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सियासत और साजिश complete

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वीना राज के नीचे लेटी हुई कस्मसाये जा रही थी, और राज नीचे से अपनी कमर को हिला कर तेज़ी से अपने लंड को वीना की चूत के अंदर बाहर किए जा रहा था. और साथ-2 मे वीना की चुचियों को मसले जा रहा था. जब राज का लंड जड तक वीना की चूत के अंदर जाता. तो राज के लंड की जड के पास का हिसा, वीना की जाँघो के जोड़ों के बीच मे ठप-2 की आवाज़ करने लग जाता.

नीचे लेटी वीना अपनी चूत के दीवारों पर राज के लंड के घर्सन को महसूस करके एक बार फिर से गरम हो चुकी थी. और वो भी अपनी जाँघो को पूरा फैला कर लेटी हुई थी. ताकि राज उसकी चूत मे अपना लंड और अंदर तक घुसा सके. राज उसे इस हालत मे 10 मिनट लगतार चोदता रहा. और वीना एक बार फिर से झड़ने के करीब थी.

उसने अपनी टाँगों मोड़ कर राज की कमर पर लपेट लिया. और अपनी बाहों को राज की पीठ पर कस के उससे एक दम चिपक गयी. राज का लंड अब पूरा आसानी से अंदर बाहर हो रहा था.

वीना: अहह ओह बाबू जीई मेरी चूत्त्त फिरररर से पानी छोड़ने वाली है. ओह्ह्ह्ह औरर्र जोर्र्र से चोदो बाबू जीए अहह ओह ओह.

और वीना का बदन अकड़ने लगा. उसने राज को अपनी बाहों मे कस के पकड़ लिया. और वीना की चूत ने पानी छोड़ना चालू कर दिया. जैसे ही वीना का झड़ना बंद हुआ. उसने अपने बदन को ढीला छोड़ दिया. और राज भी कुछ ही पलों मे झड गया. उसने अपने लंड पर चढ़े हुए कॉंडम को अपने वीर्य से भर दिया. दोनो कुछ देर वैसे ही लेटे रहे. राज अब काफ़ी थकान महसूस कर रहा था. इसीलिए वो उलट कर वीना की बगल मे लेट गया. राज की आँख लग गयी.

वीना जो आज काफ़ी देर बाद झड़ी थी. उसका रोम -2 मस्ती के कारण खिल उठा था. उसका दिल कर रहा था. कि राज उठ कर उसे अपने बाहों मे भर कर उसे खूब प्यार करे. उसकी चुचियों को मसले. और उसकी चूत को सहलाए. पर राज तो सो चुका था. वीना ने राज की तरफ देखा. जो सो रहा था. उसका लंड अभी भी आधा तना हुआ था. और कॉंडम मे वाइट कलर का गाढ़ा वीर्य भरा हुआ था.

वीना उठ कर बैठ गयी. और बड़े ध्यान से राज के लंड से कॉंडम को उतार कर एक खाली लिफाफे मे डाल कर बेड के नीचे रख दिया. और फिर वो राज के साथ सट कर लेट गयी. थोड़ी देर बाद वीना को नींद आ गयी. सुबह के 6 बजे राज ने वीना को उठा दिया. और कपड़े पहनने को बोला. राज पहले से ही तैयार हो चुका था. वो रूम से बाहर आकर नीचे आ गया.

नीचे छोटू दातुन कर रहा था. राज ने उसे विशाल के बारे मे पूछा. छोटू ने इशारे से एक कमरे की तरफ इशारा किया. और राज ने रूम के पास जाकर डोर नॉक किया. थोड़ी देर बाद विशाल ने डोर खोला . विशाल के होंठो पर राज को देख कर मुस्कान आ गयी. विशाल ने सिर्फ़ एक टवल लपेटा हुआ था.

राज : विशाल अब मुझे चलना चाहिए.

विशाल: अर्रे यार नाश्ता तो करके जाता.

राज : नही यार. मुझे अभी जाना है.

विशाल: ठीक है. अर्रे ओ छोटू. जा ड्राइवर को बोल बाबू जी को हवेली छोड़ आए. बाबू जी की कार घर पर खड़ी है.

छोटू:जी बाबू जी.

और फिर छोटू ड्राइवर को ले आया. और ड्राइवर ने राज को विशाल के घर छोड़ दिया. राज ने वहाँ से अपनी कार ली. और अपने गाँव की लिए निकल पड़ा. राज 7 बजे हवेली पहुँच गया. हरिया हवेली की सफाई कर रहा था.

राज : (अंदर आते हुए) डॉली कहाँ पर है.

हरिया: बाबू जी बिटिया अभी उठी नही है. सो रही है. मे आपके लिए चाइ बनाऊ.

राज : हां बना लो. मे ज़रा फ्रेश होकर आता हूँ.

और राज अपने रूम मे चला गया. और जब वो फ्रेश होकर बाहर आया. तो डॉली भी उठ कर बाहर आ गयी थी.

डॉली: कल क्या हुआ भैया. जो आप आ नही सके.

राज : सॉरी डॉली वो कल विशाल ने मुझ ज़्यादा पीला दी थी.

डॉली: बॅड हॅबिट भैया. आप आगे से ड्रिंक नही करोगे. अगर करोगे भी तो ज़्यादा से ज़्यादा दो पेग.

राज : अच्छा ठीक है. जैसे तुम कहो.

और फिर दोनो चाइ पीने लगे. उस दिन नाश्ता करने के बाद राज के पास कोई काम नही था. वो दोफर के 12 बजे तक साहिल के साथ खैलते हुए टाइम पास करता रहा. पर जब साहिल सो गया, तो वो बोर होने लगा. वो तो कल ही अपनी सारी ज़मीन देख आया था. इधर रवि भी सुबह से गायब था. राज अपने रूम मे आ गया. वो सोने की कॉसिश करने लगा. पर उसे रात की सारी घटनाएँ याद आने लगी.

ना चाहते हुए भी बार-2 उसका ध्यान रात हुए वाकये पर जा रहा था. राज बेड से उठ कर अपनी अलमारी के पास गया. और अलमारी से वाइन की बॉटल निकाल ली. और एक ग्लास मे एक पेग बना कर पीने लगा. वो अपने रूम मे बंद 1 घंटे मे 3 पेग पी गया था. वाइन के सरूर मे राज का और बुरा हाल हो गया. उसका ध्यान अब और ज़्यादा वीना पर जा रहा था.

कभी उसके मन मे ख़याल आता. कि वो अभी विशाल को फोन करके, वीना को फिर उसकी खेतो के बीच बनी हवेली मे बुलवा ले. पर राज के रुतबे के हिसाब से ये बहुत ही छोटी सी बात थी. इसीलिए वो विशाल को फोन भी नही कर सकता था.

दूसरी तरफ रवि खेतो मे रज़िया के रूम की तरफ बढ़ रहा था. रज़िया के कमरे के सामने जाकर उसने देखा. रज़िया अपने कमरे के सामने झाड़ू लगा रही थी. रवि रज़िया की तरफ चला गया. रवि को देख कर रज़िया के होंठो पर मुस्कान फैल गयी.

रज़िया: आओ बैठो .

रवि बाहर लगी चारपाई पर बैठ गया. रज़िया ने झाड़ू लगाना चालू कर दिया. और थोड़ी देर मे उसने झाड़ू लगा लिया. और फिर अपने हाथ पैर धोने लगी.

