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शैतान से समझौता

रात साढ़े दस बजे के लगभग विनय अपने रूममेट के साथ बाहर आया। वो दोनों एक चाय की दुकान पर खड़े थे। विनय ने यूं ही जेनिफ़र को फ़ोन लगाया। फोन बंद था। वो परेशान हो गया। उसने उसके बार पर फोन किया जहां वो पार्ट टाईम वेट्रेस थी। पता चला वो अपनी शिफ्ट खत्म करके पौने सात पे ही चली गई।

"मैं अभी आया" बोलते हुए विनय वहां से निकल गया। दस मिनट बाद जब वो जेनिफ़र के रूम पे पहुंचा तो वो लाक्ड मिला। उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगा। वो नताशा के घर पर होगी क्या???

नताशा का घर अंधेरे में डूबा हुआ था। पड़ोसीयों ने बताया कि वो तो शाम चार बजे ही निकल गए। बाहर गए हैं तीन चार दिन के लिये।

तो जेनिफ़र ने झूठ बोला था। अब कोई शक नहीं की वो जंगल वाले हैलोवीन पार्टी में ही गई है।

उसने वहीं से अपने दोस्त रोहित को फोन किया।

उधर जेनिफ़र पैदल चलते चलते बहुत दूर निकल आई थी। अचानक जैसे वो नींद से जागी और चौंक कर सब तरफ़ देखा। वो एक सूनसान रोड पर थी जिसके दोनो तरफ ऊंचे ऊंचे काले पेड़ ,

भूताह दिख रहे थे। वो जंगल में आ चुकी थी। जंगली जानवरों और झींगरों की आवाज़े आ रहीं थीं। वो परछाईं अब गायब हो चुकी थी। जेनिफ़र की उलझनें और बढ़ गईं। तो क्या वो रहस्यमयी परछाई भी यही चाहती थी!!!

वो करीब ही थी। जितना उसने पता किया था उसके अनुसार यहीं कहीं पास ही घने पेड़ों के बीच एक खुला मैदान भी था। उसी मैदान में लोग इकट्ठे होते थे। पर कहां...

वो सोच ही रही थी कि किसी ने झटके से उसका हाथ पकड़ कर उसे पेड़ों के बीच खींच लिया। जेनिफ़र चौंक गई।

"शशशशशश...." वो एक अधेड़ उम्र की औरत थी जिसने अपने मुंह पर एक उंगली रखी हुई थी "पागल है क्या?? ऐसे रोड से आने को कौन बोला? कोई देख लेता तो?" वो झिड़कती हुई बोली। फिर जेनिफ़र का हाथ छोड़ दिया और आगे चलने लगी। जेनिफ़र का मुंह खुला रह गया। उसके चारों तरफ बहुत से लोग छिप छिप कर बेआवाज़ पैदल ही चले जा रहे थे। पर...कुछ अजीब था। जेनिफ़र को वो लोग किसी भी एंगल से हैलोवीन मनाते नहीं लग रहे थे।

सबके चेहरों फर पथरीला भाव था किसी मुर्दे की तरह! उन लोगों ने सामान्य से कपड़े पहन रखे थे। सभी चुप थे कोई किसी से बात नहीं कर रहा था बस मशीनी अंदाज़ में चले जा रहे थे।

कुछ देर बाद जहां जेनिफ़र को उस औरत ने जंगल में खींच लिया था वहां एक बाईक आकर रूकी। वो विनय था जो अपने दोस्त रोहित की बाईक पे सवार था। रोहित ने आने से साफ़ मना कर दिया था पर अपनी बाईक दे दी थी।

रोहित ने विनय को बताया था कि उस ताथाकथित हैलोवीन पार्टी में कई मौतें भी हो चुकी थीं।

कई बार फारेस्ट आफिसर्स ने लाशें बरामद की थीं (वो सामान्य

लोग जो गलती से वहां पहुंच गए थे)।

विनय को अब जेनिफ़र की चिंता हो रही थी।

लगभग आधे घंटे चलने के बाद वो सब एक मैदान में पहुंच गए। पूरे चांद की रात थी। वैसे भी वहां एक अजीब सी रौशनी थी। धीरे धीरे सब एक घेरे में व्यवस्थित होने लगे। जेनिफ़र थोड़ा घबरा रही थी। अब सभी घुटनों पर बैठने लगे। जेनिफ़र भी बैठ गई। तभी उसकी नज़र अपनी सहेली नताशा पर पड़ी जो अपने माता पिता के साथ वहां मौजूद थी। उसके उसके कालेज के एक प्रोफेसर भी वहां थे..और..विक्टर! अपने पूरे कुनबे के साथ अपने घुटनों पर बैठा हुआ था। उसे अपनी जान पहचान के एक दो और लोग दिखे जो अजीब बात थी।

नताशा के पिता ने अपने हाथों में एक ब्लेड लिया और अपनी एक उंगली में कट लगाया। जेनिफ़र ने देखा सभी यही कर रहे थे। उसकी बगल में एक लगभग पैतींस छत्तीस साल का दढ़ियल बैठा था..उसने अपने हाथ पर कट लगाया और मुस्कुराते हुए अपना पाकेट नाईफ़ जेनिफ़र को दे दिया। मजबूरन जेनिफ़र को भी वही करना पड़ा। वो अब पसीने पसीना हो चुकी थी।

ये जो कुछ भी था...हैलोवीन तो हरगिज़ नहीं था!!!

वो सब धीरे धीरे कुछ बुदबुदा रहे थे और अपना जख्म वाला हाथ हवा में उपर आसमान की तरफ़ उठा रहे थे..जेनिफ़र ने भी वही किया। वो लोग जो भी बुदबुदा रहे थे वो बेहद डरावना था। तभी अचानक जेनिफ़र को अपनी कटी उंगली पर किसी की जबान महसूस हुई..वो बुरी तरह चौंक गई!

क्योंकि दिख तो कोई भी नहीं रहा था!!

वो थर थर कांपने लगी। फिर वो सारे आवाज़ करते अपनी जगह पर झूमने लगे।
 
कुछ देर बाद एक बुढ़िया झुमते हुए धीरे धीरे हवा में उठने लगी...बस कुछ इंच उपर..

जेनिफ़र की आंखें भय से फटी जा रही थीं। फिर धीरे धीरे कुछ और लोग हवा में उठे। बस एक दो फीट के लगभग...हवा में उठते लोगों को देख दूसरे किलकारी मार रहे थे। खुश हो रहे थे। जेनिफ़र ने डर के मारे अपना चेहरा ढंक लिया।

अचानक लोगों के जोर जोर से चिल्लाने की आवाज़े आने लगीं..वो ताली बजा रहे थे..चिल्ला रहे थे...

जेनिफ़र ने चेहरे से हाथ हटाया और उसे जैसे लकवा मार गया....

वो खुद हवा में पंद्रह फीट उपर ठहरी हुई सी थी!!!!

वो बेहद डरावना था!

नीचे लोग उसे देख कर जोर जोर से हर्षध्वनी कर रहे थे।

अचानक जेनिफ़र को लगा जैसे वो बहुत हल्कि हो चुकी है...डर का नामोनिशान नहीं..वो जो चाहे कर सकती है। वो लोगों को मार सकती है..तकलीफ़ पहुंचा सकती है..उनसे खिलवाड़ कर सकती है...और उसे ये सब जरूर करना चाहीये। उसे अचानक से लगने लगा कि यही थी वो..हमेशा से..उसकी असली पहचान!

