• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मैं और मेरा परिवार

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
फ्लॅशबॅक 832म

जयसिंघ अपने सारे फ़र्ज़ पूरा करने लगा

जो पिताजी और माँ चाहती थी वही जयसिंघ ने किया

पूजा की शादी की जो तय्यारी की उस से माँ और पिताजी खुश थे

जयसिंघ ने सारे मेहमानों को सिल्वर काय्न देने का फ़ैसला किया ताकि पूजा की शादी को सब याद रखे

रमेश के साथ जयसिंघ की बाते हमेशा लंबी चलती थी

बात शादी से स्टार्ट होके शेयर मार्केट पे जाके रुक जाती

पूजा को तो सब कुछ मिल गया था

अपने भैया की वजह से वो रमेश से अकेले ने प्यार कर रही थी

रमेश और पूजा एक दूसरे को समझने लगे थे

उनको तो लग रहा था कि कब उनकी शादी होगी

रमेश को शादी की ज़्यादा तय्यारी नही करनी थी जिस से वो शहर मे रह कर पूजा से मिलने को इम्पोर्टेंट देने लगा

रमेश के दोस्त सुरेश और जातीं सारी तय्यारी कर रहे थे

पिताजी को ज़्यादा मेहनत नही करनी पड़ रही थी

बड़े बेटे ने सारी ज़िम्मेदारी अपने कंधो पे ली

अपने सपने जला कर वो सबको खुश कर रहा था

दूसरो को तो जयसिंघ ने खुश कर दिया पर खुद अंदर ही अंदर रो रहा था

उसका रोना किसी को नही दिख रहा था

पूजा नेहा नीता की खुशी के सामने जयसिंघ ने अपने चेहरे पे झूठी स्माइल लेकर आ गया

माजी- सुनिए

पिताजी - क्या है

माजी- जय को देखिए कैसे अपनी बहन की शादी करवा रहा है

पिताजी -मैं ने कभी सोचा नही था कि जयसिंघ का ये चेहरा देखने को मिलेगा

माजी- मैं ने भी , उस दिन जो हुआ उसके बाद तो अजीब अजीब ख़याल आ रहे थे

पिताजी -मुझे भी खुद पे गुस्सा आ रहा था , ग़लती मेरी थी , मुझे जयसिंघ से बात करके पूजा जी सगाई करवानी चाहिए थी , वो बड़ा बेटा है इस घर का , पहली बार मुझसे जल्दबाज़ी हो गयी ,पर पूजा का तो तुम्हे पता है , उसके खुशी के लिए मैं ने हाँ कर दी , और जयसिंघ को थेप्पड़ मार कर बाहित बड़ी ग़लती कर दी पर जयसिंघ ने सब भुला कर अच्छा किया

माजी- जय सब कुछ भूल गया ,, ये अच्छी बात है

पिताजी -मैं खुश हूँ जयसिंघ के लिए

माजी- आप उसे माफ़ कर देना

पिताजी -वो तो उसी दिन कर दिया था जब उस ने रमेश से मिलने की बात कही थी

माजी- आप ने जय से बात की उसके बारे मे

पिताजी -नही , उस दिन जो हुआ उसे याद करने का दिल नही करता , वो दिन मैं भूल जाना चाहता हूँ जब मुझे जयसिंघ को थप्पड़ मारना पड़ा

माजी- भूल जाना ही ठीक होगा , वैसे जय को खुश देख कर पूजा भी खुश है

पिताजी -मुझे तो डर था कि अगर जयसिंघ शादी मे नही आता तो पूजा शादी ही नही करती

माजी- हाँ , पूजा कितनी रोई उस दिन पर नेहा नीता ने संभाल लिया उसको

पिताजी -नेहा नीता छोटी होकर सब कुछ संभाल लिया था

माजी- वो बड़ी हो रही है

पिताजी -मेरी प्यारी बेटियाँ

माजी- वैसे मेरे बेटे ने देखिए अपनी बहन के लिए क्या बनाया है

पिताजी -क्या

माजी- ये सिल्वर काय्न जिस पे रमेश और पूजा का नाम है , कितना सुंदर है

पिताजी -काय्न आ गये

माजी- हाँ , जय खुद गया था , बहुत सुंदर है

पिताजी -अगेर काय्न कम पड़ गये तो

माजी- जय ने ज़्यादा बना लिए है जितनी नेहा ने लिस्ट बनाई उस से ज़्यादा काय्न लाया है , जय कुछ कमी नही होने देगा पूजा की शादी मे

पिताजी -वो दिख ही रहा है मुझे तो कुछ करने नही दे रहा है

माजी- छोटू भी अपने भाई की कितनी मदद कर रहा है

पिताजी - बेटे किसके है

माजी- मेरे

पिताजी -मेरे बेटे है वो

माजी- आपकी बेटियाँ है

पिताजी -तुम्हे प्यार करने का दिल कर रहा है , जो मुझे इतने प्यारे बच्चे दिए है

माजी- एक बात कहूँ

पिताजी -हाँ बोलो

माजी- जय को उसके मर्ज़ी से जीने देंगे ना आप

पिताजी -क्या मतलब

माजी- अगेर वो फिर से शहर3 जाना चाहता है तो आप इजाज़त देंगे

पिताजी -उसकी खुशियाँ शहर 3 मे है , मुझे अच्छा लगेगा उसकी बाते न्यूसपेपर मे पढ़ कर

माजी- मैं यही सुनना चाहती थी

पिताजी -तुम्हे कहना क्या है वो बोल दो

माजी- जय ने अपने सपनो को जला दिया

पिताजी -क्या ?

माजी- वो आपको खुश रखने के लिए ऐसा कर रहा है

पिताजी -तुमने मुझे पहले क्यूँ नही बताया

माजी- मैं सही समय का इंतज़ार कर रही थी

पिताजी -जयसिंघ से बात करता हूँ मैं

माजी- नही , फिर से उसको याद दिलाना ठीक नही होगा

पिताजी -तो मैं क्या करूँ

माजी- अगर वो शहर3 जाना चाहे तो आप रोकना मत उसको , उसके सपने तो जल गये पर जो बच गया है उसको पूरा करने दीजिए , उसको जीने दीजिए उसके मर्ज़ी से ,

माजी- अगर वो शहर3 जाना चाहे तो आप रोकना मत उसको , उसके सपने तो जल गये पर जो बच गया है उसको पूरा करने दीजिए , उसको जीने दीजिए उसकी मर्ज़ी से ,

पिताजी -जैसा तुम कहोगी वैसा ही होगा

फिर से पिताजी शादी की तय्यारियो मे लग गये

जैसे जैसे दिन पास आ रहे थे वैसे वैसे सबकी धड़कने बढ़ रही थी

पूजा को अब अपने फॅमिली से दूर जाने के गम ने परेशान किया था

पूजा जब भी सबको देखती तो उसको वो हसीन पल याद थे जो साथ बिताए थे

नेहा नीता का मस्ती करना

वो सीओ रही होती तो नेहा का उसकी नींद खराब करना

मिलके प्लान बनाना और पिताजी से ज़्यादा पैसे लेना फिर आपस मे बात लेना

छोटू को मिलके परेशान करना

छोटू के रोते उसको मानना

माँ की डाट को प्यार समझ कर सुनना

भैया का हाथ पकड़ कर चलना सीखना

भैया का उनको पढ़ाना

पिताजी का बेटा जैसा प्यार करना

सब कुछ पूजा को याद आ रहा था

कल तक उसने ऐसा सोचा नही था

पर आज अचानक उसे सब याद आ रहा था , फॅमिली से दूर जाने के बारे मे सोचते पूजा की आँखो मे आसू आ गये

एक तरफ उसके दिल का राजकुमार और दूसरी तरफ वो फॅमिली जिसने प्यार करना सिखाया

पूजा अपने कमरे में रो रही थी

नेहा ने ये देख लिया और चुपके से पिताजी और माँ को बुला लिया

माँ ने पूजा को रोता हुआ देखा तो वो पूजा के पास आ गयी

माजी- पूजा क्या हुआ

पूजा - माँ मुझे नही करनी शादी

पूजा की उस बात से सब शॉक्ड हो गये

पिताजी - रमेश ने कुछ कहा तुझे

जयसिंघ - पूजा जीजा जी ने तेरा दिल दुखाया

नेहा - दीदी बात क्या है

पूजा - मैं आप सब को छोड़ कर कही नही जाउन्गि

माजी- तूने तो डरा ही दिया था

पिताजी- तुझे नही करनी है तो मत कर शादी ,

नेहा - पिताजी मैं कर लूँगी रमेश जीजाजी से शादी

पूजा - क्या कहा तूने , ऐसी पिटाई करूँगी कि दुबारा ऐसा कहेगी ही नही

नेहा - आप नही कर रही तो मैं कर लेती हूँ

पूजा- पिताजी

पिताजी - पूजा एक दिन सबको जाना होगा अपने नये घर अपने राजकुजमर के साथ , नेहा और नीता भी जाएँगी

