• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मैं और मेरा परिवार

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date


729

आज सनडे है.

रानी आज वापस अपने घर जाने वाली है. रानी के वापस जाने की न्यूज़ सुनकर सब नेहा बुआ के घर आ गये.

कोमल कविता और लीना रानी का समान पॅक करने मे मदद कर रही थी. रानी सिर्फ़ एक बॅग लाई थी पर लेकर जा रही थी 3 बॅग,जिसमे प्यार छुपा हुआ था.

सामान पॅक होते सब रानी से मिलने लगे

नेहा बुआ-रानी ,तुम्हारे साथ रहने से मुझे ऐसा लगा कि मेरी 2 नही 3 बेटी है.

रानी-मुझे भी आप से माँ का प्यार मिला है.

नेहा बुआ-शहर जाकर हमे भूलना मत ,हमसे मिलने आते रहना

रानी-ये तो मेरा घर है. अपने घर कोई भूलता थोड़ी है. मैं आती रहूंगी आप से मिलने

कविता लीना-दीदी और हमसे

रानी-तुमसे मिलने तो दौड़ी चली आउन्गि. वैसे अगले साल तुम शहर मे पढ़ने आओगी ना तब खूब एंजाय करेंगे.

नेहा बुआ-रानी ये मेरी तरफ से तुम्हारे लिए एक छोटा सा गिफ्ट,साड़ी,

रानी-आंटी इसकी क्या ज़रूरत थी

नेहा बुआ-मेरी बेटी के लिए गिफ्ट तो लेना ही पड़ेगा.

नेहा बुआ का रानी के प्रति इस तरह का प्यार देख कर अच्छा लगा.

पूजा बुआ और नीता बुआ ने भी रानी को गिफ्ट दिया. फिर मैं रानी को लेकर अपने घर आ गया.

चाची ने रानी के जाने की पूरी तय्यारी करके रखी थी.

सी चाची-रानी ,तुमने कुछ दिनो मे हम पे क्या जादू डाला पता नही. तुम्हारे जाने से ऐसा लग रहा है कि कोई अपना दूर जा रहा है

रानी-चाची ,मैं दूर कहाँ जा रही हू. यहीं पास मे तो जा रही हूँ, और अब तो मैं यहाँ आते रहूंगी.

सी चाची-नही आई तो मार पड़ेगी.

और छोटी चाची ने रानी को गले लगा लिया.

सी चाची-अगली बार अपनी माँ को साथ लाना.

रानी-जी ,

म चाची-हम भी यहाँ पर है

रानी-सीमा चाची आपके साथ जो मस्ती की वो हमेशा याद आएगी.

म चाची-तू जल्दी यहाँ रहने आ जा फिर हम खूब मस्ती करेंगे,मेरा मतलब है कि नेक्स्ट टाइम जब आएँगी तब खूबमस्ती करेंगे

ब चाची-रानी, तुम्हारे माता पिता ने तुम पर अच्छे संस्कार किए है.तुम जहाँ भी जाती हो सबके दिल जीत लेती हो. मैं दुआ करूँगी तुम ऐसे हस्ती खेलती रहो.

रानी ने बड़ी चाची के पैर छु कर आशीर्वाद लिया.

फिर छोटी चाची ने रानी को एक सुंदर सी साड़ी गिफ्ट दी.

रानी ने सब के पैर छु कर आशीर्वाद लिया. और अपने घर जाने के लिए तय्यार हो गयी.

अवी-चलो, मैं तुम्हे शहर छोड़ देता हूँ

सी चाची-तेरी बाइक कहाँ है

अवी-कार से छोड़ दूँगा.

कोमल-तुम्हे कार चलानी आती है

अवी-हाँ, रणजीतसिंघ और पायल ने सिखा दी.

ब चाची-अवी धीरे धीरे जाना

अवी-जी चाची.

फिर मैं रानी को कार से शहर छोड़ने चला गया.

कार धीरे धीरे चलाते हुए शहर की तरफ जाने लगा.

रानी-अवी तुम ने बताया नही कि तुम्हे कार चलानी आती है

अवी-अभी पूरी तरह से सीखी नही. थोड़ा बाकी है.

रानी-फिर तो मुझे यही उतार दो ,मेरा इन्षुरेन्स नही है

अवी-तुम्हारा इन्षुरेन्स मैं हूँ.

रानी-अवी ,शादी के बाद गाओं ही रहेंगे.

अवी-नही. हम शहर मे रहेंगे.

रानी-इतना प्यारा गाओं छोड़ कर शहर मे जाना चाहते हो, यहाँ चाची है बुआ है, खेल है इन सब को छोड़ दोगे

अवी-हाँ. और तुम मेरे साथ शहर मे रहोगी. हमारा नया परिवार बनाएँगे.

रानी-अवी तुम ऐसा सोच भी कैसे सकते हो, चाची कितना प्यार करती है तुमसे

अवी-तुम्हारे प्यार के सामने वो कम है

रानी-तुम सीरीयस हो ,शहर मे वो सब नही मिलेगा जो यहाँ गाओं मे मिलता है. गाओं मे एक सुकून मिलता था.

अवी-तुम गाओं मे रह नही पाओगी.मैं तुम्हारे बारे में सोच रहा हूँ.

रानी-मुझे तो गाओं मे रहना है

अवी-सोच लो फिर मत कहना कि मैं ने सोचने नही दिया.

रानी-मैं गाओं मे रहूंगी.

अवी-फिर मैं क्या कर सकता हूँ .मुझे भी गाओं मे रहना होगा..

रानी-सच मे, गाओं मे हमे खूब प्यार मिलेगा.

अवी-जैसा तुम कहो. और हँसने लगा.

रानी-हंस क्यूँ रहे हो

अवी-तुम बात ही ऐसी कर रही थी कि हसी आ गयी.

रानी-इसमे हँसने की क्या बात थी

अवी-मैं अपनी चाची को छोड़ कर कैसे जा सकता हूँ. वो मेरे लिए जान से बढ़ कर है, और गाओं के बिना मैं रह नही सकता. मेरे फॅमिली की हिस्टरी है यहाँ पर, क्या समझी.

रानी-मतलब तुम मेरा मज़ाक उड़ा रहे थे

अवी-रानी, तुमने बात ही ऐसी की कि मज़ाक कर ने का मन हुआ.

रानी-जाओ मैं तुमसे बात नही करूँगी

अवी-मत करो. मुझे कोई और ढूँढनी पड़ेगी. जो शहर मे रहेगी.

रानी-ढूँढ लो ,मैं तो गाओं मे रहूंगी. और चाची को कहूँगी कि तुम्हारी पिटाई करे, फिर जाकर शहर का भूत निकलेगा तुम्हारे सर से

अवी-इसमे तो मैं भी कुछ नही कर सकता, चाची मुझसे ज़्यादा तुम्हारी बात मानती है.तुम चुड़ेल हो जो चाची को अपने बस मे कर लिया.

रानी-चुड़ेल,घर चलो तुम कच्चा खा जाउन्गी.

अवी-घर जाने तक इंतज़ार नही होता ,यहीं खा लो

रानी-यहाँ ,रोड पे

अवी-तो क्या हुआ ,चुड़ेल हो जादू से कार गायब कर दो,फिर खाना शुरू करदो

रानी-पता है कौन किसे खाने वाला है

अवी-एक पुप्पी के बिना कार आगे नही जाएगी.

रानी-शहद छोड़ने का भुगतान वसूल कर रहे हो

अवी-करना तो पड़ेगा

रानी-ड्राइवर तुम भूल रहे हो कि मंज़िल पर पहुँच कर भुगतान किया जाता है.

अवी-मेडम ये नये जमाने की कार है ,बिना पप्पी के आगे नही जाएगी.

रानी-कुछ डिसकाउंट नही मिल सकता.

अवी-मिल सकता है. एक पप्पी पे दूसरी फ्री

रानी-ये डिसकाउंट नही ऑफर है.

अवी-मेडम आपको कौनसी ऑफर सेलेक्ट करेंगी

रानी-एक पप्पी पे एक फ्री

और रानी ने मेरे दोनो गालो पे पप्पी ली

अवी-ये चीटिंग है

रानी-ड्राइवर अब कार चलाओ, बाकी का मंज़िल पर पहुँचने के बाद

अवी-रानी प्यार करते हुए स्मार्टनेस दिखानी ज़रूरी है. किस की जगह पप्पी बोलने की ये सज़ा.

रानी-तुम ही ने तो कहा कि पप्पी चाहिए,वो तुम्हे दे दी.

अवी-घर चलो फिर दिखाता हूँ तुम्हे

रानी-वही तो कह रही हूँ. घर चलो जितने किस चाहिए उतने दूँगी. मम्मी के आने से पहले घर साफ करना है. चलो ना

अवी-चलो फिर

ऐसे मज़ा मस्ती करते हुए हम रानी के घर पहुँच गये.

 


730

मैं रानी के साथ उसके घर आ गया.

समान लेकर मेन गेट के पास पहुँचे तो देखा कि घर को लॉक नही था.

रानी-ये लॉक कहाँ गया.कही चोरो ने तो लॉक नही तोड़ा.

अवी-स्मार्ट रानी. घर अंदर से बंद है. अंदर कोई है ,मे बी तुम्हारी मम्मी आई होगी

रानी-मम्मी ने तो कहा था कि दोपेहर मे आएँगी. फिर अंदर चोर ही होगा.

अवी-बेल बजा कर देखो, चोर हुआ तो भाग जाएगा. आंटी हुई तो गेट खोलेंगी

मैं ने बेल बजाई. जैसा मैं ने सोचा था वैसा ही हुआ. गेट आंटी मे खोला

अपनी मम्मी को सामने देख कर रानी पहले सॉक्ड हुई फिर आंटी के गले लग गयी.

रानी-मम्मी ,आप ने कहा था कि दोपेहर मे आएँगी फिर इतनी जल्दी कैसे आ गयी

मम्मी-पहले अंदर तो चलो फिर बताती हूँ.अवी आओ अंदर

रानी अपनी मम्मी के साथ अंदर चली गयी.

मम्मी-अवी कहाँ रह गया.

