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उमा के जाने के बाद रूचि मुझसे चिपक गई, बोली- आज तो पूरी रण्डी बन गई ! खूब मसला है लोगों ने ! सच मज़ा भी बहुत आया। हसीनाओं को चुदते देख चुदने का मन बहुत कर रहा था। चोदने का तो तुमने भी खूब मज़ा लिया है। रण्डियों को गाण्ड मरवाते देखकर मेरा भी गाण्ड मरवाने का मन कर रहा है, मेरी गाण्ड में लण्ड डालो। मैंने रूचि के चुचूक चूसते हुए कहा- चलो उलटी हो जाओ, तुम्हारी गाण्ड की सवारी और कर ली जाए।
मैंने अपना लौड़ा उसकी गाण्ड में चढ़ा दिया, उसकी गाण्ड खुली हुई थी, थोड़ी देर में ही वो मज़े वाली चीखें देने लगी।
मैंने उसकी चोटी खींचते हुए कहा- तू तो खिलाड़ी है, गाण्ड पहले भी मरवा चुकी है।
उसकी गाण्ड ठोंकते हुए मैंने उसके चूतड़ों की भी जमकर हाथ से पिटाई की और चुचूकों को हाथों से जोर से मसला। रूचि मस्त आहें भर रही थी। 15 मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी होगी, इसके बाद मैंने वीर्य उसकी गाण्ड में छोड़ दिया और बिस्तर पर लेट गया।
रूचि मुझसे चिपक गई और बोली- मेरे पति गाण्ड के शौकीन रहे हैं, वो अक्सर मेरी गाण्ड ही मारते हैं, उनका लण्ड सात इंच लम्बा और तुम्हारे जितना ही मोटा है। लेकिन मेरे पति दो मिनट में ही झड़ जाते हैं, मुझे उनसे आज तक न चूत का मज़ा आया और न ही गाण्ड का। सपना ने मुझे जब यह बताया कि वह दो सौ से ज्यादा लोगों से गाण्ड मरवा चुकी है लेकिन जो मज़ा तुमने दिया वो आज तक उसे कोई नहीं दे पाया तो मेरा भी मन तुमसे गाण्ड मरवाने का करने लगा। सच में तुमसे चुदवा कर गाण्ड बहुत दुःख रही है लेकिन मरवाने में बड़ा मज़ा आया।
रूचि बोली- अगर तुम थके न हो तो एक बार मेरी चूत और मार दो ! साली की खुजली भी कम हो जाएगी।
मैंने कहा- ठीक है लेकिन पहले मेरा लण्ड तो खड़ा करो !
यह सुनते ही रूचि मेरा लण्ड चूस कर फिर खड़ा करने लगी। इस बार मैंने उसकी चूत बाथरूम के टब पर हाथ टिका कर पेली और उसे चोद चोद कर मस्त कर दिया। अब हम दोनों लेट गए।
रूचि और मैं सरीना के साथ उमा की खोली पर सुबह वापस आ गए। थोड़ी देर बाद उमा शीतल के साथ आ गई, उसने बताया- शीतल ने अपना उधार चुका दिया है, अब शीतल मुक्त है। लेकिन राका ने इसको बहुत बुरी तरह से चोदा है, साले ने तीन बार गाण्ड मारी है, बहुत थकी हुए है यह ! इसकी चूत तो पूरी सूज रही है।
उमा ने पानी गर्म करके शीतल की चूत की सिकाई की। हम सब लोग इसके बाद थोड़ी देर बातें करके सो गए।
शीतल और रूचि मेरे साथ डबल बेड पर मुझसे चिपक कर नंगी सोईं। उमा और सरीना सिंगल बेड पर सोई लेकिन रात को सब बेसुध होकर सोये। अगले दिन सुबह शीतल की चूत और गाण्ड दुःख रही थी लेकिन हम सबने खूब बातें की उमा ने शीतल को मेरी दोस्त बना दिया। बारह बजे रूचि, मैं और शीतल साथ साथ नहाए। मैंने रूचि और शीतल की चूची और चूत मसलते हुए उन पर खूब साबुन लगाया, उन दोनों ने भी मेरे लौड़े पर साबुन लगाया और सहलाया।
इसके बाद अगली रात को फिर रूचि और शीतल मेरे साथ सोईं लेकिन अब हमारी थकान कम हो गई थी रात को सोने से पहले मैंने दोनों की चूचियाँ खूब चूसीं और रात को एक बार रूचि को और सुबह एक बार शीतल को चोदा।
अगले दिन सबसे पहले उमा ने शीतल और रूचि को सरीना के साथ उनके घर भेज दिया। रूचि और शीतल ने उमा से वादा लिया कि अगले महीने तक उमा एक बार और उन्हें मुझसे अपनी खोली पर चुदवाएगी।
उसके बाद उमा मुझसे बोली- तेरे को तो शाम को भेजूँगी।
उमा मुझसे बोली- तूने मज़े बहुत ले लिए, कुछ इनाम तो दे !
