• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

शिद्दत -1- 2

भाग 12

उधर होटल मे,रानी रिया के जाने बाद सोचने लगी कि आखिर रिया ने मुझसे झूठ क्यों बोला !!!

रानी अपने मन मे ये सोचने लगी कि , रिया के हॉस्पिटल जाने के बाद मेरे पास होटल मे पापा का फ़ोन आया था,शायद स्कूल वालों ने उन्हें इन्फॉर्म कर दिया हो कि मेरा एक्सीडेंट हुआ था,और उन्होंने तो मुझसे कहा था कि उनकी विदेश यात्रा कुछ दिनों के लिए पोस्टपोंड हो गयी है और वो मुझे लेने यहाँ आ रहे हैं !! ये बात शायद रिया को पता नही होगीइसीलिए उसने मुझे झुठ बोला,पर उसने झुठ क्यों बोला...? और उसकी राजू से क्या बात हुई...? ये सारी बातें मुझे पता लगानी होगी,पर कैसे..?

रानी यही सब सोचने लगती है कि अचानक उसके रूम का फ़ोन रिंग करता है। रानी फ़ोन उठाती है ,

"हेलो,"- रानी फ़ोन उठा कर बोलती है!!

"मैडम,आपसे मिलने कोई माँ,जी आयी है" होटल के रिसेप्शन से रानी को बोला जाता है ।

"माँ जी,कौन माँ जी,क्या काम है मुझसे उनको..?"रानी ने आश्चर्य से पूछा !!

रानी का जवाब सुनने के बाद होटल की रिसेप्शनिस्ट ने सरिता देवी से पूछा कि "माँ ,जी आपका नाम क्या है,और आपको रानी जी से क्या काम है बताएं...?"

तब सरिता देवी ने बोला,"उनसे कहिए कि मैं राजू गाइड की माँ हूँ और रानी जी से कुछ बात करना चाहती हुँ राजू के बारे मे "

, रिसेप्शनिस्ट ने वैसा ही कहा रानी को और जैसे ही रानी ने ये सुना कि राजू की माँ उससे मिलने आयी है तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था,और उसने तुरंत रिसेप्शनिस्ट को उन्हें ऊपर रूम मे भेजने को कहा,स्कूल का सारा स्टाफ घूमने जा चुका था होटल मे सिर्फ रानी और रिया बचे हुए थे स्कूल ग्रुप मे से क्योंकि रानी और रिया का मूड नही हो रहा था घूमने का !! तभी रिसेप्शनिस्ट सरिता देवी को ऊपर भेजती है और रानी के रूम तक छोड़ने आती है!! राजू की माँ रानी के रूम का दरवाज़ा बजाती है,तभी रानी गेट खोलती है और माँ जी देखते ही उनको देखते ही उनके पैर छूती है और नमस्ते करके उन्हें अंदर आने का बोलती है !!

राजु की माँ रूम मे आ जाती है और रानी से पूछती हैं कि,"आज तुमने मेरे पैर क्यों छुए बेटा...?"

राजू की माँ के ई सवाल से रानी को कुछ जवाब नही सुझा तो उसने हड़बड़ाहट मे कह दिया,"कुछ नही माँ जी बस ऐसे ही,आप मेरी माँ समान है तो मैंने सोचा पैर छूने चाहिए,आप बैठिए यहाँ...और बताईये की राजू कैसा है...?अब ठीक है ना वो...? और कैसे आना हुआ आपका यहाँ...?"

"अरे इतने सारे सवाल एक साथ,बताती हूँ बेटा,सब बताती हुँ,राजू ठीक है और 2 दिन मे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज भी हो , जाएगा...पर मैं यहाँ तुम्हारे और राजू के बारे मे ही बात करने आई हुँ !! " राजू की माँ ने रानी से कहा !!

तब राजू की माँ ने पूरा वाक्या सुनाया और जो जो रिया ने राजू को हॉस्पिटल मे आकर कहा था वो सब राजू की माँ ने वैसा का वैसा ही सुना दिया , माँ जी पूरी बात सुनकर रानी की आँखों से आँसू बहने लगे कि जिस रिया को वो अपनी सबसे अच्छी दोस्त मानती थी वो ऐसा करेगी अपने प्यार को पाने के लिए ये सोचकर उसे बहुत दुख हो रहा था!! तब राजू की माँ ने रानी को चुप करवाते हुए उससे कहा," चुप हो जा बेटा,इंसान जब प्यार मे होता है तो उसे सही गलत समझ मे नही आता,और उस समय अपने प्यार को पाने के लिए इंसान को जो सही लगता है वही वो करता है,और रिया भी राजू के प्यार मे ये सब कर रही है, पर राजू रिया से नही तुझसे प्यार करता है "!! राजू की माँ अचानक ख्यालों में खोते हुए कहती है !!

इतना सुनते ही रानी चुप हो गयी और बोली,"सच माँ,आपको राजू ने ये सब कहा क्या...?"

"बेटा मैं माँ हूँ उसकी,मैंने उसकी आँखों मे तेरे लिए प्यार देखा है,और वही प्यार मैंने तेरी आँखों मे राजू के लिये देखा था जिस वक्त वो किले से नीचे गिरा था और तू मेरे पास आई , थी" राजू की माँ ने रानी से कहा !!

"पर,अभी भी एक समस्या है...!"राजू की माँ ने चिंता भरे स्वर मे कहा !!

"अभी तुम नाबालिग हो और राजू बालिग,अभी तुम्हारा इस तरह राजू से मिलना तुम दोनों के लिए परेशानी खड़ा कर देगा" राजू की माँ ने रानी से कहा !!

"कोई बात नही माँ जी,मैं राजू के लिये इंतज़ार कर सकती हूँ,क्योंकि मैं उससे प्यार करने लगी हुँ "रानी ने राजू की माँ से कहा !!

"अच्छा बेटा अब मैं चलती हूँ,मुझे राजू ने ही भेजा था यहाँ सच्चाई जानने के लिए,अब सबकुछ साफ हो गया है,पर तुमको मुझसे एक वादा करना होगा" राजू की माँ ने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए रानी से वादा करने का बोला !!

तब रानी ने पूछा ," कैसा वादा माँ जी...?"

"तू वादा कर की तू अपना गुस्सा रिया पे नही निकलेगी और उसके पापा को नौकरी से नही निकलवायेगी" राजू की माँ ने रानी से कहा..

,

"माँ,जी माना कि मेरा गुस्सा खराब है पर मैं ऐसा कुछ नही करूँगी और न कर सकती हुँ,मेरे पापा मेरी बात मानकर क्यों अपने सबसे खास एम्प्लोयी को निकलेंगे,रिया के पापा Mr सुनील शर्मा हमारी कंपनी के सबसे पुराने एम्प्लाइज मे से एक हैं,और पापा मेरे कहने पर उन्हें क्यों निकलेंगे,आप घबराइए मत,मैं ऐसा कुछ नही करूँगी" रानी ने माँ से कहा !!

"और एक बात पूछनी थी बेटा,"माँ ने रानी से पूछा

"ये होटल मे नीचे लॉन मे इतने रिपोर्टर्स की भीड़ क्यों है"राजु की माँ ने पूछा !!

"अरे वो,...वो रिपोर्टर्स मेरे लिए खड़े हुए हैं पर मैं उनसे नही मिलना चाहती,वो क्या है ना माँ जी की मेरा पूरा नाम रानी सिंघनिया है मेरे पापा का नाम बलदेव सिंघनिया है ! वो एक बहुत बड़े बिजनेसमैन है,और यहाँ पर बहुत बड़ा होटल खोलने वाले है इस दीवाली पर,मेरे जन्मदिन पर वो मेरे नाम से एक होटल जोधपुर मे खोलेंगे ! ये ख़बर छपी थी यहाँ के अखबार मे कुछ दिन पहले,और यहाँ के प्रेस वालो के बीच वो बहुत पॉपुलर हो गए और जब प्रेस वालों को ये ख़बर लगी की किले वाले एक्सीडेंट मे सिंघनिया सर की लड़की बाल बाल बच गयी तो उन्हें न्यूज़ के लिये मसाला मिल गया ! वो , लोग मेरा इंटरव्यू लेना चाहते है पर मेरा कोई मूड नही है उनसे मिलने का..." रानी ने कहा

"अच्छा ठीक है बेटा,अब मैं चलती हुँ"ऐसा कहकर राजू की माँ वहाँ से जाने लगती है ।।

"रुकिए माँ जी,"कहकर रानी राजू की माँ को रोकती है

"ये मेरा मुंबई वाला टेलीफोन नंबर है,ये राजू को दे दीजिएगा और उससे कहिएगा की अभी प्रेस वालो की वजह से मैं उससे मिलने नही आ सकती,नही तो पापा के होटल प्रोजेक्ट मे प्रॉब्लम हो सकती है। मेरे पापा आज शाम को मुझे लेने आ रहे हैं उन्हें मेरे एक्सीडेंट की ख़बर लग गयी है,मैं शाम तक मुम्बई के लिए निकल जाउंगी,पर मैं राजू से मुंबई जाकर बात करूँगी,अगर आपका कोई टेलीफोन नंबर हो तो मुझे दे दीजिए" रानी ने राजू की माँ को नंबर देते हुए कहा !!

"ठीक है बेटा,मैं राजू से कह दूंगी पर हमारा कोई टेलीफोन नंबर नही है,हम तो जोधपुर के पास बांधवगढ़ मे रहते हैं,वहाँ पूरे गाँव मे सिर्फ ठाकुर साहब के यहाँ फ़ोन है,पर मैं तुम्हे हमारा पता लिख के दे सकती हूँ,तुम ख़त लिख सकती हो,राजू रोज जोधपुर आता ही है काम करने,कभी बात कर लिया करेगा तुमसे फ़ोन पे" राजू की माँ ने रानी से कहा!!

,

"ठीक है माँ जी"रानी कहती है !!

राजू की माँ वहाँ से चली जाती है तभी अचानक रिया वहाँ आ जाती है और रानी की माँ को वहाँ से जाते हुए देख लेती है। राजू की माँ को वहाँ देखकर रिया परेशान हो जाती है और ये जानने के लिए उत्सुक रहती है कि आखिर राजू की माँ वहाँ क्यों आयी थी रानी से मिलने..? इसी उत्सुकता मे रिया रानी के पास आकर रानी से राजू की माँ के आने का कारण पूछती है और तभी रानी बिना कुछ सोचे समझे रिया को एक जोरदार थप्पड़ मारती है!!!!!
 
इस थप्पड़ की उम्मीद रिया को रानी से कभी नही थी,वो एक दम से चोंक गयी कि रानी से उसे थप्पड़ क्यों मारा,और फि उसने रानी से पूछा,- " ये क्या बत्तमीजी है रानी,ये थप्पड़ क्यों मारा मुझे...?!!

"ओह!!रियली! तुझे अभी तक नही समझ आया कि मैंने ये थप्पड़ क्यों मारा तुझे!!" रानी ने जवाब देते हुए पूछा !!

"तो सुन,शक तो मुझे तेरी बातों पर तब ही हो गया था जब तूने कहा था कि तेरी बात पापा से हुई है और वो देश के बाहर हैं,जबकि आज तेरे जाने के बाद,जब तू राजू से मिलने गयी थी,पापा का फ़ोन आया था मेरे पास, शायद स्कूल वालों से उनको ख़बर लग गयी होगी,तब उन्होंने मुझे कहा कि उनका जाना कैंसिल हो गया है और वो यहाँ मुझे लेने आ रहे हैं शाम तक!!"रानी ने रिया से कहा

ये सुनते ही रिया के चेहरे से जैसे हवाइयां उड़ गई हो ! उसे उम्मीद नही थी कि उसका झूठ इतनी जल्दी पकड़ा जाएगा !!

फिर आगे रानी ने कहा,-" मुझे तुझपर शक हुआ और मैं ये पता लगाना चाहती थी कि आखिर तूने ये झूठ क्यों बोला,और भगवान ने मेरा साथ दिया और मेरी किस्मत इतनी अच्छी है कि माँ जी ने आकर मुझे यहाँ सबकुछ बता दिया कि तूने वहाँ राजू से जाकर क्या कहा"!!

,

तब रिया बोल पड़ी,"ये कैसे हो सकता है,उस समय मेरे और राजू के अलावा वहाँ कोई नही था !!"

