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मेरी सेक्सी बहनें compleet

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हमारे अंदर जाते ही रूम में अंधेरा था, वो अब उजाले में बदल चुका था.. सामने कुर्सी पे एक बंदा बैठा हुआ था, उसके आस पास गफ़ूर के आदमी, उसके हाथ पर बँधे हुए थे, मूह में कपड़ा था तो वो बोल नहीं पा रहा था, मूह पे काला कपड़ा ढका हुआ था...

"इसका मूह दिखाओ" मैने गफ़ूर से कहा

गफ़ूर ने मूह पर से कपड़ा हटाया... धीरे धीरे वो आदमी अपनी आँखें खोलने लगा... जैसे ही उसे सॉफ दिखाई दिया, उसकी आँखें बड़ी हो गयी मुझे देख के... मैं उसके सामने वाली कुर्सी पे बैठ गया

"हेलो मिस्टर चौकसे... हाउ आर यू" मैने उस आदमी से हंस के पूछा

"मिस्टर वीरानी.. व्हाट ईज़ दिस..." कहके वो आदमी दाँत पीसने लगा

"मिस्टर चौकसे, हमे आपसे कुछ जानना है.. प्लीज़ कोओपरेट नहीं तो" ये कहके मैने एक नज़र गफ़ूर को देखा, और उसने तुरंत अपने आदमी से इशारा किया.. उसका आदमी हाथ में एलेक्ट्रिक वाइर्स लेके खड़ा था...

"शॉकिंग ना.. " मैने एक बार फिर चौकसे की आँखों में देख के कहा

"व्हाट डू यू वान्ट" उसने सिर्फ़ इतना ही कहा

"ललिता.... ही ईज़ ऑल युवर्ज़..." कहके मैं वहाँ से उठ गया और ललिता को कुर्सी पे बिठाया

"मिस्टर चौकसे.. मुझे हर एक सवाल का जवाब सीधा चाहिए.. अगर एक सवाल सही एक ग़लत हुआ, तो आपको इतने शॉक लगेंगे कि आप सोच भी नहीं सकते..." गॉट इट...

ये कहके ललिता और मैं चौकसे से सवाल पूछने लगे... उसने कितने शॉक खाए वो ललिता और मैं भी काउंट करना भूल गये थे... फाइनली 3 घंटे के बाद ललिता और मैने उससे सच निकलवाया, और उसको रेकॉर्ड कर लिया

"ये लो भाई.. आपकी सीडी.. कुछ और काम हो तो बुला लीजिएगा" गफ़ूर ने हमे कहा

"ये लो.." ललिता ने 5000 और देते हुए कहा

"ये किसलिए मेडम" गफ़ूर ने पैसे लेते हुए कहा

"इसका हुलिया ठीक करो, इसे छोड़ आओ जहाँ से लाए थे.. बाकी के जितने बचें तुम्हारे लड़को की बख़्शीस... पर याद रहे अगर ये बात बाहर गयी, तो मैं कमिशनर की बेटी हूँ.. सोच लो अंजाम अपना, " कहके ललिता वहाँ से चली गयी , उसकी आँखों पे डार्क ग्लासेज लगा के.

"ये सही में कमिशनर की छोकरी है" गफ़ूर ने मुझसे पूछा

"मैं उसका भाई हूँ.. ध्यान रहे" कहके मैं भी वहाँ से निकल गया

ललिता और मैं गाड़ी में आ गये... घर जाके सबसे पहले हमने रूम को लॉक किया और एन्षूर कर लिया चौकसे की सीडी सही है, कोई एरर नहीं है... हमने उसकी कॉपी बना ली और ओरिजिनल को लॉकर मे छुपा लिया.. मेरे रूम का लॉकर कोड सिर्फ़ मेरे पास था सो नो वरीस...

शाम के 8 बजे ललिता और मैं नीचे उतरे , सब गेस्ट्स से अच्छे से मिले... काफ़ी नाच गाना चला, मेरे सभी दोस्त आए हुए थे.. मेरे ऑफीस के फ्रेंड्स... आज रात ड्रिंक्स पार्टी थी जिसको डॅड होस्ट करने वाले थे... रात के 10 बजे करीब पार्टी स्टार्ट हुई जो करीब सुबह के 3 बजे तक चली.. जिसको होश था वो अपने घर गया, जिसे होश नहीं था उसे डॅड और मैने गाड़ी में उसके घर भिजवा दिया...

"चलो सोन.. गॉट टू स्लीप नाउ.. सी यू टुमॉरो.. और ज़य कितने बजे आ रहा है" डॅड ने अपना मूह धोते हुए पूछा

"दोपहर 12 बजे दद.." मैने नींद में कहा

"चलो, सो जाओ, कल मिलते हैं ओके" कहके डॅड अपने कमरे में निकल गये.... आज ललिता मेरे साथ नहीं थी, इसलिए मैं बेड पे जैसे आया वैसे सो गया.. सुबह 10 बजे ललिता मुझे उठाने आई

"भाई चलो, वी नीड टू गो एरपोर्ट" ललिता ने मुझे उठाते हुए कहा

"हां हाँ, चलो, अभी आता हूँ मैं , तू जा" कहके मैं फ्रेश होने गया और ललिता निकल गई नीचे

मैं फ्रेश हुआ और नीसे जाके चाइ पीने बैठ गया.. चाइ पीके ललिता और मैं एरपोर्ट ज़य को लेने के लिए निकले... एरपोर्ट पहुँचे तो ज़य हमारा वेट ही कर रहा था..

"हाई भाई..." ज़य ने गले लगते हुए कहा

"हेलो डार्लिंग.." ललिता ने उसे देखते हुए कहा

"अरे रे.. मेरी डार्लिंग भी लाए आप... अरे यार, मिस्ड यू सो मच..' ज़य ने गले लग के कहा

"उम्म्म.. लास्ट टाइम तू आया और मिला भी नहीं, बॅड बॉय" ललिता ने उससे अलग होके कहा

"अरे अभी तो 15 दिन का साथ है डियर तेरे साथ.. फिकर नोट, ऑस्ट्रेलिया में खूब मस्ती करेंगे" ज़य ने ललिता को ताली मारते हुए कहा

"ऑस्ट्रेलिया ? मैं कब जा रही हूँ.." ललिता ने मुझे देखते हुए कहा

"भाई, आपने बताया नही... वैसे भाई ने भी तेरा पासपोर्ट ट्रॅवेल एजेंट को दिया है... क्या सर्प्राइज़ है वाह भाई... चलो अब घर ले चलो" कहके ज़य गाड़ी में बैठ गया

"कब लिया पासपोर्ट आपने..." ललिता ने मुझे देखते हुए कहा

"जब तू अपनी ड्रेस चेंज कर रही थी उस रात को.. मैं तेरे रूम से पासपोर्ट लेके आया.. याद है, पानी पीने गया था... तब" मैने हसके ललिता से कहा

"दट ईज़ नीडलेस ओके.. मैं नहीं जाउन्गि कहीं" कहके ललिता गाड़ी में बैठी और हम घर की तरफ चल दिए

 
पूरे रास्ते में ललिता और ज़य की चतर पाटर चलती रही.. घर पहुँचे तो सब जे को देख के बहुत खुश थे.. लेकिन जे की आँखों में अब तक कई सवाल थे... थोड़ी देर बाद ज़य अपने कमरे में मेरे और ललिता के साथ गया और सब पूछने लगा..

"ह्म्म्मं... टुडे ईज़ दा ड-डे राइट..." ज़य ने कहा

"हां छोटू, कल सब ख़तम... अगर जैसा हमने सोचा है वैसे हुआ तो तेरे लिए एक बहुत ही बढ़िया सर्प्राइज़ भी है" मैने ललिता को देख के कहा

"हां ज़य... अब तुम आराम करो, और भाई आप मुझे ले चलो अंशु के घर...." ललिता ने अपना बॅग लेके कहा

"वहाँ क्यूँ भाई, आज ही तो आया हूँ, आज जा रही है" ज़य ने कहा ललिता को

"अरे, नाउ दट आइ आम इन देयर टीम, मुझे आज रात को जाना पड़ेगा ना उनके साथ.. उनके बॉस के पास... शायद हमने सोचा है वोई हो तो" ललिता ने बाहर निकलते हुए कहा

"तुमने किसका नाम सोचा है वो तो बताओ..." ज़य ने ललिता और मुझसे बाहर आके पूछा

"संजय" ललिता और मैने साथ में कहा

"व्हेअर डिड ही कम फ्रॉम भाई... साइको है वो बंदा वी नो इट राइट.... आंड आज आप अकेले वहाँ जाएँगे, मैं भी चलूँगा" ज़य ने ज़िद्द में आके कहा

"पागल मत बन छोटू.. तू आज आया है और आज ही कैसे आएगा बाहर.. घर पे बैठ मॉम डॅड के साथ, ऑस्ट्रेलिया और वेड्डिंग के लिए थोड़ी शॉपिंग कर आ तब तक... आंड रात को डिन्नर साथ में करते हैं " कहके मैं और ललिता बाहर निकल गये

मोम डॅड रूम में थे, तभी ललिता और मैं चुपके गाड़ी में बैठे, और अंशु के घर की तरफ निकल गये.. ललिता और मैं पूरी तरह तैयार थे... हम कुछ नहीं बोल रहे थे, दिल में अजीब सी कशमकश थी... अगर प्लान के हिसाब से नहीं हुआ तो, तो क्या करेंगे... हमने फेल्यूर के बारे में कभी नहीं सोचा था..

