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लाइफ हो तो ऐसी complete

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रिद्धी की चुत बहुत गरम होने लगती हे रिद्धी रजत को बोलती हे रजत अब मत तरसाओ डाल दो अपना लंड ,रजत रिद्धी के एक पैर को उठा कर लंड चुत पर घिसता हे रिद्धी आंखे बंद कर लेती हे .रजत रिद्धी की चुत में लंड घुसाता हे रिद्धी की चुत चुदाई के बावजूद ज्यादा खुली नहीं थी रजत का लंड कसा कसा अंदर जाता हे रिद्धी को बहुत तेज़ दर्द होता हे जैसा फस्ट चुदाई के टाइम हुआ था रजत को बोलती हे प्लीज् धीरे धीरे करना दर्द होता हे रजत बोलता हे मादरचोद तेरा भोसडा फाडने के लिए लाया हूँ ना की आरती उतारने को . रिद्धी रजत से रहम की उम्मीद करती हे रजत एक ही झड़के में ९ इंच का लंड अंदर घुसा देता हे चुत गिली होने की वजह से आराम से चला जाता हे रजत एक और झड़का मारता हे रिद्धी को रजत का लंड अपनी बच्चे दानि से टकराता हुआ महसुस होता हे . रजत को भी महसूस होता हे की उसका लंड रिद्धी की बच्चे दानी से टकरा रहा हे रजत जोश में उसकी चूचीआ दबाता हे और जोर जोर से चुत में लंड पेलता हे रिद्धी की चीखे निकलती हे पर रिद्धी अपना मुह कस के बंद कर लेती हे रजत उसे चोदता रहता है .रिद्धी की आँखों में आंसू आ जाते हे पर ये ख़ुशी के आंसू थे रिद्धी रजत को बोलती हे और जोर से पेलो फाड् दो चुत मेरी भसाडा बना दो मुझे रंडी की तरह चोदो और जोर से पेलो मेरे राजा .रजता उसकी बातो को सुन कर जोश में आ जाता हे और जोर जोर से चोदता हे .सिद्धि रजत को ढूँढ़ते ऊपर आती हे इधर उधर देखति हे पर उसे कोई नजर नहीं आता .तभी उसे एक अवाज आती हे वो अवाज का पीछा करते हुए स्टोर रूम के पास पहुच जाती हे खिड़की से जो नजारा उसने देखा उसे देख कर उसके होश उड़ गए रजत रिद्धी को बुरी तरह चोद रहा होता हे रिद्धी की सांसे तेज़ चलने लगती हे जिस से सिद्धि को पता चल जाता हे रिद्धी झाडने वाली होती हे .सिद्धि वहि खड़ी हो कर सारा प्रोग्राम देखने लगती हे. रिद्धी झड जाती हे रजत अपना लंड उसके वीर्य से भिगा हुआ चुत से बाहर निकल लेती हे .रजत लंड रिद्धी की गांड पर रगडता हे . रिद्धी को अन्दाजा हो जाता हे क्या होने वाला हे वो सोचती हे अगर मना किया तो जबरदस्ती डालेगा और बहुत दर्द होगा .ऐसे डालेगा तो प्यार से डालेगा और दर्द भी कम होगा .

रजत रिद्धी की चुत में दो ऊँगली दाल कर चुत का पाणी निकालता हे और गांड और लंड पर लगाता हे रिद्धी की गण्ड में एक उंगली ड़ालता हे जो आराम से घुस जाती हे चिकनाइ की वजह से . फिर रजत दूसरी भी दाल देता हे रिद्धी को दर्द होता हे रजत रिद्धी को किस करता हे उसकी चूचीआ मसलता हे और गांड में उंगली लगातार पेलता हे जिस से कुछ टाइम बाद गांड में उंगली घूसने लगती हे और दर्द भी नहीं होता रिद्धी मज़े से उंगली से गांड मरवाती हे और गरम हो जाती हे रजत उंगली निकाल कर लंड अंदर घुसाने लगता हे

रजत का अभी सुपडा अंदर जाता हे रिद्धी की ऑंखे फैल जाती हे पुरे बदन में दर्द की लहर उठती हे रजत उसकी चुचिओ को दबाने लगता हे लिप्स पर किस करता हे दर्द कम होने पर जोर से झटके मार देता हे ५ इंच लंड अंदर घुस जाता हे रिद्धी तडपने लगती हे उसकी आँखों से आंसू निकलने लगते हे रजत उसे शांत करता हे .रिद्धी को सहलाता हे चूमता हे दबाता हे रिद्धी नार्मल होने लग जाती हे तभी रजत रिद्धी की चुत में उंगली दाल कर सहलाता हे रिद्धी गरम हो जाती हे रजत इसका फायदा उठा कर जोर से झटका मारता हे रिद्धी की गण्ड में पूरा लंड घुस जाता हे रिद्धी का मुह हाथो से बंद करके तीन चार झटके लगा कर मारता हे रिद्धी को बहुत दर्द होता हे वो चिलाती हे रोने की आवाज सिद्धि को भी सुनाई देती हे सिद्धि खड़े खड़े अपनी चुत में ऊँगली दाल कर सहलती

सिद्धि देखति हे रजत रिद्धी की लगातार गण्ड मरता हे अब रिद्धी भी उसका साथ देती हे .सिद्धि भी गरम हो जाती हे अपनी चुत को जोर जोर से मसलती हे उंगली डालती हे चुचिओ को दबाती हे. रजत जोर जोर से रिद्धी की गण्ड मारता हे लगातार २०मिनेट रिद्धी की गण्ड मारने के बाद झड जाता हे रिद्धी उसके वीर्य को अंदर महसूस करती हे रजत लंड बाहर निकाल देता हे सिद्धि देखति हे जैसे ही रजत रिद्धी को छोडता हे रिद्धी निचे गिर जाती हे उसके जिस्म में जान नहीं रह जाती चुदाई के दोरान रिद्धी तीन बार झड चुकी थी इतनी जबरदस्त चुदाई के बाद उसका पूरा बदन दर्द से भर जाता हे .सिद्धि भी खड़े खड़े झड जाती हे रजत और रिद्धी कपडे पहन कर बाहर आने लगते है सिद्धि अपने कपडे सही करके निचे जाती हे रजत और रिद्धी निचे आते हे सीद्धि रजत और रिद्धी से पूछती हे ऊपर दोनों क्या कर रहे थे रिद्धी बोलती हे कुछ नहीं बस बाते कर रहे थे रिद्धी थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी तो सीधी पूछती हे क्या बात हे ऐसे क्यों चल रही हो रजत बोलता हे सिडिया उत्तरते वक़्त मोच आ गई हे .सिद्धि मन में बोलती हे जानती हूँ कोण सी मोच आई हे और कोण सी बाते हो रही थी उपर. रजत रिद्धी उसके उसके रूम में छोड़ देता हे . और अपने रूम की तरफ जाता हे
 
तभी निकिता आ जाती हे और बोलती हे “क्यों जनाब कहा ग़ायब थे, इतनी देर से में ढूंढ रही थी” ।रजत पूछता हे “मौसी कोई काम था? निकिता बोलती हे “घर में मेहमान आने चालू हो गए हे, कुछ लेडीज तुम्हारी माँ के साथ सो रही हे’ वहा जगह नहीं हे तुम्हारे मोसा के साथ जेंट्स हे, वहा में सो नहि सकती, रिद्धी और सिद्धि की भी फ्रेंड्स आई हे, उनका रूम भी बुक हे बचे तुम’ आज में तुम्हारे साथ सो सकती हूँ क्या? ।रजत जानता था ऐसा क्यों बोल रही हे मौसी रजत मस्ती में बोलता हे “मुझे हाथ पैर चलाने की आदत हे सोच लीजिये, फिर शिकायत मत करना बताया नहीं”.

