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मेरी सेक्सी बहनें compleet

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"सोडा या वॉटर बेटा.." डॅड ने पूछा

"ऊह.. डॅड, ऑन दा रॉक्स... नो वॉटर, नो सोडा..." मैने आँख मारते हुए कहा...

"ओह... बॉय ईज़ ग्रोयिंग अप.. थ्ट्स माइ मॅन.. चियर्स टू तट.." कहके डॅड ने दो पेग बनाए और हमने नीट ही उतार दिए अपने गले के नीचे..

काफ़ी सारी बातें करके हमने आधी बॉटल ख़तम कर दी थी... शायद इंपोर्टेड शराब का येई फ़ायदा है, जल्दी चढ़ती नहीं, पर जब साली चढ़ती है, तब उतरती नहीं...

"डॅड... एक बात बताइए.. ऑफीस में वर्कर्स का प्राब्लम, और फिर आपके कॉंपिटिटर्स के आप पे हमले... आपने कभी शेअर नहीं किया..." मैं हमारे पेग्स बनाने लगा था...

"हर चीज़ का वक़्त होता है बॉय.. अभी तुम जाय्न करोगे, सब पता चलेगा.... अभी से डोंट टेक स्ट्रेस प्लीज़... " डॅड रिलेक्स होके अपना पेग पीने लगे..

"चियर्स टू दट डॅड..." मैने ग्लास आगे बढ़ाते कहा, और हमने फिर एक एक पेग ख़तम कर दिया...

"चलिए डॅड... अभी थोड़ा फ्रेश हो जाउ, ललिता के साथ बाहर जाना है खाने पे.." मैं वहाँ से उठते हुए बोलने लगा

"अरे ललिता, व्हेअर ईज़ शी... डॉली के बाद शी ईज़ अलोन, यू प्लीज़ बी आ गुड ब्रदर ओके.. आंड टेक गुड केर ऑफ हर..." डॅड मेरे पास आते हुए बोले

"श्योर डॅड.. आप फिकर ना करें.. कोई शिकायत नहीं मिलेगी आपको..." मैने हँसी के साथ कहा, और मूड कर जाने लगा तभी डॅड ने फिर मुझे पीछे से आवाज़ दी...

" बॉय... याद रखना, ज़िंदगी में तुम्हे हर चीज़ पाने के लिए दो रास्ते दिखेंगे.. ये तुम्हारी मर्ज़ी है तुम किस रास्ते पे जाते हो.. लेकिन जिस रास्ते पे चलो, ज़िंदगी में फिर कभी पीछे मूड के मत देखना...."

मैने उनकी कोई बात का जवाब नहीं दिया और अपने कमरे में जाके फ्रेश होने लगा... हर पल में मुझे बस येई ख्याल आ रहा था.. अब क्या मुडुन्गा डॅड, इस चीज़ पे मैं इतना आगे आ गया हूँ, अब पीछे देखना चाहूं तो भी नहीं देख सकता... अब या तो इस पार, या तो उस पार..

"चलिए मोम.. आइ एम गोयिंग आउट..." मैं चिल्लाके बाहर की तरफ जाने लगा तभी पीछे से शन्नो ने आवाज़ दी...

" बेटे... हमे प्लीज़ अंशु के घर ड्रॉप कर दे.."

"हमे... आप और कौन है ?" मैने आस पास देखते हुए कहा

"अरे तेरे अंकल भी तो हैं.." शन्नो ने जवाब दिया

"आंटी आप दूसरी गाड़ी ले जाइए ना.. मैं कहीं और भी जाउन्गा प्लीज़.." मैं शन्नो के साथ नहीं जाना चाहता था..

तभी पीछे से विजय आया

"अरे बेटे, तुम प्लीज़ आंटी को ले जाओ, अभी मैं और तुम्हारे पापा कहीं बाहर जाएँगे, तो वो मुझे वहीं ड्रॉप कर देंगे.. और एक गाड़ी घर पे पड़ी हो, शायद भाभी के काम आए"

"चलिए आंटी.. मैं आपका गाड़ी में वेट कर रहा हूँ" मैं बाहर निकलते बोलने लगा

मैं गाड़ी में जाके वेट करने लगा... करीब 5 मिनट बाद शन्नो सामने आती दिखाई दी, उसने उपर से नीचे तक खुद को ढक के रखा था, एक लंबा सा ओवरकोट पहना था, और हाथ में पर्स और कपड़ों का बॅग.. गर्मियाँ निकल चुकी थी, पर बारिश ना होने की वजह से गर्मी कम नहीं थी, इसमे शन्नो ने ये ओवरकोट क्यूँ पहना है... बाहर निकलते निकलते वो मोम डॅड से मिली और मेरी गाड़ी में आके बैठ गयी...

"चलें.." मैने उसकी आँखों को इग्नोर करते हुए कहा

"ह्म्म्मो चलो..."

हम घर से अंशु के घर की तरफ निकल गये... अंशु के घर का रास्ता करीब 1.30 घंटे का था... हम जैसे ही थोड़ा आगे आए, शन्नो ने अपना ओवरकोट उतार दिया, और पीछे की सीट पे फेंक दिया... लग ही नहीं रहा था ये वो औरत है जो कितने टाइम से गुम्सुम सी रहती थी, शन्नो अपने रंग ढंग, अपने ताव में वापस आ चुकी थी...

उसने कॉपर कलर का क्रॉप्ड ड्रेस पहना हुआ था, जो सिर्फ़ उसकी जांघों तक आ रहा था. चुचे उसके ढके हुए थे, पर उसने अंदर कोई ब्रा नहीं पहना था.. साइड में से वो एक हाथ उपर करती और उसकी नंगी कमर एक्सपोज़ हो जाती.. पीछे की सीट पे अपना कोट फेंक के, जान बुझ के अंगड़ाई ली जिससे उसकी पूरी ड्रेस उपर उठ गयी और उसकी नंगी जांघे मेरी आँखों के आगे आ गई.. मैं उसके प्रति अपनी कोई फीलिंग नहीं दिखाना चाहता था, इसलिए मैने पूरा ध्यान सिर्फ़ गाड़ी चलाने में ही रखा....

"उम्म्म.... कितनी गर्मी है बेटा... एसी चलाओ ना.." ये कहके शन्नो ने खिड़कियाँ बंद करके एसी ऑन की और पूरी सीट को रिक्लाइन करके उसपे लेट सी गयी... लेटने से उसकी ड्रेस और उपर उठी , अब उसकी चूत का हिस्सा सॉफ देख सकता था मैं... देखने से पता लग रहा था, ब्रा के अलावा पैंटी भी नहीं है...

"उम्म्म आहह.... कैसी लग रही हूँ मैं बेटे.." शन्नो अपनी बाज़ू दिखाती बोली

"हुह... कोई बोल ही नहीं सकता कि अभी कुछ दिन पहले तुम्हारी बेटी का खून हुआ है... एक दम ग्रांट रोड की टॉप प्रोफाइल रांड़ लग रही हो.... कोई भी एक रात के कम से कम 10,000 तो दे ही देगा...ऐसी लग रही हो शन्नो आंटी...." मैने गुस्से में कहा

 


मेरा ये जवाब सुनके शन्नो की आँखों से एक दम खून टपकने लगा था, पर वो अपना गुस्सा दबाती हुई बोली

"क्या हुआ मेरे बेटे.. नाराज़ है आंटी से... आजा मेरी बाहों में मेरा बच्चा..." कहके शन्नो मेरे पास आने लगी और अपने चुचे मेरे मूह के पास लाने लगी.... मुझसे रहा नहीं गया, और मैने एक ज़ोर का धक्का उसके कंधों पे मारा जिससे वो सीट से नीचे गिरने लगी....

"हुआ क्या है तुझे.. अभी जब चोद रहा था तब तो बड़ा प्यार से बोल रहा था, अब क्या हुआ..." शन्नो तिलमिला उठी

"कोई प्यार नहीं था वो समझी... उसमे कोई भावना नहीं थी, ना तो वो प्यार था , ना तो वो नफ़रत.... मैं बस तुम्हे चोदना चाहता था एक बार... भूख लगती है ना, उस वक़्त एक मिनट के लिए कुछ भी खा लेता हूँ मैं... बस, वोई भावना थी उस वक़्त.. और हां, आगे से कभी मेरे नज़दीक आई, तो ऐसी गान्ड लगाउन्गा तुम्हारी, कहीं की भी नहीं रहोगी तुम.. समझी....." मैं गुस्से में आके बोला

मेरा गुस्सा देख के शन्नो शायद ठंडी तो नहीं हुई, पर उसको पता चल गया कि ये सही वक़्त नहीं था.. इसलिए वो शांति से बैठ गयी, पर वो बार बार मेरी तरफ देखती और नज़रें मोड़ लेती.... मैं गाड़ी तेज़ चला रहा था , जल्द से जल्द शन्नो को अपनी आखों से दूर करना चाहता था.. 1.30 घंटे के रास्ते को मैने जैसे तैसे 25 मिनट पहले ही ख़तम कर लिया.. जैसे ही हम अंशु के घर के बाहर पहुँचे, मैने ललिता को फोन लगाया..

"हाई... आजा नीचे जल्दी..." मैने ललिता का फोन रखने से पहले कहा...

