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मेरी सेक्सी बहनें compleet

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इधर अंशु भी आगे आ गई और एक हाथ से पूजा के चुचे को मसल्ने लगी, और अपना एक चुचा मेरे मूह में दे दिया....

"उम्म्म्म अहहहहहा चूस लो ना बेटा... अहहहाहाः, मेरे जमाई बाबू.. अहाहहा.. मेरी बेटी अहहहहहा, तेरे चुचे कितने मस्त हैं हहहहहा.."

रूम में सेक्स का तूफान सा आया हुआ था.... पूजा की चूत के अंदर बाहर जाता मेरा लंड "थप थप अहाहहाः फुक्क फुक्क अहाजाहजाह... उम्म्म्मम और

डालो ना आजाजजाजा थप्प थॅप पूच पूचाहह्हाह्ह" इन सब आवाज़ों से रूम गूँज उठा था...

"उम्म्म.. आहाहाहा मेरी बेटी, अब मेरे जमाई का लंड मुझे भी चखा दे ज़रा....." अंशु ने पूजा से कहा, जिसे सुनके पूजा मेरे लंड से उतरी...

पूजा के उतरते ही अंशु मुझे बेड से उठाके सोफे पे ले गयी.. सोफे पे जाते ही अंशु घोड़ी बन गयी, और मैने पीछे से उसकी चूत मारना स्टार्ट किया..

"अहहहाहा जमाई बाबू... चूत ही चोदोगे क्या अहहहः... वो तो मेरी बेटी से भी मिल जाएगी आपको अहहहहः...."

मैने तुरंत अपना लंड अंशु की चूत से निकाला और अंशु की गान्ड के छेद पे लंड सेट किया.... ये देखते ही पूजा आगे जाके अपनी मा के होंठ चूसने लगी , और मुझे इशारा किया उसकी गान्ड में लंड डालने का.... जैसे ही मैने अंशु की गान्ड में लंड डाला अंशु की चीख निकल गयी जो पूजा के होंठों की वजह से दब गयी...

"अहहहहहा... उम्म्म्मम अर्र्घह अहहाहाहमम्म..... निकालो इसे स्लुप्रप स्लर्प अहहहाहाः... निकालो बाहर अहहहः...ओईंम्म्ममममममममम"

एक पल के लिए तो मैं भी डर के रुक गया था.. पर आगे से पूजा ने इशारा किया चालू रखने का...

मैं फिर फुल फोर्स में आके अंशु की गान्ड मारने लगा,, और आगे पूजा अंशु के होंठों को चूस्ते चूस्ते उसके चुचे भी मसल रही थी..

 
धीरे धीरे अंशु शांत हुई.. और मज़े लेके बोलने लगी...

"अहाहहाहा... और चोद ना मेरे राजा अजजजजाजज... उम्म बिटिया, होंठ चूस ना अहहहहा.. उम्म्म्म अहहहाहा फक मी अहाहाहा एस अहहहहहहहहा"

अंशु की ये खुशी शायद पूजा से देखी नहीं गयी.. उसने मुझे रुकने का इशारा किया और अंशु को सीधा होने के लिए कहा...

पूजा ने मुझे सोफे पे सुलाया, और अंशु को मेरे उपर लेटा दिया, अंशु के उपर आते ही, पूजा ने मेरा लंड को अंशु की गान्ड के छेद पे सेट किया.. ये देखते ही मैने अपना लंड अंदर बाहर पेलना शुरू किया

"उम्म्म अहहहहः.. भडवि साली दर्द दे रही है कि मज़ा अहहहहा.. तेरी मा की अहहहहाहा बहनचोद साली अहहहहहहाहा....."

"चुप कर माआ अहहहहः रंडी तू हाया अहहहहा.... " ये कहके पूजा ने अपनी मा की चूत चाटना भी शुरू कर दिया..

"आहहहहाहाः सीसीसीसी अहहहहहा.... कितनी अहहहहहा खुश नसीब हूँ मैं अहहहहहहा.... मेरे जमाई और बेटी अहहहहहः दोनों उम्म्म्म

अहहहहहहा... यअहहस अहहहहहाहा यआःहाहः मेरी सेवा में लगे हुए हैं अहहहहहहा... फक मी हार्ड ना बेटा अज्जजजज्जा.. ज़ोर से चोदो नाहः"

करीब 10 मिनट की गान्ड चुदाई के बाद मेरा लंड झड़ने वाला था... मैने अंशु को अपने उपर से उठाया.. और अपना पूरा लंड उसके मूह में ठूंस दिया..

"उम्म्म अहहहहाहा... हां दो ना मुझे अहहहहः मेरा है ये अहहहाहा.... मुझे पानी पिलाओ अहहहहहहा...." अंशु लंड को हिलाते हिलाते बकने लगी..

"आहहाहहा... मैं आ रहा हूँ सासू माँ हाआहहा...... अहहहहहहहहहावह"

इस चीख के साथ मैने अपना पूरा पानी अंशु के मूह में छोड़ दिया, जिससे अंशु ने अच्छी तरह पी लिया और एक बूँद भी बाहर नहीं गिरने दी..

इतनी देर की चुदाई के बाद अंशु ने अपने आप को संभाला.... 5 मिनट बाद अंशु अपने कपड़े पहन के बिना कुछ बोले अपने रूम की तरफ चली गयी...

"यू आर दा बेस्ट ." पूजा ने चिड के कहा..

