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मैं और मेरा परिवार

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थोड़ी देर बाद हम नॉर्मल हो गये

पायल-तुम ने मेरी जान निकाल दी

अवी-कितना झूठ बोलती हो

पायल-सच मे मेरी जान निकल गयी.

अवी-क्या तुम से सोचा था ऐसे कार मे कभी तुम्हारी चुदाई होगी

पायल-नही

अवी-कभी जंगल मे करने के बारे मे सोचा था.

पायल-नही.

अवी-इस तरह नंगी खुले घूमने के बारे मे सोचा था

पायल-नही.

अवी-फिर बताओ ये सब करने के बाद कैसा लगा

पायल-सच कहूं. इतना मज़ा आया कि क्या बताऊ ,फिर से करने का मन हो रहा है

अवी-फिर जान निकाली ये क्यूँ कहा

पायल-तुम ने इतनी दमदार चुदाई की, कि मैं जन्नत घूम आई,और जन्नत तभी जाते है जब जान निकल जाती है.

अवी-तो ऐसा कहो ना

पायल-अवी फिर से करे

अवी-आज नही. काफ़ी टाइम हो गया

पायल-फिर कल करेंगे

अवी-उसमे मज़ा नही आएगा

पायल-वो क्यूँ?

अवी-थोड़ा इंतज़ार के बाद चुदाई मे मज़ा आता है.और ऐसी चुदाई के बाद तुम्हारी चूत को आराम चाहिए ताकि हम दोनो को मज़ा आए. और रोज रोज चुदाई करूँगा तो तुम घर की मुर्गी दाल बराबर हो जाओगी. तुम तो ऐसी मुर्गी हो जिसको वीकांड पे खाना चाहता हूँ.

पायल-तो फिर कब करेंगे

अवी-नेक्स्ट सनडे

पायल-1 हफ़्ता मुझसे नही होगा.

अवी-मेरा कॉलेज होता है ऐसे मे सनडे के बिना दूसरा रास्ता नही है

पायल-ठीक है. पर एग्ज़ॅम के बाद ज़्यादा समय के लिए करेंगे

अवी-क्यू अपनी चूत का भोसड़ा बनाना चाहती हो,अपने पति के लिए कुछ रखो

पायल-मैं तो बस मज़ा लेना चाहती हूँ ,क्या पता शादी के बाद ना मिले

अवी-मज़ा लेना है तो एक रास्ता है मेरे पास

पायल-कौन सा

अवी-तुम्हारी गंद मारता हूँ

पायल-मुझे लगा ही था कि तुम यही कहोगे .

अवी-तो नेक्स्ट सनडे तुम्हारी गंद मारूँगा

पायल-नही. वहाँ मैं नही करूँगी. मुझे वो पसंद नही है.

अवी-करके देखो मज़ा आता है

पायल-मुझे नही करना वहाँ पर. मुझे पसंद नही है.

अवी-एक बार ट्राइ तो कर लो

पायल-नही ,प्लीज़ दुबारा वहाँ करने के बारे मे मत कहना .

अवी-चलो ठीक है. तुम्हारी चूत ही मारूँगा.

पायल-वो तुम्हारी है.मेरी शादी तक ,उसके बाद भी रहेगी पर मेरे पति की भी रहेगी.

अवी-तुम तो मेरी गुलाम हो ना

पायल-हाँ

अवी-तो तुम्हें मेरी बात मान नी पड़ेगी

पायल-हाँ

अवी-मुझे तुम्हारी गंद मारनी है

पायल-मार लो ,पर क्या तुम्हें मुझे खुश ना देख कर मज़ा आएगा.

अवी-सेनटी मत होना, नही मारूँगा .चले अब

पायल-हाँ, पर मुझे

अवी-तुम्हें क्या

पायल-मुझे बाथरूम जाना था

अवी-पी लगी है

पायल-हाँ

अवी-तो यही कर लो

पायल-तुम्हारे सामने मैं कैसे करूँगी.

अवी-उसमे क्या बड़ी बात है तुम नंगी मेरे उपर सो रही हो .तो पेशाब नही कर सकती

पायल-पर

अवी-अब मुझे तुम्हें पेशाब करते हुए देखना है. चलो जल्दी

पायल-तुम उधर देखना

अवी-पेड़ के पीछे जाकर करो

मेरे इतना कहते ही पायल ने चूत से लंड निकाल लिया. और पेशाब करने चली गयी.

मैं ने मोबाइल उठा लिया जिसमे रेकॉर्डिंग चालू थी. मैं मोबाइल को लेकर पायल के पास चला गया.

पायल आराम से पेशाब कर रही थी. और मैं उसके पीछे खड़ा होकर वीडियो बनाने लगा.

पायल को पेशाब करते हुए देख कर मज़ा आ रहा था.

पायल की चूत से निकल रही पेशाब को देख कर मज़ा आ रहा था.

पायल के पेशाब का आवाज़ सुन कर मुझे फिर से सेक्स करने का मन हो रहा था.

पायल की थोड़ी रेकॉर्डिंग करके मैं ने मोबाइल बंद किया .

पायल की पेशाब कर के हो गया और मैं पेशाब करने लगा.

पायल ने पलट कर देखा और मुझे अपने पीछे देख कर वो भी पेशाब करते हुए , शरमा गयी.

और भाग कर कार मे जाकर बैठ कर गयी.

मैं पेशाब करके पायल के पास आ गया

पायल-तुम वहाँ क्यू आए थे

अवी-पेशाब करने

पायल-दूसरी तरफ नही जा सकते थे

अवी-तुम ने वहाँ बाथरूम बनाया तो मैं कहाँ जाउन्गा.

पायल-जाओ मैं तुमसे बात नही करती

अवी-मत करो ,बस एक किस दे दो

पायल-नही दूँगी.

अवी-पायल ,मेरी प्यारी पायल , स्वीट पायल

पायल-मस्का लगाने का कोई फ़ायदा नही होगा.

अवी-सॉरी दुबारा ऐसा नही करूँगा

और पायल ने मुझे एक किस दी

और मैं कपड़े पहनने लगा .और पायल अपनी चूत को नाप्कीन से साफ करने लगी.

मैं ने कपड़े पहनते हुए कार स्टार्ट की

पायल-रूको मुझे कपड़े तो पहने दो

अवी-चलती कार मे पहन लेना .

पायल पिछली सीट पर चली गयी. मैं ने डोर और विंडो बंद कर दिए.

और कार हाइवे की तरफ ले जाने लगा.

पायल धीरे धीरे कपड़े पहनने लगी.

कार हाइवे पे आते ही मैं कार चलाना सीखने लगा.

पायल ने कपड़े पहन लिए .और खराब कपड़े बॅग मे डाल दिए.

मैं हाइवे पे कार चलाने लगा.पायल अपना मेकप ठीक करने लगी.

पायल के कपड़े पहने और मेकप करने तक मैं ने कार हाइवे चलानी सीख ली

पायल मेक अप करने के बाद आगे आ गयी

पायल-कैसे दिख रही हूँ

अवी-पहले की तरह दिख रही हो. तुम्हें देख कर लग नही रहा कि थोड़ी देर पहले जंगल मे कार के अंदर तुम्हारी चुदाई हुई है.

पायल-चलो कॉफी पीते है.

अवी-चलो

फिर हम ने एक होटेल मे जाकर कॉफी पी ली

फिर पायल ने मुझे कॉलेज के पास छोड़ दिया और वो हवेली चली गयी है.

मैं बाइक लेकर करीम के घर चला गया .करीम से कुछ नोट्स लेकर घर आ गया.

 
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घर आकर मैं ने छोटी चाची को पायल की चुदाई का वीडियो दिखा दिया.

छोटी चाची पायल वीडियो देख कर खुश हो गयी.

अवी-कैसा लगा.

सी चाची-चुदाई तो तू अच्छा करता है. पर वीडियो तो अच्छे से बनाया कर

अवी-चाची ये वीडियो बनाने के लिए कितने पापड बेलने पड़े.

सी चाची-मेरे लिए इतना नही कर सकते

अवी-किया ना चाची.इस से ज़्यादा कैसे कर पाता.

सी चाची-ठीक है. ये बता कल तुम विद्या को बाहर लेकर जा रहा है.

अवी-आपको किसने बताया

सी चाची-विद्या ने

अवी-और क्या बताया

सी चाची-कुछ नही, थोड़ा घूम कर आने की बात कर रही थी.

अवी-बड़ी चाची को पता है

सी चाची-नही ,मैं ने बताने से मना किया.

अवी-अच्छा किया आपने

सी चाची-तू उसे बाहर क्यूँ ले जा रहा है, कहीं उसके साथ

अवी-ऐसा कुछ नही है. वो घर मे रह कर बोर हो रही थी तो थोड़ा घुमा के ला रहा हूँ.आप कुछ भी सोचती है ,आप ये सोचिए कि उसे बाहर कैसे ले जाउ.

सी चाची-मैं क्या कर सकती हूँ

अवी-मेरी प्यारी चाची.

सी चाची-ठीक है मस्का मत लगा ,एक काम करती हूँ विद्या को समान लाने को कहती हूँ ,इसी बहाने वो घूम लेगी.

अवी-चाची आपका जवाब नही.आप इतना कैसा सोच लेती हो.

सी चाची-सोचना पड़ता है तभी तो किस मिलता है.

और मैं ने चाची को किस किया

फिर पढ़ाई करके सो गया.

सुबह होते विद्या इधर से उधर भाग कर अपने काम ख़तम करने लघ.

विधया खुश थी क्यूँ कि मेरे साथ बाहर जा रही थी.

छोटी चाची ने बड़ी चाची को बता दिया कि विद्या को अवी के साथ शहर भेज रही है. .

कुछ समान लाना है .और सीमा चाची के लिए मेडिसिन लाना है.

बड़ी चाची ने विद्या को मेरे साथ जाने की इजाज़त दे दी.

विद्या ने जाने की तैयारी कर ली और मैं विद्या को लेकर कोमल के घर आ गया.

कोमल विद्या को देख कर सर्प्राइज़्ड हुई.

कोमल-विद्या तुम

अवी-विद्या हमारे साथ शहर आ रही है.

कोमल-शहर ,कुछ काम है

अवी-विद्या को शहर से सामान लेना है.समान लेकर विद्या को वापस ले आएगा.

कोमल-लेकिन हम तो कॉलेज मे रहेंगे

अवी-विद्या समान लेकर कॉलेज आ जाएगी. इसी बहाने से वो हमारा कॉलेज देख लेगी. और रानी से भी मिल लेगी.

कोमल-ये तो अच्छी बात है. विद्या तुम्हें मैं कॉलेज दिखाउन्गी

विद्या-इसी बहाने से कॉलेज के दिन याद कर लूँगी.

फिर मैं विद्या और कोमल को लेकर शहर आ गया.

कोमल बीच मे बैठी थी. वो हमेशा ऐसा ही करती है.

ट्रिपल सीट मे कोमल बीच मे बैठ कर जाती है.

विद्या को लेकर पहले कॉलेज आ गया.

