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वीना राज के नीचे लेटी हुई कस्मसाये जा रही थी, और राज नीचे से अपनी कमर को हिला कर तेज़ी से अपने लंड को वीना की चूत के अंदर बाहर किए जा रहा था. और साथ-2 मे वीना की चुचियों को मसले जा रहा था. जब राज का लंड जड तक वीना की चूत के अंदर जाता. तो राज के लंड की जड के पास का हिसा, वीना की जाँघो के जोड़ों के बीच मे ठप-2 की आवाज़ करने लग जाता.
नीचे लेटी वीना अपनी चूत के दीवारों पर राज के लंड के घर्सन को महसूस करके एक बार फिर से गरम हो चुकी थी. और वो भी अपनी जाँघो को पूरा फैला कर लेटी हुई थी. ताकि राज उसकी चूत मे अपना लंड और अंदर तक घुसा सके. राज उसे इस हालत मे 10 मिनट लगतार चोदता रहा. और वीना एक बार फिर से झड़ने के करीब थी.
उसने अपनी टाँगों मोड़ कर राज की कमर पर लपेट लिया. और अपनी बाहों को राज की पीठ पर कस के उससे एक दम चिपक गयी. राज का लंड अब पूरा आसानी से अंदर बाहर हो रहा था.
वीना: अहह ओह बाबू जीई मेरी चूत्त्त फिरररर से पानी छोड़ने वाली है. ओह्ह्ह्ह औरर्र जोर्र्र से चोदो बाबू जीए अहह ओह ओह.
और वीना का बदन अकड़ने लगा. उसने राज को अपनी बाहों मे कस के पकड़ लिया. और वीना की चूत ने पानी छोड़ना चालू कर दिया. जैसे ही वीना का झड़ना बंद हुआ. उसने अपने बदन को ढीला छोड़ दिया. और राज भी कुछ ही पलों मे झड गया. उसने अपने लंड पर चढ़े हुए कॉंडम को अपने वीर्य से भर दिया. दोनो कुछ देर वैसे ही लेटे रहे. राज अब काफ़ी थकान महसूस कर रहा था. इसीलिए वो उलट कर वीना की बगल मे लेट गया. राज की आँख लग गयी.
वीना जो आज काफ़ी देर बाद झड़ी थी. उसका रोम -2 मस्ती के कारण खिल उठा था. उसका दिल कर रहा था. कि राज उठ कर उसे अपने बाहों मे भर कर उसे खूब प्यार करे. उसकी चुचियों को मसले. और उसकी चूत को सहलाए. पर राज तो सो चुका था. वीना ने राज की तरफ देखा. जो सो रहा था. उसका लंड अभी भी आधा तना हुआ था. और कॉंडम मे वाइट कलर का गाढ़ा वीर्य भरा हुआ था.
वीना उठ कर बैठ गयी. और बड़े ध्यान से राज के लंड से कॉंडम को उतार कर एक खाली लिफाफे मे डाल कर बेड के नीचे रख दिया. और फिर वो राज के साथ सट कर लेट गयी. थोड़ी देर बाद वीना को नींद आ गयी. सुबह के 6 बजे राज ने वीना को उठा दिया. और कपड़े पहनने को बोला. राज पहले से ही तैयार हो चुका था. वो रूम से बाहर आकर नीचे आ गया.
नीचे छोटू दातुन कर रहा था. राज ने उसे विशाल के बारे मे पूछा. छोटू ने इशारे से एक कमरे की तरफ इशारा किया. और राज ने रूम के पास जाकर डोर नॉक किया. थोड़ी देर बाद विशाल ने डोर खोला . विशाल के होंठो पर राज को देख कर मुस्कान आ गयी. विशाल ने सिर्फ़ एक टवल लपेटा हुआ था.
राज : विशाल अब मुझे चलना चाहिए.
विशाल: अर्रे यार नाश्ता तो करके जाता.
राज : नही यार. मुझे अभी जाना है.
विशाल: ठीक है. अर्रे ओ छोटू. जा ड्राइवर को बोल बाबू जी को हवेली छोड़ आए. बाबू जी की कार घर पर खड़ी है.
छोटू:जी बाबू जी.
और फिर छोटू ड्राइवर को ले आया. और ड्राइवर ने राज को विशाल के घर छोड़ दिया. राज ने वहाँ से अपनी कार ली. और अपने गाँव की लिए निकल पड़ा. राज 7 बजे हवेली पहुँच गया. हरिया हवेली की सफाई कर रहा था.
राज : (अंदर आते हुए) डॉली कहाँ पर है.
हरिया: बाबू जी बिटिया अभी उठी नही है. सो रही है. मे आपके लिए चाइ बनाऊ.
राज : हां बना लो. मे ज़रा फ्रेश होकर आता हूँ.
और राज अपने रूम मे चला गया. और जब वो फ्रेश होकर बाहर आया. तो डॉली भी उठ कर बाहर आ गयी थी.
