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फ्लॅशबॅक 832म
जयसिंघ अपने सारे फ़र्ज़ पूरा करने लगा
जो पिताजी और माँ चाहती थी वही जयसिंघ ने किया
पूजा की शादी की जो तय्यारी की उस से माँ और पिताजी खुश थे
जयसिंघ ने सारे मेहमानों को सिल्वर काय्न देने का फ़ैसला किया ताकि पूजा की शादी को सब याद रखे
रमेश के साथ जयसिंघ की बाते हमेशा लंबी चलती थी
बात शादी से स्टार्ट होके शेयर मार्केट पे जाके रुक जाती
पूजा को तो सब कुछ मिल गया था
अपने भैया की वजह से वो रमेश से अकेले ने प्यार कर रही थी
रमेश और पूजा एक दूसरे को समझने लगे थे
उनको तो लग रहा था कि कब उनकी शादी होगी
रमेश को शादी की ज़्यादा तय्यारी नही करनी थी जिस से वो शहर मे रह कर पूजा से मिलने को इम्पोर्टेंट देने लगा
रमेश के दोस्त सुरेश और जातीं सारी तय्यारी कर रहे थे
पिताजी को ज़्यादा मेहनत नही करनी पड़ रही थी
बड़े बेटे ने सारी ज़िम्मेदारी अपने कंधो पे ली
अपने सपने जला कर वो सबको खुश कर रहा था
दूसरो को तो जयसिंघ ने खुश कर दिया पर खुद अंदर ही अंदर रो रहा था
उसका रोना किसी को नही दिख रहा था
पूजा नेहा नीता की खुशी के सामने जयसिंघ ने अपने चेहरे पे झूठी स्माइल लेकर आ गया
माजी- सुनिए
पिताजी - क्या है
माजी- जय को देखिए कैसे अपनी बहन की शादी करवा रहा है
पिताजी -मैं ने कभी सोचा नही था कि जयसिंघ का ये चेहरा देखने को मिलेगा
माजी- मैं ने भी , उस दिन जो हुआ उसके बाद तो अजीब अजीब ख़याल आ रहे थे
पिताजी -मुझे भी खुद पे गुस्सा आ रहा था , ग़लती मेरी थी , मुझे जयसिंघ से बात करके पूजा जी सगाई करवानी चाहिए थी , वो बड़ा बेटा है इस घर का , पहली बार मुझसे जल्दबाज़ी हो गयी ,पर पूजा का तो तुम्हे पता है , उसके खुशी के लिए मैं ने हाँ कर दी , और जयसिंघ को थेप्पड़ मार कर बाहित बड़ी ग़लती कर दी पर जयसिंघ ने सब भुला कर अच्छा किया
माजी- जय सब कुछ भूल गया ,, ये अच्छी बात है
पिताजी -मैं खुश हूँ जयसिंघ के लिए
माजी- आप उसे माफ़ कर देना
पिताजी -वो तो उसी दिन कर दिया था जब उस ने रमेश से मिलने की बात कही थी
माजी- आप ने जय से बात की उसके बारे मे
पिताजी -नही , उस दिन जो हुआ उसे याद करने का दिल नही करता , वो दिन मैं भूल जाना चाहता हूँ जब मुझे जयसिंघ को थप्पड़ मारना पड़ा
माजी- भूल जाना ही ठीक होगा , वैसे जय को खुश देख कर पूजा भी खुश है
पिताजी -मुझे तो डर था कि अगर जयसिंघ शादी मे नही आता तो पूजा शादी ही नही करती
माजी- हाँ , पूजा कितनी रोई उस दिन पर नेहा नीता ने संभाल लिया उसको
पिताजी -नेहा नीता छोटी होकर सब कुछ संभाल लिया था
माजी- वो बड़ी हो रही है
पिताजी -मेरी प्यारी बेटियाँ
माजी- वैसे मेरे बेटे ने देखिए अपनी बहन के लिए क्या बनाया है
पिताजी -क्या