"क्यूँ भाई.. ये भी सोचना था ना हमे" ललिता ने मुझे कहा

"क्या सोचना था.." मैने पूछा

"फेल्यूर के बारे में... हमने तो सोचा ही नहीं के कामयाब नहीं हुए तो" ललिता ने जैसे मेरे मन की बात पढ़ ली

"नहीं ललिता.. डोंट वरी, आंड अगर हुए भी तो आइ एन्षूर यू विल बी सेफ..." मैं सीरीयस टोन में बोला

"आइ आम नोट कन्सर्न्ड अबाउट मी.. आइ आम कन्सर्न्ड अबाउट अस भाई.. अंकल आंटी आप..." ललिता ने चिंता में आके कहा

"नो फियर.. आइ आम हियर.. स्वीट हार्ट, हम पहुँच गये आपकी जगह पे" मैने अंशु के घर की तरफ इशारा करते हुए कहा

अंशु का घर किसी महल जैसा लग रहा था.. शामियाना, ढोल, नगाड़े सब एक से एक प्रबंध किए थे.. ललिता जल्दी से उतरी और अंदर भाग गयी... जैसे ही वो अंदर भागी पायल और माया बुआ पकड़ के उसे नचाने लगे और अंशु और पूजा भी ठुमके मारने लगे.. मुझे देख के अंशु ने अंदर आने का इशारा किया, पर मैं जवाब दिए बिना वहाँ से निकल आया और घर चला गया.. घर जाते जाते दिमाग़ एक दम ब्लॅंक हो चुका था.. किसी चीज़ में दिल नहीं लग रहा था... दिमाग़ में बस एक ही बात थी... क्यूँ.. आख़िर क्यूँ ज़य ऐसा कर रहा है.... फिर एक सेकेंड मे दिमाग़ को झटक दिया, ये सोच के अगर जो सोचा है वो नहीं हुआ तो कोई नुकसान नहीं है.. पूजा से निपटना पड़ेगा और क्या.... आख़िर डॉली का कातिल कौन है.. ये सोच के एरिसटॉटल का ख़याल आया.. मैने तुरंत उसे कॉल किया..

"हां भाई... कब निकलेगा वहाँ से" मैने एरिसटॉटल से पूछा

", मैने सब एविडेन्स ले लिए हैं... कल आके बताता हूँ... मेरी फ्लाइट मुंबई में सुबह को 10 बजे लॅंड होगी, प्लीज़ गाड़ी भेजना 12 बजे तक तुम्हारे घर के लिए... जिस आदमी की ये गाड़ी है उसपे ऑलरेडी बहुत से केसस चल रहे हैं" एरिसटॉटल जल्दी जल्दी में बोलने लगा

"कौन है ये आदमी... नाम तो बता उसका..." मैने पूछा

"अरे उसका नाम है.." एरिसटॉटल ने उतना ही कहा के.. "ट्रूट ट्रूट" के आवाज़ से मेरे मोबाइल की बॅटरी बंद हुई

"फक इट मॅन..." मैने खुद से कहा और कार में फोन चार्ज पे रखा... जैसे ही फोन फिर स्टार्ट हुआ, मैने एरिसटॉटल को वापस कॉल किया... इस बार उसने फोन ही नहीं उठाया.... मैने रहने दिया ये सोच के आज रात को तो इस बात का खुलासा हो ही जाएगा... देखते देखते मैं घर पहुँचा, जहाँ सब केटरर्स से लेके, डेकरेटर्स सब आए थे.. मोम सब रिश्तेदारों से बिज़ी थी.. सब को एक ही जान से मिलना था.. "राज से.."

"भाई मेरी गान्ड ऑलरेडी फटी हुई है, अब और मत मारो प्लीज़..." मैं खुद से बोलके चुपके उपर रूम में चला गया

"नॉक.. नॉक..." मेरा डोर नॉक हुआ

"डॅड... बोलिए, मैने डॅड को अंदर आने के लिए जगह दी

", व्हाट्स रॉंग.." डॅड ने अपने स्पेक्स उतार कर पूछा

"नतिंग डॅड.. व्हाई" मैने हंस के जवाब दिया

"यू नोट एग्ज़ाइटेड.. व्हाई" बेटे, एनितिंग बॉदरिंग यू.. बोलो मुझे, मैं सॉल्व कर दूँगा" डॅड ने चुटकी बजाते कहा

(डॅड ये प्राब्लम चुटकी जितनी ईज़ी नहीं है.. आइ आम, ऑलमोस्ट देअर)

"नो डॅड.. जस्ट दा गूस बंप्स.... पहली शादी है ना इसलिए " मैने डॅड को आँख मारते हुए कहा

"हाहाहा... गुड वन ... नाउ टेल मी, तुम्हारी बारात कौनसी कार में निकालें" डॅड ने फोटोस दिखाते हुआ कहा

"डॅड, ये सब गाड़ियाँ हैं कहाँ आख़िर... आपके पर्सनल बॅलेन्स शीट में भी इनका ज़िक्र था" मैने पूछा

"अरे कहाँ होंगी, हर बंगलो, हर फार्म हाउस में 3 गाड़ियाँ रखी हुई हैं.. तुम उंगली रखो, कल सुबह वो यहाँ आ जाएगी" डॅड ने मुझे फिर फोटोस दिखाई

"ऑडी. BMW, वोल्वो...." डॅड यू ओन आ वोल्वो.. आपने कभी बताया नहीं" मैने शॉक में आके पूछा

"इट्स जस्ट आ वोल्वो बॉय.. ये देखो" उन्होने अगला पिक दिखा के कहा

"ओह माइ गॉड.... यू ओन आ लिमो..." मैने चिल्ला के पूछा बच्चे की तरह

"नो नो.. आइ आम गोयिंग टू बाइ दिस.. इसको छोड़ के जिसमे कहो उसमे बारात जाएगी तुम्हारी" डॅड ने अपना फोन अंदर रख के कहा

"डॅड, एनितिंग विल डू... व्हाट मॅटर्स ईज़ युवर लव... थ्ट्स इट" मैं डॅड के गले लगते हुए बोला

"थ्ट्स माइ सन... आइ विल अस्क BMW 7 सीरीस ओके..." कहके डॅड ने मुझे हग किया... मुझे उनको छोड़ने का दिल ही नहीं हो रही थी.. करीन 10 सेकेंड्स बाद

"... बेटा...." कहके उन्होने मुझे खुद से अलग किया

"व्हाई आर यू क्राइयिंग सन.... तुम्हारी आँखें क्यूँ लाल हो गयी.. पानी लो जल्दी" कहके डॅड ने पानी की बॉटल दी

"नतिंग डॅड... यू दा ग्रेटेस्ट डॅड" कहके मैं फिर उनसे लिपट गया और रोने लगा..

 


"नहीं बेटे, बी ब्रेव ओके.. आंड तुम क्यूँ रो रहे हो.... चलो, नाउ काम डाउन ओके.. यू आर दा ग्रेटेस्ट सन ऑलराइट" कहके डॅड ने मुझे फिर अलग किया

"और मेरा क्या.. मैं नहीं हूँ क्या अच्छा बेटा.." ज़य अपनी शॉपिंग बॅग्स लेके मेरे रूम में आया था

"हाहहः.. थिंक ऑफ दा डेविल आंड ही ईज़ हियर... इधर आओ" डॅड ने ज़य से कहा और हम दोनो को गले लगा लिया..

"तुम दोनो मेरे सन हो.. चलो अब तुम भाई को चुप कराओ, मैं नीचे जाता हूँ.. " कहके डॅड निकल गये और ज़य और मैं मेरे रूम में बैठ गये...

गुज़रते वक़्त के साथ घर पे काफ़ी मेहमान आए.. डॅड के दोस्त, टॉप नॉच पॉलिटिशियन्स, मोम की फ्रेंड्स.. मेरे दोस्त, मेरे ऑफीस की फुलझड़ियाँ.. ज़य की कुछ आइटम्स... आइटम्स उन्हे वो बुलाता था. सब ने काफ़ी डॅन्स किया संगीत में, जी भर के मस्ती की... पर मेरा दिल अभी भी रात के बारे में ही सोच रहा था.. रात को सब फंक्षन्स निपटने के बाद, मैं अपने रूम में गया

"हाई, वी आर ऑन टाइम, राइट ?" मैने ललिता को एसएमएस किया

"यस भाई.. सी यू अट 2 ओके... आइ मीन यू सी अस अट 2 " ललिता ने जवाब दिया

"ओके.... प्लीज़ सेंड आ कार फॉर तिवारी, यादव आंड प्रसाद.. आस्क देम टू कम डाइरेक्ट्ली अट वेड्डिंग वेन्यू"

"बिंगो.. आइ हॅव ऑलरेडी डन दट स्वीट हार्ट.. "

"ओके... " कहके मैने अपना फोन रखा और जीन्स टीशर्ट पहन लिया

"हेलो.. होटेल ह***त" मैने रिसेप्षन पे फोन लगाया

"यस सर..हाउ मे वी हेल्प यू"

" वीरानी हियर, वी हॅव रूम बुकिंग्स इन युवर होटेल आंड वेड्डिंग फॉर टुमॉरो"

"ओह यस सर.. टेल मी प्लीज़"

"कॅन यू प्लीज़ अरेंज वीडियो प्रोजेक्टर इन दा हॉल व्हेअर वेड्डिंग ईज़ टू टेक प्लेस"

"सॉरी सर, बट दट विल कॉस्ट यू.. थ्ट्स नोट इंक्लूडेड इन युवर पॅकेज"

"चार्ज मी एनितिंग ऑलराइट... बट मेक शुवर ऑल दा सीडी'स आंड वीसीडी'ज दट वी वान्ट टू प्ले इन इट , फॉर्मॅट शुड बी सपोर्टेड. ओर एल्स फर्गेट पे, आइ विल श्योर यू गाइस.." मैने कड़क आवाज़ में कहा

"शुवर सर.. रेस्ट अश्यूवर्ड.... वी विल डू तट"

मैं रिसेप्षनिस्ट से बात करके अपने कमरे वापस आया और नीचे देखने लगा.. कुछ लोग अभी भी मस्ती में झूम रहे थे, ज़य अभी अपनी तितलियों से घिरा हुआ था.. मुझे उपर देख उसने आँख मारी.. मैने भी थम्ब्स अप करके उसको हौसला बढ़ाया...

