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एरिसटॉटल:- डॉली की बॉडी पोलीस को रेलवे ट्रॅक्स के पास मिली.. ये तो किस्मत है कि जब पोलीस ने बॉडी रिकवर की, उसके 5 मिनट बाद ही ट्रेन आई, नहीं तो डेड बॉडी पूरी क्रश हो जाती... बॉडी हमे ब्लॅक पोलिथीन में रॅप्ड मिली.. वहाँ की लोकल पोलीस ने जैसे ही हमे इनफॉर्म किया, वीरानी सरनेम सुनके ये केस मैने सामने से माँगा ये सोचके कि कहीं तुम्हारी फॅमिली ही होगी... और डॉली को मारने से पहले काफ़ी डराया गया था ऐज पर पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट्स...और उसके पेट में सीधे वार हुए हैं चाकू से या किसी नोकिली चीज़ से .. इंट्रेस्टिंग बात ये है कि डॉली ने बचने की बिल्कुल कोशिश नही की थी, क्यूँ कि जिस चीज़ से उसपे वार हुआ है, वो उसके पेट के आर पार हुई है, मतलब डॉली स्टॅंडिंग पोज़िशन में थी, कातिल ने ठीक बीचो बीच वार किया है, अगर डॉली बचने के लिए हिली होती तो एक दम बीच में वार करना पासिबल नही है..
एरिसटॉटल की ये बात सुनके ललिता और मेरा पसीना छूटने लगा था... 5 मिनट तक हमारी टेबल पे खामोशी छाई रही... इतने में हमारी कॉफी भी आ गयी...
एरिसटॉटल:- ललिता जी, पसीना पोछ लीजिए प्लीज़, और आपकी कॉफी...
ललिता ने अपने आँसुओं को थाम के रखा था, और हमने ये नोटीस भी कर लिया था...
"थॅंक्स... " ललिता ने एरिसटॉटल से कॉफी और टिश्यू लेते हुए कहा...
"आप आगे बोलिए प्लीज़, आइ अम फाइन" ललिता ने फाइनली .अपने आँसू पीके बोला
"जी...इसमे हैरानी की बात ये है कि कोई अपनी जान क्यूँ बचाना नहीं चाहेगा... आइ मीन आप का फॅमिली बॅकग्राउंड ईज़ सो स्ट्रॉंग, डॉली को कोई पर्सनल प्रॉब्लम्स तो नही हो सकती..फिर क्यूँ..लेकिन मेरे दिमाग़ में फिर एक रॅंडम थॉट भी आया, कहीं डॉली को पता तो नहीं था कि उसके साथ ये सब होने वाला है .. शायद उसने किसी को कोई धोखा दिया हो..या शायद...
"डॉली ऐसी बिल्कुल नही थी इनस्पेक्टर...किसी को धोखा देने वालों में से मेरी बहेन नही थी, वो इनडिपेंडेंट थी..." ललिता ने तीखे स्वर में इनस्पेक्टर को टोका
"ललिता.. प्लीज़ कंट्रोल बेटा, एरिसटॉटल, बोल आगे" मैने बीच में आके स्थिति काबू करने की कोशिश की..
"मैं ये कह रहा था कि अगर किसी को धोखा भी नही दिया डॉली ने तो उसने अपनी जान बचाने की कोशिश क्यूँ नही की... इन सब सुरतों में शक का काँटा बस एक ही तरफ घूम रहा है" एरिसटॉटल ने ज़ोर देके कहा
"किस तरफ भाई..." मैने कॉफी का सीप लेके कहा
".. अब सिर्फ़ ऐसा लगता है कि किसी घर वाले ने ही तो, डॉली का...." इतना कहके एरिसटॉटल खामोश हो गया...
"भला कोई घरवाला कौन करेगा ऐसा इनस्पेक्टर..मेरी बहेन सब को प्यारी थी, सब उसे बहुत चाहते थे, " इतना कहके ललिता की लाल आँखें बहने लगी और बेकाबू होके रोने लगी.
