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लाइफ हो तो ऐसी complete

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में जल्दी से उठा और रूपा के पीछे जा के खड़ा हो गया, मैंने रूपा की गांड को पकड लिया और उसकी गांड में ऊंगली घुसा दी, रूपा की सिसकी निकल गयी,

रूपा मुझे बड़े प्यार से देख रही थी, मेंने उसकी गांड को फैला के अपना लंड उसके छेद पे बैठा दिया, मैंने एक जोर से धक्का मारा मेरा लंड उसकी गांड की गहराइयो में समा गया, माँ और रूपा एक ही वक़्त में चिल्ला उठि, मेरे धक्के की वजह से रबर का लंड भी माँ की चूत में पुरा घूस गया था, और रूपा की गांड में मेरा आधा लंड घूस चूका था, मैंने एक ओर धका मारा मेरा लंड अंदर समाता चल गया, रूपा माँ की चूत मार रही थी, मैं रूपा की गांड मरने लगा, इस तरह हम तीनो को मज़ा आरहा था,

माया दीदी काया के पास चली गई और दोनों बहने आपस में एक दूसरे के होठ चुसने लगी,

दोनो ही बहोत गरम थी, एक दूसरे की चूचियों को मसल रही थी, दोनों ने एक दूसरे की चूत पे हाथ रखा हुआ था और सहला रही थी,

मैंने रूपा की गांड पकड़ ली ओर जोर जोर से धक्के मारने शुरू कर दिये, रूपा की गांड थप थप आवाज करने लगी,

मेरे धक्कों से माँ की चूत में भी लंड घप घप घुसने लगा, माँ सब से ज्यादा गरम थी चारो में से उनका पानी जल्दी नही निकलता था,

काया:- "भाई भाभी को छोड़ो माँ को चोदो"

मुझे भी उसका आईडिया अच्छा लगा, मेने रुपा की गांड से लंड निकल दीया

रजत:- "रूपा में माँ की चूत मारता हु तुम माँ की गांड मारो"

रूपा और माँ मेरा मुह देखने लगे, रूपा ने माँ की चूत के अंदर से लंड निकल लिया,

में जामिन पे लेट गया, मैंने माँ को ऊपर आने को बोला माँ मेरे ऊपर आ गई, माँने मेरा लंड पकड़ के अपनी चूत से सटा दिया मैंने एक ही धक्के में लंड उसकी चूत मे घुसा दिया, मैंने रूपा को बोला अब गांड में लंड घुसाओ, आज पहली बार माँ दो लंड से चुदने वाली थी,

रूपा ने लंड माँ की गांडमे घुसाना शुरू कर दिया, माँ को हल्का हल्का दर्द होने लगा, अब माँ की गांड और चूत दोनों में लंड था, माँ के माथे पे दर्द झलक रहा था, हम दोनों माँ को चोदने लगे,

माँ जोर जोर से सिसकिया लेने लगी,

माँ चिल्ला रही थी, "हे भगवान मर गई, दोनों पतीपत्नी मिलकर मेरी जान लोगे क्या"?

रजत:- "माँ आप भी तो मेरी ही बीवी हो, अब दो लंड का मज़ा लो, देखो आप की सोतन आप की गांड कैसे मार रही है"

रूपा जोर जोर से माँ की गांड में धक्के मरा रही थी, में भी जोर जोर से माँ की चूत में धक्के मार रहा था, हुमे चुदाई करते हुए काफी वक़्त हो गया था, माँ झडने लगी में नही झड़ा था, में धक्के मारे जा रहा था, काया माया दीदी भी फिर से झड चुकी थी,

माँ:- "बेटा बस कर अब जलन हो रही हे"

मैंने लंड बाहर निकाल लिया, माँ मेरे साथ में लेट गई, रूपा भी धक्के लगा के थक गई थी वो सोफ़े पे बैठ गई उसने बेल्ट उतार दी, उसकी चूत बहुत गिली हो गई थी, में थोड़ी देर लेटा रहा फिर उसके पास जा के बैठ गया,

रजत:- "रूपा आओ तुम्हारा भी पानी निकाल दु"

रूपा:- "उसकी जरुरत नही"

रजत:- "क्यों"?