माजी- ये सिल्वर काय्न जिस पे रमेश और पूजा का नाम है , कितना सुंदर है
पिताजी -काय्न आ गये
माजी- हाँ , जय खुद गया था , बहुत सुंदर है
पिताजी -अगेर काय्न कम पड़ गये तो
माजी- जय ने ज़्यादा बना लिए है जितनी नेहा ने लिस्ट बनाई उस से ज़्यादा काय्न लाया है , जय कुछ कमी नही होने देगा पूजा की शादी मे
पिताजी -वो दिख ही रहा है मुझे तो कुछ करने नही दे रहा है
माजी- छोटू भी अपने भाई की कितनी मदद कर रहा है
पिताजी - बेटे किसके है
माजी- मेरे
पिताजी -मेरे बेटे है वो
माजी- आपकी बेटियाँ है
पिताजी -तुम्हे प्यार करने का दिल कर रहा है , जो मुझे इतने प्यारे बच्चे दिए है
माजी- एक बात कहूँ
पिताजी -हाँ बोलो
माजी- जय को उसके मर्ज़ी से जीने देंगे ना आप
पिताजी -क्या मतलब
माजी- अगेर वो फिर से शहर3 जाना चाहता है तो आप इजाज़त देंगे
पिताजी -उसकी खुशियाँ शहर 3 मे है , मुझे अच्छा लगेगा उसकी बाते न्यूसपेपर मे पढ़ कर
माजी- मैं यही सुनना चाहती थी
पिताजी -तुम्हे कहना क्या है वो बोल दो
माजी- जय ने अपने सपनो को जला दिया
पिताजी -क्या ?
माजी- वो आपको खुश रखने के लिए ऐसा कर रहा है
पिताजी -तुमने मुझे पहले क्यूँ नही बताया
माजी- मैं सही समय का इंतज़ार कर रही थी
पिताजी -जयसिंघ से बात करता हूँ मैं
माजी- नही , फिर से उसको याद दिलाना ठीक नही होगा
पिताजी -तो मैं क्या करूँ
माजी- अगर वो शहर3 जाना चाहे तो आप रोकना मत उसको , उसके सपने तो जल गये पर जो बच गया है उसको पूरा करने दीजिए , उसको जीने दीजिए उसके मर्ज़ी से ,
माजी- अगर वो शहर3 जाना चाहे तो आप रोकना मत उसको , उसके सपने तो जल गये पर जो बच गया है उसको पूरा करने दीजिए , उसको जीने दीजिए उसकी मर्ज़ी से ,
पिताजी -जैसा तुम कहोगी वैसा ही होगा
फिर से पिताजी शादी की तय्यारियो मे लग गये
जैसे जैसे दिन पास आ रहे थे वैसे वैसे सबकी धड़कने बढ़ रही थी
पूजा को अब अपने फॅमिली से दूर जाने के गम ने परेशान किया था
पूजा जब भी सबको देखती तो उसको वो हसीन पल याद थे जो साथ बिताए थे
नेहा नीता का मस्ती करना
वो सीओ रही होती तो नेहा का उसकी नींद खराब करना
मिलके प्लान बनाना और पिताजी से ज़्यादा पैसे लेना फिर आपस मे बात लेना
छोटू को मिलके परेशान करना
छोटू के रोते उसको मानना
माँ की डाट को प्यार समझ कर सुनना
भैया का हाथ पकड़ कर चलना सीखना
भैया का उनको पढ़ाना
पिताजी का बेटा जैसा प्यार करना
सब कुछ पूजा को याद आ रहा था
कल तक उसने ऐसा सोचा नही था
पर आज अचानक उसे सब याद आ रहा था , फॅमिली से दूर जाने के बारे मे सोचते पूजा की आँखो मे आसू आ गये
एक तरफ उसके दिल का राजकुमार और दूसरी तरफ वो फॅमिली जिसने प्यार करना सिखाया
पूजा अपने कमरे में रो रही थी
नेहा ने ये देख लिया और चुपके से पिताजी और माँ को बुला लिया
माँ ने पूजा को रोता हुआ देखा तो वो पूजा के पास आ गयी
