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फ्लश बॅक 863
पियाज़ी ने शालिनी को बताया दिया कि उसे क्या करना चाहिए
पिताजी चाहते तो शालिनी को बोल सकते कि उसे मना कर दो और मेरे बेटे से शादी करो
पर पिताजी ने ऐसा नही किया
पिताजी ने शालिनी को ऐसा रास्ता दिखाया जिस से शालिनी के ना करने से उसके घर मे कोई नाराज़ नही होगा
पर पिताजी कर क्या रहे थे
उनको तो शालिनी को अपनी बहू बनाना था
फिर वो शालिनी से बात क्यूँ नही कर रहे है
पिताजी के दिमाग़ मे क्या चल रहा है
अचानक वापस गाँव जाने कि बात कहाँ से आ गयी
पिताजी तो खुश खबरी लेकर जाने वाले थे
फिर ऐसे बीच मे बिना शालिनी से बात किए वो जा कैसे सकते है
शालिनी मे वो सभी गन है फिर भी पिताजी ने अब तक शालिनी से बात क्यूँ नही की
ठाकुरजी-तुझे हुआ क्या है
पिताजी-मैं ठीक हूँ
ठाकुरजी-.फिर ऐसे बीच मे हम गाँव क्यूँ जा रहे है और तूने शालिनी से बात क्यूँ नही की
पिताजी-शालिनी मुझे अपना पिता मानने लगी है , और मैं भी उसको पूजा नेहा नीता जैसा प्यार करने लगा हूँ ,
ठाकुरजी-.तो
पिताजी-तो मैं अपनी बेटी की खुशी को देख रहा हूँ , शालिनी के कुछ सपने है , उसने भी पूजा जैसे अपने राजकुमार की चाभी बना कर रखी है , ऐसे मे मैं उसको कैसे बोल सकता हू अपने बेटे से शादी करो , वो तो हाँ कर देगी पर उसके सपने
ठाकुरजी-.तू ये क्या बोल रहा है
पिताजी-पूजा और शालिनी मेरे लिए एक जैसी है , अगर मैं पूजा के सपने पूरा कर सकता हूँ तो शालिनी के भी सपने पूरे होंगे
ठाकुरजी-.मतलब तू शालिनी से बात नही करेगा , उसे अपनी बहू नही बनाना चाहता
पिताजी-मैं ने शालिनी को अपनी बेटी बनाया है , अब उसे मेरी बहू बनाने का काम भगवान को करना होगा
ठाकुरजी-.मैं नही समझा
पिताजी-मुझे अपने तरीके से शालिनी को अपनी बहू बनाना है , ऐसे की शालिनी के सपने पूरे हो और मेरी बहू भी बन जाए
ठाकुरजी-.क्या है शालिनी के सपने
पिताजी-मुझे ठीक से नही पता ,
ठाकुरजी-.तू पागल है
पिताजी-तू कुछ भी बोल ले , आज हम वापस गाँव जाएँगे
ठाकुरजी-.और शालिनी
पिताजी-उस से आख़िरी बार मिलने चल
और पिताजी शालिनी से मिलने चले गये
पिताजी के दिमाग़ मे क्या चल रहा था ये तो किसी को पता नही था
पर पिताजी के दिल मे क्या चल रहा है ये पिताजी ने ठाकुरजी को बता दिया
पिताजी ने शालिनी को अपनी बेटी मान लिया है ऐसे मे वो शालिनी के खुशी के बारे मे पहले सोच रहे थे
शालिनी से पिताजी को कुछ दिनो मे बहुत लगाव हो गया था
कुछ दिनो मे पिताजी की 4 थ बेटी बन गयी शालिनी
पिताजी का दिल ही ऐसा था
पिताजी अपने बेटे से ज़्यादा शालिनी की खुशी का सोच रहे थे
