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मैं और मेरा परिवार

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कोमल ने अपने सारे दिन की मस्ती बुआ और चाची को बता कर मुझे बचा लिया

उस मे इतनी हिम्मत कहाँ से आई ये मुझे नही पता पर उसने मुझे अपनी माँ के गुस्से से बचा लिया

कोमल ने बुआ को वही बताया जो उनको बताने लायक था

कोमल ने तालाब मे स्विम करने की बात बताई पर ये बात नही बताई कि वो बिना कपड़ो के स्विम कर रही थी

कोमल ने जंगल मे मस्ती की ये बताया पर वनरानी और वनराजा वाले खेल के बारे मे नही बताया

कोमल ने बताया कि उसने डॅन्स किया पर कपल जैसा डॅन्स किया ये नही बताया

कोमल ने कुछ बातें छुपा कर रखी ताकि मुझे बुआ के गुस्से से बचा सके

कोमल के इस स्मार्टनेस से मैं रिलेक्स हो गया वरना कितने जवाब देने पड़ते

कोमल रानी को भी ये खास बातें नही बताएगी इसका सबूत मुझे मिल गया

और कोमल अपने दिल की बातें किसी के साथ शेयर नही करती सिवाय मेरे

मुझे बता देती है पर अपनी माँ को भी नही बताई

कोमल के लिए आज का दिन स्पेशल बनाने के बाद मैं चाची के साथ घर आ गया.

घर आते सीमा चाची मेरे लिए खाना लगा रही थी कि मैं ने उनको रोक दिया.

अवी-चाची मैं खाना खा कर आया हूँ.

म चाची-तेरे लिए मैं ने परान्ठे बनाए थे .जाने दे मैं ही खाती हूँ

अवी-सिर्फ़ एक ही लुगा वो भी आपके हाथ से खाउन्गा.

म चाची-एक से क्या होगा. तू जवान हो रहा है. तुझे अपनी सेहत बनानी चाहिए. क्यू दीदी

ब चाची-सही कहा सीमा ने, मीना तू अवी की खुराक बढ़ा दे, और अच्छे से अवी की कसरत लिया कर. देख कैसा दुबला हो गया है.

अवी-चाची मैं कहाँ दुबला हुआ हूँ.

ब चाची-तू चुप रह, 2 3 महीने से देख रही हूँ ना ठीक से ख़ाता है और ना कसरत करता है.

म चाची-दीदी, ये मीना का काम था .वो अवी पे ध्यान ही नही दे रही. आप कहे तो मैं अवी की कसरत का ध्यान रखूं

ब चाची-सीमा तू बच्चो का ध्यान अच्छे से रखती है. अवी के लिए मीना ठीक है.

सी चाची-दीदी. मैं कल से इससे ऐसी कसरत लुगी कि आप देखना अवी 1 महीने मे गबरू पहलवान बन जाएगा.

ब चाची-और नही बना तो

सी चाची-तो आपकी लाठी मेरा सर

अवी-क्या चाची अच्छा आराम करने का सोच रहा था कि आपने मुझे कहाँ फसा दिया.

म चाची-कसरत करनी बहुत ज़रूरी होती है. मैं तो तेरे भले के लिए सोच रही थी.

सी चाची-सीमा दीदी सही कह रही है. तुझे कल से कसरत करनी होगी.

मैं ने बड़ी चाची की तरफ देखा.

ब चाची-अवी ,ये तेरे अच्छे के लिए है. कसरत करने से जोश बढ़ जाता है.

अवी-ठीक है. कल से पर अब मुझे आराम करना है

म चाची-पहले परान्ठ खा. नही तो सोने नही दुगी.

अवी-आअहह

सीमा चाची ने मुझे अपने हाथो से परान्ठा खिलाया.

परान्ठा खाते ही मेरे पेट मे जो थोड़ी जगह बची थी वो भर गयी.

परान्ठा खाने के बाद मुझसे चला भी नही जा रहा था.

बड़ी मुश्किल से मैं अपने बेड तक जा सका.

बेड पर गिरते ही मैं ने अपना बेल्ट और जीन्स के बटन खोल दिए.तब जाके चैन की साँस ली.

अभी मैं बेड पर लेटा था कि छोटी चाची मेरे कमरे मे आ गयी.

सी चाची-अवी

अवी-चाची कुछ मत पूछिए,मैं कुछ भी बताने की हालत मे नही हूँ.

सी चाची-मैं तुम्हारे लिए हज़मोला लाई थी. खा लो आराम मिलेगा.

अवी-जल्दी दीजिए

सी चाची-लो

हज़मोला खाते एक डकार निकल गयी और पेट मे जो दर्द हो रहा था वो ख़तम हो गया

अवी-चाची. अब अच्छा लग रहा है.

सी चाची-तू आराम कर हम कल बात करेंगे.

अवी-बिना मुझसे बात किए आपको नींद आएगी.

सी चाची-नही.

अवी-तो आइए मेरे पास

सी चाची-तू आराम कर हम कल बात करेंगे

अवी-आअहह

सी चाची-क्या हुआ

अवी-सर मे दर्द हो रहा है.

मेरे इतना कहते छोटी चाची मेरे पास आकर बैठ गयी.और मेरे सर पे हाथ घुमाने लगी.

मैं ने अपना सर चाची के गोद मे रख दिया.

सी चाची-मैं बाम लगा दूं ,

अवी-बाम किस लिए

सी चाची-तेरा सर दर्द कर रहा था ना

अवी-वोतो आप यहाँ रुके इस लिए कहा था.

सी चाची-तू भी ना.

अवी-आपको नींद अच्छी आए यही मैं चाहता हूँ.

सी चाची-बता फिर क्या किया आज

अवी-कहाँ से बताऊ

सी चाची-सुबह से लेकर शाम तक

अवी-बता तो दूँगा पर मेरे होंठ सुख रहे है.

सी चाची-तू बहुत चालू हो गया है.

अवी-आपका बेटा हूँ. आप ही से तो सीखा है.

और छोटी चाची धीरे धीरे नीचे झुकती गयी.

चाची बड़े प्यार से अपने होंठो मेरे होंठो के पास लाने लगी.

हमारे होंठ मिलते ही चाची और मैं ने अपने आँखे बंद कर ली.

चाची के बालो ने हमारे किस को छुपा दिया.

चाची के होंठो का रस पीकर मेरी प्यास बुझ गयी.

चाची के रसीले होंठो को चूस कर हम ने बातें करना स्टार्ट किया

सी चाची-अब बता क्या किया आज

अवी-रानी अपनी मम्मी के साथ हॉलिडे एंजाय करने गयी है.ऐसे मे कोमल का मन भी एंजाय करने का हो रहा था. तो मैं ने आज के दिन को उसके ज़िंदगी का हसीन दिन बना दिया.

सी चाची-कहाँ गये थे तुम

अवी-हम तो पहले हाइवे पे स्पीड से बाइक चलाने का मज़ा लिया .और बाइक चलाते हुए पता नही कितनी दूर निकल गये थे. पर जहाँ पहुँचे वो जगह बहुत संदर थी.

सी चाची-कोई हिल स्टेशन था.

अवी-हिल स्टेशन नही जंगल मे गये थे.

सी चाची-जंगल मे मॅंगल

अवी-ऐसा कुछ नही हुआ था.

सी चाची-तो क्या किया

अवी-उस जंगल मे एक झरना था वहाँ मस्ती की. वहाँ पर जाकर कोमल बहुत खुश हो गयी.

सी चाची-वो तो दिख रहा था.कोमल को देख कर कोई भी बता सकता है कि उसने कितनी मस्ती की है.

अवी-कोमल एक आज़ाद पंछी की तरह उड़ रही थी.

सी चाची-कोमल को उड़ता हुआ देख कर नेहा खुश हो गयी.

अवी-नेहा बुआ का गुस्सा तो एक मिनट मे ख़तम हो गया.

सी चाची-नेहा तो बहुत गुस्से मे थी , मुझे तो लगा कि मैं भी तुम्हे नेहा से बचा नही पाउन्गी पर कोमल का हँसता हुआ चेहरा देख कर नेहा अपने गुस्से को भूल गयी.

अवी-मैं तो डर रहा था की नेहा बुआ मेरे साथ क्या करेगी.

सी चाची-कुछ नही करती. वो दिल की बहुत अच्छी है.

अवी-आप नेहा बुआ के बारे मे हमेशा ऐसा क्यूँ कहती है. कि नेहा बुआ मुझसे प्यार करती है.

सी चाची-नेहा के दिल मे क्या है वो तुझे पता नही है. नेहा और सुमन दीदी के लिए तुम उनकी जान हो

अवी-बड़ी चाची का ठीक है. पर नेहा बुआ की मैं जान हो ही नही सकता .

सी चाची-तुझे मेरी बात पे विश्वास नही है.

अवी-पर नेहा बुआ

सी चाची-तू ज़्यादा मत सोच. बस नेहा बुआ को प्यार किया कर

अवी-जैसा आप कहे ,

सी चाची-और बता क्या किया कोमल के साथ

अवी-चाची, कोमल बहुत खूबसूरत है. आज पहली बार उसकी खूबसूरती को फील किया है.

सी चाची-कोमल करोड़ों मे एक है.

अवी-सही कहा. कोमल को फ़ुर्सत से बनाया होगा भगवान ने

सी चाची-कहीं तूने कोमल के साथ

अवी-मैं ने कुछ नही किया कोमल के साथ .बस आपको बता रहा हूँ कि कोमल क्या है. उसकी तो तस्वीर बस गयी है मेरी आँखे मे

सी चाची-तस्वीर मुझे तो नही दिख रही है.

अवी-जाने दीजिए.

सी चाची-और क्या किया

अवी-कोमल को मूवी दिखाई, डॅन्स किया. और एक कॅंडल लाइट डिन्नर पे ले गया.

सी चाची-मुझे तो कभी नही ले गया था.

अवी-हम कल चलेंगे

सी चाची-मैं मज़ाक कर रही थी.

अवी-मैं सीरीयस हूँ

सी चाची-मुझे बीवी बना कर ले जाना होगा.

अवी-सब मंजूर

सी चाची-तो हमारी शादी तक रुक जा ,फिर ले जाना कॅंडल लाइट डिन्नर पे

अवी-आप ना एक लिस्ट बना लो. कि हमे क्या क्या करना है.

सी चाची-उसकी ज़रूरत नही है. तू भी ना कहाँ से कहाँ ले जाता है बात को. आगे क्या किया

अवी-बस इतना ही एंजाय किया कोमल और मैं ने

सी चाची-कोमल तो बहुत खुश थी. और तुम्हारी बातों से तो ऐसा कुछ नही लग रहा

अवी-कोमल पहली बार घूमने गयी थी ना शायद इस लिए वो ज़्यादा खुश थी.

सी चाची-अच्छा किया तुम ने जो कोमल को बाहर ले गये थे.

अवी-हाँ ,मुझे भी पता चला कि कोमल ने कितना कुछ मिस किया है.

सी चाची-वो नही. कोमल के खुशी को देख कर नेहा खुश हो गयी.

अवी-नेहा बुआ की खुशी की चाभी कोमल है.

सी चाची-अब समझा तू

अवी-तो आप चाहती है कि मैं कोमल को खुश रखूं

सी चाची-हाँ

अवी-और जिस से नेहा बुआ मुझसे प्यार करने लगे

सी चाची-सही जा रहे हो

अवी-नेहा बुआ को मैं अपने प्यार से बदल दूं

सी चाची-सही ट्रॅक पे जा रहे हो

अवी-आप मुझे मरवाने का प्लान बना रही है.

सी चाची-तुम ग़लत ट्रॅक पकड़ रहे हो

अवी-आप जिस तरफ पे मुझे चलने की बात कह रही हो वहाँ काटे ही काटे है.

सी चाची-तू भूल रहा है कि गुलाब काटो मे से गिर हुआ होता है.

अवी-मुझसे नही होगा.

सी चाची-ये मेरा अवी कह रहा है.

अवी-चाची

सी चाची-तू गेम खेलने से पहले हार मान रहा है. जा मुझे नही करनी तुझसे बात

अवी-ये एमोशनल ब्लॅकमेलिंग है.

सी चाची-कुछ भी समझ

अवी-ठीक है. मैं धीरे धीरे ट्राइ करूँगा.

सी चाची-कैसे भी कर ,पर कोमल के ज़रिए नेहा बुआ को खुश कर

अवी-जी,

सी चाची-ये हुई ना बात

अवी-अब मुझे सोना चाहिए

सी चाची-सो जा ,कल से कसरत करनी है.

अवी-गुड नाइट

सी चाची-रूखा सूखा गुड नाइट कर रहे हो

अवी-आप ही मीठा सा गुड नाइट बोल दो

छोटी चाची ने किस करके मुझे गुड नाइट किया.

 
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सुबह सुबह छोटी चाची ने मुझे नहला दिया.

सुबह जल्दी ना उठने से छोटी चाची ने मेरे उपर पानी डाल दिया.

अवी-चाची. ये क्या किया आपने

सी चाची-कसरत करने का समय हो गया है.

अवी-सोने दो ना चाची.

सी चाची-सुमन दीदी को बुलाऊ

अवी-लगता है आप मेरी मिलिटरी ट्रैनिंग लेने वाली है.

सी चाची-सही समझे बच्चू, चलो कसरत करने को तैयार हो जाओ मैं दूध लेकर कर लाती हूँ

मैं तो मज़ाक मे ले रहा था. पर यहाँ तो चाची सच मे मेरी ट्रैनिंग लेने वाली है.

उठ जा अवी ,वरना छोटी चाची हालत खराब कर देगी.

चाची के जाते मैं छत पर जाकर कसरत करने लगा.

चाची ने छत पे पूरा बंदोबस्त करके रखा था.

मैं तो गया काम से. चाची 16 का डोला बनाके रहेगी.

छत पर आते मैं ने कसरत करनी शुरू की.

पहले हल्की पुलकी कसरत की फिर दंड पेलने लगा.

चाची जल्दी दूध लेकर उपर आ गयी.और मुझसे कसरत करवाने लगी.

चाची थोड़ी स्ट्रिक्क लग रही थी.

अवी-चाची आज के लिए इतना काफ़ी होगा ना.

सी चाची-बिल्कुल नही. 2 घंटे से पहले नीचे नही जाने दुगी.

अवी-चाची ये मज़ाक था ना

सी चाची-अवी कोई हसी मज़ाक नही चलेगा. तुम्हे कसरत करनी होगी. तुम बहुत आलसी हो गये हो.

