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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 849

पिताजी ने ठाकुर की मदद कर दी

कुंवर को कैसे सही रास्ते पे लाना है वो बता दिया

बोर्डिंग मे रहेगा तो बिना पवर और पैसो से वो लिमिट मे रहेगा

कुंवर का प्राब्लम सॉल्व होते ही प्रतापसिंघ टेन्षन फ्री हो गया

रणजीतसिंघ अपनी माँ के साथ ही रहता था , ठकुराइन के प्यार की तरफ अटर्क्ट हो रहा था रणजीतसिंघ

कुंवर के बोर्डिंग जाते प्रतापसिंघ ने पिताजी को फिर से हवेली बुला लिया

अब तो पार्टी करने बुलाया होगा

पिताजी ठाकुर से मिलने चले गये

पिताजी -कुंवर तो चला गया ,अब मेरे दोस्त को क्या परेशानी है

ठाकुरजी- अब क्या जब परेशान रहूँगा तभी तुझे बुलाता जाउन्गा

पिताजी -मेरे कहने का वो मतलब नही था

ठाकुरजी- तो क्या मतलब था

पिताजी -हम जब भी मिलेंगे तो तेरे फार्महाउस पे मिलेंगे

ठाकुरजी- हवेली मे क्या बुराई है

पिताजी -कुंवर ने हमे देख लिए था , अगर रंजीत या पायल ने देख लिया तो

ठाकुरजी- तू बता कुछ और रहा है , और तेरे चेहरे पे एक्सप्रेशन कुछ अलग है

पिताजी -ऐसा कुछ नही है

ठाकुरजी- बता बात क्या है , कही तू ठकुराइन कुछ कहेगी इस वजह से आने को मना कर रहा है

पिताजी -नही , वो बात नही है

ठाकुरजी- फिर बता बात क्या है , वरना यहाँ से जाने नही दूँगा , अगर तू नही बताएगा तो ठकुराइन से पूछना होगा मुझे

पिताजी -ठकुराइन से कुछ मत पूछना

ठाकुरजी- तो बता बात क्या है

पिताजी -कैसे बोलू समझ नही आ रहा है

ठाकुरजी- बता दे तेरी बात का मुझे बुरा नही लगता

पिताजी -सच बोल रहा हूँ ,गुस्सा मत होना

ठाकुरजी- बो भी दे वरना मुझे हार्ट अटेक आ जाएगा ये सोच सोच के कि बात क्या है

पिताजी -ठकुराइन को देख कर मेरा लंड खड़ा हो जाता है ,, जैसे देखता हूँ ठकुराइन को तो पकड़ कर बेड पे पटाकने का दिल करता है , ऐसा लगता है रात भर धक्के मारता रहूं , बड़ी मुश्किल होती है कंट्रोल करने मे

पिताजी की बात सुनकर ठाकुर हँसने लगा

पिताजी को लगा कि ठाकुर गुस्सा करेगा पर यहाँ तो ठाकुर हंस रहा है

पिताजी -तुम गुस्सा होने की जगह हंस रहे हो

ठाकुरजी- तुम्हारी बात सुनकर हँसी आ रही है

पिताजी -मैं सच बोल रहा हूँ , बहुत कंट्रोल करता हूँ मैं

ठाकुरजी- मैं सोच ही रहा था कि तूने अब तक ठकुराइन के बारे मे कभी बात क्यूँ नही की

पिताजी -क्या मतलब

ठाकुरजी- ऐसा ही मुझे लगा था जब पहली बार ठकुराइन को देखा था

पिताजी -मैं समझा नही

ठाकुरजी- तुझे तो पता है मेरे सौतेले भाई ने क्या किया था मेरे साथ , अगर तू नही होता तो मैं जिंदा नही होता , रंजीत की माँ की डेत के बाद मैं ने इसी वजह से शादी नही की कि रंजीत कुंवर को अगर सौतेला भाई मिल गया तो पास्ट रिपीट हो जाएगा

पिताजी -तूने बताया था मुझे

ठाकुरजी- पर एक दिन ऐसे काम के सिलसिले मे मैं बाहर गाँव गया था तो मेरी नज़र एक लड़की पे पड़ी , जैसा तूने कहा कि ठकुराइन को देख कर तू कंट्रोल नही कर पाता , वैसा ही मेरा हाल हुआ था पहली बार ठकुराइन को देख कर

पिताजी -तो

ठाकुरजी- ऐसा लग रहा था कि पकड़ कर बेड पे पटक दूं और रात भर धक्के मारता रहूं , यही बात दिमाग़ मे आते मेरे दिल ने कहा कि एक रात से क्या होगा , अपनी सारी रात इस के साथ प्यार कर

पिताजी -और

ठाकुरजी- मैं ने दूसरी शादी कर ली, और उसको ठकुराइन बना दिया , अब हर रात को प्यार करता हूँ

पिताजी -तभी तूने मुझे बिना बताए दूसरी शादी कर ली

ठाकुरजी- तुझे बताता तो तू मुझसे पहले ठकुराइन को पकड़ कर बेड पे पटक देता

पिताजी -मुझे बहुत बुरा लगा था उस दिन जब तूने मुझे बिना बताए दूसरी शादी की थी

ठाकुरजी- अब समझा मैं ने शादी क्यूँ की

पिताजी -समझ गया , पर तू मेरी बात पे हंसा क्यूँ

ठाकुरजी- मुझे मेरी हालत की याद आई जब पहली बार मैं ने ठकुराइन को देखा था

पिताजी -तू बहुत लकी है , जो ठकुराइन खूबसूरत होने के साथ ही समझदार है , सौतेले बेटे को सगे बेटा जैसा प्यार करती है , ऐसी औरत ढूँढने से भी नही मिलती

ठाकुरजी- हाँ , ठकुराइन रंजीत और कुंवर को जिस तरह प्यार करती है जिस से मैं टेन्षन फ्री होता हू

पिताजी -अगर ठकुराइन को बेटा होता तो

ठाकुरजी- मुझे ठकुराइन पे विश्वास था कि वो सबको एक जैसा प्यार करेगी , पर बेटी होने से मैं और ठकुराइन दोनो खुश है

पिताजी -ठकुराइन ने बेटे होने की बात नही की

ठाकुरजी- उसने कहा की उसको बेटा नही चाहिए , रंजीत और कुंवर उसके बेटे है , और पायल हमारी बेटी है , फॅमिली पूरी हो गयी

पिताजी -तेरी किस्मत बहुत अच्छी है

ठाकुरजी- ठकुराइन उम्मीद से ज़्यादा अच्छी निकली और रात मे तो पूछ ही मत , मुझे मात देती है

पिताजी -ऐसा मत बोल , मेरा लंड खड़ा हो रहा है

ठाकुरजी- खड़ा हो गया तो हिलाते रहना पड़ेगा

पिताजी -तुझे कुश्ती मे हरा कर ठकुराइन को बेड पे ले जाउन्गा

ठाकुरजी- ठकुराइन तेरे साथ आएगी ही नही

पिताजी -मेरी सराफ़त है कि मैं ने अब तक ठकुराइन के साथ कुछ करने का सिर्फ़ सोचा है किया नही है

ठाकुरजी- तू भूल गया कि हमने क्या प्रॉमिस किया था

पिताजी -याद है

ठाकुरजी- तेरी बीवी मेरी बहन और मेरी बीवी तेरी बहन

पिताजी -तेरी बीवी को मैं अपनी बहन मानता हूँ , और तेरी बहन ने ही कुंवर का प्राब्लम सॉल्व करने को कहा

ठाकुरजी- लगा ही था मुझे , मेरी बहन को मेरी फिकर रहती है

पिताजी -मैं भी तेरा दोस्त हूँ

ठाकुरजी- प्रॉमिस के मुताबिक ठकुराइन तेरी बहन हुई

पिताजी -तेरी पहली बीवी मेरी बहन थी , वो मुझे राखी बाँधती थी , तेरी दूसरी बीवी मेरी बहन नही है

ठाकुरजी- ये चीटिंग है

पिताजी -चीटिंग नही है ,

ठाकुरजी- उसे कभी बताया ही नही इस बारे मे

पिताजी -बताना भी मत

ठाकुरजी- तो क्या मेरी बीवी पे लाइन मारेगा

पिताजी -दूसरी बीवी बोल

ठाकुरजी- मेरी दूसरी बीवी पे लाइन मारेगा

पिताजी -बस बताया कि मैं हवेली क्यूँ नही आना चाहता

ठाकुरजी- सच मे तू ठकुराइन के बारे मे ऐसा सोचता है ,

पिताजी -मैं क्या पूरा गाँव बाते करता है ठकुराइन की खूबसूरती की

ठाकुरजी- वो मुझे पता है ,पर तू क्या सोचता है

पिताजी -तेरे मरने का इंतज़ार कर रहा हूँ मैं , तेरे मरते ही मैं ठकुराइन का ख़याल रखूँगा

ठाकुरजी- तू रखेगा ठकुराइन का ख़याल

पिताजी -मैं तो मज़ाक कर रहा था

ठाकुरजी- मैं सीरियस्ली बोल रहा हूँ

पिताजी -क्या मतलब

ठाकुरजी- देख मेरी एज और ठकुराइन की एज मे बहुत फरक है , मैं उसका साथ कब तक दूँगा ,

पिताजी -ऐसा क्यू बोल रहा है , तू 100 साल जिएगा

ठाकुरजी- मैं तो जी लूँगा पर मेरा लंड जीना चाहिए 100साल , क्या समझा

पिताजी -मैं तो तुझसे भी बड़ा हूँ

ठाकुरजी- पर तू फिट रहता है , तेरी फिटनेस से तेरे लंड की एज ज़्यादा होगी

पिताजी -तू कहना क्या चाहता है

ठाकुरजी- अगर मुझे कुछ हुआ , मेरे दुश्मन भी बहुत है ,देख अगर मुझे कुछ हुआ तो ठकुराइन का ख़याल तू रखेगा

पिताजी -पागल हो गया है तू

ठाकुरजी- मैं सीरियस्ली बोल रहा हूँ , वो बिना प्यार के रह नही पाएगी

पिताजी -मैं कैसे

ठाकुरजी- जैसे हम दूसरी औरतो के साथ लड़ते है बस वैसे ही ठकुराइन का ख़याल रखना

पिताजी -तू तो पीछे पड़ गया है

ठाकुरजी- मैं यही सोच रहा था कि मेरे बूढ़े हो जाने के बाद ठकुराइन का क्या होगा , तूने ठकुराइन की बात करके मेरा प्राब्लम सॉल्व कर दिया