पिताजी शालिनी से मिलने आ गये
पिताजी ने ठाकुरजी को कार के पास रुकने को कहा
और शालिनी के पास आ गये
शालिनी पिताजी को देखते भाग कर उनके गले लग गयी
और पिताजी को सुक्रिया बोल रही थी
शालिनी -आप बहुत अच्छे हो ,आप ने सब ठीक कर दिया
पिताजी-क्या किया मैं ने
शालिनी -आप ने मेरी परेशानी सॉल्व कर दी
पिताजी-क्या हुआ वो तो बताओ
शालिनी -आपने जैसा कहा मैं ने वैसे ही भाभी से कहा
पिताजी-तो क्या कहा तुम्हारी भाभी ने
शालिनी -वो तो मेरे सवाल से शॉक्ड हो गयी , और मुझे गले लगा लिया
पिताजी-फिर
शालिनी -फिर वो अपने कमरे मे चली गयी , वो टेन्षन मे आ गयी , एक तरफ उनका भाई था और दूसरी तरफ मे उनकी बहन फ्रेंड ननंद उनके बेटो की प्यारी बुआ थी
पिताजी-फिर क्या कहा तुम्हारी भाभी ने
शालिनी -फिर सुबह भाभी की फॅमिली आ गयी , मेरे पिताजी ने मेरा फ़ैसला पूछा
पिताजी-तुमने क्या कहा
शालिनी -मेरे कुछ बोलने से पहले भाभी बोल पड़ी, भाभी ने इस शादी को ना करने की बात कही , शादी हो गयी तो दोनो खुश नही रहेंगे ऐसा कहा भाभी ने
पिताजी-फिर क्या हुआ
शालिनी -ये सुनते भाभी की फॅमिली वापस चली गयी गुस्से मे , और माँ ने भाभी को वजह पूछी तो भाभी ने बस इतना कहा कि मैं आपकी बेटी हूँ
पिताजी-फिर क्या हुआ
शालिनी -ये सुनकर मेरी माँ और पिताजी बहुत खुश हो गये पर माँ को वापस मेरे शादी की टेन्षन होने लगी
पिताजी-तुम खुश हो
शालिनी -हाँ , बहुत खुश , पर माँ की टेन्षन और मेरे पिताजी की परेशानी बढ़ गयी , अब फिर से लड़का ढूँढना पड़ेगा
पिताजी-लड़का क्यूँ ढूँढ रहे हो तुम्हारा राजकुमार आ जाएगा
शालिनी -क्या पता मेरा राजकुमार कभी आएगा या नही
पिताजी-सबके लिए एक राजकुमार बनाता है उपर वाला
शालिनी -सच
पिताजी-हाँ , तुम्हारे सपनो का राजकुमार भी एक दिन ज़रूर आएगा
शालिनी -ऐसा हुआ तो मैं उस राजकुमार को कहीं जाने नही दूँगी
पिताजी-देखना जैसे पूजा को उसका राजकुमार मिला वैसा तुम्हे भी मिल जाएगा
शालिनी -आप तो बहुत अच्छी अच्छी बाते करते हो
पिताजी-अब बताओ तुम्हे कैसा राजकुमार चाहिए
शालिनी -आप तो मेरे बारे मे बात कर रहे , आज तो आप जा रहे हो
पिताजी-जा तो रहा हूँ पर वापस आने के लिए जा रहा हूँ
शालिनी -क्या मतलब
पिताजी-मैं जल्दी वापस आउन्गा
शालिनी -सच
पिताजी-हाँ , मेरी बेटी के राजकुमार को देखने आउन्गा
शालिनी -मैं आपको मेरी शादी मे ज़रूर बुलाउन्गी
पिताजी-फिर तो मैं ज़रूर आउन्गा
शालिनी -वैसे आज समझ ही नही आ रहा कि बात क्या करे , आप के जाने से अजीब लग रहा है
पिताजी-अगर मुझे मेरी बेटी की याद नही आती होती तो मैं कभी नही जाता
