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मैं और मेरा परिवार

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अपडेट 228

हम दोनो खुद को नॉर्मल करने की कोशिस कर रहे थे.

मुझे तो इसकी आदत थी पर रानी के लिए ये सब नया था ,उसे नॉर्मल होने मे ज़्यादा समय लगा.

मैं नॉर्मल होने के बाद रानी की चेस्ट जो ज़ोर से धड़क रही थी उसको देख कर सोच रहा था कि रानी के पहाड़ कब देखने को मिलेंगे.

देखते ही देखते रानी नॉर्मल हो गयी. हम दोनो नॉर्मल हो गये .

रानी उठ कर बैठ गयी. जो किस करने के बाद बेड पर लेट गयी थी.

फिर मैं ने रानी के हाथ पकड़ कर अपने पास खीच लिया .रानी मेरी गोद मे आकर बैठ गयी .रानी का चेहरा मेरी तरफ था.

मैं रानी की सासो को अपनी सासो के साथ महसूस कर रहा था.

मैं ने फिर से रानी के आँखो पर किस किया .रानी आँखो जो सेक्स की गरमी से जल रही थी उसे अपने होंठो के पानी से ठंडा करने की कोशिस कर रहा था. पर आँखो की जलन को किस कर के ठंडा नही किया जा सकता.

उसको तो सेक्स चाहिए था. इसी लिए मैं ने फिर रानी के होंठो का रस्पान करना शुरू किया...

मैं आराम से हर एक सेकेंड का मज़ा लेना चाहता था. हर एक सेकेंड को जीना चाहता था. मैं रानी के साथ बिताए हुए हर एक पल को जीना चाहता था.

मैं रानी को किस करता गया और रानी भी मुझे किस करती गयी.

मैं ने इस बार सिर्फ़ 2 मिनट तक किस किया था. जब मैं रानी से अलग हुआ तो उसकी आँखो ने पूछा कि इतनी जल्दी क्यू किस तोड़ा.मेरे पास उसकी आँखो से पूछे हुए सवाल का कोई जवाब नही था.

पर उसकी आँखो को मैं ने विश्वास दिलाया कि उसकी गरमी मैं शांत करूँगा.

मैं ने रानी के हाथो को पकड़ कर उपर कर दिया.रानी मेरा पूरा साथ दे रही थी.

फिर रानी की कमीज़ को धीरे धीरे उपर करने लगा. जैसे जैसे कमीज़ उपर जा रही थी वैसे वैसे उसकी बदन की चमक मेरी आँखो को अपनी ओर खीच रही थी.

उसके बदन की चमक ने मेरी आँखो को अपने कब्ज़े मे कर लिया .

रानी की कमीज़ ने रानी के बदन का साथ छोड़ दिया.

कमीज़ का साथ छोड़ते ही रानी का बदन कह रहा था कि ब्रा भी निकालो मुझे पूरा आज़ाद होना है.

जैसे पंछी पिंजरे से बाहर आकर आज़ाद होता है वैसे ही रानी का बदन कमीज़ और ब्रा की दीवार से निकल कर अपनी आज़ादी का मज़ा लेना चाहता था.

मैं ने रानी के बदन की बात सुनकर ब्रा को निकाल लिया. ब्रा अपने बदन से अलग होने का अहसास से रानी के बदन मे एक लहर दौड़ गयी.

रानी ने अपनी आँखो बंद की.

मैं ने रानी को बेड पर लिटा दिया .2 मिनट तक रानी के बदन को देखता रहा.

रानी के बूब्स जो इतने टाइट लग रहे थे कि ,ऐसा लग रहा कि रानी ने भी इनको कभी हाथ नही लगाया होगा. बस मेरे इंतज़ार मे अपने बूब्स को ब्रा की दीवार मे क़ैद करके रखा था कि मैं आउन्गा और बूब्स को आज़ाद करके जिस वजह से बूब्स इस दुनिया मे आए है वो काम मैं पूरा करू.

मैं रानी के बदन को बस देखता रहा.2 मिनट तक मुझे कुछ ना करते हुए देख कर रानी ने अपनी आँखो खोल दी.

मुझे ऐसा घुरते हुए देख कर रानी ने फिर से अपनी आँखो बंद कर ली.

रानी की आँखो फिर बंद होते ही मैं रानी के उपर आ गया.

एक हल्का सा किस रानी के होंठो पे कर दिया.

आज मेरी एग्ज़ॅम थी.प्यार की एग्ज़ॅम. जो मुझे मेडम ने सिखाया था. जो मैं ने अपने अनुभव से सीखा जो मुझे छोटी चाची ने सिखाया था. उसे याद करके मुझे रानी को वो प्यार देना था जिसके लिए रानी यहाँ मेरे साथ आई थी.

रानी के होंठो पर किस करने के बाद मैं धीरे धीरे नीचे आ रहा था. रानी के गर्दन को किस कर रहा था . फिर मेरे होंठ रानी के बूब्स के पास आ गये.

मैं ने अपनी जीभ के नोक से धीरे से रानी के निपल को टच किया .ऐसे रखा था कि रानी का निपल टाइट होकर उपर आकर मेरी जीभ को टच करने लगे .

मैं जीभ से रानी के निपल को चाटने लगा . मेरी जीभ टच होते ही रानी के मुँह से शीष्कारिया निकल ने लगी.

मैं अपने हाथ को रानी के नरम बूब्स पे रख कर दबाने लगा. सच मे रानी ने भी कभी इनको हाथ नही लगया होगा इतने टाइट लग रहे थे.

मैं एक बूब्स को मुँह मे लेकर चूसने लगा तो दूसरे बूब्स को हाथो मे लेकर दबाने लगा .

मेरा एक मन(दिमाग़) तो कह रहा था कि इस बूब्स को छोड़ना मत और दूसरा मन(दिमाग़) कह रहा था कि दूसरा बूब्स अभी बाकी है.

मैं ने लेफ्ट बूब्स को मुँह से अलग कर लिया और राइट बूब्स को मुँह मे लेकर चूसने लगा. रानी तो प्यार के नशे मदहोश हो गयी थी.

मैं रानी के नशे को कम होने नही दे रहा था .

रानी के जैसे होंठ गुलाबी थे वैसे उसके निपल गुलाबी थे.शायद चूत भी...

ना मुझे रानी के होंठ पे किस करते हुए छोड़ने का मन था और ना बूब्स को चूस्ते हुए छोड़ने का मन हो रहा था.

थोड़ी देर रानी के बूब्स को एक एक करके चूस्ता रहा.

फिर बूब्स चूसने के बाद मैं रानी के पेट पर किस कर ने लगा. पेट पर किस करने से रानी को गुदगुदी होने लगी.

वो अपने सर को इधर उधर घुमा रही थी.

पेट पर किस करने के बाद मैं ने अपनी जीभ रानी के नाभि मे डाल दी.जीभ नाभि मे जाते ही उसे और गुदगुदी होने लगी.

वो जल बिन मछली की तरह तड़फ़ रही थी या कहूँ गुदगुदी होने से नाच रही थी..

 
Update 228

Ham dono khud ko normal karne ki khosish kar rahe the.

Mujhe to iski aadat thi par rani ke liye ye sab naya tha ,use normal hone me jyaadaa samay laga.

Main normal hone ke bad rani ki chest jo jor se dhadak rahi thi usko dekh kar soch raha tha ki rani ke pahad kab dekhne ko milenge.

Dekhte hi dekhte rani normal ho gayi. Ham dono normal ho gaye .

Rani ut kar baith gayi. Jo kiss karne ke bad bed par let gayi thi.

Fir main ne rani ke hath pakad kar apne paas khich liya .rani meri ghod me aakar baith gayi .rani ka chehara meri taraf tha.

Main rani ki saaso ko apni saaso ke sath mahsus kar raha tha.

Main ne fir se rani ke ankho par kiss kiya .rani ankho jo sex ki garami se jal rahi thi use apne hontho ke pani se thanda karne ki khosish kar raha tha. Par ankho ki jalan ko kiss kar ke thanda nahi kiya ja sakata.

Usko to sex chahiye tha. isi liye Main ne fir rani ke hontho ka raspan karana shuru kiya...

Main aaram se har ek second ka maza lena chahata tha. Har ek second ko jina chahata tha. Main rani ke sath bitaye hue har ek pal ko jina chahata tha.

