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मेरी सेक्सी बहनें compleet

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"अरे आप.. बाहर क्यूँ खड़े हैं, और इतना चोंक क्यूँ गये..." पूजा ने अपनी किल्लर स्माइल फ्लश करते हुए पूछा..

मैं:- कौन मैं.. मैं कहाँ चोंका... वो तो बस यूँ ही... मुझे शब्द ही नहीं मिल रहे थे

पूजा:- आप शायद अंदर आना चाहते हैं, अंदर आइए प्लीज़..

ये कहके पूजा ने मेरे अंदर आने का रास्ता किया, जैसे ही मैं अंदर गया, मैने सबसे पहले गेस्ट रूम को अंदर से लॉक कर दिया..

"ये क्या कर रहे हैं आप.. इसे लॉक क्यूँ...." पूजा बस इतना ही कह पाई मैने आगे जाके उसके होंठों पे उंगली रख दी..

"श्ष्ह्ह्ह्ह्ह..... पूजा, प्लीज़ बैठ जाओ.." मैने बेड की तरफ इशारा करते हुए कहा..

पूजा बेड पे बैठ गयी... मैं वहीं ज़मीन पे उसके पास बैठ गया... मुझे उस वक़्त कुछ समझ नहीं आ रहा था , मैं क्या कहूँ, क्या नहीं, मैने उसके साथ ऐसा क्यूँ बर्ताव किया... मैं बस उसे एक टक देखे जा रहा था...

"बोलिए, क्या हुआ" पूजा ने मासूमियत से कहा

"आइ आम सॉरी पूजा.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो आज सुबह के लिए.." मेरे पहले शब्द पूजा को

पूजा:- सॉरी क्यूँ डियर.... आइ अंडरस्टॅंड... आप जिस कंडीशन में हैं, वो भी अकेले, मैं समझ सकती हूँ...

मैने पूजा का हाथ पकड़ा.. धीरे से उसके नाज़ुक हाथ को चूम कर उसकी आँखों में देख के कहा

"अकेला कहाँ... तुम हो ना मेरे साथ"

ये सुनके पूजा ने फिर से एक बार अपनी प्यारी मुस्कान देते हुए कहा..

"मैं तो हूँ.. पर कब तक.. अगर मुझे कुछ हो गया तो इन सब में" पूजा ने चिंतित होते हुए कहा

मैं भावुक सा होने लगा था.. इस डर की वजह से पहले भी किसी ने मेरा साथ छोड़ा है, अब मैं नहीं चाहता कि पूजा भी मुझे छोड़ दे..

"हेलो.... मिस्टर वीरानी.. कहाँ खो गये" पूजा ने चुटकी बजा के कहा...

"कहीं नहीं.." मैने अपनी नाम आँखों को पोछ के कहा

पूजा:- मैं जानती हूँ कि आप क्या सोच रहे हैं , और किसके बारे में सोच रहे हैं... चिंता मत कीजिए, मैं बीच में नहीं छोड़ूँगी आपको...

मैं पूजा के पास गया और उसके माथे को चूमते हुए कहा

"तुम्हे कुछ नहीं होने दूँगा मैं... ये मेरा तुमसे नहीं, खुदसे एक वादा है"

हम कुछ देर एक दूसरे को देखते रहे.. मैं धीरे धीरे पूजा के पास बढ़ने लगा... उसके पास जाके, जैसे ही उसके होंठों के करीब अपने होंठों को ले गया... पूजा ने अपने होंठों पे अपना हाथ रख दिया...

"उम्म्म उम्म..... कंट्रोल मिस्टर वीरानी..." पूजा ने अपनी दबी हुई हँसी के साथ कहा.. और वहाँ से बाहर की तरफ चली गयी...

कुछ सेकेंड्स में मैं भी वहाँ से बाहर गया और जाके पापा से बातें करने लगा...

"डॅड... इंडोनेषिया के लिए प्लॅनिंग तो पायल ने की थी, पर अब जब वो ही नहीं चल रही, तो क्या हमारा जाना सही रहेगा" मैने पापा से सवाल पूछा

"हां बेटा, ये सवाल मैने भी अंशु से कहा, पर उसे कोई दिक्कत नहीं है, और सही है, तुम लोग ज़रा घूम के आओ, एक दूसरे को अच्छी तरह से जानो.. यहाँ तुम्हे कहाँ वक़्त मिलता है"

"ठीक है डॅड.. जैसे आप कहें" ये कहके डॅड और मैं चाइ पीने लगे...

