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इधर Mr सिंघानिया भी रानी को समझाने की कोशिश कर रहे थे,बड़ी मुश्किल से बहुत समझाने के बाद रानी ने कुछ खाया और एक फैसला लिया और अपने पापा से कहा ," डोंट वरी पापा,आई एम फाइन,मैं ठीक हूँ"!!
उधर राजू भी अब धीरे धीरे अपनी माँ की बात समझ रहा था और उसे भी ये लगने लगा था कि उसके पापा की इसमें कोई गलती नही है !!
अगले दिन Mr सिंघानिया ने राजू और उसकी माँ को होटल बुलाया और कहा," सरिता मैंने कल रात बहुत सोचा और इस नातीजे पर पहुँचा हुँ की जो हक़ मैं तुम्हें और राजू को पहले नही दे पाया वो मैं अब दूंगा,मैं पूरी दुनिया के सामने तुम्हें और राजू को अपनाऊंगा,राजू को अपनी पूरी प्रॉपर्टी का वारिस बनाऊंगा,मुझे अब किसी का डर नही है,"और ये कहते हुए Mr सिंघानिया राजू से गले लग जाते हैं और उससे माफी मांगने लगते हैं और उनकी आंखों से आँसू बहने लगते हैं,अब राजू भी कुछ कुछ पिघलने लगता है और Mr सिंघानिया से गले मिलता हुआ कहता है," रोईए मत पापा," राजू के मुंह से ये शब्द सुनकर Mr सिंघानिया भावुक हो गए और उनके आँसू बहने लगे ! राजू भी अपने पिता से मिलकर भावुक हो गया और उसकी आँखें भी बह निकली !!
, उस दिन शाम की फ्लाइट से राजू,उसकी माँ,Mr सिंघानिया और रानी चारों मुंबई के लिए निकल पड़े और कुछ दिन बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए सारी दुनिया को ये बता दिया कि राजू उनका बेटा है और सरिता से दोबारा कोर्ट मैरिज कर ली !! Mr सिंघानिया ने अपने वकील को बुलवा कर दोबारा अपनी वसीयत तैयार करवाई और राजू को अपना वारिस बना लिया! राजू और रानी अपने दिल पर पत्थर रख कर एक ही छत के नीचे रह रहे थे,भले ही Mr सिंघानिया ने राजू को अपना बेटा मान लिया हो पर रानी मन ही मन उसे आज भी प्यार करती थी,वो अपनी भावनाओं पे कंट्रोल नही कर पा रही थी,वो कभी भी राजू को अपना भाई नही मान सकती थी,उसका दिमाग कह रहा था कि राजू उसका भाई है और इस सच को दुनिया की कोई ताकत नही बदल सकती थी,पर रानी का दिल उसे भाई मानने के लिए तैयार नही था !
सब कुछ ठीक चल रहा था ,कुछ महीने हो चुके थे इस बात को फिर जनवरी 1996 के एक दिन अचानक राजू को जोधपुर अपने होटल "रानी पैलेस" के काम के सिलसिले मे जाने के लिए बोला गया तो रानी भी उसके साथ जाने की ज़िद करने लगी,लाख समझाने के बाद भी रानी नही मानी और राजू के साथ जोधपुर आ गयी और फिर वहाँ आकर राजू अपने काम मे व्यस्त हो गया और रानी घूमने के लिए मेहरानगढ़ किले पर चली गयी,राजू ने उससे पूछा की वो , किले पर क्यों जाना चाहती है तो उसने कहा कि," आज कोनसा दिन है..? तो राजू ने कुछ सोचा और कहा कि "पता नही" तब रानी ने उससे कहा कि " आज से ठीक एक साल पहले हम यहाँ पहली बार मिले थे " तब राजू रानी की बात सुनकर उदास होकर कहा,"रानी तुम्हें कितनी बार कहा है कि अब हमारे बीच वो रिश्ता नही है,और अब हमारे लिए ये सोचना भी पाप है" !! तब रानी ने कहा ठीक है बाबा,तुम अपना काम निपटा लो मैं किले पे जा रही हूँ तुम वहीं आ जाना मुझे लेने" !