पिताजी -मुझसे नही होगा

ठाकुरजी- अभी थोड़ी बोल रहा हूँ करने को , अभी हाथ लगाया तो लंड काट दूँगा तेरा ,

पिताजी -हाथ तो लगा कर दिखा

ठाकुरजी- ठकुराइन दूसरो के पास जाएगी क्या तुझे अच्छा लगेगा

पिताजी -मार डालूँगा जिसने भाभी को हाथ लगाया तो

ठाकुरजी- इसी लिए कहता हूँ तू ये काम करना , पर मेरे मरने के बाद

पिताजी -वो बाद मे देखेंगे

ठाकुरजी- एक छोटा प्रॉमिस कर दे , मैं टेन्षन फ्री हो जाउन्गा

पिताजी -कर दिया प्रॉमिस , अब मुझे जाने दे ,मुझे घर पे काम है

ठाकुरजी- तेरा काम मुझे पता है

पिताजी -मैं बहुत परेशान हूँ

ठाकुरजी- जयसिंघ की वजह से ना

पिताजी -हाँ

ठाकुरजी- जयसिंघ ने बहुत तरक्की की है मैं पिछले हफ्ते शहर3 गया था तब जयसिंघ से मिला था ,

पिताजी -क्या कहा गधे ने

ठाकुरजी- वो खुश था , तुझे याद कर रहा था

पिताजी -एक बार मुझे बहू मिल जाए फिर उसको यही लेकर आउन्गा

ठाकुरजी- तुझे अभी तक लड़की नही मिली

पिताजी -नही ना

ठाकुरजी- जयसिंघ को उसकी पसंद की ढूँढने दे

पिताजी -ऐसा किया तो जयसिंघ इस गाँव को भूल ही जाएगा

ठाकुरजी- तो जल्दी ढूँढ कोई ऐसी लड़की

पिताजी -तुझे ठकुराइन से शादी नही करनी चाहिए थी

ठाकुरजी- क्यूँ

पिताजी -उसकी और जयसिंघ की एज सेम है , मैं ठकुराइन से जयसिंघ की शादी करवा देता

ठाकुरजी- पागल हो गया है तू

पिताजी -जिस तरह ठकुराइन ने रंजीत और कुंवर को सगे बेटो जैसा प्यार दिया मुझे ऐसी ही लड़की चाहिए

ठाकुरजी- फिर मेरे साथ चल

पिताजी -कहाँ

ठाकुरजी- ठकुराइन के गाँव चलते

पिताजी -वहाँ क्या है

ठाकुरजी- ठकुराइन ऐसी है तो उसके गाँव की लड़किया भी वैसी ही होगी

पिताजी -ये तो मैं ने सोचा ही नही

ठाकुरजी- और ठकुराइन की छोटी बहन और उसकी कज़िन को भी देख लेंगे

पिताजी -तूने ये पहले क्यूँ नही कहा ,

ठाकुरजी- तो चलें

पिताजी -बना तू प्रोग्राम

ठाकुरजी- तू लड़किया देखना मैं अपना काम करूँगा

पिताजी -ठकुराइन को साथ लेकर नही जाएँगे वरना मेरा दिमाग़ उसी पे लगा रहेगा

ठाकुरजी हँसने लगा

पिताजी -मैं मज़ाक नही कर रहा हूँ

ठाकुरजी- ठकुराइन को उसके मायके छोड़ दूँगा और बाकी के गाँव भी ढूँढ लेंगे

पिताजी -ठकुराइन को रहने दे

ठाकुरजी- उसको पता होगा ना कौन सी लड़की कैसी है

पिताजी -ठीक है ,

ठाकुरजी- तुम लड़किया देखना मैं अपना काम करूँगा

पिताजी -अच्छा प्लान बना

ठाकुरजी- 15 दिन का कैसा रहेगा

पिताजी -15 दिन , इतने दिन घर से दूर रहना होगा

ठाकुरजी- सोच ले , ये गोल्डन चान्स हो सकता है

पिताजी -ठीक है मैं मेनेज कर लूँगा

ठाकुरजी- हम 15 दिन मे 7 गाँव घूमेंगे ,

पिताजी -फिर तो बहुत सी लड़कियो को मिल पाएँगे

ठाकुरजी- तो उसी हिसाब से तय्यारी करना

पिताजी -कब निकलना है

ठाकुरजी- 1 हफ्ते बाद निकलते है , ठकुराइन भी खुश होगी अपने मायके जाकर

पिताजी -मैं अकेला आउन्गा क्यू की घर पे छोटू की माँ को रहना होगा , इतने दिन दोनो बाहर नही रह सकते

ठाकुरजी- तुझे जैसा अच्छा लगे वैसा कर ,

पिताजी -तूने तो मेरा काम आसान कर दिया

ठाकुरजी- तो ठकुराइन की हाथ का ख़ान खा कर जा

पिताजी -नही यार ठकुराइन जब झुकती है तो उसके आम देख कर मैं खाना नही खा पाता

ठाकुर फिर हँसने लगा ,

ठाकुरजी- ठकुराइन को बोलना पड़ेगा कि मेरे दोस्त को अपनी अदाए दिखाया करे , अपनी अदा से घायल कर दे

पिताजी -तू मरवाएगा मुझे

ठाकुरजी- चल जाने दे रहा हूँ, पर दोपहर मे फार्महाउस पे आना

पिताजी -क्यू ?

ठाकुरजी- मेरी एक फ्रेंड आई है विलायत से

पिताजी -विलायती में

ठाकुरजी- हाँ , उसको प्रेगनेंट करके भेजना है

पिताजी -आ जाउन्गा ,

और पिताजी घर चले गये

माँ को सारी बात बता दी

माँ खुश हो गयी

फिर दोपहर मे पिताजी फार्महाउस पे चले गये और विलायती में को देसी पानी पिला दिया
 
फ्लश बॅक 850

ठाकुर ने तो सारी प्राब्लम सॉल्व कर दी पिताजी की

ठकुराइन ने जिस तरह अपने सौतेले बेटो को सग़ी माँ जैसा प्यार दिया उस से पिताजी प्रभावित हुए

ठकुराइन के रिस्तेदार भी ऐसे ही होंगे ऐसा पिताजी को लगा

ठकुराइन के रिस्तेदार से काम नही चला तो उसके गाँव या उसके आसपास के एरिया मे देख लेंगे

उस एरिया मे पिताजी ने अब तक लड़की देखी नही थी

पिताजी को इस बार बहू मिलने के चान्स ज़्यादा दिख रहे थे

इस बार पिताजी कुछ भी करेंगे , 15 से 50 दिन क्यूँ ना लग जाए , पिताजी खाली हाथ नही आएँगे ,

पिताजी हवेली से घर की तरफ आने लगे , माँ को खुश खबरी सुनाने

पिताजी इतने खुश थे कि जैसे बहू मिल गयी हो

उदार घर पे माँ वैद्य से बात कर रही थी

माजी - वैद्य जी , मैं ने छोटू को डॉक्टर को दिखाया था

वैद्य- क्या कहा डॉक्टर ने

माजी - डॉक्टर ने वही कहा जो आपने कहा

वैद्य- भगवान ने चाहा तो सब कुछ ठीक हो जाएगा

माजी - भगवान की 10 साल से पूजा कर रही हूँ ,

वैद्य- धीरज रखिए , आपको फल ज़रूर मिलेगा

माजी - मुझे फल मिला तो आपको सोने से तोल दुगी

वैद्य- छोटू की सेहत देखते हुए लग रहा है कि सब ठीक हो जाएगा

माजी - यही उम्मीद है

वैद्य- पर आपको तो 2 बेटे है फिर आप इतनी टेन्षन क्यूँ ले रही हो , आपका वंश आगे बढ़ेगा

माजी - जयसिंघ का कुछ बोल नही सकते , वो शहर3 मे ही रहा तो , और छोटू को भी तो बाप बनता हुआ देखना है मुझे

वैद्य- छोटू ज़रूर बाप बनेगा , अभी वो छोटा है , जब शादी होगी तब इलाज कर सकते है अभी कुछ किया तो गड़बड़ हो जाएगी ,

माजी - जैसा आप ठीक समझे

वैद्य- और आप ,जब भी डॉक्टर गाँव मे आते है तब छोटू को दिखा दिया करे

माजी - वो तो दिखाती हूँ , पर

वैद्य- देखिए वो एक छोटी चोट लगी थी उसका असर कितना होगा ये अभी नही बता सकते

माजी - मुझे आज भी याद है , ये 6 महीने पहले की बात है , सब खेतो मे गये थे मैं और छोटू घर पे अकेले थे , अचानक पता नही कहा से पत्थर मारा किसीने घर पे और छोटू छत से नीचे गिर गया और उसको को चोट लग गयी ,

वैद्य- तब तो मैं ने इलाज कर दिया था पर कुछ बोल नही सकते

माजी - क्या ये सिर्फ़ मेरा वहम है ,

वैद्य- कुछ कह नही सकते , डॉक्टर ने कहा है कि घबराने की बात नही है , फिर आप इतनी टेन्षन क्यूँ लेती हो,

माजी - माँ हूँ मैं ,फिकर तो होगी ना

वैद्य- आप बेफिकर रहिए ,

माजी - आप ये बात किसी को मत बताना , ना छोटू को और ना छोटू के पिताजी को वरना वो बेवजह परेशान होंगे ,

वैद्य- मैं आपको अपनी बहन मानता हूँ , आप बेफिकर रहिए ,ये राज़ मुझ तक ही रहेगा , और डॉक्टर ने कहा हैना घबराने की बात नही है ,छोटू ज़रूर बाप बनेगा ,अभी तो वो बच्चा है , और ये आपको वहाँ भी हो सकता है , ऐसे चोट तो लगती रहती है ,

माँ और वैद्य बात कर रहे थे कि पिताजी आ गये

पिताजी -वैद्य जी आप , यहाँ कैसे आना हुआ

माजी - मेरी पीठ मे थोड़ा दर्द था तो दवाई के लिए बुला लिया

वैद्य- अब मैं चलता हूँ

पिताजी- चाइ पानी पी कर जाते

वैद्य- फिर किसी दिन पी ने आ जाउन्गा , अब इजाज़त दीजिए

और वैद्य चला गया

पिताजी- तुमने मुझे बताया नही तुम्हारी तबीयत ठीक नही है

माजी - थोड़ा सा पीठ दर्द था , शाम तक ठीक हो जाएगा

पिताजी- मैं तुम्हारे लिए एक गुड न्यूज़ लेकर आया था

माजी - बहू मिल गयी

पिताजी- समझो मिल ही गयी

माजी - कहाँ मिली

पिताजी- मैं ठाकुर के साथ ठकुराइन के गाँव जा रहा हूँ , वहाँ मिल जाएगी

माजी - मुझे लगा आपने ने देख ली है

पिताजी- इस बार मिल ही जाएगी समझो

माजी - क्या मतलब मिल जाएगी

पिताजी- तुमने देखा नही ठकुराइन कितनी सुंदर है

माजी - वो तो है

पिताजी- और अपने सौतेले बेटो को कितना.प्यार करती है

माजी - अब समझी ,

पिताजी- तुम समझ भी गयी

माजी - हाँ ,आप ठकुराइन की रिश्तेदारी को देखने जा रहे है

पिताजी- हाँ ,

माजी - उस एरिया मे जा रहे हो तो गाँव की बाकी लड़कियो को भी देख लेना

पिताजी- इसी लिए 15 दिन के लिए जा रहा हूँ

माजी - 15 दिन , इतने दिन मेरे बिना रह लेंगे

पिताजी- तुम ही तो कहती हो कि अब बच्चे बड़े हो गये है उनकी शादी का पहले सोचना चाहिए