"उम्म्म्म बेबी... आहहाहम्‍म्म्ममम स्लर्प स्लर्प अहहः.... यौर टेस्ट सो गुड..." मैने पूजा को करीब लाके उसके होंठ चूमते हुए कहा

"उम्म्म.... अहहः... लीव मी... लाइयर, मेरी मा के आगे तो मुझे देख भी नहीं रहे थे... मैं तो प्यासी रह गयी ना.." पूजा ने मुझसे दूर होते हुए कहा..

"ओह स्वीट हार्ट... कल से 7 दिन हम साथ ही हैं ना.. आंड तुमने ही कहा था दिस वाज़ लास्ट टाइम.. तो मेरी फॅंटेसी अच्छी तरह पूरी करनी थी ना मुझे" मैने पूजा को मनाते हुए कहा...
 


कुछ देर में पूजा भी अपने कपड़े पहन के नीचे रूम में चली गयी.... पूजा के जाते ही कुछ देर में मैने विस्की की बॉटल रख दी,, रूम सॉफ करके, बेड पे गया, और एसएमएस किया..

"दे आर डन... "

सामने से जवाब आया..

"सी यू टुमॉरो डॉग... "



अगले दिन सुबह जल्दी उठ के मैने सब डॉक्युमेंट्स और मेरा पूरा सामान चेक किया जो मुझे इंडोनेषिया ले जाना था... मैं ये सब चेक कर ही रहा था, तभी पूजा का एसएमएस आया मेरे मोबाइल पे

"आइ लव स्ट्रॉबेरी.. लव पूजा "

मैने तुरंत रिप्लाइ किया

"डोंट वरी बेबी.. तुम स्ट्रॉबेरी खा खा के थक जाओगी.."

जवाब देके मैने जल्दी से सामान उठाया और नीचे जाने लगा.... नीचे जाते ही मैने पूजा को देखा, ग़ज़ब की खूबसूरत लग रही थी...

ब्लॅक कलर की ड्रेस में उसके खुले बाल एक दम शाइन मार रहे थे.. उसकी वाइट स्किन उसकी ड्रेस के कलर को एक दम कॉंप्लिमेंट कर रही थी...

उसकी हाइ हील्स में वो और मज़ेदार लग रही थी... थोड़ा जल्दी होने की वजह से मैने उससे नज़रें हटाई और मोम डॅड से मिलने चला गया...

"गुड मॉर्निंग बेटे... हॅव आ सेफ ट्रिप" मोम ने मुझे आशीर्वाद देते हुए कहा..

"क्या तुम भी बूढो का आश्रीवाद दे रही हो... बेटे, हॅव आ सूपर ट्रिप ओके, कीप रॉकिंग, आंड हॅव फन राइट..." डॅड ने मुझे गले लगाते हुए कहा...

"थॅंक्स मोम डॅड.... ज़य निकल गया क्या..." मैने नज़रें घूमाते हुए पूछा

'हां बेटे.. वो तो सुबह 5 बजे ही निकल गया था,... उसकी फ्लाइट तो अभी 2 घंटे बाद की है, पर हमसे कहा कि उसे कहीं ज़रूरी काम है" मोम ने किचन से बाहर निकल के कहा

बाहर आके हम डाइनिंग टेबल पे बैठ गये जहाँ अंशु हमारा वेट कर रही थी.. मुझे देखते ही अंशु नज़रें चुराने लगी... शायद कल रात की वजह से.... मैं चेर पे बैठा और पूजा के आने का वेट करने लगा... जैसे ही पूजा और बाकी सब लोग आए, हमने नाश्ता स्टार्ट किया और बातें करने लगे...

मैने देखा, अंशु बार बार मुझे घूर रही थी, पर जब मैं उसे देखता तो वो नज़रें घुमा लेती... ये शायद पूजा ने भी नोट किया, और इग्नोर करके अपने नाश्ते पे कॉन्सेंट्रेट करने लगी....

नाश्ता फिनिश करके हमंसे सबसे गुड बाइ कहा, और कार में बैठ गये, वैसे तो हम पुणे के हैं, पर फ्लाइट मुंबई से ली थी, क्यूँ कि पुणे से जकार्ता की फ्लाइट 21 घंटे लेती है.. मुंबई से 8 घंटे... इसलिए डॅड हमे मुंबई छोड़ने आ रहे थे.. जब तक डॅड आते, तब तक पूजा के साथ अंशु बाहर आई थी उसे कुछ इन्स्ट्रक्षन्स देने..

"मम्मी... कुछ हुआ है क्या" मैने अंशु को देखते हुए पूछा..

"नहीं .. क्या होगा," अंशु फिर नज़रें घुमा के बोलने लगी

"देखिए मम्मी... कल रात जो हुआ, वो आपकी और पूजा की मर्ज़ी से हुआ है, और अगर आपको इतना बुरा लगा है इस बात का तो प्लीज़ माफ़ कीजिएगा... लेकिन मैने कुछ ग़लत काम नहीं किया... मैने मेरी बीवी की मर्ज़ी से किया है, और उसे कोई दिक्कत नहीं है इस बात से" मैने विश्वास से पूजा की तरफ देखते हुए कहा

"मोम... डोंट वरी, आइ विल बी फाइन.. आंड सही कह रहे हैं... कल जो हुआ वो पहली और आखरी बार था.. आप निश्चिंत रहें" पूजा ने अंशु को गले लगा के कहा..

 


इतने में डॅड बाहर आए और पूजा और मैं गाड़ी में बैठ गये.... बातें करते करते हम मुंबई एरपोर्ट पहुँचे,जहाँ पे मैने डॅड से आशीर्वाद लिया और हम चेक इन करने चले गये....

चेक इन करके, हमारी फ्लाइट में अभी 2 घंटे का टाइम था, इसलिए हम एरपोर्ट के किंगफिशर लाउंज में बैठ के वेट करने लगे.. अनाउन्स्मेंट होते ही हम बोर्ड करने चले गये...