Main rani ko kiss karta gaya aur rani bhi mujhe kiss karti gayi.

Main ne is bar sirf 2 minat tak kiss kiya tha. Jab main rani se alag hua to uski ankho ne pucha ki itni jaldi kyu kiss thoda.mere paas uski ankho ne puche hue sawal ka koi jawab nahi tha.

Par uski ankho ko main ne vishwas dilaya ki uski garami main shaant karunga.

Main ne rani ke hatho ko pakad kar upar kar diya.rani mera pura sath de rahi thi.

Fir rani ki kameez ko dire dire upar karne laga. Jaise jaise kameez upar ja rahi thi vaise vaise uski badan ki chamak mere ankho ko apni our khich rahi thi.

Uske badan ki chamak ne mere ankho ko apne kabje me kar liya .

Rani ki kameez ne rani ke badan ka sath chod diya.

kameez ka sath chodate hi rani ka badan kah raha tha ki bra bhi nikalo mujhe pura aazad hona hai.

Jaise panchi pinjare se bahar aakar aazad hota hai vaise hi rani ka badan kameez aur bra ki diwaar se nikal kar apni aazadi ka maza lena chahata tha.

Main ne rani ke badan ki bat sunkar bra ko nikaal liya. Bra apne badan se alag hone ka ahasas se rani ke badan me ek lahar daud gayi.

Rani ne apni ankho band ki.

Main ne rani ko bed par lita diya .2 minat tak rani ke badan ko dekhata raha.

Rani ke boobs jo itne tight lag rahe the ki ,aisa lag raha ki rani ne bhi inko kabhi hath nahi lagaya hoga. Bas mere intazar me apne boobs ko bra ki diwaar me kaid karke rakha tha ki main aaunga aur boobs ko aazad karke jis vajah se boobs is duniya me aaye hai wo kaam main pura karu.

Main rani ke badan ko bas dekhta raha.2 minat tak mujhe kuch na karte hue dekh kar rani ne apni ankho khol di.

mujhe aisa ghurate hue dekh kar rani ne fir se apni ankho band kar li.

Rani ki ankho fir band hote hi Main rani ke upar aa gaya.

Ek halka sa kiss rani ke hontho pe kar diya.

Aaj meri exam thi.pyar ki exam. Jo mujhe madam ne sikhaya tha. Jo main ne apne anubhav se sikha jo mujhe choti chachi ne sikhaya tha. Use yaad karke mujhe rani ko wo pyar dena tha jiske liye rani yaha mere sath aayi thi.

Rani ke hontho par kiss karne ke bad Main dire dire niche aa raha tha. Rani ke gardan ko kiss kar raha tha . Fir mere honth rani ke boobs ke paas aa gaye.

Main ne apni jibh ka tok dire se rani ke nipal ko touch kiya .aise rakha tha ki rani ka nipal tight hokar upar aakar meri jibh ko touch karne lage .

main jibh se rani ke nipal ko chatne laga . Meri jibh touch hote hi rani ke munh se shishkariya nikal ne lagi.

Main ne apne hath ko rani ke naram boobs pe rak kar dabane laga. Sach me rani ne bhi kabhi inko hath nahi lagya hoga itne tight lag rahe the.

Main Ek boobs ko munh me lekar choosne laga to dusare boobs ko hatho me lekar dabane laga .

Mera ek man(dimag) to kah raha tha ki is boobs ko chodna mat aur dusara man(dimag) kah raha tha ki dusara boobs abhi baki hai.

Main ne left boobs ko munh se alag kar liya aur right boobs ko munh me kekar choosne laga. Rani to pyar ke nashe madhosh ho gayi thi.

Main rani ke nashe ko kam hone nahi de raha tha .

Rani ke jaise honth gulabhi the vaise uske nipal gulabhi thi.shayad choot bhi...

Na mujhe rani ke honth pe kiss karte hue chodne ka man tha aur na boobs ko chooste hue chodane ka man ho raha tha.

Thodi der rani ke boobs ko ek ek karke choosta raha.

Fir Boobs choosne ke bad main rani ke pet par kiss kar ne laga. Pet par kiss karne se rani ko ghudghuddi hone lagi.

Wo apne sar ko idhar udhar ghuma rahi thi.

Pet par kiss karne ke bad main ne apni jibh rani ke nabhi me daal di.jibh nabhi me jate hi use aur ghud ghuddi hone lagi.

Wo jal bin machhali ki tarah tadaf rahi thi ya kyu ghughuddi hone se nach rahi thi..

 


अपडेट 229

रानी की नाभि के साथ खेलने के बाद मैं नीचे आ गया.

मैं रानी के दोनो पैरो के बीच मे आ गया.मैं ने सलवार के उपर से रानी की चूत पे किस किया.

चूत पर किस करते हुए मेरे होंठो को सलवार को गीला कर दिया.

रानी के साथ किस और फिर बूब्स चूसना जिस से रानी ने इतना पानी छोड़ा था कि पैंटी और सलवार दोनो गीले हो गये थे.

मैं रानी की परी को देखने के लिए मरा जा रहा था. जितना देर मुझे रानी की परी देखने मे लग रहा था उतनी तेज़ मेरी धड़कने चल रही थी.

मैं ने सलवार के नाडे को मुँह मे पकड़ लिया और खीच कर खोल दिया.

अवी-रानी एक बार अपनी आँखो खोलो ना

चुदाई का खेल शुरू हो जाने के बाद मैं ने पहली बार रानी से बात की

रानी ने ना मे गर्दन घुमा दी .

अवी-मेरे लिए अपनी आँखो खोलो ना

मेरी बात सुनकर रानी ने अपनी आँखो खोल दी .और मेरी तरफ देखने लगी .

मेरे मुँह मे उसके सलवार का नाडा देख कर रानी ने शरमा कर फिर से अपनी आँखो बंद कर ली.

फिर मैं ने सलवार को पकड़ कर नीचे करने लगा.

रानी ने अपनी गंद को उपर किया जिस से सलवार निकल गयी.

मैं जैसा कर रहा था उसमे रानी मेरा पूरा साथ दे रही थी.

रानी अब मेरे सामने सिर्फ़ पैंटी मे थी. रानी की पिंक पैंटी पूरी गीली हो गयी थी.

मैं रानी की पैंटी की महक को सूंघने लगा. मदहोश कर देने वाली महक थी.

रानी तो आँखो बंद करके मैं क्या क्या करने वाला हू उसका इंतज़ार कर रही थी.

मैं ने रानी की पैंटी जो गीली हो गयी थी उसको जीभ से चाट लिया.

मेरी जीभ पैंटी के उपर से चूत को छूने से रानी के मुँह से शीष्कारी निकल गयी.

फिर मैं ने पैंटी के अंदर अपना हाथ डाल दिया. अंदर पूरा चिपचिपा था.

मैं ने हाथ बाहर निकाल लिया और चूत के दर्शन करने के लिए तैय्यार हो गया.

मैं ने रानी की गीली पैंटी को पकड़ कर रानी के बदन से अलग करने लगा तो रानी ने पैंटी पकड़ ली.

इस बार रानी ने मुझे पहली बार कुछ करने से रोका था.

मैं ने एक बार रानी की तरफ देखा वो ना मे गर्दन हिला रही थी.

मैं ने उसके हाथ के उपर किस किया जिस से रानी ने अपनी पैंटी पकड़ी थी. मेरे उसके हाथ पर किस करते ही रानी ने पैंटी छोड़ दी.

और फिर पैंटी चूत के उपर से अलग हो गयी .

रानी का बदन अब खुल कर अपनी आज़ादी का मज़ा ले रहा था.

मुझे बस कुछ पल के लिए रानी की चूत दिखी.

क्यू कि रानी ने अपने पैरो को मोड़ लिया जिस से रानी की चूत दिखना बंद हो गयी थी.

मैं ने रानी के पैरो पे किस करना शुरू किया.किस करते हुए धीरे धीरे उपर जाने लगा .

जब मैं ने रानी की जाँघो पर किस करना शुरू किया तब धीरे धीरे रानी अपने पैर को अलग कर रही थी.

जैसे मैं उपर जाता वैसे उसके पैर एक दूसरे से अलग हो रहे थे.