 


काफ़ी दिनो बाद घर पे अलग सा सुकून था.. आस पास कोई मनहूस शकल नहीं थी, टेंपोररी ही सही, पर मेरे दिमाग़ में कोई चिंता नहीं थी,

इतने में मोम और पूजा भी आ गये... उनके पीछे पीछे विजय भी फ्रेश होके नाश्ता खाने आया

"वाह भाई... जलसे हैं आपके तो हाँ... और पूजा जी, क्या प्लॅनिंग है वाकेशन की हन्णन्न्" जय ने हरामी वाली स्माइल देते कहा

मैं:- क्या छोटे, कुछ भी बोलता है, चुपचाप नाश्ता कर...

जय:- बस क्या भाई.. पर एक बात ध्यान रखना आप, और पूजा जी आप भी सुनिए

पूजा:- बोलिए भैया, किस चीज़ का ध्यान रखें हम

" आईए हआइई... क्या स्माइल है आपकी वाह... आप मेरे कॉलेज में होती ना, कसम से, बाकी की लड़कियों को कोई पानी भी नहीं पूछता...." जय अपनी मस्ती पे उतर आया था...

"बस कर अब, रहने दे, बेचारी को नाश्ता तो करने दे, सुबह सुबह इन दोनो की टाँग मत खींच" मोम ने भी इस बात में भाग लेते हुए कहा

"और क्या जय, कौनसी बात का ध्यान रखें ये दोनो, वो भी तो ज़रा बता हमे" डॅड ने दिलचस्पी लेते हुए कहा...

जय:- बताता हूँ.. बताता हूँ.... सुनिए, आप लोग इस बात का ध्यान रखना, कि आप वहाँ एक दूसरे को सिर्फ़ और सिर्फ़ जानने के लिए ही जा रहे हैं. ऐसी एग्ज़ोटिक लोकेशन देख के बहक मत जाना.... अहहहहहहहहहहा

जे की इस बात से पूजा की शरम के मारे नज़र झुक गयी, और मोम डॅड भी अपनी हँसी को रोक नहीं पाए....

हम सब ऐसे ही बैठे बैठे नाश्ता कर रहे थे, तभी जय ने कहा

"डॅड, एक काम करते हैं, आज सब काम भूल जाइए, कहीं बाहर चलते हैं, सिर्फ़ हम लोग... और कोई नहीं"

"और है कौन भाई इधर, सिर्फ़ हम ही तो हैं" मैने जय की मस्ती लेते हुए कहा

"हां भाई... आप समझ गये ना, तो चलें, तैयार होके करीब 1 घंटे में मिलते हैं.. ओके ना सब को, कोई प्राब्लम तो नहीं... किसी को प्राब्लम हो तो बोलो, " जय ने टेबल पे खड़े होके अनाउन्स्मेंट कर दी..

हम सब ने हामी भर दी, और नाश्ता फिनिश करके तैयार होने चले गये.... करीब 40 मिनट में नहा के और तैयार होके मैं नीचे आ गया, जहाँ जय सब से पहले तैयार खड़ा था...

"अरे छोटे, तेरा प्लान क्या था वो तो बताया नही तूने ....." मैं जय के पास जाने लगा

"भाई.. कुछ नहीं, मैने सोचा था ललिता को बेंगालुरू ले जाउन्गा ये कहके के वहाँ एक पार्ट टाइम फॅशन डिज़ाइनिंग का कोर्स स्टार्ट हुआ है, इससे आपका थोड़ा लोड तो कम होता.. पर यहाँ तो सब उल्टा ही हो गया.." जय ने अपनी जॅकेट पहनते हुए कहा

हम कुछ देर खड़े यूही बातें कर रहे थे तभी सामने से डॅड आए...

 


"अरे यार, ये औरतें अभी तक नहीं आई.." पापा ने हमे देखते हुए कहा

हम कुछ बोलते उससे पहले सामने से मोम आती दिखाई दी...

"अरे वाह, आज तो बहुत ही खूबसूरत लग रही हो.. क्या बात है मेरी जान" पापा ने मम्मी को छेड़ते हुए कहा..