अवी-चाची, मैं कर लूँगा .आप आराम कीजिए

सी चाची-अवी तू समझता क्यूँ नही ,चल बता तेरा वेट क्या है

अवी-वेट क्यूँ पूछ रही है

सी चाची-बता ना अब कितना वेट है और मेले से पहले कितना था.

अवी-आप तो सीरीयस हो गयी हो

सी चाची-देख 6 केजी वेट लॉस किया है तूने ,तू काम करता है वो ठीक है पर अपना ख़याल भी तो रखना सीख

अवी-ठीक है जैसा आप कहेगी वैसा करूँगा.

सी चाची-तो सीरियस्ली कसरत कर, पहले की तरह

अवी-जी

छोटी चाची जो कह रही है वो सही था.मैं खुद का ख्याल नही रख रहा हूँ.

छोटी चाची के कहते मैं सीरियस्ली कसरत करने लगा.

चाची मुझे कसरत करते हुए देख रही थी.

थोड़ी देर बाद विद्या भी छत पर आ गयी.

सी चाची-विद्या क्या हुआ. दीदी बुला रही है

विद्या-नही. मैं तो ऐसे उपर आ गयी.

सी चाची-आओ .बैठो मेरे पास

विद्या-चाची. आप बैठिए मैं योगा करती हूँ

सी चाची-तुम्हे आता है योगा करना

विद्या-हाँ

सी चाची-मुझे भी सिखा दे,

विद्या-जी, हम साथ मे करते है.

और विद्या ने छत पर बेडशीट बिछा दी.

सिर्फ़ मेरे कमरे की छत सेमेंट की थी. बाकी का घर केवलु का था. दादाजी ने मेरे लिए एक कमरा तोड़ कर शहर जैसा बनाया था.बाकी का घर वाडा जैसा था.

विद्या छोटी चाची को योगा करना सिखाने लगी.

विद्या के साथ छोटी चाची योगा करने लगी.

छोटी चाची को योगा करते हुए देख कर मैं ने कसरत करनी बंद की. और उनके तरफ देखने लगा.

सी चाची- मिसटर इधर देखना बंद करो. और अपनी कसरत करनी शुरू करो

विद्या ने इस पे रियेक्शन नही दिया.

मैं वापस कसरत करने लगा.

थोड़ी देर बाद सीमा चाची और बड़ी चाची विद्या को आवाज़ देने के लिए उपर आ गयी.

विद्या और छोटी चाची को योगा करते हुए देख कर आवाज़ देना बंद किया.

सी चाची-दीदी आप

म चाची-क्या कर रही हो

सी चाची-विद्या मुझे योगा करना सिखा रही है.

ब चाची-विद्या को तो बहुत कुछ आता है.

विद्या-चाची वो स्कूल मे सीख लिया था.

म चाची-दीदी मैं भी करूँ

ब चाची-तू करके क्या करेगी.

म चाची-योगा करने से सेहत अच्छी रहती है.

ब चाची-कल से कर लेना. चल अवी के चाचा के उठने का समय हो गया है.

म चाची-विद्या कल से मुझे भी सिखाना ,हम साथ मे करेंगे

विद्या-जी चाची.

सी चाची-फिर तो सुमन दीदी को भी करना चाहिए .

ब चाची-सब यही करेंगे तो अवी के चाचा के लिए नाश्ता कौन बनाएगा.

सी चाची-वो हम मिल कर कर लेंगे

ब चाची-तुम करो, मुझे नही करना योगा ,और बच्चो को भी देखना होगा ना

सी चाची-दीदी ,बच्चो को छत पर लेके आएँगे .यहाँ सूरज की पहली किरण बच्चो के लिए अच्छी रहेगी.

अवी-चाची हाँ कर दो ना

ब चाची-ठीक है .पर मैं ज़्यादा देर नही करूँगी. उनके लिए नाश्ता भी बनाना होता है.

अवी-ये हुई ना बात

बड़ी चाची के हाँ करते मैं फिर से कसरत करने लगा और विद्या छोटी चाची के साथ योगा करने लगी.

कसरत करने के बाद छोटी चाची ने 2 ग्लास दूध और वो भी ड्राइफ्रूट के साथ दिया.

अवी-चाची एक ग्लास आपका हैना

सी चाची-नही. दोनो तुम्हारे लिए है.

अवी-मैं नही पीने वाला इतना दूध

सी चाची-क्या कहा. फिर से कहना

अवी-चाची, मुझसे नही पीना होगा इतना दूध

सी चाची-ट्राइ कर ,

एक ग्लास तो आराम से पी लिया .पर दूसरा ग्लास आधा पी सका.

अवी-चाची इस से ज़्यादा नही होगा.

सी चाची-बस एक सीप

मैं ने एक घूँट और पी लिया.

अवी-बस

सी चाची-आज के लिए चल जाएगा पर कल पीना होगा.

और चाची ने बाकी का दूध पी लिया .और नीचे चली गयी.

विद्या कसरत का समान ठीक करने लगी .

अवी-विद्या क्या बात

विद्या-कुछ भी तो नही.

अवी-फिर मुझसे बात क्यूँ नही कर रही हो

विद्या-ऐसा तो कुछ नही है

अवी-पर तुम्हारा चेहरा तो कुछ और बता रहा है.

विद्या-क्या बता रहा है

अवी-कि तुम नाराज़ हो.

विद्या-मैं क्यू नाराज़ रहूंगी

अवी-सोचने दो कि तुम नाराज़ क्यू रह सकती हो.

विद्या-मैं नाराज़ नही हूँ

मैं सोचने लगा कि विद्या नाराज़ क्यू है. और जल्दी मेरे दिमाग़ की बत्ती जल गयी.

अवी-विद्या तुम ईडियट हो

विद्या-मैं ने क्या किया

अवी-याद नही दिला सकती थी.

विद्या-तुम ही तो भूल गये थे

अवी-एग्ज़ॅम की वजह से याद नही रहा.

विद्या-याद क्यूँ रहेगा ,मैं हूँ ही कौन ,एक नौकरानी

और मैं ने विद्या के हल्के से गाल पे थप्पड़ मार दिया.

अवी-दुबारा ऐसा कहा तो एक और थप्पड़ पड़ेगा.

विद्या के आँखे मे आसू आ गये.

अवी-तुम इस घर का एक हिस्सा हो .नौकरानी नही. तुम ने ये बोल कर बता दिया कि तुम मेरी फॅमिली को अपनी फॅमिली नही समझती.

विद्या रोने लगी

विद्या-मेरा कहने का वो मतलब नही था.

अवी-तुम से मुझे ये उम्मीद नही थी.

विद्या-वो ग़लती से बोल दिया.

अवी-ग़लती से इंसान दिल की बात बताता है.मैं कल ही तुम्हारे लिए दूसरी जगह ढूंढता हूँ और एक जॉब भी.

विद्या मेरे पैरो मे गिर गयी.

विद्या-मुझे यहाँ से नही जाना. मुझे अपनी फॅमिली से दूर मत करो , मुझे मेरी फॅमिली से दूर मत करो .मुझे माफ़ कर दो.चाची मे मैं अपनी माँ को देखती हूँ .मुझे अपनी माँ से दूर मत करो

अवी-फिर तुम ने खुद को नौकरानी कैसे कहा.

विद्या-गुस्से मे निकल गया. तुम हर बार मुझे मना कर रहे थे जिस से

अवी-विद्या एक बात ध्यान से सुनो, तुम इस फॅमिली का एक हिस्सा हो. खुद को कभी नौकरानी मत समझना .चाची तुम्हे अपनी बेटी की तरह मानती है. मुझसे कहा ठीक है पर चाची के सामने दुबारा मत करना.

विद्या-दुबारा ग़लती नही होगी.

अवी-ग़लती मेरी भी है. मैं ही भूल गया था.

विद्या-तुम जब कहोगे तब करेंगे. दुबारा मैं कभी ज़िद नही करूँगी.

अवी-बात एग्ज़ॅम के बाद की हुई थी ,कुछ सोचने दो

विद्या-रहने दो मेरा मन नही है.

अवी-मेरी बात को दिल से मत लगाना

विद्या-तुम ने सही कहा ,चाची मुझे अपनी बेटी की तरह मानती है. तुम्हारी बहने एक सहेली की तरह रहती है मेरे साथ ,और मैं ने ये कैसे बोल दिया.

अवी-कहा ना दिल पे मत लगा लेना.ग़लती सब से होती है.ग़लती पे रोते रहने से अच्छा है कि हम दुबारा ऐसी ग़लती ना हो इसके बारे मे सोचना चाहिए

विद्या-मैं दुबारा ऐसी ग़लती नही करूँगी.

अवी-लो एक आइडिया आ गया

विद्या- किस लिए

अवी-तुम्हे प्यार करने के लिए एक आइडिया मिल गया

विद्या-अब रहने देते है

अवी-ऐसे कैसे, हम कल प्यार करेंगे

विद्या-कल

अवी-हाँ ,कल ,और सुनो मेरा प्लान

विद्या-क्या है

अवी-चाची को कहेंगे कि कल तुम्हारी माँ की बरसी है.

विद्या-कल मेरी माँ की बरसी नही बर्तडे है

अवी-सच

विद्या-हाँ

अवी-चाची को कहेंगे तुम्हारे माँ की बरसी है और कल तुम्हे अपने गाओं जाना है.

विद्या-और

अवी-हम एक होटेल मे जाकर तुम्हारी माँ का बर्तडे मनाएँगे

विद्या-अगर चाची को पता चला तो

अवी-मैं हूँ ना. बस दिन भर अपना मूड ऑफ रखना.

विद्या-इस से क्या होगा.

अवी-जितना कहा है उतना करो , बाकी मैं संभाल लुगा.

विद्या-ठीक है.

अवी-अच्छे से तैयारी करना कल की. और नीचे जाने से पहले अपना चेहरा ठीक करना.

विद्या-तैयारी करके रखी है.

अवी-दिखाओ

विद्या-यहाँ पर

अवी-कल देख लूँगा

और मैं विद्या के गंद पर थप्पड़ मार कर नीचे चला गया

विद्या अपनी गंद को सहलाते हुए नीचे आ गयी.

नीचे आते चाची अपने हाथ मे परान्ठे लेकर मेरे लिए खड़ी थी.

परान्ठे देखते ही मैं ने अपना मूह खोला था कि तीनो चाची ने एक साथ परान्ठे मुझे खिला दिए.

आज से मेरे लिए कड़क रूल बन गये थे.

नोट-

नेहा बुआ का राज़ ,

छोटी चाची तो अवी को कुछ बताती नही है

कब तक अवी छोटी चाची के सही समय का इंतज़ार करेगा

अवी को दूसरो से पूछना चाहिए

1) बड़ी चाची को पूछे अपने माँ और पापा के बारे मे , बड़ी चाची एमोशनल हो जाएगी जिस से अवी उनसे पूछ नही पाएगा

2)पूजा बुआ, वो सब मे बड़ी है , उनको पता होगा तो भी वो कहेगी कि छोटी चाची को पूछ लो

3) छोटी चाची , वो तो कहती है सही समय का इंतज़ार करो

4) नेहा बुआ तो बात नही करती उनसे पूछ ही नही सकता अवी

5) सीमा चाची , सीमा चाची बता सकती है, उनको अपनी बातों मे फसा कर अवी सच पता कर सकता है

6) नीता बुआ , नीता बुआ से भी सच पता किया जा सकता है , वो तो नेहा नुआ के काफ़ी करीब है उनको बहुत कुछ पता होगा

7)चाचा,चाचा को ज़्यादा कुछ पता नही होता फिर भी वो कुछ तो बता ही सकते है , चाचा से नर्मी से बात करनी होगी अवी को

8) स्वेता दीदी वो कभी नही बताएगी ,

9)कोमल , कोमल को जितना पता होगा वो बता देगी

तो नीता बुआ से स्टार्ट करते है

फिर सीमा चाची , कोमल , और चाचा से पूछ लेंगे

स्टेप बाइ स्टेप राज़ ओपन करते है

नीता बुआ से नेहा बुआ के बारे मे पूछते हुए राजेश का राज़ भी ओपन करेंगे

 
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चाची के साथ नाश्ता करने के बाद मैं कोमल से मिलने चला गया.

कल उसे कैसा लगा था इस के बारे मे पूछना था.कोई मुझसे गुस्ताख़ी तो नही हुई ये पूछना था.

गाओं का चक्कर लगाने चला गया.

कितने दिन हो गये मैं ने ठीक से गाओं मे चक्कर नही लगाया था.

गाओं की छोटी, पतली गलियो मे घूमते हुए लोगो से बातें करने लगा

और फिरते फिरते मैं नेहा बुआ के घर आ गया. मुझे देखते कविता खुश हो गयी.

कविता-भैया. आज इतनी सुबह कैसे आना होगा.

अवी-तुम से मिलने आया हूँ

कविता-कोमल दीदी से मिलने आए होगे. कल की तरह घुमाने ले जाने के लिए

अवी-एक दिन तो लेके गया था. तुम्हे तो कितनी बार लेकर गया हूँ

कविता-हाँ लेके गये है पर दीदी को जहाँ लेके गये वो जगह अच्छी थी.

अवी-अगली बार तुम्हे ले जाउन्गा .अब तो अंदर आने दो

कविता-पक्का अगली बार लेके जाओगे.

अवी-हाँ,

कविता-दीदी ,भैया आए है

मेरे आने की खबर मिलते कोमल किचन से बाहर आ गयी.और कविता अपने कमरे मे चली गयी.

कोमल-अवी ,अच्छा हुआ तुम आ गये . मैं कविता को तुम्हे बुलाने के लिए भेजने वाली थी.

अवी-किस लिए

कोमल-आज का खाना यहाँ खाना है तुम को

अवी-यहाँ पर, नेहा बुआ

कोमल-माँ को मैं ने मना लिया है.

अवी-वैसे बुआ कहाँ है.

कोमल-माँ मौसी के यहाँ गयी है.

अवी-फिर खाना कौन बनाएगा.

कोमल-मैं

अवी-अच्छा जोक था.

कोमल-तुम्हे जोक लग रहा है.

अवी-तुम्हे कभी खाना बनाते हुए देखा नही ना इस लिए ऐसा कहा.

कोमल-आज देख लो ,चलो मेरी मदद करना

अवी-पहले ये बताओ किस खुशी मे खाना बना रही हो और मुझे क्यू इन्वाइट किया है.