शालिनी -पर आपको वादा करना होगा कि आप वापस ज़रूर आएँगे
पिताजी-वादा रहा , अब तुम बताओ तुम क्या करने वाली हो
शालिनी -करना क्या है अपने राजकुमार का इंतज़ार करूगी
पिताजी-वैसे तुम्हारे लिए मेरी नज़र मे एक लड़का है
शालिनी -कौन
पिताजी-है एक , मेरे दोस्त का लड़का ,
शालिनी -रहने दीजिए , आप क्यू टेन्षन ले रहे है
पिताजी-तुम्हे जैसा राजकुमार चाहिए वो वैसा ही है
शालिनी -रियली
पिताजी-हाँ , कुछ कुछ ऐसा ही है
शालिनी -भाभी का भाई भी अच्छा था पर उसमे भी कुछ कमियाँ थी जो भाभी ने मुझे बताई
पिताजी-कमियों का पता तुम खुद लगा लेना
शालिनी -क्या मतलब
पिताजी-मैं उस लड़के को भेजूँगा , तुम खुद उस से मिल लेना , बिना अपने माता पिता को बताए
शालिनी -सुनने मे अच्छा लग रहा है
पिताजी-अगर वो पसंद आया तो तुम्हारी शादी करने की ज़िम्मेदारी मैं लूँगा
शालिनी -नाम क्या है उसका
पिताजी-नाम बता दिया तो तुम उसको उस नज़रिए नही देख पाओगी , ये लगेगा कि मैं ने भेजा है , फिर तुम अपने राजकुमार वाली खूबिया कैसे देखोगी
शालिनी -आपने तो अच्छा तरीका बताया
पिताजी-मैं उसको भी नाम नही बताउन्गा , बस तुम्हारे गाँव का नाम बताउन्गा , अगर किस्मत मे होगा तो तुम दोनो की मुलाकात हो जाएगी और सोच मिल गयी तो शादी भी हो जाएगी
शालिनी -ये तरीका अच्छा लग रहा है लड़का लड़की देखने का
पिताजी-और तुम उसका टेस्ट लेना ,
शालिनी -ठीक है , आप भेज देना उसे ,
पिताजी-मुझे लगता है तुम्हे वो पसंद आएगा
शालिनी -ऐसा क्यूँ लगता है आपको
पिताजी-मैं उस लड़के को अच्छे से जानता हूँ
शालिनी -क्या वो आपके गाँव का है
पिताजी-हाँ ऐसा ही समझ लो
शालिनी -फिर तो ज़रूर मिलुगी उसे ,
पिताजी-और ऐसा मत सोचना कि मैं ने भेजा है , बस ये समझना कि वो एक आम सा लड़का है
शालिनी -वो मुझे पता है
पिताजी-तो मैं उसे जल्दी भेज दूँगा
शालिनी -वो तो हो जाएगा ये लीजिए
पिताजी-ये क्या है
शालिनी -मेरी तरफ से आपके लिए एक गिफ्ट है
पिताजी-क्या है इसमे
शालिनी -आपके लिए एक छड़ी है , आपके हाथ मे अच्छी लगेगी
पिताजी-उसकी क्या ज़रूरत थी
शालिनी - अपने फ्रेंड को दे रही हूँ
पिताजी-ये मैं हमेशा अपने साथ रखूँगा ,
और पिताजी ने अपने गले की सोने की चैन निकाल कर शालिनी को दी
शालिनी -इसकी क्या ज़रूरत थी
पिताजी-ये मेरे तरफ से तुम्हारे लिए छोटा सा गिफ्ट
शालिनी -ये तो बहुत महँगा दिख रहा है
पिताजी- रख लो , ये मुझे नेहा ने दिया था ,
शालिनी -नेहा का गिफ्ट मैं कैसे ले सकती हूँ
पिताजी-नेहा तो बहुत खुश होगी कि उसका गिफ्ट इतनी प्यारी लड़की को दिया है , तुम भी तो नेहा की बहन जैसी हो