एक नज़र शन्नो की तरफ देखा जो अभी भी मुझे ही देख रही थी, उसने अपना ओवरकोट हाथ में उठाया हुआ था अब..

"गेट आउट................. प्लीज़...." मैने शन्नो से कहा..

मेरे ये तेवर देख के शन्नो उतर के घर की तरफ अंदर बढ़ने लगी जहाँ उसको ललिता वापस आती दिखाई दी..

"मोम आप यहाँ..." ललिता ने इतना ही कहा, के शन्नो उसे इग्नोर करके अंदर चली गयी

ललिता गाड़ी में बैठी और बोली

"भाई... सम्तिंग'स नोट गुड क्या.. क्या हुआ मोम को..?"

"चल, खाने पे..." मैने सिर्फ़ इतना ही कहा और हम खाने चले गये..

पूरे रास्ते में हमने कोई बात नहीं की.. मैने गाड़ी 'शिप ग्रिल आंड बार" की तरफ मोड़ दी... हम जैसे ही वहाँ पहुँचे , ललिता फिर बोली

"भाई, व्हाट हॅपंड...बोलो तो"

"नहीं, कुछ नहीं, चल मुझे भूख लगी है..." इतना कहके मैं गाड़ी से उतरा और अंदर जाने लगा.. ये भी परवाह नहीं कि मेरे साथ ललिता आई या नहीं.... मैं अंदर जाके बैठ गया, और 2 मिनट में ललिता आके सामने बैठी

ललिता के लिए खाना, और अपने लिए सिर्फ़ विस्की ऑर्डर कर के, मैं नीट पे नीट पीने लगा था.... मेरा ऐसा बिहेवियर देखके आस पास की टेबल के लोग भी मुझे घुरे जा रहे थे...

"भाई.. बस करो, क्या हो गया है आपको..."

"कुछ नहीं.. तूने खाना खाया, और कुछ खाएगी बहेन... " मैं अभी भी अंदर ही अंदर जल रहा था

"नहीं भाई... लेट्स गो... आइ आम स्केर्ड नाउ..." कहके ललिता वहाँ से चली गयी.. मैं बिल भर के वहाँ से गाड़ी की तरफ बढ़ा जहाँ ललिता ऑलरेडी मेरा वेट कर रही थी... हम गाड़ी में बैठ गये और खामोशी के साथ बढ़ने लगे... मैं कहाँ जा रहा था, किस तरफ बढ़ रहा था, कुछ होश नहीं था.. ये दारू का नशा नहीं था, पर शन्नो को चोदने के बाद दिल का एक सैलाब था... समझ नहीं आ रहा था मैने जो किया सही था या नहीं... ललिता को बताया वो सही था कि नहीं.... बस हर गली, हर रोड को नाप रहा हूँ जैसे... घूमते घूमते मैं एक ओवर ब्रिड्ज पे जाके रुका और गाड़ी से उतरके बाहर निकला... रात के करीब 11 बज रहे थे, धीमी धीमी सी हवा चल रही थी, दारू का नशा अब मीठा मीठा सा चढ़ने लगा था....

"भाई... बोल दो जो बोलना है प्लीज़.." ललिता मेरे साथ आके खड़ी हुई

"भाई बोल दो... ऐसी तो आज तक कोई बात नहीं जो मुझसे छुपाई है तुमने... फिर वो चाहे आपके जॉब की हो, या वो पेपर्स जो आपने...."

ललिता ने बस इतना ही कहा, कि मैं उसको घूर्ने लगा और आँखों से बंद होने के लिए कहा..

हम काफ़ी देर तक यूही ब्रिज पे खड़े रहे.. कुछ बोल नहीं रहे थे, धीरे धीरे हवा की तेज़ी बढ़ी, हवा ठंडी होने लगी.... कुछ सेकेंड्स में हल्की बूंदा बाँदी भी होने लगी... सीज़न की पहली बारिश, मेरे होंठों को छू रही थी... मैं बस आँखें बंद करके उस वक़्त को महसूस कर रहा था.. मैं हल्का महसूस करना चाहता था, एक भोज था दिल पे.. पता नहीं क्यूँ शन्नो के साथ उस हादसे के बाद, दिल स्थिर नहीं रहा... मैं आँखें बंद करके बारिश का मज़ा लेने लगा.. कुछ सेकेंड्स में ललिता ने मेरे कंधे पे हाथ रखा और मुझे देख के बोली

"भाई.. नहीं बताना चाहते तो इट्स ओके... बुत आप प्लीज़ मायूस ना हो.. हमने जो सोच रखा है, अंत वैसा हुआ तो मुझे आपके साथ ही ज़िंदगी निकालनी है, मैं आपको इस हालत में नहीं देख सकती.. और अगर अंत वैसा ना हुआ जो हमने सोचा है, तो मैं फिर आपको कभी देख नहीं पाउन्गि, आज नहीं तो कल, इन्हे सब पता चलने ही वाला है..."

ललिता के ये शब्द सुनके मेरा मन काफ़ी भारी हुआ और मैं उसे हल्का करने के लिए रोने लगा... करीब 5 मिनट तक मैं सिर्फ़ रोता ही रहा... कहते हैं रोने से मन हल्का हो जाता है.. मैं वहीं खड़ा खड़ा ललिता को देखता रहा, और आगे बढ़के उसके फोर्हेड पे किस करके कहा

"डोंट वरी.. जैसे हमने सोचा है वोई होगा.. डॉली को खो चुके हैं, तुझे कुछ नहीं होगा.. और आगे से ये शब्द कभी नहीं बोलेगी, समझी तू..." मैने ललिता को आँखों में देखते कहा

"ठीक है भाई.. अब चलें या यहीं भीगते रहना है" ललिता ने धीरे से मुझे मारते हुए कहा...

हम वापस अपनी कार में आ गये. जैसे ही मैने गाड़ी स्टार्ट की..

"भाई, ये लो... इससे शायद मन हल्का हो आपका.." ललिता ने सिगर्रेट आगे बढ़ाते हुए कहा.

"नहीं ललिता.. नहीं चाहिए मुझे अभी..."

"छोड़ दी है, कि ब्रांड नहीं है आपकी..." ललिता ने अपनी सिगर्रेट सुलगाते हुए कहा

"हेहहे.. चल दे , मैने उसके हाथ से दूसरी सिगर्रेट लेते हुए कहा...

सिगर्रेट के एक काश से ही मानो सब कुछ हल्का लगने लगा हो.. दिमाग़ में आया हुआ तूफान शायद थम सा गया था.. दो तीन कश और, मैं हवा में उड़ाने लगा था... धीरे धीरे रिलॅक्स होके, मैं सीट रिक्लाइन करके वहीं लेट गया और सिगर्रेट फूकने लगा..

'आइ टोल्ड यू... मुझे पता है आपको किस वक़्त क्या चाहिए..." ललिता अपने बाल खोलते हुए बोली

"यार.... बस एक बात है, आज जो तेरी मम्मी के साथ किया.. सच्ची कहूँ, मुझे समझ नहीं आ रहा क्यूँ किया... ना तो वो कोई बदला है, ना तो वो नफ़रत.. मैं ना चाहते हुए भी वो कर बैठा..." मैं बस इतना ही कह पाया कि ललिता बीच में बोली

" आइ नो भाई.. जब आपने मुझे बताया, तब मुझे भी गुस्सा आया..पर इसमे कसूर आपका नहीं है... अंशु का है.."

 


"व्हाट डू यू मीन अंशु का है.." मैने चोन्क्ते हुए कहा..

"हां भाई...क्यूँ कि जब मैं आपका रिप्लाइ करके वापस पूजा के पास जा रही थी तब अंशु किसी से अपने फोन पे बतिया रही थी... वो अपने कॉर्डलेस के स्पीकर पे बात कर रही थी, उसकी कॉन्वर्सेशन थी ....

"दीदी... चूत की आग मिटी या नहीं आपकी.." अंशु सामने शन्नो से फोन पे बोली

शन्नो:- नहीं छोटी, कहाँ... साला आया और पागल सांड़ की तरह चोद के चला गया.. समझ ही नहीं आया उसे अच्छा लगा के नहीं..

अंशु:- देखो दीदी, मैने उसमें आग लगाई थी मसेज करके, और अपने चुचे दिखा के, अब उससे ज़्यादा क्या करती.. और आपको सही टाइम पे मसेज किया मैने कि आप राज को फ़सा लो. अब इससे ज़्यादा क्या करूँ...

शन्नो:- हां छोटी... चल कोई नही, आज रात को आती हूँ तेरे पास, इतने दिन के ड्रामे से मैं भी थक गई हूँ... वहाँ आके बात करती हूँ, बाइ

"व्हाट !!! यू मीन.."

मुझे फिर टोकती हुई ललिता बोली"हां भाई... शायद मा को अंशु ने मसेज किया था कि उसने आपको भड़काया है अपने अंग प्रदर्शन से, इसलिए मा ने आपको अपने कमरे में बुलाया.. वो तो आपसे ये सब करना ही चाहती थी..." ललिता ने उदास होके कहा

"उदास मत हो यार प्लीज़.... आइ आम वेरी सॉरी यार.." मैने ललिता को अपनी बाहों में लेते हुए कहा

ललिता जैसे फ्री एर बेलून की तरह मेरी बाहों में गिर गयी और सिसकने लगी...