रजत ने मोसी को बोला शिकायत मत करना । निकिता बोली बेटा “चलो सोते हे मुझे भी लिपटकर कर सोने की आदत हे, तुझसे केसी शर्म, तू तो मेरा अच्छा बेटा हे, चल मुझे बहुत नींद आ रही हे”. ।

दोनो रूम में आते हे सिंगल बेड पर लेट जाते हे। निकिता रजत को बोलती हे “बेटा तू भी सो जा थक गया होगा,

घूम कर”. । निकिता रजत की तरफ अपणी पिठ करके सो जाती हे ।पर रजत निकिता की गांड देख कर सो

नही पाता उसका लंड फिर से खड़ा हो जाता हे रजत देखता हे निकिता सो चुकी हे उसे एक बदमासी

सूझती हे । रजत निकिता से चिपक कर लेट जाता हे रजत का लंड निकिता की गांड को टच करता हे ।रजत

थोडा घबराता हे कही मौसी जग गई तो नाराज हो गई तो मेरा क्या होगा ।वो आराम आराम से लंड

निकिता की गण्ड में रगडता है

रजत को लंड रगड़ने में मज़ा आता हे रजत अपना हाथ निकिता हे पैट पर रख देता हे और धीरे

धीरे नाभि को सहलाता हे निकिता के द्वारा कोई हरकत न देख कर उसे तसली हो जाती हे की मौसी

सो रही हे। रजत निकिता की सलवार का नाडा थोडा ढीला कर देता हे और जब हाथ निचे ले जाता हे तो उसकी

चुत एक दम साफ उसे मेहसुस होती हे जैसे आज ही शेव किया हो रजत निकिता की चुत को धीरे धीरे

सहलाता हे रजत फुल गरम हो जाता हे उसका लंड एक दम सख्त हो जाता हे वो निकिता को चोदना

चाहता हे पर पहल खुद नहीं करना चाहता था ताकि कोई उसे गलत न समझें

रजत अपना हाथ ऊपर लाता हे और निकिता की चुचिओ को धीरे धीरे दबाता हे ।

तभी हलचल होती हे और रजत अपना हाथ हटा देता हे निकिता सीधी हो कर सो जाती हे।रजत डर की

वजह से निकिता से थोड़ी देर के लिए दूर हात जाता हे । फिर वो सोचता हे लगता हे सो गई रजत उसकी

चुचिओ पर जैसे ही हाथ लगाता हे निकिता की सांसे तेज़ हो जाती हे रजत उसका चेहरा पड़ने की कोशिश

कर्ता हे निकिता की बंद आँखों के पीछे उसकी पुतलिया तेजी से घुमति हे रजत को आभास हो जाता हे

मौसी भी इंजॉय कर रही हे इसका फ़ायदा उठाना चाहिए ।वो निकिता का सूट ऊपर करके उसकी एक चूचि

बाहर निकल के चुस्ने लगता हे उसका लंड अब बर्दास्त से बाहर हो जाता हे रजत अपने लंड को जोर

जोर से हिलाता हे फिर उसे एक आईडिया आता हे वो निकिता के मुह के पास जा कर अपना लंड उसके होठो पर

रगड़ता हे निकिता का मुह खुल जाता हे रजत अपना लंड अंदर बाहर धीरे धीरे से करने लगता हे उसे

बाहुत मज़ा आता हे। निकिता भी रजत का लंड मुह में आराम से लेती हे बिना हिले डुले रजत रफ़्तार

तेज़ करता हे और निकिता के मुह से लंड निकल कर मुठ मारता हे निकिता का मुह कह खुला होने की वजह

से लंड उसके मुह के पास ले जा कर झड जाता है सारा पाणी निकिता हे मुह में गिरा देता हे ।

निकिता भी उसे पी जाती हे रजत अपनी मौसी की चूचि को मुह में डाल कर सो जाता हे

सुबह उसे निकिता उठाती हे ।ओर पूछती हे तुम रात को क्या कर रहा था मेरे साथ ।रजत एक भोले

भाले बचे की तरह बोलता हे मेने क्या किया मौसी निकिता बोलती हे तुझे नहीं पता तूने क्या किया।

रजत ना में सर हिला देता हे। निकिता बोलती हे फिर मेरी चूचि तेरे मुह मैं कैसी आ गई ।रजत बोलता

“प्यास लगी थी पाणी नहीं मिला तो आप का दूध ही पीने लगा, क्या में आप का बेटा नहीं हूँ जो आप का दूध पी सकु”. निकिता उसे बोलती हे “बेटा अगर प्यास लगी थी, तो मुझे बोल दिया होता में पाणी ला कर देती’रहि बात दूध पीने की तो अब तू बच्चा नहीं, जो छातियों से दूध पियेगा,समझे मेरे लल्लूराम”.

रजत हा में सर हिला देता है निकिता उसे तैयार हो कर ब्रेकफास्ट के लिए हॉल में आने को बोलती
 
रजत तैयार हो कर हॉल में पहुच जाता हे.जहा पर रजत के सामने निकिता के ससुर बैठे हुए

होते हे बाजु में उनकी बिवी और बेटा .फिर माँ और मौसी मेरे दोनों तरफ रिद्धी और सिद्धि बैठी थी मैं

भी जा कर बैठ गया और खाना खाने लगा .रिद्धी मुझे देख कर शर्मा गई जब्कि सिद्धि मुझे

घुर रही थी मेने अपना हाथ सिद्धि की जांघो पर धीरे से रखा और इशारे में पूछा क्या हुआ

उसने इशारे में कुछ नहीं हुआ बोल कर सर हिल्ला दिया में खाना खाने लगा .सब खाना खा कर

अपने काम में लग गया में बोर हो रहा था तो सिद्धि की माँ ने सिद्धि को बोला बेटी “रजत को आये दो दिन हो गये इसे अपना शहर घूमाओ ताकि इसका भी मन लगे .माँ और निकिता मौसी ने भी रिद्धी को बोला “ले जाओ हमारे बेटा को और इसका अच्छे से ख्याल रखना थोड़ा शर्मीला हे”.

में और सिद्धि दोनों बाहर आ गए सिद्धि बोली कहा चलोगे घुमने मेने भी मोके का फायदा उठा

के बोला की जहा हम दोनों के अलावा कोई न हो . सिधि ये सुन कर शर्मा गई. और रजत से पूछने

लागि “क्यों? वहा पर क्या करोगे” . रजत बोलने लगा “ले तो चलो वो तो में बाद में बताऊँगा” . सिधि

उसे एक माउंट पर ले गई जो आसमानो के ऊपर जैसे हो वहा पे बादल नजर आ रहे थे ठण्डी ठंडी हवा चल रही थी .सिद्धि ने बोला “ये हमारे शहर की बेस्ट प्लेस हे”. यहाँ बहुत कम लोग आते है

“पर यहाँ बहुत शान्ति हे” रजत बोला. .सिद्धि बोली “यहाँ टूरिस्ट भी आते हे आओ आगे दिखाती हु”. कुछ दुर जा कर सिद्धि ने एक तरफ उंगली की वहा पर कुछ विदेशी टूरिस्ट भी हे जो मौसम का मज़ा ले

रहे थे अपने साथी को चूम रहे थे उनकी चूचीआ दबा रहे थे पर कोई किसी की तरफ ध्यान नही दे रहा था सब अपनी मस्ती में लगे थे रजत ने जब सिद्धि की तरफ देखा तो वो शर्मा रही

थी. रजत ने उसका हाथ पकड़ लीया . सिद्धि कांप गई उसे जैसे करन्ट लग गया हो .फर रजत ने एक बियर

शॉप देखि और सिद्धि से पूछा “क्या? तुम बियर पीती हो” सिधि ने हा में सर हिला दिया . रजत ने दो

बियर ली और दोनों आगे बढ़ गये आगे जा कर रास्ता जंगल की तरफ जाता था .रजत ने पूछा जंगल

घूम सकते हे. सिद्धि बोलती है इस जंगल में कुछ नहीं हे एक दम सेफ हे ये जंगल. दोनों जंगल की तरफ जाते है और एक टूटे हुए पेड़ पर बैठ कर बियर पीने लगते हे शरीर में थोड़ी गर्मी आ जाती हे .

रजत इधर उधर देखता हे आस पास कोई नहीं होता .रजत सिद्धि की जांघो को सहलाता हे सिद्धि उसका

हाथ हटा देती हे. रजत बोलता हे तुमने वादा किया था में कुछ भी कहुंगा तुम करोगी तो चुप

चाप बैठी रहो और मुझे अपना काम करने दो .सिद्धि बोलती हे क्यों दीदी से मन नहीं भरा जो मेरे

पीछे पड़े हो. रजत बोलता हे रिद्धी तुमसे खूबसूरत नहीं हे और जान ही गई हो तो सुनो तुम्हारी

दीदी ने अपनी मर्ज़ी से मुझसे चुदवाया मैने कोई जबरदस्ती नहीं की और न तुम्हारे साथ करूँगा .

सिद्धि बोलती हैं में करने भी नहीं दूंगी . रजत बोलता हे शायद तुमको मालूम नहीं तुम्हारा बाप तुम्हारी भाभी के पीछे पड़ा हे और तुम्हारी दीदी को मेने चोद दिया हे ये बात तेरे बाप को

बता दूंगा तो वो अपनी बेटी को भी चोदने को तैयार हो जायेगा . और में ये भी बता दूँगा मैंने

तुमको किस लड़के के साथ चुदवाते हुए देखा हे . सिधि बोलती हे क्यों हमारे घर को बरबाद करना चाहते हो .रजत बोलता है बेबी लाइफ के मज़े लो फेर तुम भी कहोगी लाइफ हो तो ऐसी .”अब बोलो

मुझसे चुदवाओगी की नहीं? सिद्धि नजरे निचे झुकाए बैठी रहती है

रजत अपना हाथ सिद्धि की पीठ पर रख के सहलाता हे . सिद्धि रजत के छूने से काप जाती है.