पूजा - मुझे कहीं नही जाना है

माजी- ऐसा नही बोलते ,

पूजा - हम उनको यहाँ लाते हैना

पिताजी -ऐसा नही होता है

पूजा - आपने कहा था कि मैं शादी के बाद यही रहूंगी

माजी- पूजा ऐसा नही होता है , देखो मैं भी तो अपना घर छोड़ कर यहाँ आई थी

पूजा - मैं आप सब के बिना कैसे रहूंगी

माजी- तू एक बार रमेश के घर तो जा फिर देखना तुम खुद यहाँ नही आएगी , मैं तो शादी के बाद मायके गयी ही नही ,

पिताजी -रमेश तुम्हे हमारी कमी होने ही नही देगा ,

पूजा -मुझे आपकी याद आई तो

पिताजी- तो बस मे बैठ जाना मैं यहाँ तेरा इंतज़ार करूँगा

माजी- ये आप क्या बोल रहे है

पूजा- मैं नेहा को अपने साथ लेकर जाउन्गा

पिताजी- ये ठीक रहेगा कुछ दिन नेहा तेरे साथ रहेगी तो तुझे अच्छा लगेगा

नीता- मैं भी चलूंगी

माजी- नीता , सबको नही ले जाने दे सकते वहाँ पर

नीता- नेहा जाएँगी तो मैं भी जाउन्गि

पिताजी- ठीक है चली जाना , और अपनी दीदी का यहाँ की याद आने मत देना

नेहा ,- जी पिताजी

माजी- पर

पिताजी -मैं रमेश से बात करूँगा

पूजा - पिताजी

और पूजा पिताजी के गले लग गयी कुछ देर ऐसा ही फॅमिली ड्रामा चला

और देखते देखते वो दिन भी आ गया जब पूजा दुल्हन के रूप मे तय्यार हो गयी

नेहा नीता ने अपनी दीदी को राजकुमारी जैसा सजाया था

पिताजी पूजा को देखते अपने आसू रोक नही पाए ,

उनकी शेरनी बेटी इतनी बड़ी हो गयी कि अपना घर बसा रही है

रमेश भी गोदी पे बैठ कर पूजा को लेने जाने को आया था

जयसिंघ ने घर को ही नही पूरे गाँव को सजाया था

पूरा गाँव , गाँव की बेटी को आशीर्वाद देने आया था

ठाकुरजी के आते ही नीता ने उनको पहले थोड़ा परेशान किया

नेहा नीता अपने जीजाजी को देख कर पूजा की खिचाई करने लगी

बारात छोटी थी पर पूजा को अपने साथ ले जाने के लिए काफ़ी थी

समधी जी तो थे ही नही , रमेश के पापा की डेत हो चुकी थी

रमेश की एक माँ और एक बहन थी ,

माँ ने समधन का स्वागत किया

पिताजी समधन की ओर देखते ही रह गये

बेटी की शादी थी वरना पिताजी समधन को पकड़ कर कमरे मे ले जाते

पूजा के ससुराल वालो को शादी की तय्यारी पसंद आई

ज्योति ने अपना नाक टेढ़ा किया

पर सिल्वर काय्न देख कर उसका लालच बाहर गया

उसने एक नही 10 काय्न माँग लिए

ज्योति को बस पैसो से मतलब था , रमेश को ये अच्छा नही लगा पर वो शादी मे ड्रामा नही करना चाहता था

ज्योति 10 सिल्वर काय्न के साथ खुश थी

रमेश ने कहा कि ये सब करने की क्या ज़रूरत थी पर जयसिंघ अपनी बहन की शादी को स्पेशल बनाना चाहता था

पिताजी की लाडली बेटी दुल्हन बन गयी तू

अपने राजकुमार के साथ 7 जनम साथ रहने की कसमे खाने लगी

जैसे जैसे फेरा कंप्लीट हो रहा था वैसे वैसे सब की आँखो मे पानी आ रहा था

सब अलग अलग तरह से अपने आसू छुपा रहे थे

ठाकुरजी ने पिताजी को हिम्मत देते हुए कंट्रोल रखने को कहा

शादी हो गयी

पूजा रमेश की हो गयी

पूजा अब अपने नये घर जाएगी

पूजा अपना नया घर बसाएगी

पर उसे घर को छोड़ने का ख़याल आते पूजा के आसू बहाने लगे

नेहा नीता पूजा दीदी को संभाल रही थी

पिताजी भी पूजा के जाने से रो रहे थे

पूजा ने सबको एमोशनल कर दिया

जयसिंघ ने पूजा को खुश रहने का आशीर्वाद दिया पूजा अपने भाई के गले लग कर सब से ज़्यादा रोई

पिताजी ने रमेश को पूजा का कायल रखने को कहा

.रमेश समझ गया कि पूजा कितनी लाडली है

रमेश ने पिताजी को भरोसा दिलाया कि वो पूजा के आँखो मे आँसू नही आने देंगे

पिताजी के कहने पे नेहा नीता भी पूजा के साथ चली गयी

रमेश भी यही चाहता था कि पूजा को नये घर मे जुड़ने मे टाइम लगेगा तब तक उसको कोई तो चाहिए

पिताजी अपनी बेटी को जाते हुए देख रहे थे

उनको लग रहा था कि नेहा नीता भी शादी करके जा रही है

घर की हस्ती खेलती गुड़िया अपने नये घर जा रही थी

माँ ने अपनी बेटी को जो सिखाया है वो पूजा को मदद करेगा नया घर बसाने मे

छोटू फिर से अकेला हो गया

पहले जयसिंघ चला गया , अब पूजा दीदी चली गयी , फिर से वो अपने कमरे मे अकेला रह गया
 
फ्लॅशबॅक 832एन

पूजा अपने नये घर चली गयी अपनी नयी दुनिया बसाने के लिए

पूजा अपने साथ सबकी दुआएँ लेकर गयी

पिताजी को पहली बार लगा कि पूजा बेटा नही बेटी है

पूजा के जाने से पिताजी को अहसास हुआ कि एक दिन नेहा और नीता भी अपने घर जाएगी

पिताजी अकेले पड़ जाएँगे

पिताजी अकेले कैसे रह सकते है, माँ उनके साथ थी

माँ ने आज तक उनका साथ दिया है आगे भी देगी

पर पूजा के जाने से पहली बार पिताजी को अकेलापन का अहसास हुआ

माँ को भी पूजा की याद आएगी

माँ और पिताजी यही दुवा करेंगे कि पूजा अपनी दुनिया अच्छे से बसा सके

पूजा इन सब के लिए मेंटली तय्यार नही थी ,

उसको तो बस शादी करनी थी

पता नही वो कैसे अपने नये घर मे अड्जस्ट होगी

माँ को थोड़ी टेन्षन होने लगी

पर उनको पूजा पे विश्वास था , वो ये कर लेगी

रमेश पूजा का साथ देगा , दोनो.मिलके अपनी नयी दुनिया बसाएँगे ,

माँ अपनी सोच मे डूबी थी

पिताजी अपने सोच मे खोए हुए थे

पिताजी ने पूजा का घर तो बसा लिया पर अपने दिल के टुकड़े से दूर हो गये

नेहा नीता की जब शादी होगी तो क्या होगा पिताजी का ये सोच भी नही सकते

बेटियो की वजह से ये घर मे हसी मज़ाक चलता था

कितनी ख़ुसीया थी इस घर मे

अगेर सभी एक एक करके जाएगी तो पिताजी को ये घर काट खाएगा

नेहा नीता चली गयी तो वो कैसे जियेंगे

उनकी शादी से लहले इस घर मे बहू लानी होगी

जयसिंघ की शादी पहले करने का सोच रहे थे पिताजी

घर की बहू अपनी ननद की शादी करवाएगी

बहू और पोते के वजह से उनको जीने की नयी किरण मिलेगी

पिताजी कहाँ से कहाँ के बारे मे सोचने लगे

अभी तो पूजा को अलविदा किया है और पिताजी जयसिंघ और नेहा नीता की शादी का सोच रहे थे

जयसिंघ भी अपनी सोच मे डूबा था

जयसिंघ ने बड़े भाई होने का अपना फ़र्ज़ पूरा कर लिया

पूजा की शादी इतनी धूम धाम से की , कि सारा गाँव देखता रह गया

पूजा की शादी कोई नही भूलेगा

जयसिंघ ने अपने कंपनी के बारे मे एक बार भी नही सोचा था , बस वो पूजा की शादी के बारे मे सोच रहा था

जैसा किसी ने सोचा नही था वैसी शादी करवाई पूजा की

पहले दिन जो हुआ उसके बाद शादी ऐसी होगी पिताजी ने सोचा भी नही था

पिताजी को अपने बेटे पे गर्व महसूस हो रहा था

पिताजी पूजा को अलविदा करके जयसिंघ के गले लग गये

जयसिंघ के गले लग कर पिताजी रोने लगे

जयसिंघ पिताजी की हालत को समझता था

जयसिंघ ने पिताजी को हिम्मत दी

और पूरे गाँव की दावत खातिर होने तक सब देख रहा था

छोटू अपनी पूजा दीदी के गले लग कर रोया था

पर उसने जाते हुए पूजा दीदी को दीदी नही कहा

पर पूजा ने हमेशा की तरह उसे प्यार से छोटू कहा , जिसे सुनकर आज छोटू को बुरा नही लगा ,