विद्या कॉलेज देख कर खुश हो गयी.

कोमल के साथ विद्या को देख कर रानी हमारे पास आ गयी.

रानी-विद्या तुम यहाँ.

कोमल-हमारा कॉलेज दिखाने लाया है

विद्या-रानी तुम तो मुझे भूल ही गयी. एक बार भी फोन नही किया.

रानी-सॉरी, पढ़ाई के चक्कर मे टाइम ही नही मिला

विद्या-कोई बात नही एग्ज़ॅम के बाद मिलने आना. वैसे कोमल तो गाओं मे रह कर मिलने नही आती

कोमल-विद्या. एग्ज़ॅम हो जाने दो फिर हम साथ मे रहेंगे

रानी-चलो विद्या कॅंटीन मे चल कर बाते करते है.

कोमल-कॅंटीन से शुरुआत करते है

अवी-मैं भी यहाँ पर हूँ

कोमल-तुम्हें कब से इन्विटेशन की ज़रूरत पड़ने लगी है.

रानी-तुम भी चल सकते हो

कोमल-अवी को भी ले चलते है वरना रोने लगेगा

अवी-मैं रोउंगा, गाओं चलो फिर बताता हूँ

कोमल-मैं मज़ाक कर रही थी.

फिर हम विद्या को लेकर कॅंटीन मे आ गये.

कॅंटीन मे आते ही तीनो बाते करने लगे. और मैं उनकी बाते सुन ने लगा.

लड़किया जब मिलती है तो ऐसे बाते करती है जैसे इस के बाद कभी बात करने नही मिलेंगी.

मैं कभी कोमल की तरफ मूह करके उसकी बाते सुनता तो कभी रानी की,

विद्या भी कहाँ पीछे रहने वाली थी. वो भी दोनो के साथ ऐसे घुल गयी कि जैसे वो हमेशा कॅंटीन मे उनके साथ बाते करती है.

अवी- कोमल तुम्हारे क्लास नही है

रानी-पहला क्लास ऑफ है.

कोमल-तुम अपने क्लास मे जाओ ,तब तक हम विद्या के साथ रुकते है

मैं ने विद्या को रानी और कोमल के साथ छोड़ दिया .और क्लास मे चला गया.

हमारे क्लास का आख़िरी हफ़्ता था. अगले हफ्ते से 12थ क्लास के एग्ज़ॅम शुरू होने वाले थे.

मैं ने सिर्फ़ क्लास अटेंड किया और कॅंटीन मे चला गया.

मेरे आते रानी और कोमल चली गयी.और मैं विद्या को लेकर सामान लेने चला गया.

अवी-विद्या कैसा लगा हमारा कॉलेज

विद्या-कोमल ने अच्छे से दिखाया ,जिस से कॉलेज देखने मे मज़ा आया

अवी-मेरे साथ मज़ा करने चलोगि

विद्या-ये भी कोई पूछने की बात है.

मैं विद्या को लेकर पार्क मे आ गया.ये वही पार्क था जहाँ पर हरीश मुझे लेकर आया था.

मैं विद्या को लेकर पेड़ के नीचे बैठ कर गया.

विद्या मेरी गोद मे सर रख कर लेट गयी.

अवी-विद्या ये क्या है. कोई देख लेगा.

विद्या-यहाँ तो लवर आते है. वो देखेंगे तो हम से जलेंगे

अवी-तो जलाने जैसा कुछ करे

विद्या-मैं तो तैयार हूँ

और मैं ने अपना सर झुकाना शुरू किया और विद्या के होंठो पे किस करना शुरू किया.

विद्या के होंठो से मेरे होंठ मिलते एक तूफान शुरू हो गया.

विद्या नाम का तूफान जिस मे मैं फस कर मज़ा लेने लगा.

विद्या मुझ से प्यार करने के लिए हमेशा तय्यार रहती है.

उसका जोश देखते बन रहा था. विद्या मेरे होंठो के साथ जीभ भी चूस रही थी

मैं विद्या को इंतज़ार का पूरा मज़ा दे रहा था.

विद्या को पहली बार देखा तो ऐसा नही लगा था कि विद्या मेरे इतने करीब आ जाएगी

विद्या के करीब आने से डर लग रहा था पर विद्या समझदार थी. वो हमारे रिश्ते की लिमिटेशन समझती थी.

जिस से मुझे विद्या को किस करना अच्छा लग रहा था.

विद्या और मैं ऐसे एक दूसरे को किस करके पहली डेटिंग को एंजाय करने लगे.

विद्या को प्यार करने के बाद हम पार्क से जाने के लिए उठे थे कि दूसरी तरफ से हरीश और उसकी वो गर्लफ्रेंड सॉरी चुदाई पार्टनर हमारे पास आ गयी.

हरीश ने मुझे हाई हेलो किया और उस लड़की के साथ झाड़ियों मे चला गया.

हरीश ने मुझे याद रखा ये अच्छी बात थी.

फिर मैं विद्या को लेकर मार्केट चला गया.

छोटी चाची ने जो लिस्ट भेजी थी वो समान लेकर कॉलेज आ गये.

हमारे प्रॅक्टिकल क्लासस ख़तम हो चुके थे जिस से हम कॅंटीन मे बैठ कर टी पीते हुए बाते करने लगे.

विद्या आज मेरे साथ शहर आकर खुश हो गयी.

रानी से मिलने के बाद विद्या कोमल और मैं गाओं चले गये.

कोमल अपने घर और मैं विद्या को लेकर अपने घर चला गामा.

विद्या ने चाची को समान दिया. और मैं अपने कमरे मे जाकर पढ़ाई करने लगा.

 


766

नेक्स्ट हफ्ते से 12 थ क्लास के एग्ज़ॅम शुरू हो गये.

उस से पहले 3 दिन मे हमारे प्रॅक्टिकल एग्ज़ॅम ख़तम करके हमे पढ़ाई करने के लिए हॉलिडे दिया गया है.

वैसे भी कॉलेज मे 12थ के एग्ज़ॅम चालू हो रहे थे .ऐसे मे सब टीचर उसी मे बिज़ी थे.उसके बाद कविता लीना और राजेश के पेपर होगे.उसके बाद हमारे एग्ज़ॅम होगे.

अब मैं घर पे रह कर पढ़ाई करने लगा.शाम मे कोमल के पास जाकर डाउट पूछने लगा. मेद्स की पढ़ाई तो मुझे करनी पड़ेगी. मैं धीरे धीरे पढ़ाई करने लगा.

12थ एग्ज़ॅम शुरू हो गये .और हमारी एग्ज़ॅम पास आने लगी.

फिर कविता लीना और राजेश की एग्ज़ॅम शुरू हो गये.

राजेश तो नवोदया मे था जिस से उसकी टेन्षन नही थी.

कविता और लीना को सेंटर पास वाला गाओं मिला था जिस से मुझे उनको छोड़ने जाना पड़ा.

कविता और लीना अपनी एग्ज़ॅम के वजह से नर्वस थी.

मेरी हस्ती खेलती बहनें इस तरह एग्ज़ॅम के टेन्षन मे देख कर मुझे अच्छा नही लगा.

नेहा बुआ और नीता बुआ ने मुझे सुबह 10.00 बजे बुलाया था .कविता और लीना को ले जाने के लिए. पर मैं 1 घंटा पहले तैयार होके नेहा बुआ के घर चला गया.

कविता और लीना एग्ज़ॅम को जाने की तैयारी करने लगी.

कोमल कविता और लीना को एग्ज़ॅम मे कैसे लिखना है, कैसे शांत रह कर क्वेस्चन को समझ कर आन्स लिखना है उसके टिप्स दे रही थी.

अवी-तुम दोनो तैयार हो

नीता बुआ-अवी तुम इतनी जल्दी आ गये.

अवी-कैसे ना आता ,मेरी प्यारी बहनों को बेस्ट ऑफ लक बोलना था.

नेहा बुआ-कविता तुम टेन्षन मत लो ,

कोमल-आराम से पेपर लिखना ,फ्री होकर अन्सर लिखना

लीना-दीदी अगर अन्सर ग़लत हो गया तो ,अन्सर याद नही रहा तो ,

कोमल-इस तरह के नेगेटिव बाते मत सोचो, बस जितना आता है उतना लिखना

कविता-हम फैल हो गयी तो ,

नेहा बुआ-इतनी डरने की क्या बात है. मेले मे मस्ती करते हुए ये बात याद नही आई.

नेहा बुआ कविता और लीना को डाट रही थी.

ऐसे मे मेरी बहनो का चेहरा उतर गया. उनको खुश करने के लिए मैं चॉक्लेट अपने साथ लेकर आया था.

अवी-कविता ये देखो मैं क्या लाया हूँ.

सब ने मेरी तरफ देखा मेरे हाथो मे डेरी मिल्क थे.

चॉक्लेट देखते कविता और लीना के मूह मे पानी आ गया.

नीता बुआ-अवी ,तू इनको सर पे चढ़ा रहा है.

नेहा बुआ-अवी ने बिगड़ रखा है,

मैं ने बुआ की बातों पे ध्यान नही दिया.

अवी-कविता लीना देखने से पेट मे नही जाएगी ,लो तुम्हारे लिए है ये चॉक्लेट

कविता-माँ

अवी-मेरे पास आओ ,बुआ कुछ नही कहेंगी.

नेहा बुआ गुस्से मे अंदर चली गयी.

कविता और लीना मेरे पास आकर बैठ कर गयी.

मैं ने उनको चॉक्लेट दी.

कविता और लीना चॉक्लेट खाने लगी. उनका मूड डाइवर्ट होने लगा.

एग्ज़ॅम का टेन्षन भूल कर वो मज़े से चॉक्लेट खाने लगे

अवी-1+1

कविता ने चॉक्लेट खाते हुए जवाब दिया.

कविता-2

अवी-स्काइ का कलर क्या है

लीना -ब्लू

अवी-तुम को तो सब के जवाब पता है.

वो चॉक्लेट खाने लगी.

अवी-मेरी बहनें तो स्मार्ट है,ये एग्ज़ॅम उनकी स्मार्टनेस के आगे कुछ नही है.एग्ज़ॅम मे चुटकी बजके अन्सर लिख देंगी.

कविता-एक चुटकी मे

अवी-और सभी सवाल हल कर देंगी.क्यूँ कि मेरी बहनों जैसी कोई नही है.

लीना-एक भी सवाल छोड़ेंगे नही.

अवी-फिर तो मैं सर उठा कर चलूँगा और सब को बताउन्गा कि मेरी बहनें कितनी स्मार्ट है.

कविता-हम पूरी कोशिश करेंगे.

अवी-फिर तो मुझे तुम्हें गिफ्ट देना होगा.क्या दूं एग्ज़ॅम होते शहर जाकर आइस क्रीम खाएँगे ,कैसा रहेगा

लीना-चलो ना जल्दी एग्ज़ॅम दे कर आते है

कविता-चॉक्लेट वाली आइस क्रीम चाहिए

अवी-2 मिलेंगी. पर पहले एग्ज़ॅम

कविता-वो तो यू गये और यू आए

अवी-क्या?