अब रानी की चूत मेरे सामने थी. खिड़की के छेद से आ रही सूरज की रोशनी सीधे रानी की चूत पर गिर रही थी.

रानी की चूत पूरी गीली हो चुकी थी.और सूरज की रोशनी जब रानी की गीली चूत पर गिर रही थी तो रानी की चूत चमक रही थी.

वो चमक मेरे आँखो को अपनी तरफ अट्रॅक्ट कर रही थी.

भगवान भी मुझे सूरज की रोशनी से रास्ता दिखा रहे थे.

सूरज की चमक मे वो भी रानी की चूत देखना बस क्या कहु ....मैं तो आँखो से रानी की चुदाई करने लगा.

रानी की चूत गीली थी जिस से मुझे पहले रानी की चूत को साफ करना था .

मैं ने अपनी जीभ से रानी की चूत को साफ करना शुरू किया.

जब भी मैं रानी के किसी पार्ट को अपने जीभ से टच करता तब मुझे क्या हो जाता ,मैं अपने होश खो बैठता. मुझे ऐसा लगता कि इस दुनिया मे रानी और मैं,सिर्फ़ हम दोनो ही हो ,जो सिर्फ़ प्यार करना जानते है.

मैं अपनी जीभ से रानी की चूत चाटने लगा. रानी बस एक काम कर रही थी वो था शीष्कारिया लेना .

एक पत्नी कैसे सुहागरात के दिन अपने पति के साथ चुदाई करते हुए शरमा कर खुल कर शीष्कारिया नही लेती उसी तरह रानी भी मुझसे शरमा कर शीष्कारियो पर कंट्रोल रख रही थी.

 


पर जो भी था उसमे मुझे एक अलग ही आनंद मिल रहा था.

रानी की बिना बालो वाली गुलाबी चूत अब मैं ने चाट कर साफ कर दी थी.

अब तो सूरज की रोशनी रानी की चूत मे जाना चाह रही थी जो मुझे पसंद नही आ रहा था.

मैं ने खिड़की के उपर रानी का पायज़मा डाल कर सूरज की रोशनी को रानी की चूत मे जाने से रोक दिया.

फिर मैं ने अपनी जीभ को रानी की चूत मे डाल कर रानी को भी आनंद देने लगा. रानी भी अपना पानी छोड़ कर मेरी प्यास भूज़ा रही थी.

मैं ने हाथो से रानी की चूत के होंठ खोल दिए. फिर मैं आराम से अपनी जीभ रानी की चूत मे डाल कर चाटने लगा .खेलने लगा .

रानी की चूत मे मैं जितनी ज़ोर से अपनी जीभ अंदर डालता उतनी ज़ोर से रानी की चूत जीभ को बाहर फेक देती .

जैसे कह रही थी कि मुझे जीभ नही तुम्हारा लंड चाहिए.

देना है तो लंड दो जीभ से मेरा क्या होगा. जीभ से तो मेरी आग भड़क जाएगी.

पर मैं भी कहा हार मानने वाला था ,मैं ने भी उसकी चूत मे जीभ डालना जारी रखा. उसकी टाइट चूत मेरी जीभ को बाहर धकेल देती

इस खेल मे मुझे अपना ही आनंद मिल आ रहा था. साथ मे रानी को भी.

रानी तो अपनी शीष्कारिया अपनी भूक पर कंट्रोल रखे हुए थी.

रानी की चूत के साथ अपनी जीभ से खेलने से रानी की चूत ने पानी छोड़ दिया .मैं ने वो सारा अमृत पी लिया. और जीभ से चूत को साफ कर दिया.

रानी इतनी गरम हो चुकी थी की उसको कुछ भी करना बर्दास्त नही हो रहा था .और वो अपना पानी छोड़ देती

उसकी अमृत को पीने के बाद मैं ने उसकी चूत को एक बार चाट कर साफ किया.

फिर मैं उठ कर बॉटल से पानी पीने लगा. मैं ने टाइम देखा ,2 घंटे से मैं रानी के साथ सिर्फ़ उपर उपर से प्यार कर रहा था.

मतलब मुझे रानी के साथ प्यार करते हुए समय का भी ध्यान नही रहा.

फिर ज़्यादा देर करना ठीक नही होता. मैं ने अपने कपड़े निकाल दिए.और रानी को आँखो खोलने के लिए कहा .

उसने आँखो खोल दी.मैं ने लंड को रानी के हाथो मे दिया. रानी ने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर लंड की तरफ .फिर लंड पे एक किस कर के लंड को छोड़ दिया और ना मे गर्दन हिल दी.

रानी ने लंड पर किस किया जिस से मुझे उसपे प्यार आया. और उसके ना करने का तरीका भी पसंद आ गया. उसने लंड पर किस करके ना कहा.

मतलब वो लंड को मुँह मे लेना नही चाहती थी. मैं भी उसे ज़्यादा फोर्स नही किया.

उसने लंड नही चूसा मतलब अब बस एक काम बाकी था. वो था ...

फिर मैं ने रानी की गंद के नीचे पिल्लो रख दिया. फिर मैं रानी के टाँगो के बीच मे आ गया.

मैं ने लंड पे थूक लगा दी. और लंड को चूत पर रख दिया.

मेरा लंड रानी की चूत को प्यार करना चाहता था. उसको फील करना चाहता था.

मैं ने लंड वैसे ही रहने दिया .

लंड और चूत का मिलन होने वाला था. उस मिलन मे दर्द होने वाला था पर मेरा लंड चूत को दर्द देने से पहले उसका प्यार कर रहा था.

दर्द से पहले प्यार...

मुझे कुछ ना करते हुए देख कर रानी ने आँखें खोल कर मुझे आगे बढ़ने को कहा.

मैं ने फिर से लंड पर थूक लगाया और लंड को चूत पर रखा .और रानी के उपर आ गया.

मैं ने पहले रानी के होंठो पर एक किस किया और फिर मैं ने एक झटका मारा पर कुछ नही हुआ, मेरा लंड फिसल गया.

मैं ने फिर से लंड को चूत पर रखा और एक ज़ोर का झटका मारा कि लंड का टोपा रानी की चूत मे चला गया .

रानी के मुँह से चीख निकल गयी . रानी की दर्द भरी चीख सुनकर मुझे ऐसा लग रहा था कि दर्द रानी को नही बल्कि मुझे हो रहा हो.

दर्द रानी को हो रहा था और पानी मेरे आँखो मे पानी आ रहा था.

रानी ने जब मेरी आँखो मे पानी देख तो उसने चीखना बंद किया. और दर्द को बर्दास्त करना शुरू किया.

रानी ने अपने होंठो को दबा कर अपनी चीख को रोकने लगी. पर रानी को दर्द हो रहा था.

रानी का दर्द कम करने के लिए मैं अपने होंठो रानी के होंठो पर रख कर चूसने लगा. जिस से रानी दर्द को भूल कर किस पर फोकस कर सके ताकि दर्द कम होज़ाये.

अभी तो सिर्फ़ टोपा अंदर गया था. पूरा लंड अंदर जाना बाकी था. पर मुझे क्या हुआ था कि मैं रानी को दर्द होता हुआ देख नही पा रहा था.पर रानी को प्यार भी करना था.

उपर से मेरा लंड रानी की चूत मे जाने के लिए बेताब हो रहा था.

थोड़ी देर मे रानी शांत हो गयी फिर भी मैं हाथो से बूब्स को दबाने लगा. थोड़ी देर मे रानी को पूरी तरह से अच्छा लगने लगा .

मैं ने रानी को इशारे मे पूछा कि अंदर डालु उसने हाँ मे गर्दन हिला दी.

फिर मैं ने सील तोड़ने वाला झटका मारा,वो झटका जिसे कोई लड़की अपनी ज़िंदगी भर भूल नही सकती झटका मार कर लंड रानी की सील तोड़ कर 5 इंच तक अंदर चला गया.

रानी ने बहुत कोशिस की चीख ना निकले पर ये ऐसा झटका था जिस के मारते ही हर लड़की की चीख निकल जाती है.

रानी की भी चीख निकल गयी.पर मेरे किस करने से उसकी दबी हुई चीख मेरे मुँह मे दब गयी.

 
रानी और मेरी आँखो से पानी निकलने लगा .

