• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मैं और मेरा परिवार

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
फ्लशबॅक 1052

ठकुज़ी की हवेली पे एक अंजान फोन आ गया.

ठकुज़ी को जयसिंघ और शालिनी के आक्सिडेंट के बारे में पता चला.

ठाकुरजी बिना वक्त गवाए पिताजी के पास आ गये.

ठाकुरजी-चलो हमे जल्दी जाना है

पिताजी-कहाँ पे ले जा रहे हो

ठाकुरजी-चलो फिर बताता हूँ.बहू को साथ लो

पिताजी-बात क्या है

ठाकुरजी-तुम चल तो ,ठकुराइन का आक्सिडेंट हुआ है

पिताजी-पहले क्यूँ नही बताया. सुमन मीना जल्दी बाहर आओ

सुमन-पिताजी आपने बुलाया

पिताजी-कार मे बैठो ,हमे जल्दी ठकुराइन के पास जाना होगा.

सुमन और मीना कार मे बैठ गयी. ठाकुरजी के पास पिताजी बैठ गये और कार शहर की तरफ ले जाने लगे.

ठाकुरजी ने पिताजी की तरफ देखा और ठाकुरजी की आँख से पानी निकलने लगा.

पिताजी-हिम्मत रख ,सब ठीक हो जाएगा .मैं हूँ ना,कुछ नही होगा ठकुराइन को

ठाकुरजी ने पिताजी की बात सुनकर रोना बंद किया और कार हॉस्पिटल की तरफ ले जाने लगे.

ठाकुरजी-योगेन्द्र

पिताजी-कुछ मत बोल ,जल्दी हॉस्पिटल चल

ठाकुरजी-आक्सिडेंट ठकुराइन का नही जयसिंघ का हुआ है.

ठाकुरजी की बात सुनते ही पिताजी ने उनकी तरफ देखा

पिताजी-क्या कहा

ठाकुरजी-जयसिंघ गाँव आ रहा था कि ट्रक ने कार को उड़ा दिया.

पिताजी जयसिंघ के आक्सिडेंट की बात सुनकर रोने लगे. और ज़ोर से डोर के मिरर पे मुक्का मार कर मिरर तोड़ दिया.

ठाकुरजी-खुद को सम्भालो ,पूरी बात अभी तक पता नही है.

पिताजी-जयसिंघ शालिनी और अवी कार मे थे

ठाकुरजी-हाँ,

पिताजी की आँखो से आसू बहने लगे.

मीना और सुमन भी रोने लगी. सुमन तो ज़्यादा रो रही थी.

ठाकुरजी-बहू खुद को संभाल ,तुम रोएगी तो योगेन्द्र को कौन संभालेगा. वहाँ क्या हुआ है शालिनी कैसी है ,कुछ पता नही ,तुम्हें सब देखना होगा.

मीना-आप जल्दी हॉस्पिटल चले.

मीना ने सिचुयेशन को समझते हुए खुद को संभाल लिया और सुमन को हिम्मत देने लगी.

पिताजी अपने बेटे अपनी बहू अपने पोते के बारे में सोच रहे थे.

ठाकुरजी ने जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी कार को हॉस्पिटल ले गये.

हॉस्पिटल मे पहुँचते ही पिताजी भागते हुए हॉस्पिटल मे गये.

पिताजी के पीछे पीछे मीना सुमन और ठाकुरजी भी भागते हुए अंदर चले गये.

पिताजी-जयसिंघ कहाँ है

डॉक्टर-कौन जयसिंघ

ठाकुरजी-जिसका आक्सिडेंट हुआ है

डॉक्टर-दोनो के ऑपरेशन की तय्यारी हो रही. उनको उस रूम मे रखा है.

पिताजी भागते हुए उस कमरे मे चले गये.

डॉक्टर और नर्स जयसिंघ और शालिनी को देख रहे थे

पिताजी-जयसिंघ

जयसिंघ-पिताजिी

नर्स-आप बाहर जाइए

ठाकुरजी-रहने दो इनको

ठाकुरजी के आते ही नर्स चुप चाप अपना काम करने लगी.

पिताजी जयसिंघ के पास गये .और सुमन मीना के साथ शालिनी के पास गयी .

पिताजी-ये क्या हुआ

जयसिंघ-पिताजी मुझे माफ़ कर दीजिए

पिताजी-मैं ने तुम्हें कब का माफ़ कर दिया.

जयसिंघ-पिताजी वो कुमार ग़लत आदमी था, नेहा सही थी.कुमार का असली चेहरा मुझे पता चल गया था

पिताजी-नेहा हमेशा सही थी और तू भी ,

जयसिंघ-मैं आपसे माफी माँगने आ रहा था कि

पिताजी-मैं ने तुम्हें उसी दिन माफ़ किया था जिस दिन अवी ने मेरा हाथ तुम्हारे सर पे रखा था.

जयसिंघ-आपने मुझे माफ़ किया

पिताजी-हाँ,तू मेरा बेटा है , तुझसे कितने दिन गुस्सा रहता , बस हिम्मत रखना , तुझे कुछ नही होगा

जयसिंघ-मैं बुरा नही था.मुझे अंधेरे मे रखा गया था , मैं नेहा की सच्चाई देख नही पाया

पिताजी-तू मेरा बेटा है तू कैसे बुरा हो सकता है.

जयसिंघ-मैं ने नेहा के साथ बहुत बुरा किया.

पिताजी-तूने कुछ नही किया. वो नेहा की किस्मत मे था जो हो गया.तू खुद को गुनहगार मत मान

जयसिंघ-मैं नेहा से माफी माँगने आ रहा था.

पिताजी-नेहा ने भी तुझे माफ़ कर दिया (झूठ)

जयसिंघ-नेहा ने मुझे माफ़ कर दिया

पिताजी-हा, तुझे उसने टी पिलाई थी.उसके बाद नेहा ने कहा की अगली बार जब तुम मिलोगे तो वो तुम्हें माफ़ कर देगी ,, नेहा ने तुझे माफ़ कर दिया

जयसिंघ-नेहा ने मुझे माफ़ किया.

पिताजी-हाँ,

जयसिंघ-नेहा ने मुझे माफ़ किया.

पिताजी-डॉक्टर ये ऐसा क्यूँ बोल रहा है

डॉक्टर-आप बाहर जाइए.

पिताजी ने जयसिंघ के सर पे किस किया और शालिनी की तरफ गया.

शालिनी-पिताजी

पिताजी-हाँ बहू

शालिनी-अवी को आपके भरोसे छोड़ कर जा रही हूँ.

पिताजी-तुझे कुछ नही होगा, तू हिम्मत रख सब ठीक हो जाएगा

शालिनी-पिताजी मेरा वक्त आ गया है.

पिताजी-ऐसा मत बोल ,तेरी मुझे ज़रूरत है.इस घर को तेरी ज़रूरत है
 
शालिनी-पिताजी मैं आपके बेटे को वापस घर ला रही थी.पर

पिताजी-तूने अपना वादा पूरा किया.तुझे कुछ नही होने दूँगा

शालिनी-पिताजी इनको माफ़ कर देना. इनको अपनी ग़लती का अहसास हो गया था.

पिताजी-मैं ने जयसिंघ को माफ़ कर दिया है.

शालिनी-पिताजी अवी को अपने जैसा बनाना ,इनके जैसा बनाना

पिताजी-तू जो कहोगी वही होगा बस तू ठीक हो जा

शालिनी-पिताजी अवी ठीक हैं ना

पिताजी-अवी कहाँ है

नर्स-लड़का ठीक है

पिताजी-अवी ठीक है. अब तू भी ठीक हो जा

शालिनी-पिताजी ,नेहा नीता और पूजा को मेरा प्यार देना,

डॉक्टर-जाइए यहाँ से इनकी हार्टबीट बढ़ रही है.

