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मैं और मेरा परिवार

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फ्लश बॅक 863

पियाज़ी ने शालिनी को बताया दिया कि उसे क्या करना चाहिए

पिताजी चाहते तो शालिनी को बोल सकते कि उसे मना कर दो और मेरे बेटे से शादी करो

पर पिताजी ने ऐसा नही किया

पिताजी ने शालिनी को ऐसा रास्ता दिखाया जिस से शालिनी के ना करने से उसके घर मे कोई नाराज़ नही होगा

पर पिताजी कर क्या रहे थे

उनको तो शालिनी को अपनी बहू बनाना था

फिर वो शालिनी से बात क्यूँ नही कर रहे है

पिताजी के दिमाग़ मे क्या चल रहा है

अचानक वापस गाँव जाने कि बात कहाँ से आ गयी

पिताजी तो खुश खबरी लेकर जाने वाले थे

फिर ऐसे बीच मे बिना शालिनी से बात किए वो जा कैसे सकते है

शालिनी मे वो सभी गन है फिर भी पिताजी ने अब तक शालिनी से बात क्यूँ नही की

ठाकुरजी-तुझे हुआ क्या है

पिताजी-मैं ठीक हूँ

ठाकुरजी-.फिर ऐसे बीच मे हम गाँव क्यूँ जा रहे है और तूने शालिनी से बात क्यूँ नही की

पिताजी-शालिनी मुझे अपना पिता मानने लगी है , और मैं भी उसको पूजा नेहा नीता जैसा प्यार करने लगा हूँ ,

ठाकुरजी-.तो

पिताजी-तो मैं अपनी बेटी की खुशी को देख रहा हूँ , शालिनी के कुछ सपने है , उसने भी पूजा जैसे अपने राजकुमार की चाभी बना कर रखी है , ऐसे मे मैं उसको कैसे बोल सकता हू अपने बेटे से शादी करो , वो तो हाँ कर देगी पर उसके सपने

ठाकुरजी-.तू ये क्या बोल रहा है

पिताजी-पूजा और शालिनी मेरे लिए एक जैसी है , अगर मैं पूजा के सपने पूरा कर सकता हूँ तो शालिनी के भी सपने पूरे होंगे

ठाकुरजी-.मतलब तू शालिनी से बात नही करेगा , उसे अपनी बहू नही बनाना चाहता

पिताजी-मैं ने शालिनी को अपनी बेटी बनाया है , अब उसे मेरी बहू बनाने का काम भगवान को करना होगा

ठाकुरजी-.मैं नही समझा

पिताजी-मुझे अपने तरीके से शालिनी को अपनी बहू बनाना है , ऐसे की शालिनी के सपने पूरे हो और मेरी बहू भी बन जाए

ठाकुरजी-.क्या है शालिनी के सपने

पिताजी-मुझे ठीक से नही पता ,

ठाकुरजी-.तू पागल है

पिताजी-तू कुछ भी बोल ले , आज हम वापस गाँव जाएँगे

ठाकुरजी-.और शालिनी

पिताजी-उस से आख़िरी बार मिलने चल

और पिताजी शालिनी से मिलने चले गये

पिताजी के दिमाग़ मे क्या चल रहा था ये तो किसी को पता नही था

पर पिताजी के दिल मे क्या चल रहा है ये पिताजी ने ठाकुरजी को बता दिया

पिताजी ने शालिनी को अपनी बेटी मान लिया है ऐसे मे वो शालिनी के खुशी के बारे मे पहले सोच रहे थे

शालिनी से पिताजी को कुछ दिनो मे बहुत लगाव हो गया था

कुछ दिनो मे पिताजी की 4 थ बेटी बन गयी शालिनी

पिताजी का दिल ही ऐसा था

पिताजी अपने बेटे से ज़्यादा शालिनी की खुशी का सोच रहे थे

पिताजी शालिनी से मिलने आ गये

पिताजी ने ठाकुरजी को कार के पास रुकने को कहा

और शालिनी के पास आ गये

शालिनी पिताजी को देखते भाग कर उनके गले लग गयी

और पिताजी को सुक्रिया बोल रही थी

शालिनी -आप बहुत अच्छे हो ,आप ने सब ठीक कर दिया

पिताजी-क्या किया मैं ने

शालिनी -आप ने मेरी परेशानी सॉल्व कर दी

पिताजी-क्या हुआ वो तो बताओ

शालिनी -आपने जैसा कहा मैं ने वैसे ही भाभी से कहा

पिताजी-तो क्या कहा तुम्हारी भाभी ने

शालिनी -वो तो मेरे सवाल से शॉक्ड हो गयी , और मुझे गले लगा लिया

पिताजी-फिर

शालिनी -फिर वो अपने कमरे मे चली गयी , वो टेन्षन मे आ गयी , एक तरफ उनका भाई था और दूसरी तरफ मे उनकी बहन फ्रेंड ननंद उनके बेटो की प्यारी बुआ थी

पिताजी-फिर क्या कहा तुम्हारी भाभी ने

शालिनी -फिर सुबह भाभी की फॅमिली आ गयी , मेरे पिताजी ने मेरा फ़ैसला पूछा

पिताजी-तुमने क्या कहा

शालिनी -मेरे कुछ बोलने से पहले भाभी बोल पड़ी, भाभी ने इस शादी को ना करने की बात कही , शादी हो गयी तो दोनो खुश नही रहेंगे ऐसा कहा भाभी ने

पिताजी-फिर क्या हुआ

शालिनी -ये सुनते भाभी की फॅमिली वापस चली गयी गुस्से मे , और माँ ने भाभी को वजह पूछी तो भाभी ने बस इतना कहा कि मैं आपकी बेटी हूँ

पिताजी-फिर क्या हुआ

शालिनी -ये सुनकर मेरी माँ और पिताजी बहुत खुश हो गये पर माँ को वापस मेरे शादी की टेन्षन होने लगी

पिताजी-तुम खुश हो

शालिनी -हाँ , बहुत खुश , पर माँ की टेन्षन और मेरे पिताजी की परेशानी बढ़ गयी , अब फिर से लड़का ढूँढना पड़ेगा

पिताजी-लड़का क्यूँ ढूँढ रहे हो तुम्हारा राजकुमार आ जाएगा

शालिनी -क्या पता मेरा राजकुमार कभी आएगा या नही

पिताजी-सबके लिए एक राजकुमार बनाता है उपर वाला

शालिनी -सच

पिताजी-हाँ , तुम्हारे सपनो का राजकुमार भी एक दिन ज़रूर आएगा

शालिनी -ऐसा हुआ तो मैं उस राजकुमार को कहीं जाने नही दूँगी

पिताजी-देखना जैसे पूजा को उसका राजकुमार मिला वैसा तुम्हे भी मिल जाएगा

शालिनी -आप तो बहुत अच्छी अच्छी बाते करते हो

पिताजी-अब बताओ तुम्हे कैसा राजकुमार चाहिए

शालिनी -आप तो मेरे बारे मे बात कर रहे , आज तो आप जा रहे हो

पिताजी-जा तो रहा हूँ पर वापस आने के लिए जा रहा हूँ

शालिनी -क्या मतलब

पिताजी-मैं जल्दी वापस आउन्गा

शालिनी -सच

पिताजी-हाँ , मेरी बेटी के राजकुमार को देखने आउन्गा

शालिनी -मैं आपको मेरी शादी मे ज़रूर बुलाउन्गी

पिताजी-फिर तो मैं ज़रूर आउन्गा

शालिनी -वैसे आज समझ ही नही आ रहा कि बात क्या करे , आप के जाने से अजीब लग रहा है

पिताजी-अगर मुझे मेरी बेटी की याद नही आती होती तो मैं कभी नही जाता

शालिनी -पर आपको वादा करना होगा कि आप वापस ज़रूर आएँगे

पिताजी-वादा रहा , अब तुम बताओ तुम क्या करने वाली हो

शालिनी -करना क्या है अपने राजकुमार का इंतज़ार करूगी

पिताजी-वैसे तुम्हारे लिए मेरी नज़र मे एक लड़का है

शालिनी -कौन

पिताजी-है एक , मेरे दोस्त का लड़का ,

शालिनी -रहने दीजिए , आप क्यू टेन्षन ले रहे है

पिताजी-तुम्हे जैसा राजकुमार चाहिए वो वैसा ही है

शालिनी -रियली

पिताजी-हाँ , कुछ कुछ ऐसा ही है

शालिनी -भाभी का भाई भी अच्छा था पर उसमे भी कुछ कमियाँ थी जो भाभी ने मुझे बताई

पिताजी-कमियों का पता तुम खुद लगा लेना

शालिनी -क्या मतलब

पिताजी-मैं उस लड़के को भेजूँगा , तुम खुद उस से मिल लेना , बिना अपने माता पिता को बताए

शालिनी -सुनने मे अच्छा लग रहा है

पिताजी-अगर वो पसंद आया तो तुम्हारी शादी करने की ज़िम्मेदारी मैं लूँगा

शालिनी -नाम क्या है उसका

पिताजी-नाम बता दिया तो तुम उसको उस नज़रिए नही देख पाओगी , ये लगेगा कि मैं ने भेजा है , फिर तुम अपने राजकुमार वाली खूबिया कैसे देखोगी

शालिनी -आपने तो अच्छा तरीका बताया

पिताजी-मैं उसको भी नाम नही बताउन्गा , बस तुम्हारे गाँव का नाम बताउन्गा , अगर किस्मत मे होगा तो तुम दोनो की मुलाकात हो जाएगी और सोच मिल गयी तो शादी भी हो जाएगी

शालिनी -ये तरीका अच्छा लग रहा है लड़का लड़की देखने का

पिताजी-और तुम उसका टेस्ट लेना ,

शालिनी -ठीक है , आप भेज देना उसे ,

पिताजी-मुझे लगता है तुम्हे वो पसंद आएगा

शालिनी -ऐसा क्यूँ लगता है आपको

पिताजी-मैं उस लड़के को अच्छे से जानता हूँ

शालिनी -क्या वो आपके गाँव का है

पिताजी-हाँ ऐसा ही समझ लो

शालिनी -फिर तो ज़रूर मिलुगी उसे ,

पिताजी-और ऐसा मत सोचना कि मैं ने भेजा है , बस ये समझना कि वो एक आम सा लड़का है

शालिनी -वो मुझे पता है

पिताजी-तो मैं उसे जल्दी भेज दूँगा

शालिनी -वो तो हो जाएगा ये लीजिए

पिताजी-ये क्या है

शालिनी -मेरी तरफ से आपके लिए एक गिफ्ट है

पिताजी-क्या है इसमे

शालिनी -आपके लिए एक छड़ी है , आपके हाथ मे अच्छी लगेगी

पिताजी-उसकी क्या ज़रूरत थी

शालिनी - अपने फ्रेंड को दे रही हूँ

पिताजी-ये मैं हमेशा अपने साथ रखूँगा ,

और पिताजी ने अपने गले की सोने की चैन निकाल कर शालिनी को दी

शालिनी -इसकी क्या ज़रूरत थी

पिताजी-ये मेरे तरफ से तुम्हारे लिए छोटा सा गिफ्ट

शालिनी -ये तो बहुत महँगा दिख रहा है

पिताजी- रख लो , ये मुझे नेहा ने दिया था ,

शालिनी -नेहा का गिफ्ट मैं कैसे ले सकती हूँ

पिताजी-नेहा तो बहुत खुश होगी कि उसका गिफ्ट इतनी प्यारी लड़की को दिया है , तुम भी तो नेहा की बहन जैसी हो

