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मेरी सेक्सी बहनें compleet

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एरिसटॉटल:- डॉली की बॉडी पोलीस को रेलवे ट्रॅक्स के पास मिली.. ये तो किस्मत है कि जब पोलीस ने बॉडी रिकवर की, उसके 5 मिनट बाद ही ट्रेन आई, नहीं तो डेड बॉडी पूरी क्रश हो जाती... बॉडी हमे ब्लॅक पोलिथीन में रॅप्ड मिली.. वहाँ की लोकल पोलीस ने जैसे ही हमे इनफॉर्म किया, वीरानी सरनेम सुनके ये केस मैने सामने से माँगा ये सोचके कि कहीं तुम्हारी फॅमिली ही होगी... और डॉली को मारने से पहले काफ़ी डराया गया था ऐज पर पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट्स...और उसके पेट में सीधे वार हुए हैं चाकू से या किसी नोकिली चीज़ से .. इंट्रेस्टिंग बात ये है कि डॉली ने बचने की बिल्कुल कोशिश नही की थी, क्यूँ कि जिस चीज़ से उसपे वार हुआ है, वो उसके पेट के आर पार हुई है, मतलब डॉली स्टॅंडिंग पोज़िशन में थी, कातिल ने ठीक बीचो बीच वार किया है, अगर डॉली बचने के लिए हिली होती तो एक दम बीच में वार करना पासिबल नही है..

एरिसटॉटल की ये बात सुनके ललिता और मेरा पसीना छूटने लगा था... 5 मिनट तक हमारी टेबल पे खामोशी छाई रही... इतने में हमारी कॉफी भी आ गयी...

एरिसटॉटल:- ललिता जी, पसीना पोछ लीजिए प्लीज़, और आपकी कॉफी...

ललिता ने अपने आँसुओं को थाम के रखा था, और हमने ये नोटीस भी कर लिया था...

"थॅंक्स... " ललिता ने एरिसटॉटल से कॉफी और टिश्यू लेते हुए कहा...

"आप आगे बोलिए प्लीज़, आइ अम फाइन" ललिता ने फाइनली .अपने आँसू पीके बोला

"जी...इसमे हैरानी की बात ये है कि कोई अपनी जान क्यूँ बचाना नहीं चाहेगा... आइ मीन आप का फॅमिली बॅकग्राउंड ईज़ सो स्ट्रॉंग, डॉली को कोई पर्सनल प्रॉब्लम्स तो नही हो सकती..फिर क्यूँ..लेकिन मेरे दिमाग़ में फिर एक रॅंडम थॉट भी आया, कहीं डॉली को पता तो नहीं था कि उसके साथ ये सब होने वाला है .. शायद उसने किसी को कोई धोखा दिया हो..या शायद...

"डॉली ऐसी बिल्कुल नही थी इनस्पेक्टर...किसी को धोखा देने वालों में से मेरी बहेन नही थी, वो इनडिपेंडेंट थी..." ललिता ने तीखे स्वर में इनस्पेक्टर को टोका

"ललिता.. प्लीज़ कंट्रोल बेटा, एरिसटॉटल, बोल आगे" मैने बीच में आके स्थिति काबू करने की कोशिश की..

"मैं ये कह रहा था कि अगर किसी को धोखा भी नही दिया डॉली ने तो उसने अपनी जान बचाने की कोशिश क्यूँ नही की... इन सब सुरतों में शक का काँटा बस एक ही तरफ घूम रहा है" एरिसटॉटल ने ज़ोर देके कहा

"किस तरफ भाई..." मैने कॉफी का सीप लेके कहा

".. अब सिर्फ़ ऐसा लगता है कि किसी घर वाले ने ही तो, डॉली का...." इतना कहके एरिसटॉटल खामोश हो गया...

"भला कोई घरवाला कौन करेगा ऐसा इनस्पेक्टर..मेरी बहेन सब को प्यारी थी, सब उसे बहुत चाहते थे, " इतना कहके ललिता की लाल आँखें बहने लगी और बेकाबू होके रोने लगी.

"ललिता, प्लीज़ चुप कर डियर..प्लीज़" मैने पानी का ग्लास देके ललिता को कहा

"ललिता जी... अगर आप को ये केस सॉल्व करना है तो प्लीज़ अपने एमोशन्स पे कंट्रोल कीजिए...और अगर नही कर सकती तो प्लीज़ जाइए, मैं काफ़ी देर से अपने गुस्से को दबाए बैठा हूँ और आप हैं कि कुछ सुनने के लिए तैयार ही नहीं हैं.." एरिसटॉटल ने भी अपने ताव में आके कहा

एरिसटॉटल का गुस्सा मेरे लिए नया नहीं था, वो जब तक कंट्रोल करता तब तक ठीक है, बट जब उसका कंट्रोल टूटेगा तो किसी की खैर नहीं., मैं चुप करके ये सब सुन रहा था...ललिता और एरिसटॉटल दोनो खामोश हो चुके थे, खामोशी को तोड़ते हुए मैने पूछा

"अब क्या करना है आगे, अगर तुमको लगता है कि घरवाला कोई है, तो बेफ़िक्र रहो, हमारी तरफ से तुम्हे पूरा को-ओपरेशन मिलेगा.." मैने एरिसटॉटल को आश्वासन दिया

"वो मैं जानता हूँ , इसलिए ये केस मैने सामने से माँगा है" एरिसटॉटल अब रिलॅक्स हो गया था

"इनस्पेक्टर... आइ अम सॉरी...आप जो कहेंगे, मैं वो करूँगी, बस डॉली के कातिल तक पहुँचना है मुझे.." ललिता ने कड़क आवाज़ में कहा...

"ललिता, आप चिंता ना करें, डॉली के केस में हमे उपर से भी दबाव है, वीरानी खानदान की बेटी की मौत, छोटी बात नही है..ये तो गनीमत है कि राज के फादर यानी कि इंदर जी ने अब तक कुछ नही किया, नही तो मैं यहाँ बैठ भी नहीं पाता" एरिसटॉटल ने ललिता को कहा..

"इसमे अंकल क्या कर सकते हैं..मैं कुछ समझी नहीं..." ललिता ने आश्चर्य में आके पूछा..

इससे पहले के एरिसटॉटल कुछ बोलता, मैने ललिता को कहा "ललिता, आइ विल टेल यू दट..डॉन'ट वरी"

"एक और बात.. ये देखिए, ये जानते हैं किसकी है... " एरिसटॉटल ने एक वाच दिखाते हुए कहा..

उसके हाथ में एक वाच थी, जिसे पकड़ने के लिए जैसे ही मैने हाथ आगे बढ़ाया "ऊह..., रुमाल में लो प्लीज़, ये इनस्पेक्षन में है" एरिसटॉटल ने कहा

"ह्यूब्लोट क्लॅसिक फ्यूषन हॉट... सटडेड वित 1185 बॉगेट डाइमंड्स, वर्ल्ड्स मोस्ट एक्सपेन्सिव ., नोट अवेलबल इन इंडिया.. इसकी इंटरनॅशनल मार्केट में प्राइस है अराउंड 1 मिलियन डॉलर्स.. शायद 5 करोड़ रुपीज़.." ललिता ने हमे चौंकाते हुए कहा...

ललिता की ये बात सुनके मैं तो हैरान था ही, पर एरिसटॉटल ने सिर्फ़ एक स्माइल के साथ कहा..

"यू आर राइट ललिता.."

"पर ये आप हमे क्यूँ दिखा रहे हैं.." ललिता ने फिर एरिसटॉटल को पूछा..

"वो इसलिए ललिता... आइ मीन ललिता जी, ये . उस पोलिथीन से मिली है जिसमे डॉली की बॉडी रॅप्ड थी.." एरिसटॉटल ने ललिता को देखते हुए कहा.....

