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मैं और मेरा परिवार

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843 आ

होटेल आते ही चाचा पीछे हो गये और राजेश और मैं ने मोर्चा संभाल लिया.

मैं ने चाचा को बोल कर बस से सारा समान उतार दिया.

और मनेजर से रूम की चाबी लेकर रूम को सब मे बताने लगा.

1 स्वेता दीदी सीतल दीदी

2 रानी कोमल

3 कविता लीना

4 नेहा बुआ नीता बुआ

5 पूजा बुआ राज

6 चाची चाचा

7 चाची चाची

8 अवी राजेश

9 विद्या.

विद्या को सेपरेट रूम मिला था. ये देख कर नीता बुआ ने कहा कि उसको सेपरेट रूम चाहिए. पर नेहा बुआ ने नीता बुआ खुद से दूर नही जाने दिया.

विद्या लकी थी जो उसे सेपरेट रूम मिला था

चाचा चाची के रूम इंटर्रली कनेक्ट थे.जिस से चाचा जिसके साथ सोना चाहते सो सकते थे.

सबको अपने अपने रूम की चाबी देते हुए मैं ने उनको बताया कि 1 घंटे मे हम सब नीचे लॉबी मे मिलेंगे और फिर कॅंटीन मे जाकर खाना खाएँगे

चाची ने कहा कि वो अपने रूम मे खाना मँगवा लेगी. बुआ ने भी यही कहा.

जिस से हम भाई बहन होटेल की कॅंटीन मे जाकर खाना खा लेंगे.

सबका सामान पहले उनके कमरे मे चला गया था. चाबी मिलते ही कविता और लीना भाग कर अपने रूम मे चली गयी.

और रूम मे जाते, आलीशान रूम देख कर दोनो बेड पर उछलने लगी.

बाथरूम मे बाथटॅब शवर देख कर तो दोनो उछल पड़ी.

उनका रूम हमारे फ्लोर मे पहला था जिस से हम फ्लोर पे आते ही कविता और लीना की उछल कूद देखने लगे

कविता-भैया ये होटेल तो फिल्मों जैसा है. बेड तो कितना नरम है

नेहा बुआ-कविता. ऐसी बच्चों जैसी हरकते करना है तो वापस भेज देंगे

कविता-आप कुछ नही कर सकती. भैया ने हम कहा है कि हम जैसा करना चाहते है वैसा कर सकते है.

नीता बुआ-कविता , आज़ादी मिली है तो इतना फ़ायदा नही उठना चाहिए.

लीना-हम तो पूरा फ़ायदा उठा लेंगे.जीने के है 4 दिन

राज कहाँ पीछे रहता वो भी कविता के साथ बेड पे जंप मारने लगा.

पूजा बुआ-नेहा एंजाय करने दो बच्चों को. एंजाय करने तो आए है.

अब तो कविता लीना को लाइसेन्स मिल गया.

पूजा बुआ-राज अपने रूम मे चलो .वहाँ भी ऐसा बेड है.

कविता और लीना को उनके हाल पर छोड़ कर हम अपने अपने रूम मे चले गये.

मैं तो रूम मे जाते ही शवर के नीचे जाकर खड़ा हो गया.

शवर मे नहा कर दादाजी के बारे मे सोचना बंद कर रहा था कि फिर से दादाजी का चेहरा मेरे सामने आ जाता.

मैं तो अपने ही सोच मे डूबा था.

और बाकी सब होटेल की आलीशान लाइफ को एंजाय करने लगे.

हर कोई अपने रूम मे जाते ही बेड पर ऐसे गिरे कि कभी वहाँ से उठे ही ना.

चाचा अपने रूम मे चले गये और साथ मे बड़ी चाची को अपने साथ ले गये.

पर अंदर जाते सीमा चाची इंटर कनेक्टेड डोर से चाचा के रूम मे आ गयी.

चाचा डबल खुश हो गये. अब जिस चाची के साथ एंजाय करना चाहते है वो कर सकते है.

पर आज तो चाचा को बड़ी चाची को प्यार करना था

कोमल अपने घर से निकल कर इस आलीशान रूम मे आकर खुश हो गयी. रानी के लिए ये नया नही था पर मेरी फॅमिली केसाथ आने से वो भी फॅमिली के प्यार को फील कर रही थी.

स्वेता दीदी तो जल्द से जल्द अपना मेकप क्लीन करना चाहती थी जो दादाजी के लिए दुल्हन की तरह किया था.

राजेश ओर्मैन तो अपने समय पर तय्यार हो गये पर बाकी सब फुल्लेंजॉय करते हुए रेडी हो रही थी.

विद्या अकेली थी तो मैं उसको बुलाने गया .और राजेश बाकियो को बुला रहा था.

विद्या के रूम मे जाते ही मुझे झटका लगा .विद्या बेड पर बैठ कर रो रही थी.

अब इसको क्या हो गया .मैं विद्या के पास जाकर उसको चुप करने लगा.

अवी-क्या हुआ ,रो क्यूँ रही हो

विद्या-अवी मुझे इतना प्यार पहले कभी नही मिला जितना तुम्हारी फॅमिली मुझे दे रही है.

अवी-तो इसमे रो क्यूँ रही हो.

विद्या-मैं ने अपना बचपन झोंपड़ी मे बिताया है. मेरी माँ कहती थी कि एक दिन मैं झोंपड़ी से निकल कर बड़े घर मे रहूगी. और आज मेरी मा की बात सच हो गयी. एक ज़ोपाड़ी मे रहने वाली इस आलीशान रूम की रहेगी. और ये तुम ने पूरा किया .तुम मेरे लिए सब कुछ हो .

अवी-मतलब खुशी के आसू थे.

विद्या-हाँ

अवी-विद्या ,दिन बदलते देर नही लगते .पहले तुम झोपड़ी रहती थी अब तुम्हारा खुद का घर है. पहले तुम अनाथ थी अब इतनी अच्छी फॅमिली मिल गयी. हर दिन एक जैसा नही होता. आज गम तो कल खुशी मिलती है.

विद्या-ये खुशी तुम ने दी है.

अवी-तुम मुझे खुशी देना.

विद्या-वोटो देनी होगी.

अवी-चलो जल्दी तय्यार हो जाओ, हमे डिन्नर करने जाना है. सब इंतज़ार कर रहे है.

विद्या-10 मिनिट मे आती हूँ

विद्या भी इस टूर से खुश है. चलो देखता हूँ मेरे दिल की रानी क्या कर रही है.

मैं रानी के रूम मे गया .दोनो तय्यार होके मेरा इंतज़ार कर रही थी.

दोनो ऐसी तय्यार हुई थी कि लग रहा था कि दोनो बहनें है.

अवी-कोमल तुम तो एंजल लग रही हो

कोमल-रानी की तरफ देखो ,शायद तुम अपना इरादा बदल दो

अवी-रानी. वो तुम्हारे सामने पानी कम चाइ है. तुम एंजल और रानी चुड़ेल दिख रही है.

रानी-मैं चुड़ेल , स्वेता दीदी को आने दो फिर देखती हूँ तुम्हे

स्वेता दीदी रानी के रूम मे आते हुए

स्वेता दीदी-कौन क्या दिख रहा है.

रानी-अच्छा हुआ दीदी आप आ गयी. देखिए अवी मुझे क्या कह रहा है.

सीतल दीदी-क्या हो रहा है

अवी-मैं इनकी तारीफ कर रहा था. रानी एंजल दिख रही है और कोमल चुड़ेल

स्वेला दीदी-क्या

कोमल-मैं चुड़ेल ,अभी तो मुझे एंजल और रानी को चुड़ेल बोल रहे थे.

रानी-कोमल मुझे तो लग रहा है. थोड़ी देर बाद अवी हम दोनो को चुड़ेल बोलने लग जाएगा.

लीना-कौन चुड़ेल

कविता और लीना भी तय्यार होकर आ गयी.

अवी-लो आ गयी मेरी एंजल, तुम दोनो(कोमल और रानी) तो चुड़ेल हो.

कविता-हम चुड़ेल

अवी-नही. मेरी प्यारी गुड़िया चुड़ेल कैसे हो सकती है. चुड़ेल तो रानी और कोमल है

कविता-चुड़ेल नही. महा चुड़ेल

कोमल-चुड़ेल ,तू घर चल तुझे बताती हूँ

कविता-भैया है तो आप भी कुछ नही कर सकती.

बीच मे विद्या ने एंट्री मार दी.

विद्या -क्या हो रहा है

स्वेता दीदी-लो विद्या भी आ गयी .चलो डिन्नर करने चलते

सबके आते हम होटेल की कॅंटीन मे चले गये.

