• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मैं और मेरा परिवार

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
835

राजेश होटेल बुक करके आ गया था.

राजेश ने बताया कि होटेल ऑनलाइन भी बुक किया जा सकता था .

वो तो मुझे भी पता था पर मैं ने कविता और लीना को प्यार कर रहा हूँ ये राजेश को पता ना चले इस लिए उसको होटेल बुक करने को भेजा था.

सब दादाजी को देखने की खुशी मे अलग अलगप्लान बना रहे थे.

राजेश और मैं ने बस की जगह ट्रवल्स बुक की. जिस मे सोने का इंतज़ाम भी था.

प्राइवेट बस बुक करने से हम सब के लिए फ़ायदेमंद था. मैं ने प्राइवेट बस को 3 दिन के लिए बुक किया था कि सब को ट्रेवालिंग मे मज़ा आए.

चाची बचो को कैसे ले जाए इसके बारे मे सोच रही थी.

लेकिन मैं अपने काम कर रहा था.

2 दिन बाद अड्मिशन ओपन हुई

कविता और लीना ने मुझे बताया कि अड्मिशन स्टार्ट हो गयी है. ,तो मैं ने नेक्स्ट दिन अड्मिशन करने जाने का उनको बता दिया

कविता और लीना ने अपने डॉक्युमेंट तय्यार कर लिए.

और मैं उनको शहर ले जाने को नेहा बुआ के घर आ गया.

कविता-भैया हम तय्यार है.

अवी-बुआ कहाँ है. उनको बताया कि नही.

लीना-माँ को बता दिया है.

नीता बुआ-अवी इनका अड्मिशन अपने कॉलेज मे करवा देना.

कविता-मौसी कितनी बार एक ही बात कहेगी

नीता बुआ-मुझे तुम दोनो पे शक हो रहा है. मेरी बात इतनी जल्दी जो मान रही है.

लीना-माँ ,भैया पे तो विश्वास रखो

अवी-बुआ आप बेफिकर रहिए .मैं इनका अड्मिशन करवा दूँगा.

नीता बुआ-अब तो मुझे पूरी दाल काली नज़र आ रही है.

नेहा बुआ-काली दाल ,

और अचानक नेहा बुआ और नीता बुआ हँसने लगी

कविता- आप हंस क्यूँ रही हो

नेहा बुआ- कुछ नही , बचपन की याद आ गयी

लीना- हमे भी बताइए

नीता बुआ- तुम्हे बताया तो तुम दोनो और ज़्यादा मस्ती करोगी ,, दाल मे कुछ काला है , हैना नेहा

नेहा बुआ- हाँ

कविता - मेरी तो कुछ समझ मे नही आ रहा है कि आप क्या बात कर रही ही

नेहा बुआ- वो हमारी बाते है तुम्हे समझ मे नही आएगी , और तुम्हारा इलाज है मेरे पास

और नेहा बुआ कोमल के साथ हमारे पास आ गयी

नीता बुआ-नेहा क्या बोल रही हो

नेहा बुआ-कविता और लीना के साथ कोमल भी जाएगी

कविता-माँ .आपको हम पे विश्वास नही है

नेहा बुआ-तुम दोनो को मैं अच्छे से जानती हूँ.तुम्हारी माँ हूँ मैं. मेरा ही खून हो तुम

नीता बुआ-हाँ, कोमल भी जाएगी इनके साथ.

कोमल-मौसी ,अवी कर देगा अड्मिशन ,मुझे क्लासस जाना है.

अवी-बुआ मैं कर दूँगा.

नेहा बुआ-आज थोड़ा लेट जाना क्लासस को

कोमल-आज इम्पोर्टेंट क्लास है.(एंट्रेन्स की क्लासस )

नेहा बुआ-कोमल , रानी से पूछ लेना क्लास मे जो सिखाया है.

कोमल-ठीक है. मैं इनकी अड्मिशन करवा के जाउन्गी

कोमल की बात सुनते ही कविता और लीना मेरी तरफ देखने लगी.

मैं ने उनको शांत रहने को कहा .

अवी-चलो वरना अड्मिशन करने मे देर हो गयी तो कोमल का क्लास मिस हो जाएगा.

नीता बुआ-आराम से जाना ,

लीना-हाँ माँ,

और हम शहर की तरफ अड्मिशन कराने चले गये.

लीना मेरी बाइक पर बैठी थी और कविता कोमल की स्कूटी पे.

लीना-भैया अब हम क्या करेंगे. कोमल दीदी के आने से तो हमे आपके कॉलेज मे अड्मिशन लेना पड़ेगा.

अवी-तुम टेन्षन मत लो मैं हूँ ना

लीना-कैसे ना लू टेन्षन, देखा माँ ने कैसे कोमल दीदी को हमारे पीछे लगा दिया. इसी वजह से हम दूसरे कॉलेज मे पढ़ना चाहते है. अगर आपके कॉलेज मे अड्मिशन लिया तो कोमल दीदी हम पे नज़र रखती फ़िरेगी.कुछ करो ना भैया

अवी-करता हूँ

लीना-अगर हमारा अड्मिशन आपके कॉलेज मे हुआ तो मैं आपसे बात नही करूगी.

अवी-मुझे सोचने तो दो

लीना-सोचिए ना कुछ शहर पास आ रहा है

अवी-मेरे मोबाइल मे एक मेसेज लिखो. " कोमल को कॉल करके परेशान करो,और कोमल का फोन मत उठाना"

लीना-पर ऐसा मेसेज किसे भेज रहे हो आप

अवी-तुम टाइप तो करो

लीना ने मेरा मोबाइल लिया और मेसेज टाइप किया .और मैं ने मेसेज रानी को फॉर्वर्ड किया.

लीना-किसे भेजा मेसेज .और ये आपके इंबॉक्ष मे आर, एस ,Z, पी, जैसे कॉंटॅक्ट के मेसेज किसके है.

अवी-(गयी भैस पानी मे ,अच्छा हुआ लीना ने मेसेज रीड नही किए. रानी सारा ज़ोया पायल के मेसेज है वो) मेरी क्लासमेट है. थोड़ा टाइम के लिए गर्लफ्रेंड बनाई थी. किसी को बताना मत ,कोमल को भी नही.

लीना-नही बताउन्गी. पर हमारा अड्मिशन

अवी-मैं हूँ ना ,तुम टेन्षन मत लो

लीना-ये तो बताइए मसाज किसे भेजा है

अवी-रानी को ,

लीना-रानी दीदी, पर क्यूँ इस से क्या होगा

अवी-तुम कुछ देर चुप रहो और देखो तुम्हारा भाई क्या करता है.

और मेरा मेसेज मिलते ही रानी ने कोमल को कॉल करके डिस्ट्रब करना शुरू किया.

मोबाइल बजते ही कोमल ने पेड़ के नीचे स्कूटी रोक दी .और मोबाइल चेक करने लगी.

हम भी कोमल के पास रुक गये

अवी-क्या हुआ कोमल ,रुक क्यूँ गयी.

कोमल-रानी का मिस्ड कॉल आया है.

अवी-कॉल करो मैं हल्का होते आता हूँ.

लीना मेरी तरफ देखती रह गयी कि मैं क्या करने वाला हूँ.

कोमल रानी को कॉल करने लगी और मैने झाड़ियों के पीछे जाकर रानी को कॉल किया.

अवी-हेलो रानी

रानी-क्या है. मुझे ऐसा मेसेज क्यूँ किया .और कोमल को परेशान करने को क्यूँ कहा.

अवी-उसका कॉल आया था.

रानी-हाँ, एक कॉल आया पर मैने ने उठाया नही. और तुम्हारा फोन आ गया

अवी-मेरी बात ध्यान से सुनो

रानी-कहो

अवी-तुम मेरा फोन कट होते ही कोमल को फोन करके बोलना कि आज का क्लास बहुत इम्पोर्टेंट है. मिस किया तो बहुत लॉस होगा.

रानी-आज का क्लास टोपिक इम्पोर्टेंट है.

