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मैं रंडी बनना चाहती हूं। complete

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सुनीता- मौसी, मैं अपने मर्द के साथ सोना चाहती हूँ।

मौसी- नहीं, तुम्हें मेरे साथ सोना होगा ! यह बात राजू (मैं) के साथ तय है।

सुनीता- अच्छा, मुझे कोई ऐतराज नहीं, और वो कहाँ सोएँगे?

मौसी- उसकी फिकर मत कर ! वो भी तेरे जैसे मजे करने जाहिदा और नीला के साथ सोने गया है।

सुनीता- वाह, मेरे नाम पर बड़े मजे कर रहे हैं? चलो मौसी, अब कोठे बन्द हो रहे हैं।

मौसी- हाँ चलो।

दोनों कमरे में जाती हैं, मौसी पूरी नंगी हो जाती है।

सुनीता- मौसी यह क्या? ऐसी सोएगी? और मैं?

मौसी- देख, तेरी और मेरी उम्र में फर्क नहीं है तो यहाँ तू मेरी सहेली है और आज दोनों एक दूसरे का आनन्द लेंगे।

मौसी ने इतना कहकर सुनीता को भी पूरा नंगा किया और उसके गेंदें मसलकर चूसने लगी और झट से सुनीता के भोंसड़े में उंगली डाल कर उकसाने लगी। इस पर सुनीता बेकाबू हो गई।

सुनीता- मौसी क्या नाम है तेरा? तो उस नाम से बुलाऊँ?

मौसी- कल्पना ! और मैं एम पी से हूँ ! मेरे मर्द ने धोखा दिया तो मैं सारा माल बटोरकर यहाँ चाली आई। मैं यहाँ एक होटल चालू करना चाहती थी तो एक तेरे जैसी रण्डी ने कहा कि क्या लोगों को सिर्फ खिलाओगी? इसमें कोई कमाई नहीं ! और उसने मुझसे यह कोठा चालू करवाया।

शुरुआत में जबरन लाई हुई लड़कियों से धंधा करवाया, फिर एक दिन तीन औरतें अपने मर्द से पीछा छुड़ाकर भागी, मेरे पास आई और कहा कि हमें कैसा भी काम दो, हम करेंगी पर वापस नहीं जाना !

तब से लेकर आज तक मेरे पास उनके और तेरे जैसी औरतें आती रहती हैं.. चल अब मुझे तेरे साथ मजे लेने दे।

सुनीता- हाँ मेरी राण्ड कल्पना ! बस आज मैं और सिर्फ तुम ! मेरे भोंसड़े को अपनी जीभ से चोदो ! और मेरे गेंदों को और चुचूकों को मसल डालो।

मौसी- साली, इतने साल में तूने ही मुझे रण्डी कहने की हिम्मत की है, आज मैं तुझे बराबर चोदूँगी।

थोड़ी देर बाद दोनों 69 की अवस्था में आ गई और एक दूसरे का भोंसड़ा चाटने लगी। दोनों चरम सीमा पर पहुँच गई। तभी मौसी ने बेड के नीचे से रबर का इम्पोर्टेड लौड़ा निकाला और उसको थोडा चाट कर आहिस्ता से सुनीता के भोंसड़े में घुसा दिया।

सुनीता- मौसी डाल दो, अक्खा लौड़ा अन्दर डाल दो, बहुत भूख लगी है।

थोड़ी ही देर में सुनीता झर गई और फिर मौसी की गेंदों को मसलने के साथ चुचूक चाटने लगी। अब बारी मौसी की थी, मौसी ने अपने हाथों से लौड़ा घुसेड़ दिया और थोड़ी देर बाद शांत हो गई। दोनों सुबह उठी और कपड़े पहन कर नहा धोकर धंधे के लिए तैयार होने में जुट गई।

मौसी- सीमा, मैंने अपने एक ख़ास कस्टमर को तेरे लिए सोच रखा है आज दिन भर के लिए ! तू और मैं उससे चुदावायेंगे ! सारा कामकाज राजू और जाहिदा को सौंप देंगे, वो लोग देख लेंगे। वैसे जाहिदा और राजू की अच्छी जमती है, देख आज एक मस्त मालदार कस्टमर आने वाला है, आज तू, मैं बताती हूँ, वो कपड़े पहन ! मेरे पास दो मुलायम कपड़े की सेक्सी टाईट हाल्फ पैंट और एक बिना कंधे का टीशर्ट है और एक माइक्रो-मिनी स्कर्ट है, बोल तू क्या पहनेगी?

सुनीता- कल्पना, मैं तो माइक्रो मिनी स्कर्ट पहनूँगी, उसमें मेरी जांघें और ककड़ी जैसी टाँगें खूब खिलेंगी।
 
मौसी- हाँ, मैं पैंट और टी-शर्ट पहन लूँगी।

सुनीता- कल्पना ! नहीं मौसी ! कितने पैसे हम दोनों को देगा वो?

मौसी- तू मुझे कल्पना ही बोल ! और हमें 10000 रु. मिलेंगे, आधे तेरे आधे मेरे ! यह मेरा ख़ास कस्टमर है, सारी कोठेवालियाँ अपने दलालों के जरिये उनके पास जाने की सोचती हैं पर वो सिर्फ मेरे पास आता है।

सुनीता- उससे पहले कोई छोटा-मोटा कस्टमर ले लूँ क्या?

मौसी- नहीं ! एकदम साफ़ सुथरी और सेक्सी रह ! आते ही उसे गेंद दबाने की बहुत आदत है ! तो गेंद एकदम ब्रेज़ियर में टाईट बाँध के रख और मेरा इशारा मिलते ही उसके पास जाकर उसे चूम लियो !