"डॉली की मौत , भाई ... मम्मी ये सब ड्रामा कर रही थी... मतलब इनस्पेक्टर सही था, शायद घर वाला ही कोई है... डॉली जानती थी कि वो.... और वो कुछ ना कर सकी.... नो भाई नो आहुऊहह ह्मम्मुंम्म्म..." ललिता सिसकते हुए बोल रही थी....

मैने ललिता को कस्के अपने से गले लगाया और उसके माथे को चूमते हुए कहा

"नो नो.... प्लीज़ बेबी, डोंट क्राइ... ये सब ही हमे सुलझाना है ना.. तू रोएगी तो कैसे होगा ये पूरा हाँ.. चलो अब प्लीज़ रोना बंद करो..."

कुछ देर तक ललिता वहीं बैठे बैठे रोती रही.. अपने आँसू सुखा के, ललिता ने फिर अपने लिए एक सिगर्रेट सुलगा दी...

"मुझे नहीं देगी अब... ऐसा क्यूँ..." मैने अपनी आँखें मटकाते हुए पूछा , शायद ये देख के उसे अच्छा लगता

"लो भाई.. मेरी में से ही...." कहके ललिता ने अपनी सिगर्रेट मुझे दे दी....

हम दोनो एक सिगर्रेट शेअर करने लगे... वहाँ बैठे हमे आधे घंटे से उपर हो गया था... इस बीच हमने 6 सिगर्रेट्स भी फुक डाली.. कुछ भी है, लेकिन लड़की के साथ सिगर्रेट शेअर करके स्मोक करने का मज़ा ही अलग है. चाहे वो बहेन हो या बीवी या गर्लफ्रेंड.... ललिता मेरी बहेन थी, पर इन दिनो हुए हादसों की वजह से हम भाई बहेन से कहीं ज़्यादा आगे निकल गये थे..

"चलें.. " मैने ललिता से पूछा

"हां भाई चलो.. देर हो गयी है.." ललिता ने सीट पे सीधे होके कहा

हम गाड़ी में घर की ओर बढ़ने लगे, कि अचानक ललिता ने मुझसे सवाल पूछा

"भाई... कभी मेरे साथ तो ऐसा नहीं करोगे ना..."

ललिता का मतलब, जो आज शन्नो के साथ किया वो

"नहीं डियर... मैं अब और किसी को खोना अफोर्ड नहीं कर सकता.." मैने फर्म जवाब दिया... उसकी आँखों में देखे बिना

मेरा जवाब सुनके ललिता ने कुछ देर कोई जवाब नहीं दिया.. फिर कुछ देर बाद, ललिता वापस बोली

"अगर मैं सामने से इन्वाइट करूँ तो भी...."

उसके ये शब्द सुनके मुझे कुछ सूझा नहीं कि क्या कहूँ... कुछ सेकेंड्स की खामोशी के बाद मैने गाड़ी साइड में रोकी, और उसकी आँखों में देखते हुए कहा

"बिल्कुल नहीं ललिता.. हमे इस दलदल से निकलना है, निकलने की कोशिश में हम खुद अंदर ना चले जायें.. प्लीज़ तुम खुद को काबू में रखो, और अगर मैं बहक जाउ तो प्लीज़ मुझे रोक देना... एक तेरा रिश्ता ही मुझे अच्छा लग रहा है... कुछ ग़लत करके मैं इसे बिगाड़ना नहीं चाहता...."

मेरा जवाब सुनके ललिता ने एक हल्की सी स्माइल दी...

"लव यू ब्रदर.... मैं बस चेक कर रही थी... आंड हम में से कोई नहीं भटकेगा रास्ता.." कहके ललिता ने मेरे गालों पे हल्की से किस दी और हम फिर घर की तरफ निकल गये.. जैसे हम आधे रास्ते पे पहुँचे, ललिता ने कहा

"भाई... आगे से राइट लेना.."

"फिर क्यूँ.. तुझे वहीं जाना है अब" मैने अंशु के घर के लिए पूछा

"नहीं भाई.. मुझे नहीं हम चलेंगे अंदर.... आपको कुछ दिखाना है..." ललिता ने रहस्यमय तरीके से कहा..

"मैं कैसे चलूँगा यार...कोई देख लेगा तो.. जमाई हूँ दट डज़ नोट मीन कि रात को 1 बजे उनके घर जाउ" मैं सहमत नहीं था ललिता की बात से

"ओफफो !!! आप चलो तो, बड़े आए जमाई वाले, उस साली से शादी करोगे ही नहीं तो... आप बस गाड़ी मोडो अब" ललिता ने हुकुम चलाते हुए कहा

मैने ज़्यादा ज़िद्द ना करते हुए , गाड़ी अंशु के घर की तरफ मोड़ दी.. करीब आधे घंटे में हम अंशु के घर के बाहर पहुँचे... उसकी सोसाइटी थी बहुत हाई फाइ, लेकिन रात के करीब 1.30 बजे कोई घर में लाइट नहीं जल रही थी...

"स्ट्रेंज.." मैने खुद से थोड़े उँचे स्वर में कहा

"वेट्स स्ट्रेंज भाई..." ललिता ने शायद मेरी बात सुन ली

"नतिंग... इतनी हाई फाइ सोसाइटी है, फिर भी लोग जल्दी सोते हैं.. कमाल है ना" मैं आस पास देखने लगा

"कोई नहीं सो रहा.. अंधेरे मे राज़ दफ़न होते हैं यहाँ.. जो शायद हम जानना भी ना चाहें... खैर, आपकी होने वाली बीवी जाग रही होगी... देखना चाहोगे उसे ?" ललिता ने मुझे टीज़ करते हुए कहा..

"नहीं.." मैने सिर्फ़ एक ही शब्द कहा....

"ओके.. आपकी प्यारी सासू को भी नहीं. वो भी जाग रही होगी.." ललिता ने फिर मुझे चिढ़ाने के लिए पूछा

"नहीं.. नो इंटेरेस्ट यार..." मैं चिढ़ने लगा था अभी

"ओके.... मेरी मोम को भी नहीं...." ललिता इस बार मेरे करीब आने लगी

"व्हाट्स रॉंग यार... क्यूँ मस्ती कर रही है..नहीं देखना , ना तो अंशु को, ना तो पूजा को, ना तो आंटी को.." मैं थोड़ा उँची आवाज़ में बोला..

"हहेहहे.... चलो, तीनो को एक साथ देखो आप... कहीं अलग अलग जाने की नो नीड भाई..." ललिता ने मस्ती भरे अंदाज़ में कहा

"व्हाट डू यू मीन बाइ एक साथ..." मैने ललिता का हाथ पकड़ के उसे रोक लिया

"बहुत जल्द पता चल जाएगा इनका बॉस कौन है भाई..." ललिता ने केवल इतना ही कहा कि मैने उसे बीच में टोक दिया

"यू मीन उनकी मीटिंग है क्या, या कुछ और..." मैं जिगयासा में आके कहा

"मीटिंग नहीं... फक फेस्ट भाई..."

"फक्फेस्ट..." कहके मैं चोन्का तो नहीं, बट मुझे ये एक्सपेक्टेड नहीं था..

 


"हां, चोंक क्यूँ रहे हो.." ललिता ने सवाल पूछा

"यार, अभी तो घर पे माहॉल अच्छा होने लगा है, उसमे ये लोग कैसा ऐसे कर सकते हैं" मैने डॉली के संधर्ब में कहा

"भाई... आइ हेट टू से दिस, बट सही में मेरी मासी और मेरी मा.. एक नंबर की रंडिया हैं, और पूजा तो उनसे भी बड़ी.. उनको कोई फरक नहीं पड़ता... मुझे दुख तो है, बट लाइफ नीड्स टू मूव ऑन ना..." ललिता ने मेरे हाथ से गाड़ी की चाबी ली, और ऑटो लॉक करके उपर चलने को कहा..

क्यूँ कि मैं इससे पहले अंशु के घर नहीं आया था, मैं ललिता के पीछे पीछे चलने लगा... अंशु का घर एक दम आलीशान तरीके से बना हुआ था.. मैं गेट के अंदर जाते ही एक आलीशान गार्डन जिसके बीच में एक फाउंटन लगा हुआ था.. थोड़ा अंदर जाते ही गाड़ियों की पार्किंग. एक नज़र मैने गाड़ियों पे घुमाई, एक से एक फॉरिन ब्रॅंड्स थी.. आस्टन मार्टिन , बेंट्ली, जगुआर, वोल्वो.... गाड़ियों की पार्किंग क्रॉस करके मैं हॉल जाने का दरवाज़ा... इतनी बड़ी गाड़ियाँ मैने पहली बार नहीं देखी थी, पर मेरा दिमाग़ खराब हो रहा था... मैं वहीं रुक सा गया था...