कोमल-क्यू तुम्हे खाना खिलाने के लिए मुझे वजह चाहिए

अवी-कहीं आज सूरज वेस्ट से तो नही निकला

कोमल-तुम ऐसे नही मानोगे ,

और कोमल मेरा हाथ पकड़ किचन मे ले गयी.

और आटा गुंथने लगी.

अवी-कोमल तुम बीमार तो नही हो ना.

कोमल-जाओ मैं तुमसे बात नही करती.

अवी-सॉरी, वैसे सब्जी क्या बनाई है.

कोमल-चिकन मसाला,

अवी-नॉन वेग ,मुझे बहुत पसंद है.

कोमल-तभी तो बनाया है.

अवी-कल के लिए शुक्रिया कह रही हो ना

कोमल-यही समझ लो

मैं कोमल के पास बैठ गया .और कोमल आटा गुंथने लगी.

कोमल दोनो हाथो से आटा गूँथ रही थी. और एलेक्ट्रिसिटी चली गयी.जिस से कोमल को गर्मी होने लगी.

कॉमक के बाल उसके आँखे के सामने आ रहे थे जिस से कोमल को परेशानी हो रही थी.

कोमल के हाथो पे आटा लगा हुआ था जिस से वो बालो को हटा नही पा रही थी.

मैं ने कोमल की मदद करनी शुरू की.

मैं कोमल के बालो को फूँक मार कर उड़ाने लगा.

मेरे ऐसा करते कोमल ने मेरी तरफ देखा.और स्माइल करके मुझे थॅंक्स कहा

मेरे फूँक मारने से कोमल.के बाल उड़ जाते पर वापस कोमल की आँखे के सामने आ जाते .

मैं फिर फूँक मार कर कोमल के बालो को उड़ाने लगा.

कोमल को मेरा ऐसा करना अच्छा लग रह था. कोमल को जो गर्मी लग रही थी उस से भी राहत मिल गयी.

अवी-कोमल

कोमल-हाँ

अवी-मेरी तरफ देखो

कोमल ने मेरी तरफ देखा .मेरे हाथ मे कैंची थी.

अवी-तुम्हे वो बाल परेशान कर रहे हैना

कोमल-हाँ

अवी-उसे काट देते है. ना रहेगा बाँस और ना बजेगी बासरी

कोमल-नही

अवी-अरे काट देते है

मैं आगे बढ़ा था कि कोमल पीछे हो गयी.

कोमल-अवी ,नही

अवी-तुम्हे वो बाल फिर परेशान नही करेंगे

और मैं आगे बढ़ने लगा.

कोमल-अवी रुक जाओ, माँ

अवी-बुआ तो लीना के घर पे है

मैं और आगे बढ़ा था कि कोमल ने अपना सर दूसरी तरफ करके अपने हाथ आगे किए.

और मेरे चेहरे पे आटा लग गया.

अवी-ये क्या किया तुमने

कोमल ने मेरी तरफ देखा. मेरे मूह पे आटा लगा हुआ देख कर हँसने लगी.

कोमल-मेरे बाल काट रहे थे ना ,इसकी यही सज़ा है.

अवी-मुझे फिर नहाना पड़ेगा.

कोमल लगातार हंस रही थी.

कोमल को हँसता हुआ देख कर मुझे मस्ती करने का सोचा,

मैं ने कोमल को पकड़ लिया. कोमल फिर भी हँस रही थी.

कोमल इस बात से अंजान थी कि मैं क्या करने जा रहा हूँ.

मैं अपने गाल को कोमल के गालो के पास ले गया.

कोमल को आइडिया आ गया कि मैं क्या करने वाला हूँ.

कोमल-अवईीई

कोमल मेरा नाम ही ले पाई थी कि मैं ने अपने गाल को कोमल के गालो से रगड़ने लगा.

मेरे गाल पे लगा हुआ आटा कोमल के गालो पे लगने लगा.

कोमल पहले तो मेरे हाथो से निकलने की कोशिश करने लगी. पर बाद मे अपनी आँखे बंद करके खड़ी हो गयी.

मैं ने कोमल के गालो पे आटा लगाना शुरू किया.

कोमल अपनी आँखे बंद करके मुझे अपने गालो पे मेरे गाल रगड़ने दे रही थी.

कोमल के गालो पे आटा लगाने के बाद मैं ने कोमल को छोड़ दिया.

मेरे दूर होते ही कोमल ने अपनी आँखे खोल दी और मेरे गले लग गयी.

अब कोमल को क्या हुआ.मुझे ऐसा नही करना चाहिए था.

अवी-सॉरी कोमल

कोमल मुझसे और कस्के गले लग गयी.

अवी-क्या हुआ कोमल

कोमल-कुछ नही.

अवी-डर लग रहा है ऐसे मेरे गले क्यूँ लग गयी.

कोमल-तुम साथ होते होना तो मुझे अच्छा लगता है, तुम मुझे हमेशा हसते हो ,

अवी-क्यू कि तुम्हारे चेहरे मे स्माइल अच्छी लगती है.

और कोमल मुझसे अलग हो गयी .और मुझे स्माइल दे कर फिर आटा गुंथने लगी.

और मैं कोमल को हवा देने लगा.कोमल ने मेरे नाक पे आटा लगा कर अपना काम ख़तम किया.

फिर कोमल को रोटिया बनाने लगी.

अवी-कोमल तुम बहुत स्लो हो

कोमल-मैं रोज खाना थोड़ी बनाती हूँ.

अवी-तुम रोटी बेलो मैं सेकता हूँ

कोमल-मैं कर लूँगी

अवी-साथ मे करने से काम जल्दी हो जाएगा.

कोमल रोटिया बेलने लगी और मैं रोटी की सिकाई करने लगा.

हम बातें करते हुए ,हसी मज़ाक करते हुए रोटिया बनाने लगे.

रोटिया बनाते हम अपने चेहरे पे लगा हुआ आटा साफ करने लगे

फिर कोमल के साथ बातें करते हुए नेहा बुआ के आने का इंतज़ार करने लगा.

थोड़ी देर बाद नेहा बुआ नीता बुआ के घर से वापस आ गयी.

नेहा बुआ-काफ़ी देर हो गयी नीता के घर

कविता-माँ .मुझे भूक लगी है.

नेहा ओआ-अभी बनाती हूँ

कविता-खाना तो बन गया हैना.मुझे खुश्बू आई थी.

नेहा बुआ-मैं तो अभी आई हूँ.फिर खाना किसने बनाया

कोमल और मैं हॉल मे आ गये.

कोमल-माँ, खाना मैं ने बनाया है

कविता-दीदी आपने ,

नेहा बुआ-कोमल तूने खाना बनाया है.

कोमल-हाँ

नेहा बुआ-मुझे बता देती भूख लगी थी तो मैं बना देती ,

कोमल-आज दिल किया खाना बनाने का तो बना लिया.

नेहा बुआ-सब्जी नही बनाई होगी.

कोमल-सब तैयार है.

नेहा बुआ-माँ को आराम देने के लिए खाना बनाया है.

कोमल-हाँ, अब छुट्टियाँ लगी है तो सोचा आपको छुट्टी मिलनी चाहिए

नेहा बुआ-तूने इतना सोचा यही काफ़ी है. तू बस आराम कर

अवी-तुम्हे आराम करना चाहिए. नेक्स्ट हफ्ते से क्लासस है.

नेहा बुआ-क्लासस?

कोमल-अवी ने लगा दी है. मेडिकल एंट्रेन्स की.

नेहा बुआ-अवी ने ,क्लासस के लिए पैसे

कोमल-अवी ने दिए है

नेहा बुआ-और तुम ने ले लिए.

अवी-बुआ ,कोमल मेरी भी कुछ लगती है.

नेहा बुआ-तुम सब बैठो मैं खाना लगवाती हूँ

नेहा बुआ मेरे बात का कभी जवाब नही देती

हमेशा बात घुमा देती है

कोमल-माँ ,मैं ने अवी के लिए भी खाना बनाया है.

नेहा बुआ-मैं ने कहा सब के लिए खाना लगाती हूँ.

कोमल-लव यू

नेहा बुआ ने हम सब के लिए खाना लगा दिया.

कोमल ने हाथो मे जादू था. खाना बहुत टेस्टी बना था.

नेहा बुआ ने भी कोमल की तारीफ की.

मैं तो हर नीवाले के साथ खाने की तारीफ कर रहा था.

कोमल ने चिकन को अच्छे से पकाया था .जिस से उसका टेस्ट बरकरार था.

खाना पेट भर के खा लिया. एक तरफ से कोमल खाना सर्वे कर रही थी तो दूसरी तरफ से कविता.

कोमल खुद कम खा रही थी पर मुझे ज़्यादा खिला रही थी.

आज तो कल जैसी हालत हो गयी.

सुबह दूध. .फिर नाश्ता.. और अब कोमल के हाथो का नोन वेग खाना. अब तो एक नींद चाहिए.

अवी-कोमल क्या खाना बनाती हो तुम, दिल खुश हो गया.

कविता-दीदी, अगर रोज आप खाना बनाओगी तो मैं मोटी हो जाउन्गी.

कोमल-इतना भी अच्छा नही बनाती मैं

अवी-मुझे तो आराम करना है.

कोमल मुझे अपने कमरे मे लेकर गयी.

कोमल के कमरे मे जाते ही मैं बेड पर लेट गया.

और कोमल के साथ बातें करते हुए मुझे नींद आ गयी.

दोपेहर की गर्मी मे ठंडी एसी की हवा मे कोमल ,कविता और नेहा बुआ भी सो गयी.

मैं ने चाची को कॉल कर दिया था कि मैं नेहा बुआ के घर खाना खा रहा हूँ.

नेहा बुआ का नाम सुनते छोटी चाची खुश हो गयी.बड़ी चाची को लगा जल्दी मैं नेहा बुआ के दिल मे अपने लिए प्यार पैदा कर लूँगा

 


784

कोमल के हाथो का खाना खाने के बाद मैं वही पर सो गया.

पेट भर के खाना खाने के बाद ठंडी हवा मे नींद अच्छी आती है.

दोपहर की नींद के बाद शाम को मेरी आँखे खुली.

कोमल अभी तक सो रही थी. सोते हुए कोमल क्यूट दिख रही थी.

कोमल को इस तरह मीठी नींद मे सोता हुआ देख कर मैं खुद को रोक नही पाया और उसके माथे पर एक किस किया.

और बाथरूम मे फ्रेश होने के लिए चला गया.

मेरे आने तक कोमल उठ चुकी थी. और मेरी तरफ देख कर ऐसे शरमा रही थी जैसे नयी नवेली दुल्हन हो.

मैं समझ नही पाया कि वो शर्मा क्यूँ रही है.

अवी-क्या हुआ

कोमल-कुछ नही

और कोमल मेरी पास आ गयी.

मेरे इतने करीब आ गयी कि हम एक दूसरे की सांसो को फील कर रहे थे.

ये कोमल करना क्या चाहती है.

मैं यही सोच रहा था कि कोमल ने मेरे कान मे कहा कि मेरे जीन्स की ज़िप खुली है

इतना कह कर वो हँसने लगी.

मैं भी ना ज़िप बंद करना भूल गया .

कोमल हँसते हुए बाथरूम मे चली गयी. और मैं नेहा बुआ को बता कर अपने घर चला गया.

घर आते ही मैं ने विद्या को टी बनाने को कहा.

टी तैयार थी. चाची को शाम मे टी पीने की आदत थी.

विद्या ने मुझे टी दी और टीवी देखने लगी.मैं भी टी पीते हुए टीवी देखने लगा.

सी चाची-अवी आज काफ़ी देर तक नेहा के घर रुके

अवी-हाँ, वो कोमल ने खाना बनाया था तो रुकना पड़ा

सी चाची-कोमल ने खाना बनाया

अवी-हाँ, काफ़ी टेस्टी था.

म चाची-हमे बुला लेता,हम भी टेस्ट करते.

अवी-कोमल को पता नही आज क्या हुआ था कि नेहा बुआ भी शॉक्ड हुई थी.सब अजीब हो रहा था कि मैं आपको बुला नही पाया.

सी चाची-कोई बात नही.

ब चाची-अच्छी बात ये है कि नेहा ने तुझे कुछ नही कहा.

अवी-सब अजीब हो रहा है.

सी चाची-हाँ, ये देखो विद्या को, आज अजीब सा बर्ताव कर रही है.

म चाची-हाँ, टी डबल बनानी पड़ी. पहली टी मे नमक डाल दिया था.

अवी-क्या हुआ विद्या

विद्या-कुछ भी तो नही.

अवी-चाची आप पूछिए. आपको बता देगी.

ब चाची-विद्या क्या हुआ. माँ की याद आ रही है.

विद्या ने अपना सर नीचे झुका लिया.

ब चाची-क्या हुआ. मुझे बता ,मैं भी तेरी माँ जैसी हूँ.

विद्या-कल मेरी माँ का

सी चाची-बोलो ,कल क्या

विद्या-कल मेरी माँ की बर्तडे है.

बड़ी चाची खड़ी होकर विद्या के पास चली गयी. और उसे अपने गले लगा लिया.

ब चाची-तूने हमे पहले क्यूँ नही बताया

अवी-ये ऐसी है. हमे अपना समझती नही.

ब चाची-अवी ,हालात देख कर बात किया करो.

अवी-सॉरी

ब चाची-विद्या ,ऐसे रोते नही,हम हैना

सी चाची-अब तुम इस फॅमिली का हिस्सा हो

ब चाची-एक माँ नही है तो क्या हुआ. मैं हूँ ना .मैं भी तो तुम्हारी माँ जैसी हूँ

विद्या ने बड़ी चाची को फिर से गले लगा लिया.

ब चाची-रोते नही.हम हैना

अवी-चाची उसे अपनी माँ की याद आ रही है.

ब चाची-तुम्हे अपनी माँ की याद आ रही है.

विद्या-हाँ, मुझे

ब चाची-हाँ बोलो

विद्या-मुझे अपने गाओं जाना है.मैं अपने घर जाकर माँ को याद करना चाहती हूँ

ब चाची-ठीक है. कल हम तुम्हारे गाओं जाएँगे

विद्या-मेरा गाओं बहुत दूर है.

सी चाची-तुम्हे अकेले कैसे जाने दे सकते है.

म चाची-अवी के साथ चली जाएगी.

ब चाची-सीमा तू कभी कभी समझेदारी की बात करती हो. अवी तू कल विद्या के साथ उसके गाओं जाना और शाम को वापस ले आना

अवी-जी चाची.

ब चाची-विद्या ,कल अवी के साथ अपने गाओं जाकर आना ,ठीक है

विद्या ने हाँ मे सर घुमाया.