इतना कहकर दोनों तैयार होने में लग जाती हैं। मौसी ने बहुत दिनों बाद पैंट और टी-शर्ट पहनी थी और सुनीता मिनी स्कर्ट पहन कर बाहर आई तो बाकी रण्डियों नीला, जूली, सुशी और खुद मौसी ने ताली बजा कर दाद दी।

नीला- मौसी, साला यह जीजू तेरे कोठे की रौनक बढ़ा कर जाएगा ! ऐसा माल लाया है, साली राण्ड ! क्या लगती है ! देख न उसकी छाती तो मानो दो बम्ब लिए बैठी है ! और जांघें तो एकदम मस्त !

मौसी- बस अब तुम अपने कस्टमर सम्भालो ! मैं और सीमा एक कस्टमर की गोद में रहने वाली हैं पूरे दिन..

जूली- आज कस्टमर के दोनों हाथों में और मुँह में लड्डू है ! एक मौसी और एक सीमा ! साला हमारे हाथ नहीं आता !

मौसी- चलो अपने अपने धंधे पर ! अभी वो आ जाएगा !
 
मौसी- बस अब तुम अपने कस्टमर सम्भालो ! मैं और सीमा एक कस्टमर की गोद में रहने वाली हैं पूरे दिन..

जूली- आज कस्टमर के दोनों हाथों में और मुँह में लड्डू है ! एक मौसी और एक सीमा ! साला हमारे हाथ नहीं आता !

मौसी- चलो अपने अपने धंधे पर ! अभी वो आ जाएगा !

इतने में एक छरहरे बदन वाला आदमी आता है, उसकी बाहें तनी हुई और छाती विशाल थी।

उसके आते ही मौसी- आओ राजा बाबू ! आज आपके लिए एक से भले दो रण्डियाँ तैयार हैं.. एक मैं और यह मेरी नई सहेली सीमा। उसको कुछ दिन के लिए रण्डियों जैसी जिंदगी जीनी है। है न बड़ी अजीब बात?

राजा बाबू- क्या नाम है तुम्हारा?

सुनीता- जी सीमा।

इतने में मौसी ने आँख मार कर इशारा किया तो सुनीता उसकी गोद में जा बैठी और झट से एक जोरदार किस दे दी और लौड़े को छू लिया।

राजा बाबू- मौसी, आज बड़ा गजब ढाने वाली है? साली मस्त है ! बिल्कुल गर्म कर दिया। चलो कमरे में चलते हैं ए सी चालू कर दो और 555 सिगरेट का पैकिट ले लो।

सुनीता- चलो मेरे राजा, सब तैयार है बस तुम्हारी कमी थी।

राजा बाबू ने सुनीता और मौसी के कमर पर हाथ डाल दिया दोनों को लेकर कमरे में पहुँच गया।

मौसी- राजा बाबू, इस साली को अपने लौड़े का पूरा पूरा मज़ा चखाओ ! बहुत आशिक है अलग अलग तरह के लौड़ों की। दिन में दस लौड़े लेने के लिए तैयार है और दो दिन दिल्ली में ही है मेरे पास।

राजा बाबू- अरे मेरी रानी, मेरे एक का लौड़ा ही काफी है तुम्हारे लिए। आओ, तुम्हारी गेंदें तो बड़ी बेकरार हैं हमारे हाथों में आने के लिए। मौसी तू साली बड़ी चालू चीज है, तेरे पास ऐसी बड़ी गेंदों वाली रण्डियाँ कैसे आती हैं? इस पूरे मोहल्ले में तेरे जैसी रण्डियाँ ही नहीं हैं। किसी की गाण्ड छोटी तो किसी की गेंद न के बराबर। इसकी तो गाण्ड भी बड़ी मस्त है।

इतना कह कर राजा ने सुनीता की चूचियाँ खुली देखने के लिए उसको पूरा नंगा होने को कहा।

सुनीता- अरे, यह काम तुम ही करो न?

राजा- ठीक है।

और उसने उसके मिनी स्कर्ट में हाथ डाल दिया और भोंसड़े को थपथपाया और एक ही झटके में सुनीता को ब्रेजियर और पैंटी में खड़ा किया और पीछे से मुआइना किया।

राजा- मौसी, तू भी नंगी हो जा ! क्या राह देखती है? आज एक साथ दो गाण्ड, दो भोंसड़े और 4 गेंदों का और दो मुँह का मज़ा लेना है।

मौसी- क्यों तुम मुझे नंगी नहीं करोगे? यह तो तुम्हारा काम और हक़ है.. मैंने भी 3 दिन से एक भी लौड़ा नहीं लिया, तुम्हारी राह देख रही थी।

राजा ने दोनों को नंगी कर दिया और दोनों के बगल में हाथ डालकर दोनों की चूचियों से खेलने लगा। दोनों की निप्पलें उसके स्पर्श से एकदम अंगूर के दाने जैसे कड़क हो गई। राजा बाबू को यह समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ और किसके साथ शुरू करूँ।

सुनीता- राजा बाबू, क्या नया माल नहीं पहले चखोगे? देखो, यह भोसड़ा कैसे प्यासा है?

इतना कहकर सुनीता ने अपनी एक टांग राजा की जांघ पर रख दी और अपने हाथों से भोसड़ा साफ़ करके राजा बाबू के मुँह के पास ले गई।

राजा उसको फटाफट चाटने लगा। इधर मौसी ने राजा के पूरे कपड़े निकाल दिए, उसका लौड़ा मुँह में ले लिया और चाट चाट कर कड़क लोहे के डंडे जैसा कर दिया।
 
मौसी- उ हु उह ! राजा, क्या स्वादिष्ट लौड़ा लग रहा है ! बहुत दिन बाद आया मेरे मुँह में ! राजा बाबू अब सुनीता के भोसड़े को छोड़ो और उसे भी तुम्हारा लौड़ा चूसने दो।

थोड़ी देर बाद सुनीता ने लौड़ा चाट लिया, अपनी गेंदें राजा के मुँह में दे दी और राजा को पलंग पर लेटने कहा। इतना तेज ए सी चलने के बावजूद तीनों के तीन पसीने से लथपथ हो रहे थे और पूरी तरह सेक्स के महासागर में तैर रहे थे..

