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वतन तेरे हम लाडले complete

अंजलि ने अब लोकाटी से पूछा जान तुम मुझे अपने साथ इंडिया ले जा सकते हो ??? तो लोकाटी ने कहा तुम मेरे साथ जाना चाहोगी इंडिया ?? अंजलि ने कहा, हां। मैं भी देखना चाहती हूँ कि तुम वहाँ हमारे लिए कैसे काम कर रहे हो। लोकाटी जो शराब के नशे में धुत्त था बोला तुम चिंता मत करो मेरी आंदोलन अपने चरम पर है और तुम्हे देखकर खुशी होगी। अब अंजलि ने पूछा कि तुम्हें यकीन है कि कश्मीर के लोग इस आंदोलन में तुम्हारा साथ देंगे ??? लोकाटी ने कहा मेरे प्रांत के आम लोगों को तो मैंने अनपढ़ रखा है वह डायरेक्ट मेरा साथ तो नहीं देंगे मगर वहां की प्रभावशाली हस्तियाँ मेरे कहने पर चलती हैं और विभिन्न जनजाति के प्रमुखों को मैंने बड़े सपने दिखा रखे हैं कि पाकिस्तान मे शामिल होनेके बाद उन्हे बड़े पद और डॉलर मिलेंगे।इसलिए वे मेरे साथ हैं और जैसा वो कहेंगे वैसा ही वहां की जनता भी फैसला करेगी

अंजलि अब थोड़ा नीचे होकर बैठ गई और लोकाटी के मुरझाए हुए लंड को हाथ में पकड़ कर उसको धीरे धीरे मसलने लगी और लोकाटी से पूछा मगर इतने डॉलर तुम कैसे दोगे उन लोगों को ??? लोकाटी ने एक ठहाका मारा और बोला उन पागलों को क्या मिलना है उन्होंने पाकिस्तान में विलय की घोषणा करनी है और जब पाकिस्तानी सेना मेरे प्रांत मे पहुंचकर वहां कब्जा कर लेगी तो पहले उन लोगो का ही सफाया करना है। में अपने धन और राज्य के शासन में किसी और को नहीं जोड़ सकता। यह सुनकर अंजलि के शरीर में सनसनी दौड़ गई लेकिन उसे अब अपना और काम करना था। अब वह आगे नीचे झुकी और लोकाटी के लंड को जो कुछ हद तक खड़ा हो चुका था मगर अब भी बहुत ढीला था अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। कुछ देर तक चूसने से लोकाटी का 7 इंच का लंड अब अपनी पूरी ग्लो के साथ लहरा रहा था और अंजलि उसको बहुत बेरहमी से चूस रही थी जिससे लोकाटी को बहुत मज़ा आ रहा था।

इतनी जवान और गर्म लड़की को उसने काफी समय से नहीं चोदा था आज तो लोकाटी का उत्सव था कि ऐसी जवान और गर्म हसीना उसका लंड चूस रही थी और कुछ ही देर में उसके लंड की सवारी भी करने वाली थी। जब लंड अच्छी तरह खड़ा हो गया तो अंजलि ने लंड मुंह से निकाला और अपने हाथ से उस पर मालिश करने लगी और फिर से लोकाटी से मुखातिब हुई कि तुम अपने प्रांत को इंडिया से अलग करने में कामयाब हो गए तो मैं तुमसे शादी कर लूंगी। क्या तुम मुझसे शादी करना चाहोगे ???अंजलि की बात सुनकर लोकाटी होश और जोश में भी होता तो शायद अपने होश खो बैठता बुढ्ढे आदमी के लिए 20 वर्षीय जवान गर्म हसीना से शादी की पेशकश होश उड़ाने वाली ही तो बात थी, लोकाटी ने तत्काल कहा हां मैं तुमसे शादी करूँगा और हम दोनों मिलकर अपने राज्य पर शासन करेंगे

फिर अंजलि दोबारा बोली मगर मुझे यह बताओ कि क्या पाकिस्तान सरकार तुम्हें तुम्हारे राज्य पर शासन करने देगी? अगर उन्होने तुम्हें मरवा दिया और तुम्हारी जगह किसी अपने वफादार ले आए तो ??? इस पर लोकाटी हंसा और बोला पूरे पाकिस्तान में मुझसे ज्यादा पाकिस्तान सरकार का वफादार और कोई नहीं। और अगर उन्होंने ऐसा किया तो वहां के लोग पाकिस्तान के खिलाफ भी बगावत कर देंगे और फिर इंडियन सेना भी फिर से अपने प्रांत को वापस लेने के लिए स्थिति का लाभ उठाते हुए हमला कर देंगी जिसको पाकिस्तान सहन नहीं कर सकता। इसलिए मेरा भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल है।

अंजलि ने लोकाटी के चमकते हुए लंड पर एक प्यार भरी किसकी और बोली मगर सरकार तो तुम अब भी चला रहे हैं पाकिस्तान में विलय के बाद सरकार से तुम्हें क्या लाभ होगा? लोकाटी बोला बहुत सारे डॉलर मिलेंगे जो अभी मेरे पास नहीं हैं, मेरे प्रांत के पहाड़ों में छिपा सोना पाकिस्तान सरकार को मिल जाएगा और उसमे 25 फीसदी मेरा हिस्सा होगा इसके अलावा पाकिस्तान की सुंदर हसीनाएँ दिन रात मेरे लंड की सेवा करेंगी। दिन रात कोई ना कोई गर्म और जवान लड़की मेरी गोद में हुआ करेगी। अंजलि बुरा सा मुंह बनाते हुए बोली मगर फिर तो तुम मुझे भूल जाओगे ??? लोकाटी अंजलि को प्यार से देखते हुए बोला अरे नहीं, तुम जैसी गर्मी किसी और लड़की में नहीं है, वह तो पैसे के लिए चुदवाती हैं तुम अपनी खुशी से चुदवा रही हो और मेरा लोड़ा मुँह में लेकर चूस रही हो। किराए की रंडियां यह सब नहीं करतीं न ही इतना मज़ा दे सकती हैं जो तुम कर रही हो। तुमसे शादी करके तुम्हें रानी बनाकर रखूंगा। मगर मेरा लंड भी सप्ताह में एक बार नई चूत का तलबगार होता है जो मुझे पाकिस्तान की हसीनाएँ दिया करेंगी

लोकाटी का लंड अब अपने फुल जोबन पर था और उसके साथ ज्यादा देर तक खेलना भी उचित नहीं था क्योंकि वह किसी भी समय अपना लावा निकाल सकता था, और अंजलि भी लोकाटी से काफी अंदर की बातें उगलवाने में लीन थीं। अंजलि अब अपनी एक टांग उठाकर लोकाटी के दूसरी साइड पर रख चुकी थी और उसकी चूत का मुंह लोकाटी के लंड की टोपी के बिल्कुल ऊपर था। और उसके हाथ में कैमरा कभी लोकाटी के चेहरे को फोकस कर रहा था तो कभी लोकाटी के लोड़े और अपनी चूत के होने वाले मैच के दृश्य को अपने अंदर क़ैद कर रहा था। फिर अंजलि ने दूसरे हाथ से लोकाटी के लंड को पकड़ कर अपनी चूत के साथ लगाया और एक ही झटके में उसे अपनी चिकनी चूत की गहराई में उतार लिया और उस पर उछलने लगी। लोकाटी के लंड पर उछलते हुए अंजलि के मम्मे ऊपर नीचे उछल रहे थे जिन्हें लोकाटी बड़ी उत्सुकता से देख रहा था। कक्ष अब अंजलि की आवाजों से गूंज रहा था और वह लगातार लोकाटी के लंड पर उछल उछल कर अपनी चूत को आराम पहुंचा रही थी

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राफिया से बात करने के बाद कैप्टन फ़ैयाज़ काफी देर तक गुस्से से कांपता रहा, राफिया की बर्बर सिसकियाँ और उसमें लगने वाला जोश कैप्टन फ़ैयाज़ को पागल किए दे रहा था। वह समझ गया था कि राफिया ने जानबूझ कर उसे जलाने के लिए इमरान से चुदवाते हुए उसका फोन अटेंड किया और फिर इमरान ने भी बिना रुके उसकी चुदाई जारी रखी जिससे राफिया की सिसकियाँ और कामुकता से भरी आवाज फ़ैयाज़ के कानों में लावा बन कर छेद करती रहीं। कुछ देर के बाद जब फ़ैयाज़ सामान्य हुआ तो अब उसे समीरा का विचार आया। फ़ैयाज़ को पूरा विश्वास था कि रास्ते में खराब कार में से रफिया की कार में लिफ्ट लेने वाली समीरा ही हो सकती है। मगर उसको यह बात परेशान किए दे रही थी कि राफिया उसको अपनी दोस्त क्यों कह रही है ???