लीना-पूरे अन्सर लिख कर आएँगे

अवी-अन्सर भूल गयी तो

लीना-आइस क्रीम हमे भूलने नही देगी.

अवी-ग़लत अन्सर लिखा तो

कविता-तो सही कर देंगे

अवी-फिर तो मुझे ज़्यादा पैसे लेने होगे

नीता बुआ-एटीएम कार्ड ले जाओ

अवी-तो चलो एग्ज़ॅम दे कर आते है

नेहा बुआ हॉल मे आते कविता और लीना का मूड देख कर खुश हो गयी.

फिर कविता और लीना ने बुआ का आशीर्वाद लिया और हम एग्ज़ॅम सेंटर की तरफ निकल पड़े

अवी-कविता, मेरे पास बहोत कपड़े है. जिस से अलमारी मे कपड़े रखने की जगह नही है.मैं क्या करूँ

कविता-भैया नयी अलमारी ले लो

अवी-उस से अच्छा है कि अलमारी मे रखे हुए लॅपटॉप निकाल दूं.

लीना-हमे दे दो

अवी-दे दूँगा पर एग्ज़ॅम के बाद,

कविता-एग्ज़ॅम तो हो गयी समझो

अवी-एग्ज़ॅम ख़तम होने के बजाय मार्क ज़्यादा मिलने पर ध्यान देना वरना बुआ मुझे कच्चा खा जाएगी.

लीना-ऐसे कैसे खा लेंगी

कविता-हम ऐसा नही होने देंगे

अवी-तुम क्या करोगी

कविता-हम एग्ज़ॅम मे ज़्यादा मार्क लाएँगे. ताकि आपको कोई कुछ ना कहे.

लीना-बस आप लॅपटॉप तैयार करके रखिए

अवी-लॅपटॉप तैयार है .पूरे लॅपटॉप मे मूवी नही है.

कविता-हम को दूसरी मूवी पसंद है.

लीना-भैया बस आप नेट सेटर खरीद कर देना

अवी-तुम पेपर अच्छा लिखो ,तुम्हें जो चाहिए वो दूँगा

ऐसे इधर उधर बाते करते हुए कविता और लीना का मूड एग्ज़ॅम के टेन्षन से चेंज किया.

उनका सेंटर पास मे था.सेंटर बाते करते हुए आ गया.

मैं ने उनके नंबर ढूँढ कर दे दिए. उनका नंबर आगे पीछे था .

अच्छा हुआ कोई डाउट हुआ तो एक दूसरे को पूछ लेंगी.

मैं उनके एग्ज़ॅम के समय उनके सेंटर के पास बैठ कर कर पढ़ाई करने लगा.

उनकी एग्ज़ॅम होते वो हँसते हुए बाहर आकर मेरे गले लग गयी.

उनकी हसी बता रही थी कि पेपर अच्छा गया.

प्रॉमिस के मुताबिक मैं दोनो को लेकर शहर चला गया .और उनकी पसंद की आइस क्रीम खिला कर घर आ गया.

कविता-भैया पेपर ईज़ी था.

अवी-मतलब पूरे अन्सर लिखे

लीना-हाँ, पेपर इतना ईज़ी था कि पूरे अन्सर लिख दिए

कविता-भैया लीना को एक अन्सर मैं ने बताया

लीना-सिर्फ़ स्टार्टिंग बताई बाकी मैं ने खुद लिखा

अवी-अच्छा हुआ ना कि तुम दोनो का नंबर पास मे है. ऐसे एक दूसरे की मदद करके अन्सर लिखते जाना

उनकी एग्ज़ॅम होते ही मैं दोनो को लेकर घर आ जाता.

मैं घर मे बड़ा होने की वजह से मुझे अपनी पढ़ाई के साथ अपने भाई बहनों का ध्यान भी रखना था.

मुझे ऐसे छोटे मोटे ब्रेकर को पार कर के पढ़ाई करनी पड़ती थी.

मैं अपनी ज़िम्मेदारी के साथ पढ़ाई करने लगा.

 


767

मैं डेली कविता और लीना को एग्ज़ॅम को ले जाने लगा.

इस बीच सनडे को कविता का बर्तडे आ गया.

एग्ज़ॅम के बीच मे बर्तडे आने से सेलेब्रेट नही किया. सिर्फ़ कविता को विश किया.

हम सब ने कविता को विश किया और उनको पढ़ाई करने की वजह से जल्दी घर चले गये.

मैं पढ़ाई के चक्कर मे भूल गया कि कविता के बर्तडे पे हम ने कुछ डिसाइड किया है.

मैं तो भूल गया था. पर कविता और लीना को याद था.

कविता और लीना मुझसे मिलने हमारे घर आ गयी.

मैं दोनो को अपने कमरे मे देख कर सर्प्राइज़्ड हुआ

मेरे कमरे मे आते ही दोनो गुस्से से अपने मूह फूला कर बैठ कर गयी.

अवी-क्या हुआ ,बुआ ने कुछ कहा है

दोनो ने मेरी तरफ गुस्से से देखा.

अवी-क्या हुआ ,एग्ज़ॅम के बारे मे सोच रही हो

कविता-आप पे गुस्सा है हम

अवी-मैं ने क्या किया है.

कविता-आज क्या है

अवी-तुम्हारा बर्तडे है. अच्छा तुम्हें गिफ्ट नही दिया इस लिए गुस्सा हो

लीना-नही. आप ने क्या प्रॉमिस किया था.

मैं सोचने लगा.

कविता-पिछली बार लीना के बर्तडे पे क्या डिसाइड किया था.

अवी-वो ,ऐसा कहो ना,प्यार करने का दिन है.

लीना-हाँ, और आप क्या कर रहे हो

अवी-तुम दोनो भी ना, अभी तुम्हारी एग्ज़ॅम चालू है. एग्ज़ॅम होने दो फिर प्यार करेंगे

कविता-बात आज के दिन की हुई थी. आप मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते है.

अवी-मुझे पता है आज का दिन डिसाइड किया था .पर तुम्हारे एग्ज़ॅम चालू है. ऐसे मे तुमको पढ़ाई करनी चाहिए. एग्ज़ॅम होते तुम्हें प्यार करूँगा.

लीना-हमे कुछ नही सुनना ,आपको आज ही कुछ करना होगा.

कविता-हाँ, हम यहाँ से बिना कुछ किए नही जाएँगे. और हम एग्ज़ॅम भी नही देंगे.

मैं उठ कर दोनो के पास चला गया और किस करके वापस अपनी जगह पर आ गया.

लीना-ये क्या था

कविता-भैया आप चीटिंग कर रहे है.

अवी-समझा करो, तुम्हारी एग्ज़ॅम चालू है. अभी इतना काफ़ी है. बाकी हम एग्ज़ॅम ख़तम होते दूसरे दिन करेंगे

कविता-मुझे आज ही करना है. आप ने प्रॉमिस किया था.हमारे बर्थडे के दिन करेंगे

अवी-बर्तडे के दिन का प्रॉमिस किया था .फिर मेले मे जो किया वो क्या था.

लीना-वो तो

अवी-मैं मना नही कर रहा हूँ ,बस कुछ दिन रूको फिर करते है

कविता-हमारे एग्ज़ॅम के बाद आप कहोगे कि आपके एग्ज़ॅम है.

अवी-नही.तुम्हारे एग्ज़ॅम होते ही करेंगे .मेरे एग्ज़ॅम से पहले

लीना-कविता क्या कहती हो

कविता-फिर मेरी एक शर्त है

अवी-हाँ बोलो

कविता-आपको लीना के बर्तडे से पहले एक बार करना होगा.

अवी-ठीक है. पर दिन मैं डिसाइड करूँगा.

लीना-और मेरी भी एक शर्त है

अवी-बर्थ डे कविता का है

लीना-फिर भी मेरी एक शर्त है

अवी-कहो

लीना-एग्ज़ॅम के बाद जब करेंगे तब आपको हमारी हर बात मान नी होगी.

अवी-(अभी के लिए हाँ बोल देता हुआ.)ठीक है ,अब खुश हो जाओ और पढ़ाई करो

कविता और लीना मुझे किस कर अपने घर चल गयी.

कविता और लीना जल्दी मान गयी.

अगर मान नही जाती तो मैं गया था काम से

कविता और लीना अपनी पढ़ाई मे लग गयी.

बाकी के एग्ज़ॅम की तैयारी करने लगी.

मैं उनको एग्ज़ॅम के ले लिए लेकर जाने लगा. और वो फ्रीली एग्ज़ॅम लिखने लगी.

एग्ज़ॅम ख़तम होते क्या करना था वो मुझे पता था.

उनके एग्ज़ॅम हो गये पर कुछ सब्जेक्ट ऐसे थे जो उनके नही थे. वो पेपर होने के बाद मेरे एग्ज़ॅम थे.

मेरे एग्ज़ॅम ख़तम होने तक कविता और लीना रुक नही सकती थी.

मुझे किसी भी हालत मे उनको लेकर शहर जाना होगा.

मैं ने छोटी चाची को ये बात बताई तो उन्हो ने कविता और लीना के साथ जाने को कहा.

कविता और लीना तैयार होकर मेरा इंतज़ार कर रही थी.

मैं नेहा बुआ के घर चला गया.

कोमल को जब मेरे प्लान के बारे मे पता चला तो वो गुस्सा हो गयी.

कोमल-अवी पढ़ाई करने की जगह कहाँ घूम रहे हो

कविता-दीदी आप कुछ मत कहिए

अवी-कोमल मैं ने इनको प्रॉमिस किया था क़ि एग्ज़ॅम होते इनको घूमने ले जाउन्गा.

कोमल-पर तुम्हारी एग्ज़ॅम

अवी-एक दिन से कुछ नही होगा.

लीना-मैं तैयार हूँ

अवी-कोमल ,तुम टेन्षन मत लो मैं संभाल लूँगा.

नेहा बुआ-कविता ठीक से जाना

कविता-माँ मैं बड़ी हो गयी हूँ.

अवी-बुआ मैं कविता का पूरा ध्यान रखूँगा

लीना-चलो ना भैया ,

नीता बुआ-पर किस खुशी मे घूमने जा रहे हो

कविता-मेरे बर्तडे की पार्टी है.

लीना-हमारे एग्ज़ॅम ख़तम होने की ट्रीट है

नीता बुआ-पार्टी बाद मे ली जा सकती है.

कविता-आज की प्लॅनिंग की थी

नीता बुआ-पार्टी मे हम आ सकते है.

कविता-नही, ये पार्टी हमारी है. आपको बाद मे मिलेंगी.

लीना-माँ अब आपके सवाल ख़तम हुए होगे तो हम जा सकते है

नीता बुआ-जाओ पर जल्दी आना

नीता बुआ और नेहा बुआ की इजाज़त लेकर हम शहर की तरफ जाने लगे

मेरे इस तरह एग्ज़ॅम के पहले घूमने जाने से कोमल गुस्सा हो गयी.

पर कविता और लीना के लिए इतना तो करना था.

मैं कविता और लीना को लेकर शहर चला गया.

