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मेरी सेक्सी बहनें compleet

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पूजा ने मेरे लंड के टोपे पे कुछ 10 सेकेंड्स ही जीभ घुमाई, और मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया, जिसे पूजा ने बड़े आसानी से पी लिया... मैं अब भी पूजा की चूत पे लगा हुआ था.... एक बार पानी निकालने के बाद पूजा मेरे लंड को फिर चूसने लगी और टट्टों पे थप्पड़ मारने लगी... साथ साथ मैं भी उसकी गान्ड पे मारने लगा जो हवा में उँची उठी हुई थी..

"उम्म्म्म अहहहः.. स्पॅंक हार्ड अहहाहा.. और माअरो मुझे अहहहः... मैं बहुत रंडी हो गई हूँ अहहहहः.. मेरी चूत और गान्ड की यही सज़ा है आहहहहा..." पूजा मेरे लंड की मूठ मारने लगी थी... धीरे धीरे मेरा लंड भी फिर खड़ा होने लगा और एक दम तन चुका था.. जैसे ही मुझे एहसास हुआ इसका, मैं बेड से उठके नीचे ज़मीन पे सो गया, पूजा ने भी देरी ना करते हुए नीचे आके मेरे लंड को चूसने लगी....

"उम्म्म अहहहहहा... और चूस ना मेरी रांड़ बीवी अहहाहा सीईईई.. मज़ा आ रहा है आहहहहहा...... और ले ना अंदर अहहहहहहा... स्लर्प स्लर्प आआहहहाहा स्लर्प आहाहहाहा.." मैं पूजा की चूत चाट के बोलने लगा....

"आऊम्म्म्म्म.. गन गुणन्ं अहहाहा सीईइ.. मैं तो हूँ ही खानदानी रंडी आआआहहा.... मेरी मा को भी चोद डाला आपने अहहहहा..... और किसको चोदोगे मेरे भडवे सैयाँ आहहहहहा..... गुणन्ं गुणन्ं गुउन्न्ं.... आहहहहा मैं गयी अहहहहाहा.. और चूस्सूओ आहहाहहः चकूवसोसाहह आओह मुम्मयाहहाहा मैं गई उम्म्म..." पूजा दूसरी बार झड़ने लगी, और मैने उसका पूरा पानी गटक लिया...

मैने इस बार पूजा को नीचे ज़मीन पे लिटाया, और उसकी पीठ पे आके अपना लंड उसकी चूत के छेद पे सेट किया...

"उम्म... मेरे सैयाँ अहहाहा... रंडी की गान्ड मारो ना अहहाहा... चूत से क्या होगा अहहहहा" पूजा मदहोश होके बोलने लगी..

मैने अपना लंड उसकी गान्ड के छेद पे सेट किया जो बहुत गीला हो चुका था, सेट करके एक ही झटके में पूरा का पूरा अंदर घुसा दिया. ज़मीन पे होने के कारण और मैं उसके उपर था, पूजा बिल्कुल भी हिल नहीं सकती थी और लंड का झटका शायद सह नही पाई..

"अहहहहहहहहः..... ओह निकाल लो इसे अहहहहः... साले भडवे अहहहहहहहाः मैं मर जाउन्गि आहाहहः.....ओह्ह्ह आहहहहा निकाल ले रंडी के साले आआहहहा...... नाआ नाआ मैं मर जाउन्गि मम्मी अहहहः...... नूऊऊओ...." पूजा की आँखें अब आँसू छलकने लगे.... मैं कोई दया भाव नही दिखाना चाहता था, इसकी गान्ड तो मारनी थी, अब क्यूँ चोदु मैं... मैं अपने धक्के और तेज़ करता गया.. पूजा की चीखें बढ़ती गयी हर धक्के के साथ.....

"फ़च्छ फ़चह.... ओह्ह्ह्ह अहहाहाहहा... फ़च फ़च... आहहहाः... और डालो ना आहहहहः... मज़ा आ गया आहाहः.. फ़चह फ़चह.. उम्म्म्म आहहाहः..." इन आवाज़ों के साथ रूम पूरा गूँज उठा था... करीब 10 मिनट तक पूजा की गान्ड चुदाई करने के बाद, मैं उसके उपर से उठा और उसके बाल पकड़ के उसे भी खड़ा किया.. उसकी आँखों में अभी भी मदहोशी झलक रही थी... हम एक दूसरे को आँखों में देख रहे थे, देखते देखते फिर वापस स्मूच करने लगे... ये स्मूच बहुत ज़्यादा जंगली था..

पूजा के बाल खींच के मैं उसे डाइनिंग टेबल के पास लाया, और उसे फिर पेट के बल डाइनिंग टेबल पे लेटा दिया और उसकी टाँगें हवा में लटका दी... जैसे ही वो मेरी डिज़ाइयर्ड पोज़िशन में आ गयी, मैं एक बार उसकी चूत के पास गया और उसपे काफ़ी सारा थूक लगाया... लंड सेट किया और एक झटके में लंड उसकी चूत के आरपार कर दिया... ये धक्का वो सहन कर ली और मज़े में लेके बोलने लगी..

"अहहहहहा... अहहहहाः और चोदो ना अहहहहा येई तो मेरी फेव सेक्स पोज़िशन है अहहहाहा... आपका लंड मेरी हलक तक महसूस हो रहा है अहहहः.... और चोदो अहाहाहहा... अहहहहाहा...यॅ आहहा फक मी हार्ड बेबी अहहहहहा.. यस यस यस यस अहहहहहः ओह आइ अम कमिंग बेबी अहहहहहा...... कमिंग अहहहहहहहा........ " ये कहके पूजा तीसरी बार झाड़ गयी... उसका पूरा रस मेरे लंड पे बहने लगा जिसकी वजह से मेरे लंड पे चमक बढ़ गयी...

 


करीब 10 मिनट तक चोदने के बाद मैने अपना पूरा स्पर्म पूजा की चूत के अंदर ही छोड़ दिया.. इस बीच पूजा एक बार और झाड़ चुकी थी... हम एक दम पसीने में भीग चुके थे.. थक के हम बेड पे आ गये और ज़ोर ज़ोर से साँसे लेने लगे.. पूजा मेरे कंधे पे अपना सर रख के लेट गयी और मैं उसके सर पे अपना सर रख के कुछ देर लेट गया... करीब 20 मिनट बाद, पूजा बोली

"इतना वाइल्ड सेक्स मैने कभी सोचा भी नहीं था... आज अचानक इतना जंगलीपन कहाँ से आ गया आप में"

"क्यूँ तुम्हे पसंद नहीं आया... " मैं पूजा के गालों को चूमते हुए बोला

पूजा:- बहुत मज़ा आया...