रूपा:- "में प्रेग्नेंट हु"

उसकी बात सुन के हम चारो उसकी तरफ देखने लगे,

में बहुत खुश था, मैंने उसे गले लगा लिया,

रजत:- "पहले कयूं नही बताया हम पार्टी करते"?

रूपा:- "आज सुबह ही तो रिपोर्ट आई है"

रजत:- "कब टेस्ट करवाया"?

रूपा:- " ७ दिन पहले"

रजत:- "ये तो ख़ुशी की बात है, आओ तुम्हारी चूत मार के ख़ुशी को मनाये"

रूपा:- "नही मुझे बच्चे को लेकर रिस्क नही लेना, अभी वो मेरे पेट में हे और में नही चाहती किसी गलती की वजह से बच्चा खराब हो"

रजत:- "ठिक है जी तो अब मेरा क्या होगा"

रूपा:- "गांड मार लो पर चूत नही"

रजत:- "जैसी तुम्हारी मरजी"

रूपा खड़ी होके मेर लंड पे बैठ गई, मेरा लंड उसकी गांड में घूस गया, में बहुत खुश था, मेरा जोश डब्बल हो गया था, में जोर जोर से धके मारने लगा,

रूपा:- "धीरे, धीरे"

रजत:- "डोंट वरी, कुछ नही होगा"

में इतने तेज़ धक्के मार रहा था, रूपा पूरी ऊपर उछल जाती और उसकी चूचिया हवा में लहराने लगती थी,मैंने रूपा को कुतीया बना लिया और चोदने लगा, में काफी देर से अपनी बीवियो को चोद रहा था, मेरा भी पानी निकलने वाला हो गया था,

माया दीदी मेरे पास आई और बोलि "पानी गांड में नही मेरी चूत में गिराना,

रजत:- "फिर तैयार रहो मेरा निकलेन वाला है"

माया दीदी रूपा के साथ में झुक गई, मैंने रूपा की गांड से लंड निकाल के माया दी की चूत में घुसा दिया, दो चार धक्कों के बाद मैं भी झडने लगा, माया दी मेरा पानी चूत में फील करके बहुत खुश थी,

में बहुत थक गया था, हम पांचो जमीन पे ही लेट गये, एक दूसरे को प्यार करने लगे, तभी डोर बेल बजी,

मैंने फटा फट अपने कपडे पहन लिए मुझे पता था चाचा चाची और मामा मामी ही होंगे घडी में देखा तो ३ बज रहे थे, माँ ओर रूपा, माया, काया माँ के साथ उनके रूम में चली गई, मैंने भी अपने कपडे पहने और डोर खोलने चला गया,
 
मामा:- "बेटा सोया नही"?

रजत:- "आप सब का ही वेट कर रहा था, वेसे आज नींद भी नही आ रही है, मज़ा आया नाइट सफारी में"?

रोहणी और अनु बोली "हां भैया बहुत मज़ा आया, मैंने आज पहली बार डॉल्फिन का गाना सुना"

रजत:- "कसा गाना"?

अनु:- "भैया जहा हमारी बोट खड़ी थी वहा बहुत सारी डॉल्फिनें थी वो आवाज कर रही थी तो गाना ही लग रहा था"

रजत:- "चलो थक गई होगी जाओ सो जाओ, माँ काया माया और रूपा एक रूम में है तुम सब के लिये ३ रूम खाली हे जाओ आराम करो"

मामा मामि को लेकर ऊपर चले गये, अनु और रोहणी भी सोने चली गई, में सोफ़े पे बैठा बैठा आगे क्या करना है वह सोचने लगा,

सुबह मुझे जगाने अनु आई, उसने आते ही मेरे होठो को चूमना शुरू कर दिया, में जैसे ही जागा अनु बोलि "गुड मॉर्निंग भैया"

रजत:- "गुड मोर्निंग अनु"

और उसके रसीले होठो को चुमने लगा,

अनु:- "अब उठ जाइये सब निचे बुला रहे है"

रजत:- "ठीक है तू चल में आता हु"

में नहाने चला गया,

नहा के बहार आया तो रूपा कपडे निकाल रही थी, में तोलिये में था, पीछे से रूपा की गांड बहुत मस्त लग रही थी, में पीछे से गया और रूपा की कमर पकड़ लि,

रूपा:- "क्या कर रहे हो जान"?