माजी- पूजा क्या हुआ
पूजा - माँ मुझे नही करनी शादी
पूजा की उस बात से सब शॉक्ड हो गये
पिताजी - रमेश ने कुछ कहा तुझे
जयसिंघ - पूजा जीजा जी ने तेरा दिल दुखाया
नेहा - दीदी बात क्या है
पूजा - मैं आप सब को छोड़ कर कही नही जाउन्गि
माजी- तूने तो डरा ही दिया था
पिताजी- तुझे नही करनी है तो मत कर शादी ,
नेहा - पिताजी मैं कर लूँगी रमेश जीजाजी से शादी
पूजा - क्या कहा तूने , ऐसी पिटाई करूँगी कि दुबारा ऐसा कहेगी ही नही
नेहा - आप नही कर रही तो मैं कर लेती हूँ
पूजा- पिताजी
पिताजी - पूजा एक दिन सबको जाना होगा अपने नये घर अपने राजकुजमर के साथ , नेहा और नीता भी जाएँगी
पूजा - मुझे कहीं नही जाना है
माजी- ऐसा नही बोलते ,
पूजा - हम उनको यहाँ लाते हैना
पिताजी -ऐसा नही होता है
पूजा - आपने कहा था कि मैं शादी के बाद यही रहूंगी
माजी- पूजा ऐसा नही होता है , देखो मैं भी तो अपना घर छोड़ कर यहाँ आई थी
पूजा - मैं आप सब के बिना कैसे रहूंगी
माजी- तू एक बार रमेश के घर तो जा फिर देखना तुम खुद यहाँ नही आएगी , मैं तो शादी के बाद मायके गयी ही नही ,
पिताजी -रमेश तुम्हे हमारी कमी होने ही नही देगा ,
पूजा -मुझे आपकी याद आई तो
पिताजी- तो बस मे बैठ जाना मैं यहाँ तेरा इंतज़ार करूँगा
माजी- ये आप क्या बोल रहे है
पूजा- मैं नेहा को अपने साथ लेकर जाउन्गा
पिताजी- ये ठीक रहेगा कुछ दिन नेहा तेरे साथ रहेगी तो तुझे अच्छा लगेगा
नीता- मैं भी चलूंगी
माजी- नीता , सबको नही ले जाने दे सकते वहाँ पर
नीता- नेहा जाएँगी तो मैं भी जाउन्गि
पिताजी- ठीक है चली जाना , और अपनी दीदी का यहाँ की याद आने मत देना
नेहा ,- जी पिताजी
माजी- पर
पिताजी -मैं रमेश से बात करूँगा
पूजा - पिताजी
और पूजा पिताजी के गले लग गयी कुछ देर ऐसा ही फॅमिली ड्रामा चला
और देखते देखते वो दिन भी आ गया जब पूजा दुल्हन के रूप मे तय्यार हो गयी
नेहा नीता ने अपनी दीदी को राजकुमारी जैसा सजाया था
पिताजी पूजा को देखते अपने आसू रोक नही पाए ,
उनकी शेरनी बेटी इतनी बड़ी हो गयी कि अपना घर बसा रही है
रमेश भी गोदी पे बैठ कर पूजा को लेने जाने को आया था
जयसिंघ ने घर को ही नही पूरे गाँव को सजाया था
पूरा गाँव , गाँव की बेटी को आशीर्वाद देने आया था
ठाकुरजी के आते ही नीता ने उनको पहले थोड़ा परेशान किया
नेहा नीता अपने जीजाजी को देख कर पूजा की खिचाई करने लगी
बारात छोटी थी पर पूजा को अपने साथ ले जाने के लिए काफ़ी थी
समधी जी तो थे ही नही , रमेश के पापा की डेत हो चुकी थी
रमेश की एक माँ और एक बहन थी ,
माँ ने समधन का स्वागत किया
पिताजी समधन की ओर देखते ही रह गये
बेटी की शादी थी वरना पिताजी समधन को पकड़ कर कमरे मे ले जाते
पूजा के ससुराल वालो को शादी की तय्यारी पसंद आई
ज्योति ने अपना नाक टेढ़ा किया
