• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

लाइफ हो तो ऐसी complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
मैंने बोला “क्या हुआ इतनी जल्दी क्यों खा लिया”.

रूपा बोलि “कुछ और खाने का मन था इस लिए”.

मैंने बोला “क्या”?

रूपा ने झट से मैरा लंड मुँह में डाल लिया और चुसने लगी.

माँ बोली “बेटा थोड़ा तो सबर कर खाना खाने दे उसे”.

रुपा बोलि “माँ क्या करू आज बहुत मन हो रहा है अपनी चूत फड़वाने का”.

काया बोलि “भाभी मेरा भी मन हो रहा है”. माँ बोली “ठीक हे तुम दोनों इंजॉय करो मेरा तो लंच हो गया, में बाहर जाती हु”.

माया दीदी बोलि “में भी चलती हु माँ”

दोनों बाहर चली गई.मैंने भी खाना छोड़ दिया. जब चुदायी करने को मिल रही हो तो किसे भूख लगती है, में खड़ा हो गया, रूपा लंड चूस रही थी,मैंने काया को अपनी तरफ़ खिच लिया और उसकी चूचियों को मसलने लगा. काया बहुत उतेजित थी. दो दिन से वो रोज चुदवाना चाहती थी,मैंने काया के कपडे उतारने शुरू कर दिये. ये देख रूपा खड़ी हो गई और अपने कपडे उतारने लयी. दोनों एक दम रंडी की तरह फटा फट कपड उतार रही थी. दोनों नंगी हो गई और मेरे कपडे उतारने लगी. दोनों ने मुझे नंगा करके सोफ़े पे बैठा दिया. दोनों रंडियो की तरह मुस्कुरा रही थी. में आराम से बैठा हुआ था. काया रूपा की चूचियों को दबाने लगी और रूपा काया की. में दोनों उतेजित लकडियो के बिच था. और पता नही था क्या होने वाला हे. काया रूपा की दोनो चूचियों को दबा दबा के चुस्ने लगी. उनको देख के में भी लंड हिलाने लगा.दोनो एक एक दूसरे को नोच रही थी. बुरी तरह एक दूसरे की चूचियों को दबा रही थी.

दोनो की सिसकियो से मेरा लंड भी जोर मार रहा था. दोनों मेरे पास आई.

रूपा झुक के मेरे लंड को मुह में लेने की कोशिश कर रही थी. और काया मेरे मुह से अपनी चुचियो को रगड रही थी. रूपा अपनी चूत मसलते हुए लंड चुसने लगी. काया की चूची को मुह में डाल मैंने दो ऊंगली उसकी चूत में घूस दी. दोनों मस्त हो गई थी. दोनों ही मुझ पे हावी हो रही थी. रूपा लंड मुह में भर भर के चुस रही थी और काया की चूचियों को मुह में भर भर के में चुस रहा था. काया के निप्पल को जब भी काटता काया जोर से कराहने लगती.मैंने काया की चूत में जोर जोर से ऊंगली करना शुरू कर दिया. काया की चूत बहुत गीली हो गई थी. दोनों के चूत पाणी छोड़ने लगी थी

फिर रूपा ने लंड चूसना बंद कर दिया और अपनी चुचियो के बिच मेरा लंड दबा के हिलाने लगी. आज रूपा की चूचियों को भी चोदने को मिल गया. रूपा लंड को चूचियों में दबा के हीला रही थी. बिच बिच में लंड चुसने लगती. थोडी देर बाद. काया खड़ी हो गई और मेरे मुह पे अपनी चूत लगा के दबाने लगी. उसकी चूत से बहुत अच्छी महक आ रही थी, में उसकी चूत को चुसने लगा. मैंने अपनी जीभ अंदर तक घूसा दी. और चूत चुसता रहा. काया की चूत बहुत पानी छोड़ रही थी मैंने सारा पानी पिया. में और देर नही कर सकता था. हमे लंच करते हुये १ घण्टा हो गया था. मैंने काया को नीचे उतार दिया और खड़ा हो गया, अब मुझे दो दो की चुदाई एक साथ करणी होगी मुझे पता था. मैंने रूपा को सोफ़े के सहारे झुका दिया फिर मैंने काया को उसकी पीठ के ऊपर उलटे लेटने को बोला. दोनों सोचने लगी आखिर

करने क्या वाला हु? काया का वेट् कम था तो रूपा आसानी से उठा सकती थी. काया रूपा के उपर लेट गई. में दोनों के सामने आ गया. मैंने काया की चूत में ऊंगली डाली और रूपा की चूत में लंड डाल के धक्का का मार् दिया. दोनों को समझ आ गया अब उनकी ऐसे ही चुदायी एक साथ होगी में रूपा की चूत में धक्के मारने लगा और काया की चूत बुरी तरह मसल रहा था. दोनों सीस किया ले रही थी. मैंने जोर जोर से दुसरे हाथ से काया की निप्पल को मसला. रूपा की चूत फच फच की आवाज निकालने लगी. मुझे पता था दोनों गरम है जल्दी ही झड जायेगी पर में
 
दोनो को ज्यादा मज़ा देना चाहता था. इस लिए मैंने लंड रूपा की चूत से निकल के काया की चूत में घुसा दिया. और रूपा की चूत मसलने लगा. दोनों मस्ती में कामुक अवाजे निकल रही थी. में दोनों की बारी बारी चूत मार रहा था. दोनों ही दीवानी सी हो गई थी. फिर काया रूपा के उपर से उत्तर गई और उसके साथ झुक के बोलि

“भाई अब नही रहा जा रहा, शरीर भारी भारी हो रहा है अब तो हल्का कर दो”.

