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सबाना और ताजीन की चुदाई compleet

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Guest
सबाना और ताजीन की चुदाई -1

हेल्लो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और मस्त कहानी लेकर हाजिर हूँ दोस्तो आप तो जानते ही होंगे की एक मर्द से ज़्यादा सेक्स एक औरत मे होता है जब मर्द औरत की गर्मी शांत नही कर पाता है तो औरत पर क्या गुजरती है और यही से एक औरत का पतन होना शुरू हो जाता है ये कहानी एक भी कामातुर हसीना सबाना की है जो अपने पति से संतुष्ट ना हो पाने की वजह से बाहर की दुनिया मे अपने कदम बढ़ा देती हैअब आप कहानी का मज़ा लीजिए और रेप्लाई ज़रूर दे

सुबह के आठ बज रहे थे. परवेज़ ने जल्दी से अपना पिजामा पहना और बाहर निकल गया. शबाना अभी बिस्तर पर लेटी हुई ही थी, बिल्कुल नंगी. उसकी चूत पर अब भी पठान का पानी नज़र आ रहा था, और मायूसी मे उसकी टांगे फैली हुई थी. आज फिर पठान उसे प्यासा छ्चोड़ कर चला गया था.

"हरामजाड़ा छक्का" पठान को गाली देते हुए शबाना ने अपनी चूत में उंगली डाली और ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करने लगी. फिर एक भारी सिसकारी के साथ वो शिथिल पड़ने लगी, उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ दिया. लेकिन चूत में अब भी आग लगी हुई थी, लंड की प्यासी चूत को उंगली से शांत करना मुश्किल था.

नहाने के बाद अपना शरीर पोंच्छ कर वो बाथरूम से बाहर निकली और नंगी ही आईने के सामने खड़ी हो गई. आईने में अपने जिस्म को देखकर वो मुस्कुराने लगी, उसे खुद अपनी जवानी से जलन हो रही थी. शानदार गुलाबी चुचियाँ, भरे हुए मम्मे पतली कमर, क्लीन शेव चूत जिसके उपरी हिस्से पर बालों की एक पतली सी लकीर जैसे रास्ता बता रही हो - जन्नत का.

उसने एक ठंडी आह भरी, अपनी चूत को थपथपाया और चड्डी पहन ली. फिर अपने गदराए हुए एकदम गोल और कसे हुए मम्मों को ब्रा में लपेटकर उसने हुक बंद कर लिया. अपने उरोजो को ठीक से सेट किया, वो तो जैसे उच्छल कर ब्रा से बाहर आ रहे थे. ब्रा का हुक बंद करने के बाद उसने अलमारी खोली और सलवार कमीज़ निकाली, लेकिन फिर कुच्छ सोचकर उसने कपड़े वापस अलमारी में रख दिए और बुर्क़ा निकाल लिया.

अब वो बिल्कुल तैयार थी, सिर्फ़ एक ही बदलाव था, आज उसने बुर्क़े में सिर्फ़ चड्डी और ब्रा पहनी थी. फिर अपना छ्होटा सा पर्स जो कि मुट्ठी में आ सके और जिसमें 10-50 रुपये के 4-5 नोट रख सके, लेकर निकल गई. अब वो बस स्टॉप पर आकर बस का इंतेज़ार करने लगी, उसे पता था इस वक़्त बस में भीड़ होगी और उसे बैठने की क्या, खड़े होने की भी जगह नहीं मिलेगी. यही चाहती थी वो. शबाना सर से पैर तक बुर्क़े में धकि हुई थी, सिर्फ़ आँखें नज़र आ रही थी. किसी के भी उसे पहचान पाने की कोई गुंजाइश नहीं थी.

जैसे ही बस आई, वो धक्का मुक्की करके चढ़ गई, किसी तरह टिकेट ली और बीच में पहुँच गई और इंतेज़ार करने लगी. किसी मर्द का जो उसे छुए, उसके प्यासे जिस्म को राहत पहुँचाए. उसे ज़्यादा इंतेज़ार नहीं करना पड़ा. उसकी जाँघ पर कुच्छ गरम गरम लगा. वो समझ गई कि यह लंड है. सोचते ही उसकी धड़कनें तेज़ हो गई, और उसने अपने आपको थोड़ा अड्जस्ट किया. अब वो लंड बिल्कुल उसकी गंद में सेट हो चुका था. उसने धीरे से अपनी गांद को पीछे की तरफ दबाया. उसके पीछे खड़ा था प्रताप सिंग, जो बस में ऐसे ही मौकों की तलाश में रहता था. प्रताप समझ गया कि लाइन क्लियर है. उसने अपना हाथ नीचे किया और अपने लंड को सीधा करके शबाना की गंद पर फिट कर दिया. अब प्रताप ने अपना हाथ शबाना की गंद पर रखा और दबाने लगा. हाथ लगाते ही प्रताप चौंक गया, वो समझ गया कि बुर्क़े के नीचे सिर्फ़ चड्डी है. उसने धीरे धीरे शबाना की मुलायम गोल गोल उठी हुई गंद की मसाज करना शुरू कर दिया. अब शबाना एकदम गरम होने लगी थी. प्रताप ने अपना हाथ अब उपर किया और शबाना की कमर पर से होता हुआ उसका हाथ उसकी बगल में पहुँच गया. वो शबाना की हल्की हल्की मालिश कर रहा था, उसकी पीठ पर से होता हुआ उसका हाथ शबाना की कमर और गंद को बराबर दबा रहा था. और नीचे प्रताप का लंड शबाना की गंद की दरार में धंसा हुआ धक्के लगा रहा था. फिर प्रताप ने हाथ नीचे लिया और उसके बुर्क़े को पीछे से उठाने लगा. शबाना ने कोई विरोध नहीं किया और अब प्रताप का हाथ शबाना की चड्डी पर था. वो उसकी जाँघ और गंद को अपने हाथों से आटे की तरह गूँथ रहा था. फिर प्रताप ने शबाना की दोनों जांघों के बीच हाथ डाला और उंगलियों से दबाया. शबाना समझ गई और उसने अपनी टाँगें फैला दी. अब प्रताप ने बड़े आराम से अपनी उंगलियाँ शबाना की चूत पर रखी और उसे चड्डी के उपर से सहलाने लगा. शबाना मस्त हो चुकी थी और उसकी साँसें तेज़ चलने लगी थी. उसने नज़रें उठाई और इतमीनान किया कि किसी की नज़र तो नहीं, यकीन होने के बाद उसने अपनी आँखें बंद की और मज़े लेने लगी. अब प्रताप की उंगली चड्डी के किनारे से अंदर चली गई थी. शबाना की भीगी हुई चूत पर प्रताप की उंगलियाँ जैसे कहर बरपा रही थी. ऊपर नीचे, अंदर-बाहर - शबाना की चूत जैसे तार-तार हो रही थी और प्रताप की उंगलिया खेत में चल रहे हल की तरह उसकी लंबाई, चौड़ाई और गहराई नाप रही थी. प्रताप का पूरा हाथ शबाना की चूत के पानी से भीग चुका था - फिर उसने अपनी दो उंगलियाँ एक साथ चूत में घुसा और दो तीन ज़ोर के झटके दिए - शबाना ऊपर से नीचे तक हिल गई और उसके पैर उखड़ गये, वो प्रताप पर एकदम से निढाल होकर गिर पड़ी. वो झाड़ चुकी थी. आज तक इतना शानदार स्खलन नहीं हुआ था उसका. उसने अपना हाथ पीछे किया और प्रताप के लंड को पकड़ लिया. इतने में झटके के साथ बस रुकी और बहोत से लोग उतर गये. बस तकरीबन खाली हो गयी. शबाना ने अपना बुर्क़ा झट से नीचे किया और सीधी नीचे उतर गई. आज उसे भरपूर मज़ा मिला था, रोज़ तो सिर्फ़ कोई पीछे से लंड रगड़ कर छ्चोड़ देते थे. आज जो हुआ वो पहले कभी नहीं हुआ था. आप ठीक समझे शबाना यही करके मज़े लूट रही थी. क्योंकि पठान उसे कभी खुश नहीं कर पाया था.

