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अपडेट 228
हम दोनो खुद को नॉर्मल करने की कोशिस कर रहे थे.
मुझे तो इसकी आदत थी पर रानी के लिए ये सब नया था ,उसे नॉर्मल होने मे ज़्यादा समय लगा.
मैं नॉर्मल होने के बाद रानी की चेस्ट जो ज़ोर से धड़क रही थी उसको देख कर सोच रहा था कि रानी के पहाड़ कब देखने को मिलेंगे.
देखते ही देखते रानी नॉर्मल हो गयी. हम दोनो नॉर्मल हो गये .
रानी उठ कर बैठ गयी. जो किस करने के बाद बेड पर लेट गयी थी.
फिर मैं ने रानी के हाथ पकड़ कर अपने पास खीच लिया .रानी मेरी गोद मे आकर बैठ गयी .रानी का चेहरा मेरी तरफ था.
मैं रानी की सासो को अपनी सासो के साथ महसूस कर रहा था.
मैं ने फिर से रानी के आँखो पर किस किया .रानी आँखो जो सेक्स की गरमी से जल रही थी उसे अपने होंठो के पानी से ठंडा करने की कोशिस कर रहा था. पर आँखो की जलन को किस कर के ठंडा नही किया जा सकता.
उसको तो सेक्स चाहिए था. इसी लिए मैं ने फिर रानी के होंठो का रस्पान करना शुरू किया...
मैं आराम से हर एक सेकेंड का मज़ा लेना चाहता था. हर एक सेकेंड को जीना चाहता था. मैं रानी के साथ बिताए हुए हर एक पल को जीना चाहता था.
मैं रानी को किस करता गया और रानी भी मुझे किस करती गयी.
मैं ने इस बार सिर्फ़ 2 मिनट तक किस किया था. जब मैं रानी से अलग हुआ तो उसकी आँखो ने पूछा कि इतनी जल्दी क्यू किस तोड़ा.मेरे पास उसकी आँखो से पूछे हुए सवाल का कोई जवाब नही था.
पर उसकी आँखो को मैं ने विश्वास दिलाया कि उसकी गरमी मैं शांत करूँगा.
मैं ने रानी के हाथो को पकड़ कर उपर कर दिया.रानी मेरा पूरा साथ दे रही थी.
फिर रानी की कमीज़ को धीरे धीरे उपर करने लगा. जैसे जैसे कमीज़ उपर जा रही थी वैसे वैसे उसकी बदन की चमक मेरी आँखो को अपनी ओर खीच रही थी.
उसके बदन की चमक ने मेरी आँखो को अपने कब्ज़े मे कर लिया .
रानी की कमीज़ ने रानी के बदन का साथ छोड़ दिया.
कमीज़ का साथ छोड़ते ही रानी का बदन कह रहा था कि ब्रा भी निकालो मुझे पूरा आज़ाद होना है.
जैसे पंछी पिंजरे से बाहर आकर आज़ाद होता है वैसे ही रानी का बदन कमीज़ और ब्रा की दीवार से निकल कर अपनी आज़ादी का मज़ा लेना चाहता था.
मैं ने रानी के बदन की बात सुनकर ब्रा को निकाल लिया. ब्रा अपने बदन से अलग होने का अहसास से रानी के बदन मे एक लहर दौड़ गयी.
रानी ने अपनी आँखो बंद की.
मैं ने रानी को बेड पर लिटा दिया .2 मिनट तक रानी के बदन को देखता रहा.
रानी के बूब्स जो इतने टाइट लग रहे थे कि ,ऐसा लग रहा कि रानी ने भी इनको कभी हाथ नही लगाया होगा. बस मेरे इंतज़ार मे अपने बूब्स को ब्रा की दीवार मे क़ैद करके रखा था कि मैं आउन्गा और बूब्स को आज़ाद करके जिस वजह से बूब्स इस दुनिया मे आए है वो काम मैं पूरा करू.
मैं रानी के बदन को बस देखता रहा.2 मिनट तक मुझे कुछ ना करते हुए देख कर रानी ने अपनी आँखो खोल दी.
मुझे ऐसा घुरते हुए देख कर रानी ने फिर से अपनी आँखो बंद कर ली.
रानी की आँखो फिर बंद होते ही मैं रानी के उपर आ गया.
एक हल्का सा किस रानी के होंठो पे कर दिया.
आज मेरी एग्ज़ॅम थी.प्यार की एग्ज़ॅम. जो मुझे मेडम ने सिखाया था. जो मैं ने अपने अनुभव से सीखा जो मुझे छोटी चाची ने सिखाया था. उसे याद करके मुझे रानी को वो प्यार देना था जिसके लिए रानी यहाँ मेरे साथ आई थी.