तभी जोरों की बिजली कड़की और उसे बादलों के पार एक भयानक चेहरे की बड़ी सी आकृति दिखी..एक चेहरा जो कुछ जानवर का था और कुछ इंसानी खोपड़ी जैसा! वो बहुत डरावना था..खून जमा देने वाला!

पर न जाने क्यों.... डर तो नहीं लग रहा था!!

जेनिफ़र धीरे धीरे नीचे आ गई। लोग इस तरह व्यवहार कर रहे थे जैसे वो उनकी रानी हो। नताशा उसे हैरानी और प्रशंसा के मिलेजुले भाव से देख रही थी। और उसके ठीक पीछे विक्टर...वो उसकी तरफ बढ़ा..उसके चेहरे पर "मैंने कहा था न" वाला भाव था।

वो सबके सामने मुस्कुराते हुए जेनिफ़र के नजदीक आया और उसे ,

किस करने की कोशिश करने लगा। जेनिफ़र जैसे होश में आई उसका एक हाथ हवा में घूमा और विक्टर कई फीट पीछे फिंका गया।

जेनिफ़र भागी और पलट कर तेजी से जंगल में घुस गई। किसी ने उसे रोका नहीं। जेनिफ़र को मारियानो की बात याद आई "तू बहुत पावरफुल है न!"

पर एक बात और जेनिफ़र को परेशान कर रही थी..उसके दिमाग के एक हिस्से को वो सब बहुत पसंद आ रहा था जो पीछे मैदान में हो रहा था और वो हिस्सा अभी भी वहीं रुके रहना चाहता था।

वो रुक कर जोर जोर से हांफने लगी। तभी किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। वो पलटी...

"विनय!!!!" वो जोर से उस से लिपट गई।

"कहां थी तुम? मैने मना किया था.."

"शशशशश...चुप चाप चल यहां से जल्दी.." वो धीरे से बोली।

"क्या हुआ? वो मिले हैलोवीन पार्टी..?"

"चल यहां से मैं सब बताती...अभी हिल..

वो पैदल चलते चलते वहां आ गए जहां विनय ने बाईक खड़ी की थी। अचानक विनय ने उसे पकड़ा और अपनी तरफ घुमाया.."कुछ बताओ भी क्या हुआ?" वो बोला

जेनिफ़र सोचते हुए जमीन पर घूरने लगी..क्या वो सब सच था! वो भयानक चेहरा..वो अजीब से लोग...

तभी उसकी सोच को दर्दनाक तरीके से विराम लगा!! विनय दर्द से चीखता हुआ जमीन पर गिर गया...

"क..क्या..हु.." वो‌ सदमे से देखने लगी। विनय के पीछे विक्टर प्रगट हुआ जिसके चेहरे पर शैतानी मुस्कुराहट थी और हाथ में खून से सना चाकू।

उसने पीछे से विनय को चाकू मार दिया था...

,

"मैं वार्न किया था तेरेको..इधर प्योर ह्यूमन? नाट अलाऊड..अभी भुगत" मक्कारी से बोलता हुआ विक्टर वहां से वापस मैदान की ओर चला गया। विनय बुरी तरह तड़प रहा था। जेनिफर को अपने हाथों पर उसका गर्म खून महसूस हो रहा था। उसने उसका चेहरा अपनी गोद में रख लिया और जोर जोर से चिल्लाने लगी..विनय..नहीं..ये क्या हो गया...

उसने आस पास देखा..उस वीराने में कौन उसकी मदद करता! वो लोग अभी भी शायद मैदान पे ही थे जो यहां से दूर था। वो क्या करे...

विनय की सांस अब फंस फंस के आ रही थी।

"विनय नो नो नो नो..विनय उठ जा प्लीज... हेल्प!!!"

वो ज़ोर से चिल्लाई।

और अचानक एक तीखा कर्कश स्वर हवा में उभरा....

"तुम्हें....यहां....नहीं...आना...चाहीये...था!!!"

जेनिफ़र बुरी तरह चौंक गई। वो चारों तरफ देखने लगी..आवाज़ किधर से आई। तभी विनय को एक हिचकी आई और उसका ध्यान वापस विनय को हो गया।

"विनय!!! नहीं..."

"उसने....मना....किया...था...पर..तुमने...नहीं..माना..."
 
"कौन है इधर?" वो डरती हुई बोली। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि आवाज़ कहीं और से आ रही थी। मानो उसके आसपास की हवा ही उस आवाज़ में बदल गई हो।

जेनिफ़र को वो आवाज़ हर पेड़ से..हर पत्ते से...निकलती हुई महसूस हो रही थी।

"अब..वो...मर...जाएगा...सिर्फ...तुम्हारी..वजह...से...

,

"नो..नो.." वो रोने लगी और विनय को और भी कस कर पकड़ लिया..."ओह गाॅड! हेल्प!"

तभी वातावरण में एक तीखी हंसी गूंजने लगी। जेनिफ़र के रोंगटे खड़े हो गए..उसने अपने दोनों कान ढंक लिये। ऐसा लग रहा था मानों सैकड़ों जंंज़ीरें आपस में बार बार जोर जोर से टकरा रहीं थी।

वो?...वो....नहीं..सुनेगा...हां!..पर ..मैं....काम...आ...सकता...हूं...तुम्हारे!

जेनिफ़र चुप हो गई। "प्लीज़...हेल्प.." वो अनिश्चितता से चारों तरफ देखती हुई बोली..क्योंकि वो खुद नहीं जानती थी कि वो किससे बोल रही है।

"ना!..मैं..मदद..नहीं...करता...मैं...सौदे...करता..हूं..तो..अगर...तुम...चाहती...हो..कि...ये...जिंदा...रहे...तो...तुम्हें...मेरा...काम..करना...होगा..बोलो..मंजूर??

"क्या करना होगा?" जेनिफ़र ने पूछा। पर अबकि बार कोई आवाज़ नहीं आई। "अरे बोल न..अभी तो बिना माईक के इतना बज रहा...था!!" वो ज़ोर से चिल्लाई। फिर उसने विनय के सीने पर सर रखकर सुना...उसकी धड़कने धीमी पड़ गई थी। वक्त कम था। ऐसे तो वो मर...

"अरे किधर है तू!!!! बोले तो मेरेको... मंजूर!!!

जेनिफ़र के इतना बोलते ही जोर से बिजली कड़की। तेज़ हवाओं ने उसे घेर लिया। सूखे पत्ते और टहनियां उड़ रही थीं। जेनिफ़र ने खुद को और अब बेहोश हो चुके विनय को ढंक लिया। फिर अचानक जैसे सबकुछ शुरू हुआ था वैसे ही शांत हो भी गया। जेनिफ़र ने ,

सर उठा कर देखा और सामने वही अजनबी परछाई खड़ी थी। वो अंतत: सामने आ चुकी थी।जेनिफ़र उसे बुत बनी देख रही थी।

अचानक आस पास की हवाएं मानो ठोस हो गईं और जेनिफ़र उसमें जकड़ सी गई। वो नज़दीक आ रहा था। काले धुंएं सा....ऐसा लग रहा था जैसे बस इसी पल के लिये ही वो कब से जेनिफ़र का पीछा कर रहा था...जोर से एक बार बिजली चमकी। वो पास आ रहा था..जेनिफ़र ने कस के विनय का एक हाथ पकड़ा हुआ था...उसकी तरफ बढ़ा चला आ रहा था....