कहीं ऐसा तो नहीं कि मेजर राज ने राफिया की ही एक दोस्त को अपने साथ मिला लिया हो और फिर यह सारा नाटक रचाया हो। मगर फिर उसने इस विचार को मन से निकाल दिया कि अगर राफिया को गुंडों से बचाने वाला मेजर राज होता तो वह उसे कर्नल इरफ़ान के घर ही क्यों लेकर जाता वह उसे अगवा करके अपनी बात मनवा सकता था मगर उसने ऐसा नहीं किया इसका मतलब वह कोई साधारण व्यक्ति ही है जिसने मेजर राज जैसे अनुभवी और प्रतिभाशाली रॉ एजेंट की कोशिस नाकाम कर दी थी। मगर समीरा से वो अभी तक संतुष्ट नहीं था। उसका विचार था कि मेजर राज ने अपनी पहली असफलता के बाद समीरा को मैदान में उतारा है और उसने इमरान और राफिया की कार में लिफ्ट लेकर उनका विश्वास जीत लिया है और अब वह जल्द ही मेजर राज को कॉल करके मुर्री बुलाएगी ताकि वह फिर से राफिया का अपहरण कर सकें। अब कैप्टन फ़ैयाज़ ने राफिया की हरकत को नजरअंदाज करते हुए समीरा को ठिकाने लगाने का इरादा बना लिया था। वह पहले भी एक बार फ़ैयाज़ के हाथों से बाल-बाल बची थी जब फ़ैयाज़ ने लाहोर में जिन्ना नगर में मौजूद टैक्सी चालक की मुखबिरी पर एक घर पर छापा मारा था। मगर अब फ़ैयाज़ को विश्वास था कि रात के इस पहर में समीरा सो रही होगी और वो बा आसानी उसको धर सकता है

उसने अपनी जेब की एक साइड पर एक छोटे पिस्टल को रखा और अपनी कार को राफिया के बताए हुए पांच सितारा होटल के सामने जाकर रोक दिया और सीधा रिसेप्शन पर पहुंच गया। रेशीपशन पर मौजूद एक खूबसूरत जवान हसीना ने केप्टन का स्वागत किया तो कैप्टन ने उससे पूछा कि उसके होटल में कुछ देर पहले किसी समीरा नाम की नामक लड़की ने बुकिंग कराई है? तो उस हसीना ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया सॉरी सर हम ऐसी जानकारी किसी को बताने की पर्मीशन नहीं है आप उन्हें जानते हैं तो उन्हें फोन कर के कमरा नंबर पता कर लीजिए हम आपको उस कमरे में पहुंचा देंगे।अब कैप्टन ने अपनी जेब से अपना कार्ड निकाला और अपना नाम बताया तो उस हसीना के सुंदर लबों पर मौजूद मुस्कान एकदम गायब हो गई और वह इंतिहाई नर्म लहजे मे बोली जी सर मैं अभी चेक करती हूँ। उसने अपने सामने मौजूद कंप्यूटर पर चेक किया और फ़ैयाज़ को बताया कि समीरा नामक किसी भी लड़की ने चेक इन नहीं किया आज रात में। अब फ़ैयाज़ ने पूछा अच्छा यह बताओ किसी राफिया मेडम के नाम पर कोई कमरा बुक हुआ है? उस हसीना ने एक बार फिर अपने कंप्यूटर पर चेक किया और उसे बताया कि नहीं राफिया मेडम के नाम पर भी कोई कमरा बुक नहीं हुआ।

 
अब कैप्टन ने कुछ देर सोचा और फिर उससे पूछा अच्छा मुझे यह बताओ पिछले 4 से 5 घंटे के बीच कौन कौन से कमरे की बुकिंग हुई है। उस हसीना ने अब फिर से जाँच की और केप्टन को रूम नंबर 35, रूम नबर 315 और रूम नंबर 507 के बारे में बताया कि ये तीन कमरे हैं जिनकी बुकिंग हुई है और इनमें से एक कमरे के अलावा बाकी 2 कमरे में परिवार हैं जबकि रूम नंबर 507 में मिस अंजली हैं। कैप्टन यह सुनते ही मुस्कुराया और एक लंबी सी साँस छोड़ी वह समझ गया था कि समीरा अपना नाम बदल कर यहाँ आई है। और अंजलि समीरा ही है। राफिया ने भी फोन पर अंजलि नाम ही बताया था।अब कैप्टन फ़ैयाज़ ने उस हसीना को धन्यवाद दिया और बोला वह एक गैंगस्टर है उसे पकड़ने आया हूँ मुझे उसके रूम की डुप्लीकेट चाबी चाहिए और खबरदार जो उस कमरे में कोई वेटर गया। वहाँ हर किसी के आने जाने पर प्रतिबंध लगा दो। यह आदेश देकर फ़ैयाज़ ने अपनी जींस की एक साइड से छोटी पिस्टल निकाली और लिफ्ट के माध्यम से ऊपर जाने लगा जबकि उस हसीना ने सभी वेटर्स को निर्देशित दे दिया कि उस कक्ष से दूर रहें और वहां न जाएं।

कैप्टन फ़ैयाज़ कुछ ही देर में पांचवीं मंजिल पर पहुंच चुका था और वहां से वह दूसरे गलियारे में गया जहां 506 से लेकर 510 नंबर रूम मौजूद थे। रूम नंबर 507 के दरवाजे के बाहर 2 हटे कटे गनमैन मौजूद थे जो वास्तव में लोकाटी के बॉडीगार्ड थे, यहां पहुंचकर फ़ैयाज़ अपनी पिस्टल छुपा चुका था। कमरे के सामने पहुंचकर वह रुका तो गनमैन को देखकर उसने सोचा कि हो न हो यह कोई बहुत बड़ा गैंगस्टर है जिसने अपने साथ गनमैन भी रखे हुए हैं। वह कमरे के सामने जाकर रुका और और बाहर खड़े गनमैन को देखकर मुस्कुरा कर बोला वह मुझे मेडम अंजलि ने बुलाया था उनसे मिलने आया हूँ। उनमें से एक गनमैन ने कर्कश स्वर में कहा इस समय कोई भी अंदर नहीं जा सकता मगर फ़ैयाज़ वहीं खड़ा मुस्कराता रहा और गनमैन को आँख मारते हुए बोला मेडम के साथ कोई और भी है क्या अंदर ??? गनमैन ने फ़ैयाज़ को दहकती हुई आँखों से घूर कर देखा और बोला इधर से दफ़ा होते हो या तुम्हें यहीं भून के रख दूँ?

फ़ैयाज़ बोला भैया तुम मुझे भून कर रख दो मैं तो यहां से जाने वाला नहीं मेडम अंजलि से मिल कर ही जाऊंगा।इस पर गनमैन ने अपने हाथ अपनी गन की ओर बढ़ाए जो उसके कंधे पर लटक रही थी मगर इससे पहले कि वह अपनी बंदूक पकड़ कर फ़ैयाज़ को डराता फ़ैयाज़ की शक्तिशाली लात गनमैन की दोनों टांगों के बीच जोर से जाकर सीधे उसके आंडो पर लगी जिससे उस गनमैन की एक चीख निकली और वह नीचे झुकता चला गया नीचे झुकते ही अब की बार फ़ैयाज़ का पैर उसके मुंह पर पड़ा और वह औंधे मुंह ज़मीन पर आ गिरा , इसी दौरान दूसरा गनमैन भी आगे बढ़कर फ़ैयाज़ पर हमला करना चाहता था मगर फ़ैयाज़ ने नीचे गिरते हुए गनमैन की कमर पर पांव रखकर एक जंप लगाया और बिजली की सी तेजी के साथ दूसरे गनमैन के सिर पर अपनी दोनों कोहनियो को पूरी ताकत से मारा जिससे वह किसी कटे हुए सिर की तरह जमीन पर आ रहा। अब दोनों गन मेंन समीरा के रूम के सामने बेहोश पड़े थे।

कैप्टन फ़ैयाज़ ने अपनी जेब से उसके कमरे की दूसरी चाबी निकाली और दरवाजे के लॉक में चाबी डाल के चाबी घुमाई तो लॉक खुल गया। फ़ैयाज़ ने दरवाजे का हैडल घुमाया और हल्का सा दबाव डाला तो दरवाजा बिना कोई आवाज पैदा किए खुलता चला गया। कैप्टन ने अब अपनी पिस्टल हाथ में पकड़ ली थी और अत्यंत सावधानी से धीरे धीरे अंदर घुस गया, सामने एक बड़ा सा कमरा था जिसमें कुछ सोफे पड़े थे और एक साइड पर फ्रिज था, सोफे पर एक नाइट पड़ी दिख रही थी, जबकि दूर एक साइड पर एक ब्रा पड़ा हुआ था। कैप्टन और चौकन्ना हो गया था क्योंकि उसके विचार में मेजर राज और समीरा दोनों इस वक्त कमरे में रंगरलियाँ मनाने के बाद अब सो रहे होंगे, केप्टन अब कुछ खुशी मगर सावधानी के साथ आगे बढ़ रहा था। उसके दिल में कहीं डर भी था कि नाजाने वह मेजर राज पर नियन्त्रण पा पाएगा या नहीं ??? और खुशी भी थी कि आज मेजर राज और समीरा दोनों ही उसकी गिरफ्त में होंगे और कर्नल इरफ़ान को यह सुसमाचार सुना कर वह पदोन्नति की फरमाइश भी करेगा .