तब रानी ने रिया को बताया कि कैसे राजू की माँ ने छुपकर सारी बातें सुन ली थी और तूने राजू को मना किया था उसे बताने के लिए,तो ये सारी बातें राजू की माँ ने मुझे आकर बताई ! "अरे तू मुझे पहले बता देती की तू राजू से प्यार करती है,तो मैं उस पर कभी नज़र नही डालती,पर अब राजू भी मुझसे प्यार करता है तो अब यही सही होगा कि तू हमारे बीच से हट जाए,मैंने राजू की माँ से वादा किया ही इसीलिए सिर्फ एक थप्पड़ मे तुझे छोड़ रही हुँ,वरना तेरा वो हाल करती की तू ज़िन्दगी भर नही भूल पाती,आज के बाद तेरी और मेरी दोस्ती ख़त्म,तेरा ये धोखा कभी नही भूल पाऊंगी रिया!!"

रिया और रानी दोनो अपने अपने कमरों मे जाकर रोने लगती है,रानी को रिया की दोस्ती हमेशा के लिए खोने का दुख होता है पर एक खुशी ये भी होती है कि राजू का प्यार उसे मिल गया,वहीँ दूसरी तरफ रिया ने उसकी बचपन की दोस्ती हमेशा के लिए खो दी थी और जिस प्यार को पाने के लिए उसने अपनी दोस्ती कुर्बान की वो प्यार भी उसे नही मिल पाया !!

, कुछ ही देर में अचानक रानी को होटल रूम मे एक फ़ोन आता है,रानी फ़ोन उठाती है और उधर से राजू की आवाज़ आती है ,

"हेलो,रानी जी बोल रही हैं" - राजू

"रानी जी नही सिर्फ रानी कहो राजू,मैं ही बोल रही हूँ रानी" - रानी राजू की बात का जवाब देते हुए कहती है !!

"नहीं,जब तक हमारे बीच सबकुछ क्लियर नही हो जाता,तब तक मैं रानी जी की कहूंगा,मैं आपको मेरी कुछ सच्चाई बताना चाहता हूँ,इसके लिए मेरा आपसे मिलना ज़रूरी है" राजू ने रानी से कहा !!

"ऐसी क्या बात है जो तुमको मिलना है मुझसे" रानी ने राजू से पूछा !!

"रानी जी ये सच है कि मैं भी आपसे प्यार करने लगा हूँ,पर आपमे और मुझमें ज़मीन आसमान का अंतर है,आप आज दुनिया की नज़रों मे जो तराजू है उसमें सबसे ऊपर हैं और मैं सबसे नीचे,मैं ग़रीब हूँ और आप अमीर! मैं आपके लायक बिल्कुल भी नही हूँ और आपको मुझसे कई ज्यादा अच्छे लड़के मिल जाएंगे,मैं आपको सिर्फ दो वक्त की रोटी दे ,!सकता हूँ,इससे ज्यादा मैं आपके लिए कुछ कर पाऊंगा मुझे नही पता,पर उससे भी बड़ी एक सच्चाई है जो मेरे साथ मेरे जन्म से जुड़ी हुई है,कोई भी रिश्ता झुठ की बुनियाद पे नही टिकता इसीलिए मैं आपको वो सच्चाई बताना चाहता हूँ,शायद उसे जानने के बाद आप मुझसे रिश्ता जोड़ने की बात अपने दिमाग से निकाल देंगी,वही बात मैं आपसे मिल कर आपको बताना चाहता हूँ"!! राजू ने रानी को कहा !!

राजू की मुँह से ये सुनकर की वो उसे चाहता है,रानी खुशी के मारे अंदर ही अंदर चहक रही थी पर साथ ही उसे ये जानने की भी उत्सुकता थी कि राजू उसे कोनसी सच्चाई बताने वाला है!! उसने राजू से कहा ," अभी मिलना तो मुश्किल होगा क्योंकि कुछ ही देर मे मेरे पापा आ जाएंगे मुझे लेने और मैं रात की फ्लाइट से मुंबई निकल जाउंगी इसीलिए तुम्हें जो भी कहना हो वो अभी कह दो उसके बाद पता नही हम कब मिल पाए"!!

तब राजू ने कहा,ठीक है तो सुनो ,"मेरे पिता मेरी माँ को छोड़कर चले गए हैं,मेरी माँ ने मेरे पिता के बारे मे आजतक मुझे कुछ नही बताया कि वो कौन थे,कहाँ गए,ज़िंदा भी हैं या मर गए,और न ही मैं उनका नाम जनता हुँ ,मैंने आजतक अपने पिता को नही देखा है,क्योंकि वो मेरे जन्म से पहले ही मेरी माँ को छोड़कर चले गए थे,दूसरे शब्दों में तुम ये कह ,! सकती हो कि मैं नाज़ायज़ हूँ !! यही है मेरी सच्चाई,और अगर इस सच्चाई को जानने के बाद मुझे नही लगता की तुम ये रिश्ता आगे बढ़ाना चाहोगी"!!

इतना कहकर राजू फ़ोन रख देता है,पर ये सच्चाई सुनने के बाद रानी को जिसे झटका लगता है,वो कुछ भी सोचने समझने की हालत मे नही रहती,ये बात राजू की माँ ने भी उसे नही बताई थी !!

उधर राजू भी अपनी सच्चाई बता कर बहुत हल्का महसूस कर रहा था,और राजू को दुख भी था कि आज उसका अतीत उसके भविष्य को बिगाड़ रहा है!!

कुछ देर बाद रानी को फिर से एक फ़ोन आता है और वो बात करने लगती है, "हेलो,कौन...?"

उधर से आवाज़ आती है,"हेलो माय प्रिंसेस,रेडी हो गयी"ये आवाज़ mr. बलदेव सिंघनिया की थी !!

"यस डैड,आई एम रेडी,आप कहाँ से बोल रहे हैं" रानी ने अपने पापा से पूछा !!

"बेटा मैं जोधपुर एयरपोर्ट से बोल रहा हूँ,यहाँ एक प्रॉब्लम हो , गयी है" रानी के पापा ने कहा !!

"क्या हुआ डैड...?" रानी ने घबराते हुए पूछा!!

"बेटा,हम जिस फ्लाइट से रात को मुंबई जाने वाले थे वो कैंसल हो गयी है और मेरा मुंबई पहुँचना बहुत ज़रूरी है,हम अभी एक घण्टे मे जो फ्लाइट जाएगी उससे मुंबई जा रहे हैं!तुम एक काम करो,होटल से चेकआउट करके यहाँ आ जाओ जल्दी,क्योंकि मैं अगर वहाँ तुम्हें लेने आया तो हम लेट हो जाएंगे! मैं यहीं तुम्हारा वेट कर रहा हूँ,होटल वाले तुम्हें गाड़ी arrange करवा देंगे मैं बात कर लूंगा,तुम बस अपना सम्मान पैक करो और जल्दी से एयरपोर्ट आ जाओ" रानी के पापा ने उससे कहा !!

"ok पापा,ठीक है,आती हूँ मैं"रानी ने बेमन से उसके पापा की बात का जवाब दिया और फ़ोन रख दिया !!

रानी ने अपना सामान पैक किया और होटल के रिसेप्शन पर स्कूल स्टाफ के लिए मैसेज छोड़ दिया की वो मुंबई जा रही है,क्योंकि उस वक़्त स्कूल स्टाफ मे से कोई होटल मे नही था,सिर्फ रानी और रिया थे,रिया अपने रूम मे थी और रानी के उससे बात नही की,हालांकि स्कूल स्टाफ को पता था कि रानी मुम्बई जाएगी उसके पापा के साथ,उन्हें सिंघनिया के , आफिस से मैसेज मिल गया था सुबह ही। रानी ने मैसेज छोड़ा और वहाँ होटल वालों ने कार arrange कर दी थी,उससे रानी जोधपुर एयरपोर्ट के लिए निकल गयी!!

रानी जोधपुर से जा ज़रूर रही थी पर उसका दिल अभी भी यहीं था,राजू की सच्चाई जानने के बाद वो क्या फैसला लेगी ये वो खुद भी नही जानती थी !!

राजू को पाने के लिए रिया ने अपनी दोस्ती,अपना प्यार दोनो खो दिया था,और उसी राजू को पाने के लिए रानी ने भी अपनी दोस्ती तोड़ ली थी रिया के साथ !! यही सोचते सोचते रानी जोधपुर एयरपोर्ट पहुँच जाती है और अपने पापा के साथ मुंबई के लिए रवाना हो जाती है !!
 
15 दिन बीत जाते हैं,स्कूल का ट्रिप होटल से जा चुका था और रिया भी उनके साथ जा चुकी थी मुंबई !! राजू भी हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर पूरी तरह ठीक हो गया था और अपने काम मे लग गया था,वो रानी को भुला नही था उसके मन मे रह रह कर सिर्फ रानी का खयाल बार बार आता था,पर इतने दिन तक उसका कोई फ़ोन न आना राजू के लिए य साबित करने के लिए बहुत था कि रानी उसे भूल चुकी है और उसकी सच्चाई जानने के बाद रानी भी उसे स्वीकार नही कर पायेगी !! दिन भर बस इसी ख़याल के साथ राजू रहता और रानी को भुलाने की कोशिश करता,और काम मे अपना , मन लगाता जिससे उसे रानी की याद न आये!!

सब कुछ राजू के जीवन मे सामान्य होने लगता है तभी एक दिन राजू को उसकी कंपनी मे बुलाया जाता है और उसे कहा जाता है कि कल से उसे काम पर आने की कोई ज़रूरत नही है !!

राजू ने जब ये सुना कि उसे नौकरी से निकाल दिया गया है तो उसके पैरों के नीचे से जैसे ज़मीन ही खिसक गई हो।।

वो अपने आप को जैसे तैसे संभाल ही रहा था कि उसके मैनेजर ने फिर एक बात कह दी उससे-

"राजू,क्या हुआ...? झटका लगा,अरे भई पूरी बात तो सुन लिया करो !! मैनेजर ने राजू को मुस्कराते हुए कहा !!

"क्या मतलब सर,मैं कुछ समझा नहीं" राजू ने आश्चर्य से पूछा !!

" बलदेव सिंघनिया का नाम सुना है ना,अरे वही जिसकी लड़की की जान बचाई थी तुमने कुछ दिन पहले ,वो यहाँ जोधपुर मे बहुत बड़ा होटल खोल रहे हैं,उनका फ़ोन आया था तुम्हारे लिए,उन्होंने खास तौर पर तुम्हें मुंबई बुलाया है कुछ काम के लिए,और इसके लिए उन्होंने खास तौर पर तुम्हारे लिए ट्रेन की टिकिट भेजी है यहाँ हमारी कंपनी मे !! तुम वहाँ जाओ,और हमने तो सुना है कि तुमको नौकरी देने की बात कर रहे हैं यही जोधपुर मे,पर इसके लिए तुम्हें एक बार मुंबई जाना पड़ेगा उनसे मिलने !!" मैनेजर ने राजू से कहा !!!

राजू को मैनेजर की बात सुनकर ख़ुशी हुई और वो तुरंत अपने घर के लिए निकल गया अपनी माँ को बताने के लिए !!

घर पर जब राजू ने अपनी माँ को बताया कि उसे मुंबई बुलाया गया है रानी के पापा ने तो राजू की माँ भी खुश हुई पर दोनों इस बात से अनजान थे कि मुंबई आखिर राजू को कौनसी नौकरी देने के लिए बुलाया गया है ! अगली ही सुबह राजू मुंबई के लिए निकल पड़ता है ,इस बात से बिल्कुल अंजान की मुंबई उसे क्यों बुलाया गया है !! 20 घण्टे का , सफ़र तय करने के बाद अगली सुबह राजू मुंबई पहुँचता है,वही मुंबई जिसका अभी-अभी नया नामकरण हुआ था,वो बम्बई से मुंबई हो गया था ! ये वही शहर था जहाँ लोग अपने सपनों को पूरा करने आते हैं ,रोज़ लाखों लोग मुंबई ये सपना लेकर आते हैं कि वो कुछ बन जाएंगे पर सबके सपने पूरे कहाँ होते हैं,कुछ खुशनसीब लोग ही होते हैं जिनके सपने पूरे करता है मुंबई !! राजू ने देखा कि यहाँ किसी के लिए किसी के पास समय ही नही है ! यहाँ किसी को किसी दूसरे इंसान से कोई मतलब ही नही है !! राजू वहाँ पहुँचकर दिए गए पते पर पहुँच जाता है ,जो पता उसे अपने मैनेजर से पता लग गया था ! राजू उस पते पर यानी मालाबार हिल्स के एक आलीशान बंगले पर पहुँच जाता है ! राजू जैसे ही उस बंगले के बाहर पहुँचता है तो उस बंगले की शान-ओ-शौकत देखकर दंग रह गया था,इससे पहले राजू ने ऐसा बंगला नही देखा था,वो कभी जोधपुर से बाहर गया ही नही था !! राजू ने वहाँ पहुँचकर बंगले के गेट पर सिंघनिया का लिखा लेटर बताया जो राजू के नाम था और उसे बंगले के अंदर आने की अनुमति मिल जाती है !