"यू मीन, ये . मर्डरर की है.." मैने सीधा सवाल किया

"हो सकता है, पर ये किसकी है, वो जानना बहुत मुश्किल है" एरिसटॉटल ने जवाब में कहा

 


"जी, बिल्कुल मुश्किल नही है, ये वाच की येई तो ख़ासियत है..दिस ईज़ आ स्विस ... इससे आप कंपनी के हेडक्वॉर्टर्स ज़ुरी ले जाइए, ह्यूब्लोट की हर वाच की मशीन पे एक यूनीक नंबर होता है, जब कंपनी अपने डीलर्स या अपने स्टोर पे वाच भेजती है तो वो उसका रेकॉर्ड रखती है... इस तरह हम ये जान पाएँगे के ये वाच कहाँ से ली हुई है, और एक बार ये पता चल गया तो फिर आसानी से किसके नाम पे सेल हुई है वो भी मिल जाएगा, क्यूँ कि ये वॉचस बिल के बिना नहीं बिकती... इन वर्स्ट केस हमारी किस्मत खराब हुई तो बिल ग़लत नेम से बना होगा, बट बना ज़रूर होगा" ललिता ने बहुत कॉन्फिडेंट्ली अपनी बात कही..

"आइ आम इंप्रेस्ड स्वीट हार्ट...तो एरिसटॉटल भाई, स्विट्ज़र्लॅंड जाओ, और इसके लिए जो भी पर्मिशन चाहिए, मैं डॅड से बात कर लूँगा.." मैने माहॉल को थोड़ा हल्का करने के लिए कहा

", आइ विल अड्वाइस यू अंकल को ना बोलें हम. क्यूँ कि जैसा इनस्पेक्टर ने कहा, घर वालो पे शक़ है इनको, मैं ये नही कह रही कि अंकल शक़ के दायरे में हैं, बट उनके थ्रू अगर सही मुजरिम को पता चला तो प्राब्लम हो सकती है हमारे लिए.." ललिता ने सावधान होके कहा..

"शी ईज़ राइट , और रही मेरे जाने की बात तो मैं कमिशनर सर से बात कर लूँगा, आइ एम शुवर इंदर वीरानी का नाम ही काफ़ी है, उनको फोन करने की नो नीड.. और इंटररपोल की हेल्प भी ले लूँगा, तट विल बी मच ईज़ी..." एरिसटॉटल ने ललिता की बात से सहमति जताई..

"ओके...जैसा आप समझो ठीक...अब चलें, तुम कब जाओगे वहाँ.." मैने एरिसटॉटल से पूछा..

"तीन दिन में, इंटररपोल के नेम से वीसा का नो प्राब्लम.. " एरिसटॉटल ने बड़ी आसानी से जवाब दिया...

हम जैसे ही बिल भरके बाहर आए,

"एक्सक्यूस मी इनस्पेक्टर...सॉरी, मैं कुछ ज़्यादा गुस्सा हो रही थी आप पे..." ललिता ने एरिसटॉटल को कहा

"इट्स ओके ललिता जी...इनफॅक्ट आप आई तो हमे बहुत हेल्प मिली...आप ने जो आइडिया दिया दट ईज़ प्राइसलेस...आप को तो पोलीस में होना चाहिए..."

"एरिसटॉटल भाई...शी ईज़ माइ सिस, चलो अब बॅक टू बिज़्नेस...तुम वहाँ से होके आओ, आइ विल गिव यू एनफ स्पेस टू मीट" ये कहके मैं दोनो को अपनी गाड़ी में लाया और घर पहुँचा...

घर आते ही एरिसटॉटल अपनी जीप में निकला, और मैं अपने रूम में.. करीब 15 मिनट बाद ललिता रूम मे, आई, और दरवाज़ा बंद करके बोली

"टेल मी..व्हाट ईज़ पोलिटिकल कनेक्षन हियर..नाउ...."

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"चियर्स !!!! उम्म्म.... लव्ली.... दारू पीने का असली मज़ा तो आज आ रहा है मोम.. दम घुट रहा था मेरा उस घर में... आज जाके चेन की साँस ली है वापस अपने घर आके.." पूजा ने अपनी माँ से विस्की का ग्लास छलकाते हुए कहा..

अंशु और पूजा एक सोफे पे बैठ के दारू पे दारू पिए जा रहे थे, जहाँ अंशु टांक टॉप और जीन्स में थी जिसमे से उसके चुचों का उभार सॉफ दिख रहा था, वहीं पूजा अध नंगी हालत में थी, कहने को तो उसने भी टॉप पहना था, पर वो टॉप सिर्फ़ उसके चुचों को ढक रहा था, जहाँ उसके चुचे ख़तम हुए, वहीं से उसका टॉप ख़तम, एक हाथ उपर उठाने पर पूजा के चुचे सॉफ नज़र आने लगते, और नीचे उसने सिर्फ़ एक शॉर्ट पहना था जो केवल उसने अपनी चूत और चुतडो को ढकने के लिए पहना था... दोनो मा बेटी को इस हालत में देख कोई भी कह सकता है कि दोनो एक नंबर की ऐय्याश औरतें हैं..

"ह्म्म्मं बेटी, तू सही कह रही है, उस घर में दम के साथ चूत भी घुट रही थी, कितने दिन हो गये एक मूसल लंड लिए, आज आएगा एक जिगलो, जो मेरी और मेरी चूत की प्यास को भुजाएगा..अब जाके राहत मिलेगी..." अंशु सिगर्रेट जलाती हुई बोली

"हां माँ, वो तो है, तुम्हारे साथ मेरी प्यास का भी ख़याल रखो, मेरी भी चूत तो सूख गयी है, देखो इसे" कहके पूजा ने अपना शॉर्ट नीचे किया और अंशु का एक हाथ अपनी चूत पे रखती हुई बोली

"उम्म्म...तू तो राज का लंड लेके आई है ना मेरी रंडी बिटिया, फिर काहे की प्यास " अंशु का एक हाथ अब भी पूजा की चूत पे था, जब कि दूसरे हाथ से सिगर्रेट और दारू अब भी जारी था

"हां माँ, पर ये चूत माँगे मोर..दिन में तीन बार तो लंड चाहिए ही ना, आपने चुड़क्कड़ जो बना रखा है अपने जैसा.." कहके पूजा अब धीरे धीरे अपनी माँ के हाथ से अपनी चूत रगड़ रही थी,

"आहह....सीईईईईई..... ये दो ना माँ," कहके पूजा ने अंशु से सिगर्रेट ले ली और सुलगाने लगी...

अंशु के दोनो हाथ फ्री होते ही उसने दोनो हाथ से पूजा की चूत खोली और एक उंगली अंदर घुस्सा दी...

"आहह माआ....उम्म्म्म... शन्नो मासी भी होती तो कितना मज़ा आता आअहह..." पूजा सिसकारियाँ लेते हुए बोली...

"नाम मत ले उस रांड़ का, उसकी बेटी ने धोखा दिया तभी वो मरी, उसकी चूत की खुजली हमारे पूरे प्लान को बर्बाद कर देती..अच्छा हुआ मार दी गयी वो, एक हिस्सेदार तो कम हुआ अब...शन्नो को अकल नही है, अब ये सब ना करके डॉली वापस थोड़ी आ जाएगी..." कहके अंशु अब धीरे धीरे दो उंगलियाँ पूजा की चूत के अंदर घुसा रही थी

"उम्म्म...आहह....छोड़ दो उसको, पर राज का लंड है ही ऐसा माँ आहह..एक बार उसकी सवारी करो तो जन्नत मिल जाती है आहह...उम्म्म्ममममम" पूजा अब अपने टॉप को उतार के अपने चुचे दबाती हुई बोली,

"हाए मेरा हीरो आहह मत याद दिला उसका लंड, जब चलता है तो ऐसा लगता है जैसे हंटर चल रहा हो..उसके लंड को याद करते ही चूत में चीटियाँ रेंगने लगती हैं आहह..देख ज़रा" ये कहके अंशु ने पूजा का हाथ अपनी चूत पे रखा... पूजा देरी ना करते हुए खड़ी हुई और अपनी माँ की जीन्स उतारने लगी... उधर अंशु ने भी अपनी बेटी का और अपना टॉप उतार फेंका...दोनो माँ बेटियाँ नग्न अवस्था में किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी, पूजा की चिकनी चूत के सामने अंशु की हल्के बालों वाली चूत क़यामत ढा रही थी.दोनो के चुचे एक दूसरे से लड़ रहे थे, दोनो मा बेटियों के होंठ एक दूसरे से मिलने वाले थे तभी डोरबेल बजी..

"उफ़फ्फ़...माँ जाके देखो ना प्लीज़ कौन है" पूजा ने अंशु से अलग होते हुए कहा.. अंशु पूजा से अलग होके दरवाज़े की तरफ नंगी ही बढ़ी, पीप होल से जैसे ही उसने बाहर देखा, उसके चेहरे पे एक बड़ी मुस्कान सी फेल गयी... अंशु ने झट से दरवाज़ा खोला

"आइए, आइए..कितने दिन तड़पाते हो आप तो.." अंशु ने दरवाज़ा बंद किया और अंदर आते मर्द से लिपट गयी...

