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वतन तेरे हम लाडले complete

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साथ बने रहने के लिए धन्यवाद दोस्तो
 


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वह अब सिर झुकाए बीते हुए लम्हों को याद कर रहा था। उसका घर से निकलकर कार में होंडा का पीछा करना वहां से फिर भागते हुए बंदरगाह तक पहुंचकर गंदे पानी में पाइप के माध्यम से साँस लेना फिर जहाज चेंज करना और वहां से इरफ़ान से आमना-सामना हुआ यह सब बातें उसके मन में एक फिल्म की तरह चल रही थीं। इसी फिल्म में अचानक ही मेजर राज को एक और चेहरा याद आया। यह चेहरा किसी और का नहीं बल्कि उसकी अपनी नई नवेली दुल्हन रश्मि का चेहरा था। रश्मि का विचार मन में आते ही एक झमाका हुआ और मेजर राज को याद आया कि अभी एक दिन पहले ही तो उसकी शादी हुई थी।

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मेजर राज मैरून कलर की शेरवानी में गजब ढा रहा था। आज मेजर राज की शादी की पहली रात थी। उसकी पत्नी रश्मि अपने कमरे में मौजूद दुल्हन बनी बैठी अपने दूल्हे का इंतज़ार कर रही थी, जबकि बाहर कमरे के सामने मेजर राज की बहनें उसका रास्ता रोककर खड़ी थीं। कल्पना जिसकी उम्र 25 साल थी और पिंकी जो अब 21 साल की थी दोनों ही अपने भाई का रास्ता रोककर खड़ी थीं। साथ में कुछ रिश्तेदारों की लड़कियाँ भी थीं जो दूल्हे को अपनी नई नवेली दुल्हन के पास जाने से रोक रही थी। मेजर राज ने जेब से हजार हजार के 10 नोट निकाले और पिंकी की तरफ बढ़ाए वह जानता था कि कल्पना 10 हजार में नहीं मानेगी मगर पिंकी छोटी है शायद वह मान जाएगी। मगर इससे पहले कि पिंकी वे पैसे पकड़ती और राज को अंदर जाने का रास्ता देती कल्पना ने राज का हाथ झटक दिया और बोली हम तो अपने प्यारे भाई से सोने का सेट लेंगे फिर अंदर जाने की अनुमति मिलेगी। यह सुनकर मेजर राज ने अपनी माँ की तरफ देखा मगर वह भी आज अपनी बेटियों का साथ देने का इरादा रखती थीं। उन्होंने यह भी कह दिया कि तुम भाई बहन का आपस का मामला है इस मामले में कुछ नहीं बोल सकती।

मेजर राज ने बहुत कहा कि सोने का सेट तुम जय से लेना मेरे पास यही पैसे हैं, लेकिन ना तो कल्पना मानी और न ही पिंकी। और अंत मे मेजर राज को हार माननी पड़ी और उसने सोने की चेन जो उसकी पत्नी रश्मि के लिए बनवाई थी थी वह कल्पना को दी और पिंकी से वादा किया कि उसे भी एक अच्छी सोने की चेन दिलवाई जाएगी। इस वादे के बाद दोनों बहनों ने राज की जान छोड़ी और जय की तरफ भागी जय मेजर राज का छोटा भाई था जिसकी उम्र 27 साल थी और उसकी भी आज ही शादी हुई थी। अब रास्ता रुकने की बारी उसकी थी और दोनों बहनें कल्पना व पिंकी जय का रास्ता रोके खड़ी थीं। जिसका कमरा मेजर राज के कमरे के साथ ही था। लेकिन राज के पास अब इतना धैर्य नहीं था कि वह देखता जय के साथ बहनों ने क्या किया उसने दरवाजा खोला और अंदर जाकर सुख का सांस लिया।

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सामने बेड पर लाल गुलाब और सफेद फूलों की सेज बनी हुई थी। बेड के एक तरफ सरक पत्तियां बिखरी पड़ी थीं। पूरा कमरा गुलाब की खुशबू से महक रहा था। और सामने ही लाल शादी का जोड़ा पहने 20 वर्षीय रश्मि सिमटी बैठी थी। यूं तो मेजर राज और रश्मि की उम्र में 12 साल का अंतर था मगर दोनों ही इस शादी से खुश थे। रश्मि ने जब से राज को देखा था वह तो उसकी दीवानी हो गई थी, इस दीवानगी ने उम्र का यह बड़ा अंतर भी मिटा दिया था और वो केवल राज की ही होकर रह गई थी। रश्मि ने अपने नाम की लाज रखी थी। वह हर तरह की अनैतिक बातों से दूर रही और उसने अपनी इज्जत की रक्षा भी की। अपनी जवानी में उसने किसी गैर मर्द का साया तक नहीं पड़ने दिया था। रश्मि एक उदार और आधुनिक लड़की ज़रूर थी मगर उसके साथ विनम्रता हया और पाकदामनी में भी अपनी मिसाल आप थी। कभी किसी गैर मर्द को उसने अपने पास नहीं आने दिया था। गोरी रंग और भरपूर जवानी के बावजूद रश्मि ने अपनी रश्मि को बनाए रखा था और मेजर राज को भी रश्मि की पाकदामनी और हुश्न संहिता ने प्रभावित किया था।

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यही कारण था कि मेजर राज रश्मि को अपनी पत्नी बनाने के लिए खुशी खुशी तैयार हो गया था। कमरे में दाखिल होकर पहले राज ने अपनी शेरवानी उतारी। लगातार 4 घंटे से राज इस भारी शेरवानी में बड़ी मुश्किल से गुजारा कर रहा था। वह अपनी शादी के लिए पेंट कोट सिल्वाना चाहता था मगर रश्मि की फरमाइश पर उसने शेरवानी सलवाई। राज इस तरह के कपड़े पहनने का पूरी तरह आदी नहीं था। बस अपनी होने वाली पत्नी के कहने पर उसने 4 घंटे से शेरवानी शोभा ए तन कर रखी थी। शेरवानी उतार कर एक साइड पर रखने के बाद वह धीरे धीरे चलता हुआ सेज के पास पहुंचा, जहां सिमटी हुई रश्मि शर्म के मारे और भी सिमट गई थी। मेजर राज कुर्ता और पाजामा पहने अपनी पत्नी के सामने बैठ गया तो रश्मि ने घूँघट से ही आंखें उठाकर राज को देखा लाल दुपट्टे से राज का मुस्कुराता हुआ चेहरा नजर आया। राज के चेहरे पर नज़र पड़ते ही रश्मि के चेहरे पर चमक आ गई और उसने फिर से अपनी नजरें झुका लीं। राज ने भी अपनी पत्नी का यह अंदाज देखा तो सच मे उस पर प्यार आ गया, राज ने धीरज के साथ अपने दोनों हाथों से रश्मि के घूँघट को ऊपर उठाया। । । घूँघट को उठाते ही राज के मुंह से अपनी पत्नी के हुस्न में प्रशंसा के शब्द निकलना शुरू हुए जिन्हें सुनकर रश्मि के चेहरे का रंग अनार के रस की तरह लाल होने लगा। शर्म के मारे वो न तो अपनी आंखें ऊपर उठा रही थी और न ही कुछ बोल पा रही थी।

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राज ने अपनी एक उंगली से रश्मि का चेहरा ऊपर उठाया तो भी रश्मि की आँखें झुकी रहीं। इस पर राज ने कहा अब हम इतने भी बुरे नहीं जो आप हमारी ओर देखना भी गवारा न करें। यह सुनते ही शरमाई हुई रश्मि ने अपनी आंखें खोल लीं और राज को देखने लगी। बड़ी-बड़ी आँखों में मौजूद खुशी स्पष्ट दिख रही थी। और उनमें छिपा राज को प्यार भी अब स्पष्ट हो गया था। राज आगे बढ़ा और उसकी हसीन आंखों पर एक चुंबन दे दिया। रश्मि ने राज को बिल्कुल मना नहीं किया सिर्फ अपनी आँखें बंद कर लीं राज ने अपने होंठ कुछ देर आंखों पर रखने के बाद उठाए फिर से हुश्न की इस मूरत को देखने लगा। रश्मि का चेहरा अभी भी खुशी और प्यार के मिश्रित भाव की वजह से लाल हो रहा था। और उसकी भारी भारी सांसें उसके जज़्बात को प्रतिबिंबित कर रही थीं।

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इससे पहले मेजर राज पुनः हुश्न की इस प्रतिमा का चुंबन लेता, रश्मि ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी सुंदर और नाजुक हथेली राज के सामने फैला दी। राज ने हैरान होकर रश्मि के हाथ को देखा और फिर रश्मि की ओर सवालिया नज़रों से देखा। थोड़े से अंतराल के बाद रश्मि ने पहली बार अपने होंठ खोले। रश्मि ने बहुत प्यार भरी आवाज़ में राज को संबोधित किया और बोली हर पति अपनी पत्नी का चेहरा पहली बार देखने के बाद उसे मुँह दिखाई कुछ देता है। आप तो मेरा चुंबन भी ले चुके मगर मुंह दिखाई में कुछ नहीं दिया। यह सुनकर राज को भी अपनी गलती का एहसास हुआ और वह लज्जित होकर बोला कि बस तुम्हारी सुंदरता ने मुझे मदहोश कर दिया था और मुझे कुछ याद ही नहीं रहा। अपने हुस्न की तारीफ में यह कुछ मामूली वाक्य रश्मि के लिए बहुत बड़ा उपहार थे। उन्हें सुनकर रश्मि को लगा जैसे उसका जीवन धन्य हो गया हो और उसे जीवन में राज के साथ के सिवा और कुछ नहीं चाहिए।

इससे पहले रश्मि कुछ बोलती, राज आगे झुका, और बेडसाइड पर पड़े आल्मीरा की दराज खोलकर एक छोटी सी डिबिया निकाली जिसमें एक सोने की चेन मौजूद थी। इस की चैन में एक छोटी लेकिन बहुत ही सुंदर लटकन भी मौजूद था जो दिल के आकार का था। मेजर राज ने वह चैन रश्मि की ओर बढ़ाई तो रश्मि ने इठलाते हुए कहा खुद पहनाएं तो उपहार के मूल्य का पता चलेगा।

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यह सुनकर राज मुस्कुराया और अपने हाथ से चैन के हुक को खोल कर हाथ रश्मि की गर्दन से लेकर गया। रश्मि ने राज को रुकने का इशारा किया और अपना बड़ा सा दुपट्टा कंधे से हटा कर अपना भारी पर कम सोने का सेट अपने गले से उतारने लगी। सेट उतारते हुए राज बड़े ही प्यार के साथ अपनी पत्नी को देख रहा था, राज की नजर जब रश्मि के सीने पर पड़ी तो वह अपनी आंखें झपकाना ही भूल गया। रश्मि की सुराही दार लंबी गर्दन गोरा गोरा सीना, नीचे सीने के उभार और बीच में क्लीवेज़ की लाइन। रश्मि के चेहरे की नैन छवि तो प्यारी थी ही मगर आज राज उसके सीने के उलटफेर देखकर सांस लेना भूल गया था।

रश्मि जब अपने गले से जेवर उतार चुकी तो उसने दुपट्टा और थोड़ा पीछे हटाया और राज की नजरें रश्मि के सीने पर गढ़ी हुई थीं। रश्मि ने भी इस बात को महसूस कर लिया और उसका सीना गर्व से और फूलने लगा। फिर उसने राज के सामने एक चुटकी बजाई और एक मुस्कान से बोली क्या देख रहे हैं जी ?? राज को होश आया और वह अपनी चोरी पकड़ी जाने पर थोड़ा शर्मिंदा हुआ मगर फिर बोला अपनी किस्मत को दाद दे रहा हूँ, ऐसी सुंदर और जवानी से भरपूर पत्नी का साथ खुशनसीब लोगों को ही मिलता है। यह कह कर वह आगे बढ़ा और अपने हाथ रश्मि की गर्दन के पीछे ले गया। उसने पीछे से चैन का हुक बंद किया और फिर पीछे हटकर रश्मि के गले में मौजूद मुंह दिखाई में दी हुई सोने की चैन को देखने लगा। चैन में झूलता हुआ लटकन रश्मि की क्लीवेज़ लाइन से कुछ ऊपर था, राज ने लटकन को देखा और आगे बढ़ कर अपने होंठ लटकन वाली जगह पर रखकर एक प्यार भरा चुंबन दिया। रश्मि को राज के होंठ अपने सीने पर महसूस हुए तो उसकी भी एक सिसकी निकल गई। यह पहला मौका था कि एक आदमी के होठों ने रश्मि के सीने में प्यार भरा चुंबन दिया था।

