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फिर एक प्यारी सी नींद पूरी करने के बाद खेतो मे चला गया.
अगर आज कमला काकी ने खुद मेरे सामने पेशाब की तो मैं समझूंगा कि काकी मेरे साथ चुदाई करना चाहती है. पर चाची ने कहा कि कुछ भी हो काकी मेरे सामने पेशाब करे या ना करे फिर भी मैं काकी के साथ चुदाई करू
मैं कमला काकी के पास आ गया. आज काकी ने खुद बगीचे मे जाने की बात की शायद कल मैं ने काकी को मेरे सामने पेशाब करने को कहा था जिससे काकी को लगा होगी मैं उनकी गंद देखना चाहता हू. मतलब मैं काकी के साथ चुदाई करना चाहता हू
काकी और मैं आम के बगीचे मे आ गये. आज मैं 5 6 आम वो भी जल्दी तोड़ लिए. और पेड़ से नीचे आ गया.
अवी-(मुझे काकी के दिमाग़ मे क्या चल रहा है ये देखना था.)चलो काकी चलते है.
कमला काकी-इतनी जल्दी
अवी-हाँ मुझे कुछ काम है
कमला काकी-रूको मैं पेशाब करती हू फिर चलते है
अवी-ठीक है
कमला काकी वही पर दूसरी तरफ मूह करके पेशाब करने लगी.
कमला काकी ने मुझे दूसरी तरफ देखने को नही कहा. मैं समझ गया कि कमला काकी मेरे साथ चुदाई करना चाहती है.
काकी से बात करके चुदाई करना ठीक नही होगा. पहले चुदाई करता हू फिर बात करूँगा.
मैं ने ज़िप खोल कर लंड बाहर निकाल लिया . लंड पर कॉंडम लगा लिया. कमला काकी अभी भी वहाँ बैठ कर पेशाब कर रही थी.
मैं ने ध्यान से सुना पेशाब की आवाज़ बंद हो गयी थी.काकी ने पेशाब कर ली थी फिर भी काकी वही बैठ कर मुझे अपनी गंद दिखा रही थी.
यही सही मोका था.मैं बिना आवाज़ किए काकी के पास चला गया.
मुझे लग रहा था कि मैं बिना आवाज़ किए जा रहा था पर ऐसा नही था. बगीचे मे नीचे सूखे पत्ते थे जिससे मेरे आने की आवाज़ तो काकी ने सुन ली थी फिर भी काकी खड़ी नही हुई.
मतलब काकी पूरी तैयारी के साथ आज बगीचे मे आई थी.
मैं ने पीछे से काकी के कंधो को पकड़ कर अपनी तरफ गिरा दिया. काकी ज़मीन पर गिर गयी. मैं ने काकी के कुछ करने से पहले साड़ी कमर तक उपर कर दी. पीछे से साड़ी पहले ही उपर थी . काकी की साड़ी उपर हो गयी. काकी की चूत मेरे सामने आ गयी.
काकी की चूत पर घना जंगल था. काकी खुद को ठीक करने की कोशिस कर रही थी.
मैं काकी के उपर आ गया.मैं ने जल्दी से लंड को चूत पर रख कर एक झटके मे अंदर डाल दिया. काकी की चीख निकल गयी.
पहली बार मैं ने एक झटके मे पूरा लंड अंदर डाला था.
ऐसा करने से मुझे भी दर्द हुआ और काकी को भी दर्द हुआ.
काकी की चीख निकल गयी. मैं ने अपना हाथ काकी के मूह के उपर रख दिया.
काकी को दर्द हो रहा था फिर भी काकी ने इस बीच मुझे एक बार भी अपने उपर से हटाने की कोशिस नही की.
मैं थोड़ी देर ऐसे ही रुका रहा फिर धक्के मारना सुरू किया. कमला काकी की चूत काफ़ी बड़ी और खुली हुई थी.इस लिए काकी को ज़्यादा दर्द नही हुआ था .
काकी का दर्द बहोत जल्दी कम हुआ .और मेरे धक्के मारने की गति भी जल्दी बढ़ गयी.
मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा.हर धक्के के साथ कमला काकी अपनी गंद उपर कर देती जिस से मुझे लंड अंदर डालने ने मज़ा आ रहा था.
काकी भी चुदाई का मज़ा ले रही थी.
10 मिनट के बाद काकी का पानी निकल ने से काकी की मज़े मे शीष्कारिया लेने लगी.