"उम्म्म आहह मेरी रानी, कैसी हो तुम"

"लंड के लिए तड़प रही थी, अब प्यास बुझाओ जल्दी से..." इतना कहके अंशु उस आदमी के साथ अंदर वाले रूम में गई जहाँ पूजा नंगी पड़ी हुई दारू और सिगर्रेट का मज़ा ले रही थी

"अरे वाह, यहाँ तो सेलेब्रेशन चल रहा है, किस बात की खुशी है इतनी हाँ" आदमी ने अजीब सी हँसी में कहा

उसकी आवाज़ सुनके पूजा जो नंगी पड़ी सोफे पे आँखें बंद करके बैठी हुई थी, उसने आँखें खोल के एक नज़र देखा तो उठ के उस आदमी से गले लग गयी

“उम्म्म.. कितना तड़पाते हो आप, बिल्कुल भी ख़याल नहीं है आपको… वैसे खुशी की बात ही तो है, डॉली मर गयी है, हमारा हिस्सा बढ़ जाएगा अब, और वो तो एक दम पागल सी हो गयी थी, उसकी वजह से पूरा प्लान टूट जाता..” पूजा बेतहाशा उस आदमी को चूमे जा रही थी..

 


पूजा और अंशु को नंगा देख उस आदमी का लंड पॅंट के अंदर तंबू बनाने लगा था, जिसे अंशु ने नोटीस किया, वो आगे आके नीचे झुकी और झट से उसको नंगा करके उसका लंड मूह में लेके चूसने लगी..

“उम्म्म्म.. आहहह सीईईई गुणन्ं गन…. कितना तडपी हूँ मैं इसके लिए अहहहः… अब ज़रा मेरे साथ अपनी बेटी का भी ख़याल रखो, इसकी चूत भी लंड मांगती है अब तो…: ये कहके वापस अंशु अपने पति का लंड चूसने में लग गयी..

“हाँ हाँ.. क्यूँ नहीं, मेरी बेटी का भी ख़याल मुझे ही रखना है, ऐसी जवान चूत तो अब हमे कहाँ मिलेगी, ये तो अब बस उस राज के बिस्तर को गरम करेगी…” ये कहके पूजा का पिता भी उपर से नंगा हो गया और अपने बेटी के होंठों को चूसने लगा

“उम्म्म आअहह…. म्म मवाअहह यूम्म आआहहहह.. सक देम हार्ड डॅडी आहहह…” पूजा और उसके पिता चुंबन में बिज़ी हो गये जब कि अंशु नीचे झुक के अपने पति के लंड को चूस रही थी और अपनी एक उंगली से अपनी चूत को रगड़ रही थी…

“आहह… उम्म्म गुणन्ं गुणन्ञनाआहह स…. उम्म्म्म क्या लंड है आपका मेरे आ आहहः… उम्म्म गुणन्ञन्… गुणन्ं गन गन… “ अंशु लंड चूस्ते चूस्ते बीच में बोल रही थी..

“आहह म्व्वहहह.. डॅड आपके होंठ कितने रसीले हैं आहमम्म्मम ममवाहह इम्म्म ममम्म आहह…”

“मेरे होंठों से ज़्यादा रस मेरे लंड में है मेरी बिटिया रानी… ज़रा वो भी तो चख के देखो, मज़ा आ जाएगा”

अपने बाप की ये बात सुनके पूजा नीचे जाके बैठ गयी और दोनो मा बेटी लंड को शेअर करने लगी… एक पत्नी की जीभ और बेटी की जीभ, इन दोनो से पूजा के बाप का मज़ा बढ़ता जा रहा था.. दोनो मा बेटी बारी बारी लंड को चूस्ति रहती,

पूजा के बाप के मज़े का ठिकाना नहीं था, वो बस मज़े में सिसकारियाँ भर रहा था.. नीचे अंशु और पूजा लंड को चूस के फिर टट्टों पे हमला करती.. दर्द और मज़ा पूजा के बाप के चेहरे पे सॉफ झलक रहा था.. लंड को चूस चूस के उसका सूपड़ा लाल हो चुका था लेकिन माँ बेटी की प्यास भुज ही नहीं रही थी..

करीब 10 मिनट अपना लंड चुसवाने के बाद, पूजा के बाप ने पूजा को बालों से पकड़ के उठाया, और उठा के फिर उसके होंठों का रस चूसने लगा

"उम्म्म...डेडी, फक मी ना प्लीज़..अह्ह्ह्ह..." पूजा अपनी चूत में उंगली डाल के खुद को चोद रही थी, पूजा की गुज़ारिश सुनके उसकी मा ने लंड छोड़ा, और उठके पूजा को कुतिया की पोज़िशन में कर दिया... जैसे ही पूजा डॉगी पोज़िशन में आई, अंशु ने उसकी चूत पे काफ़ी सारा थूक लगाया, और अपने हाथ से उसके पति का लंड उसकी चूत पे सेट किया

"चोद दो आज इसको...मेरी खुजली तो मैं बुझा लूँगी किसी और के लंड से.." अंशु के ये शब्द सुनके पूजा के बाप का जैसे हैवान जाग गया हो और एक ही झटके में अपना लंड पूजा की चूत में घुसा डाला

"आहह ओह्ह्ह्ह...यॅ डॅड फक मी हार्ड ना आहह...यॅ...ओह यॅ आइ आम युवर स्लट डेडी, ओह्ह्ह आहह, स्पॅंक माइ आस पापा आहह...और चोदो ना अपनी बिटिया को ह्म्म्म....आहह..." ये कहके पूजा उछल उछल के अपने बाप का लंड अंदर लिए जा रही थी, एर उसका बाप किसी मशीन की तरह उसकी चूत मारे जा रहा था

"आहह...ह्म्म्मच और चोदो ना मेरी बेटी को, आहह...बेटी चोद भोसड़ी के आहह...और चोद माँ आहह...कहके अंशु आगे जाके पूजा की चुचियों को मूह में लेने लगी... पूजा ने तो गिनती ही नहीं रखी थी कि वो कितनी बार झड़ी है, उसके बाप के लंड का हमला और उसकी मा के होंठ , इस दोहरे हमले से पूजा फिर झाड़ गयी... अब पूजा में हिम्मत नहीं थी और, वो बेजान लाश की तरह चुद रही थी...

10 मिनट के बाद, उसके बाप ने अपना पूरा रस पूजा की चूत में ही छोड़ दिया... पूजा और उसका बाप थक हार के बेड पे लेट गये , जिसे देख अंशु बोली

"इतनी जल्दी कैसे, अभी तो मेरी चूत बाकी है" अंशु पूजा के पास आके फिर उसको गरम करने लगी..

"वो सब बाद में, पहले एक मेसेज है तुम्हारे लिए...तुम्हे अभी जाके राज और इस रंडी की शादी की तारीख तय करनी है..बॉस ने ऑर्डर दिया है" पूजा के बाप ने अंशु से कहा...

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"..प्लीज़ टेल मी , अंकल का पोलिटिकल इन्फ्लुयेन्स कब से बढ़ने लगा... आइ वान्ट टू नो इट नाउ.." ललिता मेरे कमरे में खड़ी मुझसे जवाब माँग रही थी

"ललिता, प्लीज़ सिट डाउन... बताता हूँ" मैने ललिता को ठंडा करने का सोचा...