रवि: काकी काका कहाँ हैं.

रज़िया: वो पीछे खेतो मे काम कर रहा है.

रवि: और मुन्ना कहाँ हैं.

रज़िया: वो भी अपने पापा के साथ ही है. क्यों कोई काम था अपने काका से (होंठो पर कातिल मुस्कान लाते हुए)

रवि: (रवि रज़िया की मुस्कान के पीछे छुपे राज को समझ गया) नही वो मे वैसे ही पूछ रहा था.

रज़िया: (रवि को चिढ़ाते हुए) जिसके लिए तुम आए हो. वो चीज़ आज तुम्हे नही मिलेगी. तुम्हारे काका घर पर ही हैं.

रज़िया की बात सुन कर रवि के फेस पर उदासी से छा गयी. और वो अपना मुँह लटका कर बैठ गया. रज़िया को रवि की हालत पर बहुत ख़ुसी हो रही थी. कल तक जो लड़का उससे दूर भागता था. आज वही लड़का उसकी चूत की गंध को कुत्ते की तरहा सूँघते हुए उसके पास रोज पहुँच जाता है. ये सब बातें सोच कर रज़िया मन ही मन खुस हो रही थी.

पर रज़िया रवि को उदास करके उसे नाराज़ नही करना चाहती थी. वो मन मे सोचने लगी. बहुत मुस्किल से ये छोरा हाथ मे आया है, कही हाथ से निकल गया तो, मेरी चूत फिर से लंड के लिए तड़प्ती रहगी. ये सोच कर वो अपने कमरे की तरफ जाने लगी.

रज़िया: (कमरे के अंदर जाते हुए) रवि तू एक मिनिट यहीं बैठ . मे अभी आती हूँ.

रज़िया रूम मे आ गयी. और कमरे के अंदर आकर उसने कमरे के पीछे वाली खिड़की खोली. और पीछे के खेतो मे झाँकने लगी. पीछे उसका पति काफ़ी दूरी पर काम कर रहा था. और उसका बेटा भी खेत मे ही बैठा हुआ था. ये देख कर वो कमरे के दरवाजे के पास आई, और रवि को आवाज़ देकर अंदर आने को कहा.

रवि चारपाई से खड़ा हुआ. और इधर-उधर देख कर कमरे की तरफ आने लगा. जैसे ही रवि कमरे मे आया. रज़िया ने कमरे के दरवाजे को भिड़ा दिया. और कुण्डी नही लगाई.

 
रज़िया: (काँपती हुई आवाज़ मे) अहह बेटा हो गया तेरा भी.

रवि: (हन्फते हुए) नही काकी अभी नही हुआ.

रज़िया: ओह मेरा तो हो गया बेटा अब जल्दी कर. कितना टाइम लगेगा. बेटा हमारे पास ज़्यादा टाइम नही है.

रवि ने लंड को अपने हाथ मे पकड़ा. जो रज़िया के कामरस से पूरा भीगा हुआ था. रवि का ध्यान बाहर खेतो की तरफ था. जैसे ही उसने अपने लंड को पकड़ा. तो उसका हाथ रज़िया की छूट के काम रस से भीग गया. जो उसे चिपचिपा सा लगा. टाइम पहले से ही कम था. उसने अपने हाथ को रज़िया के चुतड़ों पर रगड़ कर सॉफ करना चालू कर दिया.

रज़िया: क्या कर रहा है रवि. जल्दी कर ना.

रवि: हां काकी.

रवि ने बाहर की तरफ देखते हुए. अपने लंड को रज़िया की चूत के छेद पर लगाने की कॉसिश करने लगा. पर रवि का ध्यान बाहर के तरफ था.

रज़िया: जल्दी कर ना. क्या कर रहा है.

और रवि अपने लंड के सुपाडे से रज़िया की चूत के छेद को टटोल रहा था. अचानक से ही उसके लंड का सुपाडा रज़िया की गान्ड के छेद पर जा लगा. जैसे ही रज़िया को रवि के लंड का गरम सुपाडा अपनी गान्ड के छेड़ पर महसूस हुआ. उसने अपनी आँखे खोली. और वो बोलने ही वाली थी, कि रवि ने पूरी ताक़त के साथ अपने लंड को आगे की तरफ पेल दिया.

रवि के लंड का सुपाडा रज़िया की एक दम टाइट गान्ड के छेद को फैलाता हुआ अंदर घुस्स गया. रज़िया दर्द के मारे चिल्ला उठी.

रज़िया: ओह मार डाला रीए सलीई दिखाई नही देता कहाँ घुस्स्स्सा रहा है. ओह्ह्ह फाड़ दी मेरी गान्ड ओह निकाल जल्दी उईमाआ मर गाईए रीई.

रज़िया के ये सब बोलने से पहले रवि अपने कमर को एक बार और हिला चुका था. उसका लंड का तीसरा हिस्सा रज़िया की गान्ड के छेद को फाड़ता हुआ अंदर घुस्स गया था. जब रवि ने नीचे देखा. तो उसे पता चला कि, उसका लंड रज़िया की चूत मे नही, बल्कि उसकी गान्ड के छेद मे फँसा हुआ है. और रज़िया दर्द के मारे तिलमिला रही थी.

रज़िया: (दर्द से तिलमिलाते हुए) अबे भोसड़ी क्ीई रनडिीईई की औलद्दड़ आईसीए क्या देख रहा है मेरी गान्ड फाड़ कर चल जल्दी से निकाल बाहर.

रवि: (गुस्से से) लो निकाल लेता हू. पर आज के बाद मे तुम्हारे पास नही आउन्गा.तूने मुझ रंडी की औलाद बुलाया है ना.

रज़िया: (रवि को नाराज़ होते देख) नही मेरी जान देख ना तुनें मेरी गान्ड का क्या हाल कर दिया है. अब जल्दी से निकाल ले.

रवि: मुझ कुछ नही सुनना. मे अब यहाँ नही आउन्गा.

रज़िया: अच्छा-2 मेरे लाल मुझ माफ़ कर दे. चाहे तो मेरी गान्ड फाड़ ले. पर मुझसे नाराज़ ना होना. मेरी चूत तेरे लंड की याद मे सुख जाएगी रे.

रवि: (रवि अपने लंड को रज़िया की एक दम टाइट गान्ड के छेद मे महसूस करके बहुत मज़ा आ रहा था, और रज़िया अब उससे अपनी गान्ड मरवाने को भी तैयार थी) पक्का मे तुम्हारी गान्ड चोद सकता हूँ ना.

रज़िया: हां बेटा पर धीरे-2 करना. तेरी काकी की गान्ड अभी तक बिल्कुल कुँवारी है.

रवि: (उसने जब देखा रज़िया उसके लंड को पाने के लिए कुछ भी कर सकती है तो उसने एक और शर्त रख दी) नही मे जैसे मर्ज़ी चोदु. तुम कुछ नही कहोगी.

रज़िया के सामने अब कोई चारा नही था.

रज़िया: (खिजते हुए) अच्छा जो करना है, जल्दी कर ले.

रवि ने एक गहरी साँस ली. और अपने हाथों से रज़िया के चुतड़ों को पकड़ कर दोनो तरफ फैला दिया. रज़िया अपनी साँसें थामें हुए अपने होंठो को अपने दाँतों मे भिंचे हुए. रवि के लंड के प्रहार को अपनी गान्ड के कुंवारे छेद मे सहने की तैयारी किए हुए थी. रज़िया की गान्ड के छेद की दीवारें रवि के लंड को कस के भिंचे हुए थी. रवि ने अपनी पूरी ताक़त लगा कर अपने लंड को अंदर की ओर धकेला.