राजा अंगूर की खेती के मज़े लेने लगा और मौसी ने नीचे होकर कभी सुनीता के भोसड़े और कभी राजा के लौड़े को मुँह में लिया.. अब सुनीता गरम हो गई।

सुनीता- राजा बाबू, भड़वे साले ! चूस मेरे गोलों को और कल्पना साली रांड आज छोड़ना मत इस भोसड़े को, जब तक राजा बाबू मेरा रस नहीं चूस लेते तू मुँह से चोद डाल !

राजा- क्या मौसी का नाम कल्पना है? मुझे क्यों नहीं बताया?

मौसी- क्या रे भड़वे? मेरे से शादी करने वाला था क्या? मुझे रण्डी बने रहना ठीक लगता है। साला रोज मर्द के लिए खाना पकाओ और मर्द के साथ सोकर बच्चे पैदा करो, बड़े करो और फिर अपने भोसड़े की भूख मिटाने के लिए नए लौड़े नहीं ले सकती। यहाँ तो हर मर्द मेरे भोसड़े का प्यासा है। मैंने अगर होटल का धंधा किया होता तो इतना नहीं कमाती और सीमा, नीला, सुशी, जूली जैसी रण्डियों को सहारा नहीं मिलता।

राजा- मौसी, साला सारा मज़ा किर-किर कर दिया। कोई सेक्सी गाना लगाओ और तुम दोनों नाचो।

गाना बजने लगता है और सुनीता और मौसी ने सेक्सी लटके झटके लेने शुरू किये।

थोड़ी देर बाद राजा भी नंगा हो नाचने लगा। नाचते वक्त मौसी और सुनीता की गेंदें और राजा के लौड़े को मचला उठती थी।मौसी ने नाच-नाच में राजा को इशारा किया और उसने सुनीता को घोड़ी बनने कहा और पीछे से कुत्ते के जैसे चोदने लगा।

सुनीता- राजा बाबू चोदो ! मुझे बहुत अच्छा लगता है। बहुत दिनों बाद कोई आशिक लौड़ा मिला।

राजा ने सुनीता की दोनों गेंदों को पकड़ते हुए चोदना चालू किया। सुनीता सिसकने लगी और चाहती थी कि राजा उसकी चूत में अपना पूरा पानी छोड़ दे।

पर मौसी ने इशारा किया और कहा- क्या राजा बाबू ! हमारी गाण्ड मारने में आपको मज़ा आता है और इसकी गाण्ड तो अछूती है !

सुनीता- कल्पना, नहीं ! मैं गाण्ड नहीं मरवाऊँगी ! मैंने यह कभी नहीं किया।

मौसी- चुप साली राण्ड ! राजा बाबू ने सबके लिए पैसे गिने हैं गाण्ड तो तुझे मरवानी ही होगी। तेरे राजू ने यहाँ सबकी मतलब जाहिदा, सुशी, नीला रानी की गाण्ड मारी है, सिर्फ एक जूली बची है इसलिए कि वो पान वाले के यहाँ खड़ा रहता है और इनकी दलाली करता है और बदले में उनको मुफ्त में चोदता है। यहाँ तो राजा बाबू पैसे दे रहे हैं।

राजा बाबू ! राह मत देखो और इसकी गाण्ड में और अपने लौड़े पर क्रीम लगाओ और चोद डालो साली राण्ड की गाण्ड को। बहुत हिलाती है और कस्टमरो को बेताब करती है..

राजा ने लौड़े पे क्रीम लगाई और दो उंगली से सुनीता की गाण्ड में क्रीम लगा दी और धीरे से डाल दिया अपना लोहे जैसा लौड़ा।

सुनीता- मर गई रे ! राजा क्या किया तूने?
 
मौसी ने इशारा किया और कहा- क्या राजा बाबू ! हमारी गाण्ड मारने में आपको मज़ा आता है और इसकी गाण्ड तो अछूती है !

सुनीता- कल्पना, नहीं ! मैं गाण्ड नहीं मरवाऊँगी ! मैंने यह कभी नहीं किया।

मौसी- चुप साली राण्ड ! राजा बाबू ने सबके लिए पैसे गिने हैं गाण्ड तो तुझे मरवानी ही होगी। तेरे राजू ने यहाँ सबकी मतलब जाहिदा, सुशी, नीला रानी की गाण्ड मारी है, सिर्फ एक जूली बची है इसलिए कि वो पान वाले के यहाँ खड़ा रहता है और इनकी दलाली करता है और बदले में उनको मुफ्त में चोदता है। यहाँ तो राजा बाबू पैसे दे रहे हैं।

राजा बाबू ! राह मत देखो और इसकी गाण्ड में और अपने लौड़े पर क्रीम लगाओ और चोद डालो साली राण्ड की गाण्ड को। बहुत हिलाती है और कस्टमरो को बेताब करती है..

राजा ने लौड़े पे क्रीम लगाई और दो उंगली से सुनीता की गाण्ड में क्रीम लगा दी और धीरे से डाल दिया अपना लोहे जैसा लौड़ा।

सुनीता- मर गई रे ! राजा क्या किया तूने? राजा तूने बजा दिया गाण्ड का बाजा।

मौसी- नहीं रे ! अभी तो घुसा है ! बजाना तो बाकी है..

इतना कहकर मौसी सुनीता के मुँह पास अपना भोसड़ा ले गई और उसका सर पकड़कर अपने भोसड़े में घुसेड़ दिया। सुनीता ने भोसड़ा चाटना चालू किया। अब तक चीख रही सुनीता अब कुछ शांत हुई और बड़े सकून से गाण्ड मरवाने लगी।

सुनीता- राजा, अब ठीक है ! धीरे धीरे गाण्ड फाड़ डाल और आसानी से मरवाने लायक बना दे।

मौसी- हाँ, अब साली पूरी रांड बनी ! देख क्या चहरे पे रण्डियों जैसी रौनक छाई है।

राजा बाबू- गाण्ड मरवाना चालू किया तब जाकर सकून मिला। औरत की गाण्ड को लोग घूर घूर कर क्यों देखते है? क्योंकि उनको गाण्ड मारनी होती है। कोई भी मर्द औरत को आगे से देख लेने के बाद उसकी गाण्ड मुड़ मुड़ कर जरूर देखेगा। हाँ मौसी ! नहीं तो बेचैनी रहती है, लगता है जैसे कुछ काम अधूरा रह गया हो.. और इस सीमा की गाण्ड ने तो बड़ा हिला कर रख दिया था !