अवी-उसके बाद 10 10 मिनिट के बाद कोमल को कॉल करके पूछते रहना कि देर क्यूँ हो रही है. क्लास इम्पोर्टेंट है.

रानी-कोमल को परेशान क्यूँ करने को बोल रहे हो.

अवी-कोमल और मैं ,कविता और लीना की अड्मिशन कराने जा रहे है. हमारे कॉलेज मे पर

रानी-हाँ बोलो

अवी-पर कविता और लीना को दूसरे कॉलेज मे अड्मिशन लेना है.

रानी-हमारा कॉलेज तो बेस्ट है.

अवी-पर वहाँ कोमल हैना.कोमल के रहते कविता और लीना कॉलेज लाइफ को एंजाय नही कर पाएगी.

रानी-इस बात से मैं सहमत हूँ. कोमल उनको पढ़ाई करने के सिवा कुछ नही करने देगी.

अवी-तो मैं उनका महिला कॉलेज मे अड्मिशन करवा रहा हूँ

रानी-वो कॉलेज भी अच्छा है.

अवी-तो मेरा काम कर दो .और कोमल को अपने पास बुला लो

रानी-मेरी ननंद के लिए तो करना ही होगा. वैसे उस कॉलेज मे लड़को का टेन्षन नही रहता .दोनो सेफ रहेगी.

अवी-मेरा काम कर देना. और हां मैं शाम को तुम्हारे घर आ रहा हूँ.

रानी-कविता और लीना को लाना ,मैं मम्मी को कहुगी कि ऑफीस से जल्दी घर आ जाए.

अवी-ठीक है

और मैं ने रानी को बता दिया कि उसे क्या करना है.
 
मैं रानी से बात करके कोमल के पास गया तो वो रानी से बात कर रही थी.

हम ने कोमल की बात पूरी होने तक इंतज़ार किया.

कोमल रानी से बात करके थोड़ी टेन्षन मे आ गयी.

अवी-क्या हुआ कोमल, क्या कहा रानी ने

कोमल-क्लास के बारे मे पूछ रही थी.

अवी-तुम ने क्या कहा.

कोमल-वो जाने दो जल्दी चलो अड्मिशन करके मुझे क्लास जाना है.

और कोमल ने स्कूटी स्टार्ट की और हम कॉलेज की तरफ जाने लगे

लीना मुझसे पूछने लगी कि क्या हुआ

लीना-भैया कुछ भी तो नही हुआ

अवी-रूको तो मैं ने कोमल के लिए सेट्टिंग कर ली है.

लीना-क्या किया आपने

अवी-रानी को बता दिया कि उसे कोमल को अपने पास बुलाना .उसको मैं सब बता दिया. वो हमारी बात से सहमत है.

लीना-रानी दीदी ने कोमल दीदी को बता दिया तो

अवी-रानी को भी लगता है कि कोमल के होते हुए तुम दोनो एंजाय नही कर पाओगि.

लीना-रानी दीदी बहुत अच्छी है.

अवी-सुनो कविता को बता देना कि मैं क्या कर रहा हूँ. और चुप चाप ,मैं जैसा कहूँ वैसा करते जाना

लीना-लव यू भैया

और हम मेरे कॉलेज आ गये

कॉलेज आते ही कोमल को रानी का कॉल आया जिसे देख कर कोमल की टेन्षन बढ़ने लगी

लीना-भैया आपका कॉलेज तो बहुत अच्छा दिख रहा है.

कविता-हाँ, यहाँ तो आप बहुत एंजाय करते होंगे

कोमल-हमारे कॉलेज मे आओगी तब पता चलेगा कि तुम यहाँ अड्मिशन ना लेने की बात को भूल जाओगी

लीना-दीदी ,सच मे आपका कॉलेज जैसा दूसरा कॉलेज नही होगा.

अवी-चले फॉर्म लेने

कोमल रानी से बात करते हुए कॉलेज के अंदर आ गयी.

लड़कियो लाइन छोटी थी जिस से मैं ने कविता और लीना को लाइन मे लगने को कहा.

वो बिना कुछ कहे चुप चाप लाइन मे लग गयी. शायद उनको हमारा कॉलेज पसंद आ गया.

पर कोमल बार बार अपनी वॉच की तरफ देख रही थी.

रानी कोमल को फोन करके उसका टेन्षन बढ़ा रही थी.

अवी-क्या हुआ कोमल

कोमल-कुछ नही

अवी-मुझसे झूठ तुम बोल नही सकती. मैं तुम्हारे आँखे पढ़ सकता हूँ

कोमल-अवी आज का क्लास बहुत इम्पोर्टेंट है.

अवी-तो तुम्हे क्लास मे जाना चाहिए

कोमल-पर माँ ने कहा कि कविता और लीना का अड्मिशन करा कर क्लास जाने को

अवी-बुआ को क्या पता चलेगा कि तुम इनका अड्मिशन करने के पहले गयी

अवी-तो तुम्हे क्लास मे जाना चाहिए

कोमल-क्या मतलब

अवी-मैं इनका अड्मिशन करवा देता हूँ तुम क्लासस को जाओ. तुम्हारे क्लास बहुत इम्पोर्टेंट है

कोमल-पर कविता और लीना ने कुछ गड़बड़ की तो

अवी-कविता और लीना को हमारा कॉलेज पसंद आ गया है. वो तो देखो कैसी चुप चाप लाइन मे लगी है.मैं करवा दूँगा इनका अड्मिशन

कोमल-पर

अवी-इसका मतलब तुम्हे मुझपे विश्वास नही है.

कोमल-ऐसा कभी मत सोचना

अवी-तुम अपने ड्रीम के बारे मे सोचो. डॉक्टर बनना है तुम्हे

कोमल-मैं जाती हूँ पर कविता ने माँ को बता दिया तो

अवी-इनकी अड्मिशन होते ही मैं इनको मूवी दिखाने ले जाउन्गा. फिर रानी के घर पे तुम्हारा इंतजार करूँगा. क्या कहती हो

कोमल-थॅंक्स

और कोमल स्कूटी लेकर रानी के पास चली गयी और मैं कविता के पास आ गया.

कविता-भैया आपका कॉलेज मुझे पसंद आया

अवी-अपना इरादा तो नही बदल दिया

लीना-हम कन्फ्यूज़्ड हो गये है.

अवी-फिर तो यही अड्मिशन कर लो

कविता-कोमल दीदी

अवी-एक काम करते है उस कॉलेज को देख लेते है. जो पसंद आया वहाँ एडमिशन कर लेंगे

कविता-पर कोमल दीदी

अवी-उसको मैं ने भेज दिया रानी के पास

लीना-भैया आप ग्रेट हो ,चलो उस कॉलेज को देखते है.

अवी-यहाँ से फॉर्म ले लो वरना फिर से लाइन मे लगना पड़ा तो

मेरे कॉलेज का फॉर्म लेते ही हम महिला कॉलेज चले गये.

महिला कॉलेज का नंबर हमारे कॉलेज के बात आता था. 2न्ड नंबर पे था ये कॉलेज

महिला कॉलेज भी कुछ कम नही था. पर यहाँ सिर्फ़ लड़किया पढ़ती थी.

महिला कॉलेज देखते ही कविता और लीना खुश हो गयी.

कविता-भैया ये कॉलेज भी बढ़िया है.

अवी-पर ये सिर्फ़ लड़कियो के लिए है कॉलेज.

लीना-पता है. लड़के ना होने से बिंदास तरीके से , कैसे भी एंजाय कर सकते है. लड़के होते है तो कपड़ो का ध्यान रखो, ब्रा तो नही दिख रही ,कोई घूर तो नही रहा है. कोई चलते चलते टच करता है.

कविता-लड़किया लड़किया रहेगी तो कैसे भी ,फ्री पंछी की तरह रह सकती है. वरना लड़को की उल्लू की नज़र हम पर पड़ती रहती है. जो हमे पसंद नही है.

अवी-और मैं

लीना-आप तो हमारे राजकुमार हो

अवी-तो कहो क्या डिसाइड हुआ है.

