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रिक्शेवाले सब कमीने complete

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रिक्शेवान को मस्ती ज़रूर चढ़ी थी लेकिन वो पूरी तरह से चौकन्ना था।

तभी दूर से किसी मोटर साइकिल की आवाज आती हुई महसूस हुई।

रिक्शेवाले की फट पड़ी। तुरन्*त सीट पर आ बैठा और पैडल मारने लगा।

कुछ ही देर में एक मोटर साइकिल उसको क्रास करते हुये आगे निकल गई।

तब जाकर उसकी जान में जान आई।

रास्ते का सन्नाटा एक बार फिर उसके दिमाग में चढ़ने लगा-

"बेवी जी एक बात पूछूं......."

"......"-लड़की की मानों बोलती ही बंद हो गई थी।

पर रिक्शेवाला तो अपनी ही मस्ती में मगन था।

"क्या आपके भी वहाँ पर झाँट हैं?......"

तब एकाएक मानों लड़की को होश आया हो। एक रिक्शेवाला अपनी औकात से कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ रहा
 
. "तुमसे मतलब.......चुपचाप अपना काम करो...."-लड़की ने रिक्शेवाले को घुड़का।

"ये तो कोई बात नहीं हुई बेवी जी........आपने तो हमारा देख लिया और जब अपनी बारी आई तो गुस्सा दिखा रही हैं। जैसे की हम रिक्शेवालों की इज्जत कोई इज्जत ही नहीं है।....."- रिक्शेवान अब कहाँ बाज आने वाला था।

"मैंने थोड़ी न कहा था तुमको दिखाने के लिये......."-लड़की ने भी जवाब दिया।

रिक्शेवान की नजर आस-पास उगे अरहर के खेतों पर बड़ी बारीकी से फिर रहीं थीं।

थोड़ी दूर आगे जाकर हल्का सा सन्नाटा दिखा तो ढीढता पर उतर आया-

"देखिये बेवी जी......जो हो लेकिन आपने मेरा देखा है.....अब आपको भी अपना दिखाना पड़ेगा वरना मैं सब को बता दूँगा की आपने मेरा लौड़ा देखा है......पूरे स्कूल में आपकी बदनामी हो जायेगी......"
 
. रिक्शेवाले की ऐसी ढीढता देखकर लड़की का दिल जोरों से धड़क उठा।

"त...तुम चाहते क्या हो?"

"कुछ नहीं......भला मैं गरीब आदमी आपसे क्या चाह सकता हूँ.....आज तक मैंने किसी गोरी लड़की की झाँट नहीं देखी बस एक बार आप दिखा दीजिये सारी बात यहीं कि यहीं खत्म हो जायेगी....."

"नहीं.......तुम किसी को बता दोगे तो..."- लड़की को भी लगा कि बात अगर इतने से खत्म हो रही है तो क्या फायदा आगे बढ़ाने से। दिखा-विखा कर फुरसत लो।

रिक्शेवान की आंखों में मानों कमीनेपन के हजारों जुगनू चमक उठे।

मुँह में पानी आ गया।

मंझा हुआ खिलाड़ी था शिकार को फाँसना अच्छी तरह से आता था।

"मैं भला किसी को क्यों बताउंगा.......आपने मेरा देखा मैने आपका देखा...हिसाब बराबर....कहानी खतम.....लेकिन यहाँ नहीं......"

"तो फिर कहाँ...?"-लड़की की योनि इस बात से चुनचुनाने लगी थी कि आज पहली बार कोई आदमी उसे देखने वाला था।

"अंदर...अरहर के खेत में.......यहाँ सड़क पर कोई आ गया तो आपकी भी बदनामी होगी और मेरी भी....."

रिक्शेवाले ने रिक्शे को सड़क के एक किनारे खड़ाकर दिया।
 
. लड़की का दिल डर के मारे जोर-जोर से धड़क रहा था।

"जल्दी से देखना.......फिर मैं चली आउंगी......"