सुनीता- बातें कम करो और चोदते रहो इस गाण्ड को। उसको भी पता चल गया है लौड़े का मज़ा।

मौसी- राजा बाबू, हमारी भी गाण्ड में खुजली हो रही है, इसके बाद मेरी गाण्ड भी जम कर मारना ! आज का दिन आपके नाम।

राजा बाबू- हाँ, तुम भी घोड़ी बन जाओ, दोनों की गाण्ड में बारी बारी डाल दूँगा।

बहुत देर तक गाण्ड मरवाई जा रही थी और अब राजा भी चाहता था कि काम पूरा कर दे। उसने सुनीता को खड़े करके उसकी एक टांग मेज पर फैला दी और एक ही झटके में लौड़ा घुसा दिया और धक्के देना तेज दिया।

सुनीता- राजा, एक भी बूँद बाहर नहीं ! सब मेरे भोसड़े में चाहिए।

राजा ने जैसे ही पानी छोड़ा तो सुनीता उसकी गाण्ड पर पाँव डाल कर लपेट लिया और अपना सारा बदन ढीला छोड़ दिया। अब वो संतुष्ट हुई थी.. राजा ने पलंग पर लेट कर अपनी थकन मिटा दी।

मौसी खुद की ओर इशारा करते हुए- राजा बाबू, यह पुरानी रांड भी बेताब है, इसी लौड़ी के लिए तैयार हो जाओ।

इतना कहकर उसने राजा का लौड़ा साबुन से धोकर साफ़ किया और लॉलीपोप की तरह में मुँह में लिया और चूसने लगी।
 
मौसी- सीमा तेरा काम हुआ तो तो कपड़े लेकर नीचे जा।

सुनीता नंगी ही चली गई नीचे। अपने कपड़े हाथ में ही रखे थे। नीचे सुशी, नीला रानी और जूली अपने ग्राहकों को पटा कर बैठी थी और सुनीता को नंगी देख कर वो बोली- दीदी लगता है सारी कसर निकाल दी ! पर अभी लगता है तुम्हें और लौड़ा चाहिए।

नीला- दीदी, नहीं अब तुम ऊपर आराम करो और हमारे लिए कुछ कस्टमर छोड़ो, सब तुम ही लोगी क्या?

जूली- नहीं रे ! यह परसों चली जायेगी ! बाद में अपना ही राज है। और जीजू अपने लिए मंहगे वाले कस्टमर लाते हैं, दलाली नहीं लेते, सिर्फ एक चुदाई चाहते हैं।

सुशी- दीदी बाते ही सुनोगी, क्या कपड़े नहीं पहनने क्या? साली क्या मस्त राण्ड लगती है।

जूली- ए ! राण्ड मत बोलो ! यह एक गाली है।

सुनीता- नहीं जूली ! मुझे तो सुनकर बड़ा मज़ा आता है ! तभी तो असली राण्ड की जिंदगी जीने के लिए यहाँ मर्द के साथ आई।

जूली- सीमा, मैं भी ऐसी ही हूँ। गोवा में मेरी बहुत सहेलियाँ हैं, किसी को मेरे इस धंधे के बारे में नहीं मालूम ! सिर्फ एक सहेली है डोना ! उसको शक हो रहा है और लगता है कि वो भांडा फोड़ देगी। क्या करूँ? इधर से जाने के बाद शादी करने वाली हूँ।

सुनीता- देख जूली ! उसको समझा-बुझाकर यहाँ ले आ और अपने मौसी के दलाल को समझा कर उस पर दो कस्टमर चढ़वा दे! साली दो लौड़ों का स्वाद चखेगी, फिर देख कैसे मस्त राण्ड बन कर दिन में दस-दस लौड़ों के लिए तरसेगी? कोई कस्टमर नहीं छोड़ेगी। किसी को भी लेने लगेगी। फिर उसे रिक्शावाला, टैक्सीवाला भी चलेगा। यह चुदाई चीज ही ऐसी है।

जूली- हाँ, यह ठीक है, कल ही मैं उसे फोन करती हूँ और फ्लाईट से बुला लेती हूँ और बाद में फ्लाईट का खर्चा उसी से वसूल करती हूँ।

सुशी- साली दिखती कैसी है? धंधे के लायक है न?

रीना कब से चुप थी वो- हाँ, नहीं तो सारा खर्चा तेरे गले पड़ेगा।

जूली- अरे ! साली की छाती काफ़ी बड़ी है ! किसी अँधे की भी नजर पड़ते ही लौड़ा टाइट कर देगी।

रीना- अरे, तो बुला ले उसे ! और बता दे उसे कि तू क्या करती है? ऐसे शानपटी करने वाली को तो ठिकाने लाना ही पड़ेगा। जिस रात उसकी चीखें सुनने को मिलेंगी, तभी ठंडक पड़ेगी हमारी फ़ुद्दियों में !

सुशी- मुझे यह ठीक नहीं लगता, हम यह काम अपनी खुशी से कर रही हैं ! उससे जबर्दस्ती क्यों करवाएँ?

इतने में सुनीता कपड़े पहनकर पहुँच जाती है !

सुनीता- किसकी बात चल रही है? जूली की सहेली की? उसे बुला लो और दो दिन एक कोने में बिठा कर रखो बिना कुछ सिखाये। देखते ही भोसड़े में खुजली बढ़ेगी और फट से कस्टमर को ले लगी और जम के चुदवाएगी।

सुशी- दीदी, कैसे मालूम तुम्हें?