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राज ने यहीं बस नही की बल्कि आगे बढ़कर रश्मि की कमर के चारों ओर अपने हाथ डाल लिए, रश्मि भी उठी और अपने पति के पास गई। रश्मि ने कभी किसी पुरुष को अपने पास नहीं आने दिया था मगर वह अपने जीवन साथी अपने पति से किसी भी प्रकार की शर्म महसूस नहीं कर रही थी। लेकिन नाज़ुक और प्राकृतिक शर्म तो उसमें मौजूद थी ही मगर बनावटी शर्म और अपने पति से संकोच इस रश्मि की प्रकृति में शामिल नहीं था। वह जानती थी कि यौन संतुष्टि न केवल उसका अधिकार है बल्कि उसके पति का अधिकार है। और दोनों एक दूसरे के साथ सहयोग करेंगे तो पूरी संतुष्टि हासिल की जा सकती है।

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रश्मि करीब हुई तो राज ने अपने होंठों से रश्मि के नरम और नाजुक होठों पर अपने होंठ रख दिए। रश्मि को 440 वोल्ट का झटका लगा। वह नहीं जानती थी कि जब कोई पुरूष स्त्री के होठों को चूमता है तो कैसा लगता है। आज पहली बार उसके होंठों पर राज के होंठ लगे तो वह इस भावना से परिचित हुई। रश्मि ने भी जवाब में राज के होठों को चूमा और फिर दोनों एक दूसरे के होंठ चूसने में लग गए। रश्मि के होंठ एक गुलाब की पत्ती की तरह नरम और नाजुक और रसीले थे। राज यह रस अपने होंठों से लगातार चूस रहा था। इसी दौरान रश्मि ने अपने दुपट्टे में लगी सेफ्टी पिन को खोलना शुरू किया और कुछ ही देर में भारी दुपट्टा उसके सिर से उतर चुका था। दुपट्टा उतरते ही रश्मि को अपना बदन बहुत हल्का महसूस होने लगा और वो और भी अधिक तीव्रता के साथ राज की बाहों में उसके होंठों को चूसने लगी। राज थोड़ी थोड़ी देर बाद रश्मि के ऊपरी होंठ को अपने मुंह में लेता और उसे अच्छी तरह चूसता और फिर नीचे वाले होंठ को अपने मुँह में लेकर चूसता। रश्मि को यह सब बहुत अच्छा लग रहा था। उसकी जिंदगी में यह सब पहली बार हो रहा था मगर वह पूरी तरह उसकी लज़्जत का आनंद ले रही थी।

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राज ने अपनी ज़ुबान को रश्मि के होठों पर फेरना शुरू किया तो वह समझ गई और अपने होंठों को खोल कर राज को अंदर का रास्ता दिखाया। जैसे ही रश्मि ने अपने होंठों को खोल कर राज की जीब को रास्ता दे दिया राज की ज़ुबान रश्मि के मुंह में चली गई और रश्मि की ज़ुबान के साथ खेलने लगी। रश्मि ने भी राज का पूरा साथ दिया और अपने मुंह में उसकी ज़ुबान को चूसने लगी। रश्मि के नरम और नाजुक होंठ जब राज की ज़ुबान को चूस रहे थे तो इसी दौरान राज को अपने अंडरवेअर में हलचल महसूस होने लगी। और राज के हाथ स्वतः की रश्मि की कमर से होते हुए उसको चूतड़ों तक जा पहुंचे। मांस से भरे हुए चूतड़ हाथ में पकड़ते ही राज ने उन्हें जोर से दबा दिया और रश्मि के मुंह से एक सिसकी निकली आवोच।आह्ह्ह्ह्ह । । अब दोनों एक दूसरे को आँखों में आँखें डाल कर फ्रेंच किस करने लगे और साथ ही राज के हाथ रश्मि के 32 "के चूतड़ों की मालिश करने लगे। रश्मि को भी अपनी पैन्टी में गीला पन महसूस होने लगा।

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कुछ देर रश्मि के होंठों का रस चूसने के बाद अब राज ने अपने होंठों का रुख रश्मि की गर्दन की ओर कर दिया, जैसे ही रश्मि की गर्दन पर राज के होंठ लगे रश्मि तड़प उठी। उसने अपना हाथ राज की गर्दन पर रख कर उसको मजबूती के साथ थाम लिया और राज रश्मि के ऊपर झुक कर उसकी गर्दन पर ज़ुबान फेरने लग गया। राज कभी रश्मि की गर्दन पर ज़ुबान फेरता तो कभी अपने होंठों से चूसता। जब राज अपने दांतों से रश्मि की गर्दन को हल्का सा दबाता तो काम की तीव्रता की भावनाओं से रश्मि की सिसकी निकलती जिसको राज बहुत एंजाय करता है। गर्दन से होते हुए अब राज की ज़ुबान रश्मि की क्लीवेज़ लाइन को चूसने लगी।

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रश्मि के ब्लाऊज़ की फिटिंग शानदार थी जो उसने स्पेशल तैयार करवाया था। वह अपने पति को अपने हुस्न से पूरी तरह से मज़ा देना चाहती थी। फिटिंग वाले ब्लाऊज़ में रश्मि के सीने के उभार बहुत ही सुंदर क्लिवेज की लाइन बना रहे थे जो किसी भी आदमी को पागल कर देने के लिए काफी थी।। राज ने अभी रश्मि को बेड पर लिटा दिया और खुद उसके साथ लेट कर रश्मि के ऊपर झुक कर उसके सीने पर प्यार कर रहा था। राज का एक हाथ रश्मि की गर्दन के नीचे से निकलता हुआ उसके कंधे पर प्यार कर रहा था और दूसरा हाथ रश्मि के बाएं पैर की थाई की मालिश कर रहा था। और रश्मि अपना सिर पीछे की ओर खींच कर हल्की हल्की सिसकियाँ ले रही थी।

राज का हाथ अब रश्मि की थाई से होता हुआ उसके बाएं मम्मे के ऊपर आ गया था। रश्मि की सांसें तेज तेज चलने की वजह से उसके सीने के उभार यानी उसके मम्मे भी ऊपर नीचे हो रहे थे। राज ने बहुत प्यार से रश्मि का दाहिना मम्मा अपने हाथ में पकड़ा और उसे दबाने लगा। राज की ज़ुबान अभी भी रश्मि की क्लिवेज लाइन को चूसने में व्यस्त थी। कुछ देर इसी स्थिति में रश्मि को प्यार करने के बाद राज ने रश्मि को अपनी ओर करवट दिलवाई और उसकी कमर पर मौजूद ब्लाऊज़ की ज़िप पूरी खोल दी। अब मेजर राज अपने मजबूत हाथ के साथ रश्मि की कोमल और नाजुक कमर की मालिश कर रहा था। संगमरमर की तरह मुलायम कमर की मालिश करते हुए राज अपने आपको दुनिया का सबसे भाग्यशाली आदमी होने की कल्पना कर रहा था। 32 साल की उम्र में 20 साल की सुंदर गर्म जवानी का मिल जाना निश्चित रूप से सौभाग्य ही हो सकता है। और जवानी भी ऐसी जिसको आज तक किसी ने छुआ तक नहीं है।

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कुछ देर बाद मेजर राज ने रश्मि का ब्लाऊज़ उतारा तो नीचे गोरे शरीर पर लाल रंग का ब्रा रश्मि के मम्मों को छिपाने मे योगदान कर रहा था। रश्मि का स्कर्ट उसकी नाभि से काफी नीचे था स्कर्ट के ऊपर रश्मि का गोरा शरीर शुरू होता नजर आ रहा था जो बहुत ही पारदर्शी और हर प्रकार के दाग से मुक्त था। राज ने अपने होंठ रश्मि की नाभि पर रख दिए और उसे चूमने लगा। इस प्रक्रिया से रश्मि को एक अजीब सा स्वाद या कहें आनंद मिल रहा था जो उसने पहले कभी नहीं देखा और न ही उसके बारे में कभी सोचा था। राज ने अपने दोनों हाथों से रश्मि के मम्मे पकड़ रखे थे जो लाल ब्रा में कैद थे और वह अपनी जीभ और होंठों को रश्मि की नाभि में घुमा रहा था। रश्मि ने अपने नाजुक मेंहदी वाले हाथों से राज को सिर से पकड़ रखा था और मजे की तीव्रता से बंद, ऊच ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओय हेययीयीयैआइयीयीयियी की आवाजें निकाल रही थी। अब राज ने रश्मि की नाभि छोड़ अपनी ज़ुबान को उपर की ओर फेरना शुरू किया और धीरे धीरे रश्मि के मम्मों से होता हुआ पुनः उसकी क्लीवेज़ की लाइन में अपनी ज़ुबान फिराने लगा। रश्मि के हाथ अब राज की कमर पर थे और उसने अपने हाथों से राज की कमर मे घेरा बनाया हुआ था कुछ देर क्लीवेज़ लाइन के साथ खेलने के बाद राज एक बार फिर से अपनी ज़ुबान को नीचे लाया और नाभि से होता हुआ भी नीचे तक आ गया जहां से रश्मि का स्कर्ट शुरू होता था।

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राज ने रश्मि की स्कर्ट से उसका हुक खोला और देखते ही देखते उसका स्कर्ट भी उतार दिया। अभी रश्मि मात्र लाल ब्रा और लाल रंग की ही पैन्टी में राज के सामने लेटी थी। रश्मि की आंखों में अब लाल डोरे स्पष्ट नजर आ रहे थे जो उसकी सेक्स की इच्छा को स्पष्ट कर रहे थे। राज अभी रश्मि के गोरे चिट्टे पैरों पर प्यार करने लगा। रश्मि के पैर बालों से पूरी तरह मुक्त थे रश्मि ने अपने पति के साथ हनीमून मनाने की विशेष तैयारी कर रखी थी इसीलिए उसने आज ही अपनी टांगों की वेक्सिंग की थी और सारे फालतू बाल साफ कर दिए थे। नरम और मुलायम रेशमी पैरो पर राज कभी अपने हाथ फेरता तो कभी अपनी जीभ से उसकी गोरी गोरी टाँगें चाटने लगता। राज ने अब तक अपना हाथ रश्मि की पैन्टी से नहीं लगाया था। बल्कि उसने अपने हाथ और जीभ को रश्मि की पैन्टी से दूर ही रखा था। मगर फिर भी राज को रश्मि की लाल रंग की पैंटी में बीच के हिस्से में गीला पन नजर आ रहा था।

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कुछ देर रश्मि के पैरों पर अपनी जीभ फेरने के बाद जब राज का लंड उसको ज्यादा ही परेशान करने लगा तो उसने रश्मि को छोड़कर पहले अपना कुर्ता उतारा और उसके बाद शेरवानी के साथ वाला पाजामा भी उतार दिया। रश्मि इस बार बिल्कुल भी नहीं शरमाई और बजाय शर्म से आँखें बंद करने के वह अपने पति के शरीर को बहुत प्यार और सेक्स भरी तीव्रता के साथ देख रही थी। राज रश्मि के सामने मात्र सफेद रंग के अंडर वेअर और सफेद रंग की बनियान में था। उसका शरीर भी बहुत सुंदर और कसरती था। बेशक राज एक सेना का जवान था जिसका आधा जीवन विभिन्न प्रकार की ट्रेनिंग और व्यायाम आदि में ही गुजरा था राज बेड पर बैठा था, रश्मि, जो लेटी हुई थी राज के शरीर को देखकर उठी और खुद ही राज के करीब हुई। लाल ब्रा और पैन्टी में रश्मि किसी कयामत से कम नहीं लग रही थी।
 