चाची ने अपने कमरे मे खाना मँगवा लिया .बुआ ने अपने कमरे.

अमित सुमित और परी तो दूध पी कर सो गयी थी.

उनके सोते चाची ने खाना शुरू किया.

हम भी कॅंटीन मे जाकर डिन्नर की शुरुआत की

सब एक से बढ़ कर एक थे.

सबको पहले मेनू कार्ड चाहिए था. कोई हार नही मानना चाहता था.ऐसे मे बडो को रुकना पड़ा.और छोटो ने बाज़ी मार ली.

खाना तो आ गया .पर मेरे हलक से नीवाला नही उतर रहा था.

दादाजी की वजह से कुछ अच्छा नही लग रहा था.

पर मेरी वजह से बाकियो को प्राब्लम ना हो इस लिए थोड़ा बहुत खाना खा लिया.

रानी और कोमल ने मुझे बीच मे पूछ लिया कि क्या हुआ.

मैं ने स्माइल दे कर उनको बताया दिया कि कुछ नही ऐसे ही.

डिन्नर करने के बाद राज के कहने पे आइस क्रीम खानी पड़ी.

फिर स्वेता दीदी ने कहा कि कल घूमने जाना है तो सब अपने अपने रूम मे आराम करने के लिए चली गयी.

मैं राजेश के साथ अपने रूम मे आ गया.

राजेश तो अपने मोबाइल मे लग गया.

मैं बेड पर लेट कर आराम करने लगा.
 
844

मैं बेड पर लेट तो गया पर मुझे अच्छा नही लगा.

मुझे दादाजी को फिर से मिलने का मन हो रहा था. ऐसा लग रहा था कि मैं दादाजी के पास ही रहूं.

दादाजी के पास रह कर उनको जल्दी ठीक कर दूं.

मुझे नींद भी नही आ रही थी .बस दादाजी का ख़याल मेरे दिमाग़ मे आ रहा था.

ऐसे मे मुझे चाची की कमी महसूस होने लगी. ऐसे मे सिर्फ़ चाची मेरी मदद कर सकती है

चाची से कुछ देर बाते करूँगा तो अच्छा लगेगा. उनसे बाते करके दिल हल्का हो जाएगा.

मैं राजेश को बता कर चाची के पास चला गया.

चाची के कमरे से पहले रानी का रूम था .सोचा रानी से मिल लूँ पर कोमल के होते रानी से मिल कर कोई फ़ायदा नही होगा.

और बिना वजह मेरे वजह से उनको परेशान करना अच्छा नही होगा.

सब यहाँ पर एंजाय करने आए थे. ऐसे उनको टेन्षन देना ठीक नही होगा.

इस लिए मैं चाची के रूम के पास चला गया.

उस रूम मे चाचा होंगे मुझे इस रूम मे जाना होगा.

चाची भी तो आज तक गयी होगी. बच्चे भी सो गये होंगे ,क्या मुझे चाची को डिस्ट्रब करना चाहिए.

मैं चाची के रूम के पास आकर सोच मे पड़ गया.

ऐसी दुविधा मे हो तो फ़ैसला जल्दी करना चाहिए.

पर फ़ैसले तो भगवान करता है. और जैसा सोचा था वही हुआ.

पता नही कैसे पर मैं जैसे वापस जाने के लिए मुड़ा था कि चाची ने दूर खोल दिया.

मैं तो नींद की गोली खा कर सो जाने का फ़ैसला किया था पर लगता है मेरा चाची से मिलना लिखा हुआ था.

सी चाची-अवी ,कहाँ जा रहे हो,

अवी-कुछ नही चाची ऐसे ही.नींद नही आ रही थी तो थोड़ा घूमने निकला था.

सी चाची-झूठ मत बोलो, हमसे मिलने आए थे ना.

अवी-वो मैं

सी चाची-चल आ अंदर, हम अभी तक सोए नही है.

और चाची मुझे अपने रूम मे ले गयी. जहाँ सिर्फ़ सीमा चाची थी. जो टीवी देख रही थी.

मेरे आते ही सीमा चाची ने टीवी बंद की ,मैं बेड पर जाकर बैठ गया.

अवी-चाची परी सो गयी.

म चाची-परी तो कब की सो गयी. पर तू क्या कर रहा है.

सी चाची-दीदी. अवी आया तो हम से मिलने था पर हम डिस्ट्रब ना हो इस लिए वापस जा रहा था.

म चाची-क्या बात है अवी.

अवी-कुछ नही चाची. बस आप से बात करने का मन हो रहा था पर आप सो रही होगी ये सोच कर मैं वापस जा रहा था

सी चाची-इतनी सी बात है

म चाची-कुछ और बात है ,सच बता ,

अवी-मेरी छोड़िए ,आप बताइए कैसा लगा होटेल ,

म चाची-ऐसे होटेल मे ऐसे रूम मे रहनेक़ा मेरा सपना था.पर ऐसा लगा था कि मेरा सपना सपना ही रहेगा. पर तूने मेरा सपना पूरा किया

अवी-आप मेरे लिए सब कुछ हो. आपका ख़याल मैं नही रखूँगा तो कौन रखेगा.

म चाची-मुझे तो लगता है मेरे सारे सपने जल्दी पूरे होंगे.

अवी-आप लिस्ट बना लो मैं पूरे सपने पूरे करूँगा.

म चाची-सच, फिर तो मज़ा आ जाएगा. आज तो मुझे लग रहा है मैं हेरोयिन हूँ. फ़िल्मो जैसी नाइटी पहन कर इस आलीशान रूम मे मखमल जैसे बेड पर आराम करना ,इस से ज़्यादा क्या चाहिए. और तो और बाथरूम मे शवर ,और उसे क्या कहते है

सी चाची-बाथटब

म चाची-बाथटब मे नहाना, जैसी हेरोयिन नहाती है. सब सपने जैसा लग रहा है.

अवी-मेरी पढ़ाई हो जाने दीजिए फिर देखना मैं आपके लिए इस होटेल से बढ़िया घर बनाउन्गा. जहाँ आप महारानी जैसी रहेंगी.

म चाची-झोपड़ी की रानी को हवेली की महारानी बनाएगा

अवी-हाँ

सी चाची-दीदी आप ये क्या बोल रही थी.अवी को देखिए वो परेशान दिख रहा है.

अवी-मुझे कुछ नही हुआ है.

म चाची-हाँ, मीना मैं भी कहा अपनी बाते लेकर बैठ गयी. अवी क्या बात है. झूठ नही सच बताना.

अवी-चाची वो

सी चाची-बता रहा है या दीदी को बुलाऊ

हम बाते कर रहे थे कि बड़ी चाची हमारे रूम मे आ गयी.

बड़ी चाची चाचा के साथ प्यार कर रही थी. पता नही उनको मेरे बारे मे कैसे पता चला.

ब चाची-क्या हो रहा है यहाँ पर. मुझे बुलाने की बात क्यूँ हो रही है. और अवी यहाँ क्या कर रहा है.

ऐसा लग रहा था कि बड़ी चाची चाचा से प्यार करते हुए बीच मे आ गयी. चाची के बाल बिखरे हुए थे और चाची सिर्फ़ गाउन पहन कर आई थी.

ब चाची-कोई मेरे सवाल का जवाब देगा कि नही.

म चाची-दीदी आप क्यूँ आई. हम तो ऐसे ही

बड़ी चाची मेरे पास आ गयी .

ब चाची-क्या हुआ अवी.

अवी-चाची वो दादाजी की याद आ रही थी.

बड़ी चाची मेरी बात सुनते मेरे गले लग गयी.

ब चाची-दोपेहर मे तो मिले थे ना

अवी-चाची ऐसा लग रहा है कि मैं दादाजी के पास ही रुकु .उनकी सेवा करूँ,

ब चाची-मुझे पता था तू ऐसा ही कहेगा इसी लिए तुझे इतने साल से दादाजी को मिलने नही लाया .

अवी-चाची हम दादाजी को घर लेकर जाते है. गाँव मे उनका इलाज करेंगे.

ब चाची-गाँव मे इजाज़ होता तो यहाँ क्यूँ रखते ,पिताजी का यही रहना उनके लिए हमारे लिए अच्छा है.

सी चाची-अवी. दादाजी को अगर कहीं हिलाया तो उनकी सेहत और खराब हो जाएगी. हम ऐसा कर चुके है.

अवी-पर चाची

ब चाची-देख पिताजी को अगर गाँव लेकर गये तो शायद वो हमे हमेशा के लिए छोड़

अवी-नही. उनको कुछ नही होगा.