रिक्शेवान भी कहाँ पीछे रहने वाला था-

"तो और क्या यहाँ पर आपका नाच देखूँगा.....पहले तुम जाओ फिर मैं आता हूँ.....खेत में जाते ही ऐसे बैठ जाना जैसे मूत रही हो ताकि किसी को शक न हो......"

लड़की अपना बैग रिक्शे पर ही छोड़कर अरहर के खेत में घुस गई।

इधर रिक्शेवाले की शैतान खोपड़ी सक्रिय हो गई।

उसने लड़की का बैग सीट के नीचे डाला और वही से तेल की एक शीशी निकालकर पहले गौर से इधर-उधर देखा और फिर लपक कर खेत में घुस गया।

कुँवारी बोरी जो फाड़नी थी।

अरहर के थोड़ा अंदर जाते ही उसे वो लड़की बैठी हुई नजर आई।

रिक्शेवाले ने पहले आस-पास अरहर के पौधों को तोड़कर एक खुली जगह बनाई फिर अपना पैजामा और कुर्ता उतारकर वहाँ पर फैला दिया।

"तुम कपड़ा क्यों उतार रहे हो?....."लड़की का दिल और योनि धुकधुकाने लगी।
 
. "इसलिये ताकि तुम आराम से इस पर लेट जाओ और मैं तुम्हारी झाँट को देख सकूँ.....अब खड़ी हो जाओ और कक्षी नीचे सरकाकर जैसे मूतने बैठती हो वैसे ही बैठ कर अपनी वो दिखाओ...."

"जल्दी से देखना उसके बाद मैं चली जाउंगी....."

लड़की को हालांकि शरम तो आ रही थी लेकिन बिना दिखाये काम भी नहीं चलने वाला था।

लड़की ने एक बार रिक्शेवान की तरफ देखा जो उसकी गोरी-गोरी टाँगों को घूर-घूर कर देख रहा था। स्कर्ट के अंदर हाथ डालकर उसने धीरे से कक्षी की इलास्टिक में ऊंगली फँसाई और धीरे से उसे नीचे सरका कर जल्दी से बैठ गई।रिक्शेवान के भीतर अब और ज्यादा सब्र नहीं बचा था।

उसने भी अपना चड्ढा उतार दिया और अपने लौड़े को मुट्ठी में पकड़ कर जोर-जोर से हिलाने लगा।

"ये क्या कर रहे हो?"-लड़की ने उसके तन्नाये लौड़े को देखा तो डर गई।

"मशीन को गरम कर रहा हूँ.......ताकि तेरी बोरी को खोल सकूँ....."

उसने तेल की शीशी निकाली और उसे अपने लौड़े पर चुपड़ने लगा।

ये देखकर लड़की की योनि में चुनचुनाहट बढ़ गई।
 
. लौड़े को साटते हुये वो लड़की की स्कर्ट उठाकर नीचे झाँकने लगा।

जैसे ही नीचे नजर पड़ी मानों उसको पागलपन का दौरा पड़ गया हो।

योनि पर रत्ती भर भी बाल नहीं था। एकदम सफ़ाचट चिकनी। मानो आज ही किसी नई ने उल्टा उस्तरा मारकर उसे मुन्डा किया हो।

"तेरी बुर तो एकदम चिकनी है......झाँट क्या इस पर तो एक रोवाँ भी नहीं है.....छूरे से साफ किया था या लौँडिया वाली बाल सफा क्रीम लगाई थी।...."