"चिंता मत करो, तुम्हारा ख़याल मैं ही रखूँगा... आगे आगे देखती जाओ. याद रखोगी ज़िंदगी भर वीरानी को.."

पूजा के साथ हुई ज़बरदस्त चुदाई के बाद, पूजा और मैं थक कर मेरे ही रूम में सो गये थे. पूजा तो एक ही घंटे में नींद की आगोश में चली गयी थी, पर मैं जागता ही रहा. नींद ना आने की वजह से, मैं कुछ देर बाल्कनी में आके बैठ गया, और सोचने लगा जो मैं कर रहा हूँ, वो सही है के मुझे किसी को बता देना चाहिए, पायल बार बार बोल रही है उसकी मॉम इसमे इन्वॉल्व्ड नही है, तो क्या मुझे उसपे विश्वास कर लेना चाहिए.. अगर पूजा ने मुझे सच नहीं बताया तो फिर सच क्या है.. सबसे पहले मुझे पूजा और अंशु के बारे में सब जानना होगा.. मैने अपना मोबाइल देखा तो डॅड ने चार्टर्ड अकाउंटेंट की डीटेल्स भेजी थी. वक़्त सही नही था, पर मैने फिर भी उस वक़्त ही उसको फोन लगाया...

"हेलो मिस्टर गुप्ता... वीरानी हियर" मैने सी.ए को कहा..

"हेलो , बोलिए, इस वक़्त, कोई प्राब्लम है आपको, आइ मीन ऑल ईज़ वेल आइ होप"

"यस, ऑल कूल... मिस्टर गुप्ता, क्या आप मुझे लेटेस्ट ऑडिटेड फाइनान्षियल स्टेट्मेंट्स भेज सकते हैं.. कंपनी और मेरे डॅड के इंडिविजुयल भी... आइ नीड टू चेक फ्यू थिंग्स"

"शुवर..बट थोड़ा टाइम दीजिए प्लीज़... मैं आपको करीब 2 घंटे में भेज सकता हूँ, पर आप लेने आएँगे कि मैं घर पे भिजवा दूं"

"नही...मैं आपको एक फॅक्स नंबर टेक्स्ट कर रहा हूँ, आप उसपस फॅक्स कीजिए, आंड प्लीज़ दो घंटे से ज़्यादा नही, आइ हॅव वेरी लेस टाइम टू प्ले वित"

"ओके जी...मैं फॅक्स करके आपको कन्फर्मेशन भेजता हूँ..."

ये कहके फोन कट हो गया, और क्यूँ कि मुझे सोना नहीं था, मैं होटेल के बार के लिए निकल गया.. बार में बैठे बैठे स्कॉच पे स्कॉच गटकने लगा.. करीब 1.30 घंटे में मुझे का ने एसएमएस भेजा

"फॅक्स सेंट..प्लीज़ कन्फर्म दा रेसेप्ट"

मैं तुरंत रिसेप्षन पे पहुँचा, देख कर यकीन नही हो रहा था, सेम रिसेप्षनिस्ट सुबह से...

"हाई...हाउ आर यू" मैने रिसेप्षनिस्ट से पूछा

"हेलो मिस्टर वीरानी...आइ आम गुड, होप यू एंजायिंग दा स्टे हियर"

"ओह यस... आइएम लविंग इट... ऊह...यू वर्क हियर ऑल डे लोंग, आइ मीन , यू हियर सिन्स मॉर्निंग आंड स्टिल लुकिंग फ्रेश ऐज डेज़ी.."

"थॅंक यू सर... बट आइ गेस, यू सो लेट हियर, नोट हियर टू कॉंप्लिमेंट मी....टेल मी हाउ कॅन आइ हेल्प यू"

"आइ वाज़ आक्च्युयली एक्सपेक्टिंग आ फॅक्स फ्रॉम इंडिया.. कुड यू प्लीज़ चेक आंड लेट मी नो दा रेसेप्ट"

"ओह यस...देअर दे आर, दा मोमेंट आइ सॉ यू, आइ न्यू यू वुड बी एक्सपेक्टिंग सम्तिंग" रिसेप्षनिस्ट ने मुझे डॉक्युमेंट्स पकड़ाते हुए कहा...

"थॅंक यू वेरी मच...सी यू लेटर्स..बाय"

 


डॉक्युमेंट्स लेके मैं अपने रूम में आ गया, और चेक करने लगा.... करीब 40 मिनट के बाद मैने सब पेपर्स देख लिए... पेपर्स देख के एक बात का तो मुझे यकीन हो गया , इसके पीछे जो भी है, बहुत चालाक तो है ही, पर उसे कंपनी और पापा के फाइनान्षियल्स की सब बातें पता है... और वो बाकियों से बहुत छुपा भी रहा है... मतलब अगर वो अपने प्लान में कामयाब होता है, तो प्रॉपर्टी का सबसे बड़ा हिस्सा वो अपने पास ही रखने वाला है.

मैने वक़्त देखा तो रात के करीब 3 बज रहे थे... इंडिया में सुबह हो गयी होगी, मैने तुरंत एक कॉल लगाया...

"हां, मैं बोल रहा हूँ, "

"इधर भी मैं ही हूँ, ईडियट..बोलो क्या हुआ, सुबह सुबह, तुम्हे नींद नही आती, इंडोनेशिया कुछ हो गया है क्या" सामने से जवाब आया..

"मज़ाक नही, अब सुनो, अंशु और पूजा के बारे में मुझे सब कुछ जानना है..और पूजा का बाप भी, इन तीनो के बारे में सब कुछ..इनफॅक्ट पूरे खानदान का हिसाब, यू गेट इट"

"तुमसे पहले मैने ये सब सोच लिया था..काम चालू है, शायद ख़तम हो जाएगा आज कल में...तुम अभी सो जाओ, बाली में भी तुम्हे बहुत मेहनत करनी है...बदला लेना है, तो अपने तरीके से लो ना, मेरी नींद मत बिगाड़ो..बाइ"

(एक तो इधर मेरी फटी पड़ी है, और इसे अपनी नींद प्यारी है….) ये सोचते सोचते मैं वापस पूजा के पास चला गया जो अब तक सो रही थी…. (सो ले भाई, सो ले, तेरी और तेरे खानदान की तो मैने और मारनी है… आज गान्ड मरवाई है, आगे आगे देख मैं क्या करता हूँ… तेरे साथ अगर पायल भी हुई तो उसका भी हश्र वही होना है..) मैं जाके सब से पहले बाथरूम में नहाने घुस गया, क्यूँ कि हमारे बाली की फ्लाइट यहाँ से 4 घंटे बाद की थी… नहा के मैं तैयार हो गया, और पूजा को उठाने लगा..

