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Guest
मोना रोने लगी और मुझे लंड बाहर निकालने को कहने लगी.
मैं ने मोना को धमकी दी कि अगर तुम ने चिल्लाना बंद नही किया तो मैं पूरा लंड अंदर डाल दूँगा.
पूरा लंड अंदर डालने के नाम से मोना डर गयी और चीखना बंद किया पर रोना अभी तक चालू था.
मैं ने उस्दिन की तरह उसकी पैंटी उठा कर उसके मूह मे डाल दी.
फिर मैं ने एक और जोरदार झटका मारा .और पूरा लंड अंदर डाल दिया .मोना की हालत बहोत बुरी हो गयी .होती भी क्यू ना मेरा लंड था कि ऐसा जो चूत और गंद से खून और आँखो से आसू निकाल देता.
मोना रोते हुए मुझे लंड को बाहर निकाल ने को कह रही थी. पर मैं कहाँ मान ने वाला था. मैं ने थोड़ी देर लंड को गंद के अंदर वैसे ही रहने दिया और बोला ''देखो मोना अब तो पूरा का पूरा लंड अंदर चला गया है अब दर्द नही होगा ."तुम्हे तो पता है .बस थोड़ी देर दर्द को बर्दास्त कर लो .अब दर्द दिया है थोड़ी देर बाद मज़े ही मज़े दूँगा.
इतना कहने के बाद मैं ने अपना एक हाथ मोना की कमर से निकाला और उसके बूब्स पर ले गया और उस दिन की तरह ज़ोर से दबाने लगा .
मोना अब समझ गयी थी कि जो होना था वो हो गया .जितना दर्द होना था वो हो गया अब सिर्फ़ मज़ा मिलेगा.
वैसे मोना इस खेल मे पुरानी खिलाड़ी थी ,जिससे मुझे मोना को नॉर्मल करने मे ज़्यादा समय नही लगा.
थोड़ी देर रुकने से और बूब्स दबाने से मोना को कुछ हद तक दर्द से राहत मिल गयी.
थोड़ी देर मे मोना धक्के खाने के लिए तैयार हो गयी.
मैं धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा. लंड के हिलने से मोना को फिर से दर्द होने लगा.
मोना का बचा हुआ दर्द कम करने के लिए मैं ने अपना दूसरा हाथ भी उसकी कमर से निकाला और मोना की चूत के पास ले गया. और चूत मे उंगली करने लगा कुछ देर ऐसा ही करते रहने से मोना का दर्द कम हो गया .
एक हाथ बूब्स पर एक हाथ चूत पर और लंड गंद मे ,मोना इसका मज़ा लेने लगी.
मैं ने भी अब धीरे धीरे धक्के लगाना सुरू कर दिए.पहले तो गंद मे लंड बुरी तरह से फ़सा हुआ था. पर जैसे जैसे लंड अंदर बाहर हो रहा था जैसे जैसे समय बीत रहा था वैसे ही लंड आराम से अंदर बाहर होने लगा.
मोना तो दर्द मे भी मज़ा लेने वाली लड़की थी. दर्द चूत मे हो या गंद मे उसे बस एक बात पता थी वो थी मज़ा लेना. दर्द तो बस पल भर का होता है और मज़ा जिंदगी भर मिलता है.
मोना को मज़ा लेते हुए देख कर मैं ने धीरे धीरे धक्को की गति बढ़ा दी .अब मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा .मोना भी मज़े लेते हुए मेरा साथ देने लगी.
मैं धक्का मार कर मोना को आगे धकेल देता ,मोना अपनी गंद को लंड लेने के लिए पीछे कर देती.
हम दोनो ऐसे ही एक दूसरे को मज़ा देने लगे. हम एक ही पोज़िशन मे चुदाई करते रहे. ना मोना ने पोज़िशन चेंज करने को कहा और ना मैं ने पोज़िशन चेंज की.
गंद और लंड का खेल ऐसे ही चलता रहा.
मोना की गंद मारने मे चूत मारने से ज़्यादा मज़ा आ रहा था. मैं ने सोच लिया कि अब आगे जब भी मोना की चुदाई करूँगा तो मोना की गंद मे एक बार ज़रूर डालता जाउन्गा
धक्के लगते गये और हम दोनो मज़ा लेते गये.
30 मिनिट तक मोना की गंद मारने के बाद मैं ने मोना की गंद से लंड निकाल लिया. और हर बार की तरह आज भी कॉंडम निकाल कर लंड को मोना के मूह डाल दिया और मोना के मूह मे झड गया.
मोना ने भी अच्छे बच्चे की तरह सारा वीर्य पी लिया. .
मैं ने मोना की गंद की तरफ देखा तो उसपर खून लगा हुआ था. मैं ने मोना की पैंटी से गंद को साफ कर दिया. मोना ने मेरे हाथ से पैंटी ले ली, और खुद अपनी गंद पैंटी से साफ करने लगी.