रानी के होंठो पर किस करने के बाद मैं धीरे धीरे नीचे आ रहा था. रानी के गर्दन को किस कर रहा था . फिर मेरे होंठ रानी के बूब्स के पास आ गये.
मैं ने अपनी जीभ के नोक से धीरे से रानी के निपल को टच किया .ऐसे रखा था कि रानी का निपल टाइट होकर उपर आकर मेरी जीभ को टच करने लगे .
मैं जीभ से रानी के निपल को चाटने लगा . मेरी जीभ टच होते ही रानी के मुँह से शीष्कारिया निकल ने लगी.
मैं अपने हाथ को रानी के नरम बूब्स पे रख कर दबाने लगा. सच मे रानी ने भी कभी इनको हाथ नही लगया होगा इतने टाइट लग रहे थे.
मैं एक बूब्स को मुँह मे लेकर चूसने लगा तो दूसरे बूब्स को हाथो मे लेकर दबाने लगा .
मेरा एक मन(दिमाग़) तो कह रहा था कि इस बूब्स को छोड़ना मत और दूसरा मन(दिमाग़) कह रहा था कि दूसरा बूब्स अभी बाकी है.
मैं ने लेफ्ट बूब्स को मुँह से अलग कर लिया और राइट बूब्स को मुँह मे लेकर चूसने लगा. रानी तो प्यार के नशे मदहोश हो गयी थी.
मैं रानी के नशे को कम होने नही दे रहा था .
रानी के जैसे होंठ गुलाबी थे वैसे उसके निपल गुलाबी थे.शायद चूत भी...
ना मुझे रानी के होंठ पे किस करते हुए छोड़ने का मन था और ना बूब्स को चूस्ते हुए छोड़ने का मन हो रहा था.
थोड़ी देर रानी के बूब्स को एक एक करके चूस्ता रहा.
फिर बूब्स चूसने के बाद मैं रानी के पेट पर किस कर ने लगा. पेट पर किस करने से रानी को गुदगुदी होने लगी.
वो अपने सर को इधर उधर घुमा रही थी.
पेट पर किस करने के बाद मैं ने अपनी जीभ रानी के नाभि मे डाल दी.जीभ नाभि मे जाते ही उसे और गुदगुदी होने लगी.
वो जल बिन मछली की तरह तड़फ़ रही थी या कहूँ गुदगुदी होने से नाच रही थी..
हम दोनो खुद को नॉर्मल करने की कोशिस कर रहे थे.
मुझे तो इसकी आदत थी पर रानी के लिए ये सब नया था ,उसे नॉर्मल होने मे ज़्यादा समय लगा.
मैं नॉर्मल होने के बाद रानी की चेस्ट जो ज़ोर से धड़क रही थी उसको देख कर सोच रहा था कि रानी के पहाड़ कब देखने को मिलेंगे.
देखते ही देखते रानी नॉर्मल हो गयी. हम दोनो नॉर्मल हो गये .
रानी उठ कर बैठ गयी. जो किस करने के बाद बेड पर लेट गयी थी.
फिर मैं ने रानी के हाथ पकड़ कर अपने पास खीच लिया .रानी मेरी गोद मे आकर बैठ गयी .रानी का चेहरा मेरी तरफ था.
मैं रानी की सासो को अपनी सासो के साथ महसूस कर रहा था.
मैं ने फिर से रानी के आँखो पर किस किया .रानी आँखो जो सेक्स की गरमी से जल रही थी उसे अपने होंठो के पानी से ठंडा करने की कोशिस कर रहा था. पर आँखो की जलन को किस कर के ठंडा नही किया जा सकता.
उसको तो सेक्स चाहिए था. इसी लिए मैं ने फिर रानी के होंठो का रस्पान करना शुरू किया...
मैं आराम से हर एक सेकेंड का मज़ा लेना चाहता था. हर एक सेकेंड को जीना चाहता था. मैं रानी के साथ बिताए हुए हर एक पल को जीना चाहता था.
मैं रानी को किस करता गया और रानी भी मुझे किस करती गयी.
मैं ने इस बार सिर्फ़ 2 मिनट तक किस किया था. जब मैं रानी से अलग हुआ तो उसकी आँखो ने पूछा कि इतनी जल्दी क्यू किस तोड़ा.मेरे पास उसकी आँखो से पूछे हुए सवाल का कोई जवाब नही था.
पर उसकी आँखो को मैं ने विश्वास दिलाया कि उसकी गरमी मैं शांत करूँगा.
मैं ने रानी के हाथो को पकड़ कर उपर कर दिया.रानी मेरा पूरा साथ दे रही थी.