कैप्टन इन्हीं सोचों के साथ बहुत सावधानी के साथ आगे बढ़ रहा था कि अचानक उसके कानों में फिर वही आवाजें आने लगीं जो कुछ देर पहले वह फोन पर सुनकर आया था जिन आवाजों ने उसके तन बदन में आग लगा दी थी। आह आह .... ओह्ह्ह्ह ओह और जोर से जानू, और तेज चोदो .... आह आह .... उह आह आह आह ...... फाड़ दो मेरी चूत जानू, तेज तेज करो, और तेज, और तेज ... आह आह आह ..... मगर इस बार यह आवाज राफिया की बजाय समीरा की थी जो इस समय लोकाटी के लंड पर सवार थी और लोकाटी उसको अपनी पूरी ताकत के साथ चोद रहा था

अंजलि ने अपनी पूरी ताकत के साथ लोकाटी के लंड पर छलाँगें लगाई थी इससे अंजलि को मज़ा तो बहुत मिला मगर कुछ ही देर में वह थक गई थी, अब वह अपने घुटने बेड के साथ लगाए अपनी गांड हवा में उठा कर बैठी थी और नीचे से लोकाटी अपना लंड अंजलि की टाइट मगर चिकनी चूत में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था और अंजलि की मजे के मारे सिसकियाँ निकल रही थीं। कुछ देर के बाद लोकाटी नेझटके लगाने बंद किए तो अंजलि ने अपनी गाण्ड को लोकाटी के लंड पर घुमाना शुरू कर दिया। अंजलि अपने चूतड़ों को गोल गोल घुमा रही थी जिससे लोकाटी का लंड अंजलि की चूत में चारों साईड पर गोल गोल घूम रहा था और अंजलि की चूत में रगड़ दे रहा था जिससे अंजलि की चूत में आग पहले से ज्यादा तेज हो गई थी और उसका जी स्पॉट लोकाटी के लंड की टोपी से टकरा रहा था। फिर एकदम से लोकाटी ने फिर से अंजलि की चूत में झटके लगाने शुरू किये ...

अब की बार अंजलि वीडियो बनाने के साथ साथ लोकाटी को कह रही थी, जानू मुझे जोर से चोदो, ऐसे चोदो जैसे आप ने अपने देश की जनता को चोदा ... आह आह .... और जोर से चोदो जानू .....कश्मीर को पाकिस्तान का राज्य बनवा दो फिर मैं तुम्हें अपनी चूत इसी तरह दिया करूंगी, आपको और अपनी गाण्ड भी .... आह आह ..... ओस्स्सस्स उफ़ उफ़ .... तुम्हारा लंड .... उफ़ उफ़ उफ़ .... आह आह आह .... मेरी चूत .... आह आह आह ....... और जोर से धक्के मारो जानू .... आह आह ..... फिर अंजलि ने एक लंबी आह आह कर सिसकी ली और उसकी चूत ने लोकाटी के लंड को अपने पानी से नहलाने दिया।

जब अंजलि की चूत ने सारा पानी छोड़ दिया तो वह लोकाटी के लंड से उतर गई और बेड पर लेट कर लोकाटी को अपने ऊपर आकर चोदने को आमंत्रित किया। मगर लोकाटी ने कहा ऐसे नहीं डार्लिंग। कुतिया बन जाओ, तुम्हें अब मैं डागी स्टाइल में चोदुन्गा अंजलि को भी डागी स्टाइल पसंद था वह भी जल्दी उठ गई और लोकाटी की ओर अपनी गाण्ड करके दूसरी ओर झुकी और बेड के साथ हाथों के सहारे डागी स्टाइल बनाकर मुंह पीछे करके बोली आ जाओ जानू, डाल दो अपना लंड मेरी चूत में । चोद दो मुझे ....

लोकाटी भी जल्दी से अंजलि के पीछे आया और पहले उसके चूतड़ों पर 2, 3 जोरदार चमाट मारें और उसके बाद उसके चूतड़ों को खोल कर उसकी गाण्ड पर अपनी जीभ फेरने लगा। गाण्ड में ज़ुबान का स्पर्श महसूस कर राफिया को बहुत मज़ा मिला था। उसके मुंह से अब सिसकारियाँ निकल रही थीं और वो अपनी गाण्ड को पीछे की ओर धकेल कोशिश कर रही थी कि लोकाटी की ज़ुबान के साथ साथ उसका पूरा मुंह उसके चूतड़ों की लाइन में गायब हो जाए। लोकाटी ने भी कुछ देर अंजलि की गांड चाटी और फिर घुटनों के बल बेड पर बैठ कर अपना लंड अंजलि की चूत पर रख दिया

जैसे ही अंजलि को लंड की टोपी अपनी चूत के छेद पर महसूस हुई वो खुद ही पीछे की ओर गाण्ड करने लगी, जैसे ही अंजलि ने अपनी गाण्ड पीछे की ओर धकेली तो चूत की चिकनाहट के कारण अंजलि की चूत ने लोकाटी के लंड को अपने अंदर प्रवेश करने की अनुमति दी और लोकाटी का आधा लंड अंजलि की चूत में चला गया। एक बार अंजलि अब वापस आगे की ओर गई और जब उसे लगा कि अब मात्र लोकाटी के लंड की टोपी ही उसकी चूत में रह गई है वह फिर से पीछे की ओर अपनी गाण्ड को धकेला जिससे लोकाटी का आधा लंड फिर से अंजलि की चूत में फिसलता चला गया। अब अंजलि ने लगातार अपनी गाण्ड को आगे पीछे गति देना शुरू कर दिया था जबकि लोकाटी बिना हरकत किए अंजलि की हरकतों को एंजाय कर रहा था। ऐसी चुदाई में अधिक गति पकड़ना संभव नहीं था क्योंकि लड़की उस गति के साथ अपनी गाण्ड नहीं हिला सकती जिस गति से कोई भी पुरुष अपना लंड लड़की की चूत में आगे पीछे कर सकता है। मगर फिर भी लोकाटी अंजलि को पूरा मौका दे रहा था कि वह खुद से अपनी गाण्ड हिला हिला कर अपनी चुदाई करवाए। अविराम अंजलि के चूतड़ों पर लोकाटी के थप्पड़ पड़ रहे थे जिससे अंजलि के चूतड़ जेली की तरह हिलते, और उन पर अब लोकाटी की उंगलियों के लाल निशान पड़ चुके थे इस दौरान जब अंजलि अपनी गाण्ड पीछे की ओर धकेलटी तो वह अपने मुंह से एक लंबी आह ह ह ह ह ....... आवाज निकालती और इस दौरान अपनी चूत को भी टाइट कर लेती, और जब वापस आगे की ओर जाने लगती तो अपनी चूत को ढीला छोड़ देती और एक लंबी उफ़ एफ एफ एफ एफ एफ एफ एफ आवाज निकालती .

कुछ देर अंजलि की इसी तरह चुदाई करवाने के बाद लोकाटी ने अब अंजलि की चूत में अपने लंड से धक्के लगाने शुरू कर दिए थे। लोकाटी के धक्के शुरू हुए तो अब अंजलि के लिए संभव नहीं था कि अपनी गाण्ड को आगे पीछे हिला सके इसलिए अब वह बिना हरकत किए लोकाटी के धक्के सहन कर रही थी, लोकाटी का हर धक्का अंजलि को आगे की ओर धकेल देता था और वह पूरी कोशिश करती अपने शरीर को रोकने की क्योंकि अगर उसका शरीर ज़्यादा आगे जाता तो लोकाटी का लंड अंजलि की चूत की गहराई तक जाकर चुदाई नहीं कर सकता था, इसलिए अंजलि की हर धक्के पर कोशिश होती कि अपनी पूरी ताकत के साथ अपने शरीर को वहीं रोके रखे ताकि लोकाटी का लंड उसकी चूत की गहराई तक जा सके और अपने अंदर आने का एहसास दिलाए मगर फिर भी जब लोकाटी का शरीर अंजलि के चूतड़ों से टकराता तो वह अंजलि को आगे की ओर धकेल देता और साथ में धुप्प धुप्प की आवाज भी निकलती .