अवी-मैं इधर हूँ.रानी का ये पहला बॅग

और फिर बाहर जाकर दूसरा और तीसरा बॅग लेकर अंदर आ गया.रानी के 3 बॅग देख कर आंटी देखती रह गयी

मम्मी-ये इतने सारे बॅग,रानी तू 1 महीने के लिए गयी थी या साल भर रहने के लिए

अवी-आप ही देख लो ,कितना परेशान किया है रानी ने. ये पहनु या वो पहनु बोल बोल मुझे परेशान करती रही

मम्मी-रानी क्या ये सच है

रानी-मम्मी आप किसकी बात पर विश्वास कर रही है. मैं क्या कभी ऐसा पूछती हूँ आप ही बताइए

मम्मी-मुझे क्या पता ,अपने ससुराल जाकर क्या करती थी.

रानी-मम्मी आप भी. कोई मेरी तरफ से बोलता नही. वहाँ भी मैं अकेली थी

मम्मी-क्यूँ अवी नही था

रानी-वो तो मुझे सब से ज़्यादा परेशान करता था. वो तो अच्छा है कि छोटी चाची मेरी तरफ थी

मम्मी-अभी तो कहा था कि कोई तुम्हारे तरफ से नही बोलता, फिर ये क्या था

रानी-मैं बताने वाली थी कि छोटी चाची ने मेरा पूरा ख़याल रखा और ये बॅग मेरा है और

मम्मी-और ये 2 बॅग क्या अवी के है.

रानी-उसमे गिफ्ट है. इतने गिफ्ट मिले कि 2 बॅग हो गये.

मम्मी-इतने सारे गिफ्ट, उन्होने दिए और तुम ने ले लिए, एक 2 ठीक है पर 2 बॅग ,मुझे तुमसे ये उम्मीद नही थी.

अवी-आंटी मेरी फॅमिली इतनी बड़ी है कि ,एक ने एक गिफ्ट दिया तो 2 बॅग भर गये.

मम्मी-फिर दूसरा बॅग

अवी-वो मैं ने थोड़ी शॉपिंग करवा दी रानी की. रानी तो मना कर रही थी पर मैं ने उसे ज़िद करके ड्रेस लेने को कहा. ऐसे मे रानी क्या करती

रानी-आप है कि मुझ पे गुस्सा हो रही है.

मम्मी-कैसे ना करती ,2 बॅग गिफ्ट ,

अवी-आंटी आप ये देखिए कि रानी को सब कितना प्यार करते है जो इतने गिफ्ट मिले

मम्मी-मेरी बेटी इतनी प्यारी है कि सब की प्यारी बन जाती है.

अवी-ये सही कहा. चाची तो रानी को जाने नही दे रही थी.

मम्मी-इसका मतलब है कि रानी ने मेले मे खूब एंजाय किया.सब के दिल जीत लिए

रानी-आप को बताने के लिए मैं कब से आपका इंतजार कर रही थी ,लेकिन आप है कि,आप तो दोपेहर मे आने वाली थी फिर ये सर्प्राइज़ क्यूँ दिया.

मम्मी-मैं सुबह इस लिए आई कि घर को साफ कर सकूँ. मुझे पता था कि अवी तुम्हे छोड़ने आएगा ,उसे ऐसे जाने थोड़ी देती. सुबह पहले घर की सफाई की और अब खाना बना रही थी.

अवी-आंटी ,रानी भी यही सोच रही थी सुबह आकर आपके आने से पहले घर साफ कर दे, ताकि आप आराम कर सके

रानी-मम्मी आपने मेरा प्लान खराब कर दिया.

मम्मी-तुम ने ये सोचा यही काफ़ी है. जा समान अपने रूम मे रख दे.

रानी-आपने मेरा रूम की सफाई की.

मम्मी-उस रूम की नही की, तुम्हारे दूसरे रूम की

अवी-2 रूम ,ये क्या है

रानी-एक रूम जिस मे तुम पहली बार मुझे कोमल के साथ देखने आए थे. और दूसरा रूम जहाँ पिछली बार तुम ने हमारी फोटो देखी थी.

मम्मी-बाते बाद मे करते है पहले खाना खाते है. तुम फ्रेश हो जाओ ,

अवी-चलो मैं मदद करता हूँ समान रखने में

आंटी हँसने लगी

मम्मी-रानी अवी को भी साथ ले जाओ, यहाँ अकेला बैठ कर क्या करेगा.

रानी-चलो अवी, जल्दी समान रख कर आते है.

मैं रानी के साथ उसके रूम मे चला गया .और आंटी किचन मे चली गयी.

रानी के रूम मे आते ही मैं बेड पर लेट गया. इस रूम मे मेरे फोटो नही थे.वो टेडीबीअर भी नही था

रानी-ए मिस्टर ये मेरा बेड है.

मैं बेड से उठ गया और रानी बेड पर लेट गयी.और मैं उसके उपर लेट गया.

रानी-ये चीटिंग है.तभी तुम एक झटके मे मेरी बात मान गये.

अवी-फ़ायदा मेरा हो रहा हो तो बात तो माननी पड़ेगी. अब मेरा किस

रानी ने ताक़त लगा कर मुझे पलट दिया और मेरे उपर आ गयी.

रानी-बात ये हुई थी कि मैं कच्चा खाउन्गी.तुम मेरा खाना हो

अवी-बचाओ बचाओ

रानी-तुम्हे मेरे हाथ से कोई बचा नही सकता.

अवी-छोड़ो मुझे ,मैं ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है

रानी-तुम्हे छोड़ दूं ,ये हो नही सकता. आज तुम्हे कच्चा खा जाउन्गी.

अवी-नही गर्दन पे बाइट मत करना.मेरा खून मत पीना.

और रानी ने मेरी गर्दन पे किस किया

अवी-आअहह,मेरा खून पी रही हो ,मुझे इस चुड़ेल से बचाओ, बचाओ

रानी-ये तो शुरुआत है. आगे आगे देखो. तुम्हे कच्चा खा जाउन्गी.

और रानी ने मेरे शर्ट के बटन खोल दिए और चेस्ट पर किस करने लगी.

अवी-आहह, मैं मर गया

रानी-तुम्हारा चीखना बंद करना होगा ,

और रानी अपने होंठ मेरे होंठो के पास लेकर आ गयी. और मुझे किस करने वाली थी कि कुछ गिरने की आवाज़ सुनकर हम अलग हो गये.

गेट पर आंटी खड़ी थी. उनके हाथ से स्पून गिर गया था ,

आंटी हमारे देखते हड़बड़ा कर बाहर चली गयी.

और रानी अपने सर पे हाथ रख कर बैठ गयी.

 
731

आंटी हडबडाकर बाहर चली गयी. रानी और मैं बस देखते रह गयी

रानी-फिर से नही, पिछली बार की तरह मम्मी गुस्सा करेंगी.

अवी-पिछली बार कुछ भी तो नही कहा था आंटी ने

रानी-तुम्हारे सामने कैसे कहती. तुम्हारे जाने के बाद मेरी अच्छी खबर ली थी. अब फिर से नही. सब तुम्हारी ग़लती है.

अवी-मैं ने क्या किया

रानी-तुम ही ज़ोर से चिल्ला रहे थे.

अवी-मैं आंटी से बात करता हूँ,आंटी मेरा कहना मानेंगी.

रानी-कोशिस करो, और तुम्हारी सज़ा है कि तुम्हें किस नही मिलेगी.

अवी-छोटी ग़लती की इतनी बड़ी सज़ा.

रानी-अवी बी सीरीयस ,मम्मी को मना लो ना.

अवी-ठीक है, तुम फ्रेश हो जाओ मैं आंटी से बात करता हूँ

रानी बॅग मे से कपड़े निकालने लगी और मैं आंटी के पास किचन मे चला.

अवी-आंटी

मेरी आवाज़ सुनकर आंटी होश मे आ गयी.

मम्मी-अवी तुम यहाँ , कुछ चाहिए था.

अवी-आंटी आपने जो देखा उसके बारे मे बात करनी है

मम्मी-मेरी ग़लती थी मुझे नॉक करके आना चाहिए था.मैं तुम्हारी आवाज़ सुनी बचाओ बचाओ और मैं डर के मारे ऐसे ही बिना नॉक किए आ गयी.

अवी-आंटी वो हम ऐसे एक दूसरे के साथ मज़ाक कर रहे थे और आप आ गयी. हम बस थोड़ी मस्ती कर रहे थे और कुछ नही.

मम्मी-वो मुझे पता है. इतना तो चलता है.

अवी-आंटी हमे अपनी मर्यादा पता है. हम किस के आगे गये नही. मेले मे भी हम दूर थे. आप रानी से कुछ मत कहना वो जल्दी रो देती है.

मम्मी-तुम्हारी बात ठीक है पर रानी को ऐसा नही करना चाहिए ,वो कैसे तुम्हारे....

अवी-आंटी वो ,मैं ने मज़ाक मे रानी को चुड़ेल कहा था बस वो थोड़ी चुड़ेल की तरह आक्टिंग कर रही थी

मम्मी-वो मैं समझ गयी.मैं ही अपने पुरानी यादो मे खो गयी थी

रानी-मम्मी ,पापा ने आपको पहली बार चुड़ेल कहा था.

मम्मी-हां, चल जाने दे, अवी की वजह से तुम बच गयी.

अवी-थॅंक यू आंटी

मम्मी-जाओ ,हॉल मे बैठ कर कर टीवी देखो ,या फिर बचाओ बचाओ खेलो

रानी-मम्मी आप भी ना.

और रानी मेरा हाथ पकड़ कर अपने रूम मे ले गयी.

और मेरे गले लग गयी

रानी-थॅंक्स, वैसे मम्मी तुम्हारी बात जल्दी मान जाती है.

अवी-उनको इकलौता दामाद हूँ.

रानी-बड़े आए दामाद वाले. मेरी मम्मी से मुझे को दूर किया तुम ने

अवी-मेरी चाची से मुझको तुम ने दूर किया उसका क्या

रानी-ये तो बराबर हो गया.

अवी-ये क्या लगा रखा है. ये बताओ तुम्हारे कितने रूम है.

रानी-2 रूम है, ये एक और दूसरा वाला जिस मे तुम्हारे फोटो है.

अवी-चलो अच्छा है 2 रूम है, मैं तुम्हें कहने वाला था कि कोमल तुम्हारे घर आएगी और हमारी फोटो देख लिया तो क्या होगा.