शालिनी -नेहा के लिए रख रही हूँ , पर जब मैं नेहा से मिलुगी तो ये उसको वापस दूँगी
पिताजी-ठीक है
शालिनी -चलिए मैं आपको टी पिलाती हूँ अपने हाथो से बनाई हुई
पिताजी-आज नही , फिर किसी दिन
शालिनी -ये क्या बात हुई ,, अपने बेटी के हाथ की टी भी नही पिएँगे
पिताजी-चलो , पर जल्दी करना क्यूँ कि वहाँ नेहा मेरा इंतज़ार कर रही है
शालिनी -नेहा बहुत लकी है जो उसको आपके जैसे पिता मिले है
और शालिनी पिताजी को अपने घर लेकर गयी
शालिनी ने पिताजी को गरमा गरमा टी पिला दी
.शालिनी के हाथो की ये टी उनको हमेशा याद रहेगी
पिताजी का दिल तो नही कर रहा था शालिनी से दूर जाने का
पर शालिनी को हमेशा के लिए अपने घर लेकर जाने के लिए उनको जाना ही होगा
वो जल्द से जल्द शालिनी को अपने घर लेकर आएँगे
शालिनी से जब नेहा मिलेगी तो वो बहुत खुश होगी
नेहा को जैसी भाभी चाहिए वैसी शालिनी थी
शालिनी मे सभी गुण थे जो पिताजी को अपनी बहू मे चाहिए थे
पिताजी ने शालिनी को अपनी बहू बनाने का अच्छा रास्ता निकाला है, ऐसा करने से शालिनी अपने राजकुमार को भी पा लेगी
जयसिंघ और शालिनी को बिना बताए मिलना चाहते थे
ऐसा करने से शालिनी अपने राजकुमार मे जयसिंघ को पा लेगी
और जयसिंघ भी अपना जीवन साथी खुद पसंद कर लेगा ऐसा हो जाएगा
और पिताजी को बहू मिल जाएगी
सबके बारे मे सोचा पिताजी ने
यही पिताजी की ख़ासियत थी ,
सबका ध्यान रखते है
बस अब अपने गाँव जाकर जयसिंघ को शालिनी के गाँव भेजना होगा
बाकी सब भगवान के हाथ मे होगा उनको मिलाना
ठाकुर को लास्ट तक समझ मे नही आया कि पिताजी कर क्या रहे है
पिताजी इतनी लड़किया देख चुके थे ऐसे मे वो शालिनी को अलग तरह से क़पनी बहू बनाना चाहते थे
शालिनी से पिताजी ने एक रिस्ता तो जोड़ लिया था बेटी और बाप का
अब ससुर और बहू का रिस्ता जुड़ जाए तो सब ठीक हो जाएगा
जयसिंघ शालिनी के साथ खुश रहेगा
पिताजी शालिनी की यादे अपने साथ लेकर गाँव की तरफ जाने लगे
ठकुराइन- भाई साब आपको लड़की मिल गयी
ठाकुर- ये पागल है , एक लड़की पसंद आई और ये है कि बिना बात लिए वापस जा रहा है
ठकुराइन -क्या हुआ
पिताजी- कुछ नही , जिस काम से आए है वो हो गया
ठाकुर- क्या हो गया तूने बात कहाँ की है
पिताजी- तू नही समझेगा , तुझे गाँव जाकर बताउन्गा
ठकुराइन - भाई साब आपकी वजह से मुझे इतने दिन मायके रहने को मिला ,
ठाकुरजी- अगर ये लड़की उसकी बहू बन गयी तो तुम्हे हर साल मायके लेकर आउन्गा
पिताजी-अब चलो जल्दी , कितने दिन हो गये अपने घर से दूर हूँ , नेहा नीता छोटू कैसे होंगे
ठाकुर- रात तक पहुँच जाएँगे
और पिताजी अपने बच्चों से जल्द से जल्द मिलना चाहते थे