डॉक्टर ने सबको रूम से बाहर निकाला.

पिताजी बाहर आते ही अवी के पास चले गये.

अवी डरा हुआ बेड पर लेटा हुआ था

अवी की ऐसी हालत देखते ही पिताजी ने भाग कर उसे गले लगा लिया.

पिताजी के गले लगते ही अवी बेहोश हो गया.

अवी के बेहोश होते ही पिताजी ने ज़ोर से नर्स को बुलाया.

नर्स ने आते ही अवी को देखा और उसे आराम करने देने को कहा.

पिताजी वही अवी के पास बैठ गये .सुमन भी वही खड़ी होकर रो रही थी

पिताजी-बहू, शालिनी ने क्या कहा

सुमन रोती रही.

पिताजी-शालिनी ने क्या कहा

सुमन-अवी की माँ बन जाउ

पिताजी-और क्या कहा

सुमन-वो अवी के पापा नेहा से माफी माँगे जा रहे थे.

पिताजी-और

सुमन-अगले जनम मे इसी घर की बहू बनना चाहती है

पिताजी अपने बहू की बात सुनकर रोने लगे.

सुमन-पिताजी भाभी ठीक हो जाएगी ना

पिताजी-हाँ

पिताजी को भी नही पता था कि क्या होगा

उधर ऑपरेशन चल रहा था.

पिताजी भगवान से अपने बेटे और बहू के लिए दुआ माँग रहे थे.

दोनो की हालत बहुत करब थी पर अवी को छोटी मोटी खरॉच आई थी.अवी के सर पर अन्द्रुनि चोट लगी थी ,, ये तो अभी पता नही था किसी को ,

पता नही कैसे पर अवी सीट से नीचे गिर गया और बच गया

पिताजी को अवी को सही सलामत देख कर अच्छा लगा

डॉक्टर रूम से बाहर आ गये.

पिताजी-डॉक्टर मेरा बेटा और बहू कैसे है

डॉक्टर-सॉरी हम आपके बेटे को बचा नही पाए .और आपकी बहू का ऑपरेशन तो हो गया पर कुछ कह नही सकते.

पिताजी अपने बेटे के ना होने की बात सुनते ही नीचे गिर गये.

ठाकुरजी ने पिताजी को पकड़ कर चेयर पे बैठा दिया

पिताजी बस उस रूम की तरफ देखने लगे जहाँ जयसिंघ था.

पिताजी के आँख से आसू लगातार निकल रहे थे.

ठाकुरजी पिताजी को सहारा दे रहे थे.

सुमन मीना के गले लग कर रो रही थी.

मीना ने ससुराल मे आने के बाद जिस देवी के बारे में सुना था उनको आज देखा तो समझ गयी कि शालिनी से सब इतना प्यार क्यूँ करते है.

शालिनी ने आख़िरी समय पर भी अपनी फॅमिली ......

मीना सुमन को संभाल रही थी.

माँ के जाने से पिताजी अपाहिज हो गये थे पर अपने बेटे और बहू के जाने से टूट गये .अगर बहू भी चली गयी तो पिताजी जीते जी मर जाएँगे

उधर सीमा ने बात सब को बात दी कि ठकुराइन का आक्सिडेंट हो गया है.

सब हॉस्पिटल के लिए निकल गये.

नेहा नीता और पूजा हॉस्पिटल मे आ गयी.

नीता-ठाकुरजी, ठकुराइन कैसी है.

ठाकुरजी-शालिनी अंदर है

शालिनी भाभी का नाम सुनते ही नेहा नीता और पूजा भागते हुए पिताजी के पास चले गये

नेहा-पिताजी ठाकुरजी क्या कह रहे है

पिताजी ने अपनी बेटियो की तरफ देखा और रोने लगे

पूजा -भाभी कहाँ है

पिताजी ने कमरे की तरफ उंगली दिखाई.

तीनो ने किसी की परवा ना करते हुए कमरे मे चली गयी.

कमरे मे जाते ही अपनी भाभी को ऐसी हालत मे देखते ही तीनो रोने लगी.

नेहा ने आगे बढ़ कर अपनी भाभी को आवाज़ दी

नेहा-भाभी,मैं नेहा

नीता-उठिए ना भाभी

पूजा-भाभी ,

नेहा-दीदी कुछ करो भाभी को होश मे लाओ

पूजा-भाभी को कुछ नही हो सकता

तीनो शालिनी के पास खड़ी होकर रोते हुए भाभी के उठने का इंतज़ार करने लगी.

अचानक शालिनी की सासे तेज चलने लगी.

पूजा ने डर के मारे डॉक्टर को बुला लिया

पूजा-डॉक्टर जल्दी आइए ,भाभी को कुछ हो रहा है

डॉक्टर ने शालिनी को देखा ,शालिनी की हार्टबीट बढ़ रही थी.

शालिनी ने अपनी आँख खोल दी. नेहा नीता और पूजा को देखते हुए उनकी तरफ हाथ बढ़ाया.

तीनो ने भाभी का हाथ पकड़ लिया. और शालिनी अपने पति के पास चली गयी.

डॉक्टर ने पूरी कोशिश की पर शालिनी को बचा नही पाए.

भाभी के आँख बंद करते ही नेहा बेहोश हो गयी.

नीता नेहा को संभालते हुए रोने लगी.

पूजा तो मूर्ति की तरह खड़ी रह कर अपनी भाभी को देखने लगी.

पिताजी अपनी बहू के जाने की बात सुनते ही टूट के बिखर गये.

सब के दिल शालिनी के जाने से रो रहे थे

शालिनी ने सब के दिल मे एक जगह बना कर रखी थी .जो भर पाना मुश्किल थी.

माँ के जाने से पिताजी को जितना दर्द नही हुआ उतना अपनी बहू और बेटे के जाने से हुआ

पिताजी तो जीना नही चाहते थे पर अवी के लिए उनको जीना होगा.

पिताजी ने सिर्फ़ अवी के लिए जीने का फ़ैसला किया.
 
फ्लॅशबॅक 1053

शालिनी हम सब के बीच नही रही.

ये बात कोई मानने को तय्यार ही नही था.

सब के दिल मे रहने वाली शालिनी थी. सब के बारे में सोचने वाली. सब को साथ मे रख कर चलने वाली शालिनी थी.

शालिनी ने घर को कभी टूटने नही दिया. टूटा भी तो बिखरने नही दिया.

इतना कुछ हुआ फिर भी शालिनी ने एक डोर की तरह सबको बाँध के रखा.

अपनी ननंद को कभी फ्रेंड, कभी बड़ी बहन कभी भाभी, कभी माँ की तरह संभाला.

नेहा के साथ हमेशा एक मज़बूत सहारा बन के रही.

नीता के साथ बच्चा बनके खेली.

पूजा की सहेली बनके रही.

माँ को कभी दुखी नही किया.

पिताजी की बहू कम बेटी बनकर रही.

अपनी खुशी से पहले अपनी फॅमिली की खुशी के बारे में सोचा.

छोटू को एक भाई जैसा प्यार दिया. सुमन को प्यार से जीना सिखाया.

खुद को बेटा होकर कोमल को ज़्यादा प्यार दिया.

शालिनी के जाने से हर कोई रो रहा था. पर सब से ज़्यादा नेहा रो रही थी.