मैंने उसको अपना बैंक कार्ड देकर कहा- इसमें दो लाख रुपए हैं, जितना तुम्हें चाहिए उतना ले लेना और कार्ड सरीना को वापस कर देना। तुमने और सरीना ने जितनी ख़ुशी मुझे दी है और कोई कभी नहीं दे पाता।
उमा मुस्कुराते हुए बोली- मैं इसमें से सिर्फ दस हजार रुपए रखूँगी, दस हजार मैं सरीना को, बीस हजार शाकाल जी को और दस हजार रूचि को दूंगी। लेकिन यह असली इनाम नहीं है। असली इनाम है तेरी चड्डी में।
मैं चौंकते हुए बोला- मैं समझा नहीं !
उमा बोली- अच्छे अच्छे माल को तो तूने बड़ी जल्दी अपना लौड़ा खिला दिया और अब मुझ पचास साल की से कह रहा है समझा नहीं? मतलब चुपचाप चड्डी उतार, मैं भी तो तेरे लण्ड का स्वाद चख लूं।
मैंने मुस्कुराते हुए अपनी चड्डी उतार दी। उमा ने मेरा लौड़ा चूस कर खड़ा कर दिया और अपना पेटीकोट-ब्लाउज उतार दिया। उमा पचास की थी लेकिन मुझे लगा कि जो भी मुझे मिला है उमा और सरीना के कारण ही मिला है इसलिए मैंने उमा की फटी चूत और गाण्ड बड़े प्यार से दो-दो बार मारी।
उमा ने चुदते हुए मुझे चोदने के कई गुर सिखाए और चार बजे तक हम दोनों सेक्स करते रहे।
इसके बाद उमा बोली- कल तेरी बीवी वापस आ रही है, रात को कितना ही न-नुकर करे, चोदियो जरूर ! लेकिन केवल चूत मारना और उसके बाद देखना तेरी बीवी में क्या बदलाव आता है। चोदू तो तू बन ही गया है।
मैंने अपना लौड़ा उसकी गाण्ड में चढ़ा दिया, उसकी गाण्ड खुली हुई थी, थोड़ी देर में ही वो मज़े वाली चीखें देने लगी।
मैंने उसकी चोटी खींचते हुए कहा- तू तो खिलाड़ी है, गाण्ड पहले भी मरवा चुकी है।
उसकी गाण्ड ठोंकते हुए मैंने उसके चूतड़ों की भी जमकर हाथ से पिटाई की और चुचूकों को हाथों से जोर से मसला। रूचि मस्त आहें भर रही थी। 15 मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी होगी, इसके बाद मैंने वीर्य उसकी गाण्ड में छोड़ दिया और बिस्तर पर लेट गया।
रूचि मुझसे चिपक गई और बोली- मेरे पति गाण्ड के शौकीन रहे हैं, वो अक्सर मेरी गाण्ड ही मारते हैं, उनका लण्ड सात इंच लम्बा और तुम्हारे जितना ही मोटा है। लेकिन मेरे पति दो मिनट में ही झड़ जाते हैं, मुझे उनसे आज तक न चूत का मज़ा आया और न ही गाण्ड का। सपना ने मुझे जब यह बताया कि वह दो सौ से ज्यादा लोगों से गाण्ड मरवा चुकी है लेकिन जो मज़ा तुमने दिया वो आज तक उसे कोई नहीं दे पाया तो मेरा भी मन तुमसे गाण्ड मरवाने का करने लगा। सच में तुमसे चुदवा कर गाण्ड बहुत दुःख रही है लेकिन मरवाने में बड़ा मज़ा आया।
रूचि बोली- अगर तुम थके न हो तो एक बार मेरी चूत और मार दो ! साली की खुजली भी कम हो जाएगी।
मैंने कहा- ठीक है लेकिन पहले मेरा लण्ड तो खड़ा करो !