मैंने बोला “ठीक हे अब देखो तुम दोनों की क्या हालत करता हु”

मैंने रूपा की चूत पे लंड रखा और जोर से धक्का मार् दिया. मैंने उसकी चूचियों को पकड़ लिया और उसे जोर से पकड़ के दबाने लगा, रूपा को मैंने खिच के सिधा करने की कोशिशि की रूपा थोड़ी झुकी हुई थी में जोर जोर से मसल के चूचियों को धक्के मारे जा रहा था.

रूपा का बुरा हाल हो गया था. चूचिया दबाने से लाल हो गई थी.

चूत बहुत पानी छोड़ रही थी. उसकी चूत से जैसे लार टपक रही थी. में धक्के मारे जा

रहा था. रूपा झडने लगी,रूपा झडती रही में धक्के मारता रहा आखिर मैंने उसकी चूत से लंड बाहर निकाला उसकी चूत से पानी रिसने

लगा, फिर मैंने उसकी चूत में ऊंगली डाल के पानी को बाहर निकल के चाटने लगा. रूपा सोफ़े पे बैठ गई और हाफने लगी. में सोफ़े पे बैठ गया और काया को सिधा ऊपर आने को बोला, काया सीधा मेरे लंड पे अपनी चूत रख के बैठ गई. मेरा लंड उसकी चूत को भेदता हुआ अंदर घूस गया. मैंने काया की चुचिओ को चूसना शुरू कर दिया. काया के एक निप्पल को दातो से दबा लिया. काया लंड पे उछलने लगी. में चूचियों को चुसता मसलता हुआ चूत मारने लगा

काया काफी गरम लड़की बनती जा रही थी. उसके जिस्म की भूख माया और रूपा से ज्यादा होती जा रही थी. काया मेरे लंड पे जोर जोर से उछल के चुदवा रही थी.काया कुदते हुए थक गई थी. मैंने उसे उठा के सोफ़े पे लिटा दिया और जोर जोर से धक्के मारने लगा. रूपा हमारी चुदाई देख रही थी. उसकी चूचिया लाल हो गई थी चूत भी बहुत गीली लग रही थी काया भी तभी झड़ने लगी मेरे लंड को गिला गिला सा लगा. मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा.

काया भी पुरे जोश के साथ मेरा साथ दे रही थी. में भी झडने वाला हो गया था. मैंने

उसकी चूत से लंड निकाला और दोनों को बोलो से पकड़ के खिच लिया. मेरा लंड दोनों ने पकड़ के सहलाना शुरू कर दिया तभी मेरे लंड से पिचकारी निकलने लगी. दोनों मेरे पानी को अपने मुह में लेने की कोशिश कर रही थी. मेरी पिचकारी से उनका मुह और चेहरा भर गया था.

मे सोफ़े पे बैठ गया दोनों ने मेरा लंड चाट के साफ किया. फिर एक दूसरे को चाटने लगी दोनो मेरे आजु बाजु बैठ गई.

मैंने पूछा “मज़ा आया मेरी रानियो”.

दोनों एक साथ बोलि “हां हमारे राजा”.

मैंने दोनों के होठो को चुसना शुरू कर दिया

दोनो के साथ मस्त लंच करके मूड फ्रेश हो गया. दोनों ने अपने कपडे ठीक किया. मैंने भी कपड पहन लिए. हम तीनो बाहर आये तो माँ और माया दीदी हस रही थी. मुझे समझ नही आया क्यों हस रही है? माया दीदी मेरे पास आई और बोली

“तुम्हारे गालो पे लिप्स्टिक लगी हे साफ कर लो वरना सब समझ जायेंगे”.

मैंने जल्दी से अपणे गाल साफ किये.

मैंने बोला “तुम सब काम करो में रोहित से मिल के आता हु,उसे बोलणा है वह रोज होटल जाया करे आखिर उसे भी तो वहा काम करना हे”.

माँ बोलि “ठीक है बेटा”.

मैंने बोला “आप सब डिनर होटल में ही करना आज में कुछ खास बनवा रहा हु”

माँ बोलि “ठीक है बेटा”.

मैंने बोला “माँ टाइम पे आ जाना”.

माँ बोली “डोंट वर्री”.

में वहा से रोहित के फ्लेट में पंहुचा.
 
कोमल आंटी ने गेट खोला. मुझे देख के बोलि

कोमल आंटी- “आओ जान आ ही गई मेरी याद”. रजत- “याद तो बहुत आती हे पर तुमको ५ मंथ लग चुके हे, और में अपने बच्चे को नुक्सान नही पहुचाना चाहता”. कोमल आंटी- “में भी हमारे बच्चें का पूरा ख्याल रख रही हु, अब अंदर भी आओ”.

रेखा सोफ़े पे बेठी थी. मुझे देख मुस्कुराने लगी. कोमल आंटी मेरे से सट के बैठ गई. रजत- “तुम्हारा पति कहा हे”

कोमल आंटी- “अभी वो काम पे गया है,और रोहित मार्कीट गया है”.

रेखा दूर बेठी थी

रजत- “इतनी दूर क्यों बेठी हो पास आओ”. रेखा उठ के मटकती हुई मेरे पास आई. मैंने उसकी कमर में हाथ डाल के खींच लिया.

रेखा- “क्या बात है आज मूड बना हुआ हे क्या”?.

रजत- “नही अभी अभी अपनी बीवी और बहन चोद के आ रहा हु, अभी मूड नही में इस लिए आया था की रोहित से मिल लू आखिर आज कल कहा रहता है वो”?

आंटी- “कहा रहेगा अपनी माँ की देख भाल करता है”

रजत- “देख भाल करे तो ठीक हे और कुछ ना कर पाये, वेसे उसका मन तो होता ही होगा”

कोमल आंटी- “हां रोज बोलता है गांड ही मरवालो, में बच्चे को लेकर रिस्क नही ले सकती, इस लिए मना कर देती हु”.