माजी - मैं तो आपके लिए कह रही थी , मुझे तो आराम मिलेगा

पिताजी- कर लो आराम पर वहाँ से आते तुम्हे सोने नही दूँगा

माजी - खुश खबरी लेकर आना है

पिताजी- इस बार उम्मीद ज़्यादा दिख रही है ,

माजी - वैसे सिर्फ़ 15 दिन के लिए जा रहे हो

पिताजी- 15 के 25 भी हो सकते है

माजी - कितने भी होने दो इस बार खुश खबरी लेकर आना

पिताजी- तुम्हारी पीठ दर्द की दावा तो अब तुम्हारी बहू लगाएगी तुम्हारी पीठ पे

माजी - आप बैठिए मैं खाना लगा देती हूँ

पिताजी- नही रहने दो

माजी - हवेली से खा कर आए हो

पिताजी- नही , पर फार्महाउस पे खाने जा रहा हूँ

माजी - फार्महाउस , क्या चल रहा है

पिताजी- एक विलायती मेम आई है

माजी - विलायती मेम

पिताजी- हाँ , ठाकुर की दोस्त है विलायत वाली ,

माजी - आज मैं रोकूगी तो भी आप रुकेगे नही , विलायती मेम जो मिल रही है

पिताजी- तुम्हारे सामने सब फीकी है , तुम तो अप्सरा हो , मेरे दिल की रानी

माजी - तो मत जाओ , फार्महाउस पे

पिताजी- तुमने कहा और समझो हो गया ,

और पिताजी कपड़े निकालने लगे और घर के कपड़े पहनने लगे

माजी - मैं मज़ाक कर रही थी

पिताजी- तुम्हारी जगह कोई नही ले सकता , तुम मेरे दिल मे रहती हो

माजी - तो जाइए फार्महाउस पे ,

पिताजी- अब मूड नही है

माजी - जाते है या आप को बाहर सोना है बैल के साथ

पिताजी- तुम कह रही हो तो जा रहा हूँ

माजी - शाम मे आ जाना वरना

पिताजी- तुमने कहा और बंदा हाज़िर हो जाएगा

और पिताजी ठाकुर के साथ फार्महाउस पे चले गये
 
फ्लश बॅक- 851

फार्महाउस पे आते ही पिताजी उस विलायत मेम को देखते रह गये

ठाकुरजी- कैसे है

पिताजी- ये तो दूध की तरह सफेद है

ठाकुरजी- तो इसको गंदा कर दे , लगा दे दाग

पिताजी- तूने तो दाग लगा भी दिया होगा

ठाकुरजी- ये मेरे साथ विलायत मे पढ़ती थी तभी इसको औरत मैं ने बनाया था ,

पिताजी- तो अब यहाँ क्यूँ बुलाया है

ठाकुरजी- ये यहाँ रिसर्च करने आई थी तो मुझे कॉंटॅक्ट कर लिया , तो मैं इसके साथ पुरानी यादे ताज़ा करने का सोच रहा था

पिताजी- तू अपने यादे बाद मे ताज़ा करना पहले मैं करूँगा इस के साथ

ठाकुरजी- तेरा लंड देख कर तो ये तुझे विलायती समझेगा

पिताजी- आज तक देसी औरतों को बहुत पानी पिलाया है अब विलायती को भी पानी पिला देता हूँ जाते हुए डोर बंद करना

ठाकुरजी- क्या कहा

पिताजी- मेरे प्यारे दोस्त तू बाहर रुकेगा

ठाकुरजी- मैं बहुत सी विलायती मेम को पानी पिला चुका हूँ , ,अब तू भी कर ले , और हाँ इसको सब बता दिया है

ठाकुर के जाते ही पिताजी विलायती मेम को घूर्ने लगे

विलायती मेम पिताजी को ऐसे घूरते हुए देख कर थोड़ी डर गयी पता नही कैसे होंगे पिताजी ये सोच रही होगी

जैसे पिताजी ने अपना शर्ट निकाला वो विलयती मेम पिताजी के कसरती बदन को देख कर देखती रह गयी

वो बात कर रही थी पर पिताजी को इतनी इंग्लीश कहाँ आती थी , पिताजी एस एस नो नो कर रहे थे ,

और खुद लंगोट मे आ गये

पिताजी को लंगोट मे देखते विलायती मेम भी नगी हो गयी

पिताजी को विलायती मेम को देख कर हँसी आ रही थी , इतनी दुबली पतली , पिताजी ने ऐसी लड़की की चुदाई की नही थी

उसके छोटे छोटे अंगूर देख कर पिताजी को हँसी आ रही थी

इस से अच्छी तो अपनी देसी मुर्गी अच्छी होती है , दूध पकडो तो हाथ से बाहर निकल जाए , गंद देखो तो लंड खड़ा हो जाए

पर इसके ना दूध दिख रहे है ऐसा लग रहा है निप्पल्स ही है और गंद भी फ्लॅट थी

फॅट (चर्बी ) तो कही था ही नही

कुछ जगह पे फॅट(चर्बी ) तो होनी चसीए वरना चुदाई मे मज़ा नही आएगा

और पिताजी को तो मसल्ने मे मज़ा आता है यहाँ ना दूध सी और ना गंद अच्छी है , पिताजी मसलेंगे क्या

फिर भी ये विलायती मेम थी

इसका टेस्ट चेक करना ही होगा

पिताजी ने लंगोट निकाल कर अपना लंड दिखाया

पिताजी का लंड देखते ही विलायती मेम खुश हो गयी

उसने जैसा सोचा होगा वैसा नही था

उम्मीद से अच्छा था पिताजी का हथियार

वो खुश होकर लंड को अपने हाथो ने लेकर प्यार करने लगी

और लंड को चूसने लगी

लंड चूसना , ये मज़ेदार था

पिताजी को इसमे मज़ा आ रहा था

अगर इस विलायती मेम मे चर्बी होती तो पिताजी को और ज़्यादा मज़ा आता है

पिताजी को गोरा लंड देख कर विलायती मेम मज़े से चूसने लगी

पिताजी को तो चूत मारने मे मज़ा आता है

पिताजी उसके उपर आ गये

उसके निपल को उंगली मे पकड़ लिया और दबाने लगे

दूध अच्छे ना होने से पिताजी ने चूत पर हमला बोल दिया

विलायती मेम की चूत पिताजी को पसंद आ गयी

चिकनी , गुलाबी , चूत इतनी अच्छी दिखती है ये पहली बार पिताजी ने देखा था वरना हर बार बालों वाली मिल जाती थी

पिताजी चिकनी चूत देख कर कंट्रोल नही कर पाए और एक झटके मे अपना लंड विलायती मेम की चूत मे पेल दिया

विलयती मेम पहली बार ऐसा झटका झेल रही होगी

विलयती मेम की चीखनिकल गयी

ठाकुर चीख सुनकर हँसने लगा

ठाकुरजी- योगेंद्रसिंघ कभी सुधरेगा नही ,चीखे निकाले बिना उसको मज़ा नही आता

पिताजी को चीख निकालने से अपनी जीत गये है ऐसा लगता था

पिताजी चीख निकालने के बाद उसका भोसड़ा बनाने लगे

वो विलायती मेम पिताजी के हाथो से निकलना चाहती थी पर कोई फ़ायदा नही था

पिताजी तो उसको देसी पॉवर दिखाने लगे

विलयती मेम देसी पॉवर के सामने हार गयी

और पिताजी के धक्को मे साथ देने लगी

विलयती मेम मस्ती मे आकर शीष्कारिया ले रही थी

ठाकुरजी- कमीना है , बना दिया अपना गुलाम

ठाकुर शीष्कारिया सुनने लगा

और पिताजी विलायती मेम की शीष्कारिया निकालने लगे

विलायती मेम पिताजी का वजन अपने उपर बर्दस्त नही कर पाई

फिर क्या था वो खुद डॉगी बन गयी

और पिताजी ने उसके कहने पर अपना लंड पेल दिया पीछे से

और उसकी चूत को फाड़ने लगे

वो विलायती मेम पिताजी के इशारो पे नाचने लगी

पिताजी खुश होकेर धक्के मारने लगे

पिताजी रुकने का नाम नही ले रहे थे

विलायती मेम पानी पानी हो गयी पर पिताजी का पानी निकलने का नाम नही ले रहा था

और जब लास्ट धक्को की बात आई तो पिताजी ने ऐसे धक्के मारे कि उसकी गंद लाल कर दी

गोरा बदन होने से उसकी गंद ऐसी लाल हो गयी कि कोई देखेगा तो कहेगा ये तो पहले से लाल थी

वो विलायती मेम ऐसी चुदाई से खुश हो गयी

विलायती मेम की चुदाई से एग्ज़ाइट होकेर पिताजी ने ज़्यादा पानी निकाल दिया

और उसकी चूत भर दी अपने वीर्य से

उसकी चूत से तो वीर्य बाहर निकलने लगा

वो विलायती मेम तो बेड पे गिर गयी

ठाकुरजी- हो गया

पिताजी- मज़ा आ गया

ठाकुरजी- इसकी तो लाल कर दी तूने

पिताजी- थोड़ी मोटी होती तो और मज़ा आता

ठाकुरजी- वहाँ ऐसी पतली लड़किया ही होती है

पिताजी- चल अब तू कर बाद मे मैं एक और बार करूँगा

ठाकुरजी- तू इसकी जान लेकर रहेगा

पिताजी- दुबारा कब मिलेगी विलायती मेम इस लिए आज 2 3 बार तो कर ही लूँगा

ठाकुरजी- रुक बाहर , अब मैं निकालता हूँ उसकी चीख

और ठाकुर उस विलायती मेम की चुदाई करने लगे

फिर एक और बार पिताजी ने उसकी चुदाई की और फिर घर आ गये

छोटी चाची========

यहाँ से ठीक रहेगा

अवी को ये बताना ठीक रहेगा कि ठाकुरजी और दादा जी साथ मे गये थे लड़की देखने

इससे पहले की बात बताना ठीक नही होगा

यहाँ से बता देती हूँ

और लास्ट मे अवी क्या पूछेगा ये मुझे पता है

उसका जवाब भी मैं ने ढूँढ लिया है

और छोटी चाची बाथरूम से बाहर आ गयी

मैं तो बस छोटी चाची के आने का इंतज़ार ही कर सकता था

छोटी चाची को देखते मुझे सबसे ज़्यादा खुशी हुई

आज मुझे अपने माँ और पापा की शादी के बारे मे पता चलेगा

छोटी चाची आते ही मेरे पास लेट गयी

अवी- चाची

सी चाची- बताती हूँ ,, हमारे पास पूरी रात है

अवी- कल घूमने भी जाना है

ब चाची- मीना बता दे

सी चाची- ये कहानी है शालिनी की , शालिनी भाभी की कहानी

और छोटी चाची ने मुझे कहानी बतानी शुरू की
 
फ्लश बॅक 852

ये कहानी है शालिनी की

इस कहानी की शुरुआत कुछ साल पहले हो चुकी थी

जब पहली बार जयसिंघ की शहर3 जाने की बात पिताजी ने जयसिंघ की थी उसी दिन से जयसिंघ के बीवी की खोज मे पिताजी लग चुके थे