फिर राजू ने कहा कि ," हमे आज शाम को ही मुंबई निकलना है"!!
" हाँ तो ठीक है ना,हम वहीं से निकल जायेंगे" रानी ने जवाब दिया !!
राजू शाम को जब अपना काम निपटा के किले पर पहुंचा तो उसने रानी को ढूंढने की कोशिश की उस वक़्त किले पर कोई नही था क्योंकि उस दिन किले पर पर्यटकों के लिए प्रवेश बंद था पर रानी स्पेशल गेस्ट थी इसिलिय उसे किले पर आने दिया गया था पर रानी किले मे कहीं नजर नही आ रही थी !! उसके बहुत देर ढूंढने के बाद उसने देखा कि रानी किले की उसी दीवार पे खड़ी है जहाँ एक साल पहले उसका एक्सीडेंट , हुआ था! राजू ने तुरंत देर न करते हुए ऊपर दौड़ लगा दी और जब वो ऊपर रानी के पास पहुँचा तो उसने रानी से कहा," रानी,ये क्या मज़ाक है,नीचे उतरो वहाँ से!!
तब रानी ने कहा," वहीँ रुक जाओ नही तो मैं यहाँ से कूद जाउंगी"!!
राजू ये सुनकर बिल्कुल हक्का बक्का रह गया और कहने लगा ," ये क्या बोल रही हो रानी,क्या मज़ाक है ये,उतरो नीचे"राजू ने उसे डांटते हुए कहा !!
तब राजू को उसने अपने दिल का हाल बताया और कहा ," राजू तुम भले ही मुझे भूल चुके होंगे पर मैं अभी तक हमारे रिश्ते को नही भूली हुँ,मैं आज भी तुमसे उतना ही प्यार करती हूँ और तुम्हें पाना चाहती हूँ,अगर आज तुमने मुझसे प्यार का इज़हार नही किया तो मैं यहाँ से कूदकर अपनी जान दे दूंगी"
तब राजू ने उसे समझाया कि," अब हमें अपने इस रिश्ते को भूलना होगा क्योंकि हम भाई बहन हैं,और इस सच को कोई बदल नही सकता,मैं चाह कर भी तुम्हें अब अपना नही सकता"!!
तब रानी ने जवाब दिया," जब मैंने तुमसे प्यार किया था तब , मुझे नही पता था कि तुम भाई हो"!
"तो मुझे भी कहाँ पता था,पर अब इस सच्चाई को हम दोनों को अपनाना पड़ेगा" राजू ने कहा !!
" हम एक काम करते हैं,हम देश छोड़ देते हैं जहाँ हमे कोई जानता न हो और वहाँ जाकर हम अपनी नई लाइफ शुरू करते हैं ,किसी को पता नही चलेगा कि हम भाई बहन है" रानी एक दम ऐसी बातें कर रही थी जैसे कोई मानसिक रोगी हो ! शायद राजू के लिए प्यार मे उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि वो क्या कर रही है !!
तब राजू ने रानी से कहा कि ," ये क्या बकवास कर रही हो तुम,हम इस जनम मे एक नही हो सकते तुम जितनी जल्दी इस सच्चाई को समझ लोगी तुम्हारे लिए अच्छा होगा,और नीचे आओ हमे जाना है अब"!!
तब रानी ने कहा," ठीक है राजू,इस जनम मे हम एक नही हो सकते तो ठीक है,मैं फिर आउंगी मेरा इंतज़ार करना,और हमे नही सिर्फ मुझे जाना पड़ेगा,मेरा इंतज़ार करना,तुम्हारी और सिर्फ तुम्हारी रानी"!! ऐसा कहते हुए रानी किले की दीवार से कूद जाती है और 400 फिट नीचे गिर जाती है और इस बार वो हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह कर चली , जाती है !!
