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साँझा बिस्तर साँझा बीबियाँ

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दोनों पतियों की हांफती हुई साँसे और पत्नियोँ की दबी हुई कामुक कराहटों के उपरान्त उनकी योनियोँ के बारे बार रगड़ने और अंदर बाहर होनेसे होती हुई फच्च फच्च आवाज से बैडरूम गूंज रहा था।

रानी के मन की दशा अवर्णीय थी। उसे आज अपने नायक (हीरो) से चुदवाने का अद्भुत अवसर प्राप्त हुआ था जो रानी उसके जीवन का एक अमूल्य तोहफा मान रही थी। उसे अपने नायक को प्रसन्न करने का और उसे अपनी कामुकता द्वारा वह सुख देना, जिसके कमल कई सालों से सपने देख रहा था अवसर मिला था। और इस लिए रानी पुरे मन से और ध्यान से कमल के मोटे और लम्बे लण्ड को अपनी चूत में अद्भुत कामुक कम्पन पैदा कर कमल को अति उन्माद पूर्ण जातीय सुख देने के सतत प्रयास कर रही थी। इसका असर कमल के लण्ड पर भी हो रहा था जिसे कमल अनुभव कर रहा था। कमल रानी की शारीरिक कामुक कम्पन से जातीय सुख का अतिरेक अनुभव कर रहा था। उसे रानी को चोदने से वह अनुभव हो रहा था जो उसे कई सालों तक अपनी बीबी को चोदने में नहीं हुआ था।

कमल अपनी पत्नी कुमुद को और रानी अपने पति राज को एक दूसरे को चोदते हुए देख कर इर्षा के बजाय प्रसन्नता का अनुभव कर रही थी। दोनों जोड़ियाँ जानती थी की जिस दिन उनकी शादी हुई थी लगभग तबसे ही दोनों बीबियों का दोनों दोस्तों से चुदना विधि ने उनके भाग्य में लिख ही दिया था। बस यही देखना था वह कैसे होगा और वह दिन कब आएगा। वह रात आ चुकी थी और इस कारण अपने भाग्य को आनंद पूर्वक स्वीकार करके उसमें से सुख भोगना ही तो बुद्धिमानी थी। और वैसे भी दोनों पत्नियां दूसरे के पति से सम्भोग करने की कामना अपने मन में छिपा कर रखे हुए भी तो थी। बस थोड़ा ना नुक्कड़ करना जरुरी था।

कमल रानी की चूत की कम्पन और अनवरत सिकुड़न से बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रहा था। उसने रानी को चोदने से इतना अद्भुत सुख मिलेगा ऐसा सोचा भी नहीं था। कमल के लण्ड, बल्कि कमल के पुरे बदन में अत्याधिक रोमांच और उत्तेजना हो रही थी। कमल पिछले कई दिनों से अपने वीर्य का स्खलन नहीं कर पाया था। पिछले कुछ दिनों से उसकी पत्नी कुमुद ने उसे ब्रह्मचर्य पालने पर मजबूर कर रखा था। इसलिए कमल के लण्ड के अंडकोष में और लण्ड की नालियों में उसका वीर्य पूरा भरा हुआ था जो बाहर निकल कर रानी की चूत में कोई सुनामी के सामान फौव्वारे की रफ़्तार और ताकत से घुसने के लिए मचल रहा था।

पर कमल को यह भी तो सोचना था की क्या राज और रानी कमल के वीर्य को रानी की चूत में जाने से कोई आपत्ति तो नहीं करेंगे। इसलिए कमल जैसे ही चरम पर पहुँच ने वाला था की थम गया। रानी ने अपनी आँखें खोली देखने के लिए की क्या हुआ। कमल थम क्यों गया? रानी भी चरम पर पहुँच ने वाली जो थी। कमल और रानी के चुदाई थम जाने से राज भी आश्चर्य अनुभव कर रहा था। पर वह समझ गया की कमल अपना वीर्य रानी की चूत में उँडेले या नहीं उस असमंजस में था। तब राज ने कमल से कहा, "भैया चालु रखो। आपका वीर्य रानी के बदन में जाने से रानी को यदि आपके जैसा ही वीर्यवान पुत्र या पुत्री होती है तो वह हमारे दोनों का सौभाग्य होगा। मैंने पहले से ही तय कर रखा था की यदि आपके वीर्य से रानी गर्भवती होती है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं बल्कि बहुत प्रसन्नता होगी।"

राज ने फिर रानी की और देखकर उसे पूछा, "प्रिये, आप मुझसे सहमत हो या नहीं?"