ब चाची-हम उनको कुछ होने भी नही देंगे

सी चाची-आओ तुम ने देखा था ना तुम्हारे रोते दादाजी को क्या हुआ था. अगर वो हमारे साथ रहेगा तो उनकी हालत और खराब होगी.

अवी-आप सही कह रही है. लेकिन दादाजी के बारे मे सोच कर मुझे नींद नही आ रही.-

ब चाची-तू ज़्यादा मत सोच, भगवान ने चाहा तो पिताजी जल्दी ठीक हो जाएँगे.

सी चाची-और ,जब तुम्हे लगेगा तब तुम दादाजी से मिलने आ जाना

अवी-मैं अकेले मिलने आ सकता हूँ

ब चाची-हां, हम ने डॉक्टर को बता दिया कि जब भी तुम आओगी तो तुम्हे मिलने दिया जाए

अवी-सच चाची

ब चाची-हाँ, अब तो खुश हो ना

अवी-हाँ, पर

ब चाची-तेरे सारे पर वर के जवाब मैं देती हूँ. एक काम कर आज तू यही सो जा

अवी-मैं भी यही सोच रहा था कि आज आपके पास सो जाउ

ब चाची-तुझे क्या लगता है. और तेरे लिए क्या अच्छा है वो मुझे पता है

अवी-तो आपको मेरे आने के बारे मे कैसे पता चला

ब चाची-तेरी माँ हूँ. अपने बेटे को परेशान देख कर मुझे तो आना था.

अवी-आप

ब चाची-मुझे ऐसा लगा कि मेरा बेटा मुसीबत है तो मैं देखने आ गयी.

अवी-और आपने मेरी परेशानी अपने प्यार से ख़तम की

ब चाची-तू आज मेरे पास सो जा, तुझे अच्छा लगेगा. मीना मेरे लिए जगह बना

म चाची-दीदी

ब चाची-क्या है. सुना नही मैं अवी के साथ सोउंगी.

म चाची-दीदी.

और सीमा चाची ने डोर की तरफ देखने कोकहा.

दूसरे रूम मे जाने के डोर पे चाचा खड़े थे .

चाचा गुस्से मे मेरी तरफ देख रहे थे.

आज चाचा बड़ी चाची को प्यार करने के मूड मे थे.

सुबह से चाचा रात होने का इंतज़ार कर रहे थे.और वो चाची को प्यार कर रहे थे कि बीच मे मैं आ गया.

बड़ी चाची के मेरे साथ सोने की बात से चाचा को मुझ पे बहुत गुस्सा आ रहा था.

मेरे वजह से बड़ी चाची का प्यार उनको नही मिल रहा था.

अगर प्यार के बीच मे कोई आ जाए तो ऐसा लगता है खून कर दूं.

पर चाचा ने कुछ नही कहा पर गुस्से मे डोर हमारे मूह पे मार कर अपने रूम मे चले गये.

चाचा के गुस्से को देख कर बड़ी चाची दुविधा मे थी कि वो क्या करे. अपने बेटे के पास रुके या अपने पति के पास जाइए

ऐसे दुविधा मे हर औरत कभी ना कभी होती है. और जीत हमेशा एक माँ की होती है. एक बीवी इस मे हार जाती है.

बड़ी चाची ने मेरे लिए ,मुझे परेशान देख कर ,मेरे साथ रुकने का फ़ैसला किया.

अवी-चाची मैं अपने रूम मे सो जाउन्गा .आप चाचा के पास जाइए

ब चाची-कुछ नही हुआ. तू आज मेरे पास सोएगा

अवी-पर चाचा जी

ब चाची-उनका गुस्सा मैं सुबह ठंडा कर दुगी.

अवी-नही चाची. आपको जाना चाहिए

चाचा ने इतने ज़ोर से डोर बंद किया था कि अमित रोने लगा.

अमित को फिर से सुलाने के लिए छोटी चाची अमित को दूध पिलाने लगी.

सी चाची-अवी. ये हम से ज़्यादा देर गुस्सा नही रह सकते .तू यही सो जा.

अवी-नही चाची. पहले चाचा मुझे पसंद नही करते और अब तो

ब चाची-किसने कहा तेरे चाचा तुझे प्यार नही करते. उनके प्यार करने का तरीका अलग है .

अवी-पर

ब चाची-कहा ना तुम यही मेरे पास रुकोंगे तो यही रुकोंगे

म चाची-तुझे चाचा के गुस्से होने से बुरा लग रहा है तो उसका हाल मेरे पास है

ब चाची-क्या?

म चाची-दीदी मैं उनके पास जाती हूँ. उनका गुस्सा ख़तम करती हूँ.

सी चाची-लो हो गयी प्राब्लम ख़तम

ब चाची-सीमा

म चाची-दीदी मैं संभाल लुगी.

चलो चाचा का मूड अच्छा हो जाएगा.

मैं तो रिलॅक्स हो गया.

पर चाची एक दूसरे से कुछ इशारो मे बात कर रही थी.

मुझे तो कुछ समझ नही आया पर इतना जानता था कि चाचा को गुस्सा मैं ने दिलाया है तो मुझे उनका गुस्सा ख़तम करना होगा.

मैं कल उनके लिए कुछ ना कुछ ज़रूर करूँगा.

सीमा चाची ने मेरे लिए अपना बलिदान दे दिया.

चाचा के गुस्से का सामना सीमा चाची को करना था.

सीमा चाची जल्दी चाचा के पास चली गयी.

और छोटी चाची ने अमित को सुला कर हमारे लिए जगह बना दी.

मैं बड़ी चाची और छोटी चाची के बीच मे लेट गया.

बड़ी चाची मेरे सर पे हाथ घुमा कर मुझे सुलाने लगी.

ब चाची-अवी अब कैसा लग रहा है.

अवी-ऐसा की इस रात की सुबह ना हो. मुझे आपका प्यार मिलता रहे

सी चाची-हमारा प्यार हमारे बच्चों के लिए हम ने बचा कर रखा है.

ब चाची-अवी

सी चाची-अवी जब भी रोता था तो आपको अवी के पास रुकना पड़ता. और सीमा दीदी को जाना पड़ता उनके पास

ब चाची-अब पुरानी बाते याद मत दिला

इसी तरह हम बाते कर रहे थे

बड़ी चाची मुझे दादाजी की सोच से बाहर निकाल रही थी

बड़ी चाची मुझे कुछ साल पहले की बाते बता रही थी

जब मैं अपनी माँ को याद करते रोता तो बड़ी चाची कैसे मुझे शांत करती थी

कैसे चाचा का गुस्सा ख़तम कर देती

बड़ी चाची की बाते सुन कर अच्छा लग रहा था
 
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मैं ने जब से दादा जी को देखा तब से मैं उन्ही के बारे मे सोचने लगा

दादा जी की ऐसी हालत मुझसे देखी नही गयी

मेरे वजह से दादा जी की हार्टबीट बढ़ गयी थी

पता नही मेरे दिल और दिमाग़ मे क्या चल रहा था

मैं बस दादा जी के बारे मे सोच रहा था

दादा जी को क्या हुआ होगा

कैसे उनको हार्ट अटॅक आया होगा

मुझे देखते दादा जी की हार्ट बीट बढ़ गयी थी

दादा जी को आश्रम मे क्यू रखा गया

दादा जी अब तक ठीक क्यू नही हुए

ऐसे बहुत से सवाल मेरे दिमाग़ ने चल रहे थे

जिनके जवाब ढूँढे बिना मुझे चैन नही आएगा

इस लिए मैं चाची से मिलने गया था

लेकिन चाची से अपने सवाल के जवाब पाने के चक्कर मे मैं ने चाचा को गुस्सा दिला दिया

अगर मैं भी रानी से प्यार करने का सोचु और बीच ने कोई आ जाए तो मुझे भी गुस्सा आएगा

चाचा तो आज अच्छे मूड मे थे ऐसे मे उनके प्यार के बीच मे मेरे आने से गुस्सा तो आएगा ही

बड़ी चाची क्या करती ऐसे मे , उनको तो मेरे सिवा कोई दिखता ही नही

चाचा के गुस्से का सामना तो बड़ी चाची कर सकती है पर मेरी आँखो मे आँसू देख नही पाएगी

