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रंगीन रातों की कहानियाँ

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चूत मे भी आग लगती है



सब से पहले मैं अपने शरीर के बारे मे बता दूं. मेरा रंग सांवला और मेरी हाइट कम है. मगर मेरे मम्मे बहुत भारी भारी. पतली कमर के नीचे फिर से भारी चूतड़.

इस तरह मेरा बदन तो सब को सेक्सी लगता था मगर कोई मुझ से दोस्ती नहीं करना चाहता था. जब मैं जवान हुई तब तक मेरे माँ बाप मर चुके थे.

मैं अपनी एक दीदी और जीजा जी के साथ रहती थी. मेरी शादी के बारे मे कोई सोचने वाला ही नहीं था. यह सोच सोच के मैं दुखी होती और मेरी चूत गरम होती रहती. मेरी चूत तब कुच्छ ज़्यादा ही गर्मी दिखाने लगी थी. 19 साल की होते होते मैं चुदने के लिए बेताब रहती थी.

यहाँ तक मेरे जीजा जी ने कई बार मेरे मम्मो पर हाथ डाल कर मुझे अपनी ओर घसीटा था. वैसे तो मैं भी सेक्स चाहती थी मगर दीदी का घर बर्बाद नहीं कर सकती थी. इस लिए जीजा जी को झटक देती थी.

सेक्स के लिए मेरे पहले दो प्रयास विफल रहे. मैं ने सब से पहले गली के लड़के को इशारे कर कर के अपने कमरे तक बुलाया. फिर हम नंगे होने लगे. इस लड़के के सामने जैसे ही मेरे भरे भरे मम्मे और गांद आई उसके के लंड ने पानी छ्चोड़ दिया और ठंडा पड़ गया. फिर मेरे तमाम प्रयास के बाद खड़ा नहीं हुआ. आअख़िर मे मुझे उस लड़के की गांद पे लात मारके भगा देना पड़ा.

दूसरा लड़का कॉलेज से पकड़ के लाई. हम दोनो जल्दी मे थे. झट से नंगे हुए और बिस्तर मे कूद पड़े. मुझे लगा आज सब ठीक होगा. हमने झट पट एक दूसरे के कपड़े उतारे और बिस्तर पे लेट गये. मगर जैसे ही उस लड़के के लंड ने मेरी तड़प्ती चूत के होंठ च्छुए उस का भी माल झड़ने लगा. मेरी चूत गरम गरम माल मे नहा तो ली मगर चुद नहीं पाई. अब मैं और ज़्यादा डेस्परेट हो गयी. क्या चुदाई मेरे नसीब मे नहीं थी?

मगर ईश्वर ने मेरे लिए एक मस्त लंड का इंटेज़ाम कर रखा था और वो मुझे जल्दी ही मिल गया वो भी घर बैठे.

'राज शर्मा' मेरे जीजा जी के बड़े भाई का बेटा था. यह लोग गाओं मे रहते थे और 'राज शर्मा' का सेलेक्षन इंजिनियरिंग मे हो गया, उसी शहर मे जिस मे मैं और मेरी दीदी रहते थे. मेरे जीजा जी पोलीस मे थे इस लिए बाहर पोस्टेड थे. शनिवार और इतवार को घर आते थे.

इन दोनो दिन दीदी और जीजा जी कमरे मे बंद रहते और सोमवार की सुबह सारे कमरे मे जगह जगह दीदी के कपड़े बिखरे होते.

'राज' जब शहर आया तो यह डिसाइड किया गया कि वो हमारे साथ ही रहेगा. 'राज' के बारे मे मैं पहले भी थोड़ा थोड़ा सुन चुकी थी. यह सुना था कि वो गाओं मैं अपनी एक विधवा चाची के साथ खूब ऐश कर चुक्का था और चाची को एक दो बार पेट भी गिरवाना पड़ा था.

हमारे घर मे नीचे की मंज़िल मे एक ड्रॉयिंग रूम, एक बेडरूम और एक किचन थी. और ऊपेर दो कमरे और एक बाथरूम. मैं ऊपेर रहती और दीदी नीचे. "राज' के आते ही उस को ऊपेर वाला दूसरा कमरा मिल गया. यह दोनो कमरे बाथरूम के रास्ते से जुड़ सकते थे. हमारे मज़े के लिए पूरी सेट्लिंग थी.

राज के आते ही मैं ने उस को पटाने के हथकंडे स्टार्ट कर दिए.

उस के सामने (जब दीदी ना हो) तो मैं अपने बूब्स पे दुपट्टा नहीं डालती थी और जब वो पीछे से देखे तब अपने चूतदों को ज़्यादा मटका मटका के चलती थी. यह दो दिन चला. तीसरे दिन मैं ने 'राज' को बताया के मुझे स्टॅटिस्टिक्स बिल्कुल समझ नहीं आती (मैं एकनॉमिक्स मे एम ए कर रही थी प्राइवेट्ली). राज बोला के वो मुझे समझा देगा. हमने शाम को ही स्टॅटिस्टिक्स पढ़ने का कार्यक्रम बना डाला. (मेरा कार्यक्रम तो कुछ और ही था…..)

शाम से पहले मैं अपने शरीर को "राज' की मस्ती के लिए पूरा तैय्यार किया. अपनी चूत के बाल शेव किए. अंडर आर्म्स को क्लीन किया और अच्छा सा स्प्रे लगाया.

शाम को एक टाइट सी ड्रेस पहन कर मैं "राज' के कमरे मे पहुँच गयी. दीदी पड़ोसन मे गप्पें लगाने गयी हुईं थी.

राज और मैं टेबल पर बैठ गये. मेरे मम्मे ड्रेस फाड़ के बाहर आने वाले थे.

और दिल धधक धधक के छाती से बाहर आने वाला था. जब "राज' पढ़ा रहा था तब मेरा ध्यान कहीं और था. मैं ने अपने पैर से चप्पल उतार के उस के पैर पे दबाया. यह मेरी ज़िंदगी का सब से बड़ा इम्तिहान था. क्या होगा "राज' पर इस का रिक्षन?

राज ने भी मेरी जांघों मे हाथ डाल दिया. हे भगवान तू महान हैं. मुझे मेरा यार मिल गया.

फिर तो मैं ने भी राज को पूरा आगे बढ़ने दिया.

राज ने मुझे अपनी बाँहो मे भर लिया. फिर उस ने मुझे उठा लिया और बिस्तर मे पटक दिया. और मेरे कपड़े बदन से अलग होने लगे. मुझे उन की कोई ज़रूरत नहीं थी. मैं भी राज की पॅंट उतार कर उस के लंड को मलने लगी और उस को चुम्मे की बारिश कर दी.

फिर राज की जीभ मेरे मुँह मे धँस गयी. यह मेरे लिए बड़ा मस्त चुम्मा था. किसी मर्द ने इतना क्लोज़ चुम्मा नहीं दिया था मुझे. मेरी जीभ भी उस के मुँह को टटोलने लगी हम मस्त हो चले थे.

अब तक राज ने मेरी ब्रा तक उतार दी थी और मैं अब सिरफ़ एक पॅंटी मे थी. राज मेरी चूचियो को देख कर पागल हो गया. उन्हे कस के मसलता और फिर चूस्ता और काट भी डाला. मैं ने उस की छाती और कान काट डाले.

अब राज के हाथ मेरी पॅंटी मे घुस गये थे. और उस की उंगलियाँ मेरी चूत के होठ पर मस्ती का जादू दे रही थी.

मैं ने भी उस का लंड बाहर निकाल लिया और उस को चूम चूम के इतना मस्त कर दिया के राज के मुँह से सस्स, ससस्स, सस्सस्स निकलने लगी. जब राज की उंगली मेरे दाने (क्लिट्टी) को परेशान करती तो मेरी भी सिसकारी निकल जाती. मैं उस को रोकने की कोई कोशिश नहीं कर रही थी. थोड़ी देर मैं मेरी चूत का दाना बड़ा और गीला हो गया और उस की उंगली को एंजाय करने लगा.

अब राज मुझे चोदने को अधीर हो चला था. मैं भी बेताब थी. मैं चूत की तरफ उस के लंड को खींचा. राज ने मेरी टांगे अपने कंधे पे रखी और अपने लंड की टिप मेरी चूत से मिला दी.

मैं ने सोचा हे भगवान अब कुच्छ गड़बड़ ना हो. आज मुझे चुद लेने देना. भगवान ने मेरी प्रार्थना सुन ली और राज ने अपने लंड पे प्रेशर बढ़ा दिया. मेरी चूत के होंठ इतने खुल चुके थे के उस का सुपरा आसानी से मेरी चूत के होठों मे समा गया.

फिर राज ने फाइनल झटका दिया और दर्द की एक लहर मेरी चूत को पार कर गयी. साथ ही मैं लड़की से औरत बन गयी. दर्द की किस को चिंता थी. मैने राज के लंड को पूरा अंदर लिया और टांगे और फैला कर उस मस्त कर दिया.

मेरी शेव्ड चूत मे राज का लंड पूरा समाया हुआ था. फिर राज ने उस को बाहर निकाला. फिर अंदर तक पेल दिया. एक फूच की आव्आआज़ हुई शायद मेरी चूत के अंदर की हवा चूत और लंड के बीच के गॅप से निकली. सच कहती हूँ बड़ा सेक्सी माहौल बन गया उस आव्आआज़ से.

राज ने पहले धीरे धीरे और फिर तेज़ चोदना शुरू किया. मैं मस्त होने लगी. शरीर मे बड़ी अजीब सी सन सनी होने लगी थी. मैं उस के लंड को अपने पेट तक महसूस कर रही थी और फिर भी और अंदर लेना चाहती थी. इस के लिए मैं उस के कंधे पे लटक सी रही थी और जब राज अंदर का धकका मारता तो मैं अपने चूतड़ ऊपेर सटा देती.

उहह अया की आवाज़े निकल रही थी. और फॅक फॅक की वो सेक्सी आवाज़ लगातार हुए जा रही थी.

फिर मेरे शरीर की हलचल बढ़ने लगी. मेरे पेट की मसल्स बिना रुके सिकुड और फेल रही थी. मस्ती मे पागल सी हो रही थी. और राज मेरी चूत को पेले ही जा रहा था. अब वो उस को कभी कभी गोल गोल भी घुमा रहा था. इस से उस के लंड की जड़ मेरी चूत के होठों पे पूरी रगड़ खा रही थी और चूत रस छ्चोड़ छ्चोड़ कर रस से भर गयी थी.

फिर मुझे लगा एक भूचाल आ गया. मैं अपने होश खो बैठी और ज़ोर ज़ोर से ऊऊओ आआ ऊओ ईई करने लगी. जब यह भूचाल थमा उस से पहले राज ने भी अपने लंड से ढेर सारा माल मेरी चूत मे छ्चोड़ दिया था और निढाल होके मेरे मम्मो की बीच सिर रख कर लेट गया.

बड़ा मस्त लवर मिला था मुझे... क्या मेरी चूत को चाट ता और चोद्ता था...आआआआआआआआआअहह!!! हाई रे मेरी कककचूऊऊऊथततत्त...और उसका मस्त लौदाााआआआआ...................

उसी रात हमने एक बार फिर चुदाई करी. हम दोनो को खूब मज़ा आया. सुबह जब पाँच बजे उठने लगी तो राज ने मुझे फिर दबोच लिया. मैं ने राज को कहा अभी मेरी चूत दुख सी रही है. इस को चुदने की आदत पड़ने दो फिर चाहे जितनी बार चोदना. राज मान गया और मुझे जाने दिया.

उस दिन के बाद हमने और राज ने चार साल बे-इंतहा सेक्स का मज़ा लिया. एक दिन मे मॅग्ज़िमम 10 बार और कम से कम दो बार सेक्स चलता रहा. प्रेग्नेन्सी की परेशानी से बचने के लिए मैं ने अपनी चूत मे कॉपर टी डलवा ली.

हमारी सेक्स की थोड़ी थोड़ी खबर दीदी को भी हो ही गयी थी. मगर वो चुप रही क्यूँ के उन्हे शायद पता था कि मैं कितनी चुदैल हूँ. और राज अगर मुझे तृप्त नहीं रखेगा तो मैं गली के लड़कों से इश्क़ करूँगी या फिर उन के पती के चंगुल मे ही आ सकती थी.

राज और मैं अपनी MC के दिनो मे भी सेक्स किए बिना नहीं रह सकते थे. MC के पहले दिन जब मेरी चूत मे से खूब खून निकलता था तब सेक्स करने से कई बार राज और मेरे कपड़े और बिस्तर खराब हो जाते थे. इस से बचने के लिए राज ने मुझे गांद मरवाने की आदत भी डाल दी. अब मैं अपने शारीर के तीनो छेद मे राज का लंड लेती थी.

राज और मेरे सेक्स रिलेशन्स चार साल चले, उस के बाद राज की इंजीनियारिग पूरी हो चली थी फिर मेरी भी शादी हो गयी. शादी से पहले मैं ने राज के साथ कॉपर टी निकाल कर सेक्स किया और उस के प्यार को अपने पेट मे ले के पति के घर गयी.

जब मैं विवाह मंडप पर बैठी उस से आधे घंटे पहले राज और मैं ने चुदाई की और मंडप मे मेरी चूत से राज शर्मा का माल निकल निकल के मेरी पॅंटी गीली कर रहा था.

दोस्तो कैसिलगी ये मस्त कहानी ज़रूर बताना आपका दोस्त राज शर्मा

समाप्त...





CHOOT ME BHI AAG LAGTI HAI

Sab se pahle main apne sharer ke baare main bata doon. Mera rang sanwala aur Meree height kam hai. Magar mere mome bahut bharee bahree. Patlee kamr ke neeche fir se bharee chootad.

Is tarah mera badan to sab ko sexy lagta tha magar koi mujh se dostee naheen karna chahta tha. Jab main jawan huyee tab tak mere maan baap mar chuke the.

Main apnee ek didi aur jeeja jee ke saath rahtee thee. Meree shaadee ke bare main koi sochne wala hee naheen tha. Yeh soch soch ke main dukhee hotee aur meree choot garam hotee rahtee. Meree choot tab kuchh jyada hee garmee dikhane lagee thee. 19 saal kee hote hote main chudne ke liye betaab rahtee thee.

Yahan tak mere jeeja jee ne kai baar mere mome par haath daal kar mujhe apnee aur ghaseeta tha. Waise to main bhee sex chahtee thee magar didi ka ghar barbaad naheen kar saktee thee. Is liye Jeeja jee ko jhatak detee thee.

Sex ke liye mere pahle do prayas vifal rahe. Main ne sab se pahle galee ke ledke ko ishaare kar kar ke apne karme tak bulaya. Fir ham nange hone lage. Is ladke ke saamne jaise hee mere bhare bhare mome aur gaand aayee is ke lund ne paanee chhod diya aur thanda pad gaya. Fir mere tamam prayas ke baad khada naheen hua. Aaakhir main mujhe us ladke kee gaand pe laat marke bhaga dena pada.

Doosra ladka college se pakad ke laayee. Hum dono jaldee main the. Jhat se nange huye aur bistar main kood pade. Mujhe laga aaj sab theek hoga. Hamne jhat pat ek doosare ke kapde utare aur bistar pe let gaye. Magar jaise hee us ladke ke lund ne meree tadaptee choot ke honth chhuye us ka bhee maal jhadne laga. Meree choot garam garam maal main naha to lee magar chud naheen payee. Ab main aur jyada desperate ho gayee. Kya chudai mere naseeb main naheen thee?

Magar eeshswar ne mere liye ek mast lund ka intezaam kar rakha tha aur who mujhe jaldee hee mil gaya who bhee ghar baithe.

'n' mere jeeja jee ke bade bhai ka beta tha. Yeh log gaon main rahte the aur 'n' ka selection engineering main ho gaya, usee shahar main jis main main aur meree didi rahte the. Mere Jeeja jee police main the is liye bahar posted the. Shaneewar aur itwaar ko ghar aate the.

In dono din deedee aur jeeja jaa kamre main band rahte aur somwar kee subah saara kamre main jagah jagah didi ke kapde bikhare hote.

'n' jab shahar aaya to yeh decide kiya gaya ke who hamare saath hee rahega. 'N' ke bare main main pahle bhee thoda thoda sun chukee thee. Yeh suna tha ke who gaon main apnee ek vidhwa chachee ke saath khoob aish kar chukka tha aur chachee ko ek do baar pet bhee girwana pada tha.

Hamare ghar main neeche kee manzil main ek drawing room, ek bedroom aur ek kitchen thee. Aur ooper do kamre aur ek bathroom. Main ooper rahtee aur didi neeche. "n' ke aate hee us ko ooper wala doosra kamra mil gaya. Yeh dono kamre bathroom ke raste se jud sakte the. Hamare maje ke liye pooree settling thee.

N ke aate hee main ne us ko patane ke hathkande start kar diye.

Us ke saamne (jab didi na ho) to main apne boobs pe duptta naheen daaltee thee aur jab who peeche se dekhe tab apne chootadon ko jyada matka matka ke chaltee thee. Yeh do din chala. Teesare din main ne 'n' ko bataya ke mujhe statistics bilkul samajh naheen aatee (main economics main MA kar rahee thee privately). N Bola ke who mujhe samjha dega. Hamne shaam ko hee statistics padhne ka karyakram bana daala. (mera karyakram to kuch aur hee tha…..)

Shaam se pahle main apne sharer ko "n' kee masti ke liye poora tayar kiya. Apnee choot ke baal shave kiye. Under arms ko clean kiya aur achha sa spray lagaya.

Shaam ko ek tight see dress pahan kar main "n' ke kamare main pahunch gayee. Deedi padosan me gappen lagane gayee huyeen thee.

N aur main table par baith gaye. Mere mome dress faad ke bahar aane wale the.

Aur dil dhadhak dhadhak ke chhatee se bahar aane wala tha. Jab "n' padha raha tha tab mera dhyan kaheen aur tha. Main ne apne per se chappal utar ke us ke per pe dabaya. Yeh meree zindagee ka sab se bada imtehaan tha. Kya hoga "n' par is ka reaction?

N ne bhee meree jaanghon main haath daal diya. Hey bhagwaan tu mahan hain. Mujhe mera yaar mil gaya.

Fir to main ne bhee N ko poora aage badhne diya.

N ne mujhe apnee bbahon main bhar liya. Fir us ne mujhe utha liya aur bistar main patak diya. Aur mere kapde badan se alag hone lage. Mujhe un kee koi jaroorat naheen thee. Main bhee n kee pant utar kar us ke lund ko malne lagee aur us ko chumme kee barish kar dee.

Fir N kee jeebh mere munh main hus gayee. Yeh mere liye bada mast chuma tha. Kisee mard ne itna close chuma naheen diya tha mujhe. Meree jeebhe bhee us ke munh ko tatolane lagee hum mast ho chale the.

Ab tak N ne meree bra tak utar dee thee aur main ab siraf ek panty main thee. N mereee choochion ko dekh kar pagal ho gaya. Unhe kas ke maslta aur fir choosta aur kat bhee daala. Main ne us kee chaatee aur kaan kaat dale.

Ab N ke haath meree panty main ghus gaye the. Aur us kee unglian meree choot ke hoth par mastee ka jaadoo de rahee thee.

Main ne bhee us ka Lund bahar nikal liya aur us ko choom choom ke itna mast kar diya ke N ke munh se sss, ssss, sssss nikalne lagee. Jab N kee ungalee mere daane (Clitty) ko pareshaan kartee to meree bhee siskaaree nikal jaateee. Main us ko rokne kee koi koshish naheen kar rahee thee. Thodee der main meree choot ka dana bada aur geela ho gaya aur us kee ungalee ko enjoy karne laga.

Ab N mujhe chodne ko adheer ho chala tha. Main bhee betaab thee. Main choot kee tarah us ke lund ko kheencha. N ne meree taange apne kandhe pe rahee aur apne lund kee tip meree choot se mila dee.

Main ne socha hey bhagwaan ab kuchh gadbad na ho. Aaaj mujhe chud lene dena. Bhagwaan ne meree prarthna sun lee aur N ne apne lund pe pressure bada diya. Meree choot ke honth itne khul chuke the ke us ka supara aasaanee se meree choot ke hothon ne sama gaya.

Fir N ne final jhatka diya aur dard kee ek lahar meree choot ko paar kar gayee. Saath hee main ladkee se aurat ban gayee. Dard kee kis ko chinta thee. Main N ke lund ko poora andar liya aur taange aur faila kar us mast kar diya.