लोकाटी ने अब थोड़ा आगे की ओर झुक कर अंजलि के मम्मों को अपने हाथों से पकड़ लिया था और उन्हें हर धक्के के साथ एक बार जोर से दबाता और लंड बाहर निकालते हुए मम्मों पर हाथों का दबाव हल्का कर देता अगले धक्के में एक बार फिर वह अंजलि के बूब्स को जोर से दबाता इस तरह लोकाटी के चोदने की गति भी बढ़ गई और उसके आँड जब नीचे से अंजलि की चूत पर टकराते तो अंजलि को उसका भी मज़ा मिलता।अंजलि फुल मजे में थी और अपनी चुदाई को एंजाय कर रही थी। थोड़ी थोड़ी देर बाद अंजलि लोकाटी को पीछे मुड़कर एक हवाई चुम्बन देती और उसको तेज गति के साथ चोदने का कहती . साथ ही साथ अंजलि की सिसकियों में वृद्धि होती जा रही थी ... आह ह ह ... आह ह ह ह ... उम म म म .... उफ़ एफ एफ एफ एफ ... आह ह ह ह ह, आह ह ह ह, आह आह आह .... जोर से चोदो ना जानू आह आह .... और लोकाटी भी अंजलि के उकसाने पर अपनी गति को बढ़ा देता था। कुछ देर और डागी स्टाइल में चुदाई करवाने के बाद अब अंजलि ने लोकाटी से फरमाइश की कि वो एक बार फिर से उसके लंड की सवारी करना चाहती है तो लोकाटी ने न चाहते हुए भी अंजली की चिकनी चूत से अपना लंड निकाल दिया और खुद फिर से बेड पर लेट गया। वह इतनी सुंदर और गर्म लड़की को नाराज नहीं करना चाहता इसलिए वह उसे उसकी इच्छा के अनुसार चोद रहा था वैसे भी डागी स्टाइल में चोदने का मज़ा तो लोकाटी ले ही चुका था

 
दोस्तो अपडेट दे दिया है आपको कैसा लगा ज़रूर बताएँ
 
Rohit Kapoor wrote: ↑ 11 Jul 2017 09:47
अगले अपडेट का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा |
 
लोकाटी अब नीचे लेटा था और अंजलि अपने पांवों के बल लोकाटी के ऊपर आ गई थी और लोकाटी के लंड को अपनी चूत के छेद पर रख कर उसने एक जोरदार झटका नीचे मारा लोकाटी का पूरा लंड अंजलि की चूत में गायब हो गया। अंजलि ने अब लोकाटी के सीने पर हाथ रखकर सहारा लिया और अपनी गाण्ड ऊपर उछाल उछाल कर लोकाटी के लंड पर गिराने लगी। किसी भी लड़की के लिए इस तरह चुदाई करवाना बहुत मुश्किल होता है लेकिन अंजलि की चूत इस समय बहुत गर्म हो रही थी और वह पूरी तरह से अपनी चूत को आराम पहुंचाना चाहती थी इसलिए वह उसी स्थिति में अपनी चुदाई जारी किए हुए थी, अंजलि जब अपने पूरे वजन के साथ अपनी गाण्ड को लोकाटी के ऊपर गिराती तो लोकाटी का लंड पूरी तरह से अंजलि की चूत में गुम हो जाता मात्र उसके आँड ही चूत से बाहर रहते। 2, 3 मिनट इसी तरह चुदाई करवाने के बाद अब अंजलि थक चुकी थी अब उसने अपने घुटने भी बेड के साथ लगा लिए थे और अपने हाथ बदस्तूर लोकाटी के सीने पर रख कर अपनी गाण्ड को हवा में उठा लिया था और लोकाटी ने नीचे से अब धक्के मारने शुरू कर दिए थे

अंजलि की चूत की गर्मी काफ़ी हद तक बढ़ चुकी थी और किसी भी समय उसकी चूत पानी छोड़ सकती थी।लोकाटी अपनी फुल स्पीड के साथ अपने लंड के अंजलि की चिकनी मगर टाइट चूत में धक्के मार रहा था, अंजलि लोकाटी को और तेज चोदने का कह रही थी उसके साथ ... आह आआह आह आह उफ़ उफ़ .... आह आह आह और तेज जानू, और तेज चोदो अपनी जान को .... आह आह आह .... की आवाज लगातार अंजलि के मुँह से निकल रही थी

लोकाटी के लंड पर सवारी करते करते अंजलि को अचानक लगा कि जैसे उसके दरवाजे के बाहर कोई है।अंजलि ने दरवाज़े की ओर देखा, लेकिन वहां कोई नहीं था, वह लगातार चुदाई जारी रखती हुई और लोकाटी को और तेज चोदने उकसाने लगी मगर उसके बाद फिर से अंजलि को लगा कि दरवाजे पर कोई है, अब की बार अंजलि ने दरवाज़े की ओर देखा तो उसकी चिकनी और गीली चूत पूरी सूख गई, दरवाजे केप्टन फ़ैयाज़ खड़ा था और उसकी पिस्तौल का रुख अंजलि की ओर था। अंजलि एकदम से अपनी सिसकियाँ भूल गई और उसके मन में विस्फोट होने लगे कि यह कमीना कहाँ से आ गया ??? अंजलि अब कोई फैसला नहीं कर पा रही थी कि वह क्या करे क्योंकि वह जानती थी कि उसके पास भागने का कोई रास्ता नहीं है एक यही दरवाजा है जो केप्टन फ़ैयाज़ गन थामे खड़ा है। जबकि लोकाटी इस बात से बेखबर अंजलि की चूत में धक्के लगाए जा रहा था

कैप्टन फ़ैयाज़ जो अब अंजलि के दरवाजे पर था वह एक पल के लिए तो अंजलि को लंड की सवारी करते देख कर स्तब्ध हो गया। अंजलि के गोरे गोरे बड़े आकार के मम्मे जो लोकाटी के हर धक्के के साथ हवा में हिलते देखकर फ़ैयाज़ होश खो बैठा था। इससे पहले उसने इस हसीना मम्मे जामनगर के डांस क्लब में नशे की हालत में देखे थे और उसके मन में इन सुंदर कसे हुए मम्मों की धुंधली सी तस्वीर थी, लेकिन इस समय वह अपने पूरे होश में अंजलि के खूबसूरत मम्मे देख कर मदहोश हो गया था

अब कैप्टन फ़ैयाज़ अंजलि के मम्मों के जादू में ही गिरफ्तार था कि उसने देखा अंजलि की नजरें केप्टन फ़ैयाज़ पर नहीं बल्कि अंजलि कैप्टन फ़ैयाज़ के पीछे देख रही थी .... जैसे ही कैप्टन फ़ैयाज़ ने यह महसूस किया कि अंजलि केप्टन फ़ैयाज़ के पीछे किसी और चीज़ को देख रही है तो कैप्टन को जल्दी ही खतरे का एहसास हुआ और उसने बिजली की सी तेजी के साथ पीछे घूम कर देखना चाहा कि वहाँ कौन है, मगर उसे देर हो चुकी थी। जितनी देर में केप्टन फ़ैयाज़ पीछे घूमा इतनी देर में मेजर राज का जोरदार घूंसा कैप्टन फ़ैयाज़ की कनपटी पर लग गया था जिसने फ़ैयाज़ को दिन में ही कमरे के अंदर ही तारे दिखा दिए थे। इससे पहले केप्टन फ़ैयाज़ और कोई वार करता मेजर राज का दूसरा वार कैप्टन फ़ैयाज़ की गर्दन पर हुआ और केप्टन फ़ैयाज़ कटे हुए पेड़ की तरह लहराता हुआ जमीन पर आ रहा। मेजर राज ने उसे नीचे नहीं गिरने दिया बल्कि गिरने से पहले ही उसे सहारा देकर एक साइड पर लिटा दिया। फिर उसने एक नज़र फिर से कमरे के अंदर डाली जहां अंजलि अब तक हैरान परेशान कमरे से बाहर देख रही थी और लोकाटी इस पूरी प्रक्रिया से अनजान अंजलि की चूत में धक्के पे धक्का मार रहा था। मेजर राज ने अब अंजलि को मुस्कुराते हुए देखा और उसके मम्मों की ओर इशारा करते हुए उसकी तारीफ करने लगा साथ ही उसकी चुदाई पर हंसने भी लगा