मैं अपने रूम में आके इधर से उधर , उधर से इधर चक्कर काटने लगा... वक़्त धीरे धीरे गुज़र रहा था.. नींद तो मानो कोसो दूर थी मेरी आँखों से.. मैने वक़्त देखा तो अभी 12 ही बजे थे... नीचे लिविंग रूम से मोम डॅड ज़य विजय शन्नो, इन सब की आवाज़ें आ रही थी.. मैं भी नीचे जाके उनके साथ बैठ गया और बातें करने लगा..देखते देखते रात के 1.30 बज गया और सब लोग अभी तक बैठे हुए था... इतने में शन्नो और विजय ने कहा

"भाई साब, अंशु का फोन आया था कुछ देर पहले, आपकी इजाज़त हो तो हम उनके घर से जल्दी होके आते हैं" विजय ने पापा से पूछा

"अरे इजाज़त कैसी भाई, जाओ, और हमारा नमस्कार कहना उनसे" पापा ने कहा

"चलो..." कहके शन्नो और विजय जल्दी से भाग गये और गाड़ी लेके निकले..

मैं समझ गया और ज़य को इशारे से कहा कि मोम डॅड को भी अंदर ले जाए अब... ज़य मोम डॅड को अपनी कॉलेज के किस्से के बहाने अंदर ले गया और उनके साथ बातें करने लगा... मैने चुपके से गाड़ी निकली और अपनी मंज़िल की ओर निकल गया.. मेरे कुछ ही आगे शन्नो और विजय की गाड़ी थी, मैने थोड़ी स्लो कर दी अपनी गाड़ी ताकि उन्हे शक ना हो... जैसे ही वो काफ़ी आगे निकले, मैने तेज़ी से अपनी गाड़ी बढ़ाई... मैं पहुँच गया जहाँ मुझे जाना था.. पहुँचते ही

"हेलो ब्रदर.. हियर ईज़ युवर आक्सेस कार्ड" शक़स ने मुझे कार्ड पकड़ाया..

बिना कुछ बोले मैं सीडीयों से अपने फ्लोर पे गया और रूम में कार्ड पंच किया..

"बीएप्पप्प्प..." आवाज़ के साथ मेरा रूम खुला और सामने जो सेट अप मुझे चाहिए था, वो ठीक वैसे ही था...

मैं जाके सब चेक करने लगा, और तसल्ली कर ली.. अपनी नज़रें मैने स्क्रीन पे लगा ली... जैसे जैसे शख्स आते गये, वैसे वैसे राज़ खुलते गये.. बॉस भी था.... मेरा अंदाज़ा सही था बॉस कौन है.. मैने जो जो उसके बारे में सोचा, वो सब सही निकला.... फाइनली... मेरे सामने था डॉली का कातिल... प्लान तो बॉस का था, पर एक्सेक्यूट करने वाले को देख के मेरे होश उड़ गये.. ये क्यूँ करेगा ऐसा.. करीब 2.30 बजे से लेके 5 बजे तक मैं वहीं बैठ के सब नज़ारे देखता रहा.. कन्फेशन, सेक्स, पॅशन... क्या नहीं था...

"डिज़्गस्टिंग" कहके मैं वो रूम से चुपके से निकला, क्यूँ कि जो मुझे चाहिए था, वो मुझे मिल चुका था.. मैं जैसे ही रिसेप्षन पे पहुँचा

"ऑल ओके..." सामने शक़्स ने पूछा

"यस सर.. ऑल वेल.. सीडी कब तक दोगे" मैने पैसे देते हुए कहा

"अरे, नो मनी नाउ... सीडी कल सुबह 10 बजे तुम्हारे घर पहुँचा देगा मेरा आदमी"

"सी यू टुमॉरो.. उर इन्वाइटेड अट होटेल ह***त, 12.30 PM , ओके" कहके मैं अपने घर की तरफ निकल गया

"बेब... प्लीज़ वेक मी अप अट 8 हाँ.. नोट लेट" मैं ललिता को एसएमएस करके सोने ही जा रहा था के तभी मैने एक और एसएमएस किया एरिसटॉटल को

"भाई.. प्लीज़ बी देअर ऑन टाइम, माइ कार एमएच ** 9**9 विल कम टू पिक यू अप... ही विल मेक श्योर यू रीच मी अट राइट प्लेस"

 


ये दो एसएमएस करके मैं अपने रूम में सो गया... नींद आनी नहीं थी, पर फिर भी आँखे बंद करके लेट गया था... हर घंटे में मोबाइल देख के टाइम चेक कर लेता.. 7.45 बजे नींद खुली तो फिर सोया ही नहीं...

"अवेक डियर.. प्लीज़ कम नाउ, सेंडिंग दा ड्राइवर.. नीड टू डिसकस सम्तिंग विद यू" मैं ललिता को एसएमएस करके अपने लप्पी पे बैठ गया और पेन ड्राइव में एक वीडियो क्लिप स्टोर कर ली और उसे अपने वॉलेट में रख दिया.... सुबह 8 बजे से ही ढोल नगाड़े वाले आए हुए थे और आके सब को तंग कर रहे थे... मैने दरवाज़ा खिड़की सब बंद कर लिया... ललिता का जवाब आया

"अट होम यार... आइ केम अट 6 ओन्ली... कमिंग इन युवर रूम" जैसे ही मैने ललिता का एसएमएस पढ़ा, दरवाज़े पे नॉक हुई, मैने दौड़ के दरवाज़ा खोला तो सामने ललिता खड़ी थी... मैने दरवाज़ा बंद किया और उसे गले लगा लिया..

"क्या हुआ भाई... क्या हुआ बताइए" ललिता मेरे बालों में हाथ फेरने लगी...

"ललिता.. थॅंक यू वेरी मच.. तेरी वजह से ये सब मुमकिन हुआ है, नहीं तो आज हम इस घर की आखरी खुशी मना रहे होते" मैं उसे फिर गले लग गया

"व्हाट भाई.. ये मेरा घर नही है क्या... आंड व्हाट दा हेक, अंकल आपसे ज़्यादा मुझे प्यार करते हैं समझे, तो मैने जो भी किया वो अपने लिए था, आपके लिए नहीं.." ललिता ने मुझे बेड पे बिठाते हुए कहा

"आंड हां, एक बात कहूँ.... आप इतनी लड़कियों से घिरे रहे पूरे किस्से में, डॉली से लेके अंशु तक, हर एज की... इतना उनके साथ आपने रंगरलियाँ मनाई, मेरे साथ आपने बिल्कुल कुछ नहीं किया. यूआर ट्रू जेंटलमेन बॉस... बट मैं बात ये है, के आपको संजय का ख़याल कैसे आया.. आइ मीन वो तो हमारे दिमाग़ में कभी आया ही नहीं था..." ललिता ने आँखें मिला के पूछा

"वो इसलिए डियर, जिस दिन हम इंडोनेषिया से आए थे डॉली की डेथ के कारण, मुझे तब भी संजय नहीं दिखा था, पर याद है, कुछ महीने पहले हमारे एक रिलेटिव की शादी थी... संजय वहाँ आया था.. जो बंदा एक शादी में आ सकता है, पर बहेन की डेथ पे नहीं, तो उसपे शक तो जाएगा.. बस नज़र चाहिए, मुझे उस दिन भी कुछ फिशी लगा था, बट दिमाग़ से निकल गया था.. क्यूँ कि, मैं पूजा से घिरा हुआ था ना स्वीट हार्ट" मैने ललिता को आँख मार कर कहा

"चलो भाई, पेन ड्राइव ली आपने... और रात वाली डीवीडी कब आएगी" ललिता ने पूछा

"ये ले पेन ड्राइव, और मैं डीवीडी अभी 10 बजे आएगी, तब तक तू तैयार हो जा.. मैं भी नहा लेता हूँ.. और हां प्लीज़ कार में मेरे साथ बैठना, कुछ बातें करनी हैं" मैं ललिता को बोलके बाथरूम में घुस गया... आज मुझे फ्रेश होने की कोई जल्दी नहीं थी.. आराम से मैं नहा रहा था, आराम से अपनी मॉर्निंग आक्टिविटीस ख़तम की... 8.30 बजे से लेकर 9.45 तक मैं बाथरूम में था... जब लगा कि चलो अब ख़तम कर लेते हैं, टवल लपेट के मैं बाहर आ गया.... जैसे ही मैं बाहर आया, मेरे मोबाइल में एसएमएस आया

"भाई, बंदा तुम्हारे घर के नीचे है डीवीडी ले लो"

मैं तुरंत ललिता के रूम में गया, वो अभी भी नहा रही थी.. मैं टवल में ही नीचे चला गया और नीचे जाके देखा तो एक बंदा टोपी पहने हुए खड़ा था घर के सामने.. मैने इशारे से उसे बुलाया

"डीवीडी ?"