उसे बहुत कमजोरी लग रही थी। आंखें भी नहीं खोली जा रही थी। अपनी पलकों का वज़न भी उसे बहुत जादा लग रहा था। अरे पर ये तो..उसे अपने नीचे एक नर्म आरामदायक बिस्तर महसूस हुआ। उसने झट से आंखें खोल ली। वो हास्पिटल का एक कमरा था। उसने चारों तरफ देखा। पास ही एक कुर्सी पर विनय बैठा ऊंघ रहा था।

"वि..नय" वो क्षिण आवाज़ में बोली। विनय जल्दी से उसके पास आ गया।

"जेनिफ़र तुम ठीक हो? तुम बेहोश हो गई थी"

जेनिफ़र कुछ नहीं बोली बस विनय को देखती रही। वो ठीक हो चुका था। वो उठ के बैठ गई।

"तुम ठीक है?" वो धीरे से विनय से पूछी।

"मुझे क्या हुआ है?" विनय फुसफुसाता सा बोला। "तुम बेहोश मिली मुझे पेड़ों के पास..."

"और तुम?" वो एक टक विनय को देख रही थी।

"मैं वो शायद..मैं भी..पता नहीं कुछ याद नहीं आ रहा.." वो सशंकित सा बोला "मैं तुम्हें लेने गया, तुम जंगलों में भागती हुई मिली..फिर..." वो दुविधा में नाखून चबाने लगा।

,

जेनिफ़र समझ चुकी थी कि न सिर्फ उसका जख्म ठीक हो गया था बल्कि वो उससे जुड़ी हर याद भूल गया था।

तो उस रहस्यमयी 'परछाई' ने आखिरकार अपना वादा पूरा किया पर वो

"....मेरेसे क्या मांगता था..?" जेनिफ़र बुदबुदाई।

"क्या, कुछ बोली तुम" विनय बोला।

तभी एक डाक्टर कमरे में आया।

"अब आप इन्हें घर ले जाईये..पर बी केयरफुल!"

"वो ठीक तो है न?" विनय ने डाक्टर से पूछा।

"यस! मां और बच्चा दोनों ठीक हैं...

"व्हाट!!!" जेनिफ़र जोर से चिल्लाई...विनय भी हक्का बक्का सा कभी डाक्टर तो कभी जेनिफ़र को देख रहा था।

दोनों के चेहरे पर फटकार बरस रही थी।

लोग गलत नहीं बोलते थे...शैतान सच में जमीं पर आता था!

"ये क्या किया जेनी..क्या किया तू? मैं कित्ती टेम तेरेसे बात करने का टिराई किया, तू कुछ सुनने को ही रेडी नहीं था" मारियानो कलपता सा बोला। अपनी जिस औलाद के लिये उसने इतना कष्ट सहा, हत्याएं की उसका अंत पंत वही हुआ जिससे वो डरता था।

जेनिफ़र अपने रूम में थी। जेनिफ़र ने सर उठाया और धीरे से बोली..."साॅरी...डैडी.."

मरियानो आगे बढ़ा और उसे गले लगा लिया।

"तू टेंशन नई ले मैं सब ठीक करेंगा" वो उसका सर सहलाता सा बोला।

जेनिफ़र ने उसे पिछली रात के बारे में सब बता दिया था।

"पर वो मेरा परमिशन क्यों मागता था?" जेनिफ़र ने पूछा

"बिना परमिशन के वो तेरा नाखून भी नहीं टच करना सकता..ब्लडी डेविल! क्योंकि अभी भी ये दुनिया तो गाॅड ही चला रहा है..वो सिर्फ घटिया गेम खेलना सकता..डील करना सकता वो भी हमेरी परमिशन से"
 
जेनिफ़र के अब सब समझ में आ रहा था। वो नकली हरमन ओबेराॅय कौन था? उस दिन विनय के बदले उसके रूम में कौन आया था?

पहले तो उसने धोखा देना चाहा और अंत में उसकी मजबूरीयों का सौदा कर लिया। एक बार फिर एक इंसानी शरीर ने शैतान से समझौता कर लिया था! एक और भयानक शैतान धरती पर आने को तैयार था जो कई और हाफ डीमन के आने की वजह बनता।

मारियानो चाहता था कि उस बच्चे के जन्म लेते ही उसे खत्म कर दिया जाए। वो वैसे भी पहले ही हाफ डीमन्स से नफ़रत करता था फिर ये वाला तो 'इसपेसल करके' था।

जेनिफ़र दुविधा में थी। उसका बच्चा इंसानी बच्चे की तुलना में तुलना में तीन गुना तेजी से बढ़ रहा था और अब तो वो उसकी भावनाएं महसूस कर सकती थी। उसे उस बच्चे का मोह हो गया था या कई बार तो उसे ये अजीब अटपटा सा विचार आता था कि वो उस अजन्मे बच्चे के काबू में थी! वो चाह कर भी उसे मारने का विचार नहीं कर पा रही थी।

उसे एक ही उम्मीद की किरण दिख रही थी...विनय!

विनय की उस रात की याददाश्त में फेरबदल हुआ था और अब जेनिफ़र उसे यकीन दिलाने की कोशिश कर रही थी कि ये बच्चा उसका है। अगर विनय उसे सहारा दे और वो दोनों शादी कर लें तो शायद वो भी इस बच्चे को उन सब झमेले से अलग रखने की कोशिश करेगी जैसे उसके पिता ने उसके लिये की थी।

"मैं सच कह रहां हूं जेनिफ़र...मुझे कुछ भी याद नहीं" विनय मरी हुई आवाज़ में बोला "कब मैं तुम्हारे करीब आया और कब ये..." उसने मुट्ठी भींच ली और दूसरी तरफ देखने लगा।

वो और जेनिफ़र फिर उसी बीच वाले टीले पर बैठे थे।

"मेरा बाप इसे मारना चाहता..अभी बोल मैं क्या करे?" जेनिफ़र बोली।

"नहीं.." विनय सदमें से बोला "मुझे बस थोड़ा समय दो मैं सब ठीक कर दूंगा..बस मैं इसके लिये तैयार नहीं था..पर इसे खत्म करना तो गलत होगा। भला इसकी क्या गलती"

जेनिफ़र बहुत देर से दूर समंदर को घूर रही थी उसने पलट कर विनय को देखा। वो सामान्य था। एक खूबसूरत नौजवान जिसके सामने उसका पूरा खुला भविष्य था। वो उसकी तरह संक्रमित नहीं था। फिर वो क्यों उसकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रही थी!

उसके सीधेपन का फायदा उठा रही थी!

खुद को उस पर जबरजस्ती थोप रही थी..वो तो उससे प्यार भी नहीं करता था! कल को जब उसे उसकी सच्चाई का पता चल गया तो!

उसे खुद से नफ़रत होने लगी। ये सब उसका झमेला था और वो विनय को उसमें जबरजस्ती घसीट रही थी।

उसने विनय के चेहरे पर हाथ फेरा...उस लड़के के जिसे वो चाहती थी..जिसे वो दुबारा कभी नहीं देख पाएगी...

"मेरेको लेट होता.." वो जल्दी से नज़र घुमाती हुई बोली और उठ कर खड़ी हो गई।

"जेनिफ़र! ट्रस्ट मी! मैं सब ठीक कर दूंगा..जादा सोचो मत" विनय जल्दी से बोला। जेनिफ़र फीकेपन से मुस्कुराई और पलट कर चल दी। वो कोशिश कर रही थी कि विनय उसके आंसू न देख ले..