रानी-उस रूम की चाबी सिर्फ़ मेरे पास है. मम्मी भी वहाँ नही आती

अवी-ऐसे 2 रूम की क्या ज़रूरत है

रानी-ऐसे ही. रूम खाली था तो अपना दूसरा रूम बना दिया. और इतने सारे ड्रेसस्स रखने के लिए कुछ चाहिए ना

अवी-फिर तो गाओं मे तुम्हारे लिए एक बड़ा रूम बनाना पड़ेगा.

रानी-वो मैं वहाँ आकर बना लूँगी.

अवी-पहले तुम्हारे बारे मे सब जान ना पड़ेगा.

रानी-वो मुश्किल होगा.

अवी-ईज़ी है. तुम्हारे लॅपटॉप मे "माइ लाइफ" नाम का ड्राइव है

रानी-क्या कहा, वो मेरी डाइयरी है, तुम ने पढ़ ली,तुम ऐसा कैसे कर सकते हो.

और रानी रोने लगी.

अवी-रो क्यू रही हूँ.

रानी-तुम कैसे मेरी डायरी पढ़ सकते हो.

अवी-तुम्हारा क्या और मेरा क्या

रानी-वो मेरी पर्सनल डायरी थी.

अवी-ये रोना बंद करो, मैं ने सिर्फ़ ड्राइव देखा है. पढ़ा नही ,पढ़ा होता तो मुझे तुम्हारे बारे मे सब पता होता ,

रानी-तुम झूठ बोल रहे हो

अवी-अगर मैं ने पढ़ा होता तो तुम्हारे रूम के बारे मे पता होता ना

रानी-तुम सच कह रहे हो

अवी-तुम्हारी कसम ,

रानी-ठीक है,

अवी-वैसे क्या है उसमे

रानी-जब ज़रूरत होगी तब बता दूँगी.

अवी-जैसा तुम ठीक समझो.

रानी को पता नही क्या हुआ उसने मुझे किस करना शुरू किया.

मैं तो इसके लिए हमेशा तैयार रहता हूँ.

मैं भी रानी को किस करना शुरू किया.रानी के सॉफ्ट होंठो को किस करने से सब कुछ भूल कर सिर्फ़ रानी दिलो दिमाग़ मे छा जाती है.

रानी मुझे किस करते हुए बेड पर लेट गयी.

और मेरे होंठो को खाने लगी, चूसने लगी.मुझे प्यार करने लगी

किस करते हुए रानी मेरे उपर आ गयी. और फिर मुझे किस करने लगी.

रानी ने आज तो हद कर दी ,इतना प्यार रानी ने इस से पहले नही दिखाया था.

रानी के अंदर सच मे चुड़ेल तो नही घुस गयी.

रानी का इसतरह वाइल्ड तरीके से प्यार करना मुझे पसंद आ गया.

मैं भी रानी का पूरा साथ देने लगा.

पर मेरा जोश रानी के सामने कुछ भी नही था.

रानी इस तरह भी किस कर सकती है ये तो मैं ने कभी सोचा नही था.

मुझे तो लगा था कि रानी के साथ प्यार करते हुए मुझे ज़्यादा मेहनत करनी होगी .पर रानी का ये रूप देख कर मैं खुश हो गया.

रानी मेरे होंठो पे किस करने के साथ मेरे चेहरे पे किस करने लगी

ये किस ये बता रहा था कि शादी के बाद रानी का राज चलेगा.

रानी ने मेरे हाथो को पकड़ रखा था.और मेरे होंठो को चूस रही थी.

मैं रानी को कभी भी इस गेम मे मात दे सकता था ,पर रानी के हाथो से हार से जो मज़ा मिलेगा वो जीत कर नही मिलेगा

रानी ने मुझे आज जो प्यार दिया वो मैं ने आज तक फील नही किया था.

रानी को लगा कि उसमे अब और किस करने का जोश नही रहा तब जाके उसने मुझे किस करना बंद किया

रानी मेरे बाजू मे लेट कर हाँफने लगी.

मैं रानी की तरफ देखता रह गया.

रानी नॉर्मल होते मेरे गले लग गयी.

अवी-रानी ये क्या था

रानी-तुम अच्छा नही लगा

अवी-अच्छा क्या बहोत अच्छा लगा. ऐसा लगा कि बता नही सकता

मम्मी-रानी अवी खाना तैयार हो गया. जल्दी बाहर आ जाओ

 
732

आंटी ने हमे आवाज़ दे कर खाने के लिए बुला लिया.

आंटी की आवाज़ सुनते हम सावधान हो गये. और खुद को ठीक करके बाहर आ गये.

आंटी खाना लगा चुकी थी

मम्मी-तुम को कहा था कि हॉल मे बैठो ,तुम हो की रूम मे चले गये.

रानी-वो अवी समान रखने मे मेरी मदद कर रहा था.

मम्मी-मदद हो गयी होगी ,तो खाना शुरू करे

फिर हम ने खाना खाना शुरू किया. रानी मुझे खाना सर्व कर रही थी.

मम्मी-क्या बात है, खाना सर्व कर रही हो,कितना ख़याल रख रही हो, थोड़ा मुझ पे भी ध्यान दो

अवी-आंटी रानी को इसकी आदत पड़ गयी है ,सिर्फ़ खाना सर्व करती है ,खाना बनाती नही

रानी-झूठ क्यूँ बोल रहे हो. कितनी बार खाना बना कर खिलाया है.

अवी-आंटी,रानी ऐसा खाना बनाती थी कि मिर्ची लग जाती थी

रानी-मम्मी ,अवी ने मुझे बहोत तंग किया.खाना अच्छा बनने के बाद भी मुझे तंग करने के किए मिर्ची का नाटक किया और मुझे रुलाया ,फिर चाची के आते ही खाने की तारीफ करने लग जाता.

मम्मी-अवी ये ग़लत है. बिना वजह रानी को रुलाना ठीक नही.

अवी-आंटी रुलाने का फ़ायदा हुआ मुझे. रानी को पूछिए मेरी मिर्ची कैसे दूर की

रानी-वो मैं ने, राइस लो ना अवी

रानी के बात बदलने से हम हँसने लगे.

रानी ऐसे मेले की बाते बताते हुए खाना खिलाने लगी.

खाना खाने के बाद मैं आंटी और रानी के साथ बाते करने लगा.

अवी-आंटी आप भी मेले मे आती तो चाची से मिल लेती

मम्मी-मैं जान बुझ कर मेले मे नही आई.

रानी-ऐसा क्यूँ किया आपने

मम्मी-मैं वहाँ आती तो तुम मेले को खुलके एंजाय नही करती.और मैं ऑफीस के काम के सिलसिले मे बाहर ना जाती तो तुम अवी के साथ मेला कैसे देखती.

अवी-एक दिन के लिए तो आ जाती

मम्मी-ऑफीस का प्रॉजेक्ट ऐसा था कि वक्त ही नही मिला और मेले के वजह से कोई जा नही रहा था तो मैं चली गयी. वैसे किसी दिन आराम से तुम्हारी चाची से मिल लूँगी. और मुझे पता है कि रानी ने एंजाय करने के साथ सब के दिल भी जीते होगे

अवी-हाँ, सब रानी की तारीफ कर रहे थे. और आपकी भी ,रानी ने आप का नाम आगे चलाया है

मम्मी-मुझे अपने बेटी पे गर्व है.और क्या क्या किया तुम ने

रानी-लिस्ट लंबी है. जो भी किया उसमे छोटी चाची ने मेरी पूरी मदद की , उनके बिना मैं कुछ नही कर पाती

मम्मी-तुम्हारी छोटी चाची से मिलना होगा.बड़ा नाम सुना है.

अवी-जल्दी मिलवा दूँगा.

रानी -मम्मी आपको पता है कोमल की माँ मुझे अपने बेटी की तरह प्यार करने लगी है. और अवी के बहनें तो मेरे बिना रह नही सकती थी इतना मुझे प्यार करने लगी थी

मम्मी-ये तो अच्छा हुआ ,जब तुम्हारी शादी होगी तब तुम्हें सब अपना लगेगा.

अवी-हाँ. अब तो सीमा चाची को भी रानी पसंद आ गयी

रानी-वो ग़लती से पता चला. सीमा चाची ने हमे प्यार करते हुए पकड़ लिया था फिर जाके उनको हमारे बारे मे पता चला.

मम्मी-रानी तुम्हें ऐसा नही करना चाहिए था.उनको कैसा लगा होगा.

अवी-चाची थोड़ा गुस्सा हुई पर मैं ने संभाल लिया. वो रानी के लिए खुश है

मम्मी-फिर भी ऐसा दुबारा मत करना. मेरा ठीक है पर दूसरे के सामने ध्यान रखना

रानी-मैं रखती हूँ ,आप अवी को बताइए

मम्मी-उसको क्या बताना है. चुड़ेल तुम बनी थी.

आंटी की बात सुनकर रानी शरमा कर अपने रूम मे भाग गयी.

मैं आंटी के साथ बाते करने लगा.

मम्मी-अवी रानी का ध्यान रखने के लिए थॅंक्स, उसे मेले मे बहोत खुशी मिली ये देख कर अच्छा लगा.

अवी- रानी का ध्यान तो मुझे ज़िंदगी भर रखना है .आप बेफिकर रहिए.

मम्मी-मुझे तुम पर पूरा विश्वास है.रानी तुम्हारे साथ खुश रहती है.

अवी-और आगे भी रानी को खुश रखूँगा.

हम बात कर रहे थे कि रानी साड़ी पहन कर बाहर आ गयी.

रानी ने पेटिकोट और कमीज़ के उपर साड़ी पहनी थी.

रानी को साड़ी मे देख कर आँखो को सुकून मिला.

रानी-मम्मी ये साड़ी अवी ने खरीद कर दी है

मम्मी-तुम तो परी लग रही हो.

और रानी अपने रूम मे चली गई और फिर से दूसरी साड़ी पहन कर आ गयी.

रानी-मम्मी ये चाची ने दी है. अच्छी है ना

मम्मी-बहोत अच्छी है

अवी-तुम क्या सब पहन कर दिखाने वाली हो

रानी-हाँ, और तुम जाने का सोचना भी मत

और रानी दूसरी साड़ी पहन कर आ गयी.

रानी-मम्मी ये नीता बुआ की साड़ी है. मैं ने एक बार पहनी तो उनको मुझ पे अच्छी लगी तो मुझे दे दी. मैं ने मना किया पर ज़िद करके मुझे दे दी.

मम्मी-सिंपल होते हुए अट्रॅक्टिव है.

फिर रानी एक एक करके ड्रेस पहन कर दिखाने लगी.