Meree shaved choot main N ka lund poora samaya hua tha. Fir N ne us ko bahar nikala. Fir andar tak pel diya. Ek fuch kee awaaaz huyee shayad meree choot ke andar kee hawa choot aur lund ke beech ke gap se niklee. Sach kahtee hoon bada sexy mahaul ban gaya us awaaaz se.

N ne pahle dheere dheere aur fir tez chodna shuru kiya. Main mast hone lagee. Shareer main badee ajeeb see san sanee hone lagee thee. Main us ke lund ko apne pet tak mahsoos kar rahee thee aur fir bhee aur andar lena chahtee thee. Is ke liye main us ke andhe pe latak see rahee thee aur jab N andar ka dhkka marta to main apne chootad ooper sata detee.

Uhh aaah kee awajain nikal rahee thee. Aur fach fach kee who sexy awaz lagataar huye ja rahee thee.

Fir mere shaaree kee halchal badhne lagee. Mere pet kee muscles bina roke sikud aur fel rahee thee. Masti main pagal see ho rahee thee. Aur N meree choot ko pele hee ja raha tha. Ab who us ko kabhee kabhee gol gol bhee ghuma raha tha. Is se us ke lund kee jad mere choot ke hothon pe pooree ragad kha rahee thee aur choot ras chhod chhod kar ras se bhar gayee thee.

Fir mujhe laga ek Bhoochal aa gaya. Main apne hosh kho baithee aur jor jor se ooooo aaaa ooo eeee karne lagee. Jab yeh bhoochal thama us se pahle N ne bhee apne lund se dher saara maal meree choot main chhod diya tha aur nidhaal hoke mere mome kee beech sir rakh kar let gaya.

Bada mast lover mila tha mujhe... Kya meri Choot ko chat ta aur chodta tha...

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh!!! hai re meri Cccchhhhoooooooottttt...aur uska mast laudaaaaaaaaaaaaaa...................

Usee raat hamne ek baar fir chudaaai karee. Hum dono ko khoob maja aaya. Subah jab paanch baje uthne lagee to N ne mujhe fir daboch liya. Main ne N ko kaha abhee meree choot dukh see rahee hai. Is ko chudne kee adat padne do fir chahe jitnee baar chodna. N maan gaya aur mujhe jaane diya.

Us din ke baad hamane aur N ne chaar saal be-intaha sex ka maja lia. Ek din main maximum 10 baar aur kam se kam do baar sex chalta raha. Pregnancy kee pareshaanee se bachne ke liye main ne apneeee choot main copper T dalwa lee.

Hamaree sex kee thodee thodee khabar didi ko bhee ho hee gayee thee. Magar who chup rahee kyun ke unhe shayad pata the ke main kitnee chuddal hoon. Aur N agar mujhe tript naheen rakhega to main galee ke ladkon se ishq karoongee ya fir un ke patee ke changul main hee aa saktee thee.

N aur main apnee MC ke dino main bhee sex kiye bina naheen rah sakte the. MC ke pahle din jab meree choot main se khoob khoon niklta tha tab sex karne se kai baar N aur mere kapde aur bistar kharab ho jaate the. Is se bachne ke liye N ne mujhe gaand marwaane kee aadat bhee daal dee. Ab main apne shaareer ke teeno cheed main N ka lund letee thee.

N aur mere sex relations chaar saal chale, Us ke baad N kee engg pooree ho chalee thee fir meree bhee shaadee ho gayee. Shaadee se pahle main ne N ke saath Copper T nikaal kar sex kiya aur us ke pyar ko apne pet main le ke pati ke ghar gayee.

Jab main vivah mandap par baithee us se aadhe ghante pahle aur main ne chudai kee aur mandap main meree choot se N ka maal nikal nikal ke meree panty geelee kar raha tha.

SAMAPT...

 
चुदासी चाची --1

मेरे परिवार मैं कुल ९ लोग थे. उनमे से एक मेरी चाची थी. उसके उम्र कुछ ३२ साल होगी, उसके एक ३ साल के बेटी भी थी जिसका नाम गुडिया था. मेरे पापा और चाचा कपरे के व्यापार करते थें. इसलिए वोह लोग काफी बाहर भी जाते थे व्यापार के लिए.

अब मैं अपनी चाची के बारे में बताने जा रहा हूँ. वो एक मामूली हाउस्वाइफ की तरह नहीं थी, वो काफी पढ़ी लिखी थी और काफी स्मार्ट भी थी. वह देखने में काफी खुबसूरत थी. उनकी चूची काफी अछी साइज़ की थी और उनका गांड बहुत मस्त था. उनका गांड बिलकुल गोल था. बेटी होने के बाद भी वोह काफी सेक्सी लगती थी. लेकीन इसके पहले मैंने उन्हें कभी ऐसे देखा नहीं था. वह मेरे एक दोस्त की तरह थी.

यह तब की कहानी हैं जब डेल्ही में काफी गर्मी पर रही थी. क्योंकी मेरा एक्साम निकट था इसलिए मुझे तेर्रस का रूम मिल गया था ता की मैं मन लगा के पढ़ सकू. परिवार में एक शादी का प्रोग्राम था. इसलिए घर के सब लोग जा रहे थे. मैं नहीं गया क्योंकि मेरे एक्साम सर पे थे. और मेरा ख्याल रखने के लिए मेरी चाची भी नहीं गयी. और गुडिया की तबियत भी कुछ अच्छी नहीं थी. मैं साम को घर वालो को बस स्टेशन छोड के घर आ गया. गुडिया की तबियत ठीक नही थी तो चाची ने कहा डॉक्टर के पास चलते हैं. मेरे पास मोटर साइकिल थी तो बोला आप तयार हो जाओ फिर चलते हैं. वोह अपने कमरे में चली गयी.थोरी देर बाद वोह तयार होके बाहर आ गयी. उन्होंने सलवार सुइट पहना था. और अपनी चूची पे दुप्पटा डाल रखा था. उस ड्रेस में वो काफी अछी लग रही थी.

साम के ७ बजे होंगे और हम मोटर साइकिल पे डॉक्टरसे मिलने के लिए चल पड़े . कुछ ३० मिनट की दुरी पे डॉक्टर था. हम वहां ७:३० तक पहुँच गए. काफी लाइन लगी थे डॉक्टर से मिलने के लिए. थोडा इन्तेज्ज़ार करने के बाद हम डॉक्टर से मिले. उसने कहा की गुडिया को बुखार हैं, थोडा खाने पे ख्याल रखना और बोला हो सके तो कुछ दिनों तक स्तन का दूध ही पिलाना . फिर हम दवा लेके वहां से निकले . रात के ९:३० बजे होंगे औत थोरी थोरी बारिस होने लगे थी.मैं बाइक जोर से चला रहा था ताकि हम भींग न जायं. तभी अचानक से एक कार ने मेरा रास्ता काट दिया और मेरा बैलेंस गड़बड़ा गया. मैं बाइक लेके गिर पड़ा और चाची मेरे ऊपर आ गिरी. मैं मुह के बल गिरा और वो मेरे ऊपर आ गिरी और पहली बार मैंने उनकी चूची महसूस की उनकी चूची काफी नरम थी बात उस वक़्त उस सब का टाइम नहीं था. मैं उठा और उनको भी उठाया. मैंने उनसे पुछा की चोट तो नहीं लगी उन्होंने कहा थोरी सी लगी हैं टांगो में . गुडिया ठीक थी. मैंने उनसे कहा अब की बार दोनों तरफ टांग कर के बैठो . मैंने गुडिया को सामने ले लिया और वोह मेरे पीछे आ गयी. उनको सायद काफी चोट लगी थी, उसने दोनों हाथ मेरे कंधे पे रखे और कहा चलो घर. क्योंकी गुडिया सामने थी तो बार बार उनके चूची मेरी पीठ को छु रही थी. मुझे मज़ा आने लगा. मैंने एक दो बार जान भुज के भी ब्रेक मारा. हर बार उनकी दो नरम नरम चूची मेरी पीठ को छु रही थी .थोरी देर में घर आ गया. मैंन बाइक की सवारी के बहुत मज़े लिए. पहले बार लग रहा था की घर थोडा और दूर होता तो अच्छा होता.

हम लोग घर के अंदर गए. चाची सोफे पे जाके बैठ गई . उसे सायद काफी दर्द हो रहा था. मैंने पुछा कहा पे चोट लागी हैं, तो उन्होंने कहा घुटने के ऊपर. मैंने कहा मुझे दिखाओ ज़रा इस पे वोह थोरा असमंजस में पड़ गयी क्योंकी चोट उनकी जांघ पर लगी थी और सायद वो मुझे अपनी जांघ दीखाने में सरमा रही थी. मेरे बार बार बोलने पे वो मान गयी. उसने कहा की कपडे बदलने के बाद मैं देख सकता हूँ. फिर वो अपने कमरे में चली गई . थोरी देर बाद ड्रेस बदल के बाहर आयी. उसने एक रात में पहनने की क़मीज़ पहन रखी थी जो उनके गले से लेकर पाऊँ तक आ रही थी. वोह सोफा पे आके बैठी,मैंने उनको बोला अब दिखाओ तो उन्होंने कहा की ठीक हो जायेगा पर मैं बोलता ही गया. फिर वो मानगई और अपना गाउन ऊपर करने लगी.धीरे से उसने अपना गाउन घुटने तक ऊपर किया. चोट घुटने से थोरी ऊपर लगी थी. अभी मेरे सामने उनकी नंगी टांग दिख रही थी. मैंने उनका गाउन लेके थोडा ऊपर किया तो मुझे चोट दिख गया. काफी कट गया था. मैंने बोला की मैं दुकान से दवाई ले के अता हूँ. फिर मैं जा कर दवाएं ले आया. मैं जब घर में घुसा तब वो खाना बना रही थी. मैंने बोला मैं कुछ पट्टी ले आया हूँ ताकी चोट के ऊपर लगा सको. उसने बोला ठीक हैं पहले खाना खा लेते हैं फीर पट्टी बाँध देना लकिन मैंने कहा नहीं अभी करते हैं. फीर उसने बोला ठीक हैं और आके सोफा पे बैठ गई . मुझे अभी बहुत मज़ा आ रहा था क्योंकी मैं एक बार फीर उनकी नंगी जांघ को देख पा रहा था .

मैं सोफे के निचे बैठ गया और उसको गाउन उठाने को कहा. धीरे धीरे उसने गाउन को घुटने के ऊपर किया. उनकी टाँगे बिलकुल साफ़ थी , एक भी बाल नहीं था. उनकी जांघ बहुत गोरी और मक्खन क़ि तरह नरम थी उनकी जांघ देख के मेरे सब रिश्ते नाते खिड़की के बाहर चले गए. मैं उउनकी सेक्सी जांघो को निहारने लगा. फीर उनसे बोला की चोट क्या ज्यादा हैं उन्होंने बोला नहीं ज्यादा गहरा नहीं हैं. फीर मैं उठा और थोरा गरम पानी ले आया ताकी चोट को साफ़ कर सकू . एक कटोरी में थोरा गरम पानी लाया और साफ़ करने लगा. जब जब मैं उनकी जांघो को छु रहा था तो मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. और इसी मज़े में गलती से गरम पानी हाथ से गिर गया और उनके गाउन पे जा गीरा.पानी काफी गरम था और उन्होंने एक झटका सा दिया. उस झटके में उसका गाउन थोडा ऊपर हो गया और क्योंकी मैं निचे बैठा था, मुझे उनकी पैन्टी दिख गई . उसने लाल रंग की पैन्टी पहने थी. मुझे यह दृश्य कुछ पलो के लिए ही देखने को मिला. लेकिन उस में मैंने उनकी चुत को देख लिया था. उनकी चुत के वहां बाल बिलकुल नहीं थे. बिलकुल साफ़ थी . वो पक्का चुत के बाल काट देती थी. इससे जादा मुझे कुछ नहीं दिखा. उसके गाउन पे पानी आ गया था तो उसने अपनी दूसरी टांग पर से भी गाउन उठा लिया. अभी वो दोनों जांग तक नंगी थी. मैं भगवान को धन्वाद दे रहा था एक्सिडेंट के लिए. उसके बाद मैंने उनकी चोट पे दवाई लगाई. उन्हें काफी दर्द हो रहा था. मैंने बोला अभी मैं इस्पे पट्टी कर देता हूँ. तो चाची ने बोला ठीक हैं. मैंने उनको टांग थोरा उठाने के लिए बोला ताकी मैं पट्टी बांध सकू. उन्होंने वैसे ही किया और फीर से मेरी आखों के सामने ज़न्नत दिख रही थी . उनका गाउन उठ गया और उनकी चुत मुझे दिखने लगी .

मैंने उनको बोला की तुम टीवी देखो तो सायद जादा दर्द नहीं होगा, असल मेरा प्लान था क़ि वो आराम से टीवी देखे और मैं आराम से उनकी चुत देखू. मेरा प्लान चल गया और वो टीवी देखने लगी. मैं भी आराम से उनकी चुत देखने लगा. उन्होंने एक लाल चड्डी पहनी थी जो काफी अच्छी ब्रांड का लग रही थी . चड्डी थोड़ी पारदर्शी थी और मैं उनकी चुत उसके अन्दर से देख सकता था. चाची की चुत काफी टंच थी . वो टीवी देखने में व्यस्त थी और मैं भी मोका पा के उनकी चुत देख रहा था. उनकी चुत काफी पींक रंग की थी . मेरा लंड तो ९० डिग्री पे खड़ा हो चूका था. थोरी देर बाद उन्होंने पुछा क़ि हो गया. मैंने फीर जल्दी से पट्टी लगाई और अपने कमरे में चला गया. मैंने तुरंत अपने खड़े हुएलंड को निकाला और हिलाने लगा . थोरी देर में मैंने अपना सारा माल नीकाल दिया. चाची की चुत मेरे आँखों के सामने अभी भी झलक रही थी . फीर थोरी देर बाद मैं निचे आया. चाची तब खाना लगा रही थी. मैंने पुछा गुडिया कहा हैं तो उन्होंने बोला वो तो सो गयी. अभी मेरे मन में एक ही बात चल रही थी की कैसे फिर से चाची की चुत देखू. फीर मैंने एक प्लान सोचा, की अगर मैं चाची को मेरे कमरे में सोने के लिए मना लू तो रात को सोने के बाद मैं कुछ और कर सकता हूँ. मैंने चाची को बोला की गुडिया की तबियत भी ठीक नहीं हैं और आपको भी चोट लगी हैं, इसलिए आज आप लोग मेरे कमरे में सो जाओ ताकी कुछ जरूरत पड़ने पर रात को मैं मदद कर सकू. उन्होंने पहले तो न बोला फीर थोडा बोलेन पर मान गई. मैं बहुत खुस हो रहा था की मेरा हर प्लान कामयाब हो रहा था.. फीर हम खाने के लिए बैठे . फीर अचानक उन्होंने कहा की मैं बहुत अच्छा हूँ और उनका बहुत ख्याल रखता हूँ.. उन्होंने यह भी कहा की मैंने अपने चाचा जैसा नहीं हूँ.. पता नहीं उन्होंने यह क्यों कहा लेकिन जो भी हो मुझे बहुत अच्छा लगा सुन के.. फीर खाने के बाद उन्होंने बोला की गुडिया को लेकर ऊपर जाओ और वो बाकी के काम ख़तम कर के १० मिनट में आ रही हैं. मैंने भी वैसा ही किया. मैंने गुडिया को मेरे बिस्तर पे सुला दिया. और मैं अपनी पढाई वाली टेबल पे जा बैठा. थोड़ी देर में चाची आ गयी. उसने अपना गाउन बदल दिया था, क्योंकी उस पे तो मैंने पानी गीरा दिया था. यह गाउन भी कुछ वैसा ही था लेकिन इस में सीने के ऊपर की तरफ कुछ बटन थे. सायद रात को गुडिया को दूध पिलाने के लिए उसने ऐसा गाउन पहना था. मैं बहुत खुस था उसे देख के.

फीर वह बेड के एक तरफ जाकर सो गई . मैंने सारे लाइट बंद कर दिए और अपने टेबल का लम्प जला दिया. गुडिया बीच में सो रही थी और चाची एक तरफ सो रही थी. मेरा टेबल उसी तरफ था. वो सर पे एक हाथ रख कर सीधे हो के सो रही थी. मैं अपनी किताब छोड़ के सिफ चाची को ही देख रहा था. उनकी दोनों चूची गाउन के ऊपर उभर के आ रही थी . उनका पेट भी एक दम चिकना था. मैंने कभी

चाची को इस नज़र नहीं देखा था. लेकिन अभी मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. थोरी देर बाद अचानक उन्होंने मुझे आवाज़ दी और कहा क़ि एक तकिया ले आओ ताकी वो अपनी टांगो को उसपे रखे. मैंने एक बड़ा सा तकिया ला दिया. फीर मैंने उनसे कहा की अपनी गाउन को थोडा ऊपर कर ले ताके चोट खुले में रहे. चोट तो एक बहाना था मैं तो उनके नंगी जांघ देखना चाहता था. इस बार चाची ने एक बार में ही मेरी बात मान ली . उन्होंने अपनी गाउन को ऊपर कर लिया और अपनी नंगी जांघ को मेरे सामने खोल दिया. मेरा लंड फीर से खड़ा हो गया. गरमी भी काफी थी, मैंने सोचा टोइलेट जाकर थोडा लंड को आराम दे आता हूँ. गरमी काफी थी और कुलर चल रहा था. मैंने टोइलेट जाने से पहले कुलर को चाची के तरफ कर के मैं टोइलेट चला गया. अन्दर जाकर मैं नंगा हो गया और शॉवर के निचे खड़ा हो गया. मेरा लंड खड़ा था फटने की हालत में था. मैं चाची की चुत को सोच कर लंड को जोर जोर से हिलाने लगा. दो मिनट में मेरा सारा माल बाहर आ गया. फीर नहा के मैं बाहर निकला.

बाहर आने के साथ मैंने जो देखा मेरे तो होश उड़ गए. कुलर की हवा की वजह से चाची का गाउन काफी ऊपर जा चूका था. उसकी जांघ पूरी तरह से नंगी थी. मैंने तुरंत जा के अपनी टेबल की लाइट भुजा दी . फीर वापस आ के बेड़ के नीचे बैठ गया. वहां से मुझे उनकी पूरी चुत और गांड दिखने लगी . चाची ने वही लाल चड्डी पहन रखी थी. चाची एक तरफ मुड के सो रही थी और मुझे उनकी गांड भी दिख रही थी . उनकी चड्डी उनकी पूरी गांड को

कवर नहीं कर रही थी . उनकी चड्डी वैसे वाली थी जो गांड के बीच में घुस जाती हैं. चाची की लगभग पूरा गांड ही दिख रही थी . उनकी गांड के गोलाई देख के मैं पागल हो रहा था. मैं उनकी गांड को छूना चाहता था. फीर मेरी नज़र उनकी चुत पर गयी. उसकी चुत बड़े बड़े को मदहोश कर सकती थी . उनकी चुत का उभार चडी के ऊपर से दिख रहा था. अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था.लेकिन मैं थोरा डरा हुआ भी था के कैसे मैं उनकी गांड और चुत पर हाथ फेरु.

क्रमशः...............

 


चुदासी चाची --2


गतांक से आगे...............................