सुनीता- मैं भी ऐसे नखरे करती थी ! फिर एक नंगी फिल्म देखी तो चुदवाने का बहुत मन करने लगा ! पर अपने शहर में ठीक नहीं लगता था, यहाँ घूमने के बहाने आए तो मौसी के दलाल से मेरी और इनकी (राजू यानि मैं) मुलाकात हुई और उनसे मेरी इस विषय पर हमेशा बात होती थी तो मैंने डर के मारे कभी इसे सही नहीं समझा था। उन्होंने (मैं) मुझसे पूछा तो मैंने डर डर कर हाँ कर दी पर यहाँ आने के बाद अच्छा लगा।
 
रानी- और जीजू की चांदी हो गई, उन्होंने हम सब को जी भर के चोद लिया और हमारे लिए कस्टमर भी लाने लगे। तुम दोनो सही में भड़वा और रण्डी ही हो ! पर समाज में बड़ी इज्जत से रहते हो।

सुनीता- रानी, तुझे हम खटक रहे हैं क्या?

रानी- नहीं रे ! मैं तो उस नकली समाज की बात करती हूँ जहाँ पराई सेक्सी औरत देखी नहीं कि पुरुषों के लौड़े बिलबिला जाते हैं और चोदने की छुपी तमन्ना लिए नजरों से उस औरत को चोद डालते हैं। और सज्जनता का मुखड़ा लिए घूमते रहते हैं।

जूली- चलो छोड़ो ! अच्छा यह बताओ कि राजा बाबू अभी तक मौसी को चोद रहे हैं क्या? और जाहिदा भी नहीं दिखती?

सुशी- अरे जीजू ने उसके लिए मस्त भड़वा, मेरा मतलब कि कस्टमर लाकर दिया है, 2 घण्टे के 1500 रुपए मिलेंगे। साली दबा के चुदवा रही है जिससे वो कस्टमर दुबारा उसके पास ही आएगा। साली ने बहुत पैसे जमा किए हैं अगले महीने गाँव जाने वाली है ना !

सुनीता- सुशी, तू कुछ मत बोल ! मेरे इनको आधा प्यासा छोड़ कर चली गई ! कभी उनकी प्यास तो बुझा तो वो तेरे लिए भी कुछ कस्टमर ला देंगे।

सुशी- क्या दीदी, तुम्हें मालूम है ना कि जीजू ने मुझे सबसे ज्यादा चोदा ! और कस्टमर वो जाहिदा के लिए लाते हैं।

इतने में मैं पहुँच जाता हूँ और मेरे साथ चार ग्राहक थे। मैंने अन्दर जाते ही सब रण्डियों को एक तरफ़ खड़े रहने को कहा।

मैं- चलो सब एक बाजू में खड़ी हो जाओ। जिससे ये तुम सबको देख कर बाद में अपने लायक माल चुन सकें।

हाँ तो यारो, ये रही सारी सेक्स की महारानियाँ। पसन्द करो अपने हिसाब से ! आप इनको छू सकते हैं उनकी छाती भी देख लेना।

वो चारों एक एक करके सबके पास जाकर देखते हैं। एक ने तो पहली ही रानी को पसंद किया और कमरे में लेकर चला गया। दूसरा जूली पे फिदा हुआ और तीसरे और चौथे ने सुशी को पसंद किया। सुशी ने आकर मेरे हाथ में हाथ डाल कर थैंक्यू कहा।

सुशी- जीजू, आज तो मेरे भाग खुल गए, पर सीमा क्या करेगी?

सुनीता- टेन्शन मत ले ! मैंने बहुत दबा के चुदवाया आज राजा बाबू से ! अब बस आराम ! और न जाने मौसी क्या कर रही है?

इतने में मौसी राजा बाबू के हाथो में हाथ डाल कर आ गई।

मौसी- कहाँ गई साली सारी रण्डियाँ धन्धा छोड़ कर? टीवी देखने क्या? कल से टीवी की तार ही निकाल देती हूँ।

मैं- मौसी क्या तुम भी? सारी अभी अभी कस्टमर को लेकर चुदवाने गई हैं हर एक को तीन घण्टे के लिए ग्राहक मिला है।

मौसी- कहाँ से आए?

मैं- मौसी मैं लेकर आया उनको ! पान वाले के यहाँ खड़े थे, सोच रहे थे कि कहाँ जाएँ? उसमें दो तो एकदम नए हैं। डर रहे थे, मैंने हिम्मत देकर बुला लिया ! साले मालदार हैं ! हमेशा आयेंगे अब।

मौसी- राजू, तू तो साला बड़ा काम का भड़वा है रे? मेरे भड़वों को जो नहीं जम रहा, वो तू आसानी से कर रहा है.. राजा बाबू, यह है उस सीमा का भड़वा मतलब उसका पति ! देखना दोनों कैसे चुदक्कड़ हैं?

राजा बाबू- मौसी, तू साली नसीब वाली है। तुझे किसी से जबरदस्ती नहीं करनी पड़ती। सब खुद रण्डी बनने आ जाती हैं।

मौसी- क्योंकि मैंने खुद यह धंधा अपनी मरजी से किया और मुझे जबरदस्ती लाई हुई लड़कियों को रण्डी बनाना अच्छा नहीं लगता ! वो फिर कस्टमर को खुश नहीं कर सकती। ये सीमा ने कैसे तुम्हें खुश किया, वैसे वो नहीं कर पाएँगी।

राजा बाबू- सच है। चलो मैं चलता हूँ अब अगले महीने आऊँगा।
 
सुनीता- जरूर आना (डोना का फोटो दिखाते हुए) यह जूली की सहेली है, वो आने वाली है। वो थोड़े नखरे करेगी मगर बड़े प्यार से लौड़े लेगी, देखना !

मौसी- साली, तुझे कैसे मालूम?

