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सिद्धि भी जाग जाती हे पर रजत के वापस जाने की खबर से उदास हो जाती हे. रजत सिद्धि को बोलता हे उदास मत हो. में छुट्टीया शुरू होते ही वापस आऊंगा. सिद्धि रजत से लिपट जाती हे और रोने लगती हे. टेक्सी आ जाती हे निकिता रजत और मीना को बाहर तक छोडने आती हे. निकिता रजत को बोलती हे रजत दो मिनट बात सुणो मीना गुमसुम भी जा कर टेक्सी में बैठ जाती हे.निकिता रजत को बोलती हे “मेरी बहन बेशक तुम्हारी माँ हे, “पर एक ओरत भी हे’ “वो भी मर्द की चाहत और प्यार की हक़दार हे, “कई सालो से उसने किसी मर्द को अपने पास आने नही दिया”. रजत. “मौसी आप फ़िक्र मत करो, जैसे आप दोनों मेरी रंडी हो वेसे में माँ को भी अपनी रंडी बना कर रखूँगा, कोई तकलीफ नहीं होगी” निकिता ये सुन कर खुश हो जाती हे और प्यार से रजत का माथा चूम लेती.
रजत और मीना रेलवे स्टेशन पहुँचते हे गाड़ी टाइम पर होती हे दोनों अपनी सिट पर बैठ जाते हे ४ बजे वो घर पहुच जाएगे चंडीगढ़ से दिल्ली. रजत सोचता हे एक हफ्ता कैसे बिता पता ही नहीं चला. लाइफ मस्त लग रही थी. रिद्धी सिद्धि और मौसी तीनो ने खुद मजे दिए .रात सही से नींद न आने की वजह से माँ बेटे सोचते सोचते सो जाते हे. दिल्ली पहुच कर उनकी नींद खुलती हे. वो जल्दी से एक टेक्सी पकड़ ते है और घर पहुच जाते हे. घर की घंटी बजाते ही डोर खुलता हे रजत को अपना घर बदला बदला लग रहा था.
माया डोर खोलती हे रजत को देख कर उसे गले लगा लेती हे और रोने लगती हे काया भी आ जाती हे और रजत के गले लग कर रोने लगती हे. रजत दोनों को चुप करवाते हुए बोलता हे “घर के अन्दर भी आने दो अब तो आ गया हूँ’ में क्यों रो रही हो सब ठीक हो जायेगा”. माया मोम को भी गले लगाती हे काया सब के लिए चाय बनाती हे. रजत रोहित को कॉल करता ह.
रजत- “
हैलो रोहित कहा हे तू?
रोहित – “में होस्पिटल में हूँ तू कहा हे?
रजत- “में घर पहुच गया ह”.
रोहित- “तू घर पर रुक में आता हु”.
रोहित होस्पिटल से रजत के घर पहुच जाता हे रजत को गले लगाता हे रजत पूछता हे “कैसे हुआ ये सब?.
रोहित- “यार तेरे जाने के बाद में रूपा को तेरे घर पर ले आया, पर उसके घर के बदमाश लड़के उसे परेशान करते रहे, में जहा तक हो सका उसे बचता रहा कल में कॉलेज नहीं गया’. “रूपा ऑटो से घर आ रही थी उन लड़को ने छेड छाड़ की उसके साथ. चलती ऑटो में उन लड़को ने रूपा के साथ खींचा तानी की, जिसकी वजह से वो रोड पर गिर गई, और उसको बहुत चोट लगी”.
रजत ग़ुस्से में “सालो को जान से मार दुंगा. जिन लोगो ने रूपा का ये हाल किया हे”
रोहित- “यार वो बिगडे हुए अमीर बाप के लड़के हे, पुलिस उनका कुछ नहीं बिगड पाई तो हम क्या कर पाएंग़े?.
रजत- सालो का कुछ तो इलाज करना पडेगा.
रोहित – “प्लान बना के पीटते हे उनको” क्या बोलता हे?.
रजत – “हा पहले मुझे रूपा से मिलना हे, चल होस्पिटल चलते हे”.
रजत माँ और बहनो को बता कर होस्पिटल पहुच जाता हे रूपा को देखता हे हाथो और पैरों पर पलास्टर चढ़ा हुआ हे .रूपा रजत को देख कर रुआँसी हो जाती हे रजत पास पहुच कर पूछता हे “अब कैसा लग रहा हे? रूपा की आँखों से आँसु बहने लगते हे. रजत उनको साफ करते हुए बोलता हे “अब फ़िक्र मत करो में आ गया हूँ सब ठीक कर दूंगा” .