मैं अपने बेड़ के तरफ जा कर सो गया और प्लान बनाने लगा. थोरा डर भी था की अगर चाची को पता चल जाये और वो ना माने और सब को बता दे तो मेरा तो वाट लग जायेगा. लेकिन मैं फीर भी चाची को छूना चाहता था.मैं जहा सो रहा था वहां से चाची के नंगी जांघ तो दिख रही थी लेकिन चड्डी नहीं दीख रही थी . मैंने बहुत हिम्मत कर के अपना हाथ उनकी कमर पे रखा. मेरे हाथ काप रहे थे डर के मारे. मैंने काफी देर हाथ वही रखा फीर जब लगा के चाची गहरी नींद में हैं. फीर मैं बहुत धीरे धीरे अपना हाथ नीचे ले जाने लगा. कमर से उनकी गांड तक का सफ़र लगभग १५ मिनट में पूरा किया. अभी मेरा हाथ उसके गांड के ऊपर था. धीरे धीरे मैं उनकी गांड को सहलाने लगा. उनकी गांड और मेरे हाथ के बीच में सिर्फ उनका गाउन और एक चड्डी ही रह गयी थी . थोरी देर गांड के ऊपर हाथ से सहलाने के बाद मैं चाह रहा था की उनकी गांडमें उंगली डालू. धीरे धीरे मैं उनका गाउन उपर की तरफ खेचेन लगा. थोरी देर खेचने के बाद मैं उनकी गांड के ऊपर से गाउन हटाने में कामयाब रहा. अभी मैं उनकी पूरी गांड देख सकता था.मैंने उनकी नंगी गांड पे अपना हाथ रखा. ऐसा लगा जैसा ४४० का वोल्ट लग गया हो. उसका गांड एकदम टंच था. उसके गांड के उभार, गांड की गोलाई सब मस्त था. मैं पहली बार कीसी औरत का गांड पे हाथ फेर रहा था. मैं खुशी से पागल हो गया. और उनकी चड्डी भी इतनी कम गांड को कवर कर रही थी की पुछो मत. उसकी चड्डी उसके गांड के बीच में ही थी बस. मैंने मन भर के उनकी गांड पे हाथ फेरा. फीर मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ी तो मैंने उनकी गांड के बीच उंगली डालने की कोसिस सुरु की. चड्डी उनके गांड के बीच थी. मैंने अपनी एक उगली से चड्डी के अन्दर हाथ डाला. मैं उनकी गांड का छेद खोज रहा था. क्योंकी गुडिया बीच में सो रही थी मुझे थोरी दिक्कत हो रही थी उनकी गांड के अन्दर उंगली डालने में . फीर मैंने सोचा की अब थोरी देर उनकी चूची पर भी हाथ फेरु. मेरी हिम्मत काफी बढ़ गयी थी. चाची अभी भी काफी गहरी नींद में सो रही थी. सो मैंने मोका देख कर ऑपरेशन चूची सुरु किया.

मैंने चाची की गांड से हाथ नीकाल के मैंने अपना हाथ उनकी कमर पे रखा. मैं यह भी देख़ रहा था की चाची जग न जाय. फीर थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद मैं अपना हाथ धीरे धीरे उनकी चूची की तरफ ले गया. थोरे ही समय में चूची के पास अपना हाथ ले जाने में कामयाब हो गया. मैं चूची को महसूस करने लगा. उसने ब्रा पहन रखी थी. मैं उनकी चूची के ऊपर हाथ फेरने लगा. उनकी चूची बहुत गोला कार थी. मैं गाउन के ऊपर से ही चूची को सहलाने लगा. ब्रा ने मस्त चूची को बिलकुल सही जगह पे रखा था. मैं अब उनकी चूची का नीपल तलाश ने लगा. पर मुझे उसमे कामयाबी नहीं मिल रही थी. गुडिया बीच में सो रही थी तो और मुस्किल हो रहा था. फिर मैं उसके गाउन के ऊपर के बटन खोले ने लगा, मैंने उसके दो बटन खोल दिए. अब मेरा हाथ उसकी चूची के ऊपर था. मैंने अपनी एक उंगली उनकी दोनों चूची के बीच घुसा दी . उनकी चूची बहुत नरम थी . मेरा लंड पागल की तरह खड़ा हो गया. उसके बाद मैं अपनी उंगली को उनकी चूची के अन्दर डालने लगा. मुझे उसका नीपल चाहिए था. मैं लगबघ उसके नीपल के पास उंगली दिया ही था क़ि इतने में गुडिया हिलने लगी. मैंने फटा फट अपना हाथ उनकी चूची से नीकाल लिया. और तुरंत गुडिया रोने लगी . उसे सायद भूक लगी थी. मैं चुप चाप सोने का नाटक करने लगा. और अपनी बंद आँखों के किनारे से देखने लगा की चाची क्या करती हैं .

गुडिया के रोने से चाची उठ गई , और उसने देखा के उसकी पुरी गांड नंगी हालत में थी. उसने अपने गाउन के बटन भी खुले पाए पर उसने कुछ किया नहीं. उसने अपनी गांड भी खुले हालत में ही छोड़ दी . अब मुझे इंतज़ार होने लगा की कब चाची अपनी चूची नीकाल के गुडिया को देगी. मैं सब देख रहा था. तभी वो अपने गाउन के सारे बटन खोलने लगी. मेरा दिल ट्रेन की तरह धरक रहा था. पहली बार मैं किसी की चूची देखने वाला था. फीर उसने अपने ब्रा का हूक भी खोल दिया और अपनी एक चूची को नीकाल के हाथ में ले लिया. उसका चूची बहुत मस्त था. बिलकुल गोल और सफ़ेद था. उसके नीपल बहुत बड़े थे . चूची नीकाल के वो सो गई और गुडिया दूध पीने लगी. मुझे मेरे आखों पे बिस्वास नहीं हो रहा था की मैं अपनी चाची की चुत, गांड और चुची देखा रहा था. गुडिया के दूध पीने के आवाज़ सुन के मुझे भी उसका दूध पीने की इच्छा होने लगी . मैं दोनों के सोने का इन्तेज्ज़ार करने लगा. कुछ १० मिनट के बाद सब सन्नाटा हो गया. मैंने थोरा उठ के देखा तो चाची सो चुकी थी . उनकी चुची गाउन से बाहर लटक रही थी. मैं धीरे धीरे चाची की चुची पे हाथ फेरने लगा. उसकी चुची नहुत नरम थी, मेरा लंड तो मेरे पैन्ट को फाड़ के बाहर आने लगा. उसके बाद धीरे से मेरा हाथ उसके नीपल पर गया. जैसे ही मैंने उसके नीपल को छुआ उसका नीपल एकदम से कड़ा हो गया. उसके नीपल पर एक दो बूँद दूध के थे. मैंने उसका वो दूध लेके अपने मुह में डाला. ऐसा दूध मैंने कभी नहीं पीया था. मुझे उसका नीपल चुसना था पर गुडिया बीच में थी सो मैं ठीक से उसके पास नहीं आ रहा था. मैंने दूसरी चुची भी गाउन से नीकाल ली . दोनों चुची सामने नंगी हालत में थी . मैंने उसके नीपल पे चुटी काटी जिससे वो थोरा सा हिल गयी. पर उसने कुछ किया नहीं. सायद उसे भी मज़ा आ रहा था. लेकिन तभी गुडिया फीर से जाग गयी. मैंने अपना हाथ तुरंत वापस ले लिया. थोड़ी ही देरमें चाची उठ गयी और उठते ही उन्होंने देखा की दोनों चुची बाहर लटक रही हैं. लेकिन उसने उसे वैसे ही छोड़ दिया. उसने गुडिया को गोद में ले लिया और थोरी ही देर में गुडिया सो गयी.

उसके बाद वो उठ कर टोइलेट की तरफ चली गई . मैं अपनी बंद आँखों से सब कुछ देख रहा था. थोड़ी देर में चाची टोइलेट से आई और गुडिया को एक तरफ कर के बीच में सो गई . वो बिलकुल मेरी बगल में आके सो गई . मुझे तो बिस्वास नहीं हो रहा था. सायद उसे भी मज़ा आ रहा था. वो सीधे होके अपने सर पे हाथ रख कर सो गई . थोड़ी देर तक मैं शांत रहा और फीर चुपके से अपना हाथ उनके पेट के ऊपर रख दिया. धीरे धीरे मैं अपना हाथ ऊपर की तरफ ले गया. मेरा हाथ उसके चुचे के नीचे तक चला गया. मुझे थोरा नरम नरम महसूस होने लगा. थोरा और ऊपर गया तो पता लगा की उसका ब्रा नहीं था. सायद टोइलेट में जाकर उसने अपना ब्रा खोल दिया था. सायद उसे भी यह सब अच्छा लग रहा था पर वो सायद यह सब बस नींद के बहाने से करना था. मुझे भी मज़ा आ रहा था. और उपर गया तो सारे बटन भी खुले थे. मैंने सीधा उसके गाउन के अंदर हाथ डाल दिया. और उसकी दोनों चुचियो के साथ खेलने लगा. चूची बहुत नरम थी . मैंने उनके नीपल पर हमला कर दिया. थोड़ी ही देर में उनकी चूची से दूध आने लगा. उसका पूरा गाउन दूध से भीगने लगा था. मुझे उसका दूध पीना था सो मैं धीरे धीरे गाउन को उसके कंधे पर से खीच ने लगा. थोरे मुश्किले के बाद उसका एक तरफ का स्तन मैंने हाथ से नीकाल दिया था. उनकी चूची को मैंने पुरी तरफ ने नंगा कर दिया था. एक तरफ से गाउन खोलने के बाद मैंने दूसरी चूची को भी बाहर नीकाल दिया. फीर मैं थोडा उठ के बैठ गया और उसकी नंगी छाती की तरफ देखने लगा. दोनों चूची बिलकुल नंगी हालत में लटक रही थी, मैंने हिम्मत कर के उसके नीपल पे अपना मुह रखा. ऐसा करते ही वो थोडा सिहर गए लेकिन फीर भी सायद सोने का नाटक कर रही थी, फीर धीरे धीरे मैं उसका नीपल चूस ने लगा. वो कभी कभी थोड़ी आवाज़ कर रही थी मगर अभी भी उनकी आँखे बंद थी. चूची से दूध निकलने लगा और मैंने खूब सारा दूध पिया. दोनों चुचियो के साथ मैं काफी देर तक खेलने के बाद मेरा अब उनकी चुत के साथ खेलने का मन हुआ.

फीर मैं उनकी चूची को उसी नंगी हालत में छोड़ के अपना हाथ उसक़ि चुत के ऊपर ले आया. उसका गाउन काफी ऊपर तक उठा था. मैंने पहले उसकेगाउन के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा. मैं एक उंगली उसके गाउन के ऊपर से ही उनकी चुत में डालने लगा. मेरी उंगली थोड़ी अंदर भी घुस गया. उसकी चुत काफी गीली थी . फिर मैं गाउन को ऊपर खीच ने लगा. थोड़ी देर में उसका गाउन चुत से ऊपर हो गया. उसकी पुरी नंगी टांग मेरे सामने दिखने लगी. सिर्फ एक लाल चड्डी चुत को छुपा रही थी. मैंने कभी सोचा भी नहीं था की चाची को मैं इस तरह नंगा करूँगा. ऊपर उनकी चुची नंगी थी और नीचे उसके बस एक छोटे सी चड्डी बची थी, और ये सब तब हो रहा था जब वो सायद नींद में थी. अब मुझे उनकी चड्डी उतार नी थी, सो मैं चड्डी को नीचे की तरफ खीच ने लगा. उसकी चड्डी उसकी गांड में फसी थी. मैं उसको निकाल नहीं पा रहा था, लेकिन तभी चाची ने अपनी गांड को ऊपर किया थोरा सा और चड्डी निकल आयी. अब मुझे पाक्का यकीन हो गया था की वो भी यह सब पसंद कर रही हैं.फीर धीरे धीरे मैंने उसका चड्डी को टांगो से निकाल दिया. क्या दृश था वो . खुली हुई चुत मेरे सामने पड़ी थी . मैं तो पागल हो गया उनकी चुत देख के. चुत पे एक भी बाल नहीं था . बिलकुल साफ चुत थी . मैं चुत के ऊपर वाले हिस्से को चाटने लगा. उसका पूरा सरीर सिहर उठा.

फीर मैंने उनकी टांगो को फैला दिया ताके मैं उनकी चुत मार सकू. उसने कोई विरोध नहीं किया जब मैं उनकी नंगी टांगो को फैला रहा था. पूरी खुली चुत मेरे सामने थी . मैं दोंनो टांगो के बीच घुस गया और अपना मुह उनकी चुत के सामने ले आया. फीर मैंने अपनी एक उंगली चुत के अंदर डाल दी जिससे वो सा आवाज़ भी करने लगी . मैंने उठ के देखा तो आँखें अभी भी बंद थी और फीर मैं अपने काम में लग गया. मैंने अपनी उंगली पुरी चुत के अंदर घुसेड दी. उसकी चुत से पानी निकल ने लगा. फीर मैंने अपनी एक और उंगली चुत में डाल दी . मैं उसकी चुत के अंदर ग़दर मचा रहा था. उसकी चुत से सफ़ेद पानी नल की तरह निकल ने लगा. मैंने अपना मुह उसकी चुत के ऊपर रखा और उसकी चुत का पानी पीने लगा. उसका पूरा सरीर कापने लगा था. फीर मैंने अपनी उंगली थोड़ी टेढ़ी की और उसकी चुत के ऊपर वाले हिस्से को चुटी काटने लगा. वो हिस्सा थोरा दाने दार था. बाद मैं पता चला वो जी पॉइंट कह लाता हैं. वहां उंगली डालते ही वह और हिलने लगी . मैं समझ गया उसे मज़ा आने लगा था. फीर मैंने अपने उंगली चुत से निकाली और उसकी चुत को मैंने फैला दिया. मेरी आखों के सामने उसक़ि फैली हुई चुत दिखने लगी . फीर मैंने अपनी जीव उसकी खुली हुई डाल दी वो बिलकुल हील ही गयी. मैं अपने हाथो से उसकी चुत को फाड़ के रखा था और मेरा मुह उसकी चुत में घुसेर दिया. मैं चुत को चूस ने लगा, चुत से पानी निकल ने लगा और मैंने एक भी बूँद पानी का बर्बाद नहीं होने दिया. मैंने अपनी पुरी जीव उसकी चुत के अंदर डाल दी थी. मैं उसकी चुत को खा रहा था. उसने एकदम से एक जोर की सांस ली और उसकी चुत पानी से भर गई . ऐसा लगा की चुत में बाढ़ आ गयी और सारा बाढ़ का पानी मैं पी गया. फीर थोरी देर में सब शांत हो गया. मैंने भी वहीं पर अपना माल भी गीरा दिया. मुझे अभी भी बिस्वास नहीं हो रहा था की मैंने अपनी चाची के साथ ऐसा काम किया . फीर मैं उसी नंगी हालत में छोड़ के अपने जगह आ के सो गया. अपने हाथ उसके चुची पे रखे और नींद में सो गया.

अगले दिन जब सुबह मैं जागा तो देखा चाची मेरे साथ नहीं थी मुझे आज पेपर देने जाना था इसलिए मैं जल्दी से तैयार होकर पेपर देने चला गया शाम को मैं अपनी पढ़ाई करने लगा रात के नौ बजे चाची सोने क़ि तैयारी करने लगी

चाची बोली- राज! तुम्हारे लिए अलग बिस्तर लगायें या तुम मेरे साथ ही सो जाओगे? मैने कहा - जैसा आप ठीक समझें। मैं तो कहीं भी सो जाउन्गा। चाची बोली- तो तुम इसी बिस्तर पर सो जाना। फ़िर चाची अपने काम में लग गयी। रात को १० बजे चाची कमरे में आयी और साड़ी उतारते हुए बोली - राज, तुम अखबार पढ रहे हो, मैं सो रही हूं, जब तुम्हें नीन्द आये तुम सो जाना। थोड़ी देर में मैने लाईट बंद की और लेट गया। मुझे नींद नहीं आ रही थी। काफ़ी देर बाद चाची उठकर लाईट जला कर बाथरूम गयी और वापिस आकर लेट गयी। मैं जाग रहा था लेकिन आंखे बंद करके लेटा था।

कुछ देर बाद चाची बोली - राज तुम सो रहे हो? मैने अचानक जगने का बहाना किया और बोला क्या हुआ चाची?

चाची एक दम मुझ से लिपट गयी और बोली मुझे डर लग रहा है। मैने कहा- डर कैसा? पर मुझे करंट सा लगा जब उनके बूब्स मेरी छती से छुये। उनकी एक टांग मेरे उपर थी। मैने भी उनकी टांग पर एक पैर रख दिया और उनकी पीठ पर हाथ रखते हुए कहा- सो जाओ चाची। चाची धीरे धीरे मेरी बाहों मे सिमटती जा रही थी और मुझे मजा आ रहा था। धीरे से मैने उनके हिप्स पर हाथ रखा और धीरे धीरे सहलाने लगा। चाची को मजा आ रहा था। फ़िर चाची सीधी लेट गयी और मेरा हाथ अपने पेट पर रखते हुए कहा कि तुम मुझ से चिपट कर सोना, मुझे डर लग रहा है। अब मै भी उनसे चिपट गया और उनके बूब्स पर सिर रख लिया। मेरा लन्ड खड़ा हो चुका था। मै धीरे धीरे उनका पेट औए फ़िर जांघ सहलाने लगा।

तभी चाची ने अपने ब्लाउज के कुछ हुक खोल दिये यह कह कर कि बहुत गर्मी लग रही है। अब उनके निप्पल साफ़ नज़र आ रहे थे। मैने बूब्स पर हाथ रख लिया और सहलाने लगा। अब मेरी हिम्मत बढ चुकी थी। मैने उनके बूब्स को ब्लौज से निकाल कर मुंह मे ले लिया और दोनो हाथों से पकड़ कर मसलते हुए उनका पेटीकोट अपने पैर से उपर करना शुरु कर दिया। वह बोली-क्या कर रहे हो? मैने जोश में कहा- चाची आज मत रोको मुझे। उनकी गोरी गोरी जांघों को देख कर मै एक दम जोश मे आ चुका था। उनकी चूत नशीली लग रही थी। मैने उनकी चूत को चाटना शुरु कर दिया।मै पागल हो चुका था।

मैने अपने पैर चाची के सिर की तरफ़ कर लिये थे। चाची ने भी मेरि नेकर को नीचे कर लिया और मेरा लन्ड निकाल कर चूसने लगी। वह मुझे भरपूर मजा दे रही रही थी। कुछ देर बाद चाची मेरे उपर आ गयी और मै नीचे से चूत चाटने के साथ साथ उनके गोरे और बड़े बड़े हिप्स सहलाने लगा। चाची की चूत पानी छोड़ गयी। अब मै और नहीं रह सकता था, मै उठा और चाची को लिटा कर, उनकी टांगें चौड़ी करके चूत में लन्ड डाल दिया और चाची कराहने लगी। मै जोर जोर से धक्के लगाने लगा। चाची ने मुझे कस के पकड़ लिया और कहने लगी- राज एसे ही करो, बहुत मजा आ रहा है, आज मै तुम्हारी हो गयी, अब मुझे रोज़ तुम्हारा लन्ड अपनी चूत में चहिये एएऊउ स्स स्सी स्स्स आह्ह्ह ह्म्म आय हां हां च्च उई म्म मा। कुछ देर बाद मेरे लन्ड ने पानी छोड़ दिया और चाची भी कई बार डिस्चार्ज हो चुकी थी।

उस रात मैने तीन बार अलग अलग ऐन्गल से चाची को चोदा। चाची ने भी मस्त हो कर पूरा साथ दिया। तब से जब भी चाचा बाहर जाते तो हम दोनो रात को खूब मजे करते

आशा करता की आप लोगो को मेरी यह सची कहानी पसंद आई होगी
 
जवानी बड़ी जालिम

सर्वविदित है कि जवानी बड़ी जालिम होती है। ये जाने लड़कों और लड़कियों से क्या क्या करवा बैठती है। मुझे भी अपने कॉलेज के समय में एकलड़के से दोस्ती हो गई थी। उसका नाम सुधीर था। हम लोग मिलने के लिये अक्सर एक झील के किनारे आते जाते थे। यूं तो वहा कितने ही जोड़े आतेथे। पर वो सभी अपने आप में व्यस्त रहते थे। हम लोग वहां बस चाट और ठण्ड़ा ही लेते थे और बस यूँ ही बतिया कर चले आते थे।

पर हां, मेरे दिल में अब कुछ कुछ होने लगा था। मैं आज से चार साल पहले चुदाई का लुफ़्त उठा चुकी थी, पर फिर मै डर गई थी कि यदि मुझे गर्भ रहजाता तो क्या होता? पर नहीं हुआ। फिर कुछ दिन और चुदाया पर सावधानी रखी। आज फिर दिल में कुछ ऐसा ही हो रहा था। पर आजकल मैं भीऔरों की तरह पिल्स के बारे में जानती थी, और साथ में रखती थी।