 


उसने नीचे उतरकर रोड क्रॉस की और रिक्क्षा पकड़ ली. ऐसा मज़ा ज़िंदगी में पहली बार आया था. वो बार बार अपना हाथ देख रही थी, उसकी मुट्ठी बनाकर प्रताप के लंड के बारे में सोच रही थी. उसने घर से थोड़ी दूर ही रिक्क्षा छ्चोड़ दिया ताकि किसी को पता ना चले कि वो रिक्कशे से आई है. वो पैदल चलकर अपने मकान में पहुँची और ताला खोलकर अंदर चली गई.

अभी उसने दरवाज़ा बंद किया ही था कि घंटी की आवाज़ सुनकर उसने फिर दरवाज़ा खोला. सामने प्रताप खड़ा था. वो समझ गई की प्रताप उसका पीछा कर रहा था, इस डर से की कोई और ना देख ले उसने प्रताप का हाथ पकड़ कर उसे अंदर खींच लिया. दरवाज़ा बंद करके उसने प्रताप की तरफ देखा, वो हैरान थी प्रताप कि इस हरकत से. "क्यों आए हो यहाँ ?" "यह तो तुम अच्छि तरह जानती हो." "देखो कोई आ जाएगा" "कोई आनेवाला होता तो तुम इस तरह बस में मज़े लेने के लिए नहीं घूम रही होती". "में तुम्हें जानती भी नहीं हूँ" "मेरा नाम प्रताप है, अपना नाम तो बताओ" "मेरा नाम शबाना है, अब तुम जाओ यहाँ से". बातें करते करते प्रताप शबाना के जिस्म पर हाथ फिरा रहा था. प्रताप के हाथ उसकी चुचियो से लेकर उसकी कमर और पेट और जांघों को सहला रहे थे. शबाना बार बार उसका हाथ झटक रही थी और प्रताप बार बार उन्हें फिर शबाना के जिस्म पर रख रहा था. लेकिन प्रताप समझ गया था कि शबाना की ना में हां है

अब प्रताप ने शबाना को अपनी बाहों भर लिया और बुर्क़े से झाँकति आँखों पर चुंबन जड़ दिया. शबाना की आँखें बंद हो गई और उसके हाथ अपने आप प्रताप के कंधों पर पहुँच गये. प्रताप ने उसके बुर्क़े को उठाया, जैसे कोई घूँघट उठा रहा हो. चेहरा देखकर प्रताप को अपनी किस्मत पर भरोसा नहीं हो रहा था. गजब की खूबसूरत थी शबाना - गुलाबी रंग के पतले होंठ, बड़ी आँखें, गोरा चिटा रंग और होंठों के ठीक नीचे दाईं तरफ एक छ्होटा सा तिल. प्रताप ने अब धीरे धीरे उसके गालों को चूमना और चाटना शुरू कर दिया. शबाना ने आँखें बंद कर ली और प्रताप उसे चूमे जा रहा था. उसके गालों को चाट रहा था, उसके होंठों को चूस रहा था. अब शबाना भी अच्च्छा साथ दे रही थी और उसकी जीभ प्रताप की जीभ से कुश्ती कर रही थी. प्रताप ने हाथ नीचे किया और उसके बुर्क़े को उठा दिया, शबाना ने अपने दोनों हाथ ऊपर कर दिए और प्रताप ने बुर्क़ा उतार फेंका. प्रताप शबाना को देखता रह गया, इतना शानदार जिस्म जैसे किसीने ने तराश कर बनाया हो.