डॉली: कल क्या हुआ भैया. जो आप आ नही सके.
राज : सॉरी डॉली वो कल विशाल ने मुझ ज़्यादा पीला दी थी.
डॉली: बॅड हॅबिट भैया. आप आगे से ड्रिंक नही करोगे. अगर करोगे भी तो ज़्यादा से ज़्यादा दो पेग.
राज : अच्छा ठीक है. जैसे तुम कहो.
और फिर दोनो चाइ पीने लगे. उस दिन नाश्ता करने के बाद राज के पास कोई काम नही था. वो दोफर के 12 बजे तक साहिल के साथ खैलते हुए टाइम पास करता रहा. पर जब साहिल सो गया, तो वो बोर होने लगा. वो तो कल ही अपनी सारी ज़मीन देख आया था. इधर रवि भी सुबह से गायब था. राज अपने रूम मे आ गया. वो सोने की कॉसिश करने लगा. पर उसे रात की सारी घटनाएँ याद आने लगी.
ना चाहते हुए भी बार-2 उसका ध्यान रात हुए वाकये पर जा रहा था. राज बेड से उठ कर अपनी अलमारी के पास गया. और अलमारी से वाइन की बॉटल निकाल ली. और एक ग्लास मे एक पेग बना कर पीने लगा. वो अपने रूम मे बंद 1 घंटे मे 3 पेग पी गया था. वाइन के सरूर मे राज का और बुरा हाल हो गया. उसका ध्यान अब और ज़्यादा वीना पर जा रहा था.
कभी उसके मन मे ख़याल आता. कि वो अभी विशाल को फोन करके, वीना को फिर उसकी खेतो के बीच बनी हवेली मे बुलवा ले. पर राज के रुतबे के हिसाब से ये बहुत ही छोटी सी बात थी. इसीलिए वो विशाल को फोन भी नही कर सकता था.
दूसरी तरफ रवि खेतो मे रज़िया के रूम की तरफ बढ़ रहा था. रज़िया के कमरे के सामने जाकर उसने देखा. रज़िया अपने कमरे के सामने झाड़ू लगा रही थी. रवि रज़िया की तरफ चला गया. रवि को देख कर रज़िया के होंठो पर मुस्कान फैल गयी.
रज़िया: आओ बैठो .
रवि बाहर लगी चारपाई पर बैठ गया. रज़िया ने झाड़ू लगाना चालू कर दिया. और थोड़ी देर मे उसने झाड़ू लगा लिया. और फिर अपने हाथ पैर धोने लगी.
रवि: काकी काका कहाँ हैं.
रज़िया: वो पीछे खेतो मे काम कर रहा है.
रवि: और मुन्ना कहाँ हैं.
रज़िया: वो भी अपने पापा के साथ ही है. क्यों कोई काम था अपने काका से (होंठो पर कातिल मुस्कान लाते हुए)
रवि: (रवि रज़िया की मुस्कान के पीछे छुपे राज को समझ गया) नही वो मे वैसे ही पूछ रहा था.
रज़िया: (रवि को चिढ़ाते हुए) जिसके लिए तुम आए हो. वो चीज़ आज तुम्हे नही मिलेगी. तुम्हारे काका घर पर ही हैं.
रज़िया की बात सुन कर रवि के फेस पर उदासी से छा गयी. और वो अपना मुँह लटका कर बैठ गया. रज़िया को रवि की हालत पर बहुत ख़ुसी हो रही थी. कल तक जो लड़का उससे दूर भागता था. आज वही लड़का उसकी चूत की गंध को कुत्ते की तरहा सूँघते हुए उसके पास रोज पहुँच जाता है. ये सब बातें सोच कर रज़िया मन ही मन खुस हो रही थी.
पर रज़िया रवि को उदास करके उसे नाराज़ नही करना चाहती थी. वो मन मे सोचने लगी. बहुत मुस्किल से ये छोरा हाथ मे आया है, कही हाथ से निकल गया तो, मेरी चूत फिर से लंड के लिए तड़प्ती रहगी. ये सोच कर वो अपने कमरे की तरफ जाने लगी.
रज़िया: (कमरे के अंदर जाते हुए) रवि तू एक मिनिट यहीं बैठ . मे अभी आती हूँ.
रज़िया रूम मे आ गयी. और कमरे के अंदर आकर उसने कमरे के पीछे वाली खिड़की खोली. और पीछे के खेतो मे झाँकने लगी. पीछे उसका पति काफ़ी दूरी पर काम कर रहा था. और उसका बेटा भी खेत मे ही बैठा हुआ था. ये देख कर वो कमरे के दरवाजे के पास आई, और रवि को आवाज़ देकर अंदर आने को कहा.
रवि चारपाई से खड़ा हुआ. और इधर-उधर देख कर कमरे की तरफ आने लगा. जैसे ही रवि कमरे मे आया. रज़िया ने कमरे के दरवाजे को भिड़ा दिया. और कुण्डी नही लगाई.