लास्ट मे रानी जीन्स और टी शर्ट पहन कर आ गयी.

इस ड्रेस मे रानी हॉट लग रही थी.

मम्मी-रानी ये क्या है.

अवी-आंटी मैं ने दिया है.

मम्मी-अवी , तुम रानी को सर चढ़ा रहे हो.

अवी-कुछ नही होता आंटी ,अभी तो एंजाय करने के दिन है

मम्मी-जैसा तुम ठीक समझो ,तुम दोनो बैठो मैं चली आराम करने

आंटी के जाते ही मैं ने रानी को अपने पास बैठने को कहा.

अवी-रानी तुम इस ड्रेस मे हॉट लग रही हो

रानी-थॅंक्स पर कुछ अनकंफर्ट्ब्ल लग रहा है.

अवी-दिखाओ

रानी खड़ी हो गयी.

रानी के खड़े होते मैं उसके जीन्स पर हाथ लगा कर देखने लगा.

रानी चुप चाप खड़ी थी .रानी का मज़ा लेने के लिए मैं ने जेंस की ज़िप खोल दी.

ऐसा करते रानी मुझे दूर हो गयी. और मेरे तरफ गुस्से से देखने लगी.

अवी-रूको लगाना मत,मैं लगा देता हूँ

रानी-नही

अवी-प्लीज़

रानी-तुम्हारे इरादे ठीक नही लग रहे

अवी-प्लीज़

रानी ने मेरी रिक्वेस्ट कबुल की.

रानी मेरी पास आ गयी.

रानी के पास आते ही मैं अपना मूह उसकी ज़िप के पास ले गया .

रानी पीछे सरक रही थी पर मैं ने उसे जाने नही दिया.

रानी को लगा कि मैं ...

मैं ने ज़िप को अपने दातों मे पकड़ कर उपर करना शुरू किया.

मैं ने सपोर्ट के लिए रानी के चूतड़ पर हाथ लगा दिया.

ज़िप उपर होते ही रानी ने अपनी आँखे बंद कर ली.

ज़िप बंद होते ही मैं ने ज़िप वाली जगह पर किस किया और रानी को छोड़ दिया.

रानी भागते हुए अपने रूम मे चली गयी और बेड पर लेट गयी.

मैं भी रानी के पीछे चला गया

रानी अपना सर पिल्लो मे छुपा कर लेट गयी. मैं रानी के बाजू मे लेट गया

मैं रानी को और डिस्ट्रब ना करते हुए उसके साथ सो गया.

 


733

थोड़ी देर आराम करने के बाद आंटी हमारे पास आ गयी.

हम इस तरह सोते हुए देख कर आंटी शॉक्ड नही हुई. उनको यकीन था कि हम ऐसा वैसा कुछ नही करेंगे जिस से शर्मिंदा होना पड़े.

आंटी ने रानी के सर पर प्यार से हाथ घुमाया .और रानी के मासूम चेहरे पे खुशी देख कर उनको अच्छा लगा.

आंटी ने बड़े प्यार से रानी को उठाया .

रानी-मम्मी सो ने दो ना

मम्मी-उठो ,अवी को जाना होगा ना, उसके लिए टी नही बनाओगी

रानी-अभी बनाती हूँ , अवी कहाँ है

मम्मी-वो सो रहा है. उसे उठा दे ,तबतक मैं छत से कपड़े निकाल कर लाती हूँ.

आंटी छत पर चली गयी और रानी मुझे उठाने लगी.

रानी अपने बालो को मेरे चेहरे पे घुमाने लगी.

रानी के बालो से मेरी नींद टूटने लगी. रानी ने मेरे कान के पास गुदगुदी करते मेरी नींद खुल गयी.

रानी-अवी उठो ना ,

अवी-तुम भी मेरे साथ सो जाओ,

रानी-नही.मम्मी ने अभी हमे सोते हुए देखा है. और तुम्हें उठने के लिए कहा है. चलो उठो

अवी-किस मिलेगी तभी उठुंगा वरना रहने दो.

रानी-तुम फ्रेश हो जाओ फिर दूँगी

अवी-मुझे अभी चाहिए, और अभी से तुम प्रॅक्टीस कर लो ,शादी के बाद तुम्हें मुझे किस करके उठाना होगा.

रानी-भूल जाओ मैं ऐसा नही करूँगी

अवी-मैं वापस सो रहा हूँ.

और मैं ने अपनी आँखे बंद की ,

रानी ने स्माइल की और मेरे पास आकर मेरे कान मे कहा कि "तुम्हें भी सोने से पहले मुझे किस करना होगा" और रानी मुझे किस करके रूम से भाग गयी

रानी की इसी अदा ने मुझे उसका दीवाना बना दिया.

मैं फ्रेश होकर रानी के हाथो की टी पी कर खुद को तरोताज़ा महसूस करने लगा.

रानी और आंटी के साथ बिताया हुआ समय कैसे बीत गया पता नही चला.

शाम हो गयी. सुबह से शाम ,अब मेरे वापस जाने का टाइम हो गया था.

मेरे जाने की बात करते रानी आंटी के सामने मेरे गले लग गयी.

मम्मी-अवी नेक्स्ट टाइम अपनी चाची को साथ लाना

अवी-जी ज़रूर, चाची भी आप से मिलना चाहती है.

रानी और आंटी के साथ कुछ समय बिताने के बाद मैं घर चला गया.

घर जाकर पहले चाची को बताना पड़ा कि आंटी ने मुझे रोक लिया था. बिना खाना खिलाए जाने नही दे रही थी.

चाची को बताया कि रानी की मम्मी उन से मिलना चाहती है. चाची ने उनसे जल्दी मिलने का बोल कर अपने काम मे लग गयी.

मैं ने सनडे के बारे मे क्या सोचा था कि आज प्रेक्टीकल लिख कर कंप्लीट करूँगा पर पूरा दिन रानी के साथ बिता दिया.

अभी मेरे पास शाम और रात बाकी है ,

मैं ने डिसिशन लेते काम मे लग गया. अपने कमरे मे जाकर अपने बुक्स ढूँढने लगा. पर मुझे बुक्स कही मिल नही रही थी

अवी-चाची ,चाची

चाची ने हॉल मे रह कर मुझे जवाब दिया

सी चाची-क्या हुआ अवी, ऐसे चिल्ला क्यू रहे हो ,बच्चे सो रहे है.

मैं चाची के पास चला गया.

अवी-चाची मेरे कुछ बुक्स गायब है. आपने देखी है ,

सी चाची-मुझे कुछ नही पता, वही होगी इधर उधर पड़ी,

अवी-मैं ने पूरा कमरा देख लिया.पर कही नही मिली

सी चाची-कोमल से पूछ लो ,शायद वो लेकर गयी होगी.

अवी-वो क्यूँ लेकर जाएगी.

सी चाची-हम तुम्हारे बुक्स लेकर क्या करेंगे.

अवी-ठीक है. मैं कोमल के पास जाकर पूछता हूँ.

मैं कोमल से मिलने चला गया. कोमल अपने कमरे मे पढ़ाई कर रही थी.मैं कोमल के पास जाकर बैठ कर गया.

अवी-कोमल ,किस सब्जेक्ट की पढ़ाई कर रही हो.

कोमल-बाइयालजी ,

अवी-कोमल तुम ने मेरे प्रॅक्टिकल बुक कही देखी है

कोमल-वो वहाँ टेबल पर है

अवी-तुम ने कब ली थी.

कोमल-मेले मे तुम्हारे कमरे मे पानी के साथ खेलने के बाद मैं ने देखी थी. कुछ लिखा नही था. तुम मेले मे बिज़ी थे तो मैं ने लिख दिए

अवी-सच .मेरे प्रॅक्टिकल लिख दिए तुम ने

कोमल-हाँ, और केमिस्ट्री के चेक करा कर साइन भी ले लिए

अवी-ये कब किया.

कोमल-कल ,मैं अपने प्रॅक्टिकल चेक करने गयी थी कि तुम्हारा भी चेक करने के लिए रख दिया. कैमिस्ट्री के सर बस आँखे बंद करके साइन कर देते है.

अवी-तुम ने पता है क्या किया.

कोमल-तुम्हारी मदद की है

अवी-कोमल तुम्हारा जवाब नही है. मेरा कितना ख़याल रखती हो तुम

और मैं ने कोमल को गले लगा लिया.कोमल मेरे गले लगाने से खुश हो गयी.

अवी-कोमल इसके लिए तुम्हें ट्रीट दूँगा.

कोमल-मुझे भी तो तुम्हें क्विज़ जीतने की पार्टी देनी है

अवी-एक दिन तुम देना और दूसरे दिन मैं दूँगा.

कोमल-नही. अभी पढ़ाई के वजह से फ्री नही हूँ. फिर किसी दिन

अवी-ओके ,एग्ज़ॅम के बाद हम पार्टी करेंगे.

कोमल-ये ठीक रहेगा.

अवी-वैसे तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है.

कोमल-अभी तो टॉप गियर डाला है. 1 2 हफ़्तो मे 1 महीना की कसर पूरी कर लूँगी.

अवी-ये तो अच्छी बात है. वैसे स्कूटी चलाना सीखी कि नही.

कोमल-रानी से सीख ली. लेकिन अब तो तुम्हारा साथ कॉलेज जाउन्गी

अवी-कल से हम दोनो होगे. मुझे स्कूटी की जगह कुछ और देना चाहिए था.

कोमल-स्कूटी मुझे पसंद आई. और स्कूटी बुक हो गयी है

अवी-मैं समझा नही

कोमल-सम्मर मे मैं चलाउन्गी. फिर कविता कॉलेज जाने के लिए इस्तेमाल कर लेंगी. मैं तो तुम्हारे साथ ही जाउन्गी

अवी-ये तो बढ़िया हो गया. अगले साल कविता और लीना भी हमारे साथ कॉलेज मे आएगी.

कोमल-कोई भी आए मैं तुम्हारे साथ कॉलेज जाउन्गी. ये याद रखना

अवी-तुम्हारी जगह कोई नही ले सकता.

मेरी बात सुनकर कोमल खुशी से मेरे गले लग गयी.और मेरे गाल पर किस किया.

अवी-ये क्या कर रही हो. नेहा बुआ देखेंगी तो क्या कहेंगी

कोमल-सॉरी ,आगे से ध्यान रखूँगी

और फिर से कोमल ने मेरे गाल पर किस किया.