पिताजी ऐसी बीवी चाहते थे जयसिंघ के लिए जो उसको समझे , जयसिंघ अपने दुख दर्द उस से शेर करे , और वो इस घर को कभी टूटने ना दे

जयसिंघ के लिए पिताजी एक ऐसी जीवन साथी के खोज मे थे जो अपने पति के साथ साथ इस घर को भी अपना समझे

पिताजी को ऐसी देवी की तलाश थी जो छोटू को देवेर नही अपना बेटा समझे , नेहा नीता को ननंद की जगह अपनी बहने समझे , पूजा के साथ एक सहेली जैसी रहे , माँ और पिताजी को सास ससुर की तरह नही अपने माता पिता की तरह आदर दे

पिताजी तो कलयुग मे ऐसी देवी को ढूँढ रहे थे जो मिलना मुश्किल था

पर पिताजी को खुद पे विश्वास था , उनको भगवान पे विश्वास था

उनको यकीन था कि ऐसी बहू उनको मिल जाएगी

पिताजी ने बहुत जगह तलाश करनी शुरू की थी पर अब तक पिताजी को जैसी बहू चाहिए थी वैसी बहू नही मिली

कोई पसंद आती तो उसमे कोई ना कोई कमी पिताज़ो की दिख जाती

पिताजी बिना किसी को बताए अपने बहू के खोज मे लगे हुए थे

पिताजी ने ये बात माँ को भी नही बताई

पिताजी को कोई जल्दी नही थी

अभी तो जयसिंघ सिर्फ़ पढ़ने गया था

उसकी शादी मे अभी टाइम है

पिताजी के पास बहुत समय था

पर ऐसी बहू ढूँढना मुश्किल साबित हो रहा था

पर जब पूजा की शादी अचानक तय हो गयी

उसके बाद जयसिंघ के साथ जो छोटा झगड़ा हुआ इस बात के लिए की शादी शहर मे होगी या गाँव मे (झूठ)

पिताजी को पता चल गया कि जयसिंघ खुद को भूलता जा रहा था

पिताजी को जिस बात से डर था वही हो रहा था

पिताजी और जयसिंघ के बीच मे पुरानी और नयी सोच की जंग पूजा की सगाई के दूसरे दिन से शुरू हो गयी थी

इस जंग मे कौन जीता कौन हारा ये तय नही हुआ पर इतना पता चला कि पिताजी और जयसिंघ की सोच अलग है

जहा पिताजी गाँव मे रह कर अपनी फॅमिली और गाँव के बारे मे सोच रहे थे

वही जयसिंघ शहर3 मे रह कर अपनी फॅमिली को नयी दुनिया से मिलाना चाहता था

जब 2 अलग अलग सोच आपस मे टकराती है तो उसका नुकसान फॅमिली को होता है

जयसिंघ और पिताजी की इस जंग मे फॅमिली का नुकसान हो रहा था

जयसिंघ ने उस झगड़े के बाद भी पूजा की शादी धूम धड़ाके के साथ कर दी

जयसिंघ के इस रूप को देख कर पिताजी उस झगड़े को भूल गये थे

पर उनको पता चल गया था कि जयसिंघ अपनी सोच के साथ गाँव मे नही रह पाएगा

वो तो शहर3 मे रहना चाहता है

जयसिंघ भी अपनी फॅमिली के बारे मे सोच रहा था पर उसका तरीका अलग था

माँ को पता चल गया कि उनका बेटा ग़लत नही है

माँ को अपने बेटे पे पूरा विश्वास था

जयसिंघ के बारे मे कोई कुछ भी सोच ले पर माँ जयसिंघ के साथ थी

जयसिंघ पूजा की शादी के बाद वापस शहर चला गया

उसकी दुनिया शहर3 थी

माँ ने पिताजी से बात कर जयसिंघ को शहर जाने दिया

पर पिताजी को पूजा की शादी के समय ये पता चल गया कि जयसिंघ चाहता क्या है

उसकी सोच क्या है

जिस बात का डर था पिताजी को वही हुआ

जयसिंघ शहर3 जाकर खुद के भूलता जा रहा था

जयसिंघ अब पिताजी से झूठ बोलने लगा था

अपने कंपनी के बारे मे जयसिंघ ने पिताजी से झूठ कहा

पर पिताजी को जयसिंघ के तरक्की से खुशी हुई , पूरे गाँव मे लड्डू दिए थे पिताजी ने

पर जयसिंघ के झूठ बोलने से पिताजी समझ गये कि जयसिंघ खुद को भूलता जा रहा है

जयसिंघ को जल्दी सही रास्ते पे करना होगा

पिताजी ने उसको शहर3 वापस भेज दिया पर उनकी टेन्षन बढ़ गयी थी

पिताजी जयसिंघ को ऐसे छोड़ तो नही सकते

जयसिंघ है तो उनका बेटा ना

पिताजी अब जल्द से जल्द जयसिंघ की शादी करने के पीछे लग गये

पिताजी जितना देर करेंगे उतना जयसिंघ के लिए अच्छा नही होगा

जयसिंघ शहर3 के रंग मे रंगने से पहले उसके हाथो मे किसी और हाथ आ जाना चाहिए

पिताजी ने अपनी बहू की तलाश स्पीड से करने लगे

पर इस कलियुग मे उनको ऐसी देवी कहाँ से मिलेगी

पर दूसरी तरफ पिताजी को घर का ध्यान भी रखना था

पूजा तो अपने घर चली गयी

पूजा रमेश के साथ खुश थी

नेहा नीता अब बड़ी हो गयी थी

नेहा ने पूजा की जगह ले ली

ऐसा ही होता है ,, जयसिंघ के शहर3 जाते पूजा ने उसकी जगह लेकर अपने भाई बहनों का ध्यान रखा , अब पूजा के जाने से नेहा बड़ी बन गयी , अब नेहा नीता और छोटू को साथ लेकर चलती थी

नेहा ने अपनी मस्तिया कम कर दी

उसके उपर अब नीता और छोटू की ज़िम्मेदारी आ गयी

पर नीता अभी भी मस्ती करती थी

नीता अभी तक वही नीता थी जो नेहा को मस्ती करने मे साथ देती थी

लेकिन अब समय बदल गया था

नेहा नीता की मस्ती मे साथ देती

पर साथ ही नेहा नीता को बताती थी कि उसे कब क्या करना चाहिए था

कल तक नेहा मस्ती करने वाली लड़की थी

पूजा के जाते अचानक उसमे बदलाव आ गया

ये बदलाव हम.नही करते ये अपने आप हो जाता है

नेहा ने नीता और छोटू का ध्यान रखना शुरू किया

पिताजी को नेहा को देख कर पूजा की याद आ गयी

पूजा ने नेहा को अच्छी शिक्षा दी ,

नेहा पूजा की बातों को याद करके नीता और छोटू का ध्यान रख रही थी

पिताजी को अब घर की टेन्षन नही थी उनको यकीन था कि नेहा सब संभाल लेगी ,

अब वो अपनी बहू की तलाश मे लग गये

बहू के आते ही सब ठीक हो जाएगा ये पिताजी का विश्वास था

इस बार पिताजी ने अपने दिल की बात माँ को बताई

पिताजी -सुनो

माँ- हा

पिताजी -6महीने हो गये पूजा की शादी को

माँ- 6 महीने , मुझे तो ऐसा लग रहा है कि ये कल की बात हो कि पूजा दुल्हन बनी हो

पिताजी -पहली शादी थी ना हमारे घर की इस लिए ऐसा लग रहा है

माँ- नेहा नीता तो शादी की बात करती है , कि पूजा दीदी के शादी मे ये किया था वो किया था

पिताजी -वो सब तो ठीक है पर अभी तक खुश खबरी सुनने को नही मिली

माँ- आप भी ना , आपको कुछ समझता ही नही है
 
पिताजी -तुम्हे तो एक साल मे माँ बना दिया था

माँ- और फिर ससुरजी ने आपको कितना डांता था

पिताजी -वो तो

माँ- फिर सासू माँ ने कहा था की जयसिंघ और पूजा मे कुछ साल की गॅप रखना

पिताजी -मैं तो सिर्फ़ तुम्हे प्यार करना चाहता था , पर माँ की बात सुननी पड़ी

माँ- एक औरत को आराम चाहिए की नही , उसको माँ बनने को मेंटली तय्यार होना पड़ता है , माँ बन ने की ज़िम्मेदारी उठाने लायक बनाना पड़ता है खुद को

पिताजी -हाँ वो तो है

माँ- आप ने मुझे आराम भी दिया और मैं ने आपको 5 बच्चे दिए

पिताजी -पर पूजा की तरफ से खुश खबरी कब मिलेगी

माँ- मैं मिलके आउ पूजा से

पिताजी -मैं भी चलूँगा

माँ- कभी तो मुझे अकेला रहने दीजिए

पिताजी -तुम्हारे बिना रहने का मैं सोच भी नही सकता

माँ- मुझे भी आपके बिना रहना क्या अच्छा लगता है , पर कभी कभी कुछ दिन के लिए दूरिया रखनी चाहिए

पिताजी -मुझसे नही होता

माँ- आपने शादी के बाद मुझे अपने मायके भी अकेले जाने नही दिया , और जिस दिन जाते उसी दिन वापस आ जाते थे

पिताजी -वो जाने दो , ये बताओ पूजा की कोई खबर आई है

माँ- पूजा ने खत भेजा था ,

पिताजी -पूजा का तार आया मुझे बताया नही तुमने

माँ- कल ही आया था

पिताजी -क्या कहा पूजा ने

माँ- वो खुश है अपने ससुराल मे , पूजा कह रही थी कि उसकी सास उसको बेटी जैसा प्यार करती है , पर उसकी ननद थोड़ी टेडी टाइप की है