शालिनी -नेहा के लिए रख रही हूँ , पर जब मैं नेहा से मिलुगी तो ये उसको वापस दूँगी

पिताजी-ठीक है

शालिनी -चलिए मैं आपको टी पिलाती हूँ अपने हाथो से बनाई हुई

पिताजी-आज नही , फिर किसी दिन

शालिनी -ये क्या बात हुई ,, अपने बेटी के हाथ की टी भी नही पिएँगे

पिताजी-चलो , पर जल्दी करना क्यूँ कि वहाँ नेहा मेरा इंतज़ार कर रही है

शालिनी -नेहा बहुत लकी है जो उसको आपके जैसे पिता मिले है

और शालिनी पिताजी को अपने घर लेकर गयी

शालिनी ने पिताजी को गरमा गरमा टी पिला दी

.शालिनी के हाथो की ये टी उनको हमेशा याद रहेगी

पिताजी का दिल तो नही कर रहा था शालिनी से दूर जाने का

पर शालिनी को हमेशा के लिए अपने घर लेकर जाने के लिए उनको जाना ही होगा

वो जल्द से जल्द शालिनी को अपने घर लेकर आएँगे

शालिनी से जब नेहा मिलेगी तो वो बहुत खुश होगी

नेहा को जैसी भाभी चाहिए वैसी शालिनी थी

शालिनी मे सभी गुण थे जो पिताजी को अपनी बहू मे चाहिए थे

पिताजी ने शालिनी को अपनी बहू बनाने का अच्छा रास्ता निकाला है, ऐसा करने से शालिनी अपने राजकुमार को भी पा लेगी

जयसिंघ और शालिनी को बिना बताए मिलना चाहते थे

ऐसा करने से शालिनी अपने राजकुमार मे जयसिंघ को पा लेगी

और जयसिंघ भी अपना जीवन साथी खुद पसंद कर लेगा ऐसा हो जाएगा

और पिताजी को बहू मिल जाएगी

सबके बारे मे सोचा पिताजी ने

यही पिताजी की ख़ासियत थी ,

सबका ध्यान रखते है

बस अब अपने गाँव जाकर जयसिंघ को शालिनी के गाँव भेजना होगा

बाकी सब भगवान के हाथ मे होगा उनको मिलाना

ठाकुर को लास्ट तक समझ मे नही आया कि पिताजी कर क्या रहे है

पिताजी इतनी लड़किया देख चुके थे ऐसे मे वो शालिनी को अलग तरह से क़पनी बहू बनाना चाहते थे

शालिनी से पिताजी ने एक रिस्ता तो जोड़ लिया था बेटी और बाप का

अब ससुर और बहू का रिस्ता जुड़ जाए तो सब ठीक हो जाएगा

जयसिंघ शालिनी के साथ खुश रहेगा

पिताजी शालिनी की यादे अपने साथ लेकर गाँव की तरफ जाने लगे

ठकुराइन- भाई साब आपको लड़की मिल गयी

ठाकुर- ये पागल है , एक लड़की पसंद आई और ये है कि बिना बात लिए वापस जा रहा है

ठकुराइन -क्या हुआ

पिताजी- कुछ नही , जिस काम से आए है वो हो गया

ठाकुर- क्या हो गया तूने बात कहाँ की है

पिताजी- तू नही समझेगा , तुझे गाँव जाकर बताउन्गा

ठकुराइन - भाई साब आपकी वजह से मुझे इतने दिन मायके रहने को मिला ,

ठाकुरजी- अगर ये लड़की उसकी बहू बन गयी तो तुम्हे हर साल मायके लेकर आउन्गा

पिताजी-अब चलो जल्दी , कितने दिन हो गये अपने घर से दूर हूँ , नेहा नीता छोटू कैसे होंगे

ठाकुर- रात तक पहुँच जाएँगे

और पिताजी अपने बच्चों से जल्द से जल्द मिलना चाहते थे

और शालिनी को जल्द से जल्द अपनी बहू बनाने चाहते थे
 
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फ्लॅशबॅक 864

पिताजी ने अपने लिए बहू सेलेक्ट कर ली

जयसिंघ के लिए शालिनी पर्फेक्ट रहेगी

इस घर के लिए शालिनी पर्फेक्ट रहेगी

शालिनी मे वो सारी खूबिया थी जो उनको जयसिंघ के बीवी मे चाहिए थी

बस अब जयसिंघ शालिनी को पसंद कर दे , वैसे जयसिंघ को शालिनी ज़रूर पसंद आएगी तभी पिताजी इस तरह शालिनी और जयसिंघ को मिलाना चाहते है

वो खुद अपना जीवन साथी सेलेक्ट करे ऐसा पिताजी चाहते थे ताकि वो एक दूसरे को अच्छे से समझे

और जब शालिनी को पता चलेगा कि जयसिंघ उनका बेटा है तो शालिनी की खुशी डबल हो जाएगी

शालिनी और जल्दी घर आ जाए इस बारे मे पिताजी सोच रहे थे

शालिनी इस घर को आचे से संभाल लेगी

पिताजी ने बहुत दूर का सोच रखा था

नेहा नीता पूजा को अपनी भाभी बहुत पसंद आएगी

छोटू को तो ऐसी ही भाभी चाहिए थी जो उसका साथ दे

पिताजी जल्द से जल्द माँ को ये बात बताना चाहते थे

पिताजी अभी से सब कुछ सोच रहे थे

जयसिंघ और शालिनी की शादी कहाँ होगी वो कहाँ रहेगी उनका पोता पोती कैसे होंगे , सब कुछ सोच लिया पिताजी ने

अगर माँ यहाँ होती तो वो अभी के अभी शालिनी को अपनी बहू बना लेती

पिताजी बहुत खुश थे

पिताजी सपने देखते हुए अपने गाँव जा रहे थे

घर जाते ही पिताजी पे हमला हो जाएगा

पिताजी ने सबके लिए गिफ्ट लिया था

और स्पेशल गिफ्ट था शालिनी

और गाँव आ गया , गाँव आते ही पिताजी होश मे आ गये

ठाकुरजी- ले तेरा घर आ गया

पिताजी- चल अंदर

ठाकुरजी- अभी नही रंजीत और पायल सो गये है , कल आ जाउन्गा

पिताजी- ठीक है , और शुक्रिया

ठाकुरजी- जब शादी होगी तब शुक्रिया कहना

और ठाकुरजी हवेली चले गये और पिताजी अपने घर आ गये

पिताजी ने डोर खटखटाया

माजी- कौन होगा इतनी रात मे

नेहा - माँ आप डोर खोलो हम आपके पीछे ही है

माजी- ये डंडा क्यूँ लिया नीता ने

नीता- चोर हुआ तो

माजी- पागल चोर क्या डोर खटकटाके अंदर नही आते

नेहा- पिताजी होंगे ,

माजी-कौन है

पिताजी- मैं चोर हू , तुम सबके दिल चुराने आया हूँ

नेहा - ये तो पिताजी की आवाज़ है

और नेहा ने बिना देर किए डोर खोला

सामने पिताजी को देखते ही नेहा उनके गले लग गयी

पिताजी- नेहा अंदर तो आने दो

नेहा- नही आने दूँगी ,अब याद आई हमारी

नीता- मैं भी नही आने दूँगी ,15 दिन का बोल के गये थे और 30 दिन बाद वापस आ रहे है

पिताजी- एक ज़रूरी काम था जिस से आ नही सका

नेहा- हम से क्या ज़रूरी काम था

पिताजी- तुम्हारे लिए एक बहन ढूँढ रहा था ,

नीता-बहन

पिताजी- तुम्हे बहुत पसंद आएगी ,

नेहा- कहाँ है वो

पिताजी- जल्दी आ जाएगी अब तो आने दो अंदर

नीता- आपने दूसरी शादी की है

माजी-नीता , कुछ भी बोलती हो तुम

पिताजी- नही , शादी नही की है , और वो तुम्हारी बहन पूजा से बड़ी है ,

नेहा- मैं समझी नही

पिताजी- अंदर आने दो सब समझा दूँगा

और नेहा नीता ने पिताजी को अंदर आने दिया

पिताजी अंदर आते ही आराम से बैठ गये और नेहा ने पिताजी को पानी दिया

नेहा- अब बताइए

पिताजी-बताता हूँ , पहले बताओ छोटू कहाँ है

माजी-वो सो रहा है

पिताजी - उठाओ उसे , उसके लिए गिफ्ट लाया हूँ

माजी- जी

माँ ने छोटू को उठाया

छोटू गिफ्ट का नाम सुनते भाग कर पिताजी के पास आ गया

और अपने गिफ्ट लेकर अपने कमरे ने चला गया

पिताजी- चलो तुम्हे अपने गिफ्ट मिले हैना , अब सो जाओ

नेहा- आपने तो कहा कि नयी बहन के बारे मे बताएँगे

पिताजी-अभी नही , जब उसको लेकर आउन्गा तब पता चल जाएगा

नीता- ठीक है हम सोने जा रहे है

नेहा नीता अपने कमरे मे जाने वाली थी वापस पलट गयी

पिताजी- क्या हुआ

नेहा- आप तो भाभी लाने गये थे , कहाँ है भाभी

नीता- मैं तो भूल गयी , पिताजी भाभी कहाँ है

पिताजी-वही तो तुम्हारी बहन होगी

नेहा- भाभी बहन कैसे होगी

पिताजी- ग़लती हो गयी , वो तो तुम्हारी भाभी होगी पर उसके लिए तुम बहन होगी

नीता- पिताजी हम ननद होगी

पिताजी- वो तुम्हे अपनी बहन जैसा प्यार देगी

नेहा- कहाँ है भाभी , क्या नाम है , कहाँ रहती है उनकी फोटो है आपके पास

पिताजी- एक एक सवाल पूछो

नीता- नाम क्या है भाभी का

पिताजी-बता तो दूँगा पर अपने भैया को मत बताना

नेहा- क्यूँ , भैया को क्यू नही बताऊ

पिताजी- तुम्हारे भैया को सर्प्राइज़्ड देना है

नीता- नही बताएँगे

पिताजी- ये भी मत बताना कि उसकी शादी होगी

नेहा- आप गेम खेल रहे भैया के साथ , फिर तो मज़ा आएगा

पिताजी- बहुत मज़ा आएगा

नीता- भाभी का नाम क्या है

पिताजी- शालिनी नाम है तुम्हारी भाभी का

नेहा- नाम अच्छा है , पर शालिनी हमारी भाभी कब बनेगी

पिताजी- वही तो गेम है , जिसमे तुम्हारे भैया को शालिनी को जीत कर यहाँ लाना होगा

नेहा- सुनने मे अच्छा लग रहा है पर मैं समझी नही

पिताजी- देखो हम तुम्हारे भैया को शालिनी के गाँव भेजेंगे , तुम्हारे भैया को नाम भी नही बताएँगे ,

नीता- फिर भैया कैसे शालिनी को भाभी बनाएँगे

पिताजी- यही तो गेम है , मैं ने तो तुम्हारी भाभी सेलेक्ट की है , अब जयसिंघ को उसी को अपनी बीवी बनाना होगा , देखते है तुम्हारे भैया जीत पाते है कि नही

नेहा- भैया हार गये तो

पिताजी- तो हम शालिनी के बारे मे बता देंगे , कैसा है प्लान

नेहा नीता- सूपर

पिताजी- तो अपने भैया को कुछ मत बताना

नेहा - नही बताएँगे , अब बताइए भाभी कैसी है

पिताजी- वो कल बताउन्गा , अब मैं थक गया हू ,

नेहा- आप सो जाइए ,फिर कल बताना

नेहा नीता पिताजी के गेम से खुश हो गयी

और दोनो बाते करते हुए अपने कमरे मे चली गयी

पिताजी भी फ्रेश होकर माँ के साथ अपने कमरे मे आ गये

माजी- ये आप क्या बात कर रहे थे नेहा नीता से

पिताजी-बात तो होती रहेगी पहले प्यार करने दो ,, इतने दिन कैसे दूर रहा हूँ मुझे पता है

माजी- मैं भी क्या दूर रह कर खुश थी

पिताजी-तो आओ ना पास

माजी- पहले बताइए क्या हुआ वहाँ पर

पिताजी-पहले तो कोई भी लड़की नही मिली , मैं तो थक गया था

माजी- फिर

पिताजी-फिर एक दिन लड़की देखने जा रहे थे कि रास्ते मे एक लड़की मिल गयी जो एक अंजान आदमी जिसका आक्सिडेंट हो गया था उसे बचा रही थी

माजी- बहादुर लड़की थी

पिताजी-उसी का नाम शालिनी है

माजी- तो आपको वो पसंद आ गयी

पिताजी-बहुत अच्छी है शालिनी , जैसी हम बहू चाहते थे वो वैसी ही है

माजी- सच

पिताजी-हाँ , उसको पूरा गाँव प्यार करता है अपनी बेटी मानता है

माजी- गाँव से उसको प्यार है तो वो जयसिंघ के लिए पर्फेक्ट रहेगी

पिताजी-हाँ

माजी- दिखने मे कैसी है

पिताजी-जयसिंघ के साथ चलेगी तो ऐसा लगेगा हीरो हेरोयिन जा रहे है ,

माजी- सच

पिताजी-जयसिंघ तो देखते पसंद कर लेगा

माजी- तो हम जल्दी जयसिंघ को मिल कर शालिनी को देखने जाते है

पिताजी-ऐसा नही कर सकते

माजी- क्या मतलब , आपने बात नही की शालिनी से

पिताजी-वो मुझे अपने पिताजी जैसा मानती है

माजी- क्या ?