नेहा अपने भैया के लिए रो रही थी या अपनी भाभी के लिए ये बताना मुश्किल था.किस आसू पे किसका नाम था बताना मुश्किल था

जब जयसिंघ को आग दी जा रही थी तब नेहा की आवज़ से सब रुक गये

नेहा घर से राखी लेकर आई थी

नेहा ने अपने भाई को आख़िरी बार रखी बाँध कर अलविदा किया.

नेहा ने रखी बाँध कर जयसिंघ को माफ़ किया या नही ये बताना मुश्किल था.

नेहा को पिताजी ने बताया कि जयसिंघ यहाँ माफी माँगने आ रहा था.

नेहा को अब इस बात से ज़्यादा लेना देना नही था.क्यूँ कि जयसिंघ और शालिनी दोनो नही रहे बस नेहा उनको देख कर रोए जा रही थी

पर नेहा को ऐसा भी लग रहा था कि उसके वजह से शालिनी भाभी नही रही.

जो कुछ हुआ उसकी वजह से हो रहा था.

या फिर वो शालिनी भाभी के लिए भैया को ज़िम्मेदार मान रही थी.

नेहा ने अपने दिल की बात किसी को नही बताई.

सबको लग रहा था कि नेहा ने भैया को माफ़ कर दिया.

नेहा अवी को माँ जैसा प्यार देगी. पर नेहा के दिमाग़ मे क्या चल रहा था ये किसी को नही पता था.

सबने ने एक ग़लती कर दी अवी के हाथो जयसिंघ और शालिनी की चिता को आग दी.

माँ बाप को बेटा आग दे तो अच्छा रहता है

डॉक्टेर ने भी कहा कि अवी ठीक है वो आग देने जा सकता है

अवी को उसके माँ और पापा को आख़िरी बार दिख लाया गया

अवी का पूरा चेकअप किए बिना ही उसको गाँव लाया गया था दूसरे दिन

अवी को अन्द्रुनि चोट लगी थी ये बात किसी को पता नही थी

किसी से बात भी नही कर रहा था
 
अवी इस कंडीशन मे था ही नही कि अपने माँ पापा के जाने की बात का सामना कर सके.

पर माँ पापा को बेटा ही आग देता है. तभी उनको शांति मिलती है.

पर अवी अपने माँ पापा को आग देते ही बेहोश हो गया.

ऐसा बेहोश हो गया की हॉस्पिटल ले जाना पड़ा

अवी को उसी वक्त हॉस्पिटल ले जाया गया.

डॉक्टर ने बताया कि अवी को माँ पापा के जाने से जोरदार झटका लगा है.और उनसे एक ग़लती हो गयी बिना अवी के चेक अप किए

डिसचार्ज कर दिया था जयसिंघ और शालिनी के चिता को आग देने के लिए

अवी इस बात को मान नही रहा है कि उसके माँ पापा साथ क्या हुआ है.

और सर मे चोट लगने से वो सदमे मे चला गया

अवी जिंदा लाश की तरह हो गया.

पिताजी ये सुनते ही और टूट गये अब वो शालिनी को क्या मूह दिखाएँगे.

पर डॉक्टर ने कहा कि अवी को अब बस ऐसे चीज़ ठीक कर सकती है जिस से वो अपने माता पिता को भूल जाए , या फिर कुछ पुरानी

बाते याद दिलाई जाएँ , प्यार मिलने से वो ठीक हो सकता है.

ऐसे मे अवी को कहाँ रखना है ये सोचना ज़रूरी था

शालिनी ने पिताजी को कहा कि वो अवी को यही रखे .वो अवी को माँ जैसा प्यार देगी.

पिताजी ने शालिनी के पिता से बात की

शालिनी के पिता-शालिनी की यही इच्छा थी कि अवी गाँव मे रहे. हमे शालिनी की इच्छा पूरी करनी चाहिए. आप अवी को यहीं रखिए.

पिताजी-आपका बहुत बहुत शुक्रिया.

शालिनी का पिता-मुझे उस दिन के लिए माफ़ कर दीजिए नेहा के घर जो हुआ था उसके लिए माफी माँगता हूँ

पिताजी-ग़लती मेरी थी. आप मुझे माफ़ कर दो

शालिनी के पिता -अवी का ख़याल रखिए ,मैं यहाँ दुबारा नही आउन्गा ,अगर आ गया तो अवी को लेके जा सकता हूँ. मैं भी अवी को बहुत

प्यार करता हूँ.हम सबमे लिए यही अच्छा होगा कि अवी यही रहे

पिताजी-ऐसा मत कहिए

शालिनी के पिता-इसके सिवा दूसरा रास्ता नही है.मेरी शालिनी की निशानी का ध्यान रखना

इतना बोल कर अवी के नाना वहाँ से चले गये. शालिनी की इच्छा पूरी करने के लिए वो दुबारा अवी से मिलने नही आए

पिताजी अवी को गाँव लेकर आ गये साथ मे जयसिंघ और शालिनी का सामान भी लेकर आ गये.

अवी को देख कर सुमन खुश हो गयी. सुमन को बेटा मिल गया.

सुमन अवी को ठीक करने मे लग गयी.

नेहा अवी की हालत देख कर रो रही थी.

अवी शालिनी की आख़िरी निशानी था और जयसिंघ की भी.

नेहा डिसाइड नही कर पा रही थी कि वो अवी से प्यार करे या नफ़रत

नेहा के दिल मे जो शालिनी के लिए प्यार था वही अवी के लिए था.

जो नफ़रत जयसिंघ के लिए थी उस से कम पर थोड़ी नफ़रत अवी से करती थी.

पर नेहा जानती थी कि वो अवी से कितना प्यार करती है.

नेहा के पास जो था वो उस से हमेशा के लिए दूर चला गया .पहले भैया, फिर सास ससुर, फिर माँ, फिर भाभी, इस से नेहा ने डिसाइड किया

की वो अवी से जितना दूर रहेगी अवी के लिए उतना अच्छा होगा.

उस से जिस जिसने प्यार किया वो एक एक करके दूर चला गया ऐसे मे वो अवी को शालिनी भाभी की निशानी को खोना नही चाहती थी

नेहा ने अवी से दूर से देख कर प्यार करना सही समझा.

वो अवी से सबके सामने नफ़रत करती थी .पर सबको पता था कि नेहा अवी से कितना प्यार करती है.

किसी ने नेहा को इसके लिए ना कभी रोका और ना टोका बस उसको जैसा सही लग रहा था वैसा उसको करने दिया.

नेहा अवी के दूर रह कर ऐसे बोलती थी कि सबको लगता वो अवी से नफ़रत करती है पर वो अवी की भलाई के लिए ऐसा बोलती थी

शालिनी और जयसिंघ हम सबको छोड़ कर चले गये.
 