करीब 8 घंटे की फ्लाइट में, 10 घंटे हम जकार्ता पहुँचे... 10 घंटे की फ्लाइट के बाद हम में बहुत आलस आ चुका था.. पूजा और मैं दोनो बहुत थक चुके थे... फ्लाइट से उतरते ही हमे हमारे होटेल से कॅब रिसीव करने आई थी... हम कॅब में बैठ गये और ड्राइवर को जल्दी होटेल पहुँचने को कहा...

मुंबई से लेके इंडोनेषिया तक पूजा और मैने काफ़ी बातें की थी.. उसकी फेव बुक से लेके मेरी फेव सेक्स पोज़िशन तक.. मेरी फेव कॉफी से लेके उसकी फेव सेक्स पोज़िशन तक... इतनी देर बातें करने के बाद हमारे पास कुछ बचा ही नहीं था बोलने को.. इसलिए एरपोर्ट से होटेल तक का सफ़र एक दम शांति से गुज़रा... करीब 40 मिनट्स की ड्राइव के बाद हम होटेल पहुँचे... कॅब के बाहर उतरते ही, पूजा और मैने साथ में कहा

"वॉवववववववव!!!!"

"ये बाहर से इतना खूबसूरत है , तो अंदर से कैसा होगा ना.. वेरी प्रेटी..." पूजा ने मेरी बाहों में आते हुए कहा...

"तुमसे ज़्यादा खूबसूरत नहीं है जान..." मैने पूजा को फोर्हेड पे चूमते हुए कहा... हमने जल्दी ही चेक इन किया और रूम्स में सेट्ल हो गये.

पूजा और मेरे अलग अलग रूम्स थे.. लेकिन हमने डिसाइड किया था हम एक ही रूम में रहेंगे.. इसलिए पूजा ने अपने रूम में समान तो रखवाया पर, जल्द से मेरे रूम में आ गयी....

"... यहाँ के रूम्स भी बहुत अवेसम हैं..." पूजा ने मेरे पास सोफे पे आते हुए कहा..

मैं थकान की वजह से कुछ बोल नहीं रहा था. मैने सिर्फ़ "ह्म्म्मे'' में जवाब दिया..

"क्या हुआ ... आप बहुत थक गये हैं ?" पूजा ने सीधे होके कहा

"हां यार... आइ नीड आ मसाज.. मैं अभी कॉल करता हूँ होटेल में कि कोई मसाज की फेसिलिटी है कि नहीं" मैने रूम के फोन की तरफ बढ़ते हुए कहा..

"उः ओह... मिस्टर वीरानी.. कमाल है, इधर आपकी बीवी बैठी है, और आप मसाज के लिए दूसरी औरत को बुलाएँगे हाँ.." पूजा ने मुझे सोफे पे धक्का देते हुए कहा..

"अरे मेरी जान.. तुम भी तो थक गयी होगी ना बहुत... तुम रेस्ट करो, और मैं किसी आदमी से मसाज करवाता हूँ माइ लव.. डोंट वरी"

"रुकिये..." पूजा ने कहा और खुद फोन की तरफ बढ़ गयी...

"हेलो.... रिसेप्षन, यस कॅन यू प्लीज़ सेंड मी आ गुड मसाज आयिल आंड आ टेबल फॉर इट... यस, दट बी इट... थॅंक यू वेरी मच, बाइ"

"मैं नहीं थकि हूँ बेटू.. आप चिंता नहीं कीजिए, रिलॅक्स फील कीजिए बस... आप चेंज कीजिए, तब तक मैं भी कपड़े चेंज कर लेती हूँ, ओके ना जान"पूजा ने मेरे सर पे हाथ फेरते हुए कहा

ये कहके पूजा वॉशरूम में चली गयी और मैं भी बाहर अपने कपड़े चेंज करने लगा... कपड़े उतार के सोचा, कुछ और क्यूँ पहनु, तेल लगने से कुछ खराब क्यूँ हो.. इसलिए मैं सिर्फ़ जीन्स पहन के पूजा का वेट करने लगा.... करीब 5 मिनट बाद पूजा आई बाथरूम से...

जैसे ही मैने उसे देखा मेरे लंड का चीखना चालू हो गया... आई ही ऐसे रूप में थी...

इतने में डोर बेल भी बजी.. पूजा को छोड़ मैने दरवाज़ा अटेंड किया तो देखा .......................................

 


इतने में डोर बेल भी बजी.. पूजा को छोड़ मैने दरवाज़ा अटेंड किया तो देखा

रूम सर्विस से पूजा ने जो मँगवाया था वो समान आ चुका था... कुछ देर के लिए पूजा वापस बाथरूम में घुस गयी और तब तक रूम सर्विस का बंदा टेबल सेट करके निकल चुका था...

"आइए मेरी पूजा जी... वो जा चुका है" मैने बाथरूम का दरवाज़ा नॉक करके कहा

इस बार पूजा बाहर आई, पर उसने बाथ गाउन भी पहना हुआ था...

"ये अभी क्यूँ पहना तुमने.. अभी तो सिर्फ़ हम दोनो ही हैं" मैने पूजा को अपने से सटा के कहा..

"... थ्ट्स ओके... कुछ बात कर लें हम प्लीज़.."



आगे की स्टोरी अब पूजा की ज़बानी...