इधर विद्या ने रोना बंद किया कि उधर बच्चो ने रोना शुरू किया.

म चाची-लगता है फिर कूलर खराब हुआ है

सी चाची-आज ठीक से सो भी नही पाए.

म चाची-उस कूलर को फेकना पड़ेगा.

अवी-क्या हुआ चाची.

म चाची-अवी वो कूलर हैना उसकी मोटेर खराब हो गयी है ,जिस से ठंडी हवा की जगह गरम हवा फेक रहा है

अवी-कब हुआ खराब

म चाची-कल से ,बच्चे ठीक से सो नही पा रहे है.

अवी-कल से कूलर खराब है और मुझे किसी ने बताया नही.

सी चाची-बताने वाले थे

अवी-आप हमेशा ऐसी करती है. कभी कुछ नही बताती

ब चाची-हमे लगा वो ठीक हो जाएगा.

अवी-अगर आज मुझे पता ना चलता तो आज भी नही बताती.

और मैं खड़ा होकर जाने लगा.

म चाची-अवी गुस्सा मत हो ,हम बताने वाले थे

ब चाची-अवी कहाँ जा रहे हो

अवी-कहाँ जा सकता हूँ. नया कूलर लाने शहर जा रहा हूँ.

ब चाची-कल सुबह चले जाना.

अवी-चाची ,बच्चो की नींद ज़रूरी है.

और मैं बिना कुछ सुने शहर चला गया.

शहर जाकर मैं शॉप मे गया कि मेरी नज़र एसी पर पड़ी. कूलर की जगाह एसी लेता हूँ.

कभी परेशानी नही होगी.

मैं ने 2 एसी खरीद लिए .और एसी को लेकर घर आ गया.

म चाची-ये क्या लाया अवी तुमने

अवी-एसी है. अब ठंडी ठंडी हवा का मज़ा लोगि आप

ब चाची-अवी तुम भी ना ,

अवी-चाची,ये मेरे भाइयो के लिए है.

सी चाची-तेरे कमरे के लिए नही लाया.

अवी-मैं कूलर से काम चला लूँगा

सी चाची-बिल्कुल नही. तू गरमी मे सोएगा और हम ठंडी हवा मे ये तूने सोचा कैसे.

अवी-मैं तो बस 2 एसी लाया हूँ,कोई बात नही 2 कमरे मिला के एक एसी

सी चाची-ऐसा हो सकता है.

अवी-दीवार मे एक छेद कर देंगे.

मैं ने कारीगर को समझा दिया कि क्या करना है.

कारीगर काम मे लग गये.

उसे दीवार मे बने हुए छेद मे फिक्स किया .उस पे एसी लगवा दिया.

दीवार मे छेद करने से एसी को एक साथ 2 कमरे मे ईस्तमाल कर सकते थे.

सिर्फ़ एक एसी लगाने मे 4 घंटे लग गये.

मेरे कमरे का एसी कल लग जाएगा.

एसी ऑन होते ,सीमा चाची चेयर पे खड़ी होकर एसी के सामने खड़ी हो गयी.

म चाची-अवी ये तो मेरी कुलफी बना देगा.

अवी-चाची टेम्परेचर अड्जस्ट कर सकते है.

सी चाची-आज तो अच्छी नींद आएगी.

चाचा-अवी तूने अच्छा किया एसी लगवाकर. मैं सोच ही रहा था कि एसी लगवा दूं

ब चाची-अब कूलर का क्या करे

विद्या-चाची मुझे एसी मे नींद नही आती. कूलर मेरे कमरे मे रखते है.

सी चाची-2 कूलर मे सोएगी.

ब चाची-विद्या को जैसा अच्छा लगता है वैसा करने दो.

सी चाची-अवी. एक कूलर विद्या के कमरे मे रख दो. और ये खराब वाला क्या करे

चाचा-इसे ठीक करके खेत वाले घर3 मे रख देते है.

अवी-मैं भी वही सोच रहा हूँ.वहाँ दोपेहर मे बहुत गरमी होती है.

सी चाची-कूलर ठीक करने की क्या ज़रूरत है, तेरे कमरे का कूलर ठीक हैना ,उसे खेत वाले घर3 ले जाना

चाचा-चलो .आज से ठंडी हवा मे सोएंगे

ब चाची-अवी तुम आज मेरे साथ सो जाओ,और विद्या तू भी.

विद्या-मैं बिस्तर लगवा देती हूँ

सी चाची-ठंडी ठंडी हवा .

अवी-मेरी तो नींद ही नही खुलेगी कल

सी चाची-क्या कहा. सुबह कसरत करना है

चाचा-मीना ने कहा है. अवी तुम्हे तो उठना ही होगा.

सी चाची-उठना ही होगा..

चाचा-मुझे तो भूक लगी है.सुमन खाना लगाना

ब चाची-एसी के चक्कर मे खाना बनाना तो भूल गये

चाचा-सुमन तुम कसरत किया करो वरना भूलने की आदत लग जाएगी.

ब चाची-जी

अवी-चाची ,चाचा ने भी कहा,अब तो आपको योगा करना ही होगा.

ब चाची-वो सब बाद ,पहले खाना बनाना है.

म चाची-दीदी आज ,आप बना लो ,मेरा तो मन ही नही हो रहा कि इस कमरे से बाहर निकलने का

ब चाची-तू बच्चो का ध्यान रख ,हम खाना बना लेंगे

थोड़ी देर चाचा और मैं इधर उधर की बातें करने लगे फिर चाची ने खाना बनाते हुए हमे खाने खिलाया.

गरम खाना खाने के बाद एसी की ठंडी हवा मे जल्दी नींद आ गई

.

 
785

नेक्स्ट डे सबकी नींद देर से खुली.

देर से उठने के बाद भी चाची ने मुझसे कसरत करवा ही ली.

मेरे साथ साथ तीनो चाची विद्या के साथ योगा करने लगी. और बच्चे छत पर सुबह की फ्रेश हवा का आनंद लेने लगे.

सब के साथ कसरत करने से मेरा जोश बढ़ गया. चाचा भी छत पर फ्रेश हवा लेने आ गये.चाचा सिर्फ़ बैठे रहे पर इतना काफ़ी था.

चाचा के आते ही बड़ी चाची ने शरम की वजह से योगा करना बंद किया. बड़ी चाची चाचा के सामने योगा करने के लिए शरमा रही थी. छोटी चाची और सीमा चाची को ज़्यादा फरक नही पड़ा. वो अपना योगा करने लगी.

बड़ी चाची जल्दी नीचे गयी. और मेरे लिए दूध और बाकी सबके लिए टी और नाश्ता लेकर उपर आ गयी.

कसरत करने के बाद हम गप्पे मारते हुए नाश्ता करने लगे. चाचा हमारे फ्री होने तक बच्चो के साथ खेल रहे थे.

चाचा हमारे साथ बहुत कम समय बिताते है. पर जब भी मोका मिलता है तब सब को बहुत प्यार देते है. मुझ से भी अच्छे से बात करते है.

चाचा के फॅमिली के साथ समय बिताने से बड़ी चाची काफ़ी खुश रहती थी.

चाचा और बड़ी चाची का प्यार आँखे ही आँखे से इशारा करके होता था.

आँखो आँखो मे चाचा और बड़ी चाची ढेर सारी बातें कर लेते.

आज तो फॅमिली के साथ वक्त बिताने से समय का पता ही नही चला. 9.00आम बजे तक हम छत पर हँसी मज़ाक कर रहे थे.

सी चाची-काफ़ी दिनो के बाद ऐसे हसी मज़ाक करके समय बिताया है

चाचा-हाँ, काम इतना होता है कि समय ही नही मिलता. पर आज अपने बच्चो के लिए समय निकाल ही लिया.

अवी-चाचा जी मैं तो कहता हूँ कि सुबह देर से खेत मे जाया कीजिए.

चाचा-तुम कह तो ठीक रहे हो. पर खेत मे नही रहा तो मज़दूर काम नही करते

सी चाची-काम तो होते रहते है. थोड़ा समय अपने बच्चो के लिए निकालना चाहिए आपको

अवी-मैं चाची की बात से सहमत हूँ

ब चाची-सुबह थोड़ा समय निकाल लीजिए ना.

बड़ी चाची की बात चाचा कभी टालते नही थे.

चाचा-ठीक है ,मैं कल से मज़दोरो को अलग टाइम पे काम पे लगा दूँगा , और देर से मैं जाया करूँगा

अवी-ये हुई ना बात

म चाची-मैं कह रही थी कि ये छत हमारे लिए छोटी है. अगर पूरे घर को नया शहर जैसा बना दे , जैसे अवी की बुआ का घर है वैसा बना दिया जाए तो

चाचा-इसका फ़ैसला सिर्फ़ पिताजी ले सकते.मुझे भी लगता है घर को तोड़ कर शहर जैसा बना दूं. पर नही बना सकता ,सुमन तुम्हे तो पता है.

ब चाची-सीमा ,इतनी जगह काफ़ी है. और अवी का कमरा बड़ा है ,चलो नीचे ,विद्या को जाना भी है.

अवी-हम तो भूल ही गये .चलिए

फिर हम नीचे आकर फ्रेश होने लगे.

आज एक बात अच्छी हुई कि पूरी फॅमिली दिन मे कुछ समय साथ मे बिताएगी.

फ्रेश होते ही चाचा खेतो मे चले गये .और मैं विद्या के साथ जाने की तैयारी करने लगा.

विद्या के तैयार होते चाची का आशीर्वाद लेके हम निकल गये

चाचा ने कहा कि वो दोपेहर मे आकर एसी लगवा देंगे.

विद्या के साथ मैं घर से निकल तो गया पर विद्या को कहाँ लेकर जाउ.

विद्या-अवी कहाँ जा रहे है हम

अवी- तुम किस गाओं मे रहती थी.

विद्या-सोणेगाँव यहाँ से 60 किमी दूर है

अवी- हम पहले वहाँ जाएँगे.

विद्या-वहाँ क्यूँ

अवी- तुम अपने घर मे जाना नही चाहोगी. अपनी माँ को याद नही करना चाहोगी.

विद्या-सच मे मुझे अपने गाओं लेकर जा रहे हो.

अवी- हाँ,कुछ देर हम वही रुकेंगे.

मेरी बात सुनते विद्या ने मुझे पीछे से गले लगा लिया.

विद्या के बूब्स मेरी पीठ मे दबातें ही मैं ने स्पीड बढ़ा दी.

हाइवे होने से विद्या का गाओं जल्दी आ गया.

विद्या-मेरे गाओं की मीठी की खुशुबू , कितने दिनो बाद यहाँ आई हूँ

अवी- तुम्हारा घर कहाँ है

विद्या-सीधा चलते रहो.जहाँ रोड ख़तम होगा वही मेरा घर है.

मैं ने गाँव के अंदर बाइक डाल दी. गाओं के लोग हमारी तरफ ऐसे देख रहे थे जैसे कोई हीरो हेरोइन आए होगे.

कुछ लोगो ने विद्या को पहचान लिया .पर विद्या को इतने अच्छे ड्रेस मे और मेरे साथ देख कर लोग बातें कर रहे थे.

धीरे धीरे बाइक चलाते हुए मैं एक छोटे से ,जिस मे सिर्फ़ एक कमरा होगा. कावेलु का ,टूटा फूटे घर के सामने विद्या ने मुझे बाइक रोकने को कहा.

विद्या का ये घर था

बाइक रुकते ही विद्या उतर कर बाजू वाले ,एक बड़े घर मे चली गयी.

मैं ग़लत था. विद्या का घर तो वो बड़ा वाला है.

विद्या उस घर से जल्दी बाहर आ गयी .और उस टूटे फूटे घर को की से खोलने लगी.

मैं ने पहले जो सोचा था वही विद्या का घर था.विद्या ने उस घर से की लाई थी वहाँ से एक औरत बाहर आकर विद्या के पास आ गयी. विद्या ने गेट खोल दिया

विद्या-अवी वहाँ क्या खड़े हो आओ ना.

औरत-विद्या ये कौन है. और इतने दिनो से तुम कहाँ थी. कुछ खबर नही थी.

विद्या-काकी ये अवी है. इनके घर मैं नर्स का काम करती हूँ.और वही रहती हूँ.अवी ये मेरी काकी है,यही रहती है.

अवी- नमस्ते

और विद्या मुझे अंदर ले गयी. अंदर काफ़ी अंधेरा था.विद्या ने खिड़की खोल कर घर मे रोशनी कर दी.

घर मे मकड़ी ने जाले बनाकर रखे थे. मिट्टी की दीवार बस गिरने वाली हो ऐसा लग रहा था. छत के केवालु टूट चुके थे.छत से धूप अंदर आ रही थी

विद्या के घर मे सिर्फ़ एक कमरा था , बाथरूम ,किचन बेडरूम सब वही एक कमरा था.

अओरत-बेटी तुम नही थी तो घर कैसा हो गया. ये तो गिरने वाला है. मैं ने थोड़ी मरम्मत की थी फिर भी देखो क्या हो गया.

विद्या-काकी आपने ध्यान रखा इतना काफ़ी है.

और विद्या ने दीवार पे लगी हुई अपनी माँ की तस्वीर निकाल कर साफ की. और थोड़ी जगह साफ करके अपने माँ की तस्वीर वहाँ रख दी.

अवी- ये तुम्हारी माँ है

विद्या-हाँ,

और विद्या घर से बाहर चली गयी. और अपने साथ कुछ समान लेकर आ गयी.

औरत-क्या कर रही हो विद्या.

विद्या-काकी आज माँ का जनमदिन है,काकी थोड़ा पानी मिलेगा

औरत-अभी लेकर आती हूँ

और विद्या ने अपनी माँ के फोटो पे हार चढ़ा दिया. और पानी आते पूजा करने लगी.

अपनी माँ की पूजा करते हुए विद्या की आँखो मे पानी आ गया.

औरत-विद्या ,तुम्हारी माँ को तुम्हारा रोना अच्छा नही लगता था.

विद्या-अवी ,माँ खुद रोती थी पर मेरी आँखो मे कभी पानी नही आने दिया.

अवी-माँ का दिल ऐसा ही होता है.

विद्या-मेरी माँ और मैं ने कैसे दिन निकाले थे मुझे पता है. मुझे पढ़ाया लिखाया ,मुझे अपने पैरो पे खड़ा किया.और मेरे खड़े होते ही मुझे छोड़ कर चली गयी.

औरत-जिनको जाना होता है वो चला जाता है.

