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Guest
हमारे अंदर जाते ही रूम में अंधेरा था, वो अब उजाले में बदल चुका था.. सामने कुर्सी पे एक बंदा बैठा हुआ था, उसके आस पास गफ़ूर के आदमी, उसके हाथ पर बँधे हुए थे, मूह में कपड़ा था तो वो बोल नहीं पा रहा था, मूह पे काला कपड़ा ढका हुआ था...
"इसका मूह दिखाओ" मैने गफ़ूर से कहा
गफ़ूर ने मूह पर से कपड़ा हटाया... धीरे धीरे वो आदमी अपनी आँखें खोलने लगा... जैसे ही उसे सॉफ दिखाई दिया, उसकी आँखें बड़ी हो गयी मुझे देख के... मैं उसके सामने वाली कुर्सी पे बैठ गया
"हेलो मिस्टर चौकसे... हाउ आर यू" मैने उस आदमी से हंस के पूछा
"मिस्टर वीरानी.. व्हाट ईज़ दिस..." कहके वो आदमी दाँत पीसने लगा
"मिस्टर चौकसे, हमे आपसे कुछ जानना है.. प्लीज़ कोओपरेट नहीं तो" ये कहके मैने एक नज़र गफ़ूर को देखा, और उसने तुरंत अपने आदमी से इशारा किया.. उसका आदमी हाथ में एलेक्ट्रिक वाइर्स लेके खड़ा था...
"शॉकिंग ना.. " मैने एक बार फिर चौकसे की आँखों में देख के कहा
"व्हाट डू यू वान्ट" उसने सिर्फ़ इतना ही कहा
"ललिता.... ही ईज़ ऑल युवर्ज़..." कहके मैं वहाँ से उठ गया और ललिता को कुर्सी पे बिठाया
"मिस्टर चौकसे.. मुझे हर एक सवाल का जवाब सीधा चाहिए.. अगर एक सवाल सही एक ग़लत हुआ, तो आपको इतने शॉक लगेंगे कि आप सोच भी नहीं सकते..." गॉट इट...
ये कहके ललिता और मैं चौकसे से सवाल पूछने लगे... उसने कितने शॉक खाए वो ललिता और मैं भी काउंट करना भूल गये थे... फाइनली 3 घंटे के बाद ललिता और मैने उससे सच निकलवाया, और उसको रेकॉर्ड कर लिया
"ये लो भाई.. आपकी सीडी.. कुछ और काम हो तो बुला लीजिएगा" गफ़ूर ने हमे कहा
"ये लो.." ललिता ने 5000 और देते हुए कहा
"ये किसलिए मेडम" गफ़ूर ने पैसे लेते हुए कहा
"इसका हुलिया ठीक करो, इसे छोड़ आओ जहाँ से लाए थे.. बाकी के जितने बचें तुम्हारे लड़को की बख़्शीस... पर याद रहे अगर ये बात बाहर गयी, तो मैं कमिशनर की बेटी हूँ.. सोच लो अंजाम अपना, " कहके ललिता वहाँ से चली गयी , उसकी आँखों पे डार्क ग्लासेज लगा के.
"ये सही में कमिशनर की छोकरी है" गफ़ूर ने मुझसे पूछा
"मैं उसका भाई हूँ.. ध्यान रहे" कहके मैं भी वहाँ से निकल गया
ललिता और मैं गाड़ी में आ गये... घर जाके सबसे पहले हमने रूम को लॉक किया और एन्षूर कर लिया चौकसे की सीडी सही है, कोई एरर नहीं है... हमने उसकी कॉपी बना ली और ओरिजिनल को लॉकर मे छुपा लिया.. मेरे रूम का लॉकर कोड सिर्फ़ मेरे पास था सो नो वरीस...
शाम के 8 बजे ललिता और मैं नीचे उतरे , सब गेस्ट्स से अच्छे से मिले... काफ़ी नाच गाना चला, मेरे सभी दोस्त आए हुए थे.. मेरे ऑफीस के फ्रेंड्स... आज रात ड्रिंक्स पार्टी थी जिसको डॅड होस्ट करने वाले थे... रात के 10 बजे करीब पार्टी स्टार्ट हुई जो करीब सुबह के 3 बजे तक चली.. जिसको होश था वो अपने घर गया, जिसे होश नहीं था उसे डॅड और मैने गाड़ी में उसके घर भिजवा दिया...
"चलो सोन.. गॉट टू स्लीप नाउ.. सी यू टुमॉरो.. और ज़य कितने बजे आ रहा है" डॅड ने अपना मूह धोते हुए पूछा
"दोपहर 12 बजे दद.." मैने नींद में कहा
"चलो, सो जाओ, कल मिलते हैं ओके" कहके डॅड अपने कमरे में निकल गये.... आज ललिता मेरे साथ नहीं थी, इसलिए मैं बेड पे जैसे आया वैसे सो गया.. सुबह 10 बजे ललिता मुझे उठाने आई
"भाई चलो, वी नीड टू गो एरपोर्ट" ललिता ने मुझे उठाते हुए कहा
"हां हाँ, चलो, अभी आता हूँ मैं , तू जा" कहके मैं फ्रेश होने गया और ललिता निकल गई नीचे
मैं फ्रेश हुआ और नीसे जाके चाइ पीने बैठ गया.. चाइ पीके ललिता और मैं एरपोर्ट ज़य को लेने के लिए निकले... एरपोर्ट पहुँचे तो ज़य हमारा वेट ही कर रहा था..
"हाई भाई..." ज़य ने गले लगते हुए कहा
"हेलो डार्लिंग.." ललिता ने उसे देखते हुए कहा
"अरे रे.. मेरी डार्लिंग भी लाए आप... अरे यार, मिस्ड यू सो मच..' ज़य ने गले लग के कहा
"उम्म्म.. लास्ट टाइम तू आया और मिला भी नहीं, बॅड बॉय" ललिता ने उससे अलग होके कहा
"अरे अभी तो 15 दिन का साथ है डियर तेरे साथ.. फिकर नोट, ऑस्ट्रेलिया में खूब मस्ती करेंगे" ज़य ने ललिता को ताली मारते हुए कहा
"ऑस्ट्रेलिया ? मैं कब जा रही हूँ.." ललिता ने मुझे देखते हुए कहा
"भाई, आपने बताया नही... वैसे भाई ने भी तेरा पासपोर्ट ट्रॅवेल एजेंट को दिया है... क्या सर्प्राइज़ है वाह भाई... चलो अब घर ले चलो" कहके ज़य गाड़ी में बैठ गया
"कब लिया पासपोर्ट आपने..." ललिता ने मुझे देखते हुए कहा
"जब तू अपनी ड्रेस चेंज कर रही थी उस रात को.. मैं तेरे रूम से पासपोर्ट लेके आया.. याद है, पानी पीने गया था... तब" मैने हसके ललिता से कहा
"दट ईज़ नीडलेस ओके.. मैं नहीं जाउन्गि कहीं" कहके ललिता गाड़ी में बैठी और हम घर की तरफ चल दिए