कविता-हम महिला कॉलेज मे अड्मिशन लेंगे

अवी-तो लग जाओ लाइन मे

लीना-पर माँ ,उनको पता चला तो

अवी-बुआ कॉलेज मे देखने कहाँ आएगी.

कविता-पर कोमल दीदी को पहले दिन ही पता चल जाएगा

अवी-कोमल को मैं समझा दूँगा

लीना-पर अड्मिशन की रिसिप्ट देख कर तो पता चल जाएगा माँ को

अवी-मैं मेरे कॉलेज का ड्यूप्लिकेट रिसिप्ट बनवा दूँगा.

कविता-फिर भी एक दिन तो पता चल जाएगा.

अवी-जब पता चलेगा तब की तब देखेंगे.तुम टेन्षन मत लो, बस एंजाय करो.

लीना-थॅंक यू भैया.

और दोनो फॉर्म लेने के लिए लाइन मे लग गयी.

दोनो यहाँ अड्मिशन लेने से काफ़ी खुश दिख रही थी.

फॉर्म लेकर बिना वक्त गवाए फिल करके सब्मिट करके अपना अड्मिशन पक्का कर लिया.

अड्मिशन कराने के बाद दोनो कॉलेज मे घूमने लगी.

कॉलेज को अच्छे से देखने लगी.

दोनो अभी से प्लॅनिंग करने लगी कि उनको क्या करना है.

अवी-अब तो 2 साल तक तुम्हे यही रहना है. अभी से प्लॅनिंग कर रही हो

लीना-भैया हम ये 2 साल को पूरी तरह से एंजाय करना चाहते है ,ये 2 साल मे हम पूरी लाइफ जीना चाहते है

अवी-इतनी बड़ी बड़ी बाते मत करो.

कविता-भैया आप भी तो कॉलेज लाइफ को एंजाय कर रहे होगे

अवी-हाँ. ये साल एंजाय किया जिस से इतने कम मार्क मिले पर इस बार पढ़ाई करूँगा कि ये एअर इम्पोर्टेंट है.

लीना-हम भी ऐसा ही करेगी. एक साल फुल एंजाय ,और नेक्स्ट साल पढ़ाई के साथ एंजाय

अवी-वो ठीक है पर मेरी तरह कम मार्क मिले तो मैं तुम्हारी पिटाई करूँगा. और बुआ मेरी पिटाई करेगी.

कविता-ऐसा हम नही होने देंगे. आपको हमारे वजह से कुछ नही होने दुगी.

अवी-ऐसा नही है. बस बुआ की वजह से ऐसा बोल रहा हूँ

लीना-हमे पता है. आप बेफिकर रहिए ,हम आपकी ज़िम्मेदारी है. हम आपकी नाक कटने नही देंगे

अवी-ठीक है चलो अब

कविता-इतनी जल्दी क्या है घर जाने की थोड़ी देर रुकते है हम .

अवी-मेरे कॉलेज का ड्यूप्लिकेट अड्मिशन रिसिप्ट लेते है. और फिर मूवी देखने जाएँगे

लीना-मूवी ,पिछली बार की तरह

अवी-पिछली बार जो हुआ वो काफ़ी था.

कविता-भैया

अवी-सिर्फ़ मूवी वरना गाँव चलो

लीना-ठीक है. किस करते हुए मूवी देखेंगे

अवी-ठीक है. चलो

और मैं कविता और लीना को लेकर अपने कॉलेज चला गया.

मिसेज़ वर्मा की मदद से मैं ड्यूप्लिकेट रिसिप्ट बनवा ली.

और हम मूवी देखेने के लिए चले गये
 
836

मूवी देखते हुए कविता और लीना कहाँ शांत बैठने वाली नही थी.

मौके का पूरा फ़ायदा उठा रही थी.

मैं ने उनको कंट्रोल मे रहने को कहा जिस से वो सिर्फ़ हल्का फूलका मज़ा ले रही थी.

दोनो ने मुझसे अपना पानी निकलवा लिया.

दोनो पूरी मूवी मे मेरे हाथ को अपनी पैंटी मे लेकर बैठी थी.

और उनका हाथ मेरे अंडरवेअर मे था.

पर इंटर्वल मे मैं बाहर जाकर रानी की मम्मी को कॉल किया

क्यूँ कि मुझे रानी को अपने दादाजी का आशीर्वाद दिलवाना था.

मूवी देखते हुए ये आइडिया दिमाग़ मे आया कि रानी को भी दादाजी से मिलवा दूं

अवी-हेलो आंटी

रानी मम्मी-अवी आज मुझे कैसे कॉल कर लिया

अवी-आंटी आप बिज़ी तो नही है.

रानी मम्मी-नही. मैं तो घर जा रही हूँ.

अवी-इतनी जल्दी.

रानी मम्मी-रानी का कॉल आया था कि तुम आ रहे हो . अपनी बहनों के साथ तो सोचा घर जल्दी जाकर मेहमानों के किए कुछ बनाया जाए

अवी-रानी ईडियट है बिना वजह आपको तकलीफ़ देती है.

रानी मम्मी-ऐसा नही है , तुम आ रहे हो तो खातिरदारी तो करनी पड़ेगी अपने दामाद की

अवी-दामाद, रानी के साथ शादी कहा हुई है.

रानी मम्मी-शादी एक ना एक दिन तो हो जाएगी.

अवी-अगर बाद मे मुझे कोई और पसंद आ गयी और मैं ने रानी को बुला दिया तो

रानी मम्मी-बेटा मैं ने दुनिया देखी है. लोगों की आँखे पढ़ लेती हूँ. कौन कैसा है वो मैं पहचान जाती हूँ.

अवी-और मैं कैसा हूँ

रानी मम्मी-तुम लाखों मे एक हो. मुझे पता है तुम रानी से कितना प्यार करते हो.

अवी-आपको ऐसा लगता है ,मैं इतना भी रानी के साथ प्यार नही करता

रानी मम्मी-मेरी भी लव मॅरेज हुई है. मैं प्यार और हवस को पहचानती हूँ.

अवी-रानी और मेरे बीच मे क्या है

रानी मम्मी-प्यार ,सिर्फ़ प्यार

अवी-तो इस प्यार को और उँचाई तक ले जाने मे आपको मेरी मदद करनी होगी

रानी मम्मी-क्या करना है

अवी-आप किसी टूर पे चली जाइए इस वीकांड पे ,रानी को यही रहने दीजिए

रानी मम्मी-बेटा वो सब शादी के बाद करना

अवी-आंटी आप ग़लत समझ रही है.मैं अपनी फॅमिली के साथ अपने दादाजी से मिलने जा रहा हूँ. तो सोचा रानी को अपने दादाजी से मिलवा दूं,, उनका आशीर्वाद दिलवा दूं रानी को

रानी मम्मी-ये तो अच्छी बात है. पर तुम्हारे दादाजी कहाँ है.

अवी-उनको हार्ट अटॅक आया था ,वो अड्मिट है आश्रम मे. दादाजी को रानी से मिलवाने का सोच रहा हूँ.

रानी मम्मी-ये अच्छा रहेगा. रानी तो खुश हो जाएगी.

अवी-पर आपको टूर पे जाना होगा. और नेहा बुआ को कहना होगा कि रानी को कुछ दिन के लिए अपने पास रहने दो,, फिर तो हमको रानी को लेकर जाना पड़ेगा

रानी मम्मी-वो मैं कर लुगी.पर कितने दिन के लिए जा रहे हो

अवी-3 दिन

रानी मम्मी-हो जाएगा ,वैसे घर कब आ रहे

अवी-2 घंटे मे आ जाउन्गा.

रानी मम्मी-मैं खाना बना कर रखती हूँ.

अवी-उसकी क्या ज़रूरत है

रानी मम्मी-होने वाले दामाद हो तुम,इतना तो करना ही होगा.

अवी-अभी इतनी खातिरदारी हो रही है तो शादी के बाद कितनी होगी.