विद्या-इस घर मे कभी बारिश होती. तो कभी धूप लगती थी. कभी फॅन की ज़रूरत नही पड़ी ,ठंड मे ही दिन निकलते थे.

अवी-रोना बंद कर वरना आंटी को बुरा लगेगा.

विद्या ने अपने आँखे साफ की.

विद्या-चलो

अवी- खाली हाथ, अपनी माँ को अपने साथ ले चलो

विद्या-मैं समझी नही.

अवी- अपनी याद एक बॅग मे भर लो.और आंटी की तस्वीर भी.

विद्या ने अपना दुपट्टे को कमर मे बाँध दिया .और अपना समान बॅग मे भरने लगी. अपनी माँ की तस्वीर भी बॅग मे रख दी

अवी- सब ले लिया.

विद्या-हाँ,

अवी-चले

अओरत-विद्या अभी तो आई हो, इतनी जल्दी जा रही हो.

विद्या-काकी एक काम है ,उसे पूरा करने जाना है.

मैं ने अपनी पॉकेट से 5000 निकाल कर उस काकी के हाथ मे दिए.

औरत-ये क्या है

अवी-विद्या के घर की मरम्मत करने के लिए.

उसने पैसे अपने पास रख दिए.

औरत-इसकी क्या ज़रूरत थी.

विद्या-काकी रख लीजिए. और मैं आती रहूंगी.

और विद्या ने अपने बचपन की याद अपने साथ ले ली.

विद्या-अवी, थॅंक्स ,मुझे अपने गाओं लाने के लिए

अवी-एक बात पूछूँ

विद्या-पूछो

अवी- तुम इतनी ग़रीब थी तो पड़ाई कैसे की.

विद्या-सरकारी स्कूल से ,और नर्सिंग करने के लिए अपनी स्कॉलरशिप और गाओं वालो ने पैसे जमा करके दिए थे.और मैं जॉब करते हुए पढ़ाई कर रही थी.

अवी-काफ़ी मेहनत की है तुम ने

विद्या-मेरी माँ ने मेरे लिए मेहनत की है

अवी- लेकिन मेरी वजह से तुम्हारी पढ़ाई का फ़ायदा नही हो रहा है.

विद्या-हो तो रहा है. बच्चो का ध्यान जो रख रही हूँ.और कोमल के डॉक्टर बनते ही उसके हॉस्पिटल मे नर्स का काम करूँगी.

अवी- ये तो अच्छा रहेगा.

विद्या-अब कहाँ जाने वाले है.

अवी- तुम ही बताओ ,यहाँ कोई पास मे होटेल है

विद्या-मेरे कॉलेज के पास एक होटेल था

अवी- कितनी दूर है यहाँ से

विद्या-3 किमी

अवी- चलो फिर

मैं विद्या को लेकर पास के गाओं मे आ गया.

विद्या ने मुझे अपना कॉलेज दिखाया.

और होटेल भी जहाँ हमे रुकना था.

होटेल ठीक ठाक था. बाहर से तो अच्छा दिख रहा है पता नही अंदर से कैसा होगा.

हम होटेल के अंदर चले गये

रिसेपनिस्ट-कहिए सर ,आपकी क्या मदद कर सकती हूँ.

अवी-एक रूम चाहिए था.

रिसेपनिस्ट-सिंगल बेड या डबल बेड

अवी-हनीमून स्पेशल है

रिसेपनिस्ट-ये तो नही है ,पर हमारे होटेल का बेस्ट रूम खाली है. जैसा आपको चाहिए वैसा है वो,पर

अवी-पर क्या

रिसेपनिस्ट-वो रूम महगा है.

अवी-अपनी बीवी के लिए क्या महँगा और क्या सस्ता.

रेसेपनिस्ट-आपका नाम

अवी-मिस्टर और मिसेज़ गुप्ता.

मेरे मूह से बीवी वर्ड सुनते ही विद्या शरमा गयी.

रेसेपनिस्ट के विश करते ही विद्या तो ज़्यादा ही शरमा गयी.

विद्या जल्दी कमरे मे जाना चाहती थी.

और मैं भी

कमरे मे जाते ही विद्या बाथरूम मे चली गयी. और मैं बेड पर लेट कर कमरे को देखने लगा.

आज विद्या की वर्जिनिटी मेरे नाम हो जाएगी.

 
786

विद्या बाथरूम से फ्रेश होकर मेरे पास आकर बैठ गयी.

अवी-कुछ ऑर्डर करूँ

विद्या-तुम्हे जो अच्छा लगे वो बुला लो

अवी-मुझे जो चाहिए वो मेरे सामने है.मैं तो उसी को खाना चाहता हूँ.

विद्या-तो खा लो ,

अवी-विद्या ,तुम अपने मर्ज़ी से मेरे साथ करने को तैयार हो ना

विद्या-हाँ, मैं तो लकी हूँ जो तुम्हारे साथ पहली बार करने को मिल रहा है.

अवी-अगर तुम्हे नही करना होगा तो ,हम नही करेंगे

विद्या-ऐसा मैं कभी नही सोचूँगी. इस दिन का कब से इंतज़ार कर रही थी

अवी-कब से कर रही थी.

विद्या-जब से तुम्हारा वो देखा था.

अवी-वो क्या , मेरा लंड जो आज तुम्हारा होने वाला है.

विद्या-हाँ वही.

अवी-क्या वही.

विद्या उठ कर मेरी गोद मे बैठ गयी.

विद्या-जो मुझे नीचे चुंभ रहा है.

अवी-तुम ने अच्छा किया जो मेरी गोद मे बैठ गयी. यही से शुरुआत करते है.

और मैं ने विद्या के बूब्स को अपने हाथो मे पकड़ कर दबा दिया.

अवी-तुम्हारे बूब्स तो काफ़ी टाइट है.

विद्या-तुम्हारे लिए टाइट रखे है.

अवी-देखते है मेरे लिए क्या क्या संभाल कर रखा है.

और मैं ने अपने होंठो को विद्या के होंठो से मिला दिया.

पहले मिलन मे थोड़ा दर्द होना चाहिए ,इस लिए मैं ने विद्या के होंठो पर काट लिया.

होंठो परकाटने से विद्या को दर्द हुआ. और दर्द को कम करने के लिए विद्या ने अपने होंठो को मुझे चूसने दिया.

विद्या के होंठ मेरे होंठो के बीच आते ,पता नही चला कि मैं उसके होंठो को चूस रहा हूँ या वो मेरे होंठो को

विद्या के होंठो को चूस्ते हुए मैं ने एक बार मे उसके दोनो होंठो को एक बार मे चूसने लगा.

विद्या ने थोड़ी देर रुक कर मुझे उसके होंठो को चूसने दिया.

विद्या के होंठो का रस पीने के साथ मैं ने उसकी कमीज़ को उपर करना शुरू किया.

कमीज़ के उपर होने से विद्या ने अपने हाथ उपर किए.

मैं ने वाक्कुम सक की तरह ज़ोर से उसके होंठो को चूस कर उसकी कमीज़ निकाल दी.

विद्या के बूब्स ब्लॅक ब्रा मे मेरे सामने आ गये.

विद्या के गोरे बदन पे ब्लॅक ब्रा. और ब्लॅक ब्रा मे गुलाबी निपल के गोरे बूब्स ,कमाल के लग रहे थे.

कमीज़ निकालने के बाद मैं ने फिर से विद्या को किस करना शुरू किया.

इस बार विद्या को किस करने दिया.

विद्या मेरी तरह मेरे होंठो को काट कर चूसने लगी.मैं उसका पूरा साथ देना लगा. मैं भी उसके होंठो को प्यार से चूस रहा था

विद्या तो मुझसे एक कदम आगे बढ़ गयी .विद्या मेरे होंठो को चूसने के साथ मेरी जीभ को भी चूसने लगी.

विद्या मुझे से ज़्यादा जोश के साथ किस कर रही थी ,क्यूँ कि उसने इस दिन का कब से इंतज़ार किया था

विद्या ने तो मुझे बेड पर गिरा दिया और साथ मे मेरे उपर गिरते हुए किस करने लगी.

विद्या मेरे बालो मे हाथ घूमाते हुए किस कर रही थी और मैं उसके नगी पीठ पर हाथ घुमा रहा था.

मेरे हाथ विद्या की ब्रा को ब्रेकर की तरह लग रहा था जिस से मैं ने उसकी ब्रा निकाल दी.

ब्रा निकालने से विद्या की चेस्ट पे जो दबाव था वो काम हो गया और विद्या को साँस लेने मे जो तकलीफ़ हो रही थी वो दूर हो गयी.

ब्रा निकालने से विद्या ज़्यादा देर तक मुझे किस करती रही.और मैं भी उसके नाज़ुक होंठो को मसल्ने लगा.

और एक झटके मे मैं ने विद्या को अपने उपर से हटा कर अपने नीचे ले लिया .इस बीच विद्या के बदन से ब्रा अलग हो गयी.

किस ख़तम होते ही हम हाँफने लगे. विद्या मेरी तरफ देख रही थी और मैं विद्या के बूब्स की तरफ देखने लगा.

मैं विद्या के उपर बैठा था .और विद्या लंबी लंबी साँसे लेते हुए अपने बूब्स से डॅन्स करवा रही थी.

अब समझा मैं, पहले किस क्यूँ करते है. किस करने से साँसे तेज चलती है. और साँसे तेज चलने से बूब्स डॅन्स करने लगते है. और बूब्स के डॅन्स करने से हमारा दिल उनको चूसने का होता है.

विद्या-क्या देख रहे हो

अवी-तुम्हारे बूब्स को डॅन्स करते हुए देख रहा हूँ

विद्या-मेरे बूब्स, ये क्या, मेरी ब्रा कब निकाली

अवी-तुम ने पहनी कहाँ थी

और मैं ने अपनी टी शर्ट निकाल दी.

अवी-लो मैं ,तुम मेरी बॉडी को देख लो

विद्या-उसी को देख कर तो तुम्हारी दीवानी हुई है.

और मैं ने अपना बेल्ट और जीन्स के बटन खोल दिए .और विद्या के बूब्स के बीच मे अपना मूह ले गया.

अवी-बोलो लेफ्ट या राइट

विद्या-लेफ्ट

अवी-तुम्हारा लेफ्ट या मेरा लेफ्ट

विद्या-वो मूवी मैं ने भी देखी है.

और मैं ने लेफ्ट बूब्स से शुरुआत की.मतलब लेफ्ट बूब्स को चूसूगा और राइट बूब्स को मसलुगा

मैं ने विद्या के बूब्स को पहले तो काटकर अपने नाम का निशान बना दिया

बूब्स पर अपने दातों का निशान बनाते ही विद्या के मूह से चीख निकलगई.

विद्या-माआआआआआअ पूवपूऊऊवप ऊऊऊुुुुऊउक्ककचह

काटने के निशान को मैं ने जीभ से चाट लिया और निपल को अपने दाँतों मे पकड़ कर विद्या को मज़ा देने लगा.

बूब्स को मसल कर चूसने लगा.

बूब्स को जितना हो सके उतना अपने मूह मे लेकर सक करने लगा.

विद्या दूसरे बूब्स को खुद मसल्ने लगी.

जिस से मैं ज़्यादा से ज़्यादा एक बूब्स पे फोकस करने लगा.

जब एक जगह ज़्यादा फोकस होता है तब मज़ा दोनो को आता है.

विद्या शीष्कारिया लेने लगी. और मैं उसके बूब्स को चूसने लगा.

आआआअहह अवईीईऊूऊऊओिू मज़ाआआआ आआअहह राहामआआआ हाईईईईईिओ तूमम्म्मममममम झडुन्गर्र्र्र्र्र्र्र्र हूऊऊऊऊओ

विद्या की शीष्कारी मेरा जोश बढ़ा रही थी.

जिस का उल्टा असर विद्या पे हो रहा था.मैं उसके बूब्स पे अपना पूरा जोश ईस्तमाल कर रहा था.

विद्या के बूब्स पे अपने हाथो केआपने दांतो के निशान बना कर चूसने लगा.

जल्दी दूसरे बूब्स का नंबर लग गया.

विद्या ने राइट बूब्स को मेरे लिए तैयार करके रखा था.

रिघ्त बूब्स के निपल को विद्या ने इतना टाइट बना दिया कि पहले निपल को सक करने लगा.

निपल को सक करते हुए बूब्स को सक करने लगा

बूब्स को नुकीला बना कर ज़्यादा से ज़्यादा अपने मूह मे लेने लगा.

बूब्स का मैं आज चूस रहा था .और मेरे चूसने के बाद जल्दी उसमे दूध भरना शुरू होगा.

दोनो बूब्स को चूस कर खुद मज़ा लिया और विद्या को भी पूरा मज़ा दिया.

बूब्स चूसने के बाद मैं खड़ा हो गया.

विद्या मेरी तरफ देखने लगी.

मैं ने अपने जीन्स को निकाल दिया .और विद्या अपनी आँखे बड़ी बड़ी करके मेरे अंडरवेर मे बने तंबू को देखने लगी.

अवी-क्या देख रही हो.

विद्या-कुछ नही.

अवी-अब बोल भी दो

विद्या-वो टेंट को देख रही हूँ.

अवी-देखने से काम नही चलेगा. चलो प्यार करो

विद्या इसी का इंतज़ार कर रही थी.

विद्या मेरे लंड के सामने बैठ गयी और अंडरवेर निकाल दी.

और मेरा लंड वाइब्रट करते हुए विद्या के होंठो के सामने आ गया.

विद्या ने मेरे लंड को कई बार देखा था. पर आज जो वो लंड देख रही है वो उसका होने वाला था.

विद्या ने मेरे लंड को नही अपनी चूत के होने वाले लंड को अपने हाथो मे लिया.

हाथो मे लंड विद्या ने टोपे पर से चमड़ी को हटा दिया और लंड पे किस करने लगी.

विद्या के होंठो का टच मेरे लंड को इतना अच्छा लगा कि मेरे शरीर का सारा खून लंड की तरफ जाने लगा.

लंड की नशे फूलने लगी. लंड को फूलता हुआ देख कर विद्या ने अपनी जीभ बाहर निकाली और लंड को चाटने लगी.

लंड को चाटने से मेरा लंड चमक ने लगा.

मेरे लंड की चमक विद्या के आँखे मे समा गयी.

विद्या खुद को ज़्यादा देर रोक नही पाई.

और लंड को बड़े प्यार से अपने मूह मे लेने लगी.

लंड मूह मे जाते विद्या की चूत से पानी निकल गया होगा.

क्यूँ कि एक मनमोहक खुश्बू आ रही थी.

