फ्लॅशबॅक 848
पिताजी ने जयसिंघ के बारे मे माँ से बात की
माँ ने पिताजी का साथ दिया
पिताजी के साथ जयसिंघ के लिए लड़की ढूँढने मे लग गयी
माँ को भी उस बहाने मायके मे रहने का मोका मिलेगा
माँ और पिताजी के बिना नेहा अच्छे से घर को संभाल रही थी
जयसिंघ ने पिताजी की पसंद की लड़की से शादी करने की बात मान ली थी
पर अब उस बात को काफ़ी साल हो गये थे , पिताजी को लगा कि जयसिंघ अब मना कर देगा
पर माँ ने पिताजी को विश्वास दिलाया कि वो जयसिंघ को मना लेगी
जयसिंघ अपनी माँ की बात मानेगा ज़रूर ये पिताजी को पता था
पिताजी अब अपने दोस्तो और अपने रिस्तेदारो से बात करने लगे
माँ भी अपने मायके जाकर लड़की की तलाश करने लगी
पर पिताजी को जैसी लड़की की तलाश थी वैसी लड़की मिल ही नही रही थी
कभी पिताजी को कुछ पसंद आता तो माँ रिजेक्ट कर देती
जब माँ को कोई पसंद आती तो पिताजी कुछ कामिया ढूँढ लेते
जयसिंघ को इस बारे मे पता नही था
वो तो तरक्की पे तरक्की कर रहा था
वो अपनी लाइफ मे खुश था
वो बिना भूले सबको महीने मे एक बार तार कर देता
दीवाली मे गाँव आ जाता , अब वो ज़्यादा दिन नही रुकता , उसको जल्दी जाना होता शहर3 मे
उसकी कंपनी का काम बढ़ गया था
और इधर पिताजी अपनी तलाश मे लगे हुए थे
सवाल उनके बेटे के फ्यूचर का था ,
लड़की की तलाश मे 1 साल निकल गया पर जैसी लड़की चाहिए थी वैसी नही मिली
ऐसे ही एक दिन माँ और पिताजी कुछ तार पढ़ रहे थे
पिताजी -कुछ सफलता मिली
माँ- नही , एक भी लड़की देखने मे अच्छी नही है
पिताजी -हमे उसकी क़ाबलियत और गुणों को देखना है
माँ- साथ मे वो देखने मे अच्छी हो , मेरे बेटे की बराबरी की हो , अब जयसिंघ बड़े लोगो के साथ रहता है वैसी लड़की चाहिए
पिताजी -तो देखो ना ,
माँ- और आप
पिताजी -मैं प्रतापसिंघ से मिलके आता हूँ
माँ- ठाकुर से मिलने जा रहे हो , किस लिए
पिताजी -प्रतापसिंघ ने बुलाया है
माँ- आप मेरी मदद करने की जगह वहाँ लड़कियो के साथ मस्ती करने जा रहे हो
पिताजी -ऐसा नही है , प्रतापसिंघ ने बात करने को बुलाया है
माँ- किस बारे मे
पिताजी -प्रतापसिंघ के छोटे बेटे के बारे मे बात करनी है
माँ- क्या हुआ कुवरसिंघ को
पिताजी -पता नही शायद इस बार भी कोई बदतमीज़ी की होगी अपनी माँ के साथ
माँ- ठकुराइन कुवर की सौतेली माँ ज़रूर है पर वो दिल की अच्छी है , देखा नही रणजीतसिंघ कितना प्यार करता है अपनी माँ से ,
पिताजी -पर कुवर की बात कुछ अलग है ,
माँ- ठकुराइन को बेटी हुई फिर भी वो कुवर और रंजीत को उतना ही प्यार करती है जितना पहले करती थी , अपने सौतेले बेटो को सगे बेटे जैसा प्यार करती है
पिताजी -मुझे पता है , शायद बात कुछ और होगी इस बार
माँ- आप हवेली चले जाइए, प्रताप भाई की मदद करना , कुवरसिंघ अभी बचा है उसको सही ग़लत की समझ नही है
पिताजी -तुमने सही कहा , कुवर को मारने की जगह प्यार से समझाना चाहिए
माँ- प्रताप भाई का गुस्सा मुझे पता है , आप ही कुवरसिंघ से बात कर लेना , उसको सही ग़लत का फरख बता देना , उसको सही रास्ते पे लाना ,
पिताजी -तुम कहती हो तो ज़रूर बात करूँगा कुवर से