"दरवाज़े पर ही करना है सबकुच्छ ?" - प्रताप मुस्कुरा दिया और उसने शबाना को अपनी बाहों में उठा लिया और गोद में लेकर बिस्तर की तरफ चल पड़ा. उसने शबाना को बेड के पास ले जाकर गोद से उतार दिया और बाहों में भर लिया. शबाना की ब्रा खोलते ही जैसे दो परिंदे पिंजरे से छ्छूट कर उड़े हों. बड़े बड़े मम्मे और उनपर छ्होटी छ्होटी गुलाबी चुचियाँ और उठे हुए निपल्स. प्रताप तो देखता ही रह गया, जैसे की हर कपड़ा उतरने के बाद कोई ख़ज़ाना सामने आ रहा था. प्रताप ने अपना मुँह नीचे लिया और शबाना की चूचियों को चूसता चला गया और चूस्ते हुए ही उसने शबाना को बिस्तर पर लिटा दिया. शबाना के मुँह से सिसकारिया निकल रही थी और वो प्रताप के बालों में हाथ फिरा रही थी, उसे दबा रही थी और अपनी चूचियों को उसके मुँह में धकेल रही थी. शबाना मस्त हो चुकी थी. अब प्रताप उसके पेट को चूस रहा था और प्रताप का हाथ शबाना की चड्डी पर से उसकी चूत की मसाज कर रहा था. शबाना मस्त हो चुकी थी, उसकी चूत की लंड की प्यास उसे मदहोश कर रही थी. उसकी सिसकारियाँ बंद नहीं हो रही थी और टाँगें अपनेआप फैलकर लंड को चूत में घुसने का निमंत्रण दे रही थी. प्रताप उसके पेट को चूमते हुए उसकी जांघों के बीच पहुँच चुका था. शबाना बिस्तर पर लेटी हुई थी और उसकी टाँगें बेड से नीचे लटक रही थी. प्रताप उसके पैरों के बीच से होता हुआ बेड के नीचे बैठ गया और शबाना के पैर फैला दिए. वो शबाना की गोरी गोरी, गदराई हुई भारी भारी सुडौल जांघों को बेतहाशा चूम रहा था और उसकी उंगलिया चड्डी पर से उसकी चूत सहला रही थी. प्रताप के नथुनो में शबाना की चूत से रिस्ते हुए पानी की खुश्बू आ रही थी और वो मदहोश हो रहा था. शबाना पर तो जैसे नशा चढ़ गया था और वो अपनी गांद उठा उठा कर अपनी चूत को प्रताप की उंगलियों पर रगड़ रही थी.
 


अब प्रताप चड्डी के ऊपर से ही शबाना की चूत को चूमने लगा, हल्के हल्के दाँत गढ़ा रहा था शबाना की चूत पर. और शबाना प्रताप के सिर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा रही थी, गांद उठा उठा कर चूत को प्रताप के मुँह में घुसा रही थी. फिर प्रताप ने शबाना की चड्डी उतार दी. अब उसके सामने सबसे हसीन चूत थी एकदम गुलाबी एकदम प्यारी. एकदम सफाई से रखी हुई कोई सीप जैसी. प्रताप उसकी खुश्बू से मदहोश हो रहा था और उसने अपनी जीभ शबाना की चूत पर रख दी. शबाना उच्छल पड़ी और उसके शरीर में जैसे करेंट दौड़ गया, उसने प्रताप के सिर को पकड़ा और अपनी गंद उचका कर चूत को प्रताप के मुँह पर रगड़ दी. प्रताप की जीभ शबाना की चूत में धँस गई और प्रताप ने अपने होंठों से शबाना की चूत को ढँक लिया और एक उंगली भी शबाना की चूत में घुसा दी - अब शबाना की चूत में प्रताप की जीभ और उंगली घमासान मचा रही थी. शबाना रह रह कर अपनी गांद उठा उठा कर प्रताप के मुँह में चूत दबा रही थी. उसकी चूत से निकल रहा पानी उसकी गांद तक पहुँच गया था. प्रताप ने अब उंगली चूत से निकाली और शबाना की गंद पर उंगली फिराने लगा. चूत के पानी की वजह से गंद में उंगली फिसल कर जा रही थी. शबाना को कुच्छ होश नहीं था - वो तो चुदाई के नशे से मदहोश हो चुकी थी, आज तक उसे इतना मज़ा नहीं आया था. उसकी सिसकारिया बंद नहीं हो रही थी. उसकी गंद में उंगली और चूत में जीभ घुसी हुई थी और वो नशे में धुत्त शराबी की तरह बिस्तर पर इधर उधर हो रही थी. उसकी आँखें बंद थी और वो जन्नत की सैर कर रही थी. किसी तेज़ खुश्बू की वजह से उसने आँखें खोली, तो सामने प्रताप का लंड था. उसे पता ही नहीं चला कब प्रताप ने अपने कपड़े उतार दिए और 69 की पोज़िशन में आ गया. शबाना ने प्रताप के लंड को पकड़ा और ऊपर नीचे करने लगी, प्रताप के लंड से पानी गिर रहा था और वो चिपचिप हो रहा था - शबाना ने लंड को अच्छि तरह सूँघा, उसे अपने चेहरे पर लगाया और उसका अच्छि तरह जायज़ा लेने के बाद उसे चूम लिया. फिर अपना मुँह खोला और लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. वो एक लॉलिपोप की तरह लंड चूस रही थी, लंड के सुपरे को अपने मुँह में लेकर अंदर ही उसे जीभ से लपेटकर अच्छि तरह चूस रही थी. और प्रताप उसकी चूत अब भी चूस रहा था.

अचानक जैसे ज्वालामुखी फटा और लावा बहने लगा. शबाना का जिस्म बुरी तरह अकड़ गया और उसकी टाँगें सिकुड गई, प्रताप का मुँह जैसे शबाना की जांघों में पिस रहा था, शबाना बुरी तरह झाड़ गई और उसकी चूत ने एकदम से पानी छ्चोड़ दिया, और वो एकदम निढाल गई. आज एक घंटे में वो दो बार झाड़ चुकी थी जबकि अब तक उसकी चूत में लंड गया भी नहीं था.

क्रमशः................
 
सबाना और ताजीन की चुदाई -2

गतान्क से आगे............