"उस दिन के बाद मैंने उसे दुबारा नहीं देखा..." विनय बोला।

वो दिया के कमरे में उसके साथ बैठा था। दिया ने अपनी शाल ठीक की।

"पर वो तुम्हारा बच्चा तो नहीं था.." दिया बोली।

"हां पर मैं उस बच्चे के होने की वजह तो जरूर हूं न..जेनिफ़र ने उस रात जो कुछ भी किया मुझे बचाने के लिये किया...वो चाहती तो...

विनय की बाकि बातें दिया की एक तेज़ चीख में दब गई। वो जोर से चिल्लाई और विनय को पकड़ लिया।

"विनय वो यहीं है..अभी देखा मैंने!!! उधर खिड़की पर!!"

दिया दहशत से बोली।

वो अब तक सदमें में थी। उसे हर जगह लिलियाना दिखाई देने लगी थी। अभी विनय के आने के पहले भी उसे डाईनिंग टेबल के उपर छत पर वो दिखाई दी थी।

विनय ने खिड़की की तरफ़ देखा तो वहां कोई भी नहीं था।

"रिलैक्स दिया..संभालो खुद को वो यहां नहीं है..उसे जेनिफ़र अपने साथ ले गई। वो यहां नहीं आ सकती"

तभी विनय का फोन बजा।

"किधर पे है तुम?" मारियानो का लरजता, कांपता स्वर सुनाई दिया।

"मारियानो! क्या हुआ? सब ठीक है?" विनय बोला।

बहुत देर फोन पर खामोशी छाई रही फिर मारियानो कि दर्द से भरी आवाज़ आई...

"तुम्हेरे को खबरदार करने को फ़ोन किया मैं..जेनिफ़र चला गया..शी इज डेड..लिलियाना गायब है। बी केयरफुल वो तेरा या

तेरा फियांसी के पीछू आ सकता"

विनय की आंखें जलने लगीं..जेनिफ़र मर चुकी थी। वो कुछ नहीं कर पाया था..और लिलियाना..!

उसके हाथ से मोबाईल छूट गया। उसे अहसास हुआ कि अभी अभी दिया को जो खिड़की के पार लिलियाना दिखी थी वो दिया का वहम नहीं था...वो सचमुच वापस आ चुकी थी!
 
विनय पुलिस स्टेशन में दाखिल हुआ। वहां का इंचार्ज अमन सूरी भी उसी की तरह एक तीन सीतारे वाला इंस्पेक्टर था। तीन दिन पहले की वो दिल दहला देने वाली घटना इसी थाने के अंतर्गत आती थी।

"बहुत ही खौफ़नाक नजा़रा था..हमें लगता है वो औरत पागल थी" इंस्पेक्टर सूरी बोला।

"हुआ क्या था?" विनय ने शांति से पूछा।

"वो औरत जिसका नाम हम अब जानते हैं, जेनिफ़र ब्रैंडाओ था वो अपनी बच्ची लिलियाना के साथ शहर से बहुत दूर एक विराने में गई। वहां एक बंद पड़ी मील थी। उसने शायद बच्ची को बेहोश कर रखा था। और जिस कार से वो गई वो भी अब हमें पता है चोरी की थी। उसने खुद को और बच्ची को कार में लाक किया और आग लगा ली"

विनय की मुट्ठीयां भींच गई। चेहरा लाल हो गया। उसने बहुत मुश्किल से खुद को ज़ब्त किया और पूछा

"फिर?"

"शायद वो लड़की, बच्ची लिलियाना होश में आ गई और जोर जोर से चिल्लाने लगी..उस औरत को, जेनिफ़र को शायद ये मालूम नहीं था कि उस बंद पड़ी मील में कुछ लोग ताश पत्ती खेल रहे थे जो आवाज़ सुन कर बाहर आ गए और कांच तोड़ कर लड़की को जलती कार से बाहर खींच लिया

"और जेनि..जेनिफ़र?" विनय ने भर्राए गले से पूछा

"आग तब तक भड़क चुकी थी वैसे भी कार लाक्ड थी उसे कैसे निकालते"

विनय शांत रहा।

"वो इस शहर की नहीं थी..बाद में हमने उसके बारे में पता लगाया वो औरत शायद शुरू से ही थोड़ी अजीब थी"

"मतलब?" विनय ने पूछा

"वो सबसे अलग थलग रहती थी। जादातर बच्ची को एक कमरे में बंद रखती थी। पता नहीं अपनी बच्ची से उसे क्या समस्या थी! फिलहाल हम कोशिश कर रहे हैं कि बच्ची के पिता का कुछ पता चल जाए"

विनय को हंसी आ गई जिसे उसने वक्त रहते खांसी में बदल लिया। वो कल्पना नहीं कर पा रहा था कि इंस्पेक्टर साहब की क्या प्रतिक्रिया होगी अगर वो बता दे कि लिलियाना क्या चीज है और उसका 'पिता' कौन है! जिसकी कि वो तलाश कर रहे हैं।

"बच्ची अब कहां है?" विनय ने पूछा

"यहीं एक हास्पीटल में, बुरी तरह झुलस गई बेचारी"

विनय जानता था कि वो हास्पीटल में नहीं है। फिर भी वो हास्पीटल गया। उसकी मुलाकात एक नर्स से हुई जिसके एक तरफ के गाल पर भद्दे से खरोच के निशान थे। गाल सूजा हुआ भी था। उस तरफ की आंख भी नीली हो कर बंद हो रही थी और गले में नेकबैंड था।

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"वो शायद उसकी मां ने ही उसे मारने की कोशिश की थी..मैंने उसके सामने बस जरा सा उसकी मां को भला बुरा बोल दिया..वो गुस्सा गई और.." उसने अपना गाल दिखाया..

"सर आप भी ऐसा थप्पड़ नहीं मार सकते" वो विनय की उभरी हुई मांसपेशियां देखती हुई बोली "फिर वो तो नौ साल की बच्ची..थप्पड़ क्या पंजा था...मुझे तो लगा मैं मर ही गई" वो सहम कर बोली

"और फिर वो खिड़की से कूद कर भाग गई..."

"और कुछ?" विनय ने नर्स से पूछा

"सर वो थर्ड फ्लोर पर एडमिट थी..." नर्स दहशत से बोली।

दिया अपने घर पर थी। मारियानो से पूछ कर उसकी सुरक्षा के हर संभव उपाय कर दिये गए थे। वैसे भी विनय को यकीन था कि उसके रहते लिलियाना पहले उसी के पीछे आएगी, दिया के नहीं।

दिया अपने कमरे में बैठी थी। वो काफी हद तक संभल चुकी थी। उसके हाथ में जेनिफ़र का आखरी ख़त था जो उसने लिलियाना के जन्म के तुरंत बाद लिखा था।

दिया उसे कई बार पढ़ चुकी थी और इस वक्त गंभीरता से कुछ सोच रही थी।

शाम हो रही थी। विनय को कुछ याद आया जिसने उसका दिल छलनी कर दिया....मन पर कई टन का बोझ लेकर वो शहर के कब्रिस्तान पहुंचा। वो अंदर दाखिल हुआ।

आंखों के सामने जेनिफ़र की कब्र देखने के बावजूद उसे यकीन नहीं हो रहा था...वो जा चुकी थी। उसने अपनी आखरी कोशिश की थी उसे बचाने की...और खुद ही...

"तेरेको लेट हो गया.."