और हँसने लगी

अवी-तुम हस्ती हुई ज़्यादा खूबसूरत लगती हो.

अपनी तारीफ सुनकर कोमल शरमा गयी.

अवी-चलो मैं चलता हूँ. पढ़ाई करनी है.

कोमल-मैं मदद करूँ

अवी-तुम्हारे बिना मैं पढ़ाई कर ही नही सकता.

कोमल-तो कल से यहीं आ जाओ

अवी-नेक्स्ट हफ्ते से ,अभी प्रेक्टिकल की टेन्षन है

कोमल-वो मुझ पे छोड़ दो मैं देख लूँगी

अवी-सब तुम ही करोगी तो मैं क्या करूँ

कोमल-तुम आराम करो ,मुझसे जितना होगा वो मैं करूँगी.

अवी-तुम से जीतना मुस्किल है.

कोमल-एक बार हार चुकी हूँ, और उस हार से मैं आज इतनी खुश हूँ (दिल हारने की बात हो रही है)

अवी-क्या कहा

कोमल-कुछ नही. मुझे हरा दो मैं तुम्हें जीतते हुआ देखना चाहती हूँ

अवी-लेकिन मैं तुम्हें हारते हुए नही देख सकता.

कोमल फिर से मेरे गले लग गयी

कोमल-जब तक तुम मेरे साथ हो मुझे कोई हरा नही सकता.

अवी-हारने जीतने की बाते बहोत हुई. अब चलता हूँ

कोमल-गुड नाइट

कोमल से प्रेक्टिकल लेकर मैं घर आ गया.

और अपनी पढ़ाई मे लग गया.

 
734

1 हफ़्ता मैं ने पढ़ाई करने मे बिता दिया.

रानी और कोमल मेरी पूरी मदद कर रह थी

नोट्स, प्रेक्टिकल, और मेरी पढ़ाई का पूरा ध्यान रख रही थी.

आज सॅटर्डे है. कल मैं ने पूरे प्रेक्टिकल कंप्लीट कर दिए.

पूरे हफ़्ता कॉलेज मे बिताने के बाद मैंने आज रिलॅक्स होने का सोचा.

कोमल ने भी आज कॉलेज जाने से मना किया .वो घर रह कर पढ़ाई करना चाहती थी.

मैं हमेशा की तरह सुबह उठ कर कसरत करने लगा.

फिर फ्रेश होकर चाचा के साथ नाश्ता कर रहा था कि बाहर कार के हॉर्न की आवाज़ सुनाई दी.

हम ने हवेली की कार वापस भेज दी थी.फिर ये हॉर्न ,शायद कोई आया होगा.

विद्या ने जाकर गेट खोल कर देखा तो सामने ठाकुरजी और ठकुराइन खड़े थे

चाची ने देर ना करते हुए आगे जाकर ठाकुरजी और ठकुराइन का स्वागत किया.

ठाकुरजी और ठकुराइन को इस तरह सुबह सुबह हमारे यहाँ देख सब शॉक्ड हो गये.

ठाकुरजी और ठकुराइन को चाची ने इज़्ज़त के साथ घर के अंदर बुलाया.

ठाकुरजी-आप लोगो हमे देख सर्प्राइज़्ड हुए होगे

चाचा-आप ऐसे अचानक ,बता दिया होता तो मैं हवेली आ जाता मिलने के लिए .

ब चाची-मीना ,जा जाकर नाश्ता और खाने का देख

सी चाची-जी दीदी

ठकुराइन-मीना रहने दे,नाश्ता तो हम हवेली पे करेंगे अवी के साथ, हम अवी को हवेली ले जाने आए है.

ब चाची-अवी को

ठकुराइन-क्यू हम अवी को हवेली नही ले जा सकते.

ब चाची-आप को पूछने की क्या ज़रूरत है. आप एक आवाज़ देती तो मैं अवी को हवेली भेज देती.

ठकुराइन-अवी ने काम ही ऐसा किया है कि हमे खुद आना पड़ा.

म चाची-क्या किया अवी ने

ठाकुर-अवी ने क्या नही किया. मेले का काम किया ,और

सी चाची-ये लीजिए नाश्ता ,

ठकुराइन-इसकी क्या ज़रूरत थी.

ब चाची-आप कभी कभी तो आती है. हमे इतना करने का मोका तो मिलता है

ठाकुरजी-तो सब कैसा चल रहा है

चाचा-जैसा था वैसा ही है, खेत और घर

ठाकुरजी-मेरी मानो तो अवी की मदद लो ,जल्दी सब ठीक मिलेगा. अवी का दिमाग़ और तुम्हारी मेहनत , कामयाबी ज़रूर मिलेंगी.

चाचा-देखते है, अभी तो अवी पढ़ना चाहता है.

ब चाची-आप बता रहे थे कि अवी को हवेली ले जाने आए है

ठकुराइन-हाँ, अवी के लिए दावत रखी है.उसकी कामयाबी के लिए

सी चाची-ये तो अच्छी बात है

ठकुराइन-उसके लिए इतना तो करना ही था.

ब चाची-अवी जा तैयार हो जा हवेली जाने के लिए.

अवी-जी चाची

ठकुराइन-हम तो सबके लिए दावत रखने वाले थे पर कुंवर ने कहा कि वो जाने से पहले अवी से मिलना चाहता है,इसी लिए आज स्पेशल अवी के लिए दावत रखी है.

ब चाची-कहाँ जा रहा कुंवर

ठकुराइन-वो ...

चाचा-मीना टी लेकर नही आई.

सी चाची-जी अभी लाती हूँ ,

छोटी चाची टी लेकर आ गयी.

ठकुराइन-सुमन तुम भी ना, टी पिलाए बिना जाने नही देती

ब चाची-अगली बार खाना खा कर जाना होगा.

ठकुराइन-मैं ना कहूँगी तो तुम बिना खाना खिलाए जाने थोड़ी दोगि.

ठाकुरजी-अवी कहाँ रह गया.

ब चाची-मीना जाकर देख ,अवी को देर क्यूँ हो रही है.

अवी-चाची

ठकुराइन-सुमन तुम्हारे भतीजे को लेकर जा रही हूँ. तू फिकर मत करना ,अच्छा खिला कर भेजूँगी.

ब चाची-मोटा बना मत देना ,

ठाकुरजी-अच्छा अब हम चलते है ,

ठाकुरजी और ठकुराइन मुझे अपने साथ लेकर हवेली चले गये.

सी चाची-दीदी अवी कितना बड़ा हो गया ,ठाकुरजी खुद उसे बुलाने आए है.

ब चाची-हाँ, अवी के लिए मैं बहोत खुश हूँ

म चाची-आज तो हमारा लिए खुशी का दिन है

चाचा-मैं खेत मे जा रहा हूँ. मेरा टिफिन कहाँ है.(अवी की जगह मैं होता तो ,मेले का काम मुझे करना चाहिए था.बिना वजह अवी को दिया )

सी चाची-जी अभी लाती हूँ.

इधर मैं ठाकुरजी के साथ हवेली आ गया.

इस तरह ठाकुरजी और ठकुराइन का मुझे हवेली ले जाना कुछ ठीक नही लग रहा था.

रणजीतसिंघ ने भी कुछ नही बताया ,पता नही हवेली जाकर क्या होगा

हवेली भी आ गयी.

मैं ठाकुरजी और ठकुराइन के साथ हवेली के अंदर चला गया.

सब हॉल मे बैठ कर कर हमारा इंतज़ार कर रहे थे.

मेरे आते ही सब खड़े हो गये जैसे कोई राजा आया हो.

एक साथ पूरी ठाकुर फॅमिली को देख कर मैं सर्प्राइज़्ड हुआ, पर अच्छा भी लगा कि वो एक फॅमिली की तरह बैठे है.

मैं जाकर सोफे पर बैठ कर गया.

रणजीतसिंघ-अवी तुम तो गायब ही हो गये.मेला ख़तम होते

अवी-हाँ वो कॉलेज जाना शुरू किया है.

कुवरसिंघ-हम से मिलने तो आ जाते

अवी-मैं आने वाला था , पर पहले आपने बुला लिया. वैसे तबियत कैसी है

कुवरसिंघ-अब तो फिट हूँ. रेशमा ने पूरा ख़याल जो रखा है.

अवी-वैसे वो हॉस्पिटल वालों को पैसे देने थे

कुवरसिंघ-मैं तो भूल ही गया था. भैया

रणजीतसिंघ-मैं अवी को पैसे दे दूँगा.

अवी-पायल कैसी है तबीयत

पायल-मैं ठीक हो गयी हूँ पर

ठकुराइन-मैं ने कहा ना और 1 महीना आराम करने को

पायल-मैं ठीक हूँ ,मुझे आराम करने की ज़रूरत नही है

ठकुराइन-तुम्हें कहा ना ,जाओ अपने कमरे मे जाकर आराम करो

पायल गुस्से मे अपने कमरे मे चली गयी.

ठकुराइन-जाने दो उसे ,

ठाकुरजी-अवी तुम्हें सिर्फ़ दावत के लिए नही बुलाया है

कुवरसिंघ-तुम्हारे लिए एक सर्प्राइज़्ड है

अवी-मेरे लिए सर्प्राइज़्ड ,इसकी क्या ज़रूरत थी

ठकुराइन-इसकी तो बहोत ज़रूरत थी. तुम ने हमारे लिए जो किया उसके बदले मे हम तुम कुछ देना चाहते है.

अवी-क्या?

ठाकुरजी-अवी तुम ने कुंवर की जान बचा कर और कुंवर को बदलने मे जो मदद की उसके लिए हम तुम्हें कुछ देना चाहते है

अवी-मुझे कुछ नही चाहिए,मैने तो कुंवर की मदद इस लिए नही की ,कि मुझे कुछ मिले ,

रणजीतसिंघ-मैं ने कहा था ना कि अवी कुछ नही लेगा.

ठाकुरजी-हमे पता है योगेंद्रसिंघ का पोता है. उसके जैसा ही है.

ठाकुरजी -रंजीत वो पेपर देना

रणजीतसिंघ-ये लीजिए

ठाकुरजी-अवी हम सब डिसाइड किया था कि तुम्हें कुछ दिया जाए. रंजीत ने कहा कि तुम कुछ नही लोगे इस लिए हम ने पहले एक गिफ्ट तुम्हारे नाम किया है. और सब ने तुम्हारा नाम सुनते हाँ कर दी. पता नही तुम ने मेरी फॅमिली पे क्या जादू किया है पर सब तुम्हें बहोत मान ने लगे है. ये लो पेपर ,हम ने हमारी एक फॅक्टरी मे तुम्हें 50% पार्टनर बनाया है.

