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फ्लशबॅक 1052
ठकुज़ी की हवेली पे एक अंजान फोन आ गया.
ठकुज़ी को जयसिंघ और शालिनी के आक्सिडेंट के बारे में पता चला.
ठाकुरजी बिना वक्त गवाए पिताजी के पास आ गये.
ठाकुरजी-चलो हमे जल्दी जाना है
पिताजी-कहाँ पे ले जा रहे हो
ठाकुरजी-चलो फिर बताता हूँ.बहू को साथ लो
पिताजी-बात क्या है
ठाकुरजी-तुम चल तो ,ठकुराइन का आक्सिडेंट हुआ है
पिताजी-पहले क्यूँ नही बताया. सुमन मीना जल्दी बाहर आओ
सुमन-पिताजी आपने बुलाया
पिताजी-कार मे बैठो ,हमे जल्दी ठकुराइन के पास जाना होगा.
सुमन और मीना कार मे बैठ गयी. ठाकुरजी के पास पिताजी बैठ गये और कार शहर की तरफ ले जाने लगे.
ठाकुरजी ने पिताजी की तरफ देखा और ठाकुरजी की आँख से पानी निकलने लगा.
पिताजी-हिम्मत रख ,सब ठीक हो जाएगा .मैं हूँ ना,कुछ नही होगा ठकुराइन को
ठाकुरजी ने पिताजी की बात सुनकर रोना बंद किया और कार हॉस्पिटल की तरफ ले जाने लगे.
ठाकुरजी-योगेन्द्र
पिताजी-कुछ मत बोल ,जल्दी हॉस्पिटल चल
ठाकुरजी-आक्सिडेंट ठकुराइन का नही जयसिंघ का हुआ है.
ठाकुरजी की बात सुनते ही पिताजी ने उनकी तरफ देखा
पिताजी-क्या कहा
ठाकुरजी-जयसिंघ गाँव आ रहा था कि ट्रक ने कार को उड़ा दिया.
पिताजी जयसिंघ के आक्सिडेंट की बात सुनकर रोने लगे. और ज़ोर से डोर के मिरर पे मुक्का मार कर मिरर तोड़ दिया.
ठाकुरजी-खुद को सम्भालो ,पूरी बात अभी तक पता नही है.
पिताजी-जयसिंघ शालिनी और अवी कार मे थे
ठाकुरजी-हाँ,
पिताजी की आँखो से आसू बहने लगे.
मीना और सुमन भी रोने लगी. सुमन तो ज़्यादा रो रही थी.
ठाकुरजी-बहू खुद को संभाल ,तुम रोएगी तो योगेन्द्र को कौन संभालेगा. वहाँ क्या हुआ है शालिनी कैसी है ,कुछ पता नही ,तुम्हें सब देखना होगा.
मीना-आप जल्दी हॉस्पिटल चले.
मीना ने सिचुयेशन को समझते हुए खुद को संभाल लिया और सुमन को हिम्मत देने लगी.
पिताजी अपने बेटे अपनी बहू अपने पोते के बारे में सोच रहे थे.
ठाकुरजी ने जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी कार को हॉस्पिटल ले गये.
हॉस्पिटल मे पहुँचते ही पिताजी भागते हुए हॉस्पिटल मे गये.
पिताजी के पीछे पीछे मीना सुमन और ठाकुरजी भी भागते हुए अंदर चले गये.
पिताजी-जयसिंघ कहाँ है
डॉक्टर-कौन जयसिंघ
ठाकुरजी-जिसका आक्सिडेंट हुआ है
डॉक्टर-दोनो के ऑपरेशन की तय्यारी हो रही. उनको उस रूम मे रखा है.
पिताजी भागते हुए उस कमरे मे चले गये.
डॉक्टर और नर्स जयसिंघ और शालिनी को देख रहे थे
पिताजी-जयसिंघ
जयसिंघ-पिताजिी
नर्स-आप बाहर जाइए
ठाकुरजी-रहने दो इनको
ठाकुरजी के आते ही नर्स चुप चाप अपना काम करने लगी.
पिताजी जयसिंघ के पास गये .और सुमन मीना के साथ शालिनी के पास गयी .
पिताजी-ये क्या हुआ
जयसिंघ-पिताजी मुझे माफ़ कर दीजिए
पिताजी-मैं ने तुम्हें कब का माफ़ कर दिया.