दोनो आज खुश थी क्यूँ कि मैं उनको प्यार करने वाला था.

और साथ मे आज उनको लॅपटॉप और मोबाइल मिलने वाला था.

पर पहले मस्ती टाइम

 


768

मैं कविता और लीना को लेकर शहर आ गया.

अवी-कुछ खाना है या घर2 चलते है.

लीना-आपको खाएँगे

अवी-तो घर2 की तरफ चलें

कविता-नही, थियेटर चलते है. मुझे मूवी देखनी है.

अवी-मूवी लॅपटॉप मे देख लेना.

लीना-नही, हमे थियेटर मे देखना है,और वो भी अभी

अवी-मॉर्निंग शो ,मज़ा नही आएगा मूवी देखने के लिए

कविता-वो हमे कुछ नही पता , आपको हमे मूवी दिखाना होगा. आपने प्रॉमिस किया था कि आप हमारी सारी बात मानेगे

अवी-ठीक है. चलो फिर

मैं कविता और लीना को लेकर थियेटर मे आ गया. नये वाले थियेटर मे शो को स्टार्ट मे टाइम था इस लिए पुराने थियेटर मे लेकर आ गया.

मॉर्निंग शो वो भी पुराने थियेटर मे ,गिनती मे 10 12 लोग थे. और मूवी पुरानी थी.

लीना-आक्षन मूवी, मिथुन की.

अवी-ये मूवी देखनी है.

कविता-हाँ, आप बाइक पार्क कर लो, और कुछ खाने को लाना हम तब तक टिकेट लेते है.

अवी-ये लो पैसे

मेरा पॉकेट लीना ने लिया और कुछ पैसे निकाल कर मुझे दिए .और सारे पैसे लेकर टिकेट लेने चली गयी.

मेरे आने तक लीना ने टिकेट ले ली. दोनो हँस कर बाते कर रही थी.

अवी-टिकेट मिली

कविता-हाँ, आप यही रुकिये हम टाय्लेट जा कर आते है.

अवी-ध्यान से जाना.

लीना और कविता टाय्लेट मे चली गयी. और थोड़ी देर बाद वापस आ गयी.

अवी-तुम दोनो ऐसे क्यू हरकत कर रही हो

कविता-हम तो नॉर्मल है. चलो अंदर जाकर बैठ कर थे है.

अवी-चलो

हम हॉल मे आ गये. अंदर कुछ कपल थे जो कॉर्नर पे बैठ कर थे.

लीना भी लास्ट के रो मे जाकर कॉर्नर मे बैठ कर गयी.

लीना के वजह से हमे भी वही जाना पड़ा. लीना लास्ट मे ,उसके बाद मैं , और मेरे दूसरे तरफ कविता

अवी-लीना कॉर्नर मे क्यूँ आई

लीना-क्यू कि सब ऐसे ही बैठ कर है. देखिए वो कपल ,

अवी-वो मस्ती करने के लिए एक मिनिट .,कहीं तुम दोनो

कविता-आप सही समझ रहे है.

अवी-कविता ये रिस्की है. यहाँ पब्लिक मे ,चलो यहाँ से

लीना-आप भूल रहे है कि आप हमारी सारी बात मानेंगे.

अवी-करना है तो घर2 जाकर करते है. यहाँ ना मज़ा आएगा और सब के सामने ,किसी ने पहचान लिया तो

कविता-अंधेरे मे कौन पहचानेगा. और हम मूवी ख़तम होने से पहले चले जाएँगे.

अवी-यहाँ करके क्या मिलेगा.

लीना-पब्लिक प्लेस मे करने मे अलग मज़ा आता है.

अवी-ठीक है. चलो बॉक्स मे चलते है

कविता-नही. बॉक्स को घर जैसा है.यही पर करते है. हम ने 6 रो की टिकेट ली है

अवी-तुम दोनो ना , और क्या किया है.

लीना-पैंटी निकाल कर आए है. लो मूवी शुरू हो गयी.

अवी-तुम दोनो ने ये कब प्लान किया

कविता-अभी अभी. अचानक दिमाग़ मे आया कि मूवी देखते है.

लीना-थियेटर मे मॉर्निंग शो ,तो मैं ने ज़्यादा टिकेट खरीद ली.

अवी-और

कविता-फिर हमने टाय्लेट मे जाकर पैंटी निकाल ली.

अवी-और लीना ने यहाँ आकर जगह पकड़ ली

लीना-हाँ, पर्फेक्ट जगह है. मैं ने पूछताछ की है. यहाँ किसी को पता नही चलेगा

अवी-मूवी के हीरो को तो दिखेगा

कविता-उसे देखने दो, वैसे आक्षन मूवी मे चिल्लाना ज़्यादा रहता था.

अवी-ऊ, तो ये बात है. तुम स्मार्ट हो

लीना-बहनें आपकी है

अवी-शुरू कौन करेंगा.

लीना-कविता ,बर्तडे गर्ल

अवी-तो जगह एक्सचेंज करो.

लीना-हम भी यहीं सोच रहे थे.

और कविता लीना की जगह पर आ गयी.

मैं ने लीना को किस किया

अवी-ध्यान रखना

लीना-आप टेन्षन मत लो, इधर कोई नही देखेगा.सब बिज़ी है.आप भी बिज़ी हो जाओ

अवी-कहाँ है हमारी बर्तडे गर्ल .

कविता-इधर

अवी-उधर क्या कर रही हो .अपने भाई के गले नही लगोगी.

कविता मेरे गले लग गयी.

और दूसरी तरफ से लीना ,मैं ने दोनो के कंधो पर हाथ रख कर अपने सीने से लगाया.

कविता लीना कब क्या सोचती है कहना मुश्किल होता है.

एक से बढ़ कर एक आइडिया सोचती रहती है.

पब्लिक एरिया मे सेक्स करने से अलग मज़ा आता है.

मोविए शुरू हो गयी. थियेटर मे अंधेरा हो गया. जो दूसरे कपल थे वो अपने काम मे लग गये.

कविता लीना ने स्क्रीन से अपनी नज़र हटा दी. और मुझे पे फोकस करने लगी.

कविता ने मुझे एक किस किया और लंड को बाहर निकाल लिया.

ये दोनो तो फास्ट है.कविता ने तो बिना वक्त गवाए लंड अपने हाथो मे लिया.

लीना ने हमे कवर करके रखा था. और हम लास्ट रॉ मे बैठे थे जिस से इधर कौन देखेगा .

कविता ने फिर से मुझे एक स्वीट्स का किस किया और झुक कर लंड को चूसने लगी.

लीना इधर उधर ध्यान रख रही थी .और बीच बीच मे मुझे किस कर रही थी

कविता लीना मे अच्छी बनती थी.एक प्यार कर रही थी तो दूसरी प्यार करने मे डिस्ट्रब ना हो इसका ध्यान रख रही थी.

कविता अपना बर्तडे गिफ्ट को एंजाय कर रही थी.

कविता थियेटर मे जिस तरह लंड चूस रही थी उसे देख कर लग रहा था कि वो सिर्फ़ प्यार करना जानती है.

कविता तो मेरे लंड को खाने लगी. इतने दिनो की प्यास को मिटाने लगा

कविता कल तक लंड चूसना नही जानती थी वो आज थियेटर मे लंड चूस रही थी.

और लीना मेरे होंठो को चूस रही थी

मेरे 2 हाथो मे 2 बूब्स थे जिनको धीरे धीरे सहला रहा था

उनके प्यार करने को लिमिट क्या होती है वो पता नही थी. इतना पता था कि प्यार करो ,सिर्फ़ प्यार करो

कविता से जितना हो सका उसने उतना लंड को प्यार किया .और लीना ने मुझे अपने होंठो का मधुर रस पिलाया.

मिथुन दा हमे प्यार करते हुए देख रहा था पर हमने मूवी की तरफ देखा भी नही.

थियेटर मे ध्यान से सुना जाए तो सिर्फ़ किस्सिंग की आवाज़ आ रही थी.

थियेटर मे किस करना ,सकिंग करने मे मज़ा आता है. पर मेरी बहनें कुछ और भी करना चाहती थी. ये बात मेरे दिमाग़ मे चल रही थी.

क्यू कि कविता ने लंड को गीला करने तक चूसा था. और लीना ने मुझे गरम करने तक किस किया था.

 
769

कविता ने मूवी का 1स्ट सॉंग स्टार्ट होने तक लंड चूस कर गीला किया.

मुझे लगा अब लीना मूवी के सॉंग पर लंड चूसेगी पर ऐसा नही हुआ

कविता ने अपनी सलवार का नाडा खोल दिया .और सलवार नीचे करके मेरी तरफ देखने लगी.

अवी-कविता ये क्या कर रही हो

कविता- आवाज़ मत करिए

और मुझे आराम से लेटने टाइप बैठने को कहा और मेरी गोद मे आकर बैठ कर गयी.

कोई देखे नही इस ख़याल से मैं डर रहा था पर कविता लीना को तो डर क्या होता है ये पता नही था.

कविता मेरी गोद मे बैठ कर गयी और लीना ने मेरे लंड को कविता की चूत मे डाल दिया.

कविता अपनी चीख दबाते हुए मूवी देखने लगी.

लीना-अवी शुरू कर दो

अवी-मेरा नाम ले रही हो

मुझे भाई कहने की जगह अवी कहने से मुझे गुस्सा आया .पर लीना ने मेरे कान मे धीरे सेकहा

लीना-भैया कहा और किसीने सुन लिया तो गड़बड़ हो जाएगी.और कविता का बर्तडे गिफ्ट देना शुरू कर दो.

लीना की बात सही थी. पर यहाँ थियेटर मे चुदाई करना .मैं ने हॉल मे इधर उधर देखा तो उधर भी यही सीन चल रहा था. लड़की लड़के की गोद मे बैठी थी.

अच्छा हुआ लीना ने लास्ट रो की सीट बुक की ,कोई पीछे मूड कर देखेगा नही. देखा भी तो इट नी दूर से उसे क्या खाक दिखेगा

मैं ने कविता की चूत मे लंड इन आउट करना शुरू किया.

कविता ने सीट के हॅंडल को पकड़ रखा था जिस से वो हवा मे झूल रही थी और मैं नीचे से धक्के मारने लगा.

लीना चुप चाप बड़ी फुर्ती से इधर उधर ध्यान रख रही थी.

कविता आगे की सीट पे अपने हाथ रख कर मूवी देख रही थी.

और मैं धक्के मार कर कविता को मूवी दिखाने लगा.

धीरे धीरे कम आवाज़ के साथ धक्के मार रहा था.

कविता मिथुन दा की फाइटिंग देख रही थी. और मैं कविता की चूत के साथ लड़ाई लड़ाई खेलने लगा.

कविता की छोटी सी चूत मे मेरा मोटा लंड जाते ही कविता शिसकारिया लेने की जगह. मिथुन्दा फाइटिंग खेलते हुए याबा एयाया ऊऊओहकी आवाज़ कर रहा था.