पर सिल्वर काय्न देख कर उसका लालच बाहर गया
उसने एक नही 10 काय्न माँग लिए
ज्योति को बस पैसो से मतलब था , रमेश को ये अच्छा नही लगा पर वो शादी मे ड्रामा नही करना चाहता था
ज्योति 10 सिल्वर काय्न के साथ खुश थी
रमेश ने कहा कि ये सब करने की क्या ज़रूरत थी पर जयसिंघ अपनी बहन की शादी को स्पेशल बनाना चाहता था
पिताजी की लाडली बेटी दुल्हन बन गयी तू
अपने राजकुमार के साथ 7 जनम साथ रहने की कसमे खाने लगी
जैसे जैसे फेरा कंप्लीट हो रहा था वैसे वैसे सब की आँखो मे पानी आ रहा था
सब अलग अलग तरह से अपने आसू छुपा रहे थे
ठाकुरजी ने पिताजी को हिम्मत देते हुए कंट्रोल रखने को कहा
शादी हो गयी
पूजा रमेश की हो गयी
पूजा अब अपने नये घर जाएगी
पूजा अपना नया घर बसाएगी
पर उसे घर को छोड़ने का ख़याल आते पूजा के आसू बहाने लगे
नेहा नीता पूजा दीदी को संभाल रही थी
पिताजी भी पूजा के जाने से रो रहे थे
पूजा ने सबको एमोशनल कर दिया
जयसिंघ ने पूजा को खुश रहने का आशीर्वाद दिया पूजा अपने भाई के गले लग कर सब से ज़्यादा रोई
पिताजी ने रमेश को पूजा का कायल रखने को कहा
.रमेश समझ गया कि पूजा कितनी लाडली है
रमेश ने पिताजी को भरोसा दिलाया कि वो पूजा के आँखो मे आँसू नही आने देंगे
पिताजी के कहने पे नेहा नीता भी पूजा के साथ चली गयी
रमेश भी यही चाहता था कि पूजा को नये घर मे जुड़ने मे टाइम लगेगा तब तक उसको कोई तो चाहिए
पिताजी अपनी बेटी को जाते हुए देख रहे थे
उनको लग रहा था कि नेहा नीता भी शादी करके जा रही है
घर की हस्ती खेलती गुड़िया अपने नये घर जा रही थी
माँ ने अपनी बेटी को जो सिखाया है वो पूजा को मदद करेगा नया घर बसाने मे
छोटू फिर से अकेला हो गया
पहले जयसिंघ चला गया , अब पूजा दीदी चली गयी , फिर से वो अपने कमरे मे अकेला रह गया
जयसिंघ अपने सारे फ़र्ज़ पूरा करने लगा
जो पिताजी और माँ चाहती थी वही जयसिंघ ने किया
पूजा की शादी की जो तय्यारी की उस से माँ और पिताजी खुश थे
जयसिंघ ने सारे मेहमानों को सिल्वर काय्न देने का फ़ैसला किया ताकि पूजा की शादी को सब याद रखे
रमेश के साथ जयसिंघ की बाते हमेशा लंबी चलती थी
बात शादी से स्टार्ट होके शेयर मार्केट पे जाके रुक जाती
पूजा को तो सब कुछ मिल गया था
अपने भैया की वजह से वो रमेश से अकेले ने प्यार कर रही थी
रमेश और पूजा एक दूसरे को समझने लगे थे
उनको तो लग रहा था कि कब उनकी शादी होगी
रमेश को शादी की ज़्यादा तय्यारी नही करनी थी जिस से वो शहर मे रह कर पूजा से मिलने को इम्पोर्टेंट देने लगा
रमेश के दोस्त सुरेश और जातीं सारी तय्यारी कर रहे थे
पिताजी को ज़्यादा मेहनत नही करनी पड़ रही थी
बड़े बेटे ने सारी ज़िम्मेदारी अपने कंधो पे ली
अपने सपने जला कर वो सबको खुश कर रहा था