राजू चाह कर भी उसे नही बचा पाता और रानी के आखिरी शब्द उसके कानों मे गूंजते रहते हैं!! 10 जनवरी 1996 को रानी इस दुनिया को अलविदा कह कर चली जाती है
उधर राजू भी अब धीरे धीरे अपनी माँ की बात समझ रहा था और उसे भी ये लगने लगा था कि उसके पापा की इसमें कोई गलती नही है !!
अगले दिन Mr सिंघानिया ने राजू और उसकी माँ को होटल बुलाया और कहा," सरिता मैंने कल रात बहुत सोचा और इस नातीजे पर पहुँचा हुँ की जो हक़ मैं तुम्हें और राजू को पहले नही दे पाया वो मैं अब दूंगा,मैं पूरी दुनिया के सामने तुम्हें और राजू को अपनाऊंगा,राजू को अपनी पूरी प्रॉपर्टी का वारिस बनाऊंगा,मुझे अब किसी का डर नही है,"और ये कहते हुए Mr सिंघानिया राजू से गले लग जाते हैं और उससे माफी मांगने लगते हैं और उनकी आंखों से आँसू बहने लगते हैं,अब राजू भी कुछ कुछ पिघलने लगता है और Mr सिंघानिया से गले मिलता हुआ कहता है," रोईए मत पापा," राजू के मुंह से ये शब्द सुनकर Mr सिंघानिया भावुक हो गए और उनके आँसू बहने लगे ! राजू भी अपने पिता से मिलकर भावुक हो गया और उसकी आँखें भी बह निकली !!
, उस दिन शाम की फ्लाइट से राजू,उसकी माँ,Mr सिंघानिया और रानी चारों मुंबई के लिए निकल पड़े और कुछ दिन बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए सारी दुनिया को ये बता दिया कि राजू उनका बेटा है और सरिता से दोबारा कोर्ट मैरिज कर ली !! Mr सिंघानिया ने अपने वकील को बुलवा कर दोबारा अपनी वसीयत तैयार करवाई और राजू को अपना वारिस बना लिया! राजू और रानी अपने दिल पर पत्थर रख कर एक ही छत के नीचे रह रहे थे,भले ही Mr सिंघानिया ने राजू को अपना बेटा मान लिया हो पर रानी मन ही मन उसे आज भी प्यार करती थी,वो अपनी भावनाओं पे कंट्रोल नही कर पा रही थी,वो कभी भी राजू को अपना भाई नही मान सकती थी,उसका दिमाग कह रहा था कि राजू उसका भाई है और इस सच को दुनिया की कोई ताकत नही बदल सकती थी,पर रानी का दिल उसे भाई मानने के लिए तैयार नही था !
सब कुछ ठीक चल रहा था ,कुछ महीने हो चुके थे इस बात को फिर जनवरी 1996 के एक दिन अचानक राजू को जोधपुर अपने होटल "रानी पैलेस" के काम के सिलसिले मे जाने के लिए बोला गया तो रानी भी उसके साथ जाने की ज़िद करने लगी,लाख समझाने के बाद भी रानी नही मानी और राजू के साथ जोधपुर आ गयी और फिर वहाँ आकर राजू अपने काम मे व्यस्त हो गया और रानी घूमने के लिए मेहरानगढ़ किले पर चली गयी,राजू ने उससे पूछा की वो , किले पर क्यों जाना चाहती है तो उसने कहा कि," आज कोनसा दिन है..? तो राजू ने कुछ सोचा और कहा कि "पता नही" तब रानी ने उससे कहा कि " आज से ठीक एक साल पहले हम यहाँ पहली बार मिले थे " तब राजू रानी की बात सुनकर उदास होकर कहा,"रानी तुम्हें कितनी बार कहा है कि अब हमारे बीच वो रिश्ता नही है,और अब हमारे लिए ये सोचना भी पाप है" !! तब रानी ने कहा ठीक है बाबा,तुम अपना काम निपटा लो मैं किले पे जा रही हूँ तुम वहीं आ जाना मुझे लेने" !