तभी रूपा के डैड आते हे रजत उनको तसली देते हुए कहता हे “अब उनको सबक सिखाना ही पड़ेगा, आप फ़िक्र मत करो ऐसा सबक सिखाउंगा की याद रखेंगे”.
रात को रजत घर पहुचता हे. काया रजत को टेंशन में देख कर दुखी होती हे. सब डिनर खाते हे .रजत माया को बोलता हे “सर का और रूपा का डिनर पैक कर दो, पता नहीं कुछ खाया भी हे की नहीं दोनों ने” माया डिनर पैक कर देती हे. रजत डिनर लेकर होस्पिटल पहुच जाता हे. सर को डिनर करने को बोलता हे पर सर बोलते हे “रजत भूख नहीं हे, “मेरी बिन माँ की बच्ची के साथ ही ऐसा क्यों हो रहा हे? रजत बोलता हे “आप फ़िक्र मत करो सब ठीक हो जायेगा, आप रूपा से बहुत प्यार करते हो, खाना नहीं खाओगे तो आप की भी तबियत ख़राब हो जाएगी”. रजत की बात मान कर सर डिनर कर लेते हे रजत रूपा को भी डिनर अपने हाथो से खिलाता हे. रजत डॉक्टर से मिलता हे और पूछता हे “कब? “आप डिस्चार्ज करोगे रूपा को”. डॉक्टर बोलता हे “रूपा को दो दिन और रहना पडेगा’. “मैंने पुलिस को बता दिया था रोड एक्सीडेंट हुआ हे”. “तो आप दो दिन बाद लेजा सकते हो”.
रजत दो दिन होस्पिटल में रहता है. दूसरे दिन शाम को रोहित घबराया हुआ होस्पिटल में आता हे.
रजत- “रोहित क्या हुआ इतना घबराया हुआ क्यों हे?
रोहित- “यार उन लड़को में से दो लड़के गायब हो गए हे”
रजत- “ग़ायब मतलब क्या हे?
रोहित- “यार वो लड़के कल से ही ग़ायब हे” “पुलिस और उसके दोस्त ढूंढ रहे हे”.
रजत- “कहा ग़ायब हो गए, “कही होंगे साले मेरे हाथ लगेंगे तो तोड़ कर रख दूँगा”.
रोहित – “यार पुलिस कॉलेज में पूछताछ कर रही हे यहाँ भी आ सकती हे”.
रजत- “आने दे क्यों डर रहा हे?
रूपा के डैड सब फ़ॉर्मेल्टी पूरी कर के रूपा को लेकर रजत के घर पहुँचते हे वह पुलिस की कार खड़ी देखते हे. रजत जल्दी से अन्दर पहुचता हे अन्दर पहुँचते ही चौक जाता हे.
रजत और मीना रेलवे स्टेशन पहुँचते हे गाड़ी टाइम पर होती हे दोनों अपनी सिट पर बैठ जाते हे ४ बजे वो घर पहुच जाएगे चंडीगढ़ से दिल्ली. रजत सोचता हे एक हफ्ता कैसे बिता पता ही नहीं चला. लाइफ मस्त लग रही थी. रिद्धी सिद्धि और मौसी तीनो ने खुद मजे दिए .रात सही से नींद न आने की वजह से माँ बेटे सोचते सोचते सो जाते हे. दिल्ली पहुच कर उनकी नींद खुलती हे. वो जल्दी से एक टेक्सी पकड़ ते है और घर पहुच जाते हे. घर की घंटी बजाते ही डोर खुलता हे रजत को अपना घर बदला बदला लग रहा था.
माया डोर खोलती हे रजत को देख कर उसे गले लगा लेती हे और रोने लगती हे काया भी आ जाती हे और रजत के गले लग कर रोने लगती हे. रजत दोनों को चुप करवाते हुए बोलता हे “घर के अन्दर भी आने दो अब तो आ गया हूँ’ में क्यों रो रही हो सब ठीक हो जायेगा”. माया मोम को भी गले लगाती हे काया सब के लिए चाय बनाती हे. रजत रोहित को कॉल करता ह.
रजत- “
हैलो रोहित कहा हे तू?
रोहित – “में होस्पिटल में हूँ तू कहा हे?
रजत- “में घर पहुच गया ह”.
रोहित- “तू घर पर रुक में आता हु”.