फिर रानी की कमीज़ को धीरे धीरे उपर करने लगा. जैसे जैसे कमीज़ उपर जा रही थी वैसे वैसे उसकी बदन की चमक मेरी आँखो को अपनी ओर खीच रही थी.
उसके बदन की चमक ने मेरी आँखो को अपने कब्ज़े मे कर लिया .
रानी की कमीज़ ने रानी के बदन का साथ छोड़ दिया.
कमीज़ का साथ छोड़ते ही रानी का बदन कह रहा था कि ब्रा भी निकालो मुझे पूरा आज़ाद होना है.
जैसे पंछी पिंजरे से बाहर आकर आज़ाद होता है वैसे ही रानी का बदन कमीज़ और ब्रा की दीवार से निकल कर अपनी आज़ादी का मज़ा लेना चाहता था.
मैं ने रानी के बदन की बात सुनकर ब्रा को निकाल लिया. ब्रा अपने बदन से अलग होने का अहसास से रानी के बदन मे एक लहर दौड़ गयी.
रानी ने अपनी आँखो बंद की.
मैं ने रानी को बेड पर लिटा दिया .2 मिनट तक रानी के बदन को देखता रहा.
रानी के बूब्स जो इतने टाइट लग रहे थे कि ,ऐसा लग रहा कि रानी ने भी इनको कभी हाथ नही लगाया होगा. बस मेरे इंतज़ार मे अपने बूब्स को ब्रा की दीवार मे क़ैद करके रखा था कि मैं आउन्गा और बूब्स को आज़ाद करके जिस वजह से बूब्स इस दुनिया मे आए है वो काम मैं पूरा करू.
मैं रानी के बदन को बस देखता रहा.2 मिनट तक मुझे कुछ ना करते हुए देख कर रानी ने अपनी आँखो खोल दी.
मुझे ऐसा घुरते हुए देख कर रानी ने फिर से अपनी आँखो बंद कर ली.
रानी की आँखो फिर बंद होते ही मैं रानी के उपर आ गया.
एक हल्का सा किस रानी के होंठो पे कर दिया.
आज मेरी एग्ज़ॅम थी.प्यार की एग्ज़ॅम. जो मुझे मेडम ने सिखाया था. जो मैं ने अपने अनुभव से सीखा जो मुझे छोटी चाची ने सिखाया था. उसे याद करके मुझे रानी को वो प्यार देना था जिसके लिए रानी यहाँ मेरे साथ आई थी.
रानी के होंठो पर किस करने के बाद मैं धीरे धीरे नीचे आ रहा था. रानी के गर्दन को किस कर रहा था . फिर मेरे होंठ रानी के बूब्स के पास आ गये.
मैं ने अपनी जीभ के नोक से धीरे से रानी के निपल को टच किया .ऐसे रखा था कि रानी का निपल टाइट होकर उपर आकर मेरी जीभ को टच करने लगे .
मैं जीभ से रानी के निपल को चाटने लगा . मेरी जीभ टच होते ही रानी के मुँह से शीष्कारिया निकल ने लगी.
मैं अपने हाथ को रानी के नरम बूब्स पे रख कर दबाने लगा. सच मे रानी ने भी कभी इनको हाथ नही लगया होगा इतने टाइट लग रहे थे.
मैं एक बूब्स को मुँह मे लेकर चूसने लगा तो दूसरे बूब्स को हाथो मे लेकर दबाने लगा .
मेरा एक मन(दिमाग़) तो कह रहा था कि इस बूब्स को छोड़ना मत और दूसरा मन(दिमाग़) कह रहा था कि दूसरा बूब्स अभी बाकी है.
मैं ने लेफ्ट बूब्स को मुँह से अलग कर लिया और राइट बूब्स को मुँह मे लेकर चूसने लगा. रानी तो प्यार के नशे मदहोश हो गयी थी.
मैं रानी के नशे को कम होने नही दे रहा था .
रानी के जैसे होंठ गुलाबी थे वैसे उसके निपल गुलाबी थे.शायद चूत भी...
ना मुझे रानी के होंठ पे किस करते हुए छोड़ने का मन था और ना बूब्स को चूस्ते हुए छोड़ने का मन हो रहा था.
थोड़ी देर रानी के बूब्स को एक एक करके चूस्ता रहा.
फिर बूब्स चूसने के बाद मैं रानी के पेट पर किस कर ने लगा. पेट पर किस करने से रानी को गुदगुदी होने लगी.
वो अपने सर को इधर उधर घुमा रही थी.
पेट पर किस करने के बाद मैं ने अपनी जीभ रानी के नाभि मे डाल दी.जीभ नाभि मे जाते ही उसे और गुदगुदी होने लगी.
वो जल बिन मछली की तरह तड़फ़ रही थी या कहूँ गुदगुदी होने से नाच रही थी..