अवी-इसकी क्या ज़रूरत थी.

कुवरसिंघ-ज़रूरत थी. मैं आज जो हूँ तुम्हारे वजह से हूँ.

ठकुराइन-हमारी फॅमिली को एक करने के बदले मे इतना तो कर ही सकते है हम

ठाकुरजी-मना मत करना. हम सब की तरफ से,

अवी-लेकिन मैं इसका क्या करूँगा. मुझे फॅक्टरी के बारे मे कुछ पता नही है,मैं तो पढ़ाई कर रहा हूँ.

रणजीतसिंघ-इसी लिए 50% पार्टनर बनाया है. तुम्हारे पढ़ाई ख़तम होने तक मैं देख लूँगा .जो प्रॉफिट होगा वो तुम्हारे अकाउंट मे डाल दूँगा.

अवी-लेकिन

ठकुराइन-बेटा रख लो, हमारा प्यार समझ कर रख लो

अवी-ठीक हर पर मेरी एक शर्त है

रणजीतसिंघ-क्या?

अवी-आप इसके बारे मे चाचा और चाची को कुछ नही बताएँगे.

ठाकुरजी-वो क्यूँ?

अवी-क्यूँ कि अगर चाची को पता चला कि मैं गुन्डो से लड़ा था तो वो मुझपे गुस्सा होगी. और इतनी बड़ी बात छुपाने के वजह से मुझसे बात नही करेंगी. और मैं चाची के बिना रह नही सकता.

ठकुराइन-जैसा तुम कहोगे वैसा ही होगा. रंजीत इस बात का ध्यान रखना

रणजीतसिंघ-जी माँ, मैं अवी के बड़े होने तक पूरा ध्यान रखूँगा.

कुवरसिंघ-अवी थॅंक्स, तुम्हारा मुझ पे ज़िंदगी भर अहसान रहेगा.

ठाकुरजी-अवी एक बात बताना

अवी-हाँ

ठाकुरजी-तुम ने कुंवर पे क्या जादू कर दिया है.

अवी-मैं ने कुछ भी तो नही किया

ठाकुरजी-कुछ तो किया है तुम ने. तभी इसने 50 अनाथ लड़कियो को गोद लिया है. उनका पूरा खर्च उठा ने का फ़ैसला किया है. उनकी पढ़ाई, उनके लिए घर, खाना पीना, कपड़े ,किताबें, पूरा ध्यान रख रहा है. और तो और मेरा नाम दिया है पिता की जगह. मेरा नाम उँचा किया है कुंवर ने ,और रंजीत ने, सच बताना तुम ने क्या किया.

अवी-(चलो अच्छा हुआ ,कुवरसिंघ को जैल मे डाल कर क्या होता वो कुछ दिन जैल मे रहता पर यहाँ तो 50 लड़कियो को सहारा मिला है, ) आप खुश हैना

ठाकुरजी-मेरा बेटा ऐसा भी कर सकता है मैं ने सोचा नही था. मैं बहोत खुश हूँ ,आज न्यूज़ पेपर मे कुंवर के काम की न्यूज़ आई है. सब कुंवर का नया रूप देख कर शॉक्ड है.

अवी-कुवरसिंघ को अपनी ग़लती का अहसास हुआ इस से ज़्यादा क्या चाहिए

कुवरसिंघ-ये सब अवी की वजह से हो सका है.

कुवरसिंघ को सबक सिखाने का इतना अच्छा फ़ायदा देख कर अच्छा लग रहा है.

चलो अच्छा है. कुंवर ने अच्छे बनने की तरफ पहला कदम तो उठाया है.

कुंवर के अच्छे बनने से किसी को तो फ़ायदा हुआ है.

50 लड़कियो को गोद लेने का आइडिया अच्छा है.

जब किसी को अपनी ग़लती का अहसास होता है तो वो प्रायश्चित करने के लिए ऐसे काम करता है जो कभी ने सोचे नही थे

आज इसी बात की चर्चा शुरू होगी गाओं ,शहर मे,

जैल ना भेजने का मेरा फ़ैसला आज सही साबित हुआ.

लड़कियो के साथ जो कुंवर ने किया है उसके बदले मे अनाथ लड़कियो को गोद लेने का फ़ैसला ज़रूर रेशमा ने दिया होगा कुंवर को.

कुंवर के इस फ़ैसले से ठाकुरजी खुश है. इस से ज़्यादा मुझे क्या चाहिए. दादाजी के दोस्त की मदद करना मेरे लिए दादाजी को खुश करने जैसा था.

 


735

ठाकुर-अवी तुम ने कुंवर को कुछ ज़्यादा ही अच्छा बना दिया है

अवी-क्यू क्या हुआ

ठकुराइन-वो हवेली छोड़ कर जाना चाहता है.

ठाकुरजी-हम इसे कितना रोक रहे है पर ये है कि हवेली से दूर जाना चाहता है

कुँवरसिंघ-पिताजी, मैं ने ठाकुर के नाम पर बहोत दाग लगाए है. मुझे उस का पश्चाताप करना होगा.

ठाकुरजी-तुम यहाँ रह कर भी तो पश्चाताप कर सकते हो

कुँवरसिंघ-नही पिताजी,हवेली और ठाकुर बन ने के लायक सिर्फ़ भैया है.वो असली ठाकुर है. उनको ठाकुर और भाभी को ठकुराइन बना दो.( अवी ने कुंवर का ब्रेनवाश जो किया है. कुंवर के दिमाग़ मे रंजीत के बारे मे इतनी अच्छी बातें डाली कि कुंवर खुंद रंजीत को ठाकुर बनाने को कह रहा है.)

ठाकुरजी-वो बना दूँगा.पर तुझे हवेली छोड़ कर जाने की क्या ज़रूरत है

कुँवरसिंघ-पिताजी मुझे जाने दीजिए. मैं यहाँ रहूँगा तो मुझे पुरानी बातें याद आती रहेंगी. मैं यहाँ से दूर जाकर रेशमा के साथ नयी ज़िंदगी जीना चाहता हूँ(कुंवर यहाँ से दूर जाएगा तो मेले की बात भूल जाएगा. जो अवी के लिए अच्छा हॉंगा.)

ठकुराइन-कुंवर अभी तो हमे तुम्हारा प्यार मिला था और इतनी जल्दी छीन ना चाहते हो

कुँवरसिंघ-नही माँ, मैं हमेशा के लिए नही जा रहा हूँ. कुछ सालो के लिए, और मैं बीच बीच मे यहाँ आते रहूँगा.

ठाकुरजी-पर

कुँवरसिंघ-पिताजी मुझे नयी शुरुआत करने दीजिए. मैं यही पास मे रहूँगा. और मैं आप से मिलने आता रहूँगा.

ठकुराइन-ठीक है, पर जल्दी वापस आना होगा.

रणजीतसिंघ-माँ , पास मे ही तो जा रहा है. यहाँ से 7 8 घंटे का रास्ता है

ठाकुरजी-क्या मतलब

रणजीतसिंघ-कुंवर चाहता है कि वो नयी फॅक्टरी जो हम खरीद रहे है वो उसके नाम कर दो.वो वही रह कर फॅक्टरी देखेगा.

कुँवरसिंघ-और बाकी की फॅक्टरी भैया के नाम करके उनको ठाकुर बना दीजिए

ठाकुरजी-तुम्हें पता है तुम क्या बोल रहे हो

कुँवरसिंघ-हाँ, मैं एक फॅक्टरी मे खूंश हूँ,और हम ने कल मिल कर के ये फ़ैसला किया , भैया ही ठाकुर बनने लायक है. उनको ठाकुर बना दीजिए.

रेशमा-पिताजी ये हमने सोच समझ कर फ़ैसला किया है. आप अपनी इजाज़त दे कर इनको नयी शुरुआत करने का मोका दीजिए.( रेशमा को तो ठकुराइन बनने मे इंटेरेस्ट नही था. और ठकुराइन की जान बचा कर अपना प्यार दे कर रणजीतसिंघ ने कामिनी को ठकुराइन बनाने को मना लिया.बिना किसी झगड़े के रंजीत ठाकुर और कामिनी ठकुराइन बन गयी.)

ठाकुरजी-तुम क्या कहती हो

ठकुराइन-मुझे कोई ऐतराज़ नही है.

ठाकुरजी-ठीक है. मैं जल्दी ही वकील को बुला कर फॅक्टरी दोनो के नाम करता हूँ. और पायल के नाम हमारे खेत करता हूँ.

ठकुराइन-ये अच्छा रहेगा.हम पहली बारिश बाद एक अच्छा सा दिन देख कर रंजीत को ठाकुर और कामिनी को ठकुराइन बना देंगे.

रणजीतसिंघ-सब की सहमति से, सब को खूंश देख कर अच्छा लग रहा है.

कुँवरसिंघ-भैया हम मंडे को नयी फॅक्टरी लेने चलेंगे. और साथ मे उन 50 लड़कियो के लिए वहाँ नया घर देख लेंगे ,

रणजीतसिंघ-तुम टेन्षन मत लो हम सब ठीक करेंगे . तुम्हारे लिए भी तो घर देखना होगा. वो भी देख लेंगे

ठाकुरजी-ये खुंसिया अवी की वजह से मिली है. वरना मैं सोच रहा था कि दोनो मे ठाकुर बन ने के लिए जगड़े होगे

ठकुराइन-मेला हमारे लिए खुशिया लेकर आया है.

कामिनी-चलो खाने का टाइम हो गया

ठकुराइन-रेशमा पायल को बुलाना ज़रा

कुँवरसिंघ-अवी चलो मेरे साथ फ्रेश होके आते है.

हम खाने के लिए फ्रेश होने चले गये.मैं कुँवरसिंघ और रेशमा पहले उनके कमरे मे चले गये.

कुँवरसिंघ-रेशमा तुम मेरे फ़ैसले से खुश हो ना

रेशमा-हाँ, वहाँ हम अपनी छोटी फॅमिली के साथ नयी शुरुआत करेंगे

कुँवरसिंघ-छोटी नही. तुम मेरी 50 बहनो को भूल गयी.