फ्लॅशबॅक 1054

छोटी चाची 1

जयसिंघ और शालिनी की कार आक्सिडेंट मे डेत हो गयी

जयसिंघ और शालिनी के चले जाने से पिताजी को झटका लगा

पिताजी को ऐसा लगा जैसे उनका सहारा किसी ने काट लिया हो

शालिनी उनकी बहू नही बेटी थी

एक साथ बेटे और बेटी जैसी बहू को खो देने से पिताजी के साथ पूरे घर को एक झटका लगा

जयसिंघ कैसा भी क्यूँ ना हो था तो नेहा नीता पूजा का भाई ना

अपने भाई की डेत से नीता और पूजा ने उनके लिए जो नफ़रत थी वो ख़तम कर दी

पर नेहा को जो घाव मिले थे वो ऐसे नही भर सकते थे

नेहा कुछ हद तक जयसिंघ को माफ़ किया था

पर उसके दिल मे अभी भी जयसिंघ के लिए थोड़ी नफ़रत थी

जयसिंघ को जाते समय राखी बाँध कर नेहा ने उनको माफ़ तो किया

पर अपने अंदर की नफ़रत ख़तम नही कर पाई

माँ की डेत की ज़िम्मेदार समझती थी नेहा जयसिंघ को

फिर भी नेहा ने राखी बाँध कर माफ़ तो कर ही दिया

नेहा माँ के जाने के बाद फिर से अनाथ हो गयी है

शालिनी भाभी नेहा के लिए माँ जैसी थी

शालिनी भाभी के जाने से नेहा टूट सी गयी

शालिनी के जाने का सबको दर्द था

शालिनी ने सबके दिल मे अपने लिए जगह बनाई थी

शालिनी ने सबको प्यार से बांत रखा था

इतना कुछ हो गया फिर भी शालिनी ने हार नही मानी और सबको विश्वास दिलाती गयी कि सब ठीक हो जाएगा

सबकी हिम्मत थी शालिनी , इतना कुछ हुआ फिर भी शालिनी ने पिताजी और जयसिंघ की हिम्मत टूटने नही दी

एक विश्वास जगाए रखा कि वो सब ठीक कर देगी

शालिनी ने जैसा वादा किया था वो पूरा भी कर दिया था

जयसिंघ को इस घर के वारिश को हमेशा के लिए घर ला रही थी

पर भगवान को कुछ और मंज़ूर था

गाँव आने से पहले शालिनी और जयसिंघ भगवान के पास चले गये

उस दिन सब जयसिंघ से ज़्यादा शालिनी को खोने की वजह से रो रहे थे

किसी को विश्वास नही हो रहा था कि सबको प्यार का मतलब सिखाने वाली शालिनी हमे छोड़ कर गयी है

शालिनी के चले जाने से दो गाँव रो रहे थे

नेहा तो सबसे ज़्यादा रोई

कौन से आसू जयसिंघ के लिए है और कौन से शालिनी के लिए ये बताना मुश्किल था

नीता को भी पता नही था

चोटो का अच्छा होता है वो अपने दर्द को आसू के रूप मे बहाने देते है

पर पिताजी का क्या

वो तो रो भी नही सकते

पिताजी रो देंगे तो नेहा नीता पूजा का क्या होगा

इस घर का क्या होगा

पिताजी छुप छुप कर रोने के सिवा कुछ नही कर सकते थे

अगर आज माजी ज़िंदा होती तो वो पिताजी को सहारा दे सकती थी उनकी हिम्मत बन सकती थी

पर माजी भी पिताजी को छोड़ कर चली गयी

माजी के बाद शालिनी और जयसिंघ के जाने से पिताजी टूट से गये

पिताजी की हालत से कोई अंजान नही था

नेहा को भी पता था कि पिताजी को कितना दर्द हो रहा है

ठाकुरजी ने पिताजी की हिम्मत बनाए रखने की कॉसिश की पर नाकामयाब हुए

ठकुज़ी थे तो पराए ना

वो कब तक पिताजी के साथ रहते

पिताजी को घर का कोई चाहिए था जो इस घर की ज़िम्मेदारी उठा सके

घर का बड़ा बेटा और बड़ी बहू चली गयी

.शालिनी बच जाती तो वो इस घर को संभाल सकती थी

पर वो भी नही रही

नेहा नीता और पूजा को अपना समझने वाला कोई चाहिए

पिताजी को अब चिंता सताने लगी

उनके बाद नेहा का क्या होगा

इस घर का उनकी बेटी बेटे का क्या होगा

अगर उनको कुछ हो गया तो नेहा जीते जी मर जाएगी

पिताजी को अपने जाने के बाद किसी ना किसी को तो इस काबिल समझना होगा कि इस घर को टूटने ना दे

क्यूँ कि जयसिंघ और शालिनी की डेत के बाद अवी बेजान सा हो गया था

एक ज़िंदा लाश बन गया था

बेड पर पड़ा रहता था

इस आक्सिडेंट से सदमा लग गया था अवी को

अवी ना किसी से बात करता और ना कुछ ख़ाता

बस बेड पे लेटा रहता था

अवी की ये हालत देख कर पिताजी रोज मर रहे थे

अवी को डॉक्टर को दिखाया पर कोई फ़ायदा नही हुआ

अवी की आँख के सामने वो आक्सिडेंट का सीन ही आ रहा था

ऐसा लग रहा था जैसे अवी ने जीने की उम्मीद ही छोड़ दी हो

अवी की ऐसी हालत देख कर पिताजी पे इसका असर हो रहा था

पर सुमन ने पिताजी को हिम्मत बनाए रखने को कहा

सुमन को बच्चा तो था नही

सुमन ने शालिनी के जाते ही अवी को अपना बेटा बना लिया

अवी की देखभाल एक माँ की तरह करने लगी

अवी का ध्यान रखना , उसको नहलाना , उसका ख़याल रखना इसी मे सुमन लगी हुई थी
 
सुमन किसी भी कीमत पे अवी को ठीक करना चाहती थी

अवी को इस सदमे से बाहर निकालना चाहती थी

सुमन मंदिर मे पूजा करके अवी को ठीक करने की मन्नत माँगने लगी

पिताजी को सुमन का अवी के लिए प्यार देख कर कुछ हद तक ये उम्मीद मिली कि अवी को माँ का प्यार मिलता रहेगा

सुमन की ममता एक दिन अवी को ठीक कर देगी

सुमन ने जैसे अवी को अपना सबकुछ मान लिया था

अवी को प्यार किए बिना सुमन के गले से खाना नीचे नही उतरता था

छोटू को शालिनी भाभी और जयसिंघ के जाने से दुख हुआ

पर सुमन के इस तरह उसको इग्नोर करने से बुरा लग रहा था

सुमन के लिए तो अब अवी सब कुछ था

ऐसे मे छोटू को अवी से नफ़रत होने लगी

अवी छोटू और सुमन के बीच मे आ गया था

पर अब छोटू को घर को संभालना था क्यूँ कि पिताजी ने जैसे सब कुछ छोड़ दिया था

पिताजी को बस एक बात का इंतज़ार था कि अवी कब नॉर्मल होता है

पर छोटू कभी अवी से नफ़रत करता तो कभी प्यार भी करता

सुमन ने तो पिताजी की साफ साफ बोल दिया था कि अवी उसके पास रहेगा

शालिनी और जयसिंघ को आग देने के बाद सुमन पिताजी से बात करने गयी

सुनन ने पिताजी को बोल दिया कि अवी के नानाजी को बोल दो कि अवी यही रहेगा

सुमन ने यहाँ तक बोल दिया कि अगर अवी यहाँ से गया तो वो कुएँ मे कूद कर सुसाइड कर लेगी

सुमन- पिताजी आपसे बात करनी थी

पिताजी- बोलो बहू

सुमन- ये सही समय नही है ऐसी बात करने को पर अभी बात नही की तो बहुत देर हो जाएगी

पिताजी- क्या बात है बहू

सुमन - पिताजी अवी यही रहेगा मेरा पास

पिताजी सुमन की तरफ देखते रहे

सुमन- अवी की हालत आप देख रहे हो , अवी को अगर ठीक करना है तो उसको एक माँ की ज़रूरत है , और अवी को एक माँ का प्यार