"छोड़िए जी अब.. आप भी क्या बच्चो के सामने शुरू हो जाते हो"

"अरे बस, इतनी बात.. चलो बच्चो मूह फेर लो... तुम्हारे मा बाप तुम्हारे सामने ये सब नहीं कर सकते" पापा ने शरारती अंदाज़ में कहा

ज़य और मैं खड़े उन्हे देख ही रहे थे, तभी पीछे से पूजा आती दिखाई दी... उसको देख के जैसे मेरे तो होश उड़ गये.... आइ वाज़ लिटेरली ब्लोन अवे..

उसकी आँखें , उसके बाल, उसके होंठ.. मैं उसे देख के कहीं खो सा गया था.... पूजा हमारे बीच आ गयी

"सॉरी मम्मी पापा.. आपको मेरी वजह से वेट करना पड़ा" पूजा ने मोम डॅड से कहा... मैं अब तक उसे ही देखे जा रहा था

"अरे क्या पूजा जी... वेट तो हमने भी किया आपका, हमे तो सॉरी बोलिए, और भैया तो..... भैया.... कहाँ खो गये आप...." जय ने मेरी तरफ देख के कहा...

"हाँ... क्या, हां चलो चलते हैं..." मैने बात को सुना ही नहीं था उन लोगों की

मेरी ये बात सुनके सब लोग हँसने लगे... और पूजा भी शरमाने लगी...

"हहहहहा... क्या भाई...हेहहेहेही.... आप ना, चलो अब, चलते हैं.." जय ने आगे बढ़ते हुए कहा, जिसके साथ मोम डॅड भी चल दिए....

"क्या आप भी ना.. ध्यान नहीं देते कहीं आप.." पूजा ने मेरे सर पे मारते हुए कहा और आगे निकल गयी...

हम जैसे ही बाहर गाड़ी की तरफ पहुँचे..

"पूजा जी... भैया... आप लोग प्लीज़ अपनी गाड़ी में आइए ना... हमे क्यूँ डिस्टर्ब कर रही हैं आप...." ज़य ने पूजा से कहा

"पर भैया...." पूजा बस इतना ही बोल पाई तभी ज़य ने फिर कहा

"ना ना जी.... मुझे मोम डॅड से अपनी शादी की बात करनी है.. और आप के सामने तो मुझे शरम आएगी ना पूजा जी.. इसलिए यू प्लीज़ कम इन अनदर कार...." कहते कहते ज़य पूजा को मेरे पास लाया और हमे अलग आने के लिए कहा..

हम मेरी गाड़ी में बैठ के चलने लगे कुछ आगे, तभी मेरे उधार के मोबाइल पे ज़य का एसएमएस आया...

"भाई.. यू कॅन प्लीज़ कॅरी ऑन... हिट दा बोर्ड टुडे, देअर ईज़ नो टुमॉरो"

ज़य का एसएमएस पढ़ के मेरे चेहरे पे हँसी आई और मैने गाड़ी दूसरी जगह पे टर्न कर ली...

"कहाँ जा रहे हैं आप.. मम्मी पापा तो आगे गये..." पूजा ने सर्प्राइज़ होके कहा..

"वेट पूजा.. रिलॅक्स, "

मैने गाड़ी मोडके दूसरे रास्ते पे ले ली... थोड़ी देर पूजा मुझसे सवाल पूछती रही पर मैने उसका एक जवाब ना दिया... कुछ दूर जाके मैने गाड़ी एक होटेल में अंदर ले ली...

"हम यहाँ क्यूँ आए हैं मिस्टर वीरानी.. यहाँ का खाना मुझे इतना अच्छा नहीं लगा" पूजा ने मुझे चिढ़ते हुए कहा..

"वेरी फन्नी पूजा... अब चलो अंदर, मुझे तुम्हे कुछ दिखाना है" मैने गाड़ी वलेट को देते हुए कहा

 


हम लोग एलिवेटर से उपर जाने लगे.... जैसे ही हम लोग 10थ फ्लोर पे पहुँचे, मैने एलिवेटर से बाहर आके पूजा की आँखें बंद कर दी और उसे एक रूम में ले गया...

", आप कहाँ ले जा रहे हैं मुझे.. ये क्या है, प्लीज़ मेरी आँखें खोलिए ना, बताइए तो क्या है ये" पूजा रिक्वेस्ट करने लगी...