और शालिनी को जल्द से जल्द अपनी बहू बनाने चाहते थे
पियाज़ी ने शालिनी को बताया दिया कि उसे क्या करना चाहिए
पिताजी चाहते तो शालिनी को बोल सकते कि उसे मना कर दो और मेरे बेटे से शादी करो
पर पिताजी ने ऐसा नही किया
पिताजी ने शालिनी को ऐसा रास्ता दिखाया जिस से शालिनी के ना करने से उसके घर मे कोई नाराज़ नही होगा
पर पिताजी कर क्या रहे थे
उनको तो शालिनी को अपनी बहू बनाना था
फिर वो शालिनी से बात क्यूँ नही कर रहे है
पिताजी के दिमाग़ मे क्या चल रहा है
अचानक वापस गाँव जाने कि बात कहाँ से आ गयी
पिताजी तो खुश खबरी लेकर जाने वाले थे
फिर ऐसे बीच मे बिना शालिनी से बात किए वो जा कैसे सकते है
शालिनी मे वो सभी गन है फिर भी पिताजी ने अब तक शालिनी से बात क्यूँ नही की
ठाकुरजी-तुझे हुआ क्या है
पिताजी-मैं ठीक हूँ
ठाकुरजी-.फिर ऐसे बीच मे हम गाँव क्यूँ जा रहे है और तूने शालिनी से बात क्यूँ नही की
पिताजी-शालिनी मुझे अपना पिता मानने लगी है , और मैं भी उसको पूजा नेहा नीता जैसा प्यार करने लगा हूँ ,
ठाकुरजी-.तो
पिताजी-तो मैं अपनी बेटी की खुशी को देख रहा हूँ , शालिनी के कुछ सपने है , उसने भी पूजा जैसे अपने राजकुमार की चाभी बना कर रखी है , ऐसे मे मैं उसको कैसे बोल सकता हू अपने बेटे से शादी करो , वो तो हाँ कर देगी पर उसके सपने
ठाकुरजी-.तू ये क्या बोल रहा है
पिताजी-पूजा और शालिनी मेरे लिए एक जैसी है , अगर मैं पूजा के सपने पूरा कर सकता हूँ तो शालिनी के भी सपने पूरे होंगे
ठाकुरजी-.मतलब तू शालिनी से बात नही करेगा , उसे अपनी बहू नही बनाना चाहता
पिताजी-मैं ने शालिनी को अपनी बेटी बनाया है , अब उसे मेरी बहू बनाने का काम भगवान को करना होगा
ठाकुरजी-.मैं नही समझा
पिताजी-मुझे अपने तरीके से शालिनी को अपनी बहू बनाना है , ऐसे की शालिनी के सपने पूरे हो और मेरी बहू भी बन जाए
ठाकुरजी-.क्या है शालिनी के सपने
पिताजी-मुझे ठीक से नही पता ,
ठाकुरजी-.तू पागल है
पिताजी-तू कुछ भी बोल ले , आज हम वापस गाँव जाएँगे
ठाकुरजी-.और शालिनी
पिताजी-उस से आख़िरी बार मिलने चल
और पिताजी शालिनी से मिलने चले गये
पिताजी के दिमाग़ मे क्या चल रहा था ये तो किसी को पता नही था
पर पिताजी के दिल मे क्या चल रहा है ये पिताजी ने ठाकुरजी को बता दिया
पिताजी ने शालिनी को अपनी बेटी मान लिया है ऐसे मे वो शालिनी के खुशी के बारे मे पहले सोच रहे थे
शालिनी से पिताजी को कुछ दिनो मे बहुत लगाव हो गया था
कुछ दिनो मे पिताजी की 4 थ बेटी बन गयी शालिनी
पिताजी का दिल ही ऐसा था
पिताजी अपने बेटे से ज़्यादा शालिनी की खुशी का सोच रहे थे
पिताजी शालिनी से मिलने आ गये