एक दिन एक अच्छी अंग्रेजी पिक्चर देखने का सुधीर ने प्रोग्राम बनाया । कहता था कि मस्त मूवी है ... मजा आ जायेगा। कॉमेडी मूवी थी। मैं उसकामतलब खूब समझ रही थी। वो हॉल में मुझसे खेलना चाहता था। जैसे ही मुझे ये लगा, मेरी चूत में पानी उतर आया। मैं मजे लेने के लिये तैयार थी।मेरी चूंचिया मसलवाने के लिये तड़प उठी। मेरी चूत में कोई अंगुली करे ... हाय ये सोच कर मेरा शरीर वासना से भर उठा।

हम दोनों हाल में गये और एक कोने में बैठ गये ... कम ही लोग थे। सुधीर बहुत ही उत्तेजित लग रहा था। बार बार मूवी की तारीफ़ कर रहा था। मुझेभी लगा कि जरूर मूवी अच्छी ही होगी। मूवी चालू हो चुकी थी। मुझे अंग्रेजी कम ही आती थी सो चुपचाप बैठी रही। सो सब कुछ सर के ऊपर सेनिकल रहा था। जब सब हंसते तो मै भी हंस देती थी। जोश में सुधीर मुझे हंसते हुये कभी पीठ पर मार देता था कभी कंधे पर। पर अब तो उसने मेराहाथ भी पकड़ लिया था। मुझे झुरझुरी आने लग गई थी। मैं अपने आप को हर प्रकार से तैयार कर चुकी थी। मुझे लगा कि वो जल्दी से मेरी चूंचियाँदबा दे ... हाय राम ... मेरी चूत में अंगुली घुसा कर मस्त कर दे ... पर मैंने कुछ कहा नहीं, उसका हाथ और मेरा हाथ आपस में मिले हुये थे। वो कभीकभी मेरा हाथ दबा देता था।

अब धीरे से उसने अपना हाथ मेरे कंधे पर रख लिया। मुझे दिल में गुदगुदी सी हुई। मुझे लगा कि कुछ ही देर में वो मेरी चूंचियो पर आ ही जायेगा। पर्देपर चूमने का दृष्य चल रहा था। उसने भी मुझे गले से खींच कर अपने पास कर लिया और चुम्मा ले लिया। मै जान कर के उससे चिपक सी गई। हमारेसामने वाला जोड़ा जो साईड में सामने बैठा था, बिना किसी हिचकिचाहट के लड़की के बोबे मसल रहा था और उसे चूम रहा था। मैं तो उन्हीं को देखदेख कर उत्तेजित हो रही थी।

अचानक मुझे अब अपनी चूंचियो पर दबाव मह्सूस हुआ। सुधीर का हाथ मेरे स्तन को सहलाने लगा। हाय रे मजा आ गया ... मैं झुक कर दोहरी होगई।

"ना करो, सुधीर ... हाय हाथ हटा लो ... " मैंने भी शरीफ़ लड़की की तरह नखरे दिखाये।

"रजनी, कितने कठोर है तुम्हारे बोबे ... मस्त है यार ... " सुधीर वासना भरे स्वर में बोला।

"आह ... बस करो ... " मेरी सिसकी निकल पड़ी। पर सुधीर कहा मानने वाला था। उसका वो हाथ ऊपर से मेरी ब्रा में घुस गया और मेरी नरम नरम सीचूंचियां मसलने लगा।

उसने दूसरे हाथ से मेरा चेहरा ऊपर कर लिया और अपने होंठ मेरे होंठो से चिपका दिये। अब मेरा हाथ भी उसकी जांघो पर रेंगने लगा था। मेरे निपलकड़े हो गये थे और वो उसकी अंगुलियों के बीच में घुमा घुमा कर मसले जा रहे थे।

मेरा शरीर भी वासना से भर उठा। मैंने अपना सीना थोड़ा सा और उभार लिया ताकि वो मेरी चूंचियाँ भली प्रकार से दबा सके। उसका कड़क लंड मेरेहाथों में आ चुका था। मैंने कोशिश करके उसकी ज़िप खोल दी।

पर अन्दर चड्डी के रूप में एक बाधा और थी। जल्दी ही ये बाधा भी मैंने पार कर ली और उसका मूसल जैसा लण्ड पकड़ ही लिया। गरम गरम कड़ाडण्डा, थोड़ा जोर लगाया तो वो पेण्ट से बाहर आ गया।

"हाय रे ... ये तो बहुत मोटा है ... देखो तो कैसा हो रहा है ... " मैंने सिसकते हुये कहा।

उसके सुपाड़े के सिरे पर चिकनापन लग रहा था, शायद उत्तेजना में उसमें से चिकनाई बाहर आ गई थी। उसने भी अपना हाथ मेरी छातियों पर से हटाकर मेरी चूत पर रख दिया था। मेरी सलवार के अन्दर हाथ घुसा कर मेरी गीली चूत को रगड़ दिया।

"मैं मर जाऊंगी रे ... धीरे से करना ... ! " उसका हाथ जैसे ही मैंने अपनी चूत पर मह्सूस किया, उसे धीरे से समझा दिया। मेरी गीली चूत में उसकीअंगुली उतरी जा रही थी, मैंने भी अपनी चूत को थोड़ा सा ऊपर उठा कर उसे अंगुली घुसाने में सहायता की। मेरा जिस्म अब मीठी मीठी गुदगुदी सेभर चुका था।

"रजनी, चुदोगी क्या ... मेरे लण्ड की हालत खराब हो रही है ... " उसकी सांस फ़ूली सी लगी। उसने मेरे मन की बात कह दी। चूत फ़ड़क उठी।

"हां सुधीर ... चुदने के चूत बेताब हो रही है ... पर कैसे ... " सिसकती हुई सी बोली।

"मेरे घर चलें क्या ? वहाँ कोई नहीं है ... मस्ती से चुदना ... "

"हां हां ... जल्दी चलो ... " और हम दोनों ने खड़े हो कर अपने आप को ठीक किया और हॉल के बाहर आ गये। सुधीर वहां से सीधे अपने घर ले गया ...मैंने चेहरे पर कपड़ा बांध लिया था कि कोई पहचाने ना ... । सुधीर ने ताला खोला और हम जल्दी से अन्दर आ गये।

मुझे भी अब लग रहा था कि बस एक बार तबियत से चुद जाऊं तो मेरा जी हल्का हो जायेगा।

उसने मुझे चाय के लिये पूछा पर यहाँ चाय की नहीं चुदाने की लगी हुई थी।

"चाय छोड़ो ना सुधीर, चलो बिस्तर पर चलते हैं ... "

"रजनी ... लगता है तुम्हारा बुरा हाल है ... मेरे लण्ड को तो देखो , साला पेण्ट ही फ़ाड़ कर बाहर आ जायेगा।"

मुझे एकदम से हंसी आ गई। उसने पेन्ट की ज़िप खोल कर अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। पहली बार इतने बड़े लण्ड के दर्शन हुये। मैं जैसे ही आगेबढ़ी, उसने मुझे रोक दिया।

"पहले रजनी तुम अपने कपड़े उतारो ... तुम्हारी फ़ुद्दी देखनी है ... " सुधीर ने फ़रमाईश कर दी। मैं शरमा गई।

"धत्त ... शरम नहीं आयेगी ... ? " मैंने नारी का धर्म अदा किया।

"शरम नहीं रे ... नशा आयेगा तुम्हे नंगी देख कर ... लण्ड फ़ड़फ़ड़ायेगा ... कड़का कड़क हो जायेगा ... "

"हाय रे ... ऐसा मत बोलो ... तुम्हारा लण्ड देख कर ही मेरी फ़ुद्दी तो वैसे ही लप लप कर रही है ... "

"तो प्लीज उतारो ना ... " उसने अपना लण्ड मुझे दिखाते हुये मसला। मुझे हालांकि बड़ी शरम आ रही थी पर इस दिल का क्या करूँ, सो झिझकते हुयेमैंने कपड़े उतार ही दिये। पंखे की हवा मेरे नंगे बदन को सहलाने लगी। मैं शरम के मारे नीचे बैठ गई। पर नीचे बैठते ही मेरे चूतड़ उभर कर खिल उठे।दोनों तरबूज सी फ़ांके अलग अलग हो गई। सुधीर भी नंगा हो चुका था। उसका लण्ड मेरी गाण्ड देख कर फ़ूल उठा। उसका तनतनाता हुआ बलिष्ठलण्ड जैसे मेरी चूत को न्योता दे रहा था।

"रजनी तुम्हारा बदन तराशा हुआ है ... जरा दोनो टांगे चौड़ी करो ... अपनी फ़ूल जैसी चूत तो दिखा दो ... यूँ सिकुड़ कर मत बैठो।"

"हाय ... नहीं जी ... ऐसे तो सब दिख जायेगा ना ... " फिर भी मैंने हिम्मत करके टांगे चौड़ी करके अपनी गीली चूत खोल दी। सुधीर मचल सा पड़ा।

"रजनी, लड़कियां मुठ कैसे मारती है ... मार कर बताओ ना ... चूत में अंगुली करती हो ना ...? "

"चलो हटो जी ... मुझे क्या बेशर्म समझ रखा है ... अच्छा तुम मुठ मार कर बताओ ... "

सुधीर ने अपने मोटे से लण्ड की सुपाडे पर से चमड़ी ऊपर हटाई और लण्ड को अपनी मुठ्ठी में भर लिया और उसे पकड़ कर हाथ ऊपर नीचे चलानेलगा। उसका सुपाड़ा लाल होने लगा और फ़ूलने लगा। मेरे दिल पर छुरियाँ चलने लगी ... हाय चूत की जगह मुठ में उसका लण्ड मसला जा रहा था।उसके सुपाड़े पर चिकनाई की दो बूंदें तक उभर आई थी। मेरा हाथ अपने आप ही चूत की तरफ़ बढ़ गया और दाने पर आ गया। उसे मैं हल्के हल्केसहलाने लगी। मेरे मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। मेरी अंगुली भी चूत में घुसने लगी।

"हां ... हां ... रजनी, और करो ... आपकी चूत कैसी लपलपा रही है ... " उसकी आवाज में वासना भरी हुई थी।

मेरे बाल बिखर गये थे, लटें माथे पर लहराने लगी थी। मेरी दोनों टांगें कांपने लगी थी। चूत में अंगुली सटासट अन्दर बाहर जा रही थी। उधर मेरीनजरें सुधीर पर पड़ी, वो जोर जोर से लण्ड पर हाथ चला रहा था। उसका सुपाड़ा लाल हो गया था, फ़ूल कर मोटा हो चुका था। उसकी आंखे नशे में बंदसी हो गई थी। हम दोनों एक दूसरे को देख कर मुठ मारे जा रहे थे।

"हाय, सुधीर और जोर से मुठ चलाओ, क्या लण्ड है राम ... चला हाथ जोर से ... आह्ह्ह्ह्ह"

मैं ज्यों ही उठ कर उसके पास पहुंची,

" रजनी, ऐसे ही मजा आ रहा है ... तुम वहीं जाओ ... तुम उधर मुठ मारो ! मैं इधर मारता हूँ ... चल घुसा दे फिर से अपनी अंगुली ... " उसकी सांस फूलउठी थी।

वो मना करता रहा पर मैंने जाकर उसके लण्ड को अपने दोनों हाथो से पकड़ लिया और उसके लाल लाल फ़ूले हुये सुपाड़े पर अंगुलियाँ फ़िराने लगी।उसके सुपाड़े को मलने से उसमें से चिकनाई की दो बूंदें और निकल आई। आनन्द में वो डूब रहा था। मुझे ऐसा करते देख उसने मेरी चूंचियों को पकड़लिया और उसे दबाने लगा और निपल को अंगुलियों से हल्के हल्के दबाने और घुमाने लगा। मेरी मस्ती और वासना, मर्द के हाथों से मसले जाने सेऔर बढ़ती गई।

अब वो मेरे निपल जोर जोर से मलने लगा था। मैं नशे में उसके लण्ड को जोर जोर से मुठ मारने लगी थी। मेरे हाथ बहुत ही तेजी से उसके लण्ड परऊपर नीचे हो रहे थे। उसकी सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी।

अचानक उसने मेरी फ़ुद्दी में अपनी दो अंगुलियाँ डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा। इस से मेरी उत्तेजना तेजी से बढ़ने लगी, लगा कि चुद रही हूँ।मुख से आह की आवाजें निकलने लगी। शायद सुधीर को अहसास हुआ कि यदि ऐसे ही उसका लण्ड मेरे हाथों में फ़िसलता रहा तो उसका वीर्य निकलजायेगा। उसने मुझे नीचे दबा लिया और मुझसे लिपट पड़ा। हमारे नंगे शरीर बिस्तर में आपस में रगड़ खाने लगे।

उसका लण्ड मेरी चूत को ठोकर मारने लगा। मेरा मन सिहर उठा, लौड़ा लेने को आतुर हो उठा। मेरी चूत उसके लण्ड को लपकने की कोशिश कर रहीथी, और अन्त में सफ़ल हो ही गई। उसका लण्ड चूत में समाता चला गया। मेरे मुख से खुशी की सीत्कार निकल पड़ी। सुधीर भी तड़प उठा। ऊपर सेउसने अपने शरीर का बोझ मेरे पर डालना आरम्भ कर दिया। मैं दबती गई। आनन्द मेरे जिस्म में भरता गया।

सुधीर ने अब अपने चूतड़ ऊपर खींच कर फिर से मेरी चूत पर पटक दिए ... उसका लण्ड मेरी चूत में जड़ तक चीरता हुआ घुस गया। मुझे थोड़ा सा दर्दहुआ पर कसक भरी मिठास का अहसास अधिक हुआ।

"और जोर से चोद दे मेरे राजा ... हाय ... लण्ड़ पूरा घुसेड़ दे रे ... मेरी मांऽऽऽऽऽऽ ... " मैं आनन्द से सिसकने लगी।

"ले ... मेरी रजनी ... मेरा पूरा लण्ड ले ले ... तू तो मजे की खान है रे ... " वो मुझे भींच भींच के चोदने लगा। मेरी चूंचियों की हालत खींच खींच कर खराबकर दी थी। मैं नीचे से जोर से अपने चूतड़ उछल कर लण्ड ले रही थी। साला क्या चूत में गुदगुदी मचा रहा था। उसका मोटा लण्ड मेरी चूत की दीवारोंसे रगड़ता हुआ चोद रहा था। अचानक मेरे शरीर में ऐठन सी हुई और मुझे लगा कि मैं तो गई ... ।

तेज मीठी सी आग भड़की और फिर जैसे पानी के ठण्डे छींटे पड़े ... मेरा रज छूट पड़ा। मेरी चूत पानी से भरने लगी। मेरी चूत लहरा लहरा कर जोरलगा कर पानी छोड़ रही थी। पर उसका लण्ड था कि मेरी चूत को रोंदे जा रहा था।

मेरे मुख से अब मस्ती की सिसकियां की जगह दर्द की कराह निकल रही थी। इतनी कस कर चुदाई मेरी आज तक नहीं हुई थी। पर आह्ह्ह रे ... मेरीचूत में उसके लण्ड ने ठण्डक कर दी। मुझसे लिपटते हुये उसने अपना वीर्य मेरी चूत में निकाल दिया। मैंने अपने दोनों हाथ फ़ैला दिये और बिस्तर परपसर गई। उसका लण्ड मेरी चिकनी चूत में से फ़िसल कर बाहर आने लगा। उसके सिकुड़ कर निकलने से मेरी चूत में गुदगुदी सी हुई और लण्ड बाहरआ गया। चुदने के कारण मैं मस्ती में बस आंखे बंद करके यूँ ही पड़ी थी। सुधीर मेरे ऊपर से हट गया और मेरी चूत पर लगे वीर्य और चिकनाहट कोचाटने लगा। उसके चाटने से मुझे चूत में फिर से गुदगुदी उठने लगी ... कुछ ही देर में मुझे फिर से तरावट आने लगी। मैंने सुधीर को हटा दिया औरउसके लण्ड पर लगे वीर्य का थोड़ा सा रस चाटने के लिये उसका लण्ड मुख में घुसा लिया और उसे चूसने लगी। कुछ ही देर में उसका लण्ड फिर सेटनटना उठा। मैंने मुठ मारते हुये उसे और उत्तेजित किया। फिर सीधे खड़ी हो गई।

"बस सुधीर अब चलें ... देखो शाम होने को है ... "

"अच्छा ... बस एक किस ... फिर तुम्हें छोड़ आता हूँ।"

पर सुधीर के मन की इच्छा कुछ और ही थी। मैं जैसे ही पलटी, वो मेरी पीठ से चिपक गया। उसका लण्ड मेरी गाण्ड में घुसने के लिये जोर लगानेलगा।

"अरे नहीं करो सुधीर ... मुझे लग जायेगी ... "

"नही रजनी , तुम्हारी गाण्ड गजब की है ... बिना मारे मुझे तो चैन नहीं आयेगा !"

मेरी गाण्ड के छेद में लण्ड का घर्षण होने लग गया था। मैंने नाटक करते हुये अपनी दोनों टांगे चौड़ी कर दी। मुझे वास्तव में आनन्द आने लगा था।अभी मेरा गाण्ड का छेद तो प्यासा था ही ...

"अरे यार फ़ट जायेगी ना तुम्हारे मोटे लण्ड से ... हाय रे धीरे से करो ...

आआईईईई ... मर गई रे ... "

उसका सुपाड़ा छेद में दाखिल हो चुका था। मुझे बड़ा सुहाना सा लगा। मैंने मुस्करा कर पीछे सुधीर को देखा, वो भी खुश था कि उसे एक कॉलेज गर्लकी ताजी गाण्ड मारने को मिल रही थी ... हम दोनों ही मस्त हो रहे थे ...

पीछे से मेरी गाण्ड चुदी जा रही थी ... हम दोनों खुशी में किलकारियां मार रहे थे ... अपने चूतड़ों को हिला हिला कर चुदाई का मजा ले रहे थे ... मस्तीमें डूबे जा रहे थे
 
ब्लॅकमेल पार्ट--1

"लाइट्स, कॅमरा और आक्षन" पहले आदमी ने कहा "चलो अब जल्दी से शुरू हो जा मेरी जान"

"फुल बॉडी लिया है ना?" दूसरा आदमी बोला.

"हां फुल बॉडी है" पहला आदमी फिर से हॅंडीकॅम के डिसप्ले पर देखता हुआ बोला

"बस अब तो जानमन के कपड़े उतरने का इंतेज़ार है"

वो चारों शहर के बाहर किसी पुराने खंडहर मकान में थे. रात के 2 बज रहे थे और अजय जानता था के वो यहाँ चाहे जितना चिल्लाए, कोई उसकी मदद के लिए नही आएगा.

दोनो आदमियों ने अपने चेहरे पर रुमाल बाँध रखा था जिससे उनकी शकल देखना नामुमकिन था, सिर्फ़ आँखें दिखाई दे रही थी. दोनो लंबे चौड़े, हत्ते कत्ते थे जिनपर अजय चाहकर भी अकेला काबू नही पा सकता था. और उसपर उनके पास गन थी जो उस वक़्त अजय के सर पर लगी हुई थी.

"चल अब धीरे धीरे कपड़े उतारना शुरू कर. एक एक करके" दूसरे आदमी ने शिखा से कहा.

अजय ने एक नज़र शिखा पर डाली. रो रोकर उसकी आँखें लाल हो चुकी थी और डरी सहमी सी वो ऐसे खड़ी थी जैसे भेड़ियों के बीच किसी बकरी को बाँध दिया गया हो.

"चल चल ज़्यादा वक़्त नही है हमारे पास" दूसरे आदमी ने फिर शिखा को इशारा किया पर वो फिर भी वैसे ही अपने हाथ अपने सीने पर बाँधे खड़ी रोती रही.

"ये ऐसे नही मानेगी" दूसरा आदमी पहले से बोला "मार साले लौंदे को गोली"

अजय को अपने सर पर तनी पिस्टल की नाल और भी शिद्दत से महसूस होने लगी. वो अपने घुटनो पर बैठा था और उसके पिछे पहला आदमी उसके सर पर रेवोल्वेर लगाए खड़ा था.

"एक... दो...." गिनती शुरू हुई और अजय को जैसे अपनी पूरी ज़िंदगी अपनी आँखों के सामने घूमती नज़र आने लगी.

वो एक अमीर बाप की औलाद था, बेशुमार पैसा, गाड़ियाँ, अययाशी, ये उसकी ज़िंदगी थी. फिर उसको एक पार्टी में शिखा मिली. पहली मुलाक़ात के बाद दूसरी, फिर तीसरी और ये सिलसिला धीरे धीरे प्यार में तब्दील हो गया. शिखा एक बहुत ग़रीब घर की लड़की थी इसलिए दोनो जानते थे के अजय का बाप कभी इस शादी के लिए राज़ी नही होगा इसलिए उन्होने आसान रास्ता अपनाया और भाग कर अपने घरों से बहुत दूर एक अजनबी शहर में पहुँच गये.