"हां, पर आप कौन.."

"मुझे ही देनी है भाई" कहके मैने उस बंदे से डीवीडी ले ली

"ये लो 500 रुपये.. जलसे करो" कहके मैं वहाँ से उपर भाग आया..

जैसे ही मैं दरवाज़े पे पहुँचा, पीछे से आवाज़ आई

"भाई ,इतनी जल्दी क्या है.. कपड़े पहन के आते नीचे" पीछे ज़य ने आवाज़ दी..

"छोटू, एक काम कर, जब तक मैं रेडी होता हूँ, तू लप्पी ऑन कर और ये डीवीडी स्टोर कर..

"ओके भाई.. चलो" कहके ज़य और मैं मेरे रूम में आ गये

मैं कपड़े पहनने लगा और ज़य लॅपटॉप पे बैठ गया. जब तक मैने अपना पर्फ्यूम लगाया, . पहनी, तब तक छोटू ने लप्पी में डिस्क डाल के उसे कॉपी करने लगा..

"10 मिनट्स भाई.. कौनसी डीवीडी है ये... ओह माइ गॉड.. ये वोई है क्या.. भाई, लेट मी सी इट" ज़य ने कहा

"टाइम नहीं है भाई, जब तक ये कॉपी हो तू ललिता के पास जा और उससे मेरी पेन ड्राइव लेके आ" कहके मैने उसे धक्का देके ललिता के पास भेजा और अपने कपड़े पहन के लॅपटॉप पे नज़रें गढ़ाने लगा..... जैसे जैसे डिस्क कॉपी होती जाती, मेरी बेचेनी बढ़ने लगती... 60 सेकेंड्स.... 50 सेकेंड्स.... 30 सेकेंड्स..... 10 सेकेंड्स.... 5 सेकेंड्स....." जैसे ही ये मसेज बंद हुआ,

"छोटू, जल्दी आ यार,. किधर है" मैं अपने रूम से ही चिल्लाने लगा

"आ गये, वाइ शाउटिंग सो मच... ये लो पेन ड्राइव.." ललिता और ज़य मेरे रूम में एक साथ आ गये

"जल्दी दो.. लेट मी कॉपी दिस" कहके मैने पेन ड्राइव लप्पी में डाली और उस फाइल को लॅपटॉप से पेन ड्राइव में कॉपी कर डाला

"छोटू, एक काम कर, तू और ललिता होटेल में जाओ, मैने वहाँ बोला हुआ है कि प्रोजेक्टर तैयार रखें... वहाँ जाके चेक करो इसमे जो 2 फाइल्स हैं वो प्ले हो रही है.. आइ डोंट वान्ट टू टेक एनी चान्स ऑलराइट..." मैने जल्दी में ज़य और ललिता से कहा

"कॉपी दट ब्रदर..." कहके ज़य और ललिता जल्दी से भाग के होटेल में निकल गये

मैं तैयार होके नीचे आया, मोम डॅड रेडी थे, और बस बारात निकलने का वेट कर रहे थे..

"आओ भाई.. दा मॅन ऑफ दा डे... ये लो सेहरा तो पहन लो.." डॅड ने सेहरा आगे करते हुए कहा

"डॅड, कार में मेरे साथ ललिता बैठेगी.. नो वन एल्स हाँ" मैने सेहरे को हाथ में लिया और उसे देखने लगा

"अरे ऐसे नही, इसे मैं बांधता हूँ दो, और ठीक है ललिता ही जाएगी तुम्हारे साथ, पर अभी वो और ज़य कहाँ गये" डॅड ने सेहरा बाँधते पूछा

"डॅड, वो मैने पूजा के लिए फर्स्ट नाइट गिफ्ट लिया है, बस वोई कलेक्ट करने गये हैं..." मैने बात बनाते हुए कहा

"गुड वन सन... यू नो दा वे टू फीमेल'स हार्ट हाँ.. व्हाट ईज़ इट ?" डॅड ने गिफ्ट के बारे में पूछा

"नतिंग मच डॅड.. जस्ट दा प्लॅटिनम लव बॅंड्स" मैने होशयारी करके महेंगी गिफ्ट बताई

"ओह... आंड दट ईज़ नतिंग.. दट इस नतिंग... सोन, थ्ट्स दा बेस्ट एनी मॅन कॅन गिफ्ट टू हिज़ लव... आइ आम इंप्रेस्ड" डॅड मेरी पीठ ठोकते हुए बोले

"क्या हुआ भाई, सुबह सुबह बाप बेटे.. आप इसे कुछ गंदी बात मत सीखाना समझे. " मोम ने डॅड से मस्ती में कहा

"अरे, मैं इसे नहीं, ये मुझे सीखने वालो में से है.. मैं आज तक जो गिफ्ट तुम्हे नहीं दे पाया वो इसने अपनी बीवी के लिए खरीद भी ली" डॅड ने मोम से शरारत करके कहा

"हटिए, आपने आज तक मुझे कहाँ कुछ दिया है.. और राज अच्छे से जानता है किसका दिल कैसे जीतना है" मोम और डॅड मेरे साथ बातें करने लग गये..

 


बाते करते करते वक़्त आता गया बारात का, और सब बाराती भी इकट्ठे हो गये... शन्नो, विजय, माया बुआ, पायल.. सब आ चुके थे, और सब अपनी अपनी बातों में लगे हुए थे.. ज़य यहाँ नहीं आने वाला था क्यूँ कि उसका प्रवेश इस घर में बॅन था, सो वो डाइरेक्ट वहीं आएगा. ऐसा मुझे ललिता ने बताया था.... भीड़ बढ़ती गयी, मस्ती बढ़ती गयी, वक़्त गुज़रता गया... पर ललिता और ज़य अभी तक नहीं आए थे... जब तक वो लोग आते, मैने एक कोने में जाके एरिसटॉटल को फोन किया

"भाई किधर है, ना एसएमएस करता है, ना फोन उठाता है" मैने धीमी आवाज़ में पूछा

", बस गाड़ी में बैठा हूँ, अभी 1.30 या 2 घंटे में आ जाउन्गा.." एरिसटॉटल ने जवाब दिया

"अच्छा, मेरे घर नहीं आना... ड्राइवर को पता है मैने उसे अड्रेस दिया है, वहीं आना डाइरेक्ट ओके.. होटेल ह***त में आना है.. गॉट इट.." कहके मैने फोन रख दिया और जाके सब के साथ खड़ा हुआ...5 मिनट में ललिता और ज़य भी आ गये

"चलें सन... ललिता ईज़ ऑल्सो हियर अब तो.." डॅड ने ललिता को अपने पास बुलाते हुए कहा

"जी अंकल, बोलिए" ललिता ने पापा के पास आके कहा

"बेटा, राज वांट्स तुम उसके साथ कार में जाओ.. तो चलो, फील दा ड्राइव आंड गिव सम करेज टू युवर ब्रदर ओके" डॅड ने ललिता का माथा चूमते हुए कहा... "आंड माइ डॉल ईज़ लूकिग वेरी प्रेटी.. गॉड ब्लेस्स यू"

हम जैसे ही गाड़ी में जाने लगे, तब पायल ने कहा

"मामा.. मैं भी गाड़ी में बैठूँगी.."

"सब गाड़ी में बैठेंगे तो नाचेगा कौन" मैने मस्ती करके पायल को मना कर दिया

"बिल्कुल सही, और पायल व्हाट ईज़ दिस, अपने मामा को भी थोड़ा डॅन्स दिखाओ, अगर अच्छा डॅन्स करोगी, तो आइ विल मेक आ फिल्म विद यू.. चलो अब जल्दी करो" कहके पापा पायल को खींच के अपने साथ आगे ले गये और मैं और ललिता गाड़ी में बढ़ने लगे..

"थॅंक गॉड.. वो नहीं आई, बताइए व्हाट ईज़ इट" ललिता ने गाड़ी में बैठ के कहा...

गाड़ी में साउंड प्रूफ ग्लासस थे, इसलिए बाहर का ज़्यादा आवाज़ अंदर नहीं आ रहा था

"ललिता, एरिसटॉटल से बात कर ली मैने... कॉल प्रसाद, यादव और तिवारी.. तीनो से कन्फर्मेशन ले ले, कितने बजे पहुँचेंगे... अगर उन्हे कोई दिक्कत है तो गाड़ी भिजवा देते हैं..." मैने अपना सेहरा निकाला और ज़ोर ज़ोर से साँस लेने लगा....