रात होते होते सब मेहमान जाने लगे

जो मेहमान रुकने वाले थे उनके सोने जा इंतज़ाम किया जयसिंघ ने

दूसरे दिन वो सब मेहमान भी चले गये

रमेश के घर पे रिसेप्शन था जिसमे जयसिंघ माँ पिताजी और छोटू भी शामिल हुए

रिसेप्षन भी अच्छा अरेंज किया था

नेहा नीता पूजा के साथ साथ थी

रिशेप्शन के बाद पिताजी वापस गाँव मे आ गये

नेहा नीता वही रुकी , कुछ दिन वो पूजा दीदी के साथ रुकेगी तो पूजा को मदद मिलेगी

घर आते ही माँ और पिताजी कुछ दिन शादी के बारे मे बात करने लगे

जयसिंघ की जो ज़िम्मेदारी थी वो उसने पूरी कर ली

जिस से पिताजी को अच्छा लगेगा वो जयसिंघ ने किया

कुमार का तार आया था

1 महीना बिना जयसिंघ के कंपनी की हालत खराब हो गयी थी

जयसिंघ भी शहर3 जाना चाहता था पर वो पिताजी की मर्ज़ी से जाना चाहता था

पर वो पूछेगा कैसे

पर पूछना तो था

जयसिंघ ने यहाँ का काम तो कर दिया

पिताजी की जो इच्छा थी , जो आशा थी वो जयसिंघ ने पूरी की

अब जयसिंघ को जाना होगा

पता नही जयसिंघ क्यूँ जाना चाहता था

उसने अपने सपने तो जला दिए

फिर अब वो किस लिए जाना चाहता है

शायद कुछ और सोचा होगा जयसिंघ ने

पूजा की शादी को 5 दिन हो गये

जयसिंघ को वापस शहर3 जाना था

जयसिंघ अपना सारा समान पॅक करके सही समय का इंतज़ार कर रहा था

क्यू कि उसको पता था कि पिताजी और माँ किस हालत मे है

पूजा के जाने से पिताजी और माँ उसी के यादो मे खोए थे

जयसिंघ ऐसे मे अपनी माँ से बात करने चला गया

जयसिंघ - माँ

माजी- भूक लगी है , मैं अभी खाना बनाती हूँ

जयसिंघ - भूक तो नही पर आपसे से बात करनी थी

माजी- तुझे शहर3 जाना है

जयसिंघ - आप को कैसे पता

माजी- तेरी माँ हूँ मैं

जयसिंघ - माँ वो मैं

माजी- इतना डर क्यू रहा है , तुझे जाना है तो तू जा सकता है

जयसिंघ - पिताजी

माजी- उन से मैं ने बात कर ली है , वो भी यही चाहते है क़ी तुझे जिसमे खुशी मिले वो कर

जयसिंघ - पिताजी ने ऐसा कहा

माजी- तू अभी तक अपने पिताजी को समझा ही नही है

जयसिंघ - पर वो तो

माजी- तेरी फोटो न्यूसपेपर मे देख कर तेरे पिताजी को सबसे ज़्यादा खुशी हुई थी

जयसिंघ - माँ मैं चाहता था कि

माजी- बोल ना जो बोलना है

जयसिंघ - आप सब भी मेरे साथ शहर3 चलते तो तो

माजी- मैं शहर 3 आउ

जयसिंघ - मैं ने वहाँ घर लिया है हम सब के लिए

माजी- घर

जयसिंघ - हाँ , हम सब के लिए , वहाँ छोटू नेहा नीता की पढ़ाई भी अच्छे से हो जाएगी

माजी- वहाँ घर है तो ये क्या है

जयसिंघ - मेरे मतलब है कुछ साल के लिए ,जब तक छोटू ली पढ़ाई पूरी नही होती तब तक लिए ,

माजी- छोटू की पढ़ाई

जयसिंघ - माँ आप ऐसे क्यूँ बोल रही है

माजी- तू जो चाहता है वो नही हो सकता

जयसिंघ - कुछ साल की बात है

माजी- तुझे भी पता है उसके बाद तू कहेगा कि यही शहर3 मे रहते है

जयसिंघ - मैं ऐसा नही कहूँगा ,

माजी- बेटा तुझसे ज़्यादा दुनिया देखी है इन आँखो ने ,

जयसिंघ -माँ कम से कम कुछ दिन के लिए तो चलो , मुझे अच्छा लगेगा

माजी- मैं वहाँ कैसे आ सकती हूँ जहाँ मेरा बेटा खो गया है

जयसिंघ - आपको ऐसा लगता है तो आप मुझे शहर3 भेज क्यूँ रही है

माजी- ताकि तू अपना सपना पूरा कर सके

जयसिंघ - मेरा सपना तो जल गया है

माजी- मैं तेरे सपने को जलने कैसे देती

जयसिंघ - माँ , अब वो सब बेकार है

माजी- कुछ बेकार नही होता , तू बस कुछ समय के लिया आराम कर फिर सोचना अपने सपने के बारे मे

जयसिंघ - जी , पर आप आती तो

माजी- नही , हम वहाँ नही आ सकते

जयसिंघ - मैं आपको एक दिन लेकर जाउन्गा

माजी- मुझे खुशी होगी जब तेरे पिताजी कहेंगे कि जयसिंघ के पास चलते है

जयसिंघ - फिर तो वो दिन कभी नही आएगा

माजी- तू अभी तक अपने पिताजी को समझा ही नही , कब जाना है तुझे

जयसिंघ - आज ही

माजी- अपने पिताजी से मिल ले मैं तेरे लिए टिफिन पॅक कर देती हूँ

और जयसिंघ अपने पिताजी के पास गया

पिताजी - जयसिंघ , कब जाना है तुझे

जयसिंघ- आज

पिताजी- मैं ने सब सुन लिया है

जयसिंघ- पिताजी अगेर आप शहर3 आते तो

पिताजी- कुछ ऐसा करना जिस से मैं खुद वहाँ आ जाउ

जयसिंघ - मैं कॉसिश करूँगा

पिताजी- मेरी बात याद रखना

जयसिंघ - मैं कौन हूँ ये कभी नही भूलूंगा

पिताजी- ये बात तो याद है तुम्हे

जयसिंघ ने पिताजी के पैर छु लिए

पिताजी- मेरा आशीर्वाद तेरे साथ है , और हाँ तू शहर3जा रहा है पर जैसा पहले दीवाली मे आता था वैसे ही आया कर

जयसिंघ - जी , हर साल आउन्गा ,

पिताजी- जा , अगर नेहा नीता आ गयी तो तुझे जाने नही देगी

जयसिंघ - आप खुश हो मेरे जाने से

पिताजी- मैं तेरे लिए खुश हूँ

पिताजी ने जयसिंघ को गले लगा लिया

और जयसिंघ फिर से शहर3 चला गया

जैसा पिताजी ने सोचा था वैसा ही हुआ

जयसिंघ शहर3 को छोड़ नही पाएगा

जैसे पिताजी गाँव की छोड़ नही सकते

दोनो के शरीर मे एक ही खून बह रहा था

ना पिताजी अपने गाँव को छोड़ेंगे और ना जयसिंघ शहर3 से दूर रह सकता

जयसिंघ ने सोचा था कि इस बार सबको शहर3 लेकर आएगा

कितना कुछ सोचा था जयसिंघ ने

पर जयसिंघ वापस अकेले शहर3 चला गया
 
833

मैं ने एक बार नही 2 बार पूजा बुआ की शादी का आल्बम देख लिया

पूजा बुआ और छोटी चाची ऐसे खो गयी कि मेरी आवाज़ उनके कानो तक जा ही नही रही थी

पूजा बुआ तो अपनी शादी को याद कर रही होगी

पर छोटी चाची, वो क्यूँ ख़यालो मे डूबी है

अब फिर से मैं आल्बम नही देखूँगा

मैं ने इस बार आवाज़ देने की जगा पूजा बुआ और छोटी चाची को च्युन्टी काट ली

दोनो एक साथ चिल्लाई ऊऊऊऊचह

दोनो अचानक होश मे आ गयी

पूजा बुआ- क्या हुआ , चिमटी क्यू काट ली

सी चाची- वो भी इतनी ज़ोर से

अवी- आप दोनो कहाँ खो गयी

पूजा बुआ- मैं तो

अवी- आप मुझे अपनी शादी की कहानी बताने वाली थी , और खुद दिन मे सपने देखने लगी

पूजा बुआ- आज सारी बाते ऐसे आँखो के सामने आ गयी थी , जिस से उसी मे खो गयी

अवी- और आपको क्या हुआ

सी चाची - मैं सोच रही थी कि. काश मेरी शादी पूजा दीदी जैसी होती तो

अवी- पर आप मुझे कहानी सुनाने वाली थी

पूजा बुआ- आज तो बहुत देर हो गयी , शाम हो गयी

अवी- पर मेरी कहानी

पूजा बुआ-फिर किसी दिन सुनाउन्गि , ये वादा रहा , पर आज नही बता पाउन्गी

अवी- अगली बार कब

पूजा बुआ- जल्दी बताउन्गि ,

सी चाची- अवी हमे भी अब चलना चाहिए

पूजा बुआ- कॉफी पी कर जाओ , दिन मे सोने से अब कॉफी पीनी ही पड़ेगी

अबी- मैं पहले बहुत सी कॉफी पी चुका हूँ

पूजा बुआ- सॉरी अवी, मेरे वजह से तुम्हारी दोपेहर खराब हो गयी ,

अवी- कोई बात नही

पूजा बुआ- नेक्स्ट टाइम पक्का तुम्हे कहानी बताउन्गी ,, और तुम चाहो तो ये फॅमिली फोटो रख सकते हो