और रज़िया के मुँह से घुटि हुई दर्द भरी चीख निकल गयी.

रज़िया: ओंह अहह धीरीईए राजा एयेए धीरीए तुम्हाइन अपनी काकी ओह्ह्ह पर ज़रा भी तरस नही आ रहा.

रवि: तो फिर मुझ गाली क्यों दी.

रज़िया: मुझसे ग़लती हो गयी. तू मुझ चाहे अपनी रांड़ बुला ले. और मैं सच मे तुम्हारी रंडी बनाने को भी तैयार हूँ. पर तू मुझसे नाराज़ ना होना.

रवि ने कुछ बोले बिना ही धीरे-2 अपने लंड को रज़िया की टाइट गान्ड के अंदर बाहर करना चालू कर दिया. रज़िया अभी भी दर्द से मरी जा रही थी. रज़िया की गान्ड बहुत टाइट थी. जिसके कारण रवि के लंड के सुपाडे पर बहुत ज़्यादा घर्सन हो रहा था. और वो कुछ ही धक्कों मे रज़िया की गान्ड मे अपना लावा उगलने लगा.

जैसे ही रवि के लंड से वीर्य की गरम पिचकारी छूटी. रज़िया की गान्ड के छेद की दीवारों को राहत मिली. उसे अपनी गान्ड की दीवारों पर रवि के गरम वीर्य का बहना बहुत सुखुद अहसास दे रहा था. जैसे उसकी गान्ड की छिली हुई दीवारों पर किसी ने गरम -2 लेप लगा दिया हो.

रवि ने अपने लंड बाहर निकाल लिया. और उसने नीचे गिरे कपड़े से सॉफ किया. रज़िया के माथे पर पसीना बह रहा था. रज़िया की गान्ड का छेद ठीक से सिकुड कर बंद भी नही हो रहा था. उसे अपनी गान्ड के छेद मे तेज टीस महसूस हो रही थी. वो मुस्किल से सीधी हुई. और अपने लहँगे को ठीक किया. और फिर रवि जो कि अपनी निक्कर ऊपर कर चुका था. उसके होंठो को चूमते हुए बोली.

रज़िया: अब तो खुश हो ना.

रवि: हां काकी. पर आगे से मुझ गाली नही देना.

रज़िया: ठीक है मेरे मुन्ना नही दूँगी. अब जल्दी से बाहर जा कहीं तेरे काका इधर ना आ जाएँ.

रवि ने आगे बढ़ कर रज़िया को अपनी बाहों मे भर लिया. और उसके होंठो पर अपने होंठो को रख कर चूसने लगा. रज़िया ने भी अपनी बाहों को रवि के पीठ पर कस लिया. और अपने होंठो को ढीला छोड़ कर रवि से चुसवाने लगी.

कुछ देर रज़िया के होंठो को चूसने के बाद रवि बाहर निकल गया. और हवेली की तरफ चल पड़ा. जब वो हवेली पहुँचा . तो राज अपने रूम से निकल कर हाल मे सोफे की तरफ आ रहा था. राज का दिल और दिमाग़ मे भी अब चूत ही घूम रही थी. पर राज चाह कर भी कुछ नही कर सकता था. चाहे राज के पास बेइंतहा दौलत थी. पर राज शुरू से ही ऐसे कामों से दूर रहा था. पर कल रात वीना ने उसके अंदर सोए हुए वासना के कीड़े को जगा दिया था.

और वाइन का नशा भी राज के सर पर चढ़ कर बोल रहा था. राज शुरू से ही चिकेन खाने का बहुत सकुन था. जब उसने रवि को देखा, तो उसे रवि को अपने पास बुला लिया. उधर किचिन से हरिया भी बाहर आ गया था.

राज : रवि यहाँ कहीं चिकन मिलेगा.

हरिया: बाबू जी उसके लिए तो शहर जाना पड़ेगा.

रवि: हां बाबू जी यहाँ तो शहर से मिलेगा. या फिर एप्रा गाँव से.

 
एप्रा गाँव का नाम सुनते ही राज की आँखों के सामने वीना की छबि उभर आई. और साथ मे उसे निर्मला का भी ख़याल आ गया. राज का दिल अब निर्मला के लिए धड़कने लगा. राज जानता था, कि निर्मला आसानी से उसकी बात मान जाएगी. पर उसके पति मुरली का वो क्या करेगा. राज ने टाइम देखा. 2 बज रहे थे.

राज : ठीक है, मैं एप्रा गाँव से चिकेन ले आता हूँ.

रवि: बाबू जी मे साथ मे चलूं

राज : नही रहने दो. मे चला जाउन्गा.

और राज उठ कर बाहर आकर अपनी कार मे बैठा , और कार को हवेली से निकाल कर एप्रा गाँव की ओर बढ़ा दिया. राज आधे घंटे मे ही एप्रा गाँव पहुँच गया. उसने वहाँ पहुँच कर अपनी कार को निर्मला के कमरे के सामने खड़ी कर दिया. मुरली जो कि एक आम के पेड के नीचे चारपाई पर लेटा हुआ था. कार की आवाज़ सुन कर एक दम से खड़ा हो गया. और भागता हुआ कार के पास गया.

राज कार से निकला तो मुरली ने उसे झुक कर सलाम किया.

मुरली: आइए बाबू जी. अचानक से कैसे आना हुआ.

राज : मुरली यहाँ चिकेन कहाँ मिलेगा.

राज की बात सुन कर मुरली सोच मे पड़ गया. और फिर कुछ देर सोचने के बाद बोला. बाबू जी पहले तो यहाँ एक बड़ा सा फारम था. जो कुछ दिनो पहले बंद हुआ है. पर हां साथ वाले गाँव से मिल जाएगा. यहीं पास मे ही है. कहें तो मे ला देता हूँ.

बाहर आवाज़ सुन कर निर्मला भी बाहर आ गयी. और राज की तरफ देखते हुए कामुक मुस्कान अपने होंठो पर ले आई.

राज : तुम्हे कितना टाइम लगे गा.

मुरली: बाबू जी 30-40 मिनिट तो लग ही जाएँगे.

राज : (अपनी जेब से पैसे निकाल कर मुरली को देते हुए) जाओ ले आओ.

मुरली: बाबू जी आप अंदर बैठिए. मैं जाकर ले आता हूँ. (अपनी पत्नी को) अर्रे जा बाबू जी को अंदर बैठा कर पानी पिला. मैं बाबू जी के लिए चिकेन लेकर आता हूँ.

और मुरली अपना कुर्ता जो कि उसने चारपाई पर रखा हुआ था. उठा कर पहन कर जाने लगा. राज ने निर्मला की ओर देखा.

निर्मला: (होंठो पर कातिल से मुस्कान लाते हुए) आइए बाबू जी.

राज कमरे की तरफ बढ़ने लगा. कमरे की ओर जाते हुए, वो दरवाजे पर खड़ी निर्मला की ओर देख रहा था. निर्मला ने येल्लो कलर की साड़ी पहनी हुई थी. राज कमरे मे आ गया. अंदर आते ही निर्मला ने राज को चारपाई पर बैठने के लिए कहा. राज चारपाई पर बैठ गया. निर्मला राज के लिए पानी ले आई. और पानी का ग्लास उसकी तरफ बढ़ा दिया.