उसको सासे लेने की ज़्यादा ज़रूरत थी जिस से मैं ने उसके होंठो को अपने होंठो से आज़ाद किया. पर मैं बूब्स दबाता रहा.

रानी ने के मुँह से दाआर्र्र्र्द वर्ड निकाला. पर रानी ने कंट्रोल करते हुए उस वर्ड को बीच मे रख दिया.

मुझे पता था कि रानी को दर्द हो रहा है.फिर भी रानी ने मुझे लंड बाहर निकालने को नही कहा और अंदर डालने को भी नही कहा. वो बस मेरे नीचे लेटी हुई अपने दर्द को मुझ पर जाहिर नही होने देना चाहती थी.

रानी को मुझसे इतना प्यार करती थी कि उसने आँखो खोल कर मुझे आँखो से इशारा करके थोड़ी देर रुकने को कहा. उसे लगा कि अगर मैं भी उस से प्यार करता हू तो मैं उसका इशारा समझ जाउन्गा .और हुआ भी ऐसा ही मैं समझ गया कि वो क्या कहना चाहती है.

मैं ऐसे ही रुका रहा. मुझे ऐसे देख कर उसकी आँखो मे एक चमक आ गयी.

मैं ने अपने लंड को ऐसे ही रखा .और फिर से रानी के होंठो को चूसने लगा. बूब्स को दबाने लगा.15 मिनट के बाद रानी को अच्छा लगने लगा.

उसका दर्द कम हो गया. मैं ने रानी के होंठो को छोड़ दिया .और बूब्स को भी ...

रानी के चेहरे पर अब दर्द नही था बस प्यार ही प्यार दिख रहा था.

मैं ने पिल्लो की तरफ देखा उस पे खून लगा हुआ था.मैं लंड को धीरे से बाहर निकाल कर अंदर डालने लगा .धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा. अभी तक 5 इंच लंड अंदर था.मैं आराम से 2 मिनट तक लंड को हिलाता रहा.

रानी बस बिना पलके झुकाए मुझे देख रही थी. क्या पता क्या देख रही थी.

मैं जो प्यार से लंड अंदर बाहर कर रहा था .मैं उसे ज़्यादा दर्द नही होने दे रहा था. शायद रानी यही देख रही थी.

मैं लंड को बड़े प्यार से रानी की चूत मे डाल रहा था. शायद रानी मेरा यही प्यार देख रही थी.

फिर धीरे धीरे गति बढ़ाने लगा .अब रानी का कुछ दर्द कम हुआ था. पर मैं ने अभी तक पूरा लंड अंदर नही डाला था.मैं इंतज़ार करने लगा कि कब रानी की चूत पानी छोड़ेगी.

5 मिनट तक ऐसे ही चुदाई करने से रानी की चूत ने पानी छोड़ दिया.

रानी की चूत के पानी के साथ खून भी बाहर आ गया था. चूत अब गीली हो गयी थी. लंड के लिए जगह बन रही थी.

फिर मैं ने आख़िरी झटका मारा और पूरा लंड अंदर चला गया. रानी की दबी हुई दर्द भरी चीख निकल गयी.

मैं रानी का बचा हुआ दर्द बूब्स दबा कर कम करने लगा.

मैं ने रानी से कहा बस हो गया .अब दर्द नही होगा... जितना दर्द होना तो हो गया ...पूरा लंड अंदर चला गया है..,बस थोड़ी देर रूको सब ठीक हो जाएगा

रानी ने कहा.,अवी मुझे दर्द नही हो रहा है.

मुझे पता था कि रानी झूठ बोल रही थी.

मेरे लंड से दर्द ना हो ये हो ही नही सकता.

रानी की कुवारि चूत मे दर्द ना हो ये हो ही नही सकता.

लंड अंदर जाने के बाद चीख निकली और दर्द ना हो ये हो ही नही सकता.

फिर भी रानी ने मेरे लिए कहा कि उसे दर्द नही हो रहा.

रानी की बात सुन ने के बाद मैं ने लंड को बाहर निकाल लिया. और लंड पर जो खून था वो ये बता रहा था कि रानी को कितना दर्द हो रहा है.

मैं समझ गया कि वो मेरे लिए ,अपने प्यार के लिए दर्द बर्दास्त कर रही है.

मैं ने लंड को धीरे से फिर से अंदर डाल दिया और रानी के बूब्स दबाते हुए लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू किया.

लंड को हिलने से रानी को दर्द हो रहा था .उसने अपने हाथ मेरी पीठ पे रख दिए. जैसे उसको दर्द होता वो अपने नाख़ून मेरे पीठ मे गाढ देती.और कहती कि मुझे दर्द नही हो रहा

 
एक तरफ दर्द के वजह से नाख़ून से मेरे पीठ को खरॉच रही थी और दूसरी तरफ कह रही थी कि मुझे दर्द नही हो रहा.

रानी के साथ चुदाई करते हुए मुझे कोई जल्दी नही थी.

मैं हर एक धक्के को महसूस करना चाहता था. मैं ऐसा क्यू कर रहा था मुझे पता नही था.

पर हर एक धक्के के साथ मुझे एक अलग ही आनंद मिल रहा था.

रानी भी अब मेरे धक्को को महसूस करके अपने दिलो दिमाग़ मे ये चुदाई फिट कर रही थी.

मैं बड़े प्यार से रानी की चुदाई कर रहा था.

आज मुझे क्या हुआ था कुछ समझ नही रहा था.

मैं सुबह भगवान से दुआ कर रहा था कि आज का दिन जल्दी ना निकल जाए और अब मैं हर एक सेकेंड को जीना चाह रहा था.

सुबह मैं सोच रहा था कि रानी आज मुझसे दूर रहे और अब रानी को चोदने का मन नही हो रहा.

एक पल के लिए लगा कि रानी को अच्छा सबक सिखाऊ. और एक पल के लिए लगा कि रानी को बस प्यार करता जाउ.

ना रानी को जल्दी थी और ना मुझे जल्दी थी.

ना रानी मुझसे अलग होना चाहती थी. और ना मैं रानी को अलग होने देना चाहता था

आज मेरे साथ सब अजीब हो रहा था.

मैं लंड को रानी की चूत की गहराई तक अंदर डाल कर धक्के मारता गया. फिर भी उसका दर्द कम नही हुआ.पर मुझे लग रहा था कि उसका प्यार बढ़ रहा है.

चुदाई के बाद मैं रानी को क्या कहूँगा ,उसका सामना कैसे करूँगा ,इसकी मुझे कोई फिकर नही थी.

बस मैं धक्के मार कर अपने जीवन को सफल कर रहा था.

मैं लंड को धीरे से पूरा बाहर निकाल लेता फिर अंदर कर लेता. ऐसा 20 25 करने के बाद रानी की चूत ने मेरे लंड के लिए जगह बना दी.और लंड आराम से अंदर जाने लगा.

चूत मे लंड के लिए जगह बनने से रानी का दर्द ख़तम हो गया. मैं धक्के लगाता रहा .

रानी भी अपनी गंद उपर करके मेरा साथ दे रही. रानी अब शीष्कारिया ले रही थी पर खुल कर नही ले रही थी. वो मुझसे शरमा रही थी.

बस बीच बीच मे आहह आहह कर रही थी.10 मिनट तक मैं ने दिमाग़ को चुदाई से अलग रख कर दिल को रानी की चुदाई फील करने दे रहा था.

मैं रानी की ऐसे ही चुदाई करता रहा.फिर से रानी ने पानी छोड़ दिया.

फिर मैं ने रानी के पैरो को थोड़ा ज़्यादा फैला दिया और धक्के मारने लगा.

मैं जितनी गति के साथ दूसरो के साथ धक्के मारता उस से कही गुना कम गति से मैं रानी की चूत मे धक्के मार रहा था.

मैं रानी को हर धक्के का मज़ा दे रहा था और ले भी रहा था. कमरे मे हमारे चुदाई का म्यूज़िक गूँज रहा था.

म्यूज़िक कब से बज रहा था ये ना रानी को पता था और ना मुझे पता था.

रानी ने ज़्यादा तर समय अपनी आँखो बंद रखी थी.पर रानी बीच बीच मे अपनी आँखो खोल कर मुझे धक्के मारते हुए देख कर फिर से अपनी आँखो बंद कर लेती.