सुनीता- जब तू राजा से चुद रही थी तब हमारी नीचे बात हुई। बड़ी छाती है उसकी। छाती देखकर कस्टमर आएगा।

मौसी- मैं आज ही जूली से बात करती हूँ।

राजा बाबू- उसके आते ही मुझे फोन करना। मैं तुरंत आऊँगा।

इतना कहकर राजा चला जाता है। और सिर्फ सुनीता और मैं ही रहते हैं। मौसी कपड़े बदलकर हिसाब के पैसे ठिकाने लगाने में जुट जाती है..

सुनीता- कल एक दिन और धंधा कर लेती हूँ। कल मैं आधे घंटे के हिसाब से कस्टमर लेती हूँ। मेरा दिल नहीं भरा। मुझे बहुत चुदवाना है।

मैं- तेरा भोसड़ा ढीला पड़ जाएगा फिर मुझे क्या मज़ा मिलेगा?

सुनीता- ऐसा कुछ नहीं होगा। कल मैं जो मिला वो कस्टमर ले लूंगी। दस तो चाहिएँ ही।

मैं- तू क्या मशीन है? थक जायेगी।

सुनीता- अरे जिंदगी में एक बार तो करना है। फिर कौन यह सब करेगा। मुझे यहाँ सब रण्डी कहकर बुलाते हैं तो बहुत अच्छा लगता है और भोसड़े में अजीब खुजली शुरू हो जाती है। और लगता है कोई तुरंत मुझे लौड़ा दे दे।

मैं- मुझे नहीं मालूम था कि तुम इतनी चुदक्कड़ हो। घर जाकर तो नहीं करोगी ना?

सुनीता- पागल हो क्या? सहेलियों में मेरी नाक कट जायेगी। यहाँ की सारी बातें यहाँ छोड़ देनी पड़ेगी। नहीं तो हमें जबरन यहाँ वापस आना पड़ेगा और दुनियादारी नहीं कर पायेंगे।

मैं- हाँ मेरी प्यारी रण्डी रानी !

सुनीता- तुम ऐसा मत कहो। तुम्हारे मुँह से यह अच्छा नहीं लगता। तुम मेरे पति हो। अच्छा, तुमने कितना मज़ा किया?

मैं- देख, मैं इनके लिए कस्टमर लाता हूँ और बदले में चाहे तो पैसे नहीं तो चोदने को मिलता है। सबको चोद चुका हूँ। सिर्फ जूली बाकी है, वो भी आज मेरे लौड़े के नीचे आ जायेगी। मैं उससे पैसे नहीं लूँगा, बदले में चोद लूँगा। तुम अब क्या करोगी?

सुनीता- मैं और मौसी पहले एक डीवीडी पर फिल्म देखेंगे और बाद में अंग्रेजी ब्लू फिल्म यानि कि चुदवाने की फिल्म जिससे हमें भी पता चले कि और किस तरह हम मज़े ले सकते हैं।

मैं- हाँ ठीक है। जूली के फ्री होते ही उसके साथ मैं जाता हूँ। मैं भी वीडियो देखकर चोदना चाहता हूँ। कुछ बंदोबस्त करता हूँ..

मैंने एक डीवीडी और टीवी का बंदोबस्त किया। जैसे ही जूली का कस्टमर गया, मैंने सारा इन्तजाम कर लिया। जूली सिर्फ ब्रेजियर और चड्डी पहने थी।

मैं- हाँ तो अब तू फ्री है? अब हम फिल्म देंखे?

जूली- हाँ जल्दी लगाओ ना !

मैंने जैसे फिल्म चालू की, उसमें हिरोइन ने आते ही मर्द के गले में हाथ डाल दिया और उसको अपने कपड़े उतारने को कहा। कपड़े उतारते ही हिरोइन ने उसका गोरा लौड़ा लॉलीपोप की तरह चूसना शुरू कर दिया। यह देखकर जूली ने मेरे कपड़े निकाल कर नीचे बैठकर लौड़ा चाटना शुरू किया। थोड़ी देर बाद मर्द ने उस गोरी मेम के गोलों को नंगा किया और बड़े प्यार से मसलना शुरू किया।

जूली- देखो कैसे दबा रहा है। इंडियन मर्द तो हमारी छाती को तो कुचल ही डालते हैं और फिर कहते हैं तुम्हारी छाती नर्म हो गई.. लो अब तुम भी इसी तरह प्यार से खेलो मेरे गोलों के साथ।

मैंने छाती के साथ साथ उसकी गाण्ड भी प्यार से दबाई और वो धीरे धीरे मस्त होने लगी। उसने मेरे हाथ हटा कर मुझे पलंग पर लेटने को कहा और हम 69 की पोजिशन में आ गए। वहाँ वीडियो में भी वही हो रहा था। गोरी मेम ने मर्द का लौड़े का रसपान शुरू किया और मर्द ने भोसड़े का। बस हमने भी यही शुरू कर दिया। अभी अभी चुदे हुए भोसड़े की खुशबू कुछ अजीब ही थी, बड़ी मस्त कर रही थी। मैं भी उसके चूसने से मस्त हो रहा था। वीडियो वाला मर्द सिसकारियाँ लेने लगा और यहाँ जूली कराहने लगी।
 
जूली- जीजू, जी…जू ! जी…जू ! सहन नहीं होता ! और जोर से चाटो।

मैं- और तुम मेरे लौड़े को चाटो। मैं भी बेकरार हूँ।

मैंने उठकर जूली को खड़ा किया और उल्टा करके घोड़ी बनके उसके गाण्ड में घुसेड़ दिया और धक्के चल्लू कर दिए। फिर लौड़ा निकाल कर भोसड़े में घुसेड़ा और चोदना शुरू किया और दोनों हाथों से थोड़ा झुक कर गेंदों को हाथ में लिया।

जूली- जीजू, जरा कसके पकड़ो इन गेंदों को ! बहुत बेताब थी तुम्हारे हाथों के स्पर्श के लिए। आ… आ… आ… आआ ! चुदाई चालू रखो। अन्दर तक आने दो। कस्टमर तो आते हैं और पानी छोड़कर चले जाते हैं। कोई हमें समझता नहीं। हमें भी बहुत बार ऐसे चुदवाने का दिल होता है पर हमें भी पैसे की भूख होती है और जल्द से जल्द दूसरा कस्टमर पकड़ने की जरूरत होती है। आप बस ऐसे ही लौड़ा अन्दर डाले रखो।

थोड़ी देर बाद मैंने पुनः धक्के देना शुरू किया। जूली को सकून मिल रहा था और सकून से कराह रही थी..