राज ने उसकी तरफ देखते हुए पानी का ग्लास लिया, और पीने लगा. जब राज ने खाली ग्लास निर्मला को वापिस पकड़ा दिया. तो राज के हाथ निर्मला के हाथ को छू गये. निर्मला राज की ओर देखते हुए मुस्कुराने लगी. निर्मला ने ग्लास को वापिस रखा.

निर्मला: (होंठो पर कातिल मुस्कान लाते हुए) बाबू जी आपके लिए चाइ बनाऊ.

राज : (थोड़ा नर्वस फील कर रहा था. वो सोच रहा था, कि वो शुरुआत कहाँ से करे) नही चाइ रहने दो.

निर्मला राज के पास आई, और चारपाई के सामने एक चौकी पर बैठ गयी. निर्मला की साड़ी का पल्लू उसके कंधे से थोड़ा सा नीचे सरका हुआ था. और ब्लाउस के ऊपेर का हुक खुला था. राज की नज़रें सीधे वहीं चली गयी.

निर्मला: (राज को अपनी चुचियों की ओर घूरता देख कर) तो बाबू जी आप की क्या सेवा करूँ. बोलिए ना ? आप कॉन सा रोज-2 इधर आते हो.

राज ने अपने मन मे सोच लिया, अब जो होगा देखा जाएगा. अब वो सीधे -2 अपने इरादे जाहिर कर देना चाहता था. राज ने निर्मला की आँखों मे देखते हुए, उसके एक हाथ को पकड़ लिया. और अपने दूसरे हाथ से अपने पेंट की ज़िप्प खोल कर अपने लंड को बाहर निकाल लिया. निर्मला का दिल राज के मोटे 8 इंच के लंड को देख कर जोरों से धड़कने लगा.

फिर राज ने निर्मला की वासना से भरी हुई आँखों की ओर देखते हुए, निर्मला के हाथ को अपने हाथ से पकड़े हुए, अपने लंड पर रख दिया. निर्मला राज की ओर देखने लगी. जैसे वो पूछ रही हो, कि आख़िर वो चाहते क्या हैं. निर्मला की चूत राज के लंड को अपने हाथ मे लिए उसकी मोटाई को महसूस करके गीली हो रही थी.

निर्मला ने एक बार राज की आँखों मे देखा, और फिर राज के लंड को अपनी हथेली मे कस लिया. निर्मला के नरम हाथ अपने लंड पर महसूस करते ही. राज के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी. राज ने निर्मला के हाथ को छोड़ दिया, और निर्मला के सर के पीछे ले जाकर उसे अपने लंड पर झुकाने लगा. निर्मला को समझते देर नही लगी, कि राज क्या चाहता हैं.

निर्मला ने अपने गुलाबी होंठो को खोल कर उसे राज के लंड के सुपाडे पर कस लिया. और अपने होंठो को लंड के सुपाडे पर कस के रगड़ते हुए राज के लंड को चूसने लगी. निर्मला ने धीरे-2 राज के लंड को आधा मुँह मे ले लिया. और अपने हाथ को राज के लंड से हटा कर, अपने दोनो हाथों से अपने ब्लाउस के हुक्स खोलने लगी.

राज चारपाई पर बैठा , निर्मला को ब्लाउस के हुक्स खोलते हुए देख रहा था. निर्मला की बड़ी-2 चुचियाँ ब्लाउस के हुक्स खुलते ही बाहर आ गयी. राज का लंड निर्मला के ब्राउन कलर के निपल्स को देख कर और तन गया.

निर्मला राज के लंड को आधे से ज़्यादा मुँह मे भर कर चूस रही थी. राज ने निर्मला को उसके कंधों से पकड़ कर खड़ा कर दिया. और उसे चारपाई पर बैठे -2 अपनी ओर खैंच लिया. निर्मला राज की बाहों मे समा गयी.

निर्मला: (कामुक मुस्कान अपने होंठो पर लिए हुए) जाओ बाबू जी. उस दिन तो आप मेरी तरफ देख भी नही रहे थे. आज क्या हो गया.

राज ने निर्मला की बात का जवाब नही दिया. निर्मला की चुचियाँ राज की आँखों के सामने थी. और उसके तने और कड़े निपल देख-2 कर राज का लंड झटके खा रहा था. राज ने निर्मला के चुतड़ों को अपने हाथों मे कस के पकड़ लिया, और ज़ोर-2 से मसलना चालू कर दिया.

निर्मला: (काँपती हुई आवाज़ मे) अहह बाबू जीए आराम सीई ओह्ह्ह्ह धीरे-2 करो ना. ओह सीईईईईई

राज निर्मला के चुतड़ों को उसकी साड़ी के ऊपेर से मसल रहा था. निर्मला ने मस्ती मे आकर अपनी आँखों को बंद कर लिया. उसके होंठो थरथरा रहे थे. उसकी चुचियों के निपल कामवासना के कारण एक दम तन चुके त. जो राज को ललचा रही थी. राज ने निर्मला के चुतड़ों को मसलते हुए. निर्मला के निपल पर अपनी जीभ को घुमाना शुरू कर दिया.

राज की जीभ से अपने निपल को कुरदेन पर निर्मला एक दम कसमसा उठी, उसके बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी.

निर्मला: उम्ह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह हां बाबू जीई ईसीईई पूरा मुँह मे ले लो. ओह्ह्ह्ह आप सच मे बहुत अच्छे से चूस्ते हो.

 


निर्मला की बात सुनते ही, राज ने निर्मला की चुचि को मुँह मे भर लिया. और ज़ोर -2 से उसके निपल को चूसने लगा. निर्मला ने अपने हाथों से राज के बालों को तेज़ी से सहलाना चालू कर दिया. निर्मला मस्त हो कर राज से लिपिटी जा रही थी. राज भी जोश मे आकर उसके चुतड़ों को ज़ोर-2 से मसलने लगा.

निर्मला: (राज के मुँह से अपना निपल्स खैंचते हुए, और दूसरी चुचि को राज के होंठो की तरफ बढ़ाते हुए) उम्ह्ह्ह्ह्ह बाबू जी इसने क्या पाप किया है. इसे भी तो प्यार करो ना.

राज ने निर्मला की वासना से भरी आँखों की ओर देखा. निर्मला होंठो पर कामुक मुस्कान लिए हुए मुस्कुरा रही थी. राज ने निर्मला की दूसरी चुचि को मुँह मे भर लिया. और उसने निर्मला के निपल पर अपने दाँतों से हल्के- 2 काटना चालू कर दिया.

निर्मला: अहह बाबू जीई ओह हां काट लो जी भर के चूसो इन्हे ओह बहुत मज़ा आ रहा है बाबू जी ओह्ह्ह्ह ओह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.

राज खड़ा हो गया. और उसने अपनी पेंट के पॉकेट से एक कॉंडम निकाला. और उसकी पॅकिंग को खोलने लगा. निर्मला ने राज के हाथ से कॉंडम ले लिया, और उसे एक तरफ फैंक दिया. और फिर राज के लंड को पकड़ कर तेज़ी से हिलाने लगी.