रानी मम्मी-कल किसने देखा है.

अवी-ये तो आपने सही कहा.

रानी मम्मी-मैं फोन रखती हूँ ,ड्राइविंग करते हुए बात नही करना चाहिए

रानी के मम्मी के साथ बात करने के बाद मैं वापस मूवी देखने चला गया.

कविता और लीना वापस मुझे प्यार करते हुए मूवी देखने लगी.

मूवी देखने के बाद आइस क्रीम खाना, शरबत पीना, इधर उधर घूमते हुए पूरे शहर का चक्कर लगवा दिया कविता और लीना ने

फिर मैं दोनो को लेकर रानी के घर आ गया.

कविता और लीना पहली बार रानी के घर आकर खुश हो गयी.

हमारे आते रानी और कोमल भी आ गयी.

रानी से मिलते कविता और लीना मुझे अलग होकर रानी को थॅंक्स कहने लगी हमारा साथ देने के लिए.

कोमल-अवी हो गया अड्मिशन

अवी-हाँ ,अड्मिशन तो तुम्हारे जाते हो गया

कविता-दीदी ये रही रिसिप्ट

कविता ने रिसिप्ट कोमल को दी और कोमल ध्यान से रिसेप्ट देखने लगी.

लीना-दीदी ,भूख गयी है. कुछ खाने को मिल जाता तो

कोमल-लीना ,ये क्या तरीका है.

रानी मम्मी-कोमल, ये इनका भी घर है. और अपने घर मे ये सब तो चलता है. मैं अभी खाना लगाती हूँ

अवी-कोमल तुम भी ना ,रानी क्या कोही पराई थोड़ी है,

कोमल-मैं तो

रानी-कुछ नही हुआ. चलो खाना खाते है मुझे भी भूख लगी,चलो लीना आज मेरे घर का खाना खिलाती हूँ तुम्हे

हम सब डिन्निंग टेबल पर बैठ गये.

आंटी ने खाना लगा दिया और हमारे साथ खाना खाने लगे.

रानी मम्मी-रानी. तुम्हे एक बात तो बताना मैं भूल गयी

रानी-क्या?

रानी मम्मी-मैं इस वीकांड पे ऑफीस के

रानी मम्मी-मैं इस वीकांड पे ऑफीस के काम से बाहर जा रही हूँ.

रानी-ऐसे अचानक कैसे,

रानी मम्मी-एक प्रॉजेक्ट के सिलसिले मे जाना है.

रानी-लेकिन मेरे क्लासस

रानी मम्मी-मैं अकेली जा रही हूँ

रानी-मैं अकेली कैसे रह सकती हूँ

रानी मम्मी-कोमल को यहाँ बुला लेना

कोमल-आंटी इस वीकांड पर तो हम टूर पे जा रहे है

रानी-टूर पे

कविता-हम सब जा रहे है.पूरी फॅमिली, दादाजी से मिलने

रानी मम्मी-ये तो गड़बड़ हो गयी. मेरा जाना भी ज़रूरी है.

कोमल-इस का हाल है मेरे पास

रानी-क्या?

कोमल-तू भी चल हमारे साथ टूर पे

रानी-मैं कैसे

रानी का ये सवाल सुनते ही मैं ने अपने पैर से रानी के पैर को ठोकर मारी.

रानी मेरा इशारा समझ गयी.

रानी-घूमना तो मुझे बहुत पसंद है.

कोमल-आंटी आपको कोई प्राब्लम तो नही हैना.

रमूंमी-मुझे क्या प्राब्लम हो सकती है. पर एक बार अपनी माँ से बात कर लेती तो

कोमल-रानी के आने से सब खुश हो जाएँगे.

लीना-मौसी तो डबल खुश हो जाएगी.

कविता-और हम उनसे भी ज़्यादा खुश हो जाएँगे.

रानी मम्मी-कोमल तुम ने तो मेरी प्राब्लम सॉल्व कर दी.रानी को तुमसे कुछ सीखना चाहिए

रानी-मम्मी

कोमल-आंटी मैं रानी को सब सिखा दुगी

रानी-मैं ऐसी ठीक हूँ

रानी मम्मी- रानी को कुछ नही आता ,तुम कुछ सिखा देना ,

कविता-आंटी पता है मेरी माँ क्या कहती है. रानी दीदी को कहती है कि कोमल दीदी को कुछ सिखा दे ,और आप कहती हो रानी दीदी को कुछ सिखा दे

अवी-कविता ऐसा ही होता है.

रानी मम्मी-चलो जल्दी जल्दी खाना ख़तम करो, इसके बाद मिठाई भी है

लीना-आंटी पहले क्यूँ नही बताया अभी खाना ख़तम करती हूँ

कविता-तुझ से पहले मैं ख़तम करती हूँ खाना

लीना और कविता मे खाना ख़तम करने मे लग गयी.

और मैं रानी के पैरो को सहलाते हुए खाने का मज़ा लेने लगा.

फिर बाते करते हुए मिठाई का मज़ा लेकर हम घर आ गये.

घर आने पर मैं ने छोटी चाची को बताया कि मैं रानी को अपने साथ दादाजी से मिलने लेकर जा रहा हूँ.

रानी के आने की बात से छोटी चाची खुश हो गयी.

और जब रानी को आंटी ने मेरी बात बताई तो रानी ने मुझे कॉल कर आइ लव यू कहना शुरू किया.

और मैं हमारे जाने का इंतज़ाम मे लग गया.
 
837

वो दिन भी आ गया जब हम दादाजी से मिलने जाने वाले थे.

चाची सुबह जल्दी उठ गयी ताकि हमारी तय्यारी जल्दी हो सके.

विद्या भाग भाग कर चाची की मदद कर रही थी.

चाची ने अपने और बच्चों के ज़रूरत का समान पॅक करके रखा था फिर भी एक बार चेक कर लिया.

चाचा ने मुनीम जी को 3 दिन के लिए खेत देखने को कहा.

बुआ ने भी अपने हज़्बेंड को बता दिया कि वो उनके पिताजी से मिलने जा रही है

नेहा बुआ रानी के आने से खुश थी. नेहा बुआ तो रानी को अपनी बेटी मान ने लगी थी.

राजेश ने कल ही अपने स्कूल जाकर अपना अड्मिशन कर के जल्दी वापस भी आ गया था.

मैं ने तय्यार होते ही अपना समान विद्या को देखने को कहा,और विद्या को एक कॅमरा दिया ताकि वो इस टूर की तस्वीर ले सके.

सी चाची-दीदी बच्चों के खिलोने भी साथ लेते है.

म चाची-विद्या को बोल पॅक करने को ,मैं नहाने जा रही हूँ.

ब चाची-मीना ,नाश्ता बना ले रास्ते मे ज़रूरत पड़ेगी.

विद्या-चाची मैं बना देती हूँ.मेरी तय्यारी हो चुकी है.

सी चाची-रुक मैं बनाती हूँ. तुम सीमा दीदी की मदद कर

चाचा-सुमन मेरा टवल कहाँ है. मुझे नहाने जाना है

ब चाची-अभी लाती हूँ . पर बाथरूम मे सीमा नहा रही है.

चाचा-उसे बहुत टाइम लगेगा. मेरे लिए पानी आँगन मे लगा दो मैं आँगन मे नहा लेता हूँ.

ब चाची-जी,विद्या बच्चो के पास रूको

चाचा आँगन मे नहाने लगे और सीमा चाची बाथरूम मे नहा रही थी.

छोटी चाची नाश्ता बना रही थी तो विद्या बच्चों को देख रही थी.

ब चाची-अवी अपने कमरे मे क्या कर रहे हो.तय्यार नही होना

अवी-चाची मे कब का तय्यार हो के बैठा हूँ.

ब चाची-तूने कब नहालिया.अच्छा हुआ तू तय्यार हो गया. जा देख बस आई कि नही.

अवी-मैं ने राजेश को फोन किया है. वो कह रहा था कि बस निकल चुकी है.