अवी ऐसे ही ,और ज़ोर से ,फाड़ डालो, आआअहह मेरी चूत को , आआअहह कब से तेरे लंड लेना चाह रही थी.आहह
काकी की शीष्कारिया सुनकर मैं ने अपनी गति और बढ़ा दी.
और 10 मिनट तक मैं काकी की चुदाई करता रहा. काकी की चूत पानी पानी हो गयी थी.
काकी की चूत से तो सूनामी पे सूनामी आ रही थी.मैं भी अपना वीर्य निकलने के पास था.
जब मुझे लगा कि मेरा काम होने वाला है. मैं ने लंड को बाहर निकाल लिया. कॉंडम को निकाल कर फेक दिया. और लंड को काकी के मूह के पास ले गया.
काकी ने लंड को मूह मे ले लिया. मैं ने काकी के सर को पकड़ कर मूह मे धक्के मारने लगा. 10 12 धक्को मे मैं ने वीर्य काकी के मूह मे डाल दिया. काकी ने पूरा वीर्य पी लिया.
मैं काकी के बाज़ू मे बैठ गया. काकी लंबी लंबी सासे लेने लगी. फिर काकी ने अपने कपड़े ठीक किए.
कमला काकी-कोई ऐसे चुदाई करता है कभी
अवी-मैं काकी की तरफ देख कर हँसने लगा
कमला काकी-आराम से नही कर सकते थे .
अवी-मुझे क्या पता आप को भी चुदाई करनी है
कमला काकी-चुदाई नही करनी होती तो मैं तुम्हे रोज अपनी गंद थोड़े ही दिखाती
अवी-अगर आप ने कहा होता तो मैं अच्छे से कर लेता
कमला काकी-कोई औरत खुद अपने मूह से कैसे कहेंगी कि मेरी चूत मारो.वो तो समझना पड़ता है.
अवी-जाने दो पर आपको मज़ा आया कि नही
कमला काकी-2 साल के बाद चुदाई हुई है. मज़ा तो आयेगा ही.
अवी-पर आपको कैसे पता कि मैं आपके साथ चुदाई कर लूँगा
कमला काकी-उस दिन मैं ने देखा था कि तुम मेरी बहू की चुदाई कर रहे थे. कैसे उसकी गंद मार रहे थे.अगर तुम उसकी चुदाई कर सकते हो तो मेरी भी कर सकते हो
अवी-आपने सब देखा था तो मुझे कुछ कहा क्यू नही
कमला काकी-मैं ने मोना को घर पे मारा और फिर शहर भेज दिया . ताकि वो तुमसे दूर हो और तुम मुझ पर ध्यान दो
अवी-मतलब आपने मोना को शहर भेज दिया और उसकी जगह खुद चुदवाना चाहती थी.
कमला काकी-हाँ, मैं ने 2 साल से चुदाई नही की थी.इतना तो करना ही था मुझे.
अवी-मोना के साथ मैं आपकी भी चुदाई कर लेता
कमला काकी-मैं अपना घर तोड़ना नही चाहती थी. और मोना के सामने मैं तुम्हारे साथ नही कर सकती थी.और
अवी-और क्या
कमला काकी-मुझे अपनी गंद मरवाना पसंद है. मेरे पति ने मेरी गंद ज़्यादा नही मारी उस दिन तुम्हे मोना की गंद मारते हुए देखा तभी मैं ने सोचा था कि मैं तुमसे अपनी गंद मरवाउन्गि.
अवी-ठीक कल मारूँगा आपकी गंद (काकी ने ठीक नही किया. मोना को मुझसे दूर करके .काकी के वजह से 1 हफ़्ता मैं चुदाई नही कर पाया. काकी को इसकी कीमत चुकानी होगी .काकी को गंद मरवाना पसंद है ना ,कल काकी की अच्छी खबर लेता हू)
कमला काकी-कल मेरे घर आ जाना
अवी-घर पे नही. यही पे मारूँगा
कमला काकी-वहाँ नही
अवी-क्यू
कमला काकी-एक तो मेरी गंद बहोत कम बार मारी गयी है. और तुम्हारा लंड बड़ा है.यहाँ मेरी चीख कोई भी सुन सकता है
अवी-गंद मारूँगा तो यही पर नही तो नही मारूँगा अब चलो देर हो गयी
इतना कहने के बाद मैं ने बात करना बंद किया और हम वापस खेतो मे आ गये.