राजू जैसे ही बंगले मे अंदर आता है तो उसे लगता है जैसे कि वो जन्नत मे आ गया हो,बंगले के बाहर बहुत बड़ा गार्डन था,आसपास बहुत सारे पेड़ पौधे,झरने,फूल सब कुछ था,और उसके बाद आलीशान बंगला और उसका नाम , सिंघनिया हाउस था वो मन ही मन सोचने लगा कि काश ऐसा बंगला उसका होता और वो यहाँ रह पाता ! गेट का चौकीदार उसे बंगले के अंदर एक बहुत बड़े हॉल मे बैठने को कहता है और बोलता है कि "आप यहाँ कुछ देर इंतज़ार करिए,हमारे साहब अभी आते हैं आपसे मिलने " !!

राजू वहीँ इंतज़ार करता है और बंगले की शान-ओ-शौकत देखने मे लगा हुआ था,तभी कुछ देर बाद वहाँ Mr. सिंघनिया पहुँच जाते हैं और राजू से कहते हैं ," गुड मॉर्निंग यंग मैन,कैसे हो राजू...?"

Mr. सिंघानिया की भारी भरकम आवाज़ सुनकर जो राजू अपने ख्यालों मे खोया हुआ था बंगले को देखने मे,वो एकदम से अपने ख्यालों से बाहर आकर पलटता है और देखता है कि एक लंबा चौड़ा इंसान उसके सामने खड़ा है जो लगभग 50 साल की उम्र का होगा पर उसकी पर्सनालिटी बिल्कुल उसकी उम्र से उलट थी,वो किसी 30 साल के नौजवान को मात देने की क्षमता रखता था,अपने आपको फिट रखना Mr. सिंघानिया को पसंद था,और उसकी संयमित जीवन शैली उसके फिट होने का राज़ थी ,उनकी आवाज़ मे भी वही दम था जो एक बड़े इंसान की आवाज़ मे होना चाहिए था !!

, जैसे ही राजू और Mr. सिंघानिया एक दूसरे को देखते हैं तो राजू ,सिंघानिया की personallity देखकर दंग रह जाता है और Mr. सिंघानिया भी राजू को देखकर एक पल के लिए कहीं खो जाते है जैसे राजू को उन्होंने कहीं देखा है,पर याद करने पर भी उन्हें याद नही आता कि उन्होंने राजू को कहाँ देखा है !!

Mr. सिंघानिया राजू को गले लगाते हुए कहते है "Thanks,young men,"

राजू Mr सिंघानिया के इस व्यवहार से बिल्कुल अंजान था और उसे समझ नही आ रहा था कि भारत के इतने बड़े उद्योगपति आज उसके सामने खड़े है और वो उसे गले लगाकर धन्यवाद क्यों बोल रहे थे,यही सोचते सोचते उसने Mr सिंघानिया से पूछ लिया," माफ़ कीजियेगा सर,पर आप मुझे thanks क्यों बोल रहे हैं...?"

राजू के सवाल का जवाब देते हुए Mr सिंघानिया ने राजू से बैठने को कहा,और फिर दोनों बैठ गए !!

तब Mr. सिंघानिया ने राजू से कहा ,"राजू,मैंने तुम्हें थैंक्स इसीलिए कहा क्योंकि तुमने मेरी बेटी की जान बचाई और मेरी बेटी मेरी जान है और तुमने मेरी जान की जान बचाई है , , रानी ने मुझे अभी 2 दिन पहले ही सबकुछ बताया कि कैसे तुमने उसकी जान बचाई अपनी जान पर खेलकर,और रानी ने मुझे ये भी बताया कि कैसे तुम एक गाइड की नौकरी करके अपना और अपनी माँ का गुजारा करते हो ! मुझे ये सब बहुत दिनों बाद पता चला कि उस टाइम तुम्हें चोंट लग गयी थी और तुम हॉस्पिटल मे थे जिस समय मैं जोधपुर रानी को लेने आया था,अगर मुझे पहले पता होता तो मैं वही आता तुमसे मिलने,पर ये बात मुझे रानी ने इतने दिनों बाद बताई,मैंने फैसला कर लिया था कि जिस इंसान ने मेरी रानी की जान बचाई है उस इंसान के लिए मझे कुछ करना है,और प्लीज इस फेवर को ये मत समझना कि मैं तुम्हारा अहसान चुका रहा हूँ क्योंकि तुमने मेरी बेटी की जान बचाई है और इसके लिए मैं तुम्हारा अहसान ज़िन्दगी भर नही चुका सकता,पर तुम्हारी थोड़ी तक़लीफ़ कम करने की कोशिश जरूर कर सकता हूँ,और इसी कोशिश मे मैंने तुम्हें यहाँ बुलाया है,मैं तुम्हें अपने यहाँ नौकरी देता हूँ और तुम जितना गाइड की नौकरी मे कमाते थे उससे 5 गुना ज्यादा सैलरी मैं तुम्हें देता हूँ,इसे कोई अहसान मत समझना ये सिर्फ मेरी तरफ से तुम्हारे लिए एक तोहफा है और प्लीज मना मत करना !!"

राजू Mr सिंघानिया की बात सुनकर दंग रह जाता है और कुछ देर सोचने के बाद कहता है," मैं आपका धन्यवाद करता , हूँ कि आपने मेरे बारे मे सोचा और आपका ऑफर भी बहुत अच्छा है,पर सर,मेरे लिए मेरी माँ से बढ़कर इस दुनिया मे कोई नही है,रही बात पैसे की तो वो तो मैं जोधपुर मे रहकर भी इतना तो कमा ही लेता हूँ कि अपनी माँ के साथ गुजारा कर सकूं,और मैंने रानी जी की जान बचाई वो इंसानियत के नाते बचाई थी,पर मैं अपनी माँ को छोड़कर यहाँ मुंबई मे काम नही कर सकता,मेरी माँ का मेरे सिवा कोई नही है,मैं अगर यहाँ रहा तो उनका ध्यान कोन रखेगा ,इसीलिए मुझे माफ़ कर दीजिए सर...मैं आपके यहाँ नौकरी नही कर सकता..."

Mr. सिंघानिया को राजू से इस जवाब की उम्मीद बिल्कुल नही थी और कुछ देर शांत रहने के बाद Mr. सिंघानिया अचानक ज़ोर ज़ोर से हँसने लगते हैं और कहते हैं कि " अरे भई,तुमसे किसने कहा की मैंने तुम्हें यहाँ मुंबई मे नौकरी के लिए बुलाया है"

"मतलब,मैं कुछ समझा नही सर" राजू ने आश्चर्य से Mr. सिंघानिया से पूछा !!

तब Mr. सिंघानिया ने बोला," तुम्हारा अपनी माँ के लिए प्यार देखकर मुझे अपनी माँ याद आ गयी जिसे मैं भी अपनी जान से ज्यादा प्यार करता था और उसके लिए मैंने अपने , जीवन की सबसे कठिन फैसला लिया था,मुझे भी अपनी माँ और एक इंसान जो कि बहुत प्यारा था मुझे दोनों में से एक को चुनना था,और मैंने भी अपनी माँ को चुना था,आज तुमने भी पैसे को छोड़कर माँ को चुना तो मुझे भी तुम्हारा फैसला सही लगा !!" और Mr सिंघानिया कुछ देर के लिए अतीत मे खो जाते है फिर अचानक उन यादों से बाहर आकर राजू से कहते है ," राजू,तुम्हें मैं नौकरी मुंबई में नहीं जोधपुर मे ही दे रहा हूँ,दरअसल मैंने जोधपुर मे एक होटल खरीदा है अपनी बेटी रानी के नाम से उसका नाम तो अभी कुछ और है पर अभी वहाँ काम शुरू होने वाला है,कुछ कंस्ट्रक्शन और कुछ changes के बाद वो होटल कुछ महीनों मे तैयार हो जाएगा और उसका नाम होगा रानी पैलेस होटल,वो होटल मैं इसी साल दीवाली तक तैयार करवाना चाहता हूँ क्योंकि दीवाली पर रानी के बर्थडे पर मैं उसे ये गिफ्ट दे सकूँ,पर ये काम इतना आसान नही है क्योंकि इस काम को टाइम पे पूरा करना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और इसके लिए मुझे वहाँ का कोई लोकल आदमी चाहिए था जो उस होटल का काम देख सके,जो इसे अपना काम समझ कर करे और मेरा होटल गिफ्ट देने का सपना समय पर पूरा कर सके ! मैं किसी को ढूंढ ही रहा था कि रानी ने मुझे तुम्हारे बारे मे बताया,और मैंने तुम्हारी कंपनी मे तुम्हारे बारे मे पता लगाया कि तुम अपना काम बड़ी ईमानदारी से करते हो,तो इसीलिए मैंने तुम्हें चुना !!

, तुम अपनी माँ की चिंता छोड़ दो,क्योंकि मैं तुम्हें जोधपुर मे ही रहने के लिए एक घर दे रहा हूँ जिसमे तुम अपनी माँ के साथ रह सकोगे और ये घर तुम्हें सिंघानिया ग्रुप की तरफ से मिल रहा है,ये समझो कि कंपनी quater मिल रहा है तुम्हें ! तुम्हें जोधपुर मे ही रहकर वहाँ मेरे होटल का काम देखना है और उसे जल्द से जल्द दीवाली के पहले तक रेडी करना है ताकि मैं रानी को गिफ्ट दे सकूँ ,अभी रानी को सिर्फ ये पता है कि मैने वहाँ एक होटल खरीदा है जैसा कि मैं किसी भी बड़े शहर मे खरीदता हूँ पर उसे ये नही पता कि मैं ये होटल उसके नाम से बना रहा हूँ और उसे उसके बर्थडे पर गिफ्ट करूँगा,तो ये बात रानी को पता न चले इस बात का भी खास ध्यान रखना है ! मैं वहाँ का काम ध्यान से नही कर पाऊंगा इसीलिए मैंने तुम्हें वहाँ का काम सौंपा है,तुम्हें सिर्फ महीने मे 2 बार आकर मुझे रिपोर्ट देनी है कि काम कहाँ तक पहुँचा और तुम्हारी सैलरी होगी ₹50,000 महीने,अब बोलो तुम्हें ये ऑफर मंजूर है..?"

राजू ने ये सब सुना तो उसे अपने कानों पर भरोसा नही हुआ और वो एक दम से कुछ देर के लिए अवाक रह गया!!!
 
राजू के सामने Mr. सिंघानिया ने वो ऑफर रख दिया था जिसको राजू कभी मना नही कर सकता था,क्योंकि इससे उसकी माँ और उसकी दोनों की ही ज़िंदगी संवर सकती थी,राजू ने Mr. सिंघानिया के ऑफर को स्वीकार कर लिया !

Mr. सिंघानिया को भी खुशी हुई कि राजू ने उनका ऑफर मान लिया , बाकी की बातें राजू ने Mr. सिंघानिया के सेक्रेटरी ने राजू को समझा दी,तभी राजू ने Mr. सिंघानिया से वापस जोधपुर जाने की इजाज़त मांगी इस पर Mr. सिंघानिया ने राजू से कहा -" अरे अभी कहाँ तुम जाने की बात कर रहे हो,अभी तो आये हो तुम,भई तुम मुंबई पहली बार आये हो,थोड़ा घूम तो लो यहाँ,तुमने रानी को जोधपुर घुमाया था,अब रानी की बारी तुम्हें मुंबई घुमाने की ! रानी अभी स्कूल गयी है,जैसे ही वो आएगी तो तुमको देखकर खुश हो जाएगी,और वो तुम्हें मुंबई भी घुमा देगी !!" इस पर राजू ने कहा ," नही सर,दरअसल मेरी माँ वहाँ अकेली है और 24 घंटे हो गए हैं,और अगर मैं आज निकल गया तो मैं कल सुबह पहुँच जाऊंगा 2 दिन हो जाएंगे उन्हें अकेले रहते हुए,मैं उन्हें ज्यादा अकेला नही छोड़ सकता "

Mr. सिंघानिया ने कुछ देर सोचा और फिर राजू से पूछा ," राजू एक बात बताओ,तुम आज गए तो भी कल सुबह पहुँचोगे.." !

"जी सर," राजू ने सर हिलाते हुए कहा !!