“पूजा, गेट अप.. हमे फ्लाइट पकड़नी है… पूजा…. चलो अब कितना सोना है तुमको…”

“उम्म्म….. अभी रुकिये ना प्लीज़, थोड़ी देर और…” पूजा मूह फेरते हुए बोली

“पूजा, बच्चो जैसा बिहेव मत करो, वी हॅव आ फ्लाइट टू कॅच.. जल्दी उठो” ये कहके मैने पूजा को कंधों से पकड़ के उठा लिया… जैसे ही पूजा उठी, सीधा मुझसे लिपट गयी और बोली

“उम्म्म्म… गुड मॉर्निंग स्वीट हार्ट… लव यू आ लॉट हनी…” और ये कहके मेरे कान पे हल्का सा बाइट किया

“तुम जल्दी फ्रेश हो जाओ. तब तक मैं ब्रेकफास्ट ऑर्डर करता हूँ..” ये कहके मैं पूजा से अलग हुआ और हमारे लिए थोड़ा लाइट ब्रेकफास्ट ऑर्डर कर लिया… जब तक हमारे ऑर्डर आता, और जब तक पूजा फ्रेश होती, मैने सोचा थोड़ी भड़वापन्ति की जाए..

“हेलो पायल.. गुड मॉर्निंग डार्लिंग” मैने पायल को फोन लगाया

“गुड मॉर्निंग भाई… क्या बात है, आज सुबह सुबह..”

“अरे कुछ नही, एक काम कर, तू हमारे होटेल आजा, यहीं से हम साथ चॅलेंज एरपोर्ट”

“व्हाट भाई.. आपकी फ्लाइट अभी है, मेरी शाम की है, मैं क्या करूँ इसमे”

“नतिंग डूयिंग… टिकेट्स का वी विल सी, बट यहाँ से साथ ही चलते हैं, अगर मुझसे सही में प्यार करती है तो 30 मिनट्स में इधर आजा” ये कहके मैने फोन कट कर दिया और तुरंत रूम में जाके पूजा का मोबाइल ढूँढने लगा… जैसे ही मुझे पूजा का मोबाइल दिखा, 2 मिनट्स में पायल का एसएमएस आया उसपे..

“हाई.. व्हाट्स कुकिंग, कॉल्ड मी टू जाय्न यू गाइस.. वेट्स दा प्लान…”

मैने पूजा के मोबाइल से तुरंत पायल को रिप्लाइ किया

“नतिंग….. ही ईज़ जस्ट मिस्सिंग हिज़ डार्लिंग सिस्टर, कम आंड शो युवर लव टू दट जॅकॅस..”

“ओके.. विल बी देअर, बाय”

मैने झट से ये कॉन्वर्सेशन डेलीट कर दी पूजा के मोबाइल से और वापस मैं रूम में आके बैठ गया… इस कॉन्वर्सेशन से ये तो पक्का है कि पायल पूजा के साथ ड्रामा कर रही है, पर उसकी मोम का कन्फर्म कैसे करूँ…. क्या करूँ कि पता चल जाए इन सब के पीछे उसकी मोम है या कोई और.. ये सब सोचते सोचते हमारे लिए ब्रेकफास्ट भी आ गया, और पूजा भी रेडी हो गयी…

“गुड मॉर्निंग डार्लिंग…” पूजा के इस आवाज़ से जैसे ही मैं पीछे मुड़ा, मैं उसे देखता ही रह गया..

बहुत ही सोबर ड्रेस्ड, इतनी सिंपल लग रही थी, जी चाह रहा था अभी का अभी जाउ और उसे चोदु , चाटू, पूजा करूँ, सब कुछ …. पर दिल पे कंट्रोल करके मैने उसे जवाब दिया

“गुड मॉर्निंग… लुकिंग वेरी ब्यूटिफुल” मैने उसके गाल पे हल्का से पेक देते हुए कहा….

“थॅंक यू.. आप भी अच्छे लग रहे हैं… “ पूजा इतना कहके नाश्ता करने मेरे साथ बैठ गयी..

 


“रुकिये रुकिये… सबसे पहला बाइट आप मेरे हाथ से लीजिए.. ना जाने फिर हमारे बीच में कोई आ जाए, ये चान्स मैं खोना नहीं चाहती…” पूजा ने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा…

“नहीं.. अगर सही में मुझे अपने हाथ से खिलाना चाहती हो तो इधर आओ, मेरी गोद में बैठ के खिलाओ मुझे…”

“ओह.. इसमे क्या बात है, लीजिए…” पूजा उठके मेरी गोद में आके बैठ गयी..

उसके आते ही, मैने अपने हाथों से उसकी कमर को घेर लिया, अपने होंठ उसकी गर्दन के पास ले जाके गरम साँसे छोड़ने लगा…

“उम्म्म… सुबह सुबह जनाब रोमॅंटिक हो रहे हैं…क्या बात है, रात से दिल नहीं भरा क्या..” पूजा ने मेरी तरफ मूह करके कहा, जिससे उसके चुचे सीधा मेरे होंठों के पास आ गये..

“ओह्ह्ह… तुमसे तो दिल कभी नहीं भरेगा जानेमन.. ये कहके मैने उसके टॉप के अंदर हाथ डाल दिया और उसकी ब्रा के उपर से उसके चुचे सहलाने लगा…

“उम्म्म….आहह सीयी….. ह्म्म्म्म ..मुझे ये नीचे क्या चुभ रहा है बाबययी…अहहाहा….” इतना कहके पूजा भी मेरी जीन्स के उपर से मेरे लंड को सहलाने लगी….

“उम्म्म्म आहहः… क्या बूब्स हैं आआहहाः… लव यू बेबी आहाहः सीईईईई…..” मैं पूजा के चुचों को अब नोचने लगा था, और उसने अपने दोनो हाथ मेरे कंधों के पास लिपटा दिए थे..

मैं धीरे धीरे उसकी ब्रा खोल ही रहा था, कि तभी मेरा फोन बजने लगा, जिससे हम दोनो का ध्यान टूटा..

“च… देखिए कौन है अब… पूजा इतना कहके वापस अपनी सीट पे चली गयी…”

“हेलो..”

“मिस्टर वीरानी.. दिस ईज़ आ रिमाइंडर, युवर कॅब ईज़ रेडी फॉर एरपोर्ट.. प्लीज़ बी हियर इन 10 मिन्स ओर एल्स यू माइट गेट लेट फॉर युवर फ्लाइट..”