"क्या हुआ भाई... रुक क्यूँ गये..." ललिता ने मुझे वहीं रुक देख सवाल पूछा

"ललिता.. कम हियर प्लीज़... मुझे एक बात बता, इतना बड़ा घर है, तो सेक्यूरिटी गार्ड, ड्राइवर.. कोई नहीं है यहाँ आस पास.." मैने कुछ और पूछना चाहा, बट ये मूह से निकल गया

"ओफफो भाई... नहीं, वो लोगों को छुट्टी मिली है... अब कुछ दिन तक वो लोग नहीं रहेंगे, क्यूँ कि यहाँ जब भी फक फेस्ट होता है, वो लोग जलसे मारते हैं काम से.. और पूजा ने मुझे बताया, जो इनका मैन बॉस है, वो आएगा, इसलिए सब नौकरों को छुट्टी है.. और एक और बात, इतनी बड़ी गाड़ियाँ आपके लिए कोई बड़ी बात नहीं, पर अंशु के घर पे हैं, इसमे कोई बड़ी बात नहीं... अंशु भी बड़ी पार्टी है, आप जानते नहीं हो... पर आप फिकर ना करो, ये सब आपका ही होने वाला है ना.." ललिता ने आखरी लाइन मुझे आँख मारते हुए कहा

"और एक बात बता तू ललिता... पूजा से पूछती क्यूँ नहीं है कि बॉस कौन है.. हम डाइरेक्ट खेल ख़तम करते हैं.." मैने जोश में आके कहा

"पूछा भाई, बट इन लोगों ने डॉली को बताया था, और उस बेचारी को कुछ किए बिना भी ये सज़ा मिली... मुझे बताने में वो लोग अब बहुत हिचकिचा रहे हैं... और क्यूँ कि इन सब को शक ना हो, मैने हमेशा इन्हे दिखाया है कि मैं आपसे बिल्कुल बात नही करती, और उनसे भी थोड़ी दूरी बनाए रखती हूँ. क्यूँ कि अगर मैं उनके ज़्यादा नज़दीक गयी तो मैं भी उन लोगों की वाच लिस्ट में आ जाउन्गि.. तो अगर बिज़्नेस की लॅंग्वेज में बोलूं, तो आइ आम आक्टिंग जस्ट लाइक आ स्लीपिंग पार्ट्नर... जो काम तो करता है, बट डिसिशन्स नहीं लेता.... समझे मेरे स्वीट हार्ट भैया.. अब चलो आगे" कहके

ललिता आगे बढ़ने लगी, और मैं फिर उसके पीछ चलने लगा...

चलते चलते मैं यही सोच रहा था, एक बार इन सब झमेलों से निकल जाउ, डॅड को कन्विन्स करूँगा कि अब वो भी ऐसा बंगलो ले लें... कब तक हम उस पुराने घर में रहेंगे.. आख़िर मेरे बाप का भी नेटवर्त कम नहीं है...

ये सब सोचते सोचते हम लोग अंशु के बंगले के हॉल में आ गये... अंशु के घर का हॉल, किसी कुमार फिल्म का सेट लग रहा था.. राउंड लंबी स्टेर्स, उसपे लाल कलर का कार्पेट बिछा हुआ... हॉल के बीच में एक बड़ा सा झूमर लगा हुआ था..मैं ये सब देख के अंदर ही अंदर जल रहा था...

मन से सब कुछ निकाल के बस अब एक लिस्ट बना रहा था, कि हमारा बंगलो कैसा होगा, कौनसी गाड़ियाँ होंगी.. कौनसा झूमर, कर्टन्स.... मैं ये सब सोच ही रहा था, तभी ललिता ने कहा

"भाई... यहाँ, धीरे से ओके.. कुछ मत बोलना अब.. यहाँ आओ..."

"ह्म्म्मछ...." इतना कहके हम नीचे बने एक लंबे कॉरिडर में चलने लगे.. जूतों की आवाज़ ना हो इसलिए हम जूते गाड़ी में रख आए थे.. कॉरिडर के एक कोने में एक रूम था, जिसकी खिड़की के पास जाके ललिता खड़ी हो गयी...

"भाई... इधर से देखो, और सुनो सब ओके... मुझे बताना सब गाड़ी में फिर ओके..." कहके ललिता जाने लगी, तभी मैने उसका हाथ पकड़ के अपने तरफ मोड़ लिया

"क्या बताऊं तुझे... यहाँ खड़ी रहके शांति से सुन और देख.. अगर मैं पकड़ा गया तो तू मुझे बचाएगी ना.. घर की चाबी तेरे पास है , मैं अंदर कैसे आया , क्या जवाब दूँगा.... और मैं कुछ नहीं करूँगा ये सब देख के , ट्रस्ट मी ऑलराइट... नाउ रिमेन हियर.."

"ओके..." ललिता ने अपनी धीमी सी आवाज़ में कहा..

"वैसे ये रूम किसका है...." मैने ललिता से अपनी धीमी आवाज़ में पूछा

"आपकी होने वाली बीवी का भाई.. मैं यहीं थी आपके साथ बाहर जाने से पहले, जब अंशु और मोम की कॉन्वर्सेशन से पता चला यहाँ आज ये सब मिलने वाले हैं, तो मैने जान बुझ के खिड़की बंद की, पर अंदर से स्टॉपर नही लगाया.. अब अंदर देखो भी..." कहके ललिता ने मेरा चेहरा अंदर की तरफ किया

"अरे क्या देखूं...अंदर कोई हो तो.." मैने इतना कहा ही के सामने से तीन देवियाँ आती दिखाई दी... त्रिमूर्ति एक साथ कदम से कदम मिला के चल रही थी... अचानक उनके पीछे दो आदमी और दिखाई दिए मुझे... एक तो मेरा अंकल था विजय, दूसरे को मैं पहचान नहीं पाया... ललिता ने कहा वो पूजा का बाप है... सब लोग उस रूम में बने सोफे और बेड पे सेट हो गये... शन्नो और अंशु क़हर सा ढा रही थी.. उनके चुचे इतने बड़े हैं कि किसी भी आदमी का लिंग खड़ा हो जाए उन्हे देख के... उपर से आज कुछ ज़्यादा ही उछल रहे थे... पूजा रंडी की तरह विजय और अपने बाप के बीच में बैठी हुई थी..

पूजा:- उम्म्म.... आज तो मोम ने बहुत बड़ा काम सेट कर दिया है... वाह मोम, क्या सही तीर फेंका है, इंडोनेषिया की वजह से ये डेट जल्दी निकल जाएगी अब...

अंशु:- हां बिल्कुल, पर आज उस चूतिए राज को इन्वाइट भी दिया था, देख ना साला आया ही नहीं..,,, चूत की खुजली का क्या करूँगी अब...

पूजा:- अरे मोम, क्यूँ गुस्सा हो रही हो.. आपका यार भी तो यहीं है ना, उसको संतुष्ट करो अब तो.. राज को भूल जाओ, राज का लंड क्या, राज की उंगलियाँ भी नहीं बचेंगी अब.. एक बार मैं उस घर में जाउ, फिर देखना, राज के मा बाप के साथ राज को भी ख़तम कर दूँगी... इतना सताउन्गि, इतना सताउन्गि, कि साला पछताएगा और भगवान से कहता फ़िरेगा. "हे भगवान , तूने मुझे इस धरती पे क्यूँ भेजा भगवान.."

आज पूजा की आवाज़ में हरामीपन सॉफ झलक रहा था... पूजा की ये बात सुनके विजय ने कहा

"हहहाहा... बस कर मेरी रानी पूजा.. कहाँ उस मादरचोद का नाम ले लिया तुमने.. छोड़ो उसको, हम दोनो के लंड काफ़ी नहीं है क्या तुम लोगों के लिए हाँ.." कहके उसने पूजा के बाप को ही फाइव दिया..

"मादरचोद नहीं... आज तो वो आंटी चोद बन गया है.. आज उसने मुझे जी भर के चोदा... पर भोसड़ी का चुदाई पूरी करके बस निकल गया... आज उसने मुझे एक रंडी की तरह ट्रीट किया है... सच्ची में, जब उसकी सारी जायदाद पूजा के नाम होगी, तब उसको उसी औकात दिखाउन्गि..." कहके शन्नो ने सिगर्रेट जलाई और कुछ ही सेकेंड्स में पूरे रूम में धुआँ सा फेलने लगा

 


"आए पूजा... काम होने के बाद अगर तूने अपनी मा चुदवायि और हमारे साथ धोखा किया, याद रखना तेरा हश्र भी वोई होगा जो डॉली का हुआ था.. समझी ना.." कहके पूजा के बाप ने भी शन्नो की सिगर्रेट लेके उसके पफ लेने लगा

"हां मेरी बेटीचोद पापा... आप चिंता ना करें, दादा दादी ने ये सब दौलत मेरे नाम की है ना, फिर भी आप अपनी रंडियों के साथ घूम रहे हो ना... ये घर, ये गाड़ियाँ, बॅंक बॅलेन्स, सब मेरा ही है ना.. आप यूज़ कर रहे हो ना,... मैने कभी हिसाब माँगा है क्या... और वैसे भी डॅड, 35 करोड़ में एक पुराना सा घर ही है और कुछ गाड़ियाँ और स्टॉक्स.... हम 7 हिस्सेदार हैं, 5 करोड़ में क्या होगा.. आप तो 4 ट्रिप मारोगे अपनी रखैल के साथ, और 5 करोड़ ख़तम.. 5 करोड़ मेरे लिए कोई बड़ी रकम नहीं है, बट ये तो बॉस ने स्पेशल कहा है मुझे, मैं उनका मान रखती हूँ तभी मैं इस काम में आप लोगों का साथ दे रही हूँ " पूजा विजय के लंड को उसकी पॅंट के उपर से सहलाती हुई बोली