पिताजी ने ठाकुरजी को कार के पास रुकने को कहा
और शालिनी के पास आ गये
शालिनी पिताजी को देखते भाग कर उनके गले लग गयी
और पिताजी को सुक्रिया बोल रही थी
शालिनी -आप बहुत अच्छे हो ,आप ने सब ठीक कर दिया
पिताजी-क्या किया मैं ने
शालिनी -आप ने मेरी परेशानी सॉल्व कर दी
पिताजी-क्या हुआ वो तो बताओ
शालिनी -आपने जैसा कहा मैं ने वैसे ही भाभी से कहा
पिताजी-तो क्या कहा तुम्हारी भाभी ने
शालिनी -वो तो मेरे सवाल से शॉक्ड हो गयी , और मुझे गले लगा लिया
पिताजी-फिर
शालिनी -फिर वो अपने कमरे मे चली गयी , वो टेन्षन मे आ गयी , एक तरफ उनका भाई था और दूसरी तरफ मे उनकी बहन फ्रेंड ननंद उनके बेटो की प्यारी बुआ थी
पिताजी-फिर क्या कहा तुम्हारी भाभी ने
शालिनी -फिर सुबह भाभी की फॅमिली आ गयी , मेरे पिताजी ने मेरा फ़ैसला पूछा
पिताजी-तुमने क्या कहा
शालिनी -मेरे कुछ बोलने से पहले भाभी बोल पड़ी, भाभी ने इस शादी को ना करने की बात कही , शादी हो गयी तो दोनो खुश नही रहेंगे ऐसा कहा भाभी ने
पिताजी-फिर क्या हुआ
शालिनी -ये सुनते भाभी की फॅमिली वापस चली गयी गुस्से मे , और माँ ने भाभी को वजह पूछी तो भाभी ने बस इतना कहा कि मैं आपकी बेटी हूँ
पिताजी-फिर क्या हुआ
शालिनी -ये सुनकर मेरी माँ और पिताजी बहुत खुश हो गये पर माँ को वापस मेरे शादी की टेन्षन होने लगी
पिताजी-तुम खुश हो
शालिनी -हाँ , बहुत खुश , पर माँ की टेन्षन और मेरे पिताजी की परेशानी बढ़ गयी , अब फिर से लड़का ढूँढना पड़ेगा
पिताजी-लड़का क्यूँ ढूँढ रहे हो तुम्हारा राजकुमार आ जाएगा
शालिनी -क्या पता मेरा राजकुमार कभी आएगा या नही
पिताजी-सबके लिए एक राजकुमार बनाता है उपर वाला
शालिनी -सच
पिताजी-हाँ , तुम्हारे सपनो का राजकुमार भी एक दिन ज़रूर आएगा
शालिनी -ऐसा हुआ तो मैं उस राजकुमार को कहीं जाने नही दूँगी
पिताजी-देखना जैसे पूजा को उसका राजकुमार मिला वैसा तुम्हे भी मिल जाएगा
शालिनी -आप तो बहुत अच्छी अच्छी बाते करते हो
पिताजी-अब बताओ तुम्हे कैसा राजकुमार चाहिए
शालिनी -आप तो मेरे बारे मे बात कर रहे , आज तो आप जा रहे हो
पिताजी-जा तो रहा हूँ पर वापस आने के लिए जा रहा हूँ
शालिनी -क्या मतलब
पिताजी-मैं जल्दी वापस आउन्गा
शालिनी -सच
पिताजी-हाँ , मेरी बेटी के राजकुमार को देखने आउन्गा
शालिनी -मैं आपको मेरी शादी मे ज़रूर बुलाउन्गी
पिताजी-फिर तो मैं ज़रूर आउन्गा
शालिनी -वैसे आज समझ ही नही आ रहा कि बात क्या करे , आप के जाने से अजीब लग रहा है
पिताजी-अगर मुझे मेरी बेटी की याद नही आती होती तो मैं कभी नही जाता
शालिनी -पर आपको वादा करना होगा कि आप वापस ज़रूर आएँगे