निर्मला: ओह्ह्ह्ह बाबू जी क्यों इसे लगा कर मज़ा खराब कर रहे हो. इसकी कोई ज़रूरत नही है. पूरा एक साल हो गया. मेरी चूत मे लंड घुसे हुए. और आज जब आपका मोटा लंड मेरी चूत के सूखे को ख़तम करने वाला है. तो इस पर कॉंडम क्यों चढ़ा रहे हो. बाबू जी आप मेरी चूत को अपने पानी से भर दो. मेरी चूत बहुत प्यासी है.

राज निर्मला की तरफ सावलिया अंदाज़ मे देखने लगा. निर्मला राज के दिल की बात समझ गयी.

निर्मला: बाबू जी मे सच कह रही हूँ. मुझ भी अपनी जान प्यारी है. ओह्ह बाबू जी अब जल्दी करो.

और निर्मला ने राज को चारपाई पर बैठा दिया. और राज की पेंट को खोल कर, राज के अंडरवेर को पेंट के साथ उसके घुटनो तक सरका दिया. फिर वो तेज़ी से दरवाजे की तरफ गयी. और बाहर झाँकने लगी. चारो तरफ कड़ी धूप थी. और दूर-2 तक कोई नज़र नही आ रहा था.

निर्मला ने दरवाजे को भिड़ा दिया, और चारपाई की तरफ आते हुए, अपनी साड़ी और पेटिकॉट को दोनो हाथों से पकड़ कर ऊपेर की ओर उठने लगी. जब तक वो चारपाई के पास पहुँची , तब तक वो अपनी साड़ी को अपनी कमर से ऊपेर उठा चुकी थी, निर्मला ने एक दिन पहले ही, अपनी चूत के बालों को सॉफ किया था. उसकी चूत एक दम चिकनी लग रही थी.

राज का लंड निर्मल की चिकनी फूली हुई चूत देख कर और तन गया. निर्मला की गोरी-2 जांघे और चूत देख कर राज का दिल जोरों से धड़कने लगा. जैसे ही निर्मला राज के पास आकर खड़ी हुई, राज ने अपने हाथों से निर्मला की जाँघो को सहलाना चालू कर दिया. निर्मला एक दम से मचल उठी. और वो अपने होंठो को अपने दाँतों से हल्के-2 काटने लगी.

राज अपने दोनो हाथों से निर्मला की जाँघो को सहलाता हुआ, धीरे उसकी चूत की तरफ अपने हाथों को बढाने लगा. और जैसे-2 राज के हाथ उसकी चूत की तरफ बढ़ रहे थे. निर्मला का बदन मस्ती मे कांपे जा रहा था. और उसकी जांघे फैली जा रही थी.

निर्मला: (वासना से भरी काँपती आवाज़ मे) आहह बाबू जी ओह्ह इसे प्यार से सहलाइए. ओह्ह्ह्ह पूरा एक साल हो गया. मेरी चूत किसी मर्द के हाथों के सपर्श के लिए तरस गयी थी. ओह हाआँ बाबू जी मेरी चूत को अपनी मुट्ठी मे भर के मींज दो. ओह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईईईईईईईईईईई

निर्मला का पूरा बदन कांप रहा था. राज अपने एक हाथ से निर्मला की चूत की फांकों के बीच की दरार मे अपनी उंगली रगड़ रहा था. और निर्मला की कमर मस्ती मे आकर झटके खा रही थी.

निर्मला: उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईईईई अहह बाबू जी बससस्स और्र्रर बर्दास्त नही हो रहा. आप जल्दी से लेट जाईए. ओह्ह्ह्ह्ह.

राज चारपाई पर अपने पैरो को नीचे लटका कर लेट गया. राज की कमर के ऊपेर का हिस्सा चारपाई पर था, और पैर चारपाई के नीचे लटक रहे थे. राज के लंड का सुपाडा चूत को सलामी दे रहा था. जिसे निर्मला अपनी हसरत भरी निगाहों से देख रही थी.

निर्मला ने अपनी साड़ी और पेटिकॉट को अपनी कमर मे थामें हुए, राज के दोनो ओर अपनी टाँगों को फैला कर चारपाई के किनारे पर पैरो के बल बैठ गयी. और उसने अपनी साड़ी को अपने हाथों से छोड़ दिया. जैसे ही निर्मला पैरों को राज की कमर के दोनो तरफ करके बैठी . राज के लंड का सुपाडा, निर्मला की चूत की फांको पर रगड़ खाने लगा. और निर्मला के मुँह से मस्ती से भरी हुई आह निकल गयी.

निर्मला ने अपना एक हाथ राज की चौड़ी छाती पर रखा, और दूसरे हाथ से राज का लंड पकड़ कर लंड के सुपाडे का जायज़ा लेने लगी. निर्मला की साड़ी खिसक कर नीचे आ गयी थी. जिससे राज को उसकी चूत दिखाई देनी बंद हो गयी. राज ने झट से अपने हाथों को निर्मला के चुतड़ों के पीछे ले जाकर, उसकी साड़ी को ऊपेर कर दिया. और उसके भारी मोटे-2 चुतड़ों पर अपने हाथ फेरने लगा.

राज के निर्मला के चुतड़ों को सहलाने के कारण निर्मला मस्ती से सरोबार हो गयी. उसने अपने आँखे बंद कर ली. और अपने हाथ से लंड को पकड़े हुए, लंड के सुपाडे को अपनी चूत के छेद पर लगा लिया. लंड का गरम सुपाडा जैसे ही निर्मला को अपनी चूत के छेद पर महसूस हुआ, निर्मला की चूत की दीवारों मे सरसराहट होने लगी. उसने अपने होंठो को अपने दाँतों मे भींच लिया. और अपनी चूत के छेद को लंड के सुपाडे पर दबाने लगी.

राज के लंड का सुपाडा, निर्मला की चूत के संकरे छेद को फैलाता हुआ अंदर घुसाने लगा. चूत की फांके खुल कर फैल गयी. और जैसे ही लंड का सुपाडा चूत के छेद के अंदर गया. चूत की फांकों ने लंड के सुपाडे को चारो तरफ से कस लिया. निर्मला अपने चूत की दीवारों को सुपाडे पर कसे हुए महसूस कर रही थी. उसकी चूत मे कुलबुलाहट होने लगी.

उसने अपनी वासना से भरी नसीली आँखों को खोल कर राज की तरफ देखा. जो उसकी चुचियों की तरफ देखते हुए, उसके चुतड़ों को अपनी हथेलियों मे भर-2 कर मसल रहा था.

निर्मला: बाबू जी ओह्ह्ह्ह आप का तो बहुत मोटा है. देखो ना मेरी चूत के छेद मे ही फँस गया है. आगे नही जा रहा. अब आप ही कुछ करो ना.

राज : करता हूँ. तैयार रहना.

निर्मला: बाबू जी मे तो उस दिन से ही आपके लंड को अपनी चूत मे लेने के लिए तैयार थी. पर आप ने ही मुझ से मुँह मोड़ लिया.

राज ने निर्मला के चुतड़ों को अपने हाथों मे कस के दबोच लिया. और ऊपेर की तरफ अपनी कमर को उछाल दिया. लंड का सुपाडा चूत की सन्करि दीवारों को फैलाता हुआ, अंदर घुसने लगा. निर्मला अपनी चूत की दीवारों पर राज के मोटे लंड को महसूस कर मचल उठी. और उसके मुँह से मस्ती भरी सिसकारियाँ छूटने लगी.