"ठीक है," ऐसा बोलकर Mr. सिंघानिया ने पास ही खड़े उनके सेक्रेटरी से कहा," तिवारी जी,एक काम कीजिये,आप कल सुबह की फ्लाइट की 2 टिकट बुक करवाइए जोधपुर के लिए,और हमारी कंपनी की तरफ से वर्मा जी को भेजिए जोधपुर राजू के साथ,वहाँ जाकर वर्मा जी राजू को होटल का सारा काम समझा देंगे जिससे उसे कोई तकलीफ नही होगी" फिर राजू की तरफ देखते हुए कहा," क्यों भई राजू,हो गया , solution,देखो तुम आज भी ट्रेन से जाओगे तो कल सुबह ही पहुँचोगे और कल सुबह फ्लाइट से भी जाओगे तो भी पहुँच जाओगे 2 घण्टे मे,तुम जब यहाँ आये थे तब सिंघानिया ग्रुप के employee नही थे,पर अब तुम सिंघानिया ग्रुप के एक मैनेजर हो और तुम्हारा इतना तो हक़ बनता है ! अब जब भी तुम मुंबई ऑफिस के काम के लिए आओगे तो फ्लाइट से ही आओगे ये कंपनी तुम्हें provide करेगी,और आज मैंने तुम्हें यहाँ इसीलिए रोका क्योंकि तुम आज मुंबई घूमोगे और तुम्हें रानी घुमाएगी,अब प्लीज मना मत करना !!" सिंघानिया ने राजू से कहा !!

राजू भी अब Mr. सिंघानिया की बात को टाल नही सका और रुकने के लिए तैयार हो गया,और Mr. सिंघानिया ने तिवारी जी से कह कर राजू के रुकने का इंतज़ाम गेस्ट रूम मे करवा दिया ,और Mr. सिंघानिया ऑफिस के लिए निकल गए !!

कुछ देर बात रानी भी पैलेस मे आ जाती है,और जैसे ही उसे पता चलता है कि राजू आ गया है,वो राजू से मिलने उसके रूम मे आ जाती है,जैसे ही रानी और राजू एक दूसरे को देखते हैं वो एक दूसरे मे खो जाते हैं,क्योंकि एक्सीडेंट के बाद वो पहली बार एक दूसरे को पूरे एक महीने बाद देख रहे थे,वो दोनों बस एक दूसरे को देखते देखते खो गए !! फिर अचानक से दोनों अपने खयालों से बाहर आते हैं और राजू , अपने आप को सम्भालता है और रानी से कहता है ,"आप यहाँ..? " राजू के इस सवाल का जवाब देते हुए रानी कहती है कि "ये कैसा सवाल है..? मेरा घर है तो मैं ही होउंगी न राजू,तुम भी न किसी बात करते हो" !!

रानी के इस व्यवहार से राजू बिल्कुल अचंभित था क्योंकि जब आखिरी बार रानी और राजू की बात हुई थी तब राजू ने रानी को उसकी सच्चाई बताई थी और इस सच्चाई को सुनने के बाद राजू से रानी ने बात करना बंद कर दी थी!! तब रानी ने राजू से कहा कि," मुझे पता है कि तुम क्या सोच रहे हो,यही सोच रहे हो न कि मैंने तुमसे बात क्यों बन्द कर दी थी और फिर अचानक मैंने पापा को तुम्हारे बारे मे क्या बता दिया कि पापा ने तुम्हें नौकरी दे दी ..? सब बताती हुँ"कहकर रानी ने एक लंबी सांस ली राजू को कहा, " जब तुमने मुझे अपनी सच्चाई बताई तो मुझे समझ नही आया कि मैं कैसे react करूं,उसके बात मैंने कई दिनों तक सोचा कि हमे इस रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहिए या नही और मैं इस नतीज़े पर पहुँची की जो भी तुम्हारे साथ हुआ उसमे तुम्हारी तो कोई गलती नही है तो उसकी सज़ा भी तुम्हें नही मिलनी चाहिए,फिर मैंने पापा को जाकर सारी बात बता दी सिर्फ ये छोड़कर की मैं तुमसे प्यार करती हूँ,वो बात मैं सही वक्त आने पर बताऊंगी,और मुझे कोई फर्क नही पड़ता कि तुम्हारी सच्चाई क्या है,जब मैंने पहली बार देखा था तब तुम्हारी , सच्चाई नही पता थी मुझे,अब बताओ मैं एक लड़की होकर बोल रही हूँ कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ पर तुमने अभी तक मुझे प्रपोज़ नही किया,चलो अब तुम भी अपने दिल की बात बोल दो.."!! रानी ने राजू से कहा !

राजू ने रानी की पूरी बात सुनी और उसे खुशी हुई कि रानी भी उसकी सच्चाई के साथ उसे अपना रही है,राजू ने रानी से कहा "पर आप अब मेरी मालकिन हो गई हो,अब मैं आपको कैसे बोल दूँ,और वैसे भी तुम्हारे पापा ने मुझ पर भरोसा कर के इतनी बड़ी जिम्मेदारी मुझे सौंपी है ,मैं उनका भरोसा नही तोड़ सकता,जब तक मैं उनका सपना पूरा नही कर देता तब तक तुम्हें प्रोपोज़ नही करूँगा,जब तक मैं उनके सामने अपनी काबिलियत साबित नही कर देता तब तक इस रिश्ते के बारे मे कोई फैसला नही लूंगा,मुझे माफ़ कर देना इस बात के लिए !!

राजू की बात सुनकर रानी ने कुछ देर सोचा और कहा,"तो क्या तुम मुझे प्यार नही करते...?"

राजू ने कुछ देर सोचा और बोला ," इसका जवाब तुम खुद जानती हो की मैं तुमसे प्यार करता हूं या नही पर मैं अपने मुँह से उस दिन बोलूँगा जिस दिन खुद को साबित कर दूंगा और तुम्हारे पापा का सपना पूरा कर दूंगा"!!

,

"कौनसा सपना,और कितने दिन लगेंगे इसे पूरा करने मे..?"रानी ने राजू से पूछा !!

"वक़्त आने पर पता चल जाएगा,अभी वो बहुत confidential है,और प्लीज इसके बारे मे मैं तुम्हें नही बता सकता" राजू ने जवाब देते हुए कहा !!

"ठीक है बाबा,ठीक है,अब नही पूछुंगी,पर अब चलकर खाना खा लो,फिर तुम्हें मुंबई घुमा के लाती हूँ,मुझे पता चला है कि तुम कल सुबह जा रहे हो,पापा का फ़ोन आया था कि तुम्हें आज दिन भर मुंबई घुमाना है मुझे !!" रानी ने राजू से कहा,और दोनों खाना खाने नीचे चले जाते हैं !!
 
रानी और राजू दोपहर का खाना खाते हैं और फिर दोनों घूमने के लिए निकल जाते हैं,रानी अपने डाइवर को बोलती है गाड़ी निकालने के लिए और दोनों मुंबई दर्शन को निकल! जाते हैं,रानी राजू को सभी जगह घुमाती हैं,जुहू बीच,अमिताभ बच्चन जी का बंगला प्रतीक्षा और उस समय नए नए स्टार बने शाहरुख खान का बंगला मन्नत जो कि उन्होंने अभी अभी खरीदा था उसे देखकर राजू ने 1995 मे कह दिया था रानी से ," देखना रानी,ये जो नया लड़का आया है ना फ़िल्म इंडस्ट्री में,ये एक दिन सुपरस्टार बनेगा" तब रानी ने कहा था," हाँ ,वो लगता तो अच्छा है,cute है,बिल्कुल तुम्हारे जैसा पर वो हमेशा खलनायक के काम करता है,इसीलिए मुझे उससे डर लगता है" इस पर राजू ने कहा " अरे नही,वो एक दिन बड़ा स्टार बनेगा देखना"( ये शायद राजू की दूरदर्शिता ही थी कि उसने उस टाइम के सुपरस्टार को पहचान लिया था ) दोनों खूब घूमते हैं और रात को 10 बजे घर पहुँचते हैं,पूरे दिन रानी और राजू ने साथ खूब एन्जॉय किया था,और ये दिन राजू के जीवन का सबसे सुंदर दिन था क्योंकि दिन भर रानी उसके साथ थी,वो इस बात को जानता था कि रानी उससे प्यार करती है और वो भी उससे बहुत प्यार करता है पर कहीं न कहीं राजू को हमेशा ये डर सताता रहता है कि रानी उसकी नही होगी क्योंकि हो बहुत अमीर है और राजू बहुत ग़रीब,उसे अपने प्यार पे तो यकीन था पर कभी उसने रानी के सामने इस प्यार को जताने की हिम्मत नहीं कि थी पर रानी हमेशा इस इंतज़ार मे रहती थी कि राजू उसे प्रोपोज़ करे ! सुबह राजू की फ्लाइट थी और रानी और राजू पैलेस मे पहुँच चुके थे,वहाँ Mr. सिंघानिया भी , आ चुके थे तब तक,Mr. सिंघानिया ने आते ही राजू से पूछा," क्यों भई राजू,कैसा लगा हमारा मुंबई..?"

"बहुत अच्छा सर,बहुत घुमाया रानी जी ने मुझे,इस बात के लिए आप दोनों का बहुत बहुत धन्यवाद " राजू ने Mr. सिंघानियां की बात का जवाब देते हुए कहा और Mr. सिंघानिया के पैर पड़ने लगा !!

"अरे,अरे! ये क्या कर रहे हो तुम राजू,ये मत सोचो कि मैंने तुमपे कोई अहसान किया है,ये तुम deserve करते हो इसीलिए तुम यहाँ हो,और वैसे भी तुमने मेरी जान की जान बचाई है तो तुम्हें इतना तो मिलना ही चाहिए," कहकर Mr सिंघानिया ने राजू को गले लगा लिया !!

इतने मे रानी भी बोल पड़ी,"एक बात और मैं तुम्हें बता दूं,और आगे से तुम उस बात का हमेशा ध्यान रखना"!

रानी ने ये शब्द बोले तो राजू कुछ समझ नही पाया और उसने धीमी आवाज़ मे रानी से पूछा," कोनसी बात रानी जी..? मैं कुछ समझा नही,आप बताइए मैं ध्यान रखूंगा"!!

तो रानी ने कहा," आज के बाद तुम मुझको रानी जी नही सिर्फ रानी कहोगे,अरे मैं तुमसे छोटी हूँ और हमारे बीच , मालिक नौकर का नही दोस्ती का रिश्ता है,I m your friend yrr" !!

रानी की ये बात सुनकर सब हँसने लगे और फिर Mr. सिंघानिया ने दोनों से कहा," बेटा राजू ,तुम्हारी सुबह की फ्लाइट है,तुम्हें जल्दी उठना है ना,तो सो जाओ और तुम्हें सुबह ड्राइवर एयरपोर्ट छोड़ आएगा और वर्मा जी वहीं मिलेंगे तुम्हें,उनके साथ ही तुम्हें जोधपुर जाना है,वो वहां का सारा काम तुम्हें समझा देंगे,और रानी तुम भी अपने रूम मे जाकर सो जाओ तुम्हारी भी exams है next month से,सुबह स्कूल भी जाना है तुम्हें,"!!

"ठीक है सर,मैं चलता हूँ,गूड नाईट!"बोलकर राजू अपने रूम मैं चला जाता है और रानी भी उसके पापा से गुड नाईट बोलकर अपने रूम मे चली जाती है !!

अगले दिन सुबह राजू तैयार होकर एयरपोर्ट निकल जाता है और वहाँ वर्मा जी से मिलकर जोधपुर के लिए रवाना हो जाता है !! जोधपुर जाकर वो होटल का सारा काम समझ लेता है और अपनी माँ को लेकर कंपनी के दिये हुए फ्लैट मे शिफ्ट हो जाता है,वर्मा जी भी कुछ दिन वहाँ रुककर राजू को सारा काम समझा कर वहाँ से चले जाते हैं ! धीरे धीरे वक़्त बीतता है और राजू होटल का सारा काम सम्भाल लेता है,Mr. , सिंघानिया खुश है कि राजू ने सारा काम सम्भाल लिया ! अब राजू की personallity मे भी फर्क आ गया था अब वो दुबला पतला राजू नही था उसकी हेल्थ भी फिट हो गयी थी क्योंकि उसका रहने का अंदाज़ बदल गया था,और Mr. सिंघानिया के कहने पर राजू ने इंग्लिश भी सीख ली थी और अब वो एक परफेक्ट मैनेजर बन गया था,अब राजू का मुंबई आना जाना लगा रहता था,महीने मे दो तीन बार राजू मुंबई के चक्कर लगा लिया करता था !! रानी और राजू मे नज़दीकियां भी बढ़ने लगी थी,रानी का राजू के लिए प्यार अब बेइंतहां बड़ चुका था ,पर राजू अभी भी रानी से अपना प्यार कबूल नही करता था,वो यही कहकर हर बार रानी की बात को टाल देता था कि "एक बार ये होटल का काम पूरा हो जाये फिर मैं खुद तुम्हें प्रोपोज़ करूँगा और तुम्हारे पापा से बात भी करूँगा"! राजू के मुंह से वो तीन लव्ज़ सुनने के लिए रानी के कान तरस रहे थे !! रानी ने अपनी स्कूलिंग कम्पलीट कर ली थी और वो कॉलेज मे चली गयी थी !! राजू को कंपनी मे 8 महीने हो गए थे और रानी के जन्मदिन पर यानी 27 oct 1995 को होटल तैयार करवाना था और अब सिर्फ 10 दिन बचे थे !! होटल का काम राजू ने अपनी मेहनत के दम पर पूरा करके दिखा दिया था अब सर्फ रानी के जन्मदिन का इंतज़ार था सबको और ये बात राजू ने रानी को अब तक नही बताई थी कि उसके पापा उसके नाम से होटल बना रहे हैं।!!