रानी ने फिर एक बार पानी छोड़ दिया.इस लंबी चुदाई मे मुझे भी लग रहा था कि अब मेरा भी होने वाला है.

अब मुझे अपनी धक्के मारने की गति बढ़ानी थी.पर रानी को दर्द ना हो,इसके लिए दिल मुझे इसकी इजाज़त नही दे रहा था. अगर दिल की जगह दिमाग़ होता तो अब तक मैं ने अपनी गति बढ़ा दी होती और मेरा वीर्य रानी की चूत मे होता.

मैं बड़े प्यार के साथ आख़िरी झटके भी धीरे धीरे मार रहा था.

आख़िरी झटके वो भी धीरे धीरे मारने के लिए मुझे मेरे दिल ने बहुत मदद की.

मेरा धक्के की गति थोड़ी बढ़ गयी थी शायद उस से रानी ने पता लगा लिया होगा कि मेरा होने वाला .इस लिए वो अपनी गंद उठाकर मेरा साथ देने लगी.

फिर एक आखरी धक्के के साथ मेरा वीर्य निकल गया. मैं ने अपना वीर्य रानी की चूत मे डाल दिया.मेरा वीर्य चूत मे महसूस कर के रानी ने आँखो खोल दी और मैं रानी के उपर गिर गया.
 


Update 229

Rani ki nabhi ke sath khelne ke bad main niche aa gaya.

Main Rani ke dono pairo ke bich me aa gaya.main ne salwar ke upar se rani ki choot pe kiss kiya.

Choot par kiss karte hue mere hontho ko salwar ko gila kar diya.

Rani ke sath kiss aur fir boobs choosna jis se rani ne itna pani choda tha ki panty aur salwar dono gile ho gaye the.

Main rani ki pari ko dekhne ke liye mara ja raha tha. Jitna der mujhe rani ki pari dekhne me lag raha tha utni tez meri dhadakne chal rahi thi.

main ne salwar ke nade ko munh me pakad liya aur khich kar khol diya.

Avi-rani ek bar apni ankho kholo na

Chudai ka khel shuru ho jane ke bad main ne pahali bar rani se bat ki

rani ne na me gardan ghuma di .

Avi-mere liye apni ankho kholo na

Meri bat sunkar rani ne apni ankho khol di .aur meri taraf dekhne lagi .

mere munh me uske salwar ka nada dekh kar rani ne sharama kar fir se apni ankho band kar li.

Fir main ne salwar ko pakad kar niche karne laga.

rani ne apni gand ko upar kiya jis se salwar nikal gayi.

Main jaisa kar raha tha usme rani mera pura sath de rahi thi.

Rani ab mere samane sirf panty me thi. rani ki pink panty puri gili ho gayi thi.

Main rani ki panty ki mahak ko sungane laga. Madhosh kar dene vali mahak thi.

Rani to ankho band karke main kya kya karne vala hu uska intazar kar rahi thi.

Main ne rani ki panty jo gili ho gayi thi usko jibh se chat liya.

Meri jibh panty ke upar se choot ko chune se rani ke munh se shishkari nikal gayi.

Fir main ne panty ke andar apna hath daal diya. Andar pura chipchipa tha.

Main ne hath bahar nikaal liya aur choot ke dashran karne ke liye taiyyar ho gaya.

main ne rani ki gili panty ko pakad kar rani ke badan se alag karne laga to rani ne panty pakad li.

Is bar rani ne mujhe pahali bar kuch karne se roka tha.

main ne ek bar rani ki taraf dekha wo na me gardan hila rahi thi.

main ne uske hath ke upar kiss kiya jis se rani ne apni panty pakadi thi. mere uske hath par kiss karte hi rani ne panty chod di.

aur fir panty choot ke upar se alag ho gayi .

rani ka badan ab khul kar apni aazadi ka maza le raha tha.

Mujhe bas kuch pal ke liye rani ki choot dikhi.

Kyu ki rani ne apne pairo ko mod liya jis se rani ki choot dikhana band ho gayi thi.

main ne rani ke pairo pe kiss karna shuru kiya.kiss karte hue dire dire upar jane laga .

jab main ne rani ki jango par kiss karna shuru kiya tab dire dire rani apne pair ko alag kar rahi thi.

jaise main upar jata vaise uske pair ek dusare se alag ho rahe the.

Ab rani ki choot mere samane thi. Khidaki ke ched se aa rahi suraj ki roshani shide rani ki choot par gir rahi thi.

Rani ki choot puri gili ho chuki thi.aur suraj ki roshani jab rani ki gili choot par gir rahi thi to rani ki choot chamak rahi thi.

Wo chamak mere ankho ko apni taraf attract kar rahi thi.

BHAGVAN bhi mujhe suraj ki roshani se rasta dikha rahe the.

Suraj ki chamak me wo bhi rani ki choot dekhhna bas kya kahu ....main to ankho se rani ki chudai karne laga.

Rani ki choot gili thi jis se Mujhe pahale rani ki choot ko saf karna tha .

main ne apni jibh se rani ki choot ko saf karna shuru kiya.

Jab bhi main rani ke kisi part ko apne jibh se touch karta tab mujhe kya ho jata ,main apne hosh kho baithata. Mujhe aisa lagata ki is duniya me rani aur main,sirf ham dono hi ho ,jo sirf pyar karna jante hai.

Main apni jibh se rani ki choot chatne laga. Rani bas ek kaam kar rahi thi wo tha shishkariya lena .

Ek patni kaise suhagraat ke din apne pati ke sath chudai karte hue sharama kar khul kar shishkariya nahi leti usi tarah rani bhi mujhse sharama kar shishkariyo par control rak rahi thi.

Par jo bhi tha usme mujhe ek alag hi aanand mil raha tha.

Rani ki bina balo vali gulabhi choot ab main ne chat kar saf kar di thi.

Ab to suraj ki roshani rani ki choot me jana chah rahi thi jo mujhe pasand nahi aa raha tha.

Main ne khidaki ke upar rani ka payzama daal kar suraj ki roshani ko rani ki choot me jane se rok diya.

Fir main ne apni jibh ko rani ki choot me daal kar rani ko bhi aanand dene laga. Rani bhi apna pani chod kar meri pyass bhuza rahi thi.

Main ne hatho se rani ki choot ke honth khol diye. Fir main aaram se apni jibh rani ki choot me daal kar chatne laga .khelane laga .

Rani ki choot me main jitni jor se apni jibh andar daalata utni jor se rani ki choot jibh ko bahar fek deti .

Jaise kah rahi thi ki mujhe jibh nahi tumara lund chahiye.

Dena hai to lund do jibh se mera kya hoga. Jibh se to meri aag bhadak jayegi.

Par main bhi kaha hanr maane vala tha ,main ne bhi uski choot me jibh daalna jari rakha. Uski tight choot meri jibh ko bahar dakel deti

Is khel me mujhe apna hi aanand mil aa raha tha. Sath me rani ko bhi.

Rani to apni shishkariya apni bhuk par control rake hue thi.

Rani ki choot ke sath apni jibh se khelne se rani ki choot ne pani chod diya .main ne wo sara amrit pi liya. Aur jibh se choot ko saf kar diya.

Rani itni garam ho chuki thi ki usko kuch bhi karna bardast nahi ho raha tha .aur wo apna pani chod deti

Uski amrit ko pine ke bad main ne uski choot ko ek bar chat kar saf kiya.

Fir Main ut kar bottle se pani pine laga. Main ne time dekha ,2 ghante se main rani ke sath sirf upar upar se pyar kar raha tha.

Matlab mujhe rani ke sath pyar karte hue samay ka bhi dhyaan nahi raha.

Fir jyaadaa der karna thik nahi hota. Main ne apne kapde nikaal diye.aur rani ko ankho kholne ke liye kaha .

usne ankho khol di.main ne lund ko rani ke hatho me diya. Rani ne ek bar meri taraf dekha aur fir lund ki taraf .fir lund pe ek kiss kar ke lund ko chod diya aur na me gardan hill di.

Rani ne lund par kiss kiya jis se mujhe uspe pyar aaya. Aur uske na karne ka tarika bhi pasand aa gaya. Usne lund par kiss karke na kaha.

Matlab wo lund ko munh me lena nahi chahati thi. Main bhi use jyaadaa force nahi kiya.