इतने में अंजलि को भी होश आया जब उसे लोकाटी की आवाज आई डार्लिंग में फारिग होने वाला हूँ, तभी अंजलि को भी अपनी चूत में सुई चुभती हुई महसूस होने लगी, उसकी चूत भी पानी छोड़ने वाली थी जबकि सामने कमरे के दरवाजे पर मेजर राज ये सारा दृश्य देखकर आनन्दित हो रहा था। लोकाटी की आवाज सुनकर अंजलि ने फिर से अपना ध्यान अपनी चुदाई की ओर लगाया और लोकाटी के धक्कों साथ रधम बनाते हुए अपनी गाण्ड को उछालने लगी और बोली निकाल दो जान अपना वीर्य मेरी चूत में, मेरे अंदर ही फारिग हो जाओ, मेरी चूत भी पानी छोड़ रही है ... ये शब्द कहते हुए अंजलि के चेहरे पर भी मुस्कान थी और वह मेजर राज की ओर देख रही थी जबकि लोकाटी आंखें बंद किए अंजलि की चूत में धक्के मार रहा था और इंतजार कर रहा था कि कब उसके लंड में एक मजे की लहर उठकर उसकी सारा वीर्य अंजलि की चूत में निकल जाए।

फिर अचानक लोकाटी ने 2, 3 जोरदार धक्के मारे और अपनी सारी वीर्य अंजलि की चूत में निकाल दिया, जबकि अंजलि ने भी अपनी गाण्ड को झटके दिए और उसने भी लोकाटी के गर्म गर्म पानी के साथ अपनी चूत का गर्म पानी मिला दिया । जब अंजलि अपना सारा पानी निकाल चुकी तो वह लोकाटी के सीने के ऊपर लेट गई और मेजर राज को आँखों से इशारा किया कि वह अब जाए यहाँ से। मेजर राज जो अंजलि की चुदाई से आनन्दित हो रहा था वह भी अपने होश में वापस आया और अपने साथ बेहोश पड़े कैप्टन फ़ैयाज़ को उठाकर बाहर वाले कमरे की ओर ले गया, वहां मौजूद अंजलि की नाइटी उठाकर मेजर राज ने कैप्टन फ़ैयाज़ के मुंह में ठूंस दी, उसके बाद अंजलि का ब्रा उठाकर केप्टन के हाथ पीठ पर ले जा कर उनको भी बांध दिया। मगर फिर मेजर ने महसूस किया कि यह ब्रा बहुत कमजोर है तो उसने इधर उधर नज़रें दौड़ाई तो उसे एक कोठरी दिखी। मेजर ने अलमारी खोली तो उसमें उसे अंजलि का एक और सूट मिल गया, यह भी नाइट ड्रेस था मगर वायर्ड कपड़े का था जो थोड़ा मज़बूत था। अब की बार मेजर राज ने कैप्टन बंधे हाथों को फिर अंजलि की नाइट ड्रेस से और मज़बूती के साथ बांध दिया। फिर उसने केप्टन फ़ैयाज़ की पेंट की बेल्ट खोल ली और केप्टन के पांव पीछे की ओर मोड़ कर बांध दिए और इसी बेल्ट को आगे पीछे खींचकर कैप्टन के बंधे हाथों से बांध दिया। अब कैप्टन फ़ैयाज़ का शरीर दोहरा हो गया था पीछे की ओर, होश में आने के बाद भी उसके लिए हरकत करना संभव नहीं था, अब मेजर राज ने कैप्टन को उठाकर उसी कोठरी में बंद कर दिया जिसमें अंजलि के कपड़े थे।

 
दोस्तो अपडेट दे दिया है कैसा लगा ज़रूर बताना
 
अब मेजर राज वापस जाने की तैयारी करने लगा तो उसे लगा जैसे कमरे में कुछ हलचल हो रही है, वह देखने के लिए हौले से आगे हुआ तो लोकाटी अब भी आंखें बंद किए बेड पर लेटा था, बूढ़े होने के कारण वह आज की चुदाई से काफी थक गया था, जबकि समीरा ने अब कमरे में पड़ा एक टावल अपने शरीर पर लपेट लिया था और वह कमरे से बाहर आ रही थी, कमरे से बाहर आते ही उसने मेजर राज से पूछा कि वो यहाँ तक कैसे पहुंच गया ??? और उसे कैसे पता लगा उसके बारे में ?? तो मेजर राज ने उसे हल्की आवाज में बताया कि लाहोर से ही वो हमारे पीछे था और उसे रास्ते में तुम्हारी कार भी मिली थी, और उसका मानना है कि राफिया का अपहरण करने में उसी कार का उपयोग हुआ है जो उसे रास्ते से तुम्हारी छोड़ी हुई गाड़ी मिली है। उसने राफिया को फोन करके तुम्हारे बारे में पूछा था तो राफिया ने बता दिया कि तुम्हें इस होटल में छोड़ा है तभी मैंने सोचा कि हो न हो ये तुम्हारा पीछा करते हुए तुम्हारे कमरे तक जरूर पहुंचेगा, तभी राफिया को सोता छोड़कर तुरंत उसकी कार लेकर में यहाँ आ गया, कमरे से बाहर आया तो देखा कि 2 गन मॅन बेहोश पड़े हैं और अंदर दाखिल हुआ तो कैप्टन फ़ैयाज़ तुम्हारा और इस लोकाटी का सेक्स एंजाय कर रहा था। यह कहते हुए मेजर की आँखों में शरारत भरी चमक थी, अंजलि ने कहा, ये सब छोड़ो और अब आगे बताओ? मेजर राज ने कहा वो कैप्टन साहब तुम्हारे कपड़ों वाली कोठरी में कैद हैं उम्मीद है अब वह कल शाम को ही होश में आएंगे। तुम सुबह होते ही कोशिश करना कि लोकाटी को समुद्र में ले आना और अधिक से अधिक रहस्य उगलवाने की कोशिश करना ... मैं तुम्हें वहीं मिलूंगा राफिया के साथ। यह कह कर मेजर राज वापस जाने लगा, मगर फिर मुड़ा और समीरा से पूछा अभी मजे ही किए हैं या कोई काम की बात भी मिली है ???

अब की बार समीरा इतराते हुई बोली तुम्हें इससे क्या जितने मर्जी मजे ., तुम क्यों जल रहे हो ?? समीरा की बात पर मेजर राज धीरे हंसा और बोला मैं तुम से क्यों जलुन्गा तुम बुढ्ढे के साथ मजे कर रही हो, मेरे साथ तो तुम जैसी जवान हसीना मौजूद है मैं तुम से ज्यादा मजे कर रहा हूँ ... यह कह कर मेजर राज कमरे से निकल गया, वह समझ गया था कि समीरा ने कोई ना कोई काम की बात उगल. ली है लोकाटी से। दोनों ने ये बातें बहुत धीरे आवाज में की थीं। अब मेजर राज बाहर जाने लगा तो उसे पीछे से लोकाटी की आवाज आई कहां रह गई हो जानेमन ??? साथ ही समीरा की आवाज़ आई, प्यास लग रही थी जान, पानी पी रही हूँ, और तुरंत फ्रिज की ओर भागी जबकि मेजर राज समीरा के कमरे के बाहर पड़े गनमैन को वहीं छोड़ कर नीचे की ओर भागा और होटल से निकलकर सीधा राफिया के पास पहुंच गया जहां राफिया अपने नए प्रेमी इमरान से एक विनाशकारी चुदाई करवाने के बाद आराम से सो रही थी.

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समीरा अमजद को अपनी जान से ज्यादा प्यारी थी, उसने समीरा को अपनी छोटी बहन की तरह पाला था, और ऐसे किसी भी मिशन में समीरा को जोड़ते हुए घबराता था, मगर समीरा के अलावा वह किसी और पर भरोसा नहीं कर सकता था इसलिए मजबूरन वह समीरा को अपने साथ रखता। लेकिन इस समय वह समीरा से बेफिक्र था क्योंकि वह जानता था कि मेजर राज के साथ समीरा को कोई खतरा नहीं, मेजर राज समीरा की रक्षा कर सकता था, लेकिन सरमद से वह खासा चिंतित था। कर्नल इरफ़ान कमरे से गए खासी देर हो चुकी थी, शायद पूरा दिन बीत चुका था मगर अमजद को इस बात का इल्म नहीं था, वह तो बस एक अंधेरे कमरे में कैद था जहां बाहर होने वाले मामलों का उसको पता नहीं था।कुर्सी पर बैठे बैठे अमजद को अब तकलीफ होने लगी थी, ना जाने कब से वह इसी कुर्सी पर बंधा हुआ था और तो और पिछले काफी घंटों से न तो अमजद को पानी पीना नसीब हुआ था और न ही खाने को कुछ मिला था। परेशानी के कारण उसका गला सूख रहा था मगर उसको यहाँ पानी देने वाला कोई नहीं था