“थॅंक्स.. वी विल बी देअर सून” मैने फोन रखने से पहले कहा..

“चलो.. नाश्ता फिनिश कर लो, फ्लाइट का रिमाइंडर था…” मैने पूजा से कहा

“क्या नाश्ता…. पूरा मूड खराब कर दिया… चलिए..” पूजा ने उदास होके कहा..

“अरे जानेमन, अभी तो बाली है ना, डॉन’ट वरी… मूड अच्छा करो, वी हॅव लॉट ऑफ टाइम ओके..”

हम नाश्ता करके जैसे ही नीचे पहुँचे, कॅब हमारे लिए रेडी थी.. हम कॅब में बैठ ही रहे थे, तभी सामने हमे पायल आती दिखाई दी

पायल को देख मैं तो खुश हुआ, पर पूजा को शॉक सा लगा.. क्यूँ कि उसके हिसाब से तो पायल शाम को आ रही थी, मैने उसे अभी बुला लिया था.. जैसे ही पायल हमारे पास आई, उसने कहा..

“ऐसे क्यूँ देख रहे हो.. अम आइ नोट इन्वाइटेड वित यू गाइस…..”

पायल को देख के पूजा के चेहरे का रंग उड़ गया था.. वो समझ नहीं पा रही थी कि पायल यहाँ क्यूँ आई है.. जब कि पायल येई समझ रही थी कि ये उनका एक छोटा सा प्लान है जिसकी वजह से मैं मेंटली डिस्टर्ब रहूं...

"हाई पायल... क्या बात है, तू तो क़यामत लग रही है.. " मैने पायल को हग करते हुए कहा..

"क्या भाई आप भी ना... मुझसे ज़्यादा खूबसूरत तो पूजा भाभी लग रही है.. क्या बात है भाभी, किसी का कत्ल करने का इरादा है क्या बाली में....." पायल ने पूजा को गले लग के पूछा..

पूजा को समझ नहीं आ रहा था ये सब क्या हो रहा है, इसलिए उसने सिर्फ़ हल्की सी मुस्कुराहट में जवाब दिया...

"चलो लेट्स गो.. देर ना हो जाए," मैने दोनो को कहा

"कहाँ... पायल की फ्लाइट तो शाम की है, वो अभी कैसे आएगी..." पूजा ने आश्चर्य में आके कहा..

"हां, बट भाभी, मैं सोच रही हूँ आपके साथ ही चलूं, यहाँ अकेले शाम तक क्या करूँगी.. प्लीज़ डोंट माइंड हाँ.." पायल ने पूजा के पास जाके कहा..

"पूजा, डू यू माइंड जाय्निंग हर वित अस.." मैने पूजा से पूछा..

कुछ सेकेंड्स तक पूजा खामोश रही, फिर निराश होके बोली..

"नो नो... प्लीज़, इट्स फाइन..." ये कहके पूजा पीछे बैठ गयी..

मैने सब समान कॅब में रखवाया और जाके पूजा के पास बैठ गया, और पायल को आगे बैठने के लिए कहा...

"आप क्यूँ पीछे आए, पायल को बैठने दीजिए ना..." पूजा ने मुझे कहा

"क्यूँ भाई.. अचानक क्या हुआ, पायल से इतना प्यार हाँ.. मुझ में कोई प्राब्लम है क्या" मैने मस्ती में पूजा को जवाब दिया

"नहीं, प्राब्लम क्या होगा, बट वो आगे ड्राइवर के साथ बैठी है, अच्छा लगता है क्या.." पूजा ने फिर पायल को पीछे बैठने का ज़ोर दिया

"नहीं.. मैं यहीं बैठूँगा, पायल ईज़ फाइन, है ना पायल..." मैने पायल की तरफ देख के बोला

"हां भाई... डेट्स ओके.... आइ अम कूल हियर.." पायालने जवाब में कहा..

 


ये सुनके पूजा के मूह पे निराशा बढ़ सी गयी.. क्यूँ कि अगर पायल पीछे बैठती, तो शायद उन लोगों की बात होती कि पायल यहाँ क्यूँ आई, और पूजा के मोबाइल से जो टेक्स्ट गये थे उस बारे में... अब मेरा काम ये था कि पूजा और पायल को बिल्कुल अकेला नहीं छोड़ूं.. ताकि उन लोगों के बीच इस बारे में कोई बात ना हो... हम लोग एरपोर्ट के लिए रवाना हो गये, और कुछ ही देर में एरपोर्ट पहुँच गये... एरपोर्ट पहुँचते ही सबसे पहला मेरा काम ये था, कि पायल की शाम की फ्लाइट के बदले अभी वाली फ्लाइट में अरेजमेंट हो जाए..

"पूजा, तुम समान निकलवाओ, तब तक मैं पायल की टिकेट्स का कुछ देखता हूँ.. चल पायल मेरे साथ.." मैने कॅब से उतरते हुए कहा

"ये कहाँ जाएगी.. आप होके आओ ना, इसे इधर ही रहने दो.." पूजा ने फिर मौका तलाशना चाहा

"अरे, इसके डॉक्युमेंट्स देने हैं, इसके आइडी प्रूफ देने हैं, ये नहीं आएगी तो मैं टिकेट्स का कुछ नहीं कर पाउन्गा... पायल चल तू, पूजा प्लीज़ मॅनेज ओके.." मैं पायल का हाथ पकड़ के अंदर ले गया और पूजा वहीं खड़ी रही कॅब के पास समान के लिए..

अंदर जाते ही सबसे पहले पायल ने मुझे कहा..

"क्या बात है भाई,बहुत उतावले हो रहे हो मुझे ले जाने के लिए.. पूजा में मज़ा नहीं है क्या हाँ.." पायल ने हंसते हुए कहा

"अरे, मेरी स्वीट हार्ट, तुझसे ज़्यादा मज़ा और किसमे होगा.. देख नहीं रही है, कितना जल रही है वो तुझसे.. इससे यही साबित होता है कि तू है तो एक दम बला की खूबसूरत, तेरे सामने तो वो पानी कम चाइ है.." मैं उसकी कमर में हाथ डालते हुए चल रहा था..