निर्मला: उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अहहहह बाबू जी पेल दो जड तक अंदर डाल दो अपने लंड को अहह देखो ना मेरी चूत कैसी अपने प्यार का रस बहा रही है.

राज निर्मला की गरम बातों को सुन कर और जोश मे आ गया. और निर्मला के चुतड़ों को थामें हुए. तेज़ी से अपनी कमर को ऊपेर की ओर उछाल कर अपने लंड को निर्मला की टाइट चूत के अंदर बाहर करता हुआ, चोदने लगा.

कुछ ही पलों मे राज का लंड निर्मला की चूत मे पूरा का पूरा अंदर बाहर होने लगा. और राज के लंड का सुपाडा, बार-2 निर्मला की बच्चेदानी के मुँह पर जा कर टकरा रहा था. निर्मला अपनी बच्चेदानी के मुँह पर राज के लंड के मोटे सुपाडे को चूत पर महसूस करके मस्त हुई जा रही थी..

निर्मला: अहह अह्ह्ह्ह अहह ओह्ह्ह्ह ओह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह बाबू जी हां चोदो मुझे ओह्ह्ह ओह्ह्ह ज़ोर से चोदो ओह्ह्ह आपके लंड ने मेरी चूत्त्त को ठंडक पहुँचा दी है. आज पूरी एक साल बाद मेरी चूत को किसी मर्द का लंड नसीब हुआ हैं.

निर्मला पंजों के बल चारपाई के किनारे बैठी हुई, तेज़ी से अपनी गान्ड को ऊपेर उछाल-2 कर अपनी चूत को राज के लंड पर पटक-2 कर चुद रही थी. और मस्ती मे आकर अपने एक हाथ से अपनी चुचि को पकड़ कर मसल रही थी. निर्मला की गान्ड राज की मांसल जाँघो से टकरा कर थप-2 की आवाज़ करने लगी. जो पूरे कमरे मे गूँज रही थी.

निर्मला: उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईईईई बाबू जी आप का लंड्ड तो सच मे लोहे के जैसा है. ओह्ह्ह्ह मेरी चूत्त्त्त्त्त्त तो अभी से पानी छोड़ने वाली है. ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह बाबू जी और जोर्र्र से चोदो ओह्ह्ह मेरी चूत्त्त्त्त्त अपने प्यारर के रस की नदी बहने वाली है. ऊम्ह्ह्ह्ह्ह्ह उम्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उन्घ्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अहह

और निर्मला की चूत ने पानी छोड़ दिया. उसकी चूत से पानी की गरम नदी सी बह निकली. जिससे राज का लंड एक दम चिकना होकर चमकने लगा. राज अभी भी तेज़ी से अपनी कमर को हिला-2 कर निर्मला की चूत मे अपना लंड पेले जा रहा था.

निर्मला राज के ऊपेर से खड़ी हो गयी. राज एक दम झल्ला उठा.

राज : ये क्या कर दिया साली. अभी मेरे लौडे ने पानी नही छोड़ा है.

निर्मला: (रंडी की तरहा मुस्कुराते हुए) बाबू जी आपका जितना मन है मुझ चोद लो. बस मे आपके वीर्य की एक भी बूँद को अपनी चूत से बाहर नही गिरने देना चाहती.

ये कह कर निर्मला अपने दोनो घुटनो को चारपाई के किनारे पर रख कर आगे की तरफ झुक कर डॉगी स्टाइल मे आ गयी.

निर्मला: (राज की ओर वासना से भरी नज़रों से देखते हुए) आइए बाबू जी अपनी रांड़ को कुतिया की तरहा चोद डालिए.

राज चारपाई से खड़ा हो गया. और अपने घुटनो को थोड़ा सा मोड़ कर झुक कर अपने लंड को निर्मला की चूत की सीध मे ले आया. निर्मला आगे से नीचे झुक गयी. जिससे उसकी गान्ड बाहर की तरफ आने से, पीछे से उसकी चूत का छेद ऊपेर की ओर हो गया. उसकी चूत की फाँकें फैली हुई थी. और चूत के पानी से सनी हुई थी.

राज ने अपने लंड को पकड़ कर निर्मला की चूत के छेद पर लगा दिया. लंड का गरम सुपाडा फिर से अपनी चूत के छेद पर महसूस करके, निर्मला की मस्ती मे आँखे बंद हो गयी. और राज ने निर्मला की कमर को पकड़ कर अपनी कमर को आगे की तरफ धकेला. लंड का सुपाडा फिर से चूत की दीवारों को फैलाता हुआ अंदर घुस गया. राज ने फिर से अपनी कमर को हिलाया. इस बार चूत गीले होने के कारण राज का लंड बिना कुछ रुकावट के अंदर जड तक घुस गया.

और राज ने बिना रुके अपनी कमर को हिलाते हुए, अपने लंड को अंदर बाहर करना चालू कर दिया. फिर से थप-2 और फॅक-2 की आवाज़ पूरे कमरे मे गूंजने लगी. और निर्मला की मस्ती से भरी सिसकारियाँ पूरे कमरे मे गूंजने लगी. निर्मला भी फिर से झड़ने के करीब थी. और राज के लंड की नसें भी फूलने लगी थी.

निर्मला: अह्ह्ह्ह बाबू जीईई आपके लंड मे कितनी जान है ओह मेरी चूत तो फिर से पानी छोड़ने वाली है ओह्ह्ह ओह बाबू जी मेरा होने वाला है ओह सीओिईईईईईईई उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अहह आह अहह अह्ह्ह्ह

और इसबार निर्मला के साथ-2 राज के लंड से भी वीर्य के गरम पिचकारियाँ छूटने लगी. निर्मला अपनी चूत की दीवारों पर बहते हुए राज के गाढ़े गरम वीर्य को महसूस करके मस्ती से सारॉबार हो गयी. थोड़ी देर राज ऐसे ही अपने लंड को निर्मला की चूत मे घुसाए खड़ा रहा.

निर्मला: बाबू जी अब तो निकाल लो. मुरली आने ही वाला हो गा.

राज ने जल्दी से अपने लंड को निर्मला की चूत से निकाल लिया. उसका लंड एक दम भीगा हुआ था. और वो कमरे मे इधर उधर किसी पुराने कपड़े को देखने लगा.

निर्मला: क्या ढूँढ रहे हैं बाबू जी.

राज : वो इसे सॉफ करना है.

निर्मला : रुकें मे कर देती हूँ.

और निर्मला चारपाई से नीचे उतरी. और जल्दी से अपनी ब्लाउस के हुक्स बंद करके अपनी साड़ी ठीक कर ली. फिर वो चारपाई पर बैठ गयी. और राज के आधे तने हुए लंड को हाथ मे लेकर राज की आँखों मे देखने लगी.

राज : देख क्या रही है जल्दी से इसे किसी कपड़े से सॉफ कर.

निर्मला ने राज की आँखों मे देखते हुए, राज के लंड के सुपाडे को अपनी जीभ निकाल कर चाटना शुरू कर दिया. और निर्मला ने राज के लंड को चाट-2 कर लंड पर लगे अपने और राज के काम रस को सॉफ कर दिया. फिर अपनी साड़ी के पल्लू से राज के लंड को अच्छी तरहा सॉफ कर दिया.

 


राज ने अपनी पेंट और अंडरवेर ऊपेर करके पहन ली. और फिर चारपाई पर बैठ गया. निर्मला फिर से चौकी पर नीचे बैठ गयी.