Usne lund nahi choosa matlab ab bas ek kaam baki tha. wo tha ...

Fir main ne rani ki gand ke niche pillow rak diya. Fir main rani ke tango ke bich me aa gaya.

main ne lund pe thuk laga di. Aur lund ko choot par rak diya.

Mera lund rani ki choot ko pyar karna chahata tha. Usko feel karna chahata tha.

main ne lund vaise hi rahane diya .

Lund aur choot ka milan hone vala tha. Us milan me dard hone vala tha par mera lund choot ko dard dene se pahale uska pyar kar raha tha.

Dard se pahale pyar...

Mujhe kuch na karte hue dekh kar rani ne ankho khol kar mujhe aage badene ko kaha.

Main ne fir se lund par thuk lagaya aur lund ko choot par rakha .aur rani ke upar aa gaya.

Main ne pahale rani ke hontho par ek kiss kiya aur fir Main ne ek zataka mara par kuch nahi hua, mera lund fisal gaya.

Main ne fir se lund ko choot par rakha aur ek jor ka zataka mara ki lund to topa rani ki choot me chala gaya .

rani ke munh se chikh nikal gayi . Rani ki dard bhari chikh sunkar mujhe aisa lag raha tha ki dard rani ko nahi balki mujhe ho raha ho.

 
Dard Rani ko ho raha tha aur pani mere ankhoion me aa raha tha.

Rani ne jab mere ankho me pani dekh to usne chikhna band kiya. Aur dard ko bardast karna shuru kiya.

Rani ne apne hontho ko daba kar apni chikh ko rokne lagi. Par rani ko dard ho raha tha.

Rani ka dard kam karne ke liye Main ne apne hontho rani ke hontho par rak kar choosne laga. Jis se rani dard ko bhul kar kiss par focus kar sake taki dard kam hojaye.

Abhi to Sirf topa andar gaya tha. Pura lund andar jana baki tha. Par mujhe kya hua tha ki main rani ko dard hota hua dekh nahi pa raha tha.par rani ko pyar bhi karna tha.

Upar se mera lund rani ki choot me jane ke liye betab ho raha tha.

Thodi der me Rani shaant ho gayi fir bhi main Hatho se boobs ko dabane laga. Thodi der me rani ko puri tarah se achha lagne laga .

Main ne rani ko ishare me puch ki andar daalu usne han me gardan hila di.

Fir Main ne seal thodne vala zataka mara,wo zataka jis koi ladki apni zindagi bhar bhul nahi sakati.zataka mar kar lund rani ki seal thod kar 5 inch tak andar chala gaya.

Rani ne bahut koshosh ki chikh na nikal par ye aisa zataka tha jis ke marte hi har ladki ki chikh nikal jati hai.

Rani ki bhi chikh nikal gayi.par mere kiss karne se uski dabhi huyi chikh mere munh me dab gayi.

Rani aur mere ankho se pani nikalne laga .

Usko saase lene ki jyaadaa jarurat thi jis se main ne uske hontho ko apne hontho se aazad kiya. Par main boobs dabata raha.

Rani ne ke munh se daaaarrrrrddddd word nikala. Par rani ne control karte hue us word ko bich me rak diya.

Mujhe pata tha ki rani ko dard ho raha hai.fir bhi Rani ne mujhe lund bahar nikaalne ko nahi kaha aur andar daalne ko bhi nahi kaha. Wo bas mere niche leti huyi apne dard ko mujh par jahir nahi hone dena chahati thi.

rani ko mujhse itna pyar karti thi ki usne ankho khol kar mujhe ankho se ishara karke thodi der rukne ko kaha. Use laga ki agar main bhi us se pyar karta hu to main uska ishara samajh jaunga .aur hua bhi aisa hi main samajh gaya ki wo kya kahana chahati hai.

Main aise hi ruka raha. mujhe aise dekh kar uski ankho me ek chamak aa gayi.

Main ne apne lund ko aise hi rakha .aur fir se rani ke hontho ko choosne laga. Boobs ko dabane laga.15 minat ke bad rani ko achha lagne laga.

Uska dard kam ho gaya. Main ne rani ke hontho ko chod diya .aur boobs ko bhi ...

Rani ke chehare par ab dard nahi tha bas pyar hi pyar dikh raha tha.

Main ne pillow ki taraf dekha us pe khoon laga hua tha.main ne lund ko dire se bahar nikal kar andar daalne laga .dire dire lund ko andar bahar karne laga. Abhi tak 5 inch lund andar tha.main aram se 2 minat tak lund ko hilata raha.

Rani bas bina palake jhukaaye mujhe dekh rahi thi. Kya pata kya dekh rahi thi.

Main jo pyar se lund andar bahar kar raha tha .main use jyaadaa dard nahi hone de raha tha. Shayad rani yahi dekh rahi thi.

Main lund ko bade pyar se rani ki choot me daal raha tha. Shayad rani Mera yahi pyar dekh rahi thi.

Fir dire dire gati badane laga .ab rani ka kuch dard kam hua tha. Par main ne abhi tak pura lund andar nahi daala tha.main intazar karne laga ki kab rani ki choot pani chodegi.

5 minat tak aise hi chudai karne se rani ki choot ne pani chod diya.

Rani ki choot ke pani ke sath khoon bhi bahar aa gaya tha. Choot ab gili ho gayi thi. Lund ke liye jaga ban rahi thi.

Fir Main ne aakari zataka mara aur pura lund andar chala gaya. Rani ki dabhi huyi dard bhari chikh nikal gayi.

main rani ka bachha hua dard boobs daba kar kam karne laga.

Main ne rani se kaha Bas ho gaya .ab dard nahi hoga... Jitna dard hona to ho gaya ...pura lund andar chala gaya hai..,bas thoda der ruko sab thik ho jayega

Rani ne kaha.,Avi mujhe dard nahi ho raha hai.

Mujhe pata tha ki rani jhuth bol rahi thi.

Mere lund se dard na ho ye ho hi nahi sakata.

Rani ki kuwari choot me dard na ho ye ho hi nahi sakata.

Lund andar jane ke bad chikh nikali aur dard na ho ye ho hi nahi sakata.

Rani ne mere liye kaha ki use dard nahi ho raha.

Rani ki bat sun ne ke bad main ne lund ko bahar nikaal liya. Aur lund par jo khoon tha wo ye bata raha tha ki rani ko kitna dard ho raha hai.

Main samajh gaya ki wo mere liye ,apne pyar ke liye dard bardast kar rahi hai.

Main ne lund ko dire se fir se andar daal diya aur rani ke boobs dabate hue lund ko dire dire aage piche karna shuru kiya.

lund ko hilane se rani ko dard ho raha tha .usne apne hath mere pit pe rak diye. Jaise usko dard hota wo apne nakhun mere pit me gadh deti.aur kahati ki mujhe dard nahi ho raha

Ek taraf dard ke vajah se nakun se mere pit ko kharoch rahi thi aur dusari taraf kah rahi thi ki mujhe dard nahi ho raha.

Rani ke sath chudai karte hue mujhe koi jaldi nahi thi.

Main har ek dhakke ko mahsus karna chahata tha. Main aisa kyu kar raha tha mujhe pata nahi tha.

Par har ek dhakke ke sath mujhe ek alag hi aanand mil raha tha.

Rani bhi ab mere dhakko ko mahsus karke apne dilo dimag me ye chudai fit kar rahi thi.

Main bade pyar se rani ki chudai kar raha tha.

Aaj mujhe kya hua tha kuch samajh nahi raha tha.

main subah BHAGVAN se duva kar raha tha ki aaj ka din jakdi nikal jaye aur ab main har ek second ko jina chah raha tha.

Subah main soch raha tha ki rani aaj mujhse dur rahe aur ab rani ko chodne ka man nahi ho raha.

Ek pal ke liye laga ki rani ko achha sabak sikau. Aur ek pal ke liye laga ki rani ko bas pyar karta jau.

Na rani ko jaldi thi aur na mujhe jaldi thi.

Na rani mujhse alag hona chahati thi. Aur na main rani ko alag hone dena chahata tha

Aaj mere sath sab ajib ho raha tha.

Main lund ko rani ki choot ki gaharai tak andar daal kar dhakke marta gaya. Fir bhi uska dard kam nahi hua.par mujhe lag raha tha ki uska pyar badh raha hai.