अमजद ने 2, 3 बार चिल्लाकर पानी भी मांगा मगर उत्तर में उसको ना तो कोई आहट सुनाई दी और न ही कोई उसे पानी पिलाने आया। आज अमजद को महसूस हो रहा था कि मौत का इंतजार करना मौत को गले लगाने से कितना मुश्किल काम था। अब काशफ और सरमद के बारे में ही सोच रहा था कि उसको कमरे से बाहर कुछ कदमों की आवाज सुनाई दी। अब अमजद चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई वह समझ गया था कि शहादत का समय अब आ रहा है। इतनी देर से जो वह यातनादायक प्रतीक्षा कर रहा था वह इंतजार खत्म होने को है, कर्नल इरफ़ान की पिस्टल से अब एक गोली चलेगी और अमजद के सीने से पार हो जाएगी, और वह दूसरे देश के एक सैनिक को बचाने की खातिर अपनी जान की बलि देकर शहादत के रुतबे पर आसीन हो जाएगा। इस सोच ने अमजद के अंदर एक अजीब सी हिम्मत पैदा कर दी थी। अब कर्नल इरफ़ान उसके शरीर के टुकड़े कर डालता तब भी वे उससे कुछ उगलवा नहीं सकता था

क़दमों की आवाज़ अब खासी करीब आ चुकी थी। कमरे के भीतर ज़ीरो वाट का एक बल्ब जल गया था जिससे कमरे में कुछ रोशनी पैदा हुई थी, कमरे का दरवाजा खुला और रस्सियों में जकड़ा व्यक्ति औंधे मुंह अंदर आ गिरा ... उसके पीछे एक और व्यक्ति था वह भी रस्सियों से बंधा हुआ था और एक आदमी उसे बालों से पकड़कर खींचता हुआ अमजद के पास ले आया था। रस्सियों में जकड़ा यह व्यक्ति अमजद के पास आया तो अमजद ने उसको पहचान लिया था। ये सरमद था जिसके चेहरे पर इस समय अनगिनत घाव थे और उसकी आंखें सूजी हुई थीं मगर आश्चर्यजनक रूप से उसके चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी। अमजद को देखकर उसने बहुत मुश्किल से बोलना शुरू किया और महज इतना ही कहा: कुछ नहीं उगलवा सके कि ये कुत्ते मेरे मुंह से

सरमद के मुंह से ये बात सुनकर अमजद के चेहरे पर भी एक विजयी मुस्कान आ गई थी। वह आगे बढ़कर सरमद को गले लगाना चाहता था मगर अफसोस कि अपनी कुर्सी से उठने के लायक नहीं था वह . अब अमजद ने नीचे गिरे हुए व्यक्ति को देखा जो अब तक औंधे मुंह पड़ा था अमजद ने ध्यान से उसका निरीक्षण किया तो उसे भी पहचान लिया, यह काशफ था, मगर उसकी हालत बहुत बुरी थी। कर्नल इरफ़ान ने उस पर टारचर के पहाड़ तोड़ दिए थे, अमजद की नजर जब काशफ के पैर पर पड़ी तो उसके होश फाख्ता हो गए, उसकी टांग पर बहुत ज्यादा खून जमा हुआ था और अब भी थोड़ा सा खून उसकी टांग से रिस रहा था । उसके साथ कर्नल इरफ़ान खड़ा था जिसके चेहरे पर दुख और गुस्से के स्पष्ट संकेत देखे जा सकते थे।उसको शायद अपनी विफलता का गुस्सा था कि इन तीनों में से किसी से भी वह यह नहीं उगलवा सका था कि आखिर मेजर राज और समीरा इस समय कहाँ है? कर्नल इरफ़ान के साथ 2 लोग और थे मगर इस बार वह हंटर वाली हसीना कर्नल के साथ नहीं थी . कमरे की रोशनी अब कर्नल इरफ़ान के कहने पर ऑन कर दी गई थीं। रोशनी ऑन होने के बाद अमजद ने अब फिर काशफ को देखा तो पता चला कि आखिर काशफ के साथ हुआ क्या है। उसकी टांग में ड्रिल मशीन के माध्यम से छेद किया गया था। उसने अपना दाहिना पैर फ़ोल्ड कर के रखा था जबकि बाएं पैर को वह धीरे धीरे जमीन पर मार रहा था। मगर उसका बाकी पूरा शरीर सुन्न था, उसका चेहरा नीला हो रहा था और उसके कपड़े फटे हुए थे। काशफ की यह हालत देखकर अमजद की आँखों में खून उतर आया था। उसका बस नहीं चल रहा था कि वह अब अपनी जगह से उठे और कर्नल इरफ़ान के टकड़ टुकड़े कर डाले ...... मगर अफसोस कि वह इस समय कुछ नहीं कर सकता था। कर्नल इरफ़ान के साथ आए बाकी दो लोगों ने अब काशफ को जमीन से उठाया और अमजद के साथ एक और कुर्सी पर बिठा दिया जबकि सरमद अब तक खड़ा था मगर वह रस्सियों में जकड़ा हुआ था वह अपनी मर्जी से ज़्यादा हरकत नहीं कर सकता था सिवाय छोटे छोटे कदमों के साथ धीरे धीरे चलना। इसलिए कर्नल इरफ़ान को उससे कोई खास खतरा महसूस नहीं हो रहा था।

कर्नल इरफ़ान ने अभी अमजद से कहा और बोला यह अपने दोस्त की हालत देख रहे हो ??? मुझे सब कुछ सच सच बता दो कि मेजर राज इस समय कहाँ है अन्यथा। । । । । । । । इससे पहले कि कर्नल इरफ़ान का वाक्य पूरा होता अमजद ने एक जोरदार व्यंग्य का ठहाका लगाया तो कर्नल इरफ़ान कुछ गुस्से और कुछ आश्चर्य मिश्रित प्रतिक्रिया के साथ उसे देखने लगा। अमजद बोला कर्नल किस को डरा रहे हो? मेरे दोस्त की हालत तुम्हारे सामने है, जब वह तुम्हारा बर्बर अत्याचार सहन कर गया और आप उससे कुछ न उगलवा सके तो तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि मैं तुम्हारे अत्याचार को सहन नहीं कर पाउन्गा और तुम्हें कुछ बताउन्गा ....

अमजद की बात सुनकर उसके साथ खड़े सरमद ने भी एक ठहाका लगाया और कुर्सी पर बैठे काशफ ने भी अपनी धीमी और पीड़ा से भरपूर आवाज में एक व्यंग्य का ठहाका लगाया। तीनों को यूँ ठहाके लगाते देखकर कर्नल इरफ़ान को अपना अपमान महसूस हो रहा था . वह सोच भी नहीं सकता था कि काशफ को इस हालत में देखने के बाद भी अमजद में हिम्मत बाकी रहेगी, उसका विचार था कि अमजद सब कुछ उगल देगा काशफ की ये हालत देखकर। मगर यहां तो मामला ही उलट था, वह तीनों तो एक दूसरे को देखकर खुश हो गए थे और उनमें पहले सा साहस आ चुका था, और तो और काशफ जिसके पैर में कर्नल इरफ़ान छेद कर चुका था और उसमे बोलने तक की हिम्मत नहीं थी उसका चेहरा नीला हो रहा था और उसके शरीर से खून निचोड़ लिया गया था वह भी व्यंग्य के ठहाके लगा रहा था

कर्नल इरफ़ान के लिए इससे अधिक अपमान वाली बात और कोई नहीं थी उसने अपनी पिस्टल निकाली और उसका सुरक्षा लॉक खोल कर उसका रुख अमजद की ओर कर दिया और बोला तुम्हारे पास मात्र 2 मिनट हैं मुझे मेजर राज के बारे में बताओ नहीं तो यह गोली तुम्हारी मौत बनकर आएगी। कर्नल इरफ़ान की बात सुनकर काशफ और सरमद तो हँसे ही थे अमजद ने भी ठहाका लगा दिया। काशफ बोला ये खड़ूस अब भी समझ रहा है कि हम मृत्यु से डरते हैं। फिर उसने बहुत मुश्किल से अपना चेहरा अमजद की ओर किया तो उसकी आंखों में आंसू थे। काशफ अमजद से माफी माँग रहा था कि वो कर्नल इरफ़ान का अत्याचार सहन नहीं कर सका तो उसने अपने बारे में सब कुछ बता दिया और सरमद का पता भी बता दिया मगर मेजर राज और समीरा कहां हैं यह उसने नहीं बताया। उसने सरमद की ओर भी देखा और माफी माँगी कि मैंने तुम्हारा पता बता दिया मगर सरमद की आंखों में एक अजीब सी चमक थी, उसे काशफ से कोई शिकायत नहीं थी उसने काशफ को आँखों ही आँखों में हौसला दिया और महज इतना बोला चिंता मत करो दोस्त। हमारी मंज़िल अब करीब है