रजत- “मेरे पास एक आईडिया हे, क्यों ना रेखा रोहित को कभी कभी खुश कर दिया करे”.

रेखा- “मुझे कोई एतराज नही पर कोमल राजी हो जाये, कमसे कम रोज लंड तो मिलेगा”.

आंटी- “रजत सोच लो रोहित कही काम ना बिगाड़ दे”.

रजत- “डोंट वर्री में हु ना”

रजत- “रेखा तुम कहा रहती हो”?.

रेखा- “बस ऊपर ही”.

रजत- “मुझे नही दिखाओगी”.

में रेखा का नही अलीना का रूम देखना चाहता था.

रेखा- “चलो में दिखाती हु”.

मैंने आंटी को बोला “आया में”.

आंटी- “ज्यादा देर मत करना”.

रजत- “आ रहा हु बस”.

में रेखा के साथ ऊपर के फ्लौर पे आया. रेखा मुझे अपने रूम के पास ले जाकर बोलि

रेखा- “ये मेरा रूम हे”.

रजत- “और ये सामने वाला”?

रेखा- “में जानती हु तुम इस रूम के बारे में जानना चाहते हो, पर इसमें एक बूढ़े को देखा हे जो अपनी पोती के साथ कभी कभी आता हे पर अंदर कोण हे आज कल, किसी को पता नही चला”.

रजत- “कोई बात नही वो भी पता चल जायेगा”.

फिर में उसे लेकर आंटी के रूम में आ गया रोहित आ गया था.

रजत- “साले कहा रहता है, ना घर आता है, नाही मिलने आता है, साले में परेशन हु होटल को अच्छा बनाने में, तू यहाँ घर में बैठ के गांड मरवा रहा है”

रोहित- “भाई माफ कर में तो सोचा जब तुझे जरुरत होगी तो बुला लेगा”.

रजत- “साले कल से सारा दीन तू होटल में रहेगा और काम देखेगा”

रोहित- “भाई घुस्सा क्यों हो रहे हो जो बोलोगे वैसा कर दूंगा”.

रजत- “साले अभी से काम पे ध्यान दे वर्ना एक दिन तेरी गांड मार लूंगा”.

आंटी- “बेटा कल से में खुद इसे भेज दूंगी, कभी हमे भी दिखाओ होटल”

रजत- “ओह में तो भूल ही गया में आप सब को होटल ही तो ले जाने आया था, आज रेखा का पति खाना बना रहा है, और मैंने सारे स्टाफ़ और घर वालो को डिनर के लिए बोला हे, तो मैंने सोचा आप लोगो को भी साथ होना चाहिये, तो आ गया लेने, तो जल्दी रेडी हो जाओ अंकल को कॉल कर दो वो सिधा वही आ जाएँगे”.

मैंने रेखा को बोला वो भी साथ चले कल से उसकी भी जॉब लगवा दूंगा दोनो मिया बीवी साथ काम कर लेंगे. सब रेडी होने चले गए. हम सब बाहर आये तो मुझे राहुल की याद आई. मैंने राहुल को कॉल किया.

राहुल- “और राजत भाई कैसे याद किया”?. रजत- “राहुल भाई नेहा जी को लेकर होटल पहुच जाना आज डिनर पार्टी हे वहा पे”. राहुल- “वॉव में नेहा को बोल देता हु, वो रेडी हो जाये उसे ही सब से ज्यादा टाइम लगेगा”. रजत- “९ बजे तक आ जाना”.

राहुल- “भाई में सब से पहले पहुच जाउँगा, में तो घर जा रहा हु अभी”. इतना बोल के उसने कॉल काट दिया. मैंने टैक्सी बुलवा ली. मैंने रोहित को बोला तू आंटी के साथ रह. और टेक्सी वाले को बोला आराम से लेकर जाना आंटी प्रेग्नेंट हे. टेक्सी वाला- “ओके सर आप फ़िक्र मत करो आराम से लेकर जाउँगा”. मैंने रोहित को टेक्सी वाले के साथ बेठने को बोला ताकि आंटी को ज्यादा जगह मिल सके.
 
आंटी और रेखा दोनों साथ बेठी हुई थी. मैंने भी बाइक स्टार्ट कर दी. मैंने माया दी को कॉल किया और पूछा वो सब रेडी हे की नही. माया- “आज ८ बजे ही सब की छुट्टी कर दी थी, अभी सब रेडी हो रहे हे शॉप में ही, तुम होटल चलो में माँ के साथ आ जाउंगी”. रजत- “ठीक हे,

में भी रोहित की टॅक्सी के पीछे पीछे चल पड़ा, हम जल्दी ही पहुच गए होटल. मैंने होटल के मैंनेजर से पुछा

“डिनर रेडी है की नही”.

मैंनेजर- “सर सब रेडी है”.

रजत- “तो टेबल लगवा लो’.

मैंनेजर ने टेबल लगवा दिये. मैंने उसे बोला तुमने अपनी फैमिली को बुलाया हे क्या. मैंनेजर- “सर मेरी फॅमिली इतने महंगे होटल में खाना नही खा सकती, में जरुर मैनेजर हु, पर बहुत जिम्मेदारिया भी हे मुझ पे”.

रजत- “देखो में चाहता हु हम सब यहाँ फॅमिली बन के काम करे नोकर मालिक नही तो अभी अपनी फॅमिली को कॉल करके बुलाओ, हम भी देखे तुम्हारी फॅमिली को, इसी बहाने जान पहचान भी हो जायेगी” मैंनेजर मेरा मुह देख रहा था.

रजत- “यार अब जाओ कॉल कर लो तब तक में अपनी फॅमिली के साथ थोड़ा बेठता हु मेरी फॅमिली वैसे भी बहुत बड़ी है”.