माँ- और हाँ , कुवरसिंघ के साथ रणजीतसिंघ से भी बात करना , रणजीतसिंघ बड़ा हो रहा है उसको कुवरसिंघ का ध्यान रखने को कहना , दोनो भाई मिलके रहेंगे तो प्रताप भाई को अच्छा लगेगा
पिताजी -तुम्हे प्रतापसिंघ की बड़ी फिकर हो रही है
माँ-वो मुझे अपनी बहन मानते है , हर साल मैं उनको रखी बाँधती हूँ ,वो मेरे भाई जैसे है , उनके बारे मे सोच लिया तो क्या बुरा किया
पिताजी -मैं मज़ाक कर रहा था , मुझे भी पता है ये सब , मैं भी तो प्रतापसिंघ की पहली बीवी को अपनी बहन मानता था
माँ- और दूसरी बीवी को , (पायल की माँ )
पिताजी -उसके बारे मे बात मत करो , मैं हवेली जा रहा हूँ
माँ- शाम तक आ जाओगे ना
पिताजी -हाँ , और दोपेहर का खाना मैं हवेली खा लूँगा
और पिताजी हवेली चले गये
अपने दोस्त को मिलने
प्रतापसिंघ योगेंद्रसिंघ का इंतज़ार कर रहा था
इंट्रो-
प्रतापसिंघ - पिताजी के खास दोस्त , इनके दोस्त की कहानी हम सुन चुके है , प्रतापसिंघ अपने सौतेले भाई को मार कर ठाकुर बन गया , पिताजी ने प्रतापसिंघ की जान बचाई थी , तब से दोनो दोस्त है , और हवेली मे पार्टी करते है , साथ मे मिलके कितनी लड़कियो को औरत बना दिया ये उनको भी पता नही है , माँ को पता था कि पिताजी क्या करते है पिताजी ने ही माँ को बताया था , माँ ने इजाज़त दे दी , उनकी इजाज़त नही मिलती तो पिताजी ये सब बंद कर देते ,
प्रतापसिंघ कभी फार्महाउस पे तो कभी हवेली मे योगेंद्रसिंघ के साथ मिलके मज़ा करता था
प्रतापसिंघ की पहली बीवी की डेत हो चुकी है , पहली बीवी से रणजीतसिंघ और कुवरसिंघ हुए थे
प्रतापसिंघ ने अपनी पहली बीवी के डेत के बाद कुछ साल शादी नही की , पर उनको पता चल गया कि हवेली को चलाने के लिए ठकुराइन चाहिए , गाँव को चलाने को ठकुराइन चाहिए ,
इस लिए प्रतापसिंघ ने दूसरी शादी की , उनको पता था कि सौतेले भाइयो से क्या होता है फिर भी प्रतापसिंघ ने शादी कर ली ,
प्रतापसिंघ ने अपने से कम उमर की लड़की से शादी की , रणजीतसिंघ से ज़्यादा उमर नही थी प्रतापसिंघ की बीवी की , रणजीतसिंघ और उसकी सौतेली माँ की साथ मे देखा तो ऐसा लगेगा कि रणजीतसिंघ अपनी बड़ी बहन के साथ खड़ा है ,
कुवरसिंघ को अपनी सौतेली माँ पसंद नही आई , वो ठकुराइन को माँ कहने को तय्यार नही था , कुआवरसिंघ की इस हरकत से प्रतापसिंघ परेशान रहता था , कुवार इतनी बदतमीज़ी करता कि प्रतपसनघ को उसको मारना पड़ता ,
ऐसे मे प्रतापसिंघ अपने दोस्त की मदद लेता , योगेंद्रसिंघ कुवार को समझा देता
फिर ठकुराइन को एक बेटी हुई , जिसका नाम पायल है ,प्रतापसिंघ खुश था कि बेटी हुई वरना सौतेला भाई , फिर से पास्ट रिपीट हो जाता , ठकुराइन रणजीतसिंघ और कुवरसिंघ को अपने सगे बेटे जैसा प्यार करती थी , जिस से पायल के बाद ठकुराइन ने कोई बच्चा नही रखा
रणजीतसिंघ के बहुत करीब थी ठकुराइन , रणजीतसिंघ तो दिन भर ठकुराइन के साथ ही रहता था , और कुवरसिंघ तो अलग टाइप का लड़का था
फिर से कुवरसिंघ ने कोई बदतमीज़ी की होगी तभी प्रतापसिंघ ने अपने दोस्त को बुलाया कुवरसिंघ को समझाने को
पिताजी हवेली चले गये
पिताजी हवेली मे आते ही उनकी नज़र ठकुराइन पे गयी
ठाकुर को इतनी अच्छी बीवी मिली ये पिताजी को विश्वास नही हो रहा था