"चिल भाई.. अभी करती हूँ मैं. रिलॅक्स ओके,ये लो पानी.. और हां पेन ड्राइव ये रही.. सब चेक किया, सब ठीक है" कहके ललिता ने पानी की बॉटल दी और अपने फोन से बारी बारी सब को फोन घुमाने लगी

सब से बात ख़तम करके

"डन है भाई.. प्रसाद और तिवारी तो पहुँच गये हैं उधर, यादव ईज़ ऑन दा वे... आंड डोंट वरी, उनके पास सेक्यूरिटी भी तो है.." ललिता ने अपने बाल खोलते हुए कहा

"यआः राइट.. आंड जय , ही विल बी देअर विद अंशु ?" मैने कन्फर्म किया

"विल बी देअर् नहीं, ही ईज़ देअर.. ज़य और मैं निकल रहे थे तभी अंशु के साइड वाले वहाँ पहुँच ही रहे थे.. हम चुपके वहाँ से आ गये" ललिता ने पानी पीते हुए कहा

"ओके... वेट आ सेकेंड" कहके मैने फिर एरिसटॉटल को फोने लगाया

"भाई, तेरी गाड़ी में ही हूँ.. पहुँच रहे हैं कुछ देर में" एरिसटॉटल ने सीधा ये जवाब दिया

"अबे सुन अब, अपने साथ हो सके तो 4- 5 कॉन्स्टेबल और सब इनस्पेक्टर्स लाना.. कुछ ज़्यादा लोगों की बारात निकलेगी वहाँ से... समझा" मैने एरिसटॉटल को फोन पे हुकुम देके फोन काट दिया

"बड़ा आया, साला ना हेलो बोलता है, ना ही बोलता है" मैने एरिसटॉटल को गाली देते हुए कहा

"साला वो नहीं, आप बनॉगे उसके.. प्यार से बोलो" ललिता ने अपनी दबी हुई हँसी के साथ कहा

"हहहहा.. ओके गॉट इट.. " मैं फाइनली रिलॅक्स हुआ और ललिता से बातें करने लगा

होटेल में पहुँचने का रास्ता आधे घंटे का, बारात की वजह से हमको डेढ़ घंटा लग गया

जैसे ही हम नज़दीक आने लगे होटेल के

"ललिता, कॉल यादव, व्हेअर ईज़ ही" मैने अपना सेहरा बाँधते हुए पूछा

"भाई, वेट" कहके ललिता ने यादव को कॉल लगाया और उसके साथ बात की

"भाई, ही हॅज़ रीच्ड.. इनफॅक्ट तीनो को हमने जो रूम दिया है वहाँ बैठे हैं..."

"अच्छा, वेट.. एक और फोन कर लूँ मैं" कहके ललिता ने एक और फोन लगा लिया

"हेलो.. हाई, कैसे हैं आप... ललिता हियर, राज की बहेन.. जी, हाउ वाज़ युवर ट्रिप.... एप राज ने बताया, अच्छा आइ जस्ट कॉल्ड टू चेक यूआर सेफ.. ग्रेट.. अच्छा एक और बात, आप जब अपने साथ कॉन्स्टेबल्स और सब इनस्पेक्टर्स लाएँगे, तो सबको हर एक एग्ज़िट पॉइंट पे खड़ा कर दीजिएगा प्लीज़.... यस, .. हां हां वो तो आइ नो यू आर स्मार्ट एनफ, बट आइ एम जस्ट बीयिंग सेफ... यस... बाई, सी यू सून" कहके ललिता ने फोन कट किया

"थोड़ा कंट्रोल कर, अभी शादी नहीं हुई है तेरी...." मैने ललिता को देख के कहा

"जी भाई.... " कहके ललिता ने अपनी खुशी तो दबाई, पर उसकी आँखों में खुशी सॉफ झलक रही थी

"व्हाट दा हेक... कॉल गफ़ूर और चौकसे को यहाँ लेके आए बोल उसको.. उसको तो भूल ही गये" मैने चिल्ला के कहा

"चिल्लेक्ष भाई.. उसको मैने सबसे पहले फोन किया था. वो उसे लेके यहाँ आ रहा है, और उसको रूम नंबर दे दिया है मैने" ललिता ने अपने बाल बाँध लिए क्यूँ की हम बस होटेल से 1 मिनट की दूरी पे थे...

जैसे ही हम होटेल के बाहर पहुँचे...

"आइए आइए दामाद जी... आइए, आपका इंतेज़ार था.." कहके अंशु ने गाड़ी का दरवाज़ा खोला और मुझे बाहर आने को कहा

जैसे ही मैं बाहर आया अंशु और उसके आस पास की औरतें सब हसी मज़ाक करने लगी.... 10 मिनट के स्वागत के बाद, हम लोग अंदर जाने लगा जहाँ शादी का मंडप बँधा हुआ था.. हम शादी के मंडप के पास पहुँचे और उसके ठीक सामने ही प्रोजेक्टर लगा हुआ था....

 


"अरे ये प्रोजेक्टर यहाँ क्यूँ है, ज़य चेक करो तो" डॅड ने ज़य से कहा

"डॅड डॅड.. वेट, मैने लगवाया है.. आंड यू विल नो दा पर्पस सून" मैने ज़य को रोकते हुए कहा

कुछ रस्मो के बाद पूजा को मंडप में लाया गया.. पर मेरी आँखें जिसे ढूँढ रही थी वो मुझे अब तक नहीं दिखा था....

"व्हेअर दा फक आर यू मॅन.." कहके मैं इधर उधर नज़रें घूमने लगा..

"आअहहा..... देअर यू आर" मैने खुद से कहा... संजय एक कोने में शन्नो के साथ खड़ा था..

जैसे ही पूजा और मैं खड़े हुए साथ में, कुछ फोटो सेशन्स चालू हो गये...

इतने में एरिसटॉटल अंदर आया, उसके साथ कुछ कॉन्स्टेबल्स थे और सब इनस्पेक्टर्स भी थे... उसे देख सब लोग घुसफूस करने लगे.. मैने अपना सेहरा उतारा..

"वेट आ मिनट इनस्पेक्टर.. ईज़ देअर् एनी प्राब्लम" डॅड उसके पास जाते हुए बोले

"डॅड डॅड... आइ नो हिम ही ईज़ आ फ्रेंड.. और यहाँ काम से आए हैं.. एरिसटॉटल , दोस्त एन्षूर कर ले यू हॅव एनफ कवर ओके..." मैने उसे रास्ता देते हुए कहा

"सन.. व्हाट्स गोयिंग ऑन.." दाद ने मुझसे पूछा हैरानी में

"सर.. आइ विल टेल यू... " एरिसटॉटल ने कहा

एरिसटॉटल :- सर, अभी डेढ़ महीने पहले आपके घर में, डॉली नाम की लड़की की डेथ हुई थी... उस इन्वेस्टिगेशन के लिए मैं आपके घर भी आया था

डॅड :- ओह यस इनस्पेक्टर, आइ आम अवेर, बट दिस ईज़ नोट दा राइट टाइम, कॅन वी प्लीज़ डिसकस दिस लेटर

एरिसटॉटल :- सर... प्लीज़ लेट मी फिनिश... डॉली का मर्डर हुआ था... कोल्ड ब्लडेड मर्डर...

डॅड :- व्हाट आर यू सेयिंग.... आर यू श्योर...

एरिसटॉटल :- सर, आब्सोल्यूट्ली... आंड वन मोर थिंग.... डॉली का कातिल अभी इस वक़्त यहीं मोजूद है

"व्हाट.. इधर... इनस्पेक्टर, प्लीज़ बी शुवर एनफ टू मेक एनी अलिगेशन्स ऑन एनीबॉडी.. इधर सब टॉप नॉच लोग हैं, अगर.." डॅड ने इतना ही कहा के बीच में उनके एमएलए फ्रेंड आए

"वीरानी जी.. ये हमारी पोलीस टीम का सबसे होनहार बंदा है.. आप चिंता ना करें, आइ विल टेक केर ऑफ दट... इनस्पेक्टर, यू प्लीज़ कंटिन्यू" एमएलए ने कहा

"थॅंक यू सर.. हां तो मैं ये कह रहा था कि डॉली की डेड बॉडी के पास हमे एक वाच मिली.. इट वाज़ आ स्विस वाच मेड फ्रॉम 18 केरट डिमओंड्स.. मैं उसी सिलसिले में अभी ज़ुरी से ही लौटा हूँ.. स्विट्ज़र्लॅंड से मुझे ये एक बिल मिला है जिसमे सॉफ सॉफ उस आदमी का नाम लिखा है जिस आदमी की ये वाच है..." एरिसटॉटल ने पापा को बिल की कॉपी दिखाते हुए कहा

"गो अहेड इनस्पेक्टर... फिनिश युवर वर्क, हूस दट बस्टर्ड.." पापा ने गुस्से में आके कहा

इससे पहले एरिसटॉटल कुछ बोलता, मैने डॅड से कहा

"डॅड, जस्ट आ सेकेंड... उससे पहले एरिसटॉटल अपने सब साथियों को अंदर बुलाओ... तब तक शन्नो आंटी, विजय अंकल, माया बुआ, अंशु जी, पूजा, सर, आप भी (अंशु का पति), पायल और.... संजय भैया.... आप सब प्लीज़ यहाँ आएँगे, मैं आप सब के लिए तोफे लाया हूँ...

", व्हाट ईज़ दिस नाउ.. ये सब क्या है..." डॅड ने गुस्से में कहा

"डॅड, प्लीज़ लेट मी डू इट.. " कहके मैं आगे बढ़ा और सबको आगे आने पे फोर्स किया...

" जी.. ये सब क्या है, हमारा मज़ाक बना रहे हैं आप..." पूजा के बाप ने आगे आते हुए कहा... अंशु और शन्नो के चेहरे पे पसीना टपक रहा था.. उधर से पूजा भी धीरे धीरे आगे आ रही थी... पायल के चेहरे पे कोई भाव नहीं थे.. माया बुआ हैरान होके वहाँ खड़ी तो हुई, पर कुछ बोल नहीं पा रही थी... सबसे आख़िर में संजय आया.. उसका चेहरा देख के डॅड की तो आँखों में खून दौड़ने लगा.. संजय कुछ बोला नहीं और चुप चाप आके खड़ा हुआ....