,

एक दिन Mr. सिंघानिया ने रानी से कहा,"बेटा एक बात बोलना चाहता हूँ,!!"

"बोलिये पापा,"रानी ने जवाब दिया !!

"इस बार तुम्हारे बर्थडे पे कुछ प्लान मत करना,इस बार दीवाली आएगी तुम्हारे बर्थडे पर और हम सुबह की फ्लाइट से जोधपुर चलेंगे वहाँ तुम्हारे लिये कुछ गिफ्ट है मेरे पास और फिर शाम को हम वापस मुंबई आकर तुम्हारा बर्थडे और दीवाली मनाएंगे,अब ये मत पूछना की वो गिफ्ट क्या है,क्योंकि वो सरप्राइज है " Mr. सिंघानिया ने रानी से कहा !!

Mr सिंघानिया की बात सुनकर रानी खुशी से पागल हो गयी,वो ये सोचने लगी कि" कहिं पापा को राजू पसंद तो नही आ गया मेरे लिए,और आ भी गया है तो अच्छा है ना,मुझे कुछ बताना ही नही पड़ेगा,वो खुद ही राजू को अपना दामाद बना लेंगे!" यही सब सोच सोच के रानी खुश हुए जा रही थी !!

दिन बीतते हैं और वही दिन आ जाता है जिसका इंतज़ार राजू,रानी,और Mr सिंघानिया कर रहे थे 27 oct , 1995 ,राजू ने अपना वादा पूरा करते हुए होटल रानी पैलेस पूरा कर दिया था और Mr सिंघानिया का सपना भी !! आज दीवाली के दिन वहाँ बहुत बड़ी पार्टी रखी गयी और उसमें जोधपुर के बड़े बड़े राजघराने के लोग और बड़े बड़े बिजनेसमैन को बुलाया गया ,आज जोधपुर मे जैसे दीवाली के दिन इतने बड़े लोग वहाँ आये हुए थे,देश विदेश से मेहमानों को बुलाया गया था !! इतनी ग्रैंड पार्टी जोधपुर के इतिहास मे आजतक सिर्फ किसी राजघराने की हुआ करती थी पर ये पहली पार्टी थी जो राजघराने से अलग किसी ने दी थी!! हर कोई जानने को बेताब था कि आखिर कौन है ये खुशनसीब रानी जिसके लिए इतनी बड़ी पार्टी रखी गयी !!

सुबह की फ्लाइट से रानी और Mr सिंघानिया जोधपुर पहुँचते हैं और वहाँ अपने होटल रानी पैलेस पहुँचकर जैसे दोनो की आँखे फटी की फटी रह जाती हैं,क्योंकि राजू ने अपनी मेहनत से Mr सिंघानिया का वो सपना पूरा कर दिया था जो उन्होंने अपनी बेटी के लिए देखा था, राजू ने हो रानी पैलेस Mr सिंघानिया को बना कर दिया था वो तो उन्होंने अपने ख्यालों में भी नही सोचा था ! तब Mr सिंघानिया ने रानी को बताया कि उन्होंने रानी के लिए ये होटल बनवाया है जिसका नाम है "रानी पैलेस" और यही सरप्राइज है,रानी उस होटल को बस देखते ही रह गयी और उसने अपने पापा को गले लगाते हुए कहा ," थैंक्स डैड,u r the best father in , this world,मुझे तो लगा था कि आप सिर्फ ये मिस करते होंगे कि अगर मेरी जगह आपका बेटा होता तो आपको अच्छा लगता,मुझे आज पता चला कि आप मुझे कितना प्यार करते हो"!!! कहते हुए रानी की आँखों मे खुशी के आँसू आ गए !!

तभी वहाँ राजू आता है और Mr सिंघानिया उसे गले लगाकर रो पड़ते हैं और इमोशनल होकर बोलते हैं,"u did it राजू,तुमने कर दिखाया,ये तो मैंने अपने खयालों मे भी नही सोचा था तुमने इतना अच्छा होटल बनवाया है " !!

" मैंने कुछ नही किया सर,ये सब आपका विज़न था ,मैने तो सिर्फ अपना काम ईमानदारी से किया है,और देखना सर ये होटल जोधपुर का सबसे बड़ा और सुंदर होटल कहलायेगा" राजू ने Mr सिंघानिया से कहा !!

" मैं बहुत खुश हुँ राजू तुम्हारे काम से,मैं तुम्हे इसके लिए कुछ देना चाहता हुँ,आज तुम जो चाहो मुझसे मांग सकते हो" Mr सिंघानिया ने राजू से कहा !!

Mr सिंघानिया की ये बात सुनकर राजू बहुत खुश हुआ और रानी और राजू एक पल के लिए एक दूसरे को देखने लगे,रानी ने आँखों से इशारे करते हुए राजू से पापा से बात , करने को कहा,वो चाह रही थी कि राजू आज ही उसके पापा को उन दोंनो के बारे मे बता दे और उनसे रानी का हाथ मांग ले,पर राजू ने Mr सिंघानिया से कहा ," सर,आपका दिया हुआ सबकुछ है मेरे पास,मुझे जो चाहिए वो मैं आपको बता दूंगा,पर अभी आप चलिये,राजपरिवार के मेहमान आ गए हैं और आपका wait कर रहे हैं,हम पार्टी के बाद बात करेंगे" ऐसा कहते हुए राजू Mr सिंघानिया को वहाँ से ले जाता है और रानी भी उनके साथ चल देती है !! राजू रानी को देखता है तो रानी मुँह बनाते हुए राजू को देखती है जैसे वो राजू को गुस्से से देख रही हो !!

तभी रानी Mr सिंघानिया से बोलती है,"डैड आप चलिये मैं एक मिनट राजू से बात करके आती हूँ,"और वो राजू को वहीँ रोक लेती है !!

Mr सिंघानिया आगे निकल जाते हैं और रानी राजू को रोकती है तो इसपर राजू उससे कहता है," अरे मुझे क्यों रोका,देखो रानी मुझे बहुत काम है अभी,पार्टी की सारी जिम्मेदारी मेरे ऊपर है,क्या बात करनी है तुम्हें,हम पार्टी के बाद कर लेंगे !!"

तब रानी गुस्से से राजू से कहती है कि,"तुम्हारे लिए तो तुम्हारा काम ही important है ना,मेरी तो वैल्यू ही नही है , तुम्हारे लिए,अरे जब पापा ने पूछा था कि मांगो क्या मांगना है तो मेरा हाथ नही मांग सकते थे उनसे"!!

तब राजू ने मुस्कराते हुए कहा,"अगर वैल्यू नही होती तो आज मैं माँ को यहाँ अपनी शादी की बात तुम्हारे पापा से करवाने नही लाता,अरे मैं खुद शादी की बाद करूँगा क्या उनसे,मैंने तुमसे कहा था कि जब तक मैं कुछ बन न जाऊं तुम्हारे लायक और तुम्हारे पापा का सपना न पूरा कर दूं,तुम्हें प्रोपोज़ नही करूँगा,आज वो दिन आ गया है आज मैं अपने दिल की बात कहूंगा जिसे सुनने के लिए तुम कब से तरस रही थी,और रही बात तुम्हारे हाथ मांगने की तो वो माँ बात करेगी तुम्हारे पापा से"!!

ये सुनकर रानी खुशी के मारे फूली नही समा रही थी और उसने राजू को गले लगाना चाहा,पर राजू ने इशारा करते हुए उसे मना कर दिया,क्योंकि वहाँ बहुत लोग थे,और वहाँ से चला गया ! रानी भी तैयार होने चली गयी !!
 
राजू अपनी माँ के पास आकर बोलता है कि " माँ,अभी सर के पास टाइम नही है तो मैं तुझे उनसे पार्टी के बाद मिलवा दूंगा,अभी तू यहीं बैठ "और अपनी माँ को वहीँ मेहमानों के बीच बैठा देता है !!कुछ देर बाद वहाँ रानी तैयार होकर आती है और जैसे ही राजू की नज़र उस पर पड़ती है वो जैसे अपने , होश खो बैठता है,रानी सफेद कलर की ड्रेस मे इतनी सुंदर लग रही थी जैसे मानो कोई परी आसमान से उतर आई हो,राजू एक पल के लिए उसमे खो जाता है और सिर्फ रानी पे जाकर उसकी नज़र टिक जाती है !!

तभी Mr सिंघानिया के आने के अनाउंसमेंट के साथ ही राजू अपने खयालों से बाहर आता है!!

भाग 17

सभी मेहमान रानी और Mr सिंघानिया के स्वागत मैं ताली बजाते हैं,रानी किसी परी से कम नहीं लग रही थी,रानी और Mr सिंघानिया एक बड़े हॉल मैं प्रवेश करते हैं जहाँ सारे मेहमान एकत्रित हुए हैं और रानी यहीं अपना बर्थडे केक काटेगी ! एक बड़ा सा केक हॉल मे लाया जाता है और वहाँ पर केक काटने से पहले Mr सिंघानिया कुछ अनाउंसमेंट करने के लिए माइक हाथ मे लेते हैं,राजू की माँ कुछ देर के लिए वहाँ पे नही थी,पर प्रोग्राम की अनाउंसमेंट के बाद वो वहाँ पहुँचती है,भीड़ ज्यादा होने की वजह से उन्हें आगे जगह नही मिलती है तो वो बहुत पीछे खड़ी रहती है,दूर से उन्हें रानी और Mr सिंघानिया का चेहरा नही दिख पाता है !

तभी Mr सिंघानिया कुछ बोलते हैं माइक पे," hello ladies and gentlemen thank u for coming here,आप सभी का यहाँ स्वागत है जो आप यहाँ आये और मेरी बेटी को आशीर्वाद दिया जिसका आज जन्मदिन है,और इसी उपलक्ष मे मैं ये होटल की एक सौगात आज जोधपुर को देने जा रहा हुँ,जिसका नाम है 'रानी पैलेस',ये होटल मैं आज अपनी इकलौती बेटी को गिफ्ट कर रहा हूँ ,और आप सभी से ये वादा करता हूँ कि ये अपनी तरह का पहला होटल है जो हिंदुस्तान मे अभी सिर्फ एक ही है,आशा करता हूँ आप अपना प्यार और विश्वास बनाये रखेंगे !!"

जैसे ही राजू की माँ सरिता देवी ये आवाज़ सुनती है,तो जैसे अतीत के कई पन्ने एक साथ खुल जाते हैं,ये आवाज़ इतनी जानी पहचानी है उनके लिए जैसे इस आवाज़ के साथ उनका कोई पुराना रिश्ता हो,वो भीड़ को हटाते हुए आगे जाने की कोशिश करती है और आगे बढ़ती जाती है,जैसे उन्हें इस आवाज़ का चेहरा देखना हो वो इतनी उत्सुक थी इस आवाज़ का चेहरा देखने के लिए जैसे बहुत पुराना रिश्ता हो इस आवाज़ के साथ ! Mr सिंघानिया अपनी स्पीच दे रहे थे और , अपनी कंपनी के फ्यूचर प्लान्स अन्नोउन्से कर रहे थे तभी राजू को ध्यान आया कि माँ कहीं दिखाई नही दे रही है तो उसने माँ को ढूंढना शुरू किया,कुछ देर इधर उधर देखने के बाद उसने देखा कि माँ भीड़ मे फसी है और आगे आने के लिए कोशिश कर रही है,राजू ने तुरंत 2 volunteers को भेज कर माँ को लाने के लिए कहा और दोनों volunteers ने माँ जो भीड़ से निकालकर राजू के पास छोड़ दिया और राजू उन्हें सबसे आगे जहाँ केक कटने वाला था वहाँ ले जाकर खड़ा कर दिया,राजू के माँ ने जैसे ही Mr सिंघानिया को देखा तो मानो उनके ऊपर बिजली गिर गयी हो,सारी पुरानी यादें फ्लैशबैक की तरह उनकी आँखों के सामने आ गयी ! उनकी आँखों से लगातार आँसू बहने लगे,और इसी बीच स्पीच देते देते Mr सिंघानिया की नज़र भी राजू की माँ पर पड़ गयी और वो भी उन्हें देखकर चोंक पड़े,कुछ देर के लिए स्पीच देते देते रुक गए,और सरिता देवी और Mr सिंघानिया सिर्फ एक दूसरे को देख रहे थे,और दोनों की आँखें नम थीं,वहाँ खड़े सब लोग ये सोच रहे थे कि Mr सिंघानिया अपनी बेटी की बातें करते करते भावुक हो गए हैं!