बातें करते करते हम टिकेट काउंटर के पास पहुँचे, किस्मत अच्छी थी मेरी यहाँ कि हमारी फ्लाइट में जगह थी, हमने पायल की शाम की फ्लाइट के बदले ये टिकेट से स्वप मारा, कुछ पैसे भर के वापस पूजा के पास जाने के लिए मुड़े, तो देखा पूजा लाउंज के पास ही खड़ी थी समान के साथ.... हम पूजा के पास पहुँचे,

"लो जी, हो गया काम.. पायल की टिकेट हो गयी, पर उसकी टिकेट अलग है हम से.. "

"तो क्या हुआ, हम साथ में बैठेंगे, आप अलग बैठना," पूजा ने मुझसे कहा

"क्यूँ.. मैं नहीं बैठती तुम्हारे साथ, सॉरी, सुबह की बातों को प्यार मत समझो, भाई, मैं अलग ही बैठूँगी प्लीज़ ओके..." पायल इतना कहके कुछ ड्रिंक्स लेने चली गयी.. इधर पायल समझ रही थी कि उसे और पूजा को फिर झगड़े का नाटक करना है, और पूजा जो करना चाहती थी वो पायल अपनी आक्टिंग की वजह से होने नहीं दे रही थी... इन सब में मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा था...

"देखा.. सुबह से पागल हुए जा रही हो, जब वो तुमसे बात नहीं कर रही, तो तुम्हे क्या है अचानक उसपे प्यार आ रहा है.." मैने पूजा को डाँट के कहा.. पूजा ने कोई जवाब नहीं दिया.. कुछ देर में बोरडिंग की अनाउन्स्मेंट हो गयी और हम गेट्स की तरफ बढ़ गये... कुछ देर में टेक ऑफ हुआ, जकार्ता से बालि 1 घंटे की फ्लाइट थी, पर ये 1 घंटा पूजा के लिए बहुत भारी था, वो पायल से बात ही नहीं कर पा रही थी, और उधर पायल मुझे पागल बनाने के चक्कर में लगी हुई थी... खैर इन सब के बीच हम बालि पहुँचे, जहाँ हमारे रिज़ॉर्ट की कॅब हमारा वेट कर रही थी... हमने कॅब ली, और अपने रिज़ॉर्ट की तरफ निकल गये.. रिज़ॉर्ट में हमने विला बुक करवाया था, पायल क्यूँ कि अनएक्सपेक्टेड थी, तो उसे सिंपल सूयीट से काम चलाना पड़ा... पूजा और मैं अपने विला में निकल गये, जब कि पायल अपने सूयीट में जाके सो गयी... जैसे ही हम अपने विला में पहुँचे, हम दोनो की आँखें चका चोंध हो गयी... विला था ही इतना खूबसूरत, इतना रोमॅंटिक, इतना एग्ज़ोटिक.. इससे ज़्यादा एग्ज़ोटिक लोकेशन मैने आज तक नहीं देखा था... अगर जन्नत है तो वो बस यहीं है...

 


इतना खूबसूरत लोकेशन देख के, पूजा जो अब तक बहुत नाराज़ और खामोश थी, अचानक उछल के मेरी बाहों में आ गयी और मेरे होंठों को चूमने लगी....

"उम्म्म.....गल्प गल्प अहाहहा..... इससे ज़्यादा खूबसूरती मैने आज तक नहीं देखी ..." पूजा ने मेरे होंठों को चूमते हुए कहा

"इससे ज़्यादा खूबसूरती तो मैं रोज़ ही देखता हूँ स्वीट हार्ट.." मैने उसकी आँखों में देखते हुए कहा

"कहाँ... मुझे भी दिखाइए कभी फिर.." पूजा ने मुझसे अलग होते हुए कहा

"चलो...अभी दिखाता हूँ," ये कहके मैं पूजा का हाथ पकड़ के अंदर ले गया और मैं रूम में आके आईने के सामने खड़ा किया..

"देखो... इससे ज़्यादा खूबसूरत मेरे लिए दुनिया में कुछ भी नहीं है..." मैने पूजा की तरफ इशारा करते हुए कहा

"उम्म...बातें बनाना तो कोई आपसे सीखे..." कहके पूजा पलट के मुझसे लिपट गयी और हम एक दूसरे के होंठों को चूमने लगे..

"उम्म्म..आहह...सक हार्ड डार्लिंग आहह....उम्म्म्मम" मैं चूमते चूमते पूजा की गंद पे हाथ ले जाके दबाने लगा....

"आहह सीईइ...उम्म्म्म...चलिए ना, साथ नहाते हैं..." ये कहके पूजा और मैं बाहर बने स्विम्मिंग पूल की तरफ बढ़ गये... पूल के पास पहुँचते ही हमने एक दूसरे के कपड़े उतारे, और बेतहाशा चूमने , चाटने लग गये....

"आहह....यअहह उम्म्म्म....सक मी मोर ना बेबी आहह....यॅ आहह.." पूजा मदहोशी से कहने लगी...

पूल के पास चल रही ठंडी हवा और मेरे हाथ में पूजा के चुचे, उसके निपल्स को कड़क होने में बिल्कुल वक़्त नही लगा... मैं झट से अपना एक हाथ उसके निपल्स पे ले गया और एक हाथ से उसकी चूत को सहलाने लगा... हम चूमते चूमते ज़मीन पे लेट गये और अब जन्गलियो की तरह एक दूसरे को चाटने लगे...

"आह...सुक्कक्काहह...क्या मर्द मिला है मुझे आहह...क्या शरीर है सीईइ....उम्म्म गुलपप गुलपप्प्प..." पूजा मेरे होंठ छोड़के अब मेरी छाती को चाटने लगी और धीरे धीरे नीचे बढ़ के मेरी नाभि पे जीभ घुमाने लगी... पूजा की जीभ अजीब सी लहर पैदा कर रही थी मेरे शरीर में..नीचे आके पूजा ने अपनी जीभ मेरे लंड पे रखी और तिरछी नज़रों से मुझे देखने लगी...मानो कुछ पूछ रही हो मुझसे...

"गो फॉर दा किल बेबी आहमम्म्मम...." मैं आँखें बंद करके मज़ा लेने लगा... मेरे ये शब्द सुनके पूजा ने अपनी जीभ को मेरे लंड के सुपाडे पे घुमाया "सीईयाहहामम्म्मम" और एक हाथ से मेरे टट्टों को मसल्ने लगी...मस्ती में आके मेरा शरीर उपर उठ गया जिससे मेरा लंड पूजा के मूह में घुसने लगा..ये देख मुझसे भी रहा नही गया और मैं ऐसे ही अपने शरीर को उपर नीचे करने लगा जिससे पूजा को मुँह फक मिलने लगा..एक तरफ पूजा माउथ फक का मज़ा ले रही थी और अपने हाथों से मेरे टटटे सहला रही थी, दूसरी तरफ मैं उसे माउथ फक देते देते हवा में झूल रहे उसके चुचों को मसल्ने लगा...