हम पुणे के रहने वाले हैं... पैसों की कोई कमी नहीं है... मेरे घर में मेरे मोम डॅड के अलावा मेरे दादा दादी भी रहते हैं... मेरे डॅड ने कई सारे बिज़्नेस ट्राइ किए पर उन्हे कभी सफलता नहीं मिली... वैसे मेरे दादा दादी के पास खूब पैसा था, इसलिए डॅड को कभी सक्सेस ना मिलने का गम नहीं हुआ... मेरे दादा दादी हमेशा पापा से कहते कि सफलता नहीं मिलती ठीक है, पर कम से कम पैसे तो मत गँवाओ....

लेकिन मेरे पापा हमेशा इस बात को इग्नोर करते... उनका एक बिज़्नेस फैल होता तो वो एक लंबी वाकेशन पे निकल जाते मेरी मा और अपने दोस्तों के साथ.. इस बात से मेरे दादा दादी अक्सर परेशान रहते.... वैसे मेरे डॅड का नाम कमलेश है

मेरी मा अंशु... मेरी मा कभी एक अच्छी बहू ना तो अच्छी पत्नी बन पाई... वो हमेशा अपनी फ्रेंड्स के साथ किटी पार्टीस में रहती थी.. किटी पार्टीस में दारू और सिगरेट तो आम बात थी.. लेकिन कुछ हाइ प्रोफाइल औरतें इससे ज़्यादा भी करती थी, जो शायद हाइ सोसाइटी में आम बात है...

अक्सर मों पार्टी से नशे में ही घर वापस आती थी.. उन्हे ऐसे देखते दादी हमेशा ताना मारती थी, पर मेरी मा सामने कभी चुप नहीं रहती, वो एक के बदले मेरी दादी को दो बाते सुनाती.. कभी कबार मेरी मा अपने किसी यार के साथ नशे में धुत्त होके आती और अपने रूम में जाके अपना बिस्तर गरम कर लेती थी... ये सब देख के मेरे दादा दादी को घिंन आने लगती, पर वो कुछ नहीं कर सकते थे.. हज़ार बार उन्होने डॅड से ये बात कही, पर शायद डॅड को इससे कोई फरक नहीं पड़ा...

मैं पूजा... मैं अपने मा बाप की एक लौटी बेटी हूँ... मेरे दादा ने ऑलरेडी अपनी प्रॉपर्टी और बॅंक बॅलेन्स मेरे नाम कर रखा है... मैं खुद को शरीफ नहीं कहूँगी... शराब, सिगरेट, लड़के बाज़ी , मैं भी ये सब करती थी.. आख़िर अपनी मा की बेटी जो थी... लेकिन मैने हमेशा ये सब घर के बाहर किया... मेरे दादा दादी मुझे अच्छी लड़की मानते थे, मैं इसलिए उनके सामने ऐसी कोई हरकत नहीं कर सकती थी...

घर पे मैं जीन्स या शॉर्ट्स में रहती थी... लेकिन घर के बाहर कपड़ो पे कोई लिमिट नहीं थी... दादा दादी का प्यार कहो या उनकी इज़्ज़त, जो भी था, मैं अपनी लाइफ अच्छी तरह से बॅलेन्स करती थी.... जब मेरी दादी और मा झगड़ा करते, मैं हमेशा अपनी दादी का साइड लेती और कई बार मा से इस बात पे बहेस भी हो चुकी थी... लेकिन मेरा दिल

कभी मेरी मा का साथ देने के लिए तैयार नहीं था...

कहीं ना कहीं मैं भी मानती थी, कि ये सब चीज़े अपनी जगह, पर जब तक घर पे बड़े हैं, तब तक हमे अपनी मर्यादा में रहना चाहिए... मैने अपना पूरा ग्रॅजुयेशन फुल ऑन अश् करके निकाला.. दारू, ड्रग्स, सेक्स, डोपिंग, रवे पार्टीस, अड्वेंचर,ऐसा कुछ बाकी नहीं रखा था मैने अपने कॉलेज लाइफ में....ग्रॅजुयेशन के बाद भी ये सब चालू रहा, पर बहुत कम हो चुका था... मेरे पापा का कोई बिज़्नेस था नहीं इसलिए मैं हमेशा घर पे ही रहती...

 


रोज़ की तरह सुबह जब मैं उठी, तो पापा अपने बॅग पॅक कर रहे थे.... मैने रात को थोड़ी ज़्यादा पी ली थी एक पार्टी में इसलिए हॅंगओवर नहीं टूटा था..

मैं अपने रूम से नीचे जा रही थी, तभी पापा के रूम में नज़र पड़ी..

"हाई डॅड... गुड मॉर्निंग..." मैने पीछे से पापा को कहा...

"हाई बेटा... गुड मॉर्निंग..." पापा ने अपने बॅग पॅक करते हुए मेरी तरफ देखे बिना कहा

"कौनसा बिज़्नेस फ्लॉप हुआ डॅड अभी... कहाँ जा रहे हैं वाकेशन पे" मैने इरिटेट होते हुए कहा..

"पूजा... माइंड युवर टंग ओके.... " डॅड ने मुझ पे हाथ उठाते हुए कहा..लेकिन खुद को रोक लिया

"व्हाटेवर डॅड.... वैसे भी आपके यहाँ होने से या ना होने से किसे फरक पड़ता है" मैं नीचे जाती हुई सीडीयों से बोलने लगी...

जैसे ही मैं नीचे उतरी, सामने मेरी मा अंशु बैठी थी सोफे पे, अपनी किसी सहेली से फोन पे बात कर रही थी.. सुबह के 11 बजे थे, और मेरी मा ने सुबह सुबह दारू का एक ग्लास लिया हुआ था..