यह सुनते ही रूचि मेरा लण्ड चूस कर फिर खड़ा करने लगी। इस बार मैंने उसकी चूत बाथरूम के टब पर हाथ टिका कर पेली और उसे चोद चोद कर मस्त कर दिया। अब हम दोनों लेट गए।
रूचि और मैं सरीना के साथ उमा की खोली पर सुबह वापस आ गए। थोड़ी देर बाद उमा शीतल के साथ आ गई, उसने बताया- शीतल ने अपना उधार चुका दिया है, अब शीतल मुक्त है। लेकिन राका ने इसको बहुत बुरी तरह से चोदा है, साले ने तीन बार गाण्ड मारी है, बहुत थकी हुए है यह ! इसकी चूत तो पूरी सूज रही है।
उमा ने पानी गर्म करके शीतल की चूत की सिकाई की। हम सब लोग इसके बाद थोड़ी देर बातें करके सो गए।
शीतल और रूचि मेरे साथ डबल बेड पर मुझसे चिपक कर नंगी सोईं। उमा और सरीना सिंगल बेड पर सोई लेकिन रात को सब बेसुध होकर सोये। अगले दिन सुबह शीतल की चूत और गाण्ड दुःख रही थी लेकिन हम सबने खूब बातें की उमा ने शीतल को मेरी दोस्त बना दिया। बारह बजे रूचि, मैं और शीतल साथ साथ नहाए। मैंने रूचि और शीतल की चूची और चूत मसलते हुए उन पर खूब साबुन लगाया, उन दोनों ने भी मेरे लौड़े पर साबुन लगाया और सहलाया।
इसके बाद अगली रात को फिर रूचि और शीतल मेरे साथ सोईं लेकिन अब हमारी थकान कम हो गई थी रात को सोने से पहले मैंने दोनों की चूचियाँ खूब चूसीं और रात को एक बार रूचि को और सुबह एक बार शीतल को चोदा।
अगले दिन सबसे पहले उमा ने शीतल और रूचि को सरीना के साथ उनके घर भेज दिया। रूचि और शीतल ने उमा से वादा लिया कि अगले महीने तक उमा एक बार और उन्हें मुझसे अपनी खोली पर चुदवाएगी।
उसके बाद उमा मुझसे बोली- तेरे को तो शाम को भेजूँगी।
उमा मुझसे बोली- तूने मज़े बहुत ले लिए, कुछ इनाम तो दे !
मैंने उसको अपना बैंक कार्ड देकर कहा- इसमें दो लाख रुपए हैं, जितना तुम्हें चाहिए उतना ले लेना और कार्ड सरीना को वापस कर देना। तुमने और सरीना ने जितनी ख़ुशी मुझे दी है और कोई कभी नहीं दे पाता।
उमा मुस्कुराते हुए बोली- मैं इसमें से सिर्फ दस हजार रुपए रखूँगी, दस हजार मैं सरीना को, बीस हजार शाकाल जी को और दस हजार रूचि को दूंगी। लेकिन यह असली इनाम नहीं है। असली इनाम है तेरी चड्डी में।
मैं चौंकते हुए बोला- मैं समझा नहीं !
उमा बोली- अच्छे अच्छे माल को तो तूने बड़ी जल्दी अपना लौड़ा खिला दिया और अब मुझ पचास साल की से कह रहा है समझा नहीं? मतलब चुपचाप चड्डी उतार, मैं भी तो तेरे लण्ड का स्वाद चख लूं।
मैंने मुस्कुराते हुए अपनी चड्डी उतार दी। उमा ने मेरा लौड़ा चूस कर खड़ा कर दिया और अपना पेटीकोट-ब्लाउज उतार दिया। उमा पचास की थी लेकिन मुझे लगा कि जो भी मुझे मिला है उमा और सरीना के कारण ही मिला है इसलिए मैंने उमा की फटी चूत और गाण्ड बड़े प्यार से दो-दो बार मारी।
उमा ने चुदते हुए मुझे चोदने के कई गुर सिखाए और चार बजे तक हम दोनों सेक्स करते रहे।
इसके बाद उमा बोली- कल तेरी बीवी वापस आ रही है, रात को कितना ही न-नुकर करे, चोदियो जरूर ! लेकिन केवल चूत मारना और उसके बाद देखना तेरी बीवी में क्या बदलाव आता है। चोदू तो तू बन ही गया है।