यहाँ पहले ही दिन उनके साथ जो हुआ इसका उन्होने कभी सपने में भी गुमान नही किया था. देर रात को उनकी ट्रेन स्टेशन पर पहुँची थी जहाँ से उन्होने किसी होटेल के लिए टॅक्सी की पर टॅक्सी वाला एक बंदूक की नोक पर उन्हें यहाँ शहर से बाहर इस खंडहर में ले आया जहाँ अब वो पिस्टल अजय के सर पर लगी हुई थी.

"रूको मैं कपड़े उतारती हूँ" अचानक शिखा की आवाज़ आई "प्लीज़ उसको कुच्छ मत करना"

अजय की समझ में नही आया के क्या करे. एक तरफ तो उसके सामने वो लड़की खड़ी थी जिससे वो शादी करना चाहता था और जो कि इस वक़्त दो अजनबी आदमियों के सामने उसकी जान बचाने के लिए नंगी हो रही थी पर दूसरी तरफ वो ये भी जानता था के इस वक़्त कुछ बोला तो उसका भेजा नीचे ज़मीन पर बिखर जाएगा.

और बहुत मुमकिन था के इसके बाद वो शिखा का भी काम तमाम कर देंगे.

उसने स्टॅंड पर लगे हुए हॅंडीकॅम को देखा जो शिखा की नंगी फिल्म बना रहा था और चुप रहा.

काँपते हुए हाथों से शिखा ने अपनी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए.

"वाउ" पहला आदमी बोला "अब हुआ खेल शुरू. धीरे धीरे खोल ज़रा. पूरा मज़ा देते हुए"

शिखा ने अपनी शर्ट का पहला बटन खोला, फिर दूसरा, फिर तीसरा और एक एक करके सारे बटन खुल गये. वो एक पल के लिए रुकी और अपनी शर्ट को सामने से पकड़ कर रोने लगी.

"प्लीज़ ऐसा मत करो" रोते हुए उसने कहा

"प्लीज़ तुम्हें जो चाहिए ले लो पर हमें जाने दो" अजय ने आगे से कहा

"जो हमें चाहिए हम वही ले रहे हैं साले" दूसरा आदमी हंसते हुए बोला "चल अब ये शर्ट उतार"

शिखा भी दिल ही दिल में जानती थी के उसके पास कोई चारा नही था. उसने अगर ज़रा भी ना नुकुर की तो अजय की जान जा सकती थी इसलिए मजबूर होकर उसके अपनी शर्ट धीरे से उतार कर नीचे ज़मीन पर गिरा दी. अब वो सिर्फ़ एक काले रंग के ब्रा और नीली रंग की जीन्स में खड़ी थी.

"वाउ" एक आदमी उसके सीने की तरफ देखते हुए बोला "हाथ हटा सामने से"

उसने अपनी चूचिया अपने दोनो हाथों से ढक रखी थी. उस आदमी के कहने पर वो एक पल के लिए झिझकी और फिर अपने हाथ साइड में गिरा दिए.

"मेरी जान" एक आदमी सीटी मारकर बोला "क्या बड़े बड़े मम्मे हैं तेरे. ब्रा में फिट ही नही हो रहे"

"क्यूँ बे साले" दूसरा आदमी अजय के सर पर थप्पड़ मारते हुए बोला "बड़ी मेहनत की है लगता है तूने. सूखे दबाता है या तेल लगाके मालिश करता है?"

शिखा ने फिर अपने हाथों से सीना ढकने की कोशिश की पर एक आदमी के घूर कर देखने पर फिर सीधी खड़ी हो गयी.

"चल अब जीन्स उतार"

"नही प्लीज़" वो रोते हुए बोली

"मारु गोली तेरे आशिक़ को?"

"नही" वो फ़ौरन चिल्लाई और जीन्स के बटन खोलने शुरू कर दिए.

"शाबाश" पहले आदमी ने फिर से हॅंडीकॅम को चेक किया के रेकॉर्डिंग सही हो रही है के नही.

जीन्स के बटन एक एक करके खुले और फिर वो 2 पल के लिए रुकी.

"चल उतार जल्दी से अब" पहला आदमी बोला "चूत के दर्शन करा दे जल्दी से"

उसकी मुँह से ऐसी बात सुनकर झिझक रही शिखा सहम कर खड़ी हो गयी.

"मार दे गोली" दूसरे ने पहले से कहा ही था के शिखा ने फ़ौरन अपनी जीन्स नीचे खिसकियाई और उतार कर एक तरफ उछाल दी.

नीचे पॅंटी उसने पहेन नही रखी थी. जिस्म पर एक काले रंग का ब्रा पहने, आँखों में आँसू लिए वो खड़ी सूबक रही थी.

"क्या मस्त चूत है. एक भी बाल नही" दूरा गौर से उसकी टाँगो के बीच देखता हुआ बोला

"मुझे तो झांतो वाली ज़्यादा पसंद है" पीछे से पहले की आवाज़ आई

"गांद भी क्या मस्त है रे बाबा" दूसरा शिखा के चारो तरफ गोल गोल चक्कर सा लगा रहा था "मस्त उठी हुई है. क्या बे साले, गांद भी मरता है क्या इसकी?" उसने अजय की तरफ इशारा करते हुए कहा

"चल जानेमन अब जल्दी से तेरे मम्मे भी दिखा दे" वो शिखा की तरफ घूमता हुआ बोला

अजय की नज़र भी शिखा की तरफ घूमी. वो अब रो नही रही थी. आँसू चेहरे पर सूख चुके थे. नज़र झुकाए वो किसी लाश की तरह खड़ी थी.

"चल खोल ना" दूसरा जो उसके नज़दीक ही खड़ा था, एक हाथ उसकी गांद पर फेरता हुआ बोला

"हाथ मत लगाना उसे" अजय फ़ौरन चिल्लाया

"बैठा रह शांति से वरना गोली भेजे के पार कर दूँगा" उसके पिछे खड़े आदमी ने उसके बाल पकड़े और बंदूक की नाल उसके मुँह में घुसा दी.

"नही" शिखा फ़ौरन चिल्लाई और ब्रा अपने जिस्म से अलग करके एक तरफ उछाल दी.

"आअए हाए क्या मम्मे हैं यार. मज़ा आएगा आज तो" शिखा के करीब ही खड़ा हुआ आदमी पेंट के उपेर से अपना लंड रगड़ता हुआ बोला

"कम से कम 36 होंगे ... है ना साली?" वो शिखा से ही पुच्छ रहे थे

"अब नही रुका जाता. आजा जल्दी से" शिखा के करीब खड़े हुए आदमी ने उसका हाथ पकड़कर उसको ज़मीन की तरफ गिराया.

अजय जानता था के आगे क्या होने वाला है. शिखा के साथ बलात्कार. जिस लड़की से वो प्यार करता था, जिससे शादी करना चाहता था, उस लड़की के साथ बलात्कार.

एक अजीब से ताक़त के साथ वो पलटा और अपने पिछे खड़े आदमी के शरीर से टकराया.

"बहन्चोद" दर्द से वो आदमी चिल्लाया और लड़खड़ा कर नीचे जा गिरा. उसके हाथ में पकड़ी गन हाथ से छुट्टी और ज़मीन पर गिरी. अजय गन की तरफ भागा.

"जहाँ हो वहीं रुक जाओ" अजय गन उपेर उठाता हुआ बोला. उसने गन का रुख़ उस आदमी की तरफ कर रखा था जो शिखा को नीचे गिरा कर उसपर चढ़ने की कोशिश कर रहा था.

"तेरे मा की .... "पहला आदमी जिसके हाथ से अजय ने गन छीनी थी ज़मीन से उठता हुआ बोला

"वहीं पड़ा रह" अजय ने इशारा किया

"ना ना ना ना" आवाज़ आई तो अजय ने घूम कर शिखा की तरफ देखा "दूसरा आदमी उसके पिछे खड़ा था और शिखा को आगे कर रखा था. अब अगर गोली चलती, तो शिखा को पहले लगती.

"हमें यहाँ से जाने दो. हम किसे से कुच्छ नही कहेंगे" अजय ने एक आखरी कोशिश की.

क्रमशः........

 
ब्लॅकमेल पार्ट--2

गतान्क से आगे....................

"नही साले. जो तूने कर दिया है, उसके बाद तो पहले तेरी इस छमिया की चूत का भोसड़ा बनाएँगे, उसके बाद तेरी बोटी बोटी करेंगे"

अजय की समझ नही आ रहा था के क्या करे. उसने एक नज़र कमरे की टूटी हुई खिड़की से बाहर डाली.

घुप अंधेरा. कुच्छ नज़र नही आ रहा था.

"यहाँ तो बचके निकले भी तो जाएँगे किस तरफ" एक पल के लिए अजय के दिमाग़ में ख्याल आया. और फिर जो कुच्छ भी हुआ, बहुत तेज़ी के साथ हुआ.

अजय की नज़र खिड़की की तरफ देख कर पहले आदमी आगे को लपका. अजय उसको अपनी और आता देख हड़बड़ा गया और गन का ट्रिग्गर खींच दिया.

गन अब भी शिखा की तरफ ही पायंटेड थी.

गोली की आवाज़ से कमरा गूँज उठा. दूसरी आवाज़ शिखा के चीखने की थी.

अजय और दोनो आदमी अपनी अपनी जगह पर बुत बनकर खड़े हो गये. शिखा नीचे ज़मीन पर गिर चुकी थी. गोली उसके सीने में लगी थी. खून बहकर उसकी लाश के चारो तरफ जमा हो रहा था. आँखें बंद हो चुकी थी.

"वहीं खड़े रहो" उसने गन दोनो आदमियों की तरफ घूमाते हुए कहा, एक नज़र शिखा की नीचे ज़मीन पर पड़ी लाश पर डाली और खिड़की से बाहर कूद गया.

"पकड़ साले को" पीछे कमरे से आवाज़ आई पर अजय को रुक कर सुनने का होश नही था. वो बेतहाशा दौड़ रहा था.

उस मकान से दूर.

शिखा की लाश से दूर.

उन दोनो आदमियों से दूर.

उस मनहूस शहर से दूर.

"साले मेरी गांद का मार मार कर भोसड़ा तूने बना दिया है और पुच्छ उस लौंदे से रहा है" शिखा ने अपने उपेर चढ़े हुए आदमी से पुछा.

वो उल्टी पड़ी हुई थी और कोहनियों के बल अपना चेहरा उठा कर सिगरेट के कश लगा रही थी. एक आदमी उसके उपेर चढ़ा हुआ उसकी गांद मार रहा और दूसरा उसके सामने बैठा अपना लंड हिला रहा था. तीनो पूरी तरह से नंगे थे.

"क्या करूँ जानेमन" उसके उपेर चढ़ा हुआ आदमी तेज़ी से धक्के लगाता हुआ बोला "तेरी गांद है ही इतनी मस्त"

"वैसे एक बात बता. ये साले लौंदे तेरे इश्क़ में इतने बावले हो कैसे जाते हैं के अपना सब कुच्छ छ्चोड़ कर तेरे कहे पर चल देते हैं?" सामने बैठे आदमी ने पुछा

"बिस्तर पर जन्नत दिखाती हूँ ना सालो को. और बस. वहीं मेरे कदमों में बिच्छ जाते हैं" शिखा हँसते हुए बोली

"मानना पड़ेगा. ये चौथा था जो तेरे इश्क़ में पागल हो रहा था. इससे पहले के तीन भी साले मरे जा रहे थे तुझे अपनाने को"

"वो दूसरे वाले के पास से पैसे आ गये?" शिखा बोली

"हां आ गये ना. जितनी माँगे थे उतने ही आए. वो तीनो साले सोचते हैं के उनके हाथ से तुझे गोली लगी है और बचने के लिए कुच्छ भी करने को तैय्यार हैं" सामने बैठा आदमी बोला

"ये अजय नाम के लौंदे के पास भी टेप कल भिजवा दूँगा मैं. फिरौती कितनी मांगू इससे?" शिखा के उपेर चढ़े हुए आदमी ने ज़ोर से धक्का मारते हुए कहा

"आराम से बेहेन्चोद" शिखा चिल्लाई "दर्द होता है. तेरी माँ की गांद नही है ये, मेरी है. आराम से मार. और ये चौथा वाला इतना रईस नही है. इससे रकम ज़्यादा मोटी मत माँगना नही तो सारा मामला खराब हो जाएगा. पहली माँग थोड़ी कम ही रखो, अगर साले की जेब से निकल आए तो बाद में देखेंगे"

"वैसे कमाल है तू" शिखा ने सिगरेट बुझाई तो सामने बैठा आदमी आगे बढ़कर उसके करीब आ गया "मरने का नाटक ऐसे करती है के अगर हमें पता ना हो के ये सारा बना बनाया खेल है तो हमें भी यही लगेगा के मर गयी तू"

उसने आगे बढ़कर अपना लंड शिखा के मुँह की तरफ बढ़ाया.

"और तू साले" शिखा इशारा समझते हुए लंड मुँह में लेते हुए बोली "वो रंग थोड़ा कम डाला कर पिछे से. मेरे जिस्म में भी आम इंसानो जितना खून है, कोई 4-5 लीटर ज़्यादा नही है. इतना रंग बिखेर देता है के देखने वाले को लगेगा के जैसे कोई भैंस मरी हो यहाँ"

उसने लंड मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. पहला वाला अब तेज़ी के साथ उसकी गांद पर धक्के लगा रहा था.

"गांद में मत झड़ना. बाहर निकालना" शिखा ने एक पल के लिए लंड मुँह से निकाल कर कहा.

"वैसे एक बात बता" जिसका लंड वो चूस रही थी उस आदमी ने कहा "इन चारो लौंदो से चुदवाया तूने?"

"हां और क्या यूँ ही मेरे इश्क़ में मरे जा रहे थे ये?" शिखा हँसकर बोली "इन चारो के हिसाब से ये पहले मर्द थे जिन्होने एक सीधी सादी, पाक शरीफ लड़की के जिस्म को च्छुआ था"

तीनो ज़ोर से हंस पड़े.

"और गांद? वो भी मरवाई?" जो आदमी गांद मार रहा था उसने पुछा

"नही मेरे राजा" शिखा पिछे हाथ करके उसके चेहरे को थपथपाते हुए बोली "ये तो सिर्फ़ तेरी है. बुक करा रखी है ना तूने. पेटेंट है तेरा. ये कोई कैसे मार सकता है?"

तीनो फिर ज़ोर से हँसे.

"गांद नही मरवाई. वरना फिर सालो को शक हो सकता था के मैं बिस्तर पर खेली खाई हूँ. उनके लिए मैं एक मासूम लड़की हूँ जिसकी ज़िंदगी में वो सब पहले मर्द थे.

थोड़ी देर के लिए तीनो चुप हो गये और चुदाई पुर ज़ोरो पे चल पड़ी. उसके उपेर चढ़े हुए आदमी ने हाफ्ना शुरू कर दिया था और पूरी जान से गांद पर धक्के मार रहा था. सामने वाला आदमी अपने घुटनो पर खड़ा शिखा के मुँह में लंड अंदर बाहर कर रहा था.

"गांद में निकाल दिया क्या साले?" धक्के पड़ने बंद हुए तो शिखा ने चौंक कर पुछा

"नही अभी निकाला नही है. ज़रा साँस तो पकड़ लूँ"

"अब अगला पड़ाव कहाँ?" सामने वाले आदमी ने पुछा

"फिलहाल तो टेप उस अजय को टेप भिजवओ और फिर इस शहर से निकलते हैं. देखते हैं अगला शिकार कहाँ मिलता है" कहकर शिखा फिर लंड चूसने लगी.

"आज सॅंडविच स्टाइल हो जाए? चूत और गांद में लंड एक साथ?" मुस्कुराते हुए शिखा ने सामने वाले आदमी से कहा और आँख मार दी.

दोस्तो आपने देखा इस दुनिया मे ये भी होता है इसलिए सोच समझ कर किसी लड़की की चुदाई करे आपका दोस्त राज शर्मा समाप्त
 


मामा के घर




हाई मैं कुसुम उमर 17 रंग गोरा चुचि गोल,फिगर 34 30 32,खास मेरे चुतताड की गोलाई और मेरे पिंक निपल लड़के देख कर पागल हो जाते है मुझे सेक्स बहुत पसंद है सखत सेक्स,चुदवाते वक़्त गालिया सुन-ना मुझे पसंद है.

मैं एक बार अपने मामा के घर गयी मामा विलेज मे रहते है उनकी लड़की है पिंकी मेरी उमर की चंचल लड़की, उसकी चुचि मुझसे बड़ी फिगर होगी कोई 36 30 34 गोरी चित्ति हम आपस मे बाते कर रही थी बाते सेक्स पर आ गयी मैने पिंकी की चुचि पर हाथ फेरा और बोली पिंकी ये तो बहुत बड़ी है वो शर्मा गयी, शाम को हम गाओं मे घूमने निकली तो मुझे उसकी बड़ी चुचिओ का राज पता लग गया हम जिस भी गली से जाते उस पर कॉमेंट होते मेरी छेमिया मेरी जान एट्सेटरा हम जब घर आए तो मैने पूछा ये क्या था पहले तो वो टालती रही पर जब मैने कहा कि मैं भी मज़े लेना चाहती हू तो वो खुल गयी उसने बताया यहा तो जब मैं 14 साल की थी जब से ही मज़े कर रही है फिर तो हम स्टार्ट हो गयी मैने पूछा कैसे करती हो तो वो बोली रात को बताउन्गी वो बोली यहा तो लगभग हर लड़की 15 साल की उमर मे चुद जाती है मुझे बड़ी जलन हुई उस से, वो बताती रही कि लड़के जब लड़की को चोद्ते है है तो बहुत तंग करते है कई बार तो मार भी देते है मैं बोली मेरी चूत को लंड मिलेगा वो बोली तुम्हारे उप्पर तो टूट के पड़ेंगे आज रात को ही तेरा कल्याण हो जाएगा पर तू सह तो लेगी मैं बोली यार चिंता मत कर.

रात तक हम एक दूसरे को छेड़ते रहे रात को 9 के करीब हम रूम मे गये मैने पिंकी के कपड़े उतारने शुरू कर दिए उसे पूरी नंगी करके मैने उसकी कूची पर हाथ फेरा और उस-से पूछा पिंकी तेरी इस चूत का उद्धाटन किसके लंड से हुआ था वो बोली पापा के दोस्त है उन्होने ही मेरी सील तोड़ी थी, अंकल ने मम्मी की चुदाई भी की हुई है और आज अंकल और उसके दोस्त तेरी चूत का कल्याण करेगे मैं बोली उनका लॉडा कैसा है, पिंकी बोली जान चिंता मत कर तेरी चूत की तो धज्जिया उड़ा देंगे हमारी बातो मे 10 के करीब टाइम हो गया मैं बोली कब उड़े गी चूत की धहाज़िया उसने खिड़की खोली और मुझे बोली नीचे कूद जा मैं नीचे कूदी पीछे पीछे चादर लपेटे वो कूद गयी अब हम दोनो खेत मे खड़े थे वो बोली चल मैं उसके पीछे चल पड़ी थोड़ी दूर ही खेत मे एक मकान था हम दोनो उसमे घुस गयी.

वाहा आँगन मे तीन 40-45 साल के आदमी ताश खेल रहे थे मुझे डर सा लगा वो तीनो कछे और बनियान मे थे उनमे से एक बोला आ गयी छेमिया, ये कॉन है मेरी तरफ देखते हुए बोले, पिंकी बोली शहर से आई है मेरी बुआ की लड़की अपनी चूत की धहाज़िया उड़वाने, वो बोले अरे ये तो बिम्ला की लड़की लगती है अपनी मम्मी का नाम सुन कर मैं हैरान हो गयी मैं बोली तुम कैसे जानते हो मम्मी को वो बोला तेरी मा यहा बहुत चुदी है आज तो हमारी किस्मत खुल गयी जवानी मे मा को चोदा अब लड़की को वाह,पिंकी ने अपनी चादर उतार दी अब वो पूरी नंगी थी.

