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Guest
"अरे आप.. बाहर क्यूँ खड़े हैं, और इतना चोंक क्यूँ गये..." पूजा ने अपनी किल्लर स्माइल फ्लश करते हुए पूछा..
मैं:- कौन मैं.. मैं कहाँ चोंका... वो तो बस यूँ ही... मुझे शब्द ही नहीं मिल रहे थे
पूजा:- आप शायद अंदर आना चाहते हैं, अंदर आइए प्लीज़..
ये कहके पूजा ने मेरे अंदर आने का रास्ता किया, जैसे ही मैं अंदर गया, मैने सबसे पहले गेस्ट रूम को अंदर से लॉक कर दिया..
"ये क्या कर रहे हैं आप.. इसे लॉक क्यूँ...." पूजा बस इतना ही कह पाई मैने आगे जाके उसके होंठों पे उंगली रख दी..
"श्ष्ह्ह्ह्ह्ह..... पूजा, प्लीज़ बैठ जाओ.." मैने बेड की तरफ इशारा करते हुए कहा..
पूजा बेड पे बैठ गयी... मैं वहीं ज़मीन पे उसके पास बैठ गया... मुझे उस वक़्त कुछ समझ नहीं आ रहा था , मैं क्या कहूँ, क्या नहीं, मैने उसके साथ ऐसा क्यूँ बर्ताव किया... मैं बस उसे एक टक देखे जा रहा था...
"बोलिए, क्या हुआ" पूजा ने मासूमियत से कहा
"आइ आम सॉरी पूजा.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो आज सुबह के लिए.." मेरे पहले शब्द पूजा को
पूजा:- सॉरी क्यूँ डियर.... आइ अंडरस्टॅंड... आप जिस कंडीशन में हैं, वो भी अकेले, मैं समझ सकती हूँ...
मैने पूजा का हाथ पकड़ा.. धीरे से उसके नाज़ुक हाथ को चूम कर उसकी आँखों में देख के कहा
"अकेला कहाँ... तुम हो ना मेरे साथ"
ये सुनके पूजा ने फिर से एक बार अपनी प्यारी मुस्कान देते हुए कहा..
"मैं तो हूँ.. पर कब तक.. अगर मुझे कुछ हो गया तो इन सब में" पूजा ने चिंतित होते हुए कहा
मैं भावुक सा होने लगा था.. इस डर की वजह से पहले भी किसी ने मेरा साथ छोड़ा है, अब मैं नहीं चाहता कि पूजा भी मुझे छोड़ दे..
"हेलो.... मिस्टर वीरानी.. कहाँ खो गये" पूजा ने चुटकी बजा के कहा...
"कहीं नहीं.." मैने अपनी नाम आँखों को पोछ के कहा
पूजा:- मैं जानती हूँ कि आप क्या सोच रहे हैं , और किसके बारे में सोच रहे हैं... चिंता मत कीजिए, मैं बीच में नहीं छोड़ूँगी आपको...
मैं पूजा के पास गया और उसके माथे को चूमते हुए कहा
"तुम्हे कुछ नहीं होने दूँगा मैं... ये मेरा तुमसे नहीं, खुदसे एक वादा है"
हम कुछ देर एक दूसरे को देखते रहे.. मैं धीरे धीरे पूजा के पास बढ़ने लगा... उसके पास जाके, जैसे ही उसके होंठों के करीब अपने होंठों को ले गया... पूजा ने अपने होंठों पे अपना हाथ रख दिया...
"उम्म्म उम्म..... कंट्रोल मिस्टर वीरानी..." पूजा ने अपनी दबी हुई हँसी के साथ कहा.. और वहाँ से बाहर की तरफ चली गयी...
कुछ सेकेंड्स में मैं भी वहाँ से बाहर गया और जाके पापा से बातें करने लगा...
"डॅड... इंडोनेषिया के लिए प्लॅनिंग तो पायल ने की थी, पर अब जब वो ही नहीं चल रही, तो क्या हमारा जाना सही रहेगा" मैने पापा से सवाल पूछा
"हां बेटा, ये सवाल मैने भी अंशु से कहा, पर उसे कोई दिक्कत नहीं है, और सही है, तुम लोग ज़रा घूम के आओ, एक दूसरे को अच्छी तरह से जानो.. यहाँ तुम्हे कहाँ वक़्त मिलता है"
"ठीक है डॅड.. जैसे आप कहें" ये कहके डॅड और मैं चाइ पीने लगे...