मैंनेजर ने अपनी फमलीय को कॉल कर दिया. में आंटी के साथ एक टेबल पे जाकर बैठ गया.

आंटी- “बेटा होटल बहुत अच्छा है”.

रजत- “आंटी बस जैसा है अपना ही है, और इसे और अच्छा बनाना है हमे”

मैंने रोहित से सब को मिलवाया.

रजत- “ये भी आप के बॉस हे तो इनको यहाँ का काम सीखना हे”

तभी राहुल और माया दीदी माँ के साथ एक साथ आ गई. नेहा ने एक सेक्सी सी साडी पहनी हुई थी. उसकी बैक एक दम खुलि हुई थी. उसकी चूचिया साफ नज़र आ रही थी. उसकी पतली कमर की लचक देख के मेरा लंड खड़ा होने लगा. नेहा मुस्कुराते हुए मेरे पास आई और बैठ गई. राहुल मेरे सामने बैठ गया. माया दीदी रूपा माँ काया भी बहुत सुन्दर लग रही थी.

रजत- “क्या यार तुम सब इतनी सुन्दर लग रही हो कही कोई मर ना जाये”.

नेहा- “मरता हे तो मरे हमे क्या”.

सब हसने लगे. तभी मैंनेजर की

फॅमिली भी आ गई. उसके दो छोटे छोटे बच्चें थे. उसकी बीवी भी सुन्दर थी. थोड़ी हेल्दी थी खाते पीते घर की थी. बड़ी बड़ी चुचिया. बाहर को निकला हुआ पेट. बड़ी सी गांड देख के मैंने अपना लंड पेण्ट के ऊपर से ही मसल दिया. अब समझ आया क्यों मैंनेजर अपनी बीवी से नही मिलवा रहा था.

रजत- “आओ आओ बेठो”.

मैंने सब से उनको मिलवाया. फिर मैंने होटल स्टाफ़ को बोला टेबल पे खाना सजा दो. सब अपना खाना खुद ले लेंगे. समझ लो आज पार्टी में आये हो सब. सारे होटल स्टाफ़ ने टेबल पे खाना सजा दिया. नोनवेज के साथ वेज खाना भी बना था. जो देखने में बहुत अच्छा लग रहा था. तभी एक विदेशी आया. वो मैनेजर से बात कर रहा था.

रजत- “क्या बात है”?

मैनेजर- “सर कुछ लोग है डिनर करना चाहते है, मैंने बोल दिया हे आज यहाँ पार्टी हे तो डिनर नही मिलेगा”.

रजत- “उसे बुलाओ”

मैनेजर ने उसे आवाज लगा के बुलाया.

रजत- “भाई खाना पैसो से नही मिलेगा, ये फॅमिली पार्टी हे तुम भी फॅमिली बन के खा सकते हो”.

वो बहुत खुश हो गया वह बाहर चला गया थोड़ी देर बाद १५-२० विदेशी आ गये. उनको भी भूख लगी थी वो डिनर करना चाहते थे. वो इंडिया घुमने आये हुए थे. देखने से ही

पता चल रहा था ये एक फॅमिली है छोटे बच्चे बड़े बच्चे बूढ़े थे जवान थे.

मैंने सब का वेलकम किया. मैंने मैनेजर को बोला “ये हमारे गेस्ट हे,जरा देखना इनका ख्याल रखना हमारे देश की इज्जत का सवाल है”.

मैंनेजर- “डोंट वर्री सर मैं सब देख लुँगा”. रजत- “चलो डिनर के लिए सब आ जाओ और खाने के बाद सब बताना कैसा हे खाना”.

हम सब डिनर करने लगे. आज पहली बार पता चल की शाकाहारी खाना भी लाजवाब हो सकता हे. सब भर पेट खाना खाने लगे. सब खुश थे. विदेशी लोग भी खाने की तारीफ कर रहे थे. खाना खाने के बाद मैंने सब के लिए फ्री ड्रिंक का ऑर्डर दिया. फिर मैंने पूछा “कसा लगा खाना”?

मेरा स्टाफ बोला “बॉस ये पहली बार हुआ है जब कोई मलिक नोकरो के साथ खाना खाया हो, और खाना भी बहुत टेस्टी था”
 
साथ बने रहने के लिये आप सब का बहुत धन्यवाद
 
१५-२० विदेशी आ गये. उनको भी भूख लगी थी वो डिनर करना चाहते थे. वो इंडिया घुमने आये हुए थे. देखने से ही

पता चल रहा था ये एक फॅमिली है छोटे बच्चे बड़े बच्चे बूढ़े थे जवान थे.

मैंने सब का वेलकम किया. मैंने मैनेजर को बोला “ये हमारे गेस्ट हे,जरा देखना इनका ख्याल रखना हमारे देश की इज्जत का सवाल है”.

मैंनेजर- “डोंट वर्री सर मैं सब देख लुँगा”. रजत- “चलो डिनर के लिए सब आ जाओ और खाने के बाद सब बताना कैसा हे खाना”.

हम सब डिनर करने लगे. आज पहली बार पता चल की शाकाहारी खाना भी लाजवाब हो सकता हे. सब भर पेट खाना खाने लगे. सब खुश थे. विदेशी लोग भी खाने की तारीफ कर रहे थे. खाना खाने के बाद मैंने सब के लिए फ्री ड्रिंक का ऑर्डर दिया. फिर मैंने पूछा “कसा लगा खाना”?

मेरा स्टाफ बोला “बॉस ये पहली बार हुआ है जब कोई मलिक नोकरो के साथ खाना खाया हो, और खाना भी बहुत टेस्टी था”

विदेशियो से मैंने पूछा “आप लोगो को खाना कैसा लगा”?