ललिता मेरे सामने बैठ गयी, पर उसकी आँखें खामोश नहीं थी, वो तो अब भी जवाब माँग रही थी... मैने दरवाज़ा बंद किया और बोला

"ललिता, अभी पिछले दो साल से पापा को कुछ गवर्नमेंट ऑर्डर्स मिले हैं, जो भी गवर्नमेंट स्टाफ की यूनिफॉर्म्स हैं, उनके लिए फॅब्रिक हमने सप्लाइ करना स्टार्ट किया था... बिकॉज़ पापा ने बहुत ही चीप रेट पे देना स्टार्ट किया, उनको ऑर्डर्स बढ़ते गये और प्रॉफिट बढ़ने लगा. मैने अभी कुछ दिन पहले ही फाइनान्षियल स्टेट्मेंट्स चेक किए हमारे ऑडिटेड, प्रॉफिट के साथ पापा के पर्सनल वेल्त में भी 5 टाइम्स इनक्रिमेंट हुआ है. फॅक्टरी की कॉस्ट शीट देख के पता चला कि जो भी ऑर्डर्स मिले पापा ने पूरा कच्चा माल वो बाहर से खरीदा था, कह सकती हो कि इसमे पापा ने केवल ट्रेडिंग की…

क्यूँ कि अपना बनाया हुआ माल जितने रेट पे कॉस्टिंग है, उससे कहीं ज़्यादा कम दाम में तो पापा ने फॅब्रिक सप्लाइ किया है… और अंदर गया तो पता चला कि पापा ने पूरा का पूरा कच्चा माल एक लॉट में वेस्ट से बनाए हुए कपड़े से लिया था जिसकी वजह से उनका प्रॉफिट मार्जिन मोर दॅन ट्रिपल हुआ… अब इसकी वजह से जो उनके कॉंपिटिटर्स हैं, उन्होने पापा को मेंटली टॉर्चर करना स्टार्ट किया, आए दिन फॅक्टरी पे वर्कर स्ट्राइक्स, आए दिन पापा को रोज़ धमकी भरे कॉल्स आते हैं.. उन्होने मुझसे इसका ज़िक्र नहीं किया, बट हमारे सीए, जो पापा के फ्रेंड हैं, उन्होने मुझे बताया था… इन सब के चलते यहाँ के एमएलए से पापा ने बात की और यहाँ के एमएलए ने उन्हे सजेस्ट किया, कि जिस जिस पे शक है उसके खिलाफ एफआइआर लॉड्ज करें, ही विल पर्सनली अब्ज़र्व दिस केस..

अब ये एक कोयिन्सिडेन्स ही है कि पापा के एफआइआर लॉड्ज करते ही डॉली का मर्डर हुआ है.. सो पोलीस फिलहाल इसे बिज़्नेस रिवेंज ही समझ रही है और एरस्टोटल के हिसाब से हर 12 घंटे में वो एमएलए उनसे स्टेटस माँगता है…” मैने इतना कहा कि मुझे बीच में ललिता ने टोका

“पोलीस को कैसे पता होगा भाई, कि फॅमिली में ही एक प्लॅनिंग चल रही है… अंकल आंटी को मारने की, पोलीस को कैसे पता चलेगा भाई कि मेरे मम्मी पापा और दूसरे मिलके आप सब के खिलाफ प्लॅनिंग कर रहे हैं… पर भाई, मुझे एक डाउट है..” ललिता ने फिर सवाल किया

“ अगर अंकल की पर्सनल वेल्त इनक्रीस है, तो फिर जब मोम और डॅड ने मुझे और डॉली को इस प्लान के बारे में बताया तो फिगर इतना कम क्यूँ था.. आइ मीन उन्होने हमे बताया था इस प्लान में टोटल बेनेफिट उनका 35 करोड़ है… तो अगर आपके हिसाब से वेल्त इनक्रीस हुई है तो फिर ये फिगर…” ललिता ने केवल इतना ही कहा मैने बीच में उसे टोकते हुए कहा

“स्वीट हार्ट… इट्स 265 करोड़… डॅड का नेट वर्त ईज़ 265 करोड़… जिनमे ये घर, लोनवाला आंबी वॅली में 2 बंगलोस.. दो फार्म हाउसस पनवेल में, कार्स, स्टॉक्स, इनवेस्टमेंट्स, क्लब मेंबरशिप, कॅश आंड बॅंक बॅलेन्स, इन्षुरेन्स पॉलिसीस.. ये सब कुछ चीज़ें है व्हिच आर ऑफ हाइ वॅल्यू… मम्मी की गोल्ड ज्यूयलरी भी है, मेरे नाम के बॅंक अकाउंट्स में भी उनका कॅश है…

आंड फॅक्टरीस का नतिंग इंक्लूडेड… हां वो आंबी वॅली वाले बंगलोस डॅड ने तेरे और डॉली के नाम पे लिए हैं, बट ओनरशिप ट्रान्स्फर नहीं हुई अब तक, सो वो भी मैं इस में इंक्लूड कर रहा हूँ… तो जिसका मास्टर प्लान है ये, उसने बाकी लोगों को झूठ कहा है कि 35 करोड़ की वेल्त हैं.. अगर किसी को ये फिगर नहीं पता, इसका मतलब इस प्लान को बनाने वाला दूसरे लोगों को भी धोखा ही दे रहा है..” मैने एक साँस में ललिता को बोल दिया..

“हमारे नाम पे बंगलोस हैं…? अंकल ने कभी कहा नहीं, और एक डॅड हैं, जिन्हे लग रहा है कि अंकल उन्हे अच्छी तरह ट्रीट नहीं करते.. शायद इसलिए वो ये सब में इन्वॉल्व्ड हैं…. और एक आप हो भाई… जिसको इतना सब पता होने के बावजूद भी मुझसे आप अच्छी तरह बिहेव कर रहे हो… आम सो सॉरी भाई. मेरे मोम डॅड की वजह से ये सब कचरा पड़ा हुआ है… प्लीज़ फर्गिव मी ऑन देयर बिहाफ…” ललिता कहते कहते फिर रोने लगी…

“हे हे स्वीट हार्ट.. प्लीज़ रो मत… तेरा पछतावा उसी दिन हो गया था जिस दिन से तूने मुझे प्रॉमिस किया था कि तू अपने मोम डॅड का साथ नहीं देगी… आंड तू मेरी इतनी हेल्प कर रही है, उससे ज़्यादा कोई और भी नहीं करता डियर.. मैं जब भी पूजा के साथ था, तेरे ही एसएमएस तो थे, जो मुझे मदद करते थे… तेरे ही कारण मुझे पता चला कि पायल भी इन सब में शामिल है, तेरे ही कारण मुझे पता चला कि पायल की मोम भी शामिल है इन सब में, बट शी ईज़ नोट दा आक्चुयल पर्सन बिहाइंड दिस… “ ये कहके मैने पायल को अपने से जोड़ लिया और बहुत टाइट हग करने लगा…. ललिता से गले मिलके मुझे एहसास हुआ कि क्या बीट रही है इस्पे डॉली के जाने के बाद.. ललिता ने खुद को मुझ पर एक दम ढीला छोड़ दिया था,

“ अब प्लीज़ रिलॅक्स स्वीट हार्ट… ह्म्म्मि, हम बस करीब ही हैं ये जानने में कि इन सब के पीछे आक्चुयल में कौन है..” मैने ललिता के फोर्हेड को चूमते हुए कहा..

“ह्म्म्मप.. ठीक है भाई… वैसे एरिसटॉटल के साथ मैं भी ज़ुरी जाउ आप पर्मिट करो तो..” ललिता ने मुझसे पूछा

“क्यूँ… थोड़ा टाइम वेट कर, एरिसटॉटल और तुझे हनिमून पे वहीं भेजूँगा..” मैने मज़ाक में कहा

 


‘ओह शट अप भाई… ये बात कहाँ से आई.. और वैसे भी अभी मेरी शादी में टाइम है…. फिलहाल मैने इसके लिए पूछा के शायद वहाँ से ज़्यादा इन्फ़ॉर्मेशन निकाल सकूँ मैं..:

“नहीं डियर, एरिसटॉटल को तो इंटररपोल के नाम से वीसा जल्दी मिलेगा, पर तेरे तो रेग्युलर टाइम लगेगा ना, आंड बिसाइड्स एरिसटॉटल एक इंटेलिजेंट बंदा है.. वो अकेला हॅंडल कर लेगा ये सब, आंड तेरी मोम को पता चला तो फिर तेरे साथ कुछ ग़लत ना हो.. मैं रिस्क नहीं लूँगा अब कुछ.. शायद डॉली से भी मुझे सब बातें कर लेनी चाहिए थी, पर किस्मत ही खराब है शायद अपनी… बट फाइनल नाउ , तू नहीं जा रही कहीं. यहीं पे रह तू..”