तभी अचानक उनसे माइक ले लिया गया और उनके सेक्रेटरी ने केक कटिंग का अनाउंसमेंट कर दिया !! अपने पापा की आँखों मे आँसू देखकर रानी की आँखें भी नम हो गई ! तभी तालियों की गड़गड़ाहट से सरिता देवी और Mr सिंघानिया , अपने अपने ख़यालो से बाहर आये,तभी राजू Mr सिंघानिया के पास आकर बोलता है कि," सर वो मेरी माँ है,लगता है आपकी स्पीच सुनकर थोड़ी इमोशनल हो गयी है,मैं उनसे आपको मिलवाना चाहता हूँ,फंक्शन के बाद मैं आपसे मिलवाता हूँ उन्हें " इतना कहकर राजू वहाँ से वापस अपनी माँ के पास आकर खड़ा हो जाता है,इन सब के बीच केक काटा जाता है पर Mr सिंघानिया और सरिता देवी अपने ही ख़यालो मे कहीं गुम रहते हैं,तभी राजू माँ से कहता है " माँ मैंने सर से बात कर ली है,जैसे ही सर मेहमानों से फ्री होते हैं वैसे ही मैं तुम्हें उनसे मिलवा दूंगा और फिर तू मेरी और रानी की बात उनसे कर लेना,आज मैंने रानी से वादा किया है कि मैं शादी की बाद करूँगा उसके पापा से,आज बहुत अच्छा दिन है," !! राजू की बात सुनकर माँ ने राजू से कहा, " बेटा,एक बात बोलूं ..? " !!

"हाँ,माँ बोल न,क्या बात है" राजू ने माँ की बात सुनकर उनसे कहा !!

" बेटा,अब मैं तुझसे जो कहने जा रही हूँ वो बात शायद तुझे अच्छी नहीं लगे,पर अब तू रानी को भूल जा,क्योंकि अब ये रिश्ता नही हो सकता" राजू की माँ ने राजू से कहा !!

ये सुनकर राजू को जैसे बिजली का झटका लग गया हो,जो , माँ उसके रिश्ते के लिए दिन रात सोच रही थी,जिसे रानी अपनी बहू के रूप मे इतनी पसंद थी वो माँ आज राजू को रानी को भूलने को क्यों कह रही है,राजू को कुछ समझ नही आ रहा था कि माँ को अचानक ऐसा क्या हुआ,और राजू ने माँ से पूछा," ये क्या बोल है माँ,तुझे तो रानी पसंद थी न,तूने ही तो हमारी कहानी शुरू की थी और आज तू ही बोल रही है कि उसे भूल जाऊं,आखिर बात क्या है माँ मुझे बता,कोई गलती हुई है क्या मुझसे..?" !!

राजू की माँ उसकी बात सुनकर जवाब देती ही कि, " देख राजू,यहाँ अभी बहुत मेहमान है,और तुझे और तेरे बॉस को लोग जानते हैं,यहाँ तमाशा हो जाएगा,मेरा यहाँ मन नही लग रहा है मैं घर जा रही हुँ ! हम वहाँ बात करेंगे" ऐसा कहते हुए राजू की माँ वहाँ से निकल जाती है !!

राजू के लाख रोकने पर भी सरिता देवी वहाँ से निकल जाती है,और उन्हें मनाने के लिए राजू भी उनके पीछे पीछे चला जाता है,Mr सिंघानिया दूर से ये सब देख लेते हैं और वो भी उनके पीछे चले जाते हैं ! उधर राजू अपनी माँ को रोकने की कोशिश करता है पर उसकी माँ उसकी बात नही सुनती,हारकर वो होटल मे ही एक कमरे मे माँ का हाथ पकड़कर ले जाता है और फिर माँ से कहता है," तुझे उस भीड़ मे कुछ नही बताना था न,अब यहाँ कोई नही है और , हमारी बातें भी कोई नही सुन रहा है,अब तू यहीं बता की आखिर क्यों तुझे ये रिश्ता मंजूर नही है,जिस रिश्ते के साथ तू आजतक थी आज उसके ख़िलाफ़ कैसे हो गयी..? आज तुझे बताना पड़ेगा माँ,तुझे मेरी कसम है,"राजू ने रोते हुए अपनी माँ से पूछा !!

राजू की बात सुनकर और कसम का सुनकर माँ ने गुस्से में चिल्लाते हुए राजू से कहा, " तू सुनना चाहता है न,की मैं इस रिश्ते के ख़िलाफ़ क्यों हूँ और क्यों नही चाहती कि रानी की शादी तुझसे हो तो सुन,एक भाई और बहन की शादी नही हो सकती ये पाप है पाप,हाँ रानी तेरी बहन है और Mr सिंघानिया तेरे पिता हैं " !!

ये सच्चाई सुनकर जैसे राजू मर से गया हो,उसके सर पर पहाड़ टूट पड़ा था,उसका पूरा शहर पसीने मे नहा लिया था,उसे समझ नही आ रहा था कि ये कैसे हो सकता है,वो ये मानने को तैयार नही हो रहा था और उसने माँ से पूछा, " तू ये क्या कह रही है माँ,ये कैसे हो सकता है,Mr सिंघानिया मेरे पिता कैसे हो सकते हैं और तू जानती है की मैं इतने महीनों से उनके यहाँ काम कर रहा हुँ तो तूने आजतक ये बात मुझसे क्यों छुपाई थी...? " !

तब माँ ने कहा कि ,"मुझे नही पता था कि सिंघानिया ही तेरे , पिता हैं,मैंने उन्हें देखा नही था आजतक,आज पार्टी मे पहली बार देखा,तो मुझे कैसे पता होगा कि वो तेरे पिता हैं !"

तब राजू ने कहा कि ," अरे चेहरा नही देखा था तो नाम तो जानती होगी ना,नाम से भी नही पहचान सकी"!

फिर माँ ने राजू से कहा कि,"उनका नाम आनंद कुमार था,बलदेव सिंघानिया नहीं" !!

राजू ये सुनकर और भी चोंक पड़ा और उसने माँ से कहा,"जब उनका नाम आनंद कुमार था तो ये तो बलदेव सिंघानिया है,हो सकता है माँ की तुझे कोई गलतफहमी हो गयी हो "!!

तब माँ ने कहा," बेटा मेरी आँखें उन्हें पहचानने मे कभी धोखा नही खा सकती,वो तेरे पिता ही हैं,पर उन्होंने नाम क्यों बदला ये मैं नही जानती "!!

तभी अचानक कमरे के दरवाज़े पर दस्तक होती है,और दोनों का ध्यान दरवाज़े पर चला जाता है,राजू पूछता है.."कौन है..?

बाहर से आवाज़ आती है,"मैं ,सिंघानिया"!!

,

राजू अपने आप को सम्भालते हुए दरवाज़ा खोलता है,तभी सामने Mr सिंघानिया को देखकर दंग रह जाता है,और फिर Mr सिंघानिया राजू से कहते हैं," राजू माफ करना मैंने आप दोनों की सारी बातें सुन ली हैं और तुम्हारी माँ सही कह रही है कि मैं ही तुम्हारा बाप हूँ,"ये सुनकर राजू एकदम से दंग रह जाता है,और वो झटके से पीछे रखे सोफे पे जाकर बैठ जाता है,उसे समझ नही आता कि ये सब क्या हो रहा है !! तब Mr सिंघानिया बोलते हैं कि ये कहानी मैं तुम्हें बताता हूँ कि मैं आनंद से बलदेव क्यों बना !!

और फिर Mr सिंघानिया कहते हैं कि ," ये कहानी आज से 20 साल पहले 1975 मे शुरू हुई थी,मेरा नाम आंनद कुमार था और मैं यहीं राजस्थान मे जयपुर के पास ही एक गांव मे अपनी माँ के साथ रहता था,पिताजी का देहांत मेरे बचपन मे ही हो गया था,और माँ ने मुझे बहुत मुश्किलों से पाला था और बड़ा किया था,मैंने बहुत मुश्किलों से अपनी पढ़ाई पूरी की थी और नौकरी की तलाश मे था,तभी मुझे एक नई कंपनी का पता लगा अपने मित्रों से की वहाँ भर्ती चल रही है और उसके इंटरव्यू जयपुर मे हो रहे हैं,मैंने सोचा कि क्यों न नौकरी के लिए try किया जाए और मैं अब माँ का सहारा बनना चाहता था ,मैं उस नौकरी के लिए जयपुर गया और वहाँ सिंघानिया ग्रुप ऑफ कंपनी मे मैंने इंटरव्यू दिया,और , मुझे अपनी काबिलियत पे भरोसा था और मेरा सिलेक्शन हो गया ! मुझे नौकरी तो मिल गयी थी पर ये नौकरी मुझे बम्बई मे मिली थी क्योंकि कंपनी वहीं की थी और मुझे वहीं रहना था !! तब मैंने भी यही शर्त रखी थी जैसे तुमने मेरे सामने रखी थी कि मुझे बम्बई मैं नही रहना क्योंकि मेरी माँ यहाँ अकेली थी और उनका ध्यान रखने वाला कोई नहीं था,पर सबकी किस्मत तुम्हारे जैसे नही रहती,मैंने तुम्हारी शर्त इसीलिए भी मान ली थी क्योंकि उस वक़्त मेरी शर्त नही मानी गयी थी,और मैं नही चाहता था कि जो तक़लीफ़ मेरी माँ ने मुझसे दूर होकर सही है वो कोई और अपनी माँ से दूर होकर सहे !!
 
हुआ वही जो होना था,मेरी शर्त नही मानी गयी और उन्होंने साफ कह दिया था कि आपको बम्बई मे रहकर ही नौकरी करनी पड़ेगी,मैं मजबूर था क्योंकि मुझे नौकरी की सख़्त ज़रूरत थी तो मैंने मजबूरन ये नौकरी कर ली,अब मेरी माँ यहाँ गांव मे रहती और मैं वहाँ बम्बई मे नौकरी करता था,महीने मे एक बार मिलना हो पाता था माँ से !! 6 महीने बीत गए फिर मुझे अचानक एक दिन पता चला कि मुझे कंपनी के काम से जयपुर जाना है वो भी पूरे एक महीने के लिए!! मेरी खुशी का ठिकाना नही था क्योंकि मैं अब पूरे एक महीने अपनी माँ के पास रह सकता था,मैं जयपुर आ गया था और हमारी कंपनी उस वक़्त यहाँ एक कपड़े की फैक्ट्री , डालना चाहती थी तो मुझे यही काम इसीलिए सौंपा गया था क्योंकि मैं यहाँ का लोकल था और इस काम को अच्छी तरह से कर सकता था ! जयपुर मे फैक्ट्री के काम के लिए कुछ महिलाओं की भी भर्ती करने का काम मुझे सौंपा गया था,उसी सिलसिले मैं तुम्हारी माँ सरिता भी फैक्ट्री मे काम करने के लिए आई थी ! उसे नौकरी की ज़रूरत थी और वो गरीब भी थी,मैंने जैसे ही सरिता को देखा तो उसे देखता ही रह गया,वो बहुत सुंदर लग रही थी,मैंने उसे नौकरी पर रख लिया ! धीरे धीरे समय बीतता गया और मैं सरिता को पसंद करने लगा,पूछने पर पता चला कि सरिता का गाँव भी मेरे गाँव के पास ही है,एक दिन मैंने अपने दिल की बात सरिता को बता दी कि मै उससे प्यार करने लगा हूँ और उससे शादी करना चाहता हुँ ,तब सरिता ने भी मुझसे कहा कि वो भी मुझे पसंद करती है और वो भी शादी करने के लिए तैयार है !!