कर्नल ने जब देखा कि उसकी धमकी का इन तीनों पर कोई असर नहीं हुआ बल्कि वह कर्नल को जवाब देने की बजाय में बातें कर रहे हैं तो उसका पारा और भी ऊँचा होगया, उसने पिस्टल का रुख अमजद के पैर की ओर किया और गोली मार दी। पिस्टल से निकली हुई गोली अमजद के पैर के मांस को चीरती हुई पीछे की दीवार में जा लगी और अमजद की एक जोरदार चीख से कमरा गूंज उठा। एक चीख मारने के बाद अमजद ने अपना मुंह सख्ती से बंद कर लिया था और दुख को सहन करने की कोशिश कर रहा था, मगर तमाम प्रयासों के बावजूद उसे अपनी टांग में ऐसा लग रहा था जैसे कोई चाकू के साथ लगातार उसके मांस को काट रहा हो। अब की बार काशफ और सरमद के चेहरे पर परेशानी के आसार देखे जा सकते थे। कर्नल इरफ़ान को अब ऐसा लगने लगा था जैसे इन तीनों में से कोई न कोई मेजर राज का पता उगल देगा। मगर कुछ देर इंतजार के बाद उसे अपने कानों की सुनवाई पर शक होने लगा जब उसके कानों में अमजद की हल्की-हल्की हंसी की आवाज सुनाई दी जो अब धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी। अमजद को हंसते देखकर काशफ और सरमद भी अब मुस्कुरा रहे थे। अमजद ने एक जोरदार ठहाका लगाया और उसके बाद गरजती हुई आवाज में बोला अबे ओए कर्नल ... तू क्या समझता है कि अत्याचार करके हमसे मेजर राज का पता मालूम कर लेगा क्या? अरे तू हमारी बोटी-बोटी कर दे तो भी तो हम तीनों में से किसी की ज़ुबान नहीं खुलवा सकता, यह जेहादियों का खून है जो वफ़ा भी है और जज़्बे जिहाद भी तेरी तरह के मुसलमान होते होंगे जो थोड़ा सा अत्याचार सह कर अपनी धरती के साथ विश्वासघात कर जाए। हम शहीद तो हो सकते हैं, लेकिन अपनी कॉम के साथ गद्दारी नहीं कर सकते, अबे ओ किन्नरों के कर्नल, अगर हिम्मत है तो यहाँ मेरे दिल में गोली मार और अगर मेरे दिल में गोली मारने के बाद भी तुझे मेरी आँखों में भय नज़र आ जाए तो मेरे शव को कुत्तों के आगे फेंक देना

अमजद की आँखों में इस समय अंगारे बरस रहे थे और वहाँ डर नाम की कोई चीज नहीं थी वहाँ केवल एक चीज की तमन्ना थी और वह थी शहादत। कर्नल इरफ़ान इस समय अपने आप को पूरी तरह से असहाय महसूस कर रहा था। उसने काशफ पर हर तरह के टॉर्चर से देख लिया था यहां तक कि उसको करंट भी लगाया था उसके पैर में छेद कर दिया मगर वह टस से मस न हुआ। सरमद के साथ भी उसने हर तरह का टॉर्चार आज़मा लिया था, उसका चेहरा उबलते पानी में डाल दिया था और पानी से चेहरा निकालते ही उसका चेहरा फिर से बर्फ जैसे ठंडे पानी में डाल दिया था। गर्म पानी के टॉर्चर का तो कोई भी इंसान सामना कर सकता है, लेकिन गर्म पानी के तुरंत बाद बर्फ जैसा ठंडा पानी सहना आम इंसान के बस की बात नहीं होती, मगर सरमद इस टॉर्चर के बाद भी कर्नल इरफ़ान को कुछ भी बताने के लिए तैयार नहीं था

 
अमजद के शरीर को उसने कांटे लगे हंटर से छलनी कर दिया था, लेकिन वह कुछ नहीं बोला और अब उसकी टांग में गोली मारने के बाद भी वो पूरे उत्साह के साथ कर्नल को चुनौती दे रहा था कि गोली मारनी है तो सीने में दिल पर मारे। अमजद ने कर्नल इरफ़ान के सामने अब और कोई रास्ता नहीं छोड़ा था, वह पूरी तरह से निराश हो चुका था उन तीनों से। कर्नल ने अब अपनी पिस्टल का रुख अमजद के सीने की ओर किया और सरमद को संबोधित करके बोला, तुम्हारे पास आखिरी मौका है अमजद का जीवन बचाने का, अगर तुमने मेजर राज का पता बता दिया होगा तो अमजद की जान बच जाएगी। मगर सरमद ने मेजर राज का पता बताने की बजाय कर्नल इरफ़ान को कहा देर किस बात की है, इसी शहादत की मौत का तो हर जेहादी को इंतजार है, चला गोली और फिर देख शहीद चेहरे की मुस्कान

सरमद की इस बात के बाद अब कर्नल इरफ़ान इरादा कर चुका था उन तीनों को मौत के घाट उतारने का वह गोली चलाने ही वाला था कि उसके साथ खड़े सेना के जवान के हाथ में मौजूद कर्नल इरफ़ान के मोबाइल की घंटी बजी, कर्नल ने गुस्से के साथ उसको देखा जो फोन को एक कर्नल के पास ला रहा था, कर्नल ने गरजते हुए कहा बंद करो उसको वरना यही गोलीतुम्हारे सीने में उतार दूंगा। वह जवान वहीं रुक गया और काँपती हुई आवाज़ में बोला सर बीबीजी का फोन है। । कर्नल के चेहरे पर चिंता के संकेत दिखे और उसने तुरंत उस सैनिक से फोन पकड़ लिया और बोला हां बेटा सब कुशल तो है ना? यह पूछ कर कर्नल इरफ़ान शांत हुआ मगर अमजद देख रहा था कि कर्नल के चेहरे पर परेशानी के आसार बढ़ते जा रहे थे और उसके माथे पर पसीने की बूँदें दिखाई देना शुरू हो गई थी . अब कर्नल इरफ़ान बोला तो उसकी आवाज कांप रही थी और वह पहले से कहीं अधिक बेबस दिखाई दे रहा था। कर्नल इरफ़ान फोन पर काँपती आवाज़ में कह रहा था "देखें। त्त त तुम ऐसा न न नहीं कर सकते"। । । । । । ।

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समुद्र तट पर अंजलि लोकाटी के साथ समुद्र की लहरों के साथ साथ चल रही थी। अंजलि ने वहां फिरने वाली बाकी सभी लड़कियों की तरह सिर्फ ब्रा और पैन्टी पहन रखी थी जबकि पैन्टी के ऊपर उसने एक ठीक जाली का छोटा सा रूमाल इस तरह बांध रखा था कि वह कपड़ा अंजलि के चूतड़ों को पूरी तरह से और सामने उसकी चूत को छुपा रहा था जबकि उसकी वायर्ड नरम और मुलायम पैर पूरी तरह से नग्न थे . समुद्र की इस साइड पर विशिष्ट लोगों को ही आने की अनुमति थी यहां ज्यादातर उच्च वर्ग की लड़कियों या फिर विदेशी यूरोपीय और अमेरिकी लोगों को ही आने की अनुमति थी। और यही वजह थी कि यहां फिरने वाली हर लड़की ब्रा और पैन्टी पहने हुए थी या फिर जो पाकिस्तानी लड़कियां थीं उन्होंने अंजलि की तरह पैन्टी के ऊपर कोई कपड़ा बांध रखा था या फिर छोटी छोटी निक्कर पहन रखी थी जो शायद उनके चूतड़ों के उभारों को ही छिपाती थी बाकी गोरी जांघे निमंत्रण देती थी। लोकाटी भी बड़ी शान के साथ अंजलि के साथ चल रहा था। वो आस पास से गुजरकर थोड़ा अधेड़ उम्र के जोड़े की ओर गर्व से देखता। क्योंकि इस उम्र में भी उसके साथ में एक 20 वर्षीय किशोर सेक्सी हसीना थी जबकि बाकी जो उसके हमउम्र या आधी उम्र के भी पुरुष मौजूद थे उनके साथ मध्यम आयु और लुढ़के हुए शरीरों वाली औरतें थीं। केवल युवा लड़कों के साथ ही युवा लड़कियां थीं या फिर एक ही था लोकाटी की उम्र का वो लोकाटी ही था जिसके पहलू में एक परमाणु बम मौजूद था जो अपने सारे हुश्न के साथ समुद्र में मौजूद जवान लड़के और पुरुष तो एक तरफ बुजुर्ग के लोड़ों में भी जान पैदा कर रही थी।