पिताजी-मैं उसको अपनी बेटी मानने लगी हूँ , इतनी प्यारी है कि मैं ने उसे बेटी बना लिया

माजी- तो क्या हुआ

पिताजी-उसके भी कुछ सपने है , पूजा जैसे

माजी- और आपने उसके सपने पूरे करने का सोचा होगा

पिताजी-मैं क्या करता , शालिनी है ही इतनी प्यारी कि मैं कुछ बोल ही नही पाया

माजी- तो अब क्या होगा

पिताजी-हम जयसिंघ को शालिनी के गाँव भेजेंगे

माजी- जयसिंघ नही जाएगा

पिताजी-वो तुम्हे संभालना है

माजी- शादी की बात से तो वो कभी नही जाएगा ,वो कहेगा आप देख लो आपको पसंद है तो मुझे भी पसंद है ऐसा कहेगा

पिताजी-उसे अलग काम से भेजेंगे

माजी- मतलब शादी की बात नही करेंगे

पिताजी-नही

माजी- पर शालिनी के गाँव भेजेंगे कैसे

पिताजी-मैं ने उसका इंतज़ाम कर दिया है , उसको इंजीनियर बना कर भेजेंगे , ठाकुर वहाँ कंपनी खोल रहा है , जयसिंघ को उसी के सिलसिले मे भेजेंगे

माजी- आप ने तो सब सोच रखा है

पिताजी-इस से क्या होगा जयसिंघ खुद शालिनी को पसंद करेगा

माजी- आपने अच्छा सोचा ये

पिताजी-जयसिंघ को अपनी पसंद की लड़की मिलेगी और हमे अपनी पसंद की बहू

माजी- आपने सही तरीका निकाला है

पिताजी-हाँ , अब सिर्फ़ जयसिंघ को यहाँ बुलाना है 1 महीने के लिए

माजी- वो तो सिर्फ़ दीवाली मे आता है

पिताजी-तुम्हे बीमार बना देंगे

माजी- क्या मतलब

पिताजी-तुम्हारी बीमारी का नाटक करेंगे तो जयसिंघ भाग कर आ जाएगा

माजी- और मैं ठीक हो गयी तो

पिताजी-तार जाने मे 1 हफ़्ता लगता है तब तक तुम ठीक हो गयी हो ऐसा बोल देंगे

माजी- आप ने सब कुछ सोच लिया

पिताजी-हाँ, शालिनी को जल्दी यहाँ लाना चाहता हूँ

माजी- और बताइए शालिनी के बारे मे

पिताजी-उसके बारे मे बताता रहा तो रात निकल जाएगी

माजी- बताइएना

पिताजी ने शांतबाई वाली बात बता दी

जिसे सुनकर माँ के आँखो मे आसू आ गये

माजी- शालिनी की सोच बहुत अच्छी है

पिताजी-हाँ

माजी- शालिनी को घर जोड़ना आता है

पिताजी-शालिनी हमारे घर को टूटने नही देगी

माजी- और जयसिंघ का साथ देती रहेगी ,

पिताजी-जयसिंघ को एक हम्दर्द मिल जाएगा

माजी- आपने मुझे शालिनी के बारे मे बता कर खुश कर दिया

पिताजी-अब मुझे प्यार करने दो

माजी- आज तो मैं आपका साथ रात भर दूँगी

पिताजी-आज तुम्हे सोने नही दूँगा

और पिताजी माँ को प्यार करने लगे

पूरे 1 महीने की कसर निकालने लगे

माँ बहुत खुश थी पिताजी के प्यार करने से और शालिनी के बारे मे सुनकर
 
फ्लॅशबॅक 865

माँ अपनी बहू के बारे मे सुनकर खुश हो गयी

पिताजी ने इतनी अच्छी बहू को सेलेक्ट किया इस लिए माँ ने उनको रात भर प्यार किया

माँ और पिताजी तो अलग ही दुनिया मे चले गये ..

नेहा और नीता भी अपनी भाभी के बारे मे सुनकर खुश थी

नेहा और नीता को पिताजी का गेम पसंद आया

दोनो भैया को सर्प्राइज़्ड देने के लिए उतेज़ित हो चुकी थी

छोटू को इसके बारे मे ज़्यादा नही बताया

छोटू तो जयसिंघ के शहर 3 जाने के बाद अपने नये दोस्तो के साथ मस्ती करता था

छोटू तो अपनी ही दुनिया मे खुश था

माँ सुबह उठते उनके शरीर की हड्डी टूटने लगी

कल रात तो जंग चली थी माँ और पिताजी मे ,प्यार वाली जंग

माँ खुश थी जयसिंघ के लिए

नेहा के पिताजी को जयसिंघ क्स बारे मे इतना सोचता हुआ देख कर माँ खुश थी

अब बस जयसिंघ को यहाँ बुलाना था

पिताजी तो सुबह देर तक सोते रहे

नेहा नीता ने पिताजी की नींद खराब की

नेहा- पिताजी उठिए

पिताजी- सोने दो ना नेहा

नेहा- हमे भाभी के बारे मे सुनना है

नीता- मैं पानी लेकर आई हूँ

पिताजी- रूको बताता हूँ पर रोज एक एक बात बताउन्गा और तुम दोनो को मेरा साथ देना होगा तुम्हारी भाभी को यहाँ लाने के लिए

नेहा- हम आपके साथ है

पिताजी- तो सुनो तुम्हारी माँ की बीमारी का नाटक करके तुम्हारे भैया को यहाँ बुलाएँगे फिर तुम्हारी भाभी के गाँव भेज देंगे

नीता- अच्छा प्लान है

नेहा- पर छोटू

पिताजी- कल तू घर का काम करना तुम्हारी माँ को सोने देना जिस से छोटू को लगेगा कि माँ बीमार है

नीता-अच्छा आइडिया है

पिताजी - तो तुम काम पे लग जाओ

नेहा - लग तो जाएँगे पर आप भाभी की बात बताने वाले थे

पिताजी- तुम्हारी भाभी को आम पसंद है , और वो भी पेड़ से तोड़ कर खाना

नेहा- सच फिर तो आम के बगीचे मे हम भाभी के साथ बहुत मस्ती करेंगे

नीता- भाभी को हम खुद दिखाएँगे आम का बगीचा और ये भी बताएँगे कि आम का बगीचा हमने लगाया है

पिताजी- अब मुझे सोने दो

नेहा- आप सोएंगे तो भैया को तार कौन करेगा

पिताजी- तुम चिट्ठि लिखो तब तक मैं सोता हूँ

और नेहा नीता अपने काम मे लग गयी

पिताजी ने नेहा नीता को सब कुछ बता दिया

नेहा नीता को पता रहेगा तो उनकी मदद मिल जाएगी

और दोनो इसी बहाने से मस्ती करेगी खुश रहेगी और भाभी को मिलने के लिए बेताब रहेगी जिस से शालिनी को देखते अच्छी लगेगी

नेहा नीता को चिट्ठी लिखने को बोल कर पिताजी वापस सो गये

.एक तो लंबा सफ़र उपर से नेहा की माँ को रात भर प्यार करना , पिताजी को आराम चाहिए था

माँ भी अपनी बहू के बारे मे सोच रही थी

पिताजी ने अपनी नींद पूरी की और नेहा के पास आ गये

नेहा नीता ने ऐसी चिट्ठी लिखी थी कि जयसिंघ पढ़ते ही भागते हुए गाँव आ जाएगा

पिताजी ने चिट्ठि पढ़ते ही नेहा और नीता को चूम लिया

और डाक घर मे जाकर तार कर दिया

चिट्ठी पहुँचने मे टाइम लगेगा

.तब तक पिताजी रोज नेहा नीता को उनकी भाभी के बारे मे बताने लगे

नेहा नीता अपनी भाभी के बारे मे सुनकर शालिनी से मिलने को बेताब हो रही थी

इतनी तारीफ सुनने को मिलेगा तो मिलने का दिल तो करता है

पिताजी ने मज़ाक मे ठाकुरजी को कहा था कंपनी खोल दे शालिनी के गाँव के पास

और यही मज़ाक पिताजी के काम आएगा

ठाकुर भी वहाँ कंपनी खोलने मे इंटेरेस्ट था , जगह अच्छी थी

ठकुराइन ने भी इस बात के लिए ठाकुरजी को सपोर्ट किया क्यूँ कि ठाकुरजी कंपनी मे जाएँगे तो ठकुराइन को अपने मायके जाने को मिलेगा

फिर क्या था पिताजी ने ठाकुरजी से बात की ,

ठाकुरजी ये सुनकर खुश हुए कि जयसिंघ वहाँ जा कर कंपनी का प्लान बनाएगा

जयसिंघ ने प्लान बनाया तो कंपनी अच्छी बन जाएगी ये ठाकुरजी को पता था

.ठाकुरजी पिताजी के बात से खुश हो गये और पिताजी ने सब कुछ सेट किया

जयसिंघ का शालिनी के गाँव जाने का इंतज़ाम किया

पिताजी को नेहा नीता मा और ठाकुरजी का सपोर्ट मिलते सब कुछ अच्छे से तय हो गया

उधर जयसिंघ को जब तार मिला तो जयसिंघ की हालत खराब हो गयी

माँ की तबीयत खराब है

ये सुनते ही जयसिंघ ने सारी मीटिंग कॅन्सल की

और कुमार की कार लेकर कंपनी से ही गाँव के लिए निकल पड़ा

जयसिंघ अपनी माँ से सबसे ज़्यादा प्यार करता था

ऐसे मे माँ के बीमारी के बारे मे सुनकर जयसिंघ को माँ से मिलना था

माँ को प्यार करने की लिस्ट मे पिताजी और जयसिंघ टॉप पर थे

जयसिंघ तो निकल गया , और यहाँ पिताजी ने सारा इंतज़ाम कर दिया

कुमार तो जयसिंघ के ऐसे अचानक जाने से गुस्सा हो गया क्यूँ कि जयसिंघ ने करोड़ के डील छोड़ दी थी

यही चीज़ बताती है कि जयसिंघ अपनी फॅमिली के बारे मे क्या सोचता है

डील तो कई आएगी पर माँ को ऐसे बीमार हालत मे कैसे रहने देता जयसिंघ

पिताजी जयसिंघ के लिए तय्यार थे

जयसिंघ घर आते कार से उतर कर भाग कर घर मे अंदर आ गया

नेहा नीता जयसिंघ को देखते ही खुश हो गयी

जयसिंघ- माँ कहाँ है

नेहा- माँ सो रही है ,

जयसिंघ- पिताजी कहाँ है ,

नीता- पिताजी माँ के पास है

और जयसिंघ माँ के कमरे मे गया

जयसिंघ- पिताजी ये सब कैसे हो गया

पिताजी- जयसिंघ तुम आ गये पर तुम्हे कैसे पता माँ के बीमारी के बारे मे

जयसिंघ- नेहा का तार आया था , आपने तो बताया भी नही

पिताजी- मैं भी अभी आया हूँ

जयसिंघ- क्या मतलब अभी आए है

पिताजी- मैं ठाकुर के साथ बाहर गाँव गया था , यहाँ आया तो देखा तुम्हारी माँ बीमार है

जयसिंघ- क्या हुआ माँ को

पिताजी- तुम्हारी माँ से घर का काम नही होता जिस से फीवर हो गया था ,, , कॉफ और कोल्ड भी था , और इस बीच चक्कर आकेर गिर गयी

जयसिंघ- नहा नीता तुम्हे ये सब देखना चाहिए था , अब तुम बड़ी हो , माँ को आराम देना चाहिए