रजत:- "प्यार कर रहा हु"

रूपा:- सुबह सुबह तो ठंडा रहा करो"

रजत:- "क्या करू मेरी घर की ओराते है ही इतनी गरम तो कैसे ठंडा रहु"

मैंने रूपा की चूचियों को पकड़ लिया,

रूपा:- "जान छोड़ो मुझे बहुत काम है"

और रूपा ने मुझे कपड दिये पहनने के लिए,

रजत:- "ठीक हे जानु जाओ काम करो में अपना काम नाईट में करूँगा"

रूपा मुस्कुरा के बोलि

"कर लेना जितना करना हो"

रूपाने मेरे होठो को चुमा और चली गई, मैंने कपडे पहन लिये,ओर नीचे आ गया,

माम:- "आओ बेटा बैठो"

में बैठ गया,

रजत:- "क्या बात है कोई मिट्टिंग चल रही है क्या'?

मामी मेरे पास आई और बोलि "बेटा तुम्हारा होटल तो रेडी हो गया, और तुम बाप भी बनने वाले हो"

रजत:- "आप को भी पता चल गया"?

चाची:- "तू तो बतायेगा नही तो क्या मुझे पता नही चलेगा"

रजत:- "चाची मुझे भी तो कल ही पता चला है"

मामा:- "अब तुमपे ट्रिपल जिमेदारी है"

रजत:- "वो कैसे"?

मामा:- "पहले स्टडी की, फिर होटल की, औऱ फिर अपने बच्चे की, तुमको तीनो को टाइम देना पडेगा"

रजत:- "मामा आप क्यों फिकर करते हो में हु ना, में सब संभाल लूंगा"

माँ:- "बेटा में चाहती हु, तुम्हारे चाचा चाची और मामा मामि भी यही रहने आ जाये"

रजत:- "अच्छा आईडिया है वेसे भी हमारा घर बड़ा है, एक दो रूम और बनवा लेंगे"

मामा:- "दीदी में तो रेडी हु अपनी इस भाभी से पूछ लो जिसे गांव अच्छा लगता है"

मामी:- "मेरी फ़िक्र मत करो जहा रजत रहेगा, अब में भी वही रहूँगी,आप की तरह नही जिन्हें भैंसो के बगैर नीन्द नही आती"

मामा:- "क्या करू इतने सालो से गाव में रह रहा हु तो आदत हे उनकी"

रजत:- "चलो मामा तो रेडी है, अब चाचा चाची भी बताओ क्या करना है"

चाचा:- "बेटा गाव कैसे छोड सकते है"?

माँ:- "छोड़ने को कोण बोल रहा है, यहाँ आ के रहने को बोल रही हु"

चाचा:- "फिर भी"

माँ:- "यहाँ आ के रहोगे तो अनु रेणु की शादी और स्टडी की फ़िक्र तो नही रहेगी"

चाची:- "भाभी ठीक कह रही है, भाभी का हाथ तुम्हारे सर पे रहेगा हमेशा,ओर अनु और रेणु की स्टडी भी अच्छी चलेगी"

चाचा:- "तुम ठीक कह रही हो"

रजत:- "फिर तय हो गया कोई कही नही जा रहा अब से आप यही रहोगे"

मामा:-"नही बेटा एक बार हमे जाना ही होगा गांव"

चाचा:- "गांव का सामान खेती सब समेटना जरुरी है"

माँ:- "ठीक है, तुम दोनो चले जाओ गाव और खेती किसी को दे देना करने को और इस से तुमको बिना मेहनत के कुछ पैसे मिलते रहेंगे"

