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रात साढ़े दस बजे के लगभग विनय अपने रूममेट के साथ बाहर आया। वो दोनों एक चाय की दुकान पर खड़े थे। विनय ने यूं ही जेनिफ़र को फ़ोन लगाया। फोन बंद था। वो परेशान हो गया। उसने उसके बार पर फोन किया जहां वो पार्ट टाईम वेट्रेस थी। पता चला वो अपनी शिफ्ट खत्म करके पौने सात पे ही चली गई।
"मैं अभी आया" बोलते हुए विनय वहां से निकल गया। दस मिनट बाद जब वो जेनिफ़र के रूम पे पहुंचा तो वो लाक्ड मिला। उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगा। वो नताशा के घर पर होगी क्या???
नताशा का घर अंधेरे में डूबा हुआ था। पड़ोसीयों ने बताया कि वो तो शाम चार बजे ही निकल गए। बाहर गए हैं तीन चार दिन के लिये।
तो जेनिफ़र ने झूठ बोला था। अब कोई शक नहीं की वो जंगल वाले हैलोवीन पार्टी में ही गई है।
उसने वहीं से अपने दोस्त रोहित को फोन किया।
उधर जेनिफ़र पैदल चलते चलते बहुत दूर निकल आई थी। अचानक जैसे वो नींद से जागी और चौंक कर सब तरफ़ देखा। वो एक सूनसान रोड पर थी जिसके दोनो तरफ ऊंचे ऊंचे काले पेड़ ,
भूताह दिख रहे थे। वो जंगल में आ चुकी थी। जंगली जानवरों और झींगरों की आवाज़े आ रहीं थीं। वो परछाईं अब गायब हो चुकी थी। जेनिफ़र की उलझनें और बढ़ गईं। तो क्या वो रहस्यमयी परछाई भी यही चाहती थी!!!
वो करीब ही थी। जितना उसने पता किया था उसके अनुसार यहीं कहीं पास ही घने पेड़ों के बीच एक खुला मैदान भी था। उसी मैदान में लोग इकट्ठे होते थे। पर कहां...
वो सोच ही रही थी कि किसी ने झटके से उसका हाथ पकड़ कर उसे पेड़ों के बीच खींच लिया। जेनिफ़र चौंक गई।
"शशशशशश...." वो एक अधेड़ उम्र की औरत थी जिसने अपने मुंह पर एक उंगली रखी हुई थी "पागल है क्या?? ऐसे रोड से आने को कौन बोला? कोई देख लेता तो?" वो झिड़कती हुई बोली। फिर जेनिफ़र का हाथ छोड़ दिया और आगे चलने लगी। जेनिफ़र का मुंह खुला रह गया। उसके चारों तरफ बहुत से लोग छिप छिप कर बेआवाज़ पैदल ही चले जा रहे थे। पर...कुछ अजीब था। जेनिफ़र को वो लोग किसी भी एंगल से हैलोवीन मनाते नहीं लग रहे थे।
सबके चेहरों फर पथरीला भाव था किसी मुर्दे की तरह! उन लोगों ने सामान्य से कपड़े पहन रखे थे। सभी चुप थे कोई किसी से बात नहीं कर रहा था बस मशीनी अंदाज़ में चले जा रहे थे।
कुछ देर बाद जहां जेनिफ़र को उस औरत ने जंगल में खींच लिया था वहां एक बाईक आकर रूकी। वो विनय था जो अपने दोस्त रोहित की बाईक पे सवार था। रोहित ने आने से साफ़ मना कर दिया था पर अपनी बाईक दे दी थी।
रोहित ने विनय को बताया था कि उस ताथाकथित हैलोवीन पार्टी में कई मौतें भी हो चुकी थीं।