अब प्रताप ने अपना लंड शबाना के मुँह से निकाला और शबाना की चूत छ्चोड़कर उसके होंठों को चूसने लगा. शबाना झाड़ चुकी थी लेकिन लंड की प्यास उसे बराबर पागल किए हुए थी. अब वो बिल्कुल नंगी प्रताप के नीचे लेटी हुई थी, और प्रताप भी एकदम नंगा उसके ऊपर लेटा हुआ था, प्रताप का लंड उसकी चूत पर ठोकर मार रहा था और शबाना अपनी गांद उठा उठा कर प्रताप के लंड को खाने की फिराक में थी. प्रताप अब उसके टाँगों के बीच बैठ गया और उसकी टाँगों को उठा कर अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा. शबाना आहें भर रही थी, अपने सर के नीचे रखे तकिये को अपने हाथों में पकड़ कर मसल रही थी. उसकी गंद रह रह कर उठ जाती थी, प्रताप के लंड को खा जाने के लिए, मगर प्रताप तो जैसे उसे तडपा तडपा कर चोदना चाहता था, वो उसकी चूत पर अपने लंड को रगडे जा रहा था ऊपर से नीचे. अब शबाना से रहा नहीं जा रहा था - असीम आनंद की वजह से उसकी आँखें बंद हो चुकी थी और मुँह से सिसकारियाँ छ्छूट रही थी. प्रताप का लंड धीरे धीरे फिसल रहा था, फिसलता हुआ वो शबाना की चूत में घुस जाता और बाहर निकल जाता - अब प्रताप उसे चोदना शुरू कर चुका था. हल्के हल्के धक्के लग रहे थे और शबाना भी अपनी गांद उठा उठा कर लंड खा रही थी. धीरे धीरे धक्कों की रफ़्तार बढ़ रही थी और शबाना की सिसकारियों से सारा कमरा गूँज रहा था...प्रताप का लंड कोयले के एंजिन के टाइयर पर लगी पट्टी की तरह शबाना की चूत की गहराई नाप रहा था. प्रताप की चुदाई में एक लय थी और अब धक्कों ने रफ़्तार पकड़ ली थी. प्रताप का लंड तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था और शबाना भी पागल हो चुकी थी, वो अपनी गंद उठा उठा कर प्रताप के लंड को अपनी चूत में दबाकर पीस रही थी - अचानक शबाना ने प्रताप को कसकर पकड़ लिया और अपने दोनों पैर प्रताप की कमर पर बाँध कर झूल गई, प्रताप समझ गया कि यह फिर झड़ने वाली है - प्रताप ने अपने धक्के और तेज़ कर दिए - उसका लंड शबाना की चूत में एकदम धंसता चला जाता, और, बाहर आकर और तेज़ी से घुस जाता. शबाना की चूत से फव्वारा छ्छूट गया और प्रताप के लंड ने भी शबाना की चूत में पूरा पानी उडेल दिया...

प्रताप और शबाना अब जब भी मौका मिलता एक दूसरे के जिस्म की भूख मिटा देते थे.

शबाना बहोत दिनों से प्रताप का लंड नहीं ले पाई थी. परवेज़ की बेहन ताज़ीन घर आई हुई थी. वो पूरे दिन घर पर ही रहती थी, जिस वजह से ना तो शबाना कहीं जा पाती थी और ना ही प्रताप को बुला सकती थी.

"शबाना में दो दिनों के लिए बाहर जा रहा हूँ, कुच्छ ज़रूरी काम है, ताज़ीन घर पर नहीं होती तो तुम्हें भी ले चलता". "कोई बात नहीं, आप अपना काम निपटा कर आइए". शबाना को परवेज़ के जाने की कोई परवाह नहीं थी, और उसके साथ जाने की इच्च्छा भी नहीं थी. वो तो ताज़ीन को भी भगा देना चाहती थी, जिसकी वजह से उसे प्रताप का साथ नहीं मिल पा रहा था, पूरे पंद्रह दिन से. और ताज़ीन अभी और 15 दिन रुकने वाली थी.

रात को ताज़ीन और शबाना बेडरूम में बिस्तर पर लेटे हुए फिल्म देख रहे थे. शबाना को नींद आने लगी थी, और वो गाउन पहन कर सो गई. सोने से पहले शबाना ने लाइट बंद करके डिम लाइट चालू कर दी थी. ताज़ीन किसी चॅनेल पर इंग्लीश फिल्म देख रही थी. फिल्म में काफ़ी खुलापन और सेक्स के सीन्स थे.
 


नींद में शबाना ने एक घुटना उपर उठाया तो अनायास ही उसका गाउन फिसल कर घुटने के उपर तक सरक गया. टीवी और डिम लाइट की रोशनी में उसकी दूधिया रंग की जाँघ चमक रही थी. अब ताज़ीन का ध्यान फिल्म में ना होकर शबाना के जिस्म पर था, और रह रह कर उसकी नज़र शबाना के गोरे जिस्म पर टिक जाती थी. शबाना की खूबसूरत जांघें उसे मादक लग रही थी. कुच्छ तो फिल्म के सेक्स सीन्स का असर था और कुच्छ शबाना की खूबसूरती का. ताज़ीन ने टीवी बंद किया और वहीं शबाना के पास सो गई. थोड़ी देर तक बिना कोई हरकत किए सोई रही, फिर उसने अपना हाथ शबाना के उठे हुए घुटने वाली जाँघ पर रख दिया. हाथ रख कर वो ऐसे ही लेटी रही, एकदम स्थिर. जब शबाना ने कोई हरकत नही की, तो ताज़ीन ने अपने हाथ को शबाना की जाँघ पर फिराना शुरू कर दिया. हाथ भी इतना हल्का कि सिर्फ़ उंगलियाँ ही शबाना को च्छू रही थी, हथेली बिल्कुल भी नहीं. फिर उसने हल्के हाथों से शबाना के गाउन को पूरा नीचे कर दिया, अब शबाना की पॅंटी भी सॉफ नज़र आ रही थी. ताज़ीन की उंगलियाँ अब शबाना के घुटनों से होती हुई उसकी पॅंटी तक जाती और फिर वापस ऊपर घुटनों पर आ जाती. यही सब तकरीबन 2-3 मिनिट तक चलता रहा. जब शबाना ने कोई हरकत नहीं की, तो ताज़ीन ने शबाना की पॅंटी को छुना शुरू कर दिया, लेकिन तरीका वोही था. घुटनों से पॅंटी तक उंगलियाँ परदे कर रही थी. अब ताज़ीन धीरे से उठी और उसने अपना गाउन और ब्रा उतार दिया, और सिर्फ़ पॅंटी में शबाना के पास बैठ गई. शबाना के गाउन में आगे की तरफ बटन लगे हुए थे, ताज़ीन ने बिल्कुल हल्के हाथों से बटन खोल दिए. फिर गाउन को हटाया तो शबाना के गोरे चिट मम्मे नज़र आने लगे. अब ताज़ीन के दोनों हाथ व्यस्त हो गये थे, उसके एक हाथ की उंगलियाँ शबाना की जाँघ और दूसरे हाथ की उंगलियाँ शबाना के मम्मों को सहला रही थी. उसकी उंगलियाँ अब शबाना को किसी मोर-पंख की तरह लग रही थी. जी हाँ दोस्तो, शबाना उठ चुकी थी, लेकिन उसे अच्च्छा लग रहा था इसलिए बिना हरकत लेटी रही. वो इस खेल को रोकना नहीं चाहती थी.