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विनय जल्दी से आंखें पोछता हुआ पलटा। वो मारियानो था। विनय को उसके लिये बहुत अफसोस हो रहा था। उसके बूढ़े चेहरे पर दुख की गहरी लकीरें थी। जेनिफ़र ही उसकी एकलौती पूंजी थी।

"मैं बस उसे दफनाते हुए नहीं देखना चाहता था.." विनय बोला।

मारियानो ने एक हाथ विनय के कंधे पर रखा.."मेरेको तुमको थैंक्स बोलने का..बाई हार्ट..जेनिफ़र को उसका लाईफ़ में जो भी हैप्पीनेस मिला न वो तुम ही उसको दिया"

विनय नें आंखें भींच ली। वो ये सुनना बरदाश्त नहीं कर पा रहा था.."उसकी बर्बादी की वजह भी तो मैं ही था न" वो कड़वाहट से बोला "उस रात मुझे बचाने के लिये ही तो..." उसने मुंह फेर लिया।

"ये उसका डिसीजन था...इसके लिये तुम क्या करेंगा..उसने डेविल का सुना..."

"क्योंकि गाॅड तो चुप ही है न कब से.." विनय ने मारियानो की तरफ देखा। "बहुत सुन लिया मैंने.. हाफ डीमन..डेविल..शैतान..पर ये तो बताओ कि भगवान क्या कर रहा है" वो गुस्से से धधक रहा था।

मारियानो कुछ जवाब देता उसके पहले ही कुछ अजीब घटने लगा। मुश्किल से छ: बजा था पर अचानक ही पूरे कब्रिस्तान को रात जैसे अंधकार ने घेर लिया। हवा चलनी बंद हो गई मानो किसी ने बटन दबा कर स्वीच आॅफ कर दिया हो। घोर सन्नाटा फैल गया यहां तक की कीड़े मकोड़ो, पक्षियों और बाहर सड़क से गुजरते इक्का दुक्का वाहनों की आवाज आनी भी बंद हो गई।

विनय चौकन्ना हो गया और झटके से अपनी सर्विस रिवाल्वर बाहर निकाल ली।

"क्या हुआ?" मारियानो सकपकाया

,

"वो यहीं है.." चारों तरफ देखता विनय बोला.."लिलियाना!"

तभी विनय को लगा किसी ने उसका पैर पकड़ लिया है। उसने नीचे देखा और... देखता ही रह गया..

पास वाली एक कब्र टूटी पड़ी थी और एक सड़े गले शरीर ने बाहर आकर उसका पैर अपने गल चुके पंजे जैसे हाथ से जकड़ रखा था।

ये नहीं हो सकता! ये तो..

तभी एक धमाके से थोड़ी दूरी पर और दो कब्रें टूट गईं। पंजों के बल रेंगते हुए दो और गल चुकेशरीर बाहर आ गए और किसी जानवर की तरह भंयकर रूप से रेंगते हुए विनय की तरफ बढ़ने लगे। उनके सर मानो खोपड़ी हो चुके थे।
 
तभी एक धमाके से थोड़ी दूरी पर और दो कब्रें टूट गईं। पंजों के बल रेंगते हुए दो और गल चुकेशरीर बाहर आ गए और किसी जानवर की तरह भंयकर रूप से रेंगते हुए विनय की तरफ बढ़ने लगे। उनके सर मानो खोपड़ी हो चुके थे।

और फिर धीरे धीरे एक के बाद एक धमाके होने लगे। कब्रें टूटने लगीं। वो और मुर्दे बाहर आ रहे थे। वो विभत्स था। सारे मुर्दे बाहर आ कर धीरे धीरे विनय की तरफ बढ़ने लगे। जिस मुर्दे ने विनय को जकड़ रखा था उसका खोपड़ी जैसा जबड़ा खुला

और फिर वही भयंकर..तीखी..फुसफुसाहट जैसी आवाज़ आई

"तुम्हारी..वजह...से...उसकी..मौत..हुई..."

विनय अपना पांव छुड़ाने लगा पर उस कंकाल ने मजबूती से पकड़ रखा था।

"पहले..भी..तो..तुम्हारे..ही..कारण...ही.…वो..सब..हुआ..था."

"शटअप!!" चीखते हुए विनय ने अपनी सर्विस रिवाल्वर से उसके सर के पखच्चे उड़ा दिये..

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"वो...तुमसे...प्यार..करती..थी...और...तुम...उससे...कतरताते..थे.." अब सबसे पास वाला मुर्दा बोल रहा था।

"तुमने..उसे..उसके...हाल...पर...छोड़...दिया...था...

"भाड़ में जाओ" विनय गुर्राया

और पूरे कब्रिस्तान में वो भयंकर हंसी गूंजने लगी जो जंजीरों की टकराहट जैसी सुनाई देती थी। हर मुर्दा अपनी कब्र के बाहर था..हर किसी का जबड़ा चौड़ा खुला था जिसमें से वो

भयंकर हंसी फूट रही थी...

विनय को कुछ याद आया वो पलटा और देखा...जेनिफ़र की भी कब्र खुली हुई थी!

और वो अपनी खुली कब्र के सामने खड़ी थी। उसकी दोनों आंखें बंद थी मानो वो गहरी नींद में हो। वो कर्कश आवाज़ फिर उभरी...

"क्या..तुम..जानते..हो?...उस..रात..क्या...हुआ..था..!!

और दो विशालकाय पंजे जैसे काले हाथों ने पीछे से आ कर जेनफ़र को जकड़ लिया...

ये जानते समझते भी कि ये सब छलावा है विनय को ये सब देखना बरदाश्त के बाहर हो रहा था।

"इनफ़!!' विनय चिल्लाया "मुझे डराने के लिये तुम्हें थोड़ी और मेहनत करनी पड़ेगी, इन सबसे कोई फर्क नहीं पड़ता!!"

अचानक सबकुछ गायब हो गया। टूटी कब्रें, घिसटते मुर्दे..और जेनिफ़र की आकृति भी। और उसके गायब होते ही पीछे से लिलियाना प्रगट हुई!!!

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"जीजस!!!!" पहली बार मारियानो कुछ बोला

वो अपनी मां की कब्र के पास खड़ी थी। विनय ने देखा उसके हाथों, गर्दन और गाल पर जलने के निशान थे। उसने एक बार जेनिफ़र की कब्र को देखा फिर पलट कर विनय को घूरने लगी।

उसकी आंखे गुस्से से दहक रहीं थी। और चेहरे पर गहन नफ़रत के भाव थे। वो गुस्से से कांप रही थी और जोर जोर से सांसे ले रही थी।

मिलता जुलता हाल विनय का भी था। उसके अंदर भी पिछले दो दिन से गुस्सा किसी ज्वालामुखी सा दहक रहा था।

वो सामने थी...जिसकी वजह से जेनिफ़र की मौत हुई थी..जो उसके हर दुख का कारण थी!

और फिर देखते ही देखते लिलियाना का हुलिया बदलने लगा। उसकी आंखें बड़ी होकर पूरी तरह से काली हो गईं जिनमें सफेद हिस्सा था ही नहीं। हाथ और पैर लंम्बे हो कर पंजों में बदल गए जिनमें लंबे लंबे काले नाखून थे। उसका पूरा शरीर रोयेंदार दिख रहा था।

"कम आॅन.." विनय फुसफुसाया। "उस दिन तो जेनिफ़र ने बचा लिया था तुम्हें पर आज नहीं" विनय ने अपनी गन तान दी।

लिलियाना उसकी तरफ़ बढ़ने लगी। विनय ने ट्रिगर दबाया

"नहीं!!!!!!"
 