फिर एक प्यारी सी नींद पूरी करने के बाद खेतो मे चला गया.
अगर आज कमला काकी ने खुद मेरे सामने पेशाब की तो मैं समझूंगा कि काकी मेरे साथ चुदाई करना चाहती है. पर चाची ने कहा कि कुछ भी हो काकी मेरे सामने पेशाब करे या ना करे फिर भी मैं काकी के साथ चुदाई करू
मैं कमला काकी के पास आ गया. आज काकी ने खुद बगीचे मे जाने की बात की शायद कल मैं ने काकी को मेरे सामने पेशाब करने को कहा था जिससे काकी को लगा होगी मैं उनकी गंद देखना चाहता हू. मतलब मैं काकी के साथ चुदाई करना चाहता हू
काकी और मैं आम के बगीचे मे आ गये. आज मैं 5 6 आम वो भी जल्दी तोड़ लिए. और पेड़ से नीचे आ गया.
अवी-(मुझे काकी के दिमाग़ मे क्या चल रहा है ये देखना था.)चलो काकी चलते है.
कमला काकी-इतनी जल्दी
अवी-हाँ मुझे कुछ काम है
कमला काकी-रूको मैं पेशाब करती हू फिर चलते है
अवी-ठीक है
कमला काकी वही पर दूसरी तरफ मूह करके पेशाब करने लगी.
कमला काकी ने मुझे दूसरी तरफ देखने को नही कहा. मैं समझ गया कि कमला काकी मेरे साथ चुदाई करना चाहती है.
काकी से बात करके चुदाई करना ठीक नही होगा. पहले चुदाई करता हू फिर बात करूँगा.
मैं ने ज़िप खोल कर लंड बाहर निकाल लिया . लंड पर कॉंडम लगा लिया. कमला काकी अभी भी वहाँ बैठ कर पेशाब कर रही थी.
मैं ने ध्यान से सुना पेशाब की आवाज़ बंद हो गयी थी.काकी ने पेशाब कर ली थी फिर भी काकी वही बैठ कर मुझे अपनी गंद दिखा रही थी.
यही सही मोका था.मैं बिना आवाज़ किए काकी के पास चला गया.
मुझे लग रहा था कि मैं बिना आवाज़ किए जा रहा था पर ऐसा नही था. बगीचे मे नीचे सूखे पत्ते थे जिससे मेरे आने की आवाज़ तो काकी ने सुन ली थी फिर भी काकी खड़ी नही हुई.
मतलब काकी पूरी तैयारी के साथ आज बगीचे मे आई थी.
मैं ने पीछे से काकी के कंधो को पकड़ कर अपनी तरफ गिरा दिया. काकी ज़मीन पर गिर गयी. मैं ने काकी के कुछ करने से पहले साड़ी कमर तक उपर कर दी. पीछे से साड़ी पहले ही उपर थी . काकी की साड़ी उपर हो गयी. काकी की चूत मेरे सामने आ गयी.
काकी की चूत पर घना जंगल था. काकी खुद को ठीक करने की कोशिस कर रही थी.
मैं काकी के उपर आ गया.मैं ने जल्दी से लंड को चूत पर रख कर एक झटके मे अंदर डाल दिया. काकी की चीख निकल गयी.
पहली बार मैं ने एक झटके मे पूरा लंड अंदर डाला था.
ऐसा करने से मुझे भी दर्द हुआ और काकी को भी दर्द हुआ.
काकी की चीख निकल गयी. मैं ने अपना हाथ काकी के मूह के उपर रख दिया.
काकी को दर्द हो रहा था फिर भी काकी ने इस बीच मुझे एक बार भी अपने उपर से हटाने की कोशिस नही की.
मैं थोड़ी देर ऐसे ही रुका रहा फिर धक्के मारना सुरू किया. कमला काकी की चूत काफ़ी बड़ी और खुली हुई थी.इस लिए काकी को ज़्यादा दर्द नही हुआ था .
काकी का दर्द बहोत जल्दी कम हुआ .और मेरे धक्के मारने की गति भी जल्दी बढ़ गयी.
मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा.हर धक्के के साथ कमला काकी अपनी गंद उपर कर देती जिस से मुझे लंड अंदर डालने ने मज़ा आ रहा था.
काकी भी चुदाई का मज़ा ले रही थी.
10 मिनट के बाद काकी का पानी निकल ने से काकी की मज़े मे शीष्कारिया लेने लगी.