पिंकी बोली यार हमे तो चोद लो मम्मी को बाद मे चोद लेना, उन तीनो नई हम दोनो को अपनी और खींच लिया हम दोनो उनकी गोदी मे लेटी पड़ी थी मेरी कुर्त और पाजामी दो मिनिट मे ही मुझसे अलग हो गये वे तीनो(मैं तीनो के नाम लिख दू सुरेश,रमेश,मनोज) हमे बुरी तरह से चूसने लगे मसलने लगे मेरी चुचिओ पर गर्दन पर नीले मार्क्स बना दिए हम दोनो के मूह से.

आआआआआअऊऊऊ वॉववववववव एयाया वॉववववव ऊऊऊ ऊऊ आआआआ ऊऊऊऊऊऊओह निकल रही थी रमेश बोला साली अपनी मा से भी चिकनी पड़ी है तभी रमेश ने मुझे गोदी मे ही उल्टी कर दिया अब मेरे चुतताड रमेश की गोदी मे थे और मेरा मूह सुरेश के लंड के पास था सुरेश ने अपना कछा उतारा उसका 10" लंबा.

लंड स्प्रिंग के तरह मेरे चेहरे से टकराया, उसके लंड देख कर मेरे होश उड़ गये रमेश ने मेर लेग्स खोल के मेरी चूत मे 2 उंगलिया डाली मैं चिहुक गयी वो बोला क्या हुआ, मैं बोली मैने नही चुदवाना ये तो मेरी चूत ही फाड़ देगा पिंकी बोली क्यू बड़ा शौक चढ़ा था चूत की धहाज़िया उड़वाने का सुरेश बोला तू वैसे ही डर रही है पिंकी तेरे से छ्होटी है फिर भी इससे रोज़ाना चुदवाति है 14 साल की उमर मे ही ये इसे अपनी चूत मे ले गयी थी मैने सुरेश का लोड्‍ा अपने हाथ मे पकड़ा उसका लंड लोहे से भी सखत था पिंकी मनोज की गोदी मे बैठी थी मनोज पिंकी की चुचिया चूस रहा था सुरेश मेरी गॅलो मेरे होंठो पर अपना मोटा लंड फिरा रहा था मेरे होठ सख्ती से बंद थे तभी रमेश ने मेरी गांद मे उंगली दे दी मेरा मूह खुला मूह खुलते ही सुरेश ने अपना लंड मेरे मूह मे सरका दिया सुरेश का लंड बड़ी मुश्किल से मेरे मूह मे आ रहा था पर उसने धक्के मार- मार के मूह मे जगह बना ली मैं धीरे धीरे उसका लंड चूसने लगी तभी रमेश ने मेरे को अपनी गोदी से नीचे पटक दिया और अपने कपड़े उतार कर मेरे सामने आ गया मैं उसका लंड देख कर फिर कांप गयी उसका लंड सुरेश से भी बड़ा और बीच मे से कुछ टेडा था वो अपना लुंड पूचकारता हुआ मेरे सामने खड़ा था.

मैं मन मे सोच रही थी आज मेरी खैर नही इतने मे मूज़े पिंकी की चीख सुनाई दी आाआूऊ ऊऊऊऊ माआआआआअ ऊऊऊऊऊ धीरेयययययययी ऊऊऊऊऊऊओ माआआआआआ आआमम्म्ममममाआआआररर्र्र्र्र्रृिईईईईईईईईईई मैने उसकी तरफ उसकी दोनो टांगे हवा मे थी और मनोज अपना लंड उसकी चूत मे सरका रहा था मैं पिंकी की तरफ देख रही थी सुरेश बोला उधर क्या देख रही है तेरा भी यही हॉल होना है मुझे भी मस्ती चढ़ि थी पिंकी को देख कर पर मैं नाटक करती बोली, मैने नही चुदवाना तुमसे अपनी चूत नही फदवाणी इतने मोटे मोटे लॉड मेरी चूत मे नही जा पाएगे, पिंकी चुद्ते हुए बोली साली तो यहा भजन करने आई है अभी तक शहर के लूलिओ से चुदवाइ होगी आज पता चलेगा गाओं का लंड क्या मस्ती देता है पिंकी सुरेश को बोली अंकल इसे बड़ा शौक है अपनी चूत की धहाज़िया उड़वाने का आज इसकी चूत की धहाज़िया ही उड़ानी है मैं डर गयी मैं बोली पिंकी क्या बोल रही है तू, पर सुरेश ने मेरे मूह से लंड निकाला लंड निकलते ही टक की आवाज़ आई.

सुरेश और रमेश मुझे खींच कर पिंकी के पास ले गये पिंकी की चूत मे मनोज का लंड सटा-सॅट आ जा रहा था उसकी चूत की दोनो किनारिया दूर तक अलग हुई पड़ी थी मनोज की स्पीड इतनी तेज़ थी कि बस लंड सिर्फ़ चमकता था मैं पिंकी की चुदाई मे खो सी गयी मैं झुकी तो हुई थी रमेश ने मुझे थोड़ा और झुका दिया रमेश अंकल ने मेरी टांगे खुलवा कर अपना लंड मेरी चूत पर लगाया तो मैं चोकते हुए बोली अंकल अंदर मत करना पिंकी बोली क्यू मैं बोली मुझे इनके मुड़े हुए लंड से डर लग रहा रहा है रमेश बोला ये मुड़ा हुआ लंड तेरी मा को बहुत पसंद है उसने मेरी कमर पकड़ के ज़ोर से धक्का मारा तो छ्होटा गुबारा फटने की आवाज़ आई और लंड चूत को फाड़ता हुआ अंदर चला गया मेरे मूह से भयनकर चीख निकली आआआआआहह ऊऊऊऊ ऊओ मर गई ईईइ उउईईईईईईईईईई माआआआआ ऊऊऊओ माआआआआ फत्त्तटटटटतत्त गैिईईईईईईईईईईई ऊऊऊऊऊऊऊ आआआअ हहूओ ऊऊहह हमाआआआआ आआआआ बाहर निकालो प्ल्ज़ बहुत दर्द हो रहा है पिंकी बोली साली दो मिनिट रुक जा तू ही बोलेगी और अंदर डालो, रमेश ने धीरे धीरे धक्के लगाने स्टार्ट किए मैं उउउउउआआअ कर रही थी रमेश बोला कुसुम पूरा डाल दू पिंकी बोली अभी इस हरंजड़ी के अपना पूरा लोड्‍ा अंदर नही डाला रमेश ने दुबारा धक्का मारा उसका लंड छूट को चीरता हुआ मेरी बच्चे दानी को टच करने लगा मैं चीखती रही पर रमेश ने स्पीड से धकके मारने शुरू कर दिए, उधर पिंकी झड़ने वाली थी वो आंट-शॅंट बोल रही थी आआआ......राजा ज़ोर से चोदो अपनी रानी को मुझे चोद चोद के मार डालो मनोज भी झड़ने वाला था मनोज भी बोल रहा ले संभाल इसको अपनी चूत मे ले मैं आअ रहा हू आआआ मैं गया

जैसे ही मनोज झाड़ा दो काम एक साथ हुए, मनोज ने अपना टपकता लंड मेरे मूह मे डाल दिया और सुरेश ने पिंकी को अपने उप्पर खींच के पिंकी की चूत मे लंड घुसा दिया मेरे मूह मे मनोज का लंड झाड़ रहा था उसके लंड से पिंकी की चूत का स्वाद आ रहा था पूरी तरह झड़ने के बाद भी मनोज का लंड बड़ा दिख रहा था मैं लंड पकड़ कर बोली पिंकी अपनी चूत मे इतना बड़ा लंड कैसे ले गयी, पिंकी सुरेश के लंड पर बैठे थी सुरेश ने उसकी कमर मे हाथ डाल कर अपने उप्पर लिटा लिया पिंकी की चुचिया रमेश की छाती से दब गयी और पिंकी के चुतताड बाहर को उभर आए सुरेश ने अपनी टांगे मोड़ के धक्के मार रहा था मैं पिंकी की ओर देख रही थी तो रमेश ने मुझे उठाया और पिंकी की चूत के पास ले आया वाहा मुझे कुत्ति की तरह झुका के पीछे से लंड दुबारा घुसा दिया मेरा मूह पिंकी के चुतताड़ो की तरफ था मनोज ने मेरा मूह पिंकी की गांद पर लगा दिया मैं पिंकी की गांद चाटने लगी पिंकी के मूह से सिसकारिया निकल रही थी मेरी जीब थोड़ी सी नीचे आई तो वो सुरेश के लंड को टच कर रही थी मैं सुरेश की गोलिया सहला रही थी तभी सुरेश ने लंड निकाला मैने उसे चूस के दुबारा पिंकी की चूत मे डाल दिया मैं अपने चरम पर थी मैं रमेश को बोली अंकल तेज़ चोदो मुझे और हा सनडे को मम्मी आ रही है मैने मम्मी के साथ चुदना है रमेश बोला ये कैसे होगा मैं बोली मैं और मम्मी साथ मे चुद चुकी है पिंकी बोली मैं भी बुआ के साथ चुड़ूँगी रमेश ने स्पीड बढ़ाते हुए कहा ठीक है मैं उुआअ कर रही तभी मेरा बदन कस गया और मैं निढाल सी पड़ गयी रमेश ने भी मेरी चूत मे पिचकारी मारनी स्टार्ट कर दी उधर पिंकी और सुरेश झाड़ चुके थे सारी रात मैं और पिंकी ऐसे ही चुद्ती रही .

समाप्त




Hi main kusum umar 17 rang gora chuchi gol,figure 34 30 32,khas mere chuttad ki golai aur mere pink nipple ladke dekh kar pagal ho jate hai muje sex bahut pasand hai sakhat sex,chudte waqt galia sun-na muje pasand hai.

Mai ek baar apne mama ke ghar gayi mama villege mai rehte hai unki ladki hai pinky meri umar ki chanchal ladki, uski chuchi mujse badi figure hogi koi 36 30 34 gori chitti hum aapas mai batte kar rahi thi batte sex par aa gayi maine pinki ki chuchi par hath fera aur boli pinki ye to bahut badi hai wo sharma gayi, sham ko hum gaon mai ghumne nikli to muje uski badi chuchio ka raj pata lag gaya hum jis bi gali se jate us par comment hote meri chhamia meri jaan etc hum jab ghar aaye to maine puca ye kya tha pehle to wo talti rahi par jab maine kaha ki bi maze lena chahti hu to wo khul gayi usne bataya yaha to jab mai 14 saal ki thi jab se hi maze kar rahi hai fir to hum start ho gayi maine pucha kaise karti ho to wo boli raat ko bataugi wo boli yaha to lagbhag har ladki 15 saal ki umar mai chud jaati hai muje badi jalan hui us se, wo batati rahi ki ladke jab ladki ko chodte hai hai to bahut tang karte hai kai baar to maar bi dete hai mai boli meri chut ko lund milega wo boli tumhare uppar to toot ke padege aaj raat ko hi tera kalyan ho jayega par tu sah to legi mai boli yaar chinta mat kar.

Raat tak hum ek dusre ko chedte rahi raat ko 9 ke karib hum room mai gaye maine pinky ke kapde utarne shuru kar diye usu puri nangi karke maine uski cuchi par hath faira aur us-se pucha pinky teri is chut ka udhgatan kiske lund se hua tha wo boli papa ke dost hai unhone hi meri seal todi thi, uncle nai mummy ki chudai bi ki hui hai aur aaj uncle aur uske dost teri chut ka kalyan karege mai boli unka lauda kaisa hai, pinky boli jaan chinta mat kar teri chut ki to dhajjia udda denge hamari batto mai 10 ke karib time ho gaya mai boli kab ude gi chut ki dhazia usne khidki kholi aur muje boli niche kud ja mai niche kudi piche piche chadar lapete wo kud gayi ab hum dono khet mai khade the wo boli chal mai uske piche chal padi thodi dur hi khet mai ek makan tha hum dono usme ghus gayi.

Waha aangan mai teen 40-45 saal ke aadmi taash khel rahe the muje dar sa laga wo teeno kache aur baniyan mai the unme se ek bola aa gayi chammiya, ye kon hai meri taraf dekhte hue bole, pinky boli shahar se aayi hai meri bua ki ladki apni chut ki dhazia udwane, wo bole are ye to bimla ki ladki lagti hai apni mummy ka naam sun kar mai hairan ho gayi mai boli tum kaise jante ho mummy ko wo bola teri maa yaha bahut chudi hai aaj to hmari kismat khul gayi jawani mai maa ko choda ab ladki ko wah,pinky nai apni chadar uttar di ab wo puri nangi thi.

Pinky boli yaar hame to chod lo mummy ko baad mai chod lena, un teeno nai hum dono ko apni aur khinch liya hum dono unki godi mai leti padi thi meri kurt aur pajami do minute mai hi mujse alag ho gayi ve teeno(mai teeno ke naam likh du suresh,ramesh,manoj) hume buri tarah se chusne lage maslne lage meri chuchio par gardan par nile marks bana diye hum dono ke muh se.

Aaaaaaaaaaoooooo wowwwwwww aaaaa wowwwww oooooo oooo aaaaaaaa ooooooooooooohhhhhhhhhhhh nikal rahi thi ramesh bola sali apni maa se bi chikni padi hai tabi ramesh nai muje godi mai hi ulti kar diya ab mere chuttad ramesh ki godi mai the aur mera muh suresh ke lund ke pass tha suresh nai apna kacha utara uska 10" lamba.

Lund spring ke tarah mere chehre se takraya, uske lund dekh kar meere hosh ud gaye ramesh nai mer legs khol ke meri chut mai 2 unglia dali mai chihuk gayi wo bola kya hua, mai boli maine nahi chudna ye to meri chut hi fad dega pinki boli kyu bada shauk chada tha chut ki dhazia udwane ka suresh bola tu waise hi dar rahi hai pinki tere se chhoti hai fir bi isse rozana chudti hai 14 saal ki umar mai hi ye isse apni chut mai le gayi thi maine suresh ka loda apne hath mai pakda uska lund lohe se bi sakhat tha pinky manoj ki godi mai baithe thi manoj pinki ki chuchia chus raha tha suresh meri gallo mere hotho par apna mota lund fira raha tha mere hoth sakhti se band the tabi ramesh nai meri gaand mai ungli de di mera muh khula muh khulte hi suresh nai apna lund mere muh mai sarka diya suresh ka lund badi mushkil se mere muh mai aa raha tha par usne dhakke mar- mar ke muh mai jagah bana li mai dhire dhire uska lund chusne lagi tabi ramesh nai mere ko apni godi se niche patak diya aur apne kapde uttar kar mere samne aa gaya mai uska lund dekh kar fir kamp gayi uska lund suresh se bi bada aur bich mai se kuch teda tha wo apna lumd puchkarta hua mere samne khada tha.

Mai man mai soch rahi thi aaj meri khair nahi itne mai muje pinki ki chikh sunai di aaaaaoooooo oooooooo maaaaaaaaaaa oooooooooo dheereyyyyyyyy ooooooooooooo maaaaaaaaaaaa aaaammmmmmmaaaaaaaarrrrrrrrrii

iiiiiiiiiiii maine uski taraf uski dono taange hawa mai thi aur manoj apna lund uski chut mai sarka raha tha mai pinky ki taraf dekh rahi thi suresh bola udar kya dekh rahi tera bi yahi hall hona hai muje bi masti chadi thi pinky ko dekh kar par mai natak karti boli, maine nahi chudna tumse apni chut nahi fadwani itne mote mote laude meri chut mai nahi ja payege, pinky chudte hue boli sali to yaha bhajan karne aayi hai abi tak shahar ke lulio se chudi hogi aaj pata chalega gaon ka lund kya masti deta hai pinky suresh ko boli uncle isse bada shauk hai apni chut ki dhazia udwane ka aaj iski chut ki dhazia hi uddani hai mai darr gayi mai boli pinky kya bol rahi hai tu, par suresh nai mere muh se lund nikala lund niklate hi tak ki awaz aayi.

Suresh aur ramesh muje khinch kar pinky ke pass le gaye pinky ki chut mai manoj ka lund sata-sat aa ja raha tha uski chut ke dono kinaria dur tak alag hui padi thi manoj ki speed itni tez thi ki bus lund sirf chamkta tha mai pinky ki chudai mai kho si gayi mai jhuki to hui thi ramesh nai muje thoda aur juka diya ramesh uncle nai meri taange khulwa kar apna lund meri chut par lagaya to mai choki mai boli uncle andar mat karna pnki boli kyu mai boi inka muda hua lund se muje dar lag raha raha hai ramesh bola ye muda hua lund teri maa ko bahut pasand hai usne meri kamar pakad ke jor se dhakka mara to chhota gubara fatne ki awaz aayi aur lund chut ko fadta hua andar chala gaya mere muh se bhaynkar chikh nikli aaaaaaaaaahh oooooooo ooo mar gai iiii uuiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaa ooooooo maaaaaaaaaa fatttttttttt gaiiiiiiiiiiiiii oooooooooooooo aaaaaaa hhhhhhhhhooo oooohhhhhh hmaaaaaaaaaa aaaaaaaa bahar nikalo plz bahut dard ho raha hai pinky boli sali do minute ruk ja tu hi bolegi aur andar dalo, ramesh nai dhire dhie dhakke lagane start kiye mai uuuuuaaaaa kar rahi thi ramesh bola kusum pura dal du pinky boli abi iss haramjadi ke apna pura loda andar nahi dala ramesh nai dubara dhaka mara uska lund chut ko chirta hua meri bachedani ko touch karne laga mai chikhti rahi par ramesh nai speed se dhkke marne shuru kar diye, udhar pinky jhadne wali thi wo ant-shant bol rahi thi aaaaaa......raja jor se chodo apni rani ko muje chod chod ke mar dalo manoj bi jhadne wala tha manoj bi bol raha le sambhal isko apni chut mai le mai aaa raha hu aaaaaa mai gaya

Jaise hi manoj jhada do kam ek sath hue, manoj nai apna tapkta lund mere muh mai daal diya aur suresh nai pinky ko apne uppar khinch ke pinky ki chut mai lund ghusa diya mere muh mai manoj ka lund jhad raha tha uske lund se pinky ki chut ka swad aa raha ta puri tarah jhadne ke baad bi manoj ka lund bada dikh raha tha maine lund pakad kar boi pinki apni chut mai itna bada lund kaise le gayi, pinky suresh ke lund par baithe thisuresh nai uski kamar mai hath daal kar apne uppar lita liya pinky ki chuchia ramesh ki chhati se dab gayi aur pinky ke chuttad bahar ko ubhar aaye suresh nai apni taange mod ke dhakke mar raha tha mai pinki ki aur dekh rahi thi to ramesh nai muje uthaya aur pinky ki chut ke pass le aaya waha muje kutti ki tarah jhuka ke piche se lund dubara ghusa diya mere muh pinky ke chuttado ki taraf tha manoj nai mera muh pinki ki gaand par laga diya mai pinky ki gaand chatne lagi pinky ke muh se siskaria nikal rahi thi meri jeeb thodi si niche aayi to wo suresh ke lund ko touch kar rahi thi mai suresh ki golia sahla rahi thi tabi sursh nai lund nikala maine use chus ke dubara pinky ki chut mai daal diya mai apne charam par thi mai ramesh ko boli uncle tez chhodo muje aur ha sunday ko mummy aa rahi hai maine mummy ke sath chudna hai ramesh bola ye kaise hoga mai boli mai aur mummy sath mai chud chuki hai pinky boli mai bi bua ke sath chudugi ramesh nai speed badate hue kaha theek hai mai uuuaaa kar rahi tabi tabi mera badan kas gaya aur mai nidhal si pad gayi ramesh nai bi meri chut mai pichkari marni start kar di udar pinky aur suresh jhad chuke thei sari raat mai aur aise hi chudti rahi .

 
शीला इन ट्रेन

दोस्तों मैं यानि आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी के साथ हाजिर हूँ एक दिन हमारी मौसी (मदर'स सिस्टर) डिस्ट.-गया के विलेज-टेकरि से आई मुझे और शीला को अपने साथ गाओं अपनी लड़की गीता की मँगनी में ले जाने के लिए. हम दोनो भाई-बेहन का टिकेट अपने साथ बनाकर लेने आई.मम्मी हमसे कही जब तुम्हारे मौसी इतनी दूर से खुद लेने आई तो जाना तो पड़ेगा ही. लेकिन शीला की स्कूल भी खूलि है इसलिए जाओ और मँगनी के बाद दूसरे दिन वापस आ जाना. वापसी का टिकेट अभी ही जाकर लेलो.