नीता- हम तो काम करते है पर माँ का तो आपको पता है

जयसिंघ- इस पे बाद मे बात करते है डॉक्टर ने क्या कहा

नेहा- डॉक्टर कहाँ भैया, वैद्य को बुलाया था

जयसिंघ- डॉक्टर के पास ले जाते है

पिताजी- तुम बैठो पहले

जयसिंघ- पर माँ

पिताजी- अब वो ठीक है

जयसिंघ- ठीक है , पर माँ तो सो रही है

पिताजी- सब ठीक है , तार कब मिला तुझे

जयसिंघ- आज सुबह ही

पियाज़ी- तार 5 दिन पहले भेजा था

जयसिंघ- अब कैसी है माँ

पिताजी- ठीक है , तुम्हे देख लेगी तो और अच्छी हो जाएगी

नेहा- भैया कुछ दिन आप यहीं रुक जाओ

जयसिंघ- माँ के ठीक होने तक मैं कही नही जाउन्गा

पिताजी- नेहा जयसिंघ के लिए पानी टी लेकर आओ

जयसिंघ- नेहा

नेहा- जी भैया

जयसिंघ-तूने अच्छा किया मुझे तार करके

नीता- भैया आप भी नही थे पिताजी भी नही थे तो मैं डर गयी थी जिस से आपको तार किया , पिताजी जहाँ गये वहाँ का अड्रेस नही था

जयसिंघ- कभी भी डर लगे तो मुझे बताया करना

नेहा-पर भैया तार तो कितनी देर से जाती है

जयसिंवह- मैं तुम्हे अपनी कंपनी का नंबर दूँगा जब कभी ज़रूरत पड़े तो कॉल करके बुलाना

नीता- यहाँ फोन कहाँ है

जयसिंघ- हवेली पे हैना , वहाँ जाकर कॉल करना

नेहा- जी भैया

जतसीघ- पिताजी आप आराम कीजिए मैं माँ के पास बैठ ता हूँ

पिताजी अपने काम मे लग गये

जयसिंघ अपनी माँ का ख़याल रखने लगा

माँ ने जब आँखे खोली और जयसिंघ को देखा तो माँ ने जयसिंघ को गले लगा लिया

माँ को आक्टिंग करते हुए बुरा लग रहा था

पर ये जयसिंघ के लिए ही कर रही थी

माजी- बेटा तुम आ गये

जयसिंघ- माँ तुम लेटी रहो

माजी- तुम्हे देख लिए तो अब ठीक हो जाउन्गी

जयसिंघ- ये सब कैसे हुआ

माजी- कुछ नही , काम करते हुए फिसल गयी , फिर फीवर आ गया

जयसिंघ- अब कैसी है तबीयत

माजी- तू आ गया ना बस समझो ठीक हो गयी , तूने कुछ खाया

जयसिंघ- हाँ मैं खाना खा कर आया हूँ

माजी- तेरी माँ हूँ , झूठ मत बोल ,अभी तुझे खाना बना कर देती हूँ

जयसिंघ- आप आराम कीजिए ,नेहा हैना वो खाना बना देगी

माजी- पर

जयसिंघ- आप आराम कीजिए

नेहा- भैया नाश्ता आ गया है

जयसिंघ- देखा माँ नेहा ने नाश्ता भी बना दिया , अब आप बस आराम करो

नेहा- भैया आप टेंशन मत लो अब दुबारा ऐसी ग़लती नही होगी , माँ को अब काम करने नही दूँगी

जतसिंघ- ये है हमारी नेहा

नीता - भैया टी

जयसिंघ- नीता तुम भी माँ को काम करने मत देना

नीता- भैया अब दुबारा ऐसी ग़लती नही होने दूँगी

जयसिंघ- चलो जाओ , माँ को आराम करने दो

माजी- तू भी आराम कर

जयसिंघ ने आते ही माँ की सेवा करनी शुरू की

ये देख कर माँ को पिताजी पे गुस्सा आ रहा था

बिना वजह माँ से ये पाप करवा रहे थे

माँ से जयसिंघ को परेशन देखा नही गया

और माँ दूसरे ही दिन ठीक हो गयी

पिताजी ने माँ से पूछा कि ऐसा क्यूँ किया

पर माँ ने पिताजी की बात नही सुनी , माँ जयसिंघ को परेशान कैसे देखती

माँ के ठीक होते जयसिंघ को अच्छा लगा

पिताजी ने फिर भी मेनेज किया

माँ ने साफ साफ कहा कि आपको जो करना है करो पर उनसे ये पाप नही होगा

भले जयसिंघ के अच्छे के लिए क्यूँ ना हो पर वो जयसिंघ को परेशान नही देख सकती

पिताजी ने भी इस पे ज़्यादा बहस नही की

और वो दूसरे स्टेप के बारे मे सोचने लगे

जयसिंघ कुछ दिन रुक के जाने वाला था

माँ भी ठीक हो गयी थी

अब पिताजीको ठाकुर के आने का इंतज़ार था
 
फ्लॅशबॅक 866

पिताजी जयसिंघ को घर लाने मे कामयाब हुए

जयसिंघ सेनटी हो गया

अपनी माँ को बेड पे देख कर जयसिंघ एमोशनल हो गया

पिताजी को अब ये रास्ता भी चल जाएगा क्यूँ कि ये जयसिंघ के लिए कर रहे थे

पिताजी अब जयसिंघ को शालिनी से मिलाने का सोच रहे थे

माँ पिताजी का थोड़ा साथ दे रही थी

माँ अब ठीक हो गयी ,फिर भी जयसिंघ वापस गया नही था

माजी - अब आगे क्या सोचा है

पिताजी- अब ठाकुर को बुलाता हूँ , तुम बस मेरा साथ देना

माजी-मुझसे नही होगा

पिताजी- ये जयसिंघ के लिए है , अगर उसने शहर मे कोई ग़लत लड़की से शादी कर ली तो

माजी- मैं सिर्फ़ गर्दन हाँ मे हिलाउन्गी

पिताजी- ठीक है मैं खुद कर लूँगा

माजी- बुलाओ ठाकुर को

पिताजी ने ठाकुर को बुलाने का इंतज़ाम किया

पिताजी- जयसिंघ

जयसिंघ- जी पिताजी

पिताजी- शादी का क्या सोचा है

जयसिंघ- ये अचानक शादी की बात कहाँ से आ गयी

पिताजी- कब करेगा ये पूछ रहा था क्यूँ कि कुछ सालो मे नेहा और नीता भी शादी के लायक हो जाएगी

जयसिंघ- उनकी शादी मैं करवाउन्गा

पिताजी- वो बाद मे देखेंगे तू बता , तू कब शादी करेगा

जयसिंघ- करने को तो आज भी कर सकता हूँ पर वैसी लड़की मिलनी चाहिए

पिताजी- पर करेगा कब शादी

जयसिंघ- पर आप अब क्यूँ पूछ रहे है ,

पिताजी- मैं देखना चाहता था कि तूने शहर 3 मे तो कोई देख नही रखी है

जयसिंघ- ऐसा कुछ नही है ,

पिताजी- तो शादी कब करेगा

जयसिंघ- मेरे लिए लड़की तो आप देखने वाले थे

पिताजी- देखूँगा पर अगर तुम्हे कोई पसंद हो बता दो

जयसिंघ- कोई पसंद आई तो बता दूँगा

पिताजी- मतलब तुझे कोई लड़की पसंद नही है , इसका मतलब मैं तेरे लिए लड़की ढूँढ सकता हूँ

जयसिंघ- जी

पिताजी- बाद मे मुकर मत जाना

जयसिंघ- आपको प्रॉमिस किया है मैं ने

पिताजी- तो मैं तेरे लिए लड़की ढूँढना शुरू करता हूँ

जयसिंघ- जैसा आप ठीक समझे

पिताजी- वैसे तुझे मेरा एक काम करना होगा

जयसिंघ- गाँव आने की बात छोड़ कर कुछ भी बोलिए

पिताजी- मैं ने ठाकुर से एक वादा किया है बिना तेरे पूछे

जयसिंघ- कैसा वादा

पिताजी- ठाकुर एक कंपनी खोलना चाहता है

ज़सयसिंघ- मैं शहर3 की कंपनी को नही छोड़ सकता

पिताजी- मैं कहाँ कह रहा हूँ छोड़ने को

जयसिंघ- फिर बात क्या है

पिताजी- ठाकुर एक कंपनी खोलना चाहता है , उसके लिए ठाकुर ने एक जगह भी देखी है

जयसिंघ- ये तो अच्छी बात है

पिताजी- उनकी यहाँ भी कंपनी है तो वो नयी कंपनी की प्लॅनिंग नही कर पा रहे है

जयसिंघ- तो आप चाहते है मैं कंपनी की जगह देखु , और प्लान बना कर दूं

पिताजी- हाँ , मेरे लिए ये काम कर दे

जयसिंघ- ये तो मैं कर दूँगा , पर मैं सिर्फ़ 1 महीना रहूँगा

पिताजी- 1 महीने मे हो जाएगा ,

जयसिंघ- किस गाँव मे कंपनी डालनी है

पिताजी- ठकुराइन के मायके के पास है वो गाँव

जयसिंघ - कब जाना होगा

पिताजी- जितनी जल्दी हो सके उतना अच्छा होगा

जयसुंघ- पर माँ

पिताजी- अब तो वो ठीक है , और तुम्हारी माँ ने ही कहा ठाकुर को कि तुम कर दोगे

माजी- बेटा वो ग़लती से मेरे मूह से निकल गया था

जयसिंघ- आपने वादा किया हैना , मैं कर दूँगा ठाकुरजी का काम

पिताजी- और हाँ तुम्हे उसी गाँव मे रहना होगा , वहाँ तुम्हारे लिए एक घर का इंतज़ाम किया है , यू मेनेज कर लेना

जयसिंघ- बस 1 महीना

पिताजी- तुझ पे है ,, तू जल्दी काम कर देना , ठाकुर को काम पसंद आया तो तू वापस आ जाना

जयसिंघ- ठीक है , पर मुझे पहले शहर3 जाना होगा

पिताजी- वहाँ क्यू जाना चाहता है

जयसिंघ- एक दिन के लिए जा रहा हूँ , वहाँ सब समझा के आ जाउन्गा

पिताजी - ठीक है , अभी ठाकुर आएगा तू मिल ले उनसे

जयसिंघ- बस इतना ही हैना

माजी- हाँ , वो ग़लती से मैं

जयसिंघ- कोई बात नही माँ , मैं कर दूँगा , अपने ही तो है ठाकुरजी , पिताजी के दोस्त

ठाकुरजी-- दोस्त का नाम लिया और दोस्त हाज़िर है

पिताजी- तेरी बात कर रहा था

ठाकुरजी- कैसे हो जयसिंघ

जयसिंघ- सब ठीक है , आप नयी कंपनी निकाल रहे हो

ठाकुरजी- हाँ वो ठकुराइन कह रही थी उधर कंपनी निकाल दो जिस से उसको मायके जाने को मिलेगा

जयसिंघ - ये तो अच्छा सोचा आपने

ठाकुर- पर ये सिर्फ़ तेरी मदद से हो पाएगा

जयसिंवह- मैं कर दूँगा आप बेफिकर रहिए

ठाकुरजी- मैं ने एक छोटा सा प्लान बनाया है वो देख लो

और ठाकुरजी ने कंपनी का प्लान दिखाया जयसिंघ को

जयसिंघ प्लान देखने लगा

पिताजी ने ठाकुरजी से बात करनी शुरू की

जयसिंघ- ये प्लान बेकार है

त्सकुर-क्या हुआ

जयसिंघ- इस के हिसाब से कंपनी स्टार्ट की तो डूब जाएगी

पिताजी- तभी तो तुम्हारी मदद माँग ली

माजी- जय मदद कर दो

जयसिंघ- ये प्लान देख कर लग रहा है मुझे मदद करनी ही होगी , मैं कर दूँगा

ठाकुरजी- तुम्हारा शुक्रिया कैसे अदा करूँ समझ नही आ रहा है

जयसिंघ- इस मे शुक्रिया की कोई बात नही है ,

ठाकुरजी- अगर तुम जल्दी प्लान बना देते तो

जयसिंघ- आप वहाँ इंतज़ाम कर दीजिए

ठाकुरजी- मैं अपने मेनेज़र को तुम्हारे साथ भेज रहा हूँ , और रहने का इंतज़ाम गाँव मे कर दिया है