एक तो मौसम सुहाना ठण्डा ऊपर से दो जिस्म में सुलगते अरमान रजत की तरफ से की गई पहल का नतीजा रजत को नजर आ रहा था .सिद्धि को उसका छूना अच्छा लगा सिद्धि शर्मा के रजत के सीने से लग जाती हे .सिद्धि के चेहरे को रजत अपने हाथो से ऊपर उठाता हे .सिद्धि शर्मा कर ऑंखे बन्द कर लेती हे रजत सिद्धि की आँखों पर चुमता हे सिद्धि रजत की इस हरकत से रजत को जोर से सीने से लगा लेती हे रजत सिद्धि के होठो की गरमी अपने सीने में मेहसुस करता हे . सिधि के चहेरे को उठा कर अपने होठ सिद्धि के होठो पर रख देता हे और ठंडे मौसम में गरम होठ चुमने लगता है सिद्धि भी रजत के नीचले होंटो को चुस्ती हे . रजत अपनी जीब सिद्धि के मुँह में दाल कर उसकी जीभ से खेलता हे . सिधि रजत की जीभ चुस्ने लगती हे. रजत अपना हाथ सिद्धि की चुचिओ पर रख देता है

वाओ क्या अद्बुत अहसास होता हे सिद्धि की चुचिआ एक दम ठोस हो चुकी थी निप्पल बन्दुक की तरह

फायर करने को तैयार थे . रजत सिद्धि की चुचिओ को दबाता हे. इतने नरम जैसे अभी अभी

मुलायम बरफ को छूआ हो नरम होठो का पाणी जैसे ओस की बूंदे गिरि हो और रजत उनको चूस रहा हो .रजत सिद्धि को अपनी गोद में बैठा लेता हे ..सिद्धि रजत की गोद में बैठा जाती हे
 
उसको

बहुत आनंद आ रहा होता हे .रजत का लंड अपनी चरम सिमा तक पहुच चुका था सिद्धि के बैठते

ही उसने सिद्धि की गांड को सलाम ठोका सिद्धि चौक कर कड़ी हो गई रजत बोला “क्या हुआ जान? सिद्धि बोली “तुम्हारा वो मुझे डरा रहा हे” . रजत बोला “तो प्यार कैसे करोगी? .सिद्धि रजत की गोद में

बैठ जाती हे रजत सिद्धि की दोनों चुचिओ को जोर जोर से दबाता हे सिद्धि की सिसकिया माहोल को और गरम

करने लगती हे .

तभी अचानक मौसम ख़राब होने लगता हे सिद्धि रजत को बोलती हे मौसम खराब हो रहा है चलो घर.

चलते हे रजत बोलता हे पास आओ गर्मी देता हूँ ठण्ड भाग जायेगी हलकी हलकी बरफ पड़ने लगती हे

सिद्धि रजत से लिपट जाती हे रजत होठ चूसता हूँ .सिद्धि बोलती हे “मेरा दिल घबरा रहा हे . पर मे

यहाँ से नहीं जाना चाहती .मुझे चिंता अपनी नहीं तुम्हारी हे क्या तुम बर्दाश्त कर पाओगे

ऐसे मौसम को . रजत बोलता हे जब गर्मी देने वाला अपने पास हो तो ऐसी सर्दी और बर्फ मेरा कुछ नही बिगाड़ पाएंगे . रजत सिद्धि को लेकर आगे बढ़ जाता हे वहा एक बहुत बड़ा पेड़ होता हे वो भी गिरा

रजत बोलता हे चलो इसके अंदर बैठते है मौसम साफ हो जायेगा तो घर चलेंगे सिद्धि जानती थी

आज उसके साथ क्या होने वाला है .सिद्धि और रजत अंदर आ जाते हे दो आदमी आराम से लेट सकते थे.

रजत सिद्धि को लिटा ता हे और उसकी जीन्स को खोल देता हे .सिद्धि भी पेन्ट उत्तर देती हे और टीशर्ट भी .

ओर लेट जाती हे रजत देखता हे उसका जिस्म बर्फ की तरह सफ़ेद हे . सिधि अब लाल रंग की पेन्टी और ब्रा में है. और रजत अपनी टीशर्ट उतार कर सिद्धि के ऊपर लेट जाता हे . सिधि की चुचिओ को दबाने लगता है

होठ चूसता है .बाहर बर्फ का तूफ़ान आ जाता हे पूरा जंगल बर्फ से ढक जाता हे. रजत बोलता है. “सिद्धि ब्रा और पेन्टी भी उतार दो”. सिद्धि शरमाते हुए बोलती हे “मुझे शर्म आती हे तुम ही उतार दो” .रजत सिद्धि की ब्रा खोलता हे उसकी चुचिअ ठण्ड की और ब्रा की वजह से लाल हो जाती हे. निप्पल एक दम खड़ी होती है रजत निप्पल को पकडता हे सिद्धि की सिसकिया निलकलती हे . रजत अपने होठ उन पर रख कर

जीभ से सहलाता है ल उनको दबाता हे .सिद्धि अनादित हो जाती हे ऑंखे बंद कर लेती हे . सिद्धि की हापने की तेज अवाज रजत को सुनाई देती हे सांसो की गरमी मेहसुस होती हे.

रजत धीरे धीरे निचे आने लगता हे सिद्धि की नाभि को जोर से चूसता हे सिद्धि के मुह से ओओउउउउम्म्मम्माआ निकल जाता हे .रजत और निचे आता हे तो देखता हे सिद्धि की चुत गिली हे रजत पेन्टी के ऊपर से अपनी जीभ सिद्धि की चुत पर लगाता हे सिद्धि आखे बंद कर के .अंगड़ाई लेती हे ऐसा

उसके साथ उससे पहले कभी नहीं हुआ था वो इसका भरपूर आनंद लेने की सोचती हे. रजत पेन्टी को

उत्तारने लगता हे . सिद्धि की चुत पर ठण्ड की वजह से चुत के पाणी पर बर्फ जेसा जमने लगता हे .

रजत चुत को देख कर हेरान रहा जाता हे एक दम गुलाब के फूल की पंखुड़ी जैसे फाके होती है उस्की

चुत की फांके उप डाउन कर रहे थे . उनमे से लगातार पाणी रिस रहा था .रजत उसकी चुत को ऊँगली

से सहलाता है .उसको को खोल कर देखता हे अंदर गुलाबी रंग की चुत देख कर आनन्दित होता हे .

अपनी ऊँगली चुत के छेद पर रख से सहलाता हे .सिद्धि का बुरा हाल होने लगता हे सांसे तेज़ धड़कन तेज आंखे लाल होने लगती हे जिसे देख कर कोई भी कह देता की उसकी वासना जाग गई हे .रजत सिद्धि की चुत पर अपना मुह रख देता हे सिद्धि रजत के बालो में हाथ डाल कर सहलाती हे और दूसरे हाथ से अपनी चूचि दबाने लगती हे .रजत जीभ अंदर दाल कर चुत का पाणी साफ करता हे चुत को एक दम चिकना कर देता हे .सिद्धि की चुत दहकती भट्टी की तरह धुंआ छोडती है. सिद्धि रजत को बोलती है

“मुझे तो नंगा कर दिया, मुझे ठण्ड लग रही हे और खुद कपडे पहन कर बैठे हो”. रजत बोलता

है “जान बस इतनी सी बात लो में भी नंगा हो जाता हूँ”. रजत अपनी पेण्ट उतारने लगता हे सिद्धि की निगाह

रजत के लंड पर टीकी होती हे वो उसे देखने के लिए पागल हो जाती हे और बोलती हे “जल्दी करो ना” .रजत पेण्ट उतार देता हे .सिद्धि अंडरवियर में रजत के खड़े लंड को देखति हे और सोचती हे बहुत बड़ा लग रहा हे.अब जो होगा देखा जायेगा . सिधि रजत को बोलती हे “इसे भी निकालो” . रजत बोलता हे

“ईसका हक तो तुम्हारा हे, इसे आज तुम ही निकालो”. रजत लेट जाता हे सिद्धि घुटनों के बल बैठ जाती हे और

रजत के सीने को सहलाती हुई निचे आती हे उसके लंड को अंडरवियर के ऊपर से सहलाती है . सिद्धि

रजत के लंड को जोर से पकड़ लेती हे. और सहलाती हे रजत भी आनंद लेता हे उसे आज से पहले ऐसा

मज़ा किसी के साथ नहीं आया था .सिद्धि जैसे ही रजत की अंडरवियर उतारती हे देख कर हक्की बक्की रह

जती हे रजत पूछता हे “क्या हुआ? सिद्धि बोलती हे “इतना बडा कैसे हो गया .कुछ खा कर आये हो क्या?