दूसरो को तो जयसिंघ ने खुश कर दिया पर खुद अंदर ही अंदर रो रहा था
उसका रोना किसी को नही दिख रहा था
पूजा नेहा नीता की खुशी के सामने जयसिंघ ने अपने चेहरे पे झूठी स्माइल लेकर आ गया
माजी- सुनिए
पिताजी - क्या है
माजी- जय को देखिए कैसे अपनी बहन की शादी करवा रहा है
पिताजी -मैं ने कभी सोचा नही था कि जयसिंघ का ये चेहरा देखने को मिलेगा
माजी- मैं ने भी , उस दिन जो हुआ उसके बाद तो अजीब अजीब ख़याल आ रहे थे
पिताजी -मुझे भी खुद पे गुस्सा आ रहा था , ग़लती मेरी थी , मुझे जयसिंघ से बात करके पूजा जी सगाई करवानी चाहिए थी , वो बड़ा बेटा है इस घर का , पहली बार मुझसे जल्दबाज़ी हो गयी ,पर पूजा का तो तुम्हे पता है , उसके खुशी के लिए मैं ने हाँ कर दी , और जयसिंघ को थेप्पड़ मार कर बाहित बड़ी ग़लती कर दी पर जयसिंघ ने सब भुला कर अच्छा किया
माजी- जय सब कुछ भूल गया ,, ये अच्छी बात है
पिताजी -मैं खुश हूँ जयसिंघ के लिए
माजी- आप उसे माफ़ कर देना
पिताजी -वो तो उसी दिन कर दिया था जब उस ने रमेश से मिलने की बात कही थी
माजी- आप ने जय से बात की उसके बारे मे
पिताजी -नही , उस दिन जो हुआ उसे याद करने का दिल नही करता , वो दिन मैं भूल जाना चाहता हूँ जब मुझे जयसिंघ को थप्पड़ मारना पड़ा
माजी- भूल जाना ही ठीक होगा , वैसे जय को खुश देख कर पूजा भी खुश है
पिताजी -मुझे तो डर था कि अगर जयसिंघ शादी मे नही आता तो पूजा शादी ही नही करती
माजी- हाँ , पूजा कितनी रोई उस दिन पर नेहा नीता ने संभाल लिया उसको
पिताजी -नेहा नीता छोटी होकर सब कुछ संभाल लिया था
माजी- वो बड़ी हो रही है
पिताजी -मेरी प्यारी बेटियाँ
माजी- वैसे मेरे बेटे ने देखिए अपनी बहन के लिए क्या बनाया है
पिताजी -क्या
माजी- ये सिल्वर काय्न जिस पे रमेश और पूजा का नाम है , कितना सुंदर है
पिताजी -काय्न आ गये
माजी- हाँ , जय खुद गया था , बहुत सुंदर है
पिताजी -अगेर काय्न कम पड़ गये तो
माजी- जय ने ज़्यादा बना लिए है जितनी नेहा ने लिस्ट बनाई उस से ज़्यादा काय्न लाया है , जय कुछ कमी नही होने देगा पूजा की शादी मे
पिताजी -वो दिख ही रहा है मुझे तो कुछ करने नही दे रहा है
माजी- छोटू भी अपने भाई की कितनी मदद कर रहा है
पिताजी - बेटे किसके है
माजी- मेरे
पिताजी -मेरे बेटे है वो
माजी- आपकी बेटियाँ है
पिताजी -तुम्हे प्यार करने का दिल कर रहा है , जो मुझे इतने प्यारे बच्चे दिए है
माजी- एक बात कहूँ
पिताजी -हाँ बोलो
माजी- जय को उसके मर्ज़ी से जीने देंगे ना आप
पिताजी -क्या मतलब
माजी- अगेर वो फिर से शहर3 जाना चाहता है तो आप इजाज़त देंगे
पिताजी -उसकी खुशियाँ शहर 3 मे है , मुझे अच्छा लगेगा उसकी बाते न्यूसपेपर मे पढ़ कर
माजी- मैं यही सुनना चाहती थी
पिताजी -तुम्हे कहना क्या है वो बोल दो
माजी- जय ने अपने सपनो को जला दिया
पिताजी -क्या ?