मैं उसकी बातें अनसुनी करके, मेरे रूम के पास पहुँचा... मैने धीरे से उसे अनलॉक किया.. हल्के से पूजा का हाथ पकड़ के अंदर ले गया...

अंदर ले जाके मैने धीरे से उसकी आँखों की पट्टी खोली, पहले तो उसे कुछ दिखाई नहीं दिया, फिर धीरे धीरे उसका विजन क्लियर हुआ... अंदर देख के उसका मूह खुला का खुला रह गया...

अंदर का सेटप देख के उसकी आँखें खुली की खुली रह गयी.... मैने ज़य से जो कहा था, उसने उससे ज़्यादा अच्छा काम किया था... ऐसा सेट अप देखके मैं भी थोड़ा चकित रह गया.. कोई एक शाम में इतना अच्छा सेट अप करवा सकता है.. WओW!!!

"ये सब क्या है मिस्टर वीरानी..." पूजा ने मेरी आँखों में देखते कहा.. उसकी आँखों में अलग ही भाव थे, जिन्हे में पढ़ नहीं पा रहा था....

इससे पहले के मैं कुछ जवाब देता, मेरे मोबाइल पे ज़य का कॉल आया.. मैने वो फोन पूजा को पकड़ा दिया....

"हेलो...." पूजा ने कहा

"वेलकम टू फॅमिली भाभी.. प्लीज़ मेरे भैया का ध्यान रखिएगा आप... " ज़य ने इतना कहके फोन कट कर दिया...

इससे पहले पूजा को कुछ समझ आता, मैने अपनी जेब से रिंग निकाली, और पूजा की आँखें फिर बंद कर दी... अपने हाथों से एक बार लाइट्स ऑफ कर दी, फिर तुरंत लाइट्स ऑन भी कर दी....

इस बार जब पूजा ने आँखें खोली, उसके सामने मैं खड़ा था, अपने हाथ में रिंग लिए..

"पूजा.. विल यू मॅरी मी.." मैने घुटनो पे बैठ के कहा...

ये सब देख के पूजा हक्की बक्की रह गयी.. शायद उसने कभी ये नहीं सोचा था कि ये घड़ी इतनी जल्दी आएगी, और वो भी मेरी तरफ से पहेल होगी.... कुछ देर के बाद पूजा वहाँ से आगे बढ़ती हुई बाल्कनी में चली गयी..

 


मैं भी उसके पीछे पीछे जाने लगा... उस वक़्त हम दोनो बाल्कनी में खड़े थे, कुछ बोल नहीं रहे थे एक दूसरे से... मेरे चेहरे पे हज़ार सवाल देख पूजा बोली

".... आप इतना ट्रस्ट किसी पे ना करें प्लीज़..." कहते कहते पूजा की आँखें नम होने लगी...

"किसी पे कहाँ, मैं ट्रस्ट तुम पे कर रहा हूँ पूजा. मेरा दिल ग़लत नहीं हो सकता तुम्हारे बारे में.." मैं पूजा का हाथ अपने हाथ में लेके उसके पास आ गया...

पूजा:- दिल तो आपका उस वक़्त भी ग़लत था, जब आपने पायल के साथ मिलके... इतना कहके पूजा रुक गयी...

"पूजा, मैं पहले ही बोल चुका हूँ, मुझे हमारे बीच में पायल या उसके नाम से कुछ डिस्कशन नहीं चाहिए" मैने अपनी आवाज़ उँची करते हुए कहा..

".. आप मुझे कुछ वक़्त अकेला छोड़ेंगे प्लीज़... मैं सोचने का वक़्त चाहती हूँ.." पूजा ने मूह फेरते हुए कहा...

"यू हॅव ऑल दा टाइम इन दा वर्ल्ड डार्लिंग.. " ये कहके मैं वहाँ से बाहर चला गया... बाहर जाके सीधा रेस्टोरेंट में जाके बैठा, और अपने लिए सिंगल स्कॉच ऑर्डर कर दी.. पीते पीते मैं सोचने लगा, कहीं मैं जल्दी तो नहीं कर रहा ये सब करके.... पर इसके अलावा मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था... ये सब सोचते सोचते 1 घंटा निकल गया, और ध्यान से देखा तो मैं 4 पेग मार चुका था... शूकर है सिंगल माल्ट का नशा चढ़ने में वक़्त लगता है.... मैं सोच रहा था पूजा कुछ ज़्यादा वक़्त ले रही है. इतने में उसका कॉल आया मोबाइल पे

पूजा:- आप प्लीज़ उपर आएँगे...