जयसिंघ- ठीक है

ठाकुरजी- अगर कुछ ज़रूरत पड़ी या मुश्किल हुई तो वहाँ के ज़मींदार से मिलना , वो तुम्हारी मदद कर देंगे उनकी ही ज़मीन पे कंपनी लगा रहे है

जयसिंघ- ज़मींदार , फिर तो मुश्किल नही होगी

माजी- आप बाते करो मैं सबके लिए खाना लगा देती हूँ

जयसिंघ - ठाकुरजी मैं कल शहर3 जाउन्गा और 3 दिन बाद आपकी कंपनी का काम शुरू कर दूँगा

ठाकुरजी- बेटा तुम्हारा शुक्रिया कैसे कहूँ समझ नही आ रहा , ये कंपनी ठकुराइन का सपना है

जयसिंघ- मैं कर दूँगा

पिताजी- चलो खाना खाते है

और पिताजी ने जयसिंघ को शालिनी के गाँव भेजने का प्लान बना दिया

और साथ मे शालिनी के घर जाने का का इंतज़ाम भी कर दिया

बस अब सब ठीक हो जाए

जयसिंघ और शालिनी की मुलाकात हो जाए

नज़रें मिलते ही प्यार हो जाएगा ये पिताजी को पता था

माँ ने जयसिंघ ठाकुरजी और पिताजी के लिए बढ़िया खाना बनाया

नेहा नीता को जब पता चला कि जयसिंघ भाभी के गाँव जाने वाला है तो दोनो खुश हो गयी

अब इस घर मे भाभी आएगी

जयसिंघ अपनी माँ और पिताजी के लिए इतना तो कर ही सकता है

जयसिंघ ने नेक्स्ट दिन शहर3 जाकर कुमार को मना लिया

कुमार तो पहले ही करोड़ का कांट्रॅक्ट जाने से गुस्से मे था

पर उसके पास जयसिंघ का नेक्स्ट ऑप्षन नही था जिस से कुमार को हाँ करनी पड़ी

जयसिंघ ने ज़रूरत का सारा समान ले लिया

और वापस गाँव मे आ गया

माँ और पिताजी का आशीर्वाद लेकर शालिनी के गाँव आ गया

ये गाँव भी जयसिंघ के गाँव जैसा था

जयसिंघ को गाँव पसंद आया

जयसिंघ आते ही काम मे लग गया

पहले कुछ दिन तो जयसिंघ काम मे बिज़ी रहा

पर कुछ गॉव के काम की वजह से जयसिंघ को काम बंद करना पड़ा

काम बंद होते ही जयसिंघ गाँव मे घूमने लगा

गाँव मे घूमते हुए जयसिंघ को ठाकुरजी की बात याद आ गयी

कुछ भी प्राब्लम हुई तो ज़मींदार से मिलना

ज़मींदार का ख़याल दिमाग़ मे आते ही जयसिंघ उनसे मिलने लगा

ज़मींदार के घर जाते ही जतसिंघ की मुलाकात उस देवी से हुई जो उसके अधूरे पन को दूर करने आई है

.शालिनी को देखते ही जयसिंघ अपना मूह फाड़ कर उसको देखता रह गया

शालिनी भी जयसिंघ की पर्सनॅलिटी देख कर प्रभावित हुई

जयसिंघ को देखते ही शालिनी को नेहा के पिताजी की याद आ गयी

पर शालिनी के दिमाग़ मे तो जैसे घंटी बजने लगी थी

जयसिंघ का भी वही हाल था जो शालिनी का था

दोनो के दिल मे घंटियाँ बजने लगी

दोनो कुछ देर के लिए ऐसे एक दूसरे को देखते रह गये

ये पहली बार था जब दोनो की नज़रें मिली ,

इसके बाद तो उनके दिल मिलने लगे

ये शुरुआत हो गयी उस प्यार की जिसका दोनो को कब से इंतज़ार था

शालिनी तो जैसे सब कुछ भूल गयी थी जयसिंघ को देख कर

जयसिंघ को यहाँ आकर मानो जैसे जन्नत मिल गयी थी

दूसरी मुलाकात तो इतने जल्दी हो गयी कि दोनो सोच भी नही सकते थे

उस पूरे दिन जयसिंघ ज़मींदार के घर के चक्कर लगाता रहा था

शालिनी भी जयसिंघ को खिड़की से देख रही थी

जैसे शालिनी को पता हो कि जयसिंघ उसे देखने वापस आएगा

पहली मुलाकात मे नमक वाली टी पीने को मिली जयसिंघ को

पर इस नमक वाली टी मे भी जयसिंघ को शालिनी के प्यार का पता चला

दूसरे दिन जयसिंघ ने खुद को इन्वाइट किया शालिनी के घर पे

जयसिंघ खुद चला गया खाना खाने शालिनी के घर

शालिनी ने इस बार स्वादिष्ट खाना खिलाया जयसिंघ को फिर तो जैसे मिलने का सिलसिला शुरू हो गया

कंपनी गयी भाड़ मे

जयसिंघ तो बस गाँव मे घूमता रहता था शालिनी को देखने के लिए

.शालिनी भी बहाने कर करके जयसिंघ को अपने दीदार करवा देती

फिर तो धीरे धीरे दोनो मे बातों का सिलसिला शुरू हो गया

पढ़ाई करने वाला जयसिंघ , लड़कियो से दूर रहने वाला जयसिंघ आज कल शालिनी के घर के चक्कर लगा रहा था

मूवी थियेटर के बाहर शालिनी का इंतज़ार कर रहा था

.गाँव के बोरिंग फंक्षन को देखने जा रहा था

शालिनी भी अपने कामो पे ज़्यादा ध्यान नही देती

कभी खाने मे नमक कम होता तो कभी ज़्यादा नमक डाल देती

शालिनी की भाभी तो परेशान हो गयी थी

शालिनी आज कल देर से उठने लगी

मिरर के सामने ज़्यादा देर बैठ कर मेकप करने लगी

बार बार भाभी से पूछने लगी कि वो कैसी दिख रही है

अपने ड्रेस को बार बार पहन कर देखती

शालिनी को प्यार हो गया था

शालिनी प्यार मे दीवानी हो गयी थी

जयसिंघ का भी ऐसा ही हाल था

आज कल जयसिंघ अपने बाल बनाने से तो अपने कपड़ो तक ध्यान देने लगा

बोरिंग चस्मा निकाल कर अच्छा स्टाइल वाला गॉगल लगा लिया

काम पे तो उसने जाना ही बंद किया

कंपनी का काम कैसा चल रहा था ये तो जयसिंघ को पता ही नही था

जयसिंघ को इतना पता था कि दिन भर शालिनी को देखना है उस से बात करनी है

और रात मे शालिनी के सपने देखने है

शालिनी और जयसिंघ दीवाने बन गये

दोनो की बाते अब बहुत देर तक चलती

दोनो अकेले मे मिलने के चान्स ढूँढने लगे

जयसिंघ और शालिनी ने अब तक प्यार का इज़हार नही किया पर दोनो के दिल एक हो चुके थे

जैसा पिताजी ने सोचा था वही हुआ
 
फ्लॅशबॅक 867

जयसिंघ और शालिनी को प्यार हो गया

प्यार होते ही दोनो खुद को भूल गये

शालिनी तो घंटो मिरर के सामने बैठी रहती थी

जयसिंघ भी खुद को फिट और स्टाइलिश रखने लगा

रोज एक गुलाब का फूल लेकर गाँव मे आता

अपने हाथ ने लेकर घूमता रहता

जब शालिनी दिखती तो गुलाब का फूल छुपा देता

शालिनी जयसिंघ के इस हरकत पे गुस्सा हो जाती

शालिनी को लगता आज गुलाब का फूल देगा कल देगा पर जयसिंघ की हिम्मत ही नही हो रही थी

पहलवान का बेटा एक लड़की से बात करने को घबरा रहा था

दिल की बात ज़ुबान पे लाने मे जयसिंघ को डर लग रहा था

पहला प्यार था

इसका इंतज़ार जयसिंघ कब से कर रहा था

शालिनी से तो एक एक दिन बड़ी मुश्किल से कट रहा था

जब भी रात होती तो शालिनी सोचती कि कब ये रात ख़तम होगी और कब सुबह जयसिंघ उसे गुलाब का फूल देगा

शालिनी को तो अब नींद भी नही आ रही थी

ऐसे दिन कट रहे थे

जयसिंघ घर से निकलता तो सोचता कि आज शालिनी को दिल की बात बताएगा पर जैसे शालिनी को देखता तो सब कुछ भूल कर शालिनी की खूबसूरती मे खो जाता

ऐसे एक दिन जयसिंघ गुलाब का फूल लेकर गाँव मे घूमने लगा

शालिनी शॉप ने कुछ समान लेने आई थी

शालिनी ने देखा कि जयसिंघ कभी शालिनी को तो कभी गुलाब के फूल को देख रहा है

.शालिनी ने सोचा कि अगर उसने कुछ नही किया तो जयसिंघ कभी दिल की बात नही कहेगा

शालिनी ने सोच लिया और जयसिंघ तरफ जाने लगी

शालिनी को अपने तरफ आता हुआ देख कर जयसिंघ के पसीने निकलने लगे

जयसिंघ पलट कर जाने लगा था की शालिनी ने उसे रोक दिया

शालिनी की आवाज़ सुनते ही जयसिंघ कापने लगा

शालिनी ने जयसिंघ को बहुत डांटा

इस तरह गाँव मे लड़की के पीछे फूल लेकर चक्कर लगाना इस पे शालिनी ने बहुत बड़ा भाषण दिया

शालिनी की बात सुनते जयसिंघ की जान निकल गयी

पहलवान का बेटा एक लड़की के सामने काप रहा था

ये प्यार के वजह से हो रहा था

शालिनी की बात सुनकर जयसिंघ वैसे जाने वाला था कि शालिनी ने रोक लिया

और जयसिंघ के हाथ का गुलाब का फूल ले लिया

फिर शालिनी ने इधर उधर देखा और किसी को पास ना पाकर जयसिंघ के गाल पे पुप्पी दे कर भागने लगी

जयसिंघ शालिनी के इस हरकत से शॉक्ड हो गया

पर जैसे शालिनी को हँसते हुए देखा तो जयसिंघ नाचने लगा

बीच सड़क पे जयसिंघ डॅन्स कर रहा था

शालिनी जयसिंघ को डॅन्स करता हुए देख कर शरमा कर अपने घर भाग गयी गाँव वाले तो जयसिंघ को पागल समझने लगे

हाँ जयसिंघ पागल हो गया था

जयसिंघ शालिनी के प्यार मे पागल हो गया था

.