“पर मुझे एक बात बता, तुझे कैसे पता चला इतना कुछ उस वाच के बारे में.. आइ मीन, हमने तो कभी नहीं सोचा के इतनी एक्सपेन्सिव वाच हो भी सकती है, मेरे हिसाब से राडो आंड रोलेक्स आर दा एक्सपेन्सिव वॉचस, पर ये कौन कंपनी है” मैने आश्चर्य दिखा के पूछा

“ आइ डॉन’ट नो भाई… अभी एक या दो महीने पहले की बात है, मैं एक पार्टी में गयी थी, याद नहीं फॅमिली फंक्षन था या कुछ और, पर वहाँ किसी के हाथ में देखी थी… मैने उस वाच की डीटेल्स पूछ के उसके बारे में नेट पे ज़्यादा पढ़ लिया..” ललिता ने सवालिया नज़रों से ये कहा..

“ललिता, याद कर, किसके हाथ में देखी थी ये ... थोड़ा ज़ोर डाल, शायद इससे कुछ क्लू मिले, इससे बहुत हेल्प होगी हमे..” अब मैं ललिता के उपर नाचने लगा था..

“वेट भाई… याद तो करने दो, आंड याद आएगा तो आपको ही बताऊँगी, फिलहाल मुझे कुछ ख़याल नहीं आ रहा…. ये भी याद नहीं आ रहा कि वो फॅमिली फंक्षन था या कुछ और.. और वैसे भी सेम वाच दो अलग अलग आदमियों की हो सकती है ना.. इसलिए चिल, एरिसटॉटल को जाने दो ज़ुरी, वहाँ से वी विल गेट ऑल दा इन्फ़ॉर्मेशन..” ललिता ने इतना ही कहा कि नीचे से कुछ जानी पहचानी आवाज़ें आने लगी…

"बहेन जी.. नमस्ते, क्या हाल है आपका..." नीचे आई अंशु ने मोम से कहा.. अंशु के साथ पूजा भी थी... इन दोनो के लिए मेरे दिमाग़ में जो भी नफ़रत थी, पूजा को देख के एक सेकेंड के लिए सब गायब हो जाती थी.. पूजा लग ही ऐसी रही थी, वाइट चूड़ीदार में एक दम परी की तरह. उसके बाल बँधे हुए थे इस बार बट लूज छोड़ रखे थे, कान में झुमके लटकते हुए, उसकी गर्दन, उसका फिगर.. हाए भगवान... इसे दुश्मन क्यूँ बनाया तूने, ये सब सोचते हुए ललिता और मैं सीडीयाँ ही उतर रहे थे कि मैने एक स्टेप मिस कर दिया जिसकी वजह से स्लिप होते होते रह गया....

"उः ओह भाई... ध्यान से, क्या कर रहे हो.." ललिता ने मुझे संभालते हुए कहा..

"सॉरी.. वो यार.." मैं इतना ही कहा कि फिर ललिता ने आँखें दिखा के कहा

"दिमाग़ ठीक है आपका, वो ऐसा निकली है, फिर भी आप उसके लिए पागल हो... ध्यान से चलो अब, नहीं तो मैं आपको छोड़ दूँगी, फिर करते रहना ये सब अकेले, समझे" ललिता ने गुस्सा दिखाते कहा

'अरे बेटे ध्यान से.. मोच तो नहीं आई तुम्हे..." मोम ने हमे देखते हुए कहा

"नहीं मोम... आइ अम फाइन... आंड तुम गुस्सा कम करो समझी, मैं कंट्रोल करता हूँ.." मैने ललिता से कहा और हम नीचे लिविंग रूम में आ गये जहाँ मोम के साथ शन्नो, अंशु और पूजा बैठे थे...

"और दीदी... आप कैसे हो, " अंशु ने शन्नो से पूछा...

"ह्म्म्म ... ठीक हूँ..." शन्नो ने बस यही जवाब दिया

"ललिता बेटी, इधर आओ.. तुम ठीक हो ना, " अंशु ने ललिता को देखते हुए कहा..

"आइ अम फाइन मासी... आप बहुत दिनो बाद आए, जिस वक़्त मोम को सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी आपकी, आप उसी वक़्त चले गये, दिस ईज़ नोट फेर मासी..." ललिता ने गुस्से में अंशु को जवाब दिया

"बेटे, आइ नो, इसलिए तो यहाँ आई हूँ.. मैं दीदी को अपने साथ अपने घर ले जाना चाहती हूँ... इनफॅक्ट तुम भी हमारे साथ चलो तो बहुत अच्छा लगेगा हमे.. बहेन जी, आप की पर्मिशन हो तो मैं दीदी को अपने साथ ले जाउ कुछ दिन..." अंशु ने ललिता के साथ मोम से भी कहा

"जी इसमे इजाज़त कैसी... बेशक आप इन्हे ले जाइए, शायद शन्नो को माहॉल बदलने से कुछ फ़ायदा मिले... और ललिता बेटे, तुम भी जाओ मोम के साथ, उनको ज़रूरत पड़ेगी..." मोम ने ललिता से कहा...

ललिता अब भी कन्फ्यूषन में थी कि वो जाए कि नहीं, मैने तुरंत बाथरूम जाने के बहाने दूर जाके ललिता को एसएमएस किया

"प्लीज़ डोंट गो... आइ नो व्हाट विल हॅपन देअर.."

ललिता ने जवाब दिया

" आइ नो.. विल नोट गो देअर.. आंड मोम, शी हैज वेरी मच बिकम आ पार्ट ऑफ इट नाउ.. "

कुछ सेकेंड्स में फिर मैं वहीं जाके बैठ गया, जहाँ मोम और अंशु बातें कर रहे थे, ललिता और अंशु ललिता के कमरे में जा चुके थे, और शन्नो भी अपने कमरे में निकल गयी थी...

 


"अच्छा बहेन जी.. एक और काम की बात है आपसे, ये वक़्त ठीक नहीं है उसके लिए शायद, पर मैं राज और पूजा की शादी की तारीख के बारे में सोच रही थी.. आपको कोई दिक्कत नहीं हो तो" अंशु ने अपना पासा फेंका

"अंशु जी, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, पर घर का माहॉल ऐसा है, राज के पापा भी नहीं मानेंगे, और पूजा के पापा भी तो बाहर हैं, उनके बिना हम तारीख कैसे तय कर सकते हैं.." मोम ने पापा का नाम यूज़ करके बात को टालना चाहा

"बहेन जी, मैं कब बोल रही हूँ कि शादी अभी करनी है... पूजा के पापा कुछ दिनो में आ जाएँगे, और मैने उन्हे कहा हुआ इस रिश्ते के बारे में, उन्हे कोई दिक्कत नहीं है, इनफॅक्ट इसकी वजह से तो वो अपनी बिज़्नेस ट्रिप आधे में छोड़ के आने वाले हैं ... और भाई साहब की बात रही तो मुझे यकीन है घर में खुशियाँ आएँगी तो वो भी मना नहीं करेंगे..." अंशु अपनी बात पे ज़ोर डालने लगी...

"वो ठीक है, पर हमने रिंग सेरेमनी भी नहीं की अब तक.. डाइरेक्ट शादी कैसे करेंगे.."

"रिंग सेरेमनी तो हम शादी के दो दिन पहले ही कर लेंगे.... उसमे कोई परेशानी नहीं है.. बहेन जी, हम लड़की वाले हैं, आपसे ज़्यादा तैयारियाँ हमे करनी हैं, साथ ही लड़की का भी ख़याल रखना है.. अभी राज और पूजा इंडोनेषिया होके आए, अगर देरी करेंगे तो आप समझ सकती हैं ना कि कैसी कैसी बातें हो सकती हैं.. इसलिए हम चाहते हैं जल्द से जल्द शादी हो..."

अंशु के इस मास्टर स्ट्रोक से मोम भी बीट हो गयी, और उन्होने जवाब दिया... " जी बिल्कुल, पूजा अब हमारी भी बेटी है, उसका ध्यान हमे भी रखना है, आप फिकर ना करें, मैं आज ही राज के पापा से बात करती हूँ, और डेट डिसाइड कर लेते हैं..

जहाँ मेरी गान्ड फट रही थी, वहीं अंशु अपनी गान्ड मटकाती हुई शन्नो के पास चली गयी, खुश खबरी सुनाने... क्या घंटा खुश खबरी, मैं इन सब के बीच में ऐसे फसा हुआ था और अब शादी, शादी की डेट ईज़ लाइक हिट्टिंग दा नहिल ऑन दा हेड... मेरी उमीदों पे, इट वाज़ लीके "हिट्टिंग थे लास्ट नहिल ओं थे कॉफ्फिंन..... मुझे इन सब विचारों में देख मों बोली..