निर्मला: बाबू जी. फिर कब मुझ अपनी सेवा का मोका दोगे.

राज : जल्द ही तुझे फिर से सेवा का मोका मिलेगा.

राज कुछ देर के लिए सोच मे पड़ गया. वो जानता था, कि वो रोज -2 यहाँ नही आ पाएगा. वो इसके लिए कोई हल सोचने लगा. कुछ ही देर मे मुरली भी आ गया. उसने चिकेन का लिफ़ाफ़ा राज को दे दिया. राज बाहर आ गया. उसके पीछे मुरली भी दौड़ा चला आया.

राज : (कार की तरफ बढ़ते हुए) मुरली मुझे हवेली के काम काज के लिए कुछ दिनो के लिए एक भरोसे वाली औरत चाहिए. जो पूरी ईमानदारी के साथ वहाँ काम कर सके. वो क्या है ना. जो औरत पहले काम करती थी. वो चली गयी हैं. और एक महीने बाद वापिस आने वाली है. अगर तुम्हे एतराज ना हो तो तुम अपनी पत्नी को कुछ दिनो के लिए हवेली छोड़ आओ. मैं तुम्हें हर महीने इसके लिए 2000 रुपये दूँगा.

2000 रुपये ये सुन कर मुरली एक दम से हैरान हो गया, क्योंकि गाँव मे वैसे भी कोई घर के काम के लिए इतने पैसे नही देता था. मुरली राज की बात सुन कर झट से राज़ी हो गया.

राज : तो ठीक है मुरली तुम कल उसे मेरे गाँव मे हवेली छोड़ जाना.

मुरली: ठीक है बाबू जी.

और राज अपनी कार मे बैठ कर अपने गाँव के लिए निकल लिया. मुरली दौड़ता हुआ, निर्मला के पास आया, और उसे अंदर आने को कहा.

निर्मला: क्या बात है. इतने खुश दिखाई दे रहे हो. क्या कहा बाबू जी ने.

मुरली: अर्रे तुम सुनो जी, तो तुम भी खुश हो जाओगी.

निर्मला: अर्रे बताओ तो सही.

मुरली: वो बाबू जी ने तुम्हें कल से हवेली बुलवा लिया है. और पता है 2000 रुपये महीने के भी देंगे.

निर्मला के होंठो पर ये सुन कर मुस्कान आ गयी. उसका दिल ख़ुसी के मारें नाच रहा था.

जब राज एप्रा गाँव से गुजर रहा था. तो रास्ते मे उसे विशाल मिल गया. और वो उसे अपने घर ले गया. दूसरी तरफ डॉली राज का हवेली मे वेट कर रही थी. क्योंकि आज उसे अपने ससुर के अकाउंट मे कुछ पैसे ट्रान्स्फर करने थे. क्योंकि डॉली के सास ससुर ने अपनी सारी जयदाद. अपने पोते साहिल के नाम कर दी थी, और डॉली को ही साहिल के बालिग होने तक उसके बिजनेस और प्रॉपर्टी का केर टेकर बनाया गया था. जब काफ़ी देर तक राज नही आया तो उसने अकेले सिटी जाने का फैंसला किया.

उसने रोमा को आवाज़ दी, और बताया कि वो बाहर जा रही है. वो साहिल का ख़याल रखें. साहिल रूम मे सो रहा है.

पर जब वो हवेली के बाहर आई और उसने कार स्टार्ट की, तो कार स्टार्ट नही हुई. उसका आज बॅंक जाना बहुत ज़रूरी था. फिर उसने हरिया को आवाज़ लगाई.

हरिया: जी मालकिन.

डॉली: काका देखो तो रवि कहाँ है.

हरिया: जी अभी देखता हूँ.

और थोड़ी देर बाद हरिया रवि को हवेली के पीछे बने कमरे से उठा लाया.

डॉली: रवि यहाँ से सिटी कितनी दूर है.

रवि: दीदी ज़्यादा दूर तो नही है. पर 14-15 किमी है.

डॉली: देखो रवि मुझे बहुत ज़रूरी काम है. मुझ अभी सिटी जाना है. पर लगता है ये कार खराब हो गयी है. यहाँ से कोई बस या ऑटो मिलेगा.

रवि: दीदी जी यहाँ से सिर्फ़ बस ही मिलेगी. वो भी काफ़ी इंतजार करना पड़ेगा.

डॉली: (अपने मुँह मे बुदबुदाते हुए) अजीब मुसबीत है. चलो तुम मेरे साथ चलो.

रवि: जी दीदी मे अभी आता हूँ.

और रवि दौड़ कर पीछे चला गया. और जल्दी से अपनी एक पुरानी से पेंट शर्ट पहन ली.

रवि: (डॉली के पास आते हुए) चले दीदी जी.

और फिर दोनो हवेली से निकल कर गाँव से मेन रोड तक जाने वाले रास्ते पर पैदल चलने लगे. रास्ते मे जो भी कोई उनके सामने से गुज़रता तो वो झुक कर डॉली को सलाम करता.

दोनो 10 मिनट पैदल चलने के बाद मेन रोड पर पहुँच गये. और बस का वेट करने लगे. करीब 10 मिनट मे उन्हें बस मिल गये. वो दोनो बस से 20 मिनट मे सिटी पहुँच गये. डॉली जल्दी से रवि के साथ बॅंक मे गयी.

और अपने ससुर के अकाउंट मे पैसे ट्रान्स्फर करवा दिए. फिर जब रवि और डॉली दोनो बॅंक से बाहर आए तो, बाहर का नज़ारा देख डॉली एक दम से हैरान हो गयी. बाहर चारो तरफ़ा घने काले रंग के बदल छाए हुए त. दोनो तेज़ी से बस स्टॅंड की तरफ चले, और गाँव की तरफ जाने वाली जो उन्हें पहली बस मिली, उसमें बहुत ज़्यादा भीड़ थी.

रवि: दीदी इसमें तो बहुत भीड़ थी.

डॉली: (कुछ देर सोचने के बाद आसमान की ओर देखते हुए) कोई बात नही, मोसम का मिज़ाज भी बिगड़ा हुआ है. हमें इसी मे निकल लेना चाहिए.

और दोनो बस मे किसी तरहा चढ़ गये. बस मे बहुत भीड़ थी. रवि डॉली के एक दम पीछे खड़ा था. डॉली ने एक वाइट कलर का सलवार सूट पहना हुआ था. जो काफ़ी महीन कपड़े का था. जैसे ही वो दोनो बस मे चढ़े. पीछे से कुछ और लोग बस मे चढ़ गये. बस एक दम ठसाठस भरी हुई थी.

डॉली का बदन पीछे से रवि से एक दम चिपक गया था. रवि और डॉली की हाइट बराबर थी. पर डॉली ने उँची हिल्स के सॅंडल पहने हुए त. जिसके कारण वो रवि से ज़्यादा उँची लग रही थी. बस स्टार्ट हो गयी. पर दोनो को खड़े रहने मे भी दिक्कत हो रही थी. डॉली की पीठ और उसके बदन का पिछला हिस्सा रवि से एक दम सट गया.

रवि का लंड डॉली के बदन की गरमी और उसके स्पर्श के अहसास को महसूस करके खड़ा होने लगा. वो अपना ध्यान कहीं और लगाना चाहता था. पर उसका अपने पे कोई ज़ोर नही चल रहा था. उसके सामने दुनियाँ की सबसे हसीन भरी पूरी औरत खड़ी थी. जो उससे एक दम सटी हुई थी. उसके बदन से उठ रही भीनी-2 खुसबू उसे और पागल कर रही थी. ना चाहते हुए भी रवि का लंड कुछ ही पलों मे एक दम खड़ा हो गया.