मैंने कामसूत्र के पाँच दाँव आजमाए और आखिर में उसे पलंग पर लेटा कर चोदना शुरू किया।

जूली- जी… जू ! पागल कर दोगे आप मुझे ! बहुत प्यार से चोद रहे हो ! अच्छा लगता है। चोदो, चोदो, चोदो मुझे चोद डालो और इस भोंसड़े को दिखा दो कि इसे कहते हैं चुदवाना।

मेरे धक्के बढ़ गए और आखिर में मेरा पानी उसके भोसड़े में छूट गया। इससे तृप्त होकर उसने अपनी टांगों से मेरी गाण्ड को लपेट लिया जिससे मैं छूट नहीं पाया और उसने कस कर पकड़े रखा।

जूली- हा…श… कुछ मज़ा आया ! जीजू… तुमको आया या नहीं?

मैं- बहुत मज़ा आया !

जूली- कल आपका आखिरी दिन है तो वादा करो कि कल दिन भर आप मेरी गोद में लिपटे रहोगे ! और किसी के पास नहीं जाओगे?

मैं- कल का तो मैं बता नहीं सकता।

जूली- नहीं ! आपको कल भी मुझे चोदना है। मेरा दिल भरने तक !

मैं- किसी और ने बुलाया तो?

जूली- उसे भी साथ ले लो ! तुमको तो क्या? पाँचों उंगलियाँ घी में।

फिर हम नंगे ही एक दूसरे की बांहों में हाथ डालकर सो गए। सुबह होते ही हम कपड़े पहनकर नीचे नहाने धोने गए, तैयार हो गए। और फ़िर चाय नाश्ते के लिए गए।

सबने योजना बनाई थी कि आज कोठे में सब रण्डियाँ सिर्फ ब्रेज़ियर और हाफ़ पैंट ही पहनेंगी।

जूली- कल आपका आखिरी दिन है तो वादा करो कि कल दिन भर आप मेरी गोद में लिपटे रहोगे ! और किसी के पास नहीं जाओगे?

मैं- कल का तो मैं बता नहीं सकता।

जूली- नहीं ! आपको कल भी मुझे चोदना है। मेरा दिल भरने तक !

मैं- किसी और ने बुलाया तो?

जूली- उसे भी साथ ले लो ! तुमको तो क्या? पाँचों उंगलियाँ घी में।

फिर हम नंगे ही एक दूसरे की बांहों में हाथ डालकर सो गए। सुबह होते ही हम कपड़े पहनकर नीचे नहाने धोने गए, तैयार हो गए। और फ़िर चाय नाश्ते के लिए गए।

सबने योजना बनाई थी कि आज कोठे में सब रण्डियाँ सिर्फ ब्रेज़ियर और हाफ़ पैंट ही पहनेंगी। साली सबकी सब सेक्सी लग रही थी यहाँ तक कि मौसी भी उसी तरह तैयार हुई।

मौसी- वाह ! आज तो कस्टमर तो चकरा जाएगा कि किसको चोदूँ? सब की सब पटाख़ा लग रही हैं.. कोठे पे कदम रखते ही उसका लौड़ा ऐसा तनेगा कि जो बोले वो पैसे दे देगा। उससे कंट्रोल ही नहीं होगा।

मैं तैयार होकर रोज की तरह पान वाली दुकान के पास जा खड़ा हुआ। तभी मुहल्ले के असली भड़वे भी आ गये और बोले- क्या तुम ही कमाओगे? हम नहीं क्या?

मैं- अरे, हमने कब मना किया?

सब भड़वे- अरे यार जो चुदाई तुम्हारे यहाँ होती है, वो बाकी जगह पर नहीं। ऐसा क्यों?

मैं- हमारे यहाँ सब अपनी मरजी से धंधा करती हैं किसी को उठा कर या फंसा कर नहीं लाया। सब आती हैं किसी गई पुरानी रण्डी की पहचान लेकर। सब कमाती हैं और चली जाती हैं अपनी दुनिया में। हमारे यहाँ सीमा भी इसी तरह आई और अब कमा रही है।

सब बोले- साली, ऐसी हमारे हाथ क्यों नहीं आती? हमें तो मार-मार कर उसे रण्डी बनाना पड़ता है और उस धंधे में मज़ा नहीं।

मैं- हमारे यहाँ के कस्टमर को पूछो कि किसी औरत ने रोते हुए उसको लिया है? वो ना ही बोलेगा। उससे रण्डियाँ बहुत प्यार से पेश आती है और बेताब होकर लौड़ा लेती हैं। ऐसा किसी दूसरे कोठे पर नहीं होता। देखो कल ही बाजू वाले घर में वो लड़कियों को आप लोग बंगला देश और नेपाल से लाये हैं, आप उन्हें मारेंगे, पीटेंगे और फिर वो क्या खुशी से धंधा करेंगी? नहीं ना? तो आप लोग ऐसी औरतें ढूँढो जिनको कमाना भी है और पहचान भी छुपानी है ! ऐसी औरतें एक ढूँढो तो हजार मिलेंगी। एक बार वो गई तो जाने दो ! दूसरी उसके पीछे अपने आप आ जाएगी।

सभी भड़वे- हां ! यह सोलह आने सच है। देखते हैं, ऐसी हमारी किस्मत भी है या नहीं?

मैं- एकदम से नहीं मिलेंगी। थोड़ा धीरज रखना पड़ेगा।

इतने में दो लड़के कल्पना के कोठे का पता पूछने लगे।

मैं- हाँ, बोलो कहाँ जाना है?