अवी ऐसे ही ,और ज़ोर से ,फाड़ डालो, आआअहह मेरी चूत को , आआअहह कब से तेरे लंड लेना चाह रही थी.आहह
काकी की शीष्कारिया सुनकर मैं ने अपनी गति और बढ़ा दी.
और 10 मिनट तक मैं काकी की चुदाई करता रहा. काकी की चूत पानी पानी हो गयी थी.
काकी की चूत से तो सूनामी पे सूनामी आ रही थी.मैं भी अपना वीर्य निकलने के पास था.
जब मुझे लगा कि मेरा काम होने वाला है. मैं ने लंड को बाहर निकाल लिया. कॉंडम को निकाल कर फेक दिया. और लंड को काकी के मूह के पास ले गया.
काकी ने लंड को मूह मे ले लिया. मैं ने काकी के सर को पकड़ कर मूह मे धक्के मारने लगा. 10 12 धक्को मे मैं ने वीर्य काकी के मूह मे डाल दिया. काकी ने पूरा वीर्य पी लिया.
मैं काकी के बाज़ू मे बैठ गया. काकी लंबी लंबी सासे लेने लगी. फिर काकी ने अपने कपड़े ठीक किए.
कमला काकी-कोई ऐसे चुदाई करता है कभी
अवी-मैं काकी की तरफ देख कर हँसने लगा
कमला काकी-आराम से नही कर सकते थे .
अवी-मुझे क्या पता आप को भी चुदाई करनी है
कमला काकी-चुदाई नही करनी होती तो मैं तुम्हे रोज अपनी गंद थोड़े ही दिखाती
अवी-अगर आप ने कहा होता तो मैं अच्छे से कर लेता
कमला काकी-कोई औरत खुद अपने मूह से कैसे कहेंगी कि मेरी चूत मारो.वो तो समझना पड़ता है.
अवी-जाने दो पर आपको मज़ा आया कि नही
कमला काकी-2 साल के बाद चुदाई हुई है. मज़ा तो आयेगा ही.
अवी-पर आपको कैसे पता कि मैं आपके साथ चुदाई कर लूँगा
कमला काकी-उस दिन मैं ने देखा था कि तुम मेरी बहू की चुदाई कर रहे थे. कैसे उसकी गंद मार रहे थे.अगर तुम उसकी चुदाई कर सकते हो तो मेरी भी कर सकते हो
अवी-आपने सब देखा था तो मुझे कुछ कहा क्यू नही
कमला काकी-मैं ने मोना को घर पे मारा और फिर शहर भेज दिया . ताकि वो तुमसे दूर हो और तुम मुझ पर ध्यान दो
अवी-मतलब आपने मोना को शहर भेज दिया और उसकी जगह खुद चुदवाना चाहती थी.
कमला काकी-हाँ, मैं ने 2 साल से चुदाई नही की थी.इतना तो करना ही था मुझे.
अवी-मोना के साथ मैं आपकी भी चुदाई कर लेता
कमला काकी-मैं अपना घर तोड़ना नही चाहती थी. और मोना के सामने मैं तुम्हारे साथ नही कर सकती थी.और
अवी-और क्या
कमला काकी-मुझे अपनी गंद मरवाना पसंद है. मेरे पति ने मेरी गंद ज़्यादा नही मारी उस दिन तुम्हे मोना की गंद मारते हुए देखा तभी मैं ने सोचा था कि मैं तुमसे अपनी गंद मरवाउन्गि.
अवी-ठीक कल मारूँगा आपकी गंद (काकी ने ठीक नही किया. मोना को मुझसे दूर करके .काकी के वजह से 1 हफ़्ता मैं चुदाई नही कर पाया. काकी को इसकी कीमत चुकानी होगी .काकी को गंद मरवाना पसंद है ना ,कल काकी की अच्छी खबर लेता हू)
कमला काकी-कल मेरे घर आ जाना
अवी-घर पे नही. यही पे मारूँगा
कमला काकी-वहाँ नही
अवी-क्यू
कमला काकी-एक तो मेरी गंद बहोत कम बार मारी गयी है. और तुम्हारा लंड बड़ा है.यहाँ मेरी चीख कोई भी सुन सकता है
अवी-गंद मारूँगा तो यही पर नही तो नही मारूँगा अब चलो देर हो गयी
इतना कहने के बाद मैं ने बात करना बंद किया और हम वापस खेतो मे आ गये.