अवी-सच

पूजा बुआ- हाँ , मेरे पास इसकी रियल है , मैं नयी फोटो बना लुगी ,

अवी- थॅंक यू बुआ

पूजा बुआ- ऐसी पूरी फॅमिली वाली फोटो बहुत कम है , संभाल कर रखना

अवी- बुआ मेरी माँ भी होगी ऐसी फॅमिली फोटो नही है

पूजा बुआ- हैना , पर वो सिर्फ़ एक ही है मेरे पास

अवी- मुझे दीजिए मैं एक और कॉपी बना कर लाता हूँ

पूजा बुआ- ठीक है ये लो , ये भैया की शादी की फोटो है , जब भाभी मंदिर मे पूजा कर रही थी

अबी- अब मेरी दोपेहर अच्छी गयी है

हमने फिर से एक एक कॉफी पी और चाची के साथ अपने घर आ गया

अबी तो बस आराम करना ही था

थोड़ी बहुत पढ़ाई

टेन्षन तो अब राजेश लीना और कविता को आ रहा था

उनका रिज़ल्ट जो आने वाला था

देखते है क्या निकलता है उनका रिज़ल्ट

कविता और लीना का स्टेट बोर्ड होने से उनका रिज़ल्ट बाद मे लगने वाला था.

पर राजेश का रिज़ल्ट स्टेट बोर्ड के रिज़ल्ट से एक हफ़्ता पहले लगने वाला था.

राजेश अपने रिज़ल्ट को लेकर मुझसे ज़्यादा टेन्षन मे था.

मैं तो कम मार्क के वजह से टेन्षन ले रहा था तो राजेश टॉप मे आने के वजह से टेन्षन ले रहा था.

वो अपने स्कूल से तो टॉप करेगा इसमे डाउट नही था पर उसको ओवरॉल टॉप मे आना था.

टॉप नही कम से कम टॉप 10 मे आना था. अपने डिविषन से

जैसे कोमल हमारी फॅमिली की लॅडीस मे पढ़ाई मे अवल थी.

वैसे राजेश था ,मुझसे और राज से पढ़ाई मे तेज था. पर स्मार्टनेस मुझसे कम थी.

नीता बुआ ने बचपन से राजेश पे कुछ ज़्यादा ही ध्यान दिया था .खास करके पढ़ाई पे

पूजा बुआ राज को राजेश जैसा बनाना चाहती थी पर बचपन मे राज का छोटा सा आक्सिडेंट हो गया था जिस से उस पे ज़्यादा फोर्स नही किया पूजा बुआ ने

फिर भी राज की काबिलियत एक दिन सबको पता चल जाएगी. उसका दिन आने मे टाइम है.

राजेश का रिज़ल्ट होने से सब नीता बुआ के घर पे जमा हो गये थे.

अपने अपने लॅपटॉप लेकर रिज़ल्ट देखने को बेताब थे.

स्वेता दी, कोमल, कविता और लीना अपने अपने लॅपटॉप मे वेबसाइट ओपन करके रिज़ल्ट लगने का इंतज़ार कर रहे थे.

सीतल दीदी ने राजेश का लॅपटॉप लिया और विद्या मेरे लॅपटॉप लेकर रिज़ल्ट देखने की कोशिस कर रही थी.

राजेश हॉल मे एक कॉर्नर मे बैठ कर अपने नाख़ून खा रहा था.

राज और मैं अपनी पेट पूजा कर रहे थे.

हमे पता था कि राजेश का रिज़ल्ट अच्छा लगेगा.

बिना वजह राजेश टेन्षन ले रहा था

नीता बुआ-रिज़ल्ट लगा क्या

स्वेता दीदी-अभी तक तो नही लगा.

कविता-मौसी दीदी से मत पूछिए रिज़ल्ट तो सबसे पहले मेरे लॅपटॉप पे लगेगा.

कोमल-पहले इंटरनेट तो कनेक्ट कर,

कविता-कर रही हूँ.

लीना-भैया का रिज़ल्ट तो मैं देखुगी पहले

सीतल दीदी-रहने दे, मेरे होते ये मुश्किल होगा तेरे लिए

कविता-देख लेते है.

स्वेता दीदी-किसी के लॅपटॉप मे दिखे पर रिज़ल्ट तो लगना चाहिए पहले

पूजा बुआ-इतने लॅपटॉप है पर कोई काम का नही है.

स्वेता दीदी-माँ ,हमारी तरह सब वेबसाइट ओपन करके बैठे होंगे. जिस से ओपन होने मे टाइम लग रहा है,

सी चाची-अवी के हाथ मे लॅपटॉप दो वो कुछ करेगा.

नेहा बुआ-मीना इनसे नही हो रहा तो अवी से क्या होगा.

विद्या-एक मिनिट ,पेज ओपन हो रहा है.

विद्या की आवाज़ सुनते ही राजेश भाग कर उसके लॅपटॉप के पास आ गया.

पेज लोड हो रहा था.

सबकी नज़र विद्या के लॅपटॉप पर थी

इस बीच लीना ने अपने लॅपटॉप पे रोल्नंबर डाला और विद्या केलपटॉप से जो नेट्सेटटर कनेक्ट था उसको हिला दिया.

और पेज पे कनेक्षन एरर दिखाने लगा.

राजेश को गुस्सा आ गया.

नीता बुआ-ये क्या हुआ ,

विद्या-इंटरनेट कनेक्षन लॉस हो गया.

स्वेता दीदी-मेरा भी

कोमल-मेरा भी. ये कैसे हो गया
 
कविता -लीना ने किया ,मेरा भी नेट्सेटटर निकाल दिया.

राजेश-लीना

राजेश गुस्से मे लीना को मारने वाला था कि मैं ने रोक दिया.

लीना-मैं तो

नीता बुआ-तू कब बड़ी होगी.

लीना-मैं तो बस

अवी-इसमे नाराज़ होने की क्या बात है. देखो पेज ओपन हो रहा है.

स्वेता दीदी-लीना ने बाज़ी मार ली.

कविता-चीटिंग करके

अवी-चीटिंग नही, दिमाग़ लगा कर जीत गयी. अब चुप रहो

हम सब लॅपटॉप की तरफ देखने लगे.

मैं ने लीना के कंधे पे हाथ रख कर उसको हिम्मत दी

नीता बुआ-कितनी देर लगेगी

कोमल-हो रहा है.देखिए 1स्ट लेंग्वेज मे 95 मार्क मिले है

नेहा बुआ-रिज़ल्ट अच्छा दिख रहा है.

राजेश-सस्स्शह

और पेज लोड हो गया.

सबकी धड़कने कुछ सेकेंड के लिए रुक गयी.

सबकी आँखे रिज़ल्ट के पर्सेंट को ढूँढने मे लग गयी.

लीना-96.66%

नीता बुआ-कितने मिले है.

कोमल-96.66% मिले है.

राजेश अपने मार्क देखते ही लीना के गले लग गया

और अपनी खुशी को जाहिर करने लगा.

राजेश-लीना लीना,96% मिले है.

लीना-कोंग्रट्ज़ भैया.

राजेश ने लीना को उठा कर गोल गोल घुमा कर पास होने का जशन मनाने लगा.

राजेश-लीना मैं बहुत खुश हूँ , 96 % मिले है .

नीता बुआ उन दोनो के गले लग कर राजेश को बधाई देने लगी.

नीता बुआ-तूने मेरा नाम रोशन कर दिया.

राजेश-माँ मुझे 96%मिले है. 96%

नीता बुआ-तूने अपना प्रॉमिस पूरा किया ,90% से ज़्यादा मार्क लेने का

राजेश-हाँ, मैं ने टॉप किया अपने स्कूल से

नेहा बुआ-कोंग्रट्ज़ राजेश

राजेश ने नेहा बुआ को गले लगा लिया

राजेश-मौसी ,मैं ने टॉप किया.

सी चाची-हमे पता था कि तू टॉप करेगा. तेरे मामा को मिठाई लाने को कहा है

राजेश-मामी ,96% , मैं तो पागल हो जाउन्गा.