ब चाची-एक काम कर सब का समान आँगन मे रख दे. और कुछ छूटना नही चाहिए.

अवी-चाची आप इतनी भाग दौड़ मत कीजिए मैं करता हूँ.

मैं ने सब का समान आँगन मे लाकर रख दिया.

अवी-विद्या बच्चो को लेकर आँगन मे आ जाओ ,वरना बच्चो को भूल जाएँगे

सीमा चाची ने मेरे सर पे थप्पड़ मारा

म चाची-कुछ भी बोलता है.हट रास्ते से

ब चाची-सीमा तू अभी तक पेटिकोट मे घूम रही है. जल्दी कर ,मुझे देर नही होना.

म चाची-बस हो गया दीदी. 2 मिनिट मे तय्यार हो जाती हूँ

ब चाची-अगर देर हुई तो तेरा मोबाइल फेक दुगी. देर रात तक मोबाइल पे पिक्चर देखती रहती है.

सीमा चाची भाग कर अपने कमरे मे गयी और तैयार होने लगी.

चाचा-सुमन मेरा शर्ट कहाँ रखा है.

ब चाची-जी अभी लाती हूँ ,प्रेस कर रही थी.

बड़ी चाची चाचा का शर्ट लेकर उनके कमरे मे चली गयी.

छोटी चाची ने परान्ठे बना लिए और नयी साड़ी पहनने लगी जो मैं ने उनको मेले मे खरीद कर दी थी.

और बस भी आ गयी.

बस आते ही मैं चाचा को बताने उनके कमरे मे गया तो बड़ी चाची और चाचा गले लग कर प्यार कर रहे थे.

ब चाची-छोड़िए ना कोई आ जाएगा.

चाचा-सुमन तुम इस साड़ी मे बहुत खूबसूरत दिख रही हो. अगर आज जाना ना होता तो

और चाचा ने बड़ी चाची को किस किया.ज्योति बुआ ने जो सिखाया वो बड़ी चाची पे ईस्तमाल कर रहे थे

ब चाची-ये आप क्या कर रहे है.पहले तो ऐसा नही करते थे.

चाचा-सुमन तुम दिन बे दिन खूबसूरत होती जा रही हो जिस से मैं भी जवान बन रहा हूँ.

ब चाची-छोड़िए ,डोर खुला है. कोई आ जाएगा. मुझे काम भी बहुत है

चाचा-अभी तो छोड़ रहा हूँ ,पर रात मे तुम्हे सोने नही दूँगा.

ब चाची-हटिए ,कुछ भी बोलते रहते है

मैं डोर से वापस चला गया .और सामान बस मे रखने लगा.

ज़रूरत का समान बस के अंदर बाकी बस के उपर रख दिया.

ब चाची-बस आ गयी.

अवी-हाँ,

ब चाची-तूने बताया क्यूँ नही.

अवी-चाचा ने मना किया था. थोड़ी देर कमरे मे ना आने से

मेरी बात सुनते बड़ी चाची शरमा गयी .और अपने कमरे मे चली गयी.

चाचा-बस आ गयी

अवी-हाँ ,और सामान भी रख दिया.

चाचा-सुमन सीमा जल्दी करो बस आ गयी है

म चाची-मैं तय्यार हूँ ,

सी चाची-मैं भी.अवी सब कमरे को चेक कर लो .

मैं ने पूरा घर चेक कर मेन स्विच ऑफ किया .और डोरलॉक कर दिए

और हम सब मेन गेट से बाहर आ गये.

मैं ने मेन गेट को लॉक लगाया . और सबकी तरफ देखा तो सब बस को घूर रहे थे.

सबको लगा गॉव वाली बस बुक की होगी. पर मैने प्राइवेट बस बुक की थी जिसमे एसी था टीवी था स्लीपर कोच था,सीट्स कंफर्टबल थे, विंडो पर पर्दे लगे हुए .बस को देखते सब खुश हुए

ब चाची-ये तो

चाचा-ये तो बहुत महेगी होगी

अवी-बच्चों को ध्यान मे रख कर ये प्राइवेट बस बुक की है.

म चाची-सफ़र आराम वाला होगा. मज़ा आएगा.

सी चाची-मुझे लगा था कि अवी ऐसा कुछ करेगा.

ब चाची-अवी अच्छा किया जो प्राइवेट बस की. वरना गॉव की बस मे बच्चों के साथ इतना लंबा सफ़र,इतनी गर्मी मे ,मुश्किल होता.

चाचा-अवी बड़ा हो रहा है. और समझदार भी. चलो बैठो पता नही वहाँ कितना समय लगेगा.

हम सब बस मे बैठ गये. बस के अंदर आती ठंडी हवा और बस मे आलीशान कमरे जैसे देख कर चाची और चाचा खुश हो गये.

मैं ने बीच की 3 सीट को पीछे की तरफ मूव करके बच्चों को सुलाने जैसा बना दिया.

2 सीट कंबाइन थी जिस से एक सीट को सोने के मोड़ पर लाकर बच्चों के लिए जगह बनाई और उसके बाजू की सीट चाची के लिए.

इसी तरह तीनो चाची के लिए 3 जगा बना दी. मेरे ऐसा करने से चाची खुश हो गयी.

फुल कंफर्टबल हो गया.

आगे हम भाई बहन बैठेंगे ,बीच मे चाची और बचे उनके पीछे बुआ और चाचा ड्राइवर के पास बैठने वाले थे.

अरेंज्मेंट करते हम बुआ की घर आ गये.

पूजा बुआ पूरी तय्यारी के साथ घर को लॉक करके हमारा इंतजार कर रही थी.

स्वेता दीदी और सीतल दीदी दुल्हन की तरह शृंगार करके तय्यार थी. बस साड़ी पहनना बाकी थी. अगर साड़ी पहन ली तो दुल्हन बन जाएगी.

राज अपने गले मे कॅमरा लेके उनकी तस्वीरे निकाल रहा था. और हमारे आते ही बस की तस्वीर निकाली.

बस को देखते राज तो उछल पड़ा .पूजा बुआ खुश हो गयी.

मैं ने पूजा बुआ का समान बस मे रखा और उनके लिए बस का डोर ओपन किया

बस के अंदर आते ही बुआ का एक्शप्रेशन देखने लायक था.

पूजा बुआ-सुमन ये सब क्या है.

ब चाची-अवी ने किया है. देखो बच्चों के लिए कितनी अच्छी जगा बना दी

पूजा बुआ-सफ़र मे मज़ा आएगा.

अवी-बुआ आपकी सीट पीछे है. आगे की बुकिंग हो चुकी है.

पूजा बुआ-बुकिंग मतलब कोई और भी आने वाला है

अवी-आगे की सीट हम भाई बहनों की है.

राज-माँ आप पीछे बैठ जाइए हम तो आगे धमाल करेंगे.

स्वेता दीदी-इस बस की वजह से सफ़र मे डबल धमाल करेंगे.

अवी-बैठो अपनी अपनी जगह पर. कोमल के घर जाना है

ड्राइवर ने बस कुछ फीट आगे ले ली.

आ गया कोमल का घर

ड्राइवर ने हॉर्न बजा कर बुआ को बताया कि बस आ गयी.

नीता बुआ अपना समान लेकर नेहा बुआ के घर पे थी.

हॉर्न का आवाज़ सुनते ही कविता और लीना भाग कर बाहर आ गयी. और राजेश उनका समान लेकर कुली बन गया था.

बस को देखते दोनो चिल्लाने लगी.

चिल्लाने की आवाज़ सुन बुआ और कोमल बाहर आ गयी.

मैं बस से उतर कर राजेश की मदद करने लगा. कि कविता और लीना भाग कर मेरे गले लग गयी.

कविता-भैया हमे पता था कि आप ये टूर मज़ेदार बनाएँगे

अवी-मैं ने कहा था कि हमारी जल्दी पूरी फॅमिली टूर पे जाएगी

लीना-भैया हम इस टूर को यादगार बनाएँगे

अवी-तुम अंदर जाकर सोचो कि ट्रेवलिंग मे क्या करना है. तब तक मैं समान बस मे रखता हूँ

दोनो चिल्लाते हुए बस मे बैठ गयी.