विद्या ने लंड को एक मशीन की तरह नही तो एक भूके जानवर की तरह चूसने लगी.

मैं ने विद्या के बालो को पकड़ रखा ताकि.उसे कोई परेशानी ना हो.

विद्या के मूह मे लंड को अंदर बाहर होते हुए देख कर मज़ा आ रहा था.

विद्या तो अपनी ही दुनिया मे खोई हुई थी

उसको होश मे लाने के लिए मैं ने विद्या के सर को पकड़ कर लंड को मूह मे पेलने लगा.

मेरे ऐसा करने का भी मज़ा ले रही थी.

विद्या को आज कैसे भी क्यूँ ना मेरा प्यार चाहिए था.

विद्या के मूह से तो मेरा लंड भी बाहर ना निकले.

लड़की देखी तो दोस्त क्या लंड भी पराया हो जाता है.

लंड को पूरा विद्या के मूह मे डाल दिया फिर भी विद्या मेरे लंड को बाहर निकालने को तैयार नही थी.

विद्या का क्या करूँ. लंड को चूसना बंद ही नही कर रही.

इतने देर चूसने से उसका मूह भी दुख रहा होगा पर वो लंड को चूस्ति रही.

विद्या तो मेरे लंड की दीवानी हो गयी.

और अपनी दीवानी के सामने मेरा लंड पिघल जाता है.

विद्या ने मेरे लंड से वीर्य निकाल दिया

विद्या के मूह मे मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी.

विद्या का प्यार इतना ज़्यादा था कि वीर्य भी ज़्यादा निकाला.

विद्या ने एक ड्रॉप भी वेस्ट नही होने दिया .और सारा वीर्य पीकर बेड पर गिर गयी.

और मैं विद्या को देखता रह गया.

 
787

विद्या मेरा वीर्य तो पी गयी.

और मेरे लंड तो ठंडा कर दिया.

अब लंड को खड़ा करने मे थोड़ा टाइम चाहिए.

तब तक मैं विद्या का पानी पी लेता हूँ. कुवारि चूत का पानी अंदर जाएगा तो लंड अपने आप खड़ा हो जाएगा.

विद्या मेरे वीर्य के टेस्ट को एंजाय कर रही थी और मैं उसके टाँगो के बीच आ गया.

पहले तो नाडा खोल दिया. विद्या अपनी दुनिया मे खोली थी.

उसके गंद के नीचे हाथ डाल कर मैं ने सलवार निकाल दी.

फिर भी विद्या की तरफ से कोई रिक्षन नही मिला.

विद्या की ब्लॅक पैंटी उतनी खास नही थी. पर उसके अंदर एक खास चीज़ थी.

विद्या को नयी पैंटी खरीद कर देनी होगी.

पहले पैंटी मे छुपा हुआ खजाना तो देख लेता हूँ.

मैं ने विद्या की पैंटी को एक झटके मे निकाल कर दुनिया की जानलेवा चीज़ मेरे आँखे के सामने आ गयी.

विद्या की चूत ,थोड़ी सावली थी पर अट्रॅक्टिव थी.

चूत को चिकनी बनाकर रखा था .चूत के होंठ थोड़े फूले हुए थे .

चूत के होंठ खुले हुए थे ,पर विद्या वर्जिन थी.

चूत से छिपा छिपा पानी टपक रहा था जिसकी खुश्बू सूंघ कर मैं पागल हो गया.

और इस पागलपन कभी कभी मुझे पसंद आता है.

मैं ने विद्या के पैरो को फैला कई अपने होंठो को चूत के होंठो से मिला दिए.

एक किस ने विद्या को सपने से बाहर निकाल लिया.

विद्या कुछ समझ पाती उस से पहले मेरी जीब उसकी चूत मे चली गयी.

जीभ की चुलबुली चाल अपनी चूत मे महसूस कराते विद्या को मज़े की दुनिया मे ले गया.

विद्या मेरी जीभ से शीष्कारिया निकालने लगी.

और मैं अपने काम मे लगा रहा.विद्या की कुवारि चूत से पानी निकालने का काम

चूत के नाज़ुक हिस्से को अपनी जीभ से छेड़ छाड़ करके विद्या को मज़ा देने लगा.

चूत को जी भर प्यार करने के मूड मे था.

चूत पे किस करते हुए चूस रहा था.

चूत की खुश्बू के मज़े लेते हुए चाट रहा था.

विद्या की रसभरी चूत से पहला पानी मैं पीने को तैयार हो गया.

विद्या अपनी गंद उपर नीचे करके पानी निकालने मे मेरा साथ देने लगी.

क्या जादू था विद्या की चूत का ,क्या जादुई पानी होगा विद्या की चूत का.

लो आ गया कुवारि चूत का पानी ,सील से फिल्टर होके.

सील का फिल्टर पानी मेरे जीभ से होते हुए मेरे मूह मे जाने लगा.

जैसे विद्या मेरा सारा पानी पी गयी वैसे ही मैं भी सारा पानी पी गया.

टिट फॉर टॅट

विद्या अपना पानी मुझे पिलाकर ठंडी पड़ गयी .पर मेरे लंड को खड़ा कर गयी.

मेरा लंड अब चूत का खून पीने के लिए खड़ा हुआ था.

लेकिन विद्या को नॉर्मल होने का इंतज़ार करना होगा.

मैं ने तब तक लंड पर हल्का सा तेल लगा दिया. और विद्या की गंद के नीचे पिल्लो रख दिया.

विद्या भी जल्दी तैयार हो गयी लंड लेने को

एक आँखो ही आँखो मे इशारा करके लंड और चूत के खेल की शुरुआत करने की बात हुई .

इजाज़त मिलते ही मैं ने विद्या के पैरो को हाथो से पकड़ कर फैला दिया

पैरो को फैला ने से चूत के होंठो ने मेरे लंड के लिए जगह बना दी.

जगह बनते ही मैं ने अपने लंड के टोपे को विद्या की चूत के बीच मे रख दिया.

और लंड को चूत पे रगड़ने लगा.मेरे ऐसा करते ही विद्या ने अपने हाथो मे बेडशीट पकड़ ली.

अवी-विद्या मेरी होने को तैयार हो.

विद्या-आज मुझे अपनी बना लो.

विद्या के हाँ करते ही मैं ने उसके पैरो को पकड़ कर एक झटका मार कर टोपा विद्या की चूत मे पुश किया.

टोपा अंदर जाते ही कुछ तो बाहर आना चाहिए. आई माँ, विद्या की चीख बाहर निकल आई.

विद्या की चीख निकल गयी

माआ आअहह मररर्र्र्ररर गाइिईईईईईईईई

अब तो सिर्फ़ टोपा गया था .अभी तो सील तोड़ना था.

विद्या को इसके लिए तैयार करके मैं ने एक और ज़ोर का झटका मारा और मेरा आधा लंड विद्या की सील तोड़ते हुए

अंदर घूंस गया.

सील टूटवाना तो हर लड़की का सपना होता है. और अगर तोड़ने वाला उसके सपनो का राजा हो तो

इतना कुछ होने के बा लड़की चिल्लाएगा ज़रूर

उईईईईई........

माआआआअ......... मररर्र्र्र्र्र्ररर........ गआआआआईयईईईईईई....... माआआआआईं.......... आआआआआहह......... अवईीईईईईईईईईई.......... रुउुुुुुउउक्

ज़ाआआआवववववववव.... प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़........ . विद्या कराहने लगी

विद्या की दर्द भरी चीख सुनकर मैं रुक गया

विद्या की चूत से खून निकल गया.खून की धार बाहर निकल गयी.

विद्या दर्द से छटपटा रही थी .मैं ने विद्या के बूब्स को दबाना शुरू किया.

बूब्स दबा कर विद्या का दर्द कम करने लगा.

मैं ने अपने लंड को विद्या की चूत से थोड़ा बाहर निकाल लिया. पर ऐसा करने से विद्या को दर्द होने लगा.मैं वैसे रुक गया

विद्या ने दर्द को बर्दाश्त करना शुरू किया और मैं उसके बूब्स को दबाने लगा.

विद्या के निपल को मरोड़ ने से उसकी चीख निकल गयी. पर इस दर्द ने चूत के दर्द को कम करने मे मदद की.

लोहा लोहे को काट ता है वैसे दर्द दर्द को कम.करता है

विद्या का दर्द कम ना होते हुए देख कर मैं विद्या के उपर झुक गया और विद्या के होंठो को

अपने मूह मे लेकर चूसने लगा.

किस करने से विद्या ने मेरे होंठो पे काट कर अपने दर्द के बारे मे बताया.

मेरे किस करने से विद्या को काफ़ी राहत मिली.

मैं सोच रहा था कि लंड अंदर डालु कि नही.

एक काम करता हूँ 2 झटके मारता हूँ .दर्द कम होगा.

विद्या का दर्द कम होते ही एक और झटका मारा.

इस बार विद्या की चीख निकल ते निकल ते रह गयी क्यू कि मैं ने विद्या के होंठो को अपने होंठो से दबा कर रखा था.

चीख नही निकली तो क्या हुआ दर्द से कराहने लगी.

मेरा आधा से ज़्यादा लंड विद्या की चूत मे घूंस चुका था.

चूत से खून निकलना बंद हो गया था. पर विद्या को दर्द हो रहा है.

ये दर्द लंड ने दिया है तो लंड ही ख़तम करेगा.

मैं ने विद्या को किस करते हुए अपनी कमर हिलाने लगा.

थोड़ी देर कमर हिलाने से विद्या की चूत मे मेरे लंड के लिए जगह बन गयी.

जगह बनते ही मैं ने धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.

विद्या अभी भी दर्द से कराह रही थी.

विद्या ऐसे कैसे चलेगा

मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया और विद्या के होंठो को चूसने लगा.

विद्या को थोड़ा थोड़ा दर्द देने से उसे मज़ा नही आएगा.

पूरा लंड जाते ही विद्या की चूत खुल.जाएगी

मैं ने विद्या को किस करते हुए अचानक एक जोरदार झटका मार दिया.

मेरा लंड साप की तेज़ी की तरह विद्या की चूत मे पूरा घूंस गया.

मैं ने विद्या के होंठो को आज़ाद किया .और उसे चिल्लाने दिया.

विद्या मेरे लंड के नाम से चिल्लाने लगी.

विद्या के बूब्स को चूस कर दर्द कम.करना शुरू किया.

पर विद्या ने लंड को बाहर निकालने को नही कहा.

विद्या की इसी बात ने मुझे उसका दर्द कम करने के लिए कहा.

विद्या के दर्द कम होने तक मैं रुक सकता था.

मैं विद्या के कहने तक रुक कर कभी बूब्स को चूसने लगा तो कभी किस करने लगा.

विद्या ने मेरे प्यार के मलम से अपना दर्द ख़तम करके मुझे चुदाई करने की इजाज़त दे दी.

मैं विद्या के उपर से उठ गया .और लंड को आहिस्ता से बाहर निकाल कर लाल लंड को देखने लगा.

लाल लंड देख कर मैं ने लंड को वापस उसकी सही जगह डाल दिया.

ऐसा मैं ने 2 3 बार किया ताकि चूत मे जगह बन सके.

चूत सिकुड़ना खुलना शुरू हो गयी.

और मेरा लंड चूत मे अंदर बाहर होने लगा.

पहले मैं अच्छे से चूत मे जगह बना देना चाहता था.

जिस के लिए धीरे धीरे धक्के मारने लगा.

चूत की गहराई को मेरा लंड नापने लगा

अंदर जाकर किसी दीवार को ठोकर मारने लगा.

विद्या ने कब दर्द से चिल्लाने की जगह मज़े से शीष्कारिया लेनी शुरू की पता ही नही चला.

विद्या को मज़ा मिलना शुरू हुआ.

मतलब मैं भी मज़ा लेना शुरू कर सकता हूँ.

मैं ने अपने धक्को की गति बढ़ा दी.

अवी-विद्या.

विद्या-अवईीई

अवी-मज़ा आ रहा है

विद्या-हाँ, बहुत मज़ा आ रहा है.

अवी-और मज़ा चाहिए

विद्या-हाँ,

विद्या के हाँ करते मैं ने अपने गति बढ़ा दी.

लंड विद्या की चूत मे अंदर बाहर होते हुए खुश हो रहा था.

विद्या की चूत मारने मे मैं कोई कमी नही रख रहा था.

धक्के मारते हुए विद्या का पूरा बदन तोड़ रहा था.मसल रहा था

कभी उसके फ़िरो को फैला के धक्के मार रहा था तो कभी पैरो को उपरकरके चूत मारने लगा.

विद्या मेरे स्ट्रॉंग धक्को के सामने ज़्यादा देर रुक नही पाई.

विद्या एक जोरदार चीख के साथ झड गयी.

विद्या का पानी निकलने से हमारी चुदाई आसान हो गयी.

लंड को उसका पेट्रोल मिल गया.

लंड को उसकी खुराक मिलते ही वो चूत के हाइवे पे फुल स्पीड मे चलने को तैयार हो गया.

मैं ने विद्या को एक तरफ होकर लेटने को कहा और उसका एक पैर मोड़ कर लंड को उसकी चूत मे पेल दिया.

विद्या के एक चूतड़ पर हाथ रख कर अपना वेट विद्या पे डाल कर धक्के मारने लगा.

मेरे धक्को मे गति थी और जोरदार भी थे.

विद्या तो मेरे धक्को से शीष्कारियो पे शीष्कारिया लेती गयी.

मैं बिजली की तरह अपना लंड विद्या की चूत में अंदर बाहर करने लगा.

जैसे ही विद्या की शीष्कारी कुछ कम हो जाती तो मैं जोरदार धक्का लगा देता जिस से विद्या फिर से चीख पड़ती थी.

कुछ देर तक मैं इसी तरह विद्या को चोदता रहा.

कब धीरे धीरे मेरा पूरा लंड विद्या के चूत की गहराई तक जा कर जगह बना देता तो कभी ज़ोर ज़ोर से लंड चूत मे जाकर भूंकंप पैदा करता.

मेरा लंड जिस तेज़ी के साथ अंदर बाहर हो रहा था.उस से विद्या को ऐसा मज़ा आ रहा था जैसा पहले कभी किसी को नही दिया था

विद्या अपनी कमर हिला कर तो कभी गंद हिला कर मेरा साथ दे रही थी.

अपनी गांद उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी.

विद्या की चुदाई करते हुए लगभग 15-20 मिनट हो चुके थे पर ना विद्या रुकने को कह रही थी और ना मैं रुकने वाला था.