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राज के करीब आने के बाद रश्मि ने खुद ही अपने होंठ पहले राज के होंठों पर रख दिए और उसका रस चूसने लगी, फिर होठों को छोड़ वह राज की गर्दन तक आई और उसकी गर्दन पर अपने होंठ और दांतों से प्यार करने लगी। राज को 20 वर्षीय जवान रश्मि की ये बेबाकी बहुत अच्छी लग रही थी। फिर रश्मि ने खुद ही राज की बनियान ऊपर की और उसको उतार दिया। राज का सीना बालों से पूरी तरह मुक्त था। आजकल के युवा फैशन के रूप में अपना सीना भी शेव करते हैं ऐसा ही राज ने कर रखा था। हल्का गेहूंआ रंग और कसरती शरीर के लिए रश्मि का आदर्श मानो उसके सामने था रश्मि को हमेशा से ही सॉफ सीने वाले और कसरती शरीर वाले पुरुष पसंद थे। फिल्मों में भी वह जब हीरो को देखती जिसका सीना बालों से मुक्त होता तो उसका बहुत मन करता कि उसके होने वाले पति का सीना भी ऐसा ही हो। और राज का सीना और शरीर की बनावट बिल्कुल रश्मि की पसंद के अनुसार था। रश्मि आगे झुकी और राज के सीने पर मौजूद निपल्स पर ज़ुबान फेरने लगी। स्त्रियो के निपल्स की तरह पुरुषों के निपल्स भी कभी कभी सेक्स के दौरान सख्त हो जाते हैं। इसी तरह राज के निपल्स तब सख्त थे जिन पर रश्मि अपनी जीभ तेज तेज चला रही थी। कभी रश्मि राज के निप्पल मुँह में लेकर उनको चूसने लगती तो कभी मात्र ज़ुबान फेर कर ही गुज़ारा करती।

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रश्मि ने राज को लेटने को कहा तो राज बेड पर लेट गया। वह रश्मि को पूरा मौका देना चाहता था कि वह भी अपनी मर्जी से राज के साथ अपने हनीमून को एंजाय करे। राज के लेटने के बाद रश्मि ने सिर से पांव तक राज के शरीर का जायजा लिया। कुछ देर उसने अपनी नज़रें राज के अंडर वेअर पर रोक ली जहां उसे उभार नजर आ रहा था। रश्मि जानती थी कि यह लंड का उभार है जो उसकी चूत में जाने को बेताब हो रहा है। रश्मि ने प्रशंसा भरी नज़रों से राज को मुस्कुराते हुए देखा और फिर अपनी टाँगें फैला कर राज के ऊपर बैठ गई। राज के पैरों पर बैठने के बाद रश्मि राज के ऊपर झुकी और उसके सीने पर प्यार करने लगी। सीने से होती हुई रश्मि नीचे तक आई और अंडर वेअर के ऊपर अपनी ज़ुबान फेरने लगी

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अंडर वेअर तक पहुंचने के बाद रश्मि ने बिना झिझक अपना हाथ राज के लंड पर रख दिया जो अब तक अंडर वेअर की कैद में था। रश्मि की ये बेबाकी राज को बहुत पसंद आ रही थी। वह भी ऐसी ही पत्नी चाहता था जो न केवल गर्म हो बल्कि अपनी गर्मी व्यक्त करना भी जानती हो। और बिस्तर में अपने पति के साथ सेक्स एंजाय करने की इच्छा भी रखती हो। राज ने हल्की आवाज़ मे रश्मि से पूछा कि मेरा हथियार कैसा लगा तुम्हें ???
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तो रश्मि ने एक शरारती मुस्कान से कहा, यह तो जब आप अपना काम करोगे तभी पता लगेगा इसके बारे में। यह सुनकर राज को रश्मि पर एकदम से प्यार आया और उसने रश्मि को अपने ऊपर गिरा लिया। और पागलपन की हद वाले प्यार से उसको प्यार करने लगा। राज अब अपने हाथ रश्मि के चूतड़ों पर भी फेर रहा था। 32 आकार के नरम और मांस से भरे हुए चूतड़ राज को बहुत पसंद आए मगर अब तक उन पर लाल रंग की पैन्टी मौजूद थी।

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इसी दौरान रश्मि जो राज के ऊपर झुकी हुई थी उसको अपनी चूत पर सख्त चीज़ लगती महसूस हुई। रश्मि ने उसका मज़ा लेने के लिए अपना वजन राज के ऊपर डाला तो रश्मि की चूत इस कठोर लंड के और करीब हो गई। और चूत लंड की रगड़ से रश्मि और राज दोनों को ही मज़ा आने लगा। कुछ देर के बाद राज ने इसी स्थिति में रश्मि की ब्रा का हुक खोल दिया और और उसे सीधा बिठा कर उसके बूब्स को ब्रा की कैद से मुक्त कर दिया। रश्मि पैन्टी पहने राज के लंड के ऊपर बैठी थी, अंडर वेअर में होने के बावजूद राज का लंड रश्मि की चूत को मज़ा दे रहा था। और रश्मि के 34 आकार के मम्मे पहली बार किसी मर्द के सामने नंगे थे। और राज वह भाग्यशाली इंसान था जो इन सुंदर सुडौल और कसे हुए मम्मों को पहली बार अवलोकन कर रहा था। राज ने अपने हाथ रश्मि की कमर से आगे लाते हुए उसके मम्मों पर रख दिए और रश्मि के मुंह से एक सिसकारी निकली। और मजे की तीव्रता से उसकी आँखें बंद हो गई।

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राज रश्मि को अपने ऊपर से उतार उसको बेड पर लिटा कर खुद उसके ऊपर झुक कर उसके गोरे गोरे दूध जैसे बूब्स को देखने लगा। रश्मि का पूरा शरीर सभी प्रकार के दाग से मुक्त था और इसी तरह उसके मम्मों पर भी कोई निशान नहीं था। गोरे गोरे बूब्स हल्के ब्राउन रंग के 2 घेरे और उन पर एक छोटा सा हल्का ब्राउन निप्पल बहुत सुंदर लग रहा था। राज ने पहले अपने हाथों से उनके नपल्स को छुआ और फिर उन्हें अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। राज की इस प्रक्रिया ने रश्मि को पागल कर दिया था और उसने अपनी एक टांग राज के पैरों के बीच फंसा दी थी रश्मि की इस हरकत का नतीजा यह हुआ कि राज का भी एक पैर रश्मि पैरों के बीच चला गया और साथ ही साथ उसका लंड भी रश्मि की चूत के साथ गले मिलने लगा। रश्मि ने अपनी चूत को धीरे धीरे राज के लंड पर रगड़ना शुरू कर दिया था और राज लगातार रश्मि के मम्मे चूसने में व्यस्त था।
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राज ने पहले भी कुछ लड़कियों के सुंदर बूब्स को चूसा था मगर ऐसे साफ गोरे और खूबसूरत मम्मे उसे कभी नसीब नहीं हुए थे। इसीलिए वह दिल भर कर अपने मम्मों का दूध पीना चाहता था। और रश्मि भी राज के साथ पूरा सहयोग कर रही थी। यह एक हक़ीकत है कि अगर अकेला पुरुष ही महिला को प्यार करता रहे और उत्तर में महिला रिस्पोन्स न दे तो न पुरुष को सेक्स का मूल मज़ा आता है और न ही महिला को। मगर रश्मि उन महिलाओं में से नहीं थी। अपनी प्राकृतिक विनय हया और पाकदामनी होने के बावजूद वह सेक्स के तरीकों से न केवल परिचित थी बल्कि यह भी जानती थी कि सेक्स का मूल मज़ा लेने के लिए पति का पूरा पूरा साथ देना चाहिए।

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जब राज का मम्मों से दिल भरने लगा तो वह धीरे धीरे नीचे की ओर आने लगा, और अब की बार राज ने एक ही झटके में रश्मि की पैन्टी उतार दी थी। रश्मि की पैन्टी जैसे ही उतरी रश्मि ने अपनी एक टांग दूसरे पैर पर रख कर अपनी योनी को छुपाना चाहा मगर राज ने बीच में हाथ रखकर रश्मि की नरम थाई को पकड़ा और उसकी टांगों को थोड़ा खोल दिया। पैर खोलने के बाद राज बड़ी ही उत्सुकता के साथ रश्मि की छोटी योनी को देखने लगा। छोटी इसलिए कि यह वास्तव में अन टच योनी थी। जिस पर कभी किसी पुरुष ने और तो और खुद रश्मि ने भी छेड़छाड़ नहीं की थी। उसने अपनी योनी को अपने पति की अमानत समझते हुए बहुत संभाल कर रखा हुआ था। रश्मि की योनी के दोनों होंठ आपस में मिले हुए थे। उनमें बाल बराबर भी दूरी नहीं था। योनी के होंठों का रंग हल्का पीला लाल और गुलाबी था और बालों का नामोनिशान तक नहीं था। लबों के बीच हल्की हल्की चिकनाहट मौजूद थी जो राज के शरीर की गर्मी पाने के बाद प्रकट हुई थी। राज ने अपना एक हाथ धीरे धीरे रश्मि की योनी के लबों पर फेरना शुरू किया तो रश्मि की आंखें लाल होने लगीं, उसके मुंह से आह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, आह, उफ़फफफफफफफफफफफ्फ़ ऊचच्च्च्च्चक्, ओय आह आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जैसी सिसकियाँ निकल रही थी और उसने अपने दोनों हाथों से राज का वह हाथ पकड़ लिया था जिसे वह रश्मि की योनी के लबों पर मसल रहा रहा था मगर इसके बावजूद राज ने अपने हाथ से उसकी योनी को मसलना जारी रखा जिससे रश्मि की योनी के लबों में मौजूद चिकनाहट में वृद्धि होने लगी

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कुछ ही देर बाद राज रश्मि के ऊपर झुक कर उसकी योनी की साईडों पर अपनी ज़ुबान फेर रहा था जिससे रश्मि का पूरा शरीर काँपने लगा था अब। रश्मि बुरी तरह कांप रही थी, उसका पेट तेज तेज साँसों की वजह से ऊपर नीचे हो रहा था जबकि उसके मम्मे भी लगातार ऊपर नीचे हो रहे थे।

राज ने अपनी जीभ को धीरे धीरे रश्मि की योनी के होंठों के ऊपर किया तो रश्मि ने सख्ती से राज का हाथ पकड़ लिया और उसको ऐसा करने से मना किया। राज ने सवालिया नज़रों से रश्मि की ओर देखा तो उसने काँपती हुई आवाज़ में कहा यह जगह गंदी है। मगर राज तो योनी चाटने के लिए बेकरार था। वह तो बहुत गंदी और बालों से भरी हुई योनी को भी मज़े से चाटता था तो ऐसी साफ-सुथरी और अन छुई योनी को वह कैसे छोड़ सकता था। राज ने मुस्कुराते हुए रश्मि की ओर देखा और अपने होंठ रश्मि की योनी ऊपर रखकर एक प्यार भरा लंबा चुंबन दिया। इस चुंबन ने तो जैसे रश्मि की जान ही निकाल दी थी।

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इससे पहले कि रश्मि राज को फिर रोकती ऐसा करने से राज की ज़ुबान रश्मि की योनी के होंठों पर अपना जादू चलाने की महारत से शुरू हो गई थी। राज की गीली जीभ को अपनी योनी के लबों पर महसूस करते ही रश्मि के शरीर में एक करंट दौड़ गया। और उसकी सिसकियों से अब की बार पूरा कमरा गूंजने लगा। राज की ज़ुबान ने रश्मि इतना मज़ा किया था कि वह फिर से राज को रोक ही ना पाई ऐसा करने से और राज लगातार अपनी जीभ से रश्मि की योनी को चूसे जा रहा था। कुछ देर बाद राज ने अपनी जीभ से रश्मि की योनी के होंठों पर दबाव बढ़ाया और अपनी ज़ुबान हल्की सी योनी के होंठों के बीच प्रवेश करा दी। राज की इस हरकत ने रश्मि की रही सही सहनशक्ति को भी खत्म कर दिया था और अब उसने अपनी टांगों को सख्ती से दबा लिया था मगर पैरों के बीच राज का सिर मौजूद था जिसकी वजह से वह अपनी योनी को राज की ज़ुबान से अलग न कर पाई। अभी रश्मि अपना सिर दाँये बाएं मारने लगी थी। और उसकी चूत लगातार पहले से अधिक गीली होती जा रही थी।

