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शंकर ने अपने लौडे को नीचे की तरफ दबाते हुए कहा – हां माँ, बहुत परेशान है बेचारा.., लेकिन मजबूरी है.., अभी उसे कोई रास्ता खाली दिखाई ही नही दे रहा…,
रंगीली ने अपनी चूत सहलाते हुए कहा – ये रास्ता है ना.., थोड़ा इसे कोशिश करके सवारी करने लायक कर्दे.., फिर देख कैसा सरपट दौड़ाती हूँ तेरे इस बिगड़ैल घोड़े को…!
माँ-बेटे की इतनी उत्तेजना से पूर्ण बातें सुनकर सलौनी मंद-मंद मुस्कुराते हुए अपनी माँ की चुचियों को सहलाने लगी…!
शंकर ने अपनी माँ की चूत को चाटना शुरू कर दिया.., दोनो भाई बेहन के प्रयासों ने रंगीली को जल्दी ही फिरसे कामोत्तेजित कर दिया…!
शंकर को सवारी करने का इशारा करते हुए बोली – आजा मेरे लाल.., तेरे घोड़े के लिए रास्ता तैयार है.., जैसे चाहे दौड़ा ले…!
इशारा पाकर शंकर ने अपनी माँ की जांघों के नीचे हाथ डालकर उसकी मोटी-मोटी गुदाज चिकनी जांघों को अपने मजबूत पाटों पर चढ़ाया..,
सुराख पर अपने दहक्ते लौडे के सुपाडे को रखा जो कामोत्तेजना से लाल सुर्ख हो चुका था.. करारा सा धक्का अपनी कमर में लगा दिया…!
माँ-बेटी दोनो के मूह से एक साथ बेहद कामुक सिसकी निकल पड़ी.., सलौनी उसे अपने अंदर इमगीन करके सिसकी,
वहीं रंगीली की चूत की मुलायम दीवारों को दरेरता हुआ जब उसका मूसल 3/4 तक अंदर गया…, इतने दिनो से चुद रही रंगीली जैसी परिपक्व महिला भी कराह उठी…!
हाईए…रे हरजाइ…आज क्या हो गया है इसे.., लगता है बेहन की कोरी चूत समझ कर कुछ ज़्यादा ही सख़्त हो गया है…!
शंकर लंड बाहर खींचते हुए बोला – हां माँ, मुझे भी ये आज कुछ ज़्यादा ही फूला सा लग रहा है.., तेरी चूत में एक दम से कस गया है…!
थोडा सा बाहर खींचकर शंकर ने फिरसे एक करारा सा धक्का देकर जैसे ही उसे जड़ तक अंदर किया.., सलौनी अपनी माँ के पेट पर लेटकर उसे देखने लगी…!
माँ की चूत पर आगे से अपने हाथ से टटोलकर देखते हुए बोली – हाई…माँ..ये तो पूरा का पूरा अंदर चला गया…, बहुत गहरी है तेरी चूत…!
औंधी लेटी सलौनी की गोल-मटोल गान्ड सहलाते हुए रंगीली ने उसकी चूत को अपनी उंगली से सहलाते हुए कहा – घबरा मत मेरी लाडो, कुछ दिन बाद तू भी पूरा लेने लगेगी इसे....,
औरत की चूत लंड के आकर के हिसाब से अपना आकार बना लेती है..,
सलौनी बड़े विश्मय के साथ उन दोनो की चुदाई देख रही थी.., माँ की उंगलियों को अपनी चूत पर पाकर उसे फिरसे मज़ा आने लगा था…!
धक्के मारते हुए शंकर ने उसे अपने बदन से सटा लिया.., बीच बीच में वो उसकी छोटी-छोटी कच्ची चुचियों से भी खेलने लगता…!
तीनो को भरपूर मज़ा आ रहा था…, कमरे में आहों कराहों का बाज़ार गरम हो चला था…!
रंगीली एक बार और झड चुकी थी.., शंकर को रोक कर वो अब घोड़ी बनकर बिस्तर पर औंधे मूह हो गयी..,
सलौनी को उसने अपने आगे लिटा लिया.., पीछे से शंकर ने अपना लॉडा उसकी गीली रस से तर-बतर चूत में फिर से पेल दिया..,
एक मादक सिसकी भरते हुए उसने अपना मूह अपनी बेटी की छोटी सी मुनिया की फांकों पर टिका दिया.. और अपनी जीभ से उसे चाटने लगी…!