अब ताज़ीन की हिम्मत बढ़ गई थी, उसने झुककर शबाना की चुचि को किस किया. फिर उठी, और शबाना के पैरों के बीच जाकर बैठ गई. शबाना को अपनी जाँघ पर गर्म हवा महसूस हो रही थी, वो समझ गई ताज़ीन की साँसें हैं. वो शबाना की जाँघ को अपने होंठों से च्छू रही थी, बिल्कुल उसी तरह जैसे वो अपनी उंगलियाँ फिरा रही थी. अब वोही साँसें शबाना को अपनी चड्डी पर महसूस हो रही थी, लेकिन उसे नीचे दिखाई नहीं दे रहा था. वैसे भी उसने अभी तक आँखें नहीं खोली थी. अब ताज़ीन ने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसे शबाना की पॅंटी में से झाँक रही गरमागरम चूत की दरार पर टिका दी. कुच्छ देर ऐसे ही उसने अपनी जीभ को पॅंटी पर ऊपर नीचे फिराया. शबाना की चड्डी ताज़ीन के थूक से और, चूत से निकल रहे पानी से भीगने लगी थी. अचानक ताज़ीन ने शबाना की पॅंटी को साइड में किया और शबाना की नंगी चूत पर अपने होंठ रख दिए. शबाना से और बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने अपनी गंद उठा दी, और दोनों हाथों से ताज़ीन के सिर को पकड़ कर उसका मुँह अपनी चूत से चिपका लिया. ताज़ीन की तो मन की मुराद पूरी हो गई थी !! अब कोई डर नहीं था, वो जानती थी कि अब शबाना सबकुच्छ करने को तैयार है - और आज की रात रंगीन होने वाली थी.
 


ताज़ीन ने अपना मुँह उठाया और शबाना की चड्डी को दोनों हाथों में पकड़ कर खींचने लगी, शबाना ने भी अपनी गांद उठा कर उसकी मदद की. फिर शबाना ने अपना गाउन भी उतार फेंका और ताज़ीन से लिपट गई. ताज़ीन ने भी अपनी पॅंटी उतारी और अब दोनों बिल्कुल नंगी एक दूसरे के होंठ चूस रही थी. दोनों के मम्मे एक दूसरे से उलझ रहे थे, ताज़ीन अपनी कमर को झटका देकर शबाना की चूत पर अपनी चूत लगा रही थी, जैसे की उसे चोद रही हो. शबाना भी सेक्स के नशे में चूर हो चुकी थी और उसने ताज़ीन की चूत में एक उंगली घुसा दी. अब ताज़ीन ने शबाना को नीचे गिरा दिया और उसके ऊपर चढ़ गई. ताज़ीन ने शबाना के मम्मों को चूसना शुरू किया, उसके हाथ शबाना के जिस्म से खेल रहे थे. शबाना अपने मम्मे चुसवाने के बाद ताज़ीन के ऊपर आ गयी और नीचे उतरती चली गई, ताज़ीन के मुम्मों को चूस्कर उसकी नाभि से होते हुए उसकी जीभ ताज़ीन की चूत में घुस गई. ताज़ीन भी अपनी गांद उठा उठा कर शबाना का साथ दे रही थी. काफ़ी देर तक ताज़ीन की चूत चूसने के बाद शबाना ताज़ीन के पास आ कर लेट गई और उसके होंठ चूसने लगी अब ताज़ीन ने शबाना के मम्मों को दबाया और उन्हें अपने मुँह में ले लिया - ताज़ीन का एक हाथ शबाना के मम्मों पर और दूसरा उसकी चूत पर था. उसकी उंगलियाँ शबाना की चूत के अंदर खलबली मचा रही थी, शबाना एकदम निढाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ी और उसके मुँह से अजीब अजीब आवाज़ें आने लगी. तभी ताज़ीन नीचे की तरफ गई और शबाना की चूत को चूसना शुरू कर दिया, अपने दोनों हाथों से उसने चूत को फैलाया और उसमें दिख रहे दाने को मुँह में ले लिया और उसपर जीभ रगड़ रगड़ कर चूसने लगी. शबाना तो जैसे पागल हो रही थी, उसकी गांद ज़ोर ज़ोर से ऊपर उठाती और एक आवाज़ के साथ बेड पर गिर जाती, जैसे की वो अपनी गांद को बिस्तर पर पटक रही हो. फिर उसने अचानक ताज़ीन के सिर को पकड़ा और अपनी चूत में और अंदर धकेल दिया, उसकी गांद जैसे हवा में तार रही थी और ताज़ीन लगभग बैठी हुई उसकी चूत खा रही थी - वो समझ गई अब शबाना झड़ने वाली है और उसने तेज़ी से अपना मुँह निकाला और दो उंगलियाँ शबाना की चूत के एकदम भीतर तक घुसेड दी, उंगलियों के दो तीन ज़बरदस्त झटकों के बाद शबाना की चूत से जैसे पर्नाला बह निकला. पूरा बिस्तर उसके पानी से गीला हो गया. फिर ताज़ीन ने अपनी चूत को शबाना की चूत पर रख दिया और ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी, जैसे की वो शबाना को चोद रही हो. दोनों की चूत एक दूसरे से रगड़ रही थी और ताज़ीन शबाना के ऊपर चढ़ कर उसकी चुदाई कर रही थी, शबाना का भी बुरा हाल था और वो अपनी गंद उठा उठा कर ताज़ीन का सहयोग कर रही थी. तभी ताज़ीन ने ज़ोर से आवाज़ निकाली और शबाना की चूत पर दबाव बढ़ा दिया - फिर तीन चार ज़ोरदार भारी भरकम धक्के देकर वो शांत हो गयी. उसकी चूत का सारा पानी अब शबाना की चूत को नहला रहा था.

फिर दोनों उसी हालत में सो गये.

 


अगले दिन शबाना और ताज़ीन नाश्ते के बाद बातें करने लगे. "भाभी सच कहूँ तो बहोत मज़ा आया कल रात" "मुझे भी" "लेकिन अगर असली चीज़ मिलती तो शायद और भी मज़ा आता" "क्यों दीदी, जीजाजी को बुलायें ?" आँख मारते हुए कहा शबाना ने. "उनको छ्चोड़ो, उन्हें तो महीने में एक बार जोश आता है और वो भी मेरे ठंडे होने से पहले बह जाता है. और जहाँ तक में परवेज़ को जानती हूँ, वो किसी औरत को खुश नहीं कर सकता. तुमने भी तो इंतज़ाम किया होगा अपने लिए" यह सुनकर शबाना चौंक गई, लेकिन कुच्छ कहा नहीं.