मामा:- "हा दीदी आप ठीक कह रही हो, वरना खेत बंज़र हो जायेंगे, हम आज शाम को ही चले जाते है,१५ दिन में सब समेट के आ जायेंगे"

अनु, रेणु, चाची, मामी बहुत खुश थी, और में भी अब मेरा परिवार जो बड़ा हो गया था,

रजत:- "ठीक है तब तक में तीन रूम और बनवा देता हु"

माँ:- "हां बेटा ऊपर की तरफ बनवा दो"

रजत:- "माँ फ़िक्र मत करो में सब देख लूंगा"

माँ:- "अब फ़िक्र नही करती, मुझे पता हे तुम सब संभाल लोगे"

रजत:- "में होटल जा रहा हु"

मैंने रोहित को कॉल किया तो वो बोला वो होटल में हे, में भी जल्दी से होटल पहुच गया, होटल में पहुंचा तो रोहित काम कर रहा था,

रजत:- "गुड रोहित आखिर तूमको भी जिमेदारी का अहसास हो गया है"

रोहित:- "हां भाई"

रजत:- "ठीक है अब कॉलेज स्टार्ट होने वाला है तो उस पे भी ध्यान देना होगा"
 
मैंनेजर ने नया स्टाफ़ भरती किया था, मैंनेजर ने मुझे उनसे मिलने को बुलाया, में और रोहित उनसे मिले,मैंने उन सब को बोल दिया की वो लोग मेरे होटल में अगर ईमानदारी से काम करेंगे तो तनख्वाह तो मिलेगी ही, और जो बेस्ट काम कर के दिखायेगा उसे साल के एन्ड में एक बड़ा गिफ्ट भी मिलेगा,

में नही चाहता आप सब बस एक नोकर समझे खुद को, ये समझो की ये होटल आप का हे आप को इसे उस मुक़ाम तक पहुचाना है, जिसके आगे कोई ओर टिक ना सके,

सब को समझा कर मैंने मैंनेजर को बोल दिया

रजत:- "मैंने एक बस भी खरीद ली है, जिन लोगोके पास आने जाने के साधन नही हे या फिर दूर रहते है उन सब की सेफ्टी के लिए बस में एक गार्ड रहेगा वो उनको सही सलामत लायेगा और ले जायेगा, और नाईट शिफ्ट के वर्कर को यही रहने को रूम दिया जायेगा, ताकि जरुरत पडने पे वो डे शिफ़्ट में भी काम कर सके"

मैंनेजर:- "ये अच्छा आईडिया है"

रजत:- "टूरिस्ट के लिए मैंने एक बस ख़रीदी है, और टूरिस्टस के लिए एक सी बोट भी खरीदी हे जो लोग घुमना चाहते हे उनको हमारे होटल की तरफ से घुमाया जायेगा, हम एक गाइड भी रख लेंगे जो ईमानदार हो, जिससे हमारे होटल में ज्यादा गेस्ट आयेंगे, और में सोच रहा हु, टेक्सी वालो से भी कॉंन्टेक्ट किया जाये जो भी गेस्ट लायेगा उसे इनाम दिया जायेगा,

मैंनेजर:- "सर यु आर राइट, ये बढ़िया रहेगा,

रजत:- "ठीक हे आप होटल देखो मुझे काम है में चलता हु"

में रोहित के साथ राहुल के ऑफीस में गया,

राहुल हमे देख के बोले "रोहित क्या हुआ आज यहाँ"?