विदेशियो में से एक बूढा आदमी बोला “बेटा खाना बहुत लाजवाब है, और हम लोगो को खाना खिलने के लिए थँक्स”,

विदेशी को हिंदी बोलता देख में हैरान हो गया,

रजत- “अंकल आप हिंदी कसे बोल रहे हो”?

बूढा- “बेटा २५ साल से इंडिया आ रहा हु, इंडिया की कई सिटी घुम चुका हु, यहाँ के लोग यहाँ की रीतिरिवावज और त्योहार मुझे पसंद हे, इस लिए में जब भी यहाँ आता था, हिंदी बोलना सीखता था, अब तो बोल लेता हु, में अपने बच्चों को भी इस लिए यहाँ लाता हु की वो एक अच्छे इंसान बने, हमारे देश में तो कोई किसी से मतलब नही रखता, जब की इंडिया में सब मिल जुल के रह्ते हे, हर काम आपपास में मिल जुल के करते हे” फिर बूढा बोला “बेटा तुम्हारे होटल के बारे में लिखूँगा में”,

उसने बताया वो इंग्लैण्ड में किसी न्यूज़ पेपर का एडिटर हे, मैंने सोचा चलो इसे बहाने,

इंग्लैण्ड में फ्री में मेरे होटल की ऐड हो जायेगी और ज्यादा से ज्यादा विदेशी मेरे होटल मे आयेंगे,

रजत- “अंकल थैंक्स, आप खुश हो तो में भी खुश हु”,

बूढा- “अच्छा बेटा हम चलते है”,

मैंने भी ओके बोल दिया, फिर हम सब बैठ के गप्पे मारने लगे, मैंने उन स्टाफ को खाना घर ले जाने को बोला जिनकी फैमिली यहा उनके साथ है, सब खुश थे, मैनेजर को भी बोला

रजत- “तुम भी अब घर चले जाओ,आज में यहाँ हु लेट नाइट घर जाउँगा”

कुछ वेटर और स्टाफ को छोड बाकि सब लोग चले गये, मैंने उनको बोला ‘होटल में गेस्ट तो है नही इस लिए चाहो तो घर जा सकते हो’,

उन्होंने बोला ”हम लोग तो यही रह्ते है हमारे पास रहने की जगह नही ह” मैंने

रजत- “ठीक हे तुम लोग भी आराम कर लो अब”

मैंने राहुल और रोहित को भी बोला “टाइम ज्यादा हो रहा हे तुम लोगो को भी जाना चाहिए”,

मैंने सब के लिए एक एक ड्रिंक और मंगवाई, फिर हम लोगो ने पी, राहुल और रोहित चले गए, में भी अपनी फैमिली के साथ घर आ गया, नशा कुछ ज्यादा हो गया था, हम सब तक भी गए थे, तो अपने अपने रूम में जा के सो गये,

नेक्स्ट डे से रोहित भी अब जाने लगा होटल, होटल बनाने की स्पीड उसके जाने से तेज़ हो गई, माँ की शॉप को काया और रूपा ने संभाल लिया, मैंने कुछ लोगो का और इतज़ाम कर लिया, अब माल ज्यादा मंगवाना पड़ता था रखने के लिए एक गोदाम और खरीद लिया, माया दी भी अपने पार्लर और स्पा के लिए सामानो की शॉपिंग करने लगी,

कॉलेज भी शुरू होने वाला था, मैंने पेपर में ऐड भी दे दी पर होटल का नाम बदल दिया होटल का नाम “हार्ट ऑफ़ इंडियन” रख दिया, सब बहुत तेज़ी से हो रहा था,

सब काम देखने पड रहे थे, काफी बिज़ी रहने लगा, बिच बिच में मस्त भी कर रहा था, कभी होटल में माया दीदी के साथ तो कभी काया के साथ कभी माँ और रूपा के साथ, स्पा रेडी था अब मुझे पेंटिंग करवानी थी, इस लिए मैंने जयपुर से एक पेंटर को बुलाया और उसे बोला की पुरे होटल में इंडियन आर्ट चाहिए मुझे, मैंने उसे नेटपे कुछ इमेज दिखाई, उसने बोला ठीक है जहां होटल १५ दिन में ओपन होने वाला था वह १० दिन और लगने वाले थे, पीटर ने अपने साथियो के साथ काम शुरू कर दिया, मैंने होटल लॉक करवा दिया ताकि अंदर क्या हो रहा है किसी को पता ना चले, ये मेरे बिजनेस के लिए अच्छा था, में ऐसा होटल बना रहा था जैसा पूरी सिटी में नही था, मैंने होटल के आस पास की जमीन भी खरीद ली, कुछ सर्वेट क्वाटर बना दिए, पार्किंग और बैठने के लिए जगह बना दी, मैंने कुछ बाग़वानी वालो से

बात करके होटल के यज़ पास बहुत बढ़िया घास और पेड़ पौधे लगवा दिये, जिसके वजह से होटल बहुत खूबसूरत हो गया था, रोहित भी बहुत ध्यान दे रहा था, जब उसे अच्छा नही लगता वह वो दुबारा काम करवा दे रहा था, मुझे ख़ुशी थी रोहित अब सब कुछ संभाल रहा है, में माँ की शॉप पे भी अब ध्यान दे रहा था, मैंने माँ की शॉप में सीसीटीवी कैमरे लगवादिये, और डोर पे एक गार्ड खड़ा कर दिया जो बिल देख के लोगो को बाहर जाने दे रहा था,
 