'क्यूँ री मेरी रांड़ भांजी... फॅक्टरी में भी तो साली तू हिस्सेदार बन गयी है... उसका हिस्सा कौन देगा भेन की लौडी... अभी से चीटिंग करने लगी, साली कुतिया याद रखना, मेरी बेटी की बलि इस काम में लगी है..." कहके शन्नो गुस्सा होने लगी पूजा पे

"हां मासी.. आप क्यूँ फिकर कर रहे हो... रूको, सुनो ओह मेरे प्यारे अंकल.. फॅक्टरी का मन्थलि रेवेन्यू कितना है.. तो उसके बारे में भी बॉस से बात कर लेंगे... उसका हिस्सा भी तो डिसाइड करना है.." पूजा विजय की तरफ देखती बोली

"मन्थली रेवेन्यू का पता नहीं पूजा.. मैं फॅक्टरी काम करने नहीं जाता, मैं वहाँ वर्कर्स को बस भड़काने जाता हूँ, और भाई साहब के कॉंपिटिटर्स तक उनकी सब खबरें पहुँचाता हूँ... ताकि वो दिमागी तोर से अभी प्रेशर में आ जायें... काम तो करने दो मेरे सोतेले भाई को,

वो साला मेहनत करेगा तभी तो हमे उसका फल मिलेगा, पर साले की किस्मत अच्छी है, आज तक वर्कर्स उसके खिलाफ गये पर ज़्यादा देर ना रहे, और उसके कॉंपिटिटर्स भी कुछ ख़ास दम के नहीं हैं..." विजय पूजा के चुचों को सहला रहा था

"ये लो.... भोसड़ी के, एक बार तो कंपनी के काग़ज़ देख लेता, लंड जैसा दिमाग़ है चूतिए का.." पूजा के बाप ने विजय को गालियाँ देते हुए कहा..

'ओफफो.... अब बंद भी करो, कुल मिलाके बात ये है के अभी 2 दिन में राज और इस रांड़ की शादी फिक्स हो जाएगी... मैं दबाव बनाउन्गि कि शादी 10 दिन में हो... फिर हमारा काम पूरा,.... अब इस बात पे जश्न मनाते हैं जी.. चलो दारू तो लाओ...." अंशु ने विजय से कहा, विजय वहाँ से उठके थोड़ी देर के लिए गायब हो गया.. कुछ देर में वो दारू की बॉटल और 2 ग्लासस लाया., और आके वापस अपनी जगह पे बैठ गया...

"ये 2 ग्लासस क्यूँ.. हम नहीं पिएँगे क्या.." कहके अंशु और शन्नो उस सोफे के पीछे आई जहाँ पूजा विजय और उसका बाप बैठे हुए थे..

"अरे इन ग्लासस में हम पिएँगे, और हमारे लबों से तुम पीयो हमारी रंडियों... " कहके विजय ने ग्लासस भरे और सब लोग ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे...

(बहनचोद... इतने पैसे, फिर भी दारू कौनसी, रॉयल स्टॅग... किसी ने सच ही कहा है, मनी कन्नोट बाइ क्लास...) मैने सोचते सोचते नज़र घुमा ली खिड़की से, तब ललिता ने कहा

"ज़्यादा मत सोचो.. सामने देखो, और सुनो..."

मैं फिर सामने देखने लगा, वो लोग अब ज़ोर ज़ोर से हँस हँस के दारू पीने लगे... पोज़िशन ये थी, पूजा विजय और उसके बाप के बीच में बैठी थी और पीछे अंशु और शन्नो खड़ी थी... सब लोग खुश लग रहे थे और दारू पे दारू पीए जा रहे थे... जहाँ विजय एक सीप लेता, तभी पूजा उसके होंठों से अपने होंठ चिपका लेती और दारू के घूँट को अपने अंदर उतार देती.. जब पूजा का बाप सीप लेता, तब पीछे से शन्नो उसके होंठ चुस्ती, और अपनी जगह पे जाके फिर अंशु के होंठ चुस्ती जिससे उसके होंठ भी गीले होते... ऐसा करते करते सब ने एक एक ग्लास ख़तम किया और फिर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे..

धीरे धीरे कर, दारू का नशा उन सब पे चढ़ने लगा... जब विजय ने पूजा के होंठों से होंठ लगा के उसे घूँट पिलाया, तब अंशु मदहोश सी होने लगी

"उम्म्म्म आहह... मौसा मेरे आहह हेहहहे...क्या होंठ चूस्ते हो अहहह...उम्म्म्म और काटो ना अओमम्म्मम" कहके पूजा विजय के होंठों चूसने लगी, और उसका बाप उसके ड्रेस के उपर से ही उसके चुचे सहलाने लगा... ये देख अंशु और शन्नो भी गरम होने लगी और सिसकारियाँ लेने लगी...

"आहह उम्म दीदी आहह... मेरी इस रांड़ ने तो आग लगा रखी है मेरे शरीर में उम्म्म...अहहहहा" कहके अंशु अपने एक हाथ से अपनी चूत और दूसरे हाथ से शन्नो की चूत को सहलाने लगी

"आहहहह मेरी बहना तो दे दे ना तेरा बदन आहहह.. मैं आग भुजाति हूँ इसकी उम्म्म आहह...." कहके शन्नो और अंशु के होंठ जुड़ गये और वो लोग एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे..

शन्नो और अंशु एक दूसरे को बेतहाशा चूमने में बिज़ी हो गये थे, वहीं पूजा को विजय और उसके बाप ने मिलके नंगा करना चालू कर दिया था.. जहाँ शन्नो और अंशु अब सिर्फ़ ब्रा पैंटी में आ गये थे, पूजा अब नग्न अवस्था में आ चुकी थी.. विजय और उसका बाप अब दारू उसके चुचे पे बहाने लगे.. विजय दारू उसके चुचों पे बहाता और नीचे पूजा का बाप उसके निपल्स पे लगा हुआ जैसे दारू उसके निपल्स से निकल रहा हो.. विजय एक हाथ से दारू गिराता और दूसरे हाथ से उसके चुचे मसल्ने लगता... पूजा को ये दोहरा मज़ा आने लगा था.. वहीं अंशु और शन्नो ने अब अपने कपड़े उतार

लिए थे, और दोनो एक दूसरे को चूसने में लगी हुई थी..

"अहहहहहा.... यॅ डॅडी आहहह बाइट मी, आहहहहा सक मी उफफफफ्फ़ उम्म्म्ममम हाहहान्ंननणणन् हाआन्नान मौसा और मस्लो ना इन चुचों को आहहहामम्म्मम... येआः डॅडी माइ डॅडी उहह सक देम हार्ड उउईइ आहह...एम्म्म , मौसा और मस्लो ना इन्हे आअहह......" पूजा मस्ती में आके बड़बड़ाने लगी

"अहहहहहः मेरी बिटिया रानी उम्म्म यूंममाहहह सिक अहहहः...उम्म उम्म्माहह पिछच्छ पिचह...उम्म्म्म आहाहहा टेस्टी दूध है मेरी बिटिया रानी का अहहह..... अहहहः ज़रा इधर भी तो देखो, मेरी रांड़ बेटी की गुफफा अहहहहहा..." पूजा का बाप उसके निपल्स को चूस्ते चूस्ते उसकी चूत में भी दो उंगलियाँ अंदर बाहर करने लगा..

"आहहहाः डॅडी यॅ फक मी हार्ड आहहाहा... और तेज़ी से कीजिए आहहहहा यॅ ओह हाहहहा फक माइ पुसी उम्म्म अहहहहाः... और चोदिये ना

अहहहहा.. येआः डॅडी आइ आम कमिंग उम्म्म्म अहहहहहहः.... ओह्ह अहहहहहा... मेरे मौसा आहहहहहा. और मस्लो इन चुचों को अहहहः... डॅडी और तेज़ और तेज़ आहह... यॅ हार्डर डॅडी अहहहहहा..... और हानननना हाानान आइ आम कमिंग अहहाहा.. ओह नो शिट मम्मी आहाहहाहहा मुंम्म यय्या अहहहहहहा... मैं गई अहहहहहा ओह्ह्ह्ह..... ओूवह अहहहहाहा...." कहके पूजा ने अपनी चूत का पूरा पानी उसके बाप की उंगलियों पे छोड़ दिया... पूजा के बाप ने झट से उंगलियों को अपने मूह में डाला और उन्हे चूसने लगा

"अहहहम्म... यम्मी है मेरी रांड़ का पानी तो उम्म्म्म..." पूजा का बाप अपनी उंगलियाँ चाटने लगा जिनमे पूजा का पानी लगा हुआ था

विजय अब भी पूजा के चुचों को मसल रहा था.. उसके निपल्स एक दम कड़क और लाल हो चुके थे.... पूजा से और बर्दाश्त नहीं हो रहा था..

"उम्म अहहहः... आजा ने मेरे रंडवे मौसा... इन्हे चूस भी ले अब भडवे उम्म्म्म...." कहके पूजा ने विजय के मूह में अपने चुचे दे दिए और विजय एक बच्चे की तरह उसके निपल्स चूसने लगा....