जयसिंघ-पिताजी वो कुमार ग़लत आदमी था, नेहा सही थी.कुमार का असली चेहरा मुझे पता चल गया था
पिताजी-नेहा हमेशा सही थी और तू भी ,
जयसिंघ-मैं आपसे माफी माँगने आ रहा था कि
पिताजी-मैं ने तुम्हें उसी दिन माफ़ किया था जिस दिन अवी ने मेरा हाथ तुम्हारे सर पे रखा था.
जयसिंघ-आपने मुझे माफ़ किया
पिताजी-हाँ,तू मेरा बेटा है , तुझसे कितने दिन गुस्सा रहता , बस हिम्मत रखना , तुझे कुछ नही होगा
जयसिंघ-मैं बुरा नही था.मुझे अंधेरे मे रखा गया था , मैं नेहा की सच्चाई देख नही पाया
पिताजी-तू मेरा बेटा है तू कैसे बुरा हो सकता है.
जयसिंघ-मैं ने नेहा के साथ बहुत बुरा किया.
पिताजी-तूने कुछ नही किया. वो नेहा की किस्मत मे था जो हो गया.तू खुद को गुनहगार मत मान
जयसिंघ-मैं नेहा से माफी माँगने आ रहा था.
पिताजी-नेहा ने भी तुझे माफ़ कर दिया (झूठ)
जयसिंघ-नेहा ने मुझे माफ़ कर दिया
पिताजी-हा, तुझे उसने टी पिलाई थी.उसके बाद नेहा ने कहा की अगली बार जब तुम मिलोगे तो वो तुम्हें माफ़ कर देगी ,, नेहा ने तुझे माफ़ कर दिया
जयसिंघ-नेहा ने मुझे माफ़ किया.
पिताजी-हाँ,
जयसिंघ-नेहा ने मुझे माफ़ किया.
पिताजी-डॉक्टर ये ऐसा क्यूँ बोल रहा है
डॉक्टर-आप बाहर जाइए.
पिताजी ने जयसिंघ के सर पे किस किया और शालिनी की तरफ गया.
शालिनी-पिताजी
पिताजी-हाँ बहू
शालिनी-अवी को आपके भरोसे छोड़ कर जा रही हूँ.
पिताजी-तुझे कुछ नही होगा, तू हिम्मत रख सब ठीक हो जाएगा
शालिनी-पिताजी मेरा वक्त आ गया है.
पिताजी-ऐसा मत बोल ,तेरी मुझे ज़रूरत है.इस घर को तेरी ज़रूरत है
ठकुज़ी की हवेली पे एक अंजान फोन आ गया.
ठकुज़ी को जयसिंघ और शालिनी के आक्सिडेंट के बारे में पता चला.
ठाकुरजी बिना वक्त गवाए पिताजी के पास आ गये.
ठाकुरजी-चलो हमे जल्दी जाना है
पिताजी-कहाँ पे ले जा रहे हो
ठाकुरजी-चलो फिर बताता हूँ.बहू को साथ लो
पिताजी-बात क्या है
ठाकुरजी-तुम चल तो ,ठकुराइन का आक्सिडेंट हुआ है
पिताजी-पहले क्यूँ नही बताया. सुमन मीना जल्दी बाहर आओ
सुमन-पिताजी आपने बुलाया
पिताजी-कार मे बैठो ,हमे जल्दी ठकुराइन के पास जाना होगा.
सुमन और मीना कार मे बैठ गयी. ठाकुरजी के पास पिताजी बैठ गये और कार शहर की तरफ ले जाने लगे.
ठाकुरजी ने पिताजी की तरफ देखा और ठाकुरजी की आँख से पानी निकलने लगा.
पिताजी-हिम्मत रख ,सब ठीक हो जाएगा .मैं हूँ ना,कुछ नही होगा ठकुराइन को
ठाकुरजी ने पिताजी की बात सुनकर रोना बंद किया और कार हॉस्पिटल की तरफ ले जाने लगे.
ठाकुरजी-योगेन्द्र
पिताजी-कुछ मत बोल ,जल्दी हॉस्पिटल चल
ठाकुरजी-आक्सिडेंट ठकुराइन का नही जयसिंघ का हुआ है.
ठाकुरजी की बात सुनते ही पिताजी ने उनकी तरफ देखा
पिताजी-क्या कहा
ठाकुरजी-जयसिंघ गाँव आ रहा था कि ट्रक ने कार को उड़ा दिया.
पिताजी जयसिंघ के आक्सिडेंट की बात सुनकर रोने लगे. और ज़ोर से डोर के मिरर पे मुक्का मार कर मिरर तोड़ दिया.
ठाकुरजी-खुद को सम्भालो ,पूरी बात अभी तक पता नही है.