हम से और रहा नही गया..हमने जल्दी से पूल में डुबकी मारी, पूल में आते ही मैने पूजा को किनारे पे खड़ा रखा और नीचे पानी में जाके उसकी चूत को चाटने लगा...मेरे लिए ये अनुभव बिल्कुल नया था, ब्लू कलर का पानी, उसमे पूजा के जिस्म की गर्मी और उसकी चूत का नमकीन पानी, डेड्ली कॉंबिनेशन था..

"उम्म्म...आहह सीईईईईई हां और चाटो ना आहह....यस कमिंग बेबी आहह यअहह सक मी आहह फास्टर ओहूऊओाहमम्म्मम" पूजा के इन शब्दों के साथ उसका शरीर अकड़ गया और उसने दूसरी बार अपना पानी छोड़ दिया.... मैं बाहर आके लंबी साँसे लेने लगा.. जैसे ही मैं बाहर आया,पूजा ने मेरे बाल पकड़ के अपनी तरफ खींचा और फिर से मेरे होंठों को चूसने लगी

"उम्म्म..आआअह्ह्ह्ह फक मी नाउ आहह..." ये कहके पूजा मुझे पूल से बाहर ले जाने लगी..हम जैसे ही पूल के बाहर आए, सामने खड़ी पायल को देख के चौंक गये..

 
बंधु मित्रो भाइयो भाभिओ आप सब को कैसा लगा मेगा अपडेट
 


हमे देख पायल ने अपनी आँखें खोली, जो अब तक हमारी लीला देख के खड़ी खड़ी नंगी होके अपनी चूत रगड़ रही थी...जैसे ही पायल ने अपनी आँखें खोली, उसने अपनी दो उंगलियाँ चूत के अंदर डाल दी जो बहुत गीली दिख रही थी...दो कदम आगे बढ़के उसने अपनी दो उंगलियाँ मेरे होंठों के करीब लाई..मैं सामने गया और उसकी उंगलियों को चाटने लगा..

"आह्ह्ह...दट'स माइ गुड ब्रदर..." पायल ने इतना ही कहा के उसने तुरंत अपने होंठ पूजा के होंठों से मिला लिए और उसके मज़े लेने लगी...पूजा कोई रेस्पॉन्स नही दे रही थी, तभी मैं नीचे झुक के अपनी जीभ पूजा की चूत पे सेट की और दो उंगलियाँ पायल की चूत में घुसा दी...

"स्लूरप्पप्प्सलूरप्प्पाहह..सीईईयाघह....उम्म्म स्लूरप्प्प्प्प स्लूरप्प्प्प्प आहह...." ऐसी आवाज़ों से पूजा की चूत चटाई शुरू हुई...इसके साथ ही पायल की चूत को भी मेरी उंगलियों ने चोदना चालू कर दिया..

"उम्म्म्म आहभ....भाई ज़ोर स्स आअहह....यू.एम्म्म सम्मूचमवाभाआभ.....आहहसिईई..... और ज़ोर से चाटिये ना आहह...." ऐसे आवाज़ों से दोनो लड़कियाँ एक दूसरे के चुंबन में लीन हो गयी..दोनो के चुचे एक दूसरे में धँस रहे थे... शाम के 7 बजे इतनी रोमॅंटिक जगह पे मैं अपनी सो कॉल्ड होने वाली बीवी और अपनी बुआ की लड़की को चोद रहा था...बारी बारी मैने दोनो की चुतो को चाटा और उंगली से चोदा...उपर दोनो एक दूसरे को चूम रही थी, काट रही थी...

"उम्मण आहह मेरी रांड़ पूजा भाभी आहहसिईइ...पहले तो मेरी चूत का पानी नही ले रही थी..आहह..अब कुतिया की तरह चाट रही है आअहन्न्न...पायल कहते कहते पूजा को जन्गलियो की तरह थप्पड़ मारने लगी...

"आहह मेरी कुतिया तू है मेरी ननद...कुतिया रंडी, अपने भाई से चुदवाने आ गयी...आहभमम्म्म और चूस ना भडवि आअहहसिईई...." कहके पूजा और पायल एक दूसरे के होंठ और चुचे चूसने लगी... इतनी देर में पायल पूजा ना जाने कितनी बात झाड़ चुकी थी..मैं नीचे से उठके पायल और पूजा को अंदर चलने का इशारा किया, पूजा और मैं आगे बढ़े तभी पायल ने पूजा का हाथ पकड़ के रोका..

"अंदर क्यूँ..यहीं चुदवा अपने पति से चल.."

पायल की ये बात सुनके पूजा तुरंत पूल के पास बने स्टेर्स पे गयी और अपने पैर फेला के कुतिया पोज़िशन मे अपनी चूत में घुसने का इशारा किया..पायल और मैं तुरंत आगे बढ़े, मैं पीछे से पूजा की चूत पे लंड सेट करने लगा, वहीं पायल पूजा के सामने जाके अपनी चूत फेला के लेट गयी... पायल के इशारे से मैने पूजा की चूत में लंड डालना शुरू किया और उधर पूजा की जीभ पायल की चूत को चाटने लगी..

"उहहाहह उहहाहह...उम्म्माहब ओह्ह्ह..और ज़ोर से आहाहह...ज़ोर से चोदो भाई इस रांड़ को आहह...और ज़ोर से चाट साली छिनाल मेरी चूत को आहहस्सिईइ.." पायल जोश में आने लगी थी...

"फकच..फ़ाच्छ... उम्म्म्म आहह उम्म्माहह..फक मी हार्डर यअहह....सक मी हार्डर आहह....रंडी कहीं की आहह...और ज़ोर से चूस ना...आहहाहा मेरे सैयाँ ज़ोर से चोदो ना अहहहा....." इन चीखों से हमारी चुदाई तेज़ चलती रही... करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद मुझे लगा मैं झड़ने वाला हूँ,लंड बाहर निकाल के पायल और पूजा को इशारे से बुलाया और दोनो आके मेरे लंड को चूसने लगी, मूठ मारने लगी...मेरे से कंट्रोल नही हुआ और "आहाहह ओह येस्स्साह्ह्ह्ह्ह्ह्ह" इस चीख के साथ अपना पूरा स्पर्म पायल और पूजा के मूह पे छोड़ दिया....

डेडैकेशन के साथ उन दोनो ने मेरे स्पर्म को सॉफ कर डाला और एक दूसरे को देख के हँसने लगी..