Chudai ke bad main rani ko kya kahunga ,uska samana kaise karunga ,iski mujhe koi fikar nahi thi.

Bas main dhakke mar kar apne jivan ko safal kar raha tha.

Main lund ko dire se pura bahar nikaal leta fir andar kar leta. Aisa 20 25 karne ke bad rani ki choot ne mere lund ke liye jaga bana di.aur lund aaram se andar jane laga.

Choot me lund ke liye jaga bane se rani ka dard khatam ho gaya. main dhakke lagata raha .

rani bhi apni gand upar karke mera sath de rahi. Rani ab shishkariya le rahi thi par khul kar nahi le rahi thi. Wo mujhse sharama rahi thi.

Bas bich bich me aahh aahh kar rahi thi.10 minat tak main ne dimag ko chudai se alag rak kar dil ko rani ki chudai feel karne de raha tha.

Main rani ki aise hi chudai karta raha.fir se rani ne pani chod diya.

Fir main ne rani ke pair ko thoda jyaadaa faila diya aur dhakke marne laga.

Main jitani gati ke sath dusaro ke sath dhakke marta us se kahi guna kam gati se main rani ki choot me dhakke mar raha tha.

Main rani ko har dhakke ka maza de raha tha aur le bhi raha tha. Kamare me hamare chudai ka music gunj raha tha.

Music kab se baj raha tha ye na rani ko pata tha aur na mujhe pata tha.

Rani ne jyaadaa tar samay apni ankho band raki thi.par Rani bich bich me apni ankho khol kar mujhe dhakke marte hue dekh kar fir se apni ankho band kar leti.

Rani ne fir ek bar pani chod diya.is lambi chudai me mujhe bhi lag raha tha ki ab mera bhi hone vala hai.

Ab mujhe apni dhakke marne ki gati badani thi.par rani ko dard na ho,iske liye dil mujhe iski ijajat nahi de raha tha. Agar dil ki jaga dimag hota to ab tak main ne apni gati bada di hoti aur mera veery rani ki choot me hota.

Main bade pyar ke sath aakhari zatake bhi dire dire mar raha tha.

Aakari zatake wo bhi dire dire marne ke liye mujhe apne dil ne bahut madad ki.

Mera dhakke ki gati thodi badh gayi thi shayad us se rani ne pata laga liya hoga ki mera hone vala .is liye wo apni gand utakar mera sath dene lagi.

Fir ek aakhari dhakke ke sath mera veery nikal gaya. Main ne apna veery rani ki choot me daal diya.mera veery choot me mahsus kar ke rani ne ankho khol di aur main rani ke upar gir gaya.

 


अपडेट 230

थोड़ी देर मैं रानी के उपर ही रहा. फिर रानी नॉर्मल हो गयी.

अब रानी को अपने बदन मे दर्द महसूस हो रहा था. क्यू कि मैं अभी तक रानी के उपर था

मुझे इस बात का अहसास हुआ .मैं रानी के उपर से अलग हो गया. मैं ने अपने लंड को रानी की चूत से बाहर निकाल लिया.

मेरा लंड तो रानी की चूत से बाहर आने को तैय्यार नही था. उस हमेशा के लिए एक घर मिल गया हो और वो वही रहना चाहता था.दिल पर पत्थर रख कर लंड को बाहर निकाल लिया.

मेरे लंड पे खून लगा हुआ था. रानी के चूत पर भी खून लगा हुआ था.

मैं बेड से नीचे आकर खड़ा हो गया. मुझे पता था कि अब रानी को चलने मे दर्द हो गा.

इस लिए मैं ने रानी को अपने गोद मे उठा लिया. रानी को गोद मे लेते ही रानी ने आँखो खोल ली.

मुझे बड़े प्यार से देखने लगी.

मैं ने रानी को उठ कर बाथरूम मे ले गया. बाथरूम में रानी को एक जगह पर बैठा दिया.

रानी मेरी तरफ देख रही थी कि मैं क्या करने वाला हू.

मैं ने गरम पानी लिया और गरम पानी से चूत को साफ करने लगा. फिर टवल को गरम पानी मे डाल कर चूत की मालिश करने लगा. रानी को अब अच्छा लग रहा था.

ये सब करते हुए रानी मुझे चुप चाप बैठ कर देख रही थी.

मैं ने उसके दर्द को समझ कर उसकी चूत को साफ किया. ये रानी देखती गयी. मेरे ऐसा करने से रानी के दिल मे मेरी लिए प्यार और बढ़ गया.

फिर मैं ने रानी को टाय्लेट सीट पर बैठा कर बाथरूम से बाहर आ गया. थोड़ी देर बाद रानी भी बाथरूम से बाहर आ गयी.

रानी बेड पर बैठ गयी. मैं ने रानी को 2 मेडिसिन दी. रानी ने मुझे कुछ नही पूछा कि ये मेडिसिन किस लिए है. फिर भी मैं ने बता दिया कि एक प्रेग्रनॅसी रोकने के लिए और दूसरी पेन किल्लर है.

उसकी इतनी फिकर करने की वजह से रानी का दिल मेरे प्यार से भर गया.

मेडिसिन खाने के बाद मैं रानी को बेड पर लिटा दिया.मैं भी रानी के साथ बेड पर लेट गया.

रानी अपने सर को मेरी चेस्ट पर रख कर सो गयी.

शायद दुबारा ऐसे सोने का ना मिले इस लिए रानी जल्दी से सपनो की दुनिया मे चली गयी.

पर मेरी आँखो से नींद बहुत दूर जा चुकी थी. उसकी वजह रानी थी.

मैं छत की तरफ देख रहा था. फन घूम रहा था और मैं उसे देख रहा था.

मैं माला और रानी के बारे मे सोचने लगा. एक तरफ माला थी जो मुझे छोड़ कर चली गयी और दूसरी तरफ रानी थी जो मेरे कहने पर मुझे प्यार करने दिया. मेरे साथ ज़िंदगी भर रहना चाहती है.

मुझे माला के साथ वो प्यार नही मिला जो मुझे रानी के साथ मिला.

क्या सच मे मैं माला से प्यार करता था.मैं ने माला की मदद की और माला ने मुझे खाना देकर मेरा अहसान वापस किया.

मुझे सिर्फ़ वो अच्छी लगी थी प्यार नही हुआ था.अगर प्यार होता तो मैं उसे ऐसे जाने नही देता. अगर माला भी मुझे सच्चा प्यार करती तो मेरे साथ ऐसा नही करती.

क्या मैं रानी की वजह से ऐसा सोच रहा हू .अगर माला ने ऐसा किया फिर भी मैं माला को हर पल याद करता हू.

पर क्या माला ने कभी मुझे याद किया. यहाँ तक की वो रिज़ल्ट लेने नही आई .अगर आती और मैं मिल जाता इस लिए वो नही आई.

भले ही माला मुझसे प्यार करती थी वो सिर्फ़ उसकी मदद करने की वजह से अगर मैं माला की मदद नही करता तो क्या माला कभी मेरी तरफ देखती भी नही.और माला ने जो छोटी चाची के साथ किया, उसके बाद तो मुझे माला से सिर्फ़ नफ़रत करनी चाहिए.

माला ने सिर्फ़ अपने और अपनी फॅमिली के बारे मे सोचा. उसे आराम की ज़िंदगी चाहिए थी. माला ने मुझे कहा कि मेरी चाची अभी मेरी शादी नही करेगी पर उसने ऐसा नही कहा कि एक बार चाची को पूछ लो.

मतलब वो पहले ही फ़ैसला कर चुकी थी. और रही बात चाची की तो वो मेरी बात मान जाती. चाची ने मेरी खुशी के लिए क्या कुछ नही किया ,चाची माला के लिए मना नही करती.पर माला ने क्या किया छोटी चाची को गालियाँ दी.

माला को मैं कभी पसंद नही था बस अपनी प्यास बुझाने के लिए मेरे साथ चुदाई की. रिया से जलन होने पर माला ने मेरे साथ चुदाई की. उसने माला का प्यार नही था उसमे सिर्फ़ एक जलन और प्यास थी जो मोना ने माला के अंदर जगाई थी.और प्यास भुज़ाने के बाद मैं उसे दुबारा परेशान ना करू इस लिए वो छोटी चाची को बुरा भला कह कर चली गयी.