मैं दे सकती हूँ , अवी को यही रहने दीजिए

पिताजी- अवी के नानाजी से बात करता हूँ

सुमन- पिताजी आप उनको बोल दीजिए कि अवी यही रहेगा , मेरे पास , मेरा बेटा बन कर

पिताजी- सुमन , अवी पे जितना हक हमारा है उतना ही अवी के नानाजी का है

सुमन- मुझे कुछ नही सुनना है , मैं अवी को कही जाने नही दूँगी , अगर अवी को कहीं ले जाने का किसीने सोचा भी तो मैं अपनी जान दे दूँगी

पिताजी- बहू ये तुम क्या बोल रही हो

सुमन- पिताजी अवी को यही रोक लीजिए , अवी के नानाजी को मना कर दीजिए अवी को ले जाने को

पिताजी- में बात करता हूँ

सुमन- पिताजी मैं ने अवी को अपना बेटा मान लिया है , मैं अवी को एक माँ को प्यार दूँगा , शालिनी भाभी की कमी महसूस नही होने दूँगी

पिताजी- तुम्हारी बात तो सही है पर

सुमन- पिताजी शालिनी भाभी जैसी मैं बन तो नही सकती पर मैं ये वादा करती हूँ कि अवी को इतना प्यार दूँगी कि वो शालिनी भाभी को याद

नही करेगा और शालिनी भाभी अवी को जैसा बनानी चाहती थी वैसा बना दूँगी ,ये एक माँ का वादा है पिताजी

पिताजी- मैं बात करूँगा अवी के नानाजी से , जाओ अब

शालिनी और जयसिंघ की चिता जल रही थी और सुमन ने अवी को अपना बेटा बना भी दिया

ऐसा सुमन ने क्यूँ किया ये सिर्फ़ सुमन को पता था

सुमन को पता था कि वो क्या कर रही है

पिताजी भी सुमन की बात से सहमत थे

अवी को एक मा की ज़रूरत थी

अवी इस घर का अकेला वारिश , उसको यही रहना होगा

पिताजी सोचने लगे कि वो अवी के नानाजी से कैसे बात करे

पर भगवान अवी की किस्मत लिख चुका था

अवी के नानाजी ने खुद ये कहा कि शालिनी ये चाहती थी कि उसे कुछ हो जाने के बाद अवी अपने दादाजी के पास रहे

अवी के नानाजी ने पिताजी से कहा कि वो अवी को सुमन को सोन्प दे , सुमन अवी को वो प्यार दे सकती है जो उसको मिलना चाहिए

अवी के नानाजी ने यहाँ तक कहा कि अवी की भलाई के लिए अब वो उसके बाद कभी अवी से मिलने नही आएँगे

इतना बोल कर अवी के नानाजी अपनी फॅमिली के साथ अपने गाँव चले गये

सुमन को जब पिताजी ने कहा कि आज से अवी उसका है तो सुमन की खुशी का कोई ठिकाना नही था

पिताजी- बहू

सजमान- जी पिताजी

पिताजी- आज से अवी तुम्हारा है , तुम उसकी माँ हो , अवी तुम्हारा बेटा है

सुमन - सच पिताजी

पिताजी- हाँ , अवी तुम्हारा है , और तुमसे अवी को कोई अलग नही करेगा

सुमाम- पिताजी मैं वादा करती हूँ अवी को इतना प्यार दूँगी कि वो शालिनी भाभी को याद करके कभी नही रोएगा

पिताजी- बहू तुमने हमारी मुश्किल आसान कर दी

सुमन - पिताजी मैं इस घर की बहू हूँ , इस घर की प्राब्लम मेरी है

पिताजी- तुम शालिनी जैसी बोल रही हूँ

सुमन- मैं शालिनी भाभी जैसी कभी नही बन सकती , पर मैं उनकी बातों को हमेश्या याद रखूँगी कि इस घर को कभी टूटने मत देना , अपने

प्यार से बाँध कर रखना

पिताजी- मुझे तुमसे यही उम्मीद थी , सीमा और मीना को भी समझा देना कि उनको क्या करना है

सुमन- जी पिताजी

पिताजी- जाओ अपने काम मे लग जाओ ,अवी को अपने प्यार से पहले जैसा कर दो

.सुमन-मैं पूरी कॉसिश करूँगी , आप अपना आशीर्वाद बनाए रखना

पिताजी - मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है

पिताजी को सुमन पे पूरा विश्वास था कि वो अवी को ठीक कर देगी

पर सुमन इस काबिल नही थी कि इस घर को संभाल सके

सुमन अवी को संभाल सकती है पर इस घर को संभालने के लिए पिताजी को किसी ना किसी को सेलेक्ट करना ही होगा

क्यूँ कि पिताजी को लग रहा था कि अगर उनको कुछ हो गया तो इस घर का क्या होगा
 
फ्लशनकक 1055

छोटी चाची 2

जयसिंघ और शालिनी को गये हुए 1महीना हो गया

पर अवी की हालत मे कोई फरक नही दिखाई दिया

अवी अभी तक उसी सदमे पे जी रहा था

सुमन अपने बेटे को अपने प्यार से ठीक करने मे लगी हुई थी

पिताजी सुमन की लगन और प्यार देख कर टेन्षन फ्री हो गये

उनको सुमन पे पूरा विश्वास था कि उसका प्यार अवी को ठीक कर देगा

सुमन के साथ सीमा और मीना भी अवी की देखभाल मे लगी हुई थी

सीमा सुमन की मदद कर रही थी

पर मीना सुमन को मदद करने के साथ घर की ज़िम्मेदारी भी उठा ली

पिताजी तीनो बहू को देख कर शालिनी को याद करने लगे

पिताजी को पता था कि सुमन सीमा और मीना को एक साथ बहनों की तरह रखने के पीछे शालिनी का हाथ है

शालिनी ने ही सुमन को बताया था कि किस तरह वो घर को टूटने से बचा सकती है,

सुमन ने शालिनी भाभी की बताई हुई बात पे चलते हुए सीमा और मीना को अपनी बहन बना लिया और तीनो साथ साथ रहने लगी

छोटू भी खेतो के कामो मे लगा हुआ था

सुमन को दूर जाना छोटू को अच्छा नही लगा पर अवी के लिए इस घर के लिए सुमन ने अपना सबकुछ अवी को मान लिया

पिताजी ने खेतो मे जाना बंद कर दिया

अब पिताजी घर मे रह कर अवी के होश मे आने का इंतज़ार कर रहे थे

पिताजी को अवी के सामने कुछ अच्छा नही लग रहा था

पिताजी को अवी वापस चाहिए था जिसको मेले मे अपने कंधे पे उठा कर घुमाया था

छोटू पिताजी का बताया हुआ काम तो कर रहा था

पर छोटू इतना मेंटली मेच्यूर नही था कि अच्छे फ़ैसले ले सके

पर उसमे मीना ने अपने दिमाग़ की मदद ली

मीना ने छोटू को बताया कि क्या कैसे करना है

मीना जैसे जैसे बताती वैसे वैसे छोटू करता गया

मीना का तेज दिमाग़ और छोटू की मेहनत से खेतो के कामो मे कोई रुकावट नही आई

मीना खेतो मे भी ध्यान दे रही थी , घर भी संभाल रही थी , और सुमन को मदद भी कर रही थी , नेहा को उस सदमे से निकालने मे मदद भी कर रही थी