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कुछ ही देर के बाद रश्मि को अपनी टांगों में चीटियाँ रेंगती महसूस होने लगी। और अपनी योनी में उसे सुई की चुभन महसूस हो रही थी। वह इस स्थिति से घबरा गई और काँपती हुई आवाज़ में राज से बोली कि यह मेरे शरीर को क्या हो रहा है? राज ने रश्मि की इस बात का कोई जवाब नहीं दिया, वह जानता था कि रश्मि जैसी कुंवारी लड़की इस रमणीय कामस्राव के आनंद से बिल्कुल ही नावाकिफ़ है और वह नहीं जानती कि अब उसकी योनी से कैसा लावा निकलने वाला है। राज बिना रुके रश्मि की योनी में अपनी जीभ चला रहा था कि अचानक ही रश्मि के शरीर ने झटके लगाना शुरू किया और साथ ही उसकी चूत से एक गर्म पानी वर्षा जल चल निकला जो थोड़ा गाढ़ा और चिकनाई से भरपूर पानी राज के मुंह पर आकर गिरा था, कुछ बूँदें उछल कर हवा में गई और राज की कमर पर आकर गिरी जबकि कुछ पानी उसके मुंह के अंदर भी गया जिसको वह बिना हिचक पी गया था।
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रश्मि का शरीर कुछ देर झटके मारता रहा और फिर उसे आराम मिल गया। रश्मि के चेहरे पर खुशी और संतुष्टि के आसार थे। लेकिन साथ ही वह हैरान भी थी कि आखिर उसकी चूत से इतना पानी निकला कैसे। उसने सुन रखा था कि सेक्स के दौरान औरत की चूत पानी छोड़ती है मगर उसका विचार था कि जैसे उसकी पैन्टी गीली हो रही थी बस इतना ही पानी होता है। उसे नहीं मालूम था कि गर्म पानी का एक वर्षाके नाले जैसा पानी चल निकलता है योनी से।

दोस्तो दिल थाम के पढ़ते रहिए अभी रश्मि और राज का मिलन चल रहा है इसका पूरा आँखो देखा हाल आपकी सेवा में कल मिलेगा आपका दोस्त राज शर्मा

 


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राज ने अपना मुंह पास पड़े कपड़े से साफ किया और उसके बाद नीचे लेट गया और रश्मि को अपने ऊपर आने को कहा। रश्मि फिर पहले की तरह राज के ऊपर आकर बैठ गई थी। उसकी चूत अभी भी राज के लंड के ऊपर थी मगर फर्क यह था कि पहले रश्मि ने पैन्टी पहन रखी थी जबकि अब उसकी चूत पूरी नग्न और गर्म थी। राज के लंड का एहसास मिलते ही उसकी चूत ने एक बार फिर से चिकनी होना शुरू कर दिया था। और रश्मि अब एक बार फिर राज के ऊपर झुक कर उसके शरीर पर प्यार कर रही थी। कुछ देर बाद राज ने रश्मि से फरमाइश की कि अब वह उसका अंडर वेअर उतार दे। और मुंह दिखाई के बाद अब चूत दिखाई भी प्राप्त कर ले। राज की यह बात सुनकर रश्मि खिलखिला कर हंसने लगी। और राज को कहने लगी ये चूत दिखाई क्या होती है ?? तो राज ने कहा कि जिस तरह मुंह दिखाने के लिए उपहार होता है उसी तरह आप अपनी चूत मुझे दिखाओ और उसका भी उपहार ले लो। रश्मि ने इठलाते हुए कहा कहाँ मिलेगा चूत दिखाई उपहार? राज ने कहा मेरा अंडर वेअर उतारो इसी में है तुम्हारी चूत दिखाई का उपहार। इस पर रश्मि ने अपना हाथ राज के अंडरवेअर के ऊपर से ही उसके लंड पर रख दिया और कहने लगी यह तो मेरा अधिकार है। जो मुझे मिलना ही है चाहिए। मगर पहली बार चूत दिखाई उपहार तो कुछ और होना चाहिए?

राज ने भी रश्मि की इस बेबाकी से चूत दिखाई का उपहार ऑफर कर दिया कि रश्मि जो माँगेगी उसको मिलेगा। मगर रश्मि ने बजाय कोई और उपहार मांगे बगैर कुछ कहे राज का अंडर वेअर उसके घुटनों तक नीचे उतार दिया। अंडर वेअर उतरने की देर थी राज का 8 इंच लंबा लंड एकदम से बाहर निकल आया। 8 इंच लंबा और सख़्त लंड देखकर रश्मि की आंखों में वासना और भी बढ़ गई। वासना के साथ उसकी आँखों में आश्चर्य के आसार थे। उसे अनुमान था कि पुरुषों का लंड सेक्स के दौरान काफी लंबा और कठोर हो जाता है मगर वह यह नहीं जानती थी कि वह इतना लंबा भी हो सकता है।

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रश्मि गौर से राज के लंड को देखने लगी और बेझिझक उस पर अपना हाथ रखकर प्यार करने लगी। राज ने रश्मि से पूछा कैसा लगा तुम्हें मेरा लंड ?? तो रश्मि ने भी बेबाकी से जवाब दिया बहुत मस्त है। खूब मज़ा आ रहा है अब मुझे। यह कह कर रश्मि ने फिर से राज का लंड अपने दोनों हाथों मे लेकर उसको सहलाना शुरू कर दिया। रश्मि अपने हाथ को राज के लंड की टोपी से लेकर उसके आंडो तक नीचे की ओर फिराने लगी और उसके बाद फिर से अपने हाथ ऊपर टोपी तक लेकर जाती। नरम हाथों की गर्मी राज को बहुत मज़ा दे रही थी, इसी मजे के कारण लंड की टोपी पर वीर्य 2 बूँदें दिखाई दी जिन्हें रश्मि ने अपने हाथों से ही राज के लंड पर मल दिया। रह रहकर राज के लंड पर कुछ बूँदें दिखाई देती जिन्हें रश्मि अपने हाथों से राज के लंड पर चुपड देती। राज का लंड अब काफी चिकना हो चुका था।

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राज ने रश्मि से फरमाइश की कि वह उसके लंड मुंह में लेकर चूसे। जिसे रश्मि ने अस्वीकार कर दिया और बोली वह ऐसा गंदा काम नहीं करेगी। राज ने कहा इसमें गंदा काम वाली कौनसी बात है? मैंने भी तो तुम्हारी चूत पर जीभ फेरी है। रश्मि कहने लगी मैंने आपको मना तो किया था कि ऐसा न करें आप। राज बोला कि लेकिन तुम्हें मजा तो आया ना ऐसा करने से?

रश्मि ने हां में सिर हिला दिया। जिस पर राज ने कहा अब तुम नहीं चाहती कि तुम्हारे पति को भी मज़ा आए ?? इस पर रश्मि कुछ देर राज को देखती रही फिर बोली में केवल इस पर अपनी ज़ुबान फिराउन्गी मगर मुँह में नहीं लूँगी और ज़ुबान भी लंड के डंडे पर फिराउन्गी टोपी पर बिल्कुल नहीं। राज ने तुरंत ही कहा जैसे तुम्हारा मन करता है वैसे ही करो। कोई ज़बरदस्ती नहीं तुम्हारे साथ।

अभी रश्मि की ज़ुबान राज के लंड की टोपी से कुछ नीचे लगती और रगड़ खाती हुई उसके आंडो तक जाती जो बालों से वैसे ही साफ थे जैसे रश्मि की चूत बालों से मुक्त थी इस प्रक्रिया के दौरान कभी कभी रश्मि राज के लंड पर अपने होंठों से भी प्यार करती मगर उसने अब तक लंड अपने मुँह में नहीं लिया था। लेकिन राज के आंडो को वह 2 से 3 बार अपने मुंह में लेकर चूसने लगी थी। वह जानती थी कि यहां से पुरुषों की नमी नहीं निकलती। स्राव निकालने वाली जगह लंड ऊपर वाला हिस्सा है जहां वह पहले ही वीर्य की अनगिनत बूंदों को देख चुकी थी। इसलिए अब तक उसने वहां पर अपने होंठ या अपनी ज़ुबान नहीं फेरी थी।

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राज ने भी रश्मि के लिए थोड़ी मेहनत की और थोड़ी देर बाद जब रश्मि की चूत पहले की तरह चिकनी हो गई तो राज ने रश्मि को बेड पर लेटने को कहा और खुद उसकी टांगों के बीच आकर बैठ गया। इस प्रक्रिया के दौरान रश्मि ने राज को कोठरी में से सफेद चादर निकालने को कहा जो रश्मि की सास ने खासकर रश्मि को दी थी और उसे समझा दिया था कि संभोग से पहले यह चादर जरूर बिछा लेने से पुरुषों के विश्वास में वृद्धि होगी। ( क्योंकि ज़्यादातर पुरुषों का यही ख्याल होता है कि अगर स्त्री की योनि से अगर खून निकला तो वह कुँवारी है अन्यथा नही सफेद चादर होने से खून के धब्बे सॉफ तौर पर दिखाई देते हैं )

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रश्मि के कहने पर राज ने सफेद चादर रश्मि के नीचे बिछाई और अब रश्मि ने अपने पैर खोले और राज अपने 8 इंच के लंड से यह नाजुक सी चूत को फाड़ने के लिए तैयार बैठा था। रश्मि की आंखों में अब भय काफी हो रहा था। उसकी नज़रें राज के लंड पर थीं और वह यही सोच रही थी कि इतना बड़ा लंड उसकी नाजुक सी योनी में कैसे प्रवेश करेगा . रश्मि के भय और डर को देखते हुए और उसकी चूत की नजाकत को देखते हुए राज ने ड्रेसिंग टेबल से तेल की शीशी उठाई और रश्मि की चूत को चिकना करने लगा। फिर उसने थोड़ा सा तेल अपने लंड पर डाला और उसको भी अच्छी तरह मसल मसल कर चिकना कर दिया। अब राज ने रश्मि को इशारा किया कि वह तैयार रहे, रश्मि समझ गई कि अब यह मोटा लंड उसकी चूत की नाजुक दीवारों को चीरता हुआ उसकी गहराई में जाकर टक्कर मारने वाला है। उसने अपनी आँखें बंद कर ली और समर्पण के आलम में इंतजार करने लगी कि कब उसका पति उसका कुँवारा पन समाप्त करके उसको एक लड़की से औरत और एक कली से फूल बनाता है।

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अचानक ही रश्मि को अपनी चूत के छेद पर एक मोटी और कठोर चीज का दबाव महसूस हुआ, इससे पहले कि वो आँखें खोलकर उसका पूर्वावलोकन करती रश्मि की एक जोरदार चीख निकली, उसको ऐसे लगा जैसे कोई गर्म लोहे की छड़ ने उसके शरीर को चीर कर रख दिया है। राज ने तुरंत अपना एक हाथ रश्मि के होंठों पर रख कर उसकी ज़्यादा चीख-पुकार को खत्म किया। इस एक धक्के से ही रश्मि की आंखों में आंसू आ गए थे। जब कि अभी उसका कुँवारा पन खत्म नहीं हुआ था और राज के लंड की मात्र टोपी ही उसकी चूत के लबों को चीरती हुई अंदर तक गई थी मगर उसके बावजूद रश्मि को लगा जैसे पूरे का पूरा 8 इंच लंड उसकी चूत में उतर चुका है। रश्मि की 2, 3 हल्की चीखों के बाद राज ने एक बार फिर अपने शरीर का दबाव रश्मि पर बढ़ाया और दबाव का सारा केंद्र अपने लंड पर रखा, जिसके कारण लंड रश्मि की चूत की दीवारों से रगड़ खाता हुआ कुछ और अंदर चला गया और रश्मि की चीखें फिर जोर के साथ कमरे में गूंजने लगीं।

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इन चीखों को पहले तो राज ने अपने हाथ से रोका मगर फिर उसके बाद रश्मि के होंठों पर अपने होंठ रख कर उसकी चीखों को अपने मुंह के अंदर ही कहीं गुम कर दिया। इस धक्के के बाद राज को अपने लंड के रास्ते में बाधा महसूस हुई थी और इस बाधा ने राज के लंड को अधिक अंदर जाने से रोक दिया था। कुछ देर राज ने अपना लंड इसी बाधा के सामने रोके कर रखा फिर जब रश्मि की चीखों में कमी हुई तो राज ने अपना लंड थोड़ा बाहर निकाला और शक्ति के साथ इस बाधा पे दे मारा। इस बार मेजर राज के फौलादी लंड ने अपने रास्ते में आने वाली हर बाधा को तहस-नहस कर डाला था। कमरा रश्मि की चीखों से गूंज रहा था, रश्मि की कुंवारी चूत अभी कुंवारी नहीं रही थी। उसका पर्दा फट चुका था और खून की छोटी धार उसकी चूत से निकल कर नीचे बिछी हुई सफेद चादर पर जा गिरी थी।