'चलो अब हमे भी तो दो ये रंडी चूसने को अहहहाः... हम भी तो चखें इसका पानी अब..." अंशु शन्नो को छोड़ के आगे आई और पूजा को उठा के बेड पे ले गयी... शन्नो ने उन्हे जाय्न किया और तीनो एक दूसरे को चूमने लगी.... ये देख पूजा के बाप ने कहा

"उम्म्म्म कितना खुश नसीब हूँ मैं आह... चलो रंडियों, अब लेज़्बीयन मूवी दिखाओ हमे...." पूजा का बाप अपना लंड हिलाते हुए बोला और विजय भी अब सोफे पे अपनी टाँगें चौड़ी करके अपने लंड और टट्टों को मसल्ने लगा... ऐसा लग रहा था मानो कोई लाइव लेज़्बीयन शो देखने बैठा हो

"हां जी मेरे हुज़ूर... हम तो पैदा ही हुए हैं आपके लंड की गुलामी के लिए.... आजा मेरी बेटी, बाप को खुश कर दे अपने... ये चुचे दे ना मुझे आहह.. उम्म्म्म आहहहहहा केसर आम से भी मीठे तेरे चुचे अहहहहा... उम्म्म्मम.... दीदी आप भी तो मज़ा लो इस भडवि का औहमम्म...." कहके अंशु शन्नो के पास गयी और उसका एक हाथ पूजा के चुचों पे रखवाया और एक हाथ उसकी चूत पे रखवाया.. और खुद फिर से उसके लेफ्ट चुचे को मूह में लेके चूसने लगी.. शन्नो भी अब तेज़ी से पूजा की चूत को रगड़ने लगी थी और उसका दूसरा चुचा चूसने लगी थी... पूजा के दोनो चुचे अब उसकी मा और मासी के मूह में थे , और दोनो के हाथों की उंगलियाँ तेज़ी से उसकी चूत रगड़ रही थी... इन तीनो को देख के उधर विजय और पूजा का बाप तेज़ी से अपने लंड को हिलाने में लगे हुए थे.. दोनो को देख के ऐसा लग रहा था कि दोनो अपनी चरम सीमा पे पहुँच चुके हैं...

"आहहहहा माअममम आहहाहहा मासीई आहहहा... और रागडो ना आहहहहा, मैं आने वाली हूँ अहहहहा और रागडो उम्म्म्मम अहहहहहा...ुआहहहा हाआंनाना और तेज़ चोदो ना अहहहाहा..... हननाना माई गयी माआ उफ़फ्फ़ उईईई आहहाहहहः....." चिल्लाके पूजा दूसरी बार झाड़ गयी

"ऊहंब अहहहहहा..... ओह्ह्ह्ह अहहहह... आअहह " इन आवाज़ों के साथ पूजा का बाप और विजय भी झड़ने लगे....

 


ऐसा सीन देख के मेरी हालत तो खराब हो चुकी थी, पर मैं ललिता को आँखों में नहीं देख सकता था... मैने टेढ़ी नज़र से देखा ललिता को, उसकी हालत भी खराब लग रही थी... उसका चेहरा पूरा पसीने से भीग चुका था, और उसने अपने हाथ अपने शॉर्ट्स की पॉकेट में डाल रखे थे..... इससे ज़्यादा नोट नहीं कर पाया मैं और फिर वापस अंदर देखने लगा..

"भाई... आइ कन्नोट स्टॅंड अनीमोर प्लीज़.. मैं जाउ" ललिता ने इनोसेंट्ली कहा

"क्यूँ.. रुक अभी, मैन चीज़ तो सुननी है, आंड मैं कंट्रोल करके खड़ा हूँ ना, तू भी कंट्रोल कर.." मैने हल्की सी हँसी के साथ ललिता का मज़ा लेते हुए कहा.. हम फिर अंदर देखने लगे..

"अरे मेरी रंडियों... अभी हमारा लंड कौन खड़ा करेगा, हमारा तो माल ही निकल गया..." विजय अपना मुरझाया हुआ लंड हाथ में लेके बोलने लगा सामने बैठी औरतों से

"हम करेंगे जी.. और कौन करेगा... अभी रुकिये..." ये कहके शन्नो अंशु और पूजा तीनो बेड पे अपनी दोनो घुटनो के बल खड़े हो गये और एक दूसरे को चूमने लगे.. तीनो जान एक दूसरे के होंठों को चूमने लगे, कोई किसी के चुचे मसलता , तो कोई किसी के निपल्स के साथ खेलता.. लेकिन तीनो ने अपनी अपनी उंगलियाँ भी एक दूसरे की चूत में डाल रखी थी और एक दूसरे को चोदे जा रहे थे... जहाँ तीनो की गति तेज़ होती जा रही थी वहीं वो एक दूसरे को आँखों में आँखें डाले देखते जा रहे थे

"उउउम्म्म्म आहहाहहा.. मेरी रंडी मा, मदरजात मासी अहहाहाः.... तुम्हारी मा के भोस्डे में गधे का लंड डालूं बेन्चोद अहहहहा... अभी देखो... " ये कहके पूजा ने शन्नो और अंशु को बेड पे धक्का देके सुला दिया और उनकी चूत में दोनो हाथों की तीन तीन उंगलियाँ घुस्सा दी और उन्हे तेज़ी से चोदने लगी

"अहहहहहा उहन्न अहहहहा.... अब बोलो भैन की लोड़ियों अहहहहहा.... और बोलो भडवि माँ आआहाहा... मेरी रांड़ मासी उहहुहह अहहहहहा.....एयहहा आयआःहाहा आहाहहा.. और चोद बेटी अहहहहहा अहहहः यआःा फक मी डॉटर अहहहहहा.... फक मी स्लट अहहहहहहा फास्टर फास्टर आहाहा यआःाहहहा.... कम ऑन अहहहहहा और चोद ना साली दम नहीं है क्या अहहहहहा.. हाँ मेरी रांड़ मौसी ये ले अहहहहहहा..." अंशु शन्नो और पूजा पागल से बन गये थे और अब अंशु ने 4 उंगलियाँ उन दोनो की चूत में डाल दी थी.... चूत का भोसड़ा बन चुका था देखा जाए तो... पूजा सामने बैठे विजय और अपने बाप को देखे जा रही थी, बदले में वो भी अब खड़े हो चुके थे अपने तने हुए लंड के साथ... आगे आके बेड पे वो लोग भी सेट हो गये, और अपने मर्दों का इशारा समझ के पूजा ने अपने हाथ दोनो की चूत से बाहर निकाला और उन दोनो का पानी अपने मर्दों के मूह में दे दिया... पूजा का हाथ निकलने से अंशु और शन्नो को थोड़ी राहत मिली, पर ज़्यादा देर तक नहीं.. विजय और पूजा के बाप ने अपने गधे जैसे लंड को उनकी चूत पे सेट किया और धददड़ चोदने लगे.... अंशु विजय से चुदवा रही थी और शन्नो पूजा के बाप से.. पूजा अब दोनो मर्दों का साथ दे रही थी... कभी किसी के होंठ चूमती, तो कभी किसी के निपल्स मूह में लेती...

इधर दोनो मर्द अपना अपना लंड किसी मशीन की तरह चला रहे थे, वहीं पूजा अब अपनी चूत फेला के अपनी माँ के उपर बैठ गयी और उससे अपनी चूत चटवाने लगी...और अपने एक हाथ की उंगली शन्नो के मूह में डाल दी...

"अहहहहहः चाट ले मेरी चूत मेरी माँ अहहहाहा.... अहाहहाः मासी, मेरी उंगली को लंड समझ ले ना अहहहाहा... अहहहहा और चोदो इन दोनो को साले भडुओ अहहहा......" कहके पूजा रंडीपन्ति पे उतर आई थी

"अहहाहा... और चोद अपनी जीभ से अहहहः.. मेरी मा रंडी साली अहहौमम्म्मम...... और चोद ना मेरे बाप अहहहा.. साले दम नहीं है क्या छक्के साले अहहहा.... अपना मूसल पेल दे इस रांड़ के अंदर अहहहा.. अपनी साली को चोद भडवे अहहहहा..... और मेरे मौसा साले, तू क्या अपनी बेटी ललिता को चोद रहा है क्या साले अहहहहा... रहम मत कर इन आआहा उफफफफफ्फ़ ओमम्म्मममम इन रंडियों पे अहाहाहा.... और चोदो भैनचोद अहहहहः... इनकी माँ चोद डालो, इनकी बेटी चोदो अहहहा...... ज़िंदगी में अब से बस चुदाई ही करनी है अहहहहा... पूरी ज़िंदगी आश कुत्तों आहहहा.. हाआँ मेरी माँ अहहहहा और ज़ोर से चोद ना अपनी बेटी को औआ अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओउफ़फ्फ़.... मैं जा रही हूँ माआहाः अहहहा....." कहके पूजा झड़ने लगी और जैसे ही वो झड़ी, अंशु के उपर से उठके अपनी चूत शन्नो के मूह पे रख दी और अपना पानी उसे पिला दिया..

 


"अहहहहः मेरी मासी आहहा.. कैसा लगा अपनी रांड़ भांजी का पानी अहाहहा.. बोल ना भडवि उम्म्म्म हाहाहा....."