उसके बाद मैंने ये बात अपनी माँ को बताई और उन्हें सरिता से मिलवा दिया,माँ को भी सरिता पसंद आ गयी! अब माँ भी चाहती थी कि हमारी शादी जल्द से जल्द हो जाये! धीरे धीरे पूरा महीना बीत गया और मुझे बम्बई जाने मे सिर्फ 2 दिन बचे !!
 
ये 2 दिन मैं सिर्फ सरिता के साथ बिताना चाहता था और हमने इन दो दिनों मे मैं सरिता की सारी यादें समेटकर ले जाना चाहता था,और जल्द से जल्द बम्बई जाकर अपने सेठ जी से बात करके दोबारा जल्दी आकर सरिता से शादी करना चाहता था ! हम दोनों जयपुर खूब घूमें इन दो दिनों में अपनी यादों का पिटारा मैंने सरिता के साथ बिताए लम्हों से भर लिया था,दूसरे दिन शाम को हम जयपुर के किले मे थे तभी वहाँ जोरदार बारिश होने लगी,बारिश से बचने के लिए हम छुपने की जगह ढूंढने के लगे और हम किले मे ही एक जगह जाकर अपने आप को किसी तरह बारिश से बचाने लगे,हम दोनों लगभग पूरे भीग गए थे और बारिश बन्द होने का नाम नही ले रही थी !! मेरी नज़र सरिता पर पड़ी और मैं उसे देखता ही रह गया, उसके बाद हम दोनों बस एक दूसरे को देखे जा रहे थे, हम दोनों अपनी भावनाओं मे बह गए और हमने सारी मर्यादा तोड़ दी और हम उस दिन एक दूसरे के हो गए !!

उसके बाद सरिता ने मुझसे कहा जी जो हुआ अच्छा नही हुआ,हमे खुद पर काबू रखना चाहिए था,भावनाओं में बहकर हमने गलत कर दिया,तो मैंने उसे समझाया कि हमने कोई पाप नही किया है,हम एक दूसरे को चाहते हैं प्यार करते हैं एक दूसरे से,और वैसे भी मे कल बम्बई जाकर अपने सेठ जी से बात करूंगा और एक महीने में वापस आकर हम शादी कर लेंगें !! उसके बाद अगले दिन मैं बम्बई वापस आ गया,मुझे लगा कि सब ठीक चल रहा है और आगे भी सब ठीक ही होगा,पर मुझे क्या पता था कि बम्बई मे एक तूफ़ान मेरा इंतज़ार कर रहा है जो मेरी मेरे सारे सपने बिखेर कर रख देगा,और हमेशा के लिए मेरी ज़िंदगी बदल देगा !!

,

एक दिन मेरी कंपनी के मालिक सेठ श्री मदनलाल सिंघानिया ने मुझे बुलाया और मुझे अपनी बेटी को एयरपोर्ट से लेकर आने को कहा क्योंकि डाइवर उस वक़्त नही था,और अगर एयरपोर्ट टाइम पे किसी को नही भेजा गया तो मेरी बेटी सुमन पूरा एयरपोर्ट सर पर उठा लेगी ! उसका गुस्सा बहुत खराब है वो 3 साल बाद हिंदुस्तान आ रही है अमेरिका से अपनी पढ़ाई पूरी करके ! मैंने अपने सेठ जी की बात मान ली और सुमन को लेने एयरपोर्ट चला गया !!

एयरपोर्ट पर सुमन को लेकर मैं घर गया और उन्हें वहाँ छोड़ दिया,पर पता नही क्यों सुमन ने अपने ख्यालों मे मुझे नही छोड़ा था,मुझे पता ही नही चला कि कब मन ही मन वो मुझे चाहने लगी और उसकी चाहत इतनी बढ़ गयी कि उसने मुझसे शादी करने का फ़ैसला कर लिया था और मुझे ये बात पता नही थी,एक दिन मुझे तुम्हारी माँ सरिता का फ़ोन आया था गाँव से और उसने बताया कि वो माँ बनने बनने वाली है,और हमें जल्दी से शादी करना पड़ेगी ! ये बात सुनकर मैं तुरन्त अपने सेठ जी के पास गया और मैंने उनसे कहा कि मुझे गाँव जाना पड़ेगा मेरी शादी है,सेठ जी मान गए और उन्होंने कहा कि ठीक है और मुझे 4 दिन बाद जाने को कहा,क्योंकि जो काम मैंने शुरू किया था उसे खत्म करना था,मैं मान गया और मैंने अपनी शादी की तैयारियाँ शुरू कर , दी ! गाँव आने के 2 दिन पहले जब मैं फैक्ट्री मे काम कर रहा था तो मुझे अचानक पता चला कि कंपनी का एक employee महेश जो मुझसे पहले से कंपनी मे काम कर रहा था उसने 5 लाख का गबन कर दिया था और एकाउंट्स मे हेरफेर किया था,और उसने ये सारे गबन मेरे नाम से किये थे,ये बात मुझे उस रात पता चली और मैंने तुरंत सेठ जी को बताना चाहा पर मेरी किस्मत उस दिन खराब चल रही थी,मैं तुरंत सेठ जी के यहाँ के लिए रवाना हो गया,वहाँ पहुँचा तो मुझे पता चला कि सब लोग हॉस्पिटल मे हैं क्योंकि सुमन ने अपने हाथ की नस काट ली थी,मैं तुरंत हॉस्पिटल पहुँचा तो मुझे पता चला कि सुमन ने हाथ की नस मेरे लिए काटी थी वो ये ज़िद पकड़ के बैठी थी कि मुझसे ही शादी करेगी या मर जाएगी क्योंकि उसे ये पता चल गया था की मैं शादी करने गाँव जा रहा हुँ तो उसको लगा कि अब उसकी शादी नही हो पाएगी तो उसने हाथ की नस काट ली, ये बात सेठ जी ने मुझे बताई,वो मुझसे कहने लगे कि उन्होंने लाख समझाने की कोशिश की पर सुमन मानने को तैयार नही थी,वो बार बार कह रही थी कि कब तक मुझे बचाओगे मैं फिर अपनी जान देने की कोशिश करूँगी !! सेठ मदनलाल अपनी बेटी से बहुत प्यार करते थे और उसकी खुशी के लिए उसकी बात भी मान सकते थे! तब मैंने सेठ जी को मौका देखकर ये बता दिया कि महेश ने कंपनी के एकाउंट्स मे गबन किया था और सारे कागज़ उसने आनंद कुमार के नाम से बनाये हैं!

,

मेरे पास अपनी बेगुनाही का कोई सबूत नही था पर फिर भी सेठ जी को मुझ पर विश्वास था कि मैंने ये गबन नही किया ! अगले दिन जब मैं जाने की तैयारी करने लगा तब सेठ जी ने मुझे बुलाया और कहा ," देखो आनंद अब जो बात मैं तुम्हें बताने जा रहा हूँ उसे सुनने के बाद तुम शायद यहाँ से जा नही पाओगे,पर मैं जो भी कर रहा हूँ अपनी बेटी की खुशी के लिए कर रहा हूँ,मैं उसे मरता हुआ नही देख सकता और इसीलिए मैं चाहता हूँ कि तुम उससे शादी कर लो," ! सेठ जी की बातें सुनकर मैं चोंक गया कि ये कैसे हो सकता है जबकि सेठ जी को सब मालूम था !
 
उन्होंने मुझे कहा कि अगर मैं उनकी बात नही मानता हूँ तो वो मुझे जेल भेज सकते हैं क्योंकि वो अपनी बेटी की खुशी के लिए कुछ भी सही या गलत करने के लिए सोचेंगे नही और मेरे नाम से जो गबन हुआ है वो सारे सबूत मेरे ख़िलाफ़ है और मैं ये कभी साबित नही कर पाऊंगा की मैं बेगुनाह हूँ,सेठ जी की ये बातें सुनकर मैं दंग रह गया,वो उनकी बेटी के प्यार मे अंधे हो चुके थे !! मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या हो रहा है,फिर सेठ जी ने कहा कि तुम घबराओ मत अगर तुम मेरी बात मानकर मेरी बेटी से शादी करोगे तो तुम्हारी माँ का ख्याल रखना मेरी ज़िम्मेदारी ,उन्हें समय समय , पर पैसे पहुँच जाएंगे और शादी के बाद तुम उन्हें भी यहीं ले आना उसके बाद तो वो मान ही जाएंगी न !! मैं शादी के बाद तुम्हें अपनी कंपनी मे पार्टनर बना लूंगा क्योंकि तुम दामाद बन जाओगे मेरे,अब फैसला तुम्हारे हाथ मे है,एक तरफ तुम्हारी आज़ादी और साथ ही साथ तुम्हारी ज़िन्दगी बदल जाएगी और दूसरी तरफ तुम जेल चले जाओगे ये सुनकर तुम्हारी माँ जीते जी मर जाएगी !! तब मैंने सेठ जी से कहा कि सरिता का क्या होगा तो उन्होंने मुझसे कहा कि उसकी शादी भी कहीं दूसरी जगह करवाने की ज़िम्मेदारी भी वो उठाने के लिए तैयार हैं !!

ये सब सुनने के बाद मेरी समझ नही आ रहा था कि मैं क्या करूँ,मैं सरिता और माँ को नही छोड़ सकता था पर अगर मैं सेठ जी की बात नही मानता तो वो मेरी ज़िंदगी हमेशा के लिए बर्बाद कर देते !! मैंने अपने दिल पर पत्थर रख कर लिया और सेठ जी की बात मान ली !! सेठ जी ने अपने पैसे की ताकत से सारे सबूत जो मेरे खिलाफ थे वो मिटा दिए और रमेश को गबन के केस मे फंसा कर उसे जेल भेज दिया ,और मैंने अपनी कंपनी के काम का बहाना बना कर सरिता को शादी आगे बढ़ाने के लिए मना लिया और यहाँ सुमन से मजबूरन शादी कर ली, सेठ जी ने मेरी पूरी आइडेंटिटी बदल दी थी मैं आंनद कुमार से बलदेव सिंघानिया बन गया था और कंपनी मे पार्टनर भी हो गया था,सेठ जी ने ऐसा इसीलिए , किया ताकि अगर शादी के बाद कोई मेरे बारे मे पूछने आये तो उन्हें आनंद कुमार के बारे मे कुछ पता नही चले !! मैं अपनी शर्त से बंधा हुआ था शादी तक न तो मैं सरिता से और न ही अपनी माँ से बात कर सकता था और न ही अपनी माँ को शादी मे बुला सकता था,क्योंकि यही शर्त थी सेठ जी की !! 10 दिन के अंदर ही उन्होंने एक छोटे से फंक्शन मे मेरी शादी सुमन से करवा दी और उसके तुरंत बाद हम दोनों को घूमने के लिए अमेरिका भेज दिया 15 दिनों के लिए !!

जब हम अमेरिका में थे तब हमें अचानक खबर लगी कि सेठ जी को अटैक आया है,ये ख़बर सुनते ही हम तुरंत वहाँ से निकल गए और 10 दिनों मे ही वापस आ गए ! पर हमें यहाँ आकर पता चला कि हमारे आने से पहले ही सेठ जी परलोक सिधार गए थे और उनके वकील से मुझे पता चला कि उन्होंने अपनी सारी प्रॉपर्टी मेरे और सुमन के नाम कर दी थी !! ये सुनकर मुझे बहुत बड़ा झटका लगा था क्योंकि माँ को यहां लाने की और सरिता की ज़िंदगी बर्बाद होने से बचाने की ज़िम्मेदारी सेठ जी ने उठाई थी !! सेठ जी के अंतिम संस्कार के कुछ दिन बाद मैंने सोचा कि मैं माँ और सरिता का पता लगाया जाए,मैं खुद वहाँ जा नही सकता था क्योंकि मैंने अपनी पहचान बदल ली थी तो मैंने अपने आदमियों से कहकर पता लगाया और मुझे पता लगा कि माँ मर चुकी थीं और सरिता भी गाँव छोड़कर चली गयी थी !! उसके बाद मैं , टूट सा गया था,मैंने सरिता को बहुत ढूंढने की कोशिश की पर मुझे उसका पता नही चला और इन सब के बीच सुमन को भी अपनी गलती का अहसास हो गया था कि उसकी एक ज़िद की वजह से मेरी ज़िंदगी बदल गयी मैंने उससे शादी तो कर ली थी पर कभी पत्नी के रूप मे उसे स्वीकार नही किया था !!

सुमन ने अपनी गलती मानते हुए मुझसे माफी मांग ली थी और धीरे धीरे मैंने भी उसे माफ कर दिया था क्योंकि अब कुछ नही हो सकता था,मैंने भी हालात से समझौता करते हुए सुमन को अपना लिया था पर शायद सुमन की किस्मत मे मैं नही था क्योंकि कुछ साल बाद रानी को जन्म देते वक्त सुमन इस दुनिया को छोड़कर चली गयी थी !!