रजत:- "भाई मेरा होटल भी रेडी हो गया, हम नई सिटी में आ के बस गये, नयी स्टडी के लिए एडमिशन भी करवा लिया"

राहुल:- "हा वो तो है"

रजत:- "अब में बाप बनने वाला हु तो सोच रहा हु नए सिरे से ज़िन्दगी की शुरुआत करू"

राहुल:- "हां ये ठीक रहेगा, बीते साल में बहुत कुछ अच्छा और बहुत कुछ बुरा हुआ है, तुम को नए सिरे से ज़िंदगी बीतानी चाहिये, पहले तुम शादी शुदा नही थे अब शादी शुदा हो, तुम्हारी ज़िन्दगी में क्या घटा क्या बढा उसे भूल जाओ, और फिर से कॉलेज लाइफ से शुरू करो, जहा तक में जानता हु,तूम दोनों बहुत मेहनत से होटल चलाओगे, पर में चाहता हु एक साल के बिच में तूम ऐसे ही दो तीन होटल और खोलो, और रोहित तुम भी कोई अच्छी लड़की देख के शादी कर लो, तुम्हारा दोस्त तो बाप भी बनने वाला है"

रोहित:- "मौसा जी कोई लड़की तो मिले"

राहुल:- "इतनी लड़किया है, कोई तो पसंद करो"

रजत:- "कोई बात नही में ढूंढ दूंगा कोई अच्छी लड़की"

मैंने राहुल को अपने प्लान के बारे में बताया,

राहुल:- "ग्रेट आइडिया तुम जो करना चाहते हो करो में साथ हु"

फिर हम तीनो प्लानिंग पे बात करते रहे,

रजत:- "रोहित चलो एक काम और करना है"

मैंने कॉन्ट्रेक्टर को कॉल किया ओर उसे घर आने को बोला, हम भी घर की तरफ चल पड़े, घर पहुचे तो मामा ओर चाचा दोनों ही गाव जाने की तेयारी कर रहे थे, कॉन्ट्रेक्टर भी आ गया,

रजत:- "ऊपर की तरफ दो तीन रूम और बनवाने है"

कॉन्ट्रेक्टर ने ऊपर जा के व्यू देखा और बोला ठीक हे सर,

रजत:- "ये काम १५ दिन में होना चाहिए"

कॉन्ट्रेक्टर बोला १५ दिन तो बहुत ज्यादा हे १० दिन में बना देंगे, मैंने उसे एडवांस दे दिया, वह चला गया फिर मामा चाचा को कार में लेकर रेलवे स्टेशन आ गया, वहा मैंने मामा चाचा को कुछ रूपये दिए ताकि रस्ते में कोई दिक्कत ना हो और बोल दिया आगर कोई दिक्कत हो तो बता देना में वहा आ जाउँगा, दोनों की गाड़ी आ गई थी दोनों बैठ के चले गये, हम घर आ गए, १५ दिन मुझे भाई बाप पति जीजा की भूमिका निभानी पड़ी, पर एक दो बार ही मैंने सेक्स किया, माँ का काम भी अच्छा चल रहा था, मैंने काया से भी शादी कर ली किसी ने विरोध नही किया,चाचा और मामा को माँ ने समझा दिया पहले तो वह गुस्सा हुये पर माँ के समझाने से और हमारे प्यार की वजह से सब मान गये 1 साल बाद रूपा और माया दीदी को बच्चे हुए रूपा को लड़का और माया को लडकि हुई घर बच्चों की किलकारियों से गूंजने लगा,काया को मैंने मना किया पहले पढ़ाई पूरी होगी फिर वह माँ बनेगी,

रोहित ने मेरी चाचा की लड़की अनु से शादी की अब वह मेरा जीजा बन गया,रेणु अभी शादी नही करना चाहती उसके लिए तो मैं हु ही जब तक उसकी शादी नही होती,

मेरा होटल भी चमक गया था, हमेशा होटल फुल रहता था, गेस्ट ज्यादा तर बार बार आने लगे, इस से हमारे होटल का नाम बाहर विदेशो में भी होने लगा, मैंने अपने होटल के नाम पे एक वेबसाइट भी बनवा ली जिस में अपने होटल के बारे में सब कुछ लिख दिया था, लोग अब ऑनलाइन बुकिंग करवा लेते थे,

सभी मुझे देख बोलने लगे थे

"रजत भाई लाइफ हो तो ऐसी ...!!!!

तो दोस्तों इस स्टोरी का चेप्टर तो यहाँ खत्म हो गया, अशा करता हु आप लोगो को पसंद आई होगी.....सतीश

समाप्त
 
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