एक जोरदार गन फायर की आवाज़ आई पर किसी ने एन वक्त पर विनय का गन वाला हाथ ऊपर कर दिया। गोली हवा में चली।

"साहब क्या हुआ?" एक आदमी ने पूछा।

विनय ने गौर से देखा वो कब्रिस्तान का चौकिदार था। जो थोड़ा हड़बड़ाया हुआ सा उसी वक्त वहां पहुंचा था।

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"कुछ नहीं" विनय बोला और गन वापस रख ली। उसने देखा लिलियाना जा चुकी थी‌।

एक बार फिर बच गई!

"तू जा यहां से" विनय बोला

"पर साहब आप वो..."

"सुना नहीं!!!" इस बार वो कड़क कर बोला।

चौकिदार सर पर पांव रखकर भागा। विनय ने पलट कर हैरान नज़रों से देखा....

वो दिया थी। उसी ने एन वक्त पर विनय का गन वाला हाथ उपर कर दिया था और लिलियाना भाग गई थी। वो अब भी कब्रिस्तान की बाउंड्री वाल को घूर रही थी जहां लिलियाना गायब हुई थी।

"क्या हरकत थी ये" विनय खीजता हुआ बोला

"वो चौकिदार तुम्हें देख रहा था। उसके सामने तुम एक बच्ची को शूट करने जा रहे थे" दिया उसे घूरती हुई बोली।

"वो लिलियाना..वो...

"क्या? उस चौकिदार को बताते कि वो डीमन थी??" दिया ने पूछा।

"तुम यहां क्या कर रही हो? तुम्हें घर पर होना था न?" विनय ने विषय बदल दिया

"अभी से हंसबैंड बन गए!" उसने आंखें दिखाई

"तुमसे बहस करने का कोई फायदा ही नहीं.."

दिया को उसके फ्लैट पर सुरक्षित छोड़ने के बाद विनय वापस अपने घर आ गया। उसके साथ मारियानो भी था। आज ही जेनिफ़र का फ्यूनरल हुआ था उसने उसे साथ आने के लिये मना लिया था। पर मारियानो को ये नहीं बताया था कि वो हमेशा के लिये उसे अपने साथ ही रखने वाला था। मारियानो अपनी एकलौती बेटी की मौत के बाद बिलकुल अकेला था। कम से कम

वो जेनिफ़र के लिये इतना तो कर ही सकता था।

"अच्छा है वो..तेरा फियांसी..नाईस गर्ल" मारियानो बोला

"दिया!..हम्म बस थोड़ी ज़िद्दी है" विनय बोला।

"क्या तुमने भी वो सब देखा?" विनय ने पूछा "जो वहां हुआ"

"वो बस तेरे वास्ते था, मैं खुद भी एक डीमन है वो मेरेको हार्म नहीं करेगा" मारियानो बोला।

"वो किसी के भी दिमाग से खिलवाड़ कर सकती है..है न?" विनय बोला।

"बस उसीच्च के जो उसको वेलकम करेगा..सबके नई..और बस डेंजरस विज़न देता कोई फिजिकल हार्म नहीं करेगा"

"पर उसने हास्पिटल की नर्स को...

"वो रेअरली ही होता है और स्लैप किया ना, डीमन के स्टाईल से तो पनिश नई किया.."

"वेलकम?" विनय ने पूछा।

"याद कर जब तू उसको क्लिफ(खाईं) से बचाया..तुने अपना हाथ बढ़ाया...

"वो तो उसको बचाने के लिये..." विनय बोलना शुरू किया

"अरे किसी भी वास्ते किया, वेलकम तो किया। उसके बाद ही उसने तेरेको बुरा विज़न दिया। वो फैमिली जिसने उसे अडाप्ट किया वो अडाप्शन भी तो एक टाईप से वेलकम ही था। उसने उन्हें भी हार्म किया। जब तेरेको बुलेट लगा था तो याद कर! उसने पहले तेरा फियांसी से परमिसन मांग था उसका घर पे स्टे करने का। बिकाज़ विदाऊट परमिसन डेविल कुछ नहीं कर सकता...मैं बार बार बोलता है...

ये दुनिया अभी भी गाॅड का है"

विनय के चेहरे पर गहन उपेक्षा के भाव आ गए।

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"तेरेको गाॅड से प्राबलम? उधर सेमेट्री में भी बोलता था? जो लोग गाॅड पर ट्रस्ट नई करता वो ईज़ली डेविल का शिकार होता। मेरेको दिखता तू नई करता। वो फैमिली जो लिलियाना को अडाप्ट किया था तुम बताया था वो भी अपना डाटर का डेथ के बाद गाॅड को प्रे करना छोड़ दिया था"

तभी नौकर ने आ कर बताया कि उसने डिनर मेज पर लगा दिया था।

"तुम मूंछ में जादा अच्छा दिखता..हीरो के माफिक.." मारियानो और विनय खाना खाने के बाद बैठे थे। दीवार पर एक ब्लैक एण्ड व्हाईट फोटो लगी थी जिसे मारियानो देख रहा था।

"ये मेरे पिता हैं" विनय थोड़ा हंसता हुआ बोला.."इस तस्वीर को लेने के डेढ़ साल बाद ही एक नक्सली हमले में उनकी मौत हो गई। वो सेना में जवान थे"

"सांता मारीया!!" मारियानो बोला।

"कुछ दिन बाद मेरी मां ने मजबूरी में दूसरी शादी कर ली। मेरा नया बाप बिलकुल तुम्हारे जैसा था!"

"बोले तो प्लंबर था?"

"नहीं वो भी पक्का बेवड़ा था"

मारियानो का हाथ रूक गया। वो बस अपनी जेब से बाटली निकालने ही वाला था।

विनय हंसता हुआ बोला "काश वो सच में तुम्हारी तरह होता..पर वो तो हैवान था.."

विनय ने खुद ही उसकी बाटल निकाल कर उसके हाथ में दे दी।

"मुझे जानवरों की तरह मारता था। उससे पीछा छूटा तो कुछ दिन बाद मां भी गुजर गई। जेनिफ़र? बेस्ट फ्रेंड थी मेरी, अब वो भी चली गई..और तुम पूछते हो मैं गाॅड को प्रे नहीं करता!!" अचानक उसका स्वर कठोर हो गया।

"क्यों करूं!! उसने मुझे दिया ही क्या है!!!"

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"ओह रिअली!! कुछ नहीं दिया??" मारियानो बोला।

"गाॅड, डेविल के माफिक चीप एग्रीमेंट नहीं करता..वो अपना कंडीशन पे देता है..चुपके से देता है..और जिधर जितना जरूरी हो उतना ही देता है...इधर देख, तेरेको भी बराबर दिया है"...बोलते हुए उसने विनय की उंगली पकड़ ली जिस पर उसकी सगाई की अंगूठी थी।

विनय उसका चेहरा देखने लगा।
 
"तुम उधर सेमेट्री में बोला था न कि गाॅड चुप है?? नई है..वो बोलता है बराबर बोलता है पर तुम लोग गाॅड पर इतना गुस्सा करता है कि सुनता किधर है!"

"मारियानो तुम..."

"इधर आ मैं तेरेको गाड का वाईस सुनाता" मारियानो ने विनय का हाथ पकड़ा और उसी के दिल पर रख दिया।

"सुना? ये गाॅड का वाईस है..वो इधर से बोलता है.. सुना!!

कभी कोई भी डाउट हो इधर से गाॅड को काल करने का बराबर जवाब मिलेगा, एवरी टाईम जवाब मिलेगा...काल वेटिंग भी कभी नहीं होता इधर समझा! बात करता है!"