पहले मोना को दर्द हुआ फिर मज़ा आया अब फिर से मोना को दर्द हो रहा था. होगा भी क्यू नही 2 झटके मे लंड जो अंदर डाला था.
मैं आज पेन किल्लर भी अपने साथ नही लाया था. मोना 20 मिनिट तक वैसे बैठी रही फिर थोड़ी कोशिस करके खड़ी हो गयी और अपने कपड़े पहन लिए.
मैं ने मोना को 500 रुपये दे दिए.मोना 500 रुपये देख कर खुश हो गयी. मोना ने पैसे ले लिए. मोना को मज़ा भी मिला और पैसे भी मिले.इस लिए मोना खुश हो गयी.
फिर हम धीरे धीरे चलते हुए खेतो मे आ गये. अभी सुबह के 11.30 हो रहे थे. मतलब सब मज़दूर काम पर आ गये थे.
मैं मोना के साथ चल रहा था. मोना की चाल बदल गयी थी. जैसे ही हम खेतो मे आ गये. हमारा सामना कमला काकी से हुआ. काकी ने हमे कुछ नही कहा पर वो मुझे घूर घूर के देख रही थी.शायद मेरे चेहरे को देख कर जान ना चाहती थी हम कहाँ गये थे ,क्या कर रहे थे.
जब कमला काकी की नज़र मोना की चाल पर पड़ी तो कमला काकी को कुछ शक हो गया. पर वो यहाँ खेतो मे मुझे पूछ नही सकती थी. कमला काकी को समझ मे आ गया कि मोना आज खेतो मे जल्दी क्यू आई थी. कमला काकी का अनुभव काकी को चीख चीख कर बता रहा था कि कुछ तो गड़बड़ है.
पहले मोना का खेतो मे जल्दी आना, फिर जब काकी खेत मे आई तो मोना का खेत मे नज़र ना आना. अब मेरे साथ बगीचे से आते हुए देखना, मोना की चाल मे बदलाव, ये सब सिर्फ़ एक बात की ओर इशारा कर रहा था. काकी सोच रही थी कि क्या वो जो सोच रही है वो सच है.
काकी का इस तरह मुझे घूर्ना मुझे भी यकीन हो रहा था कि कही काकी को हमारे बारे मे पता ना चले.
मैं जल्दी से काकी के सामने से दूर होना चाहता था. मैं मोना को काकी के पास छोड़ कर खेतो मे घूमने लगा.
मैं ने मोना को धमकी दी कि अगर तुम ने चिल्लाना बंद नही किया तो मैं पूरा लंड अंदर डाल दूँगा.
पूरा लंड अंदर डालने के नाम से मोना डर गयी और चीखना बंद किया पर रोना अभी तक चालू था.
मैं ने उस्दिन की तरह उसकी पैंटी उठा कर उसके मूह मे डाल दी.
फिर मैं ने एक और जोरदार झटका मारा .और पूरा लंड अंदर डाल दिया .मोना की हालत बहोत बुरी हो गयी .होती भी क्यू ना मेरा लंड था कि ऐसा जो चूत और गंद से खून और आँखो से आसू निकाल देता.
मोना रोते हुए मुझे लंड को बाहर निकाल ने को कह रही थी. पर मैं कहाँ मान ने वाला था. मैं ने थोड़ी देर लंड को गंद के अंदर वैसे ही रहने दिया और बोला ''देखो मोना अब तो पूरा का पूरा लंड अंदर चला गया है अब दर्द नही होगा ."तुम्हे तो पता है .बस थोड़ी देर दर्द को बर्दास्त कर लो .अब दर्द दिया है थोड़ी देर बाद मज़े ही मज़े दूँगा.
इतना कहने के बाद मैं ने अपना एक हाथ मोना की कमर से निकाला और उसके बूब्स पर ले गया और उस दिन की तरह ज़ोर से दबाने लगा .
मोना अब समझ गयी थी कि जो होना था वो हो गया .जितना दर्द होना था वो हो गया अब सिर्फ़ मज़ा मिलेगा.
वैसे मोना इस खेल मे पुरानी खिलाड़ी थी ,जिससे मुझे मोना को नॉर्मल करने मे ज़्यादा समय नही लगा.
थोड़ी देर रुकने से और बूब्स दबाने से मोना को कुछ हद तक दर्द से राहत मिल गयी.
थोड़ी देर मे मोना धक्के खाने के लिए तैयार हो गयी.
मैं धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा. लंड के हिलने से मोना को फिर से दर्द होने लगा.
मोना का बचा हुआ दर्द कम करने के लिए मैं ने अपना दूसरा हाथ भी उसकी कमर से निकाला और मोना की चूत के पास ले गया. और चूत मे उंगली करने लगा कुछ देर ऐसा ही करते रहने से मोना का दर्द कम हो गया .