मैं देल्ही रेलवे स्टेशन गया वहाँ किसी भी ट्रेन की दो दिन की वापसी टिकेट नहीं मिली. अंत मे मैं झारखंड एक्सप्रेस का 98, 99 वेटिंग का ही टिकेट लेकर आ गया कि नहीं कन्फर्म होने पर टीटी को पैसे देकर ट्रेन पर ही सीट ले लेंगे. 29थ ऑक्टोबर. 2000 को मैं और शीला अपनी मौसी (मदर'ससिसटेर) के बेटी (गीता) के मँगनी से वापस लौट रहे थे.

डिस्ट-गया (बिहार) के टेकरि गाओं मे हमारी मौसी रहती थी. मौसी ने गीता की मँगनी में शीला को लाल रंग के लंगा- चोली खरीद कर दी थी जिसे पहनकर शीला मेरे साथ देल्ही वापस लौट रही थी. टेकरि गाओं के चौक पर हम लोग गया रेलवे स्टेशन आने के लिए ट्रेकर (जीप) का एंतजार कर रहें थे. इतने में वहाँ एक कुतिया (बिच) और उसके पिछे-पिछे एक कुत्ता (डॉग) दौड़ता हुआ आया. कुतिया हम लोगो से करीब 20 फ्ट. की दूरी पर रुक गयी. कुत्ता उसके पिछे आकर कुतिया की बुर (कंट/चूत) चाटने लगा और फिर दोनो पैर कुतिया के कमर पर रखकर अपनी कमर दना दान चलाने लगा. जिसे मैं और शीला दोनो देखें. कुत्ता बहूत रफ़्तार से 8-10 धक्का घपा- घाप लगाकर केरबेट ले लिया. दोनो एक दूसरे में फँस गये. ये सीन हम दोनो भाई-बहन देखें. इतने में गाओं के कुच्छ लड़के वहाँ दौड़ते हुए आए और कुत्ता-कुतिया पर पत्थर मारने लगे. कुत्ता अपने तरफ खींच रहा था और कुतिया अपनी तरफ. लेकिन जोट छ्छूटने का नाम ही नहीं ले रही थी.

मैने शीला के तरफ देखा वो शर्मा रही थी लेकिन ये सीन उसे भी अच्छा लग रहा था मुझसे नीचे नज़र करके ये सीन बड़े गौर से देख रही थी. मेरा तो मूड खराब हो गया अब मुझे शीला अपनी बहन नहीं बल्कि एक सेक्सी लड़की की तरह लग रही थी. अब मुझे शीला ही कुतिया नज़र आने लगी. मेरा लंड पैंट में खड़ा हो गया. लेकिन इतने में एक ट्रीकर (जीप) आई .हम दोनो जीप में बैठ गये. जीप में एक ही सीट पर 5 लोग बैठे थे जिस से शीला मुझसे चिपकी हुई थी. मेरा ध्यान अब शीला की बुर (कंट/चूत) पर ही जाने लगा. हमलॉग स्टेशन पहुँचे. मैं अपना टिकेट कन्फर्मेशन के लिए टी.सी. ऑफीस जाकर पता किया. लेकिन मेरा टिकेट कन्फर्म नहीं हुआ था. फिर मैं सोचा किसी भी तरह एक भी सीट लेना तो पड़ेगा ही.टी.सी. ने बताया आप ट्रेन पर ही टी.टी. से मिल लीजिएगा शायद एक सीट मिल ही जाएगा. ट्रेन टाइम पर आ गई. शीला और मैं ट्रेन पर चढ़ गये.टी.टी. से बहूत रिक्वेस्ट करने पर .200 में एक बर्त देने के लिए अग्री हुआ.टी.टी. एक सिंगल सीट पर बैठा था वो कहा आप लोग इस सीट पर बैठ जाओ जब तक हम आते है कोई सीट देखकर. मैं और शीला गेट की सीट पर बैठ गये रात के करीब 10 बज रहे थे खिड़की से काफ़ी ठंडी हवाएँ चल रही थी. हमलॉग शाल से बदन ढक कर बैठ गये. इतने में टीटी आकर हम लोगो को दूसरे बोगी में एक अप्पर बर्त दिया. मैने 200 रुपीज़ टी.टी. को देकर एक टिकेट कन्फर्म करवा कर अपने बर्त पर पहेले शीला को उप्पेर चढ़ाया चढ़ते समय मैं शीला के चूतड़ (बूट्तुक) कस्के दबा दिया था सिला मुस्कुराती हुई चढ़ि फिर मैं भी उपेर चढ़ा.

सारे स्लीपर पर लोग सो रहें थे. हमारे स्लीपर के सामने स्लीपर पर एक 7 एअर की गर्ल सो रही थी जिसकी मम्मी दादी मिड्ल और नीचे के बर्त पर थे. सारी लाइट पंखे बंद थे सिर्फ़ नाइट बल्ब जल रही थी. ट्रेन अपनी गति में चल रही थी. शीला उप्पेर बर्त में जाकर लेट रही थी. मैं भी उप्पेर बर्त पर चढ़कर बैठ गया. शीला मुझसे कहने लगी लेटोगे नहीं. मैने कहा कहाँ लेटू जगह तो है नहीं इस पर वो कारबट लेकर लेट गयी और मुझे बगल में लेटने कहा. मैं भी उसीके बगल में लेट गया.और शाल ओढ़ लिया. जगह छोटी होने के कारण हम दोनो एकदूसरे से चिपके हुए थे. शीला का चून्ची मेरे चेस्ट से दबी हुई थी. मुझे तो शीला की चूत (बुर) पर पहले से ही ध्यान था. मैने और भी अपने से चिपका लिया. शीला से कहा. और इधर आ जा नही तो नीचे गिरने का डर है. वो और मुझसे चिपक गयी. शीला अपनी जाँघ मेरे जाँघ (थाइ) के उपर रख दी. उसका गाल मेरे गाल से सटा था. मैं उसके गाल से उपना गाल रगड़ने लगा. मेरा लंड धीरे- धीरे खड़ा हो गया. मैं अपना एक हाथ शीला की कमर पर ले गया और और धीरे -धीरे उसका लहनगा उपर कमर तक खींच-खींच कर चढ़ाने लगा.

शीला की साँसे भी तेज चलने लगी थी. मैने उसका लहनगा कमर के उपर कर दिया और उसकी चूतड़ सहलाने लगा. मैं उसकी पॅंटी पर से हाथ घुमा कर देखने लगा बुर (चूत) के पास उसकी पॅंटी गीली थी उसकी बुर से चिप-चिपा लार निकला था जो मेरे उंगलियों को चट-चटा कर दिया. मैं पॅंटी के अंदर से हाथ डालकर बुर के पास ले गया उसकी बुर लार से भींगी हुई थी. मैं बुर को सहलाने लगा शीला ने अपने होठ मेरे होंठो पर रख दिए और मेरे होठ को उपने मुँह में लेकर चूसने लगी. मुझे एक बरगी पूरा बदन में जोशआ गया मैं एक हाथ शीला के ब्रेस्ट में डालकर उसके संतरे जैसे चूची को सहलाने लगा. उसकी चूची की निपल काफ़ी छ्होटी थी उसे मैं उपने मुँह मे लेकर चूसने लगा. और पहले एक उंगली शीला की बुर मे धूका दी. बुर गीली होने के कारण आसानी से उंगल बुर में चला गया. फिर दो उंगली एक बार मे धूकने लगें इस पर शीला कस-मसाने लगी मैं एक हाथ से उसकी निपल की घुंडी मसल रहा था और एक हाथ उसकी बुर से खिलवाड़ करने लगा . मैं किसी तरह धीरे-धीरे दोनो उंगली उसकी बुर में पूरा घुसेड दिया. और दोनो उंगली को चौड़ा करके उसकी बुर में चलाने लगा.

शीला सिसियाने लगी और अपनी हाथ मेरी पॅंट के जिप के पास लाकर जिप खोलने लगी. मैने भी जिप खोलने में उसकी मदद की और अपना लंड शीला के हाथ में दे दिया. शीला मेरे लंड के सूपदे को सहलाने लगी. उसको मेरा लंड सहलाने से बहूत मज़ा मिला मैं उसकी बुर में इसबार तीन उंगली एकसाथ डालने लगा. बुर से काफ़ी लार गिरने लगा जिस से मेरा हाथ और शीला की पैंटी पूरी भींग गयी. लेकिन इस बार तीनो उंगली बुर में नहीं जा रही थी मैने एक हाथ से बुर को चीर कर रखा और फिर तीनो उंगली एक साथ डाली शीला मेरे हाथ पकड़ कर बुर के पास से हटाने लगी शायद इस बार तीनो उंगली से बुर दर्द करने लगी होगी लेकिन मैं उसके होठ अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा और किसी तरह तीनो उंगली आधा जाकर ही अटक गयी .

मैं जोश में आ गया और शीला की पैंटी एक साइड करके अपना लंड उसके बुर के च्छेद में धूकने लगा. लंड का सूपड़ा ही बुर में घुसा कि शीला मेरे कन में कहने लगी धीरे- धीरे धुकाओ बुर दर्द कर रही है. मैने थोड़ा सा पोज़िशन लेकर उसके चूतड़ को ही उपने लंड पर दबाया तो एक 1/4 हिस्सा उसकी बुर में गया. मैं उसे ज़्यादा परेशान नहीं करना चाहता था.मैने सोचा पूरा लंड बुर में में धूकाने पर उसके मुँह से चीख निकलेगी और लोग जाग भी सकते हैं इसीलिए मैं 1/4 हिस्सा उसकी बर में घुसाकर अंदर बाहर करने लगा. पैंटी के किनरो ने साइड से मेरे लंड को कस्स रखा था इसलिए मुझे चोदने में काफ़ी मज़ा मिल रहा था शीला भी चुदाई की रफ़्तार बढ़ाने में मेरा साथ देने लगी.धीरे- धीरे पैंटी भी लंड को कसकर बुर पर चांपे हुए थी.पैंटी के घर्सन से लंड भी बुर में पानी छ्चोड़ने के लिए तैयार हो गया.

मैने शीला की कमर को कसकर अपनी कमर में चिपकाए मेरे लंड पानी छ्चोड़ दिया .शीला की पैंटी पूरा भींग गयी.शायद सर्दी के रात के कारण उसे ठंढ लगने लगी फिर उसने अपनी पैंटी धीरे से उतारकर उसी से अपनी बुर पोंच्छ कर पैंटी अपनी हॅंड बॅग में रख ली.

फिर मैं और शीला एक दूसरे से चिपक कर सोने लगें. लेकिन हम दोनो के आँखों में नींद कहाँ. मैं शीला के कान में कहा कुतिया बनकर कब चुदवाओगी. तब शीला कहने लगी घर चल कर चाहे कटीया बनाना या गाय (काउ) बनाकर चोदना यहाँ तो बस धीरे-धीरे मज़ा लो. हमलॉग शाल से पूरा बदन धक रखे थे. शीला फिर मेरे लंड को लेकर मसल्ने लगी मैं भी उसकी बुर के टिट को कुरेद कर मज़ा लेने लगा. आब शीला मुझसे काफ़ी खूल चुकी थी.मेरे होठ को चूस्ते हुए मेरे लंड मसले जा रही थी उसके हाथो की मसलन से फिर मेरा लंड खड़ा होने लगा और देखते ही देखते मेरा लंड शीला की मुट्ठी से बाहर आने लगा. शीला बहूत गौर से मेरे लंड की लंबाई- चौड़ाई नापी 9 इंचस का लंड देख कर हैरान हो मेरे कान में कही इतना मोटा-लंबा लंड तूने मेरी बुर में कैसे धुका दिया. मैने कहा अभी पूरा लंड कहाँ धूकाया हूँ मेरी रानी अभी तो सिर्फ़ 1/4 हिस्सा से काम चलाया हूँ पूरा लंड तो तुम जब घर में कुतिया बनोगी तो हम कुत्ता बनकर डॉगी स्टाइल में पूरे लंड का मज़ा चखाएँगे.

इसपर वो ज़ोर-ज़ोर से मेरे गॉल में दाँत से काटने लगी फिर मैने उसके कान में धीरे से कहा शीला तुम ज़रा कारबट बदलकर सो जाओ. तुम अपनी गंद (आस होल) मेरे लंड की तरफ करके सो जाओ. उसपर वो मेरे कान में कहने लगी. नहीं बाबा गंद मारना हो तो घर में मारना यहाँ मैं गंद मारने नहीं दूँगी. फिर मैने उस से कहा नहीं रानी मैं तुम्हारी गंद नहीं मारूँगा मैं तुम्हे लंड-बुर का ही मज़ा दूँगा. फिर वो कारबट बदल दी. मैने शीला के दोनो पैर मोड़ कर शीला के पेट (बेल्ली) में सटा दिया जिस से उसकी बुर पिछे से रास्ता दे दी.मैं उसकी गंद अपने लंड की तरफ खींच कर उसकी पैर उसके पेट से चिपका दिया और बुर में पहले दो उंगली डालकर बुर के छेद को थोडा फैलाया फिर दोनो उंगली बुर में डालकर उंगली बुर में घुमा दिया शीला उस पर थोड़ा चिहुकी.

फिर मैं उसके गाल पर एक चुम्मा लेकर अपने लंड को शीला की बुर में धीरे-धीरे घुसाने लगा. बहुत कोशिश के बाद आधा लंड बुर में घुसा मैं शीला से ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा लेना और देना चाहता था. इसलिए बहुत धीरे- धीरे घुसाया और एक हाथ से उसकी निपल की घुंडी मसल्ने लगा. मैने देखा अब शीला भी अपनी गंद मेरे लंड की तरफ चांप रही है.

फिर शीला की बुर ने हल्का सा पानी छ्चोड़ा जिस से मेरा लंड गीला हो गया और लंड बुर में अंदर- बाहर करने पर थोड़ा और अंदर गया अब सिर्फ़ 1/4 हिस्सा ही बाहर रहा. और मैं धीरे-धीरे अपनी कमर चलाकर शीला को दुबारा चोदने लगा. शीला भी अपनी गंद हिला-हिला कर मज़े से चुदवाने लगी. इस बार करीब एक घंटे तक दोनो चोदा-चोदि करते रहें. ट्रेन ने एक बार कहीं सिग्नल नहीं मिलने के कारण ऐसा ब्रेक मारा कि शीला के चुतताड ने पिछे के तरफ हाचाक से दवाब डाला जिस से मेरा पूरा लंड खचाक से शीला की बुर में पूरा चला गया शीला के मुँह से भयानक चीख निकलने ही वाली थी कि मैने अपने एक हाथ से शीला का मुँह बंदकर दिया और एक हाथ से उसकी दोनो चूची बारी- बारी से मसल्ने लगा. मैं तो ट्रेन पर उसके साथ ऐसा नहीं करना चाहता था लेकिन ट्रेन की मोशन में ब्रेक लगने के कारण ऐसा हुआ. शीला धीरे-धीरे सिसक रही थी. मैं अपने लंड को स्थिर रख कर पहले शीला की दोनो चूची को कासके मसल रहा था. फिर थोड़ी देर बाद उसे राहत मिली और शीला अब खुद अपनी कमर आगे- पिछे करने लगी. शायद अब उसे दर्द के जगह पर ज़्यादा मज़ा आने लगा.

मेरा हाथ शीला की बुर पर गया मैने देखा उसकी बुर से गरम-गरम तरल पदार्थ गिर रहा है मैं समझ गया कि ये बुर का पानी नहीं बल्कि बुर की झिल्ली फटने से बुर से खून (ब्लड) गिर रहा है.मैने शीला से ये बात नहीं कही क्योंकि वो घबडा जाती मैने अपने पैंट से रूमाल निकाल कर उसकी बुर से गिरे सारे खून को आछि तरह से पोंच्छ दिया और शीला को अपनी गंद आगे- पीछे करते देख कर मैं भी घपा-घपप धक्का दे-देकर चोदने लगा. शीला अब मज़े से चुदवाये जा रही थी. जब मैने 10-15 धक्का आगे पिछे होकर लगाए तो शीला की बुर ने पानी छ्चोड़ दिया. मैं शीला की दोनो संतरे जैसी चूची मसल-मसल कर चोदने लगा. करीब 10 मिनिट तक बुर में लंड अंदर- बाहर करके चोद्ते हुए मैने भी पानी छ्चोड़ दिया. और मैं 5 मिनिट तक अपना लंड बुर में डाले पड़े रहा. जब मेरा लंड सिकुड गया तब फिर बुर से बाहर निकालकर फिर अपने रुमाल से बुर और लंड पोंच्छ कर साफ करके रुमाल ट्रेन की विंडो से बाहर फेंक दिया. इस समय सुबह के 4:35. बज रहे थे. अब हम दोनो भाई- बेहन एक दूसरे से खुल कर प्यार करने लगे.

समाप्त




Shila In Train

Ek din humare massi (mother's sister) Distt.-Gaya ke Village-Tekari se aai mujhe aur Shila ko apne sath gaon apni ladki Gita ki mangni mein le jane ke liye. Hum dono bhai-behan ka ticket apne sath banakar lene aayee.Mummy humse kahi jab tumhare massi etni dur se khud lene aayee to jana to padega hi. lekin Shila ki School bhi khooli hai esliye jao aur mangni ke bad dusre din wapas aa jana. wapsi ka ticket abhi hi jakar lelo.

main Delhi railway station gaya wohan kisi bhi train ka do din ki wapsi ticket nahin mili. ant me main JHARKHAND EXPRESS ka 98, 99 waiting ka hi ticket lekar aa gayen ki nahin confirm hone par TT ko paise dekar train per hi sit le lenge. 29th oct. 2000 ko main aur shila apni massi (mother'ssister) ke beti (Gita) ke mangni se wapas laut rahe the.

Distt-Gaya (Bihar) ke Tekari Gaon me humari massi rahti thi. massi ne Gita ke mangni mein Shila ko lal rang ke langa- choli kharid kar di thi jise pahankar shila mere sath Delhi wapas laut rahi thi. Tekari gaon ke chowk par humlog Gaya Railway station aane ke liye trekar (Jeep) ka entejar kar rahen the. etne mein wohan ek kutti (bitch) aur uske pichhe-pichhe ek kutta (dog) daudta hua yaya. kuttiya humlog se karib 20 ft. ki duri par rook gayee. kutta uske pichhe aakar kutti ke bur (cunt/choot) chatne laga aur phir dono pair kutti ke kamar par rakhkar apna kamar dana dan chalane laga. Jise main aur Shila dono dekhen. kutta bahoot raftar se 8-10 dhakka ghapa- ghap lagakar kerbat le liya. dono ek doosre mein phans gaya. ye scene hum dono bhai-bahan dekhen. etne mein gaon ke kuchh ladke wahan daudte huye aaye aur kutte-kutti par pathar marne lage. kutta apne taraf khinch raha tha aur kuttiya apni taraf. lekin jot chhootne ka nam hi nahin le raha tha.

Main shila ke taraf dekha wo sharma rahi thi lekin ye scene use bhi achha lag raha tha humse niche nazar karke ye scene bade gour se dekh rahi thi. mera to mood kharab ho gaya ab mujhe shila apni bahan nahin balki ek sexy ladki ki tarah lag rahi thi. ab mujhe shila hi kuttiya nazar aane lagi. mera lund paint mein khada ho gaya. lekin etne mein ek treaker (jip) aayee .hum dono jip mein baith gayen. jip mein ekhi sit par 5 log baithe the jis se shila humse chipki hui thi. mera dhyan ab sila ke bur (cunt/choot) per hi jane laga. humlog station pahunche. Main apna ticket confirmation ke liye T.C. office jakar pata kiyen. lekin mera ticket confirm nahin hua tha. phir main socha kisi bhi tarah ek bhi sit lena to padega hi.T.C. bataya aap train per hi T.T. se mil lijiyega shayad ek sit mil hi jayega. Train time par aa gai. shila aur main train par chadh gayen.T.T. se bahoot request karne par Rs.200 mein ek birth dene ke liye agree hua.T.T. ek single sit par baitha tha wo kaha aap log es sit par baith jawo jab tak hum aaten hai koi sit dekhkar. main aur shila gate ke sit par baith gayen rat karib 10pm baj rahi thi khidki se kafi thandi hawayen chal rahi thi. humlog shal se badan dhak kar baith gayen. etne mein TT akar humlog ko dusre bogi mein ek upper birth diya. maine 200 rupees T.T. ko dekar ek ticket confirm karwa kar apne birth per pahele shila ko upper chadhayen chadhate samay main shila ke chootad (buttuk) kaske daba diya tha sila muskurati hui chadhi phir main bhi uper chadha.