पिताजी -उसकी ननद तो अपने पति के साथ रहती है

माँ- हाँ , पर सतरडे सनडे को ज्योति पूजा के घर आती है ,

पिताजी -मैं कुछ करूँ ज्योति का

माँ- पूजा संभाल लेगी , वो उसका घर है उसको हॅंडल करने दीजिए

पिताजी -ठीक है , और क्या कहा पूजा ने

माँ- पूजा ने कहा की दामाद जी चाहते है कि पूजा माँ बनने की ज़िम्मेदारी उठाने लायक बन जाए फिर वो खुशख़बरी सुना देंगे

पिताजी -क्या मतलब

माँ- पूजा की शादी जल्दी हो गयी , इस तरह अचानक हो गयी , जिस से दामाद जी पूजा को पहले सेट्ल होने देना चाहते है , मेंटली तय्यार करवा रहे है दामाद जी पूजा को

पिताजी -रमेश अच्छा लड़का है , मैं ने कहा था ना कि वो पूजा को बहुत प्यार करेगा

माँ- क्या रमेश रमेश लगा के रखा है , दामाद बोला कीजिए , वरना सम्धन को बुरा लगा तो

पिताजी -ग़लती हो गयी

माँ- दुबारा ऐसा मत करना

पिताजी -नही बोलूँगा , कब तक खूसखबरी नही मिलेगी

माँ- 1 साल रुकना होगा फिर वो दोनो मिलकर सोचेंगे

पिताजी -पूजा की प्राब्लम तो सॉल्व हो गयी

माँ- क्या मतलब ,

पिताजी -अब जयसिंघ की बात करे

माँ- जयसिंघ की बात

पिताजी -जयसिंघ की शादी की बात कर रहा हूँ

माँ- इतनी जल्दी क्या है

पिताजी -जल्दी करनी होगी ,

माँ- क्यूँ ? उसको पहले सेट्ल होना है

पिताजी -उसका इंतज़ार किया तो नेहा नीता बड़ी हो जाएगी उनकी शादी का सोचना होगा

माँ- ये आपने सही सोचा

पिताजी -तो क्या कहती हो

माँ- आप जो कहेंगे वही होगा

पिताजी -तो लड़की ढूढू मैं

माँ- आप से हो पाएगा

पिताजी -तुम भी देखना

माँ- मुझे तो ऐसी बहू चाहिए जो मुझे माँ कहे

पिताजी -मुझे ऐसी बहू चाहिए जी छोटू को देवेर नही बेटा समझे , नेहा नीता को बहनों की तरह प्यार करे , पूजा की फ्रेंड बन जाए , और हम को माँ और पिताजी कहे

माँ- मैं भी ऐसी बहू चाहती हूँ

पिताजी -मैं कब से ढूँढ रहा हूँ पर मिल ही नही रही है

माँ- क्या मतलब कब से ढूँढ रहा हूँ

पिताजी -जिस दिन जयसिंघ पहली बार शहर3 गया था तब से ढूँढ रहा हूँ

माँ- और आपने बताया नही

पिताजी -ग़लती हो गयी पर अब जल्दी देखनी होगी वरना जयसिंघ बदल गया तो प्राब्लम होगी

माँ- मुझे अछा लगा जो आप जयसिंघ के बारे मे सोच रहे है

पिताजी -हमे बहू अच्छी मिल गयी तो जयसिंघ को वापस गाँव मे ला पाएगी

माँ- आप ने ये अच्छा सोचा

पिताजी -पर जतसिंघ , उसने मना किया तो

माँ- आपने उसको प्रॉमिस करने को कहा था ना

पिताजी -हाँ ,

माँ- फिर जयसिंघ को मुझपे छोड़ दीजिए , मैं उसको मना लुगी बस बहू अच्छी मिल जाए

पिताजी -हम आज से काम पर लग जाते है

माँ- आप को तो कुछ समझता ही नही ,

पिताजी -क्या हुआ ,

माँ- ऐसी थोड़ी लड़की देखी जाती है

पिताजी -तो कैसे

माँ- आप अपने रिस्तेदारो से बात कीजिए और पूछिए कि कोई लड़की होगी तो बता दे और मैं अपने मयको वालो से पूछती हूँ

पिताजी -मतलब तुम अपने मायके और मैं कही और जाउन्गा , ये हो नही सकता

माँ- समझा कीजिए , अब बच्चे बड़े हो गये है , अब तो मुझे अकेला जाने दीजिए , और मैं कुछ दिन के लिए ही वहाँ जाउन्गी ,

पिताजी -मुझे सोचने दो

माँ- अगर आप लड़की देखने गये और वही रहना पड़ा तो तब आपको चल जाएगा

पिताजी -तुम कह तो सही रही हो

माँ- तो जाने दीजिए , मैं जयसिंघ के लिए अपने मायके जा रही हूँ

पिताजी -ठीक है , पर घर पे कौन रहेगा

माँ- नेहा नीता और छोटू बड़े हो गये है वो घर को देख लेंगे

पिताजी -बच्चों को अकेला रहने देना ये नही कर सकता मैं

माँ- आप भी ना , जब आप लड़की देखने जाएँगे तो मैं घर पे रहूगी और जब मैं जाउन्गी तो आप घर पे रुकना , इसी लिए कह रही थी कि मुझे आपके बिना मायके जाना होगा

पिताजी -ठीक है पर छोटू को साथ लेकर जाना

माँ- जी ,

पिताजी -पर ज़्यादा दिन वहाँ रुकना मत

माँ- मुझे पता है आप मेरे मायके जाते ही हवेली जाएँगे

पिताजी -तुम्हे तो सब बताता हू मैं , और तुम भी जानती हो मुझसे रहा नही जाता है

माँ- तभी तो मैं ने आज तक कभी हवेली जाने से रोका नही है आपको

पिताजी -तुम कहोगी तो दूसरो की चुदाई करना बंद कर दूँगा

माँ- ना बाबा ऐसा मत करना , मेरे अकेले से आपको संभाला नही जाता , आप अगर रोज रोज मुझे प्यार करेंगे तो मैं बेड से उठ भी नही पाउन्गी , आप बीच बीच मे हवेली जाते रहना ताकि मुझे आराम मिले

पिताजी -तुम बहुत अच्छी ही जो मेरा इतना ध्यान रखती हो

माँ- पर ध्यान रखना अब बच्चे बड़े हो गये है

पिताजी -मैं तो अब फार्महाउस पे पार्टी करता हूँ प्रतापसिंघ के साथ मिलके

माँ- आज का क्या प्लान है

पिताजी -आज तुम्हे प्यार करूँगा ,

माँ- और जयसिंघ

पिताजी -पहले तुम्हे प्यार तो करने दो , जयसिंघ के बारे मे सोच भी लिया है

और पिताजी माँ को प्यार करके सो गये
 
फ्लॅशबॅक 853

पिताजी ने माँ से बात कर ली

पिताजी ने जयसिंघ के बारे मे माँ से बात की

माँ ने पिताजी का साथ दिया

पिताजी के साथ जयसिंघ के लिए लड़की ढूँढने मे लग गयी

माँ को भी उस बहाने मायके मे रहने का मोका मिलेगा

माँ और पिताजी के बिना नेहा अच्छे से घर को संभाल रही थी

जयसिंघ ने पिताजी की पसंद की लड़की से शादी करने की बात मान ली थी

पर अब उस बात को काफ़ी साल हो गये थे , पिताजी को लगा कि जयसिंघ अब मना कर देगा

पर माँ ने पिताजी को विश्वास दिलाया कि वो जयसिंघ को मना लेगी

जयसिंघ अपनी माँ की बात मानेगा ज़रूर ये पिताजी को पता था

पिताजी अब अपने दोस्तो और अपने रिस्तेदारो से बात करने लगे

माँ भी अपने मायके जाकर लड़की की तलाश करने लगी

पर पिताजी को जैसी लड़की की तलाश थी वैसी लड़की मिल ही नही रही थी

कभी पिताजी को कुछ पसंद आता तो माँ रिजेक्ट कर देती

जब माँ को कोई पसंद आती तो पिताजी कुछ कामिया ढूँढ लेते

जयसिंघ को इस बारे मे पता नही था

वो तो तरक्की पे तरक्की कर रहा था

वो अपनी लाइफ मे खुश था

वो बिना भूले सबको महीने मे एक बार तार कर देता

दीवाली मे गाँव आ जाता , अब वो ज़्यादा दिन नही रुकता , उसको जल्दी जाना होता शहर3 मे

उसकी कंपनी का काम बढ़ गया था

और इधर पिताजी अपनी तलाश मे लगे हुए थे

सवाल उनके बेटे के फ्यूचर का था ,

लड़की की तलाश मे 1 साल निकल गया पर जैसी लड़की चाहिए थी वैसी नही मिली

ऐसे ही एक दिन माँ और पिताजी कुछ तार पढ़ रहे थे

पिताजी -कुछ सफलता मिली

माँ- नही , एक भी लड़की देखने मे अच्छी नही है

पिताजी -हमे उसकी क़ाबलियत और गुणों को देखना है

माँ- साथ मे वो देखने मे अच्छी हो , मेरे बेटे की बराबरी की हो , अब जयसिंघ बड़े लोगो के साथ रहता है वैसी लड़की चाहिए

पिताजी -तो देखो ना ,

माँ- और आप

पिताजी -मैं प्रतापसिंघ से मिलके आता हूँ उस से भी बात करके देखता हूँ कुछ बात बन जाए

और पिताजी ठकुज़ी से मिलने चले गये

ठाकुरजी ने जब पिताजी को देखा तो वो समझ गये कि पिताजी को फिर से उसी बात ने परेशान किया है

ठाकुरजी ने सीधे उसी परेशानी को सॉल्व करना शुरू किया

ठाकुरजी- तू इतना टेन्षन क्यूँ लेता है

पिताजी -मैं बहुत परेशान हूँ

ठाकुरजी- जयसिंघ की वजह से ना

पिताजी -हाँ

ठाकुरजी- जयसिंघ ने बहुत तरक्की की है मैं पिछले हफ्ते शहर3 गया था तब जयसिंघ से मिला था ,

पिताजी -क्या कहा गधे ने

ठाकुरजी- वो खुश था , तुझे याद कर रहा था

पिताजी -एक बार मुझे बहू मिल जाए फिर उसको यही लेकर आउन्गा

ठाकुरजी- तुझे अभी तक लड़की नही मिली

पिताजी -नही ना

ठाकुरजी- जयसिंघ को उसकी पसंद की ढूँढने दे

पिताजी -ऐसा किया तो जयसिंघ इस गाँव को भूल ही जाएगा

ठाकुरजी- तो जल्दी ढूँढ कोई ऐसी लड़की

पिताजी -तुझे ठकुराइन से शादी नही करनी चाहिए थी

ठाकुरजी- क्यूँ

पिताजी -उसकी और जयसिंघ की एज सेम है , मैं उसी से जयसगींघ की शादी कर देता

ठाकुरजी- पागल हो गया है तू

पिताजी -जिस तरह ठकुराइन ने रंजीत और कुंवर को सगे बिटो जैसा प्यार दिया मुझे ऐसी ही लड़की चाहिए