मैंने माँ की शॉप को बढ़ाने की शोच ली थी इस लिये मैंने माल की डिलीवरी ज्यादा कर दी, मैंने डिस्ट्रब्यूटर को बोल दिया हम और ज्यादा माल दो, माँ की दूकान बहुत चल रही थी, अच्छी आमदनी हो रही थी, मैंने दो कार ले ली एक कार माँ की शॉप पे काम करने वाली लड़कियों के लिए और दूसरी अपने होटल के लिए, मेरे होटल में भी सीसीटीवी कैमरे लग गए, मैंने आस पास ऐसे कैमरे लगवाये जो वीएसआर लेस थे, ताकि आस पास कुछ गलत न हो, मैंने एक सिक्युरिटी चेम्बर भी बनवा लिया जहा से पुरे होटल के हर फ्लोर और एरिया को देखा जा सकता था, मैंने उसमे कई कैमरे देखने के लिए एलसीडी भी खरीद लिए, और लगवा दिए, वनमंथ आफ्टर मेरा होटल रेडी था ओपनिंग के लिए, मैंने राहुल को बोल दिया सिटी के बड़े और फेमस लोगो को इनवायट कर दे, मैंने एक बहुत बड़ा बैनर भी लगवा दिया, “हार्ट ऑफ़ इंडियन” होटल का, ओपनिंग का दिन दो दिन बाद था, में काफी खुश था, क्यों की सारी सिटी में मेरे होटल की चर्चा हो रही थी, आये दिन में आपने होटल की एड न्यूज़ पेपर और केबल पे दिलवा रहा था, में एक ग्रेड ओपनिंग पार्टी देना चाहता था, पर में किसके हाथों से ओपनिंग करवाउ यही समझ नही आ रहा था, होटल ओपनिंग के लिए एक दिन बचा था, एक दिन एक अदमी का कल आया, मैंने पूछा “कौन? तो पता चला गोवा के मेयर का कॉल है में तो सुन के हैरान रह गया इनको किसने मेरा नंबर दे दिया,

मेयर- “मैंने तुम्हारे होटल के बारे में बहुत सुना के मुझे तुम्हारा कार्ड मिला है, में जरूर आना चाहूंगा”

तभी मेरे दीमाग में ओपनिंग वाली बात आ गई,

रजत- “सर क्या में एक बात बोल सकता हु”

मेयर- “हा बोलो”

रजत- “क्या आप मेरे होटल की ओपनिंग करोगे”

मेयर (खुश हो के) “व्हाई नॉट, ये तो मेरी खुश किस्मती होगी जो इतने बड़े और अच्छे होटल की ओपनिंग करूँगा”

रजत- “सर थैंक्स आप की वजह से मुझे अब शांति मिली है मे बहुत परेशान था”

फिर मैंने कुछ नॉर्मली बाते की और उन्होंने कॉल रख दिया,

राहुल से मिला

राहुल- “मैंने सिटी के कुछ बड़े लोगो को बुलाया है कुछ न्यूज़ पेपर एडिटर को भी”

रजत- “थैंक्स यार तुम न होते तो में ये सब कर ही नही पाता”

राहुल- “ये में तुम्हारे लिए नही अपने लिए भी कर रहा हु आखिर रोहित मेरा भी कुछ लगता है”

अब मुझे इंतज़ार था कल का, मैंने लाइटिंग और सजावट वालो को भी बोल दिया था, पूरा होटल कवर करवा दिया था ताकि किसी को अंदर के राज के बारे में पता ना चल सके, और आस पास गार्ड लगवा दिए ताकि कोई हमारे होटल के बारे मे कोई बात लीक न कर दे, में सच में बहुत खुश था, और अब में अपनी स्टडी भी कर सकता था, मैंने काया माया माँ और रूपा के लिए अच्छी साड़िया और ड्रेसेज खरीद लिये, कुछ जेवर भी बनवाए थे, मेरी और रोहित की फैमिली बहुत खुश थी, में इस ख़ुशी को बढ़ाना चाहता था, इस लिए मैंने मामा मामी और चाचा चाची को भी बुलावा भेज दिया था उनकी टिकट बुक कर दिया था, वो लोग वहा से निकल चुके थे और रात तक पहुच भी जायेंगे, मैंने राहुल और रोहित को उनको लेने के लिए रेलवे स्टेशन भेज दिया था, राहुल और रोहित टाइम पे पहुच गए थे, गाड़ी भी टाइम पे थी वो सब को लेकर आ गये, माँ और माया काया रूपा, चाचा चाची और मामा मामी को देख के खुश थी, सब बहुत थक गये थे, मैंने उनको आराम करने को बोला, सूबह जागा तो अनु और रेणु मेरे सामने खड़ी मुस्कुरा रही थी,

रजत- “क्या हुआ”?

अनु- “भाई आप तो बहुत चालू निकले, दीदी से ही शादी कर ली”

रजत- “क्या करता, उस से प्यार करात हु” अनु- “यानि हमसे नही करते हो”?

रजत- “करता हु पर उतना नही, तुम्हारी दीदी मेरी जान है, मेरा पहला प्यार है”

तभी घडी में देखा ८ बज गए है, तभी रूपा आ गई,

रजत- “आओ देखो तुम्हारी ननद सुबह सुबह सवाल जवाब कर रही है”

रूपा- “अनु, रेणु तुम निचे जाओ चाची जी बुला रही है”

दोनों नीचे चली गई, रूपा जाने लगी तो रजत- “मैडम जी गुडमोर्निंग तो बोल दीजिये” रूपा पलटि और मटक मटक के मेरे पास आई,
 
मेरे होठो को चूमती हुई,

रूपा- “हम ऐसे गुडमॉर्निंग बोलते है”

मैंने उसकी चूचियों को मसल के

रजत- “और हम ऐसे”

में उसके होठो को जोर जोर से चुसने लगा, उसकी चुचियो को मसलने लगा, थोड़ी देर बाद हम अलग हुए,

रूपा- “जल्दी रेडी हो जाओ १० बजे ही होटल ओपनिंग है”

रजत- “में तो रेडी हो जाउँगा तुम लोग कब होंगे”?