"सन दे ऑल आर हियर... क्या करना चाहते हो तुम अब" डॅड ने मुझे कहा

"डॅड रिलॅक्स ओके... ज़य, मोम को रूम नंबर 2**8 में ले जाओ, आपके नाम पे बुक्ड है वो... ललिता, कॉल देम प्लीज़" मैने ललिता को देखते हुए कहा

" बेटे, क्या है ये, मेरा तो दिल बैठा जा रहा है... " मोम ने मेरे पास आके कहा

"मोम, देअर् ईज़ नतिंग टू वरी अबाउट... ज़य, प्लीज़ जल्दी जाओ.." मैने चिल्लाके कहा

"भाई, देअर दे आर..." ललिता ने दरवाज़े पे इशारा करके कहा

तिवारी, यादव और प्रसाद... इन तीनो को देख के मैने पूजा अंशु और उसके बाप के एक्सप्रेशन्स देखे.... तीनो की गान्ड फट के हाथ में आ गयी थी....

"ये यहाँ क्या कर रहे हैं." अंशु ने आगे आते कहा

"अंशु जी, प्लीज़ वहीं खड़े रहें, नहीं तो मुझे ज़बरदस्ती करनी पड़ेगी" मैने अंशु को ठंडे दिमाग़ से कहा

", मेरे सब बंदे यहाँ हैं, बोलो" एरिसटॉटल ने मुझे इनस्पेक्टर्स और सब इनस्पेक्टर्स दिखाते हुए कहा

"भाई... इन सब के आस पास लगा दो इन्हे, इनमे से कोई भी यहाँ से भागना नहीं चाहिए ओके.." मैने एरिसटॉटल के कान में कहा

उसने मेरी बात समझी, और एक हल्के इशारे से अपने आदमियों को उन सब को घेरने के लिए कहा.. धीरे धीरे उसके आदमी उन्हे घेरने लगे.. हां थोड़ी दूरी पर थे, ताकि कोई हरक़त ना कर सके... जैसे जैसे एरिसटॉटल के आदमी आगे बढ़ रहे थे , बाकी आए हुए सब मेहमान पीछे हटने लगे और एक कोने में जा खड़े हुए.. अब सीन ये था कि इन लोगों के चारो और 15 फीट डिस्टेन्स में सब इनस्पेक्टर्स और कॉन्स्टेबल्स बंदूक ताने खड़े थे.... मैं , एरिसटॉटल , डॅड और ललिता उनके सामने..

"इनस्पेक्टर.. नाउ यू कॅन गो अहेड" मैने एरिसटॉटल से कहा

"थॅंक्स .. हां मिस्टर वीरानी... तो डॉली के कातिल का नाम तो वैसे काफ़ी पुराना है, पर उसके ख़ास दोस्त उसे डीजे के नाम से जानते हैं... और उसपे डॉली के खून के अलावा फेक पासपोर्ट्स और मनी लॉंडरिंग के भी काफ़ी केसस हैं... ही लव्स ट्रॅवेलिंग यू सी... एक्सपेन्सिव वॉचस, महेंगी दारू, एग्ज़ोटिक लाइफ स्टाइल.. ये सब उसे बहुत पसंद है... इन्हे पाने के लिए वो किसी भी हद तक जा सकता है.. मनी लॉंडरिंग तो छोड़ो, अब इन्होने खून भी कर लिया.." एरिसटॉटल आगे बढ़ते हुए बोलने लगा और उसके कदम जा रुके विजय और अंशु के पति के सामने...

"है ना... मिस्टर दिलीप जोशी.. उर्फ डीजे" एरिसटॉटल ने कॉन्फिडेन्स में आके कहा

"व्हाट... इनस्पेक्टर आप होश में हैं... मैं आपकी वर्दी उतरवा सकता हूँ अंडरस्टॅंड.. आप मुझे जानते नहीं" अंशु के पति ने गुस्से में आके कहा

 


"मेरे पास सबूत है , ये बिल उस स्टोर का जहाँ से आपने ये वाच खरीदी... अगर आप चाहें तो स्विट्ज़र्लॅंड से गवाहों को भी लाया जा सकता है..." एरिसटॉटल ने इतना कहा, कि मैने उसे बीच में टोक दिया

"नहीं.. स्विट्ज़र्लॅंड जाने की नो नीड... ये तो अपना गुनाह कबूल कर चुके हैं.." मैने आगे बढ़ते हुए कहा

"वॉट नॉनसेन्स... ये कक्ककयाआअ बाकव्वासस्स हैं" पूजा के बाप की आवाज़ लड़खड़ा रही थी

"रिलॅक्स मिस्टर जोशी... रिलॅक्स... लॅडीस आंड गेंटल्मन... आइ वुड प्लीज़ रिक्वेस्ट यू ऑल टू वेकट दा रूम आसाप... बिकॉज़ आप सब लोग इतना दूर आए हमारी खुशी में शरीक होने, आपके खाने का बंदोबस्त रेस्तरॉ में है.. प्लीज़ बी और गेस्ट्स...." मैने चिल्लाके सब को रूम खाली करने को कहा

डॅड आगे आके कुछ बोलते उससे पहले मैने डॅड से कहा.. "डॅड रिलॅक्स.. आइ नो व्हाट आम आइ डूयिंग"

10 मिनट्स में रूम एक दम खाली हो चुका था.. रूम में अब मैं ललिता और डॅड थे.. सामने इनस्पेक्टर्स, एरिसटॉटल और बाकी के लोग..

"ललिता.. प्लीज़ स्टार्ट, बट उससे पहले गफ़ूर को बुला ले.." मैने ललिता से कहा

"राइट ब्रदर." कहके ललिता प्रोजेक्टर के पास बढ़ने लगी, और गफ़ूर को भी फोन कर लिया.. जब तक ललिता प्रोजेक्टर कनेक्ट करती तब तक गफ़ूर चौकसे को भी ला चुका था

"चौकसे.. व्हाट आर यू डूयिंग हियर.. और ये सब क्या है" डॅड ने चौकसे को देख के कहा

"डॅड.. यू विल लव हिज़ वर्क...." मैने चौकसे को एरिसटॉटल के पास धक्का देते हुए कहा और उसने उसे भी बाकी सब के साथ खड़ा कर दिया

"भाई.. स्टार्टिंग ओके... 3....2.... 1....... " कहके ललिता भी प्रोजेक्टर से हमारे पास आई और अपनी आँखें स्क्रीन पे गाढ ली

डीवीडी पे था, वो है नीचे

"हाहहहहा... हहहहहाहा.... यस आइ हॅव वॉन मिस्टर वीरानी... आइ हॅव वॉन.... तुम बर्बाद हो गये हो वीरानी हाहहहहहहा..... आज मैने अपना बदला ले लिया है वीरानी... तुम बहुत जल्द अब रोड पे आ जाओगे और मैं तुम्हारा वो हश्र करूँगा कि तुम कभी सोच भी नहीं पाओगे कि ऐसा क्यूँ हुआ.. हहहहहहहहा.. यूआर फिनिश्ड वीरानी....." संजय विक्की के होटेल रूम में था, और दीवार पे मेरे डॅड की फोटो लगा के उनसे बातें कर रहा था...

"वेलकम ऑल... वेलकम टू वर्ल्ड ऑफ संजय... वेलकम ऑल माइ डॉल्स आंड डॉग्स...." संजय ने सबको बुलाते हुए कहा...

धीरे धीरे करके सब लोग फ्रेम में आए... शन्नो, विजय, माया, पायल, ललिता, दिलीप (अंशु का पति) और सबसे अंत में.. पूजा.. जहाँ सब लोग संजय के सामने बैठे थे, वहीं पूजा सीधे जाके संजय की गोद में बैठ गयी..

"हेलो माइ जान.. मीसड यू सो मच.." पूजा ने संजय के होंठों को चाँटे चूमते हुए कहा

"मिस्ड यू टू मी प्रिन्सेस... लव यू अलॉट जान" कहके संजय और पूजा एक लंबे चुंबन में डूब गये

"आहह... चलो, क्या अपडेट है बताओ..." संजय ने बाकी के लोगों से पूछते हुए कहा..

"हे हे हे.. वेट आ सेकेंड.. ये यहाँ क्या कर रही है.. " संजय ने ललिता की तरफ इशारा करके कहा

"ये भी हमारे साथ है संजय..." शन्नो ने बस इतना कहा

संजय रूम में बनी छोटी सी सीडीयो से उतरा, और ललिता के पास आया

"हमारे साथ है.. ये हमारे साथ है.. ये हमारे साथ कभी नहीं हो सकती समझी तुम" संजय ने चिल्ला कर शन्नो को कहा

"है ये कहा ना तुम्हे एक बार.. और भूलो मत , हम तुम्हारे घर वाले हैं ओके... काम की बात करें अब या कुछ और भी बात से ध्यान भटकाना है हमारा" शन्नो ने गुस्से में आके संजय को जवाब दिया

"ये कैसे साबित करेगी कि ये हमारे साथ है.. और तुम, अपनी ज़बान बंद रखो समझी.." ज़य ने शन्नो को धक्का देते हुए कहा जो सीधा विजय के पास जा गिरी

"तुम जो कहो मैं वो कर सकती हूँ, मैं तुम्हारे साथ ही हूँ कब्से.. पर तुम्हारे ये लोग मुझे पहचान नहीं पाए... " ललिता ने विश्वास के साथ जवाब दिया

"क्या पहचान नहीं पाए ये लोग जो तुमने पहचान लिया है.." संजय ने ललिता से पूछा

"अंकल की नेट वर्थ कितनी है तुम पूछो इनसे, इनके पास जवाब नहीं होगा" ललिता ने कॉन्फिडेन्स के साथ कहा.. वो जानती थी कि संजय ये जवाब जानता है, पर क्यूँ कि उसने किसी को नहीं बताया था, इसलिए उसे खामोश रहना पड़ा... वो इस फिराक़ में था कि सब को 5 करोड़ का पप्लू पकड़ा देगा, और एंड में मेरे डॅड को मार देगा.. और डॅड के जाते ही, उनकी सारी प्रॉपर्टी मेरे नाम होने वाली थी, विच मीन्स, ऑटोमॅटिकली पूजा उसे भी अपने नाम करवा लेती... ललिता के इस सवाल से सब चोंक गये, संजय ने कुछ नहीं कहा... काफ़ी देर तक खामोशी के बाद विजय उठा.