कई बार फारेस्ट आफिसर्स ने लाशें बरामद की थीं (वो सामान्य
लोग जो गलती से वहां पहुंच गए थे)।
विनय को अब जेनिफ़र की चिंता हो रही थी।
लगभग आधे घंटे चलने के बाद वो सब एक मैदान में पहुंच गए। पूरे चांद की रात थी। वैसे भी वहां एक अजीब सी रौशनी थी। धीरे धीरे सब एक घेरे में व्यवस्थित होने लगे। जेनिफ़र थोड़ा घबरा रही थी। अब सभी घुटनों पर बैठने लगे। जेनिफ़र भी बैठ गई। तभी उसकी नज़र अपनी सहेली नताशा पर पड़ी जो अपने माता पिता के साथ वहां मौजूद थी। उसके उसके कालेज के एक प्रोफेसर भी वहां थे..और..विक्टर! अपने पूरे कुनबे के साथ अपने घुटनों पर बैठा हुआ था। उसे अपनी जान पहचान के एक दो और लोग दिखे जो अजीब बात थी।
नताशा के पिता ने अपने हाथों में एक ब्लेड लिया और अपनी एक उंगली में कट लगाया। जेनिफ़र ने देखा सभी यही कर रहे थे। उसकी बगल में एक लगभग पैतींस छत्तीस साल का दढ़ियल बैठा था..उसने अपने हाथ पर कट लगाया और मुस्कुराते हुए अपना पाकेट नाईफ़ जेनिफ़र को दे दिया। मजबूरन जेनिफ़र को भी वही करना पड़ा। वो अब पसीने पसीना हो चुकी थी।
ये जो कुछ भी था...हैलोवीन तो हरगिज़ नहीं था!!!
वो सब धीरे धीरे कुछ बुदबुदा रहे थे और अपना जख्म वाला हाथ हवा में उपर आसमान की तरफ़ उठा रहे थे..जेनिफ़र ने भी वही किया। वो लोग जो भी बुदबुदा रहे थे वो बेहद डरावना था। तभी अचानक जेनिफ़र को अपनी कटी उंगली पर किसी की जबान महसूस हुई..वो बुरी तरह चौंक गई!
क्योंकि दिख तो कोई भी नहीं रहा था!!
वो थर थर कांपने लगी। फिर वो सारे आवाज़ करते अपनी जगह पर झूमने लगे।
"मैं अभी आया" बोलते हुए विनय वहां से निकल गया। दस मिनट बाद जब वो जेनिफ़र के रूम पे पहुंचा तो वो लाक्ड मिला। उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगा। वो नताशा के घर पर होगी क्या???
नताशा का घर अंधेरे में डूबा हुआ था। पड़ोसीयों ने बताया कि वो तो शाम चार बजे ही निकल गए। बाहर गए हैं तीन चार दिन के लिये।
तो जेनिफ़र ने झूठ बोला था। अब कोई शक नहीं की वो जंगल वाले हैलोवीन पार्टी में ही गई है।
उसने वहीं से अपने दोस्त रोहित को फोन किया।
उधर जेनिफ़र पैदल चलते चलते बहुत दूर निकल आई थी। अचानक जैसे वो नींद से जागी और चौंक कर सब तरफ़ देखा। वो एक सूनसान रोड पर थी जिसके दोनो तरफ ऊंचे ऊंचे काले पेड़ ,
भूताह दिख रहे थे। वो जंगल में आ चुकी थी। जंगली जानवरों और झींगरों की आवाज़े आ रहीं थीं। वो परछाईं अब गायब हो चुकी थी। जेनिफ़र की उलझनें और बढ़ गईं। तो क्या वो रहस्यमयी परछाई भी यही चाहती थी!!!
वो करीब ही थी। जितना उसने पता किया था उसके अनुसार यहीं कहीं पास ही घने पेड़ों के बीच एक खुला मैदान भी था। उसी मैदान में लोग इकट्ठे होते थे। पर कहां...