ताज़ीन ने चुप्पी तोड़ी "भाभी, अगर आपकी पहचान का कोई है तो उसे बुलाए ना." सुनकर शबाना मन ही मन खुश हो गई. "ठीक है में बुलाती हूँ, लेकिन तुम छुप कर देखना फिर मौका देख कर आ जाना"

शबाना के दरवाज़ा खोलते ही प्रताप उसपर टूट पड़ा. उसने शबाना को गोद में उठाया और उसके होंठों को चूस्ते हुए उसे बिस्तर पर ले गया. शबाना ने सिर्फ़ गाउन पहन रखा था. वो प्रताप का ही इंतेज़ार रही थी और पिच्छले पंद्रह दिनों से सेक्स ना करने की वजह से जल्दी में भी थी..चुदाई करवाने की जल्दी.

प्रताप ने उसे बिस्तर पर लिटाया और सीधे उसके गाउन में घुस गया, नीचे से. अब शबाना आहें भर रही थी..उसकी चूत पर जैसे चींटियाँ चल रही हो...उसे अपना गाउन उठा हुआ दिख रहा था और वो प्रताप के सर और हाथों के हिसाब से उपर नीचे हो रहा था. प्रताप ने उसकी चूत को अपने मुँह में दबा रखा था और उसकी जीभ ने जैसे शबाना की चूत में घमासान मचा दिया था. एकाएक शाना की गंद ऊपर उठ गई, और उसने अपने गाउन को खींचा और अपने सर पर से उसे निकाल कर फर्श पर फेंक दिया. उसके पैर अब भी बेड से नीच लटक रहे थे और प्रताप बेड से नीचे बैठा हुआ उसकी चूत खा रहा था... शबाना उठा कर बैठ गई और प्रताप ने अब उसकी चूत में उंगली घुसाइ - जैसे वो शबाना की चूत को खाली रहने ही नहीं देना चाहता था. और शबाना के मम्मों को बेतहसह चूमने और चूसने लगा. शबाना की आँखें बंद थी और वो मज़े ले रही थी..उसकी गंद रह रह कर हिल जाती जैसे प्रताप की उंगली को अपनी चूत से खा जाना चाहती थी.

फिर उसने प्रताप के मुँह को उपर उठाया और अपने होंठ प्रताप के होंठों पर रख दिए. उसे प्रताप के मुँह का स्वाद बहोत अच्छा लग रहा था. उसकी जीभ को अपने मुँह में दबाकर वो उसे चूसे जा रही थी. प्रताप खड़ा हो गया. अब शबाना की बारी थी, उसने बेड पर बैठे हुए ही प्रताप की बेल्ट उतारी, प्रताप की पॅंट पर उसके लंड का उभार सॉफ नज़र आ रहा था. शबाना ने उस उभार को मुँह में ले लिया और पॅंट की हुक खोल दी, फिर जैसे ही ज़िप खोली प्रताप की पॅंट सीधे ज़मीन पर आ गिरी जिसे प्रताप ने अपने पैरों से निकाल कर दूर धकेल दिया. प्रताप ने वी कट वाली अंडरवेर पहन रखी थी. शबाना ने अंडरवेर नहीं निकाली, उसने प्रताप की अंडरवेर के साइड में से अंदर हाथ डाल कर उसके लंड को अंडरवेर के बाहर खींच लिया. फिर उसने हमेशा की तरह अपनी आँखें बंद की और लंड को अपने चेहरे पर सब जगह घुमाया फिराया और उसे अच्छि तरह अपनी नाक के पास ले जाकर सूंघने लगी. उसे प्रताप के लंड की महक मादक कर रही थी और वो मदहोश हुए जा रही थी. उसके चेहरे पर सब जगह प्रताप के लंड से निकल रहा "प्रेकुं" (पानी) लग रहा था. शबाना को ऐसा करना अच्च्छा लगता था. फिर उसने अपना मुँह खोला और लंड को अंदर ले लिया. फिर बाहर निकाला और अपने चेहरे पर एकबार फिर उसे घुमाया. शबाना ने अपने मुँह में काफ़ी थूक भर लिया था, और फिर उसने लंड के सुपरे पर से चमड़ी पीछे की और उसे मुँह में ले लिया. प्रताप का लंड शबाना के मुँह में था और शबाना अपनी जीभ में लपेट लपेट कर उसे चूसे जा रही थी...ऊपर से नीचे तक, सुपरे से जड़ तक..उसके होंठों से लेकर गले तक सिर्फ़ एक ही चीज़ थी, लंड. और वो मस्त हो चुकी थी..उसके एक हाथ की उंगलियाँ उसकी चूत पर थिरक रही थी और दूसरा हाथ प्रताप के लंड को पकड़ कर उसे मुँह में खींच रहा था. फिर शबाना ने प्रताप की गोटियों को खींचा, जो कि अंदर घुस गई थी एक्सेयैटमेंट की वजह से. आह गोतिया बाहर आ गई थी और शबाना ने अपने मुँह से लंड को निकाला और उसे ऊपर कर दिया. फिर प्रताप की गोटियों को मुँह में लिया और बेतहाशा चूसने लगी. प्रताप की सिसकारिया पूरे कमरे में गूँज रही थी और अब उसके लंड को घुसना था, शबाना की चूत में. दोस्तो कैसी लग रही है कहानी आप सबको ज़रूर बताना आगे की कहानी जानने के लिए इस कहानी अगले पार्ट ज़रूर पढ़े आपका दोस्त राज शर्मा क्रमशः................
 
सबाना और ताजीन की चुदाई -3

गतान्क से आगे............

उसने अब शबाना का मुँह अपने लंड पर से हटाया और उसे बेड पर लिटा दिया. फिर उसने शबाना के दोनों पैरों को पकड़ा और ऊपर उठा दिया. अब प्रताप ने उसकी दोनों जांघों को पकड़ कर फैलाया और उठा दिया. अब प्रताप का लंड उसकी चूत पर था और धीरे धीरे अपनी जगह बना रहा था. शबाना ने अपनी आँखें बंद की और लेट गई..यही अंदाज़ था उसका. आराम से लेटो और सेक्स मा मज़ा लो - जन्नत की सैर करो - लंड को खा जाओ - अपनी चूत में अंदर बाहर होते हुए लंड को अच्छि तरह महसूस करो - कुच्छ मत सोचो, दुनिया भुला दो - कुच्छ रहे दिमाग़ में तो सिर्फ़ सेक्स, लंड, चूत - और जोरदार ज़बरदस्त चुदाई. प्रताप की सबसे अच्छि बात यह थी कि वो जानता था कि कौनसी औरत कैसे चुदाई करवाना पसंद करती है..और उसके पास वो सबकुच्छ था जो किसी भी औरत को खुश कर सकता था.