रजत बोलता हे “नहीं ये तो हमेशा से ऐसा ही हे” .सिद्धि एक टक लंड को देखति रेहती हे.रजत बोलता हे

“देखति रहोगी की प्यार भी करोगी इसको”.सिद्धि शरमाते हुए रजत के लंड को पकड़ कर ऊपर निचे करती है

रजत सिद्धि को लंड चूसने को बोलता है सिद्धि बोलती है बहुत मोटा है में नहीं चूसूंगी. और बोल के शर्माने लगी .रजत बोला “कुछ नहीं होगा यार ट्राय तो करो”.सिद्धि शरमाती हुई रजत के लंड की तरफ

झुकी जीभ लगा कर चाटने लगी लंड एक दम टाइट और ठण्डा था एक दम. आइस क्रीम चाटते है वेसे चाटने लगी .रजत का लंड झटके मारने लगा . सिधि के गरम होठो के स्पर्श से

से लंड और जोश में आ गया .सिद्धि ने बड़े प्यार से सुपडे को मुह में ले लिया और लोलीपोप की तरह

चुस्ने लगी. रजत ने सिद्धि का सीर पकड़ लिया और जोर से झटका मार दिया लंड सीधा उसके मुह में

घूस के हलक से जा टकराया .सिद्धि अपना मुह हटाना चाहती थी पर रजत सीर नहीं छोडता और लगातार १५-२० धक्के मरता हे. सिधि को दर्द होता हे . सिधि रोने लगती हे .रजत उसके आंसू देख कर रुक जाता हे और सिद्धि को सॉरी बोलता है रजत कहता हे “सिद्धि माफ् करना जोश में होश खो बैठा” .सिद्धि रोते हुए बोलती हे “तुम बहुत बुरे हो कोई ऐसा भी करता हे, “मेरा मुह दर्द करने लगा हे’ “मेंचुस तो रही थी फेर ऐसा क्यों किया”. और रजत के सीने पर मुक्के मारने लगती हे रजत उसे पकड़ कर

उपर खीच लेता हे. और सिद्धि के आंसू चाटने लगता हे सिद्धि की आंखों को चुमता हे.सिद्धि रजत के

लंड को अपनी चुत पर रगडती हे .रजत सिद्धि को निचे लिटाकर सिद्धि के पैरो के पास जा कर बैठ जाता हे सिद्धि के पैरो को फैला देता हे .सिद्धि थोड़ा सा सहमी सहमी नज़र आती हे .रजत सिद्धि को

बोलता हे “घबराओ मत कुछ नहीं होने दूंगा तुमको” .सिद्धि उसकी तरफ रहम की उम्मीद की निगाह से

देखति हे .रजत अपने लंड पर थुक लगाता है
 
सिद्धि की चुत को छू कर देखता हे वो गिली हो चुकी थी तो गिला करने की जरुरत नहीं थी .रजत उसकी

चुत में अपनी ऊँगली डालता है सिद्धि की चीख निकल जाती हे. रजत उसे शांत करता हे.सिद्धि के आंसू

निकलते रहते हे .सिद्धि को बहुत दर्द होता हे रजत रुक कर ऊँगली धीरे धीरे अंदर बाहर

करता हे. अब सिद्धि को भी दर्द कम होने लगता हे . रजत ऊँगली तेज़ कर देता हे अब ऊँगली आसानी से

अंदर बाहर होती हे.सिद्धि और गरम हो जाती हे और कमर उठा उठा के चुत में उंगली लेती हे .

तब रजत उंगली निकाल के चुत की चिकनाई लंड पर लगाता हे . सिधि ऑंखे बंद किये हुए लेटी

रहती हे. रजत देखता हे मोका अच्छा हे लोहा गरम हे हथोड़ा मार देना चाहिए . रजत ने

अपना लंड सिद्धि की चुत पर रख दिया दोनों पैरो को जांघो से पकड़ कर एक झटका जोर से मारा सिद्धि जब तक सम्भालती तब तक रजत अपना काम कर चुका था. रजत का लंड मोटा होने की

वजह से सिर्फ सुपडा चुत में जाता हे . सिधि की चीखे सारे जंगल में सुनाई देती हे रजत सिद्धि की

चुचिओ को दबाता हे सिद्धि की झांघो को सहलाता हे सिद्धि बोलती हे “बाहर निकालो बहुत दर्द हो

रहा है” प्लीज्!में मर जाउंगी मुझसे नहीं होगा प्लीज् छोड़ दो मुझे’ “मुझे ये सब नहीं करवाना” .

“प्लीज् प्लीज्” रजत उसकी नहीं सुनता और उसको सहलाता और चुमता रहता हे. सिद्धि थोड़ी नार्मल हो जाती है

पर रोती रहती हे. रजत सहलाते सहलाते सिद्धि को चूमता हे और एक जोर दार धक्का और मारता हे ..सिद्धि बोलती है “रजत प्लीज हट जाओ निकालो बाहर मेरे पैर और चुत बहुत दर्द कर रहे हे प्लीज् निकाल लो” रजत बोलता है “बस हो गया जान थोड़ा और बर्दाश कर लो” और सिद्धि को फिर सहलाने और चुमने लगता हे . सिद्धि

दर्द से छटपटाती हे चिल्लाती हे सारे माहोल में उसकी सिसकीओ और दर्दनाक चीख की आवाज आती हे पर

रजत पर उनका असर नहीं होता .रजत उसे प्यार से सहलाता हे चुमता हे उसकी चुचिओ को दबाता है.

इस बार रजत ने जब धक्का मारा तो दोनों की चीखे सारे जंगल में गुंजी और चारो तरफ सन्नटा

छा गया . रजत ने जब धक्का मारा तो सिद्धि ने अपने नाख़ून पीठ पर और दाँत गर्दन पर गडा

दिये थे .जब सिद्धि की चुत में रजत का ९ इंच का लंड पूरा घुस गया था सिद्धि चीखती रही दर्द से

बेहाल हो गयी. रजत की पीठ और गर्दन से खून निकलने लगा सिद्धि की चुत से खून निकल कर

बरफ पर फैल गया. रजत फिर भी नहीं माना . उसने अपना लंड थोड़ा बाहर निकाला और जोर से पेल

दिया फिर एक बार सिद्धि की चीख माहोल को गरम करने लगी ऐसा लग रहा था सिद्धि को की अब नही

बचेगी रजत उसे मार डालेगा .सिद्धि दर्द से अस्सू बंद होने का नाम नहीं लेते चुत से खून

निकलना बंद नहीं होता .रजत धीरे धीरे सिद्धि को चोदता रहता हे .सिद्धि की दर्दभरी सिस्किया

निकलती रहती हे. रजत उसे चूमता सहलाता दबाता और चोदता रहता हे .

तक्रीबन २०मिनेट बाद सिद्धि की चुत खुल जाती हे और उसे अब मज़ा आने लगता हे रजत अब जोर जोर

से जब धक्के मारता तो सिद्धि भी जवाब में अपनी कमर उछलती .रजत जोर जोर से चोदता हे सिद्धि को

सिद्धि भी आनन्दित होती हे चुदाई से . कुछ देर बाद सिद्धि रजत को बोलती हे “मुझे कुछ हो रहा है”.

रजत समझ जाता हे सिद्धि झड़ने वाली हे .रजत जोर जोर से लंड चुत में घुसाता हे .सिद्धि की एक

चीख निकलती हे और सिद्धि रजत से साप की तरह लिपट जाती हे रजत समझ जाता हे सिद्धि झड गई हे .

