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Guest
मैने उन्हे कुछ जवाब नहीं दिया.. मैं वहाँ से सीधा अपने रूम में भाग गयी और रूम को लॉक कर दिया... उनकी चुदाई देख के मैं भी काफ़ी गरम हो चुकी थी, मैं सीधे जाके शवर लेने लगी... ठंडे पानी का एहसास पाके मुझे कुछ शांति मिली.... काफ़ी देर तक नहा के मैं रूम में आके कपड़े चेंज करने लगी... वक़्त देखा तो रात के 9.30 बज रहे थे... मैने नीचे जाके दादा दादी के लिए खाना बनाने का सोचा.. रास्ते में फिर मेरी मा और रॉकी की चुदाई देखी.. इस बार मैने उनके दरवाज़े को पटक के बंद कर दिया और किचन में जाके दादा दादी का खाना बनाया..
खाने लेके मैं जैसे ही उनके रूम में पहुँची, दादू ने मुझे कहा
"आओ बेटी... ये लो बॅंक की डीटेल्स, तुम्हे इसके रहते पैसों की फिकर नहीं करनी पड़ेगी...."
"थॅंक यू दादू... और ये लीजिए आप लोगों का खाना..." मैने दादा दादी को खाना देते हुए कहा
"बेटी.. अंशु आई के नहीं अब तक.. सुबह से गयी हुई है.." दादी ने मुझसे चिंतित स्वर में कहा..
"हां दादी आ गयी है.. अपने कमरे में नींद आ गयी है उनको...." मैने फिर झूठ कहा दादी को
"हां नींद तो आएगी ही.. पूरा दिन सिर्फ़ दारू, सिगरेट.. ऐसे तो नींद ही आएगी उनको और क्या होगा" दादी ने झल्ला के कहा
मैने इस बार उनसे कोई बहस नहीं की. और अपने रूम की तरफ बढ़ गयी.. इस बार अपने रूम में भागती हुई चली गयी क्यूँ कि मुझे अंदर से कुछ भी नहीं सुनना था... अपने कमरे में जाके मैने दादू की बॅंक डीटेल्स चेक की. फ्लाइट का स्टेटस चेक किया और अपने लिए ऑनलाइन कॅब बुक कर ली...
थोड़ी देर में मेरा ऑर्डर किया हुआ खाना भी आ गया... मैं खाना लेके अपने रूम में आ गयी और खाते खाते सोचने लगी...कैसी है मेरी मा....कोई अपनी बेटी के सामने ये सब कर सकता है.. कोई पैसे देता है इस काम के लिए... और मेरे डॅड??? कैसे बेटे हैं वो, कैसे पिता हैं वो, कैसे पति हैं वो... इन लोगों को कुछ भी ख़याल नहीं था अपनी ज़िंदगी का... आख़िर ये लोग कब तक जीएँगे ऐसे... आख़िर मेरा भविश्य क्या होगा... इनसे दूर भी हुई तो नाम तो जुड़ा हुआ ही है इनके साथ.... ये सब सोचते सोचते मैं अपना खाना ख़तम ही करने वाली थी कि तभी बाहर से कुछ चिल्लाने
की आवाज़ें आने लगी... ध्यान से सुना तो मोम और दादा दादी झगड़ा कर रहे थे.. मैं झट से अपने कमरे से बाहर गयी तो मोम के रूम के बाहर ये सब चिल्लम चिल्ली हो रही थी...
"सुन आए बुढ़िया.. ज़्यादा बकवास मत कर मेरे साथ.. समझी, नहीं तो धक्के मारके तुझे इस घर से बाहर निकाल दूँगी.." मेरी मा दादी मा को धमकी दे रही थी...
"मूओंम्म्ममम..... ये सब क्या है... हाउ कॅन यू स्पीक लाइक दिस टू हर हाँ.... " मैने दादी को संभालते हुए कहा, जो फूट फूट कर रो रही थी...
"तू बड़ी आई है हाँ अपनी दादी की लाडली... सुन , अगर अपनी जान प्यारी है तो समझा इन बूढो को, मेरे बीच में दखल ना दें..." मेरी मा ने फिर से शराब पी हुई थी....
"ऐसे कैसे निकाल देगी हाँ.... ये घर मेरे बेटे का है समझी.. आने दे उसे, धक्के मार के निकालूंगी तुझे..." मेरी दादी ने रोते हुए कहा..
"दादी प्लीज़ आप चलिए मेरे साथ..." मैने थोड़ा संभालने की कोशिश की....
"रुक जा साली... क्या बोलती है, तेरा बेटा मुझे निकालेगा.. अहहहहहहहाहा... वो तो साला कहीं मेरी सहेलियों की चूत में बैठा होगा, तुझे क्या लगता है, मैं यहाँ अयाशी कर रही हूँ , तो तेरा बेटा कौनसी पूजा कर रहा है... वो भी रंडियों में बैठा रहता है समझी... और मुझे निकलेगी हाँ तू... रुक जा ज़रा" ये कहके मेरी मा नशे की हालत में आगे बढ़ी और मेरी दादी माँ पे हाथ उठाने की कोशिश की पर मैने उन्हे रोक लिया और उनका हाथ पकड़ लिया...
"तू नहीं सुधरेगी हाँ साली कुतिया.. सबसे पहले तुझे देखती हूँ.." ये कहके मेरी मा ने मुझे इतनी ज़ोर का चाँटा मारा कि दूर जाके अपने रूम के दरवाज़े से टकराई.. मेरे सर से खून बहने लगा...
"नहीं मोम... प्लीज़ उन्हे नहीं कीजिए कुछ" मैं वहीं बैठी बैठी उन्हे बिनति करने लगी....
"बुढ़िया कहीं की... आज तेरा खेल ही ख़तम कर देती हूँ मैं... मुझे निकालेगी हाँ..." ये कहके मेरी मा ने दादी मा के गाल पे इतना ज़ोर का चाँटा मारा कि दादी मा के चश्मा मेरे पास आके गिरा... और देखते ही देखते दादी मा नीचे सीडीयों पे फिसलने लगी.... फिसलते फिसलते दादी माँ नीचे गिर गयी और उनके सर से खून की नदी बहने लगी.....