अब तो जयसिंघ को सब कुछ मिल गया था

शालिनी के हाँ करते ही जयसिंघ को जैसे पंख लग गये थे और वो हवा मे उड़ने लगा

जयसिंघ का दिल शालिनी लेकर भाग गयी

उस रात जयसिंघ और शालिनी सो नही पाए

पर सुबह होते दोनो ऐसे तैयार हुए जैसे उनकी शादी हो

और गाँव के बाहर पेड़ के नीचे दोनो एक दूसरे के बहो मे बहे डाल कर बैठ कर प्यार भरी बाते करने लगे

शालिनी तो जयसिंघ को पा कर खुद को भूल गयी

जयसिंघ को तो अपना हमदर्द साथी मिल गया था

जयसिंघ शालिनी से उसके बारे मे पूछने लगा

.शालिनी की पढ़ाई उसकी समझदारी से खुश हुआ

गाँव के लोगो से शालिनी के बारे मे जो पता चला उस से तो जयसिंघ डबल खुश था

.शालिनी ने जब जयसिंघ से पूछा तो जयसिंघ की बात सुनकर शालिनी को शॉक लगा

नेहा नीता पूजा के बारे मे सुनकर शालिनी समझ गयी कि जयसिंघ कौन है

नेहा के पिताजी ने एक लड़के को भेजने की बात कही थी

वो कोई दोस्त का बेटा नही था वो अपने बेटे की बात कर रहे थे

शालिनी समझ गयी कि नेहा के पिताजी ने उसको उसका राजकुमार दिया है

जयसिंघ को ये नही पता है क़ि शालिनी और नेहा के पिताजी मिल चुके है

शालिनी ने भी चुप रहना ठीक समझा

पर उसको खुशी हुई कि उसने खुद अपना राजकुमार सेलेक्ट किया

नेहा के पिताजी ने इस तरह जयसिंघ से मिलन करवाया उस से शालिनी खुश थी

शालिनी जयसिंघ के सपने उसकी काबिलियत देख कर और ज़्यादा खुश हुई

जयसिंघ तो शालिनी के साथ 7 जनम के सपने देखने लगा

और रोज रात ने शालिनी के सपने देखने के लिए सोता था

जयसिंघ सिर्फ़ एक महीने के लिए आया था

पर यहाँ तो जयसिंघ को समय का ध्यान ही नही रहा

जयसिंघ को इतना पता था कि उसे शालिनी से प्यार करना है

मूवी देखना सिटी मे घूमना खेतो मे घंटो तक शालिनी की गोद मे सर रख लेटना

उसमे जयसिंघ को अच्छा लगने लगा

कंपनी और शहर3 की बोरिंग लाइफ मे शालिनी अपने प्यार के रंग भरने आई थी

शालिनी का साथ पा कर जयसिंघ खुद को कंप्लीट समझने लगा

लेकिन जैसे शालिनी ने शादी की बात कही जयसिंघ को झटका लगा

जयसिंघ को पिताजी की बाते याद आ गयी

शादी तुम मेरी पसंद की लड़की से करोगे

अब तो बहुत बड़ी मुश्किल हो गयी

अगर शालिनी पिताजी को पसंद नही आई तो

जयसिंघ शालिनी के बिना अब किसी और के बारे मे सोच नही सकता

अब क्या करे

जयसिंघ तो सोच मे पड़ गया

ऐसे मे माँ जयसिंघ की मदद कर सकती है

जयसिंघ जल्द से जल्द बात करना चाहता था पिताजी से

शालिनी के साथ रिश्ता आगे बढ़ाने से पहले पिताजी से बात करना चाहता था

जयसिंघ कल ही गाँव वापस जाने का सोच रहा था

शालिनी ने जयसिंघ को रोका नही क्यूँ कि उसे पता था कि अब जल्दी उसकी शादी होगी

वापस जाने की बात याद आते ही जयसिंघ शहर3 की कंपनी और कुमार के बारे मे सोचने लगा

बात सिर्फ़ 1 महीने की हुई थी पर यहाँ तो 2 महीने हो गये

अब जयसिंघ कुमार और पिताजी को कैसे हॅंडल करेगा

और यहाँ की कंपनी , इसको तो जैसे भूल ही गया था जयसिंघ

मेनेज़र से बात की तो पता चला कि काम ठीक चल रहा है

मेनेज़र को इसी लिए भेजा था कि जयसिंघ शालिनी के साथ बिज़ी रहेगा और वो काम करेगा

जयसिंघ शालिनी के कहते ही गाँव की तरफ निकल पड़ा

मेनेज़र ने फोन करके बता दिया था कि जयसिंघ क्या कर रहा है

ये सुनकर पिताजी बहुत खुश हो गये

पिताजी ने जैसा सोचा था वही हुआ

जयसिंघ और शालिनी को प्यार हो गया

पिताजी जो चाहते थे वही हुआ

पिताजी ने ये बात सबको बता दी कि जयसिंघ ने शालिनी को पसंद कर दिया

पिताजी ने फिर से एक प्लान बनाया

पिताजी ने बता दिया नेहा नीता को कि उनको क्या करना है

बस इंतज़ार था जयसिंघ के आने का

पिताजी- नेहा नीता तुम्हारा भैया आने वाला है अभी ठाकुर के घर फोन आया था

नेहा- भैया आ रहे है , फिर तो हमे तैयार रहना चाहिए

माजी- ये सब करना ज़रूरी है

पिताजी- सर्प्राइज़ देंगे जयसिंघ को

नीता- पिताजी मैं तैयार हूँ

नेहा - मैं भी

पिताजी- तो हम जयसिंघ को आते ही बताएँगे कि हम ने एक लड़की पसंद कर ली है उसके लिए

माजी- आप क्यूँ मेरे बेटे के पीछे पड़े रहते है , सीधे सीधे बता सकते हैना

पिताजी- उसको भी पता चलना चाहिए कि मैं उसके बारे मे कितना सोचता हूँ

नीता- पिताजी भैया की कार आ गयी है

जयसिंघ के आते ही नेहा उस के गले लग गयी

नेहा - भैया मैं बहुत खुश हूँ

जयसिंघ- क्या हुआ

नीता- भैया आपकी शादी होने वाली है

जयसिंघ- क्या ?

नेहा- हाँ भैया , पिताजी ने भाभी पसंद कर ली है

जयसिंघ पर तो जैसे न्यूक्लियर बॉम्ब गिर गया था

जयसिंघ के पैरो के नीचे से ज़मीन निकल गयी

जतसिंघ को चक्कर आ रहा था नेहा नीता की बात सुनकर

माजी- बेटा अच्छा हुआ तू आ गया , तेरे लिए लड़की देखी है हमने ,

जयसिंघ- माँ वो मैं

पिताजी- जयसिंघ तू सही समय पर आया है , , आज मैं एक लड़की का रिस्ता फाइनल करने जा रहा था , अब तू आ गया है तो तू भी साथ मे चल

ये क्या रिस्ता तो फाइनल भी ही गया

जयसिंघ की जान निकल गयी है ऐसी हालत हो गयी थी

जयसिंघ ने क्या सोचा था और क्या हो गया

यहाँ तो सब कुछ फिक्स कर दिया पिताजी ने

पिताजी- जयसिंघ तुम खुश नही हो

जयसिंघ- पिताजी मैं वो .......

पिताजी- मैं ने तुम्हे पूछा था कि तुम्हे कोई लड़की पसंद हो तो बता दो पर तुमने ना कहा तो मैं ने तेरे लिए लड़की ढूँढ ली

ये क्या , ग़लती तो जयसिंघ की है

जयसिंघ ने ही कहा था कि उसे कोई पसंद नही है और अब शालिनी की बात करेगा तो वो ग़लत साबित होगा

पिताजी ने तो पूछा भी था

जयसिंघ के सपने फिर से टूट गये

कितना कुछ सोचा था जयसिंघ ने , एक झटके मे सब कुछ बिखर गया

अब वो क्या बोलेगा शालिनी को

जयसिंघ किस मूह से पिताजी को शालिनी के बारे मे बताएगा , किस मूह से शालिनी से ये कहेगा कि शालिनी तुम मुझे भूल जाओ

माजी- क्या हुआ बेटा तू खुश नही है

जयसिंघ-माँ वो मैं

माजी- तू तो कुछ बोल ही मत , देख अब मुझे घर के काम.नही करने पड़ेंगे मेरे बेटे की बीवी सारे काम करेगी

ये भी तो जयसिंघ ने ही कहा था

पिताजी- जयसिंघ तैयार हो जाओ हम.लड़की के घर जा रहे है

जतसिंघ- पिताजी हम कल चलते है

जयसिंघ सोचने के लिए समय माँग रहा था पर पिताजी ने तो कुछ और सोच रखा था

पिताजी- बस पास मे जाना है , लड़की अच्छी है हाथ से निकल गयी तो ऐसी लड़की मिलना मुश्किल होगा

नेहा- मैं तो तैयार हो गयी हूँ , अरे भैया आओ तैयार नही हुए

नीता- मैं भी तैयार हूँ

पिताजी- क्या हुआ जयसिंघ किस सोच पे पड़ गये

जयसिंघ- पिताजी वो मैं

पिताजी- देखो जयसिंघ मैं ने कभी तुम्हे अपना फ़ैसला नही थोपा है , शादी तुम्हे करनी है , अगर लड़की पसंद नही आई तो मना कर देना ,

जयसिंघ- मैं मना कर सकता हूँ

पिताजी- शादी तुझे करनी है , तू जो चाहेगा वही होगा

जयसिंघ को तो पिताजी की बाते सुनते ही डॅन्स करने का दिल कर रहा था

मतलब शालिनी के साथ शादी करने का चान्स है

जयसिंघ-(पिताजी के लिए देख लूँगा , और ना कर दूँगा फिर शालिनी की बात करूँगा )

माजी- क्या हुआ बेटा

जयसिंघ- मैं बस अभी तैयार होता हूँ ,

और जयसिंघ ने पिताजी को एक बार गले लगाया और तैयार हो गया लड़की देखने के लिए

पिताजी- जयसिंघ

हटसिंघ- जी पिताजी

पिताजी- लड़की मेरे पुराने दोस्त की बेटी है सोच समझ कर फ़ैसला करना

पिताजी ने फिर झटका दिया

जयसिंघ-( मैं कोई ना कोई कमी निकाल दूँगा ) जी पिताजी पर लड़की का नाम क्या है

पिताजी- शालिनी है

शालिनी नाम सुनते ही जयसिंघ को शॉक लगा

जयसिंघ- शालिनी कौन शालिनी

पित्स्जी- जाकर देख लेना,तेरी कार मे चलते है

नेहा- मैं आगे बैठुगी

नीता- मैं भी

जयसिंघ- तुम दोनो आगे बैठो ,

पिताजी- ऐसे नही ठाकुर भी आ रहा है उसकी कार मे बैठ जाओ तुम सब

और जयसिंघ के लिए शालिनी का रिस्ता पक्का करने के लिए पिताजी जाने लगे

जिस फोन से मेनेज़र ने कहा कि जयसिंघ गाँव आ रहा है तभी ठाकुर ने बता दिया कि शालिनी के घर वालो को बता दो कि ठाकुर एक रिस्ता शालिनी के लिए लेकर आ रहे है

उधर शालिनी की फॅमिली तैयारी मे थी

और इधर जयसिंघ ने सोच लिया कि उस लड़की को ना कहेगा
 
फ्लॅशबॅक 628

जयसिंघ अपने माँ और पिताजी के साथ लड़की देखने जाने लगा

जयसिंघ ने सोचा था कि वो घर आकर पिताजी और माँ को शालिनी के बारे मे बताएगा

पर घर आते ही जयसिंघ को झटका लगा पिताजी ने जयसिंघ के सर पे बॉम्ब फोड़ दिया

लड़की देखने की बात से जयसिंघ तो पहले डर गया उसे लगा शालिनी के साथ जो उसने सपने देखे है वो भूल जाने होंगे

पर बाद मे पिताजी ने कहा कि शादी का फाइनल डिसिशन उसको लेना होगा ये सुनकर जयसिंघ के जान मे जान आ गयी

जयसिंघ को एक उम्मीद की किरण दिखी

पिताजी वाली शालिनी को ना कहेगा फिर अपने शालिनी की बात करेगा पिताजी से

जयसिंघ तो रिलॅक्स था

पिताजी ने फिर से जयसिंघ की झटका दिया

पिताजी- तुम ने रिंग ली हैना

माजी- हाँ ले ली है आज जयसिंघ की सगाई ही कर देंगे

जयसिंघ- रिंग किस लिए

पिताजी- आज तेरी सगाई करने का सोचा है हमने

जयसिंघ- पर आपने तो कहा कि शादी का फाइनल डिसिशन मेरा होगा

पिताजी- हाँ , पर यहाँ तो सब फिक्स कर दिया है , लड़की अच्छी है तुझे भी पसंद आएगी

जयसिंघ- पर मुझे सोचने के लिए टाइम तो दीजिए

पिताजी- अब क्या सोचना है , मैं ने पहले पूछा था कि तुझे कोई लड़की पसंद है क्या , तूने मना कर दिया तो मैं ने लड़की देख ली , सब तेरी मर्ज़ी से हो रहा है

.जयसिंघ- अगर अब मैं कहूँ कि मुझे एक लड़की पसंद है तो

पिताजी-मैं कहूँगा कि भूल जा उसे , और मैं जिस से कहूँगा उस से शादी कर ,तूने प्रोमिस किया था

जयसिंघ- माँ

माजी- तूने ही प्रॉमिस किया , तूने प्रॉमिस ना किया होता तो मैं तेरे पिताजी को मना कर देती

जयसिंघ- माँ तुम भी

माजी- हम तेरे माता पिता है तेरे भले का सोचेंगे हम

जयसिंघ- माँ मैं तुम्हारी बात मानता हूँ , तुम यही चाहती हो तो यही सही , मैं भूल जाउन्गा अपने प्यार को