ठाकुर की दूसरी शादी थी फिर भी इतनी अच्छी लड़की मिल गयी
ठकुराइन की खूबसूरती मे घायल हो गया था ठाकुर
ठकुराइन को देखते ही पसंद कर लिया और शादी करके हवेली ले आया
ठकुराइन की खूबसूरती की बहुत बाते होती थी गाँव मे
ठकुराइन को देखने के लिए सब तरसते थे ,
ठकुराइन जितनी खूबसूरत थी उतनी कड़क भी थी , गाँव वाले डरते थे भी ठकुराइन से
गाँव वालो के लिए कड़क थी पर हवेली पे सिंपल तरीके से रहती
पिताजी को देखते ही ठकुराइन ने उनको चाइ पानी के लिए पूछा
पर पिताजी ठकुराइन से ज़्यादा बात नही करते थे
पिताजी ने ठाकुर के बारे मे पूछा और उसी के रूम मे चले गये
पिताजी (योगेंद्रसिंघ ) -क्या चल रहा है
ठाकुरजी (प्रतापसिंघ) - तुम आ गये , अच्छा हुआ , मैं तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था
पिताजी -मेरा इंतज़ार , क्यूँ नयी माल फसा ली क्या
ठाकुरजी- नयी माल भी है पर बात कुछ और है
पिताजी -तू परेशान दिख रहा है
ठाकुरजी- कुवर की वजह से परेशान हूँ
पिताजी -अब क्या हुआ
ठाकुरजी- कुछ पूछ ही मत
पिताजी -नही पूछता
ठाकुरजी- मेरा मतलब था कि
पिताजी -सीधे सीधे बता
ठाकुरजी- कुवार ने आज तो हद ही कर दी
पिताजी -क्या किया ,
ठाकुरजी- ठकुराइन को रांड़ बोल दिया
पिताजी -क्या बोल रहा है , ऐसा नही करेगा कुवर
ठाकुरजी- उसने ऐसा ही बोला है
पिताजी -ठकुराइन सौतेली माँ ज़रूर है पर कुवर को सगे बेटे जैसा प्यार करती है , उसको ऐसा नही बोलना चाहिए था
ठाकुरजी- पता नही कुवर को हो क्या रहा है ,वो दिन ब दिन बदतमीज़ी कर रहा है
पिताजी -मैं बात करता हूँ
ठाकुरजी- इसी लिए तो तुझे बुलाया है
पिताजी -बस इतनी ही बात थी ना
ठाकुरजी- और पता है क्या किया कुवर ने
पिताजी -क्या?
ठाकुरजी- कल नौकरानी की बेटी को नंगा करके डॅन्स करने को बोला , और डॅन्स ना करने पे उस लड़की की बेल्ट से पिटाई की
पिताजी -कुवर ग़लत रास्ते पे जा रहा है
ठाकुरजी-मैने तो उसकी खाल निकाल दी आज सुबह जब मुझे ये पता चला तो
पिताजी -मारने से तो वो तुम्हे दुश्मन समझ लेगा , गुस्सा उसके दिल मे जमा हो जाएगा ,
ठाकुरजी- तो मैं क्या करूँ
पिताजी -हर ग़लती की सज़ा पिटाई करनी नही होती
ठाकुरजी- पर वो सुनने को तय्यार नही है , ठकुराइन को तो रांड़ भी बोल दिया , मुझे इतना गुस्सा आया था कि मैं उसकी जान ले लेता पर ठकुराइन बीच मे आगयि , जिसको उसने रांड़ बोला उसी ने उसकी बचाया ये भी कुवर के समझ मे नही आ रहा है
पिताजी -इसमे ग़लती हमारी है
ठाकुरजी- हमारी ग़लती , वो कैसे
पिताजी -हम भी तो पार्टी करते है , कुवर ने देख लिया होगा
ठाकुरजी- तुम सही कह रहे हो
पिताजी -इसीलिए मैं फार्महाउस चलने को बोलता था , और तुम हो कि हवेली मे पार्टी करने को बोलते थे
ठाकुरजी- तुमने मुझे पहले क्यूँ नही बताया मैं हवेली पे पार्टी करना बंद कर देता
पिताजी -अब भी देर नही हुई है , कुवर को समझाया जा सकता है
ठाकुरजी- मुझे नही लगता वो समझेगा , उसको तो ठाकुर बनना है ,
पिताजी -मेरे पास एक आइडिया है जिस से कुवर सुधार सकता है
ठाकुरजी- बोल
पिताजी -कुवर के दिमाग़ मे ये बात घुस गयी है कि वो ठाकुर है तो कुछ भी कर सकता है