"मैं जानता हूँ ललिता... भाई साब की प्रॉपर्टी की वॅल्यू 35 करोड़ है, हम सब उसमे हिस्सेदार हैं.. इसमे क्या बड़ी बात है" विजय ने कॉनफ़ीरड़ेंट्ली जवाब दिया

"हुहम... डॅड, दया आती है कभी कभी आप पे मुझे... अंकल की नेट वर्थ है.. 265 करोड़, एक्सक्लूडिंग हिज़ होल्डिंग्स इन हिज़ प्राइवेट कंपनी... और अगर वो लिस्ट कर देंगे कंपनी को, तो एड 180 करोड़ मोर टू इट.. उनकी नेट वर्थ होगी 445 करोड़..." ललिता ने संजय की आँखों में देखते हुए कहा

ललिता की बात सुनके संजय चोन्का नहीं, पर उसे सब के सामने दिखावा करना था.. वो ललिता को देखता रहा, धीरे धीरे विजय की तरफ बढ़ा

"चटाक..... " एक तमच्चा मारा अपने बाप को जिससे वो जाके ज़मीन पे गिरा

 


"सुन चूतिए... सुन, तेरी इनी हरकतों की वजह से आज हमारे नाम पे एक फूटी कोड़ी नहीं है... फॅक्टरी में जाके क्या गान्ड ही मरवाता है साले गान्डु... अनपढ़ भैनचोद..." कहके संजय वापस ललिता के पास आया

"ललिता.. पुरानी बातें भूल जा.. अब हम साथ हैं" कहके जैसे ही संजय पलटा ललिता ने उसे कहा

"नही संजय.. हम साथ नहीं है... इतने छोटे प्लान में मैं तुम्हारा साथ क्यूँ दूं.. इससे बड़ा प्लान मेरे दिमाग़ में है अभी.." ललिता ने अपनी सीट पे बैठ के कहा

"और वो क्या है ललिता.." संजय वापस अपनी चेर पे गया जहाँ पूजा उसके लिए सिगरेट लेके खड़ी थी

"वो मैं तुम्हे बाद में बताऊँगी.. पहले मैं जानना चाहती हूँ, तुमने इस काम के लिए इतने लोगों को क्यूँ इन्वॉल्व किया... आइ मीन, तुमने ये सब किया क्यूँ"

"ललिता.. शायद तुम भूल गयी हो, कि वीरानी ने मुझे तो चोट पहुँचाई थी, पर उसने डॅड को भी जैल पहुँचाया था... वो ड्रग्स का बॅग, उन्हो ने ही कार में रखवाया था, और उन्हे गिरफ्तार करवाया था.. ये तो भला हो दिलीप मासा का, उन्होने डॅड को बैल दिलवाई.. मुझे आज भी याद है वो दिन जब डॅड जैल से रिहा हुए थे और अंशु के घर पे बैठे थे.. मैं भी था वहाँ, डॅड की आँखों से, उनके हाथों से. हर जगह से खून बह रहा था.. यहाँ तक कि वो चल भी नहीं पा रहे थे.. और उनका गुनाह क्या था.. के उन्होने एक दो कौड़ी की असिस्टेंट का रेप किया था... उस दिन उन्होने साबित कर दिया कि डॅड उनके सौतेले भाई हैं.. मैं नहीं भूल सकता ललिता, तू भले ही भूल जाए, लेकिन मैं नहीं भूल सकता वो दिन जब मोम के पास एक ढंग की साड़ी नहीं थी और राज की माँ ने भी उनकी मदद नहीं की थी... आज तक हर जगह, हर वक़्त उन्होने हमे ज़लील ही किया है.. आज तक उन्होने मेरा हाल तक नहीं पूछा.... और तुझे आज भी उनकी फ़िक्र है ज़्यादा...." संजय ने सीट पे वापस बैठते हुए कहा

"नहीं, फ़िक्र तुम्हारी है तभी तो पूछ रही हूँ... तुम्हारी बात तो मुझे समझ आई पर ये बाकी के लोग... क्या विश्वास है इनका के ये लोग हमे धोखा नहीं देंगे संजय.. आज की डेट पे हमे किसी का इतना भरोसा नहीं करना चाहिए" ललिता ने बाकी सब को देखते हुए कहा

"हाहहाहा.. किसपे भरोसा नहीं है तुझे... इस पूजा पे" उसने पूजा को खड़ा करते हुए कहा

"सुन ध्यान से, पूजा और इसके माँ बाप आज भी हमारे गुलाम रहेंगे, और आगे जाके भी... क्यूँ कि जिस दिन पूजा अपने घर पे बैठ के आराम से दारू पी रही थी, अंशु और उसका पति उनके मा बाप से झगड़ा कर रहे थे.. अंशु के सास ससुर के पास इतनी प्रॉपर्टी थी कि कोई सोच भी नहीं सकता... पर उनके पास एक चीज़ नहीं थी... दिमाग़.. उन बूढ़ों ने सारी प्रॉपर्टी किसी ट्रस्ट के नाम पे की थी.. इस बात को लेके, रोज़ अंशु और उसके सास ससुर का झगड़ा होता था... लेकिन एक दिन, मेरी प्यारी डॉल.. मेरी डार्लिंग पूजा ने अपना दिमाग़ चलाया.. उसने यूनिवर्सिटी के फॉर्म के बहाने अपने प्यारे दादा दादी से साइन करवा ली और उनकी प्रॉपर्टी के नकली डॉक्युमेंट्स बना दिए.. उन पेपर्स के हिसाब से अब सारी प्रॉपर्टी पूजा की थी.. बात तो ये खुशी की थी, पर फिर भी अंशु खुश नहीं थी... उसने गुस्से में आके अपने सास ससुर को मार डाला... जिस रात को उसने और उसके पति ने उन बूढ़ो का खून किया, उनकी बॅड लक.. और मेरी गुड लक, मैं वहाँ पहुँच गया था.. पहुँचा तो मैं कुछ पैसे लेने था, पर मेरी किस्मत देखो... मैने अंशु को उसके सास ससुर को ठिकाने लगाने में मदद की.. तब से लेके आज तक, पूजा और अंशु मेरे तलवे ही चाटेंगे.. है ना मेरी रंडियों" कहके संजय ने पूजा को अपने बाजू में से धक्का दिया...

"ओह.. तो अभी अंशु और उसके बाप को हम कभी भी यूज़ कर सकते हैं, पर पूजा को नहीं,, क्यूँ कि इस किस्से में तो पूजा ने कुछ नहीं किया.. ललिता अब खुलके अपने सवाल पूछने लगी

"अहहहहहा.... व्हाट आ जोक हाँ... ये ऐसा करेगी तो इसके माँ बाप की लाश भी नहीं मिलेगी इसको..और इसके बाप को तो मैं यूज़ कर चुका हूँ समझी..." ज़य ने अंशु के पति को देखते हुए कहा

"ललिता... तुम्हारी बहेन का खून मैने ही किया है... उसे मैने ही मारा है.." दिलीप ने गर्व के साथ खड़े होके कहा

ललिता की आँखों में खून उतर आया... पर उसने खुद पे काबू रखा और पूछा

"क्यूँ.. "

"क्यूँ कि वो राज के हाथों की कट्पुतली बन चुकी थी.,, और पायल ने मिलके डॉली का एमएमस बनाया था जिसकी वजह से वो लोग डॉली को इस्तेमाल करके हम तक पहुँच सकते थे... ये बात हमे पायल ने खुद बताई... अगर वो नहीं मरती, तो आज हम सब यहाँ नहीं बैठे होते..." दिलीप ने बहुत ही सीधे तरीके से ये बात कही.. ना एमोशन्स, ना दुख.. कुछ भी नहीं

"पर संजय.... माया बुआ और पायल क्या कर रहे हैं इधर" ललिता ने आखरी सवाल पूछा

"माया बुआ बेचारी.... उनके पति का कर्ज़ा चढ़ चुका है... कितना है बुआ, ज़रा बताएँगे प्लीज़.." संजय ने माया बुआ को देखते हुए कहा

"20 करोड़.. और ललिता, उनके बिज़्नेस में हो रहे लॉस की वजह से ये कर्ज़ा आज 40 करोड़ हो चुका है..." माया बुआ ने दुख भरी आवाज़ में कहा

 


"तो फिर आपको तो इसमे 5 करोड़ मिलेंगे.. बाकी के पैसे कहाँ से लाएँगी आप..." ललिता ने माया बुआ से कहा