कुछ देर की धमा-चौकड़ी के बाद अंततः तीनो ही एक साथ अपने अपने परम सुख को पा गये…, एक दूसरे में गुड-मूड बिस्तेर पे पड़े गहरी गहरी साँसें भरने लगे…!
रंगीली ने अपनी चूत सहलाते हुए कहा – ये रास्ता है ना.., थोड़ा इसे कोशिश करके सवारी करने लायक कर्दे.., फिर देख कैसा सरपट दौड़ाती हूँ तेरे इस बिगड़ैल घोड़े को…!
माँ-बेटे की इतनी उत्तेजना से पूर्ण बातें सुनकर सलौनी मंद-मंद मुस्कुराते हुए अपनी माँ की चुचियों को सहलाने लगी…!
शंकर ने अपनी माँ की चूत को चाटना शुरू कर दिया.., दोनो भाई बेहन के प्रयासों ने रंगीली को जल्दी ही फिरसे कामोत्तेजित कर दिया…!
शंकर को सवारी करने का इशारा करते हुए बोली – आजा मेरे लाल.., तेरे घोड़े के लिए रास्ता तैयार है.., जैसे चाहे दौड़ा ले…!
इशारा पाकर शंकर ने अपनी माँ की जांघों के नीचे हाथ डालकर उसकी मोटी-मोटी गुदाज चिकनी जांघों को अपने मजबूत पाटों पर चढ़ाया..,
सुराख पर अपने दहक्ते लौडे के सुपाडे को रखा जो कामोत्तेजना से लाल सुर्ख हो चुका था.. करारा सा धक्का अपनी कमर में लगा दिया…!
माँ-बेटी दोनो के मूह से एक साथ बेहद कामुक सिसकी निकल पड़ी.., सलौनी उसे अपने अंदर इमगीन करके सिसकी,
वहीं रंगीली की चूत की मुलायम दीवारों को दरेरता हुआ जब उसका मूसल 3/4 तक अंदर गया…, इतने दिनो से चुद रही रंगीली जैसी परिपक्व महिला भी कराह उठी…!
हाईए…रे हरजाइ…आज क्या हो गया है इसे.., लगता है बेहन की कोरी चूत समझ कर कुछ ज़्यादा ही सख़्त हो गया है…!
शंकर लंड बाहर खींचते हुए बोला – हां माँ, मुझे भी ये आज कुछ ज़्यादा ही फूला सा लग रहा है.., तेरी चूत में एक दम से कस गया है…!
थोडा सा बाहर खींचकर शंकर ने फिरसे एक करारा सा धक्का देकर जैसे ही उसे जड़ तक अंदर किया.., सलौनी अपनी माँ के पेट पर लेटकर उसे देखने लगी…!
माँ की चूत पर आगे से अपने हाथ से टटोलकर देखते हुए बोली – हाई…माँ..ये तो पूरा का पूरा अंदर चला गया…, बहुत गहरी है तेरी चूत…!
औंधी लेटी सलौनी की गोल-मटोल गान्ड सहलाते हुए रंगीली ने उसकी चूत को अपनी उंगली से सहलाते हुए कहा – घबरा मत मेरी लाडो, कुछ दिन बाद तू भी पूरा लेने लगेगी इसे....,
औरत की चूत लंड के आकर के हिसाब से अपना आकार बना लेती है..,
सलौनी बड़े विश्मय के साथ उन दोनो की चुदाई देख रही थी.., माँ की उंगलियों को अपनी चूत पर पाकर उसे फिरसे मज़ा आने लगा था…!
धक्के मारते हुए शंकर ने उसे अपने बदन से सटा लिया.., बीच बीच में वो उसकी छोटी-छोटी कच्ची चुचियों से भी खेलने लगता…!
तीनो को भरपूर मज़ा आ रहा था…, कमरे में आहों कराहों का बाज़ार गरम हो चला था…!
रंगीली एक बार और झड चुकी थी.., शंकर को रोक कर वो अब घोड़ी बनकर बिस्तर पर औंधे मूह हो गयी..,
सलौनी को उसने अपने आगे लिटा लिया.., पीछे से शंकर ने अपना लॉडा उसकी गीली रस से तर-बतर चूत में फिर से पेल दिया..,
एक मादक सिसकी भरते हुए उसने अपना मूह अपनी बेटी की छोटी सी मुनिया की फांकों पर टिका दिया.. और अपनी जीभ से उसे चाटने लगी…!
कुछ देर की धमा-चौकड़ी के बाद अंततः तीनो ही एक साथ अपने अपने परम सुख को पा गये…, एक दूसरे में गुड-मूड बिस्तेर पे पड़े गहरी गहरी साँसें भरने लगे…!