ठाकुरजी- फिर मेरे साथ चल

पिताजी -कहाँ

ठाकुरजी- ठकुराइन के गाँव चलते हैं

पिताजी -वहाँ क्या है

ठाकुरजी- ठकुराइन ऐसी है तो उसके गाँव की लड़किया भी वैसी ही होगी

पिताजी -ये तो मैं ने सोच ही नही

ठाकुरजी- और ठकुराइन की छोटी बहन और उसकी कज़िन को भी देख लेंगे

पिताजी -तूने ये पहले क्यूँ नही कहा ,

ठाकुरजी- तो चलें

पिताजी -बना तू प्रोग्राम

ठाकुरजी- तू लड़किया देखना ,मैं अपना काम करूँगा

पिताजी -ठकुराइन को साथ लेकर नही जाएगा वरना मेरा दिमाग़ उसी पे लगा रहेगा

ठाकुर हँसने लगा

पिताजी -मैं मज़ाक नही कर रहा हूँ

ठाकुरजी- ठकुराइन को उसके मायके छोड़ दूँगा और बाकियो के गाँव भी ढूँढ लेंगे

पिताजी -ठकुराइन को रहने दे

ठाकुरजी- उसको पता होगा ना कौन सी लड़की कैसी है

पिताजी -ठीक है ,

ठाकुरजी- तुम लड़किया देखना ,मैं अपना काम करूँगा

पिताजी -अच्छा प्लान बना

ठाकुरजी- 15 दिन का कैसा रहेगा

पिताजी -15 दिन , इतने दिन घर से दूर रहना होगा

ठाकुरजी- सोच ले , ये गोल्डन चान्स हो सकता है

पिताजी -ठीक है मैं मनेज कर लूँगा

ठाकुरजी- हम 15 दिन मे 7 गाँव घूमेंगे ,

पिताजी -फिर तो बहुत सी लड़कियो को मिल पाएँगे

ठाकुरजी- तो उसी हिसाब से तय्यारी करना

पिताजी -कब निकलना है

ठाकुरजी- 1 हफ्ते बाद निकलते है , ठकुराइन भी खुश होगी अपने मायके जाकर

पिताजी -मैं अकेला आउन्गा क्यूँ कि घर पे छोटू की माँ को रहना होगा , इतने दिन दोनो बाहर नही रह सकते

ठाकुरजी- तुझे जैसा अच्छा रहे वैसा कर ,

पिताजी -तूने तो मेरा काम आसान कर दिया

ठाकुरजी- तो ठकुराइन के हाथ का खाना खा कर जा

पिताजी -नही यार , आज रहने दे ,

पिताजी की बात सुनकर ठाकुरजी हँसने लगे
 
फ्लॅशबॅक 854

जैसा कि तय हुआ था

पिताजी ठाकुरजी के साथ 15 दिन के लिए ठकुराइन के मायके जा रहे थे

पिताजी ने माँ को समझा दिया कि 15 दिन कैसे रहना है पिताजी ने अपने आदमियो को नज़र रखने की कहा घर पे

माँ ने पिताजी का सारा समान पॅक कर दिया

नेहा अब ज़िद्द नही कर रही थी पिताजी के साथ जाने को

क्यू कि अब नेहा पे नीता और छोटू की ज़िम्मेदारी थी , वो उस ज़िम्मेदारी को निभा रही थी

पिताजी ने नेहा को वादा किया कि उसके लिए उसके जैसी भाभी लेकर आएँगे

भाभी का नाम सुनते नेहा और नीता उछल पड़ी

मतलब भैया की शादी होगी

नेहा - पिताजी भाभी मेरी जैसी लाना

नीता- पिताजी भाभी मेरी जैसी होनी चाहिए

पिताजी -तुम दोनो को प्यार करने वाली लाउन्गा ,

नेहा - फिर तो पहले मैं मिलुगी भाभी से

पिताजी- मैं लेकर आउन्गा जिसको मिलना है वो मिल लेना

नेहा - देखना भाभी मुझे ज़्यादा प्यार करेगी

नीता- भाभी मुझे ज़्यादा प्यार करेगी मैं छोटी हूँ ना

पिताजी- क्या अब मैं जा सकता हू तुम्हारी भाभी को लाने

नेहा - पिताजी जल्दी आना भाभी को लेकर

पिताजी- अभी तो देखने जा रहा हूँ , पसंद आ गयी तो शादी जल्दी करा दूँगा

माजी- मैं ने लड्डू बाँध दिए है , खा लेना

पिताजी- मैं तुम्हारे लिए लड्डू लाउन्गा खूसखबरी के

माजी- मैं भगवान से प्रार्थना करूँगा

पिताजी- अपना ध्यान रखना , अगर कुछ प्राब्लम हुई तो सीधे मायके चली जाना

माजी- जी

पिताजी ने माँ को समझा दिया कि अकेले कैसे रहना है

फिर पिताजी ने छोटू को प्यार किया और हवेली चले गये

ठाकुरजी कार मे पिताजी का इंतज़ार कर रहे थे

पिताजी आकेर कार मे आगे बैठ गये

ये क्या रणजीतसिंघ भी आ रहा है ठकुराइन के साथ

लगता है रणजीतसिंघ अपनी माँ से बहुत प्यार करता है

पिताजी के आते ही ठाकुरजी कार को ठकुराइन के मायके ले जाने लगे

ठाकुरजी- योगेंद्रसिंघ बात करो ठकुराइन से , पूछो मायके के बारे मे

पिताजी- मैं हााअ....... जन्न्नीई वाला है नाआआआ

पिताजी की बात सुनते ही ठाकुरजी हँसने लगे

ठकुराइन- आप हँस क्यूँ रहे है

ठाकुरजी- ये योगेंद्र हैना तुम से बात करने से शरमाता है

ठकुराइन - मुझसे क्या शरमाना मैं तो आपकी बहन जैसी हूँ

फिर तो ठाकुर और ज़ोर से हँसने लगे

ठकुराइन - अब क्या हुआ

ठाकुरजी- कुछ नही , ऐसे ही हँसी आ गयी

पिताजी- तू गाँव वापस चल फिर तुझे बताता हूँ ,

ठाकुरजी- पूछ लेना जो पूछना है , वरना वहाँ जाकर भी ऐसा ही रहेगा तो कैसे चलेगा

ठकुराइन - पूछिए ना क्या पूछना है

पिताजी- भाभी जी वो मैं , आपकी कोई छोटी बहन है

ठकुराइन - आप मुझसे उमर ने बड़े है , आप मुझे तुम कह सकते है ,

ठाकुरजी- ये सही कहा

पिताजी- मैं आप ही कहूँगा ,

ठकुराइन -ठीक है जैसा आप ठीक समझे

पिताजी- आपकी छोटी बहन है

ठकुराइन- हाँ है पर वो मेरी जैसी नही है

पिताजी- कैसी है वो

ठकुराइन- वो मतिमन्द है

पिताजी- आपकी कोई कज़िन

ठकुराइन- वो अच्छी है मैं मिलवा दुगी आप से

पिताजी- कितनी है

ठकुराइन- 7 कज़िन है और गाँव मे भी अच्छी लड़किया है

पिताजी- सब से मिल लेंगे

ठकुराइन- जयसिंघ से तो कोई भी हाँ कह देगी शादी को , दिखने मे अच्छा है , पैसे वाला है

ठाकुरजी-तुम कर देती

ठकुराइन- ये कैसा सवाल है

ठाकुरजी- सिंपल सा सवाल है

ठकुराइन- मेरी शादी ना होती तो हाँ कर देती पर आपने पूछा क्यूँ

ठाकुरजी- ये योगेंद्रसिंघ बोल रहा था कि तुमसे जयसिंघ की शादी करवा देता

ठकुराइन - भाई साब आपने पहले पूछा होता तो ज़रूर हाँ करती

इस बात से रणजीतसिंघ को थोड़ा गुस्सा आया पर वो चुप चाप आँखे बंद करके सो गया

ऐसे इधर उधर की बाते करके पिताजी ठकुराइन के मायके आ गये

अपने दामाद का स्वागत अच्छे से किया

पहले दिन तो अच्छी खातिर दारी हो गयी

ठाकुरजी और पिताजी काफ़ी खुश हुए

पर पिताजी को तो बहू की तलाश थी

ठकुराइन ने ये बात बता दी कि पिताजी कौन है और क्यूँ आए है

जयसिंघ के बारे मे बताते ही गाँव मे ये बात हवा की तरह फैल गयी

दूसरे दिन गाँव के बड़े बड़े लोग पिताजी को टी पे बुलाने आ गये , जयसिंघ कंपनी का मालिक जो था , कौन ऐसा रिस्ता जाने देगा

पिताजी सब के घर की टी पीने गये

ठाकुरजी को भी पिताजी के साथ जाना पड़ता

टी पीने के बहाने लड़की भी देख लेते

कोई ढंग की नही मिली

सब अच्छी दिखने के लिए मेकप करके आई थी

ये रिस्ता जुड़ने के लिए हर कॉसिश कर रहा था

पर पिताजी को मेक अप का दिखावा पसंद नही था

पिताजी हर लड़की को रिजेक्ट करते गये

ठाकुरजी- अबे तुझे चाहिए कैसी लड़की

पिताजी-बताया था तुझे

ठाकुरजी- तुझे इतनी खूबिया वाली लड़की नही मिल सकती

पिताजी- क्यू नही मिल सकती

ठाकुरजी- ननंद को बहन , पूजा को फ्रेंड , छोटू को बेटा जैसा प्यार करने वाली इस कलयुग मे मिलना मुश्किल होगी

पिताजी- मुश्किल कुछ नही होता

ठाकुरजी- पर हम जितनी भी लड़किया देख चुके है सब मे एक ना एक कामिया थी

पिताजी- मुझे तो पर्फेक्ट बहू चाहिए

ठाकुरजी- तू एक काम कर हर एक एक खूबियो वाली लड़की सेलेक्ट कर , 4 लड़कियो से शादी करवा देते है जयसिंघ की , किसी एक लड़की मे इतनी खूबिया मिलना मुश्किल होगा