इस लिए बड़ी चाची मेरे पास आ गयी

और सीमा चाची चाचा के पास गयी उनका गुस्सा ठंडा करने को

बड़ी चाची और छोटी चाची मेरे दिमाग़ से दादा जी की बाते निकालने लगी

अवी- चाची

ब चाची- हाँ अवी

अवी- दादा जी कब ठीक होंगे

ब चाची- भगवान ने चाहा तो जल्दी ठीक हो जाएँगे

अवी- दादा जी की ऐसी हालत को कई साल हो गये

ब चाची- हाँ , डॉक्टर ने कहा था ना कि दादा जी मे थोड़ी इंप्रूव्मेंट हुई थी

अवी- चाची दादा जी को हार्ट अट्क क्यू आया था

सी चाची- तुझे क्यू जानना है

अवी- इस लिए कि मैं दादा जी को ठीक करना चाहता हूँ

ब चाची- फिर तो तुम्हे बताना होगा

सी चाची- दीदी

ब चाची- मीना तू ही बता दे क्यू अटॅक आया था

बड़ी चाची की बात सुनकर छोटी चाची रिलॅक्स हो गयी

अवी- चाची कैसे अटॅक आया था

सी चाची- आक्सिडेंट की बात सुनते ही तुम्हारे दादा जी जयसिंघ भाई साब , शालिनी भाभी और तुम्हारी डेत की बात सुनते खुद को संभाल नही पाए और हार्ट अटॅक आ गया , उनको लगा कि तुम्हारी भी डेत हो चुकी है

अवी- आप झूठ बोल रही है

बड़ी चाची थोड़ी शोक्ड हो गयी पर छोटी चाची ने खुद को कंट्रोल मे रखा

सी चाची- मुझे झूठी बोलता है , जा मैं नही बताती

अवी- मेरे मतलब था कि

ब चाची- अवी मीना सच कह रही है ,

अवी- (मैं तो बस देखना चाहता था कि छोटी चाची मेरे झूठ कहते डरती है कि नही , पर छोटी चाची तो छोटी चाची है ) मैं ने बस ऐसे ही कहा था

ब चाची- अवी तू ये फालतू के सवाल छोड़ दे

अवी- दादा जी के बारे मे सोचना तो होगा ही ना

ब चाची- ज़्यादा सोचेगा तो तुम्हारी तबीयत खराब हो जाएगी

अवी- मैं क्या करूँ चाची , जब भी दादा जी के बारे मे सोचना बंद करता हूँ कि फिर से दादा जी की बाते याद आती है

ब चाची- इसी लिए तुझे दादा जी से मिलने नही देते थे

अवी- क्या फिर से मुझे मिलने नही देगी

ब चाची- एक शर्त पे मिलने दुगी

अवी- क्या

ब चाची- अब तू ज़्यादा सोच मत

अवी- लेकिन

ब चाची- तू ऐसे नही मानेगा , तुझे एक कहानी बताती हुँ

सी चाची- कैसी कहानी

अवी- कैसी कहानी चाची

ब चाची- शालिनी भाभी और तेरे पापा की कहानी सुनेगा

अवी- माँ और पापा की कहानी

सी चाची- दीदी देर बहुत हो गयी हमे सोना चाहिए

अवी- छोटी चाची आप कुछ मत कहिए ,

ब चाची- सुनेगा तेरी माँ की कहानी

अवी- हाँ ,,

ब चाची- तेरे माँ और पापा के शादी की कहानी बताती हूँ

अवी-अब तो मैं कहानी सुनकर ही सोउंगा

छोटी चाची थोड़ी टेन्षन मे आ गयी

अवी- बताइए ना चाची

ब चाची- लेकिन एक प्रॉब्लम है

अवी- क्या ?

ब चाची- मुझे कहानी बतानी नही आती है

अवी- क्या ?

ब चाची- मीना तुझे कहानी बताएगी

अवी- छोटी चाची नही , आप बताइए

ब चाची-मीना अच्छे से बताती है , हैना मीना

सी चाची- दीदी

ब चाची- मीना बता दे कहानी , अवी बड़ा हो रहा है

अवी- चाची बताइए ना

छोटी चाची कुछ सोचने लगी

सी चाची- एक शर्त पे बताउन्गी

अवी- यही ना कि मैं बीच मे कुछ ना पुच्छू

सी चाची- हाँ , और पूजा बुआ की शादी के बारे मे मैं कुछ नही बताउन्गी

अवी- पूजा बुआ की शादी बीच मे क्यूँ आई

सी चाची- मुझे कुछ नही पता , तुझे मंज़ूर हो तो बता , और हाँ पूजा बुआ की शादी के बारे मे तू किसी को नही पूछेगा क्यू कि वो कहानी मैं ही बताउन्गी तुझे पर आज नही किसी और दिन

अवी- आप बताएगी ना , फिर मुझे सब मंज़ूर है

सी चाची- तो मैं बताऊ

ब चाची- बता दे मीना

अवी- चाची क्या सोच रही हो

सी चाची- कहाँ से शुरू करू वो सोच रही हूँ

अवी- क्या मतलब कहाँ से

सी चाची- पूजा दीदी के शादी से , या तुम्हारे पापा के शहर जाने से ,या तुम्हारे पापा के शहर से आने के बाद, या तुम्हारी माँ से

अवी- आप को जहा से अच्छा लगे वहाँ से बताइए , मुझे बस जानना है और आप तो कभी ना कभी बाकी की कहानी भी बता देगी

ब चाची- ये है मेरा अवी , सबसे समझदार

सी चाची- ठीक है ,तो सुनो ,, तुम्हारी माँ का गाँव और ठकुराइन का मायका पास पास है ,

और छोटी चाची रुक गयी

अवी- क्या हुआ चाची

ब चाची- क्या हुआ मीना

सी चाची- मैं बाथरूम होकर आती हूँ

अवी- चाची

सी चाची- बस 2 मिनिट मे , एक बार कहानी शुरू की तो रुक नही सकते ,

ब चाची- जल्दी आना ,

मुझे बड़ी चाची की वजह से चुप रहना पड़ा

और छोटी चाची बाथरूम मे चली गयी

छोटी चाची बहुत चालाक है

अब छोटी चाची को सोचने का मोका मिला है

छोटी चाची अचानक मुझे सच कैसे बताती

उनको सोचने का टाइम चाहिए था जो उनको मिल गया

अब जो बताना चाहिए वही बताएगी छोटी चाची मुझे
 
फ्लॅशबॅक 846

छोटी चाची बाथरूम मे चली गयी

ये दीदी भी ना मुझे फसा दिया

अब मैं क्या बताऊ अवी को

अगर ऐसा वैसा कुछ बता दिया तो गड़बड़ हो जाएगी

अछा हुआ बाथरूम.जाने का बहाना किया

अब सोचने का टाइम मिलेगा कि अवी को क्या बताया जाए

कहाँ से बताऊ अवी को

क्यूँ कि सुमन दीदी ने सही कहा कि अवी को बताना तो पड़ेगा एक दिन

और अब तो सुमन दीदी भी है वहाँ पर मतलब अवी कंट्रोल मे रहेगा ज़्यादा कुछ पूछेगा नही

लेकिन अवी को बताऊ क्या

अवी से प्रॉमिस तो लिया कि पूजा दीदी की शादी के बारे मे कुछ ना पूछे, मैं ही एक दिन उसको पूजा दीदी की शादी के बारे मे बता दूँगी

लेकिन इस कहानी के बाद अवी अपने मामा अपने नाना नानी के बारे मे पूछेगा उसका क्या करूँ

कुछ सोच मीना ,,

आइडिया , ऐसा लिया तो सब ठीक हो जाएगा

अवी के एक सवाल का पर्मनेट जवाब दूँगी

लेकिन प्राब्लम वो नही है कि अवी क्या पूछेगा

प्राब्लम ये है कि अवी को कहाँ से बताऊ

और छोटी चाची पुरानी बाते याद करने लगी ताकि ये फ़ैसला कर सके कि कहानी कहाँ से शुरू करे

ये कहानी है शालिनी की इसकी शुरुआत होती है कुछ साल पहले से

जब पहली बार जयसिंघ के शहर3 जाने की बात पिताजी ने जयसिंघ से की थी उसी दिन से जयसिंघ के बीवी की खोज मे पिताजी लग चुके थे

पिताजी ऐसी बीवी चाहते थे जयसिंघ के लिए जो उसको समझे , जयसिंघ अपने दुख दर्द उस से शेयर करे , और वो इस घर को कभी टूटने ना दे

जयसिंघ के लिए पिताजी एक ऐसी जीवन साथी के खोज मे थे जो अपने पति के साथ साथ इस घर को भी अपना समझे

पिताजी को ऐसी देवी की तलाश थी जो छोटू को देवेर नही अपना बेटा समझे , नेहा नीता को ननंद की जगा अपनी बहने समझे , पूजा के साथ एक सहेली जैसी रहे , माँ और पिताजी को सास ससुर की तरह नही अपने माता पिता की तरह आदर दे