ठाकुरजी- तो इस बात को बाहर कैसे निकाले
पिताजी -कुवर को यहाँ से दूर भेज दो , उसको बोर्डिंग स्कूल मे डाल दो , वो हवेली से दूर रहेगा तो वो नॉर्मल लड़को की तरह रहेगा , और इस से वो सुधर जाएगा
ठाकुरजी- ये बात मेरे दिमाग़ मे पहले क्यू नही आई
पिताजी -अब भी देर नही हुई है , कुवर को बोर्डिंग स्कूल भेजने का इंतज़ाम करो , वहाँ ना वो ठाकुर रहेगा ना उसके पास पॉवर होगी जिस से उसको समझ मे आ जाएगा , और वो नॉर्मल लड़को की तरह बन जाएगा
ठाकुरजी- तू तो जयसिंघ को शहर3 भेजने को तय्यार नही था और कुवर को बोर्डिंग भेजने को बोल रहा है
पिताजी -जयसिंघ को शहर3 भेजने से ऐतराज़ नही था , उसके सपने बड़े थे ,
ठाकुरजी- क्या था जयसिंघ का सपना
पिताजी -बड़ा आदमी बनना है उसे
ठाकुरजी- ऐसा जयसिंघ ने कहा
पिताजी -नही , मुझे नेहा और छोटू की माँ ने बताया है , ये क्या बात कर रहे है , कुवर की बात करो
ठाकुरजी- तुम बात करो कुवर से
पिताजी -ठीक है , कुवर को मैं समझा दूँगा , और कहो क्या चल रहा है
ठाकुरजी- रणजीतसिंघ बड़ा हो रहा है
पिताजी -तो
ठाकुरजी- वो ठकुराइन के साथ ज़्यादा समय बिता रहा है ,
पिताजी -ये अच्छी बात है
ठाकुरजी- हाँ , रणजीतसिंघ अपनी सौतेली माँ से बहुत प्यार करता है , मुझे ये देख कर अच्छा लगता है
पिताजी -फिर परेशानी क्या है
ठाकुरजी- वो बड़ा हो रहा है , अब उसको ठकुराइन से दूर रह कर आगे का सोचना चाहिए
पिताजी -ये प्राब्लम थोड़ी हुई
ठाकुरजी- रणजीतसिंघ ठकुराइन के साथ साथ ही रहता है
पिताजी -तो
ठाकुरजी- एक हफ्ते पहले मैं ने मज़ाक मज़ाक मे ठकुराइन को थप्पड़ मार दिया तो रणजीतसिंघ ने मुझ पे फ्लवर प्लॉट फेक कर मारा था
पिताजी -ये तो माँ बेटे का प्यार है , रणजीतसिंघ पहले ही अपनी माँ को खो चुका है , अब दूसरी माँ को कुछ नही होने देना चाहता होगा
ठाकुरजी- ये मैं समझ सकता हूँ , पर कभी कभी रणजीतसिंघ के आँखो मे मुझे ठकुराइन को पाने का जुनून नज़र आता है
पिताजी -कुछ भी मत बोल , वो उसकी माँ है , ये ख़याल अपने दिमाग़ से निकाल दे
ठाकुरजी- तू ठीक कह रहा है
पिताजी -रणजीतसिंघ अच्छा लड़का है वो ही तेरा वारिश बनेगा
ठाकुरजी- मुझे भी यही लगता है , पर कुवर का क्या
पिताजी -वो समझ जाएगा , अगर नही समझा तो मैं समझा दूँगा कि रंजीतसिंग ही गाँव का ठाकुर बने से सबका भला होगा
ठाकुरजी- ये ज़िम्मेदारी तेरी तरफ रही
पिताजी -मैं कुवर को संभाल लूँगा , और बता तेरी छोटी बेटी पायल कैसी है
ठाकुरजी- बहुत प्यार है , मैं तो उसी के साथ रहता हूँ दिन भर
पिताजी -बेटी की इच्छा पूरी हो गयी तेरी
ठाकुरजी- ठकुराइन ने मुझे पायल दी ,अब मेरी फॅमिली पूरी हुई
पिताजी -चल फिर कुवर से बात करते है
ठाकुरजी- तू कर मैं तेरे खाने का इंतज़म करने को बोलता हूँ
पिताजी -कहाँ है कुवर
ठाकुरजी- अपने कमरे मे होगा
और पिताजी ने कुवर को समझा दिया
कुवर ने पिताजी की बात मे मान ली
पर कुत्ते की दुम कितनी भी सीधी करो टेडी के टेडी ही रहेगी
कुवरसिंघ ऐसा ही था
कुवर को बोर्डिंग भेज दिया,
रणजीतसिंघ ठकुराइन के प्यार मे बड़ा होने लगा ,
पायल भी बड़ी हो रही थी ठाकुर के प्यार के साथ