Mr सिंघानिया की बातें सुनकर सरिता देवी और राजू दंग रह गए और फिर सरिता देवी ने Mr सिंघानिया से कहा ," अगर तुम आंनद कुमार से बलदेव सिंघानिया बन गए थे तो फिर गाँव मे तुम्हारे मरने की खबर कैसे आ गयी,और फिर उसके बाद तुम्हारी लाश भी आई थी वो किसकी थी...?"!!

Mr सिंघानिया ने जैसे ही ये सुना वो दंग रह गए और इसकी सच्चाई जानने के लिए उत्सुक थे !!
 
Mr सिंघानिया ने सरिता से आश्चर्य से पूछा,"लाश,ये क्या बोल रही हो..? मैं ज़िंदा हूँ तो मेरी लाश कहाँ से आ सकती है..? !!

सरिता देवी ने कहा," हाँ तुम्हारी लाश गाँव मे आयी थी,पर.."

" पर क्या,..? " Mr सिंघानिया ने सरिता देवी से पूछा !

" पर उस लाश का चेहरा पूरी तरह बिगड़ गया था,और उसकी शिनाख्त सिर्फ तुम्हारी कंपनी के कागज और तुम्हारे पहचान पत्र से हुई थी,हमें ये बताया गया था कि तुम्हारी हत्या कर दी गयी है और हत्यारे ने तुम्हारा चेहरा पूरी तरह से बिगाड़ दिया था" सरिता देवी ने Mr सिंघानिया से रोते हुए कहा !!

Mr सिंघानिया ने जब ये सुना तो कुछ देर तक सोचने के बाद उन्हें पूरी कहानी समझ आ गयी थी,और Mr सिंघानिया ने कहा," अब मुझे सब समझ आ गया कि ये किसने किया होगा" !!

" किसने,...? " सरिता देवी ने पूछा !!

,

तब Mr सिंघानिया ने बताया," ये सब सेठ जी ने करवाया था,इसीलिए उन्होंने मेरी आइडेंटिटी बदलवाई थी,ताकि मुझे कानून की नज़र मे मार दें और नई पहचान के साथ मैं उनकी बेटी के साथ जीवन जी सकूँ,मैं उन्हें अच्छे से पहचानता हूँ वो अपनी बेटी के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और ये सब उन्होंने कैसे किया होगा मुझे पता है,उन्होंने मुझसे सारे पहचान पत्र ले लिए थे उसके बाद उन्होंने हॉस्पिटल के मुर्दाघर से एक मेरे जैसी कदकाठी की लाश ढूंढ़ी और फिर उसका चेहरा बिगाड़ कर उसके पास मेरी आइडेंटिटी छोड़ दी और ये सब उन्होंने तब किया होगा जब मैं शादी के बाद अमेरिका गया था सुमन के साथ,पैसों के दम पर उनके लिए ये सब करना बहुत आसान था ! पर भगवान ने उन्हें इसकी सज़ा जल्दी ही देदी,क्योंकि उसी बीच बदकिस्मती से उन्हें heartattack आ गया और वो चल बसे !!"

ये सुनकर सरिता देवी ने कहा," जब गाँव मे वो लाश आयी थी तब उसे देखकर तुम्हारी माँ का बुरा हाल हो गया और वो ये सदमा सहन नही कर सकीं और उसी दिन वो भी चल बसी,जब ये ख़बर मुझे लगी तो मेरे लिए जैसे सारी दुनिया ही लूट गयी हो,एक तो तुम्हारी मौत की ख़बर और दूसरी मेरे पेट मे राजू था और दुनिया को कैसे ये समझाती की ये तुम्हारी निशानी है,कोई ये बात नही मानता और उस जमाने मे मुझे , सब बच्छलन कहते,ये बात जब मेरे घरवालो को पता चली की मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली हूँ तो उन्होंने बदनामी के डर से उसी हालत मे मुझे घर से निकाल दिया,मैंने वो गाँव छोड़ दिया और जोधपुर के पास बांधवगढ़ मे आकर रहने लगी,लोग ताने तो यहाँ भी देते थे पर मैंने लोगों के तानों का सामना करके राजू को जन्म दिया,क्योंकि मैं तुम्हारी आखिरी निशानी कैसे मिटा सकती थी,मैंने पूरी ज़िंदगी राजू को बड़ी मुश्किलों से पाला,और आज जब तुम्हारी आवाज़ सुनी और तुम्हें देखा तो तुम्हें पहचान लिया !!

Mr सिंघानिया ने तब सरिता देवी और राजू की तरफ हाथ जोड़ते हुए कहा," मैं तुम दोनों का गुनाहगार हूँ और हो सके तो मुझे माफ़ कर दो,हालांकि मैं माफी के लायक तो नही हूँ पर जो भी हुआ वो हालातों के कारण हुआ,मैं मजबूर था !!"

ये सारी बातें राजू चुपचाप सुन रहा था और उसकी आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे अब Mr सिंघानिया और सरिता देवी को इंतज़ार था कि राजू क्या बोलेगा,और तभी कुछ देर के लिए पूरे कमरे मे सन्नाटा छा गया और फिर तभी राजू Mr सिंघानिया से कहता है," Mr बलदेव सिंघानिया उर्फ Mr आनंद कुमार,आप क्या समझते हैं कि आपने जो गलती की उसके लिए मैं आपको माफ़ कर दूंगा,अरे बिल्कुल नही,आपकी वजह से माँ ने और मैंने कितनी तक़लीफ़ उठाई , है ये शायद आपको अंदाजा भी नही होगा,हमने किस तरह लोगों के ताने सुन सुन कर अपना जीवन काटा है,माँ ये सब भूल के आपको माफ़ कर सकती है पर मैं नहीं ,और जाने अनजाने आपने आज मुझसे मेरा प्यार भी छीन लिया है,अरे मैं रानी से बेइंतेहा प्यार करता हुँ और आज उससे अपने प्यार का इज़हार करने वाला था,पर अब चाह के भी उससे कुछ नही कह पाऊंगा,आज उससे मेरा रिश्ता एक ही पल मे बदल चुका है,जाईये Mr सिंघानिया आज आपकी बेटी का जन्मदिन है,और बाहर आपका इंतज़ार कर रहे है आपके मेहमान और घबराइए मत,ये बात मैं किसी को नही बताऊंगा की मैं आपका बेटा हुँ क्योंकि इससे आपकी इज़्ज़त खराब हो जाएगी "ये कहते हुए राजू रूम से बाहर चला जाता है !!

राजू जैसे ही रूम से बाहर निकलता है तो उसे सामने से रानी आते हुए दिखती है जो कि अपने पापा को ढूढ़ते हुए आयी थी ! राजू के पास आकर बोलती है ," राजू,तुम कहाँ चले गए थे,और मेरे पापा कहाँ है..? तुम दोनों कहाँ चले गए थे,मैं कब से ढूंढ रही हुँ,और आज तो तुम मुझे प्रोपोज़ करने वाले थे ना,पापा से माँ की बात करवाने वाले थे,तो फिर अचानक तुम सब कहाँ गायब हो गए"!!

राजू रानी की बातों का जवाब दिए बिना वहाँ से चले जाता है और रानी उसे आवाज़ लगाती है फिर भी नही रुकता राजू , और तभी वहाँ Mr सिंघानिया आ जाते हैं और रानी से कहते हैं कि ," बेटा,मुझे तुझसे कुछ बात करनी है" और रानी कहती है कि ,"क्या पापा,आप कहाँ चले गए थे,मेहमानों को जवाब देते देते मैं थक गई हुँ,सब पूछ रहे थे आप कहाँ हैं..? अभी बात बाद मे करेंगे पापा,आप पहले चलो यहाँ से" ऐसा कहते हुए रानी Mr सिंघानिया को खीच के ले जाने की कोशिश करती है,तभी Mr सिंघानिया रानी से कहते हैं कि," बेटा,अभी जो बात मुझे तुझे बतानी है उससे ज़रूरी काम अभी कुछ भी नही है " तो रानी उनसे कहती है, " ऐसी क्या बात है पापा,अभी राजू भी मुझसे बात किये बिना ही चला गया और आप भी कुछ परेशान लग रहे हो,क्या हुआ...?"!

Mr सिंघानिया रानी को फिर रूम मे लेकर आते हैं जहाँ पहले से ही राजू की माँ बैठी रहती हैं,रानी उन्हें देखती है और कहती हैं कि "माँ जी आप..! आप दोनों यहाँ क्या बात कर रहे थे,और पापा इतने परेशान क्यों है..?" तब Mr सिंघानिया रानी को बोलते हैं कि " मुझे पता है कि तू और राजू एक दूसरे से प्यार करते हैं और ये बात तू मुझे आज बताने वाली थी" ये सुनकर रानी खुश हो जाती है,और कहती है "हाँ पापा ये बात मैं आज आपको बताने वाली थी,की मैं उससे बहुत प्यार करती हुँ और हम दोनों शादी..." इतना सुनते ही Mr सिंघानिया रानी को वहीं रोकते हैं और बोलते हैं कि बस रुक जा रानी,इसके आगे एक शब्द भी मत बोलना क्योंकि ये नही , हो सकता,तेरी राजू से शादी नही हो सकती "!

"क्यों नही हो सकती पापा,मैं उससे प्यार करती हूँ और मैं उसके बिना नही जी सकती,आज मेरा बर्थडे है और आप मेरा दिल तोड़ रहे हो,क्यों नही कर सकती मैं राजू से प्यार,सिर्फ इसीलिए की वो आपके स्टेटस का नही है"रानी ने अपने पापा की बात का जवाब देते हुए कहा !

तब Mr सिंघानिया ने रानी को जवाब देते हुए चिल्लाते हुए कहा," क्योंकि तेरा उससे रिश्ता है,इसीलिए नही हो सकती उससे तेरी शादी,क्योंकि वो मेरा बेटा है इसीलिए नही हो सकती उससे तेरी शादी ,क्योंकि वो तेरा भाई है इसीलिए नही हो सकती उससे तेरी शादी..."

जैसे ही रानी ने Mr सिंघानिया के ये शब्द सुने तो उसपे मानो बिजली गिर गयी हो,उसे समझ नही आ रहा था कि उसके पापा क्या बोल रहे हैं,तब रानी ने अपने पापा से पूछा," ये क्या बोल रहे हैं आप पापा,ये कैसे हो सकता है" !!

तब Mr सिंघानिया और सरिता देवी ने मिलकर रानी को पूरी कहानी सुनाई ! पूरी कहानी सुनने के बाद रानी जैसे बुत बनकर बैठी रही,उसे जैसे सबकुछ जानकर कोई सदमा लगा हो,उसकी पूरी दुनिया लूट गयी थी,आज उसके लिए सबसे खास दिन था और आज ही के दिन उसने एक ऐसी सच्चाई का सामना किया था जिसकी उम्मीद उसने कभी नहीं कि , थी! एक ही पल मे रानी और राजू के रिश्ते बदल गए थे,उन दोनों ने एक दूसरे के लिये जो दिल मे जगह बनाई थी अब उस जगह से हटना उन दोनों के लिए मुमकिन नही था ! रानी को ये बात जानकर इतना सदमा लगता है कि वो पार्टी छोड़कर चली जाती है और फिर Mr सिंघानिया किसी तरह महमानों को बेमन से विदा करते हैं!! Mr सिंघानिया अपने सेक्रेटरी से बोल कर बम्बई जाने की टिकट कैंसिल करवाते हैं और बोलते हैं कि वो अभी बम्बई नही जाना चाहते और कुछ दिन तक कोई मीटिंग्स न लें क्योंकि वो किसी से नही मिलना चाहते!!

अभी तक ये बात सिर्फ 4 लोगों को ही पता थी उस दिन दीवाली थी और जोधपुर मैं सब धूमधाम से दीवाली मना रहे थे पर सिंघानिया परिवार के लिए ये दीवाली सबसे काली दीवाली थी क्योंकि एक तरफ Mr सिंघानिया को उनका बेटा और उनका प्यार मिल गया था तो वहीं दूसरी तरफ जाने अनजाने उनके अपने बच्चों के प्यार हमेशा के लिए खत्म हो रहे थे !! उधर राजू की माँ भी लगातार राजू को समझा रही थी कि अपने पिता को माफ़ करदे क्योंकि इन सब मे उनकी कोई गलती नही थी,कुछ गलतफहमियां और कुछ हालात ऐसे थे कि उन्हें ये सब करना पड़ा और वो ये सब करने के लिए मजबूर थे!!
 
Back
Top