पिताजी तो कलयुग मे ऐसी देवी को ढूँढ रहे थे जो मिलना मुश्किल था

पर पिताजी को खुद पे विश्वास था , उनको भगवान पे विश्वास था

उनको यकीन था कि ऐसी बहू उनको मिल जाएगी

पिताजी ने बहुत जगा तलाश करनी शुरू की थी पर अब तक पिताजी को जैसी बहू चाहिए थी वैसी बहू नही मिली

कोही पसंद आती तो उसमे कोई ना कोई कमी पिताजी की दिख जाती

पिताजी बिना किसी को बताए अपने बहू के खोज मे लगे हुए थे

पिताजी ने ये बात माँ को भी नही बताई

पिताजी को कोई जल्दी नही थी

अभी तो जयसिंघ सिर्फ़ पढ़ने गया था

उसकी शादी मे अभी टाइम है

पिताजी के पास बहुत समय था

पर ऐसी बहू ढूँढना मुश्किल साबित हो रहा था

पर जब पूजा की शादी अचानक तय हो गयी

उसके बाद जयसिंघ के साथ जो झगड़ा हुआ

पिताजी को पता चल गया कि जयसिंघ खुद को भूलता जा रहा था

पिताजी को जिस बात का डर था वही हो रहा था

पिताजी और जयसिंघ के बीच मे पुरानी और नयी सोच की जंग पूजा के सगाई के दूसरे दिन से शुरू हो गयी थी

इस जंग मे कौन जीता कौन हारा ये तय नही हुआ पर इतना पता चला कि पिताजी और जयसिंघ की सोच अलग है

जहाँ पिताजी गाँव मे रह कर अपनी फॅमिली और गाँव के बारे मे सोच रहे थे

वही जयसिंघ शहर3 मे रह कर अपनी फॅमिली को नयी दुनिया से मिलना चाहता था

जब 2 अलग अलग सोच आपस मे टकराती है तो उसका नुकसान फॅमिली को होता है

जयसिंघ और पिताजी की इस जंग मे फॅमिली का नुकसान हो रहा था

जयसिंघ ने उस झगड़े के बाद भी पूजा की शादी धूम धड़ाके के साथ कर दी

जयसिंघ के इस रूप को देख कर पिताजी उस झगड़े को भूल गये थे

पर उनको पता चल गया था कि जयसिंघ अपनी सोच के साथ गाँव मे नही रह पाएगा

वो तो शहर3 मे रहना चाहता है

जयसिंघ भी अपनी फॅमिली के बारे मे सोच रहा था पर उसका तरीका अलग था

जयसिंघ ने अपने सपने को जला तो दिया पर माँ को पता चल गया कि उनका बेटा ग़लत नही है

माँ को अपने बेटे पे पूरा विश्वास था

जयसिंघ के बारे मे कोई कुछ भी सोच ले पर माँ जयसिंघ के साथ थी

जयसिंघ पूजा की शादी के बाद वापस शहर चला गया

उसकी दुनिया शहर3 थी

माँ ने पिताजी से बात कर जयसिंघ को शहर 3 जाने दिया

पर पिताजी को पूजा के शादी के समय ये पता चल गया कि जयसिंघ चाहता क्या है

उसकी सोच क्या है

जिस बात का डर था पिताजी को वही हुआ

जयसिंघ शहर3 जाकर खुद के भूलता जा रहा था

जयसिंघ अब पिताजी से झूठ बोलने लगा था

अपनी कंपनी के बारे मे जयसिंघ ने पिताजी से झूठ कहा

पर पिताजी को जयसिंघ की तरक्की से खुशी हुई , पूरे गाँव मे लड्डू दिए थे पिताजी ने

पर जयसिंघ के झूठ बोलने से पिताजी समझ गये कि जयसिंघ खुद को भूलता जा रहा है

जयसिंघ को जल्दी सही रास्ते पे लाना होगा

पिताजी ने उसको शहर3 वापस भेज दिया पर उनकी टेन्षन बढ़ गयी थी

पिताजी जयसिंघ को ऐसे छोड़ तो नही सकते

जयसिंघ है तो उनका बेटा ना

पिताजी अब जल्द से जल्द जयसिंघ की शादी करने के पीछे लग गये

पिताजी जितना देर करेंगे उतना जयसिंघ के लिए अच्छा नही होगा

जयसिंघ शहर3 के रंग मे रंगने से पहले उसके हाथो मे किसी और हाथ आ जाना चाहिए

पिताजी ने अपनी बहू की तलाश स्पीड से करने लगे

पर इस कलियुग मे उनको ऐसी देवी कहाँ से मिलेगी

पर दूसरी तरफ पिताजी को घर का ध्यान भी रखना था

पूजा तो अपने घर चली गयी

पूजा रमेश के साथ खुश थी

नेहा नीता अब बड़ी हो गयी थी

नेहा ने पूजा की जगह ले ली

ऐसा ही होता है ,, जयसिंघ के शहर3 जाते ही पूजा ने उसकी जगह लेकर अपने भाई बहनो का ध्यान रखा , अब पूजा के जाने से नेहा बड़ी बन गयी , अब नेहा नीता और छोटू को साथ लेकर चलती थी

नेहा ने अपनी मस्तिया कम कर दी

उसके उपर अब नीता और छोटू की ज़िम्मेदारी आ गयी

पर नीता अभी भी मस्ती करती थी

नीता अभी तक वही नीता थी जो नेहा को मस्ती करने मे साथ देती थी

लेकिन अब समय बदल गया था

नेहा नीता को मस्ती मे साथ देती

पर साथ ही नेहा नीता को बताती थी कि उसे कब क्या करना चाहिए था

कल तक नेहा मस्ती करने वाली लड़की थी

पूजा के जाते ही अचानक उसमे बदलाव आ गया

ये बदलाव हम.नही करते ये अपने आप हो जाता है

नेहा ने नीता और छोटू का ध्यान रखना शुरू किया

पिताजी को नेहा को देख कर पूजा की याद आ गयी

पूजा ने नेहा को अच्छी शिक्षा दी ,

नेहा पूजा की बातों को याद करके नीता और छोटू का ध्यान रख रही थी

पिताजी को अब घर की टेन्षन नही थी उनको यकीन था कि नेहा सब संभाल लेगी ,

अब वो अपनी बहू की तलाश मे लग गये

बहू के आते ही सब ठीक हो जाएगा ये पिताजी का विश्वास था

इस बार पिताजी ने अपने दिल की बात माँ को बताई
 
फ्लॅशबॅक 847

बहू के आते ही सब ठीक हो जाएगा ये पिताजी का विश्वास था

इस बार पिताजी ने अपने दिल की बात माँ को बताई

पिताजी -सुनो

माँ- हाँ

पिताजी -6महीने हो गये पूजा की शादी को

माँ- 6 महीने , मुझे ती ऐसा लग रहा है कि ये कल की बात हो कि पूजा दुल्हन बनी हो

पिताजी -पहली शादी थी ना हमारे घर की इस लिए ऐसा लग रहा है

माँ- नेहा नीता तो शादी की बात करती है , कि पूजा दीदी के शादी मे ये किया था वो किया था

पिताजी -वो सब तो ठीक है पर अभी तक खुश खबरी सुनने को नही मिली

माँ- आप भी ना , आपको कुछ समझता ही नही है

पिताजी -तुम्हे तो एक साल मे माँ बना दिया था

माँ- और फिर ससुरजी ने आपको कितना डाटा था

पिताजी -वो तो

माँ- फिर सासू माँ ने कहा था कि जयसिंघ और पूजा मे कुछ साल की गॅप रखना

पिताजी -मैं तो सिर्फ़ तुम्हे प्यार करना चाहता था , पर माँ की बात सुननी पड़ी

माँ- एक औरत को आराम चाहिए कि नही , उसको माँ बनने को मेंटली तय्यार होना पड़ता है , माँ बन ने की ज़िम्मेदारी उठाने लायक बनाना पड़ता है खुद को

पिताजी -हाँ वो तो है

माँ- आप ने मुझे आराम भी दिया और मैं ने आपको 5 बच्चे दिए

पिताजी -पर पूजा की तरफ से खुश खबरी कब मिलेगी

माँ- मैं मिलके आउ पूजा से

पिताजी -मैं भी चलूँगा

माँ- कभी तो मुझे अकेला रहने दीजिए

पिताजी -तुम्हारे बिना रहने का मैं सोच भी नही सकता

माँ- मुझे भी आपके बिना रहना क्या अच्छा लगता है , पर कभी कभी कुछ दिन के लिए दूरिया रखनी चाहिए

पिताजी -मुझसे नही होता

माँ- आपने शादी के बाद मुझे अपने मायके भी अकेले जाने नही दिया , और जिस दिन जाते उसी दिन वापस आ जाते थे