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रश्मि अपनी चूत से निकलने वाले खून से बेखबर अपनी चूत में होने वाले बेतहाशा दर्द को सहन करने की नाकाम कोशिश कर रही थी जबकि मेजर राज अपनी फूल जैसी नाजुक पत्नी का दर्द कम होने का इंतजार कर रहा था ताकि वह ज़्यादा धक्के मारकर अपनी पत्नी को हनीमून के मूल मजे से परिचित करा सके। उसके लिए राज को और अधिक इंतजार नहीं करना पड़ा, रश्मि के अंदर मौजूद गर्मी और सेक्स को एंजाय करने की इच्छा ने जल्द ही उसको दर्द भुला दी थी। और अब वह थोड़ा संतोष के साथ अपने पति की आँखों में आँखें डाले इशारा कर रही थी कि अपना काम जारी रखो। रश्मि की ओर से संकेत मिलते ही राज ऊपर उठा और एक जोरदार धक्का रश्मि की चूत में मारा जिससे राज का 8 इंच लंड पूरी तरह रश्मि की चूत की गहराई में उतर गया था।

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फिर रश्मि की चीखों से कमरे गुंजा मगर इस बार रश्मि ने खुद ही अपनी चीख पर काबू पा लिया था। एक चीख के बाद दूसरी चीख उसने खुद ही रोक ली थी। और राज ने भी नीचे बिछी हुई चादर पर लाल निशान देख लिया था जिससे वे पूर्ण संतुष्ट हो गया था कि रश्मि का कुँवारा पिन राज के मजबूत लंड ने ही खत्म किया है। अब उसको अपनी प्यारी सी पत्नी पर और भी अधिक प्यार आने लगा था। वह अपने लंड को रश्मि की चूत में रोक कर उसका दर्द कम होने का इंतजार कर रहा था कि अचानक ही रश्मि ने अपनी गाण्ड हिला कर खुद ही राज का लंड अपनी चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। इतना मज़बूत सिग्नल मिलने पर राज ने अब खुद से रश्मि की चूत के अंदर झटके मारने शुरू कर दिए रश्मि की चूत ने बहुत मजबूती के साथ राज के लंड को जकड़ रखा था जिसकी वजह से राज का लंड बहुत मुश्किल से अंदर बाहर हो रहा था। राज ने काफ़ी समय बाद इतनी टाइट चूत में अपना लंड उतारा था। और आज उसको सही मज़ा आ रहा था चुदाई का। जबकि रश्मि भी अपने पति का पूरा साथ दे रही थी। राज जो अभी तक आराम से लंड प्रवेश करा रहा था रश्मि की गाण्ड को तेज तेज हिलाने से उसे सिग्नल मिला कि अपनी स्पीड बढ़ा दो।

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यह संकेत मिलते ही राज ने अपनी स्पीड बढ़ा दी, कुछ ही झटकों के बाद रश्मि को अपने शरीर में पहले की तरह सुई चुभन महसूस होने लगी और देखते ही देखते उसकी चूत ने पानी से राज के लंड को पूरी तरह भिगो दिया था। राज का लंड अब बहुत आसानी से रश्मि की चूत में खुदाई कर रहा था। रश्मि की चूत के पानी ने उसकी चूत को और राज के लंड अधिक चिकना कर दिया था। राज बिना रुके धक्के लगाने में व्यस्त था। और अब राज के इन धक्कों से रश्मि की चीखें सिसकियों में बदल चुकी थीं। चिकनी चूत ने लंड को स्वतंत्र रूप से अंदर बाहर जाने की अनुमति दे दी थी और इसी का फायदा उठाते हुए राज अविराम मशीन चला रहा था अपनी पत्नी की चूत में।

 
कुछ देर के बाद राज ने स्थिति चेंज करने के लिए रश्मि की चूत से अपने लंड को निकाला तो रश्मि को ऐसा लगा जैसे उसकी चूत में फंसा हुआ कोई मोटा डंडा एकदम से बाहर निकल गया हो और अब उसको अपनी चूत पहले की तरह हल्की फुल्की महसूस हो रही थी। मगर राज ने बिना समय जाया किए खुद नीचे लेटकर रश्मि को अपने ऊपर बिठा लिया और उसकी चूत को अपने लंड ऊपर सेट करके नीचे से एक जोरदार धक्का रश्मि की चूत में मारा। इस धक्के ने रश्मि के चूतड़ों को राज की नाभि के हिस्से से मिला दिया था और धुप्प की एक ध्वनि उत्पन्न हुई। फिर रश्मि को लोहे की गर्म छड़ अपनी नाजुक चूत में जाती हुई महसूस हुई और उसकी एक चीख भी निकली लेकिन अब की बार इस चीख में दर्द के साथ साथ मज़ा भी था।

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राज के एक ही धक्के से पूरा लंड रश्मि की चूत में घुस गया था और अब राज का हर धक्का रश्मि के चूतड़ों और राज के नाभि भाग के मिलाप का कारण बन रहा था जिसकी वजह से पूरा कमरा धुप्प धुप्प की आवाज से गूंज रहा था। राज ने रश्मि को अपने ऊपर लिटा कर अपने सीने से लगा लिया। रश्मि के मम्मे राज के सीने में छिप गए थे और राज रश्मि को चूतड़ों से पकड़ कर अपना लंड तेजी के साथ उसकी चूत में अन्दर बाहर कर रहा था। रश्मि ने अपना सिर उठा कर अपने गर्म होंठ राज होंठों से मिला दिए और चुदाई के साथ चुंबन करने का मज़ा भी लेने लगी। अब लंड काफी धाराप्रवाह के साथ रश्मि की चूत में पंप चला रहा था। और पंप के चलाने से जल्द ही फिर से पानी निकलने वाला था। रश्मि अब अपनी सुहाग रात फुल मजे से एंजाय कर रही थी।

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हालांकि अब भी रश्मि को अपनी चूत की दीवारों के साथ राज का लंड रगड़ता हुआ ऐसा लगता था जैसे उसके शरीर के साथ कोई कीचड़ लूट रगड़ाई कर रहा हो, मगर इस चुभन और रगड़ाई का भी अपना ही अनोखा मज़ा था। कुछ देर राज के होंठ चूसने के बाद अब रश्मि उठकर बैठ गई थी, अब की बार वह खुद भी राज के लंड ऊपर उछल रही थी जिसके कारण लंड की चोट पहले से अधिक लग रही थी। पहले केवल राज नीचे से धक्के मार रहा था मगर अब रश्मि खुद भी उछल रही थी, रश्मि की चूत से जब लंड बाहर निकलता तो राज नीचे होता और रश्मि ऊपर की ओर उठती , जब लंड ने अंदर जाना होता तो राज एक जोरदार धक्का ऊपर से मारता और रश्मि भी अपने पूरे वजन के साथ राज के लंड के ऊपर आती। राज और रश्मि अब अपनी सुहाग रात पहली चुदाई को फुल एंजाय कर रहे थे। इतने में रश्मि को अपने शरीर में ही सुई की सी चुभन महसूस होने लगी। मगर अबकी बार वह जानती थी कि उसके बदले में मिलने वाला मज़ा क्या और कितना महत्व रखता है।

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राज ने भी अब की बार पूरी गति के साथ धक्के लगाना शुरू कर दिया था और उसने रश्मि के चूतड़ों को जोर से पकड़ रखा था। कुछ देर धक्के लगाने के बाद राज ने कुछ जोरदार धक्के लगाए और इसके साथ ही अपना सारा वीर्य अपनी पत्नी रश्मि की चूत के अंदर निकाल दिया जैसे-जैसे राज के लंड से वीर्य निकल रहा था वैसे ही रश्मि की चूत भी अपना पानी छोड़ रही थी। चूत और लंड ने जब एक साथ पानी छोड़ा तो रश्मि की चूत में जैसे बाढ़ आ गई। और यह बाढ़ जोकि बहुत अधिक गर्म पानी था इससे रश्मि की चूत और गर्म जवानी को एक सुकून मिला।

दोनों अपना अपना पानी छोड़ने के बाद काफी देर तक एक दूसरे के गले लगकर गहरी गहरी सांस लेते रहे। राज का 8 इंच लंड अब छोटा होकर 2 इंच का हो गया था जिसको रश्मि बहुत उत्सुकता के साथ देख रही थी और हैरान हो रही थी कि यह नन्हा मुन्ना सा 2 इंच लंड कुछ ही देर पहले कैसे लोहे की रॉड की तरह उसकी चूत में घुसा हुआ था। मेजर राज ने आज अपनी पत्नी को अपने लंड से कली से खुला गुलाब बना दिया था और रश्मि भी लंड के मजे से पहली बार परिचित हुई थी। दोनों अब तक एक दूसरेके शरीर गर्म कर रहे थे और समय समय पर एक दूसरे को चूम भी रहे थे।

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इसी चूमा चाटी के दौरान राज के लंड ने एक बार फिर अपना सिर उठाना शुरू किया और देखते ही देखते 2 इंच की लुल्ली 8 इंच लंबा और मोटा ताजा लंड बन गया। रश्मि लंड को इस तरह लंबा होते हुए बहुत आश्चर्य से देख रही थी। रश्मि समझ गई थी कि उसके पति का अभी मन नहीं भरा और वह एक और चुदाई का राउंड लगाकर अपनी प्यास बुझाना चाहता है। जबकि रश्मि बहुत बुरी तरह थक चुकी थी और उसकी चूत आज पहली चुदाई के बाद लंड लेने के लिए तैयार नहीं थी मगर फिर भी उसने पति को मना करना उचित नहीं समझा। अच्छी पत्नी वही होती है जो पुरुषों के लंड के लिए अपनी योनी को हर समय तैयार रखे। यही रश्मि ने भी किया और बिना कोई नखरा दिखाए फिर से चुदने के लिए तैयार हो गई।

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राज ने एक बार फिर अपनी पत्नी के पैर ओपन कर अपना लंड हाथ में पकड़े रश्मि की योनी मारने के लिए तैयार बैठा था कि इतने में साथ पड़े दराज में मोबाइल की घंटी बजने लगी। मेजर राज ने सब कुछ भुलाकर आगे बढ़कर मोबाइल उठाना चाहा तो रश्मि ने मना कर दिया और कहा कम से कम आज की रात तो मोबाइल को छोड़ दो। मगर मेजर राज ने कहा कि उसका अपना निजी मोबाइल बंद है, यह विशेष मोबाइल है जिस पर उसकी खुफिया एजेंसी द्वारा अति आवश्यक काम के लिए ही कॉल आती है वह कॉल रेजैक्ट नहीं कर सकता। यह कह कर उसने कॉल अटेंड की तो आगे से फोन पर उसको तुरंत ड्यूटी पर आने के लिए कहा गया। दुश्मन देश का एक एजेंट भारत के कुछ गुप्त रहस्य चुरा कर वापस अपने देश भागने की तैयारी कर रहा था और मुम्बई में उस समय मेजर राज से अधिक होनहार गुप्त एजेंट मौजूद नहीं था। इसलिए रॉ ने मेजर राज के हनीमून का विचार किए बिना ही उसे फोन करके वापस ड्यूटी पर बुलाया।

मेजर राज जिसमें स्वदेश के प्यार की भावना कूट कूटकर भरी थी उसने भी बिना कुछ कहे अपनी गर्म और जवान पत्नी की चिकनी चूत को छोड़ा और तुरंत ही अपनी अलमारी से आम कपड़े निकालकर पत्नी के सिर पर चुंबन देकर कक्ष से निकल गया। रश्मि हैरान और फटी हुई नजरों से मेजर राज को देख रही थी कि कैसे अचानक ही हनीमून पर जब वह अपना लंड रश्मि की चूत में डालने ही वाला था, राज सब कुछ भूल कर अपना कर्तव्य निभाने निकल गया था। मेजर राज ने अपनी काले रंग की कोरोला कार स्टार्ट की ओर घर से निकल पड़ा।