"ललिता, प्लीज़ चुप कर डियर..प्लीज़" मैने पानी का ग्लास देके ललिता को कहा
"ललिता जी... अगर आप को ये केस सॉल्व करना है तो प्लीज़ अपने एमोशन्स पे कंट्रोल कीजिए...और अगर नही कर सकती तो प्लीज़ जाइए, मैं काफ़ी देर से अपने गुस्से को दबाए बैठा हूँ और आप हैं कि कुछ सुनने के लिए तैयार ही नहीं हैं.." एरिसटॉटल ने भी अपने ताव में आके कहा
एरिसटॉटल का गुस्सा मेरे लिए नया नहीं था, वो जब तक कंट्रोल करता तब तक ठीक है, बट जब उसका कंट्रोल टूटेगा तो किसी की खैर नहीं., मैं चुप करके ये सब सुन रहा था...ललिता और एरिसटॉटल दोनो खामोश हो चुके थे, खामोशी को तोड़ते हुए मैने पूछा
"अब क्या करना है आगे, अगर तुमको लगता है कि घरवाला कोई है, तो बेफ़िक्र रहो, हमारी तरफ से तुम्हे पूरा को-ओपरेशन मिलेगा.." मैने एरिसटॉटल को आश्वासन दिया
"वो मैं जानता हूँ , इसलिए ये केस मैने सामने से माँगा है" एरिसटॉटल अब रिलॅक्स हो गया था
"इनस्पेक्टर... आइ अम सॉरी...आप जो कहेंगे, मैं वो करूँगी, बस डॉली के कातिल तक पहुँचना है मुझे.." ललिता ने कड़क आवाज़ में कहा...
"ललिता, आप चिंता ना करें, डॉली के केस में हमे उपर से भी दबाव है, वीरानी खानदान की बेटी की मौत, छोटी बात नही है..ये तो गनीमत है कि राज के फादर यानी कि इंदर जी ने अब तक कुछ नही किया, नही तो मैं यहाँ बैठ भी नहीं पाता" एरिसटॉटल ने ललिता को कहा..
"इसमे अंकल क्या कर सकते हैं..मैं कुछ समझी नहीं..." ललिता ने आश्चर्य में आके पूछा..
इससे पहले के एरिसटॉटल कुछ बोलता, मैने ललिता को कहा "ललिता, आइ विल टेल यू दट..डॉन'ट वरी"
"एक और बात.. ये देखिए, ये जानते हैं किसकी है... " एरिसटॉटल ने एक वाच दिखाते हुए कहा..
उसके हाथ में एक वाच थी, जिसे पकड़ने के लिए जैसे ही मैने हाथ आगे बढ़ाया "ऊह..., रुमाल में लो प्लीज़, ये इनस्पेक्षन में है" एरिसटॉटल ने कहा
"ह्यूब्लोट क्लॅसिक फ्यूषन हॉट... सटडेड वित 1185 बॉगेट डाइमंड्स, वर्ल्ड्स मोस्ट एक्सपेन्सिव ., नोट अवेलबल इन इंडिया.. इसकी इंटरनॅशनल मार्केट में प्राइस है अराउंड 1 मिलियन डॉलर्स.. शायद 5 करोड़ रुपीज़.." ललिता ने हमे चौंकाते हुए कहा...
ललिता की ये बात सुनके मैं तो हैरान था ही, पर एरिसटॉटल ने सिर्फ़ एक स्माइल के साथ कहा..
"यू आर राइट ललिता.."
"पर ये आप हमे क्यूँ दिखा रहे हैं.." ललिता ने फिर एरिसटॉटल को पूछा..
"वो इसलिए ललिता... आइ मीन ललिता जी, ये . उस पोलिथीन से मिली है जिसमे डॉली की बॉडी रॅप्ड थी.." एरिसटॉटल ने ललिता को देखते हुए कहा.....
"यू मीन, ये . मर्डरर की है.." मैने सीधा सवाल किया
"हो सकता है, पर ये किसकी है, वो जानना बहुत मुश्किल है" एरिसटॉटल ने जवाब में कहा