 


"हहेहेः...लव यू भाभी.." कहके पायल पूजा को चूमने लगी, और फिर खड़ी होके मेरे होंठ चूसने लगी...

"अब चलो भी, नहा लेते हैं...अभी तो इसकी चूत भी चोदना बाकी है आपको..." कहके पूजा के साथ हम तीनो जैसे ही पूल में उतर रहे थे, रूम में पड़ा पूजा का फोन बजने लगा...

"ओह..नो...अब कौन मर गया..रुकिये एक सेकेंड.." ये कहके पूजा रूम में गयी, उसके पीछे पायल और मैं भी चले गये...

"हेलो मोम..बोलिए..ये ग़लत टाइम पे क्यूँ फोन किया"

सामने से अंशु की बात सुनके..

"व्हाट !!!!! मोम क्या ... ओह माइ गोद्द्द्द्दद्ड !!!!! " पूजा के हाथ से उसका फोन गिर गया, और इसकी आँखों से आँसू टपकने लगे...

'हेलो... ऊह हाई, दिस ईज़ वीरानी.. कॅन यू प्लीज़ हेल्प अस अरेंज दा टिकेट्स टू दा अर्लीयेस्ट फ्लाइट फॉर इंडिया..." मैने होटेल के ट्रॅवेल डेस्क पे फोन करके पूछा...

"यस. वी आर थ्री पीपल.. कॅन यू प्लीज़ मेक इट बिज़्नेस क्लास... एप दट'डी बी गुड... ओह शुवर, प्लीज़ सेंड अक्रॉस युवर स्टाफ मेंबर, आइ विल सेंड दा डॉक्युमेंट्स आंड मनी वित देम.. थॅंक्स बाय..."

अंशु से बात करने के बाद जहाँ पूजा रोना बंद नहीं कर रही थी, वहीं पायल सब समान पॅक करने में लग गयी थी.. हमारी इंडोनेषिया की ट्रिप ख़तम... वी आर गोयिंग बॅक टू इंडिया.. ट्रवेल्देस्क का स्टाफ हमसे ज़रूरी काग़ज़ात और पैसे ले गया हमारी टिकेट्स का बंदोबस्त करने के लिए.. पायल बखुबी अपना काम कर रही थी, हमने पूजा को अलग छोड़ दिया था, जितना रोना है रोने दो पूजा को, मैने पायल से कहा था... सारा समान पॅक, टिकेट्स डन, बट पूजा का रोना अभी ख़तम नहीं हुआ था.. पूरी रात पूजा और पायल ने एक साथ बिताई..

रोना मुझे भी आ रहा था, बात ही ऐसे थी.. पर मैं खुद को संभाले बैठा था, क्यूँ कि अगर मैं भी रोता तो शायद पूजा फ्लाइट लंड होने तक भी चुप नहीं होती.. पूरी रात हम तीनो में से कोई नहीं सोया.. मैं बार बार जाके पूजा को देखता और बार बार पायल उसे चुप होने को कहती... दूसरे दिन की सुबह हम फ्रेश होके बाली से जकार्ता और जकार्ता से मुंबई के लिए निकल गये.. इतनी लंबी फ्लाइट, इतने घंटे के सफ़र के बाद भी पूजा का दुख कम नहीं हुआ था, उसका रोना बंद था, पर उसकी आँखें अभी भी बहुत कुछ बोल रही थी..

करीब 12 घंटे के सफ़र के बाद, हम रात के 10 बजे मुंबई लॅंड हुए.. मुंबई में डॅड ने ऑलरेडी एक कार का बंदोबस्त किया था जिससे हमे पुणे जाना था… 12 घंटे में हमने कुछ खाया नहीं, कुछ पिया नहीं.. बस घर पहुँचना था.... जैसे जैसे हम घर के नज़दीक पहुँचते, हमारे दिल की धड़कन तेज़ होती जाती.. 2 घंटे की ड्राइव के बाद जैसे ही हम घर पहुँचे, पूजा दौड़ के घर के अंदर चली गयी और जाके अपनी मा से, शन्नो से, विजय से, सब से लिपट के फुट फुट के रोने लगी.. पहली बार मेरे घर पे इतनी भीड़ मैने देखी थी..

सब लोग शोक जता रहे थे.. मेरी नज़र एक कोने से दूसरे कोने पे पड़ी तो मोम डॅड भी एक कोने में खड़े रो रहे थे… मैं तुरंत उनके पास गया और उनसे लिपट गया..

“ये क्या हो गया बेटे… हे भगवान… ऐसा क्यूँ हुआ , ऐसा क्यूँ हुआ…” मोम मुझसे लिपट के रोती हुई बोली… मैं रोना नहीं चाहता था, इसलिए मैने मोम डॅड को कस्के पकड़ा हुआ था.. शन्नो घर के बीचो बीच सफेद साड़ी पहनी हुई बैठी थी, उसके बाल बिखरे हुए थे, उसे कोई होश नहीं था कि उसके आस पास क्या हो रहा है... विजय उसे संभालने में लगा हुआ था…

पूजा अब ललिता के पास खड़ी थी और दोनो एक दूसरे को दिलासा दे रहे थे… मोम डॅड से अलग होके मैं शन्नो के पास गया... धीरे धीरे मेरे कदम शन्नो के नज़दीक पहुँच रहे थे, मैं जैसे ही शन्नो के पास पहुँचा, मुझे देख शन्नो खड़ी हो गयी..

“.... देख इसको... ये अब नहीं रही यययययी...” शन्नो एक बार फिर मेरी छाती पे मुक्के बरसा के मुझसे लिपट के रोने लगी

“आंटी.. प्लीज़ चुप हो जाइए... प्लीज़ आंटी...” मैं शन्नो को गले लगाते हुए कहने लगा... शन्नो का रोना बंद नही हो रहा था, मैने मोम को इशारा करके उन्हे ले जाने को कहा...

जैसे ही मोम शन्नो को वहाँ से ले गयी.. मेरी आँखों के सामने थी उसकी लाश.. मेरी आँखों के सामने “डॉली” की डेड बॉडी पड़ी हुई थी.. मैं ज़मीन पे अपने पैरो के बल बैठ के डॉली के चेहरे को देखने लगा.. उस वक़्त मेरे दिमाग़ में सब एक फिल्म की तरह दौड़ने लगा था... डॉली के साथ बिताए हर एक लम्हे को याद करके मेरी आँखें भारी होने लगी थी.. मेरे आँसू सूख से गये थे, दिल भारी होने के बावजूद आँखें छलक नहीं रही थी.. शायद येई अंजाम था इन सब का...