" बेटे.. तुम खुश तो हो ना पूजा के साथ, तुम पसंद करते हो ना उसे..."

मेरे मूह से जवाब ही नहीं निकल रहा था... करीब 1 मिनट तक मैं खामोश ही रहा, मोम मुझे घुरे जा रही थी.... मेरा मोबाइल फिर से बजा और ललिता ने एसएमएस किया था...

"हां बोल दो.. मेरी गॅरेंटी है पूजा तुम्हारी बीवी नहीं बनेगी..."

मैने नज़र उठा कि देखा तो पूजा और ललिता सामने सीडीयों से नीचे उतर रहे थे.... ललिता को देख मेरी स्माइल निकल गयी और मैने जवाब दिया..

"हां मोम... शी ईज़ पर्फेक्ट.. " ये सुनके मोम मुझसे गले लग गयी और एमोशनल होके फिर अपने कमरे में चली गयी...

"आहें आहें... क्या हुआ, शादी मुबारक हो आप दोनो को..." ललिता ने मुझे और पूजा को साथ खड़े करते हुए कहा..

"क्या ललिता, चल पागल.. " पूजा ने शरमाने का नाटक करते हुए कहा..

"आप बातें करो, आइ विल बी बॅक.." ये कहके ललिता चली गयी और पूजा और मुझे अकेला छोड़ के चली गयी...

ललिता के जाते ही पूजा ने मुझे देखते हुए कहा

"क्या हुआ है ... कितने दिन से ना आपने एसएमएस किया है, ना कॉल किया है, कुछ नाराज़गी है क्या आपको मुझसे.. मैने कोई ग़लती कर ली हो तो प्लीज़ बताइए.."

"नहीं पूजा... नतिंग लाइक दट.. बट घर पे ऐसा अट्मॉस्फियर रहता है, इन सब में मज़ा नहीं आता यार.. आंड मैं तुम्हारे साथ टेन्स्ड होके बात नहीं कर सकता... इसलिए कुछ दिन थोड़ा दूर रहा... सोचा, शायद सब जल्दी से नॉर्मल होगा और फिर वोई माहॉल बन जाएगा घर का

"समझ सकती हूँ मैं ... पर मेरा भी तो आप सोचिए ना प्लीज़.. इतने दिन मैं कैसे रही हूँ, सिर्फ़ मैं ही जानती हूँ.. आपको अब फॅमिली के साथ मेरा भी सोचना है" पूजा ने शिकायत करते हुए कहा..

"नहीं स्वीट हार्ट... डोंट वरी, आइ विल टेक एनफ केर ऑफ यू.. आंड आज रात को इसका सबूत भी दे दूँगा मैं तुम्हे.. तैयार रहना फॉर आ सूपर टाइम." मैने पूजा को अपने पास खींचते हुए कहा.. पूजा किसी पतंग की तरह मेरे पास आ गयी, मैने जैसे ही उसकी कमर में हाथ डाला, शन्नो के रूम से आवाज़ आई और हम दोनो अलग हो गये..

"दीदी.. चलो ना प्लीज़.. क्या हुआ है , ऐसा मत करो प्लीज़.." अंशु शन्नो के पीछे आती हुई बोली...

"देख पूजी, तेरी मासी नहीं आ रही. तू ही समझा अब इसे..." अंशु ने अपनी गान्ड सोफे पे पटकते हुए कहा

"मासी, प्लीज़ चलिए ना, ऐसा मत कीजिए. आपको वहाँ बहुत अच्छा लगेगा प्लीज़..." पूजा भी ज़िद्द करने लगी

"नहीं, मैं नहीं जाउन्गि कहीं... तुम लोग ललिता को ले जाओ... प्लीज़ ज़िद्द मत करो.." शन्नो ने तंग होते हुए कहा..

"रहने दीजिए मोम.. मासी ना आए तो ओके, मैं ललिता को ले आती हूँ. उसको ले चलते हैं.." कहके पूजा ललिता के कमरे में चली गयी

 


पूजा के जाते ही मैने अंशु को देखा, तो उसके चुचे ड्रेस में एक दम टाइट फिट थे... अंशु ने मुझे नोटीस किया पर कोई रियेक्शन नहीं दिया, मैं थोड़ा मज़ा लेने के लिए भी अपने होंठ पे जीभ फेरने लगा.. अंशु शन्नो के आगे कोई रियेक्शन नहीं दे रही थी पर तिरछी नज़रों से मुझे देख के मुस्कुरा रही थी... उसने तुरंत मुझे अपने मोबाइल से एसएमएस किया

"दामाद जी.... घर तो आइए, कभी हमारे लिए भी वक़्त निकालिए.. अपनी सेवा करने का मौका हमे भी तो दीजिए"

अंशु के इस एसएमएस से शन्नो को शक हुआ क्यूँ कि अंशु भी अपने मोबाइल में ही देख रही थी और उसी वक़्त मेरे मोबाइल में भी रिंग बजी... शन्नो ने जैसे ही मेरी तरफ देखा, मैने स्मस पढ़ के फोन अपने पॉकेट में रख दिया और वहाँ से उठ के टीवी ऑन करके देखने लगा.. शन्नो अभी भी हमे ही घूर रही थी.... ललिता और पूजा भी नीचे आ गये, ललिता को मजबूरी में उनके घर जाना पड़ रहा था....

"विल कम टुमॉरो... आंड प्लीज़ टेक मी आउट टुनाइट, आइ डोंट वान्ट टू बी आ पार्ट ऑफ दिस मेसेज.." ललिता ने जाते जाते एसएमएस किया...

"चलिए सम्धन जी... आप भी प्लीज़ आइए घर कभी, और दामाद जी... आप कब आएँगे, हमारी सेवा में कोई कमी नहीं होगी आपको... चिंता ना करें.. " अंशु ने अपने चुचों को बाहर निकालते हुए कहा...

ललिता और अंशु तो चले गये पूजा के साथ... मैं और मोम अंदर आ गये जहाँ शन्नो अकेली बैठी हुई थी... मोम ने मुझे इशारे से शन्नो के साथ बात करने को कहा... बहुत अजीब फीलिंग आ रही थी, पर मजबूरन मुझे उनके साथ बात करने जाना पड़ा..

"आंटी... क्या देखेंगे आप टीवी पे..." कुछ और सूझा नहीं तो येई पूछ लिया मैने शन्नो से...

"कुछ नहीं.. तुम मेरे रूम में आओ अभी...." ये कहके शन्नो अपने रूम में चली गयी..

शन्नो अपने रूम में जाने लगी, और मुझे भी बुला लिया था... एक पल के लिए तो मैं डर गया था शायद अंशु के लिए कुछ ना बोले, पर दूसरे ही पल में मुझे ख़याल आया.. ये भी तो शामिल है इस प्लान में, इसको भी तो चोद के बदला लेना पड़ेगा.. मैने एक नज़र मोम को देखा तो वो अपने रूम में थी और अपने वॉर्डरोब में कपड़े बिखेर के खड़ी हुई थी... मैं ये देख तुरंत शन्नो के रूम में चला गया..

"आंटी... आपने बुलाया मुझे..." मैं शन्नो के रूम में जाके बोला

शन्नो मेरे सामने बैठी हुई थी, सफेद ड्रेस में उसके बाल खुले हुए थे.. काफ़ी दिन से उसके चुचों को नहीं देख पाया था, आज जाके देखा तो उसके चुचे काफ़ी बड़े लग रहे थे.. सफेद ड्रेस से सॉफ दिख रहा था उसने अंदर ब्लॅक ब्रा पहनी थी.. उसके चुचों का उभार मुझे पागल बना रहा था, मेरी नज़र वहाँ से हट ही नहीं रही थी.. शन्नो ने ये नोटीस किया, और मुझे कहा

"आओ... अंदर आओ पहले और बैठो..." उसने बेड पे इशारा करते हुए कहा..

मैं अंदर जाके बैठ गया, और शन्नो बोली..

"मुझे तुम्हारा मोबाइल दो, काम है कुछ.."

"ये लीजिए, क्या काम है आपको इसमे.." मैने मोबाइल देते हुए कहा

मुझे शन्नो ने कुछ जवाब नहीं दिया और मेरे मोबाइल को स्कॅन करने लगी...

"ये क्या है.. मुझे समझाओ ज़रा.." शन्नो ने अंशु का एसएमएस दिखाते हुए मुझे कहा..