पिताजी-वादा रहा , अब तुम बताओ तुम क्या करने वाली हो
शालिनी -करना क्या है अपने राजकुमार का इंतज़ार करूगी
पिताजी-वैसे तुम्हारे लिए मेरी नज़र मे एक लड़का है
शालिनी -कौन
पिताजी-है एक , मेरे दोस्त का लड़का ,
शालिनी -रहने दीजिए , आप क्यू टेन्षन ले रहे है
पिताजी-तुम्हे जैसा राजकुमार चाहिए वो वैसा ही है
शालिनी -रियली
पिताजी-हाँ , कुछ कुछ ऐसा ही है
शालिनी -भाभी का भाई भी अच्छा था पर उसमे भी कुछ कमियाँ थी जो भाभी ने मुझे बताई
पिताजी-कमियों का पता तुम खुद लगा लेना
शालिनी -क्या मतलब
पिताजी-मैं उस लड़के को भेजूँगा , तुम खुद उस से मिल लेना , बिना अपने माता पिता को बताए
शालिनी -सुनने मे अच्छा लग रहा है
पिताजी-अगर वो पसंद आया तो तुम्हारी शादी करने की ज़िम्मेदारी मैं लूँगा
शालिनी -नाम क्या है उसका
पिताजी-नाम बता दिया तो तुम उसको उस नज़रिए नही देख पाओगी , ये लगेगा कि मैं ने भेजा है , फिर तुम अपने राजकुमार वाली खूबिया कैसे देखोगी
शालिनी -आपने तो अच्छा तरीका बताया
पिताजी-मैं उसको भी नाम नही बताउन्गा , बस तुम्हारे गाँव का नाम बताउन्गा , अगर किस्मत मे होगा तो तुम दोनो की मुलाकात हो जाएगी और सोच मिल गयी तो शादी भी हो जाएगी
शालिनी -ये तरीका अच्छा लग रहा है लड़का लड़की देखने का
पिताजी-और तुम उसका टेस्ट लेना ,
शालिनी -ठीक है , आप भेज देना उसे ,
पिताजी-मुझे लगता है तुम्हे वो पसंद आएगा
शालिनी -ऐसा क्यूँ लगता है आपको
पिताजी-मैं उस लड़के को अच्छे से जानता हूँ
शालिनी -क्या वो आपके गाँव का है
पिताजी-हाँ ऐसा ही समझ लो
शालिनी -फिर तो ज़रूर मिलुगी उसे ,
पिताजी-और ऐसा मत सोचना कि मैं ने भेजा है , बस ये समझना कि वो एक आम सा लड़का है
शालिनी -वो मुझे पता है
पिताजी-तो मैं उसे जल्दी भेज दूँगा
शालिनी -वो तो हो जाएगा ये लीजिए
पिताजी-ये क्या है
शालिनी -मेरी तरफ से आपके लिए एक गिफ्ट है
पिताजी-क्या है इसमे
शालिनी -आपके लिए एक छड़ी है , आपके हाथ मे अच्छी लगेगी
पिताजी-उसकी क्या ज़रूरत थी
शालिनी - अपने फ्रेंड को दे रही हूँ
पिताजी-ये मैं हमेशा अपने साथ रखूँगा ,
और पिताजी ने अपने गले की सोने की चैन निकाल कर शालिनी को दी
शालिनी -इसकी क्या ज़रूरत थी
पिताजी-ये मेरे तरफ से तुम्हारे लिए छोटा सा गिफ्ट
शालिनी -ये तो बहुत महँगा दिख रहा है
पिताजी- रख लो , ये मुझे नेहा ने दिया था ,
शालिनी -नेहा का गिफ्ट मैं कैसे ले सकती हूँ
पिताजी-नेहा तो बहुत खुश होगी कि उसका गिफ्ट इतनी प्यारी लड़की को दिया है , तुम भी तो नेहा की बहन जैसी हो
शालिनी -नेहा के लिए रख रही हूँ , पर जब मैं नेहा से मिलुगी तो ये उसको वापस दूँगी