मीना ने जैसे इस घर को अपनो कंधो पे उठा लिया था

पिताजी को इस बात का पता नही था

डॉक्टेर से लेकर खर्चो तक सब मीना ने ही देखा

पिताजी को मीना के तेज दिमाग़ का पता था तभी तो उसको इस घर मे ले आए

पर मीना इतना कुछ कर सकती है ये अभी तक पिताजी को पता नही था

पिताजी दिन भर एक तो अवी के पास बैठ रहते या फिर नेहा के पास रहते

कोमल लीना कविता स्वेता सीतल राज राजेश के साथ खेलते थे पर उनको अवी के ठीक होने का इंतज़ार था

पिताजी की एक टेन्षन सुमन ने ख़तम की अवी को अपना बेटा बना कर

बस अब कोई ऐसा मिल जाए जो इस घर को संभाल सके

नेहा का ख़याल रख सके

पिताजी की बेटियो को ख़याल रखे

इस घर की परंपरा टूटने ना दे

पर इससे भी बड़ी टेन्षन ये थी कि नेहा नीता पूजा फिर से हँसने लगे , शालिनी और जयसिंघ के जाने के गम मे डूबी ना रहे

इस लिए पिताजी नेहा से मिलने उसके घर गये

कोमल कविता नीता के घर पे खेल रही थी

नेहा घर पे अकेली बैठ कर शालिनी भाभी को याद कर रही थी

पिताजी के आते ही नेहा ने खुद को ठीक किया पर पिताजी ने ये देख लिया कि नेहा शालिनी के जाने के गम मे डूबी हुई है

पिताजी हमेशा की तरह नेहा के सर को अपनी गोद मे रख कर उस से बाते करने लगे , जैसे बचपन मे कहानी सुनाते थे

पिताजी- नेहा

नेहा- जी पिताजी

पिताजी- ऐसा कब तक चलेगा

नेहा- भाभी की बहुत याद आ रही है

पिताजी- शालिनी की याद तो हम सबको आ रही है , इसका ये मतलब तो नही हम जीना छोड़ दे

नेहा- पिताजी , मेरे साथ ही ऐसा क्यूँ हो रहा है

पिताजी- जो किस्मत मे लिखा होता है वही होता है

नेहा- मेरी किस्मत ही ऐसी क्यूँ लिखी है

पिताजी- तुमने देखा होगा कि गुलाब के फूल के आजू बाजू काटे लगे होते है , तुम भी उस गुलाब के फूल जैसी हो , देखना तुम जितनी रोई हो ना उतनी ही खुशी देने के लिए भगवान किसी ना किसी को ज़रूर भेजेगा , या कहूँ तो भेज दिया है , मेरी बेटी के लिए भगवान ने ज़रूर कुछ

अच्छा लिखा होगा

नेहा- पर मेरे साथ ही ऐसा क्यूँ हो रहा है , पहले भैया ने जीते जी मुझे पराया बनाया , फिर माँ मुझे छोड़ कर चली गयी , और अब शालिनी भाभी , शालिनी भाभी भी मुझे बीच मे छोड़ कर चली गयी

पोताजी- किसने कहा शालिनी हमे छोड़ गयी है
 
नेहा- आप कहना क्या चाहते है

पिताजी- शालिनी हम सबके दिल मे बसी है , वो हमारी यादो से कभी नही जा सकती

नेहा- ये सब आप मुझे बहलाने के लिए बोल रहे है

पिताजी- नही , तुम्हें अपनी आँख खोल कर देखो , शालिनी तुम्हें दिखाई देगी

नेहा- कहाँ

पिताजी- अवी मे , अवी मे शालिनी को देखने की कॉसिश करो

नेहा- अवी मे भैया भी दिखाई देते है

पिताजी- जयसिंघ को तुमने अब तक माफ़ नही किया

नेहा- माफ़ करना चाहती हूँ पर कुछ बाते ऐसी है जो मुझे इसकी इजाज़त नही देती

पिताजी- जयसिंघ अब चला गया है उसे अब माफ़ कर दो

नेहा- कैसे करूँ पिताजी , भैया की वजह से माँ चली गयी , अब भाभी मुझे छोड़ कर चली गयी , अगर आपको भी कुछ हो गया तो मैं जी नही

पाउन्गी

पिताजी- मुझे कुछ नही होगा , मैं तुम्हें छोड़ कर कभी नही जाउन्गी

नेहा- माँ और भाभी ने भी यही वादा किया था

पिताजी- मैं कहीं भी चला जाउ पर किसी ना किसी रूप मे तेरे पास रहूँगा

नेहा- आप मुझे छोड़ का कभी मत जाना

पिताजी-नही जाउन्गा तुम भी ये नफ़रत को ख़तम कर दे

नेहा - भैया के लिए जो नरफत है वो कभी कम नही होंगी

पिताजी- तू माफ़ नही करेगी तो जयसिंघ की आत्मा को शांति नही मिलेगी

नेहा- मुझसे नही होगा

पिताजी- अब पुरानी बातों को भूल जाओ

नेहा- पुरानी बात भूली नही जाती पिताजी

पिताजी- मेरे लिए इतना नही कर सकती

नेहा- आपके लिए तो कुछ भी कर सकती हूँ

पिताजी- पुरानी बातों को भूल जाओ , और अवी को प्यार करो

नेहा- नही कर सकती

पिताजी- क्यूँ नही

नेहा- अवी के पास जाती हूँ तो भैया की याद आती है

पिताजी- शालिनी को याद किया कर

नेहा- पिताजी मैं उलझन मे फसि हूँ

पिताजी- मुझे बताओ

नेहा- अवी को जब भी देखती हूँ तो भाभी की याद आती है जिस से प्यार करना चाहता है मेरा दिल अवी को , पर अचानक भैया की याद आते ही नफ़रत सी हो जाती है अवी से

पिताजी- उस नफ़रत को ख़तम कर दे , मेरे लिए ,

नेहा- मुझसे नही होगा

पिताजी- तुम्हें ये करना होगा नेहा , अवी को तुम्हारी ज़रूरत है , सुमन अकेली अवी को ठीक नही कर पाएगी ,

नेहा- मुझसे नही होगा पिताजी

पिताजी- मेरी बेटी क्या कर सकती है ये मुझे पता है , तेरे प्यार की ज़रूरत है अवी को ,

नेहा- अवी के लिए सुमन है

पिताजी- सुमन से ज़्यादा अवी को तुम्हारी ज़रूरत है ,सुमन और तुम्हारा प्यार अवी को ठीक कर देगा , मुझे पूरा विश्वास है

नेहा- मुझसे नही होगा

पिताजी- मेरी बेटी ना बोल रही है ये कैसे हो सकता है ,

नेहा- पिताजी

पिताजी- मेरे लिए , अपनी माँ के लिए , अपनी शालिनी भाभी के लिए जयसिंघ की नफ़रत को कुछ समय के लिए भूल जाओ

नेहा- कुछ समय के लिए

पिताजी- भूल जाओ कि क्या किया था जयसिंघ ने , ये याद रखो कि क्या थी शालिनी तुम्हारे लिए क्या था जयसिंघ तुम्हारे लिए , उस जयसिंघ को याद रखो जो शहर जाने से पहले हमारे साथ था

नेहा- माँ के बाद भाभी ही मेरे लिए सब कुछ थी

पिताजी- उसी प्यार के लिए , अवी को अपना प्यार दे , तुम सबका प्यार अवी को मिलेगा तो अवी ज़रूर ठीक हो जाएगा

नेहा- आपको ऐसा लगता है

पिताजी- हाँ , और तू खुद सोच क्या शालिनी की आत्मा को अवी की ऐसी हालत देख कर क्या अच्छा लग रहा होगा , शालिनी को तो यकीन