"मुझसे क्यूँ पूछ रहे हो, अपनी बहेन से पूछो ना.. एसएमएस तो उसी ने किया मुझे..

"देखो ... रिश्ते को खराब मत करो तुम, वो तुम्हारी सास होने वाली है, तुम्हे शरम नहीं आती इन सब में..." शन्नो ने अपनी आवाज़ उँची करते हुए कहा

"आंटी.. ऐसा तो क्या किया, एसएमएस तो उन्होने ही मुझे भेजा"

"पूजा को पता चला ये सब तो, सोच भी नहीं सकते कितनी अच्छी लड़की है वो"

"क्या पता चलेगा आंटी.. सीधे बोलिए ना... मेरा क्या जवाब है उसको कोई, आपके सामने ही है मोबाइल"

", मुझे सब पता है... ज़्यादा बनने की नो नीड ओके..."

"आंटी, ठीक है... आप जानते हो मैने आपकी बहेन को और पूजा को एक साथ चोदा है.. और कसम से बोलता हूँ बहुत मज़ा आया था... आप सीधे सीधे पॉइंट पे आइए.. क्या कहना चाहते हो..." मैने सीधे सीधे शन्नो को बोला...

मेरा जवाब सुनके शन्नो कुछ सेकेंड्स यूही खड़ी मुझे देखती रही, पर कुछ बोली नहीं... शन्नो बेड पर से खड़ी हुई और मेरे सामने आके खड़ी हो गयी..

" और रही पूजा की अच्छाई की बात, तो उसी ने अपनी मा को मुझसे चुदवाया... आपको और कुछ कहना है मुझे... या मैं जाउ..."

 


मेरी ये बातें सुनके शन्नो वहीं खड़ी रही.. पहली बार मैं शन्नो से ऐसे बात कर रहा था, क्यूँ कि मुझे अब बस उसको चोदना ही था.. बदला, प्लान, ऐसा कुछ भी दिमाग़ में नहीं था... मुझे बस उस दिन की याद आई जब शन्नो मुझे सिड्यूस कर रही थी और मैने उसकी ख्वाहिश पूरी नहीं की थी...

", तुम्हारा दिमाग़ ठीक है, बेटे ऐसा मत करो प्लीज़... सब रिश्ते खराब होंगे..." शन्नो अब नाटक बढ़ाने लगी थी

"अच्छा.... तो उस दिन आप मुझे सिड्यूस क्यूँ कर रहे थे हाँ... आपको भी तो मुझसे चुदवाना ही था ना... और अगर ऐसा कुछ नहीं है तो फिर मुझे जाने दीजिए अब.. ज़्यादा नाटक मत कीजिए..." मैं ये कहके जैसे ही बेड से उठा, शन्नो ने मुझे धक्का देके बेड पे लेटा दिया, और खुद मेरे उपर आ गयी

"जब सब समझ चुके हो तो फिर क्यूँ ऐसा कर रहे हो.. अपनी सास के साथ अब अपनी चाची का भी ख़याल रखो ना..."

ये कहके शन्नो और मैं एक दूसरे को चूमने लगे

"उम्म्म.. मवाहाहहहहः... आहम्म्म्म म..... उम्म्म्मम...आहहहाहा ज़ोर से चूसो ना आहहाहहहा....... हाआँ मेरे भतीजे आहहह सीईईई... उम्म्म..........और चूसो आहह... म्म्मममवाहह..." शन्नो और मैं जन्गलियो की तरह एक दूसरे को चूमने लगे...

"आहह मेरी चाच्ची.. ह्म्म्म्म मज़ा दो ना आहाहह... अहहहामम्म मवाहह यूम्मम आहहहहहहः..... उम्म्म्म...... आपके ये चुचे आअहह सीईईई..... मुझे पागल आहमम्म बनाते आअहह हैईयांन्णणन्..." मैं शन्नो की ड्रेस से ही उसके चुचे दबाते हुए बोल रहा था और होंठ चूस रहा था...

"आहहः मेरे भतीजे, आहहह ले ले ना इन्हे,,, तुझे ये चाहिए ना आहह....ले ले ना...." कहके शन्नो खड़ी हुई और कुछ ही सेकेंड्स में अपना कुर्ता और पायजामा नीचे उतार दिया और ब्रा और पैंटी उतार कमरे के एक कोने में फेंकी... नंगी होके मेरे सामने शन्नो किसी पॉर्न स्टार की तरह खड़ी थी

हवा में आम जैसे झूलते हुए उसके चुचे, उसकी चूत पे हल्के हल्के बाल मुझे पागल बना रहे थे... अपनी चूत के उपर उंगली फिराते हुए मुझे टीज़ करती हुई शन्नो बोली... "उम्म्म आओ ना.. आहहह तुम्हारा ही है ये सब भतीजे आहह....."

मैं वहाँ से उठके शन्नो के पास गया और उसके एक चुचे को मूह में लेके चूसने लगा और एक उंगली चूत के अंदर बाहर करने लगा...

"उम्म्म्म आहह.... सीईईईईईई हां चूस लो इस आम को मेरे भतीजे आहह.... इस चूत की खुजली भी मिटाओ ना आहह.....उम्म्म आहह आहह....." शन्नो मेरे मूह को अपने चुचों में धसाने लगी....

'आअहह.. चाच्ची तेरे चुचे तो मस्त हैं उम्म्म्म आहह... सस्ककककककस्सहह.... केसर आम से भी मीठे हैं आहह सीईइ....और ये चूत तो और भी मज़ेदार है आहहह......" मैं अब बारी बारी शन्नो के चुचों को मसल्ने लगा था और नीचे से शन्नो की चूत पे तेज़ी से उंगलियों के वार करने लगा था..

"उम्म्म्म आहहहह और ज़ोर से चोदो इस चूत को आअहह सीईइ मैं गयी आहह...." ये कहके शन्नो ने अपना पूरा पानी मेरी उंगलियों पे छोड़ दिया और मैने वो सब उंगलियाँ उसको चाटने के लिए दे दी....

"आहह... अब चोद भी डाल ना भतीजे... आहह.. चल ना अब और देर मत कर मेरे राजा आज्झहह.... सीईईई..." ये कहके शन्नो और मैं बेड पे आ गये और उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया...

"उम्म्म आआहहहः क्या लंड है तेरा आ अहहहह.. तभी अंशु जैसी बड़ी रंडी भी तेरी दीवानी हो गयी है आहह.. ज़रा चख के तो देखूं इसे मेरे भतीजे आहह...." कहके शन्नो ने मेरे लंड को मूह में ले लिया और चूसने लगी

"उम्म अहहह गुणन्ं गुणन्ं आहह..... क्या लंड है मेरे भतीजे आहह.... पूजा की चूत तो फट गयी होगी उम्म्म आहह...... मुझे भी दे ना आहह... क्या मिठास है इसमे आआहसीईईईई...." शन्नो मेरे लंड को चूसे जा रही थी, और पीछे से जाके मैं भी उसकी चूत को उंगलियों से चोदने लगा...

"आअहह मेरी चाची आहह... तुम बहनें तो एक नंबर की रंडिया हो आहह सीईइ... तेरी भांजी भी तो रांड़ है एक नंबर की उम्म्म.... आह होंठ दे अपने भडवि आहह,.., उम्म्म्मम उःम्म्म्म आहह,,,मवाहाहह आहह... उम्म्म्मममम मेरी रांड़ चाची, मेरी रांड़ सास.. आहह सीईईईई..उम्म्म्ममम ममवाहह... पत्नी भी रांड़ मिली है आहह रंडियों साली कहीं की उम्म्म आहह....." मैं जंगली बनके होंठ चूसे जा रहा था और उंगलियों से शन्नो की चूत चोदने लगा था

"अहहहाहा मेरे भडवे भतीजे साले आहह... कुत्ते कहीं के उम्म्म्म... तू ही तो हमारा मालिक है आहह... उम्म्म्म लंड दे भडवे साले.... आहह.. उम्म्म्म फक फक गुउन्ण गुउन्ण आअहह,म्म्म्मचम हेहहहे आह क्या लंड है मेरा राजा आहह... ससीई आहह... उम्म्म्मम.... " शन्नो मेरे लंड की मूठ मारने लगी अब....

