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मैं होटेल से सीधा एक फ्रेंड के पास गया. (फ्रेंड-चाचा के साथ कभी कभी शहर आम बेचने आने पर एक लड़के से पहचान हो गयी थी. मैं उसकी के पास चला गया )
मैं ने उस से कहा कि मुझे एक घर रेंट पे चाहिए.घर अच्छी सोसायटी मे होना चाहिए पर कम पैसो मे. उसने 2 3 कॉल किए .
मुझे घर रेंट पर सोनिया और हीना की चुदाई करने के लिए चाहिए था.
फिर हम घर देखने चले गये. घर नयी सोसायटी मे था. एरिया अच्छा था. उस सोसायटी मे ज़्यादा घर नही थे. ज़्यादा घर ना होना ये मेरे लिए अच्छा था. घर मे 1 बेडरूम ,किचन और हॉल था. बाथरूम बेडरूम मे था. घर पे कुछ समान था जो घर के मालिक का था. घर 4000 पर मंथ पे मिल गया.
घर की साफ सफाई पहले से करके रखी हुई थी. मतलब कुछ करने की ज़रूरत नही थी. बेडरूम मे बेड था हॉल मे सोफे के साथ टेबल भी था. मैं ने फिर भी 2 घंटे मे घर साफ कर दिया. कुछ समान खरीद कर घर मे रख दिया.
घर का मालिक दूसरे शहर मे रहता है जो काफ़ी दूर था मतलब कुछ टेन्षन नही था.किसी को भी यहाँ लेकर आ सकता था ,रोकने वाला कोई नही था.
मैं ने घर2 (शहर के घर को "घर2 " और गाओं के घर को "घर " कहूँगा) को लॉक कर के घर चला आया.
मैं ने चाची को बता दिया कि मैं ने शहर मे एक घर2 लिया है रेंट पर.
चाची ने कुछ नही कहा ,बस अपना ख़याल रखने को कहा
आज मेरा पूरा मूड खराब हो गया था.हीना और सोनिया चाहती क्या है कुछ समझ मे नही आ रहा था. दिमाग़ को शांत करने के लिए मैं बाहर घूमने चला गया. गाओं मे घूमते घूमते प्रिन्सिपल सर के घर के पास आ गया.
सोचा चलो सर से मिल लेते है. बहुत दिन हो गये है सर और किरण से मिले हुए
मैं ने गेट खट खाटाया .किरण ने गेट खोला .मुझे देख कर खुश हो गयी.
मैं अंदर चला गया.
अवी-सर कहा है
किरण-वो शहर गये है. अब वो कल ही आएँगे
अवी-मतलब तुम घर पे अकेली हो
किरण-हाँ
अवी-कुछ पिलाओगी नही
किरण-रूको मैं चाय बनाती हू
किरण अंदर चली गयी.मैं ने छोटी चाची को कॉल किया.
अवी-चाची आज मैं घर नही आ रहा
सी चाची-कहाँ जा रहे हो
अवी-मैं सर के घर पे रुक रहा हू
सी चाची-ठीक है मैं दीदी को बता दूँगी कि तुम सर के घर रुक रहे हो.
अवी-मैं किरण के साथ हू. सर शहर गये है
सी चाची-समझ गयी .मैं यहाँ संभाल लूँगी. तुम मज़े करो
अवी-थॅंक्स चाची
किरण चाय लेकर आ गयी.
अवी-क्या प्लान है
किरण-कुछ भी नही
अवी-घर मे पूरी रात अकेली रह कर क्या करना चाहती हो
किरण-क्या कर सकती हू .मेरी किस्मत ऐसी है कि क्या कहु
अवी-क्या हुआ तुम्हारी किस्मत को
किरण-जिसका पति बाहर जॉब करता हो और साल मे एक बार आता हो उसकी किस्मत खराब नही तो क्या अच्छी है
अवी-क्यू मैं हू ना
किरण-तू कब तक मेरा साथ दे सकते हो
अवी-जब तक तुम चाहो
किरण-पर तुम्हे अपनी ज़िंदगी भी तो ज़ीनी है
अवी-कभी कभी तो तुम्हारा साथ दे सकता हू
किरण-हाँ,दे सकते हो पर
अवी-पर क्या
किरण-तुम सिर्फ़ 1 या 2 घंटे के लिए आते हो और चले जाते हो
अवी-मैं इस से ज़्यादा क्या कर सकता हू
किरण-तुम ने जितना किया है वो काफ़ी है,मैं तुमसे नाराज़ नही हू. तुमने तो मेरी प्यास बुझाई है. मैं तो अपने पति से नाराज़ हू
अवी-तुम्हारा पति बहोत अच्छा इंसान है. तुम उससे नाराज़ मत रहो.
किरण-क्यू ना होऊ
अवी-सर ने कहा है ,सर के रिटाइयर्मेंट के बाद तुम और सर उसके पास जाने वाले हो.
किरण-मुझे तो नही बताया ऐसा कुछ.और बाबूजी के रिटाइयर्मेंट को तो बहोत टाइम बाकी है.
अवी-तो क्या हुआ ,सर जल्दी रिटाइयर्मेंट ले भी सकते है. अब तो खुश हो जाओ
किरण-लेकिन तब तक
अवी-तब तक मैं हू ना
किरण-चलो ठीक है.कम से कम तुम तो हो
अवी-चलो एक और खुशी की बात बताता हू
किरण-क्या?
अवी-मैं आज रात यही रहने वाला हू
किरण-सच
अवी-मुच