कविता की चूतड़ दबाते हुए चूत मारना ,एक डर कोई देख तो नही लेगा ,मज़ेदार बना रहा था चुदाई मे

एक बहन नज़र रख रही थी और दूसरी बहन अपनी नज़र दूसरो से बचाते हुए धक्के खाने लगी

मुझे लगा ही था कि ये दोनो ऐसा ही कुछ करेंगी.

दोनो को मैं ने सर चढ़ा के रखा है जिस से वो अब लंड पे जाके बैठी है.

इस पोज़िशन मे दर्द हो रहा था फिर भी मैं कविता खुशी दे रहा था

मेरे लंड को किसी का डर नही था ,उसे बस मज़ा चाहिए होता है.

और मैं कविता को एक आक्षन मूवी दिखाते हुए धक्के मार रहा था.

कविता की चूत धीरे धीरे गीली होने लगी.

कविता अपनी गंद को मेरे लंड पे गोल गोल घुमा देती

और मैं लंड को आहिस्ता आहिस्ता इन आउट करने लगा.

कविता-मैं थक गयी हूँ

लीना-तू सीट पे पैर फैलाक़े बैठ जा ,

कविता अपनी सीट पे जाके बैठ कर गयी और मैं उसके उपर आ गया.

इस तरह चूत मारने मे दोनो को मज़ा आएगा.

कविता मुझे किस करते हुए चुद रही थी.

लीना मूवी देखते हुए चूत मे उंगली करने लगी.

कविता के हाथ मेरी गंद पे थे .और कविता उनको दबा कर लंड को और गहराई तक ले जाने लगी.

कविता को अपने बर्तडे गिफ्ट मे मेरा वीर्य चाहिए था.

और मैं उसको उसका गिफ्ट देने मे पसीना बहा रहा था.

कविता की चुदाई मे मज़ा ना आए ये हो नही सकता.

कविता लीना का दूसरा नाम मस्ती मज़ा था

कविता-मेरा निकल रहा है.

कविता अपना पानी निकालने को तैयार हो गयी. और मैं धक्के मार कर उसकी मदद करने लगा.

और कविता ने एक चीख के साथ अपना पानी छोड़ दिया.

इधर कविता की चीख निकली उधर मूवी मे हीरो को गोली लगने से चीख निकल गयी.

कविता का तो हो गया अब

कविता लीना साथ मे हो न ऐसे सवाल पैदा नही होना चाहिए कि अबक्या करे

लीना अपनी सलवार नीचे करके अपने पैर फैला कर मेरा इंतज़ार कर रही थी

एक ठंडी पड़ गयी तो दूसरी गरम हो जाती है

इसी लिए मैं अपना स्टॅमिना बनाए रखने के लिए कसरत करता हूँ.

कविता तो अपनी चूत को नॅपकिन से सॉफ करने लगी और मैं लीना के उपर आ गया.

लीना की चूत तो हमारी चुदाई देख कर गरम हो गयी.

मैं ठंडा कर देता हू.

मैं ने धीरे धीरे अपना लंड लीना की गहराई मे उतार दिया.

और हम मूवी के सॉंग पर डांस करने लगे.

लीना की चुदाई करने लगा.

कविता ने अपनी पैंटी और सलवार पहन ली मतलब इसके बाद यहाँ चुदाई नही होगी.

ये भी ठीक है.

पर ये इंटर्वल क्यू नही हो रहा है.

मुझे क्या मैं लीना की चूत मे धक्के मारने लगा.

एक बार मैं ने टाइम देखा तो कविता ने मुझे जवाब दे दिया.

कविता-आज इंटर्वल नही होगा हम ने उसको पैसे दिए.

फिर क्या था मैं बिना टेन्षन के लीना की चूत मारता गया.

थियेटर के अंधेरे मे चाँदनी की तरह चमकती 2 नटखट चूत का मज़ा लेने लगा.

लीना ने पहले उंगली करके अपना पानी निकाला था इस से मुझे ज़्यादा मेहना करनी पड़ी.

लीना मेरे धक्को के साथ मेरे होंठो को काटने लगी.

थियेटर के अंधेरे का मज़ा लेने का अपना मज़ा होता है.

इस मज़े मे मैं ने लीना का पानी भी निकाल दिया.

मैं और लीना की चूत मे धक्के मारना चाहता थापर लीना ने मना किया.

और मैं दोनो के बीच मे बैठ कर गया

अब क्या होगा.

होना क्या था.कविता फिर से लंड चूसने लगी

लीना ने अपनी चूत पे नॅपकिन रख दिया .और सलवार पहनने की जगह कविता के साथ मेरा लंड चूसने लगी

दोनो लंड चूस रही थी और मैं मूवी देखने लगा

अब जाके मेरी नज़र मूवी पे गयी. पर दोनो जिस तरह लंड चूस रही थी कि मेरी आँखे बंद हो गई.

वीर्य निकलने के बाद भी मैं ने अपनी आँखे नही खोली.

किसने मेरा वीर्य पिया मुझे नही पता .पर यहाँ थियेटर मे करना मज़ेदार था.

कविता लीना ने खुद मज़ा लिया और मुझे मज़ा दिया.

और हम इसी मज़े को याद करते हुए मूवी देखने लगे.

 


770

थियेटर मे कविता और लीना को प्यार करने के बाद हम मूवी ख़तम होने से पहले बाहर आ गये.

अवी-अब घर2 चले .

लीना-पब्लिक प्लेस मे करने मे मज़ा आता है.पार्क चलते है.

अवी-बिल्कुल नही.

लीना-वहाँ बस बैठ कर कर आराम करेंगे. प्रॉमिस

अवी-चलो फिर

फिर मैं कविता और लीना को लेकर पार्क मे आ गया.ये वही पार्क है जहाँ मैं हरीश के साथ और कुछ दिन पहले विद्या के साथ आया था.

हम पार्क मे जाकर पेड़ पे पास बैठ कर गये.

और बाते करते हुए आराम करने लगे.

मैं इधर उधर देख कर बात कर रहा था कि मेरी नज़र एक औरत पे गयी.

ये तो रणजीतसिंघ की सेक्रेटरी है. अपने बच्चो के साथ यहाँ क्या कर रही है.

उनको देख कर लग रहा था कि वो अपने बच्चो को स्कूल से यहाँ लेकर आई है. उसके बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म मे थे और बॅग भी था.

लीना-हॉट है

अवी-हाँ, क्या कहा

कविता-उस औरत को देख रहे हो ना

अवी-नही तो

लीना-ये रणजीतसिंघ की सेक्रेटरी हैना ,मेले मे देखा था. आपको अच्छी लग रही है.

अवी-ठीक ठाक है. उतनी खास नही है.

कविता-आपको पसंद है तो आप उसके साथ मज़े क्यूँ नही करते

अवी-तुम दोनो के सामने वो कुछ नही है. तुम्हारे होते हुए मैं उसके साथ क्यूँ करूँ

लीना-मतलब हम ना होते तो करते

अवी-मे बी ट्राइ करता

कविता-तो अब कर लो ,हम यहीं रुकते है.

अवी-उसके साथ ट्राइ किया और वो मान गयी ,और मैं ने उसके साथ किया तो तुम्हारे साथ करने की ताक़त नही रहेगी.

लीना-इसका हल है मेरे पास

अवी-क्या?

लीना-आप उस पे ट्राइ करो ,वो मान गयी तो जाकर किस्सिंग करना ,और प्यासा छोड़ कर हमारे पास आना

अवी-ये ग़लत होगा. उसके साथ ऐसा करना ठीक नही होगा

मैं बोल रहा था कि कविता और लीना ने मेरे हाथ पकड़ कर खड़ा किया और सेक्रेटरी के पास ले जाने लगी. सेक्रेटरी मुझे देख कर खुश हुई.

सेक्रेटरी-अवी तुम यहाँ ,

अवी-हाँ, वो अपनी बहनों को घुमाने लाया था. आप यहाँ कैसे

सेक्रेटरी-मैं बच्चों को स्कूल से लाने गयी थी. बच्चों ने ज़िद्द की तो पार्क मे ले आई.

अवी-तो आज छुट्टी ली है

सेक्रेटरी-सर यहाँ नही है तो छुट्टी चल रही है.मेले के बाद आराम मिल रहा है.

कविता-आंटी पार्क मे भी आप काम की बाते कर रही है.

लीना-आप वहाँ बेंच पर जाकर बैठ कर बाते कीजिए ,हम तो बच्चो के साथ खेलेंगे.

अवी-चलिए हम बैठ कर कर बात करते है.कविता बच्चो का ध्यान रखेगी.

मैं सेक्रेटरी को लेकर बेंच पर बैठ कर गया.

अवी-कहिए क्या चल रहा है

सेक्रेटरी-कुछ नही. सर फॅक्टरी खरीदने गये है. मैं भी जाने वाली थी कि मुझे यहाँ का काम देखने को रख दिया.

अवी-और तुम छुट्टियाँ मना रही हो

सेक्रेटरी-फॅमिली को थोड़ा टाइम देना चाहिए.

अवी-सही कहा. चलो चलते चलते बात करते है यहाँ बैठ कर रहे तो पिछवाड़ा दुखने लगेगा

सेक्रेटरी-बच्चों के पास ही घूमते है.

अवी-बच्चों को खेलने दो कितना मज़ा कर रहे है

सेक्रेटरी-हाँ, तुम्हारी बहनों के साथ जल्दी घूम मिल गये.

फिर मैं सेक्रेटरी के साथ पार्क मे घूमते हुए बात करने लगा.

अवी-सारी मे खूबसूरत लग रही हो

सेक्रेटरी-थॅंक्स, वैसे मुझे स्कर्ट पहना ज़्यादा पसंद है. पूछो क्यूँ

अवी-क्यू?

सेक्रेटरी-सर का हाथ उसी के अंदर रहता है.

अवी-सिर्फ़ हाथ और क्या रहता है

सेक्रेटरी-तुम भी तो अंदर जा चुके हो,

अवी-उस दिन तुम्हें मज़ा आया था

सेक्रेटरी-हाँ, तुम सिर से अच्छा करते हो. बहोत मज़ा आया था .मैं तो तुमसे और करवाना चाहती हूँ

अवी-फिर देर इस बात की है. तुम हो मैं हूँ ,चलो शुरू करते है

सेक्रेटरी-यहाँ ,पार्क मे नही कर सकते ,

अवी-क्यू नही कर सकते, किसी झाड़ियों के पीछे चले जाओ और एंजाय करो

सेक्रेटरी-दोपेहर का टाइम है. उजाले मे ,और मेरे बच्चे भी यहाँ पर

अवी-मेरी बहनों के साथ खेल रहे है.उनको पता भी नही चलेगा.

सेक्रेटरी-करने का मन तो हो रहा है. पर

अवी-क्या पर वर के चक्कर मे पड़ी हो. हम रोज तो नही मिलते ,आज मिले है ,चान्स को कॅश कर लो.

सेक्रेटरी ने एक बार अपने बच्चो की तरफ देखा .बच्चो को खेलता हुआ देख कर मेरे साथ चलने को तैयार हो गयी.