रूपा- “सब रेडी हो रहे है, में ब्रेकफास्ट बना के रेडी होऊँगी”

में बाथरूम में चला गया रूपा ब्रेकफास्ट बनाने लगी, में नहा के आया मैंने राहुल और रोहित को कॉल करके ९ बजे आने को बोला, वो दोनों रेडी थे, दोनों ही बोले हम होटल जा रहे हे तुम वही मिलो, में नीचे आया तो मेरी पूरी बिग फैमिली रेडी थी,

माँ- “बेटा ब्रेकफास्ट कर ले तब चलते है” रजत- “नही माँ होटल में वेसे भी खाना पीना हो ही जायेगा हमे चलना चाहिए”

माँ ने आस पड़ोस के लोगो को भी बुलाया था, उनका स्टफ भी आया हुआ था, में बाहर निकला तो एक लम्बी लाइन कार की लगी हुई थी,

रजत- “माँ ये क्या है”?

माँ- “बेटा देखते जा”

तभी हर कार के उपर मेरे होटल इंडियन रेसोर्ट के झंडे लड़के लगाने लगे, बैनर बना बना के कार के पीछे लगाये गए थे,

माँ- “जल्दी चलो हमे अपने होटल की ओपनिंग ठीक टाइम पे करनी है”

सब लोग कारो में बैठ गये, एक लम्बी कारो की रेल जा रही थी, जैसे कोई वीआईपी जा रहा हो, राहुल ने कारो के आगे दो बाइक पुलिस को लगा रखा था,

हम जल्दी ही होटल पहुच गये, रोहित राहुल ने मेरा स्वागत किया बेंड बाजों के साथ, रजत- “यार ये क्या है मेरा क्यों स्वागत कर रहे हो”?

राहुल- “आखिर मालिक हो यार”

रजत- “सब बन्दों बस्त हो गया”?

रोहित- “हां सब रेडी है”

रजत- “पंडित को बुलाया की नही हवन बोला था करवाने”?

राहुल- “मैंने बुला लिया है, वो अंदर तैयारी कर रहे है”

रजत- “गेस्ट सब आ रहे है, उनके बैठने का इन्तज़ाम तो किया है ना”?

राहुल- “वो मैंने संभाल रखा है”

रजत- “खाने का क्या हुआ, वो रेडी है ना”? मैंनेजर- “सर खाना रेडी हो रहा है”

तभी गेस्ट आने लगे, मेरी फैमिली और रोहित की फैमिली ने सबका स्वागत किया ९,४५ पे मेयर साहब भी आ गये वो होटल का रूंगरुट देख के खुश हुये,

मेयर साहब- “ये पहला होटल देखा हे जो इंडियन हे वरना तो सब वेस्ट्रन फ़ूड ही बनाते है”

रजत- “सर यहाँ हर तरह का खाना मिलता हे जो भारत में मिलता है”

मेयर साहब- “तो रिबन काटा जाये”?

रजत- “हां सर”

मेयर साहब ने रिबन काट के होटल की ओपनिंग की, बेंड बाजे बजने लगे, फिर में सब को अंदर लेकर आ गया, अंदर बेठने का अच्छा अरेंजमेंट था, हर टेबल पे पानी की बोतल रखी हुई थी, फूलो के गुलदस्ते उनकी शोभा और बढा रहे थे, दीवारों पे अभी भी चादर थी,

मेयर साहब- “अब अपना होटल तो दिखा दो”?

रजत- “पहले सर पूजा तो हो जाये”

मेयार साहब और सब पूजा में बैठ गये, पंडित जी ने पूजा स्टार्ट कर दी, हवन १ घण्टा चला फिर माँ ने पंडित जी को उनका दक्षिणा दि, वो भी खुश हो गये, माँ ने उनको ५०००१ रूपये दिए थे,

माँ- “बेटा सबको अपना होटल दिखाओ”

मैंने स्टाफ को इशारा किया, सब ने चादर खिच ली, सारे लोग देख के दंग रह गये, हर दीवार पे भारत की खूब सूरति दीख रही थी, हर राज्य की संस्कृति की बारीकिया दीवारों पे दिखाई दे रही थी,

मेयर साहब- “वाक़ई तुमने बहुत अच्छा होटल बनाया है, अगर में इसकी ओपेनिंग नही करता तो मुझे बहुत अफ़सोस होता”

रजत- “आप लोगो को पसंद आया यही बड़ी बात है”

फिर मैंने सबको खाना खाने के लिए बोला, स्टाफ हर टेबल के पास मेनु कार्ड लेकर जा रहे थे, जिसको जो पसंद था वही ऑर्डर ले रहे थे, सब लोग खुश नज़र आ रहे थे,

राहुल- “रजतभाई ये सिटी के बड़े लोग है, और जब ये लोग बाहर जायेंगे तो तुम्हारे होटल का और नाम हो जायेगा बस खाना पसंद आ जाये”

स्टाफ ने सब का ऑर्डर सर्वे कर दिया, सब को खाना पसंद आ रहा था ये उनके चेहरे और आपसी बातो से लग रहा था, तभी मेयर साब ने मुझे बुलाया,

में उनके पास गया,
 
मेयर साहब- “रजत बेटा तुमने बहुत अच्छा होटल और खाना बनाया है, तुमने गोवा और भारत की नाक ऊंची की है इस होटल से” रजत- “सर आप को पसंद आया यही बात बड़ी है, में तो छोटा अदमी हु”

मेयर- “अब छोटे नही रह गये हो, अब बहुत बड़े अदमी बन गए हो”