Sare sleeper per log so rahen the. humare sleeper ke samne sleeper par ek 7 year ka girl so rahi thi jiski mummy dady middle aur niche ke birth per the. sari light pankhe band the sirf night balb jal rahi thi. tain apni gati mein chal rahi thi. Shila upper birth mein jakar let rahi thi. main bhi upper birth per chadhkar baith gayen. Shila mujhse kahne lagi letoge nahin. main kaha kahan letun jagah to hai nahin es par wo karbat hokar let gayee aur mujhe bagal mein letne kahi. main bhi usike bagal mein let gaya.aur shal odh liya. jagah chhota ke karan hum dono ekdoosre se chipke huye the. shila ka choonchee mere chest se dabba hua tha. mujhe to sila ki choot (bur) per pahle se hi dhyan tha. main aur bhi apne se chipka liya. sila se kahen. aur edhar aa ja nahi to niche girne ka daar hai. wo aur mujhse chipak gayee. shila apni jangh mere jangh (thigh) ke uppar rakh di. uski gaal mere gaal se sata tha. main uski gaal se upna gaal ragadne laga. mera lund dhire- dhire khada ho gaya. main upna ek hath shila ki kamar par le gaya aur aur dhire -dhire uski lahnga upar kamar tak khinch-khinch kar chadhane lage.

Shila ki sanse bhi tej chalne lagi thi. main uski lahnga kamar ke upar kar diya aur uski chootad sahlane lage. main uski panty per se hanth ghuma kar dekhne laga bur (choot) ke pass uski panty gila tha uski bur se chip-chipa lar nikla tha jo mere ungliyon ko chat-chata kar diya. main panty ke under se hanth dalkar bur ke pass le gaya uski bur lar se bhingi huithi. main bur ko sahlane laga shila upni hoth mere hoth par rakh di aur mere hoth ko upne munh mein lekar choosne lagi. mujhe ek bargi pura badan mein josh yaa gaya main ek hath shila ke breast mein dalkar uske santre jaise choochi ko sahlane laga. uski choochi ke nipple kafi chhoti thi use main upne munh me lekar choosne laga. aur pahle ek ungli shila ke bur me dhooka diyen. bur gili hone ke karan assani se ungal bur mein chala gaya. phir do ungli ek bar dhookane lagen es par shila kas-masane lagi main ek hanth se uski nipple ki ghundi masal raha tha aur ek hath uski bur se khilwad karne laga . main kisi tarah dhiree-dhire dono ungli uski bur mein pura ghused diya. aur dono ungli ko chauda karke uski bur mein chalane laga.

shila sisyane lagi aur apni hath mere pant ke jip ke pass lakar jip kholne lagi. maine bhi jip kholne mein uski madad ki aur apna lund shila ke hanth mein de di. sila mere lund ke supade ko sahlane lagi. usko mere lund sahlane se bahoot maja mila main uski bur mein isbar tin ungli eksath dalne laga. bur se kafi lar girne laga jis se mera hath aur sila ki painty pura bhing gayee. lekin esbar tino unli bur mein nahin ja raha tha main ek hanth se bur ko chir kar rakha aur phir tino ungli ek sath dalen shila mere hanth pakad kar bur ke pass se hatane lagi shayad es bar bur tino ungli se bur dard karne laga hoga lekin main uski hoth apne munh me lekar choosne lagen aur kisi tarah tino ungli aadha jakar hi utak gaya .

Main josh mein aa gaya aur shila ki painty ek side karke upna lund uske bur ke chhed mein dhukane lagen. lund ka supada hi bur mein ghusa ki shila mere kan mein kahne lagi dhire- dhire dhukao bur dard kar rahi hai. main thoda sa position lekar uski chootad ko hi upne lund par dabaya to ek 1/4 hissa uski bur mein gaya. main use jyada pareshan nahin karna chahta tha.main sochha pura lund bur mein mein dhukane par uski munh se chikh neklegi aur log jag bhi sakte hain esiliye main 1/4 hissa uski bur mein ghusakar under bahar karne lagen. painty ke kinare side mere lund ko kass rakha tha esiliye hume chodne mein kafi maja mil raha tha shila bhi choodai kiraftar badhane mein humare sath dene lagi.dhire- dhire painti bhi humare lund ko kaskar bur par chanpe huye thi.painty ke gharsan se lund bhi bur mein pani chhodne ke liye taiyar ho gaya.

main sila ke kamar ko kaskar apne kamar mein chipkaye mere lund pani chhod diya .sila ki painty pura bhing gayee.shayad sardi ke ratt ke karan use thandh lagne lagi phir usne apni painty dhire se utarkar usi se apni bur ponchh kar painty apni hand bag mein rakh li.

Phir main aur shila ek dusre se chipak kar sone lagen. lekin humdono ke ankhon mein nind kahan. main shila ke kan mein kaha kuttiya bankar kab chodayegi. tab shila kahne lagi ghar chal kar chahe kuttiya banana aa gay (cow) banakar chodna yahan to bas dhire-dhire maja lo. humlog shal se pura badan dhak rakhe the. shila phir mere lund ko lekar masalne lagi main bhi uske bur ke tit ko kuder kar maja lene laga. aab shila humse kafi khool chuki thi.mere hoth ko chuste huye mere lund masle ja rahi thi uski hanthon ki maslan se phir mere lund khada hone laga aur dekhte hi dekhte mera lund sila ki muthi se bahar aane laga. shila bahoot gaur se mere lund ki lumbai- chaudai napi 9 inches ka lund dekh kar hairan ho mere kan mein kahi itna mota-lumba lund tune mere bur mein kaise dhuka diya. main kaha abhi pura lund kahan dhukaya hun meri Rani abhi to sirf 1/4 hissa se kam chalaya hun pura lund to tum jab ghar mein kuttiya banogi to hum kutta bankar doggy style mein pure lund ka maja chakhayenge.

Ispar wo jor-jor se mere gall mein dant katne lagi phir main uske kan mein dhire se kaha shila tum jara karbat badalkar soao. tum apni gand (ass hole) mere lund ki taraf karke soao. uspar mere kan mein kahne lagi. nahin baba gand marna ho to ghar mein marna yahan main gand marne nahin dungi. phir main us se kaha nahin Rani main tumhari gand nahin marunga main tumhe lund-bur ka hi maja dunga. phir wo karbat badal di. main shila ke dono pair mod kar shila ke pet (belly) mein sata diya jis se uski bur pichhe se rasta de di.main uski gand upnne lund ki taraf khinch kar uski pair uski pet se chipka diya aur bur mein pahle do ungil dalkar bur ke chhed ko thoda phailaya phir dono ungli bur mein dalkar ungli bur mein ghuma diya shila us par thoda chihuki.

phir main gall mein ek chumma lekar apne lund ko Shila ke bur mein dhire-dhiree ghusane lagen. bahut koshish ke bad adha lund bur mein ghusa main sila se jyada se jyada maja lena aur dena chahte the. esiliye bahut dhire- dhire ghusayen aur ek hanth se uski nipple ki ghundi mainjne lagen. main dekha ab shila bhi apni gand mere lund ki taraf chanp rahi hai.

Phir shila ke bur halka sa pani chhoda jis se mera lund gila ho gaya aur lund bur mein under- bahar karne par thada aur under gaya ab sirf 1/4 hissa hi bahar raha. aur main dhire-dhire apna kamar chalakar shila ko dubara chodne lage. shila bhi apni gand hila-hila kar maje se chodbane lagi. Es bar karib ek ghante tak dono choda-chodi karte rahen. train ek bar kahin signal nahin milne ke karan aisi break mara ki shila ki chuttad pichhe ke taraf hachaak se dawab dala jis se mera pura lund khachaak se shila ke bur mein pura chala gayaa shila ke munh se bhayanak chikh nikalne hi wali thi ki main apne ek hanth se shila ki munh bandkar diya aur ek hanth se uski dono choochi bari- bari se mainjne lagen. main to trian per uske sath aisa nahin karna chate then lekin train ki motion mein break lagne ke karan aisa hua. sila dhire-dhire sisak rahi thi. main apne lund ko sthir rakh kar pahle shila ke dono choochi ko kaske mainje. phir thodi der bad use rahat mili aur shila ne ab khud apni kamar age- pichhe karne lagi. shayad ab use dard ke jagah par jyada maja aane laga.

Mera hanth sila ke bur par gaya main dekha uske bur se garam-garam taral padarth gir raha hai main samajh gaya ki ye bur ki pani nahin balki bur ki jhilli phatne se bur si khoon (blood) gir raha hai.main shila se ye bat nahin kahen kyonki wo ghabda jati main apne paint se Roomal nikal kar uske bur se gire sare khoon ko aachhi tarah se ponchh diya aur sila ko apni gand age- piche karte dekh kar main bhi ghapa-ghapp dhakka de-dekar chodne laga. shila ab maje se chodbaye ja rahi thi. jab main 10-15 dhakka age pichhe hokar lagayen to shila ki boor pani chhod di. main sila ki dono santre jaisi choochi mainj-mainj kar chodne laga. karib 10 minute tak bur mein lund under- bahar karke chodte huye main bhi pani chhod diya. aur humlog 5 minute apna lund bur mein dale pade rahein. jab mera lund sikud gaya tab phir bur se bahar nikalkar phir apna rumal se bur aur lund ponchh kar saf karke rumal train ki window se bahar phenk diyen. es samay 4:35a.m. baj rahi thi. ab hum dono bhai- behan ek dusre se khul kar pyar karne lagen.

samaapt

 
मोहिनी भाभी और चाँदनी की चुदाई

मैं अब आपको अपनी सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ।

ये एक लड़की और एक भाभी (मोहिनी) की चुदाई की एकदम सच्ची घटना है। ये दोनों मेरे अलग-अलग प्रवास के दौरान बगल के कमरों में रहने वाली थीं।

मेरा नाम विवेक है, मैं एक छोटे शहर का रहने वाला हूँ। मेरे बगल के घर में एक बहुत ही खूबसूरत लड़की रहती थी उसका नाम चाँदनी था।

उसका कद 5’3” था। उसके घर में एक लड़की आती थी उसका नाम भारती था। उसकी बड़ी बहन चाँदनी के घर में किराए पर रहती थी और उसका भी कद 5’4” था और जिस्म करीब 32-28-34 था। मैं 10 वीं पास करके दिल्ली पढ़ने चला गया। मैं करीब चार महीने बाद लौटा तो मेरी बुआ के लड़के यानि मेरे फुफेरे भैया मेरे घर आए हुए थे। उनका नाम राजीव है। शाम को उनसे बात हो रही थी। उन्होंने मुझे बताया कि बगल में एक लड़की आई है वो मुझे बहुत परेशान कर रही है, वो चाँदनी से कहती है कि राजीव को मुझे दे दो या फिर एक बार मजा दिला दो।

उन्होंने मुझसे बोला- उसका नम्बर ले लो और तुम ही उसे पेल लो।

मैं झट से तैयार हो गया क्योंकि मैंने उससे पहले कभी चूत नहीं मारी थे। सिर्फ ब्लू-फ़िल्म में देख कर हाथ से काम चलाता था, मुठ मार लिया करता था।

दोस्तों.. मैं एक बात आपको बता दूँ कि मेरे राजीव भैया उस बगल वाली लड़की को बहुत पेलते थे, जिसका नाम चाँदनी है। भैया फार्मा में हैं उस समय वो चेन्नई में पढ़ते थे और वो जब भी आते तो रात में अपनी छत से उसके छत पर चले जाते और उसे चोदते। फ़िर सुबह होने से पहले चले आते। वो आकर मुझे सब बताते कि किस तरह वो अपना लन्ड चाँदनी को पेलते हैं… किस तरह उसे चोदते हैं।

तो जब मैंने भैया से उस लड़की की नम्बर लिया और उससे बात की, तो वो पहले तो मुझे नहीं पहचान पाई। फ़िर भैया ने अपनी गर्ल-फ्रेंड को फ़ोन करके बताया कि भारती के साथ छत पर आओ और विवेक उससे बात करना चाहता है। तब भारती सब समझ गई और फ़िर चाँदनी और भारती दोनों छत पर आ गईं।

फ़िर मैंने उससे प्यार से बात की और पूछा- हम लोग भी वैसे मिल सकते हैं, जैसे राजीव भैया, चाँदनी से मिलते हैं? तो उसने ‘हाँ’ कह दी।

चूंकि हम लोग खाना खा कर टहलने गए थे और भैया का चूत मारने का समय हो गया था। इसलिए भारती ने कह दिया, “वो कल से इस बारे में सोचेगी।”

फिर मैं अपने कमरे में आ गया और भारती भी नीचे अपने कमरे में चली गई। फिर हमने फोन पर बातें कीं, करीब एक घंटे तक गर्मा-गर्म बातें करने के बाद.. वो तैयार हुई। फिर मैंने झट से राजीव भैया को फोन किया और चूत छोड़ कर आने को कहा, पर वो नहीं माने, वो बोलते समय जोर लगा रहे थे शायद वो झड़ने वाले थे।

मैंने भारती से कहा- तुम ऊपर का दरवाजा खोलो।

फिर मैं भी भैया की तरह अपनी छत से उसकी छत पर चला गया।

दोस्तों मैं आपको बता दूँ कि मेरी छत और चाँदनी की छत लगभग सटी हुई है। कोई भी आ-जा सकता था।

फिर मैंने उसे गोद में उठाया और नीचे उसके कमरे में ले गया। फिर हमने दरवाजा बंद किया और कपड़े निकाले मुझे तो लड़का होकर भी बहुत शर्म आ रही थी और वो तुरन्त पैंटी और ब्रा में हो गई। उसने तो मेरी चड्डी भी उतार कर रख दी। उसने मेरा लन्ड अपने मुँह में ले लिया। मुझे अजीब सा अहसास होने लगा मैंने सोचा कि ये लड़की बहुत बड़ी चुदक्कड़ लगती है.. खैर मुझे क्या… मैं तो खुद चूत के लिए तड़फ रहा था। सो मुझे छेद आसानी से मिल रहा था। मैंने कभी चूत नहीं मारी थी इस लिए घबराहट सी हो रही थी। फिर भारती ने अपने भी पैंटी और ब्रा बगल में रख दिए। मैं लेट गया और मैंने उसे अपने लन्ड पर बैठने को कहा।

वो मेरे लवड़े पर चढ़ कर बैठ गई और उसने मेरे लन्ड का मुँह अपनी चूत में लगाया। फिर मैंने उसकी कमर पकड़ कर नीचे से धक्का लगाया.. वो चीख पड़ी। वो तो भला हो ऊपर वाले का.. कि किसी ने उसकी आवाज नहीं सुनी.. बगल के कमरे में उसकी बड़ी बहन और जीजा सोए थे। फिर मैंने देखा कि मेरे लन्ड पर खून लगा हुआ था, खून देख कर वो तो रोने लगी। फिर मैंने किसी तरह पुचकारते हुए उसे चुप कराया और उसे लिटा कर मैंने उसकी चूत को तौलिए से पौंछा। फ़िर थूक लगा कर अपना लन्ड डाल दिया। इस बार भी वो चिल्लाई, पर शांत हो गई। मैंने 10- 12 झटके ही लगाए होंगे कि मेरा बीज उसकी चूत में गिर गया। मैं थका-थका सा महसूस कर रहा था शायद डर के मारे। फिर मैंने कपड़े पहने और अपने घर चला गया। बाद में मैंने भैया से पूछा- अगर कोई चूत में ही झड़ जाए.. तो कुछ होगा तो नहीं..?

तो उन्होंने मुझसे आँख मार कर पूछा- कोई.. या फिर तुम…?

मैं उनसे आँख चुराने लगा।

उन्होंने मुझे बताया, “मैं उसी समय ही इधर आ गया था, जब तुमने फोन किया था, पर यहाँ से तो तुम गायब थे… तब मेरी समझ में आया कि तुम इसी चूत के लिए मुझे अधूरे में छोड़ कर आने पर मजबूर कर रहे थे।”

मतलब जब मैंने फ़ोन किया था उसके बाद ही राजीव भैया आ गए थे। फ़िर मैंने उनसे पूछा- कल रात मैं भारती की चूत में ही झड़ गया था.. कुछ होगा तो नहीं?

तो उन्होंने मुझे डराना शुरू कर दिया, “अब तो बच्चा हो जाएगा ।”

फिर मैंने चाँदनी से पूछा- उसने बताया, “नहीं उम्मीद तो कम है फिर भी अभी कुछ दिन मजा लेने के बाद एक गर्भनिरोधक दवा खिला देना..।”

फ़िर अगले दिन मैं भारती के कमरे में गया। वो ब्रा और पैन्टी में ही लेटी थी। उसने मुझसे बताया कि वो ऐसे ही सोती है। फिर हम दोनों ही नंगे हुए।

दोस्तों क्या बताऊँ.. वो क्या गजब की माल लग रही थी। उसकी चूत में हल्के हल्के रोयें से बाल थे.. मानो 1-2 दिन पहले ही झांटें साफ़ की हों। मैंने उसकी चूत चाटनी शुरू की.. वो अकुलाने लगी अपनी टाँगें दबाने लगी, मेरा सिर उसकी टाँगों के बीच में था। मैंने अपनी जीभ चूत के अन्दर ठेली और उसकी चूत के मुँह को चौड़ा किया और पूरे जोश के साथ उसकी चूत को चाटने लगा। वो पूरी तरह तड़फने लगी। वो मुँह से “इस्स्स्स” की आवाज निकाल रही थी। फिर मैंने अपना लन्ड उसके मुँह में डाल दिया। वो मेरा लवड़ा लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। उसके बाद मैंने अपना लन्ड उसकी चूत में डाल दिया, वो मजे लेने लगी और मैं जल्दी-जल्दी उसकी चूत में लौड़ा पेल कर उसे धुकर-पुकर चोदने लगा।

वो बोल रही थी, “मुझे छोड़ दो…।”

और मैं बोल रहा था, “मुझे चोद दो..।” वो हँसने लगती.. पर दर्द के मारे पूरी तरह नहीं हँस पाती। मैं उसे पेलता ही जा रहा था.. ना जाने कहाँ से मुझमें ताकत आ गई थी.. मेरा लन्ड एकदम कड़ा हो गया था और मैं धक्का-पे-धक्का लगाए जा रहा था। पूरा कमरा “पच-पच” की आवाज से गूंज रहा था। उसकी चूत गीली हो गई थी। मैंने अपना लन्ड उसकी चूत से बाहर किया और उसका सारा रस पी गया। कुछ अजीब सा स्वाद था पर मीठा भी था। फिर मैंने लन्ड को वापस चूत में डाला… चूत इतनी गरम थी कि मेरा लन्ड भी घिसते-घिसते गर्म हो गया था और आखिर आधे घंटे बाद मैं झड़ गया। वो भी थक कर चूर हो चुकी थी, फ़िर हमने थोड़ी देर आराम किया और फिर काम पर लग गए। अब मैंने उससे घोड़ी बनने को कहा.. वो झट से बन गई। फिर मैंने उसके चूतड़ों को थोड़ा पीछे किया और अपना लन्ड उसकी गान्ड में पेल दिया। वो चिल्ला उठी.. मैंने जल्दी से उसका मुँह अपने हाथों से दबा दिया। वो डर गई कि कहीं उसकी गान्ड तो नहीं फट गई और उसने मुझे चले जाने को कहा, फिर मैंने उसे समझाया और फिर से चुदाई शुरू हुई। उस रात हमने चार बार चुदाई की।

दोस्तों उस रात मैंने भारती की बुर को भोसड़ा बना दिया। सुबह उसकी चूत सूजी हुई थी।

मैं जब अगले दिन उसके पास गया, तो उसे दवा लाकर दी। फ़िर मैं रोज जाता और उसे पेल कर चला आता। कुछ दिन बाद वो अपने गाँव चली गई और भारती जब भी आती तो मैं उसे चोदता और राजीव भैया जब भी आते तो वो चाँदनी को चोदते थे।

अब इसके बाद मेरे लवड़े को चूत का स्वाद लग गया था।

 
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