स्वेता दीदी-पहले मूह मीठा करो फिर पागल हो जाना

राजेश-दीदी ,96% ,

सीतल दीदी-कितनी बार बताएगा.

नीता बुआ-मैं मिठाई लाती हूँ.

म चाची-अवी के चाचा ला रहे है.

नीता बुआ-मैं ने बना कर रखी है. पहले उस से मूह मीठा करते है.

नेहा बुआ और नीता बुआ किचन मे चली गयी

लीना-भैया पापा का फोन है

राजेश-मुझे दो

राजेश-हेलो पापा ,मुझे96.66%मिले है.

राजेश-रंक तो अभी तक पता नही चला

राजेश-मैं अभी स्कूल फोन करके पूछता हूँ.

राजेश-थॅंक यू पापा

लीना-क्या कहा पापा ने

राजेश-पापा बहुत खुश है. और पूछ रहे थे कि बोर्ड मे रॅंक क्या आया है.

कोमल-स्कूल फोन करो

राजेश-अभी करता हूँ

राजेश अपने स्कूल मे फोन करने लगा.

और नीता बुआ हमारे लिए मिठाई लाई.

सब खुश थे राजेश के रिज़ल्ट से

राजेश ने स्कूल मे फोन करके पूछ लिया कि रंक क्या आया है.

स्वेता दीदी-क्या हुआ.

राजेश-स्कूल मे 1स्ट आया

नेहा बुआ-बोर्ड मे

राजेश-हमारे डिविषन मे 3र्ड और बोर्ड मे 7थ रॅंक आया है

रॅंक सुनते हम एक साथ चिल्लाते हुए खड़े हो गये

और नाचने लगे.

लीना-वाउ भैया आप तो चमक गये. कल न्यूसपेपर मे फोटो आएगा.

नीता बुआ की आँखो मे खुशी के आसू आ गये

राजेश ने नीता बुआ के पैर छु कर आशीर्वाद लिया.

नीता बुआ ने राजेश को गले लगा कर चूम ना शुरू किया.

राजेश ने सब का आशीर्वाद लिया.

राजेश का मोबाइल बज रहा था .उसको बधाई के मेसेज आ रहे थे

राजेश ने अपने पापा को फोन करके अपना रॅंक बता दिया.

चाचा भी मिठाई लेकर आ गये

चाचा-क्या हुआ ऐसे नाच क्यूँ रहे हो

राजेश-मामा मैं पास हो गया.

चाचा के लिए इतना काफ़ी था .चाचा ने राजेश का मूह मीठा किया.

और हम राजेश के पास होने की खुशी मे जशन मनाने लगे.

राजेश ने मोबाइल स्विच ऑफ किया ताकि ये खुशी का पल अपने फॅमिली के साथ बिताए

राजेश का ऐसा करने से मुझे अच्छा लगा

हम राजेश के रिज़ल्ट का पोस्टमार्टम करने लगे.

इसमे इतने मार्क मिले है. इसमे एक मार्क कम मिला. जीता सोचा था उस से ज़्यादा मिला.

फिर शाम को मैं राज राजेश और चाचा मिठाई गाँव मे बाटने लगे.

पूरा गाँव हमारी खुशी मे शामिल हुआ.

हम ने हवेली मे भी मिठाई दी.

पूरा दिन हम जशन मनाने लगे.

आज राजेश के पास होने से नीता बुआ ने सबके लिए दावत का इंतज़ाम किया.

कुछ समान शहर से लाया ,ताकि दावत रंगीन हो

सॉंग्स लगा कर हम डॅन्स करते हुए सेलेब्रेट करने लगे तो बुआ और चाची खाना बनाने लगी.

राजेश के पास होने की दावत को एंजाय करने के बाद हम अपने अपने घर चले गये.

और राजेश फोन पर बात करते हुए रात भर सोया नही.
 
833आ

राजेश का फोटो दूसरे दिन न्यूज़ पेपर मे आया.

जिस देख कर हम सब खुश हो गये

लीना ने जितने न्यूज़ पेपर मे राजेश का फोटो आया वो खरीद लिए और उनको कट करके आल्बम मे लगा दिए

सरपंच और ठाकुरजी ने राजेश के पास होने की खुशी मे गाँव मे सत्कार रखा.

नीता बुआ तो इस से इतनी खुश हुई कि उस फंक्षन का वीडियो बार बार देख रही थी.

राजेश के पापा भी राजेश के लिए खुश थे

राजेश अपने रिज़ल्ट को लेने के लिए गाँव का फंक्षन होते ही चला गया.

राजेश मुझे चलने को बोल रहा था. पर अब हॉलिडे मे जाकर क्या फ़ायदा होगा. सब स्टूडेंट को कल ही रिज़ल्ट लेके गये होगे.

पर नीता बुआ और लीना के जाने से चाची ने मुझे उनके साथ जाने को कहा.

मैं भी राजेश के साथ उसके स्कूल गया.

जैसा सोचा था वैसा ही हुआ .स्कूल मे कुछ टीचर थे. हमारे आते ही प्रिन्सिपल मेडम खुद रिज़ल्ट देने आ गयी.

प्रिन्सिपल मेडम को देखते ही समझ गया था कि राजेश ने इनको क्यूँ पटाया होगा. देखते ही मूह मे पानी आ गया.

पर बुआ और लीना की वजह से मैं चुप था.

प्रिन्सिपल मेडम ने राजेश की काफ़ी तारीफ की जिसे सुनकर नीता बुआ खुश हो गयी.

हमने रिज़ल्ट लिया .और हम जाने वाले थे कि प्रिन्सिपल मेडम ने नाश्ते के लिए अपने बंगले मे बुला लिया.

नाश्ता करते हुए प्रिन्सिपल मेडम ने कहा कि कॉलेज शुरू होते ही राजेश के टॉप करने की खुशी मे एक फंक्षन रखेंगे.

हम सब को इन्वाइट किया ,

रिज़ल्ट लेके हम वापस गाँव आ गये

पूरा हफ़्ता राजेश के नाम रहा. जिस से नीता बुआ के घर खुशी का महॉल था

राजेश का रिज़ल्ट तो लग गया. अब कविता और लीना रिज़ल्ट का इंतज़ार था.

कोमल और मेरे समय हम साइड स्कूल मे गये थे.

पर कविता और लीना ने स्कूल जाने से पहले लॅपटॉप पे रिज़ल्ट देखने का सोचा

राजेश के टाइम जैसे हम जमा हो गये थे वैसे इस बार हम नेहा बुआ के घर जमा हुए

लीना और कविता ने स्ट्रिक्ट वॉर्निंग दी कि उनसे पहले कोई रिज़ल्ट नही देखेगा.

कविता-हमारे से पहले कोई रिज़ल्ट नही देखेगा.

स्वेता दीदी-हम तो देखेंगे

लीना-कैसे देखोगी दीदी ,रोल नंबर हमारे पास है.

सी चाची-दोनो बहुत स्मार्ट है

कविता-मामी हम आप से भी ज़्यादा स्मार्ट है.

नीता बुआ-रहने दो मीना जैसी स्मार्ट तुम दोनो बन नही सकती.

पूजा बुआ-हाँ, पता नही मीना क्या खा कर बड़ी हुई .

ब चाची-मीना अगर थोड़ी और पढ़ती तो कलेक्टर बन जाती

राजेश-मामी नही बनी तो क्या हुआ मैं बन जाउन्गा

सी चाची-इसे कहते है कॉन्फिडेन्स

कविता-हम भी कुछ कम नही है

नेहा बुआ-देखते है कुछ देर मे पता चल जाएगा.

कविता-आप हमे कम मत समझिए

नीता बुआ-रिज़ल्ट अच्छा नही आया तो तुम दोनो की मस्ती बंद और लॅपटॉप भी नही मिलेगा.

लीना-लॅपटॉप भैया ने दिया है. वो आप नही ले सकती

नीता बुआ-रिज़ल्ट लगने दे सब पता चल जाएगा

नेहा बुआ-एग्ज़ॅम के नाम से डर रही थी. पता नही कैसा रिज़ल्ट होगा.

नीता बुआ-इनकी पिटाई करूगी. मैं तो एग्ज़ॅम के समय समझ गयी थी. पर अवी की वजह से कुछ नही कहा. पर रिज़ल्ट खराब निकाला तो पिटाई करूगी मैं

लीना-भैया

अवी-मुझे तुम दोनो पे पूरा विश्वास है. तुम्हारा रिज़ल्ट अच्छा आएगा.

कविता-भैया हमारे साथ है.

कोमल-पहले रिज़ल्ट के लिए रोल नंबर तो डालो

सीतल दीदी-मैं डालती हूँ

लीना-नही ,भैया डालेंगे.

कविता-भैया ये लो चिट इसमे नंबर है

ब चाची-अवी की बहनें है ,अवी उनके लिए लकी हो

लीना-भैया ,

मैं ने उनके रोल नंबर एंटर किए

दोनो लॅपटॉप मे दोनो के रिज़ल्ट ओपन हुए

कविता और लीना अपना रिज़ल्ट देखते ही उछल पड़ी. और मेरे गाल पर किस किया.