माजी- वो आपको खुश रखने के लिए ऐसा कर रहा है
पिताजी -तुमने मुझे पहले क्यूँ नही बताया
माजी- मैं सही समय का इंतज़ार कर रही थी
पिताजी -जयसिंघ से बात करता हूँ मैं
माजी- नही , फिर से उसको याद दिलाना ठीक नही होगा
पिताजी -तो मैं क्या करूँ
माजी- अगर वो शहर3 जाना चाहे तो आप रोकना मत उसको , उसके सपने तो जल गये पर जो बच गया है उसको पूरा करने दीजिए , उसको जीने दीजिए उसके मर्ज़ी से ,
माजी- अगर वो शहर3 जाना चाहे तो आप रोकना मत उसको , उसके सपने तो जल गये पर जो बच गया है उसको पूरा करने दीजिए , उसको जीने दीजिए उसकी मर्ज़ी से ,
पिताजी -जैसा तुम कहोगी वैसा ही होगा
फिर से पिताजी शादी की तय्यारियो मे लग गये
जैसे जैसे दिन पास आ रहे थे वैसे वैसे सबकी धड़कने बढ़ रही थी
पूजा को अब अपने फॅमिली से दूर जाने के गम ने परेशान किया था
पूजा जब भी सबको देखती तो उसको वो हसीन पल याद थे जो साथ बिताए थे
नेहा नीता का मस्ती करना
वो सीओ रही होती तो नेहा का उसकी नींद खराब करना
मिलके प्लान बनाना और पिताजी से ज़्यादा पैसे लेना फिर आपस मे बात लेना
छोटू को मिलके परेशान करना
छोटू के रोते उसको मानना
माँ की डाट को प्यार समझ कर सुनना
भैया का हाथ पकड़ कर चलना सीखना
भैया का उनको पढ़ाना
पिताजी का बेटा जैसा प्यार करना
सब कुछ पूजा को याद आ रहा था
कल तक उसने ऐसा सोचा नही था
पर आज अचानक उसे सब याद आ रहा था , फॅमिली से दूर जाने के बारे मे सोचते पूजा की आँखो मे आसू आ गये
एक तरफ उसके दिल का राजकुमार और दूसरी तरफ वो फॅमिली जिसने प्यार करना सिखाया
पूजा अपने कमरे में रो रही थी
नेहा ने ये देख लिया और चुपके से पिताजी और माँ को बुला लिया
माँ ने पूजा को रोता हुआ देखा तो वो पूजा के पास आ गयी
माजी- पूजा क्या हुआ
पूजा - माँ मुझे नही करनी शादी
पूजा की उस बात से सब शॉक्ड हो गये
पिताजी - रमेश ने कुछ कहा तुझे
जयसिंघ - पूजा जीजा जी ने तेरा दिल दुखाया
नेहा - दीदी बात क्या है
पूजा - मैं आप सब को छोड़ कर कही नही जाउन्गि
माजी- तूने तो डरा ही दिया था
पिताजी- तुझे नही करनी है तो मत कर शादी ,
नेहा - पिताजी मैं कर लूँगी रमेश जीजाजी से शादी
पूजा - क्या कहा तूने , ऐसी पिटाई करूँगी कि दुबारा ऐसा कहेगी ही नही
नेहा - आप नही कर रही तो मैं कर लेती हूँ
पूजा- पिताजी
पिताजी - पूजा एक दिन सबको जाना होगा अपने नये घर अपने राजकुजमर के साथ , नेहा और नीता भी जाएँगी
पूजा - मुझे कहीं नही जाना है
माजी- ऐसा नही बोलते ,
पूजा - हम उनको यहाँ लाते हैना
पिताजी -ऐसा नही होता है
पूजा - आपने कहा था कि मैं शादी के बाद यही रहूंगी
माजी- पूजा ऐसा नही होता है , देखो मैं भी तो अपना घर छोड़ कर यहाँ आई थी
पूजा - मैं आप सब के बिना कैसे रहूंगी
माजी- तू एक बार रमेश के घर तो जा फिर देखना तुम खुद यहाँ नही आएगी , मैं तो शादी के बाद मायके गयी ही नही ,
पिताजी -रमेश तुम्हे हमारी कमी होने ही नही देगा ,
पूजा -मुझे आपकी याद आई तो
पिताजी- तो बस मे बैठ जाना मैं यहाँ तेरा इंतज़ार करूँगा
माजी- ये आप क्या बोल रहे है
पूजा- मैं नेहा को अपने साथ लेकर जाउन्गा
पिताजी- ये ठीक रहेगा कुछ दिन नेहा तेरे साथ रहेगी तो तुझे अच्छा लगेगा