पिताजी- कार चला , देर हो रही है , एक तो बोल के गया था कि एक महीने के लिए गया था और 2 महीने लगा दिया पता नही क्या कर रहा था

जयसिंघ- जी

और जयसिंघ सिटी मे आ गया

ये तो शालिनी के गाँव के पास वाली सिटी है

जयसिंघ- वैसे लड़की है कहाँ की

पिताजी- वहाँ पास मे गाँव है चल मैं बताता हूँ

और पिताजी जयसिंघ को लेकर शालिनी के गाँव मे आ गये

ये तो शालिनी का गाँव है

जयसिंघ- पिताजी कहीं आप ज़मींदार की बेटी की बात तो नही कर रहे है

पिताजी- वो , वो एक नंबर की बदतमीज़ लड़की है मैं दूसरी शालिनी की बात कर रहा हूँ

जयसनघ- गाँव मे दूसरी भी शालिनी है

पिताजी- हाँ , चल पहले ज़मींदार से मिल लेते है तब तक लड़कीवाले तैयारी कर लेंगे

जयसिंघ खुद की कोसने लगा खुद को गालियाँ देने लगा

जिस लड़की से प्यार करता है उसी के घर मे रुक कर दूसरी लड़की को देखने जाएगा जयसिंघ

जयसिंघ ऐसा उलझ गया था कि उसका दिमाग़ उसका साथ ही नही दे रहा था

अब जयसिंघ शालिनी का सामना कैसे करेगा

अगर शालिनी को लगा कि मैं उसके लिए अपने माता पिता को लेकर आया हूँ तो

जयसिंघ तो फस गया

जयसिंघ कार रुकने के बाद भी कार मे बैठा रहा

बाकी सब ज़मींदार के घर मे चले गये

शालिनी के पिताजी- आपने तो मुझे शॉक्ड कर दिया , आपने पहले क्यूँ नही बताया अपने बेटे के बारे मे

पिताजी- पहले बता देता तो शालिनी बेटी को उसके सपनो का राजकुमार कैसे मिलता

.शालिनी के पिताजी- आपलो शालिनी ने बताया है

पिताजी-हाँ , और शालिनी ने खुद जयसिंघ को पसंद किया है

शालिनी के पिताजी- शालिनी को पसंद है जयसिंघ

शालिनी की माँ- शालिनी ने बताया नही

माजी- ऐसी बाते लड़की माँ से नही अपनी सहेली को बताती है

शालिनी की भाभी- सासू माँ मुझे बताया था शालिनी ने जयसिंघ के बारे मे

शालिनी की माँ- तुझे पता था

माजी-कहा था ना कि सहेली को पता होता है

शालिनी की माँ- जाओ देखो शालिनी तैयार हुई कि नही

शालिनी के पिताजी- शालिनी को पसंद है तो हमे क्या प्राब्लम हो सकती है

पिताजी- जयसिंघ को भी पसंद है शालिनि

शालिनी का भाई-जयसिंघ कहाँ है

पिताजी-वो कार मे ही होगा , छोटू जाओ बुला कर लाओ अपने भैया को

छोटू ने जयसिंघ को बुला लिया

जयसिंघ बड़ी.मुश्किल से शालिनी के घर के अंदर आया

जयसिंघ शालिनी के घर की तैयारी देख कर शॉक्ड हो गया

पर उसके दिमाग़ मे कुछ और चल रहा था

जयसिंघ चुप चाप जाकर चेयर पे बैठ गया

शालिनी का भाई-जयसिंघ तुमने बताया नही

जयसिंघ- क्या ?

पिताजी - ये थोड़ा इन बातों मे शर्मिला है

.

.जयसिंघ-पिताजी किस बारे मे बात हो रही है और हम यहाँ क्या कर रहे है

पिताजी- अभी पता चल जाएगा , बुलाओ लड़की को

.

शालिनी की माँ शालिनी को बुलाने गयी

और शालिनी साड़ी पहन कर मेक अप करके अपने हाथो मे टी लेकर आ गयी

शालिनी को देखते ही जयसिंघ को एक और झटका लगा

शालिनी साड़ी मे ,और टी लेकर

जयसिंघ तो शालिनी को देखता ही रह गया

शालिनी ने सबको टी दी और चेयर पे जाकर बैठ गयी .

शालिनी के पिताजी- आपको कुछ पूछना हो तो पूछ सकते हो

.जयसिंघ ने पिताजी की तरफ देखा

पिताजी- मुझे तो शालिनी पसंद है , और जयसिंघ को भी पसंद है , बस नेहा नीता और छोटू की माँ को कुछ पूछना हो तो पूछ सकती है

ज़सयसिंघ को कुछ कुछ समझ मे आ रहा था

नेहा - मुझे भाभी पसंद है ,

नीता- नेहा से ज़्यादा मुझे पसंद है भाभी

माजी- हमे शालिनी के बारे मे इतना बताया गया है उस 2 महीने मे कि पूछने को कुछ रहा ही नही ,फिर भी एक दो सवाल पूछ लेती हू

जयसिंघ समझ गया कि क्या हो रहा है

पिताजी ने जयसिंघ के कान मे धीरे से बात की

पिताजी- तेरे बाप हूँ , तुझे क्या पसंद है मुझे पता है , मैं ने तुझे इसी लिए यहाँ भेजा था ताकि तू खुद शालिनी को पसंद करे ,

ये सुनते जयसिंघ को पिताजी के गले लग कर नाचने का दिल कर रहा था

पिताजी- ज़्यादा खुश मत हो , वरना रिंग फेक दूँगा

जयसिंघ के चेहरे पे स्माइल आ गयी

सबने जयसिंघ को ऐसा सर्प्राइज़्ड दिया जो जयसिंघ कभी सोच भी नही सकता था

जयसिंघ को तो पिताजी ने ऐसा गिफ्ट दिया जो कभी वो सोच भी नही सकता था

माजी- बेटी तुम्हे क्या क्या काम आते है

पिताजी- तुम्हे बताया है मैने

माजी- मैं सवाल पुच्छू कि नही

पिताजी- पूछ लो

माजी- तो शालिनी जवाब दो

शालिनी- सिर्फ़ गुस्सा करने के सिवा सब कुछ कर लेती हूँ

नेहा- स्मार्ट जवाब

शालिनी- तुम नेहा हो ,

नेहा- आपको कैसे पता

.शालिनी- मुझे तो बहुत कुछ पता है तुम्हारी दाल मे कुछ काला वाली बात भी पता

नेहा - पिताजी आपने ये भी बता दिया

शालिनी-मुझे तो तुम्हारी जैसी ननद चाहिए थी

नीता- और मैं

शालिनु- तुम्हारे साथ तो आम तोड़ूँगी मैं

नीता- पूरा बगीचा है हमारे यहाँ

मोंटू- मैं भी बुआ के साथ जाउगा

मोंटू की बात पे सब हँसने लगे

शालिनी- मैं तुम्हे बहुत सारे आम भेजुगी

छोटू- भाभी मेरा नाम भी बताया होगा पिताजी ने

शालिनी- नाम तो बताया है, पर तुम इतने प्यारे हो कि तुम्हे छोटू ही कहुगी

ये सुनते नेहा और नीता हँसने लगी

छोटू- माँ

माजी- सही तो कहा है तेरी भाभी ने तू बहुत प्यारा है जिस से तुझे छोटू कहने का दिल करता है

नेहा- मैं सवाल पुच्छू

पिताजी- पूछ लो

नेहा- आप जब भैया से मिली थी तो आपको पता था कि ये मेरे भाई है

.शालिनी- तुम बहुत लकी हो तुम्हे इनके जैसे पिताजी मिले है

नीता- ये कैसा जवाब हुआ

शालिनी- नही पता था , पर जैसे ही तुम्हारे बारे मे बताया तो समझ गयी कि तुम्हारे पिताजी अपने फ्रेंड के बेटे की नही अपने बेटे की बात कर रहे थे

जयसिंघ- तुम्हे पता चल गया था तो तुमने मुझे बताया क्यू नही

पिताजी- तेरी बीवी नही मेरी बहू है वो

शालिनी- बहू नही बेटी आप तो भूल ही गये

फिराजी- सॉरी

नेहा- हम तो भाभी कहेंगे

शालिनी- पूजा नही आई

शालिनी की माँ- तुम्हे तो बहुत कुछ पता है

शालिनी- अपने ससुराल के बारे मे सब पता होना चाहिए तभी उसको अपना घर बना सकते है

माजी- सही कहा ,

पिताजी- आप भी पूछ लो जो पूछना है जयसिंघ से

.शालिनी के पिताजी- मैं क्या पुच्छू , ठाकुरजी के होते हुए पूछ कर पाप नही करना है

पिताजी- पूछ लीजिए वरना आप बाद मे पछताएँगे

जयसिंघ- मैं ही बता देता हूँ ,

शालिनी के पिताजी- शालिनी को पसंद है इतना ही काफ़ी है

शालिनी भाभी - हाँ , और शालिनी ने बताया है कि जयसिंघ ने खुद कंपनी स्टार्ट की है शहर3 मे और बड़ा घर है

माजी- है पर हम गाँव मे रहते है

शालिनी की भाई - आज कल गाँव और शहर मे कुछ फ़र्क नही होता

पिताजी - होता है , गाँव मे प्यार मिलता है

शालिनी- चलिए खाना लग गया है

पिताजी- खाने से पहले हम ने जो गिफ्ट शालिनी के लिए लाए है वो देते है और साथ मे दोनो एक दूसरे को रिंग पहना देंगे ,

शालिनी के पिताजी- इतनी जल्दी

पिताजी- बस रिंग बदल देंगे , और सगाई की जगह डाइरेक्ट शादी क्यूँ जयसिंघ

जयसिंघ- हाँ मुझे कंपनी को भी देखना होता है , पहले सगाई फिर शादी इस से अच्छा है आज फॉरमॅलिटी के लिए रिंग एक्सचेंज करते है और सगाई की जगह डाइरेक्ट शादी

शालिनी के पिताजी- एक मिनिट मुझे बात करनी पड़ेगी क्यूँ कि मेरे सभी बेटे यहाँ नही है

शालिनी की माँ- कर दीजिए , रिंग ही तो बदलने की बात की है

शालिनी की भाभी- पिताजी कर दीजिए , शालिनी भी यही चाहती है , बस रिंग बदलना है ताकि ये रिस्ता जुड़ जाए और सगाई की जगह डाइरेक्ट शादी कर देंगे ,,

शालिनी का भाई- पिताजी.मैं हूँ ना यहाँ पर , उनकी तरफ से गिफ्ट लिया है ऐसा कन्सिडर कर लेंगे , दोनो एक दूसरे को पसंद करते है जिस से जल्दी शादी करना अच्छा रहेगा दोनो के लिए

शालिनी की माँ- सगाई की जगह डाइरेक्ट शादी अच्छा है , वरना अगर शालिनी ने शादी से मना किया तो

शालिनी के पिताजी- तुम कुछ भी सोचती हो

शालिनी की माँ- कितनी मुश्किल से सब फिक्स हुआ है , इस बार सब मेरी मर्ज़ी से होगा

शालिनी के पिताजी- जैसा तुम ठीक समझो

पिताजी- हमारी बड़ी बेटी और दामाद नही है फिर भी कर रहे है

शालिनी के पिताजी- ठीक है रिंग लेकर आओ .