था कि उसके जाने के बाद नेहा अवी को उसकी कमी.महसूस नही होने देगी

नेहा- भाभी ने ऐसा कहा

पिताजी- हॉस्पिटल मे शालिनी ने सुमन को यही कहा था कि , वो अवी को छोड़ कर जा रही है पर अवी को अब एक नही 6 माँ का प्यार मिलेगा

नेहा- भाभी ने ऐसा कहा था

पिताजी- शालिनी को तुमपे विश्वास था कि तुम अवी को उसकी कमी महसूस नही होने दोगि

नेहा- मैं सिर्फ़ भाभी के लिए भैया ने जो किया वो भूलने की कॉसिश करूँगी

पिताजी- अवी को तुम्हारी ज़रूरत है

नेहा- मैं उसे ठीक कर दूँगी ये मेरा वादा है आपसे

पिताजी- मैं यही सुनना चाहता था

नेहा-मैं भाभी की आत्मा को रोने नही दूँगी ,

पिताजी- शालिनी ने तुम्हारे लिए जो किया उसके बदले मे अवी को थोड़ा प्यार देना है तुम्हें

नेहा- मैं कोमल से ज़्यादा अवी से प्यार करूँगी ,

पिताजी- मेरी प्यारी बेटी है तू , और अपने इसी प्यार से अवी को ठीक कर देगा

नेहा- जी पिताजी

नेहा अवी के लिए कन्फ्यूज़ थी

अवी से नफ़रत करे या प्यार करे

अवी मे जयसिंघ और शालिनी दोनो की छवि नेहा को दिखती थी

शालिनी के बारे में सोचते नेहा को अवी को प्यार करने का दिल करता पर जैसे जयसिंघ का ख़याल दिमाग़ मे आता तो नेहा के दिल मे

नफ़रत पैदा हो जाती

नेहा को इस कशमकश मे बाहर निकालने के लिए पिताजी ने ये तरीका ईस्तमाल किया

नेहा अवी के पास रहेगी तो एक दिन अवी नेहा की नफ़रत ख़तम कर देगा

पिताजी ने नेहा को बताया कि जयसिंघ माफी माँगने आ रहा था

.और पिताजी नेहा को और दर्द मे देखना नही चाहते थे

पर नेहा के दिल से जयसिंघ की नफ़रत ख़तम करने के लिए पिताजी ने अवी का सहारा लिया

नेहा अवी को प्यार करेगी

इस से नेहा के दिल से नफ़रत ख़तम होंगी और अवी भी ठीक हो जाएगा

पिताजी ने नेहा को मना लिया अवी को थोड़ा प्यार देने के लिए
 
फ्लॅशबॅक 1056

छोटी चाची 3

नेहा ने पिताजी को वादा किया किया कि वो अवी को ठीक करने मे सुमन की मदद करेगी

भैया ने कितना भी दर्द क्यूँ ना दिया हो वो शालिनी भाभी के लिए अवी का ख़याल ज़रूर रखेगी

पिताजी को नेहा के वादे से ये उम्मीद दिखाई देने लगी कि अवी नेहा की नफ़रत को ख़तम कर देगा

नेहा और अवी जितने पास रहेंगे इतने ही नेहा के दिल से नफ़रत दूर रहेगी

नेहा को फिर से हंसाने के लिए उसके चेहरे पे हँसी लाने के लिए ये तो करना ही था पिताजी को

कब तक पूरी फॅमिली शालिनी को याद करके रोती रहेगी

शालिनी को भूलना आसान नही था पर शालिनी ने कभी ये चाहा ही नही था , शालिनी को याद करके कोई रोए

पिताजी ने शालिनी की कसम दे कर सबको वापस पहले की तरह जीने को कहा

नेहा और पिताजी की बात बाहर नीता और पूजा खड़ी होकर सुन रही थी

पिताजी ने देख लिए था कि पूजा और नीता सब सुन रही थी ,

नेहा से बात करने के बाद पिताजी ने पूजा और नीता से बात की

पिताजी - पूजा

पूजा- जी पिताजी

पिताजी - तूने सब सुन लिया ना

पूजा- जी

पिताजी - तुझे पता है ना कि तुझे क्या करना है

पूजा- मैं समझ गयी कि मुझे क्या करना है

पिताजी - जयसिंघ के शहर जाने के बाद जिस तरह तूने अपने भाई बहनो को संभाला था वैसे तुझे फिर से बड़ी बन कर सबको साथ लेकर चलना होगा

पूजा- ना मैं ने उस वक्त आपकी कोई शिकायत का मोका दिया और ना इस बार दूँगी

पिताजी - मुझे तुमसे यही उम्मीद थी , तू हमेशा याद रखना कि तू बड़ी है

पूजा- जी पिताजी

पिताजी - मेरे जाने के बाद तुम्हें सबका ध्यान रखना होगा

पूजा- आप ये जाने की बात मत कीजिए

पिताजी - ज़िंदगी का क्या भरोसा , कब किसका बुलावा आ जाए , ये किसी को पता नही होता है

पूजा- आपको मेरी उमर लग जाए

पिताजी - तूने इतना कहा यही काफ़ी है , बस मेरे जाने के बाद इस घर को तुम्हें संभालना होगा

पूजा- जी

पिताजी - इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी तुम्हारे कंधो पे सोन्प रहा हूँ , खुद को कभी अकेला मत समझना , अगर कभी ऐसा लगे कि तुम अकेली कुछ नही कर सकती तो सबको अपने साथ खड़ा करना ,

पूजा- जी , जैसा आपने बचपन मे कहा था कि मुट्ठी है हम पाँचो भाई बहन

पिताजी - हाँ , तुम 6 मिलकर अवी का ध्यान रखना

पूजा- जी पिताजी ,

पिताजी - तुम सोच रही होंगी कि मैं ये सब अभी क्यूँ बोल रहा हूँ

पूजा- हाँ यही सोच रही थी

पिताजी - किस्मत मे क्या लिखा होगा ये किसी को पता नही होता , मैं बस सबको उनकी ज़िम्मेदारी बता रहा हूँ कि मेरे बाद उनको क्या करना है

पूजा- आप बेफिकर रहिए , मैं अवी और नेहा का पूर ध्यान रखूँगी , अवी से थोड़ी जलन होती है मुझे क्यूँ कि उसको आपका प्यार स्वेता

सीतल और राज से ज़्यादा मिला है , पर मैं कॉसिश करूँगी कि ये बात मैं भूल जाउ

पिताजी - मुझे तुमसे यही उम्मीद थी

पूजा को कुछ बाते समझाने के बाद पिताजी नीता के पास गये

नेहा को पिताजी के बाद सिर्फ़ नीता ही संभाल सकती है

नीता की बात नेहा कभी नही मना करती

पिताजी नीता के घर गये

नीता पिताजी और नेहा की बातों के बारे में सोच रही थी

पिताजी के आते ही नीता ने खुद की संभाल लिया

पिताजी - मेरी छोटी बेटी क्या सोच रही है

नीता- कुछ नही पिताजी

पिताजी - अपने पिताजी से झूठ बोल रही हो

नीता- नेहा को आपने जो कहा उसी के बारे में सोच रही थी

पिताजी - क्या सोचा मेरी छोटी बेटी ने

नीता- यही कि नेहा जब भी अवी से नफ़रत करने लग जाए तो मैं नेहा को संभाल लूँ , उसको रोक दूं