नीता बुआ-नेहा ,अवी और राजेश बड़े हो रहे है.

नेहा बुआ-और समझदार भी. सफ़र मे हमे तकलीफ़ ना हो इसका पूरा ध्यान रखा है.

नीता बुआ-पिताजी जब अवी को देखेंगे तो उनको बहुत खुशी होगी. कि उनका वारिश उनके नाम को आगे बढ़ा रहा है.

नेहा बुआ-चले ,बस मे जाकर बाते करते है

बुआ ने मेरे सर पे हाथ रख कर बस की तरफ चली गयी.

अवी-कोमल चलो ऐसी क्या देख रही

कोमल-अवी ,पूरी फॅमिली को एक साथ खुश देख कर कितना अच्छा लगता है

अवी-मैं अपनी फॅमिली की खुशी के लिए कुछ भी करता हूँ

राजेश-दीदी चलो वहाँ क्यू खड़ी हो

अवी-चलो कोमल ,सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे है

कोमल-मेरा समान

अवी-मैं लेता हूँ. वैसे रानी को बता दिया तुम ने

कोमल-बस मे बैठते ही उसको फोन करके तय्यार रहने को कहुगी.

और मैं कोमल के साथ बस मे बैठ गया.

किसी को लगा नही था कि उनका सफ़र इतना आराम दायक होगा.

पर मेरे रहते जो कभी सोचा नही जाता वो मैं कर देता हू.

बस मे आते ही पूजा बुआ ने मेरी और राजेश की तारीफ की और दादाजी का नाम लेकर हम गाँव से निकल पड़े

सफ़र की शुरुवत हसी के साथ हुई तो पूरा सफ़र मे खुशी ही खुशिया मिलेगी.

बस चालू होते ही राज ने सबका एक फोटो निकाल लिया. चाचा को पीछे बुला कर कॅमरा टाइमर पे सेट करके राज ने पूरी फॅमिली की फोटो खिच ली.

कविता और लीना प्लॅनिंग करने लगी कि उनको क्या क्याकरना है.

बस इंतज़ार था घर की बहू के आने का ,रानी के आने का.

बस मैं ने रानी के घर के सामने रोकी.

रानी और रानी की मम्मी बस की आवाज़ सुनते ही समान लेकर बाहर आ गयी.

रानी के घर आने से ,पहली बार रानी की मम्मी को मिलने के लिए चाची और बुआ बस से नीचे उतर गयी.

रानी ने अपनी मम्मी को चाची और बुआ से मिला दिया.

अगर हमे जाने की जल्दी ना होती तो हम रानी के घर मे ज़रूर रुकते. आंटी भी मेरी चाची और बुआ को बिना नाश्ता किए जाने नही देती.

लेकिन रानी की तरह आंटी भी स्मार्ट थी.आंटी ने शरबत बनाके रखा था.

आंटी ने बस मे हमको शरबत पिलाया .जिस से चाची और बुआ काफ़ी खुश हो गयी.

लॅडीस की बाते तो लंबी चलती है. आंटी और चाची की बाते ख़तम होने का नाम नही ले रही थी.

चाचा के गुस्से मे चिल्लाते ही चाची बस मे बैठ गयी.

रानी की मम्मी ने रानी को अलविदा किया .जैसे कि रानी को शादी करके मैं बारात के साथ ले जा रहा हू.

आंटी की आँखो मे हल्के आसू आ गये. पर ये खुशी के आसू थे.

रानी के बस मे बैठते ही हमारा सफ़र चालू हो गया.
 
838

रानी के आते ही हमारा सफ़र स्टार्ट हो गया.

हर कोई रानी को अपने पास बिठाना चाहती थी पर कोमल ने बाज़ी मार ली

वैसे भी हर कोई एक पाटनेर के साथ बैठा था ऐसे मे सिर्फ़ कोमल अकेली थी.

बस के एक तरफ ,कविता और लीना उनके पीछे कोमल और रानी ,और उनके बाद स्वेता दीदी और सीतल दीदी बैठी थी.

तो दूसरी तरफ, राजेश उसके पीछे मैं विद्या के साथ बैठा था तो लास्ट मे राज ,स्वेता दीदी के रो मे बैठा था

बुआ ने भी अपने हिसाब से चाची के पास जगा बना दी थी.

सब अपनी अपनी जगह पर बैठ ते बातों का सिलसिला शुरू हो गया.

बुआ और चाची ने हम से अलग अपना ग्रूप बना दिया था.

जिस से उनकी धीरे धीरे दबी आवाज़ मे हो रही बाते हमे सुनाई नही दे रही थी

अच्छा हैना वो अपनी बाते कर रही थी तो हम बिना किसी रोक टोक मस्ती कर सकते है

बुआ और चाची की बाते तो बस से भी तेज चल रही थी

हम बस के शहर के बाहर जाने का इंतजार कर रहे थे जिस से हम अपनी मस्ती शुरू कर सके

रानी ने आते ही हम सब मे नयी जान डाल दी थी.

स्वेता दीदी-रानी अच्छा हुआ तू भी साथ आ रही है. वरना टूर मे मज़ा नही आता

रानी-कोमल ने बताने मे देर की वरना हम बढ़िया प्लान बनाते टूर के लिए

राज-दीदी स्माइल

और राज ने रानी का फोटो निकाल लिया

रानी-राज अभी सारे फोटो निकाल लोंगे तो टूर पे बेटरी डाउन हो जाएगी

स्वेता दीदी-रानी राज स्मार्ट हो गया है, एक्सट्रा बॅटरी है उसके पास

कोमल-मैं ने दिया था एक्सट्रा बॅटरी का आइडिया

राज-क्या दीदी. जाइए अब मैं आपकी फोटो नही निकालूँगा.

कोमल ने ख़ान पकड़ कर सॉरी कहा .और राज ने कोमल का सॉरी बोलते हुए फोटो निकाल लिया.

रानी-पूनम दीदी नही दिख रही है.

सीतल दीदी-पूनम दीदी नही आ रही. वो बॅंकिंग जॉब की तय्यारी कर रही है

कोमल-पूनम दीदी होती तो और मज़ा आता.

रानी-वैसे दीदी आप आज बहुत खूबसूरत दिख रही हो

सीतल दीदी-थॅंक्स

राज-स्वेता दीदी को कहा था दीदी ने

सीतल दीदी ने राज का कान पकड़ लिया.

सीतल दीदी-भूल गया. स्वेता दीदी के हाथो का मार खाने से कौन बचाता था तुझे

राज-मेरी प्यारी दीदी ,सीतल दीदी

स्वेता दीदी-सीतल तो मुझसे भी सुंदर है.

रानी-ये सही कहा. पर कविता और लीना ऐसे चुप क्यूँ बैठी है

अवी-उनको डिस्ट्रब मत करना. वो प्लान बना रही है

स्वेता दीदी-कैसा प्लान

कोमल-ये दोनो कब क्या करती है कुछ पता नही चलता.

रानी-कविता क्या बात है.मेरे आने के बाद भी ऐसेचूप हो

कविता और लीना खड़ी हो गयी

कविता-हम सब एक ग्रूप मे, और दूसरे ग्रूप मे राज ,राजेश, भैया और विद्या

स्वेता दीदी-ग्रूप ,आगे बोलो

लीना-एक ग्रूप का मेंबर गाना गाएगा तो दूसरे ग्रूप का मेंबर डॅन्स करेगा.

स्वेता दíदी-डॅन्स, मैं नही करने वाली

कोमल-कविता ,स्वेता दीदी की बात मत सुनो तुम शुरू करो

कविता-शुरू करते है राजेश भैया से

राजेश ने अपना नाम सुनते एक बदिक्षलया सा गाना शुरू कर दिया

राजेश के गाना गाते ही लीना खड़ी हो गयी .और राजेश के गाने पे ठुमके लगाने लगी.