इतना कहके पूजा ने फोन कट कर दिया... मैं तुरंत बिल भरके उपर जाने लगा.... जैसे जैसे मैं रूम के करीब पहुँच रहा था, मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी.... रूम के पास पहुँच के, एक लंबी साँस लेके जैसे ही मैने दरवाज़ा खोला, रूम में एक दम अंधेरा छाया हुआ था..

जैसे ही मैने कदम अंदर रखा, मेरे पीछे से पूजा ने आके मेरी आँखों पे अपना दुपट्टा बंद दिया...

"श्श्ष्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.... मिस्टर वीरानी.. साइलेन्स नाउ.... आपको लगता है सिर्फ़ आपको ही सर्प्राइज़ देना आता है हाँ... मैं ज़रूर आपके घर ग़लत इरादे से आई थी, मेरे दिल में आपके लिए कोई प्यार नहीं था, पर आपने और आपके परिवार ने मुझे बदल दिया है... मिस्टर वीरानी.... आइ विल मॅरी यू.....

 


ये कहके पूजा ने मेरी आँखों से पट्टि हटा दी... रूम में सिर्फ़ कॅंडल्स ही जल रही थी, बेड पहले जैसा ही सज़ा हुआ था... मैने जैसे ही पूजा को देखा, मेरी आँखें फट के बाहर आने लगी. मैने आज तक पूजा को इस रूप में नहीं देखा था, और इस वक़्त तो मैने बिल्कुल कल्पना भी नहीं की थी कि वो इस रूप में मेरे सामने आएगी....

पूजा को ऐसे देख मुझे समझ नहीं आ रहा था मैं कैसे रिएक्ट करूँ... मुझे ऐसा देख पूजा बोली

", मुझे पता है आपकी फॅंटसीस के बारे में.. और इसमे शॉक मत होइए, आज सुबह आपके रूम में कपड़े निकालते वक़्त मुझे आपकी डाइयरी हाथ लगी तो वो पढ़ ली मैने...." पूजा ने आगे आते हुए कहा....

"... आप मास्टरबेट भी नहीं करते, तो फिर आप खुद को हल्का कैसे करते हैं...." पूजा ने अपनी उंगली मेरे होंठों पे फेरते हुए कहा

"पूजा... वो....."

"ष्ह्ह्ह्ह्ह.... मिस्टर राज वीरानी.... आप मर्द हैं, मुझे पत्नी होने का नाते आपका ख़याल रखना है... अब आप प्लीज़ मुझे मेरा काम करने दें" ये कहके पूजा मेरे होंठ से अपने होंठ मिला के धीरे धीरे चूसने लगी...

"उम्म्म.....अहह....म्म्माेममम्ममममम्मूऊम्म्म्म....." हम एक दूसरे के होंठ चूसने में लगे हुए थे...

धीरे धीरे होंठ चूस्ते चूस्ते, हमारी जीभ मिलने लगी, और हम एक दूसरे की जीभ चाटने लगे

"उम्म्म....अहहहहहाहा ......सक मी ना पूजा अहहाहहहा....." मैं जीभ चूस्ते चूस्ते बोल पड़ा

ये सुन के पूजा तुरंत मुझसे अलग हुई...

"ना ना.... मिस्टर वीरानी.. ऐसे नहीं... यहाँ आइए..." ये कहके पूजा मेरा हाथ पकड़ के मुझे बेड के पास ले गयी...

बेड के पास जाते ही, पूजा ने मुझे बेड पे लेटा दिया...

"अब बोलिए.... आपकी हर एक फॅंटेसी को पूरा करना चाहती हूँ मैं..." कहके पूजा घुटनो के बल बेड पे चढ़ गयी और अपना एक चुचा मेरे मूह में डाल दिया...

"उम्म्म...अहह सीईईई.... उम्म्म्म.... अहहहहा... चूसिए ना इन्हे अहहहहा........ बहुत तडपाया है ना मैने आपको अहहह...."

पूजा धीरे धीरे अपना आवाज़ बढ़ने लगी... मैं भी किसी बच्चे की तरह उसका चुचा चूसने में लगा हुआ था.....