सेक्रेटरी-तुम्हारे साथ तो ज़्यादा टाइम लगता है.

अवी-एक बार करता हूँ ,तुम्हारा हो गया तो ,वापस आ जाएँगे

सेक्रेटरी-मुझे नही लगता तुम इतने मे मान जाओगे.

अवी-चलो तो

मैं सेक्रेटरी को लेकर हरीश वाली जगह पर आ गया.

सेक्रेटरी-ये तो बढ़िया जगह है. किसी को दिखेगा नही.

अवी-मैं तुम्हें किसी को देखने थोड़े दूँगा.

सेक्रेटरी-तुम्हारे साथ आराम से प्यार से करने मे मज़ा आता है.इस तरह ,

अवी-इसका मज़ा भी लेना चाहिए

और मैं ने सेक्रेटरी को किस करना शुरू किया.

लास्ट टाइम सेक्रेटरी के साथ बहोत मज़ा आया था ,इस बार जल्दी जल्दी करना होगा.

सेक्रेटरी की लिपस्टिक का टेस्ट मुझे पसंद था. उसका पर्फ्यूम का स्मेल मुझे उसका दीवाना बना देता था.

मैं सेक्रेटरी के होंठो को चूस कर उसको चुदाई के लिए तैयार करने लगा.

सेक्रेटरी का नशीला बदन मेरे किस करते ही गरम होने लगा.

हमारे पास ज़्यादा समय नही था. उसे लगना नही चाहिए कि मेरी बहनें इस बारे मे जानती है.

मैं उसके कपड़े खराब नही करना चाहता था जिस से सिर्फ़ किस कर रहा था.

किस करने के बाद मैं ने उसको पेड़ को पकड़ कर झुका दिया.

उसकी साड़ी और पेटिकोट उपर करके उसे पकड़े रहने को कहा.

उसकी सेक्सी पैंटी मे छुपी हुई प्यारी चूत को देखने के लिए मैं मरा जा रहा था.

मैं ने उसकी पैंटी पूरी निकाल दी. और अपने जेब मे रख दी.

सेक्रेटरी की गंद मेरे सामने थी जिसे रणजीतसिंघ ने बड़ा कर दिया था.

मैं ने गंद की जगह चूत को सेलेक्ट किया .

सेक्रेटरी की गंद देख कर लंड खड़ा हो चुका था. उसे मैं ने सेक्रेटरी के चूत मे पेल दिया.

सेक्रेटरी मेरा लंड चूत मे लेते ही जन्नत मे चली गयी.

मैं धक्के मार कर उसे जन्नत मे पुश करने लगा.

सेक्रेटरी शीष्कारी ले रही थी पर धीमी आवाज़ मे

मैं धीरे धीरे धक्के मारने लगा.

पार्क मे सेक्रेटरी की सेक्सी बॉडी के साथ खेलने मे मज़ा आ रहा था.

मैं ने कविता से कहा था कि मैं चुदाई नही करूँगा .

मैं ने बीच का रास्ता निकाला ,कविता को टाइट लंड दिखा कर खुश करूँगा और सेक्रेटरी का एक बार पानी निकाल कर खुश कर दूँगा.

सेक्रेटरी की सुखी चूत मे सूखा लंड डालने से हम दोनो का मज़ा आ रहा था.

धीरे धीरे मेरे धक्के जोरदार हो रहे थे.

सेक्रेटरी भी अपनी गंद पीछे करके मुझे धक्के मारने को उतेज़ित कर रही थी.

उसका ऐसा करने से मैं जोरदार धक्के मार कर उसकी सुखी चूत मे पानी का तूफान लाना चाहता था

सेक्रेटरी मेरे साथ चुदाई करके मस्ती मे जल्दी आ जाती थी.

क्या चूत थी. लंड तो चूत मे अंदर बेच्चेदानी से टकराकर वापस आ जाता.

जिस से हम दोनो मज़े मे आगे पीछे हो जाते.

सेक्रेटरी फुल मस्ती मे आ गई और उसकी चूत से पानी निकल गया.

उसका पानी निकलते ही लंड बाहर निकाल लिया.

मुझे दूसरो की खुशी के लिए अपने लंड को खड़ा रखना पड़ता था.

मैं लंड पे दर्द झेल लेता पर दूसरो को खुश रखता.

सेक्रेटरी ने नॅपकिन से अपनी चूत साफ की .और अपनी पैंटी ढूँढने लगी

सेक्रेटरी-मेरी पैंटी कहाँ है

अवी-मेरे पास है और वो तुम्हें नही मिलेगी

सेक्रेटरी-बिना पैंटी के मुझे अजीब लगता है.

अवी-पैंटी मेरा वीर्य निकालने के लिए रखी है.

इतना कह कर मैं कविता की तरफ चला गया.

सेक्रेटरी थोड़ी देर वही खड़ी रह कर अपने कपड़े ठीक करने लगी.

मेरे अकेले आने से कविता को सबूत मिला कि मैं ने उसको जैसा कहा वैसा किया है.

मैं ने कविता के सामने अपने खड़े लंड को जीन्स से दिखाया.

कविता खुश हो गयी. और फिर सेक्रेटरी आ गयी.

कविता-अच्छा आंटी अब हम चलते है

सेक्रेटरी-बच्चो ने ज़्यादा परेशान तो नही किया

लीना-हमने तो पूरा मज़ा लिया .आप कहाँ गयी थी

सेक्रेटरी-वो घूमते हुए दूर चली गयी थी.

अवी-चलो हमे चलना चाहिए

सेक्रेटरी को बाइ बोल कर मैं कविता और लीना को लेकर घर2 आ गया.

 


771

मैं कविता और लीना के साथ घर2 आ गया. मिसेज़ दूबे के घर पे लॉक लगा हुआ था.

कविता और लीना घर2 आते ही बेडरूम मे चली गयी.

मैं ने फोन करके कुछ दिन पहले मसेज दूबे को घर2 साफ करने को कहा था. मिसेज़ दूबे अपना काम करके पता नही कहाँ गयी.

कविता-भैया आपने उस सेक्रेटरी के साथ क्या किया.

अवी-मैं ने उसे पटा लिया.

लीना-इतनी जल्दी हाँ कर दिया उसने

अवी-अपने भाई को कम मत समझना

कविता-फिर क्या किया

अवी-तुम ने जैसा कहा वैसा किया .और ये देखो उसकी पैंटी लेकर आया हूँ

पैंटी देख कर दोनो खुश हो गयी.

लीना-भैया ,वो मान गयी थी तो आपने उसकी चुदाई करनी चाहिए थी.

अवी-कैसे करता .मेरी एंजल तो यहाँ है. कविता और लीना

कविता-हमारे वजह से वो आपके हाथ से निकल गयी. शायद दुबारा ना मिले

अवी-तुम दोनो के लिए ऐसे लाखों कुर्बान करू.

लीना-आप हम से इतना प्यार करते है.

अवी-अपनी जान से ज़्यादा ,

कविता-लव यू भैया.

लीना-हम बहोत किस्मत वाली हैं जो हमारा पहला प्यार आप है. और हमेशा रहेंगे

अवी-मैं भी तुम्हारे लिए खुश हूँ

कविता-भैया भूक लगी है.

अवी-तुम फ्रेश हो जाओ मैं होटेल से खाना लेकर आता हूँ

लीना और कविता नहाने चली गयी .और मैं खाना लाने होटेल चला गया.

थोड़ी देर बाद मैं खाना लेकर आ गया .

मेरी नटखट चुलभुली बहनें ब्रा पैंटी मे मेरे सामने आ गयी.

उनके खूबसूरत बदन को देख कर मैं खुद पे गर्व महसूस करने लगा कि मेरी बहन जैसा कोई नही है.

उनका बदन खिल रहा था. कली से फूल बन रहा था.

जल्दी मैं उनको सब से सुधार फूल बना दूँगा.

और मैं माली बन कर उस फूल की रक्षा भी करूँगा.

फिर हम ने हल्का नाश्ता टाइप का खाना खा लिया.

और मेरी नटखटा बहन अपने गबरू भैया को प्यार करने लगी.

दोनो को मैं ने एक एक बार प्यार किया.

पहले बर्तडे गर्ल को प्यार किया .फिर लीना को प्यार करके जन्नत ले गया.

मेरे प्यार करने के बाद कविता और लीना मुझसे चिपक कर सो गयी.

वो मेरे प्यार को सपने मे क़ैद करके रखना चाहती थी.

मेरी सभी बहन एक से बढ़कर एक है

स्वेता दीदी ,बड़ी होने से सब को साथ लेकर चलती है. वो कितनी जल्दी अपनी ज़िम्मेदारी को समझ गयी. मैने उनसे बहोत कुछ सीखा है. दीदी ग़लती होने पर डाँटती है और फिर प्यार भी करती है.उनके साथ मैं ने एक बार किया था उसके बाद स्वेता दीदी ने कभी उस बात के बारे मे मुझसे पूछ कर शर्मिंदा नही किया. मैं भी स्वेता दीदी को दुबारा करने के लिए नही कह सकता. वो मना नही करेंगी क्यूँ कि वो मुझे बहोत प्यार करती है पर ऐसा करके मैं उनको टूटने नही दूँगा

सीतल दीदी कभी शांत तो कभी बिंदास बन जाती है. वो मेरी गर्लफ्रेंड है और बहनों मे उनके साथ पहले किया था. सोहन के मिलते ही मुझ से ब्रेकप कर लिया. जैसा तय हुआ था. सीतल दीदी मुझे सोहन से ज़्यादा प्यार करती है मैं कहूँगा तो जल्दी हाँ कर देंगी. शादी से पहले वो एक बार मुझ से ज़रूर प्यार करेंगी .पता नही कब लेकिन उस दिन का इंतज़ार रहेगा.

कोमल ,क्या कहूँ , पढ़ाई मे 1स्ट, खूबसूरती मे 1स्ट, मुझे तो वो रानी जैसी लगती है. रानी के साथ रह कर वो उसके जैसी बन गयी है.रानी और कोमल फ्रेंड कम बहनें ज़्यादा लगती है. कोमल मे मैं ने बहन कम अपनी फ्रेंड ज़्यादा देखी है. उसका पहला फ्रेंड ,बेस्ट फ्रेंड मैं हूँ. वो सभी बहनों मे अलग है .

कविता और लीना, कज़िन है पर ऐसा लगता है जैसे जुड़वा बहनें हो हमेशा साथ रहती है. सुख हो या दुख, एक दूसरे का साथ नही छोड़ती.एक को चोट लगती है तो दर्द दूसरे को होता है. मेरी नटखट चुलबुली बहनें, उनको ना करने का मन नही होता.

सब से छोटी, मेरी बेटी और बहन भी, परी है उसका नाम ,सब से क्यूट लगती है मुझे .

पूनम दीदी. दूर की रिश्तेदार है पर 1 साल मे मेरे करीब आ गयी. स्वेता दीदी से बड़ी है पर उनकी तरह ज़िम्मेदारी नही उठाती. पूनम चौदहवीं का चाँद है पर उस चाँद पे ज्योति बुआ दाग लगा रही है. पूनम दीदी से एक दिन प्यार ज़रूर करूँगा.