पिताजी-जयसिंघ शालिनी और अवी कार मे थे
ठाकुरजी-हाँ,
पिताजी की आँखो से आसू बहने लगे.
मीना और सुमन भी रोने लगी. सुमन तो ज़्यादा रो रही थी.
ठाकुरजी-बहू खुद को संभाल ,तुम रोएगी तो योगेन्द्र को कौन संभालेगा. वहाँ क्या हुआ है शालिनी कैसी है ,कुछ पता नही ,तुम्हें सब देखना होगा.
मीना-आप जल्दी हॉस्पिटल चले.
मीना ने सिचुयेशन को समझते हुए खुद को संभाल लिया और सुमन को हिम्मत देने लगी.
पिताजी अपने बेटे अपनी बहू अपने पोते के बारे में सोच रहे थे.
ठाकुरजी ने जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी कार को हॉस्पिटल ले गये.
हॉस्पिटल मे पहुँचते ही पिताजी भागते हुए हॉस्पिटल मे गये.
पिताजी के पीछे पीछे मीना सुमन और ठाकुरजी भी भागते हुए अंदर चले गये.
पिताजी-जयसिंघ कहाँ है
डॉक्टर-कौन जयसिंघ
ठाकुरजी-जिसका आक्सिडेंट हुआ है
डॉक्टर-दोनो के ऑपरेशन की तय्यारी हो रही. उनको उस रूम मे रखा है.
पिताजी भागते हुए उस कमरे मे चले गये.
डॉक्टर और नर्स जयसिंघ और शालिनी को देख रहे थे
पिताजी-जयसिंघ
जयसिंघ-पिताजिी
नर्स-आप बाहर जाइए
ठाकुरजी-रहने दो इनको
ठाकुरजी के आते ही नर्स चुप चाप अपना काम करने लगी.
पिताजी जयसिंघ के पास गये .और सुमन मीना के साथ शालिनी के पास गयी .
पिताजी-ये क्या हुआ
जयसिंघ-पिताजी मुझे माफ़ कर दीजिए
पिताजी-मैं ने तुम्हें कब का माफ़ कर दिया.
जयसिंघ-पिताजी वो कुमार ग़लत आदमी था, नेहा सही थी.कुमार का असली चेहरा मुझे पता चल गया था
पिताजी-नेहा हमेशा सही थी और तू भी ,
जयसिंघ-मैं आपसे माफी माँगने आ रहा था कि
पिताजी-मैं ने तुम्हें उसी दिन माफ़ किया था जिस दिन अवी ने मेरा हाथ तुम्हारे सर पे रखा था.
जयसिंघ-आपने मुझे माफ़ किया
पिताजी-हाँ,तू मेरा बेटा है , तुझसे कितने दिन गुस्सा रहता , बस हिम्मत रखना , तुझे कुछ नही होगा
जयसिंघ-मैं बुरा नही था.मुझे अंधेरे मे रखा गया था , मैं नेहा की सच्चाई देख नही पाया
पिताजी-तू मेरा बेटा है तू कैसे बुरा हो सकता है.
जयसिंघ-मैं ने नेहा के साथ बहुत बुरा किया.
पिताजी-तूने कुछ नही किया. वो नेहा की किस्मत मे था जो हो गया.तू खुद को गुनहगार मत मान
जयसिंघ-मैं नेहा से माफी माँगने आ रहा था.
पिताजी-नेहा ने भी तुझे माफ़ कर दिया (झूठ)
जयसिंघ-नेहा ने मुझे माफ़ कर दिया
पिताजी-हा, तुझे उसने टी पिलाई थी.उसके बाद नेहा ने कहा की अगली बार जब तुम मिलोगे तो वो तुम्हें माफ़ कर देगी ,, नेहा ने तुझे माफ़ कर दिया
जयसिंघ-नेहा ने मुझे माफ़ किया.
पिताजी-हाँ,
जयसिंघ-नेहा ने मुझे माफ़ किया.
पिताजी-डॉक्टर ये ऐसा क्यूँ बोल रहा है
डॉक्टर-आप बाहर जाइए.
पिताजी ने जयसिंघ के सर पे किस किया और शालिनी की तरफ गया.
शालिनी-पिताजी
पिताजी-हाँ बहू
शालिनी-अवी को आपके भरोसे छोड़ कर जा रही हूँ.
पिताजी-तुझे कुछ नही होगा, तू हिम्मत रख सब ठीक हो जाएगा
शालिनी-पिताजी मेरा वक्त आ गया है.
पिताजी-ऐसा मत बोल ,तेरी मुझे ज़रूरत है.इस घर को तेरी ज़रूरत है