पिताजी -वो जाने दो , ये बताओ पूजा कि कोई कभार आई है

माँ- पूजा ने खत भेजा था ,

पिताजी -पूजा का तार आया मुझे बताया नही तुमने

माँ- कल ही आया था

पिताजी -क्या कहा पूजा ने

माँ- वो खुश है अपने ससुराल मे , पूजा कह रही थी कि उसकी सास उसको बेटी जैसा प्यार करती है , पर उसकी ननद थोड़ी टेडी टाइप की है

पिताजी -उसकी ननद तो अपने पति के साथ रहती है

माँ- हाँ , पर सटरडे सनडे को ज्योति पूजा के घर आती है ,

पिताजी -मैं कुछ करूँ ज्योति का

माँ- पूजा संभाल लेगी , वो उसका घर है उसको हॅंडल करने दीजिए

पिताजी -ठीक है , और क्या कहा पूजा ने

माँ- पूजा ने कहा कि दामाद जी चाहते है कि पूजा माँ बनने की ज़िम्मेदारी उठाने लायक बन जाए फिर वो खुशख़बरी सुना देंगे

पिताजी -क्या मतलब

माँ- पूजा की शादी जल्दी हो गयी , इस तरह अचानक हो गयी , जिस से दामाद जी पूजा को पहले सेट्ल होने देना चाहते है , मेंटली तय्यार करवा रहे है दामाद जी पूजा को

पिताजी -रमेश अच्छा लड़का है , मैं ने कहा था ना कि वो पूजा को बहुत प्यार करेगा

माँ- क्या रमेश रमेश लगा के रखा है , दामाद बोला कीजिए , वरना सम्धन को बुरा लगा तो

पिताजी -ग़लती हो गयी

माँ- दुबारा ऐसा मत करना

पिताजी -नही बोलूँगा , कब तक खूसखबरी नही मिलेगी

माँ- 1 साल रुकना होगा फिर वो दोनो मिलकर सोचेंगे

पिताजी -पूजा की प्राब्लम तो सॉल्व हो गयी

माँ- क्या मतलब ,

पिताजी -अब जयसिंघ की बात करे

माँ- जयसिंघ की बात ?

पिताजी -जयसिंघ की शादी की बात कर रहा हूँ

माँ- इतनी जल्दी क्या है

पिताजी -जल्दी करनी होगी ,

माँ- क्यूँ ? उसको पहले सेट्ल होना है

पिताजी -उसका इंतज़ार किया तो नेहा नीता बड़ी हो जाएगी उनकी शादी का सोचना होगा

माँ- ये आपने सही सोचा

पिताजी -तो क्या कहती हो

माँ- आप जो कहेंगे वही होगा

पिताजी -तो लड़की ढूँढ लूँ मैं

माँ- आप से हो पाएगा

पिताजी -तुम भी देखना

माँ- मुझे तो ऐसी बहू चाहिए जो मुझे माँ कहे

पिताजी -मुझे ऐसी बहू चाहिए जो छोटू को देवर नही बेटा समझे , नेहा नीता को बहनों की तरह प्यार करे , पूजा की फ्रेंड बन जाए , और हम को माँ और पिताजी कहे

माँ- मैं भी ऐसी बहू चाहती हूँ

पिताजी -मैं कब से ढूँढ रहा हूँ पर मिल ही नही रही है

माँ- क्या मतलब कब से ढूँढ रहा हूँ

पिताजी -जिस दिन जयसिंघ पहली बार शहर3 गया था तब से ढूँढ रहा हूँ

माँ- और आपने बताया नही

पिताजी -ग़लती हो गयी पर अब जल्दी देखनी होगी वरना जयसिंघ बदल गया तो प्राब्लम होगी

माँ- मुझे अच्छा लगा जो आप जयसिंघ के बारे मे सोच रहे है

पिताजी -हमे बहू अच्छी मिल गयी तो जयसिंघ को वापस गाँव मे ला पाएँ

पिताजी -हमे बहू अच्छी मिल गयी तो जयसिंघ को वापस गाँव मे ला पाएगी

माँ- आप ने ये अच्छा सोचा

पिताजी -पर जयसिंघ , उसने मना किया तो

माँ- आपने उसको प्रॉमिस करने को कहा था ना

पिताजी -हाँ ,

माँ- फिर जयसिंघ को मुझपे छोड़ दीजिए , मैं उसको मना लुगी बस बहू अच्छी मिल जाए

पिताजी -हम आज से काम पर लग जाते है

माँ- आप को तो कुछ समझता ही नही ,

पिताजी -क्या हुआ ,

माँ- ऐसी थोड़ी लड़की देखी जाती है

पिताजी -तो कैसे

माँ- आप अपने रिस्तेदारो से बात कीजिए और पूछिए कि कोई लड़की होगी तो बता दे ओफ मैं अपने मायके वालो से पूछती हूँ

पिताजी -मतलब तुम अपने मायके और मैं कही और जाउन्गा , ये हो नही सकता

माँ- समझा कीजिए , अब बच्चे बड़े हो गये है , अब तो मुझे अकेला जाने दीजिए , और मैं कुछ दिन के लिए ही वहाँ ज़रूगी ,

पिताजी -मुझे सोचने दो

माँ- अगर आप लड़की देखने गये और वहीं रहना पड़ा तो तब आप को चल जाएगा

पिताजी -तुम कह तो सही रही हो

माँ- तो जाने दीजिए , मैं जयसिंघ के लिए अपने मायके जा रही हूँ

पिताजी -ठीक है , पर घर पे कौन रहेगा

माँ- नेहा नीता और छोटू बड़े जो गये है वो घर को देख लेंगे

पिताजी -बच्चों को अकेला रहने देना ये नही कर सकता मैं

माँ- आप भी ना , जब आप लड़की देखने जाएँगे तो मैं घर पे रहूगी और जब मैं जाउन्गी तो आप घर पे रुकना , इसी लिए कह रही थी कि मुझे आपके बिना मायके जाना होगा

पिताजी -ठीक है पर छोटू को साथ लेकर जाना

माँ- जी ,

पिताजी -पर ज़्यादा दिन वहाँ रुकना मत

माँ- मुझे पता है आप मेरे मायके जाते ही हवेली जाएँगे

पिताजी -तुम्हे तो सब बताता हूँ मैं , और तुम भी जानती हो मुझसे रहा नही जाता

माँ- तभी तो मैं ने आज तक कभी हवेली जाने से रोका नही है आपको

पिताजी -तुम कहोगी तो दूसरो की तरफ देखना बंद कर दूँगा

माँ- ना बाबा ऐसा मत करना , मेरे अकेले से आपको संभाला नही जाता , आप अगर रोज रोज मुझे प्यार करेंगे तो मैं बेड से उठ भी नही पाउन्गी , आप बीच बीच मे हवेली जाते रहना ताकि मुझे आराम मिले

पिताजी -तुम बहुत अच्छी हो जो मेरा इतना ध्यान रखती हो

माँ- पर ध्यान रखना अब बच्चे बड़े हो गये है

पिताजी -मैं तो अब फार्महाउस पे पार्टी करता हूँ प्रतापसिंघ के साथ मिलके

माँ- आज का क्या प्लान है

पिताजी -आज तुम्हे प्यार करूँगा ,

माँ- और जयसिंघ

पिताजी -पहले तुम्हे प्यार तो करने दो , जयसिंघ के बारे मे सोच लेंगे

और पिताजी माँ को प्यार करके सो गये
 
फ्लॅशबॅक 848

पिताजी ने जयसिंघ के बारे मे माँ से बात की

माँ ने पिताजी का साथ दिया

पिताजी के साथ जयसिंघ के लिए लड़की ढूँढने मे लग गयी

माँ को भी उस बहाने मायके मे रहने का मोका मिलेगा

माँ और पिताजी के बिना नेहा अच्छे से घर को संभाल रही थी

जयसिंघ ने पिताजी की पसंद की लड़की से शादी करने की बात मान ली थी

पर अब उस बात को काफ़ी साल हो गये थे , पिताजी को लगा कि जयसिंघ अब मना कर देगा

पर माँ ने पिताजी को विश्वास दिलाया कि वो जयसिंघ को मना लेगी

जयसिंघ अपनी माँ की बात मानेगा ज़रूर ये पिताजी को पता था

पिताजी अब अपने दोस्तो और अपने रिस्तेदारो से बात करने लगे

माँ भी अपने मायके जाकर लड़की की तलाश करने लगी

पर पिताजी को जैसी लड़की की तलाश थी वैसी लड़की मिल ही नही रही थी

कभी पिताजी को कुछ पसंद आता तो माँ रिजेक्ट कर देती

जब माँ को कोई पसंद आती तो पिताजी कुछ कामिया ढूँढ लेते

जयसिंघ को इस बारे मे पता नही था

वो तो तरक्की पे तरक्की कर रहा था

वो अपनी लाइफ मे खुश था

वो बिना भूले सबको महीने मे एक बार तार कर देता

दीवाली मे गाँव आ जाता , अब वो ज़्यादा दिन नही रुकता , उसको जल्दी जाना होता शहर3 मे