रिक्शेवान ने अपनी खुरदुरी उंगली से योनि की चिकनी फाँकों को छुआ।

लड़की को मानों करेन्ट लगा।

उसकी योनि के छेद से बूँद भर लासा चूँ पड़ा।

"सीSSSSSS........क्रीम से"
 
. "किसलिए चिकनी की थी.......चुदने के लिये....."- वो जिस मूतने वाली पोजीशन में बैठी हुई थी उससे उसकी योनि की फाँकें एकदम भिंच गई थीं। रिक्शेवाले ने अपनी कठोर उंगलियों से योनि की मोटी-मोटी पुत्तियों को चीर कर देखा। कुँवारे पन का लाल रंग उसे दिखाई पड़ा। उसने नाक लगाकर जोर से सांस खींची। लौड़ियापन की एक अजीब सी बू से उसका शरीर मस्ता गया।

"बोल न....किसलिए चिकनी कि है.......चुदने के लिये....."

"ऐसे ही......दो दिन बाद मेरी एम.सी आने वाली है इसलिये किया था......."

"वाह.....तब तो मामला एकदम सेफ है..अगर मैं तेरी बुर भी चोद दूँ तब भी तुझे बच्चा नहीं आयेगा......"- रिक्शेवान नीचे लेट गया और अपनी जीभ घुसाकर बुर के छेद को जीभ से चोदने लगा।

लड़की पिघल गई। लौड़ियापन का मजा जैसे ही मिला वैसे ही उसकी योनि लिंग लेने के लिये सिसकने लगी।

5 मिनट योनि में जीभ की चुदाई से वो एकदम मस्ता गई थी।

रिक्शेवान ने जब देखा कि लौंडिया पूरी तरह से बहक गई है और चूत से लासा टपकने लगा है तो बस लौंडिया को लिटाकर उसकी कुँवारी चूची धर दबोची। जैसे ही चूची मसली गई की लौँडिया पूरी तरह से रिक्शेवान से लिपट गई।

मौका सही था।
 
. लौड़ा तन्नाया हुआ था। चूत पूरी तरह से गीली थी। लड़की भी मस्ती में आकर पूरी तरह से चुदने के लिये तैयार थी।

फिर क्या था।

'गुच्च'-रिक्शेवान ने अपने लौड़े का नुकीला सिरा लड़की की गीली लेकिन कसी बुर में घुसा दिया।

"आईSSS मम्मी......."

एकदम सही मौका देखकर उसने लड़की के लाल-लाल होठों को चभुआ कर अपने होठों के बीच में भर लिया।

'गुच्च'

इस बार पूरी ताकत से लौड़े को भोषड़ी के अंदर चाप दिया।

लड़की छटपटा न पाये इसलिये उसे कसकर अपने सीने से चिपका लिया। लड़की की दोनों मोटी-मोटी गोरी-गोरी चिकनी टांगों को अपने कंधे पर लादकर उसी पर पसरकर हुमकने लगा।

'गुच्च....गुच्च....गुच्च.....'

"आईSSSS.....उईSSS.....मम्मी......."
 
. 5 मिनट बाद जब लड़की नीचे से खुद ब खुद कमर उछालने लगी तब रिक्शेवान ने उसे कुतिया बना दिया और और गाँड़ के छेद में थोड़ा सा तेल लगाकर पहले तो उंगली से उसे चोक-चोक कर नरम बनाया फिर अपने पेल्हर को कस कर चाप दिया।

"आई मम्मीSSSSSS........कल्ला रही है........"

"बस मेरी मुर्गी.......हो गया तेरा काम.......अब देख तुझे कैसे चापता हूँ......जब तक तेरी गाँड़ पादेगी नहीं तब तक मेरा लौड़ा झड़ेगा नहीं....."

उसके बाद तो मानों रिक्शेवान पिल पड़ा।

बस 20 ही धक्कों में गाँड़ ढोल की तरह बजने लगी।

पक्क-पक्क की आवाज ऐसे आ रही थी मानों किसी ने सुरंग खोद दी हो।

"अब बोल......पादती है कि नहीं......."

"नहींSSSS आहSSSSS....."

"जब तक नहीं बोलेगी तब तक चोदूंगा......बोल.....पादती है कि नहीं...."

लेकिन ठीक तभी जैसे ही रिक्शेवान ने कस कर चाँपा

'पुर्रSSSSSSSSSS......'
 
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