अब उसकी चूत में लंड घुस चुका था. प्रताप ने धक्कों की शुरुआत कर दी थी. बिल्कुल धीरे धीरे. कुच्छ इस तरह की लंड की हर हरकत शबाना अच्छि तरह महसूस कर सके. लंड उसकी चूत के आखरी सिरे तक जाता और बहोत धीरे धीरे वापस उसकी चूत के मुँह तक आ जाता. जैसे की वो चूत में सैर कर रहा हो. हल्के हल्के धीरे धीरे. प्रताप को शबाना की चूत के भीतर का एक-एक हिस्सा महसूस हो रहा था. चूत का पानी, उसके भीतर की नर्म, मुलायम मांसपेशियाँ. और शबाना - वो तो बस अपनी आँखें बंद किए मज़े लूट रही थी, उसकी गंद ने भी अब ऊपर उठाना शुरू कर दिया था. यानी की अब शबाना को रफ़्तार चाहिए थी और अब प्रताप को अपनी स्पीड बढ़ाते जानी थी..और बिना रुके तब तक चोदना था जब तक कि शबाना की चूत उसके लंड को अपने रस में नहीं डूबा दे. प्रताप ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और अब वो तेज़ धक्के लगा रहा था. शबाना की सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगी थी, उसके पैर सीधे हो रहे थे और अब उसने प्रताप को कसकर पकड़ लिया और गंद उठा दी. इसका मतलब अब उसका काम होने वाला था. जब भी उसका स्खलन होने वाला होता था वो बिल्कुल मदमस्त होकर अपनी गंद उठा देती थी, जैसे वो लंड को खा जाना चाहती हो फिर जब उसकी चूत बरसात कर देती तो वो धम से बेड पर गंद पटक देती. आज भी ऐसा ही हुआ...शबाना बिल्कुल मदमस्त होकर पड़ी थी. उसकी चूत पानी छ्चोड़ चुकी थी. प्रताप को पता था, शबाना को पूरा मज़ा देने के लिए अपने लंड का सारा पानी उसकी चूत में अडेलना होगा..यानी अभी और एक बार चोदना होगा और अपने लंड के पानी में भिगो देना होगा, शबाना की चूत को.

प्रताप ने अपना लंड बाहर निकाला और बेड से नीचे आ गया, नीचे बैठ कर उसने शबाना की टाँगों को उठाया और उसकी चूत का पानी चाटने लगा. तभी प्रताप को अपने लंड पर गीलापन महसूस हुआ जैसे किसीने उसके लंड को मुँह में ले लिया हो. उसने चौंक कर नीचे देखा, जाने कब ताज़ीन कमरे में आ गई थी और उसने प्रताप का लंड मुँह में ले लिया था. ताज़ीन पूरी नंगी थी उसने कुच्छ नहीं पहन रखा था. प्रताप को कुच्छ समझ नहीं आ रहा था. शबाना तब तक बैठ चुकी थी और वो मुस्कुरा रही थी "आज तुम्हें इसे भी खुश करना है प्रताप, यह मेरी ननद है ताज़ीन".
 


अब तक प्रताप भी संभाल चुका था और ताज़ीन को गौर से देख रहा था. शबाना जितनी खूबसूरत नहीं थी, मगर अच्छि थी. उसका शरीर थोड़ा ज़्यादा भरा हुआ. उसके मम्मे छ्होटे लेकिन शानदार थे. एकदम गुलाबी चूचियाँ. गंद एकदम भरी हुई और चौड़ी थी. उसके घुंघराले बाल कंधों से थोड़े नीचे तक आ रहे थे, जिन्हें उसने एक बकल में बाँध कर रखा था. प्रताप अब भी ज़मीन पर बैठा था और उसका लंड ताज़ीन के मुँह में था. प्रताप अब तक सिर्फ़ लेटा हुआ था और जो कुच्छ भी हो रहा था ताज़ीन कर रही थी. वो शबाना के बिल्कुल उलट थी - उसके मज़े लेने का मतलब था "मर्द को चोद कर रख दो". कुच्छ वैसा ही हो रहा था प्रताप के साथ. ताज़ीन जैसे उसका बलात्कार कर रही थी.

तभी ताज़ीन ने उसे धक्का दिया और उसे ज़मीन पर लिटा कर उसके ऊपर आ गई. अपने हाथों से उसने प्रताप के लंड को पकड़ा और अपनी चूत में घुसा लिया. वो प्रताप के ऊपर चढ़ बैठी. अब वो ज़ोर ज़ोर से प्रताप के लंड पर उच्छल रही थी. उसके मम्मे किसी रब्बर की गैन्द की तरह प्रताप की आँखों के सामने लहरा रहे थे. फिर ताज़ीन झुकी और उसने प्रताप के मुँह को चूमना शुरू कर दिया. प्रताप के लंड को अपनी चूत में दबाए वो अब भी बुरी तरह उसे चोदे जा रही थी. फिर अचानक वो उठी और प्रताप के मुँह पर बैठ गई और अपनी चूत प्रताप के मुँह पर रगड़ने लगी जैसे की प्रताप के मुँह में खाना ठूंस रही हो, अब तक प्रताप भी संभाल चुका था. उसने ताज़ीन को उठाया और वहीं ज़मीन पर गिरा लिया - और उसकी चूत में उंगली घुसा कर उसपर अपना मुँह रख दिया. अब प्रताप की जीभ और उंगली ताज़ीन की चूत को बहाल कर रही थी. ताज़ीन भी मस्त होने लगी थी उसने प्रताप के बालों को पकड़ा और ज़ोर से उसे अपनी चूत में घुसाने लगी, साथ ही अपनी गंद भी पूरी उठा दी. प्रताप ने अब अपनी उंगली उसकी चूत से निकाल ली. ताज़ीन की चूत के पानी से भीगी हुई उस उंगली को उसने ताज़ीन की गंद में घुसा दिया. ताज़ीन को तेज़ दर्द हुआ, पहली बार उसकी गंद में कोई चीज़ घुसी थी.