दोनो ठण्ड में पसीना पसीना हो जाते हे. रजत सिद्धि को कुछ देर आराम करने देता हे .१० मिनेट

बाद रजत सिद्धि की चुत की अपने मोठे तगडे लंड से धुलाई करता हे जैसे कोई रुई की धुलाई करता

हो सिद्धि की चीखे फिर गुजने लगती हे सिसकिया बंद नहीं होती रजत चोदता रहता हे .सिद्धि भी चुप्

चाप चुद्वाती रहती हे अब उसे पहले जैसा दर्द नहीं होता हे उसे बहुत मज़ा आ रहा होता हे

रजत चुदवा के. रजत सिद्धि की चुचिओ को मुह में दाल के चुत चोदता रहता हे और चुचिओ के

निपाल को दांत से कुरेदता हे सिद्धि की चुचिओ के निपाल में जलन होती हे वो रजत को मना करती है

ऐसा करने से .पर रजत पर तो चुत का बुखार छाया था वो किसकी सुनता उसका लंड झाडने का नाम

नही ले रहा था लंड में दर्द होना शुरू हो जाता हे .रजत अब और जोर जोर से चुत में लंड घुसाता

सिद्धि भी कमर उठा उठा के लंड चुत में लेती .ये चुदाई का सिलसिला १ ऑवर चलता हे . आखिर कार

रजत सिद्धि की चुत में झडने वाला होता हे रजत बुलेट की रफ्तार से लंड चुत में घुसाता रहता

ही सिद्धि उसके धक्कों को सहन नहीं कर पति .उसके असू फिर से निकलने लगते हे . रजत दे दना दन

लंड पेलता रहता हे और रजत जोर से एक धक्का मारता हे और सिद्धि की चुत में फ़ायर कर देता हे लगातार कई पिचकारियां चुत में मारता हे .(दोस्तों ये अपडेट किसी की रियल लाइफ से जुडी हे में जनता हूँ एक

दीन उसको ये स्टोरी भी मिल जायेगी और हमारे रिश्ते में दरार आ जायेगी बस आप के लिए लिखने

का मन किया तो लिख दिया कमैंट्स जरूर करे स्टोरी अभी बाकि हे भाई मेरे)

रजत दे दना दन

लंड पेलता रहता हे और रजत जोर से एक धक्का मारता हे और सिद्धि की चुत में फ़ायर कर देता है लगातार कई पिचकारियां चुत में मारता हे .
 
निकिता बहुत परेशान हे रजत और सिद्धि वापस नहीं आई है. निकिता अपने हसबंड को बोलती हे “जा कर कर देखो मेरा बच्चा कहा रह गया, मौसम भी ख़राब हे”. सब परेशान होते है.

रजत और सिद्धि अपने आप को देखते हे रजत का लंड खून से और ठण्ड से एक दम लाल हो गया हे

सिद्धि की चुत भी सुज गई हे उस से उठा नहीं जा रहा हे ठण्ड की वजह से शरीर अकड गया हे.

सिद्धि और रजत अपने कपडे पहनते हे और घर की तरफ चल्ने की कोशिश करते हे सिद्धि को बहुत

पेण हो रहा हे. वो रजत को बोलती हे “तुमने तो मेरी फाड् ही दी हे चला भी नहीं जारहा”रजत सिद्धि

को गोद में उठा लेता हे. और बोलता हे “जान में हूँ ना’ में ले जाउँगा घर तुमको आराम से”. सिद्धि बोलती

है “घर वालो को क्या बोलूंगी ऐसी हालत में क्यों हूँ” रजत बोलता हे “कोई बहाना बना लेना शादी हे,

उतना कोई ध्यान नहीं देगा”.

रजत सिद्धि को उठा कर घर पहुचता हे निकिता और उसका हसबंड दोनों को ढूँढ़ने निकलते

उस से पहले रजत घर पहुच जाता हे निकिता डोर खोलती हे और फिर लगातार सवाल पूछती हे.

“कहा थे तुम दोनों ?

“सलामत तो हो तुम ?

“मोसम ख़राब होने लगा था तो घर वापस क्यों नहीं आये?

“सिद्धि को क्या हुआ?

रजत और सिद्धि दोनों एक साथ बोलते हे “बोलने दो तो कुछ बताये, कुछ नहीं हुआ हे,बस तूफ़ान से बचने के चक्कर में सिद्धि के पैरमें, मोच आ गई हे”. रजत सिद्धि को उसके रूम में छोड़ कर आता है तो मोम ने उसे गले लगा लिया और पूछा “बेटा तू तो ठीक हे ना?. “में कितना घबरा गई थी”.

तब शाम हो गई थी तो सब डिनर करने लगे सिद्धि का डिनर उसके रूम में पंहुचा दिया गया

शादी की तयारिया जोर शोर से शुरू हो गई थी मेहमान भी आने शुरू हो गए घर दुलहन की

तरह सजा दिया गया. शादी का आज का दिन सब तय्यार होते हे निकिता और मोम रिद्धी को तयार करते हे.

सिद्धि रजत को तयार होने को बोलती हे रजत बोलता हे “चलो दोनों एक साथ तयार होते है”. सिद्धि बोलती है “अकेले हो जाओ,में चलि खुद को तयार करने”. रजत सीधी का हाथ पकड़ लेता हे और खीच के अपने बदन के साथ लगा देता हे. सिद्धि अपना हाथ छुड़ानेकी कोशिश करती हे.रजत अपना लंड सिद्धि की गांड पर रगडता हे सीधी की चुचिओ को दबाता हे और पूछता हे “अब क्या ख्याल हे”.सिद्धि शरमा

जाती हे और बोलती है “अभी अकेले तय्यार हो जाओ शादी के बाद जेसा कहोगे वैसा करुँगी,प्लीज रजत अभी जाने दो”. रजत सिद्धि को चूमता हे और बोलता हे “अब में तुमको छोडूंगा रात को आओगी तो ही जाणे

दुंगा. सिद्धि वादा करती हे. रजत सीधी को जाने देता हे. और खुद तैयार होने लगता हे. निकिता का ससुर रजत से रूम में मिलने आता हे. वो रजत को बोलता हे “क्यों दोस्त मेरा काम होगा की नही?

रजत बोलता हे “पहले मेरा तो हो”. निकिता का ससुर चौकते हुए “तुम अपनी मौसी को चोदोगे? रजत बोलता हे “मौसी को तो चोद दिया”. निकिता का ससुर चोकते हुए “क्या? “कब चोदा तुमणे? “अब किस को चोदोगे?. रजत बोलता हे” काम हो जाये बता दूंगा, इतनी भी क्या जल्दी हे”. निकिता का ससुर सोचता है.

घर में निकिता को तो चोद ही लिया अब कोण बची हे. कही ये लड़का अपनी माँ नहीं ऐसा तो ये कर ही नही सकता फेर किसे चोदेगा. कही मेरी बेटियो में से कोई तो नहीं है. दोनों जवान हे मन तो करता होगा. निकिता का ससुर रजत से पूछता हे कही तुम रिद्धी को तो नहीं चोदने वाले. रजत हँसते हुए बोलता हे.” रिधि क्या सिद्धि को भी चोद लिया हे मैंने जानना चाहते हो तो सुनो में तुम्हारी बिवी की गांड पर मर मिटा हू. अब आज रात में उसकी गांड जरूर मरूँगा और मौसी को बता दूंगा तुम क्या चाहते हो. निकिता के ससुर का मुह खुला का खुला रह जाता हे उसे विश्वास नहीं होता उसकी बेटिया इतनी बड़ी रंडी निकलेँगी. रजत निकिता के ससुर को बोलता हे “प्लीज् दोस्त ग़ुस्सा मत करना”.

“मे मजबूर था,”तुम्हारी बेटिया हे ही इतनी सेक्सी तो मैं” क्या? करता निकिता का ससुर सोचता हे जब रजत

रिद्धी सिद्धि को चोद सकता हे तो में क्यों नहीं वो रजत को बोलता हे “दोस्त कभी मेरा भी भला कर दिया करो”. रजत समझ जाता हे वो बोलता हे “में तो दो दिन बाद जा रहा हूँ,मेरी रंडियों का तुमको ही तो खयाल रखना हे,और हा मेरी एक बात मानना बाहर के किसी भी आदमी को, अपने साथ मत मिलाना”.

“वरना तुमको कुछ नहीं मिलेगा”. निकिता का ससुर हा में सर हिला देता हे. दोनों निचे आते हे.

बारात आने का टाइम हो गया हे तभी एक कार आ कर रुकति हे. कार में से एक लड़की निकलती हे लाल

साडी पहनी हुई हॉट है! एकदम सेक्सी फ़िगर. रजत चौक जाता हे और मुह से निकल ता है” ये तो वो हे “
 
रजत चौक जाता हे उस लड़की को देख कर ये तो ट्रैन वाली लड़की हे पर यहाँ कैसे?. निकिता आगे बड़ कर स्वागत करती हे. रजत निकिता की तरफ देखता हुये पूछता हे की मौसी ये लड़की कोण हे? तब निकिता बताती हे “ये रिद्धी की ननद हे”. “और उसे तैयार करने आई हे”. रजत खुश हो जाता हे चलो कुछ तो अच्छा हे. रजत लड़की हे पास जाता हे और बोलता हे

रजत- “हाय आईएम रजत हम ट्रैन में भी मिले थे”.

रानी- “हा. मैं रानी मुझे सब याद हे”.

रजत – “आप ने पहले क्यों नहीं बताया आप निकिता मौसी को जानती हे?

रानी- “आप की मौसी ने ही तो, मना किया था”.