विनय एक बार फिर से खुद को उसके सामने बौना महसूस कर रहा था। वो बूढ़ा जिसने अपनी जिंदगी में सबकुछ गंवा दिया था..जो आज ही अपनी एकलौती बेटी को दफ़ना कर लौटा था, उसे आज भी भगवान पर पूरा भरोसा था...जबकि वो ऐसे लोगों से घिरा हुआ था जो जुकाम तक होने पर भी भगवान को कोसना नहीं भूलते थे।

रात के लगभग दो बजे थे जब दिया की नींद खुली। पूरे कमरे में अजीब सी महक फैली हुई थी। जैसे कुछ जल रहा हो। वो अपने कमरे से बाहर आ गई। बाहर आते ही उसे लगा कुछ गड़बड़ थी!

उस फ्लैट में तीन बेडरूम थे। एक दिया का एक उसके मातापिता का और एक अब बंद ही रहता था। क्योंकि वो उसकी बड़ी बहन ,

दिशा का था जो अब मर चुकी थी।

उसकी बहन दिशा एक एमएनसी में जाब करती थी और उस फ्लैट में कभी कभी ही उसका आना होता था। दिशा भी कई दूसरे लोंगो की तरह "मुर्दों की ट्रेन" की शिकार बनी थी और उसी रहस्यमयी स्टेशन पर उसकी मौत हो गई थी।

पर आज उसका कमरा खुला था और अंदर बत्ती भी जल रही थी। दिया घबराते हुए कमरे में दाखिल हुई। वहां जलने की बदबू सबसे जादा थी। कमरा खाली था पर...बाल्कनी में कोई खड़ा था!

दिया की तरफ उसकी पीठ थी पर दिया सब समझ चुकी थी।

वो उसकी बहन का फेवरेट रेड लेदर जैकेट था.. अपनी मौत के वक्त भी वो वही पहनी थी...

"दी...!!!" दिया धीरे से बोली..."दी!"

कुछ पल बाद दिशा पलटी और दिया कई कदम पीछे हट गई। उसका आधा चेहरा जला हुआ था। एक आंख गायब थी और दूसरी सफेद मटमैली सी थी। वो गुस्से से घूरती हुई दिया की तरफ बढ़ने लगी...उसके जल चुके होठ हिले.. और फिर वही खौफ़नाक आवाज़....

"तुम्हारी...वजह...से...मैं...उस...स्टेशन...पर...आई..थी..है..न?

वो बढ़ी चली आ रही थी और दिया पीछे हट रही थी...

"मैंने...सरप्राईज़...प्लान...कर...रखा..था...

"नहीं दी नहीं..मैने फोन पर...

"सरप्राईज़...पसंद...आया...दिया?" अब वो भयानक विकृत ,

तरीके से हंसने लगी।

दिया ने दोनों हाथों से चेहरा ढंक लिया। नहीं! ये सच नहीं है! एक बुरी याद है..बस! उसने कुछ देर बाद धीरे धीरे आंखें खोली। वो गायब हो चुकी थी। पर इन सबका मतलब?? वो यहीं है..लिलियाना!!!!

वो घर के अंदर नहीं आ सकती पर एक बार फिर वो उसके दिमाग से खिलवाड़ कर रही थी।

वो चलती हुई उसी बाल्कनी पर आई जहां उसने अपनी बहन को खड़ा देखा था। उसने नीचे रोड पर देखा और एक बार फिर!!..डर किसी जहरीली मकड़ी की तरह उसके शरीर पर रेंगने लगा।
 
लिलियाना सामने रोड पर खड़ी थी! उसका सर उठा हुआ था..वो सीधे दिया को देख रही थी। चेहरे पर वही भयानक भाव लिये!! और अजीब बात ये थी कि उसके चारों तरफ बहुत से आवारा कुत्ते मंडरा रहे थे। जैसे उन सबका रीमोट कंट्रोल उसी के पास था! उन सबके बीच रात की उस घड़ी वो बहुत ही रहस्यमय और डरावनी लग रही थी।

दिया का मन हुआ कि वो वापस अंदर आ कर बाल्कनी का दरवाज़ा बंद कर ले क्योंकि लिलियाना तो अंदर नहीं आ सकती थी। पर..

"नहीं! मुझे ये करना होगा...और मुझे ही करना होगा...विनय को समझाने का कोई फायदा नहीं..वो नहीं मानेगा....

सोचती हुई वो बाल्कनी में थोड़ा और आगे बढ़ी और रेलिंग पकड़ कर खड़ी हो गई। लिलियाना उसे अभी भी गुस्से से घूर रही थी। उसकी नज़रें दिया से मिली और दिया...

धीरे से मुस्कुराई!

लिलियाना अब थोड़ी दुविधा में थी। अचानक उसे शाम की वो ,

घटना याद आ गई जब विनय उस पर गोली चला चुका था और दिया ने एन वक्त पर उसका गन वाला हाथ उपर कर दिया था। दिया ने उसे बचाया था!!

वो अब भी दिया को घूर रही थी पर गुस्से से नहीं..वो थोड़ी असमंजस में थी। उसे देखते हुए दिया धीरे धीरे अंदर गई पर दरवाजा बंद नहीं किया।

कुछ देर बाद दिया किचन से बाहर निकली। उसके एक हाथ में सैंडविच की प्लेट थी और दूसरे में दूध का गिलास था। "मैं शायद पागलपन कर रहीं हूं पर...यही सही!" सोचते हुए धड़कते दिल से वो फ्लैट के दरवाजे की तरफ बढ़ी। क्या बाहर जाना सुरक्षित था?

पर उसे ये जोखिम लेना ही होगा।

उसने फ्लैट का दरवाज़ा खोला..प्लेट और दूध का गिलास वहीं बाहर सामने रख कर जल्दी से अंदर आ कर दरवाज़ा बंद कर लिया। पता नहीं क्या होगा!

वो जल्दी से वापस उसी बाल्कनी पर आई....अब नीचे रोड पर कोई नहीं था!

"यही घर होने का, मैं इधर ही देखता था दोनों को" मारियानो बोला। वो और विनय एक पुराने से घर के बाहर खड़े थे। ये वही घर था जहां जेनिफ़र, लिलियाना के साथ रहा करती थी।

"मकान भाड़े पर चाहीये क्या?" एक औरत की आवाज़ आई। विनय पलटा..वहां एक दुबली पतली सी औरत थी जो हुलिये से काम वाली लग रही थी। यस!!!

"हां पर घर देखने के बाद" विनय बोला। मारियानो हैरानी से उसका चेहरा देखने लगा।

कुछ देर में वो औरत पीछे एक मकान से चाबी ले के आ गई।

"एक हफ्ते से खाली पड़ा..रहना होगा तो बताना, मैं बाई..लो देखो" वो ताला खोलती हुई बोली।

"पहले यहां कौन रहता था?" विनय अंजान बनता हुआ पूछा

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"थी एक मेम अपनी बेटी के साथ रहती थी। बहुत सुंदर थी दोनो! पता नहीं कहां चली गईं, बताया भी नहीं"

"अच्छा?"

"बहुत अजीब थी साहब!" वो आंखे गोल करती हुई बोली। विनय यूं ही उसको देख के खुश नहीं हुआ था। वो बस अपने 'ज्ञान' का रिकार्डर चालू करने ही वाली थी!