उसकी कंपनी का काम बढ़ गया था

और इधर पिताजी अपनी तलाश मे लगे हुए थे

सवाल उनके बेटे के फ्यूचर का था ,

लड़की की तलाश मे 1 साल निकल गया पर जैसी लड़की चाहिए थी वैसी नही मिली

ऐसे ही एक दिन माँ और पिताजी कुछ तार पढ़ रहे थे

पिताजी -कुछ सफलता मिली

माँ- नही , एक भी लड़की देखने मे अच्छी नही है

पिताजी -हमे उसकी क़ाबलियत और गुणों को देखना है

माँ- साथ मे वो देखने मे अच्छी हो , मेरे बेटे की बराबरी की हो , अब जयसिंघ बड़े लोगो के साथ रहता है वैसी लड़की चाहिए

पिताजी -तो देखो ना ,

माँ- और आप

पिताजी -मैं प्रतापसिंघ से मिलके आता हूँ

माँ- ठाकुर से मिलने जा रहे हो , किस लिए

पिताजी -प्रतापसिंघ ने बुलाया है

माँ- आप मेरी मदद करने की जगह वहाँ लड़कियो के साथ मस्ती करने जा रहे हो

पिताजी -ऐसा नही है , प्रतापसिंघ ने बात करने को बुलाया है

माँ- किस बारे मे

पिताजी -प्रतापसिंघ के छोटे बेटे के बारे मे बात करनी है

माँ- क्या हुआ कुवरसिंघ को

पिताजी -पता नही शायद इस बार भी कोई बदतमीज़ी की होगी अपनी माँ के साथ

माँ- ठकुराइन कुवर की सौतेली माँ ज़रूर है पर वो दिल की अच्छी है , देखा नही रणजीतसिंघ कितना प्यार करता है अपनी माँ से ,

पिताजी -पर कुवर की बात कुछ अलग है ,

माँ- ठकुराइन को बेटी हुई फिर भी वो कुवर और रंजीत को उतना ही प्यार करती है जितना पहले करती थी , अपने सौतेले बेटो को सगे बेटे जैसा प्यार करती है

पिताजी -मुझे पता है , शायद बात कुछ और होगी इस बार

माँ- आप हवेली चले जाइए, प्रताप भाई की मदद करना , कुवरसिंघ अभी बचा है उसको सही ग़लत की समझ नही है

पिताजी -तुमने सही कहा , कुवर को मारने की जगह प्यार से समझाना चाहिए

माँ- प्रताप भाई का गुस्सा मुझे पता है , आप ही कुवरसिंघ से बात कर लेना , उसको सही ग़लत का फरख बता देना , उसको सही रास्ते पे लाना ,

पिताजी -तुम कहती हो तो ज़रूर बात करूँगा कुवर से

माँ- और हाँ , कुवरसिंघ के साथ रणजीतसिंघ से भी बात करना , रणजीतसिंघ बड़ा हो रहा है उसको कुवरसिंघ का ध्यान रखने को कहना , दोनो भाई मिलके रहेंगे तो प्रताप भाई को अच्छा लगेगा

पिताजी -तुम्हे प्रतापसिंघ की बड़ी फिकर हो रही है

माँ-वो मुझे अपनी बहन मानते है , हर साल मैं उनको रखी बाँधती हूँ ,वो मेरे भाई जैसे है , उनके बारे मे सोच लिया तो क्या बुरा किया

पिताजी -मैं मज़ाक कर रहा था , मुझे भी पता है ये सब , मैं भी तो प्रतापसिंघ की पहली बीवी को अपनी बहन मानता था

माँ- और दूसरी बीवी को , (पायल की माँ )

पिताजी -उसके बारे मे बात मत करो , मैं हवेली जा रहा हूँ

माँ- शाम तक आ जाओगे ना

पिताजी -हाँ , और दोपेहर का खाना मैं हवेली खा लूँगा

और पिताजी हवेली चले गये

अपने दोस्त को मिलने

प्रतापसिंघ योगेंद्रसिंघ का इंतज़ार कर रहा था

इंट्रो-

प्रतापसिंघ - पिताजी के खास दोस्त , इनके दोस्त की कहानी हम सुन चुके है , प्रतापसिंघ अपने सौतेले भाई को मार कर ठाकुर बन गया , पिताजी ने प्रतापसिंघ की जान बचाई थी , तब से दोनो दोस्त है , और हवेली मे पार्टी करते है , साथ मे मिलके कितनी लड़कियो को औरत बना दिया ये उनको भी पता नही है , माँ को पता था कि पिताजी क्या करते है पिताजी ने ही माँ को बताया था , माँ ने इजाज़त दे दी , उनकी इजाज़त नही मिलती तो पिताजी ये सब बंद कर देते ,

प्रतापसिंघ कभी फार्महाउस पे तो कभी हवेली मे योगेंद्रसिंघ के साथ मिलके मज़ा करता था

प्रतापसिंघ की पहली बीवी की डेत हो चुकी है , पहली बीवी से रणजीतसिंघ और कुवरसिंघ हुए थे

प्रतापसिंघ ने अपनी पहली बीवी के डेत के बाद कुछ साल शादी नही की , पर उनको पता चल गया कि हवेली को चलाने के लिए ठकुराइन चाहिए , गाँव को चलाने को ठकुराइन चाहिए ,

इस लिए प्रतापसिंघ ने दूसरी शादी की , उनको पता था कि सौतेले भाइयो से क्या होता है फिर भी प्रतापसिंघ ने शादी कर ली ,

प्रतापसिंघ ने अपने से कम उमर की लड़की से शादी की , रणजीतसिंघ से ज़्यादा उमर नही थी प्रतापसिंघ की बीवी की , रणजीतसिंघ और उसकी सौतेली माँ की साथ मे देखा तो ऐसा लगेगा कि रणजीतसिंघ अपनी बड़ी बहन के साथ खड़ा है ,

कुवरसिंघ को अपनी सौतेली माँ पसंद नही आई , वो ठकुराइन को माँ कहने को तय्यार नही था , कुआवरसिंघ की इस हरकत से प्रतापसिंघ परेशान रहता था , कुवार इतनी बदतमीज़ी करता कि प्रतपसनघ को उसको मारना पड़ता ,

ऐसे मे प्रतापसिंघ अपने दोस्त की मदद लेता , योगेंद्रसिंघ कुवार को समझा देता

फिर ठकुराइन को एक बेटी हुई , जिसका नाम पायल है ,प्रतापसिंघ खुश था कि बेटी हुई वरना सौतेला भाई , फिर से पास्ट रिपीट हो जाता , ठकुराइन रणजीतसिंघ और कुवरसिंघ को अपने सगे बेटे जैसा प्यार करती थी , जिस से पायल के बाद ठकुराइन ने कोई बच्चा नही रखा

रणजीतसिंघ के बहुत करीब थी ठकुराइन , रणजीतसिंघ तो दिन भर ठकुराइन के साथ ही रहता था , और कुवरसिंघ तो अलग टाइप का लड़का था

फिर से कुवरसिंघ ने कोई बदतमीज़ी की होगी तभी प्रतापसिंघ ने अपने दोस्त को बुलाया कुवरसिंघ को समझाने को

पिताजी हवेली चले गये

पिताजी हवेली मे आते ही उनकी नज़र ठकुराइन पे गयी

ठाकुर को इतनी अच्छी बीवी मिली ये पिताजी को विश्वास नही हो रहा था

ठाकुर की दूसरी शादी थी फिर भी इतनी अच्छी लड़की मिल गयी

ठकुराइन की खूबसूरती मे घायल हो गया था ठाकुर

ठकुराइन को देखते ही पसंद कर लिया और शादी करके हवेली ले आया

ठकुराइन की खूबसूरती की बहुत बाते होती थी गाँव मे

ठकुराइन को देखने के लिए सब तरसते थे ,

ठकुराइन जितनी खूबसूरत थी उतनी कड़क भी थी , गाँव वाले डरते थे भी ठकुराइन से

गाँव वालो के लिए कड़क थी पर हवेली पे सिंपल तरीके से रहती

पिताजी को देखते ही ठकुराइन ने उनको चाइ पानी के लिए पूछा

पर पिताजी ठकुराइन से ज़्यादा बात नही करते थे

पिताजी ने ठाकुर के बारे मे पूछा और उसी के रूम मे चले गये

पिताजी (योगेंद्रसिंघ ) -क्या चल रहा है

ठाकुरजी (प्रतापसिंघ) - तुम आ गये , अच्छा हुआ , मैं तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था