पिताजी- रिंग हम अपने साथ लाए है ,

शालिनी की.माँ ने अपनी रिंग ही देने की ज़िद की , घर मे रखी हुई रिंग शालिनी की माँ लेकर आ गयी

और शालिनी जयसिंघ ने रिंग बदल कर अपने नये रिस्ते की शुरुआत कर दी

भाभी मिलते ही नेहा और नीता खुश हो गयी

सब खुश थे

जयसिंघ और जयसिंघ की फॅमिली

शालिनी और शालिनी की फॅमिली

फिर दोनो फॅमिली ने साथ मे खाना खा लिया

और आज शालिनी के घर पे रुक गये सब

फिर नेक्स्ट दिन दोनो फॅमिली मे शादी की डेट फिक्स की

शादी 1 महीने बाद होगी

जैसे पूजा की शादी हुई थी वैसे

इसके लिए दोनो फॅमिली तैयार हो गयी

शालिनी और जयसिंघ तो सबसे ज़्यादा खुश थे

पिताजी और माँ अपने बेटे को खुश देख कर खुश थे
 
फ्लॅशबॅक 869

जयसिंघ को जो चाहिए था वो पिताजी ने उसे दे दिया

ये तो पिताजी का प्लान था

जयसिंघ और शालिनी को मिलाने का

जयसिंघ अपने पिताजी को शुक्रिया बोलते हुए थक ही नही रहा था

शालिनी को पा कर तो जयसिंघ को जन्नत मिल गयी थी

पर शालिनी और जयसिंघ दोनो पिताजी से थोड़े नाराज़ थे

इतनी बड़ी बात छुपाई इस लिए

पर दोनो खुश थे कि पिताजी ने उनको मिला दिया है

जयसिंघ- पिताजी आपने मुझे क्यूँ नही बताया

पिताजी- पहले बताता तो तू शालिनी से इतना प्यार नही करता जितना अब करने लगा है , तू तेरी पसंद की लड़की से शादी करेगा इस बात मे जो जादू होता है वो दूसरी बातों मे कहाँ

जयसिंघ- पर आपने तो मुझे थोड़ा भी शक नही होने दिया

पिताजी- तेरा बाप हूँ , और ये प्यार का जादू था जिस से तू कुछ और सोच ही नही पाया

जयसिंघ- मैं तो कितना डर गया था जब आपने किसी और लड़की से शादी करने की बात कही थी

पिताजी- पता है मुझे , तू कुछ ज़्यादा ही डर गया था ,

जयसिंघ- आपने तो मेरी जान निकाल दी थी

पिताजी- तेरी जान ना निकले इस लिए तो कहा कि फ़ैसला तेरा होगा कि शादी करनी है कि नही

जयसिंघ- करनी है , और जल्दी करनी है , जितनी जल्दी ही सके उतनी जल्दी , अब तो शालिनी के बिना एक दिन भी नही रह पाउन्गा

पिताजी- जल्दी क्यूँ

जयसिंघ- अब तो मैं शालिनी के बिना रह नही सकता, जब तक शादी नही होगी तब तक शालिनी के बिना रहना तो सोच भी नही सकता

पिताजी- पूजा का क्या हाल हुआ होगा अब समझ मे आया

जयसिंघ- जी पिताजी

पिताजी- कभी कभी ऐसे फ़ैसले लेने पड़ते है जिस से सबका भला हो

जयसिंघ- जी पिताजी , तभी तो मैं ने पूजा की शादी इतनी अच्छी तरह से कर दी

पिताजी- तेरी शादी भी डूम धड़ाके के साथ होगी

जयसिंघ- मुझे तो बस शालिनी चाहिए

पिताजी-शालिनी का साथ कभी मत छोड़ना , वो तेरी बीवी नही मेरी बेटी है

जयसिंघ- जी पिताजी ,

पिताजी- उसकी आँखो से आँसू निकले तो इसकी सज़ा तुझे दूँगा मैं

जयसिंघ- शालिनी मेरी जान है , उसे कुछ नही होने दूँगा

शालिनी- कौन किस की जान है

पिताजी- शालिनी तुम , आओ , हम तुम्हारी बात कर रहे थे

शालिनी-आप तो मुझसे बात ही मत कीजिए

पिताजी- क्या हुआ मेरी बेटी को , मुझपे गुस्सा आ रहा है

शालिनी- आपने मुझे झूठ क्यूँ कहा

पिताजी- झूठ कितना अच्छा था ,तुम्हे जयसिंघ मिल गया

शालिनी- आपने पहले बता दिया होता तो मैं

पिताजी- पहले बता दिया होता तो तुम जयसिंघ से आज जैसा प्यार नही करती ,

शालिनी- ये आपने सही कहा

पिताजी- तो तुम्हारे सपनो के राजकुमार जैसा है जयसिंघ

शालिनी- उस से भी अच्छा

पिताजी- जयसिंघ शालिनी तुम्हारे सपनो की रानी जैसी है

जयसिंघ-देवी है शालिनी

शालिनी-मैं शालिनी हूँ

पिताजी- सही कहा

शालिनी- और मैं आपको पिताजी ही कहुगी

पिताजी- तुम मेरी बेटी हो

जयसिंघ- तो ,

पिताजी- शालिनी पता है ये तो तुम्हे भूलने का सोच रहा था , जब इसे कहा कि मैं इसकी शादी किसी और लड़की से कर दूँगा

शालिनी- ऐसा कहा था ,

जयसिंघ- सब इतना अचानक हुआ कि मुझे सोचने भी नही दिया पिताजी ने

माजी- ये इनकी ग़लती है , बिना वजह मेरे बेटे को डरा दिया था

जयसिंघ- देखा माँ क्या कह रही है

पिताजी- वो तो तेरी तरफ से ही बोलेगी

शालिनी- पिताजी अब मैं जल्दी घर आउगि तब आपकी तरफ से मैं बोलुगी

पिताजी- फिर तो हम इन दोनो को बहुत परेशान करेंगे

शालिनी- जी

माजी- मैं तेरी होने वाली सास हूँ और तू ऐसा बोल रही है

शालिनी- आप सास नही मेरी माँ है ,

पिताजी- अब बोलो

माजी- अब क्या बोलू , तुम और तुम्हारी बेटियो ने मुझे तंग करना ही सीखा है

पिताजी- मेटी बेटियो के बारे मे कुछ मत कहना

शालिनी- ये नेहा नीता कहाँ है

माजी- उनसे दूर रहना बड़ी शैतान है वो

पिताजी- उनको कुछ मत कहो

माजी- शालिनी वो तुम्हे भी तंग करेगी

शालिनी - छोटी बहन बड़ी बहन को तंग तो करती है

पिताजी- ये है मेरी बहू

माजी- कहाँ से ढूँढ निकाला इसको

पिताजी- कितने साल लगे शालिनी को ढूँढने मे

जयसिंघ- मतलब आप काफ़ी साल से मेरे लिए लड़की ढूँढ रहे थे

माजी- हाँ , पर तुझे बताया नही

पिताजी- तेरे लिए सर्प्राइज़ था

जयसिंघ- मुझे ये गिफ्ट बहुत पसंद आया

शालिनी- पर ये नेहा कहाँ है

माजी- वो तो शैतान की नानी है कुछ ना कुछ कर रही होगी

नेहा - मैं ने सुन लिया

माजी- अब तो गयी मैं काम से

नीता- कौन क्या बोल रहा था हमारे बारे मे

माजी- मैं ने कुछ नही कहा ,

शालिनी- आप तो डर रही है

माजी- तुम्हे भी पता चल जाएगा कि नेहा नीता है क्या चीज़

नेहा- ऐसा कुछ नही है भाभी , माँ तो ऐसे ही बोल रही है

नीता- हम आपके साथ प्यार से रहेंगे

शालिनी - तुम दोनो के बारे मे बहुत सुना है

नेहा - क्या सुना है हमारी भाभी ने

शालिनी- नेहा हँसी का दूसरा नाम है

नीता- और मैं

शालिनी- नीता पिताजी की जान है

नेहा- और मैं

शालिनी- नेहा नीता घर की खुशी है

नीता- और मैं

शालिनी- नेहा नीता के साथ बचपन फिर से जी सकते है

नेहा - और

शालिनी- नेहा नीता इतनी प्यारी है कि उसे सिर्फ़ प्यार किया जा सकता है

नेहा- भैया भाभी ने तो शादी से पहले हमारा दिल जीत लिया

पिताजी- मैं ने कहा था कि तुम्हारे लिए इतनी अच्छी भाभी लाउन्गा कि तुम अपनी भाभी से मुझसे ज़्यादा प्यार करोगी

नीता- भैया आपने पहले क्यूँ शादी नही की

जयसिंघ- पिताजी ने पहले नही ढूँढा ना शालिनी को

नेहा- भाभी की शादी पहले हो जाती तो पूजा दीदी भी इनके साथ मस्ती करती

शालिनी- नेहा तुम तो अच्छी हो , दूसरा के बारे मे भी सोच लिया

नीता- पूजा दीदी तो भैया की जान लेगी , उनको अभी तक पता नही है

शालिनी- ऐसा कुछ नही होगा , हम मिलके पूजा को समझा देंगे

नेहा- पिताजी आज मैं भाभी के साथ सो जाउ

पिताजी- अभी नही अपने घर आएगी तब जो करना है करना

शालिनी- कोई बात नही , तुम दोनो मेरे साथ सो जाओ

पिताजी- तुम्हारे घर वाले

शालिनी- वो तो खुश होंगे कि इतनी प्यारी ननंद मिली है मुझे

नेहा- भाभी आप बहुत अच्छी है

नीता- पर हम सोएंगे नही आज

शालिनी- तो रात भर बाते करनी है

माजी- तुम दोनो अभी से शुरू हुई , अभी तो मिली नही कि शुरू हो गयी

नेहा- माँ अब भाभी के साथ भैया शादी करेंगे पर वो रहेगी हमारे साथ

नीता- भैया को तो हाल मे सुलाएँगे

नीहा नीता की बात पे शालिनी हँसने लगी

जयसिंघ- तुम्हारी भाभी है जैसा तुम चाहोगी वैसा ही होगा

नेहा- चले भाभी , हमे आपके बारे मे सब कुछ जानना है

नीता- आप भी हमारी तरह मस्ती करती है कि नही ये देखना है

पिताजी- तुमसे भी ज़्यादा मस्ती करती है शालिनी

नेगा- फिर तो हमारी अच्छी बनेगी

छोटू- और मैं

शालिनी- छोटू , छोटू तो अपनी माँ जैसा मेरा ख़याल रखेगा

छोटू- जी भाभी

पिताजी- अपनी भाभी का अच्छे से ध्यान रखना

छोटू- भाभी को अपना गाँव मैं दिखाउन्गा

नेहा- खेत तो मैं दिखाउन्गी

शालिनी- मुझे आम बहुत पसंद है

नीता- फिर तो हमारी अच्छी बनेगी

पिताजी- जाओ अब आराम करो कल हमे वापस जाना है

नेहा- कल ही

पिताजी- कल जाएँगे तभी तो तुम्हारी भाभी को अपने घर लाने की तैयारी करेंगे

नेहा- फिर तो आज भाभी को सोने नही देंगे

माजी- शालिनी इनकी बातों मे मत आना , ज़्यादा तंग किया तो मुझे बताना

शालिनी- जी

और नेहा नीता शालिनी के साथ चली गयी

नेहा नीता को अपनी भाभी पसंद आई

उनके जैसी थी शालिनी

शालिनी को भी अपनी ननद अच्छी लगी , नेहा नीता के बारे मे जैसा सुना था उसे ज़्यादा पाया

नेहा नीता खुशी का दूसरा नाम थी

छोटू को भी अपनी भाभी पसंद आई

जयसिंघ खुश था

उसको जो चाहिए वो मिला

शालिनी मिली

पूरी फॅमिली खुश है

जयसिंघ तो अब अपने फ्यूचर के बारे मे सोचने लगा

शालिनी के साथ शहर3 मे नयी ज़िंदगी शुरू करने का सोचने लगा

उस रात कोई नयी सोया

सब बाते करने लगे

शालिनी ने तो नेहा नीता को अपने किस्से बता कर अपना दीवाना बना दिया

दूसरे दिन शादी की डेट फिक्स हो गयी

जयसिंघ और शालिनी के प्यार को नाम मिल रहा था

पर

पूजा का क्या

उसे जब पता चलेगा तो वो पूरा घर सर पे उठा लेगी

सब उसके साथ ऐसा कैसे कर सकते है

बिना बताए बिना भाभी से मिलाए शादी फिक्स कर दी

अब तो फिर से शेरनी की दहाड़ सुननी पड़ेगी पिताजी को

पिताजी ने सारी बात कर ली शालिनी के पिताजी से

शादी शालिनी के गाँव में होगी

आज से 1 महीने बाद

सब कुछ तय होते दोनो फॅमिली तैयारी मे लग गयी

नेहा नीता तो कुछ दिन भाभी के साथ रुकना चाहती थी

पर माँ ने इजाज़त नही दी

सब वापस गाँव आ गये

.सबको जयसिंघ के शादी की खुशख़बरी सुनाने

पूजा को भी बताया गया जयसिंघ के शादी तय हो गयी है
 
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