राजेश गाने के साथ तबला बजा रहा था तो लीना भी अपनी पायल के गुणगरू की आवाज़ से राजेश के गाने को सग़ीत देने लगी

लीना के ठुमके देख कर मैं सीटी बजाने लगा तो रानी ने भी मेरे साथ सीटी बजा दी.

और बुआ के साथ चाची भी लीना का डॅन्स देखने लगी.

राजेश के गाना बंद करते ही लीना अपनी जगह पर बैठ गयी

कविता -अब कोमल दीदी की बारी

मुझे लगा कि कोमल मना करेगी,पर कोमल खड़ी होकर गाने लगी.

कोमल तो कोयल की तरह मधुर आवाज़ मे गाना गा रही थी.

कोमल की मधुर आवाज़ सुनते ही हम ने शोर मचाना बंद किया और कोमल की मधुर आवाज़ मे खो गये

.

कोमल की मधुर आवाज़ सुनकर बच्चों ने भी रोना बंद किया. बुआ और चाची भी अपनी बाते बंद करके कोमल का गाना सुनने लगी.

हमे पता नही था कि कोमल इतना अच्छा गाती है.

कोमल अपनी धुन मे खो कर आँखे बंद कर अपनी सुरीली आवाज़ से हमारे दिल जीतने लगी.

कोमल का गाना हमे इतना अच्छा लगा कि कोमल ऐसे ही गाती रहे

कोमल ने अपना गाना बंद किया तो ऐसा लग रहा था कि किसी ने हमारी खुशी छिन ली हो

नेहा बुआ ने अपनी जगह से उठ कर कोमल के माथे पर किस किया

स्वेता दीदी-कोमल तुम तो

कोमल-मैं तो बाथरूम सिंगर हूँ

सीतल दीदी-फिर तो बाथरूम मे गाना सुनने आना होगा.

कविता-वो सब बाद मे, अब स्वेता दीदी की बारी

स्वेता दीदी रॉकिंग गाना शुरू किया.

हमे डॅन्स करना था पर करेगा कौन

कविता-भैया ,आपको डॅन्स करना होगा.

मैं ने विद्या को डॅन्स करने को कहा.

विद्या-मुझे डॅन्स नही आता

रानी-यहाँ प्राइज़ थोड़े मिलने वाला है. जो आता है वही करो

फिर क्या था स्वेता दीदी के रॉकिंग डॅन्स पे विद्या ने टपोरी डॅन्स शुरू किया.

विद्या के टपोरी डॅन्स पे सब ने सीटी बजाई

ऐसे एक एक करके हम सब ने डॅन्स किया गाना गाया कर अपने अंदर के सिंगर को सबके सामने लाया.

मेरे बेसुरे गाने पे रानी को 1स्ट क्लास डॅन्स अजीब कॉंबिनेशन था.

फिर भी इस मे मज़ा आ रहा था

पर फिर से एक राउंड खेलने से बोर हो रहे थे

कोमल-अब बोर हो रहा है.

राजेश-कुछ और खेलते है

विद्या-ट्रूथ आंड डेर खेलते है

सब ने एक साथ ना कहा

क्यू कि हर किसी का कोई ना कोई राज़ था जिस से कोई ट्रूथ आंड डेर नही खेलना चाहता था.

विद्या-ये तो अच्छा गेम है

स्वेता दीदी-गेम अच्छा है पर इस गेम मे हमारी ज़्यादा खिचाई होगी. रोहन और सोहन के नाम से

कोमल-रोहन जीजू आते तो बहुत मज़ा आता

रानी-फिर तो लास्ट की सीट पहले बुक होती

स्वेता दीदी-समझी

विद्या-हाँ,पर अब क्या खेलेंगे

राजेश-लीना कुछ सोच ना

लीना-सोच लिया

राजेश-क्या

लीना-पंच पे पंच

राज-बॉक्सिंग खेलनी है. मैं तय्यार हूँ

कविता-डायलॉग वाले पंच

रानी-सुनने मे अच्छा लग रहा है

स्वेता दीदी-चलो खेल कर देखते है

विद्या -हम अपने भी डायलॉग बना सकते है. मज़ा आएगा.

लीना-मैं शुरू करती हूँ " मैं आज भी फेके हुए पैसे नही उठाती हूँ"

राजेश-जानी ये पैसे नही चिलर है. उठा ले वरना कॉल कैसे करेगा

कोमल-गणपत चिलर मे तो दारू भी नही मिलती.खोका हो तो बता

नेहा बुआ-कोमल ये क्या बोल रही हो

नेहा बुआ की बात सुनते ही हम चुप हो गये

नीता बुआ-नेहा वो गेम खेल रहे है. उनको खेलने दो,खेलो तुम सब

हम फिर से पंच पे पंच गेम खेलने लगे

अवी-कोमल डार्लिंग सोना (गोल्ड) कहाँ है खोके मे

रानी-काका, सोना भन्गर की दुकान मे किलो के भाव बिकता है.

विद्या-डार्लिंग वो सोना नही प्यास है

कविता-प्यास लगी है तो कुएँ के पास जाओ, शराब के ठेके पे क्या रखा है

राज-मैं तो छोटसा नन्हा सा बच्चा हूँ. मुझे शराब नही दूध चाहिए

राजेश-दूध की जगह प्यास ले लो, 200 रुपये किलो

लीना-200 रुपये किलो प्यास, अब क्या रुलाएगा क्या

विद्या-रोते रोते हसना है तो 100 पे कॉल करो, 3र्ड डिग्री होने के बाद भी पोलीस की जॉब करते है.

कोमल-पोलीस का डंडा हसता नही रुलाता है

राज-क्यू कि पोलीस हफ्ते मे प्यास लेते है

लीना-तूने तो फिर रुला दिया.

विद्या-ये अली का आसू, ये राम का आसू, दोनो को मिला दो, अब बता कौन सा आसू मुसलमान का है और कौन आसू हिंदू का

रानी-रोना है तो बकेट मे रोना ले , गॅब्बर नहा तो लेगा

राज-गॅब्बर तेरी बदबू सूंघ कर ठाकुर आ जाएगा ,नहा ले

सीतल दीदी-गॅब्बर होली आने वाली है , पिचकारी तय्यार रख

राज-ठाकुर तेरी पिचकारी मुझे दे दे, तेरे पास हाथ नही

स्वेता दीदी-सांभा सरकार ने हम पे कितने किलो प्यास इनाम रखा है

विद्या-चस्मा लगा लो किलो नही ग्राम था

कविता-50 ग्राम प्यास तो सोनार की दुकान पे मिलती है

राज-मेरी 2 आँखे पीछे है

रानी-4 आँखो वाले तेरा नाम क्या है

अवी-रानी डार्लिंग तेरा नाम तो मैं ने अपने दिल पे लिखा है.

मेरा डायलॉग सुनकर सब शॉक्ड हो गये.

सब मुझे अपनी आँखे बड़ी बड़ी करके घूर्ने लगे

रानी मेरी स्मार्टनेस देख कर मन ही मन पे हंस रही थी

सब के सामने उसको प्रपोज जो किया था.

लेकिन मेरी स्मार्ट बहनों का ध्यान दूसरी तरफ करना होगा वरना मैं फस जाउन्गा.

अवी-कविता मेरे पंच पे पंच मारो वरना हार जाओगी

मेरी बात सुनकर सब नॉर्मल हो गये

कोमल-तुम दिल की बात करते हो मैं ने तो अपने खून से अपनी आत्मा पर तुम्हारा नाम लिखा है

कोमल के पंच से फिर से सब शॉक्ड हो गये

मैं तो कोमल को देखता रह गया

रानी-नाम मे क्या रखा है. मैं ने तो अपनी आत्मा तुम्हारे नाम की है

अब तो कुछ ज़्यादा हो रहा था.

कविता-हमारी आत्मा 2 नही एक है

अब तो ऐसा लग रहा था कि हर कोई अपने दिल की बात बता रहा है

ऐसे मे राज ने कॉमेडी वाला पंच मार कर बात घुमा दी

राज-आत्मा आत्मा ना कहो, रात मे मेरा पेशाब निकलता है.