"उम्म्म्म.. बोलिए ना अहहहसिईई.... आपको चुदाई करते वक़्त आहाहः सीईईई....उम्म्म्मम......" पूजा सिर्फ़ येई बोल पाई के मैने झट से उसकी ब्रा उतार के उसके दोनो कबूतरो को आज़ाद कर दिया और उसका एक चुचा चूस्ते चूस्ते दूसरे चुचे के निपल को मसल्ने लगा....

"उम्म्म....अहहहहहा, ऐसे नहीं , इन्हे मसल डालिए ना.. अहहहहा इनकी सज़ा येई है सीईईई..... बहुत रोक के रखा है मैने आपको उम्म्म....."

ये कहके पूजा अपना एक चुचा मेरे मूह में घुसाती चली गयी और मेरा दूसरा हाथ पकड़वा के अपने बॉब्बे को दबाने लगी...

पूजा के चूचे दबाते दबाते मैं बेड पर से उठा, अपनी टी-शर्ट निकाली और उसके पीछे जाके उसकी गर्दन को चूमने लगा और एक हाथ से पैंटी के उपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा..

"उम्म्म्म...अहहहहहः... और रागडो ना मेरी चूत को अहहहहाहा......उम्म्म्मम.....लव मी ना बेबी अहहहहा...... ज़ोर से करो ना अहहहहा"

कहते कहते पूजा आपे के बाहर हो गयी और पलट के मेरे होंठों को जन्गलियो की तरह चूसने लगी...

"उम्म्म्माहहहहः.... सिससीिससीसीसी.....उम्म्म्मममहहहामम्म अमम्मा अममममममा.... ज़ोर से चूसो ना इन्हे अहहह्ा...." कहते कहते पूजा ने मेरे लंड को सहलाना चालू किया...

"उम्म्म्म अहहहहा....येई लंड है ना जो कल रात मेरी मा को देख के अकड़ने लगा था..अहहहाहा... ज़रा मैं भी देखूं इसे आहाहाहा......."

मेरे होंठ छोड़ के पूजा मेरा पॅंट उतारने लगी... जैसे ही उसने मेरा पॅंट उतारा, मेरा लंड उसकी आँखों के सामने आ गया...

"उम्म्म...अहहहः, ज़रा देखो इसे अहहाहा... मेरी मा का नाम सुनके कैसे खड़ा है हरामी कहीं का अहाहहा... ये कहके पूजा मेरे लंड को मूह में लेके चूसने लगी.... एक हाथ से पूजा मेरे लंड को चूसने लगी थी, और दूसरे हाथ से पूजा मेरे टट्टों को सहला रही थी...

"उम्म्म उम्म्म उम्म्म... गल्प गल्प गल्प.... स्लर्प स्लर्प स्लूर्प्प अहहहहः... सीसीसिससी स्लूरप्परप्परपहाहहहहहा...." उम्म्म्मम अहहहहहा....." बोल ना साले

भडवे, कुछ बोल क्यूँ नहीं रहा साले ना मर्द कहीं के...अहहहहाहा, भडवे कहीं के..हहाहहा....

"अहहहहाहा.... हां मदरजात साली चूस ना मेरे लोड्‍े को.. आआहहहा, कुतिया कहीं की... तेरी मा और तुझे दोनो को एक साथ चोदना है साली रांड़ की औलाद अहाहाहा...." मैं जोश में आके बकने लगा...

"उम्म्म... अहहहहहाहा.... ह्म्म्म. और बोलो ना अहहहहा... आपकी फॅंटेसी और पूरी करो अहहहहसीसीईईई...." पूजा मेरे लंड के सुपाडे पे जीभ फेरने लगी...

 


इस हरकत से मेरा जोश और बढ़ गया.... मैं जैसे सातवें आसमान पे पहुँच गया था... मैं पूजा के बाल पकड़ के, अपने लंड को उसके मूह के अंदर बाहर करने लगा..

"उम्म्म्म गुणन्ं उज्णणणणन् गुणन्ञन् आहाहः गुणन्ञणन्... उम्म्म गुणन्ञन्......." पूजा का दम घुटने लगा था इस हरकत से....

"और ले भेन की लौडि अहहहः.... साली रांड़ की औलाद... अहहहहा कुतिया जनि.... तेरा बाप नामार्द होगा रंडी अहहहहा.... तभी तो तेरी मा बाहर चुदवाति है साली रंडी अहाआहहाहा...." मैं पागल होने लगा था... चुदाई किए हुए काफ़ी वक़्त बीत चुका था शायद इसलिए...