"आहाहहाः ओह्ह्ह्ह उफफफफ्फ़ येअह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आौर ज़ोर से चोदो ना आहाहहहा.... हां मेरी रांड़ बिटिया, अहहहहः मेरी रांड़ भांजी उहह फफफफ्फ़.... मस्त था, अहहहहाहाहहा... और ज़ोर से चोदो ना मुझे अहहहहा..... " शन्नो पूजा और पूजा के बाप से बोलने लगी

"फ़च्छ फ़चह...अहहहहा ओह... उम्म्म्म अहहहहहहा हाआँ मेरी रंडियों अहहहहा.... और लो अंदर अहहहहा... मेरी बेटी पूजा अहहहहा.. मेरी रंडी साली, मेरी रंडी बीवी अहहाहा.. कितने नसीब वाले हैं हम अहाहा.. फ़च फ़च फ़च फ़च....." विजय और पूजा का बाप अपने धक्के मारते हुए बोलने लगे...

पूजा उठके अपने बाप और विजय के लंड के पास खड़ी हुई और नीचे बैठ के उनके टट्टों पे जीभ फिराने लगी....

"उम्म्म्म आहाहहा... मॅनचरियन बॉल्स आहाहहा हहहहहा... मेरे मर्द हो तुम आहाहा.. और चोदो इन हरामी जनियो को आहहहा.... उम्म्म्म आइ लव युवर बॉल्स अहहाहा...." कहके पूजा अपने बाप और विजय के टट्टों पे हाथ फिराती, जीभ फिराती और उन्हे मसल्ने लगती.. ये हमला शायद वो दोनो बर्दाश्त नहीं कर पाए और दोनो एक साथ झड़ने लगे..... विजय के लंड को पूजा ने अपने मूह में ले लिया और पूजा के बाप ने अपना पूरा माल अंशु और शन्नो के मूह पे छोड़ दिया

"आहहाहा... ओह आहहहहा..... ओह माइ गोड्ड़ अहहाहा...... हुह अहहा हा अहहहाः हा अहहहा... आज तो मज़ा आ गया... " विजय अपनी उखड़ी हुई साँसे संभालते बोलने लगा....

"हां मेरे चोदु मौसा आहाहः... क्या चुदाई करते हो उम्म्म्म... गधे जैसा लंड ही अच्छा है आप में.... काश इतना अच्छा दिमाग़ भी होता आपको अहाहहा..." पूजा विजय की गोद में बैठ कर बोली

"तेरे मतलब क्या है रंडी साली उः हा अहहा.." विजय पूजा के निपल्स को मसालते हुए बोला

"मतलब ये साले भडवे मौसा, कंपनी का रेवेन्यू तो पता नहीं है, 5 करोड़ रुपये का करेगा क्या तू" पूजा हंस के विजय का मज़ाक उड़ाती हुई बोली

"तेरे जैसी रंडिया खरीडुँगा भडवि साली.....अहहहहहा..." ये कहके विजय पूजा की चूत में फिर उंगली डालने लगा.. अब की बार पूजा ने उसे रोक दिया, और खुद उठके गान्ड मटकाती हुई अपना मोबाइल ले आई

"चलो अब बॉस से बात करते हैं.... स्पीकर पे करूँ, हम सब बात करते हैं... क्या बोलते हो" पूजा ने हंस के ऑफर दिया सब को...

"हां हां चलो... लगाओ फोन, आज तो वो खुश होंगे..." शन्नो ने अपनी गान्ड उछाल कर कहा

"रूको.." कहके पूजा ने फोन उठाया और नंबर डाइयल किया

कुछ सेकेंड्स के बाद, एक आदमी ने सामने फोन उठाया

"हेलो माइ बेबीडॉल... क्या कर रही हो" सामने आदमी ने कहा..

"बस आपके नाम से ही चुद रही थी.. आज तो मज़ा आ गया.." पूजा ने मस्ती में आके कहा

"चुदाई किस खुशी में भैनचोदो.... बाकी सब कहाँ हैं, सब को ले लाइन पे साली मदरजात" सामने वाले आदमी ने गुस्से में आके कहा

"अरे हेलो... बॉस , आज मैं पूजा और राज की शादी की डेट फाइनल करने गई थी... बाकी 2 दिन.. फिर राज और पूजा की शादी की तारीख निकल जाएगी, और मेरी कोशिश येई रहेगी कि शादी 10 दिन में फाइनल हो जाए.. 10 दिन में किसी को ज़्यादा कुछ करने का टाइम नहीं मिलेगा" अंशु ने अपनी बात जैसे किसी कंपनी सीईओ को बोली हो इतनी स्पेसिफिक..

"ओह... तो ये अभी बता रही हो मुझे... याद रहे मुझे हर पल तुमसे खबर मिलते रहनी चाहिए.. समझे तुम लोग" आदमी ने अपनी आवाज़ धीमी की, पर वो अब भी कड़क थी..

"ओके माइ हनी... डोंट वरी बेबी... मैं हूँ ना आपकी डॉल यहाँ, इन सब को सही से रखा है... बस अब आप बताओ, कब आओगे आप मुझसे मिलने... " पूजा ने फाइनली मुद्दे की बात की

"बहुत जल्द.. तुम लोग मुझे शादी की तारीख बताओ, मैं तुम्हारे पास आने की डेट भिजवा दूँगा.. और याद रहे, आज इस नंबर पे कॉल किया है, आगे से इस्पे कॉल किया तो तुम्हारा हश्र ठीक नहीं होगा, समझी.." ये कहके उस आदमी ने फोन कट कर दिया

"चलो.. अब थोड़ी दारू पिलाओ मुझे, और हाँ मौसा, आपको सही में दिमाग़ नहीं है... हहेहहे" ये कहके पूजा एक बार फिर अपनी गान्ड मटकाने लगी और किचन में जाके बियर्स ले आई और सब फिर से पीने बैठ गये..

 


ललिता और मैं वहाँ से निकल गये, और कुछ सेकेंड्स में भाग के अपनी गाड़ी में आके बैठ गये.. इतनी चुदाई देख के मेरा लंड तो अब भी खड़ा था, पर थोड़ा प्रेकुं की वजह से अभी सॉफ्ट होने लगा था... ललिता के चेहरे पे अभी भी भाव सेम ही थे..

"ललिता, अभी दो मिनट में घर पहुँचते हैं, फिर तू बाथरूम जाना , ओके" मैने सीरीयस होके कहा

"शट अप भाई.. मैं कुछ और सोच रही हूँ" ललिता ने टेन्स्ड होके कहा

" ललिता, एक बात तो सॉफ है, इसमे मुझे माया बुआ कहीं नहीं दिख रही... पूजा की कहानी झूठी थी, पर एक दूसरी बात ये भी है, कि पूजा और ये आदमी बहुत करीब हैं.. तुमने देखा, सब लोग उससे डर के बातें कर रहे थे, पर पूजा नहीं... और तुम्हारे मोम दाद तो कुछ बोले नहीं, सिर्फ़ पूजा और अंशु.... ऐसा क्यूँ.. और बार बार पूजा तुम्हारे पापा को बेवकूफ़ बोल रही है, क्या बात हो सकती है, " मैने उस ट्रॅक पे आ गया जिस पे ललिता थी अभी...

"हां भाई, ये तो मुझे भी लग रहा है.. माया इसमे कहीं नहीं है, पर मेरी चिंता ये नहीं है..." ललिता ने एक बार फिर अपने स्वर में चिंता जताई

"तो क्या है फिर," मैने आश्चर्य में आके पूछा

"पूजा ने जिस नंबर पे फोन लगाया, उसकी कॉलर ट्यून... उसकी कॉलर ट्यून मैने सुनी हुई है कहीं.. आपने उसकी कॉलर ट्यून सुनी.. कोई फिल्मी सॉंग नहीं था, ना ही तो कोई मूवी का सॉंग... उसका कॉलर ट्यून एक डायलॉग था... इतना यूनीक मैने कहीं सुना हुआ है, और वो कोई फिल्म का नहीं है, वो किसी ने अपनी आवाज़ में रेकॉर्ड किया हुआ है..." ललिता ने जवाब दिया

कुछ देर तक मैं उसकी बात सुनता रहा, पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या कहना चाहती है..

"ललिता, तूने सामने वाले आदमी से कभी बात की है.. एनी आइडिया ? " मैने फिर उससे पूछा

"नहीं भाई... आज तक इतनी कड़क आवाज़ वाले किसी शक्स से मैने बात नहीं की, पर ये कॉलर ट्यून... मैं पक्का कहीं सुनी है... पहले ., देखी हुई थी.. अब ये कॉलर ट्यून कहीं सुनी हुई है... इससे सॉफ ज़ाहिर होता है, जो कोई भी है, मैं उसे अच्छी तरह जानती हूँ... कोई फेमिलियर शक्स ही है भाई.. " ललिता ने जासूसी अंदाज़ में आके कहा

"ओके.. स्वीट हार्ट, प्लीज़ रिलॅक्स नाउ... इतना प्रेशर मत डाल दिमाग़ पे... रात काफ़ी हो चुकी है, और गर्मी ऑलरेडी बढ़ गयी है अंदर.. घर चल के बात करते हैं" मैने गाड़ी स्टार्ट करते हुए कहा

"अंदर कहाँ भाई... स्पेसिफिक बोलो" ललिता ने शरारत में आके कहा

"वहीं स्वीट हार्ट, जहाँ तुझे भी गर्मी है अभी" मैने आँख मारते हुए कहा

'यू डॉग.... चलो अब आगे" ललिता ने फाइनल ऑर्डर दिया

रात के करीब 2 बज रहे थे, सड़क खाली थी, हम आधे टाइम में ही घर पहुँच गये.. घर पहुँच के जहाँ मैं अपने रूम में जल्दी से भागा, वहीं ललिता धीरे धीरे चल के अंदर आ रही थी.. मुझे ऐसे देख ललिता ने मुझे स्टेर्स पे रोका और कहा

"हेलो भाई... 5 मिन्स में आइ एम कमिंग.. स्कॉच है ना आपके पास... आइ नीड इट, मैं आइस क्यूब्स ले आती हूँ ओके... डोंट स्लीप ..."