आज जो हाल डॉली का था, वो शायद ना होता अगर मैने उसे ब्लॅकमेल ना किया होता तो...पर फिर दिमाग़ में बार बार आ रहा था, कि अगर डॉली को ब्लॅकमेल ना किया होता तो भी उसका अंजाम बुरा ही होता... इसी कशमकश में मेरी पूरी रात गुज़री... पूरी रात घर पे रोना धोना चला, अगली सुबह सब लोग शमशान चले गये, मैं पूजा और ललिता घर पे ही रुके.. हम एक दूसरे से कोई बात नही कर रहे थे... डॉली मुझसे ज़्यादा पूजा और ललिता के करीब थी, ज़ाहिर है उन लोगों को दुख ज़्यादा हुआ होगा...

कुछ दिन यूही गुज़रे, अब पूजा और अंशु भी अपने घर जा चुकी थी, मैं फिर अपने रुटीन में बिज़ी हो गया... जान बुझ के मैं रोज़ ऑफीस से लेट आता क्यूँ कि मैं ज़्यादा रोना धोना नहीं देख सकता था.... मेरे इस बर्ताव को मेरी मोम ने देखा, पर उन्होने मुझे कुछ कहा नहीं... एक वीकेंड की बात है जब मैं ऑफीस के लिए निकल रहा था...मोम मेरे कमरे में आई

" बेटे, कहीं जा रहे हो"

"हां मोम...ऑफीस, कुछ काम है इसलिए," मैं तैयार होते हुए मोम से बोलने लगा

"बेटे..सिर्फ़ एक बात कहूँगी, तुम्हारा दिल कमज़ोर है मैं जानती हूँ, तुम ये माहॉल घर में नही देख सकते आइ नो..पर इससे दूर भागना इसका सल्यूशन नही है.." ये कहके मोम भी मेरे रूम से निकल गयी और छोड़ गयी मेरे दिल में कई सवाल...

 
मैं तैयार होके नीचे आया जहाँ मोम के साथ शन्नो और ललिता भी बैठे थे... शन्नो को मैं इग्नोर कर सका, पर ललिता की आँखों को नही, उसकी आँखें आज भी डॉली को ही तलाश रही थी.. मैं तुरंत ही घर के बाहर जाके गाड़ी में ऑफीस के लिए निकल गया... पूरे रास्ते में मुझे सिर्फ़ ललिता दिख रही थी..कैसा लग रहा होगा उससे...डॉली के साथ सोती थी, आज अकेली है, बिल्कुल अकेली... इस वक़्त मैं उससे और अकेला कर रहा हूँ.. ये सोचके मैने आधे रास्ते में ही गाड़ी यू टर्न ले ली और घर निकल गया... घर पहुँचते ही

"आंटी, ललिता कहाँ है, " मैने शन्नो से पूछा

"बेटे. ,वो उपर है..." मों ने जवाब दिया, आंटी गुम्सुम सी बैठी हुई थी..

मैं दौड़ के ललिता के रूम में गया, जहाँ वो अकेली बेड पे रो रही थी...

"बेटू...अभी भी रोएगी तू...इधर देख डियर, क्यूँ रोती है तू हाँ.." मैं ललिता के पास जाते हुए बोला

"क्या फरक पड़ता है भाई आपको...एक बहेन नही रही, दूसरी का होना ना होना क्या मॅटर करता है..." ललिता सूबक सूबक के बोल रही थी..

"ह्म्म..शायद ज़्यादा नही, पर एक बहेन से ज़्यादा एक दोस्त का दुख है...मेरा दोस्त ऐसे रोएगा तो मुझे भी अच्छा नही लगता ना..."

"नहीं...आप झूठ बोल रहे हो भाई...प्लीज़ भाई, डॉली क्यूँ चली गयी भाई..." ये कहके ललिता मुझे हग करके ज़्यादा रोने लगी...

करीब एक घंटा मैं ललिता के साथ बैठा, उसको काफ़ी समझाने के बाद हम दोनो नीचे आ गये... नीचे आके थोड़ा नॉर्मल हुई ललिता, जैसे ही हम कुछ बात करते, दरवाज़े पे दस्तक हुई... मोम ने दरवाज़ा खोला

"आइए इनस्पेक्टर..आज सुबह सुबह..." मोम ने सामने खड़े पोलीस वाले को पूछा..

"मोम..कौन है, खाना दीजिए, आज ललिता और में साथ खाएँगे" कहके जैसे ही मैं दरवाज़े के पास पहुँचा

"अबे साले..तू इधर कैसे, बहुत दिन बाद याद आई ना..किधर रहता है आज कल..." मैने पोलीस वाले को गले लगाते हुए बोला

"तुम लोग जानते हो एक दूसरे को.." मोम ने हमसे पूछा..

"अरे हां मोम, इनस्पेक्टर एरिसटॉटल...ये मेरे साथ स्कूल में था,..पर साले, तेरी पोस्टिंग तो बंगलोर थी.. यहाँ कैसे" मैं बहुत खुश था एरिसटॉटल को देख के..

"...कुछ ज़रूरी बात करनी है, कहीं बाहर चलें" एरिसटॉटल अपने गंभीर स्वर में बोला

"चलो..पर मेरी गाड़ी में, नही तो लोगों को कुछ उल्टा ना लगे.."

ये कहके जैसे ही हम बाहर की तरफ बढ़े

"..वेट, मैं भी चलूंगी.." पीछे से ललिता ने कहा...

"मॅम..प्लीज़ आप" एरिसटॉटल ने इतना ही कहा के मैने उसे बीच में टोका

"आओ ललिता..चलो... यार शी ईज़ आ फॅमिली, आंड मेरे हिसाब से जो बात तुम करोगे, उसमे ललिता मदद भी कर सकती है, "

इतना कहने हम तीनो घर से निकल गये और थोड़ी दूर जाके कॉफी शॉप में बैठे..

एरिसटॉटल और हम,यानी ललिता और मैं कॉफी शॉप में बैठे बातें कर रहे थे..

एरिसटॉटल:- ललिता जी, मैं आपकी भावनाओ की कदर करता हूँ, समझ सकता हूँ आप इस वक़्त किस दौर से गुज़र रही हैं, पर...

ललिता:- ये सब छोड़िए, हम काम की बात करते हैं प्लीज़...आप कुछ बताने वाले थे हमे

:- ललिता, प्लीज़ चिल मार एक सेकेंड... एरिसटॉटल, भाई पॉइंट पे आ, वक़्त की नज़ाकत को समझ... सबसे पहले बता के डेड बॉडी कहाँ मिली, और पोलीस को खबर कैसे हुई

 
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