"बहुत डांटती थी अपनी बेटी को। हमेशा वो आखरी वाले कमरे में बंद कर देती थी। बच्ची भी अजीब थी! बहुत चिल्लाती थी..जोर जोर से मानो कमरे मे नहीं भट्ठी में बंद कर दी गई हो..हूंह" वो मुंह बिचकाई।

विनय ने आखरी वाला कमरा खोला। वो छोटा सा सामान्य कमरा था। कुछ भी अजीब नहीं! पर तभी उसकी नज़र दरवाजे के अंदरूनी हिस्से पर पड़ी...जहां एक कैलेंडर लटका हुआ था। उस कैलेंडर पर मां काली की बहुत बड़ी सी तस्वीर थी!

तो इसलिये लिलियाना यहां चिल्लाती थी!

विनय ने देखा कि कैलेंडर की कई तारीखों पर किसी ने या शायद जेनिफ़र ने ही, लाल स्याही से निशान लगा रखे थे। एक तारीख तो चार दिन पहले की ही थी! अरे!!!

"उसी दिन तो उसकी मौत हुई थी!!!" विनय बुदबुदाया।
 
अगली जिस तारीख पर निशान लगा था वो डेढ़ महीने बाद की थी। विनय ने मोबाईल से उन सारी निशान वाली तारीखों की फोटो ले ली।

"कोई हमेशा मिलने भी आता था उससे" उधर बाई का टेप रिकार्डर चालू था।

"कौन?" विनय ने पूछा। अब मारियानो भी ध्यान से सुन रहा था।

"नाम नहीं पता। कोई लड़का था। उसके बाएं गाल पे घाव का निसान था"

एक साथ मारियानो और विनय को ध्यान आया..."विक्टर!

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उधर दिया जेनिफ़र की कब्र के सामने खड़ी थी। वो डर भी रही थी और उसे उम्मीद भी थी। वो‌ बार बार चारों तरफ देख रही थी। उसके हाथ में सफेद गुलाबों का एक गुलदस्ता था जो उसने कब्र पर रख दिया। फिर धीरे से अपने बैग से एक सुंदर सी खिलौने वाली गुड़िया निकालकर उसे भी वही कब्र के पास रख दिया।

फिर वो जल्दी जल्दी चलती हुई एक बड़े शिलालेख के पीछे छिप गई जिसके दूसरे तरफ बाहर जाने का गेट था। वो किसी अनहोनी के लिये भी तैयार थी। उसने वापस मुड़कर जेनिफ़र की कब्र की तरफ देखा...

वहां लिलियाना खड़ी थी!

वो उन फूलों को हैरानी से देख रही थी जो अभी अभी दिया ने रखे थे। फिर उसकी नज़र गुड़िया पर पड़ी। उसने जल्दी से उसे उठाया और पास पड़ी एक बेंच पर खेलने लगी। वो बहुत खुश लग रही थी!

"तुम भी कमाल हो विनय! जिस बच्ची ने अपनी मां को खो दिया उसे पूरे शहर में ढूंढते फिर रहे हो..वो यहां नहीं होगी तो कहां होगी" दिया मन ही मन सोच रही थी और लिलियाना को खेलते हुए देख रही थी।

विनय को जो तारीखें उस कैलेंडर पर मिलीं थी उन्हें गूगल करने भर से उसे पता चल गया कि वो सब किसी न किसी ग्रहण की तारीखें थीं। जिस रात जेनिफ़र की मौत हुई उस रात भी एक मामुली सा चंद्र ग्रहण था।

वो दोनो अब विक्टर के पास जा रहे थे।

दिया ने विनय को रोक दिया था पर उसे विश्वास भी नहीं था कि वो गोली से मरती। वो रास्ता ढूंढ रहा था लिलियाना नाम की शक्तिशाली डीमन को हराने का।

"इधर कोई विक्टर नहीं रहता" विक्टर के गंजे बाप ने गरजते हुए बोला। "दफा हो जाओ यहां से.."

"क्या बोलता पिंटो! वो तेरा सन विक्ट..." मारियानो बोल ही रहा था कि..

"अरे बोला न इधर कोई विक्टर नहीं..फूटो अब.." उसने दरवाजा बंद कर लिया।

मारियानो और विनय अब हर संभावित जगहों पर विक्टर को तलाश रहे थे। वो एक चर्च के सामने से गुजर रहे थे कि, तभी..

"रोक रोक..गाड़ी रोक.." मारियानो बोला

उस चर्च के बाहर एक बेंच पर..

"विक्टर!!!" मारियानो हैरानी से बोला। उसके पीछे विनय भी था। उसने देखा विक्टर का पूरा शरीर गल रहा था। हट्टा कट्टा रहने वाला वो अभी पूरा हड्डीयों का ढांचा दिख रहा था। जगह जगह घाव के निशान थे।

"मारियानो! कैसा है?" वो पहचानता हुआ बोला फिर उसकी नज़र मारियानो से हट कर विनय पर टिक गई।

"सब मेरा गलती..उस रात तेरेको स्टैब किया था मैं..और उसी रीज़न से जेनी.." उसने दुख से आंखें बंद कर ली।

विनय को उस पर तरस आ रहा था। वो बहुत दयनीय दिख रहा था।

"अब मैं भी चर्च जाता..अपने अंदर का डीमन‌ को जलाता..अबकि बार जेनी से मिलेगा तो प्योर ह्यूमन बनके.." वो बहक रहा था।

"भेजा हिल गया है क्या...ऐसे तो तू मर जाएगा" मारियानो बोला। पर विनय समझ गया था...उसे अपने किये का भारी पछतावा था।

"ग्रहण से कोई समस्या है? तुम्हारे जैसे लोगों को?" विनय ने जल्दी से पूछा। विक्टर मारियानो को देखने लगा। मारियानो आम तौर पर दूसरे हाफ डीमन्स से दूर रहता था इसलिये उसे बहुत कुछ नहीं पता होता था।

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"उस टाईम हम हाफ डीमन लोग... बहुत वीक हो जाता..एक्लिप्स के टाईम..कोई भी एक्लिप्स हो सन, मून..." विक्टर बोला "बोले तो हमारे मास्टर से हमारा कनेक्शन..फ्यूज़ हो जाता"

तो इसलिए जेनिफ़र ने उस रात लिलियाना और खुद को खत्म करने की कोशिश की! वो चंद्रग्रहण की रात थी! लिलियाना कमजोर थी पर जेनिफ़र भी तो...

"मारियानो सुनो!" विनय जल्दी से बोला और मारियानो को विक्टर से थोड़ा दूर खींच लिया "डेढ़ महीने बाद एक बड़ा, पूर्ण सूर्यग्रहण है, सीधी सी बात है दिन में है जब वो वैसे भी जादा एक्टिव नहीं होती"

"तू उसको एक्लिप्स के टाईम शूट करेंगा?" मरियानो पूछा

"नहीं.." विनय विक्टर को गौर से देखता हुआ बोला "पर उसी समय हम उसे किसी चर्च या फिर किसी भी पवित्र जगह पर बंद कर दें तो? वो वैसे भी ग्रहण से कमजोर होगी?"

"जीजस!!!" मारियानो सदमें से बोला "मेरेको नई पता! तू तपता तवा पर पानी छींटने को बोल रहा है..एक बार जेनी घुस गया था चर्च में, इसीच्च चर्च में" उसने सामने वाले चर्च की तरफ ईशारा किया..."बहुत गलाटा हुआ था..भूचाल आ गया था! फिर लिलियाना जैसा पावरफुल डीमन!! चर्च में"

"हमारे पास कोई दूसरा रास्ता है?" विनय जिदभरे स्वर में बोला।

"तू आ मेरे साथ"
 
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