राज की बात सुनकर सब हँसने लगे

सब मेरे पंच को भूल गये

और ड्राइवर ने लास्ट पंच मारा

ड्राइवर-होटेल पे कुछ देर रुकते है. लंच करते है

और हम ने आधे से ज़्यादा हमारा सफ़र तय कर लिया.
 
838 आ

रानी को पिकप करते ही हमारा सफ़र स्टार्ट हो गया.

चाची और बुआ ने कार के पीछे का पार्ट अपने लिए बुक कर लिया.

और हम सब आगे मस्ती करने लगे

बुआ और चाची दबी हुई आवाज़ मे बाते कर रही थी.

और बस शहर के बाहर जाते ही हम मस्ती करने लगे.

और बुआ चाची के साथ बाते करने लगी है.

नेहा बुआ-पहली बार हम ऐसे पूरी फॅमिली के साथ बाहर घूमने जा रहे है

नीता बुआ-मैं तो काफ़ी एग्ज़ाइट हूँ ,पिताजी से मिलने के लिए और टूर को एंजाय करने के लिए

म चाची-मुझे तो रात मे नींद ही नही आ रही थी ,टूर के बारे मे सोच कर

पूजा बुआ-टूर का तो सब ठीक है. पर पिताजी की तबीयत मे कोई सुधार नही आया है

ब चाची-आ जाएगा. अपने पोतो को देख कर क्या पता कुछ फरक पड़ जाए.

नेहा बुआ-काश ऐसा हो. पिताजी को उस हालत मे मैं नही देख पाउन्गी

नीता बुआ-नेहा सम्भालो खुद को, अगर तुम हिम्मत खो दोगि तो बच्चो का क्या होगा

पूजा बुआ-नीता सही कह रही है. तुझे खुद पे काबू रखना होगा.

नेहा बुआ-पिताजी के साथ ये क्या हो गया. कितने साल हो गये वो ज़िंदा लाश बने हुए है

ब चाची-वो हमारे साथ है यही काफ़ी है.

नेहा बुआ-पिताजी को मैं कुछ नही होने दुगी. माँ तो हमे छोड़ कर चली गयी. पिताजी के बिना मैं जी नही पाउन्गि.

सी चाची-वो देखो ,कोमल के लिए तुम्हे हिम्मत से काम लेना होगा.

और कोमल ने गाना शुरू कर दिया.

कोमल की मधुर आवाज़ सुनकर नेहा बुआ पिघल गयी.

नेहा बुआ के लिए कोमल ही सब कुछ थी.

कोमल की मधुर आवाज़ ने नेहा बुआ को हिम्मत देनी शुरू की.

कोमल का गाना ख़तम होते ही नेहा बुआ उठ कर कोमल के पास गयी. और उसे प्यार से किस किया.

हम वापस अपनी मस्ती मे खो गये .और बुआ वापस अपनी बातों पे लग गयी.

पूजा बुआ-मीना मैं क्या कह रही थी कि पिताजी को ऐसी हालत मे देख कर गड़बड़ हो गयी तो

सी चाची- गड़बड़ तो होनी है. पर ये फॅमिली टूर भी तो ज़रूरी था.

ब चाची-पिताजी पूरी फॅमिली को एक साथ देख कर खुश हो जाएँगे, क्या पता उस से कोई फरक पड़ जाए

पूजा बुआ-इतने सालो मे कुछ नही हुआ. अब क्या होगा.डॉक्टर तो हिम्मत हार चुके है

नेहा बुआ-पिताजी की हालत मे 1%भी सुधार नही हुआ है

नीता बुआ-पर मीना के कहने पे हम सब से झूठ बोलते आ रहे है कि पिताजी की हालत अच्छी हुई है.पिताजी ने बात की, वो खुश है ,पर अब क्या होगा जब वो पिताजी को ऐसे देखेंगे

सी चाची-वैसा करना पड़ा वरना अवी अपने दादाजी के बारे मे सुनकर आज जैसा अवी कैसे बन पाता, 2 साल पहले अवी कैसे चुप चाप रहता था और आज देखो कितना हस्ता खेलता रहता है.

ब चाची-मीना सही कह रही है. अवी मे कितना बदलाव आ गया है. और उसके साथ बाकी सब मे भी एक नयी जान आ गयी है

नेहा बुआ-कोमल कविता और लीना भी खुश रहती है

पूजा बुआ-बात वो नही है, बात ये है कि अवी ने पहली बार उसके दादाजी को ऐसी हालत मे देखा था तो उसकी क्या हालत हुई थी पता हैना. उसके वजह से तो पिताजी को आश्रम मे अवी से दूर रखना पड़ा

ब चाची-फिर से ऐसा नही होना चाहिए

सी चाची-तब अवी की एज ही क्या थी. अब अवी काफ़ी समझदार हो गया है

म चाची-वो तो है. अभी अवी किसी का भी सामना कर सकता है

नीता बुआ-आज उसे अपने दादाजी का सामना करना होगा.

सी चाची-आप सब घबरा क्यू रहे है. मैं हूँ ना. हम मिलकर सब संभाल लेंगे

नेहा बुआ-वो कैसे

सी चाची- हम को

कोमल का डायलॉग सुनकर नेहा बुआ ने छोटी चाची को रोक लिया .

पर नीता बुआ ने नेहा बुआ को शांत किया.

नीता बुआ-मीना क्या कह रही थी तू

सी चाची-हम बच्चो को बताएँगे कि उनके दादाजी की तबीयत अच्छी हुई थी पर कुछ हफ्ते पहले उनको फिर से हार्ट अटॅक आया था. जिस से उनकी तबीयत फिर खराब हो गयी

पूजा बुआ-ये तो बढ़िया रहेगा.

ब चाची-अवी का क्या

सी चाची -उसको मैं समझा दुगी. उसको पता है दादाजी को हार्ट अटॅक आया था.

म चाची-और उनका क्या

सी चाची-सुमन दीदी आप उनके साथ रहना जिस से वो ज़्यादा दिमाग़ नही लगाएँगे

नीता बुआ-और स्वेता बाकियो को संभाल लेगी

सी चाची-यही तो, हम 6 है. और एक स्वेता ,हम आपस मे बच्चो को शेर कर लेंगे ,जिस से कोई ज़्यादा सवाल नही पूछेगा.और अवी के साथ मैं रहूगी

पूजा बुआ-ये तो ठीक है. पर ऐसा हम कब तक करेंगे.एक दिन तो अवी को बताना होगा, अवी को उसके पापा के बारे मे बताना होगा

सी चाची-बता देंगे. मुझे लगता है वो दिन ज़्यादा दूर नही है

नेहा बुआ-जितना ज़रूरी है वही बताना वरना मुझसे बुरा कोई नही होगा.

सी चाची-जो उसके लिए अच्छा होगा वही करूगी

नेहा बुआ-पर पिताजी कब ठीक होंगे

नीता बुआ-हिम्मत रखो ,सब ठीक हो जाएगा.

पूजा बुआ-ठाकुरजी पूरी कॉसिश कर रहे है पिताजी को ठीक करने की. भगवान ने चाहा तो सब ठीक हो जाएगा.

म चाची-हम साथ है , हमारी दुआ एक दिन रंग ज़रूर लाएगी

ब चाची-काश ऐसा हो , आज भी उस दिन जो हुआ उसको ...

बड़ी चाची के कुछ कहने से पहले छोटी चाची उनको रोक लिया.

और ड्राइवर ने बस रोक ली लंच करने के लिए

हम इतना लंबा सफ़र काफ़ी दिन बाद तय कर रहे थे.जिस से हम एक ब्रेक चाहिए था

ड्राइवर के बस रोकते ही हम सब हरकत मे आ गये

हम ने पंच पे पंच गेम खेलना बंद किया

बुआ और चाची ने भी अपनी बातों को फुल स्टॉप लगा दिया.
 
Back
Top