मेजर राज इन्हीं सोचों में गुम था कि अचानक उसके सिर पर ठंडे बर्फ जैसे पानी की एक बाल्टी डाल दी गई। सिर पर ठंडा पानी पड़ते ही मेजर राज अपनी सोचों की दुनिया से वापस आया तो उसने देखा वह उसी अंधेरे कमरे में जहां कर्नल इरफ़ान से आमना-सामना होने के बाद उसकी आंख खुली थी। यूं तो मेजर राज को विशेष ट्रेनिंग दी गई थी कि किसी भी तरह की स्थिति में अपने आसपास का ख्याल रखना है, लेकिन रश्मि की यादों में खो कर मेजर राज को पता ही नहीं लगा जब उसके जेल का दरवाजा खुला और एक पुरुष और एक औरत ने अंदर प्रवेश किया। मेजर राज को होश तब आया जब उसके सिर पर ठंडे पानी की बाल्टी डाल दी गई।

मेजर राज ने होश में आते ही फिर हिलने जुलने की कोशिश की मगर फिर वह बुरी तरह नाकाम रहा। कमरे में बहुत हल्की रोशनी थी जिसमें वह आने वाले पुरुष और महिला को पहचान नहीं पा रहा था। उनकी मंद सी छवि दिख रही थी। मेजर राज ने अनुमान लगाया कि पुरुष की उम्र 30 के करीब रही होगी जबकि महिला की उम्र 25 से 26 साल होगी। मेजर राज उन्हें पहचानने की कोशिश कर रहा था कि आने वाले व्यक्ति ने महिला को वापस चलने का इशारा किया और बोला आ ही गया है भारतीयकुत्ता होश में चल अब उसके लिए खाना भिजवा दे। मेजर राज ने पुरुष को आवाज़ दी और पूछा कि तुम कौन हो ?? और मैं कहाँ हूँ इस समय ?? पुरुष ने एक बार मुड़ कर घूर कर राज को देखा और बिना कोई उत्तर दिए वापस चला गया।

 


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कुछ देर के बाद फिर से दरवाजा खुला और वही औरत जो पहले अंदर आई थी अपने हाथ में एक प्लेट लिए अंदर आई। उसने मेजर राज के सामने आकर बड़ी हिकारत से उसके सामने थाली रखी और बोली चल अब खा ले। यह कह कर वह स्त्री चुपचाप वापसी के लिए मुड़ गई। मेजर राज फिर चिल्लाया कि तुम कौन हो ?? और मैं कहाँ हूँ?

औरत मुड़ी और बोली मैं कौन हूँ तुझे इससे मतलब चुप कर रोटी खा फिर तुझे इधर से शिफ्ट करना है।

मेजर राज ने फिर पूछा इतना तो बता दो मैं कब से हूं इधर ??

इस पर महिला बोली कल रात तुझे मालिक बेहोश हालत में लाया था और आज तुझे होश आया है। यह कह कर वह स्त्री वापस चली गई और दरवाजा फिर से बंद हो गया।

मेजर राज ने पहले तो हिकारत से खाने को देखा जैसे कि कहना चाह रहा हो कि वह दुश्मन का दिया हुआ खाना नहीं खाएगा। मगर फिर खाने पर नज़र पड़ते ही उसको भयंकर भूख महसूस होने लगी और वह चुपचाप थाली की तरफ हाथ बढ़ाने लगा। थाली में पतली दाल और साथ मे कुछ रोटियाँ पड़ी थीं। मेजर राज के दोनों हाथ आपस में मजबूती से बंधे थे। उसने बहुत मुश्किल से रोटी खाई। आश्चर्यजनक रूप से मेजर राज सारा खाना खा गया और प्लेट ऐसी साफ कर दी जैसे धूलि हुई हो। उसको बहुत भूख लगी थी। खाना खाने के बाद मेजर राज ने फिर से कमरे में नज़रें दौड़ाई तो पूरा कमरा खाली था। अंदर अंधेरे के सिवा कुछ नहीं था। फिर मेजर राज चिल्लाया और पानी मांगने लगा। मगर शायद उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था।

काफी समय के बाद मेजर राज को फिर से दरवाजे के पास कुछ कदमों की आवाज आई तो उसने फिर से पानी के लिए चिल्लाना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद दरवाजा खुला और वही स्त्री हाथ में पानी का जग ले आई। और मेजर राज के सामने रख कर खाने वाली प्लेट उठा कर बाहर चली गई। मेजर राज ने इस बार कुछ नहीं पूछा क्योंकि वह समझ गया था कि इससे कोई जवाब नहीं मिलेगा। इसलिए वह चुपचाप पानी पीने में लग गया। इतना तो उसे यकीन था कि वह कर्नल इरफ़ान की कैद में है। मगर अंदर आने वाला पुरुष कर्नल इरफ़ान हरगिज़ नहीं था। और यह महिला कौन थी मेजर राज उसको भी नहीं जानता था। वह यह भी नहीं जानता था कि वह कब से इस कमरे में कैद है।

मेजर राज अब आने वाले हालात के बारे में सोचने लगा। वह जानता था कि ये लोग मुझे मारेंगे तो नहीं। क्योंकि दुश्मन हमेशा अपने दुश्मन को जिंदा रखने की ही कोशिश करता है ताकि अधिक से अधिक रहस्य मालूम कर सके। अब मेजर राज ने अनुमान लगाया कि आखिर कर्नल इरफ़ान कौनसी जानकारी लेकर भारत से भागा था ?? और अब वह मेजर राज के साथ क्या करेगा मगर इनमें से किसी भी बात का जवाब नहीं था मेजर के पास। मेजर इन्हीं विचारों में गुम था कि फिर से दरवाजा खुला और एक लंबा चौड़ा आदमी अंदर प्रवेश किया। उसके पीछे 2 आदमी और भी थे जो हाथ में बंदूक लिए खड़े थे। ये तीनों लोग भेषभूषा से ही एक बदमाश गिरोह के गुंडे लग रहे थे। आगे आने वाले व्यक्ति ने मेजर राज के पास खड़े होकर उसको सिर के बालों से पकड़ा और खड़ा होने को कहा। मेजर राज लड़खड़ाते हुए खड़ा हो गया और इस आदमी की आंखों में आंखें डालकर बोला कि तुम कौन हो और मैं यहाँ क्यों हूँ ??

मेजर की आंखों में भय का नामोनिशान तक न था। इस व्यक्ति ने मेजर राज के मुंह पर एक जोरदार थप्पड़ मारा जिससे मेजर का मुंह एक पल के लिए सही साइड पर मुड़ गया मगर मेजर ने तुरंत ही वापस उसकी आँखों में आँखें डाली और बोला बताओ मुझे तुम कौन हो और क्या चाहते हो? ?

अब की बार भी मेजर की आंखों में भय नहीं था। मेजर सीधा खड़ा था उसके पैर भी बंधे थे और हाथ भी। मेजर की बात का जवाब देने के बजाय उस व्यक्ति ने कहा यहाँ मैं तेरी बातों का जवाब देने नहीं आया, जो मैं पूछूँ केवल तू इसका उत्तर दे। वरना यह पीछे जो लोग खड़े हैं यह अपनी बंदूक की सारी गोलियां तेरे शरीर में उतार देंगे ......... अभी उस व्यक्ति की बात पूरी नहीं हुई थी कि मेजर राज ने अपना सिर बहुत जोरदार ढंग से सामने खड़े व्यक्ति की नाक पर दे मारा जिससे वह बलबलाता हुआ पीछे की ओर लड़खड़ाते हुए 4, 5 कदम पीछे हो गया। राज की इस हरकत से पीछे दो खड़े लोगों ने अपनी अपनी बंदूकों के रुख राज के सिर पर किए मगर उनके बॉस ने तुरंत ही हाथ के इशारे से उन्हें मना कर दिया कि गोली नहीं चलाना .

अब वह गुस्से में राज की ओर देखने लगा तो मेजर राज बोला तेरे इन किराए के कुत्तों से मैं तो क्या मेरे देश का बच्चा भी नहीं डरेगा हिम्मत है तो उन्हें कहो मेरे ऊपर गोली चलाने को वास्तव में राज जो रॉ का लायक एजेंट था वह अच्छी तरह जानता था कि कोई भी सेना कभी भी दूसरी सेना के कैदी को इतनी आसानी से नहीं मारते। क्योंकि उनका उद्देश्य कैदी से ज़्यादा से ज्यादा जानकारी लेना होता है। इसलिए उन्हे कभी गवारा नहीं होता कि हाथ आए कैदी को कुछ जानकारी लिए बिना मार दिया जाय यही कारण था कि मेजर राज बिल्कुल निडर खड़ा था।

अब की बार अंदर आने वाले व्यक्ति ने पूछा बताओ तुम लेफ्टिनेंट कर्नल रंगीला का पीछा क्यों कर रहे थे? और हमारे जहाज पर क्या करने आए थे ??? उसकी यह बात सुनकर मेजर राज ने एक ठहाका लगाया और बोला ये धोखा किसी और को देना, कर्नल इरफ़ान जैसे कुत्ते को किसी भी रूप में पहचान सकता हूँ। वह लेफ्टिनेंट कर्नल रंगीला नहीं बल्कि कर्नल इरफ़ान था जिसका में पीछा कर रहा था। मेजर की यह बात सुनकर वह व्यक्ति मुस्कुराया और बोला अच्छा तो तुम जानते हो कि वो कर्नल इरफ़ान था। चलो यह तो अच्छी बात है। अब यह भी बता दो कि तुम उनका पीछा क्यों कर रहे थे ??? उसकी यह बात सुनकर राज बोला कि मैं तब तक तुम्हारे किसी सवाल का जवाब नहीं दूंगा जब तक तुम मेरे कुछ सवालों के जवाब नहीं दे देते। दूसरे व्यक्ति ने पूछा कौन से सवाल ?? तो मेजर राज बोला कि मैं इस समय कहाँ हूँ ?? और तुम लोग कौन हो? राज की बात सुनकर वह व्यक्ति बोला तुम इस समय जामनगर में हो और हम कौन हैं यह जानने की तुम्हें कोई जरूरत नहीं।

यह जवाब सुनकर राज ने अनुमान लगा लिया कि यह पाकिस्तान का तटीय शहर है, अब मेजर राज को विश्वास हो गया था कि वह पाकिस्तान का कैदी बन गया है। मगर उसने बिना परेशान हुए अगला सवाल किया कि मैं कितनी देर बेहोश रहा ?? इस पर वह व्यक्ति बोला हमें 3 दिन पहले बता दिया गया था कि एक भारतीयकुत्ता पकड़ा गया है और कल तुम्हें यहां पहुंचा दिया गया था। तब से तुम इधर ही हो। यह सुनकर मेजर राज हैरान रह गया। 3 दिन पहले उस व्यक्ति को पता लगा था कि मेजर राज कर्नल इरफ़ान के कब्जे में है, उसका मतलब है कि मेजर राज कम से कम 3 दिन से बेहोश पड़ा था। अबकी बार वह व्यक्ति दहाडा कि अब बताओ तुम कर्नल इरफ़ान का पीछा क्यों कर रहे थे ???

उसकी बात सुनकर मेजर राज ने बोला जब वह सड़क पर यातायात नियमो का उल्लंघन करते हुए 90 के बजाय 130 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से गाड़ी चलाएगा तो मैं उसका पीछा करूंगा ही ना। मेरी तो ड्यूटी है यह।

मेजर राज का यह जवाब सुन कर दूसरा व्यक्ति दहाडा क्या मतलब है तुम्हारा?

मेजर राज ने मुस्कुराते हुए बोला अरे यार में यातायात पुलिस में हूँ मुम्बई में। रात 3 बजे एक होंडा जिसमें तुम्हारा कर्नल इरफ़ान कहीं जा रहा था मैने उसकी कार का पीछा किया क्योंकि वो यातायात नियमों का उल्लंघन करते हुए पूरे 130 किमी। । । । । । । । इससे पहले कि मेजर राज की बात पूरी होती एक झन्नाटे दार थप्पड़ मेजर मुँह पर पड़ा जिसने मेजर राज के चारों चिराग रोशन कर दिए थे।

मेजर राज को फिर से उसी व्यक्ति की गुर्राती हुई आवाज़ आई अबे दुष्ट आदमी एक यातायात पुलिस वाले को कैसे पता हो सकता है कि लेफ्टिनेंट कर्नल रंगीला के भेष में कर्नल इरफ़ान जा रहा है ... तू निश्चित रूप से रॉ का कुत्ता है। सच सच बोल नहीं तो तेरी जीभ खींच कर बाहर कर दूँगा में ....