फिर राजू ने कहा कि ," हमे आज शाम को ही मुंबई निकलना है"!!
" हाँ तो ठीक है ना,हम वहीं से निकल जायेंगे" रानी ने जवाब दिया !!
राजू शाम को जब अपना काम निपटा के किले पर पहुंचा तो उसने रानी को ढूंढने की कोशिश की उस वक़्त किले पर कोई नही था क्योंकि उस दिन किले पर पर्यटकों के लिए प्रवेश बंद था पर रानी स्पेशल गेस्ट थी इसिलिय उसे किले पर आने दिया गया था पर रानी किले मे कहीं नजर नही आ रही थी !! उसके बहुत देर ढूंढने के बाद उसने देखा कि रानी किले की उसी दीवार पे खड़ी है जहाँ एक साल पहले उसका एक्सीडेंट , हुआ था! राजू ने तुरंत देर न करते हुए ऊपर दौड़ लगा दी और जब वो ऊपर रानी के पास पहुँचा तो उसने रानी से कहा," रानी,ये क्या मज़ाक है,नीचे उतरो वहाँ से!!
तब रानी ने कहा," वहीँ रुक जाओ नही तो मैं यहाँ से कूद जाउंगी"!!
राजू ये सुनकर बिल्कुल हक्का बक्का रह गया और कहने लगा ," ये क्या बोल रही हो रानी,क्या मज़ाक है ये,उतरो नीचे"राजू ने उसे डांटते हुए कहा !!
तब राजू को उसने अपने दिल का हाल बताया और कहा ," राजू तुम भले ही मुझे भूल चुके होंगे पर मैं अभी तक हमारे रिश्ते को नही भूली हुँ,मैं आज भी तुमसे उतना ही प्यार करती हूँ और तुम्हें पाना चाहती हूँ,अगर आज तुमने मुझसे प्यार का इज़हार नही किया तो मैं यहाँ से कूदकर अपनी जान दे दूंगी"
तब राजू ने उसे समझाया कि," अब हमें अपने इस रिश्ते को भूलना होगा क्योंकि हम भाई बहन हैं,और इस सच को कोई बदल नही सकता,मैं चाह कर भी तुम्हें अब अपना नही सकता"!!
तब रानी ने जवाब दिया," जब मैंने तुमसे प्यार किया था तब , मुझे नही पता था कि तुम भाई हो"!
"तो मुझे भी कहाँ पता था,पर अब इस सच्चाई को हम दोनों को अपनाना पड़ेगा" राजू ने कहा !!
" हम एक काम करते हैं,हम देश छोड़ देते हैं जहाँ हमे कोई जानता न हो और वहाँ जाकर हम अपनी नई लाइफ शुरू करते हैं ,किसी को पता नही चलेगा कि हम भाई बहन है" रानी एक दम ऐसी बातें कर रही थी जैसे कोई मानसिक रोगी हो ! शायद राजू के लिए प्यार मे उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि वो क्या कर रही है !!
तब राजू ने रानी से कहा कि ," ये क्या बकवास कर रही हो तुम,हम इस जनम मे एक नही हो सकते तुम जितनी जल्दी इस सच्चाई को समझ लोगी तुम्हारे लिए अच्छा होगा,और नीचे आओ हमे जाना है अब"!!
तब रानी ने कहा," ठीक है राजू,इस जनम मे हम एक नही हो सकते तो ठीक है,मैं फिर आउंगी मेरा इंतज़ार करना,और हमे नही सिर्फ मुझे जाना पड़ेगा,मेरा इंतज़ार करना,तुम्हारी और सिर्फ तुम्हारी रानी"!! ऐसा कहते हुए रानी किले की दीवार से कूद जाती है और 400 फिट नीचे गिर जाती है और इस बार वो हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह कर चली , जाती है !!
राजू चाह कर भी उसे नही बचा पाता और रानी के आखिरी शब्द उसके कानों मे गूंजते रहते हैं!! 10 जनवरी 1996 को रानी इस दुनिया को अलविदा कह कर चली जाती है