पिताजी- ढूँढने से भगवान भी मिल जाता है मैं तो एक लड़की की तलाश मे हूँ

ठाकुरजी- जयसिंघ को पता है ये सब

पिताजी- नही

ठाकुरजी- अगर तुझे लड़की मिल गयी और जयसिंघ ने मना किया तो

पिताजी- नही करेगा हमारी बात हो चुकी है

ठाकुरजी- तो अब ठकुराइन की लास्ट कज़िन को देखते है

पिताजी- चल उसको भी देख लेते है

ठाकुरजी- इस लड़की के साथ हो जाएगी

पिताजी- मैं तो अब खुशख़बरी लेकर जाउन्गा

ठाकुरजी- दोस्ती की है इतना तो करना होगा , अब तो मैं भी हवेली तभी जाउन्गा जब तेरा काम होगा

पिताजी- चल फिर

और पिताजी ठकुराइन की लास्ट कज़िन को देखने चले गये

ये तो दिखने मे ठकुराइन जैसी है

पिताजी- 1स्ट टेस्ट पास हो गयी , दिखने मे अच्छी है

फिर पिताजी ने कुछ सवाल पूछे उसके जवाब पिताजी को पसंद आए

ठाकुरजी- 2न्ड टेस्ट भी पास हो गया

पिताजी- तुम सास ससुर को किस तरह देखना पंसद करोगी

लड़की- माता पिता के रूप मे

ठाकुरजी- ये तो सारे टेस्ट पास कर रही है

पिताजी- अब आख़िरी सवाल , शादी के बाद कहाँ रहोगी , गाँव मे हमारे साथ या फिर जयसिंघ के साथ शहर3 मे , गाँव मे हमारा पुस्तेनि घर है पर जयसिंघ ने शहर मे आलीशान घर बनाया है

लड़की - मैं तो गाँव मे रहूगी , वो शनिवार सनडे को गाँव मे आ जाएँगे ,

ठाकुरजी- तू जो चाहता है उसने तो सारे जवाब करेक्ट दिए है

पिताजी- मैं जल्दी बता दूँगा कि तुम्हे पसंद किया है या नही

और पिताजी उठ कर बाहर चले गये

इस लड़की ने सारे जवाब सही दिए

जैसे पिताजी को चाहिए था वो वैसी ही थी

फिर भी पिताजी के चेहरे पे खुशी नही थी

पिताजी के ऐसे उठ कर जाने से ठाकुरजी सोच मे पड़ गये ,

ठाकुरजी भी पिताजी के पीछे बाहर आ गये

ठाकुरजी- क्या हुआ लड़की पसंद नही आई

पिताजी- वो जयसिंघ के लिए ठीक नही है

ठाकुरजी- उसने तो सारे जवाब करेक्ट दिए है , तुझे जैसी लड़की चाहिए थी ये वैसी ही है

पिताजी- उसने सारे करेक्ट जवाब दिए है क्यू कि उसको सवाल पहले से पता थे

ठाकुरजी- क्या मतलब

पिताजी- ठकुराइन ने उसको सवाल बता दिए होंगे , तभी उसने इतने अच्छे और स्कूल के एग्ज़ॅम जैसे जवाब दिए है ,

पिताजी- ठकुराइन ने उसको सवाल बता दिए होंगे , तभी उसने इतने आचे और स्कूल के एग्ज़ॅम जैसे जवाब दिए है ,

ठाकुरजी- तुझे ऐसा क्यू लगता है

पिताजी- उस लड़की के एक्सप्रेशन उसकी पर्सनॅल्टी और जवाब सब अलग थे , बिना डोचे समझे उसने सवाल पूछते जवाब दिए , ऐसा तभी होता है जब सवाल पता हो , वरना ऐसे सवाल की शादी के बाद कहाँ रहोगी थोड़ा तो सोचना पड़ता है पर उसने एक झटके मे आन्सर दिया

ठाकुरजी- रुक तू यही

.और ठाकुरजी गुस्साए मे अंदर चले गये , पिताजी को लगा कि अब कुछ गड़बड़ होगी

ठाकुरजी- तुमने उसको सवाल बताए थे

ठकुराइन - ये आप क्या बोल रहे है

ठाकुरजी- मैं ने जो पूछा है उसका जवाब दो

ठकुराइन - भाई साब इतने परेशान थे कि.मुझे उनकी हालत देखी नही गयी और मैं ने मेरी सिस्टर को सवाल और जवाब बता दिए

ठाकुरजी गुस्से मे आकर ठकुराइन को थप्पड़ मारने वाले थे कि पिताजी ने रोक दिया

पिताजी- ये क्या कर रहा है

ठाकुरजी- इस ने कितनी बड़ी ग़लती कर दी है अगर तूने हाँ कर दी होती तो बाद मे तेरा घर बर्बाद हो जाता

पिताजी- ठकुराइन ने जानबूझ कर नही किया , मेरे लिए किया है जाने दे

ठकुराइन- मुझे माफ़ कर दीजिए

ठाकुरजी- दुबारा ऐसा मत करना , चलो हम चलते है

ठकुराइन - मेरी बात तो सुनिए

पिताजी- गुस्सा थूक दे , ग़लती हो गयी माफ़ कर दे

ठाकुरजी - दुबारा ऐसा मत करना

ये लड़की भी रिजेक्ट हो गयी

पिताजी निराश हो रहे थे

उनको जैसी बहू की तलाश थी मिल नही रही थी

ठाकुरजी- इस गाँव की तो सारी लड़किया हो गयी देख कर

पिताजी- इस बार मैं खुश खबरी लेकर जाउन्गा घर पे

ठाकुरजी- एक काम करते है आजू बाजू के गाँव की लड़किया देखते है

पिताजी- ठीक है कल से देखेंगे

और पिताजी फिर से लड़कियो को ठकुराइन के मायके के आज बाजू वाले गाँव मे देखने लगे

पर रोज एक गाँव घूम कर आते पर सफलता नही मिल रही थी

पिताजी थक गये थे

पर हार मानने को तय्यार नही थे

उनकी तलाश चालू थी
 
फ्लॅशबॅक 855

शालिनी पिताजी- शालिनी बेटा , कहाँ हो

शालिनी - आई पिताजी

शालिनी के पिताजी- हो गयी तय्यारी

शालिनी- हाँ , मेरी तो हो गयी पर आपके पोते पोती की तय्यारी नही हुई

शालिनी के पिताजी- तुमने उनकी तय्यारी करके नही दी

शालिनी- बहुत सैतानी कर रहे थे , एक को कपड़े पहना रही थी तो दूसरा मेरी चोटी खिच रहा था

शालिनी के पिताजी- तुम उनकी बुआ हो , वो तुम्हारे साथ मस्ती कर रहे थे

शालिनी- तो क्या हुआ पिताजी , मैं उनकी बुआ हूँ ,उनको मेरी चोटी खिचने की ज़रूरत क्या थी

शालिनी के पिताजी- तुम्हारी माँ कहाँ है उससे कहो अपने पोतो की तय्यारी कर दे

शालिनी- माँ तो मंदिर गयी है

शालिनी के पिताजी- तुम्हारी भाभी

शालिनी- वो तो अपने काम मे बिज़ी होगी और अपने बच्चों को मेरे भरोसे छोड़ देती है , आप उनसे कुछ कहते क्यू नही

शालिनी के पिताजी- तुझे आज हुआ क्या है

शालिनी- मेरा मूड खराब है , जल्दी चलिए देर हो रही है

शालिनी के पिताजी- मेरे पोतो को लेने दो

और शालिनी के पिताजी अंदर चले गये ,

अंडर तो उनके पोता पोती तय्यार होके बैठे थे

शालिनी के पिताजी- मुझे तंग करती है कहाँ है शालिनी

शालिनी- पिताजी आप भी ना , मैं अपने प्यारे प्यारे भतीजे के बिना कहीं जा सकती हूँ भला

शालिनी के पिताजी- तू मुझे तंग करना कब बंद करेगी

शालिनी की माँ- मैं तो कहती हूँ शालिनी की शादी करवा दो , अब वो बड़ी हो गयी है

शालिनी- माँ तुम आ गयी , दो प्रसाद जल्दी

शालिनी की माँ- देखा मेरी बात का तो उसपे कोई असर ही नही हो रहा है ,

शालिनी के पिताजी- करवा दूँगा शादी क्यू तुम उसके पीछे पड़ी हो

शालिनी की माँ- उसकी उमर की सारी लड़कियो की शादी हो चुकी है

शालिनी के पिताजी- उसके खेलने के दिन है अभी ,

शालिनी - माँ , तुम भी तो मेरी सहेली हो तुम्हारी शादी कहाँ हुई है

शालिनी की माँ- देखा क्या बोल रही है , कुछ भी बोलती है , मेरी शादी नही हुई तो तू क्या उपर से आई है

शालिनी- मेरी सहेली बनने से पहले आपकी शादी हुई थी , पर आपको फिर से शादी करनी चाहिए हैं पिताजी

शालिनी के पिताजी- मैं नही करूँगा फिर से शादी तुम्हारी माँ से

शालिनी की माँ- आप भी शुरू हो गये इसके साथ

शालिनी - माँ के लिए कल्लू पहलवान कैसा रहेगा

शालिनी की माँ- तुझे मार चाहिए , कुछ भी बोलती है

शालिनी के पिताजी- तुम्हे पसंद है तो बोल दो मैं तुम्हारी शादी करवा देता हूँ कल्लू पहलवान से

शालिनी की माँ- आप भी , आप शालिनी के साथ बच्पना करना छोड़ दीजिए , अब ये बड़ी हो गयी है

शालिनी - बड़ी हो गयी हूँ बड़ी हो गयी हूँ , माँ तुम मेरे बिना क्या रह पाओगि

शालिनी की माँ- नही , पर तेरी शादी करनी भी ज़रूरी है

शालिनी - अगले साल करवा देना

शालिनी की माँ - अगले साल कब

शालिनी - 30 फेब को

शालिनी की माँ- देख बाद मे पलट मत जाना

शालिनी - पक्का 30 फेब को शादी करूगी

शालिनी का भाई - माँ फेब मे 30 तारीख नही होती , शालिनी आपको उल्लू बना रही है

शालिनी की माँ- शालिनी तेरी पिटाई करने पड़ेगी

शालिनी की भाभी - माजी शालिनी की शादी हो जाएगी तो मैं तो अकेली पड़ जाउन्गि

शालिनी - मेरी भाभी मेरी सहेली , थॅंक यू भाभी

शालिनी की माँ - तुम सब से तो हार गयी हू मैं , कल को लड़का नही मिलेगा तो मुझे मत कहना

शालिनी - आपके लिए तो आज भी लड़का मिल जाएगा , कल्लू पहलवान से बात करूँ , ओह कल्लू लहलवान

शालिनी की माँ- चुप , वरना मार खाएगी

शालिनी - फिर से शादी की बात करेगी ,

शालिनी की माँ-जब तक शादी नही करेगी तू

शालिनी -कल्लू पहलवान मेरी माँ सीईई

शालिनी की माँ- मेरी माँ , चुप रह , जब भी मैं शादी की बात करती हूँ तो तुम कल्लू पहलवान को आवाज़ क्यूँ देती हो