"हेलो मिसेज़ वेर्मा... आज की पार्टी कहाँ है..." मेरी मा ने मुझे देखते हुए फोन पे बातचीत चालू रखी

"ओह... आपके घर ही, क्या बात है... पर आप प्लीज़ दारू का बंदोबस्त रखिएगा, कम पड़ती है तो मज़ा किरकिरा हो जाता है.."

थोड़ी देर सामने वाले की बात सुनने के बाद

"ह्म्म... क्या बोल रही हैं, तो इस बार के स्ट्रिपर आपने देल्ही से मँगवाए हैं.. क्या बात है.. पंजाबी मुंडे हैं, उनका लंड लेने में तो मज़ा आ जाएगा हमे..."

मेरी मा मेरे सामने ये सब बोल रही थी.. मैं जितना इग्नोर कर रही थी उतना ही मेरी मा बेशरम होती जा रही थी... मैं वहीं बैठी रही ये जानने के लिए के और कितनी नीच हो सकती है मेरी मा...

"ओह हो.. ये क्या कह दिया आपने... पूरी रात आपके साथ.. देखिए ऐसा मत कीजिए... हां मेरा ख़याल कौन रखेगा फिर... एहहेहीही.... सही है, तो डन एक को आप रखेंगी पूरी रात, और एक शाम को मेरे साथ मेरे घर आएगा.."

"ओके जी... चलिए मिलते हैं शाम को.. बाय..." मेरी मा ने फाइनली फोन कट किया

फोन कट करके मेरी मा मुझे देख के बोली

"गुड मॉर्निंग बेटा.. तुम्हारी पार्टी कैसी रही कल रात"

मैं:- ठीक थी मोम, आप की पार्टीस जैसी रॉकिंग नहीं होती हमारी पार्टीस...

मोम:- तो फिर चल तू भी मेरे साथ, तेरी लाइफ भी रॉकिंग हो जाएगी... एक बार चल तो मेरे साथ..

मैं:- नहीं मोम... थॅंक्स... रॉकिंग के नाम पे मुझे रांड़ नहीं बनना..

"क्या कहा तुनीईई लड़किईइ..." मोम ने सोफे से उठके चिल्लाते हुए कहा....

"वोई जो आपने सुना मोम... आपको ये लाइफ मुबारक हो... वैसे भी आज लेट नाइट की फ्लाइट से मैं यूएसए जा रही हूँ, शायद आपको और डॅड को ना मिल सकूँ, इसलिए अभी बता रही हूँ" मैने मोम से आँख मिला के कहा

"तुम कहीं भी जाओ पूजा.. हमे कोई फरक नहीं पड़ता, बस हमारी लाइफ में दखल मत दो समझी" डॅड ने नीचे उतरते हुए सीडीयों से कहा..

"हाय डार्लिंग..." डॅड ने मोम को गले लगाते हुए कहा..

"किधर जा रहे हैं जी आज... " मोम ने डॅड को चूमते हुए कहा..

डॅड:- कहीं नहीं, बस सोचा थाइलॅंड घूम आउ थोड़ा सा... चलॉगी तुम.. वैसे मेरे साथ तुम्हारी फ्रेंड्स कविता और सुमन आ रही हैं..

मोम:- नहीं जी.. आप ही जाइए उनके साथ, मेरा तो प्रोग्राम आज सेट है... मिसेज़ वेर्मा ने देल्ही के दो लौन्डे मँगवाए हैं.. एक को तो आज पूरी रात लूँगी मैं... आप नहीं होंगे तो ज़्यादा मज़ा आएगा..

डॅड:- क्यूँ मेरी जानेमन,, मेरे साथ मज़ा नहीं आता क्या तुझे.. आज भी तेरी गान्ड देख के मेरा लंड तो हुंकार मारता है

मोम:- छोड़िए जी... तभी तो उस रंडी सुमन और कविता के साथ जा रहे हैं, मुझसे पूछा भी नहीं... और आपका लंड ले लेके अब बोर होने लगी हूँ..तो आज कुछ न्यू ट्राइ कर लेते हैं..

ये बात सुनके मोम और डॅड दोनो ज़ोर ज़ोर से ठहाके मार के हँसने लगे.... मैं वहीं खड़ी उनकी बातें सुनती रही, आख़िर में मैं खुद परेशान हुई और वहाँ से वॉशरूम जाके फ्रेश होने लगी... मुझे जाते देख मोम ने चिल्ला के कहा

"सुन पूजा... अगर आज घर पे ही बैठेगी तो तेरी मासी के कोई रिलेटिव्स आने वाले हैं घर पे, उन्हे अटेंड कर लेना समझी"

 


मैं उनकी बात अनसुनी करके नहाने चली गयी, और जब नहा के बाहर आई, तब तक मोम डॅड दोनो जा चुके थे... मैं रूम में आके मैं टीवी देखने बैठी, कुछ देर में दादा दादी भी आ गये...

"नमस्ते दादू... कहाँ गये थे आप" मैने दादा जी के पैर छू के कहा

"बेटा.. ये ले प्रषाद... मंदिर गये थे हम" दादा ने मुझे आशीर्वाद देते हुए कहा...

"अंशु.. बेटे चाइ पिला दे ज़रा" दादी ने थोड़ा ज़ोर से कहा..

मैं:- दादी, मोम तो नहीं है, मैं बना देती हूँ चाइ, आप बैठिए इधर.

दादी:- हां , बस अभी येई रह गया था... रात को देर से आना तो ठीक था, अब सुबह सुबह भी अयाशी के लिए निकल जाती है...