नेहा बुआ-इतना उछल क्यूँ रही हो

नीता बुआ-हमे देखने दो

नेहा बुआ और नीता बुआ ने उनके रिज़ल्ट देख लिए

उनको अपनी आँखो पर विश्वास नही, हो रहा था.

पर यही सच था ,उनको कोमल से ज़्यादा पर्सेंट मिले

रिज़ल्ट देखते ही नेहा बुआ ने लीना को और नीता बुआ ने कविता को चूम लिया

कोमल-क्या हुआ ,

पूजा बुआ-दोनो को अच्छे पर्सेंट मिले है

स्वेता दीदी-लग तो यही रहा है.

राजेश-वाउ अच्छे पर्सेंट मिले है

कोमल-मुझसे भी ज़्यादा मिले .मैं तो इनको कच्चा नींबू समझ रही थी पर ये तो छुपी रुस्तम निकली

कविता-भैया की वजह से इतने पर्सेंट मिले है.

लीना-पूरा क्रेडिट भैया को जाता है.

नीता बुआ-हमे थोड़ा सा क्रेडिट दो

कविता-नही, भैया ने कहा था कि हमारा रिज़ल्ट उनकेलिए ज़रूरी है. वरना सब उनको ज़िम्मे

कविता-नही, भैया ने कहा था कि हमारा रिज़ल्ट उनकेलिए ज़रूरी है. वरना सब उनको ज़िम्मेदार समझेंगे कि उनकी वजह से हम कम मार्क मिले है.

लीना-और भैया ने हमे लॅपटॉप दिया तो हम ने उनका मान रख लिया. उनके लिए पढ़ाई की

स्वेता दीदी-पर इतने पर्सेंट कैसे आ गये

कोमल-मुझे तो अपनी आँखो पे विश्वास नही हो रहा.

सी चाची-दोनो तो कोमल से अवल निकली

नेहा बुआ-कोमल से ज़्यादा टॅलेंटेड ये दोनो ,मैं नही मानती. सच बताओ तुम ने चीटिंग करके मार्क कमाए है

कविता-माँ ,क्या हम ऐसा कर सकते है ऐसा आपको लगता है.

सी चाची-मुझे नही लगता कि दोनो चीटिंग कर सकती है.

लीना-थॅंक यू मामी

स्वेता दीदी-मुझे ये बात हजम नही हो रही है

कविता-इतने अच्छे मार्क लाए और ऐसी बाते सुनो.

नेहा बुआ-हमारा ऐसा मतलब नही था. हम खुश है तुम दोनो के लिए

कविता-हमारे सर से बड़ा बोझ हल्का हो गया

लीना-इतने दिनो बाद आज अच्छा लग रहा है.

कोमल-मैं समझ गयी कि मुझसे ज़्यादा मार्क इनको कैसे आए

नेहा बुआ-कैसे

कोमल-कविता और लीना ने बताया नही हमे कि उन दोनो ने संस्कृत लिया है 3र्ड लॅंग्वेज की जगा.

राजेश-संस्कृत

नीता बुआ-इन दोनो का मैं क्या करूँ. पता नही क्या क्या करती रहती है

स्वेता दीदी-देखो 96 मार्क मिले है

सीतल दीदी-पर्सेंट भी सेम है

कोमल-और हर सब्जेक्ट मे प्रॅक्टिकल भी आया है.

राजेश-स्टेट बोर्ड मे आड हुआ है प्रॅक्टिकल

सीतल दीदी-मेद्स मे भी प्रॅक्टिकल है.

कोमल-तभी इनको अच्छे मार्क्स मिले है.

नेहा बुआ-इस तरह इनको कोमल से ज़्यादा मार्क मिले है.

कविता-आप मार्क देखिए ,कैसे आए ये मत देखिए

लीना-प्रॅक्टिकल मे भी मेहनत करनी पड़ती है

स्वेता दीदी-पता है. यहाँ के टीचर कैसे मार्क देते है

कविता-भैया आप कुछ तो बोलिए

अवी-रिज़ल्ट इम्पोर्टेंट होता है. रिज़ल्ट ये कहता है कविता और लीना हम सब मे स्मार्ट है.

सी चाची-अवी ने कहा तो हम भी मान लेते है.

कोमल-अवी कह रहा है तो कविता और लीना मुझ से ज़्यादा स्मार्ट है.

कविता लीना-याअ हुउऊ

नेहा बुआ-मैं मिठाई लाती हूँ

पूजा बुआ-मैं तो अपने हाथो से खिलाउन्गी

अवी-कविता लीना ,तुम्हे संस्कृत मे इतने अच्छे मार्क मिले है तो तुम ने इस सब्जेक्ट मे टॉप किया होगा.

कविता-मुझे भी ऐसा लग रहा है.

कोमल-स्कूल मे जाकर देखते है.

सीतल दीदी-पर कोमल को इन दोनो ने पीछे छोड़ दिया.

अवी-कोमल का 12थ का रिज़ल्ट जब आएगा तब देखना कोमल 95 या 96 % लेगी

कविता-हम भी लेंगे.

नेहा बुआ-बेटा इतने मिले तो भी मैं खुश हो जाउन्गि.

कविता-माँ ने कहा इस लिए वरना मैं तो 100% ले आती

कविता की बात सुनकर हम हँसने लगे

हँसते हुए हम सब ने मूह मीठा किया.

मैं कविता और लीना के साथ स्कूल चला गया
 
833 ब

मैं कविता और लीना को लेकर स्कूल की तरफ जाने लगा

अवी-तुम दोनो ने तो कमाल कर दिया

लीना-आपके लिए इतना तो करना था.

कविता-हाँ आपकी नाक हम कैसे कटने देती

अवी-मुझे तुम दोनो पे पूरा विश्वास था.

लीना-आपका विश्वास जीत गया

अवी-मेरी प्यारी बहन जीत गयी.

कविता-तो हमारा इनाम

अवी-लॅपटॉप दिया हैना

लीना-वो नही. वो वाला

अवी-बर्तडे कहाँ है.

कविता-आपका बर्तडे नही आता तो इसमे हमारी ग़लती नही है

अवी-मेले मे तुम्हे प्यार किया था ना. और कविता के बर्तडे पे भी प्यार किया

लीना-हमे कुछ नही सुनना है. हम ने हमारा काम किया है. अब आपकी बारी है.

अवी-ठीक है. कल जाएँगे

कविता-हम जैसे चाहेंगे वैसा करना होगा.

अवी-तुम ने मार्क इतने अच्छे लिए कि मैं मना कैसे कर सकता हूँ

लीना-थॅंक यू भैया

अवी-चलो रिज़ल्ट लेते है

हम स्कूल मे चले गये. प्रिन्सिपल सर रिज़ल्ट दे रहे थे.

हम सही टाइम पर स्कूल पहोच गये.

कविता और लीना का नाम लिया गया .दोनो स्कूल मे 2न्ड आई थी. सरपंच की बेटी 1स्ट आई.

पर कविता और लीना संस्कृत मे हमारे डिविषन से 1स्ट आई जिस से उनकी खुशी डबल हो गयी.

लीना-भैया हम डिविषन मे 1स्ट आई.

अवी-ये सरपंच की बेटी को इतने मार्क कैसे मिले

कविता-भैया इसको यही सेंटर था .उसके पिता ने चीटिंग करके 1स्ट लाया अपनी बेटी को

अवी-जाने दो ,स्कूल से ज़्यादा इम्पोर्टेंट डिविषन होता है.

लीना-भैया हमारा इनाम याद रखना

अवी-ज़रूर ,कल शहर चलते है

कविता-दिन भर वही रहेंगे

अवी-हाँ बाबा, हम खूब मस्ती करेंगे (बस राजेश को संभालना होगा)

हम रिज़ल्ट लेकर घर आ गये

नेहा बुआ-क्या हुआ ,1स्ट आई या 2न्ड

लीना-दोनो

नीता बुआ-वो कैसे

कविता-स्कूल मे 2न्ड आई. और डिविषन मे संस्कृत मे 1स्ट आई

कोमल-मान गये तुम दोनो को

अवी-बहनें किस की है

लीना-आपकी

स्वेता दीदी-आगे का क्या सोचा है

कविता-साइन्स लेंगे

लीना-शहर मे पढ़ेंगे

कविता-दीदी की स्कूटी है

लीना-दीदी भैया के साथ जाती है. हम दोनो स्कूटी से जाएगी

कविता-हम ने स्कूटी सीख ली है.

लीना-12थ के बाद बीए करेंगे

कविता-फिर एमबीए

स्वेता दीदी-रूको,

कोमल-कितना सोच रखा है दोनो ने

लीना-हम ने सब सोच रखा है.

सी चाची-काफ़ी तेज है दोनो

ब चाची-ये दोनो कब क्या करती है समझमे नही आता

कविता-हम ऐसे ही है

नेहा बुआ-तुम्हारा अड्मिशन कोमल करवा देगी.