शालिनी- तो आप मेरी शादी की बात क्यूँ करती हो

शालिनी की माँ- नही करूगी , अब खुश

शालिनी - कल्लू पहलवान तेरी बुलबुल उड़ गयी

इंट्रो -

शालिनी - शालिनी , घर की सबसे छोटी बेटी ,, शालिनी के सारे भाई बहनो की शादी हो चुकी है ,बस शालिनी की शादी करनी बाकी है , शालिनी की माँ शालिनी के पीछे हाथ धो कर लगी है ,शालिनी पिताजी की लाडली ,, अपनी भाभी की बेस्ट फ्रेंड , अपने भतीजों की माँ जैसी है

शालिनी के पिताजी- शालिनी के पिताजी,गाँव के ज़मींदार , अच्छा कारोबार है , गाँव मे बहुत इज़्ज़त है , अपने सारे बेटो और बेटियो को सेट्ल कर दिया है , बड़ा बेटा उनके साथ ही रहता है बाकी बेटे शहर मे रहते है ,

शालिनी की माँ- शालिनी की माँ , शालिनी के शादी की टेन्षन लगी रहती है , एक एक करके सबकी शादी करवा दी है , बस एक बार शालिनी शादी को हाँ कर दे तो गंगा मे डुबकी लगा कर आ जाएगी

शालिनी का भाई - शालिनी का सबसे बड़ा भाई जो पिताजी के साथ रहता है

शालिनी की भाभी - शालिनी की बड़ी भाभी

मोंटू - सोनू - शालिनी के भतीजे, शालिनी के बड़े भाई के बेटे

बाकी के भाई बहन इधर उधर के शहर मे जॉब और अपना कारोबार देखते है

वो गाँव मे नही रहते

जैसा आपने सुना ही है

माँ शालिनी के पीछे हाथ धो कर लगी है

शालिनी के शादी के लिए हाँ करने के लिए कितना ट्राइ करती है

पर शालिनी जब भी माँ उसको शादी का पूछती है तो वो अपने पड़ोसी कल्लू पहलवान को आवाज़ देती है

माँ कल्लू पहलवान का नाम सुनते ही रुक जाती है

वो हुआ ऐसा था कि एक दिन माँ रात को मंदिर से भजन सुनकर आ रही थी तो उनके पीछे कुत्ते लग गये

तभी कल्लू पहलवान आ रहा था उसने शालिनी की माँ को बचा लिया

तब से शालिनी अपनी माँ को कल्लू पहलवान के नाम से चिड़ाती है

शालिनी के लिए तो ये जादू की छड़ी थी

जब भी माँ शादी की बात करती तो शालिनी कल्लू के नाम से डरा देती

बाकी सब शालिनी का साथ देते

पिताजी को शालिनी की ज़्यादा टेन्षन नही थी

जिस दिन शालिनी कहेगी उसकी शादी करवा देंगे पिताजी

शालिनी की भाभी तो उसकी बेस्ट फ्रेंड है

दोनो बहनों जैसी रहती है

शालिनी अपनी भाभी से अपने सारे सीक्रेट शेयर करती है

शालिनी और उसकी भाभी की बहुत बनती है

शालिनी के पिताजी- चलना है कि नही मूवी को

शालिनी - चलिए

शालिनी की भाभी- मोंटू सोनू अपनी बुआ के साथ जाना नही है क्या

मोंटू-2 मिनिट

शालिनी- क्या कर रहे हो तुम दोनो

सोनू- बस हो गया बुआ

मोंटू- वो मेरा है

सोनू और मोंटू रशोई घर से लड्डू चुराके खा रहे थे

सब बाहर आँगन मे थे

शालिनी को मूवी देखने जाना था

ये क्या लड्डू एक और बच्चे दो

मोंटू और सोनू एक दूसरे की तरफ देखने लगे

मोंटू बड़ा था

उसने लड्डू उठा लिया और सोनू को ठेंगा दिखाकर भागने लगा

सोनू लड्डू लेने के लिए मोंटू के पीछे पीछे भागने लगा

दोनो इधर से उधर भागने लगे

शालिनी की भाभी - भाग क्यूँ रहे हो

सोनू- माँ मोंटू मेरा लड्डू लेकर भाग रहा है

मोंटू - ये मेरा लड्डू है

शालिनी की माँ- मोंटू तू बड़ा हैना अपने छोटे भाई को दे लड्डू

मोंटू- मैं नही दूँगा

शालिनी की भाभी- क्या कहा ,

मोंटू - ये मेरा लड्डू है मैं नही दूँगा

शालिनी की भाभी - तू ऐसे नही मानेगा

और शालिनी की भाभी अपने बड़े बेटो को मारने लगी

तो शालिनी ने अपने भाभी का हाथ पकड़ लिया

शालिनी - भाभी ये क्या कर रही हो

शालिनी की भाभी -देखा नही तुमने मोंटू शेरिंग करना नही चाहता

शालिनी - पर इसके लिए मारने की क्या ज़रूरत है

शालिनी की भाभी -तो तू ही देख अपने भतीजे को

शालिनी - मेरे बेटे है मैं ही देखुगी

शालिनी - मोंटू इधर आओ

मोंटू - जी

शालिनी - लड्डू दो मुझे

मोंटू- ये मेरा है

शालिनी - मुझे दो तो सही ,

मोंटू- आप माँ या सोनू को मत देना

शालिनी - नही दूँगी

मोंटू ने लड्डू अपनी बुआ को दिया

शालिनी - तुम्हे मैं एक कहानी बताती हूँ

शालिनी के पिताजी- तुम्हे मूवी देखने जाना था ना

शालिनी - छोटी सी कहानी है

शालिनी का भाई- फिर तो मैं भी सुनुगा कहानी

शालिनी की भाभी- शालिनी दादीमा की कहानी

सोनू - माँ ने बुआ को दादीमा कहा

और सोनू हँसने लगा

शालिनी - सोनू मोंटू मेरी गोद मे आकर बैठो

मोंटू- जी बुआ

दोनो एक एक तरफ बैठ गये

शालिनी - ये कहानी है एक जंगल की , जहाँ 2 शेर भाई रहते थे

मोंटू- मैं बड़ा शेर बनूंगा

शालिनी - ठीक है , उस शेर का नाम था , सोनू और मोंटू

दोनो बहुत मस्ती करते थे

साथ मे मिलके खेलते थे

मोंटू बड़ा था तो वो सोनू शेर को अपने साथ रखता उसका ख़याल रखता

फिर एक दिन जंगल मे सूखा पड़ गया

मोंटू- सूखा क्या होता है

शालिनी - सूखा मतलब पानी और खाने को कुछ नही मिलता

खाने और पीने को कुछ नही था ,सब पेड़ सुख गये थे

मोंटू- दोनो शेर ने क्या खाया

शालिनी - उनके पास भी खाने को कुछ नही था

मोंटू- फिर

शालिनी - ऐसे मे मोंटू शेर खाने की तलाश मे निकल गया , सोनू को भूक लगी थी तो मोंटू शेर उसके लिए खाना ढूँढने गया

मोंटू- खाना मिल गया

शालिनी - नही पर उसको एक देवी मिली जिसने मोंटू को एक लड्डू दिया

मोंटू- सिर्फ़ एक लड्डू

शालिनी - हाँ , मोंटू शेर ने कहा कि वो दो है , एक लड्डू से क्या होगा ,

पर मोंटू शेर का सवाल सुनने से पहले देवी गायब हो गयी

सोनू-फिर क्या हुआ

मोंटू- मोंटू शेर ने क्या किया एक लड्डू का

शालिनी - मोंटू शेर को लगा कि वो लड्डू खुद खा ले पर सोनू बीमार था

सोनू की हालत मोंटू शेर से देखी नही गयी और मोंटू ने पूरा लड्डू सोनू शेर को दिया

सोनू- सोनू शेर ने तो लड्डू खा लिया होगा

मोंटू- बिचारा मोंटू शेर

शालिनी - ऐसा नही हुआ , मोंटू शेर ने सोनू शेर को लड्डू दिया और खाने की तलाश.मे चला गया

सोनू शेर को पता था कि जंगल मे खाना नही है

इस लिए सोनू शेर ने सिर्फ़ आधा लड्डू खाया

और आधा लड्डू बचा कर रखा

मोंटू- फिर क्या हुआ

शालिनी - फिर मोंटू शेर शाम मे खाली हाथ वापस आ गया

उसको कहीं खाना नही मिला ,और दिन भर घूमने से मोंटू शेर भी बीमार पड़ गया

उसको बहुत भूक लगी

मोंटू शेर ने सोनू शेर से कहा कि उसको भूक लगी है

पर खाना तो कही नही था

पर सोनू शेर ने लड्डू बचा कर रखा था

सोनू शेर ने मोंटू शेर को आधा लड्डू दिया

लड्डू देखते ही मोंटू शेर ने अपने भाई को गले लगा लिया

आधा लड्डू सोनू शेर ने मोंटू शेर को दिया

आधा लड्डू खाते ही मोंटू शेर की तबीयत अच्छी हो गयी

दोनो भाई ऐसी ही मिल जुल कर रहे जिस से सूखा ख़तम हो गया

फिर दोनो ऐसे मिल बाँट कर खाना खाने लगे

जिस से कम खाने से भी उनका पेट भर जाता और दोनो खुश रहते

इस कहानी से पता चला कि शरेंग करना कितना ज़रूरी होता है

पहले मोंटू शेर ने लड्डू सोनू शेर को दिया और सोनू शेर ने पूरा लड्डू नही खाया क्यूँ कि उसको पता था कि ये लड्डू तो मोंटू शेर भी खा सकता था पर उसने सोनू शेर को दिया , जिस से सोनू शेर ने आधा लड्डू मोंटू शेर के लिए बचा कर रखा , मोंटू शेर को उसके शेरिंग का फल मिल गया और अपने भाई का प्यार भी मिल गया

शालिनी - कैसी लगी कहानी

मोंटू- सोनू ये ले आधा लड्डू

सोनू- मैं भी आपको आधी चॉक्लेट दूँगा ,

शालिनी - मेरे भतीजे बहुत समझदार है

शालिनी की भाभी - शालिनी तेरे साथ मेरे बेटे का फ्यूचर ब्राइट होगा

शालिनी - ऐसा कुछ नही भाभी , आपकी जगह मैं होती तो मैं भी पहले मारने का सोचती

शालिनी की भाभी - तू मेरी ननद नही मेरी बहन है

शालिनी- आप भी मेरी बड़ी बहन है ,

शालिनी के पिताजी- चले अब

शालिनी- जी पिताजी

और शालिनी पिताजी के साथ मूवी देखने चली गयी
 
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