"वो नहीं सोचा है... फिलहाल ये 5 करोड़, घर गाड़ी सोना ज़ेवर बेच के कुल 25 करोड़ इकट्ठे हो जाएँगे... टोटल 30 करोड़.. बाकी के 10 करोड़ के लिए हम ज़्यादा मौहलत ले लेते लेनदारों से" बुआ ने अपनी आँखें पोछते हुए कहा

"और पायल तुम...." ललिता ने पायल को देखते हुए कहा

पायल जवाब देती इससे पहले संजय ने कहा

"हहहहा.. उसने अब तक कुछ नहीं किया... उसने बस राज को अपने प्यार में फ़साए रखा... जब हमे लगा पूजा अब ये काम कर लेगी, हमने उसे वहाँ से हटा दिया... पायल को तो अभी....... यूज़ करना बाकी है ललिता" संजय अपनी सीट से पायल के पास आया था और उसके चेहरे पर उंगली फेरते हुए बोला

"तो तुमने माया बुआ और पायल से कुछ नहीं करवाया अब तक.. हम उन्हे अभी भी इस्तेमाल कर सकते हैं" ललिता ने संजय से पूछा

"नहीं.. और हां ... पायल को हम जब चाहें इस्तेमाल कर सकते हैं, बट माया बुआ हमारा एक काम कर चुकी हैं.. माया बुआ, बताएँगे प्लीज़..." संजय ने माया को देखते हुए कहा

"ललिता... तुम्हारी बहेन को मारने के लिए दिलीप को हथियार मैने ही दिया था.. वो स्विस नाइफ थी.. हमने उसका इस्तेमाल किया क्यूँ कि अगर किसी भी तरह पोलीस को पता चलता कि ये हथियार यूज़ हुआ है, तो भी आसानी से उन्हे सबूत नहीं मिलता, क्यूँ कि ऐसी नाइफ इंडिया में मुश्किल से एक जगह अवेलबल है" कहके माया बैठने लगी सीट पे और धीरे धीरे उसकी आँखें नम हो रही थी

"और और बोलिए... माया बुआ जी..." संजय ने माया को इशारा करते हुए बोला

"और ललिता बेटे.... तुम्हारी बहेन की डेड बॉडी भी मैने और दिलीप ने मिलके ट्रॅक्स पे फेंक दी, ताकि ट्रेन उसके उपर से गुज़रेगी तो किसी को बॉडी पूरी नहीं मिलेगी..." कहके माया अब सिसक रही थी आँसुओं से

"रोना बंद करो समझिइीईईईईईईई" संजय माया पे चिल्लाया

"हां तो ललिता.. अब तुम बताओ तुम्हारा क्या प्लान है.." संजय ने ललिता से कहा

"संजय, अभी प्रॉपर्टी पूजा के नाम हुई है 50 %, विच ईज़ रफ्ली 133 करोड़... क्यूँ ना हम राज को मार दें.. इससे हमे ये फ़ायदा होगा, कि राज के जाते ही पूरी प्रॉपर्टी पूजा के नाम होगी. मीन्स हमारी होगी..

"और ज़य का क्या करेंगे हम.." संजय ने ललिता से सीरीयस होके पूछा

"ज़य कोई मायने नहीं रखता, उसके नाम पे 10 करोड़ है , वो घर से दूर रहता है.. उसे कब मारेंगे, कब गायब करेंगे किसी को कानो कान खबर भी नहीं होगी.." ललिता ने संजय के हाथ से सिगर्रेट लेते हुए बोला

"हहहहा.. यआः, आइ लाइक इट ललिता.. राज को कैसे मारेंगे, वो बताओ अब" संजय ने ललिता से सिगर्रेट छीनते हुए कहा

"वो भी प्लान है मेरे पास... शादी के बाद राज अपने मा बाप को ऑस्ट्रेलिया भेजने वाला है ज़य के साथ... मतलब पूजा और राज अकेले होंगे.. नया शादी का जोड़ा घूमने जाएगा बाहर.. पूजा को बोल दो कि हनीमून पे पहाड़ी इलाक़े में जाए और उसकी गाड़ी में.. उसकी गाड़ी की ब्रेक्स फैल कर दो और खेल ख़तम.. लौंडा गुम हो जाएगा" ललिता ने संजय के आस पास घूमते हुए बोला

"हहहहहा.. हाआँ अहहा.. यॅ नाइस... सुन आए रंडी पूजा.... शादी के बाद कहाँ जाएगी घूमने, अब तक सोचा हम" संजय ने पूजा को देखते हुए कहा

"अब तक नहीं संजय.. लोनवाला या महाबालेश्वर सही रहेगा..." पूजा संजय के पास आती हुई बोली

"महाबालेश्वर जा समझी... और एक दिन में उसका खेल निपटा... बेटे की मौत का सुनके उसके माँ बाप यूही मर जाएँगे.." समझे तुम सब, या नहीं..

संजय ने सब को चिल्लाते हुए कहा

सब ने हामी भरी और संजय वापस अपनी चेर पे जा बैठा...

"ललिता डार्लिंग.. प्लीज़ कम हियर..."

 
ललिता उसके पास जाने लगी.. जैसे ही ललिता उसके पास पहुँची, संजय उसके बदन पे हाथ घुमाने लगा.. देखते देखते ललिता ने उसे रोक दिया

"संजय.. एक बार प्रॉपर्टी हाथ लगने दो... फिर आइ आम ऑल युवर्ज़... अभी डिस्टर्ब नहीं होना चाहती मैं प्लीज़.." ललिता ने संजय को देखते हुए कहा

"ओके.. तू नहीं, तो ये रंडी ही सही..." कहके संजय ने पूजा को पकड़ा और उसके होंठ चूसना चालू कर दिया

इतने में ललिता ने जाके वो डीवीडी बंद कर दी, क्यूँ कि उसके आगे उन लोगों की चुदाई थी जिससे डॅड को ज़्यादा धक्का पहुँचता..

"इतना बड़ा धोखा.. हाउ डरे यू.." कहके डॅड संजय के पास जा रहे थे, तभी एरिसटॉटल ने उन्हे रोका

"मिस्टर वीरानी.. प्लीज़ कंट्रोल, आइ विल टेक केर ऑफ देम.."

"इनस्पेक्टर... मेक श्योर थे रिमेन इन जैल फॉर एंटाइयर लाइफ" डॅड अपनी आँखें पोछते हुए बोले

"संजय... जोश के साथ होश खोना अच्छी बात नहीं... ललिता ने तो केवल अपना काम किया... उसे भेजा गया था तुम्हारे बीच ताकि वो तुम्हारी प्लॅनिंग जान सके... तुम जोश में आके उसे सब बताने लगे और मेरा काम आसान हो गया....."

"आंड यू मिस्टर आंड मिसेज़ जोशी... आइ हॅव नो वर्ड्स फॉर यू...." कहके जैसे ही मैं आगे बढ़ा तभी अंशु बोली

", इनस्पेक्टर सर.. ये सब संजय ने झूठ कहा.. हमने हमारे माँ बाप को नहीं मारा.."

"जी ठीक है, आपको गवाह बना देता हूँ मैं.." कहके मैने अपना रुख़ उनके ड्राइवर तिवारी और उनके गार्डनर यादव की तरफ किया और उन्हे इशारा किया

"जी इनस्पेक्टर साहब.. इन्होने ही खून किया है, हमने अपनी आँखों से देखा है, हमने इन्हे माँ बाबू जी की लाश को इनके घर के गार्डेन में ही दफनाते हुए देखा था.. जैसे ही हमने इन्हे देखा, इन्होने हमे 50,000 रुपये दिए थे मूह बंद रखने के लिए.. "

"और आगे की कहानी आपको जैल में पता चलेगी मेडम.."

एरिसटॉटल.. पायल और माया बुआ के खिलाफ हमे कोई कंप्लेंट नहीं है... तुम इन्हे अरेस्ट नही करो प्लीज़.. ललिता ने जो भी किया इनका जुर्म कबूल करवाने के लिए किया, शी ईज़ नोट गिल्टी एनीवेस.... बाकी सब लोगों को तुम हिरासत में ले सकते हो

"मैने कुछ नहीं किया .. दादा दादी ने जयदाद मेरे नाम पे ही की थी, प्लीज़ मेरा यकीन करें"

"प्रसाद जी.. आप आगे आइए प्लीज़" मैने प्रसाद को आगे बुलाते हुए कहा

"इनस्पेक्टर, मैं लीगल काउनसेलर हूँ ओल्ड होम ट्रस्ट का.. मरने से दो दिन पहले इनके दादा दादी ने मुझे घर बुलाया था और मुझे अपनी जायदाद के पेपर्स दिए थे.. लेकिन जिस दिन इनकी मौत हुई, उसके अगले दिन ही ये मेडम पेपर्स लेके आई हमारे पास और प्रॉपर्टी पे क्लेम कर दिया.. मेरे ऑफीस के स्टाफ ने इनके लालच में आके इन्हे पेपर्स बेच दिए थे.. हम कुछ नहीं कर सके"

"यू लाइयर... मैं सच बोल रही हूँ, और मैं वो पेपर्स कभी नहीं दूँगी आपको..." पूजा चिल्लाने लगी

"यू माइट वान्ट टू चेक दट अगेन लेडी.." मैने अपनी शेरवानी के अंदर से पेपर्स निकालते हुए कहा

"ये वोई पेपर्स हैं ना... तुमने किसी से धोके से चुराए... और मैने तुम्हारे साथ वोई किया..."

 
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