"दादी.. कुछ काम से गयी है वो बाहर, ऐसा कुछ नहीं जो आप सोच रहे हैं" मैने दादी से झूठ बोलते हुए कहा

दादी:- छोड़ ना बेटी.. टेबल पे खाली पड़ा ये दारू का ग्लास सब बयान कर रहा है.. तू अपनी मा को बचाने की कोशिश मत कर.

"दादी, आप ये सब छोड़िए ना, मैं चाइ बना देती हूँ आपके लिए, आप प्लीज़ गुस्सा ना करें सुबह सुबह" मैने टेबल से ग्लास उठाया और किचन में चली गयी..

कुछ देर में चाइ लेके दादा दादी के पास आई, उन्हे चाइ दी और हम बातें करने लगे....

"दादू.. दादी मा... एक बात कहनी है आप लोगों से" मैने चाइ फिनिश करते हुए कहा

"बोलो ना बेटा, क्या हुआ" दादी ने पूछा

मैं:- दादी माँ... मैं आज रात की फ्लाइट से यूएसए जा रही हूँ, मैं चाहती हूँ आप भी चलिए मेरे साथ..

"क्यूँ बेटी अचानक यूएसए क्यूँ, वहाँ कौन है हमारा..." दादू ने आश्चर्य में आके पूछा

"कोई नहीं दादू... बस अब यहाँ दिल नहीं लगता, और वहाँ मैं पीजी कोर्स करने वाली हूँ, यहाँ रहके नहीं हो पाएगा. और आप लोगों को ले जाना चाहती हूँ, रीज़न आप जानते हैं" मैने थोड़ा ज़ोर देते हुए अपनी बात का प्रस्ताव रखा...

"बेटी.. तुम्हारा फ़ैसला ग़लत नहीं है... पर हम नहीं आ सकते, हम चाहते हैं कि हमारी आखरी साँसे भी यहीं पर हो, इस घर को हमने इतनी मेहनत से बनाया है... कहीं बाहर जाके हम....." इससे पहले दादी कुछ बोलती, दादू ने बीच में कहा

"हां बेटी.. तुम्हारी दादी सही कह रही है, हमारी उमर हो चुकी है, तुम्हारे आगे तुम्हारी पूरी ज़िंदगी पड़ी है.. तुम उसे यूही ज़ाया ना करो..."

"नहीं दादू. आप यहाँ अकेले रहेंगे तो मुझे हमेशा आपकी चिंता रहेगी.. और रोज़ रोज़ की बातों से क्या आप तंग नहीं हुए हैं" मैं ज़िद्द पे आ गयी

"बेटी.. प्लीज़ तुम हमारी हालत समझो.. भगवान जाने के कितनी साँसे रह गयी हैं हमारे पास.. हम नहीं चाहते कि हम इस घर के बाहर हम हमारा दम तोड़ें.. और बेटी तुम चिंता मत करो... तुम्हारे पढ़ाई की जितनी फीस है , हम भर देंगे... और वहाँ खर्च और रहने की कोई दिक्कत भी नहीं होगी..."

 


ये कहके दादू और दादी अपने कमरे में जाने लगे... मैने उन्हे काफ़ी समझाया पर वो नहीं माने.. आख़िर कार मैने अपनी हार मान ली और जाके अपने कमरे में रात के जाने की तैयारी करने लगी.... सब कुछ चेक करके बॅग्स पॅक किए, इतने में दोपहर के 3 बज चुके थे... मैं जल्दी से अपने कमरे से बाहर निकली और किचन में जाके दादू और दादी के खाने की तैयारी करने लगी.... आधे घंटे में मैने उनके लिए खाना बनाया और उनके रूम में चली गयी

"दादू, दादी.. ये लीजिए, आपका खाना, और ये पानी की बॉटल.. प्लीज़ पूरा फिनिश कीजिएगा ओके...." मैने दादू को हिदायत देते हुए कहा

"हां बेटी.. तुमने खाया..." दादू ने मुझसे पूछते हुए खाना स्टार्ट किया

मैं:- नहीं दादू , घर पे ज़्यादा कुछ है नहीं, मैं पिज़्ज़ा मंगवा लेती हूँ

दादी:- घर में होगा भी कुछ कैसे बेटी, पूरा दिन तो हमारी बहू और बेटा, अयाशी में व्यस्त होते हैं... कहीं घर का समान बेच के भी वो लोग दारू में ना उड़ा दें...

"ओफफो दादी.... आप प्लीज़ गुस्सा नही कीजिए... मैं खा लूँगी"

दादू:- बेटी, तुम चली जाओगी तो हमारा क्या होगा....

दादू की आँख में आँसू आने लगे थे...

"दादू.. तभी तो आपको साथ चलने के लिए बोल रही हूँ... इधर आप और मैं खुश नहीं हैं...." मैने एक बार फिर अपनी बात आगे रखी...

"नहीं बेटी.... हम नहीं आ सकते, और जाके अब तुम भी कुछ खा लो पहले..." दादू ने अपने आँसू पोछते हुए कहा

मैं वहाँ से निकल गयी और बाहर आके अपने लिए कुछ खाना मंगवा लिया... खाना खाते खाते मुझे लिविंग रूम में ही हल्की हल्की नींद आने लगी.... धीरे धीरे मैं नींद की आगोश में डूब गयी... करीब 7 या 7 30 बजे मेरी आँखे मैन गेट नॉक होने की आवाज़ से खुली... मैने उठ के बाहर जाके देखा तो मोम की गाड़ी खड़ी थी... मोम गाड़ी से उतर चुकी थी, एक दम नशे में धुत लग रही थी.. उनके साथ एक लड़का भी , शायद मेरी उमर का होगा... मैं वहीं खड़े खड़े उन्हे देखती रही, कुछ सेकेंड में मोम और वो लड़का लिविंग रूम के गेट के पास आ गये....