रेशमा-इतनी सारी ननद पाकर मैं खूंश हूँ.

कुँवरसिंघ-तुम्हें ठकुराइन ना बन ने का गम होगा ना

रेशमा-नही. मुझे बस तुम चाहिए. तुम्हारा प्यार, मुझे ठकुराइन नही बनना है.हम साथ है इसी मे मैं खूंश हूँ

कुँवरसिंघ-ये सब अवी की वजह से हो सका है.

रेशमा-अवी ,तुम्हारा शुक्रिया कैसे अदा करूँ समझ नही आ रहा

अवी-शुक्रिया अदा करने के लिए पूरी ज़िंदगी बाकी है. पहले पायल को बुला लीजिए

रेशमा पायल के कमरे मे चली गयी. और मैं कुँवरसिंघ के साथ इधर उधर की बातें करने लगा.

थोड़ी देर बाद रेशमा वापस आ गयी.

पायल बहोत गुस्से मे है. वो किसी की बात नही सुन रही है.

रेशमा को बता कर मैं पायल के कमरे मे चला गया.उसे बुलाने के लिए.

पायल बेड पर लेटी हुई थी. उसने अपना चेहरा पिल्लो मे छुपा कर रखा था

पायल-भाभी मुझे किसी से बात नही करनी.

अवी-मुझ से भी.

मेरी आवाज़ सुनते ही पायल ने पलट कर देखा और मुझे देखते ही उठ कर मेरे गले लग गयी.

पायल-इतने दिनो बाद मेरी याद आई.

अवी-मैं पहले भी आया था पर तुम सो रही थी.जिस से तुम्हें मिले बिना चला गया था

पायल-थॅंक्स भैया की मदद कर ने के लिए.

अवी-वो तुम्हारा भाई था इस लिए मदद की वरना मैं मदद नही करता.

पायल-सच

अवी-हाँ, चलो नीचे खाना खाने के लिए ,

पायल-मैं नही आने वाली.

अवी-क्यूँ?

पायल-माँ मुझे तुमसे मिलने नही दे रही है.

अवी-तुम्हें आराम करने की ज़रूरत है

पायल-मैं अब ठीक हूँ,

अवी-पर मैं बिज़ी हूँ. मुझे कॉलेज जाना होता है. पढ़ाई बाकी रही वो कवर करना है.फिर एग्ज़ॅम रहेंगा.और तुम्हें भी आराम चाहिए. तुम फिट हो जाओ फिर मैं तुम्हें खूंश करूँगा.

पायल-मेरा क्या होगा .मैं तो मर जाउन्गि.

अवी-तुम कुछ दिन आराम करो. फिर मैं तुम्हें कॉल करके बुलाया करूँगा. पर रोज नही.

पायल-ठीक है.

अवी-वैसे अब कैसी है वो

पायल-वो कौन

मैं ने पायल की चूत पर कपड़ो के उपर से हाथ लगाया

अवी-इसकी बात कर रहा हूँ

पायल-पहले की तरह हो गयी.

अवी-मैं नही मानता

पायल-खुद देख लो

मैं इसी का इंतज़ार कर रहा था. मैं ने सलवार का नाडा एक झटके मे खोला और सलवार नीचे गिर गयी.

पायल ने पैंटी नही पहनी थी. मैं ने कमीज़ को उपर किया और पायल की चूत को देखने लगा.

चूत पर छोटे छोटे बाल थे. शायद पायल ने शेव नही की. और पायल की चूत पर फटने का नामो निशान नही था.

अच्छा है पायल की चूत पहले जैसी हो गयी. फिर फाड़ने मे मज़ा आएगा.

मैं ने पायल की चूत को खोल कर देखा तो सब ठीक था.मतलब पायल के साथ चुदाई करने मे मज़ा आएगा

मैं ने पायल की चूत पर किस किया .और पायल के मूह से आअहह निकल गया.

फिर पायल ने कपड़े ठीक किए और हम नीचे आ गये जहाँ सब खाने की टेबल पर हमारा इंतज़ार कर रहे थे.

 
736

फिर हम सब ने खाना खा लिया. खाना खाने के बाद हम फिर से बातें करने लगे.

ठाकुरजी-अवी दावत पसंद आई.

अवी-ऐसी दावत का पहली बार मज़ा लिया है.

रणजीतसिंघ-चलो अवी तुम्हें फॅक्टरी दिखा कर आता हूँ

ठाकुरजी-हाँ, दिखा दो

कुँवरसिंघ-मैं भी चलता हूँ

रणजीतसिंघ-तुम यही रूको, और नयी फॅक्टरी की स्टडी करो, मैं अवी को फॅक्टरी दिकता हूँ और पार्टी मे लेकर जाउन्गा ,लोगो से मिलाउन्गा.

अवी-हाँ, चलो

फिर मैं रणजीतसिंघ के साथ फॅक्टरी मे चला.

गारमेंट की फॅक्टरी थी. काफ़ी बड़ी फॅक्टरी थी. थोड़ी देर फॅक्टरी मे घूमने के बाद रणजीतसिंघ मुझे अपने ऑफीस मे ले गया.

रणजीतसिंघ-अवी ये तुम्हारा ऑफीस है.

अवी-इसके लिए टाइम है. मैं अपनी पढ़ाई करने के बाद ऑफीस के बारे मे सोचूँगा.

रणजीतसिंघ-जैसा तुम कहो, बाकी बातें फार्महाउस पे चलके करते है.

अवी-हाँ चलो

सेक्रेटरी-सर ,कुछ क्लाइंट आए है.आप से मिलना चाहते है

रणजीतसिंघ-उनको कहो मैं बिज़ी हूँ

अवी-तुम मिल लो .मैं फार्महाउस जाकर आराम करता हूँ ,काम निपटा कर फार्महाउस आ जाना

रणजीतसिंघ-ठीक है. तुम सेक्रेटरी के साथ चले जाओ,तुम अवी का ख़याल रखना.

सेक्रेटरी-सर मैं अवी का पूरा ख़याल रखूँगी.

फिर सेक्रेटरी मुझे फार्महाउस पर ले गयी.

सेक्रेटरी-आज तुम हाथ मे आए हो.

अवी-चलो तुम्हारे खून से हाथ . लेता हूँ

सेक्रेटरी-बोलो क्या पियोगे

अवी-मैं शराब नही पीता

सेक्रेटरी-मैं तो पीती हूँ

सेक्रेटरी अपने लिए एक जाम बना कर मेरे पास आकर बैठ कर गयी.

उसने स्कर्ट और वाइट शर्ट पहन रखा था. वो पैरो पे पैर रख कर मेरे पास बैठ कर कर शराब पीने लगी.

अवी-तुम शराब क्यू पी रही हो

सेक्रेटरी-ताकि उस लड़की की तरह जिसके साथ टेंट मे तुम ने सेक्स किया था मेरी हालत ना हो जाए.नशे मे रहूंगी तो ज़्यादा दर्द नही होगा.

अवी-ऐसे तो मज़ा नही आएगा.

सेक्रेटरी-बस एक जाम और ये लो हो गया

जाम ख़तम होते ही मैं ने सेक्रेटरी के बालो को पकड़ कर उसके होंठो पे किस करना शुरू किया.

सेक्रेटरी मेरे साथ चुदाई करने के लिए कब से इंतज़ार कर रही थी .आज उसका इंतज़ार ख़तम हुआ था.

अवी-बोलो आज कितनी बार फाड़ दूं तुम्हारी.

सेक्रेटरी-सर के आने तक जितनी बार हो सके उतनी बार

अवी-फिर तो सिर्फ़ एक राउंड हो पाएगा.

सेक्रेटरी-कोई बात नही. अब तो तुम फॅक्टरी के मालिक हो .मिलते तो रहेंगे

अवी-तुम्हारी लिए तो आना पड़ेगा फॅक्टरी मे.

सेक्रेटरी-तुम जल्दी जाय्न कर लेना ,फिर मैं तुम्हें सिखा दूँगी.

अवी-पहले काम क्रीड़ा सिखा दो

सेक्रेटरी-वो तो तुम मुझ से अच्छे से जानते हो. आज भी मेले की वो चुदाई याद आती है.

अवी-वो चुदाई नही थी. तब तो गंद मारी थी.

सेक्रेटरी-इतना खुल मत बोलो .अजीब लगता है.

अवी-तो क्या बोलूं

सेक्रेटरी-आज सिर्फ़ आगे से करना

अवी-पिछवाड़ा क्या रंजीतसिंग के लिए बचा कर रखना है.

सेक्रेटरी-हाँ, सर ने कहा कि वो आजकी रात मेरे साथ बिताएँगे.

अवी-अच्छी बात है. चलो तुम्हारी इच्छा पूरी कर देता हूँ. आज सिर्फ़ चूत मारूँगा.

सेक्रेटरी-ऐसा खुल के मत बोलो. नीचे कुछ कुछ होता है.

अवी-थोड़ी देर मे बहुत कुछ होगा.

सेक्रेटरी-उसी के इंतज़ार मे कितने दिन से हो रही है.

अवी-आज तुम्हारी खुजली ख़तम कर देता हूँ. चलो बेडरूम मे

सेक्रेटरी-बेडरूम सिर्फ़ सर और मेडम का है. हमे यही करना होगा.

अवी-सोफे पर. चलो यही पर मज़ा करते है

सेक्रेटरी-शुरू करे

अवी-मैं तो शुरू हो गया हूँ. नीचे कुछ चुभ रहा है.

सेक्रेटरी-हाँ

अवी-देखो कितना बेताब है मेरा हथिया तुम्हारे अंदर जाने को

सेक्रेटरी-तो डाल दो

और इसी के साथ शुरू हुई मेरी और सेक्रेटरी की काम क्रीड़ा .

 


737

she was getting excited I could feel it in her words and tone in which she spoke that and next instant she placed her lips over mine and we started kissing. I can easily say that it was most wonderful kiss I have ever experienced in my sex life till now.

Secretary was into me so lovingly and got so engrossed in exploring my mouth that for few seconds I forgot to respond back and went unconscious in her love making. Along with sucking my tongue Secretay was releasing her saliva in my mouth and I was just gulping it.

After a while I too responded back to her. I also explored her mouth and sucked her tongue and we just went on eating each other like true lovers. She was over me and we both on sofa ; warm and cozy and soon after breaking the kiss secretay lifted my undershirt and ultimately took it out from my arms and started brushing her wet lips over my face and kissed me all around.