वो सोच ही रही थी कि किसी ने झटके से उसका हाथ पकड़ कर उसे पेड़ों के बीच खींच लिया। जेनिफ़र चौंक गई।
"शशशशशश...." वो एक अधेड़ उम्र की औरत थी जिसने अपने मुंह पर एक उंगली रखी हुई थी "पागल है क्या?? ऐसे रोड से आने को कौन बोला? कोई देख लेता तो?" वो झिड़कती हुई बोली। फिर जेनिफ़र का हाथ छोड़ दिया और आगे चलने लगी। जेनिफ़र का मुंह खुला रह गया। उसके चारों तरफ बहुत से लोग छिप छिप कर बेआवाज़ पैदल ही चले जा रहे थे। पर...कुछ अजीब था। जेनिफ़र को वो लोग किसी भी एंगल से हैलोवीन मनाते नहीं लग रहे थे।
सबके चेहरों फर पथरीला भाव था किसी मुर्दे की तरह! उन लोगों ने सामान्य से कपड़े पहन रखे थे। सभी चुप थे कोई किसी से बात नहीं कर रहा था बस मशीनी अंदाज़ में चले जा रहे थे।
कुछ देर बाद जहां जेनिफ़र को उस औरत ने जंगल में खींच लिया था वहां एक बाईक आकर रूकी। वो विनय था जो अपने दोस्त रोहित की बाईक पे सवार था। रोहित ने आने से साफ़ मना कर दिया था पर अपनी बाईक दे दी थी।
रोहित ने विनय को बताया था कि उस ताथाकथित हैलोवीन पार्टी में कई मौतें भी हो चुकी थीं।
कई बार फारेस्ट आफिसर्स ने लाशें बरामद की थीं (वो सामान्य
लोग जो गलती से वहां पहुंच गए थे)।
विनय को अब जेनिफ़र की चिंता हो रही थी।
लगभग आधे घंटे चलने के बाद वो सब एक मैदान में पहुंच गए। पूरे चांद की रात थी। वैसे भी वहां एक अजीब सी रौशनी थी। धीरे धीरे सब एक घेरे में व्यवस्थित होने लगे। जेनिफ़र थोड़ा घबरा रही थी। अब सभी घुटनों पर बैठने लगे। जेनिफ़र भी बैठ गई। तभी उसकी नज़र अपनी सहेली नताशा पर पड़ी जो अपने माता पिता के साथ वहां मौजूद थी। उसके उसके कालेज के एक प्रोफेसर भी वहां थे..और..विक्टर! अपने पूरे कुनबे के साथ अपने घुटनों पर बैठा हुआ था। उसे अपनी जान पहचान के एक दो और लोग दिखे जो अजीब बात थी।
नताशा के पिता ने अपने हाथों में एक ब्लेड लिया और अपनी एक उंगली में कट लगाया। जेनिफ़र ने देखा सभी यही कर रहे थे। उसकी बगल में एक लगभग पैतींस छत्तीस साल का दढ़ियल बैठा था..उसने अपने हाथ पर कट लगाया और मुस्कुराते हुए अपना पाकेट नाईफ़ जेनिफ़र को दे दिया। मजबूरन जेनिफ़र को भी वही करना पड़ा। वो अब पसीने पसीना हो चुकी थी।
ये जो कुछ भी था...हैलोवीन तो हरगिज़ नहीं था!!!
वो सब धीरे धीरे कुछ बुदबुदा रहे थे और अपना जख्म वाला हाथ हवा में उपर आसमान की तरफ़ उठा रहे थे..जेनिफ़र ने भी वही किया। वो लोग जो भी बुदबुदा रहे थे वो बेहद डरावना था। तभी अचानक जेनिफ़र को अपनी कटी उंगली पर किसी की जबान महसूस हुई..वो बुरी तरह चौंक गई!
क्योंकि दिख तो कोई भी नहीं रहा था!!
वो थर थर कांपने लगी। फिर वो सारे आवाज़ करते अपनी जगह पर झूमने लगे।