अब प्रताप ने अपनी उंगली उसकी गंद के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और चूत को चूसना जारी रखा. फिर उसने ताज़ीन की चूत को छ्चोड़ दिया और सिर्फ़ गंद में तेज़ी के साथ उंगली चलाने लगा. अब गंद थोड़ी खुल चुकी थी और ताज़ीन भी चुपचाप लेटी थी. फिर ताज़ीन ने उसके हाथ को एक झटके से हटाया और उठ कर प्रताप को बेड पर खींच लिया. प्रताप ने उसकी दोनों टाँगें फैला दी और उसकी चूत में लंड डाल दिया जैसे ही लंड अंदर घुसा ताज़ीन ने प्रताप को कसकर पकड़ा और नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए, प्रताप ने भी धक्के लगाने शुरू कर दिए. तभी ताज़ीन ने प्रताप को एक झटके से नीचे गिरा लिया और उसपर चढ़ बैठी. इस बार उसका एक पैर बेड पर था और दूसरा ज़मीन पर. और दोनों पैरों के बीच उसकी चूत ने प्रताप के लंड को जाकड़ रखा था. फिर वो प्रताप से लिपट गई और ज़ोर ज़ोर से प्रताप की चुदाई करने लगी...और फिर उसके मुँह से अजीब आवाज़ें निकालने लगी, वो झड़ने वाली थी. और प्रताप भी नीचे से अपना लंड उसकी चूत में धकेल रहा था. तभी प्रताप के लंड का फव्वारा छ्छूट गया और उसने अपने पानी से ताज़ीन की चूत को भर दिया - उधर ताज़ीन भी शांत हो चुकी थी. उसकी चूत भी प्रताप के लंड को नहला चुकी थी.

 


अब ताज़ीन खड़ी हुई. प्रताप ने पहली बार उसे ऊपर से नीचे तक देखा. ताज़ीन ने झुक कर उसे चूम लिया. उसके होंठों को अपनी जीभ से चटा और मुस्कुरा कर बाहर निकल गई. प्रताप ने इधर उधर देखा शबाना भी कमरे में नहीं थी. बाथरूम से पानी की आवाज़ आ रही थी. शबाना नहा रही थी.

"क्यों प्रताप कैसी रही ?" "मज़ा आ गया, एक के साथ एक फ्री" प्रताप ने हंसते हुए कहा. शबाना भी मुस्कुरा दी.

ताज़ीन वहीं बैठी हुई थी, उसने चुटकी ली "साली तेरे तो मज़े हैं, प्रताप जैसा लंड मिल गया है चुदाई के लिए. मन तो करता है मैं भी यहीं रह जाऊं और रोज चुदाई करवाउ. बहुत दिनों के बाद कोई असली लंड मिला है". "अभी पंद्रह दिन और हैं ताज़ीन जितने चाहे मज़े लेले, फिर तो तुझे जाना ही है. हां कल तुम्हारे भैया आ जाएँगे तो थोड़ा सावधान रहना होगा."

तभी ताज़ीन ने कहा "प्रताप तुम्हारा कोई दोस्त है तो उसे भी ले आओ. दोनो तरफ दो-दो होंगे तो मज़ा भी ज़्यादा आएगा"

"यह क्या बक रही हो ताज़ीन तुम तो चली जाओगी मुझे तो यहीं रहना है, किसी को पता चल गया तो में तो गई काम से."

"आज तक किसी को पता चला क्या ? और प्रताप का दोस्त होगा तो भरोसेमंद ही होगा, उसपर तो भरोसा है ना तुम्हें ? और मुझे मौका है तो में दो तीन के साथ मज़े करना चाहती हूँ. प्लीज़ शबाना मान जाओ ना, मज़ा आएगा"

थोड़ी ना-नुकर के बाद शबाना मान गई.

प्रताप ने अपना फोन निकाला और उन लोंगों को फोन में अपने दोस्तों के साथ की कुच्छ तस्वीरें दिखाई. इरादा पक्का हुआ जगबीर सिंग पर. वो एक सरदार था, यह भी एक प्लस पॉइंट था. क्योंकि सरदार भरोसे के काबिल होते ही हैं. फिर उसकी खुद की भी शादी हो चुकी थी, तो वो किसी को क्यों बताने लगा, वो खुद मुसीबत में आ जाता अगर किसी को पता चल जाता तो.

"हाई जगबीर प्रताप बोल रहा हूँ" "बोल प्रताप आज कैसे याद कर लिया ?" एक रौबदार आवाज़ ने जवाब दिया.

इधर उधर की बातें करने के बाद प्रताप सीधे मुद्दे पर आ गया. "आज रात क्या कर रहा है ?" "कुच्छ नहीं यार बीवी तो मैके गई है, घर पर ही हूँ, पार्टी दे रहा है क्या ? "

"पार्टी ही समझ ले, शराब और शबाब दोनों की "

"यार तू तो जानता है में इन रंडियों के चक्कर में नहीं पड़ता, बीमारियाँ फैली हुई है"

"अबे रंडियों के पास तो में भी नहीं जाता, भाभी हैं. इंटेरेस्ट है तो बोल. वो आज रात घर पर अकेली हैं, उनके घर पर ही जाना है. बोल क्या बोलता है ?"

"नेकी और पूच्छ पूछ, बता कहाँ आना है"

प्रताप ने अड्रेस वग़ैरह कन्फर्म कर दिया.

रात के नौ बजे डोर बेल बजी. शबाना ने दरवाज़ा खोला, प्रताप और जगबीर ही थे. जगबीर के हाथ में एक बॉटल थी, विस्की की. शबाना ने दरवाज़ा बंद किया और दोनों को ड्रॉयिंग रूम में बैठा दिया. जगबीर ने शबाना को देखा तो देखता ही रह गया - उसने सारी पहन रखी थी.

तभी ताज़ीन भी बाहर आ गई, उसने मिनी स्कर्ट पहन रखी थी और शॉर्ट टी-शर्ट उसका जिस्म च्छूपा कम आंड दिखा ज़्यादा था. जगबीर फोटो में जितना दिख रहा था उससे कहीं ज़्यादा आकर्षक था. पक्का सरदार - कसरती बदन और पूरा मर्दाना था, काफ़ी बाल थे उसके शरीर पर. वहीं दूसरी ओर प्रताप भी बिकुल वैसा ही था - सिर्फ़ पगड़ी नहीं बँधी थी और क्लीन शेव था. कौन ज़्यादा आकर्षक है कहना मुश्किल था.

 
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