वो बोले- कल्पना के यहाँ ! वहाँ मस्त-मस्त रण्डियाँ हैं ! बहुत नाम सुना है।

मैं- तो चलो मेरे साथ। कितनी देर तक बैठना है? एक बार चोदने के 500 रुपए होगे और एक घंटे के 1000 रुपए।

वो- नहीं, हमें तो बस एक बार चोदना है, अच्छा लगा तो दूसरी बार पूरी रात के लिए आयेंगे।

बातें करते करते हम कोठे पर आ गए। सभी अन्दर टीवी देख रही थी। मैंने बेल बजाई तो मेरी सारी की सारी सालियाँ बाहर आ गई। उनको इन कपड़ों में देखकर वो दोनों पागल से हो गए और नजदीक जाकर किसको चोदें, इसका विचार करने लगे..
 
एक ने रानी को और दूसरे ने जूली को चुना और लेकर कमरे में चले गए। धीरे धीरे कोठे पर चोदुओं की भीड़ बढ़ गई। चोदने के लिए कमरे और लड़कियाँ कम पड़ने लगी। सभी रण्डियों ने दो-दो राउंड पूरे किये, उनमें सीमा भी थी।

सीमा मेरे पास आई और बोली- और पाँच घण्टे काम करना है ! और 6-7 लौड़े तो चाहिएँ ही मेरी चूत को।

मैं- मैं कोशिश करता हूँ।

उतने में पहले दिन वाला युवक आया, साथ में एक दोस्त को लाया था।

आते ही युवक- रमेश, जिसकी मैं बात कर रहा था वो यही है सीमा, सीमा आज हम दोनों को एक साथ लेना है।

सुनीता- आज आधा घंटे से ज्यादा नहीं लूंगी, मुझे बहुत कस्टमर पटाने हैं।

युवक- चलेगा। दोनों के 1000 रुपए ! है मंजूर?

सुनीता- हाँ चलो अन्दर ! दोनों कपड़े निकालकर बैठो ! और पैसे दो ! मैं पेटी में रख कर आती हूँ।

सुनीता ने अन्दर जाकर बारी-बारी दोनों लड़कों से चुदवाया और कपड़े पहनकर बाहर आई। आते युवक ने उसकी छाती को पकड़ा तो वो गुस्सा हुई।

सुनीता- ए नखरा नहीं करने का ! सिर्फ चोदने के पैसे लिए, छाती को हाथ लगाने का नहीं। उसके पैसे अलग।

युवक- सॉरी, सॉरी।

इतना कहकर चले गए।

बाहर और 5-6 ग्राहक बैठे थे और सभी रण्डियाँ अपना और एक राउंड पूरा करके बाहर आई। उनको देखते ही सारे ग्राहकों ने सिटी मारी और बोले- साली इस कोठे की रंगीनियाँ कुछ अलग ही हैं ! साली आज सब आधे से ज्यादा तो नंगी ही हैं ! ज्यादा तकलीफ नहीं होगी कपड़े निकालने के लिए।

सीमा एक आँख मार कर नीचे झुक कर अपनी छाती हिलाने लगी। इस पर फ़िदा होकर एक नौजवान उसे ले गया। जाहिदा के पास दो कस्टमर गए। सुशी और रानी ने भी कस्टमर लिए।

मौसी- साला कोई मुझे क्यों नहीं लेता? चल राजू, तू ही मेरे भोसड़े में डाल दे अपना लौड़ा। इन रण्डियों की चुदवाने की स्पीड देखकर मुझे भी चुदवाना है।

मैं- चल तो फिर ! फटाफट चोद डालूँ तुझे..

मैंने उस दिन मौसी के हाथ में अपना मस्त लौड़ा दिया तो वो चुदवाने के लिए तैयार हो गई।

मौसी- मेरे कोठे की रण्डियों ने तेरी बहुत तारीफ़ की तो सोचा देखूँ कि कितना सच है?

थोड़ी देर बाद सारी की सारी रण्डियाँ सारे कस्टमर पटा कर बाहर आई। किसी किसी ने तो ऊपर कुछ भी नहीं पहना था और मस्त होकर पंखे के नीचे बैठी थी।

मौसी- इन साली रण्डियों को किसी की शर्म ही नहीं ! अरे यह राजू यहाँ बैठा है ना? इसकी तो शर्म करो !

जूली- इनसे क्या शर्माना ! मुझे और बाकी रण्डियों को पूरा नंगा देख कर उर चोद चुके हैं हमारे जीजू।

मौसी- ठीक है पर अभी कोई आया तो? कमरे में नंगी हो जाओ बाहर नहीं। बेशर्म कहीं की साली। चलो ब्रेज़ियर तो पहनो ! क्या रे राजू? तेरा लौड़ा नहीं कड़क होता इन को देख कर?

मैं- इनको तो चख लिया अब सिर्फ तू बाकी है..

मैंने पास जाकर मौसी को छुआ तो पता चला वो गर्म हो चुकी थी मेरा हाथ लगते ही !

उसने शरारती अंदाज में देखकर कहा- अभी मुझे दो कस्टमर लेने दे। फिर रात तेरी और मेरी।

मौसी ने दो दो कहते हुए 4 कस्टमर लिए और सुनीता का कोटा भी पूरा हुआ। वो अब थक चुकी थी।

सुनीता- मैं अब नहीं लेने वाली। मैं सोने जाती हूँ।

मौसी- राजू, तू अब मेरे साथ चल।

मैंने उसे गोद में उठाया और उसके कमरे में ले गया और कमरे बन्द किया। उसने एसी चालू किया। थोड़ी देर में कमरे ठण्डा हो गया।

मौसी ने मुझे खींचते हुए अपनी बाहों में लिया और बोली- भड़वे, तेरी तारीफ मैंने सभी रण्डियों से सुनी तो सोचा मैं भी तेरा लौड़ा ले ही लूँ। आज रात मैं सोने वाली नहीं और तुझे भी नहीं सोना।

मैं- हाँ मेरी रण्डियों की रानी। तू क्यूँ बाकी रहेगी?
 
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