S
StoryPublisher
Guest
"सोडा या वॉटर बेटा.." डॅड ने पूछा
"ऊह.. डॅड, ऑन दा रॉक्स... नो वॉटर, नो सोडा..." मैने आँख मारते हुए कहा...
"ओह... बॉय ईज़ ग्रोयिंग अप.. थ्ट्स माइ मॅन.. चियर्स टू तट.." कहके डॅड ने दो पेग बनाए और हमने नीट ही उतार दिए अपने गले के नीचे..
काफ़ी सारी बातें करके हमने आधी बॉटल ख़तम कर दी थी... शायद इंपोर्टेड शराब का येई फ़ायदा है, जल्दी चढ़ती नहीं, पर जब साली चढ़ती है, तब उतरती नहीं...
"डॅड... एक बात बताइए.. ऑफीस में वर्कर्स का प्राब्लम, और फिर आपके कॉंपिटिटर्स के आप पे हमले... आपने कभी शेअर नहीं किया..." मैं हमारे पेग्स बनाने लगा था...
"हर चीज़ का वक़्त होता है बॉय.. अभी तुम जाय्न करोगे, सब पता चलेगा.... अभी से डोंट टेक स्ट्रेस प्लीज़... " डॅड रिलेक्स होके अपना पेग पीने लगे..
"चियर्स टू दट डॅड..." मैने ग्लास आगे बढ़ाते कहा, और हमने फिर एक एक पेग ख़तम कर दिया...
"चलिए डॅड... अभी थोड़ा फ्रेश हो जाउ, ललिता के साथ बाहर जाना है खाने पे.." मैं वहाँ से उठते हुए बोलने लगा
"अरे ललिता, व्हेअर ईज़ शी... डॉली के बाद शी ईज़ अलोन, यू प्लीज़ बी आ गुड ब्रदर ओके.. आंड टेक गुड केर ऑफ हर..." डॅड मेरे पास आते हुए बोले
"श्योर डॅड.. आप फिकर ना करें.. कोई शिकायत नहीं मिलेगी आपको..." मैने हँसी के साथ कहा, और मूड कर जाने लगा तभी डॅड ने फिर मुझे पीछे से आवाज़ दी...
" बॉय... याद रखना, ज़िंदगी में तुम्हे हर चीज़ पाने के लिए दो रास्ते दिखेंगे.. ये तुम्हारी मर्ज़ी है तुम किस रास्ते पे जाते हो.. लेकिन जिस रास्ते पे चलो, ज़िंदगी में फिर कभी पीछे मूड के मत देखना...."
मैने उनकी कोई बात का जवाब नहीं दिया और अपने कमरे में जाके फ्रेश होने लगा... हर पल में मुझे बस येई ख्याल आ रहा था.. अब क्या मुडुन्गा डॅड, इस चीज़ पे मैं इतना आगे आ गया हूँ, अब पीछे देखना चाहूं तो भी नहीं देख सकता... अब या तो इस पार, या तो उस पार..
"चलिए मोम.. आइ एम गोयिंग आउट..." मैं चिल्लाके बाहर की तरफ जाने लगा तभी पीछे से शन्नो ने आवाज़ दी...
" बेटे... हमे प्लीज़ अंशु के घर ड्रॉप कर दे.."
"हमे... आप और कौन है ?" मैने आस पास देखते हुए कहा
"अरे तेरे अंकल भी तो हैं.." शन्नो ने जवाब दिया
"आंटी आप दूसरी गाड़ी ले जाइए ना.. मैं कहीं और भी जाउन्गा प्लीज़.." मैं शन्नो के साथ नहीं जाना चाहता था..
तभी पीछे से विजय आया
"अरे बेटे, तुम प्लीज़ आंटी को ले जाओ, अभी मैं और तुम्हारे पापा कहीं बाहर जाएँगे, तो वो मुझे वहीं ड्रॉप कर देंगे.. और एक गाड़ी घर पे पड़ी हो, शायद भाभी के काम आए"
"चलिए आंटी.. मैं आपका गाड़ी में वेट कर रहा हूँ" मैं बाहर निकलते बोलने लगा
मैं गाड़ी में जाके वेट करने लगा... करीब 5 मिनट बाद शन्नो सामने आती दिखाई दी, उसने उपर से नीचे तक खुद को ढक के रखा था, एक लंबा सा ओवरकोट पहना था, और हाथ में पर्स और कपड़ों का बॅग.. गर्मियाँ निकल चुकी थी, पर बारिश ना होने की वजह से गर्मी कम नहीं थी, इसमे शन्नो ने ये ओवरकोट क्यूँ पहना है... बाहर निकलते निकलते वो मोम डॅड से मिली और मेरी गाड़ी में आके बैठ गयी...
"चलें.." मैने उसकी आँखों को इग्नोर करते हुए कहा
"ह्म्म्मो चलो..."
हम घर से अंशु के घर की तरफ निकल गये... अंशु के घर का रास्ता करीब 1.30 घंटे का था... हम जैसे ही थोड़ा आगे आए, शन्नो ने अपना ओवरकोट उतार दिया, और पीछे की सीट पे फेंक दिया... लग ही नहीं रहा था ये वो औरत है जो कितने टाइम से गुम्सुम सी रहती थी, शन्नो अपने रंग ढंग, अपने ताव में वापस आ चुकी थी...
उसने कॉपर कलर का क्रॉप्ड ड्रेस पहना हुआ था, जो सिर्फ़ उसकी जांघों तक आ रहा था. चुचे उसके ढके हुए थे, पर उसने अंदर कोई ब्रा नहीं पहना था.. साइड में से वो एक हाथ उपर करती और उसकी नंगी कमर एक्सपोज़ हो जाती.. पीछे की सीट पे अपना कोट फेंक के, जान बुझ के अंगड़ाई ली जिससे उसकी पूरी ड्रेस उपर उठ गयी और उसकी नंगी जांघे मेरी आँखों के आगे आ गई.. मैं उसके प्रति अपनी कोई फीलिंग नहीं दिखाना चाहता था, इसलिए मैने पूरा ध्यान सिर्फ़ गाड़ी चलाने में ही रखा....
"उम्म्म.... कितनी गर्मी है बेटा... एसी चलाओ ना.." ये कहके शन्नो ने खिड़कियाँ बंद करके एसी ऑन की और पूरी सीट को रिक्लाइन करके उसपे लेट सी गयी... लेटने से उसकी ड्रेस और उपर उठी , अब उसकी चूत का हिस्सा सॉफ देख सकता था मैं... देखने से पता लग रहा था, ब्रा के अलावा पैंटी भी नहीं है...
"उम्म्म आहह.... कैसी लग रही हूँ मैं बेटे.." शन्नो अपनी बाज़ू दिखाती बोली
"हुह... कोई बोल ही नहीं सकता कि अभी कुछ दिन पहले तुम्हारी बेटी का खून हुआ है... एक दम ग्रांट रोड की टॉप प्रोफाइल रांड़ लग रही हो.... कोई भी एक रात के कम से कम 10,000 तो दे ही देगा...ऐसी लग रही हो शन्नो आंटी...." मैने गुस्से में कहा