"उम्म्म.... मेरी बेटी, कैसी है तू हननंनणणन्..." मोम नशे में बोल रही थी

मैने कोई जवाब नहीं दिया, और उस लड़के को देखती रही....

"उम्म्म.... अंशु , युवर चिक ईज़ टू हॉट बेबी... रात को हमारे साथ ये भी आएगी या नहीं" उस लड़के ने मेरी ओर देख के मेरी माँ से पूछा

उसकी बात सुनके जैसे मेरा खून गरम सा होने लगा... मैने तुरंत उस लड़के को जवाब दिया

"मैं कोई दो कोड़ी की रांड़ नहीं हूँ जो हर किसी का बिस्तर गरम करती फिरू... समझे" मैने अभी इतना कहा ही था, तभी

"शताककककक...... शताअक्कक......"

मेरी मा ने मुझे दो थप्पड़ झाड़ दिए, और बाल खीच के बोलने लगी...

"क्या बोली तू कुतिया कहीं की.. सुबह भी मैने तेरी बात को इग्नोर किया समझ के कि तू बच्ची है, पर अभी फिर... पूजा, आगे से मेरे साथ ज़बान लड़ाई तो याद रखना क्या होगा..." मेरी माँ मुझे वहीं खड़ा छोड़ के, लड़खड़ाती हुई उस लड़के के साथ अपने कमरे की ओर बढ़ने लगी...

 


मेरी मा की बातें सुनके बहुत दुख हुआ, पर मैं ये सब इतना देख चुकी थी, कि मेरी आँख के आँसू सुख गये थे.. मुझे रोना भी नहीं आता था इन सब बातों से.. कुछ देर वहीं खड़े रहने के बाद मैं अपने कमरे की ओर बढ़ने लगी... मेरे कमरे में जाते हुए बीच में माँ का कमरा भी आता है.. वहाँ से गुज़रते गुज़रते अंदर की आवाज़ें भी सुनाई दे रही थी... मैने धीरे से दरवाज़े को पुश किया तो अंदर मेरी मा और वो लड़का, कपड़ो के बिना बैठे हुए बिस्तर पे दारू पी रहे थे...

"उम्म्म्म... रॉकी, तुम्हारा लंड तो काफ़ी बड़ा है.. मैं इसे ले पाउन्गि के नहीं.." मेरी मा दारू पीते पीते उस लड़के से बोलने लगी...

"अरे मेरी रानी, पहले इसे हाथ में तो पकड़ ले... जबसे तुझे पार्टी में सिर्फ़ ब्रा पैंटी में देखा है तबसे खड़ा है... ज़रा इसको आराम पहुँचा मेरी बेबी...

उस लड़के ने इतना कहा ही था, कि मेरी मा बेड के दूसरे कोने पे जाके उस लड़के का लंड मूह में लेके उसे चूसने लगी

"उम्म.... अहहहहा... क्या हथियार है, एक दम घोड़े जैसा अहहह्ा... मज़ा आ जाएगा आज रात को" मेरी मा उस लड़के का लंड लेके चूस्ते चूस्ते बोलने लगी...

"आहहहहा मेरी रानी... तेरे जैसी घोड़ी के लिए, घोड़ा ही चाहिए ना... किसी कुत्ते के लंड से तू संतुष्ट थोड़ी होगी.... अहहहहहाहा उम्म्म्मम" वो लड़का मेरी मा के बाल पकड़ के उनके मूह को चोदने लगा था....

मेरी मा भी अपनी जीभ उसके लंड पे सुपाडे पे घुमाए जा रही थी, जिससे उस लड़के के मज़े दुगने हो गये थे...

"उम्म्म अहहहाहा मेरी रानी अंशु अहहहहा... उहाननना यहना चूस ना आहाहहहा...." लड़का मज़े लेते हुए बोल रहा था....

"रानी नहीं मेरे प्यारे अहहहहा... रंडी बोल ना अहहहहहः....मैं रंडी हूँ तेरी अहहहा... क्या लंड है तेरा.. उम्म्म्म आज रात पूरा का पूरा निचोड़ डालूंगी तुझे अहहहः..... पूरे 1 लाख दिए हैं, सब के सब वसूल करूँगी तुझसे अहहहहा......" मेरी मा अब उस लड़के के लंड को छोड़ के उसके टट्टों को चूसने लगी...

"आहहहाहा... 2 लाख वसूल लेना मेरी रांड़.... अहहहाहा, कितने लंड लिए हैं आज तक तूने... अहहहहहाहा और चूस ना.... और तेरा पति कहाँ है...उंम्म्म... अहहः इधर ही चूस आन्ननणना" लड़का बोले जा रहा था..

"उम्म...स्लूप्र स्लर्प अहहहहा.....उम्म्म्ममसलुर्प स्लर्प.... अहहहाहा.... छोड़ मेरे पति को तू अहहहाः..... वो तो ना मर्द है साला आहहहा..... मुझे छोड़ के, मेरी दो रंडी सहेलियों के पीछे लगा हुआ है भड़वा कहीं का अहहहहहा...." मेरी मा ने उसके लंड को पूरा का पूरा अपने मूह में उतार दिया था

देखते देखते अब उस लड़के ने मेरी मा को अपने उपर ला दिया, और उसकी चूत को चाटने लगा...

 


"अहहहाहा धीरे चाट अहाहाहा.... साले मदर्चोद कहीं के आहाहहा..... उम्म्म्म.... इधर ही हननान आहहहान्णन्न् और चाट ना अहहहहहा...आहहहा.... उम्म्म्म तेरे लंड स्लर्प स्लर्प अहहहहा...." मेरी मा उसके हमले से मदहोश सी होने लगी....