इस दौरान विद्या 2 बार झड चूँकि थी और मैं रुकने का नाम ही नही ले रहा था.

विद्या के साथ और छुदाई करनी होगी तो पोज़िशन चेंज करनी होगी.

मैं विद्या के उपर से हट गया और विद्या को पलट दिया .

विद्या पेट के बाल लेट गयी .और मैं ने उसके पेट के नीचे पिल्लो रख दिया.

विद्या हाफ घोड़ी की तरह बन गयी थी.

मैं पीछे से उसके उपर आ कर अपना लंड उसकी चूत मे पेल दिया.

विद्या पलटना चाहती थी पर मैं ने उसकी कमर पकड़ के रखा.

और पीछे से उसकी चूत मारने लगा.

विद्या थोड़ी देर दर्द से कराहने लगी पर

जल्दी वो मेरे रंग मे रंगने लगी.

विद्या के उपर आ कर मैं ज़ोर ज़ोर से चूत मारने लगा.

थोड़ी देर बाद विद्या अपनी गंद को उपर पुश कर के ताल से ताल मिलाने लगी.

विद्या पानी छोड़ कर मेरे लंड की प्यास बुझाने लगी.

औट मेरा भी टाइम आ गया कि मैं विद्या की चूत को मेरे वीर्य से भर दूं.

मैं फुल स्पीड से धक्के मार कर अपना वीर्य विद्या की चूत मे डालने लगा.

मेरा गरम लावा अपनी चूत मे महसूस करके विद्या खुशी से अपनी गंद को उपर करके वीर्य को चूत के अंदर तक जाने दे रही थी.

विधवा की चूत अंदर से बहुत गहरी थी ,जिस से मेरा वीर्य बाहर नही निकला.

और मैं ने अपना लंड विद्या की चूत से बाहर निकाल कर बेड पर लेट गया.

 


788

विद्या की पहली चुदाई मेरे वीर्य निकलने के बाद ख़तम हो गयी

विद्या अपनी चूत मे गरम गरम लावा महसूस करके मेरी तरफ देखने लगी

मैं ने विद्या को अपने पास बुलाया.

विद्या मेरे चेस्ट पे सिर रख कर लेट गयी.

अवी-विद्या

विद्या-मुझे और करना है.

अवी-क्या कहा

विद्या-मुझे और करना है, बस ज़िंदगी भर करते रहना है.

अवी-और करना है फिर खड़ी होकर दिखाओ. अगर ठीक से खड़ी हो गयी तो और एक बार करेंगे

विद्या बेड से सरक गयी और खड़ी होने लगी थी कि उसके अपनी चूत और पेट मे दर्द हुआ और गिरने लगी.

विद्या को मैं ने गिरने नही दिया और उसे अपने बाहों मे ले लिया.

विद्या-अवी दर्द हो रहा है.

अवी-एक बार करते हैना

विद्या-नही होगा.

अवी-अब समझी ,

विद्या-हाँ, पर तुम्हारे साथ करते रहने का मन हो रहा है.

अवी-मैं ने जीतनों के साथ किया है वो ऐसे ही कहती है.

विद्या-कितनो के साथ किया है.

अवी-तुम गिन नही पाओगी.

विद्या-मैं ने कैसे किया. मैं ने उनसब से अच्छा किया ना

अवी-हाँ, बहुत अच्छा,10/10

विद्या-फिर तो मुझे इनाम मिलना चाहिए

अवी-इनाम भी दूँगा ,चलो पहले तुम्हारा दर्द कम करते है.

विद्या-कहाँ

अवी-बाथरूम मे

और मैं विद्या को अपनी गोद मे उठा कर बाथरूम मे ले गया .

और गरम पानी से विद्या की चूत की सिकाई करने लगा.

विद्या-ये क्या कर रहे हो. मैं कर लुगी.

अवी-तुम चुप चाप बैठी रहो ,मुझे अपना काम करने दो

विद्या-तुम काम करो और मैं बैठी रहूं .ये कैसे हो सकता है.

अवी-कुछ नही होता. तुम्हारे इनाम की तैयारी कर रहा हूँ.

विद्या-मैं समझी नही.

अवी-लो हो गया. अब गरम पानी से नहा लो, बदन मे जो दर्द हो रहा है वो कम होगा.

विद्या-साथ मे नहाते हैना.

अवी-मैं ठंडे पानी से नहाउन्गा.

विद्या-पहले तुम

मैं ठंडे पानी से नहाने लगा. और सोप विद्या की तरफ दी.

अवी-लो अपने राजा को लगा दो

विद्या मेरे लंड को सोप लगा कर साफ करने लगी.

मैं जल्दी नहा कर बाहर आ गया .और विद्या गरम पानी से नहाने लगी.

विद्या के नहाने तक कुछ ऑर्डर करता हूँ

मैं ने फोन करके नोन वेज और स्वीट मे एक केक ऑर्डर किया . साथ मे एक बीयर भी. आज फिर से पी कर देखता हूँ.

हमारा ऑर्डर भी आ गया पर विद्या का नहाना नही हुआ

मैं ने विद्या के आने तक खाना प्लेट मे लगा दिया. और केक पे कॅंडल लगा दी.

अवी-विद्या और कितनी देर लगेगी

विद्या-5 मिनट और

अवी-खाना ठंडा हो रहा है

विद्या-तुम शुरू करो .

अवी-तुम्हारे आने से पहले मैं खाना नही खाउन्गा .जल्दी आओ

विद्या टवल पहन कर बाहर आ गयी.

टवल मे गीले बदन के साथ विद्या हॉट लग रही थी.

विद्या-ये केक क्यूँ बुलाया

अवी-तुम्हारी माँ का बर्तडे है इस लिए और

विद्या-और

अवी-और तुम औरत बन गयी इस खुशी मे

विद्या-थॅंक्स

अवी-थॅंक्स बाद मे कहना पहले केक काटो मुझे भूक लगी.

विद्या ने कॅंडल बुझा दी.

विद्या-चाकू कहाँ है.

अवी-वेटर भूल गया होगा.

विद्या-बुला लो

अवी-मेरे पास तलवार है

विद्या-कहाँ है.

मैं ने अपना टवल निकाल दिया.

और लंड से केक को काट दिया.

विद्या-केक तो तुम ने काट लिया.

अवी-तो क्या हुआ खिला तो तुम्हे रहा हूँ.

और विद्या मेरे लंड पे लगा हुआ केक चाटने लगी.

विद्या-आज केक काफ़ी टेस्टी लग रहा है.

अवी-केक के साथ मेरा लंड मत खा जाना

विद्या-तुम्हारा नही वो मेरा है.

अवी-आज का दिन अजीब है. तुम्हारी माँ के बर्तडे पे तुम्हारे साथ

विद्या-माँ आज भी मुझे तुम्हारे रूप मे खुशी दे रही है. माँ के बर्तडे पे मैं खुश रहूं यही तो मेरी माँ का सपना था.

अवी-आंटी जी आज से मैं विद्या को हमेशा खुश रखूँगा. ये मेरा प्रॉमिस है.

विद्या-मेरी किस्मत आज से बदलने वाली है.

अवी-बिल्कुल बढ़ेगी. तुम ने जो अब तक सहा है उसे भूल जाओ ,और मेरे साथ खुशी के साथ जीना शुरू कर दो

विद्या-यस बॉस

अवी-चलो खाना के हटे

विद्या-ये क्या बीयर,तुम बीयर पियोगे

अवी-ट्राइ कर रहा हूँ. चाची को बताना मत

विद्या-चाची को पता चला तो गुस्सा होगी.

अवी-कुछ नही होगा. और बीयर सिर्फ़ मेरे लिए है.

और विद्या के साथ मैं खाना खाते हुए बीयर का मज़ा लेने लगा.

ज़्यादा कुछ नही 2 3 सीप ही लिए. पर नोन्वेज के साथ पीने मे मज़ा आया .

खाना खाने के बाद विद्या और मैं बेड पर लेट गये.

अवी-अब कैसा लग रहा है.

विद्या-थोड़ी राहत है.

अवी-जल्दी दर्द ख़त्म होगा

विद्या-वो कैसे

अवी-तुम ने जो पानी पिया है उसमे पेन किल्लर डाली थी. और सोने से दर्द जल्दी ख़तम होता है.

विद्या-तभी मुझे हल्का हल्का लग रहा है.

अवी-कहाँ पे हल्का हल्का लग रहा है.

विद्या-बूब्स पे

अवी-मैं मसल देता हूँ

विद्या-मसल दो सब कुछ तुम्हारा है.

मैं विद्या के बूब्स को सहलाते हुए बातें करने लगा.

अवी-विद्या

विद्या-हाँ

अवी-तुम्हारी चूत खुल गयी

विद्या-हाँ,

अवी-इसका मतलब है कि अब तुम्हे दर्द नही होगा जिस से हम कभी भी सेक्स कर सकते है.

विद्या-हाँ, ये तो अच्छा हो गया.

अवी-तुम तो खुश हो गयी पूरी बात तो सुन लो

विद्या-बोलो

अवी-चुदाई के पीछे लगी मत रहना ,कंट्रोल करना

विद्या-वो तो करूँगी है.

अवी-और मैं जब कहूँगा तब करेंगे ,

विद्या-ओके बॉस, बस ज़्यादा इंतज़ार मत करवाना

अवी-टेन्षन मत लो ,तुम्हे समय समय पर प्यार करता रहूँगा.

विद्या-अवी तुम कितनो के साथ किया है.

अवी-क्यू पूछ रही

विद्या-बस ऐसे ही.

अवी-रणजीतसिंघ की बीवी कामिनी, सेक्रेटरी ,और उसकी भेजी हुई लड़किया.

विद्या-कामिनी के साथ ,रणजीतसिंघ को पता है.

अवी-उसी ने तो भेजा था कामिनी को ,और उसके सामने किया था.

विद्या-मुझे भी भेजो गे किसी के पास

अवी-नही, तुम तो मेरी हो. और मैं दूसरो से लेता हूँ देता कुछ नही.

विद्या-कामिनी के साथ तो बहुत मज़े किए होगे.

अवी-हाँ, उसकी गंद मार मार कर लाल कर दी थी.

विद्या-गंद भी.

अवी-तुम्हारी भी मारूगा.

विद्या-वहाँ तो बहुत दर्द होता है

अवी-नर्स मेडम आज नही किसी दिन आराम से मारूगा.

विद्या ने एक बार मेरे लंड को हाथ लगाया और फिर्र अपनी गंद के छेद को हाथ लगाया.

अवी-क्या हुआ.

विद्या-कुछ नही ,

अवी-मैं आराम से करता हूँ

विद्या-पता है.मैं तुम्हे मना थोड़े कर रही हूँ.बस सोच रही थी कि तुम्हारा लंड मेरे अंदर जानेके बाद कैसे लगेगा.

अवी-तुम तो नर्स हो ,ये सब तुम्हे पता होगा.

विद्या-पता है पर बहुत कम लोग पीछे से करते है.

अवी-रणजीतसिंघ तो सिर्फ़ पीछे से करता है

विद्या-अच्छा हुआ मेरे साथ कुछ नही किया

अवी-चलो सोते है,

विद्या-मैं अपने कॉलेज मे जाना चाहती थी.

अवी-पुरानी यादे, थोड़ी देर सो लो फिर चलेंगे

विद्या-क्या हम कुछ किताबें खरीद सकते है.

अवी-तुम्हे जो चाहिए खरीद लेना. पहले सो लो

विद्या मेरी बाहों मे नगी सो गयी.

मैं ने अपना हाथ विद्या की गंद पर रख कर उसे अपने से चिपका दिया.

थोड़ी देर हम सोते रहे.

पहले मेरी नींद खुल गयी. विद्या मेरी तरफ गंद करके सो रही थी. मैं उस से चिपका हुआ था.मेरा लंड विद्या की गंद की दरार मे फसा हुआ था.

मैं उठने के बाद भी थोड़ी देर वैसे लेटे रहा .विद्या की गंद को फील करते हुए.

थोड़ी देर बाद विद्या को अपनी गंद पर मेरा लंड महसूस हुआ. उसने अपना हाथ पीछे ले जाकर देखा .

मेरा लंड अपनी गंद मे फसा हुआ देख कर विद्या की नींद खुल गयी.

विद्या-ये तुम क्या कर रहे हो

अवी-कुछ भी तो नही ,ये नींद मे हो गया.

विद्या-बहुत गरम है. और अच्छा लग रहा था.

अवी-जब अंदर जाएगा तो सोचो कितना अच्छा लगेगा.

विद्या-डाल दो

अवी-अभी नही. एक साथ मिठाई नही खानी चाहिए. धीरे धीरे मिठाई का मज़ा लेना चाहिए

विद्या-टाइम क्या हुआ है.

अवी-तुम्हे कॉलेज जाना है तो अभी जाना होगा.

विद्या-चलो कॉलेज चलते है

विद्या फ्रेश होकर कॉलेज जाने के लिए तैयार हो गयी.

मैं विद्या को लेकर कॉलेज चला गया. कॉलेज जाते ही विद्या अपनी टीचर और सहेलियो के साथ बातें करने लगी.

उसे जितना चाहिए उस से ज़्यादा मिल गया था

विद्या को खुश देख कर अच्छा लगा.

विद्या ने कुछ ज़्यादा ही समय लिया पर इतना तो मैं उसके लिए कर ही सकता हूँ.

विद्या के कॉलेज देखने तक मैं ने छोटी चाची को कॉल करके बता दिया कि हमे देर होगी.

फिर विद्या ने अपने लिए कुछ किताबें ली ताकि खाली समय मे किताबें पढ़ कर टाइम पास कर सके.

किताबो का साइज़ देख कर मैं तो डर गया , पता नही विद्या अपने दिमाग़ मे इतनी बड़ी किताए कैसे फिट करेगी.

कॉलेज देखने के बाद हम होटेल मे आ गये.

हल्का फूलका नाश्ता करने के बाद विद्या मुझे अपने कॉलेज के बारे मे बताने लगी.

 


789

विद्या मुझे अपने कॉलेज के बारे मे बताने लगी

अवी-विद्या ,बात कल करें,

विद्या-कल, क्या हम यहाँ रुकने वाले है.

अवी-नही. हमे गाओं जाना होगा.

विद्या-मैं तो भूल ही गयी.मैं समान पॅक करू

अवी-समान पहले देखने तो दो फिर पॅक कर लेना.

विद्या-मैं समझी नही तुम क्या कह रहे हो.

मैं अपने कपड़े उतारने लगा.