पिताजी - मेरी छोटी बेटी तो सबसे समझदार बन गयी है

नीता- आपकी बेटी हूँ

पिताजी - तुम्हें देखता हूँ तो यकीन नही आता कि मस्ती मज़ाक करने वाली छोटी नीता इतनी समझदार कैसे हो गयी

नीता- ये जतिन के प्यार का असर है

पिताजी - नीता तुझे जब भी देखता हूँ तो मुझे गर्व महसूस होता है , तूने जिस तरह अपना घर बसाया है उसे देख कर मैं खुश हूँ

नीता- आपकी खुशी ही मेरा इनाम है

पिताजी - बस इसी तरह नेहा का ख़याल रखना , उसको कभी अकेला मत होने देना

नीता- इस से पहले भी मैं ने नेहा का साथ कभी नही छोड़ा , और आगे भी मैं नेहा के साथ रहूंगी

पिताजी - मुझे तुमसे यही उम्मीद थी

नीता- पिताजी एक बात कहूँ

पिताजी - हाँ कहो

नीता- सुमन अवी से बहुत प्यार करने लगी है

पिताजी - हाँ , सुमन ने मेरी सबसे बड़ी चिंता ख़तम कर दी
 
नीता- सुमन ने अवी को प्यार दे कर आपकी एक प्रॉब्लम सॉल्व की मैं नेहा को संभाल कर आपकी प्राब्लम सॉल्व कर दूँगी

पिताजी - काश तू पूजा की जगह होती

नीता- मैं छोटी ठीक हूँ , हाँ मैं पूजा दीदी की भी मदद करूँगी

पिताजी - तुमने तो सब सोच लिया है

नीता- जी

कोमल- मौसी चलो ना खेलने

पिताजी- कोमल मेरे पास आओ

कोमल- दादाजी आप भी खेलो ना मेरे साथ

पिताजी-अपने भाई को भी पूछो खेलने के लिए

कोमल- राजेश और राज तो यही है

पिताजी- मैं अवी के बारे में बात कर रहा हूँ

कोमल- वो तो बस बेड पे लेटा रहता है ,

पिताजी- कभी पूछ कर देखा ही नही शायद वो खेलने आ जाए

कोमल- मुझे नही खेलना उसके साथ

पिताजी- क्यूँ ?

कोमल- वो बेड पे लेटा रहता है पता नही नहाता है कि नही

नीता- कोमल की बच्ची , अपने पति के बारे में ऐसा थोड़े बोलते है

कोमल- मौसी वो मेरा पति नही है

नीता- अवी से ही तेरी शादी होंगी ,

कोमल-मैं नही करने वाली उस से शादी

नीता- जा नेहा से पूछ तेरी शादी किससे होंगी

कोमल- माँ ने कहा है मेरी शादी किसी राजकुमार से होंगी

नीता- झूठ बोल रही है नेहा ,, तेरी शादी तो अवी से होंगी , जा अभी से सेवा कर उसकी

कोमल- दादाजी देखो ना मौसी क्या बोल रही है

पिताजी- नीता तू फिर सुरू हो गयी

कोमल-दादाजी मौसी को डाँट दो , मुझे हमेशा उस अवी के नाम से तंग करती है

पिताजी- नीता क्यूँ कोमल को तंग करती हो , हमारी कोमल के लिए तो उसके सपनो का राजकुमार आएगा

नीता- क्या पिताजी, मैं तो बस मज़ाक करती हूँ

पिताजी- तू भी ना उस छोटी सी बात की वजह से कोमल को तंग करती है

कोमल- दादाजी मौसी बहुत तंग करती है , माँ भी कुछ नही बोलती मौसी को

पिताजी- अगर दुबारा नीता ने कुछ कहा तो मुझे बताना हम मिलके सज़ा देंगे तुम्हारी मौसी को

कोमल नीता मौसी को ठेंगा दिखाने लगी

नीता- क्या पिताजी , कोमल की खिचाई लेने मे मज़ा आता है

पिताजी- तू इतनी बड़ी हो गयी है और छोटी बच्ची के साथ मज़ाक करती है

नीता- कोमल इतनी प्यारी है कि उसके साथ खेलने का दिल करता है इस लिए थोड़ा मज़ाक कर लेती हूँ

पिताजी- अब कोमल बड़ी हो रही है , अब ऐसा मज़ाक बंद कर दो

नीता- दादाजी की वजह से तू बच गयी कोमल ,

कोमल- अब तो आप जब भी मुझे कुछ कहेगी तो मैं दादाजी को बताउन्गी

पिताजी- कोमल मुझे बताया कर हम मिलके तुम्हारी मौसी को सज़ा देंगे

कोमल- दादाजी चलो ना घोड़ा घोड़ा खेलते है

नीता- तुझे घोड़े पे बैठना है

कोमल- हाँ

नीता- मेरी कोमल रानी , तू घोड़े पे नही बैठ सकती , अवी घोड़े पे बैठ कर तुझे लेने आएगा

कोमल- देखिए ना दादाजी ,, मौसी फिर से मुझे तंग कर रही है

पिताजी-नीता ,

नीता- पिताजी आदत पड़ गयी है धीरे धीरे कम हो जाएगी

पिताजी- कोमल तू ना मौसी की बात पे ध्यान मत दिया कर , चल तुझे घोड़े की सवारी करवाता हूँ

और पिताजी घोड़ा बन गये

और कोमल अपने दादाजी की पीठ पे बैठ कर खेलने लगी

नीता बस ऐसे कोमल को तंग करने के लिए अवी का नाम लेती थी

वो क्या है ना , शालिनी भाभी ने कोमल को देखते ही कहा था कि कोमल इतनी प्यारी है कि इसे मैं अपनी बहू बना लूँ

तब से नीता बस कोमल के पीछे पड़ी हुई है

नीता समझदार तो हो गयी और कोमल को देखते ही वो मस्ती करने लग जाती

कोमल है तो बहन की बेटी ना

कोमल को अवी के नाम से छिड़ने लग जाती

नेहा भी कुछ नही कहती , एक तरफ बेटी और दूसरी तरफ नीता

नेहा तो चुप ही रहती

ऐसे मे कोमल नीता की शिकायत दादाजी को करती , दादाजी के सामने नीता कहती कि वो अब

कोमल को तंग नही करूँगी

पर पिताजी के जाते ही नीता फिर से कोमल को तंग करना सुरू कर देती

अब तो जैसे कोमल को आदत सी पड़ गयी अवी के नाम की

कोमल भी सिंपल सी शिकायत करती नीता मौसी की

पर बाद मे नीता मौसी के सॉरी बोलते ही उसके साथ मस्ती मारने लग जाती

वैसे जब से अवी एक्सीडेंट के बाद अपने कमरे मे बेड पे पड़ा हुआ रहता है तब से कोई दिन ऐसा गया नही होगा कि कोमल अवी से मिलने नही गयी हो

हर दिन कोमल अवी को देखने जाती

अवी को बेड पर लेटा हुआ देख कर मायूस होकर वापस घर आ जाती

कोमल को भी अवी के साथ खेलना था

नीता के बचपन से तंग करने से कोमल के दिल मे भी अवी का नाम जैसे बैठ सा गया हो

पता नही आगे क्या क्या होगा

पर आज तो पिताजी सबको एक एक ज़िम्मेदारी दे कर अपने पोते पोतियो के साथ खेल रहे थे

कोमल को अपनी सवारी करवा रहे थे

बस एक बार अवी ठीक हो जाए फिर पिताजी अपने पोते पोतियो के नाम बाकी की ज़िंदगी कर देंगे
 
Back
Top