"आअहह मेरी रंडी चाची... ह्म्म्म अऔुहह... और मज़ा दे ना मदरजात कहीं की आहह...... आहह और मज़ा ले साले बेहेन्चोद कहीं के आहहह... ये ले.... कहके शन्नो अब अपनी जीभ मेरे लंड के टोपे पे घुमाने लगी, और मेरे टट्टों को सहलाने लगी

"अहहहहहा भडवे कहीं के आहह सीईईई.. यही लंड है ना जिसपे अंशु उछल उछल के चुद रही थी मेरे भडवे आहहह... रुक जा साला बहेन चोद कहीं के आहह....." कहके शन्नो उठ गयी और मेरे लंड को अपनी चूत पे सेट करके मेरे लंड पे उछलने लगी..

"आहह... आहहाहहहहा फ़च फ़च आफूक्क फक आहहाहह और ज़ोर से यआःः आहह हार्डर आहह.. उम्म उम्म्म आअहह ऑश...... आअहह हाआंन्णचणन् और फाड़ ना मेरी चूत को आहह.... यआः येआः आहहहहहाः..... मेरे चुचों को क्या देख रहा है भडवे आहाहहहा...." शन्नो उछल के बोले जा रही थी..

" अहहहहः मेरी रांड़ चाची, तेरे चुचे ही तो हैं जिसकी वजह से तू चुद रही है साली आअहह..... उम्म्म ये दे ना मुझे आहहहहहह...." ये कहके शन्नो को मैने अपने उपर लिटाया और लंड से चुदाई चालू रखी

 


"उम्म्म आहह ... खंजर चल रहा है जैसे मेरे राज आहह...... बहुत मज़ा आ रहा है उम्म्म आहह... और चोद ना मेरे राजा आहह.... उम्म्म...."

मैं झड़ने के करीब था..

"आहहः मैं निकल रहा हूँ मेरी रांड़ आहहः.. कहाँ छोड़ूं आहह...."

"मेरे अंदर ही डाल दे मेरे राजा आहह.... मैं भी आ रही हूँ अहहिसीईईई...." ये कहके मैं और शन्नो एक साथ झड़ने लगे... हमारा पानी पूरे बेड पे गिरने लगा..... कुछ सेकेंड में शन्नो थक हार के मेरे उपर से उतरी और पास में आके लेट गयी....

"अहहह... थॅंक यू आहम्म्म ..... जब से डॉली गयी है, तुम्हारे अंकल ने मुझे चोदा ही नहीं था... आधा दुख तो इस बात का था.... थॅंक यू..." कहके शन्नो ज़ोर की साँसे ले रही थी..... मैने उसका कोई जवाब नहीं दिया, और बिना कुछ बोले कपड़े पहन के वहाँ से निकल गया... शायद शन्नो भी जानती थी कि ये सब क्यूँ हुआ.. मेरी वासना ही थी ये और कुछ नहीं... मैं बस शन्नो को चोदना चाहता था, कोई वजह नहीं थी... शन्नो के रूम से निकल के मैं अपने रूम में आया, और आके ललिता को एसएमएस किया

" आइ आम सॉरी... आइ फक्ड युवर मोम ऐज वेल... प्लीज़ फर्गिव मी..."

ललिता का रिप्लाइ आया...

"रिवेंज और व्हाट एवर.. दिस ईज़ रॉंग... प्लीज़ मीट मी इन दा नाइट, आइ वान्ट टू गेट आउट ऑफ हियर..."

ज़िंदगी में पहली बार किसी को चोदने के बाद, दिल में कोई फीलिंग नहीं थी.. ना तो खुशी थी, ना तो दुख... शन्नो आंटी को चोद के ऐसा लग रहा था जैसे मैने किसी रांड़ को पैसे देके सेक्स किया हो.. लंड डालने को चूत तो मिली, पर वो भाव नहीं थे जो मज़ा दे... येई सब सोचते सोचते मैं अपने रूम में गेम खेलने बैठा... गेम खेलते खेलते शाम हुई और मैं ऑफीस के मेल्स चेक करने लगा... ऑफीस के मेल्स चेक कर रहा था, कि डॅड आए रूम में

दाद:- बेटे.. प्लीज़ नीचे आओ, वान्ट टू टॉक टू यू..

ये कहके डॅड नीचे चले गये, ना तो मेरे जवाब का वेट किया, ना तो मेरे रियेक्शन का.. कमाल है यार मैने सोचा, अचानक क्या हुआ डॅड को... मैं जल्दी से मेलबॉक्स बंद करके नीचे चला गया

"हां डॅड.. बताइए, " मैं डॅड के रूम में जाके बोला

डॅड:- , दीज़ आर दा पेपर्स, जिसमे तुम और पूजा आर अफीशियल ओनर्स ऑफ और बिज़्नेस... एक एक पेज ध्यान से पढ़ो, बिकॉज़ मैं नहीं चाहता कोई पॉइंट तुम्हारे दिमाग़ से निकल जाए.. तुम शार्प हो आइ नो, बट फिर भी..

मैं:- डॅड जब आपने पढ़े हैं तो मैं दोबारा क्यूँ पढ़ु...

"नो नो बॉय... बिज़्नेस का सबसे पहले और अहेम कायदा... जब भी कोई पेपर साइन करो, उसे ध्यान से पढ़ो, बिज़्नेस में देरी सह सकता हूँ मैं, लेकिन घाटा नहीं.. ये तुमसे अच्छी तरह कौन जानता होगा, तुमने तो अभी से मेरे पर्सनल इनकम . और फॅक्टरीस के स्टेट्मेंट्स देखना चालू कर दिया है ना" डॅड ने एक नर्म आवाज़ में कहा.. ना तो मुझे वो ताना लगा, ना तो मुझे वो ऑर्डर लगा... एक सीधी बात कही थी, आज पहली बार मुझे लग रहा था मैं एक बिज़्नेसमॅन के साथ बात कर रहा हूँ...

"डॅड, वो मैने बस इसलिए मँगवाए थे ताकि जाने से पहले थोड़ा बिज़्नेस स्टडी कर लूँ" मैं हकलाते हुए कहने लगा

"नहीं बेटे, इट्स टोटली ओके.. आइ आम हॅपी कि तुम सीरीयस हो इस बारे में... अप्रीशियेटेड" डॅड ने एक छोटी सी फोर्स्ड स्माइल के साथ कहा

"बट डॅड, आप बोल रहे हैं कि मैने मँगवाए, बट विजय अंकल को तो पता ही होगा ना... आइ मीन वो भी तो आपके साथ रहते हैं हर टाइम, वो भी तो देखते होंगे ना ये सब" मैने सवाल किया

"नहीं बेटा, आइ डोंट थिंक सो... बट हो सकता है देखता भी हो.. उससे क्या फरक पड़ता है, इन पेपर्स के आ जाने से युवर दा अफीशियल आंड आक्टिव मेंबर ऑफ दा कंपनी... तुम्हारे साइन के अलावा कंपनी में पत्ता भी नहीं हिलेगा... यू हॅव दा पवर नाउ..." डॅड एक दम जोश में आ गये थे, आज उनके अंदर का बिज़्नेसमॅन कूद कूद के बाहर आ रहा था..

"ऊह हुह... वी हॅव दा पवर नाउ डॅड... आप भूल रहे हैं, पूजा भी इसमे हिस्सा रखती है.." मैं सोफे पे बैठ गया था अब

"ओफ़कौर्स.. , आइ एम ग्लॅड कि तुमने सही चाय्स ली है... दट कॉल्स फॉर पार्टी नाउ... रूको...." ये कहके डॅड अपने क्लॉज़ेट के पास गये और उसमे से एक इंपोर्टेड स्कॉच की बॉटल निकाली..

"डॅड.. ये क्या है... मैं नहीं पीता.." दिल तो बहुत हां बोल रहा था , पर मैं डॅड के आगे अपनी ये इंप्रेशन नहीं बनाना चाहता था..

"हाहहहहाहा बॉय... रिश्ते में मैं तेरा बाप हूँ... तू कब कहाँ जाता है, किसके साथ पीता है, सब जानता हूँ मैं.. आंड इट्स नोट हार्मफुल बॉय.. गुड फॉर हेल्त, आगे जाके तुम ऐसे लोगों के साथ उठोगे बैठोगे जहाँ ये स्टेटस सिंबल है... इसलिए डोंट डिनाइ ऑलराइट.." कहके डॅड ने दो फाल्ट बॉटम ग्लासस में विस्की पोर कर दी...

 
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