लीना-एक मिनिट कहीं आप हमे कोमल दीदी के कॉलेज मे तो नही डाल रहे है

नेहा बुआ-तुम को क्या लगा.

कविता-हम उस कॉलेज मे अड्मिशन नही लेंगे

कोमल-तो कहाँ लेना है

लीना-महिला कॉलेज मे

नीता बुआ-कोमल के कॉलेज मे अड्मिशन लोगि तो कोमल और अवी रहेगा ना वहाँ पर ध्यान रखने के लिए

कविता-वही तो हम नही चाहते ,कोमल दीदी हमे कुछ करने नही देगी. हमेशा ध्यान रखेगी.

नेहा बुआ-कविता

पूजा बुआ-कविता ,नेहा ठीक कह रही है. तुम दोनो अवी के कॉलेज मे पढ़ोगी

ब चाची-अवी इनका कोमल की तरह ध्यान रखेगा.

लीना-हमे वहाँ नही पढ़ना

अवी-पर क्यूँ .मैं हूँ ना ,हम खूब मस्ती करेंगे

कविता-नही कर सकते, आप कहोगे ये करो .वो मत करो. दीदी कहेगी लाइब्रेरी चलो,क्लास मे चलो.

स्वेता दीदी-तो तुम दोनो को मस्ती करनी है.

नीता बुआ-इनका अड्मिशन कोमल के कॉलेज मे होगा.

लीना-सब अपने पसंद के कॉलेज मे पढ़ते है. और हम क्यूँ नही.

नेहा बुआ-इस पे ज़्यादा बहस नही होगी. तुम दोनो कोमल के कॉलेज मे पढ़ोगी. और इन दोनो के साथ कॉलेज जाओगी.

कविता-भैया

मैं ने कविता को आँख मारी

अवी-कविता हाँ कर दो

कविता-ठीक है ,

लीना-तुम पागल तो नही हो रही

कविता-भैया ने कहा है. समझा कर

नीता बुआ-क्या कहा

लीना-हम तय्यार है.

नीता बुआ-अवी के एक बार कहने पे दोनो मान गयी.

कविता-भैया की बात हम मना कैसे कर सकते है.

नीता बुआ-अवी इनका अड्मिशन करवा देना

अवी-जी बुआ

बी चाची- अवी से बहुत प्यार करने लगी है.

कविता-भैया हमे कल शॉपिंग करवाने वाले है.

स्वेता दीदी-तो ये चक्कर है

सीतल दीदी-और हमे

अवी-इतना अच्छा रिज़ल्ट आया है तो शॉपिंग तो करवाना पड़ेगा. और आपको आपकी शादी के समय

नेहा बुआ-ऐसे तो ये बिगड़ जाएगी.

नीता बुआ-नेहा ,रिज़ल्ट देख

पूजा बुआ-अवी अच्छी शॉपिंग करवाना

अवी-जी बुआ

नीता बुआ-अवी इनकी अड्मिशन भी करवा देना

लीना-फॉर्म निकलने मे टाइम है. फॉर्म निकलते ही हम अड्मिशन कर लेंगे

अवी-बुआ आप बेफिकर रहिए

कविता-माँ मेरा मोबाइल देना ,पापा को फोन करना है

नेहा बुआ-मैं तो भूल गयी. तेरे स्कूल जाते ही फोन आया था तेरे पापा का .कर जल्दी

लीना-माँ मेरा मोबाइल कहाँ है. भैया आप भी चलिए

कविता और लीना अपने अपने मोबाइल लेकर मुझे अपने कमरे मे ले गयी.

और गेट बंद करके मेरी तरफ देखने लगी.

अवी-ये क्या चक्कर है दूसरे कॉलेज का

कविता-भैया हम कॉलेज लाइफ को खुल के जीना चाहते है

अवी-तो क्या मेरे साथ नही जी सकती.

कविता-आपके साथ तो बहुत मज़ा आएगा पर कोमल दीदी के रहते पासिबल नही है.

अवी-बात तो ठीक कह रही हो. मैं भी फ्रीली कॉलेज लाइफ को एंजाय नही कर पाता कोमल के वजह से

लीना-इसी लिए हम दूसरे कॉलेज मे पढ़ना चाहते है. एक आज़ाद पंछी की तरह

अवी-पंछी के पीछे ईगल लग गये तो

कविता-हमारा सिर्फ़ एक बाय्फ्रेंड है .वो है आप

अवी-फिर भी आज कल लड़को का भरोसा नही है

लीना-भैया आपने ठीक से सुना नही. हम महिला कॉलेज की बात कर रहे. जो सिर्फ़ लॅडीस के लिए है.

अवी-सॉरी ,मेरा ध्यान नही था.

कविता-तो आप हमारा अड्मिशन करवा देंगे

अवी-करवा तो दूँगा पर मुझे प्रॉमिस करो तुम मुझे बुआ के सामने शर्मिंदा नही करोगी.

लीना-आप हम पे ट्रस्ट कर सकते है. हम पूरा ध्यान रखेंगे कि आपका सर ना झुके

अवी-तो समझो तुम्हारा अड्मिशन हो गया

कविता-पर माँ

अवी-उनको हम बताएँगे कि तुम्हारा अड्मिशन मेरे कॉलेज मे हुआ है

लीना-और कोमल दीदी उनका क्या

अवी-उसको मैं संभाल लूँगा.

कविता-अगर बाद मे पता चला तो

अवी-तो कौन क्या करेगा ,अड्मिशन तो हो गया

लीना-आप पे मौसी गुस्सा करेगी

अवी-तुम टेन्षन मत तो मैं नेहा बुआ को संभाल लूँगा.

कविता-थॅंक यू भैया

अवी-मेरी बहनों को आज़ाद पंछी बन कर उड़ते हुए देखना है मुझे ,काबी गिरना मत

लीना-नही. गिरेन्गे. आप की मदद से हम उची उड़ान भरेंगे.

अवी-वैसे महिला कॉलेज से हमारा कॉलेज अच्छा है.

कविता-पता है पर कोमल दीदी की वजह से आप से दूर रहना पड़ रहा है.

अवी-कोई बात नही हम इसी शहर मे रहेंगे ना

लीना-वैसे भैया हमारा महिला कॉलेज मे जाने से आपका बहुत फायाअ होगा.

अवी-वो कैसे

कविता-हम अच्छी अच्छी फ्रेंड बनाएँगे आपके लिए

अवी-ऐसा मत करना अब अपनी पढ़ाई पे ध्यान देना

लीना-भैया आप हमे गिफ्ट देते है तो हम क्यूँ ना दे

अवी-गड़बड़ हो गयी तो प्राब्लम होगी

कविता-हम पूरा ध्यान रखेंगे

अवी-जैसा तुम्हे ठीक लगे वैसा करना

लीना-आप के लिए तो हम कुछ भी कर सकते है

कविता-आप जैसे भैया किस्मत वालो को मिलते है.

अवी-तुम दोनो जैसी बहन मुझे मिली है .शायद मैं ने पिछले जनम मे कोई पुण्य किया होगा.

लीना-इस जनम मे तो आपने हमे इतना प्यार दिया क्या हम अगले जनम मे आपकी बहनें बन ना पसंद करेंगे

कविता-मैं भी.

अवी-इसी बात पे मूह मीठा हो जाए

और मैं ने दोनो को एक एक बार किस किया

उसके बाद कविता और लीना फोन पर बात करने लगी अपने पापा से और मैं हॉल मे आ गया.

चाचा फिर से एक बार अपने साथ मिठाई लेकर आ गये गाँव मे बाटने के लिए
 
834

चाचा मिठाई लेकर आ गये गाँव मे बाटने के लिए.

पूजा बुआ-ले आया मिठाई.

चाचा-हां, पास हो गयी दोनो,

कविता-मामा हम अच्छे मार्क्स से पास हो गये.

चाचा -ये तो अच्छी बात है.

नेहा बुआ-तुम मिठाई गाँव मे बाँट देना

चाचा-वो तो गाँव वालो को खिला दूँगा.

पूजा बुआ-फिर बैठे क्यू हो.

चाचा-मैं सोच रहा था कि

नीता बुआ-क्या सोच रहे थे.

चाचा-इतना कुछ अच्छा हो रहा है. इतनी खुशी मिल रही है.मेला अच्छे से हो गया , कोमल राजेश अवी कविता लीना पास हो गयी , क्यू ना हम पिताजी से मिलने जाए

चाचा की बात सुनते सब उनकी तरफ देखते रह गये.

पूजा बुआ-तुम

और बुआ चाचा को आँखो से इशारे करने लगी.

पता नही बुआ ऐसा क्यूँ कर रही थी.

बुआ के आँख दिखाते ही चाचा चुप हो गये

पर बड़ी चाची ने चाचा का साथ दिया.

ब चाची-अवी के चाचा सही कह रहे है. हमे पिताजी से मिलने जाना चाहिए

पूजा बुआ-सुमन ये तुम क्या कह रही हो

ब चाची-अब हालत बदल गये है.

नेहा बुआ-क्या बदल गया है.