पिताजी -मेरा इंतज़ार , क्यूँ नयी माल फसा ली क्या

ठाकुरजी- नयी माल भी है पर बात कुछ और है

पिताजी -तू परेशान दिख रहा है

ठाकुरजी- कुवर की वजह से परेशान हूँ

पिताजी -अब क्या हुआ

ठाकुरजी- कुछ पूछ ही मत

पिताजी -नही पूछता

ठाकुरजी- मेरा मतलब था कि

पिताजी -सीधे सीधे बता

ठाकुरजी- कुवार ने आज तो हद ही कर दी

पिताजी -क्या किया ,

ठाकुरजी- ठकुराइन को रांड़ बोल दिया

पिताजी -क्या बोल रहा है , ऐसा नही करेगा कुवर

ठाकुरजी- उसने ऐसा ही बोला है

पिताजी -ठकुराइन सौतेली माँ ज़रूर है पर कुवर को सगे बेटे जैसा प्यार करती है , उसको ऐसा नही बोलना चाहिए था

ठाकुरजी- पता नही कुवर को हो क्या रहा है ,वो दिन ब दिन बदतमीज़ी कर रहा है

पिताजी -मैं बात करता हूँ

ठाकुरजी- इसी लिए तो तुझे बुलाया है

पिताजी -बस इतनी ही बात थी ना

ठाकुरजी- और पता है क्या किया कुवर ने

पिताजी -क्या?

ठाकुरजी- कल नौकरानी की बेटी को नंगा करके डॅन्स करने को बोला , और डॅन्स ना करने पे उस लड़की की बेल्ट से पिटाई की

पिताजी -कुवर ग़लत रास्ते पे जा रहा है

ठाकुरजी-मैने तो उसकी खाल निकाल दी आज सुबह जब मुझे ये पता चला तो

पिताजी -मारने से तो वो तुम्हे दुश्मन समझ लेगा , गुस्सा उसके दिल मे जमा हो जाएगा ,

ठाकुरजी- तो मैं क्या करूँ

पिताजी -हर ग़लती की सज़ा पिटाई करनी नही होती

ठाकुरजी- पर वो सुनने को तय्यार नही है , ठकुराइन को तो रांड़ भी बोल दिया , मुझे इतना गुस्सा आया था कि मैं उसकी जान ले लेता पर ठकुराइन बीच मे आगयि , जिसको उसने रांड़ बोला उसी ने उसकी बचाया ये भी कुवर के समझ मे नही आ रहा है

पिताजी -इसमे ग़लती हमारी है

ठाकुरजी- हमारी ग़लती , वो कैसे

पिताजी -हम भी तो पार्टी करते है , कुवर ने देख लिया होगा

ठाकुरजी- तुम सही कह रहे हो

पिताजी -इसीलिए मैं फार्महाउस चलने को बोलता था , और तुम हो कि हवेली मे पार्टी करने को बोलते थे

ठाकुरजी- तुमने मुझे पहले क्यूँ नही बताया मैं हवेली पे पार्टी करना बंद कर देता

पिताजी -अब भी देर नही हुई है , कुवर को समझाया जा सकता है

ठाकुरजी- मुझे नही लगता वो समझेगा , उसको तो ठाकुर बनना है ,

पिताजी -मेरे पास एक आइडिया है जिस से कुवर सुधार सकता है

ठाकुरजी- बोल

पिताजी -कुवर के दिमाग़ मे ये बात घुस गयी है कि वो ठाकुर है तो कुछ भी कर सकता है

ठाकुरजी- तो इस बात को बाहर कैसे निकाले

पिताजी -कुवर को यहाँ से दूर भेज दो , उसको बोर्डिंग स्कूल मे डाल दो , वो हवेली से दूर रहेगा तो वो नॉर्मल लड़को की तरह रहेगा , और इस से वो सुधर जाएगा

ठाकुरजी- ये बात मेरे दिमाग़ मे पहले क्यू नही आई

पिताजी -अब भी देर नही हुई है , कुवर को बोर्डिंग स्कूल भेजने का इंतज़ाम करो , वहाँ ना वो ठाकुर रहेगा ना उसके पास पॉवर होगी जिस से उसको समझ मे आ जाएगा , और वो नॉर्मल लड़को की तरह बन जाएगा

ठाकुरजी- तू तो जयसिंघ को शहर3 भेजने को तय्यार नही था और कुवर को बोर्डिंग भेजने को बोल रहा है

पिताजी -जयसिंघ को शहर3 भेजने से ऐतराज़ नही था , उसके सपने बड़े थे ,

ठाकुरजी- क्या था जयसिंघ का सपना

पिताजी -बड़ा आदमी बनना है उसे

ठाकुरजी- ऐसा जयसिंघ ने कहा

पिताजी -नही , मुझे नेहा और छोटू की माँ ने बताया है , ये क्या बात कर रहे है , कुवर की बात करो

ठाकुरजी- तुम बात करो कुवर से

पिताजी -ठीक है , कुवर को मैं समझा दूँगा , और कहो क्या चल रहा है

ठाकुरजी- रणजीतसिंघ बड़ा हो रहा है

पिताजी -तो

ठाकुरजी- वो ठकुराइन के साथ ज़्यादा समय बिता रहा है ,

पिताजी -ये अच्छी बात है

ठाकुरजी- हाँ , रणजीतसिंघ अपनी सौतेली माँ से बहुत प्यार करता है , मुझे ये देख कर अच्छा लगता है

पिताजी -फिर परेशानी क्या है

ठाकुरजी- वो बड़ा हो रहा है , अब उसको ठकुराइन से दूर रह कर आगे का सोचना चाहिए

पिताजी -ये प्राब्लम थोड़ी हुई

ठाकुरजी- रणजीतसिंघ ठकुराइन के साथ साथ ही रहता है

पिताजी -तो

ठाकुरजी- एक हफ्ते पहले मैं ने मज़ाक मज़ाक मे ठकुराइन को थप्पड़ मार दिया तो रणजीतसिंघ ने मुझ पे फ्लवर प्लॉट फेक कर मारा था

पिताजी -ये तो माँ बेटे का प्यार है , रणजीतसिंघ पहले ही अपनी माँ को खो चुका है , अब दूसरी माँ को कुछ नही होने देना चाहता होगा

ठाकुरजी- ये मैं समझ सकता हूँ , पर कभी कभी रणजीतसिंघ के आँखो मे मुझे ठकुराइन को पाने का जुनून नज़र आता है

पिताजी -कुछ भी मत बोल , वो उसकी माँ है , ये ख़याल अपने दिमाग़ से निकाल दे

ठाकुरजी- तू ठीक कह रहा है

पिताजी -रणजीतसिंघ अच्छा लड़का है वो ही तेरा वारिश बनेगा

ठाकुरजी- मुझे भी यही लगता है , पर कुवर का क्या

पिताजी -वो समझ जाएगा , अगर नही समझा तो मैं समझा दूँगा कि रंजीतसिंग ही गाँव का ठाकुर बने से सबका भला होगा

ठाकुरजी- ये ज़िम्मेदारी तेरी तरफ रही

पिताजी -मैं कुवर को संभाल लूँगा , और बता तेरी छोटी बेटी पायल कैसी है

ठाकुरजी- बहुत प्यार है , मैं तो उसी के साथ रहता हूँ दिन भर

पिताजी -बेटी की इच्छा पूरी हो गयी तेरी

ठाकुरजी- ठकुराइन ने मुझे पायल दी ,अब मेरी फॅमिली पूरी हुई

पिताजी -चल फिर कुवर से बात करते है

ठाकुरजी- तू कर मैं तेरे खाने का इंतज़म करने को बोलता हूँ

पिताजी -कहाँ है कुवर

ठाकुरजी- अपने कमरे मे होगा

और पिताजी ने कुवर को समझा दिया

कुवर ने पिताजी की बात मे मान ली

पर कुत्ते की दुम कितनी भी सीधी करो टेडी के टेडी ही रहेगी

कुवरसिंघ ऐसा ही था

कुवर को बोर्डिंग भेज दिया,

रणजीतसिंघ ठकुराइन के प्यार मे बड़ा होने लगा ,

पायल भी बड़ी हो रही थी ठाकुर के प्यार के साथ
 
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