रानी क्या बोलती? वह तो अपनी नजरें झुकाये चुप रही। पर उसने अपने कूल्हे से ऊपर की और धक्का मार कर कमल को उसका वीर्य अपनी चूत में उंडेलने का संकेत दे ही दिया। उसे अपने ही पति की इजाजत जो मिल गयी थी। कमल को और क्या चाहिए था? अब कमल की चोदने की रफ़्तार तेज हो गयी। उधर रानी भी अपने चरम पर पहुँच रही थी। कमल का फुला हुआ लण्ड उसकी चूत में अजीबो गरीब उत्तेजना और उन्माद पैदा कर रहा था। रानी अपनी उत्तेजना सम्हाल नहीं पा रही थी और न चाहते हुए भी उसके मुंह से कामुक कराहटें निकल ही जाती थीं।

कमल के रफ़्तार बढ़ाने से रानी की उत्तेजना भी बढ़ने लगी। रानी ने कमल की नंगी कमर कस के पकड़ी और बोल पड़ी, "कमल जल्दी करो। मुझे और तेजी से चोदो। अब मैं अपने चरम पर पहुँचने वाली हूँ। जल्दी.... प्लीज... और जोरसे.... मेरी चिंता मत करो। ... आह्हः.... हैश..... ओह.... उफ़...." ऐसे कराहट करती हुई रानी को एक ऐसा अनुभव हुआ जैसे उसके बदन में समंदर की जबरदस्त ऊँचे ऊँचे तक उठती मौंजों की तरह उछाल आया और उसका बदन कभी सिकुड़न तो कभी खिंचाई महसूस करने लगा। उसकी चूत में से भी उसके स्त्री रस की बौछार फुट पड़ी।

 
कमल के रफ़्तार बढ़ाने से रानी की उत्तेजना भी बढ़ने लगी। रानी ने कमल की नंगी कमर कस के पकड़ी और बोल पड़ी, "कमल जल्दी करो। मुझे और तेजी से चोदो। अब मैं अपने चरम पर पहुँचने वाली हूँ। जल्दी.... प्लीज... और जोरसे.... मेरी चिंता मत करो। ... आह्हः.... हैश..... ओह.... उफ़...." ऐसे कराहट करती हुई रानी को एक ऐसा अनुभव हुआ जैसे उसके बदन में समंदर की जबरदस्त ऊँचे ऊँचे तक उठती मौंजों की तरह उछाल आया और उसका बदन कभी सिकुड़न तो कभी खिंचाई महसूस करने लगा। उसकी चूत में से भी उसके स्त्री रस की बौछार फुट पड़ी।

उधर रानी और कमल की अति रोमांचक चुदाई देख कर राज और कुमुद भी उत्तेजना से मचल रहे थे। उन्हें पूरी स्वच्छंदता से जो चाहे करने का जैसे लाइसेंस मिल गया था। और क्या देखना था? राज ने कमल की चूत में अपना लण्ड पूरा घुसेड़ दिया और उसे जोर शोर से कुमुद की चूत में पेलने लगा। राज का लण्ड कुमुद को बड़ा प्यारा लग रहा था। अपने पति कमल के मोटे लण्ड से कुमुद बड़ी त्रस्त थी। कमल कई बार जब जल्दी में होता था तो पूरी तरह अपना लण्ड चिकना किये बिना कुमुद की चूत में डाल देता था और उससे कुमुद की चूत में बड़ा दर्द होता था और उसकी चूत में कई बार खून तक निकल जाता था। आज कुमुद बड़े सुख से राज के लण्ड से चुदवा कर बिना दर्द के आनंद का अनुभव कर रही थी। कुमुद मारे उन्माद के बिस्तर पर मचलने लगी और अपनी गाँड़ बिस्तरे पर रगड़ती हुई कामुकता भरी उन्मादित आवाज से कराह ने लगी।

दोनों जोड़ियां आज वह सुख अनुभव कर रही थी जो उन्हें शादी के इतने सालों के बाद सपना जैसे लग रहा था। दोनों ही पत्नियां सारी शर्मो हया को ताक पर रख दूसरी के पति से बड़े प्यार से और उच्छृंखलता से चुदवा रही थी और अपना जातीय सुख का अद्भुत उन्माद अपनी सहेली को दिखाने के लिए कई बार अपनी सहेली की हाथ दबा कर संकेत दे रही थी। उनमें कोई इर्षा का भाव नहीं रहा था क्यूंकि इस उच्छृंखलता में उसके पति और सहेली भी तो भागीदार थे। उन चारों ने यह सोचा भी नहीं था की ऐसा अद्भुत अनुभव उन्हें मिल सकेगा।

राज और कुमुद अपने चरम पर पहुँच चुके थे। उन्हें यह सोचने की जरुरत नहीं थी की राज अपना वीर्य कुमुद की चूत में डाले या नहीं। कमल भैया ने रानी की चूत में अपना पूरा वीर्य जब उंडेल ही दिया था तो भला राज को पूछने की क्या आवश्यकता? पर फिर भी राज ने कमल भैया के हाथ को पकड़ा और इशारे से पूछा की क्या राज कुमुद की चूत में अपना वीर्य डाले?

तब कमल ने राज को डाँटते हुए कहा, "भाई कहता है मुझे? अरे हमारी दोनों पत्नियां अब हमारी दोनों की साझा हैं। आज हमारा बचपन का सपना साकार हुआ है। अब तुम पूछ कर मुझे अपमानित ना करो। कुमुद और रानी दोनों ही तुम्हारी पत्नियां है और दोनों ही मेरी पत्नियां भी है। तो फिर सोचना क्या? जाने दो अपना सारा माल मेरी बीबी की चूत में और आज कुमुद को भी तुम सच्चे मायने में अपनी पत्नी बना ही लो। अब इन दोनों के जो बच्चे होंगें वह हमारे साँझा होंगे। भले ही नाम एक का ही हो। अब आज से जब भी मौक़ा मिले गए तो हमारा साँझा बिस्तर होगा। रानी और कुमुद हमारी साँझा बीबियाँ होंगी।"

end

 
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