पिताजी-ठीक है
शालिनी -चलिए मैं आपको टी पिलाती हूँ अपने हाथो से बनाई हुई
पिताजी-आज नही , फिर किसी दिन
शालिनी -ये क्या बात हुई ,, अपने बेटी के हाथ की टी भी नही पिएँगे
पिताजी-चलो , पर जल्दी करना क्यूँ कि वहाँ नेहा मेरा इंतज़ार कर रही है
शालिनी -नेहा बहुत लकी है जो उसको आपके जैसे पिता मिले है
और शालिनी पिताजी को अपने घर लेकर गयी
शालिनी ने पिताजी को गरमा गरमा टी पिला दी
.शालिनी के हाथो की ये टी उनको हमेशा याद रहेगी
पिताजी का दिल तो नही कर रहा था शालिनी से दूर जाने का
पर शालिनी को हमेशा के लिए अपने घर लेकर जाने के लिए उनको जाना ही होगा
वो जल्द से जल्द शालिनी को अपने घर लेकर आएँगे
शालिनी से जब नेहा मिलेगी तो वो बहुत खुश होगी
नेहा को जैसी भाभी चाहिए वैसी शालिनी थी
शालिनी मे सभी गुण थे जो पिताजी को अपनी बहू मे चाहिए थे
पिताजी ने शालिनी को अपनी बहू बनाने का अच्छा रास्ता निकाला है, ऐसा करने से शालिनी अपने राजकुमार को भी पा लेगी
जयसिंघ और शालिनी को बिना बताए मिलना चाहते थे
ऐसा करने से शालिनी अपने राजकुमार मे जयसिंघ को पा लेगी
और जयसिंघ भी अपना जीवन साथी खुद पसंद कर लेगा ऐसा हो जाएगा
और पिताजी को बहू मिल जाएगी
सबके बारे मे सोचा पिताजी ने
यही पिताजी की ख़ासियत थी ,
सबका ध्यान रखते है
बस अब अपने गाँव जाकर जयसिंघ को शालिनी के गाँव भेजना होगा
बाकी सब भगवान के हाथ मे होगा उनको मिलाना
ठाकुर को लास्ट तक समझ मे नही आया कि पिताजी कर क्या रहे है
पिताजी इतनी लड़किया देख चुके थे ऐसे मे वो शालिनी को अलग तरह से क़पनी बहू बनाना चाहते थे
शालिनी से पिताजी ने एक रिस्ता तो जोड़ लिया था बेटी और बाप का
अब ससुर और बहू का रिस्ता जुड़ जाए तो सब ठीक हो जाएगा
जयसिंघ शालिनी के साथ खुश रहेगा
पिताजी शालिनी की यादे अपने साथ लेकर गाँव की तरफ जाने लगे
ठकुराइन- भाई साब आपको लड़की मिल गयी
ठाकुर- ये पागल है , एक लड़की पसंद आई और ये है कि बिना बात लिए वापस जा रहा है
ठकुराइन -क्या हुआ
पिताजी- कुछ नही , जिस काम से आए है वो हो गया
ठाकुर- क्या हो गया तूने बात कहाँ की है
पिताजी- तू नही समझेगा , तुझे गाँव जाकर बताउन्गा
ठकुराइन - भाई साब आपकी वजह से मुझे इतने दिन मायके रहने को मिला ,
ठाकुरजी- अगर ये लड़की उसकी बहू बन गयी तो तुम्हे हर साल मायके लेकर आउन्गा
पिताजी-अब चलो जल्दी , कितने दिन हो गये अपने घर से दूर हूँ , नेहा नीता छोटू कैसे होंगे
ठाकुर- रात तक पहुँच जाएँगे
और पिताजी अपने बच्चों से जल्द से जल्द मिलना चाहते थे
और शालिनी को जल्द से जल्द अपनी बहू बनाने चाहते थे