रजत- “अभी वक़्त हे उस मुकाम को पाने मे” सब लोग खाने और होटल की तारीफ कर रहे थे, सारा प्रोग्राम अच्छा रहा,

राहुल- “रजतभाई एक बात और बोलनि थी, होटल तो बहुत अच्छा बनाया है पर अगर एक बियर-बार भी साथ होता अच्छा होता, आखिर यहाँ सब बाहर के लोग मोज मस्ती करने आते हे, उनको यही सब तो चाहिए होता है” रजत- “राहुल भाई पहले क्यों नही बताया”? राहुल- “भाई मैंने सोचा पहले ही होगा बियर-बार इसमें”

रजत- “कोई बात नही, बाहर की तरफ बीच के पास एक बियर-बार बनवा दूंगा डोंट वरी वहा रहेगा तो लोग समुन्दर की लहरो का मज़ा भी ले सकेंगे”

राहुल- “हां ये सही रहेगा, वेसे भी हमारी ही तो प्रॉपर्टी है वो भी”

रजत- “बियर- बार का लायसेन्स भी लेना होगा”?

तभी मेयर साहब आ गए वो हमारी बात बात सुन रहे थे,

मेयर साहब- “तुम बियर- बार खोल लो में लइसेंस का इंतज़ाम करवा दूंगा”

रजत- “थैंक्स यु सर, पर में खुद ले लूंगा लायसन्स वरना लोग बोलेंगे मेयर के हाथों ओपेनिंग करवा के बियर-बार का लायसन्स ले लिया है”

मेयर साहब- “तुम अच्छे लड़के हो इस लिए ऐसा बोल रहे हो, कोई बात नही वेसे भी तुम सब काम रेगुलर ही करते हो, तो ये भी करवा लोगे”

फिर सब गेस्ट जाने लगे सब ने खाने के लिए और बुलाने के लिए थँक्स बोला, सब चले गए बचे हम लोग, मैंने सब स्टाफ को बोला “अब तुम लोग भी खाना खा लो”

मैंनेजर- “सर आप ने तो सुबह से कुछ खाया नही है हमे आप की माँ ने बताया”

रजत- “यार तुम सब के साथ में भी तो खाऊंगा”

सब हसने लगे, आज खाना वाकई में बाकि दिनों से अच्छा बना हुआ था,

रजत- “मैंनेजर जिन लोगो ने खाना बनाया हे उनको बुलाओ”

मैंनेजर ने सब को बुला लिया, शेफ और उनके साथी लोगो को,

रजत- “यार आज तो तुम लोगो ने कमाल कर दिया है, सच में आज का खाना बहुत अच्छा बना है”

शेफ- “सर आज हम लोगो ने एक दूसरे की बहुत हेल्प की है, जिस से खाना अच्छा बन गया है”

रजत- “ऐसे ही मिल के बनाते रहो, हमारा होटल इंडिया का बेस्ट होटल बन जायेगा” सब लोगो ने खाना खा लिया,५ बज गए थे,

मैंने मैंनेजर को बोला होटल की ओपनिंग हो गई हे और लोगो को अगर जॉब पे रखना पड़े तो रख लेना”

फिर मामा बोले “घर चले”?

रजत- “आप लोग कहा चले आप लोगो का इन्तज़ाम हे आज घुमने का”

मामा- “मतलब”?

रजत- “मतलब आज आप गोवा घूमेंगे, मैंने उसका इंतज़ाम कर दिया है”

अनु रेणु बहुत खुश थी,

माँ- “बेटा ये अच्छा किया”

रजत- मैंने के गाड़ी कर इन्तज़ाम कर दिया हे, जो इनको घुमायेगा और एक बोट का भी जो आपको समुन्दर की सैर करवाएंगे, आखिर आये हे तो थोड़ा घुम भी ले”

मामा- “ठीक है”

राहुल- “में एक कॉन्सटेबल भेज देता हु साथ सेफ्टी के लिये”

रजत- “हां ये अच्छा रहेगा, मामा मामी अपनी टूर कार में बैठ के चले गए, हम सब घर आ गए, घर पे भी बहुत लोग मुबारक़बाद देने आये एलिना और उसका दादा भी आया था, एलिना एक दम हॉट लग रही थी,

फिर डिनर टाइम हो गया, माँ ने सब के लिए डिनर बनाया, रोहित और राहुल की फैमिली ने साथ खाना खाया,फिर सब चले गए, हम सब हॉल में बैठे थे,

रजत- “माँ काया की शादी अब कर देनी चाहिये”?

माँ- “अभी पढने दो, बाद में सोचेंगे, और तुझे क्या लगता है, वह तुझे छोड़कर किसी और से शादी कर सकती है”

रजत- “ उसे समझाना होगा पर उसके लिये अभी देर है, जैसा आप को अच्छा लगे वैसा समझाइये”

काया- “भैया मैं आपके सिवा किसी और को अपना पति नही बनाउंगी मैं सिर्फ आपकी हु और रहूंगी,फिर किसी और से शादी की बात की तो मुझसे बुरा कोई नही होगा, किसी और से शादी करने से अच्छा है मैं अपनी जान दे दु”

रजत- “मैंने किसी और से कब कहा,पागल तू सिर्फ मेरी है समझी”?

काया मुझसे लिपट गयी और मेरे होठो पर आने होठ रख दिये,वह आज बहोत खुश हो गयी थी फिर वह मुझसे सट कर बैठी थी,

मैंने माँ की चुचियो को पकड़ के दबाना शुरू कर दिया,

माँ- “शर्म कर सभी यही है”

रजत- “तो सब के सामने ही करता हु, चलो सब कपडे उतारो आज पार्टी करते है”
 
साथ बने रहने के लिये आप सब का बहुत धन्यवाद
 
Back
Top