पूजा के मूह को चोद्ते चोद्ते उसकी आँखों से आँसू आने लगे थे.... ये देख जैसे ही मैने लंड बाहर निकाला, पूजा बोलने लगी....

"क्या हुआ बेटा..अहहहः मेरे जमाई आ... उम्म्म्म अपनी सास को तो ठीक से पेला भी नहीं है तूने अभी.. अहहहहहा पूजा सही कहती है...उसका पति साला नामार्द ही है..अहहहहहा" कहते कहते पूजा मेरा लंड की मूठ मारने लगी...

मैं समझ गया वो ये सब क्यूँ बोल रही है.. मैने भी उसका साथ देना पसंद किया..

"उम्म्म...अहहहः सासू मा.... आपके आगे तो आपकी बेटी कुछ भी नहीं अहहाईयैयैयाया. उम्म्म्म, आपकी तो मूठ भी कमाल लग रही है अहहहहः"

"उम्म्म्म अहाहहा जमाई बाबू.... अब पेल भी दो ना अपनी सास को बेटा अहहहहा... तुम्हारे ससुर तो चोद्ते ही नहीं अहहहा.. दो धक्कों में ही हाहहहहहा निकल जाते हैं.. अहहहः, मेरी इस मुनिया का तो ख़याल रखो अब अहहहहहा...."

ये सुनके मैने पूजा को बालों से पकड़ के उठाया और जबरन उसके होंठ चूसने लगा...

"उम्म्म.. अहहहहा... कितनी गरम हो तुम अहहहा...." मैने पूजा के होंठ चूस्ते हुए कहा

"आहहहसीई...उम्म्म्म, मेरी चूत भी तो गरम है ना जमाई बाबू....अहहहहहा" पूजा बेड पे लेट गयी और अपनी चूत के होंठ खोल के दिखाने लगी...

दूध से सफेद उसका शरीर.. उसके सफेद चुचों पे लाल निपल्स, उसकी चिकनी चूत, उसकी चूत के लाल होंठ मुझे पागल कर रहे थे...उपर से पूजा ने अपनी आँखें बंद कर दी और अपनी उंगली चूसने लगी...

मुझसे रहा नहीं गया, और मैं तुरंत उसकी टाँगों के बीच जाके , अपने लंड को पूजा की चूत में सेट करने लगा... मैं जान बुझ के लंड को अंदर डालने की वजाय उसकी चूत के होंठ पे ही अपने लंड के सुपाडे को घुमाने लगा....

"उम्म्म अहहहहा.... कोई ऐसे भी करता है क्या अहहहा..अब चोद डालो ना जमाई बाबू अपनी सास को अहहहहा... अब घुसा दो ना इस डंडे को अंदर"

"अंदर कहाँ मेरी सासू मा.. अहहहहा, मैं अभी हल्के से सुपाडे को चूत के अंदर ले जाता और फिर बाहर निकाल लेता...

इससे पूजा मचल उठी

"उम्म्माहहाहा... अंदर ना, इस चूत में अहहहहा.. इस भोस्डे में मेरी बेटी के पति अहहहहहा.. जल्दी सास की चूत कूट दो आहाहा...."

पूजा के मूह से ये सुनते ही, मैने एक झटके में अपने लोहे जैसे तने हुए लंड को पूजा की चूत में उतार गया.. पूजा की चूत इतनी पनिया चुकी थी कि मेरा लंड एक झटके में अंदर फिसलता चला गया....

मेरे इस झटके से पूजा जो कुछ देर पहले मस्ती में थी वो अब दर्द में आ गयी..

"औहहाहाहा अहः...धीरे धीरे अहहहः..... उहह ऑश.... गो स्लो अहाहाहा....उहमम्म्मम अहहाहामम्म्मम..."

मैने धीरे धीरे झटके मारने लगा... इससे पूजा का भी दर्द कम होने लगा और अब मज़े में आके .. "उम्म्म्म उम्म्म्म हहहहहहः उम्म्म्ममम"ये करने लगी थी..

जैसे जैसे पूजा मदहोशी में आती गयी, मैं धक्कों की स्पीड बढ़ाने लगा, और पूजा भी उछल उछल के मेरा साथ देने लगी..