नीता- मैं भी चलूंगी
माजी- नीता , सबको नही ले जाने दे सकते वहाँ पर
नीता- नेहा जाएँगी तो मैं भी जाउन्गि
पिताजी- ठीक है चली जाना , और अपनी दीदी का यहाँ की याद आने मत देना
नेहा ,- जी पिताजी
माजी- पर
पिताजी -मैं रमेश से बात करूँगा
पूजा - पिताजी
और पूजा पिताजी के गले लग गयी कुछ देर ऐसा ही फॅमिली ड्रामा चला
और देखते देखते वो दिन भी आ गया जब पूजा दुल्हन के रूप मे तय्यार हो गयी
नेहा नीता ने अपनी दीदी को राजकुमारी जैसा सजाया था
पिताजी पूजा को देखते अपने आसू रोक नही पाए ,
उनकी शेरनी बेटी इतनी बड़ी हो गयी कि अपना घर बसा रही है
रमेश भी गोदी पे बैठ कर पूजा को लेने जाने को आया था
जयसिंघ ने घर को ही नही पूरे गाँव को सजाया था
पूरा गाँव , गाँव की बेटी को आशीर्वाद देने आया था
ठाकुरजी के आते ही नीता ने उनको पहले थोड़ा परेशान किया
नेहा नीता अपने जीजाजी को देख कर पूजा की खिचाई करने लगी
बारात छोटी थी पर पूजा को अपने साथ ले जाने के लिए काफ़ी थी
समधी जी तो थे ही नही , रमेश के पापा की डेत हो चुकी थी
रमेश की एक माँ और एक बहन थी ,
माँ ने समधन का स्वागत किया
पिताजी समधन की ओर देखते ही रह गये
बेटी की शादी थी वरना पिताजी समधन को पकड़ कर कमरे मे ले जाते
पूजा के ससुराल वालो को शादी की तय्यारी पसंद आई
ज्योति ने अपना नाक टेढ़ा किया
पर सिल्वर काय्न देख कर उसका लालच बाहर गया
उसने एक नही 10 काय्न माँग लिए
ज्योति को बस पैसो से मतलब था , रमेश को ये अच्छा नही लगा पर वो शादी मे ड्रामा नही करना चाहता था
ज्योति 10 सिल्वर काय्न के साथ खुश थी
रमेश ने कहा कि ये सब करने की क्या ज़रूरत थी पर जयसिंघ अपनी बहन की शादी को स्पेशल बनाना चाहता था
पिताजी की लाडली बेटी दुल्हन बन गयी तू
अपने राजकुमार के साथ 7 जनम साथ रहने की कसमे खाने लगी
जैसे जैसे फेरा कंप्लीट हो रहा था वैसे वैसे सब की आँखो मे पानी आ रहा था
सब अलग अलग तरह से अपने आसू छुपा रहे थे
ठाकुरजी ने पिताजी को हिम्मत देते हुए कंट्रोल रखने को कहा
शादी हो गयी
पूजा रमेश की हो गयी
पूजा अब अपने नये घर जाएगी
पूजा अपना नया घर बसाएगी
पर उसे घर को छोड़ने का ख़याल आते पूजा के आसू बहाने लगे
नेहा नीता पूजा दीदी को संभाल रही थी
पिताजी भी पूजा के जाने से रो रहे थे
पूजा ने सबको एमोशनल कर दिया
जयसिंघ ने पूजा को खुश रहने का आशीर्वाद दिया पूजा अपने भाई के गले लग कर सब से ज़्यादा रोई
पिताजी ने रमेश को पूजा का कायल रखने को कहा
.रमेश समझ गया कि पूजा कितनी लाडली है
रमेश ने पिताजी को भरोसा दिलाया कि वो पूजा के आँखो मे आँसू नही आने देंगे
पिताजी के कहने पे नेहा नीता भी पूजा के साथ चली गयी
रमेश भी यही चाहता था कि पूजा को नये घर मे जुड़ने मे टाइम लगेगा तब तक उसको कोई तो चाहिए
पिताजी अपनी बेटी को जाते हुए देख रहे थे
उनको लग रहा था कि नेहा नीता भी शादी करके जा रही है
घर की हस्ती खेलती गुड़िया अपने नये घर जा रही थी
माँ ने अपनी बेटी को जो सिखाया है वो पूजा को मदद करेगा नया घर बसाने मे
छोटू फिर से अकेला हो गया
पहले जयसिंघ चला गया , अब पूजा दीदी चली गयी , फिर से वो अपने कमरे मे अकेला रह गया