मेरे भाई भी मेरी तरह है, राज और राजेश ,उनको मेरी तरह बनाना होगा.और मेरे बेटे अमित और सुमित उनको मैं अपने से अच्छा बनाउन्गा.

मैं ने पूरी फॅमिली को एक साथ लाया है. इसी तरह उनको साथ मे रखूँगा. चाहे कुछ भी हो जाए.

मैं अपने बहनों के बारे मे सोचते हुए सो गया.

2 3 घंटे की नींद लेने के बाद मैं उठ गया. कविता और लीना घोड़े बेच कर सो रही थी.

मैं उनके उतने से पहले फ्रेश हो गया .और उनके लिए टी लेने चला गया.

मेरे टी लाने के बाद भी वो सो रही थी.

अवी-कविता उठो

कविता-भैया सोने दो ना

अवी-अरे उठो हमे घर जाना है

कविता-सोने दो ना, आप भी हमारे साथ सो जाउ

अवी-उठो नही तो पानी डाल रहा हूँ.लीना

लीना-क्या है भैया .

मैं ने दोनो को उठाया .लीना उठ ते ही बाथरूम मे भाग गयी शायद पेशाब लगी होगी.

कविता लीना के पीछे बाथरूम मे चली गयी.

दोनो फ्रेश होकर टी पीने के लिए आ गयी.

टी पीने के बाद हम जाने के लिए तैयार हो गये.

कविता-भैया आज मैं बहोत खुश हूँ

अवी-तुम्हारी खुशी डबल करने वाला हूँ

कविता-वो कैसे

अवी-तुम को ड्रेस खरीद कर देने वाला हूँ

कविता-या हू ,

अवी-चलो जल्दी ,शॉपिंग के बाद हमे घर जाना है.

लीना-हाँ चलते है

फिर मैं ने कविता और लीना को एक एक ड्रेस खरीद कर दिया.

ड्रेस देखते दोनो खुश हो गयी. और नेहा बुआ नीता बुआ भी खुश हो जाएगी

फिर गाओं जाते हुए मैं ने कविता और लीना को आइस क्रीम खिला दी.

अब तो दोनो इतनी खुश थी कि पूछो मत .

उनको हस्ता हुआ घर लेकर आ गया. घर आते ही कविता और लीना अपनी मा को आज के दिन के बारे मे बताने लगी.

मैं कविता और लीना को उनके घर छोड़ कर अपने घर आ गया.

कविता और लीना को उनका मोबाइल और लॅपटॉप दिया.

लॅपटॉप और मोबाइल मिलते कविता और लीना ने मुझे गले लग कर थॅंक्स कहा.

कविता और लीना अब पूरा सम्मर लॅपटॉप और मोबाइल मे घुसी रहेंगी.

मोबाइल के साथ सिम देने से दोनो ने सब को अपना नंबर देना शुरू किया.

उनका बच्पना देख कर मुझे खुशी मिली.

फिर छोटी चाची को दिन भर की कहानी बता कर मैं पढ़ाई करने लगा.

 


772

कविता और लीना को प्यार करने के बाद मैं पढ़ाई करने लगा.

कविता और लीना अपनी एग्ज़ॅम दे कर फ्री हो गयी. अब वो लॅपटॉप और मोबाइल मे बिज़ी हो जाने से मैं पढ़ाई करने पे ध्यान दे सकता था.

कोमल भी एग्ज़ॅम की पढ़ाई जोरो शॉरो से कर रही थी.

रानी ने भी मुझे फोन करके पढ़ाई के बारे मे बताया और मेरी पढ़ाई कैसी चल रही है उसकी पूछताछ की.

मैं ने रानी से कुछ इम्पोर्टेंट क्वेस्चन पूछ लिए जो उसके हिसाब से एग्ज़ॅम मे आ सकते थे.

टॉपर स्टूडेंट पिछले साल के पेपर चेक करके गेस करते है.

रानी के बाद कोमल से भी इम्पोर्टेंट क्वेस्चन पूछ लिए. कुछ क्वेस्चन सेम थे पर कुछ अलग थे.

मैं ने रानी और कोमल के बताए हुए क्वेस्चन पे ज़्यादा ध्यान दिया ,मुझे फैल होने से बचना जो था.

देखते देखते एग्ज़ॅम का दिन भी आ गया.

चाची के आशीर्वाद के बिना मैं एग्ज़ॅम की शुरुआत नही करता था.

चाची मेरे लिए सब कुछ थी, मेरी माँ, गुरु, दोस्त और बहोत कुछ.

छोटी चाची ने मुझे ठीक से पेपर लिखने को कहा था.

पिछले साल मैं ने पेपर मे अच्छे मार्क्स लिए थे.

पर 1 साल मे बहोत कुछ बदल गया था.

इस बदलाव मे मैं अपनी पढ़ाई का ध्यान नही रख पा रहा था

पर कोमल ने मुझे ज़्यादा भटकने नही दिया. मुझे हमेशा पढ़ाई करने केलिए कहती थी.

कोमल एग्ज़ॅम के लिए जाने के लिए मेरा इंतज़ार कर रही थी.

मेरे आते ही कोमल ने अपनी माँ का आशीर्वाद लिया ,मैं ने भी नेहा बुआ के पैर छुलिये.

मेरे ऐसा करने से नेहा बुआ शॉक्ड हुई. लेकिन उनका हाथ मेरे सर पर आते मुझे अच्छा लगा.

मेरे खड़े होते नेहा बुआ अंदर चली गयी.

मैं कोमल के साथ कॉलेज चला गया.

कॉलेज मे सभी स्टूडेंट के हाथो मे किताबें थी.

रानी हमेशा की तरह पहले कॉलेज मे आई थी .जिस से उस ने हमारा सीट कहाँ है ये पता कर लिया था.

रानी और कोमल का नंबर एक क्लास मे था ,तो मेरा नंबर दूसरी क्लास मे था.

रानी-अवी पेपर की पढ़ाई पूरी हो गयी.

अवी-की तो है पर देखते है पेपर कैसा आता है

कोमल-पेपर कैसा भी हो,बस पेपर पूरा लिखना ,

अवी-वो क्यू?

कोमल-केमिस्ट्री के सर आँखे बंद करके पेपर चेक करते है. आन्स पता ना होने पे कुछ भी लिख देना आधे मार्क मिल जाते है

रानी-हाँ,तुम्हें अंसार पता ना होने पर कुछ भी लिख के आना ,बस प्रश्न मिस मत करना.

अवी-बिना वजह इतनी पढ़ाई की, कोई बात नही , जो आन्स पता है वो लिख लूँगा बाकी मैं संभाल लूँगा

कोमल-चलो क्लास मे चलते है

रानी-बेस्ट ऑफ लक अवी

कोमल-बेस्ट ऑफ लक

अवी-थॅंक्स

मैं क्लास मे चला गया.करीम मेरा इंतज़ार कर रहा था.

साला कमीना क्लास मे भी किताब पढ़ रहा था.

अवी-बस कर ,कितना पड़ेगा

करीम-बहोत पूरी हालत है.

अवी-तुझ से ज़्यादा मेरी हालत खराब है. तू तो पढ़ाई कर रहा था मैं तो मेले मे घूम रहा था

करीम-पढ़ने दे ,सर के आने तक पढ़ लेता हूँ.

फिर हमारी एग्ज़ॅम चालू हुई

साइन्स ब्रांच के मतलब हमारे एक दिन मे 2 पेपर थे.

कॉमर्स और आर्ट के ब्रांच के एक दिन मे एक पेपर था.

हमारे पेपर जल्दी हो जाएँगे .पंकज के पेपर कुछ दिन और चलेंगे

देखते देखते हमारे पेपर ख़तम हो गये

मेरे पेपर उतने खास नही गये थे. जाएँगे भी कैसे ,पढ़ाई करता तो अच्छे जाते

पर मैं अपने परर्फमेन्स पे खुश था.

रानी और कोमल के पेपर ,उनका क्या बताऊ, अच्छे क्या बेस्ट गये थे.

करीम और उसकी गर्लफ्रेंड के पेपर भी अच्छे गये. करीम को मुझ से ज़्यादा मार्क मिलेंगे .नेक्स्ट यियर मैं पढ़ाई पे ज़्यादा ध्यान दूँगा.

मेले के बाद मैं पंकज से मिला नही. एग्ज़ॅम के समय उसे बेस्ट ऑफ लक भी नही दिया.

मैं अपने टेन्षन मे था जिस से पंकज को भूल ही गया.

पंकज के पेपर होते पहले उस से मिल लूँगा.

करीम तो चूतिया है. वो पढ़ाई के चक्कर मे पंकज को भूल गया होगा.

लास्ट पेपर होते करीम और उसकी गर्लफ्रेंड मेरे पास आ गयी.

करीम-कैसा गया पेपर

अवी-जैसा आया था वैसा ही गया ,बस एक दो वर्ड लिख कर भेज दिए

करीम की गर्लफ्रेंड-क्यूँ ,क्या हुआ ,पढ़ाई नही की थी

अवी-पढ़ाई कैसे करता ,मैं इतना बिज़ी था ,तुम्हें तो पता है

करीम-चल जाने दे .मुझे पता है तू पास हो जाएगा.

अवी-पास नही परसेटेज अच्छे चाहिए,

करीम-मिल जाएँगे ,ये साल इतना इम्पोर्टेंट नही होता .जो है वो नेक्स्ट ईयर है.

अवी-अगले साल कोई कसर नही छोड़ूँगा.

करीम-मत छोड़ना ,चलो अब

करीम की गर्लफ्रेंड -एग्ज़ॅम ख़तम होने की खुशी मे पार्टी करते है.

अवी-पंकज और उसकी गर्लफ्रेंड की एग्ज़ॅम तो होने दो

करीम-हाँ, मैं तो पंकज को भूल ही गया था.

अवी-लास्ट टाइम उस से कब बात की थी ये भी तुझे पता नही होगा.

करीम-एग्ज़ॅम की टेन्षन मे पंकज को भूल गया. चलो पंकज से मिलते है.

अवी-अब नही ,उनकी एग्ज़ॅम होने दो फिर मिलते है और पार्टी भी करेंगे.

करीम-ठीक है. चलो अब मुझे टाय्लेट जाना है.

अवी-तो जा ना रोका किसने है.तेरी गर्लफ्रेंड को खा नही जाउन्गा.

करीम टाय्लेट मे चला गया .और करीम की गर्लफ्रेंड मेरे पास बैठ कर गयी.

करीम की गर्लफ्रेंड-अवी ,पार्टी मे कुछ धमाल करेंगे.

अवी-क्यू ,खुजली हो रही है.

करीम की गर्लफ्रेंड-हाँ,एग्ज़ॅम की वजह से करीम के साथ भी नही किया.

मैं ने करीम की गर्लफ्रेंड की चूत को हाथ से मसल दिया.

अवी-करीम के लिए ये तड़फ़ रखो, मैं तो हूँ ही

करीम की गर्लफ्रेंड-वैसे तुम्हें एक बात बतानी थी.