"उहह अहहहहहा..... थॅप थाप ठप थाप.... आहहहैईईसिईसीई... कैसा लग रहा है मेरी सासू मा अहहहहा.. अपने जमाई का लंड आपकी चूत में... आहाहहहा.... ये लो अंदर और अहहहहा... ठप ठप्प चप्प्प्पापा औआहहहह उम्म्म्मम "

"अहहहहा क्या बताऊं बेटा अहहहहाहा.. बहुत मज़ा दे रहे हो मेरे जमाई आ अह्ह्ह्ह्ह... धन्य हो गई मेरी बेटी तो अहहहहहा...."

हम चुदाई में मदहोश होने लगे थे... हमे बिल्कुल भी होश नहीं था हम क्या बक रहे थे...

"उहह अहहहा.. सासू मा अहाआह मैं आने वाला हुन्न्ं आआहुन्न्ञनननणणन्"

ये सुनके पूजा ने तुरंत अपनी चूत को मेरे लंड से अलग किया.. और बेड से उठती हुई बोली..

"अभी कैसे मेरे जमाई आ अहहाहा.. अभी तो तुम्हारी सास को बाल्कनी में चुदवाना है मेरी चोदु जमाई अह्ह्ह्ह आहाहहा..."

ये कहके पूजा और मैं बाहर बाल्कनी में आ गये... बाल्कनी में आते ही पूजा ने रेलिंग को पकड़ के अपनी एक टाँग को हवा में उठा दिया, जिससे मुझे उसकी चूत का हिस्सा सॉफ दिखाई देने लगा...

"आहहहा... आ अब पेल भी दो ना..अपनी सासू को उम्म्म..."

 
खुले में चुदाई



मैं भी देरी ना करते हुए, पीछे से पूजा की चूत को चोदने लगा.... खुली बाल्कनी में चोदने का मज़ा बहुत आ रहा था..

"अहहहहा आ और ज़ोर से चोदो ना सासू को हहाहा..... हांाआना इधर दो ना आहाहहहा.... मेरे जमाई अहहहा... और चोदो ना"

बाल्कनी में हवा के साथ हमारे धक्के भी तेज़ होने लगे थे....

"ठपप्प्प थापप्प्प...... अहहहहा.... उम्म्म्म आहाहः गुर्रहाहः..... ुआहहहहा यआहहहहः...." इन आवाज़ों के साथ हमे कोई परवाह नहीं थी के कोई बाल्कनी में देख रहा है कि नहीं....

"उहहहहा अहहहहा.... अपनी सास को चोदो ना मेरे आ..आहहहहा.. कहते पूजा ने अपनी गान्ड पे "सपाक" करके एक थप्पड़ झाड़ दिया, जिससे उसकी सफेद गान्ड पे लाल निशान बन गया....

"उम्म्म्म अहहहाहा... बेटा आइ अम कमिंग अहहाहा... मैं आ रही हूँ बेटा अहाहा...... अहहाहाहा मैं गयी अहहहौमम्म्ममम अहहहाहा......ओहहह..यआहहहहाहाहहहहहहहा" कहके पूजा कमज़ोर पड़ी और ढीली हो गयी...

जैसे ही पूजा ढीली पड़ी, उसने अपनी चूत से मेरा लंड निकाला, और उसे मूठ मारने लगी.. चूसने लगी...

"उम्म्म.. अहहहहहहः अहहहहा... क्या लंड है तुम्हारा अहहाहा... उम्म गल्प गल्प स्लर्प स्लर्प अहहहहहा....." पूजा लंड को मूह में लेके बोलने लगी...

जैसे ही मुझे लगा मैं झड़ने वाला हूँ, मैने लंड पूजा के मूह से बाहर निकाल के अपना माल पूरा उसके बूब्स पे छोड़ दिया

पूजा के बूब्स पे इतना स्पर्म छोड़ा जितना आज तक मैने कभी नहीं निकाला था..... जैसे ही मैने अपना स्पर्म छोड़ा, मैने एक राहत की साँस ली, और आँखें बंद कर दी.... जैसे ही मैने कुछ सेकेंड्स में आँखें खोली, पूजा वहाँ से अंदर जा चुकी थी..... मैं उसके पीछे पीछे जाने लगा..

"पूजा.... पूजा सुनो तो" मैं उसके पीछे चिल्लाने लगा...
 
फ्रेंड्स बड़ा सा अपडेट दे दिया है अब आपकी बारी है
 
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