उस व्यक्ति की यह बात सुनकर मेजर राज ने अपनी जीभ बाहर निकाल दी .... वह व्यक्ति हैरान होकर मेजर को देखने लगा तो मेजर बोला लो ज़ुबान खींच लो जो कुछ उगलवाना है। यह कह कर मेजर राज हंसने लगा और फिर बोला यार कार के शीशे काले थे मुझे तो नहीं पता था अंदर कौन है। मैंने तो पीछा करना शुरू कर दिया था। फिर बंदरगाह के पास मैंने कर्नल इरफ़ान को कुछ हथियार बंद लोगों के साथ बातें करते सुना, वे उसको कर्नल इरफ़ान कह कर ही संबोधित कर रहे थे तो मैं समझ गया कि ये आदमी जो कानून का उल्लंघन कर रहा है यह कर्नल इरफ़ान है।

मेजर की यह बात खत्म हुई तो वह व्यक्ति मुस्कराने लगा और बोला चूतिया समझ रखा है क्या तूने हमें ?? कुछ भी बोलेगा और हम मान लेंगे ???

मेजर राज ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा अच्छा यार न मानो। जो सच है मैंने तुम्हें बता दिया।

वह व्यक्ति फिर बोला सच सच बता रॉ ने किस मकसद से तुझे भेजा था कर्नल के पीछे ???

मेजर राज ने अंजान बनते हुए कहा कौन रॉ ??? फिर खुद ही बोल पड़ा अच्छा अच्छा भारत की खुफिया एजेंसी ... अरे यार वे इतने पागल थोड़ी ही है जो एक यातायात पुलिस के कांस्टेबल को कर्नल के पीछे भेज दें, मैंने बताया ना कि वह ओवर स्पीड । । । । एक और झन्नाटे दार थप्पड़ मेजर राज के चेहरे पर लगा और उसकी बात बीच में ही रह गई।

अब की बार मेजर राज ने गुस्से से उस व्यक्ति को देखा और उसकी आँखों में आँखें डालते हुए बोला कि थप्पड़ का बदला तो तुमसे ज़रूर लूँगा। एक बार मेरे हाथ तो खोल फिर देख तुझे तेरे भाइयों के सामने कुत्ते की मौत मारूँगा।

 
रात के 12 बजे जय बाकी लोगों के साथ गोआ पहुंच चुका था। वहां आर्मी कॅंट मे पहुंचते ही जय और डॉली अपने कमरे में चले गए जबकि रश्मि और पिंकी दूसरे रूम में चले गए। मेजर राज की वजह से जय की पहले से ही आर्मी केंट में एक सुंदर रूम की बुकिंग थी। बॉम्बे से हवाई जहाज़ के माध्यम गोआ तक की यात्रा में सब थक गये थे सर्विस बॉय ने सारा सामान जय के कहने के अनुसार उचित कमरों में रख दिया था। थोड़ी देर बाद सर्विस बॉय ने पहले जय और फिर रश्मि का कक्ष खटखटाया और उन्हें खाने के लिए डाइंग टेबल पर आने के लिए कहा। कुछ ही देर में सब लोग खाना खा हो चुके तो थकान के कारण अपने अपने कमरों में चले गए। रश्मि और पिंकी अपने कमरे में गए जबकि डॉली और जय अपने रूम में चले गए।जय के कमरे में एक खिड़की थी जिसके पीछे समुद्र और पेड़ ही पेड़ थे। रात के इस पहर में यह दृश्य खासा भयानक लग रहा था मगर जय जानता था कि सेना के अंडर होने के कारण यह सुरक्षित क्षेत्र है।डॉली ने कमरे में जाते ही उस खिड़की के पर्दे गिरा दिए और शौचालय चली गई।

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जय ने कमरे की रोशनी बंद कीं और एक ज़ीरो वाट का बल्ब जलता रहने दिया। वह बहुत थक चुका था और अब कुछ सोना चाहता था। अपने बूट और कोट उतार कर अब वह कंबल में घुसने ही लगा था कि शौचालय का दरवाजा खुला और डॉली बाहर आई। डॉली पर नज़र पड़ते ही जय अपनी नज़रें हटाना भूल गया था। पिंक कलर की शॉर्ट नाइटी में डॉली इस समय कोई सेक्स क्वीन लग रही थी। गहरे गले वाली नाइटी में डॉली के 38 आकार के बूब्स का उभार बहुत स्पष्ट नजर आ रहा था। कसे हुए सख्त मम्मे आपस में जुड़े हुए थे और उनके बीच बनने वाली क्लीवेज़ लाइन किसी भी आदमी को पागल कर देने के लिए काफी थी। नाइटी मुश्किल से डॉली के 34 आकार के चूतड़ों को घेरे हुए थी। नीचे डॉली ने एक जी स्ट्रिंग पैन्टी पहन रखी थी जिसने सामने से डॉली की चूत को ढक रखा था जबकि पीछे से डॉली के चूतड़ों को कवर के लिए पैन्टी मौजूद नहीं था। पीछे की साइड पर केवल पैन्टी की एक स्ट्रिंग थी जो डॉली के 34 आकार के भरे हुए चूतड़ों की लाइन में गुम हो गई थी।

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डॉली ने मदहोश नजरों से जय को देखा और एक सेक्सी अंगड़ाई ली जिससे डॉली की शॉर्ट नाइटी और ऊपर उठ गई और उसकी जी स्ट्रिंग पैन्टी स्पष्ट दिखने लगी। इसी तरह डॉली ने मुंह दूसरी तरफ कर लिया तो नाइटी ऊपर उठने की वजह से उसके भरे हुए चूतड़ भी अपना जलवा दिखाने लगे। डॉली को इस हालत में देखते ही जय की पेंट में लंड सिर उठाने लगा और गोवा में नवंबर की ठंड में भी जय के शरीर में आग लगा दी।

जय बेड से उठा और तुरंत डॉली के पास पहुंचकर उसको अपनी गोद में उठा लिया। गोद में उठाया तो डॉली के 38 आकार के गोल मम्मे जय के चेहरे के सामने आ गए जबकि जय के हाथ डॉली के पैरों के आसपास थे। डॉली ने अपनी टाँगें पीछे की ओर फ़ोल्ड कर ऊपर उठा ली और जय को सिर से पकड़ कर अपने सीने के साथ लगा दिया। डॉली के सीने पर सिर रखते ही जय को लगा जैसे उसने अपना सिर एक नरम और गुदाज़ तकिए पर रख दिया हो। जय ने अपना सिर उठाया और डॉली की क्लीवेज़ लाइन देखने लगा तो उसने अपने गर्म गर्म होंठ डॉली के मम्मों के उभारों पर रख दिए जो नाइटी से बाहर दिख रहे थे। जय दीवाना वार डॉली के मम्मों को प्यार करने लगा। थोड़ी देर बाद जय ने डॉली को बेड पर धक्का दिया और खुद उसके ऊपर गिर कर उसको पागलों की तरह चूमने लगा। जय कभी डॉली के नरम होंठों का रस चूसता तो कभी उसकी गर्दन को दांतों से खाने लगता। कभी उसके मम्मे हाथ में पकड़ कर जोर से दबाता तो कभी डॉली के चूतड़ों का मांस हाथ में लेकर उन्हें जोर से दबाता।

डॉली की मोटी थाईज़ पर प्यार करते हुए जय उनकी नरमी का दीवाना हुआ जा रहा था। वह बड़े जोश के साथ डॉली की थाईज़ को चूम रहा था और फिर जय के होंठ थाईज़ से होते हुए डॉली की पैन्टी तक पहुंचे, जो अब तक की कार्रवाई के परिणामस्वरूप काफी गीली हो चुकी थी। डॉली की पैन्टी से आने वाली खुशबू ने जय को मदहोश कर दिया था। जय ने अपनी ज़ुबान निकाली और पैन्टी के गीले हिस्से पर रख कर उसको चाटने लगा। डॉली ने अपने दोनों पैर उठाकर जय की गर्दन के आसपास लपेट दिए और उसके सिर के बालों में अपनी उंगलियां फेरने लगी। जैसे-जैसे जय डॉली की पैन्टी पर अपनी जीभ फेर रहा था वैसे-वैसे डॉली की आउच, उम्मह, उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह आह आह। आह आह। । अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्म । । उम उम्म्म .... मज़ा आ गया जान, आह, खा जाओ इन्हे तुम्हारे ही है यह, ऊच जैसी आवाजें बुलंद हो रही थीं। थोड़ी देर के बाद जय ने डॉली की पैन्टी उतार दी। पैन्टी उतारते ही वह डॉली की हल्के गुलाबी रंग की चूत पर टूट पड़ा। डॉली की चूत महज 10 दिन पहले ही पहली बार फटी थी इसीलिए अभी तक उसकी चूत के होंठ आपस में मिले हुए थे। अब जय की ज़ुबान तेजी के साथ चल रही थी। डॉली ने गोवा आने से पहले विशेष रूप से अपनी चूत की सफाई की थी। उसका पहले से कार्यक्रम था कि गोआ जाते ही वहां की ठंड में जय के गरम लंड से अपनी चूत की प्यास बुझानी है। कुछ ही देर के बाद जय की ज़ुबान की रगड़ाई के कारण डॉली की चूत ने पानी छोड़ दिया।

इस ठंड में भी डॉली की चूत ने कई बार गर्म पानी छोड़ा था जिससे जय का चेहरा भर गया था। उसके बाद डॉली ने पास पड़े बॉक्स से तोलिया निकाल कर जय के चहरे को साफ किया और उसे चूमने लगी। फिर डॉली ने जय की शर्ट को गले से पकड़ा और एक ही झटका मारा , जय की शर्ट खुलती चली गई उसकी शर्ट के बटन टूट चुके थे और डॉली ने बिना इंतजार किए उसकी शर्ट उतारने के बाद उसकी बनियान भी एक ही झटके में उतार दी और उसके सीने पर प्यार करने लगी। वह एक जंगली बिल्ली की तरह जय पर टूट पड़ी थी। जब की शादी के बाद जय उसको 5, 6 बार चोद चुका था मगर ऐसी दीवानगी जय ने अभी तक नहीं देखी थी। जय को डॉली की यह दीवानगी और जंगली पन बहुत अच्छा लग रहा था। डॉली अपने हाथ और उंगलियों को जय की कमर पर फेर रही थी उसके नाखून जय की कमर पर अपने निशान छोड़ रहे थे जिससे जय की दीवानगी भी बढ़ती जा रही थी। फिर डॉली ने जय को बेड पर धक्का दिया और उसकी पेंट की बेल्ट खोलने के बाद ज़िप खोली और उसकी पेंट को घुटनों तक नीचे उतार दिया।

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वीर्य की निकलने वाली बूंदों की वजह से जय का अंडर वेअर गीला हो चुका था जय की तरह डॉली ने भी अपनी ज़ुबान को जय के गीले अंडर वेअर पर रख दिया और उसके वीर्य की सुगंध का आनंद लेने लगी। कुछ देर तक उसका अंडर वेअर चाटने के बाद अब डॉली ने जय का अंडरवेअर भी उतार दिया और पैन्ट भी उतार दी थी। जय अब पूरी नंगा था और उसका 7 इंच का लंड डॉली के हाथ में था जिसको वह किसी लॉलीपाप की तरह चूसने में व्यस्त थी। जय की टोपी से निकलने वाला पानी डॉली अपनी जीभ से चाट्ती और फिर उस पर थूक का गोला बनाकर गिराती और अपने हाथों से इसे पूरे लंड पर मसल देती। उसके बाद फिर से जय के लंड की टोपी को अपने मुंह में डालती और जय के लंड से फिसलता हुआ डॉली का मुंह आंडो तक चला जाता। डॉली के मुंह की गर्मी जय के लंड को बहुत मज़ा दे रही थी। डॉली बहुत ही मजे के साथ जय की लंड चुसाइ कर रही थी।