रोहित होस्पिटल से रजत के घर पहुच जाता हे रजत को गले लगाता हे रजत पूछता हे “कैसे हुआ ये सब?.
रोहित- “यार तेरे जाने के बाद में रूपा को तेरे घर पर ले आया, पर उसके घर के बदमाश लड़के उसे परेशान करते रहे, में जहा तक हो सका उसे बचता रहा कल में कॉलेज नहीं गया’. “रूपा ऑटो से घर आ रही थी उन लड़को ने छेड छाड़ की उसके साथ. चलती ऑटो में उन लड़को ने रूपा के साथ खींचा तानी की, जिसकी वजह से वो रोड पर गिर गई, और उसको बहुत चोट लगी”.
रजत ग़ुस्से में “सालो को जान से मार दुंगा. जिन लोगो ने रूपा का ये हाल किया हे”
रोहित- “यार वो बिगडे हुए अमीर बाप के लड़के हे, पुलिस उनका कुछ नहीं बिगड पाई तो हम क्या कर पाएंग़े?.
रजत- सालो का कुछ तो इलाज करना पडेगा.
रोहित – “प्लान बना के पीटते हे उनको” क्या बोलता हे?.
रजत – “हा पहले मुझे रूपा से मिलना हे, चल होस्पिटल चलते हे”.
रजत माँ और बहनो को बता कर होस्पिटल पहुच जाता हे रूपा को देखता हे हाथो और पैरों पर पलास्टर चढ़ा हुआ हे .रूपा रजत को देख कर रुआँसी हो जाती हे रजत पास पहुच कर पूछता हे “अब कैसा लग रहा हे? रूपा की आँखों से आँसु बहने लगते हे. रजत उनको साफ करते हुए बोलता हे “अब फ़िक्र मत करो में आ गया हूँ सब ठीक कर दूंगा” .
तभी रूपा के डैड आते हे रजत उनको तसली देते हुए कहता हे “अब उनको सबक सिखाना ही पड़ेगा, आप फ़िक्र मत करो ऐसा सबक सिखाउंगा की याद रखेंगे”.
रात को रजत घर पहुचता हे. काया रजत को टेंशन में देख कर दुखी होती हे. सब डिनर खाते हे .रजत माया को बोलता हे “सर का और रूपा का डिनर पैक कर दो, पता नहीं कुछ खाया भी हे की नहीं दोनों ने” माया डिनर पैक कर देती हे. रजत डिनर लेकर होस्पिटल पहुच जाता हे. सर को डिनर करने को बोलता हे पर सर बोलते हे “रजत भूख नहीं हे, “मेरी बिन माँ की बच्ची के साथ ही ऐसा क्यों हो रहा हे? रजत बोलता हे “आप फ़िक्र मत करो सब ठीक हो जायेगा, आप रूपा से बहुत प्यार करते हो, खाना नहीं खाओगे तो आप की भी तबियत ख़राब हो जाएगी”. रजत की बात मान कर सर डिनर कर लेते हे रजत रूपा को भी डिनर अपने हाथो से खिलाता हे. रजत डॉक्टर से मिलता हे और पूछता हे “कब? “आप डिस्चार्ज करोगे रूपा को”. डॉक्टर बोलता हे “रूपा को दो दिन और रहना पडेगा’. “मैंने पुलिस को बता दिया था रोड एक्सीडेंट हुआ हे”. “तो आप दो दिन बाद लेजा सकते हो”.
रजत दो दिन होस्पिटल में रहता है. दूसरे दिन शाम को रोहित घबराया हुआ होस्पिटल में आता हे.
रजत- “रोहित क्या हुआ इतना घबराया हुआ क्यों हे?
रोहित- “यार उन लड़को में से दो लड़के गायब हो गए हे”
रजत- “ग़ायब मतलब क्या हे?
रोहित- “यार वो लड़के कल से ही ग़ायब हे” “पुलिस और उसके दोस्त ढूंढ रहे हे”.
रजत- “कहा ग़ायब हो गए, “कही होंगे साले मेरे हाथ लगेंगे तो तोड़ कर रख दूँगा”.
रोहित – “यार पुलिस कॉलेज में पूछताछ कर रही हे यहाँ भी आ सकती हे”.
रजत- “आने दे क्यों डर रहा हे?
रूपा के डैड सब फ़ॉर्मेल्टी पूरी कर के रूपा को लेकर रजत के घर पहुँचते हे वह पुलिस की कार खड़ी देखते हे. रजत जल्दी से अन्दर पहुचता हे अन्दर पहुँचते ही चौक जाता हे.