"स्लर्प स्लर्प... अहहहहहहाहाहा स्लर्प अहहाहा उम्म्म.... अहहहहहा.. मैं तेरी रंडी हूँ रॉकी अहहहहाः... और चाट ना मेरी चूत का,, अहहहहाहां अंशु.. अहहहाहा मैं भी तेरा भड़वा हूँ अहाहहाहः.... क्या चूत है तेरी आहहहाः स्लर्प स्लर्प उम्म्म्म...." मेरी मा किसी बाज़ारु औरत की तरह बकने लगी थी...

"आहहाहहहा रॉकी मैं निकल रही हूँ आहहः.. ज़ोर से चाट मेरे भडवे आहाहहः.. मैं आ रही हूँ अहहहहहा........ मैं गयी अहहहा उईईई माआआहहाहाहहः...... हानन पी ले ना मेरा पूरा पानी आहहहाहा.. चाट ले ना मुझे अहहहहहाहा....."

इतना चिल्ला के मेरी मा वहीं बिस्तर पे निढाल हो गयी.... कुछ देर में रॉकी ने भी अपना लंड उसके मूह से निकाला और उसके होंठ चूमने लगा...

"उम्म्म..... मेरी रंडी थक गयी क्या अहहहाः... बातें तो बहुत बड़ी कर रही थी साली हां..... एक बार में ही थक गयी" वो लड़का मेरी मा के होंठ चूस्ते हुए बोलने लगा...

ये सब सुनके मेरी माँ जोश में खड़ी हो गयी... उस लड़के को बेड पे लेटा दिया और उसके लंड को लेके अपनी चूत के छेद पे सेट किया, और एक ही झटके में उस लंड पे बैठ गयी...

"आहहहहहहहहहहहहा.... हाहहहहा और चोद मुझे भडवे अहहहहहा..... यस यस अहहहहहाहाः... और चोद साले ना मर्द कहीं के अहहहहहाअहहहहहा... तू थक गया होगा साले रंडी के बेटे अहहहहा... मैं रंडी हूँ समझा और चोद मुझे अहहहहहः... आहहाहा ओह्ह्ह्ह येस्स्स एयसस्सस्स यस सस्स्स्स्सस्स... फक मी हार्ड एसस्स्स्सस्स अहहहहा......."

इतना जोश देख के रॉकी भी अपने लंड के तेज़ झटके मारने लगा.... पूरे रूम में उनकी चुदाई की चीखें गूँज रही थी.... देखते देखते मेरी माँ उसके लंड से उतर गयी, और बेड के एक कोने में आके, उसने अपनी दोनो टाँगें बंद कर दी, और उन्हे हवा में उठा दिया..... रॉकी भी शायद उसकी ये पोज़िशन समझ गया, और बेड पे खड़े होके उसकी चूत में लंड पेलने लगा

"अहहहहाः.. इससे तो तेरी चूत बहुत टाइट लग रही है मेरी रंडी आहाहहहा... कहाँ से सीखी ये पोज़िशन मेरी रांड़ साली अहाहहाः..." रॉकी चोद्ते चोद्ते पूछने लगा...

"तू चोद ना मेरे यार.... मैं तो बनी ही चुदवाने के लिए हूँ अहहहः... अयाशी का दूसरा नाम है अंशु जोशी.. अहहहहहा... और चोद ना मेरे भडवे...अहहहहहहा.... हाँ और मार ले ना मेरी चूत को अहाहहा सीईईईई......" मेरी मा चुदवाते चुदवाते किसी पॉर्न स्टार की तरह चिल्ला रही थी

"आहहहहाः मेरी रांड़ मैं निकल रहा हूँ अहाहहाहहा... कहाँ छोड़ूं मैं अपना पानी अहहहहा..." रॉकी पूछने लगा...

"उम्म्म्म मेरे राजा.. मेरी चूत में ही छोड़ दे ना, अहहहाहा... चिंता क्या है उम्म्म्म यआःा अहहहहाहा.. गिरा दूँगी बच्चे को अगर हुआ तो..अहहहहहा. इससे पहले भी तो कई बार कर चुकी हूँ.. तू बस मज़े दे मुझे अहहहहा...."

ये सुनके रॉकी ने अपना पूरा स्पर्म मेरी माँ की चूत के अंदर छोड़ दिया

जैसे ही उन दोनो की चुदाई ख़तम हुई... मेरी मा ने अपनी उखड़ी हुई साँसों से कहा

"उम्म.... मैने सही घोड़े पे पैसे लगाए हैं मेरे आ अजजाजा..... आज रात को भी दौडेगा ना रेस में हाँ" मेरी मा ने रॉकी के होंठ चूमते हुए कहा...

"हां मेरी रानी अहहाहाः... तेरे जैसी घोड़ी हो तो कौन कम्बख़्त नहीं दौड़ेगा हाँ" रॉकी मेरी मा का बखुबी साथ देने लगा था....

कुछ सेकेंड्स में उन दोनो ने एक दूसरे का चम्बन तोड़ा, तो मुझे सामने देख लिया

'उम्म्म... पूजा रानी आहहाः... आजा ना तू भी मज़े ले इस लोड्‍े के.. कसम से बड़ा ही कमाल चोदता है ये अहाहहाः... मेरी चूत तो अभी से ही दूसरे राउंड के लिए तड़प रही है..." मेरी माँ मुझे देख के बोल रही थी और एक हाथ की उंगली से रॉकी के स्पर्म को चाट रही थी....

 
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