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कुछ देर की चुसाइ के बाद जय के लंड की मोटाई थोड़ी बढ़ी और उसकी नसें स्पष्ट होने लगीं। डॉली समझ गई कि उसका लंड वीर्य उगलने वाला है मगर आज तो डॉली अपने आप में नहीं थी उसने बिना इसकी परवाह किए जय के लंड के चौपे लगाना जारी रखे और आखिरकार जय ने अपनी सारी वीर्य डॉली के मुँह में ही निकाल दिया जिसकी आखिरी बूंद तक डॉली ने अपने गले से नीचे उतार ली . जब जय अपना सारा वीर्य निकाल चुका तो डॉली ने अपनी जीभ से उसके लंड पर लगा हुआ वीर्य भी चाट लिया और फिर अपने होंठों पर जीभ फेरकर उसके मजे लेने लगी।

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अब जय का लंड थोड़ा मुरझा गया था। अब जय उठा और डॉली की नाइटी उतार दी। डॉली ने नीचे ब्रा पहनने की जहमत नही उठाई थी उसके 38 आकार के भारी मम्मे जय के हाथों में थे जिन पर वह अपनी ज़ुबान फेर रहा था। डॉली ने जय का एक हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रखा और दूसरा हाथ मम्मों पर ही रहने दिया, जय अब एक हाथ से उसका एक मम्मा दबा रहा था जबकि दूसरे हाथ से उसकी चूत में उंगली फेर रहा था और डॉली का दाहिना मम्मा जय के मुंह में था जिसका निप्पल जय लगातार चूस रहा था और डॉली आँखे बंद किए आह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हऊच की आवाजें निकाल रही थी। डॉली आज निडर होकर सिसकियाँ ले रही थी और आज की रात सेक्स एंजाय कर रही थी।

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जब कि डॉली की सिसकियाँ घर में भी रश्मि को सुनाई देती थीं मगर वहाँ डॉली काफी नियंत्रित करती थी मगर कमरा साथ होने के कारण कुछ सिसकियाँ साथ वाले कमरे में भी सुनाई दे रही थीं। मगर आज तो डॉली को किसी बात का होश नहीं था। वो बिना किसी डर के जोर से सिसक रही थी। वह जानती थी कि औरत की सिसकियाँ पुरुष को जोश दिलाती है और वह फिर जमकर चुदाई करता है। और हो भी ऐसा ही रहा था डॉली की सिसकियों की ही वजह से जय का लंड फिर से तन चुका था और चूत में जाने के लिए तैयार था। एक कमरा छोड़ कर दूसरे कमरे में लेटी रश्मि भी डॉली की सिसकियाँ सुन रही थी जबकि पिंकी कमरे में पहुंचते ही सो गई थी। डॉली की सुनाई देने वाली सिसकियाँ रश्मि को तीव्रता से राज की याद दिला रही थीं। राज ने पहली रात में रश्मि को अपने 8 इंच के लंड से जो मज़ा दिया था रश्मि वह मज़ा अभी तक नहीं भूली थी। और डॉली की सिसकियाँ रश्मि की चूत को भी गर्म कर रही थीं।

यही कारण था कि इधर डॉली की सिसकियाँ जय के लंड खड़ा कर चुकी थीं तो उधर उसकी सिसकियों से रश्मि भी अपनी चूत में उंगली फेर रही थी। रश्मि की चूत आज भी ऐसी ही थी जैसे बिल्कुल कुंवारी चूत होती है। क्योंकि इसमें सिर्फ एक बार ही सुहागरात वाले दिन लंड गया था।

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जब जय का लंड फिर से चुदाई को तैयार हुआ तो जय ने डॉली के पैर खोलना चाहे ताकि वो उसकी चूत में अपना लंड उतार सके। मगर डॉली ने उसको मना कर दिया और जय को लेटने को कहा। जय लेट गया तो डॉली जय के ऊपर आई और उसके लंड का टोपा अपनी चूत के छेद पर फिट कर एक ही झटके में उसके लंड पर बैठ गई।

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जय का लंड डॉली चूत की दीवारों के साथ रगड़ खाता हुआ उसकी चूत की गहराई तक उतर गया और गर्भाशय से जा टकराया जिस पर डॉली ने एक जोरदार सिसकी भरी जिसने रश्मि के कानों में घुस कर उसकी चूत में और ज़्यादा आग लगा दी । उधर डॉली जय के लंड पर घोड़े की तरह सवारी कर रही थी और आवाज़ें निकाल रही थी तो दूसरे कमरे में रश्मि की उंगली अब चूत में पहले से अधिक तेजी के साथ अपना काम कर रही थी।

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जब डॉली जय के लंड पर उछल उछल कर के थक गई तो जय ने उसे अपने ऊपर लिटा लिया और नीचे से अपना लंड पूरी गति के साथ डॉली की चूत में चलाना शुरू किया। 5 मिनट की चुदाई के बाद डॉली की योनी में बाढ़ आ गई और उसकी चूत का सारा पानी जय के आंडों और थायज़ तक आ गया था। डॉली ने बिना इंतजार किए जय की गोद से उतर कर डॉगी स्टाइल की स्थिति ले लिया और जय को आमंत्रित किया कि वह अब पीछे से आकर डॉली की चुदाई करे। जय ने भी बिना समय बर्बाद किए पीछे से आकर डॉली की चूत पर अपना लंड रखा और एक ही धक्के में पूरा लंड सट से डॉली की चूत में उतार दिया। फिर डॉली की टाइट योनी में जय का 7 इंच का लंड पकडम पकड़ाई खेलने लगा। जैसे ही लंड अंदर की ओर धक्का लगाता चूत पूरी ताकत के साथ उसे पकड़ लेती जिसकी वजह से पूरा लंड एक पल के लिए दब सा जाता तो लंड अपनी ताकत से चूत की पकड़ से निकलता और चूत से बाहर निकल आता केवल लंड का टोपा ही चूत के अंदर रह जाता है, फिर धक्का लगता और फिर से लंड चूत के अंदर जाता और चूत फिर से उसको पूरी ताकत के साथ पकड़ लेती।

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डॉली का यह रूप जय के लिए बिल्कुल नया था। उसने पहले भी बहुत तेज़ी से डॉली को चोदा था मगर डॉली ने ऐसा दीवाना पन पहले कभी नहीं दिखाया था। पहले डॉली डॉगी स्टाइल में चुदाई करवाते हुए थोड़ी बेचैनी महसूस करती थी मगर आज तो वह खुद अपनी गाण्ड आगे पीछे करके चुदाई का मज़ा उठा रही थी। जय जैसे जैसे डॉली की चूत में धक्के मार रहा था वैसे ही साथ में उसके चूतड़ों पर थप्पड़ मार मार कर डॉली को और अधिक आनंद दे रहा था डॉली के चूतड़ों से जय की जांघे टकराने पर धुप्प धुप्प की आवाज कमरे के वातावरण को बहुत सेक्सी बना रही थीं। डॉली के 38 आकार के मम्मे हवा में लटके हुए थे जो हर धक्के के साथ आगे हिलते और जब लंड बाहर निकलता तो मम्मे भी वापस पीछे की ओर झूलते जब चूतड़ों पर हाथ मार मार कर डॉली के चूतड़ लाल हो गए तो जय ने आगे झुककर डॉली के मम्मे पकड़ लिये, अब जय के पास ज्यादा गैप नहीं था वह लंड को ज़्यादा बाहर नहीं निकाल पा रहा था। मगर अब उसके धक्के पहले की तुलना में अधिक गति से लग रहे थे, जय का आधा लंड योनी से बाहर निकलता और एक जोरदार धक्के के साथ वापस योनी की गहराई से जाकर टकरा जाता

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अब डॉली ने अपना अगला हिस्सा ऊपर उठा लिया था। जो कि वह अभी भी एक तरह से डॉगी स्टाइल में ही चुदाई करवा रही थी क्योंकि जय पीछे से ही उसकी चूत में लंड डाले उसको चोद रहा था मगर उसने अपना अगला धड़ उठा लिया था और घुटनों पर खड़ी हो गई थी जबकि उसकी गाण्ड बाहर निकली हुई थी क्योंकि लंड को चूत तक का रास्ता चाहिए था। डॉली की कमर जय के सीने से जुड़ी हुई थी और गाण्ड बाहर निकलकर जय की नाभि के हिस्से से टकराती थी जबकि लंड लगातार डॉली की चूत की खुदाई कर रहा था। इस स्थिति में डॉली की सिसकियाँ चीखों में बदल चुकी थीं जय ने उसे आवाज हल्की रखने को कहा मगर डॉली इस समय अपने आप में नहीं थी उस पर चुदाई का भूत सवार था और वह अपनी हनीमून की पहली रात को यादगार बनाना चाहती थी। वह जय के तूफानी धक्कों को काफी देर से सहन कर रही थी साथ ही अपनी चूत को अपनी उंगली से भी सहला रही थी। थोड़ी देर के बाद एक बार फिर डॉली की चूत ने पानी छोड़ दिया जो फव्वारे के रूप में चादर पर गिरता चला गया। और कुछ बूँदें बेड की दूसरी ओर फर्श पर भी जा गिरी

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दूसरे कमरे में रश्मि का चेहरा लाल हो रहा था उसको उस समय राज के लंड की कमी महसूस हो रही थी मगर वह सिर्फ अपनी उंगली को ही अपनी चूत में चला रही थी। उसकी चूत अब डॉली की सिसकियाँ सुन सुनकर काफी गीली हो चुकी थी जबकि रश्मि का दूसरा हाथ उसके मम्मों पर था और वह अपना मम्मा जोर से दबा रही थी।

डॉली तीसरे राउंड के लिए तैयार थी जबकि जय के लंड ने अभी तक पानी नहीं छोड़ा था। डॉली अब बॅड पर लेट गई और खुद ही अपनी टाँगें खोल कर जय को बीच में बैठने के लिए आमंत्रित किया, जय ने डॉली के पैर पकड़कर चौड़े किए और उसके बीच बैठकर अपने लंड की टोपी डॉली की चूत पर रखकर एक ही झटके में लंड उसकी चूत के अंदर प्रवेश करा दिया अब जय का लंड बड़े आराम से डॉली की चूत को चोद रहा था और डॉली अपने मम्मों को अपने हाथों में पकड़ कर उन्हें दबा दबाकर अधिक आनंद महसूस कर रही थी। उसकी आंखों में लाल डोरे तैर रहे थे और वह जय को प्रशंसा भरी नज़रों से देख रही थी और उसको अधिक से अधिक उकसा रही थी कि वह और अधिक शक्ति के साथ उसकी चूत की चुदाई करे।

5 मिनट की चुदाई ने डॉली की चूत को लाल कर दिया था अब जय के शक्तिशाली लंड के सामने उसको अपनी चूत हार मानती दिख रही थी और उसकी हिम्मत जवाब दे रही थी, जय के धक्के भी पहले की तुलना में तूफानी होते जा रहे थे और कुछ ही देर बाद वो तीनों एक साथ ही अपना अपना पानी निकालने लगे। डॉली और जय का पानी डॉली की चूत में ही मिल गया जबकि रश्मि की चूत का पानी उसकी सलवार के अन्दर ही बहता रहा। डॉली और रश्मि दोनों ने चूत का पानी निकलते हुए सिसकियाँ ली और जय भी अपना पानी निकालने के बाद डॉली के ऊपर गिर गया।

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डॉली अब प्यार से जय को चूम रही थी और उसकी प्रशंसा कर रही थी कि उसने आज बहुत मज़ा दिया। जबकि जय भी डॉली के जंगली पन बहुत खुश था। उसे नहीं मालूम था कि उसकी पत्नी में इतनी आग भरी हुई है वरना वो शादी के तीसरे दिन ही उसे हनीमून पर लाकर खूब चोदता। कुछ देर बाद जय और डॉली एक दूसरे के सीने से लगे सो चुके थे। वे नंगे ही बिना कपड़े पहने सो गए थे। पहले यात्रा की थकान और फिर डॉली के वहशीपन के कारण जबरदस्त चुदाई ने दोनों को खूब थका दिया था। दूसरी ओर रश्मि भी चूत का पानी निकलने के बाद कुछ शांत हुई थी और राज का लंड याद करते करते सो गई।

 
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