अवी-तुम प्रेगनेंट हो

कगफ़-वेरी फन्नी,पंकज और उसकी गर्लफ्रेंड को मैं ने मेले के बाद साथ मे नही देखा.

अवी-पढ़ाई कर रहे होगे

करीम की गर्लफ्रेंड-ऐसा ही हो, पर मैं ने पंकज को कॉल किया था वो परेशान दिख रहा था.उसकी गर्लफ्रेंड ने भी पंकज को छोड़ कर सब बाते की.

अवी-तुम्हें इसमे अजीब क्या लगता है

करीम की गर्लफ्रेंड-कहीं दोनो ने ब्रेक अप तो नही किया.

अवी-नही करेंगे. दोनो एक दूसरे से बहोत प्यार करते है. अगर ऐसा कुछ है तो मैं देखता हूँ

करीम की गर्लफ्रेंड-तुम पंकज से पूछ लेना.करीम से ज़्यादा वो तुम्हें अपनी बाते बताता है.

अवी-मैं कुछ करता हूँ, पहले उनकी एग्ज़ॅम होने दो,

करीम की गर्लफ्रेंड-ठीक है. थोड़ा मेरा भी ध्यान रखना.

अवी-वो पार्टी मे देखते है

करीम की गर्लफ्रेंड-मैं पार्टी का इंतज़ार करूँगी.

अवी-तैयार रहना , चलो अब

करीम की गर्लफ्रेंड-हाँ चलो

फिर करीम अपनी गर्लफ्रेंड को लेकर कॅंटीन मे चला गया .

और मैं रानी और कोमल के क्लास मे चला गया.

रानी और कोमल भी एग्ज़ॅम के बाद अपने पेपर के बारे मे बात कर रही थी.

 


773

एग्ज़ॅम ख़तम होते ही मैं रानी और कोमल के पास चला गया.

रानी और कोमल पेपर के आन्सर के बारे मे बात कर रही थी.

आरती भी वही पर थी, वो पढ़ाई के सिवा दूसरे चीज़ पर ध्यान नही देती थी.

वो कॉलेज के पहले दिन खूबसूरत दिखती थी.अब वो मोटी हो चुकी थी. और उसके चश्मे का नंबर बढ़ गया था.

उसने खुद का बिल्कुल ध्यान नही रखा था.मुझे पहले उसमे इंटेरेस्ट था पर अब वो ,जाने दो उसे ,

मेरे आते ही आरती चली गयी. और मैं रानी और कोमल के साथ बाते करने लगा.

रानी-अवी पेपर कैसे गये

अवी-ठीक ठाक गये

रानी-पास तो हो जाओगे ना.

अवी-हाँ, उतने भी खराब नही गये कि मैं फैल हो जाउ

कोमल-अवी ,अगले साल पढ़ाई पे ध्यान देना.

अवी-अगले साल जैसा तुम कहोगी मैं वैसा करूँगा.

रानी-चलो अच्छा है, तुम भी टॉपर बन जाओगे

अवी-टॉपर ,मुझे बस अच्छे मार्क लेने है

रानी-एग्ज़ॅम के बाद पढ़ाई के बाते बंद करते है.

कोमल-मैं तो कुछ दिन आराम करने की सोच रही थी पर ये आरती ने आकर झटका दे दिया

अवी-क्या हुआ ,

रानी-ये देखो

रानी ने मुझे एक पोम्पलेट दिया .जिस मे मेडिकल एंट्रेन्स के क्रोस के बारे मे एड था

अवी-ये क्या है

रानी-मेडिकल एंट्रेन्स की ट्यूशन की एड है.

अवी-इतनी जल्दी क्या है.

कोमल-आरती कह रही थी कि इस साल लगाने से अगले साल ज़्यादा मेहनत नही करनी पड़ेगी.

अवी-उसने सही कहा. मेरे कहने का मतलब था कि कुछ दिन आराम करो फिर क्लास लगा लेना.

रानी-मैं ने भी यही कहा था. पर आरती कह रही थी कि क्लासस अच्छे है,और लिमिटेड सीट रहती है.

अवी-मैं हूँ ना ,तुम्हारे क्लास लगवा दूँगा.

कोमल-आरती ने एग्ज़ॅम से पहले क्लासस मे अड्मिशन ली है. वो कह रही थी कि एग्ज़ॅम होते ही ट्यूशन मे जगा नही मिलेगी.

अवी-ये आरती भी ना ,मैं सोच रहा था कि होटेल मे जाकर कॉफी पीकर पार्टी करेंगे ,बिना वजह तुम्हें टेन्षन दे गयी.

रानी-अवी मुझे लगता है, एक बार जाकर पूछ लेते है ,सीट बुक करके रखते है.

अवी-कोमल को ट्यूशन की ज़रूरत है पर दूसरे क्लासस भी होगे ना

कोमल-ये बेस्ट है, अच्छा पढ़ाते है. और सिर्फ़ 3 महीने के है

रानी-हाँ, 3 महीने ,छुट्टियों मे एंटरेस की पढ़ाई हो जाएगी. अगले साल रिविषन करके टेस्ट पेपर देने होगे

अवी-चलो फिर तुम्हारे क्लासस लगवा देते है.

कोमल-अवी तुम भी लगवा लो, केमिस्ट्री और फिज़ के

अवी-नही. मैं तुम्हारे नोट्स से पढ़ लूँगा. मेरे आने से तुम डिस्ट्रब हो जाओगी

रानी-कुछ नही होता तुम भी लगवा लो,

अवी-मैं घर पे पढ़ाई करने पे विश्वास रखता हूँ.और कुछ प्राब्लम हुए तो मैं कोमल से डाउट पूछ लूँगा.और तुम भी हो.

रानी-चलो सीट बुक करके आते है.

अवी-तुम बाइक के पास चलो ,मैं 2 मिनिट मे आता हूँ

रानी और कोमल को आगे भेज कर मैं एटीएम मे चला गया. और पैसे निकाल लिए.

कोमल के लिए क्लासस ज़रूरी है ,मैं रिस्क नही लेना चाहता था.

पैसे निकाल कर रानी और कोमल को लेकर कोचिंग सेंटर चला गया.

रानी ने सही कहा था. क्लासस लगाने के लिए लाइन लगी थी.

हमारा नंबर आने तक कुछ सीट्स बची थी.

अछा हुआ मैं पैसे लेकर आ गया. अगर 1 2 घंटा देर हो जाती तो सीट नही मिलती.

मैं ने रानी और कोमल के पैसे जमा कर लिए.अड्मिशन कर लिया. और स्लिप लेकर रानी और कोमल के पास आ गया.

रानी-क्या हुआ ,

अवी-क्लासस मे जगह नही है. चलो दूसरे क्लासस देखते है

कोमल-ये अच्छे क्लास थे. यहाँ पर हो जाता तो .

कोमल ने अपना चेहरा छोटा कर लिया

रानी-कोमल हम दूसरे क्लास मे जाकर देखते है.

अवी-कहीं जाने की ज़रूरत नही है.कोमल को यहाँ पढ़ना है तो यही पढ़ेगी. ये लो अपनी अपनी स्लिप ,तुम्हारी अड्मिशन हो गयी.

कोमल मेरी बात सुनते ही खुश हो गयी.

कोमल-हमे सीट मिल गयी.

अवी-हाँ, तुम्हें डॉक्टर बन ने से कोई नही रोक सकता. तुम्हारे पैसे भर दिए है

कोमल मेरे गले लग गयी.

कोमल-मुझे भी जल्दी डॉक्टर बनना है

रानी-मेरे पैसे भी भर दिए, मैं तुम्हें कल दे दूँगी.

अवी-क्या कहा, मैं क्या इतना भी नही कर सकता..कोमल तुम ही बताओ रानी को

कोमल-सही कहा अवी ने, पैसे देने की ज़रूरत नही है.अगर दिए तो याद रखना मुझ से बुरा कोई नही होगा

रानी-पर

अवी-पर को मारो गोली. चलो कॉफी पीने

रानी और कोमल को लेकर कॉफी पीने चला गया.

कॉफी पीते हुए हम ने खूब मस्ती की.

कॉफी पीने के बाद भी हम थोड़ी देर होटेल मे बैठ कर कर बाते करने लगे

रानी-अवी तुम ने पूछा कि क्लास कब से है.

अवी-हाँ, अगले हफ्ते से स्टार्ट हो जाएँगे.

कोमल-टाइमिंग क्या है

अवी-10 से 12 बाइलॉजी ,12.30 से 2.30 से केमिस्ट्री ,और 3 से 5 फिज़िक्स

रानी-इसमे तो पूरा दिन चला जाता है.

अवी-तो क्या हुआ .अगले साल बस टेस्ट देनी होगी. और तुम्हारे पास 1 साल मिलेगा पढ़ाई करने के लिए

कोमल-हाँ, अभी क्लास करना ठीक रहेगा. अगले साल तो स्वेता दीदी की शादी है. पता नही कब डेट निकालेंगी

अवी-ये रीज़न सही है. मुझे भी पढ़ाई करनी शुरू करनी होगी. तुम्हारे साथ ही स्टार्ट करूँगा.अच्छे नोट्स बना देना

रानी-मैं भी तो आउन्गि .शादी मे .और नोट्स की टेन्षन मत लो ,हम हैना

कोमल-हाँ, और प्राब्लम हुई तो पढ़ाकू फ्रेंड है आरती मदद करने के लिए

और आरती का नाम लेकर दोनो हँसने लगी.

अवी-उस पे हसो मत उसकी के वजह से क्लासस मे अड्मिशन हुआ है

रानी-सॉरी ,

अवी-वैसे वो इस साल टॉप करेगी

कोमल-उसकी बराबरी हम भी नही कर सकते

रानी-हम इतने मे खुश है

अवी-वो छोड़ो, अब तुम दोनो बिज़ी हो जाओगी

रानी-हाँ,पर 1 हफ़्ता है ,मैं मम्मी के साथ घूमने जा रही हूँ.

अवी-कहाँ पे

रानी-हिल स्टेशन पे

अवी-कब

रानी-कल सुबह की ट्रेन से ,

अवी-तुम ने बताया नही.

कोमल-तुम ऐसे क्यूँ पूछ रहे हो

अवी-वो मैं...मैं ने सोचा था कि हम मिलकर मस्ती करेंगे.

रानी-सॉरी ,वो मम्मी को मैं मना नही कर सकती. हम हर साल छुट्टी पे घूमने जाते है.

अवी-कोई बात नही.

रानी-अच्छा अब मुझे चलना चाहिए .पॅकिंग करनी है.

कोमल-जल्दी आना

रानी-बस 5दिन के लिए जा रहे है. इस बार टूर प्लान किया है

अवी-तुम एंजाय करो ,हम गाओं मे एंजाय करेंगे.

कोमल-चलो देर हो गयी.

रानी-बाइ

अवी-बाइ

रानी अपनी स्कूटी लेकर चली गयी. और मैं कोमल को लेकर गाओं की तरफ निकल पड़ा.

 
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