एक हाथ बूब्स पर एक हाथ चूत पर और लंड गंद मे ,मोना इसका मज़ा लेने लगी.
मैं ने भी अब धीरे धीरे धक्के लगाना सुरू कर दिए.पहले तो गंद मे लंड बुरी तरह से फ़सा हुआ था. पर जैसे जैसे लंड अंदर बाहर हो रहा था जैसे जैसे समय बीत रहा था वैसे ही लंड आराम से अंदर बाहर होने लगा.
मोना तो दर्द मे भी मज़ा लेने वाली लड़की थी. दर्द चूत मे हो या गंद मे उसे बस एक बात पता थी वो थी मज़ा लेना. दर्द तो बस पल भर का होता है और मज़ा जिंदगी भर मिलता है.
मोना को मज़ा लेते हुए देख कर मैं ने धीरे धीरे धक्को की गति बढ़ा दी .अब मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा .मोना भी मज़े लेते हुए मेरा साथ देने लगी.
मैं धक्का मार कर मोना को आगे धकेल देता ,मोना अपनी गंद को लंड लेने के लिए पीछे कर देती.
हम दोनो ऐसे ही एक दूसरे को मज़ा देने लगे. हम एक ही पोज़िशन मे चुदाई करते रहे. ना मोना ने पोज़िशन चेंज करने को कहा और ना मैं ने पोज़िशन चेंज की.
गंद और लंड का खेल ऐसे ही चलता रहा.
मोना की गंद मारने मे चूत मारने से ज़्यादा मज़ा आ रहा था. मैं ने सोच लिया कि अब आगे जब भी मोना की चुदाई करूँगा तो मोना की गंद मे एक बार ज़रूर डालता जाउन्गा
धक्के लगते गये और हम दोनो मज़ा लेते गये.
30 मिनिट तक मोना की गंद मारने के बाद मैं ने मोना की गंद से लंड निकाल लिया. और हर बार की तरह आज भी कॉंडम निकाल कर लंड को मोना के मूह डाल दिया और मोना के मूह मे झड गया.
मोना ने भी अच्छे बच्चे की तरह सारा वीर्य पी लिया. .
मैं ने मोना की गंद की तरफ देखा तो उसपर खून लगा हुआ था. मैं ने मोना की पैंटी से गंद को साफ कर दिया. मोना ने मेरे हाथ से पैंटी ले ली, और खुद अपनी गंद पैंटी से साफ करने लगी.
पहले मोना को दर्द हुआ फिर मज़ा आया अब फिर से मोना को दर्द हो रहा था. होगा भी क्यू नही 2 झटके मे लंड जो अंदर डाला था.
मैं आज पेन किल्लर भी अपने साथ नही लाया था. मोना 20 मिनिट तक वैसे बैठी रही फिर थोड़ी कोशिस करके खड़ी हो गयी और अपने कपड़े पहन लिए.
मैं ने मोना को 500 रुपये दे दिए.मोना 500 रुपये देख कर खुश हो गयी. मोना ने पैसे ले लिए. मोना को मज़ा भी मिला और पैसे भी मिले.इस लिए मोना खुश हो गयी.
फिर हम धीरे धीरे चलते हुए खेतो मे आ गये. अभी सुबह के 11.30 हो रहे थे. मतलब सब मज़दूर काम पर आ गये थे.
मैं मोना के साथ चल रहा था. मोना की चाल बदल गयी थी. जैसे ही हम खेतो मे आ गये. हमारा सामना कमला काकी से हुआ. काकी ने हमे कुछ नही कहा पर वो मुझे घूर घूर के देख रही थी.शायद मेरे चेहरे को देख कर जान ना चाहती थी हम कहाँ गये थे ,क्या कर रहे थे.
जब कमला काकी की नज़र मोना की चाल पर पड़ी तो कमला काकी को कुछ शक हो गया. पर वो यहाँ खेतो मे मुझे पूछ नही सकती थी. कमला काकी को समझ मे आ गया कि मोना आज खेतो मे जल्दी क्यू आई थी. कमला काकी का अनुभव काकी को चीख चीख कर बता रहा था कि कुछ तो गड़बड़ है.
पहले मोना का खेतो मे जल्दी आना, फिर जब काकी खेत मे आई तो मोना का खेत मे नज़र ना आना. अब मेरे साथ बगीचे से आते हुए देखना, मोना की चाल मे बदलाव, ये सब सिर्फ़ एक बात की ओर इशारा कर रहा था. काकी सोच रही थी कि क्या वो जो सोच रही है वो सच है.
काकी का इस तरह मुझे घूर्ना मुझे भी यकीन हो रहा था कि कही काकी को हमारे बारे मे पता ना चले.
मैं जल्दी से काकी के सामने से दूर होना चाहता था. मैं मोना को काकी के पास छोड़ कर खेतो मे घूमने लगा.