लोकाटी का एक हाथ अंजलि की चिकनी कमर पर था और उसने कस कर अंजलि को पकड़ रखा था जैसे उसे डर हो कि अंजलि को कोई मनचला युवक न ले उड़े। जबकि अंजलि अब लोकाटी के साथ काफी बोर हो चुकी थी। रात 2 बार लोकाटी से चूत मरवाने के बाद सुबह भी लोकाटी ने उठते ही अपना तना हुआ लंड एक बार फिर से अंजलि की चूत में डाल कर उसे खूब चोदा था। और उसके साथ ही अंजलि ने लोकाटी से कुछ और काम की बातें उगलवा ली थीं। अब वह किसी तरह लोकाटी से जान छुड़ाना चाह रही थी। मगर लोकाटी तो अंजलि को अपने साथ इंडिया लेजाने की सोच रहा था, उसने पाकिस्तान में मौजूद अपने कुछ विशिष्ट दोस्तों को कहलवा दिया था कि वह अंजलि के लिए जाली पासपोर्ट तैयार करें ताकि आज रात इंडिया जाते हुए वो हुश्न की इस देवी को अपने साथ इंडिया ले जा सके। रात जब अंजलि इमरान को अपने अपार्टमेंट से निकालने के बाद फिर लोकाटी के साथ बेड पर लेटी तो तब अंजलि ने लोकाटी को बताया था कि वह उसके साथ इंडिया नहीं जा सकती क्योंकि उसका पासपोर्ट नहीं बना हुआ और न ही यहाँ उसके पास राशन कार्ड या आई एसडी कार्ड है जिससे उसकी पहचान हो सके। मगर लोकाटी को इन बातों की चिंता नहीं थी, पाकिस्तान और इंडिया में उसके ऐसे परिचित लोग थे जो महज कुछ घंटों में नकली पासपोर्ट बना सकते थे और लोकाटी ने सुबह होते ही पाकिस्तान में मौजूद अपने एजेंट को पासपोर्ट बनवाने का कह दिया था और अंजलि को भी इस बारे में पता था, लेकिन वह लोकाटी के साथ अभी तंग आ चुकी थी

हालाँकि लोकाटी ने अंजलि की चूत के साथ खूब मजे किए थे और कहीं न कहीं अंजलि ने भी चुदाई का मज़ा लिया था मगर चुदाई के अलावा लोकाटी में और कोई विशेष बात नहीं थी वह एक बूढ़ा और सूखी तबीयत रखने वाला आदमी था जबकि अंजलि शोख़ और चंचल एक युवा हसीना थी जो अपने किसी हमउम्र या फिर चंचल मर्द के साथ समय बिताना चाहती थी। मगर उसे जो पुरुष पसंद आ रहा था उसके साथ अंजलि की बजाय राफिया मौजूद थी। अंजलि उत्सुकता से इमरान और राफिया का इंतजार कर रही थी क्योंकि इमरान ने उसे बीच पर आने के लिए कहा था। अंजलि का यह इंतजार जल्द ही खत्म हो गया जब उसे दूर से इमरान और राफिया आते दिखाई दिए। इमरान ने महज एक छोटी हाफ़पेंट पहन रखी थी जो शायद उसके घुटनों तक थी, जबकि ऊपर से शर्ट नाम की कोई चीज इमरान के शरीर में मौजूद नहीं थी और उसका मांसल शरीर बीच पर सभी युवा लड़कियों को आकर्षित कर रहा था। राफिया भी बाकी लड़कियों की तरह एक छोटी सी पैंटी पहने इमरान के साथ थी जबकि ब्रा के ऊपर से राफिया ने एक हल्की सी नेट शर्ट पहन रखी थी जिसके पार राफिया का लाल रंग का ब्रा नज़र आ रहा था

कुछ ही देर बाद राफिया और इमरान अंजलि के पास पहुंच चुके थे, लोकाटी भी राफिया को देखकर खुश हुआ और उसे दिखाने के लिए अब की बार उसने अंजलि को अपने और भी करीब कर लिया था वह दिखाना चाहता था कि उसने बुढ़ापे में भी राफिया की दोस्त कैसे पटा लिया और अब वह उसकी प्रेमिका बनकर उसके साथ समुद्र तट की सैर कर रही थी। इमरान की नजर अंजली के उदास चेहरे पर पड़ी तो वह भी समझ गया कि बेचारी बुढ्ढे के साथ रात बिताने से काफी तंग है, इमरान ने आगे बढ़कर अंजलि और लोकाटी से हाथ मिलाया जबकि राफिया और अंजलि गले मिली और अरबी शैली में एक दूसरे के गाल भी चूमे। जबकि राफिया ने लोकाटी के साथ हाथ मिलाया, लोकाटी की टकटकी राफिया की शर्ट के पीछेउसके लाल ब्रा में थी, उसने नीचे से ऊपर तक राफिया के सुंदर शरीर की समीक्षा की और दिल ही दिल में यह इच्छा जताई कि काश राफिया और अंजलि दोनों उसके नीचे आ जाएँ और वो दोनों की जी भर कर चुदाई कर दे। कुछ देर चारों इधर उधर की बातें करते रहे, इस दौरान लोकाटी ने राफिया को बताया कि तुम्हारी दोस्त को इंडिया जाने का बहुत शौक है आज रात की फ्लाइट से यह मेरे साथ इंडिया जा रही है। यह सुनकर इमरान ने थोड़ा आश्चर्य के साथ अंजलि को देखा कि यह क्या नई फिल्म है मगर अंजलि ने किसी भी प्रकार का कोई रिएक्शन नहीं दिया। इसी दौरान राफिया ने अंजलि को बताया कि हम अभी वाटर स्कूटर पर समुद्र की सैर करके आए हैं बहुत मज़ा आया। वाटर स्कूटर का नाम सुनते ही अंजलि की आंखें खुल गईं उसको भी बहुत शौक था वाटर स्कूटर का और वह इसमें काफी विशेषज्ञ भी थी

उसके मन में उत्साह और लोकाटी से जान छुड़ाने का आइडिया आया, उसने तुरंत लोकाटी से कहा चलो डार्लिंग हम भी वाटर स्कूटर का आनंद लें ...मगर लोकाटी की उम्र इसकी अनुमति नहीं देती थी वह स्कूटर चला सके और पानी में जाने का जोखिम ले सके, उसने तुरंत ही अंजलि को कहा नहीं नहीं खतरनाक है, मैं यह काम नहीं कर सकता, अंजलि ने एक बार फिर उसे कहा कि कुछ नहीं होता प्लीज़ चलो ना मुझे बहुत शौक है ...मगर लोकाटी भला ऐसा जोखिम कैसे ले सकता था इस उम्र में उसने सख्ती से अंजलि को मना किया तो अंजलि ने कहा ठीक है फिर इमरान के साथ चली जाती हूँ। इमरान ने भी तुरंत हामी भर ली वह तो पहले ही अंजलि का सेक्सी बदन देख कर उसके पास होना चाह रहा था और कल रात तो उसने अंजलि के बड़े मम्मे देख लिए थे जब वह अपनी चूत में लोकाटी के लंड को लेकर उछल उछल कर अपनी चुदाई करवा रही थी। अंजलि तुरंत इमरान की ओर बढ़ी और उसका हाथ पकड़ कर उसी ओर चल पड़ी जिस तरफ से इमरान और राफिया आए थे, इमरान भी तुरंत अंजलि को साथ लिए दूसरी ओर चल पड़ा। राफिया को हालांकि ये बात बुरी लगी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि इमरान एक और लड़की के साथ हो, खासकर जब लड़की भी राफिया की तरह सेक्सी और जवान हो। मगर वह कुछ नहीं बोली क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कोई उसे संकीर्ण होने का ताना दे

राफिया से कुछ दूर जाते ही मेजर राज ने समीरा को संबोधित किया और बोला कोई विशेष बात पता लगी? तो समीरा ने उसे बताया कि हाँ, बहुत जल्द इंडिया में कोई बड़ा आतंकवादी हमला होने वाला है जिसमें लोकाटी हाथ होगा और यह किसी ऐतिहासिक इमारत को निशाना बनाना चाहते हैं लेकिन यह पता नहीं चल सका कि वह कौन-सी इमारत हो सकती है। उसके बाद इंडिया विरोधी आंदोलन जोर पकड़ जाएगा, और उन्हीं दिनों में पाकिस्तान की मशहूर अभिनेत्री इंडिया जाएगी और वहां उसकी एक फिल्म रिलीज की जाएगी। यह फिल्म विशेष रूप से कश्मीर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी और उसमें भी यही दिखाया जाएगा कि उस प्रांत में लोगों को इंडियन सरकार की ओर से अधिकार नहीं दिए जा रहे, यह फिल्म कश्मीर के सीधे साधे लोगों के दिलों में इंडिया के लिए अधिक नफरत पैदा करेगी और फिर कोई उचित मौका देखकर इस लोकाटी ने इंडिया से अलग होने की घोषणा कर देना है। और पाकिस्तानी सेना ने कश्मीर में अपना नियंत्रण संभालना है।हालात काफी खराब हैं

 
दोस्तो अपडेट दे दिया है और कोशिस की है एक बड़ा अपडेट देने की
 
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