I was enjoying getting loved by her madly and next instant she moved down to my bare chest and started licking my skin; around my neck and after moving bit down she started sucking my nipples. I grunted in heavenly sensation and afterwards just went on moaning while holding her in my arm,ranjit have real jewel called secretary

I was also getting excited and eventually turned around her took her under me and responded back to her love making with same passion and kissed her all around her face.secretary was puffing in pleasure so was I and in due course my hands reached to her soft breasts and I squeezed them gently.

Ohhh Wow secretary was so soft and fleshy over her milks mounds that I couldn’t stop playing with them and I just went on clutching them with my hand over the soft cloth of my own shirt.

she told me to suck her melons and I immediately started unbuttoning her shirt and finally got a clear view of her luscious melons.

Ohhh…they were so big and luscious tipped with thick, long and erect nipples with wrinkled areolas. I reached to her breasts with my hands and I caressed them and praised about the size of her breasts, I cupped them in my hand and instantly took one of her milk mound in my mouth and started sucking her nipples with all my affection and in moment secretary seemed getting mad in lust.

I sucked her long and erect nipples one by one with all my affection and she enjoyed and eventually reached to my semi erect Penis with her hand

Holding my scalp she went on moaning in pleasure while feeding me like a mother and I just went on pleasuring her by sucking and squeezing her fleshy mounds. After sucking her both the melons properly, gradually I moved down to her belly and licked her naval and ultimately reached to her panty.

I could smell erotic aroma of her pleasure juices and next intant holding her panty from her waist I tried taking it out of her legs and secretary lifted her bottom to get herself naked. After that she take off my underwear and ultimately we both got naked.

secretary lied beside me again and eventually her hand moved over my monster. Ohh…that was real heaven for me.

Secretary took my Penis in her hand and started jerking I moaned with intense pleasure and in reflex tried reaching to her fuckhole with my hand, Ohhh…that was too good, knowing her basic nature and modern lifestyle I was expecting that she will be having lot of hairs free over her fuckhole and i found same thing ,she was soft and clean with hell of wetness.

She was looking at me with a smile while leaning over my crotch and jerking Penis with her hand and eventually took out her tongue and licked tip of my Penis. I liked it; above that it was a good view for a male like me to get aroused and I started getting harder and next instant Secretary took tip of my Penis in her warm mouth and sucked it tenderly.

I moaned nicely, it was so pleasurable, above that Secretary was looking gorgeous while doing that nasty act. I was getting harder and harder in her mouth itself and slowly she was taking my entire length in her mouth, heat and wetness of her mouth was increasing slowly and slowly her beautiful face was getting inflamed with my size.

Although I was feeling bit of pain too but because Secretary was tender in sucking me it was more of pleasure and I just went on grunting in weird but pleasant sensation while looking at my monster appearing and disappearing in her mouth. Secretary brought me to my full size just in few minutes but continued sucking me using plenty of her warm saliva and my belly rippled repeatedly in divine pleasure.

She massaged my balls with her other hand and that enhanced my excitement and I went harder and ultimately stopped her from sucking me. I wanted to fuck her now but she needed her fuckhole sucked and she lied down on the bed on her back. I got up half heatedly with a hope that sensing my mental state Secretary might stop me from sucking her fuckhole

but she needed that desperately and as I reached between her fleshy thighs she widened her fleshy thighs and told me suck her fuckhole in lust laden tone ,

I came between her legs and held her fleshy thighs wide with both the hands, I looked at Secretary fuckhole closely,

it was wet and swollen and ready for me to eat, aroma of her love juices was in the air all around me, I looked at her face and she smiled, she was breathing bit heavy while waiting for me to start sucking her and finally I went into her fleshy thighs while being on my knees. I tried to lick it and as I moved my tongue over her vertical slit Secretary trembled with excitement.

For couple of minutes it was really very good feeling, and Secretary pleasure moans were insisting me to continue licking her juices .

While licking her swollen slit I parted her pussy lips lightly with my rough tongue and dragged my tongue from bottom of her slit to up till the edge of her crack and Secretary face got arched, her eyes got shut and she moaned nicely and murmured erotically “aaaaaaaaahhhhhhhh oooooooohhhhhhhhh aaaaaahhhhhh….”

Her words drove me and I continued, I distended her thick and sodden pussy lips again with a powerful lick of my thick tongue and sucked her opening tenderly and Secretary started puffing erotically.I parted her pussy lips with my fingers and my tongue just rippled into her fuckhole.

Secratary gasped sharply to that, her belly rippled feverishly and her hips lurched erotically "Ohhhhh... God yes!" she cried and next instant Secratary lifted her legs in air and opened it wide to give more access of her pleasure hole to my mouth.

My tongue was over her fuckhole, I was licking and sucking her opening randomly and suddenly I pulled out one of her thick pussy lips with my lips and took it completely in my mouth and sucked it tenderly for few seconds and Secretary just went mad in pleasure.

Her gasping state was arousing me continuously and in that rising excitement holding her fleshy thighs apart I just went on going deeper in her fuckhole with my mouth and sucked her without any hesitation and Secretary started streaming out fresh, erotic juices.

By now I was gone mad in lust and as I felt intensity of her pleasure juices increasing I went further deep into her fuckhole and sucked her hard to take out every drop of her nectar and Secretary cried out erotically, she trembled helplessly and lurched in bottom in unbearable pleasure and ultimately pushed me away to stop sucking her fuckhole.

That was a point where she could not resist that pleasure anymore, her hairs were spread all over and her face was full of lust. She was looking gorgeous while puffing and I thought about plunging her beautiful face one more time, I got up and moved to face while jerking my monster back and forward with my own hand and told her to suck me again for a while and she asked me if we can get into 69,

Resting our heads over each other thighs my Penis was close to her mouth and her love hole was in front of my lips. Their Secretary held my monster in her hand and started jerking here I moved into her thighs.

Secratary broaden her thighs wide open so that I can reach to her fuckhole with my tongue comfortably and at the same instant took tip of my monster in her mouth and started sucking me tenderly and buried my mouth in her fuckhole like before. secretary kept on massaging my balls while sucking me with lot of her warm saliva and I explored every corner of her soft,

737A

after 69 position we lied over sofa and Our hands were over each other’s pleasure zones; while talking to each other Secretary was jerking my monster and I was rubbing her wet and soft love opening and like it can be expected I was getting harder and harder and wetness over Secretary fuckhole was also increasing.

I inserted my finger in her fuckhole, Secretary moaned softly with a sexy hum, “hmmmmm….” after that she lossing all the control and say that please replace your penis with finger , i told her to put the condom over my monster and she told me to put in without that,

I was surprised to hear that ,but it was expected answer , ranjitsingh mostly fuck her ass hole, she never enjoy with ass hole thats why she want my penis without condom in her wet pussy.

I responded to her with a smile ,Secretary opened her fleshy thighs further wide to settle me between them and just in few seconds tip of my thick and hard monster was resting over Secretarys wet love opening.

Now she was waiting for me to plunge her and I must say that she was looking beautiful lying under me like that with lustful expressions and to enhance her desperation I rubbed my Penis over opening and for a moment Secretary just went mad in pleasure and stopped me from doing that,

she was aroused like hell and she told me not to do that as she might cum and I stopped and further opened her thighs and holding my monster pushed it into her love hole and just in a fraction I slipped inside her womb till the root of my Penis.

Wow…She was so wet and hot, I grunted in pleasure with clamp of her starved fuckhole over my monster and as I reached to the depth of her fuckhole Secretary also panted erotically while getting crushed under me.

I halted for a moment and finally began fucking Secretary with a steady pace, I wanted to fuck her as long as possible and showing no hurry I moved in and out of her fuckhole in control and my steady pace made Secretary even more desperate, she needed me faster and she sprawled her legs further wide and her feet climbed backs of my thighs.

I just went on fucking her with all my control and Secretary clenched my pumping ass with her thighs and wrapped her arms around me nicely.

her gesture and pleasure moans aroused me just in few seconds and began to fuck her with deep screwing thrusts, my hips rose and fell, swung back and forward with bit more pace but somehow I continued pressing Secretary swollen cunt-lips with my balls with every down thrust and Secretary was delighted with that.

Couple of time I rubbed my croutch over her fuckhole after burring my whole monster in her womb and I felt significant changed in speed ,it was barely covering my pumping ass, we did not needed it either,

heat of our body was rose so high that we both were seating and secratary was looking stunning while panting in pleasure with the wetness over her face and all around her neck and breasts which were partially getting crushed under my shoulders.

Within a minutes time excitement rose further high andI started talking to Secretary while screwing her with all my passion

Her acceptance that she is enjoying aroused me and my pace rose further high and in rising lust

it was highest level of sexual excitement came ever in my life, I was getting mad in lust and I just wanted to fuck her as hard as possible.

Our bodies slapped together as I moved faster and faster,

my monster was slamming hard and deep in Secretary pleasure hole like a machine and each thrust made her gasp and jerk under me helplessly.

Secretary was in extreme pleasure, her big and heavy milk mounds were bouncing under my brutal thrusts, her eyes were closed, neck was arced, face was tilted to the right but her mouth was open and was moaning in gasping in bizarre fashion.

Her feet were locked behind my pumping ass and she was trying crushing my body in her arms and thighs.

She was at the verge of climax, so was I and suddenly Secretary cried out loud and arched her body in shock, extended her hands to the maximum and clenched my ass with all her strength and told me to stop fucking her “Ahhh…..Please….stop…please….Ahhhh….”.

As I was also reached to the point of no return I was not in state to stop and over hearing her request I just continued fucking but hardly for couple of seconds.

Finally while squeezing my ass together I also dived down into her womb and began to climax.

Secretary orgasmed hard and loud, she was holding ne with all her strength and I saw her trembling strangely while releasing her pressure with clenched teethes and just then I too came up with a loud cry and started discharging my gunk into her fuckhole.

That was the most wonderful fuck I have has till now, this kind excitement is very rare in mu other affair sex,

we both were soaked in sweat like hell and did not had strength even to go to the washroom.

I remained over Secretary for long and eventually we used one of the pillow covers to clean our wet and messy gentiles and threw it away on the floor.

For an instant Secretary was satisfied, she was relaxed and it was evident over her facial expressions

Holding each other’s naked body we kissed again and it was a long and delicate kiss with full of love and affection.

She hugged me with lot of affection and spoke out after a minute “Thank you very much…”

 
Back
Top