सुबह मेरी आँख ज़रा देर से खुली... रात को गुस्से में, प्यार में और खुशी में... इतनी शराब पी ली थी, ऐसा तो होना ही था.... वक़्त देखा तो सुबह के 9 बज रहे थे... इतने दिनो की सुबह एक छोटे से फ्लॅशबॅक में आ गयी.. पहले पायल, और फिर पूजा, कैसे मुझे सुबह उठाने आती थी... रोज़ सुबह किसी ना किसी की प्यारी स्माइल देखने को मिलती थी, रोज़ सुबह किसी का प्यारा चेहरा दिखता था... आज की सुबह ऐसा कुछ नहीं था, मैं उठके फ्रेश होने चला गया और साथ ही साथ ऑफीस के मेल्स भी चेक करने लगा... काफ़ी सारे मेल्स पेंडिंग थे रिप्लाइ करने के लिए.. साथ ही मेरे मॅनेजर के भी कुछ मेल्स थे मेरी बढ़ती हुई आब्सेन्स को लेके... मैने सोचा मैल का जवाब दे दूं, पर बेहतर होगा कि ऑफीस जाके सब कुछ सेट्ल कर दूं.. ऑफीस जल्दी जाने के चक्कर में मैने अपनी सब मॉर्निंग आक्टिविटीस ख़तम की और सीधा नीचे जाने लगा... सीढ़ियों पे पहुँचते ही सुबह सुबह का एक छोटा सा झटका लगा.... लिविंग रूम में सामने के सोफा पे अंशु बैठी हुई थी, रोज़ की तरह अपने डिज़ाइनर सूट में, जिसमे से उसके चुचे उभर उभर के बाहर आ रहे थे.. कसी हुई कमर, खुले हुए भूरे बाल... हाए, काश इसको अपनी बाहों में ही लपेट के रखूं पूरा दिन.... ऐसा हो नही सकता पर, ये सोचते सोचते में भी उसके सामने जाके बैठ गया..

"हाई आंटी.. गुड मॉर्निंग." मैं अंशु के सामने बैठ गया

"अभी भी आंटी बोलोगे क्या दामाद जी.. अभी तो आप हमारे ही होने वाले हैं, अभी तो ये दूरियाँ कम कीजिए" कहके अंशु ने अपनी चुन्नी को एक दम उपर कर दिया जिससे उसकी चुचों की गहराई सॉफ दिखने लगी.... मैने ये नोटीस किया, और अंशु ने तभी

(हाए मेरी बिल्लो रानी... जितना अंग प्रदर्शन करना है कर ले, कुछ दिनो बाद तो तू और तेरी बेटी कपड़े पहनने के लिए तरस जाओगी) मैं अंशु को घूरते हुए सोचने लगा...

"क्या देख रहे हो जमाई जी.... सब आपका ही है , जब चाहे आ जाइए हमारे घर आम खाने... याद रखेंगे आप भी" कहके अंशु अपना झुकाव मेरे आगे बढ़ाने लगी... जैसे ही डॅड और मोम आते हुए दिखे, वो सीधी होके बैठी और अपनी चुन्नी भी नीचे कर ली...

 


"अरे बहेन जी... कैसी हैं आप, और शन्नो और ललिता तो ठीक हैं ना.. " पापा ने अंशु से पूछा

"जी बिल्कुल, सब ठीक है, अब जो हो गया उसे भूलना तो पड़ेगा ना.. बढ़ते रहना ही ज़िंदगी का दूसरा नाम है" अंशु ने पापा को जवाब देते कहा और मम्मी को भी देखने लगी..

"जी, बिल्कुल, और बताइए सब ख़ैरियत... पूजा बिटिया कैसी है, और आपके पति इंडिया आ गये?" इस बार मम्मी पापा के साथ बैठ गयी और अंशु के साथ बातें करने लगी

"जी बहेन जी, वो कल रात ही आए, और पूजा एक दम मज़े में है, आप लोगों को बहुत याद करती है... ख़ास कर आपको" अंशु ने मम्मी को मस्का मारते हुए कहा

(भैन की लोडि, पीछे मेरे मा बाप को गालियाँ देते हो, और यहाँ ये... साला सही में इंडिया में आक्टर लोगों की कोई कमी नहीं है) मैं चुप चाप वहाँ बैठे बैठे सोच रहा था...

" जी, उसका दिल बहुत लग गया था यहाँ पे... बस अब तो उस दिन का इंतेज़ार है जब वो हमारे घर बहू बन के आएगी" पापा ने अंशु को चाइ ऑफर करते हुए कहा

"इसीलिए मैं यहाँ आई हूँ भाई साहाब... आप से बहेन जी ने बात तो की होगी, हम चाहते हैं पूजा और राज की शादी जल्द से जल्द फिक्स हो..." अंशु ने अपनी बात रखी पापा के आगे

"जी, बात तो की है.. पर मैं इतना जल्दी नहीं कर सकता राज की शादी... बिसाइड्स, ये फ़ैसला राज लेगा, उसकी शादी कब करनी है... और रही पूजा बेटी की बात, आप फ़िक्र ना करें, पूजा हमारे घर की इज़्ज़त है अब.. समाज के कहने पे हम जल्दी में कुछ नहीं करना चाहते.. बच्चो की रज़ामंदी भी देखनी है हमे... क्यूँ , तुम क्या कहना चाहते हो इस बारे में.. " पापा ने मेरे फ़ैसले के नाम पे अंशु को टालना चाहा...

"डॅड... आप एक सेकेंड प्लीज़ आइए, मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूँ..."

"श्योर बेटा.. अंशु जी, एक सेकेंड एक्सक्यूस उस...." कहके पापा और मैं नीचे बने एक रूम में घुस गये..

"डॅड.... आप इनको कह दीजिए, कि हमारी शादी 5 दिन में होनी चाहिए..." मैने पापा को अपना फ़ैसला सुनाया...

"व्हाट !!!!! हॅव यू गॉन इनसेन.... 5 दिन.. कॅन यू इमॅजिन, वो क्या तैयारियाँ करेंगे..." पापा ने शॉक ख़ाके कहा

"डॅड..... अगर आपने फ़ैसला मुझपे छोड़ा है, तो प्लीज़ वो करेंगे... आइ एम श्योर, वो मना नहीं करेंगे..." मैने अपनी बात पे ज़ोर डाला

"... दिस ईज़ नोट डन.... कम आउट नाउ..." कहके पापा बाहर चले गये, और उनके पीछे मैं बाहर आ गया....

"ऊह,... अंशु जी.... माफ़ कीजिएगा... ऊह.... राज जो है वो पूजा से 5 दिन में शादी करना चाहता है... " पापा ने लड़खड़ा के कहा

"जी... 5 दिन में इतनी तैयारिया कैसे होंगी हमारी... आख़िर हमारी भी इकलोति बेटी है पूजा... हमारे काफ़ी अरमान है" अंशु ने झटका ख़ाके कहा

"मम्मी जी... आप चिंता ना करें, शादी में कुछ कार्ड्स ही छपवाने हैं.. बिसाइड्स, अगर आपको तैयारियों में कोई भी दिक्कत आए, तो हम हैं ना.... आफ्टर ऑल वे आर आ फॅमिली नाउ...." मैने एक डेव्लिश स्माइल के साथ कहा..

"जी... इतना जल्दी, मैं श्योर नहीं हूँ.... मैं क्या करूँ... आप मुझे सोचने का टाइम दें प्लीज़...." अंशु सहम गयी थी

"मम्मी.. प्लीज़ सॉरी, बट इसमे सोचना क्या.... और मैं आज अपना रेसिग्नेशन रखने जा रहा हूँ ऑफीस में... कल से मैं सीधा फॅक्टरी का काम ओवर्टेक करूँगा.. आप समझ सकती हैं, कि अगर शादी हमने टाल दी, तो मैं अच्छी तरह ना तो फॅक्टरी को टाइम दे पाउन्गा, ना तो पूजा को... जल्दी से शादी करके पूजा और मैं इकट्ठे फॅक्टरी के काम काज में जुट जाएँगे... इससे हम एक साथ भी रहेंगे , और खुद को अच्छे से जान भी लेंगे... " मेरे दिमाग़ की हरामपँति दिखाने का टाइम था अब....

"फिर भी बेटा... काफ़ी चीज़ें सोचनी हैं, काफ़ी लोगों को इन्वाइट करना है..." अंशु लगातार रेज़िस्टेन्स दिखा रही थी...

"मम्मी.. प्लीज़, अगर 5 दिन में नहीं तो एक साल तक भी नहीं... फिर आप आराम से अपनी तैयारियाँ कीजिएगा..." मैने फाइनली उसकी गान्ड के नीचे छुरा रखा.. वो ना ही बैठ सकती थी नीचे, ना ही काफ़ी देर तक खड़ी रह सकती थी...

 
मित्रो मेगा अपडेट दे दिया है अब आपकी बारी है
 
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