रानी बोलती हे “मुझे अपनी भाभी को रेडी करना हे तो में जाउ?. “फ्री हो कर बात करते हे”. रजत भी काम में लग जाता हे. सिद्धि एक लाल लहँगे चोली में मस्त गुलाब जेसी लगती हे रजत उसे देख कर मदहोश हो जाता हे और एक शायरी बोलता हे

“होंठो पे रंगत है”

“दिल में मोहब्बत है”

“क्या जिस्मे ओरत हे”

“बस जन्नत ही जन्नत हे”

रजत की शायरी सुन सब वाह वाह करने लगते हे रजत चौक जाता हे और शर्म से नजर निचे कर लेता हे. निकिता बोलती हे “क्यों छोटु मिया बहुत शायरी आ रही हे”. रजत शरमाते हुए बोलता हे “क्या करू? सिद्धि को देख कर खुद पर क़ाबू नहीं रख पाया” ..सिद्धि रजत के पास आती हे और बोलती हे “कोई ऐसे सबके सामने तारीफ करता हे?. रजत बोलता हे तो “क्यक हुआ जाणु?. “आज बहुत सेक्सी लग रही हो”. सिद्धि बोलती हे “तुम्हारे लिए ही तो तैयार हुई हू” रजत बोलता हे तो इस बात पर एक किस दे दो. सिद्धि बोलती हे “मेरा मेकअप ख़राब हो जायेगा”. रजत सिद्धि की कलाई पकड़ कर रूम में ले जाता हे. सिद्धि बोलती हे “प्लीज् रजत ऐसा मत करो कोई देख लेगा”. रजत बोलता हे “देखने दो”. और सीधी की चुचिओ को दबाने लगता हे. सिद्धि के लिप्स पर अपने लिप्स रख देता हे और दोनों एक दूसरे को चुस्ने लगते हे. रजत अपनी जीभ सीधी के मुह में दाल देता हे सीधी उसे चुस्ने लगती हे. रजत सीधी की चोली के अंदर हाथ दाल के जोर से चूचि दबा देता हे रजत का लंड खड़ा हो जाता हे सिद्धि बोलती हे “अभी नहीं रात में चोद लेना प्लीज् जाने दो”.रजत बोलता हे “इसका में क्या करू जो खड़ा हो जाता हे” सिद्धि बोलती हे “तुम बताओ में क्या करू”. रजत बोलता हे “जानू चुस कर शांत भी कर दो प्लीज्”. सिद्धि रजत का लंड चुस्ने लगती हे. रजत के लंड को पूरा पूरा मुह में लेने की कोशिश करती हे. पर रजत का आधा लंड ही मुह में ले पाती हे. दोनों अपनी मस्ती में खो जाते हे. तभी निकिता आ जाती हे सीधी की पीठ निकिता की तरफ होती हे. रजत निकिता को देख के मुस्कराता हे और ऊँगली के इशारे से चुप रहने को बोलता हे. सिद्धि रजत का पाणी निकाल देती हे और सारा पाणी पी जाती हे. जैसे ही घुमति हे निकिता पूछती हे “केसा टेस्ट हे इसके पाणी का? “जो तू मज़े ले कर पी रही थी”. सिद्धि डर की वजह से कांपने लगती हे उसकी ऐसी हालत देख के निकिता बोलती हे अब क्यों डर रही हे लंड लेते हुए डर नहीं लगा”. सिद्धि चुप चाप खड़ी रहती हे. रजत आगे बढ़ कर निकिता को पकड़ कर चूम लेता हे सिद्धि ये देख के हक्की बक्की रह जाती हे रजत बोलता है “मत डर ये भी तुम्हारी बहन की तरह मेरी रंडी हे”. निकिता बोलती हे अब हम तीनो रजत की रंडी हे जैसे चाहे वेसे हमे चोदे. रजत बोलता हे “आज मौसी आप अपने ससुर से चुद्वाओंगी”. निकिता बोलती हे “उस बुढे में दम भी हे?. “में प्यासी रह गई तो? रजत बोलता हे “में हूँ ना,में चोद कर बुझा दूंगा”. सिद्धि कुछ भी समझ नहीं पति क्या हो रहा हे.

रजत सीधी को बोलता हे “में आज तुझे तेरे बाप के सामने चोदुंगा”. तभी रजत की माँ आ कर बताती हे “शादी होने वाली हे सब निचे चलो”.

सब नीचे आते हे. रजत रानी को देख कर मुस्कराता हे और बोलता हे “क्या बात हे? “आप अभी तक फ्री नहीं हुई”. रानी बोलती हे “जी में फ्री हूँ आप ही ग़ायब हो”. रजत और रानी एक टेबल पर बैठ के बाते करने लगते हे.

रजत- “आप दिल्ली में ही रहती हो ?

रानी. .हा!

रजत – “क्या करती हो आप?.

रानी- “में एक कंपनी में कंप्यूटर ऑपरेटर हू”.

रजत पूछता हे “आप दिल्ली में अकेली रहती हो?

रानी बोलती हे “नहीं हम दो फ्रेंड्स हे,और एक ही कंपनी में काम करती है”

रजत बोलता हे “क्या में आपका फ़ोन नंबर मांग सकता हू?

रानी बोलती हे “वो तो में पहले ही दे चुकी हू”.

रजत -चौक जाता हे और पूछता हे “कब दिया?.
 
रानी बताती हे जब में आई तो “आप की जेब में, “मेने अपना कार्ड डाला था आप को नहीं मिला”.

रजत - अपनी जेब चेक करता है और और मुस्कुराते हुए बोलता हे “बहुत स्मार्ट हो तुम्”

दोनो बैठ कर बाते करते हे तभी निकिता का ससुर आता हे और रजत को साथ चलने को बोलता हे रजत रानी को बोलता हे बस दो मिनट में आया. रजत निकिता के ससुर को बोलता हे “आज रात आप को ऊपर छत पर आना है’ मौसी तैयार हे मगर एक शर्त पर? निकिता का ससुर पूछता हे “क्या शर्त हे?रजत बोलता हे “सिद्धि के सामने मौसी को चोदोगे और में सिद्धि को आप के सामने चोदूगा. निकिता का ससुर बोलता हे “सिद्धि क्या सोचेगी? “मेरे बारे मे”. रजत बोलता है “वो तैयार हे,और ज्यादा मत सोचो, “मेरे बाद तो आप ही सिद्धि को भी चोद सकते हो”.निकिता का ससुर बोलता हे “क्या ? “सिद्धि मेरे साथ भी चुद्वायेगी?. रजत बोलता है “जेसा में कहुंगा वैसा करेगी सिद्धि”

रजत निकिता के ससुर को टाइम बता कर भेज देता हे और रानी के पास वापस जाने लगता हे पर रानी उसे नजर नहीं आती. रजत उसे ढूँढ़ने लगता हे ढूंढते ढूंढते रजत एक रूम के पास पहुचता हे जिसके अंदर कोई फ़ोन पर बाते कर रहा था.

रूमम में कोई लड़की फ़ोन पर बात करते हुए हुए रो रही थी. रजत खिड़की से देखता हे रानी हे वह. रजत उसकी बात सुनने की कोशिश करता हे पर उसे साफ सुनाई नहीं देता. रजत वेट करता हे रानी के बाहर निकलने की. रानी बाहर आती हे आँखे भीगी हुई रजत पूछता हे “क्या हुआ? रानी बोलती हे “कुछ नहि”. रजत पूछता हे “फिर फ़ोन पर रो क्यों रही थी? “मेने फ़ोन पर हुई तुम्हारी बाते सुनि, अब साफ साफ बाताओ क्या हुआ?. रजत अन्धेरे में तीर चलता हे उसका तीर ठीक निशाने पर लगता है.

रानी रोने लगती हे और रजत को गले लगा लेती हे. रानी की चुचिआ रजत के सीने से लगती हे रजत का लंड खड़ा हो जाता हे.

रजत रानी के सर पर हाथ रख के सहलाता हे और चुप करने की कोशिश करता हे रानी की पीठ को सहलाता हे और बोलता हे “चुप हो जाओ” और रानी को रूम में ले जाता हे और पूछता हे “अब बताओ प्रॉब्लम क्या हे?.

रानी – “रोती हुयी बोलती हे वो मेरा बॉयफ्रेंड” .

रजत – “बॉयफ्रेंड” “क्या हुआ बताओ उसे कोई प्रॉब्लम हे क्या”.

रानी. – “उसे कुछ नहीं हुआ हे”.

रजत – “फिर क्यों रो रही हो, सही से बतओ?. रजत उसके लिए पाणी लाता हे और बोलता हे “लो पाणी पियो और बताओ क्या हुआ?.

रानी. - रानी रजत को वीडियो दीखाती हे और बोलती हे “ये मेरे बॉयफ्रेंड ने अपने मोबाइल से रिकॉर्ड की हे.और अब ब्लैकमेल कर रहा हे”.

रजत- “ये वीडियो की खींची गई जगह कोण सी हे?तुमको पता हे”.

रानी. – “है ये मेरे बॉयफ्रेंड का रूम हे”.