बड़ी चाची का साथ छोटी चाची ने दिया.

सी चाची-सुमन दीदी से मैं सहमत हूँ

नीता बुआ-मीना ये तू क्या रही हो

हम सब बुआ और चाची की बात चुप चाप सुन रहे थे.

सी चाची-अब बच्चे बड़े हो गये है. हैना बच्चो

सब ने एक साथ हाँ कहा

पूजा बुआ-मीना तुम सोच समझ कर बोल रही हो ना

सी चाची-हाँ दीदी,मैं इनकी बात से सहमत हूँ

पूजा बुआ-पर

ब चाची-आप खुद सोच कर देखिए बच्चो को उनके दादाजी को देखने का मन नही हो रहा

स्वेता दीदी-माँ हम चलते हैना.कितने दिन हो गये दादाजी को देखे हुए.हम हमेशा की तरह दूर से देखेंगे

सी चाची-दीदी पिताजी को उनके नये पोते पोतियो को दिखाना होगा ना.

चाचा-पिताजी का आशीर्वाद उनके पोते को मिलना चाहिए. माँ की यही इच्छा थी,

सी चाची-और अवी ने जो उनका नाम रोशन किया उसके बारे मे भी तो बताना है. उनका वारिस उनकी परंपरा आगे बढ़ा रहा है. ये उनको बताना है. मेले मे जो अवी के नाम हर तरफ लिया जा रहा था वो पिताजी को बताना होगा ना.

नीता बुआ-बात तो सही है.

पूजा बुआ-मीना एक बार सोच ले

ब चाची-एक ना एक दिन तो

सी चाची-दीदी सही कह रही है. स्वेता सीतल की अगले साल शादी है तो ,पिताजी का आशीर्वाद उनको चाहिए कि नही.

नीता बुआ-राजेश कविता और लीना के पास होने की बात ,उनका नाम रोशन करने के किससे पिताजी को बताना होगा.

चाचा-सब को पिताजी से मिलना है.

पूजा बुआ-सुमन मीना

सी चाची-मैं कह रही हूँ ,आप हाँ कर दो

पूजा बुआ-ठीक है ,हम सब पिताजी से मिलने जाएँगे.

पूजा बुआ की बात सुनते हम सब खुश हो गये

हमे दादजी को देखने को मिल रहा था.

सी चाची-अवी ऐसे क्या देख रहे हो तुम भी चलने वाले हो, पर अपने दादाजी को देख कर रोओगे तो हम तुम्हे नही लेकर जाएँगे

कविता-भैया रोते है

स्वेता दीदी-अवी दादाजी को देख कर रोने लग जाता है. इसलिए उसको हम लेकर नही जाते थे.

अवी-चाची मैं अब बड़ा हो गया हूँ

सी चाची-तभी तो तुम्हे लेकर जा रही हूँ

चाचा-मैं हमारे जाने का इंतज़ाम करता हूँ

कविता-पर हमारी अड्मिशन

पूजा बुआ-हम अगले हफ्ते जा रहे है तब तक तुम अपनी अड्मिशन करवा लेना

अवी-मैं करवा दूँगा.

चाचा-सब के लिए तो बस बुक करनी होगी.

अवी-चाचजी आप कहे तो मैं और राजेश इंतज़ाम करवाते है जाने का

चाचा-कर पाओगे

ब चाची-अवी बड़ा हो रहा है.उसको करने दीजिए

चाचा-ठीक है कर लो

अवी-कितने दिन के लिए जा रहे है.

पूजा बुआ-सुबह जाएँगे रात तक वापस आ जाएँगे

स्वेता दीदी-इसमे क्या मज़ा आएगा.

नेहा बुआ-हम पिताजी से मिलने जा रहे है.

कोमल-हम दादाजी से मिल लेते है. और साथ मे पिक्निक पर जाते है. पूरी फॅमिली एक साथ कही नही गयी.

नीता बुआ-कोमल की बात से मैं सहमत हूँ

नेहा बुआ-कोमल ने कहा ना तो हम एक दो दिन का प्रोग्राम बनाते है.

पूजा बुआ-जैसा तुम ठीक समझो

चाचा-मैं भी यही सोच रहा था.

अवी-तो मैं 3 दिन का प्रोग्राम बनाता हूँ. पहले दिन दादाजी से मिलेंगे. दूसरे दिन किसी हिल स्टेशन जाएँगे. और तीसरे दिन हम वापस आ जाएँगे.

सी चाची-ये अच्छा रहेगा.पिताजी से भी मिल लेंगे और फॅमिली पिक्निक भी हो जाएगी.

चाचा-तुम दोनो कर लोगो ना

राजेश-मामा जी आप आराम कीजिए ,सब हम पर छोड़ दीजिए

चाचा-ठीक है.

पूजा बुआ-तो अगले वीकॅंड पर पिताजी से मिलने जाएँगे

कविता -चलो हम सब प्लॅनिंग बनाते है

पूजा बुआ-तो अगले वीकॅंड पर पिताजी से मिलने जाएँगे

कविता -चलो हम सब प्लॅनिंग बनाते है

स्वेता दीदी-एक हफ़्ता बाकी है

लीना-हमे सब पर्फेक्ट चाहिए

कोमल-हाँ. फॅमिली पिक्निक पे बहुत एंजाय करेंगे.

फिर चाचा राज के साथ गाँव वालो को मिठाई खिलाने लगे

चाची और बुआ कमरे मे जाकर ज़रूरी बाते करनी लगी.

मेरी बहनें और मैं प्लॅनिंग बनाने लगे.

कविता और लीना ने एक झटके मे प्लान बना दिया.

लॅपटॉप की मदद से सर्च करके पूरा प्लान बना दिया

प्लान बनते ही हम काम पर लग गये

मुझे भी दादाजी से मिले हुए काफ़ी समय हो गया था.

याद भी नही कि लास्ट टाइम कब गया था दादाजी से मिलने.

दादाजी को मिलने का मेरा भी मन हो रहा था.

उनकी हालत मे कुछ सुधार आया कि नही ये देखना था.

क्या वो आज भी बेड पर पड़े हुए है.

मुझसे दादाजी से बहुत कम बार मिलाया है.

पिछले 4 साल मे मैं सिर्फ़ 2 बार दादाजी को मिला हूँ.

वो भी मुझे कमरे के बाहर से दादाजी को दिखाया था.

दादाजी के पास जाने नही दिया था.

तब मैं छोटा था पर अब मैं समझदार हो गया हूँ

मैं इस बार दादाजी के पास ज़रूर जाउन्गा.उनका आशीर्वाद ले कर रहूँगा.

मैं ने प्लान बनते ही राजेश को अकेले मे बुला लिया

राजेश-क्या है भैया

अवी-तुम कल क्या कर रहे हो

राजेश-कुछ नही.

अवी-तो एक काम करो दादाजी को जिस आश्रम मे रखा है वहाँ जाकर उसके पास जो अच्छा होटेल होगा वो बुक कर लो

राजेश-मैं अकेले जाउ.

अवी-मुझे कल कविता और लीना को शॉपिंग पर लेकर जाना है

राजेश-पर वो तो बहुत दूर है

अवी-तो क्या हुआ ,सुबह चले जाना शाम तक वापस आ जाना

राजेश-ठीक है कर दूँगा.पर पैसे

अवी-ये चाचा का एटीएम लो ,होटेल मे 9 कमरे बुक करना.

राजेश-हो जाएगा पर हम परसो भी तो जा सकते है. आपके फ्री होते ही

अवी-एक होटेल मे 9 कमरे बुक करना है. इसलिए जल्द जल्द बुक करना होगा

राजेश-मैं चला जाउन्गा. पर हमे बस भी तो बुक करनी होगी

अवी-वो परसो करेंगे

राजेश-मैं माँ को बता देता हूँ

राजेश को कल बिज़ी रखना ज़रूरी था .वरना मैं कविता और लीना को उनका गिफ्ट कैसे देता.

नेक्स्ट डे राजेश सुबह मेरा बताया हुआ काम करने चला गया

और मैं कविता और लीना को प्यार करने घर2 ले गया

कविता और लीना ने हमेशा की तरह इस बार कुछ अलग किया.

कविता और लीना ने लॅपटॉप का पूरा फ़ायदा लेते हुए नये नये तरीके सीख लिए

मुझे आज कविता और लीना ने सर्प्राइज़्ड कर दिया.

हम सुबह से लेके शाम तक प्यार करते रहे.

फिर उनको कुछ शॉपिंग करवाई.

वो शॉप गर्ल मुझे देखते खुश हो गई.

पर कविता और लीना ने मुझे पूरा निचोड़ दिया था जिस से मैं ने शॉप गर्ल को नेक्स्ट टाइम का वादा किया.

कविता और लीना ने ज़्यादा शॉपिंग नही की क्यूँ कि उनको आराम करना था.

पर बुआ को दिखाने के लिए थोड़ी शॉपिंग कर ली.

कविता और लीना को मैं ने इतना प्यार किया कि दोनो खुश हो गयी.
 
Back
Top