वही रानी ने सिर्फ़ मुझे प्यार किया. इतना प्यार कि वो मेरे लिए इतना कुछ कर गयी. दर्द होने पर भी मेरी लिए उसने कुछ नही कहा. रानी को सिर्फ़ प्यार चाहिए मेरा प्यार ,फिर वो एक दिन का ही क्यू ना हो.

मुझे लगता है कि रानी से अच्छा जीवन साथी मुझे नही मिलेगा. रानी ने मेरे लिए इतना किया और मैं ने क्या किया रानी के साथ अपनी प्यास बुझाई . नही मैं रानी को ज़िंदगी भर प्यार करूँगा. और रानी मेरा पूरा साथ देगी.

मुझे छोटी चाची को बता देना चाहिए कि मैं क्या करने वाला हू. पिछली बार छोटी चाची के कहने के बाद भी मैं ने माला को प्यार किया पर इस बार ऐसा नही होगा. हाँ यही सही होगा कि छोटी चाची को बता दूं.

मैं ने रानी के सर को अपनी चेस्ट से उठा कर बेड पर रख दिया. फिर उठ कर हॉल मे आकर छोटी चाची को कॉल किया.

मैं ने छोटी चाची को सब कुछ बता दिया .छोटी चाची मेरे लिए खुश थी और छोटी चाची ने माला के बारे मे वही कहा जो थोड़ी देर पहले मैं ने सोचा था.

सी चाची-अवी माला तुम्हारे लिए नही बनी थी. मैं तो तुम्हे तभी बता देती पर मुझे लगा कि तुम धीरे धीरे उसे भूल जाओगे यही तुम्हारे लिए सही है.माला ने कभी तुम्हारे बारे मे सोचा नही .उसने तो अपना फ़ैसला पहले कर लिया था. तुम रानी का हाथ कभी मत छोड़ना. मेरा अनुभव यही कहता कि रानी तुम्हे इतना प्यार देगी कि कोई और नही दे पाएगी. और हाँ रानी को सब बता देना मेडम से लेकर रानी तक का सफ़र पर हमारे और बुआ और स्वेता सीतल के बारे मे अभी मत बताना.बाकी सब बता देना क्यू कि प्यार की शुरुआत सच से हो यही ठीक होता है.(अच्छा हुआ अवी माला को भूल कर रानी से प्यार करने लगा. मैं तो इस बात से डर रही थी कि जब अवी को ये पता चलेगा कि मैं ने माला के बारे मे झूठ कहा है.मैं माला को बस स्टॉप पर नही मिली थी. वो सब झूठ था.ये सब जान कर अवी मुझे कभी माफ़ नही कर पाएगा)

अवी-जी चाची.

फिर मैं ने कॉल कट कर दिया.और मैं बेडरूम मे आ गया .

2 घंटे हो चुके थे रानी को सो कर .अब रानी ने भी अपनी आँखो खोल ली थी.

अवी-रानी तुम फ्रेश हो जाओ तब तक मैं बाहर जाकर आता हू.जब तक मैं वापस ना आऊ तब तक तुम यही रहना.

रानी-तुम कहाँ जा रहे हो

अवी-एक काम अभी बाकी है उसे पूरा करके आता हू

रानी-जल्दी आना

मैं कपड़े पहन कर बाहर चला गया.

मैं बाहर जाकर 1 घंटे मे वापस आ गया मेरे आने तक रानी फ्रेश होकर घर को साफ करके मेरा इंतज़ार कर रही थी.

 
मैं वापस आ गया. रानी सोफे पर बैठ कर मेरा इंतज़ार कर रही थी.

रानी-कहाँ गये थे .

अवी-बताया था ना एक काम था और तुम तो मेरी बीवी की तरह पूछ रही हो

रानी-बीवी का नाम सुनकर शरमा गयी

अवी-रानी तुम मुझे कितना प्यार करती हो

रानी-अपनी जान से ज़्यादा

अवी-और अगर मैं कहु की मेरी ज़िंदगी मे कई लड़किया आई और मैं ने उनके साथ सेक्स किया फिर भी

रानी-हाँ फिर भी मैं तुम्हे प्यार करती रहूंगी.

अवी-पुछोगि नही कि कौन और कितनी लड़की आई थी.

रानी-मुझे तुमसे पूछने की ज़रूरत नही.

अवी-ऐसा क्यू?

रानी-मुझे पता है तुम खुद मुझे बता दोगे .मैं तुम्हे तुमसे ज़्यादा पहचानने लगी हू.

अवी-सही कहा तुमने मैं तो सब बताना चाहता हू.फिर मैं ने एक एक कर के रानी को सब बता दिया

रानी-पर तुमने मुझे ये सब बताया क्यूँ?

अवी-बताता हू पर उससे पहले मेरा एक काम करो

रानी-कौनसा काम

अवी-अपनी आँखो बंद करो और जब तक मैं ना कहूँ खोलना मत

रानी-पर किस लिए

अवी-तुम करो तो

रानी-ये लो कर ली

मैं रानी के पास गया और पॉकेट मे से नेकलेस निकाल कर रानी के गले मे पहना दिया.

फिर रानी के आँखो पर किस किया.रानी ने अपनी आँखो खोल ली. रानी नेकलेस देख कर शॉक्ड हो गयी

रानी-ये किस लिए दिया

अवी-क्यू मैं तुम्हे कुछ दे नही सकता

रानी-पर ये तो...

अवी-तुम्हे पसंद आया

रानी-हाँ,तुम्हारी दी हुई हर चीज़ मुझे जान से ज़्यादा पसंद है.

अवी-फिर तुम इसे कभी मत निकाल ना

रानी-मैं इस अपने से कभी अलग नही करूगी.

फिर मैं ने रानी को गले लगा लिया और रानी के कान मे कहा

अवी-इसे कभी मत निकालना

रानी-नही निकालूंगी

अवी-इसे सिर्फ़ मैं निकालूँगा. वो भी इसके जगह मंगलसूत्र पहनने के लिए. क्या मेरे हाथो से मंगलसूत्र पहनना पसंद करोगी.क्या मुझसे शादी करोगी.क्या मेरी बीवी बन ना पसंद करोगी.

मेरी बात सुनकर रानी की आँखो मे पानी आ गया.रानी ने मेरी तरफ देखा और मेरे चेहरे पे किस करने लगी.

रानी-क्या तुम सच बोल रहे हो....हाँ... हाँ मैं हमेशा के लिए तुम्हारी बन कर रहना चाहती हू.

फिर हमने किस किया .

अवी-जब तक हम एक नही होते तब तक हम एक फ्रेंड के तरह रहेंगे

रानी-मुझे तुम मिल गये इस से ज़्यादा मुझे कुछ नही चाहिए,मुझे सब मंज़ूर है .तुम ने मुझे वो खुशी दी है .मैं ने उसके बारे मे सोचना बंद कर दिया था.

अवी-और अगर तुमने मुझे किसी और लड़की के साथ देखा तो...

रानी-मैं शादी तक अपनी आँखो बंद करके रहूंगी पर शादी के बाद देखा तो मैं अपने आप को कुछ कर लूँगी.

अवी-मैं ने जो तुम्हे बताया है वो किसी को बताना मत .... और हमारे प्यार के बारे मे कोमल तो बिल्कुल भी पता नही चलना चाहिए.

रानी-क्यू?

अवी-ऐसे ही. और हाँ मैं ने अपनी चाची को तुम्हारे बारे मे बता दी है. वो मान गयी हमारे लिए.इसे ज़्यादा तुम्हे किसी और को नही बताना है.

रानी-मैं किसी को नही बताउन्गि .और कोमल को भी नही.

अवी-और हम आज जैसा प्यार सुहागरात को करेंगे

रानी-ठीक है पर हर साल मेरे बर्तडे पे मुझे ऐसा प्यार चाहिए

अवी-वो तो मिलेगा ही

रानी-आइ लव यू

अवी-आइ लव यू टू

रानी-अब मुझे जाना होगा देर हो गयी

अवी-हाँ मुझे भी कोमल के पास जाना है.

फिर एक किस करने के बाद रानी को उसके घर छोड़ कर मैं कॉलेज चला गया.

 
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