रजत – “एक बात पुछु बुरा अगर ,ना मानो”.

रानी. – “रजत तुम्हारी बात बुरी क्यों मानुंगी?पुचो क्या पूछना हे”.

रजत हिचकिचाते पूछता हे की “क्या तुम उसके साथ ???.....

रानी. - रजत के सवाल समझ जाती हे और “बोलती हे नहीं रजत मैन कभी ऐसा नहीं किया”

रजत –“तो तुम उसके बाथरूम में क्या कर रही हो?

रानी- “एक दिन में उसके घर उसके बर्थडे की पार्टी में गई थी तब खाना निकालते वक़्त मेरे बॉयफ्रेंड ने खाना मेरे कपड़ो पर गिरा दिया था, “में तो फ्रेश होने गई थी मुझे नहीं मालूम था की वो मेरी वीडियो बना लेगा और ब्लैकमेल करने लगेगा”

रजत पूछता हे “कब की बात है यह?.

रानी “जिस दिन ट्रैन में मिले उस से एक दिन पहले की बात थी”.

रजत. “इट्स ओके में उस से बात करके देखता ह’. “नहीं मानेगा तो कोई इलाज कर दूंगा डोन्ट वरि ओके, अब खुश हो जाओ और टेन्शन मत लेना में हूँ’ तुम्हारा बॉयफ्रेंड जरूर सुधर जाएगा”.

रिद्धी की शादी हो गई वो अपने ससुराल चलि गई. सब रिश्तेदार भी अपने घर जाने लगते हे . बिदाई के टाइम रानी रजत को अपना दिल्ली का पता देती हे. और बोलती हे फ़ोन जरूर करना. रजत उसे बोलता हे “दिल्ली में अब मिलेंगे” .
 
सब लोग थक चुके थे और अपने अपने रूम में जाने लगते हे. रजत की माँ मीना को नींद नहीं आती वो ताज़ी हवा लेने छत पर चलि जाती हे मौसम ठण्डा हे छत के एक तरफ जा कर खड़ी हो जाती हे. कुछ देर बाद उसे कुछ आहट सुनाई देती हे.

वह मुड कर देखति हे की रजत और सिद्धि स्टोर रूम में जा रहे हे. वो अभी आगे बढ्ने वाली होती हे उसे निकिता नज़र आती हे वो भी स्टोर रूम में चलि जाती हे वो सोचती हे ये तीनो स्टोर रूम में क्या करने गए हे. मिना स्टोर रूम की खिड़की से देखति हे रजत निकिता की चूचीआ दबा रहा हे और सिद्धि रजत का लंड मुह में ले कर चुस्ती हे.

तभी उसे फिर लगता हे कोई ऊपर आ रहा हे वो छुप जाती हे तभी निकिता का ससुर ऊपर आता हे और स्टोर रूम में दाखिल होता हे. वो देखता हे उसकी बहु और बेटी रंडी की तरह रजत से चिपकी हे रजत बोलता हे वहा क्यों खड़े हो आ जाइये और जिंदगी के मज़े लो. सिद्धि अपने बाप को देख के शर्मा जाती हे रजत बोलता हे सिद्धि को साली रंडी आज कोई बाप बेटी या ससुर बहु नहीं हे बस चुदाई के मज़े लो रंडी की तरह सिद्धि हा में सर हिला देती हे

रजत निकिता और सिद्धि को नंगा होने को बोलता हे रूम में ० वाट का ब्लब जाल रहा होता हे दोनों उसकी बात सुन कर शर्मा जाती हे रजत आगे बढ़ कर सिद्धि की चुचिअ पकड़ लेता हे उसकी बुर कपड़ो के ऊपर से मसलता हे. निकिता और उसका ससुर एक दूसरे की सूरत देखते रहते हे रजत बोलता हे चुदाई भी करोगे की एक दूसरे की सूरत देखोगे और निकिता को धक्का मारता हे और निकिता अपने ससुर से जा टकराती हे निकिता का ससुर उसे पकड़ लेता हे और बोलता हे मेरी रानी मेरी दिली तमन्ना थी तुमको अपनी बाहो में लेने की जो आज रजत की वजह से पूरी हो गई और निकिता के गालो को उसका ससुर चूम लेता हे निकिता शर्मा जाती हे.

रजत सिद्धि की चुचिओ को दबा दबा के चूसता हे निकिता की चुचिओ को उसका ससुर दबा कर होठ चूमता हे. चारो नंगे हो जाते हे ये सब देख कर रजत की माँ मीना गरम हो जाती हे और अपनी बुर को मसलने लगती हे. रजत सिद्धि की बुर में उंगली दाल कर चोदता हे. निकिता की बुर को उसका ससुर चूसता और चाटता हे. पूरा रूम दोनों ननद भाभी की सिसकीओ से गुंज जाता हे रजत की माँ अपनी बुर में ऊँगली डाल कर चुचिओ को अपनी मसलती हे. .

सिद्धि और निकिता दोनों मर्दो का लंड चुस्ती हे दोनों मर्द जोर जोर से मुह को चोदते हे निकिता के ससुर का लंड ६ इंच का था जो रहत के लंड से बहुत छोटा था.इस लिए निकिता पूरा लंड मुह में ले लेती हे पर सिद्धि के मुह में रजत का पूरा लंड नहीं आता ..

रजत सिद्धि को लिटाता हे. और बोलता हे आज में साली तेरी गांड भी मारूंगा

सिद्धि - रजत तुम्हारी रंडी हूँ जो चाहे कर लो पर आराम से करना

रजत- साली आराम से तेरी लुँगा फ़िक्र मत कर रंडी मेरी .रजत सिद्धि को बेड पर लेटा देता हे और टांगो फैला कर बुर को चाटता हे आज सिद्धि की बुर दूसरी बार चुदने जा रही थी सिद्धि को डर लग रहा था कही रजत आज उसकी बुर का भुर्ता न बना दे

रजत सिद्धि की बुर चाटता हे उसकी बुर को काटने लगता हे

सिद्धि- उउउउउम्मम्मम्हाआआ मम्माआररररर गाहाइ सससससससससीईईईईओई सिद्धि की सिसकिया निकलने लगती है

निकिता भी जोश में आ जाती हे रजत निकिता के ससुर को बोलता हे भोसड़ी वाले ढंग से चोदना मेरी रंडी को आज खुश कर देना.

निकिता ससुर बोलता हे गुरु फ़िक्र मत करो आज इसकी फाड् कर ही दम लूंगा.

रजत की माँ मीना सब देख के उत्तेजित होती रहती हे उसकी बुर पाणी छोडने लगती हे. रजत सिद्धि की बुर का पाणी चाट चाट के साफ करता हे. निकिता का ससुर भी निकिता की बुर में उंगली पेल देता हे. दोनों औरते गरम हो जाती हे.

सिद्धि - रररररराअज्जा असे ही कक्कछ्हाते रहो.

निकीटा - ससुर जी और जोर से चुत मे पेल दो ऊँगली पुरी.

सिद्धि अपनी भाभी को इंजॉय करते देख कर जोश में गालिया देना शुरू कर देती हे.

सिद्धि – “मादरचोद आच्छे से चाट”

रजत – “भोसड़ीवाली ज्यादा गरमा गई हे क्य?

सिद्धि - साले पेल दे आज फाड् दे बुर को खा जा मेरी बुर को.

रजत सिद्धि की बुर में दो उंगली गुसा देता हे.

रजत - रंडी छिनाल ले अब आया मजा.

सिद्धि की आँखों में आंसू आ जाते हे वो कराहने लगती है

रजत बोलता हे “मादरचोद आज तेरी ऐसी चुत चोदूगा की तेरा बाप काप जायेगा, “और तू मेरे बच्चे की माँ बन जायेगी मादरचोद”

सिद्धि- बातो के शेर पहले चोद के दिखा देखु तेरे लंड में कितना दम हे.

रजत- “भोसडी वाली मुझे चैलेंज कर रही हे, “आज तू चिल्लाएगी तेरी चीखे सारा शिमला सुनेगा छिनाल”.

रजत सिद्धि को दीवार के साथ कर उसकी चुत चाटता हे और गांड पर थप्पड़ मारता हे.

सिद्धि- “हरामी मारता क्यों है?

रजत- साली आज तुझे मार मार के बुर की हालत ख़राब करुन्गा. और रजत सिद्धि की चुत में अपनी जीभ पेलता रहता हे सिद्धि की सिस्किया निकलती हे. रजत गांड को मसलता हे गांड को फैलाकर गांड चाटता हे .. रजत सिद्धि की गांड में उंगली पेल देता हे सिद्धि की चीख गूंजती हे .

सिद्धि-“मार डाला राजा”

रजत-“साली छिनाल चिल्लाती क्यों हे”.