अवी-मैं अपना समान दिखाता हूँ .तुम अपना दिखाओ

विद्या-मुझे अब भी समझ मे नही आ रहा है.

मैं ने अपने कपड़े निकाल दिए और लंड को हाथ मे पकड़ लिया.

अवी-फिर से प्यार नही करना चाहोगी.

विद्या-ऐसा बोलो ना. ओह मेरा समान

विद्या अपने कपड़े निकालने लगी और मैं बेड पर लेट कर लंड को हिलाने लगा.

मेरे लंड को देख कर विद्या ने जल्दी से अपने कपड़े निकाल दिए.

अवी-69

विद्या ने मुझे किस किया और 69 पोज़िशन मे आ गयी.

विद्या तो पोज़िशन मे आते लंड को चूसने लगी.

मैं पहले विद्या की चूत को देखने लगा.

विद्या की चूत लाल हो चुकी थी.और छिल भी गयी थी.

विद्या की चूत के होंठो लाल होकर धक्को के वजह से ढीले पड़ गये थे.

मैं ने एक उंगली विद्या की चूत मे डाल दी.

उंगली चूत मे जाते ही विद्या के मूह मे पूरा लंड चला गया.

उंगली से विद्या की चूत मे गुदगुदी करने लगा.

गुदगुदी करने से विद्या की चूत सिकुड रही थी.

गुदगुदी से विद्या केदाँत मेरे लंड को काट रहे थे.

मैं एक उंगली को विद्या की चूत मे अंदर बाहर करने लगा और दूसरे हाथ से विद्या की गंद के छेद को कुरेदने लगा.

विद्या तो मेरे ऐसा करने से मज़ा लेते हुए लंड को चाटने लगी.

विद्या की चूत मे उंगली के बाद मैं ने जीब डाल दी.

उंगली और जीभ से चूत को चूसने लगा. दाने के साथ कबड्डी खेलने लगा.

विद्या को लगा नही था कि आज दुबारा उसके साथ चुदाई नही करूँगा.

पर घर जाने से पहले एक बार विद्या की चूत का मज़ा लेना चाहता हूँ.

विद्या की चुदाई तो घर पे भी कर सकता हूँ पर यहाँ खुल के ,मज़े लेते हुए ,बिना किसी डर के कर सकता हूँ.

एक दूसरे को चूस कर मज़ा देने के बाद चुदाई करने का समय आ गया था.

अवी-विद्या डार्लिंग तुम चुदाई करो,बैठो मेरी गोद मे

विद्या-गोद मे या लंड के उपर

अवी-मेरे कहने का वही मतलब था.

विद्या खड़ी होकर मेरे गीले लंड पे अपनी गीली चूत लेकर बैठने लगी

अवी-आराम से .ये तुम्हारा 2न्ड टाइम है.

विद्या-तुम ने गोली खाई है क्या ,मुझे ऐसा लग रहा हैकि तुम्हारा लंड बड़ा हो गया है.

अवी-मेरा लंड उतना ही तो है. एक बार अंदर जाने दो पता चल जाएगा.

विद्या-आधा तो चला गया है

अवी-आधा अभी बाकी है

विद्या-तुम्हारा टोपा बड़ा होने से चुदाई मे मज़ा आता है.

अवी-वो कैसे

विद्या-टोपा बाकी के लंड के लिए जगह बनाते हुए जाता है

अवी-गया पूरा अंदर

विद्या-हाँ,

अवी-दर्द हो रहा है

विद्या-थोड़ा सा. पर ऐसा लग रहा है की गरम रोड अंदर हो

अवी-गरम रोड से गरम लावा निकलता है.

विद्या-गरम लावा मुझे पसंद है.

अवी-तो उछलना शुरू करो

विद्या-तुम भी पुश करो .मज़ा ज़्यादा आएगा.

अवी-मज़ा आ रहा है

विद्या-मुझे भी मज़ा आ रहा है.

अवी-तुम तो अच्छे से कर रही हो.

विद्या-ब्लू फिल्म मे देखा था.

अवी-और क्या देखा था.

विद्या-खड़े खड़े चुदाई करना

अवी-तुम्हारे पानी निकालते ही खड़े खड़े करेंगे

विद्या-मज़ा आ रहा है.

अवी-तुम्हारी शीष्कारी मेरा जोश बढ़ा रही है

विद्या-और तुम्हारा लंड अंदर लेने की ख़ुसी मेरा जोश बढ़ा रही है.

अवी-मेरी तरफ पीठ करके लंड पर बैठो

विद्या-पीछे से कुछ मत करना

विद्या मेरी तरफ पीठ कर लंड पर बैठ गयी. और लंड पर उछलने लगी.

अवी-तुम थकि नही

विद्या-ऐसा लंड जिसे मिलेगा वो थक नही सकती

अवी-तो मेरा वीर्य निकलने तक उछलती रहो

विद्या-उतनी देर तक, मैं तो मर जाउन्गी.

अवी-चुदाई करते हुए कोई मरता थोड़े है.

विद्या-बोलते तो हैना

अवी-बोलने मे तुम अपनी एनर्जी वेस्ट कर रही हो. लंड पर उछलने पे एनर्जी लगाओ

विद्या-बोलने से मुझे लंड पे उछलने मे ज़्यादा मज़ा और नया जोश मिल रहा है.

अवी-जोश मेतो पानी निकलना चाहिए

विद्या-पानी निकल रहा है.

अवी-नहला दो लंड को

विद्या-ले लो ,सूनामी आ गयी

अवी-देखना सूनामी मे मेरा लंड डूब ना जाए

विद्या-मेरे होते हुए लंड डूब नही सकता.

विद्या झाड़ गयी.

विद्या-मैं थक गयी.

अवी-अब मैं करता हूँ

विद्या-कब कौनसी पोज़िशन मे

अवी-खड़े खड़े

विद्या-लो हो गयी मैं खड़ी

अवी-मेरे लंड के साथ भी खड़ा हो गया

विद्या-डाल दो

मैं लंड विद्या की चूत मे डालने लगा.

अवी-कुछ फील हो रहा है

विद्या-बहुत कुछ फील हो रहा है.

अवी-लो आ गया पूरा अंदर

विद्या-अभी भी तुम्हारा लंड गरम है

अवी-गरम चूत के लिए गरम लंड

विद्या- तुम्हारे गरम लावा के लिए मेरा गरम पानी

अवी-तुम्हारे बूब्स तो डॅन्स कर रहे है.

विद्या-करने दो ,डॅन्स करके थक जाएँगे तो मुझे परेशान नही करेंगे.

अवी-ये तुम्हे परेशान करते है

विद्या-बहुत परेशान करते है. पर आज के बाद नही करेंगे. आराम से धक्का मारो

अवी-आराम से तो कर रहा हूँ

विद्या-मेरी पूरी तरह से फट गयी.

अवी-चूत फट ने के लिए होती है.

विद्या-पर लोग तो कहते है गंद फट ती है.

अवी-वो औरतों के लिए कहावत नही है वो मर्दो के लिए है.

विद्या-आआहह कैसे

अवी-मर्दो के पास गंद ही तो होती है फटने के लिए

विद्या-आअहह मेरी कब फाड़ोगे गंद

अवी-पहले चूत को तो फाड़ने दो

विद्या-हार्डर ,फक मी ,और ज़ोर से

अवी-क्यूँ पानी निकल रहा है

विद्या-हाँ, तुम्हारा हुआ नही

अवी-अभी कहाँ घोड़ी की सवारी करने के बाद निकलेगा.

विद्या-आअहह, मैं आ गयी.

अवी-तुम ने आज मेरे लंड को बहुत बार नहला दिया.

विद्या-घोड़ी बनूँ

अवी-बन जाओ

विद्या घोड़ी बन गयी. और मैं ने लंड उसकी चूत मे डाल दिया.

अवी-अब जोरदार चुदाई करूँगा.

विद्या-करो. पर मेरा फिर पानी निकालो

अवी-अब एक साथ निकालेंगे

विद्या-ये सही रहेगा.

अवी-तुम्हारी गंद भी घोड़ी बनाकर मारूगा

विद्या-तो अभी से प्रॅक्टीस

अवी-प्रॅक्टीस बहुत है

विद्या-वो दिख रहा है.

अवी-ज़्यादा दर्द हो रहा है.

विद्या-हाँ, तुम्हारे धक्के जोरदार लग रहे है

अवी-स्पीड कम करूँ

विद्या-नही रहने दो

अवी-बाद मे ज़्यादा दर्द होगा

विद्या-मीठा दर्द बहुत कम लोगो के नशीब मे होता है.

अवी-तुम्हारा नशीब उज्ज्वल है

विद्या-थॅंक्स

अवी-मेरा होने वाला है

विद्या-मेरा भी

मैं ने अपने आख़िरी की झटके जोरदार मारकर अपना वीर्य विद्या की चूत मे डाला.

विद्या भी मेरे साथ झड गयी.

हम ठंडे पड़ गये. हमारी चुदाई लंबी हो गयी.

विद्या की आज 2 बार चुदाई की.

और 3 बार अपना वीर्य विद्या के नाम कर दिया.

 


790

आज के दिन के सफ़र की एंडिंग विद्या की एक और बार चुदाई करके की.

फिर से चुदाई करके विद्या खुश हो गयी.

अवी-विद्या मज़ा आया

विद्या-ऐसे ही मज़ा करते रहना

अवी-चलो जल्दी फ्रेश हो जाओ ,हमे घर जाना है. काफ़ी देर हो गयी.

विद्या-खाना भी खाना है.

अवी-खाना घर जाकर खाएँगे.

विद्या फ्रेश होने चली गयी. और मैं विद्या के गाओं सेलाया हुआ समान और किताब पॅक करने लगा.

विद्या के फ्रेश होते मैं ने होटेल का बिल पे किया और हम गाओं कीतरफ निकल पड़े.

अवी-विद्या

विद्या-हाँ

अवी-मुझे पीठ मे कुछ चुभ रहा है.

विद्या-मेरे निपल होगे

अवी-और कस के पकड़ लो,

विद्या-किसे तुम्हे या उसको

अवी-अभी के लिए मुझे पकड़ लो ,जिस से हम जल्दी घर जा सके

विद्या ने मुझसे चिपक गयी और मैं ने बाइक की स्पीड बढ़ा दी.

रात काफ़ी हो चुकी थी. पर हम जल्दी गाओं आ गये.

घर आते ही चाची को कॉल करके गेट खोलने को कहा

चाची ने गेट को खोल दिया

मैं और विद्या समान लेकर अंदर चले गये.

मेरे आने की आवाज़ सुनकर बड़ी चाची उठ गयी.

ब चाची-अवी आ गये तुम लोग

अवी-जी चाची

म चाची-अवी ,इतनी रात मे आने की क्या ज़रूरत थी.

ब चाची-सीमा मैं बात कर रही हूँ

म चाची-जी दीदी

ब चाची-विद्या गाओं जाकर मिल लिया सबसे

विद्या-हाँ चाची, मुझे गाओं मे देख कर सब मुझसे मिलने आ गये थे

ब चाची-ये बॅग मे क्या है

विद्या-माँ और मेरी कुछ याद अपने साथ ले आई. और माँ की तस्वीर है.

ब चाची-अच्छा किया जो अपनी माँ की तस्वीर ले आई ,समान को अपने रूम मे ले जाओ

विद्या समान लेकर अपने कमरे मे चली गयी

ब चाची-अवी कितने बज रहे

अवी-11.30

ब चाची-इतनी रात मे आने की क्या ज़रूरत थी ,और तुम्हारे साथ विद्या थी. उसके बारे मे तो सोचते

अवी-मुझे लगा कि जितने जल्दी घर आ जाए उतना अच्छा रहेगा. आपके हाथो का खाना खाना था

सी चाची-अवी, मज़ाक नही. अगर विद्या को कुछ हो जाता तो

विद्या-चाची. इसमे अवी की ग़लती नही है. मैं ज़िद्द की थी यहाँ आने की. मुझे अपनी माँ के पास जल्दी आना था.

ब चाची-ऐसी ज़िद्द नही करते ,दुनिया बहुत खराब है. अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो

अवी-चाची. विद्या का वहाँ रो रो कर बुरा हाल हो रहा था जिस से वहाँ रहना ठीक नही होता.

म चाची- दीदी, पहली ग़लती सबको माफ़ होती है

अवी-चाची ,हम तो आपके हाथ का खाना खाने के लिए होटेल मे नही रुके

ब चाची-तूने कुछ नही खाया. पहले क्यू नही बताया. सीमा

म चाची-दीदी कभी तो मीना का नाम लिया कीजिए.

ब चाची-मीना से नही होगा. तू मीना से स्मार्ट है.

सीमा चाची छोटी चाची को ठेंगा दिखाते हुए रशोई घर मे चली गयी.

सीमा चाची के ऐसा करने से सब हँसने लगे.

सीमा चाची हमारे लिए खाना लेकर आ गयी.

खाना खाते हुए बड़ी चाची विद्या से बातें करने लगी.

विद्या उसकी माँ, उसके गाओं के बारे मे बताने लगी.

मेरा तो खाना जल्दी हो गया. और मैं अपने कमरे मे एसी की हवा खाने चला गया.

छोटी चाची भी मेरे कमरे मे आ गयी.

अवी-चाची ठंडी ठंडी हवा

सी चाची-हवा के बच्चू ,तुझे रात मे आने को किसने कहा था.

अवी-रात मे सफ़र करने मे मज़ा आता है.

सी चाची-मज़ा तो वही रुक के कर सकता था.

अवी-रात मे रुकता तो सुबह कसरत कैसे करता

सी चाची-पर रुक जाता तो होटेल मे मज़ा कर सकता था

अवी-मज़ा तो पहले ही कर लिया था.

सी चाची-दोपेहर मे

अवी-हाँ,मज़ा करने ही लेकर गया था विद्या को

सी चाची-मतलब विद्या के माँ की

अवी-विद्या की माँ का बर्तडे था,

सी चाची-और केक तुम ने काट लिया

अवी-हाँ

सी चाची-वाह रे मेरे शेर ,चल बता पूरी स्टोरी पर शॉर्ट मे ,मुझे सोना भी है.

मैं ने चाची को सारी बात बता दी.

सी चाची-मुझे बताया कर ,जिस से मैं सब संभाल सकूँ

अवी-जी

सी चाची-चल अब सो जा, सुबह ठंडी हवा मे, सुबह पसीना निकना है

अवी-सुबह मिलते है

और मैं बेड पर गिरते ही सपनो की दुनिया मे चला गया

 
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