सिद्धि- “रजत उंगली निकालो कोई ऐसे करता हे क्या दर्द हो रहा हे.”

रजत-भोसडी वाली जब उंगली बर्दाश्त नहीं होती तो मेरा लंड कैसे बर्दाश्त करेगि. सिद्धि ये सोच के के कांप जाती हे की रजत उसकी आज गांड फाड् के रख देगा.

सिद्धि-रजत प्लीज् बुर चोद लो चाहे फाड् दो पर अभी गांड मत मरो प्लीज् प्लीज् प्लीज्

रजत-कुतिया शर्त लगाने से पहले तुझे ये सोचना चाहिए था .तेरा में क्या हाल करुँगा.

रजत उंगली अन्दर बाहर करता हे गांड में सिद्धि को दर्द कम हो रहा था रजत से ये देखा नहीं गया उसने अपनी दूसरी उंगली भी अन्दर दाल दि.

सिद्धि की दर्द से सिसकिया निकलती है रजत सिद्धि की कमर में हाथ दाल के सहलाता हे चुचिओ को दबाता हे. सिद्धि सिसकिया लेती हुई रजत की उंगली गांड में लेती रहती हे .
 
निकिता और उसका ससुर ६९ की पोजीशन में एक दूसरे को चुसते चाटते रहते हे. निकिता अपने ससुर को बोलती हे अब नहीं सहा जाता अन्दर दाल दो फाड् दो मेरी. निकिता का ससुर निकिता को बाद के किनारे खीच लेता हे और टांगे कन्धो पर रख के निकिता की बुर पर लंड रगडता हे. निकिता भी उतेजित हो कर बोलती हे साले क्या रगड रहा हे दाल अन्दर

निकिता का ससुर- है रंडी ड़ालता हू. निकिता का ससुर लंड बुर पर रख कर धक्का मारता हे पर सही से पोजीशन नहीं बना पूरा लंड फ़िसल जाता हे. निकिता गुस्से से बोलती हे

निकिता- कुत्ते हरामी अभी तक बुर में लंड भी पेलना नहीं आया हे जो नौसिखियों की तरह घुसा रहा हे.

निकिता का ससुर- साली रंडी बहुत भोकती हे ले अब तुझे बताता हू. और लंड बुर पर रख के जोर से झटका मारता हे लंड बुर में आधा अन्दर घुस जाता हे और निकिता दर्द से कराहती हे.

निकिता- “कमीने मार डालेगा क्या?

निकिता का ससुर एक झटका और मारता हे. पूरा लंड अन्दर घुस जाता हे.

निकिता-“हरामी कुत्ते साले धीरे धीरे नहीं दाल सकता? इतना दर्द हो रहा हे अब”.

निकिता का ससुर – “कमीनी बहुत भोक रही थी कुतिया की तरह”.

रजत भी निकिता और उसके ससुर की रासलीला देख के गरम हो जाता हे. सिद्धि को सीधा करता हे और उसके लिप्स को बुरी तरह चुस्ने लगता हे. सिद्धि की चुचिओ को जोर जोर से खीचने लगता हे. सिद्धि भी रजत को जो जोर से चुस्ती हे. रजत का लंड एक दम सीधा हो जाता हे ९ इंच का उसकी बुर पर रगडता हे. रजत सिद्धि को दिवार से लगा कर एक पैर उठा लेता हे और आपना लंड बुर से सटा देता हे सिद्धि किस करती रहती हे रजत को यही मौका अच्छा लगता हे .रजत जोर से झटका मारता हे.सिद्धि की बुर दूसरी बार चुदने जा रही थी तो उसकी बुर अभी भी टाइट थी रजत का लंड का टोपा बुर में फस जाता हे. लिप्स को चुसते रहने की वजह से उसकी चीख दब जाती हे उसके मुह से दबी दबी चीख निकलती हे .

सिद्धि – “ओह मा”

रजत सिद्धि की कमर पकड़ कर खड़े खड़े दूसरा झटका मारता हे अबकी बार सिद्धि रजत के मुह को हटा देती हे और उसकी चीख रूम में गूंजती हे.

सिद्धि-“मार डाला”

रजत का आधा लंड सिद्धि की बुर में घुस चुका था वो दर्द से कांप रही थी पर रजत ने उसे कस कर पकड़ रखा था. खड़े खड़े उसके पैर दर्द होने लगे थे पर रजत उसे छोड़ नहीं रहा था वो तडप रही थी दर्द से तो

सिद्धि की बुर फट गई थी खून बुर से निकल कर पैरो से निचे गिर रहा था सिद्धि की ऑंखे दर्द से लाल हो गई थी पर रजत पर शैतान सवार हो गया था वो सिद्धि को दीवार के सहारे चोदता रहा. निकिता का ससुर भी निकिता को बुरी तरह चोद रहा था. निकिता के ससुर ने निकिता को अपने ऊपर ले कर चोदना शुरू कर दिया था. रजत ने भी सिद्धि को गोद में उठा लिया और लगा जोर जोर से धक्के मारने सिद्धि ऐसी चुदाई और दर्द से कराह रही थी. रजत चोदता रहा. सिद्धि दो बार झड चुकी थी अब तीसरी बार झड़ने वाली थी रजत ने देखा सिद्धि हिम्मत हार चुकी हे और अब और नहीं बर्दाश्त कर पायेगी रजत को उस पर तरस आ गया. सिद्धि के झडते ही रजत ने सिद्धि की चुत से लंड बाहर निकल लिया. पर उसका काम अभी नहीं हुआ था इस लिए उसके दिमाग में एक आईडिया आया.

निकिता आराम से चुदवा रही थी ससुर से. सिद्धि थक चुकी थी ऐसी चुदाई से उसके जिस्म में जान जैसे नहीं हो हिल नहीं पा रही थी . रजत निकिता के पीछे जा कर खड़ा हो गया और निकिता की कमर को पकड़ लिया निकिता की गांड पर अपना लंड सता कर जोर से झटका मारा. निकिता इस अचानक हुए हमले से चीख पड़ी. पर रजत ने दूसरा झटका भी मार दिया रजत का पूरा लंड गांड में फस चुका था ..निकिता चिल्लाने लगी

हरामजादो मार डालोगे क्या बाहर निकालो

पर रजत कुछ भी सुन नही रहा था उसने तीसरा झटका भी मार दिया. निकिता की गांड में ७ इंच लंड घुस चुका था वो चिल्ला रही थी निकिता का ससुर भी जोर जोर से बुर में लंड पेल रहा था.

सुअर की औलाद धीरे चोदो मर जाउंगी में पर दोनों कुछ नहीं सुन रहे थे बस चोदते रहे .

रजत ने अपना लंड थोड़ा बाहर निकाला और जोर से झटका मारा लंड पूरा उसकी बच्चेदानी से जा टकराया निकिता की जैसे जान निकल गई थी.

दर्द से निकिता चिल्ला रही थी रजत और निकिता का ससुर ४ बजे सुबह तक चुदाई करते रहे चारो थक गए थे अपने अपने रूम में चले जाते हे. सुबह ७ बाजे फोन की घंटी बजती हे. रजत नींद में फ़ोन उठाता है.

रजत- “हैल्लो कोण हे”?

रोहित- “रजत में रोहीत”.

रजत- “साले सुबह सुबह क्यों डिस्टर्ब कर रहा हे, सोने दे”.

रोहित – “रजत प्रॉब्लम हो गई हे”.

रजत – “क्या बक रहा हे क्या प्रॉब्लम?.

रोहित- “यार मुझे माफ् कर दे. वो वो घर”.

रजत- “साले क्या हुआ घर पर”?

रोहित- “यार तू जल्दी आ जा हालत बहुत ख़राब हो गए हे यहाँ’ “प्लीज्”

रजत- “साले साफ साफ क्यों नहीं बोलता”

रोहित- “वह तेरे घर पर”

रजत – “साले मेरी बहनो को क्या हुआ”?

रोहित – “यार तेरी बहने ठीक हे” मगर?

रजत- “तो साले क्या हुआ बताओ?

रोहित – “रजत रूपा ........

रजत रूपा का नाम सुन के घबरा जाता हे.

रजत- “रूपा!. “क्या हुआ उसे साले?.

रोहित- “रूपा हॉस्पिटल में हे”

रजत – “साले क्या हुआ उसे?.

रोहित- “तू यहाँ आ जा में सब समझा दूंगा” .

रजत- “साले में आज रात ही पहुच रहा हूँ अभी निकल रहा हू”.

रोहित फ़ोन कट देता हे. रजतअपनी माँ को बोलता हे चलने की तैयारी करो हमें अभी निकलना होगा माँ पूछती हे “क्या हुआ?. रजत बताता हे की घर में कुछ प्रॉब्लम हो गई हे जल्दी से रेडी हो जाओ में टेक्सी मँगवाता हू..
 
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