और डॉली की सलवार और पैंटी के ऊपेर से उसकी गान्ड की दरार मे धँस गया. जैसे ही डॉली को अपनी चुतड़ों की दरार मे किसी सख़्त और गरम चीज़ का अहसास हुआ, डॉली एक दम से सिहर गयी. उसने अपने फेस को पीछे की तरफ घुमा कर देखा. पीछे रवि खड़ा बाहर की तरफ झाँक रहा था. जैसे उसे कुछ पता ही ना हो. डॉली जानती थी, कि ना तो रवि पीछे हो सकता है, और ना ही वो आगे हो सकती है. बस मे हिलने तक की भी जगह नही थी.

धीरे- 2 रवि का लंड पूरी तरहा अकड़ गया. और डॉली के कपड़ों के ऊपेर से उसके चुतड़ों की दरार मे और धँस गया. डॉली अपनी जाँघो को भींचे हुए खड़ी थी. उसके बदन मे भी ना चाहते हुए, भी मस्ती की लहर दौड़ गयी. उसका पूरा बदन मस्ती और सिहरन के मारे कांप रहा था. उसने अपने काँपते हुए हाथों से अपने साथ वाली सीट के हॅंडेल को पकड़ लिया.

बस धीरे-2 आगे बढ़ रही थी. अचानक बस का टाइयर किसी खड्डे मे से गुजरा. जिससे सभी बुरी तरहा हिल गये. और डॉली ने अपने आप को संभालने के लिए अपने पैरों को थोड़ा सा खोल लिया. ये उसकी बहुत बढ़ी ग़लती थी. जैसे ही डॉली की जाँघो मे गॅप बना. रवि का लंड डॉली के कपड़ों के ऊपेर उसके चुतड़ों की दरार मे रगड़ ख़ाता हुआ. उसकी चूत के ऊपेर जा लगा.

डॉली की तो मानो जैसे साँस ही अटक गयी. उसका दिल जोरों से धड़कने लगा. और वो तेज़ी से साँसें लेने लगी. रवि का भी बुरा हाल हो रहा था. वो डॉली की सलवार और पैंटी के अंदर से उसकी चूत से उठ रही गरमी को अपनी पेंट के अंदर अपने लंड पर महसूस कर रहा था. क्या गरम माल थी.

डॉली की चूत मे सरसराहट अचानक से और बढ़ गयी. उसकी आँखे अब बंद हुई जा रही थी. वो बहुत मुश्किल से अपने आप को सिसकारी भरने से रोके हुए थी. और उसकी चूत ने आज कई महीनो बाद अपने कामरस के थोड़ा सा उगला था. जिससे डॉली को पानी पैंटी मे नमी महसूस होने लगी.

रवि भी एक दम मजबूर था. वो चाह कर भी पीछे नही हट सकता था, जिसे डॉली अच्छी तरहा जानती थी. दोनो बस अपनी साँसों को थामें खड़े थे. पर जैसे ही बस उनके गाँव को जाने वाले रास्ते के सामने जाकर रुकी. तो डॉली ने राहत की साँस ली. दोनो मुस्किल से बस नीचे उतरे. और गाँव की तरफ जाने वाले रास्ते पर पैदल चलने लगी.

 
बाहर अब तेज़ी से हवा चल रही थी. वो अभी कुछ ही कदम चले थे, कि बारिश तेज़ी से शुरू हो गयी. और दोनो तेज़ी से चलने लगी. रास्ते मे सर छुपाने तक की कोई जगह नही थी. दोनो तेज़ी से हवेली की तरफ भागने लगे. दोनो कुछ ही पलों मे पूरी तरहा से भीग गये. रवि डॉली के आगे -2 तेज़ी से चल रहा था. अचानक डॉली का पैर उँची हील के कारण मूड गया.

डॉली एक दम से चीख उठी, और वो गिरते-2 बची. रवि वापिस पीछे की और भागा.

रवि: क्या हुआ दीदी.

डॉली: आह रवि मेरा पैर मूड गया था. चल जल्दी कर.

दोनो तेज़ी से चलते हुए हवेली मे पहुँच गये. हाल के अंदर आकर डॉली ने हरिया को आवाज़ दी. पर हरिया का कुछ पता नही था.

रवि अपने फेस पर पानी को पोंछ रहा था. तभी उसका ध्यान डॉली की तरफ गया. डॉली एक दम भीगी हुई थी. उसकी जवानी उसके कपड़ों के अंदर से झलक रही थी. उसकी पतला सा वाइट कलर का सलवार कमीज़ गीला होकर उसके बदन से चिपक गया था. एक साइड से डॉली की सलवार गीली होने के कारण उसकी अंदर पहनी हुई ब्लॅक कलर की पैंटी को देख रवि के दिल ने धड़कना बंद कर दिया.

पतली सी सलवार उसके चुतड़ों और जाँघो से एक दम चिपकी हुई थी. और अंदर उसकी गोरी-2 मांसल जांघे और ब्लॅक कलर की पैंटी को देख रवि का लंड उसकी पेंट मे तन गया. डॉली अपने रुमाल से अपने फेस को सॉफ कर रही थी. उसका ध्यान रवि की तरफ नही था. जो उसे बड़ी हसरत भरी नज़रों से देख रहा था.

डॉली की कमीज़ का भी वही हाल था. वो भी गीली होकर उसके बदन से चिपकी हुई थी. और डॉली की ब्लॅक कलर की ब्रा और उसकी पतली कमर और गहरी लंबी नाभि सॉफ-2 दिखाई दे रही थी. रवि एक टक डॉली को देखे जा रहा था. अचानक से डॉली ने रवि की ओर देखा. जो उसके कयामत बदन को देख कर अपनी आँखे सेंक रहा था. डॉली एक दम शरमा गयी. पर उसने ये बात जाहिर नही होने दी. क्योंकि उसकी नज़र मे रवि एक नौकर से बढ़ कर कुछ भी नही था. वो जल्दी से अपने रूम की तरफ गयी.

जैसे ही वो रूम मे आई, तो उसने देखा कि, रोमा नीचे फर्श पर लेटी सो रही थी. क्योंकि डॉली ही उसे साहिल की देख भाल के लिए कह कर गयी थी. और साहिल भी सो रहा था. डॉली ने अपनी ममता से भरी नज़रों से अपने दिल के दुलारे राजकुमार को देखा, और फिर रोमा को आवाज़ लगाई.

रोमा डॉली की आवाज़ सुन कर झट से उठ गयी, और खड़ी हो गयी.

डॉली: हरिया काका कहाँ हैं.

रोमा: जी दीदी शायद वो अपने कमरे मे गये हैं पीछे.

डॉली: अच्छा ठीक है. मैं अपने कपड़े चेंज करती हूँ. तू जाकर मेरे लिए बढ़िया सी चाइ बना दे. और हां सुन रवि के लिए भी बना देना.

रोमा: जी दीदी मे अभी बना देती हूँ.

और रोमा बाहर चली गयी. रोमा के जाते ही डॉली ने डोर लॉक किया, और आलामरी मे से दूसरे कपड़े निकाले, और बाथरूम मे घुस गयी. अंदर जाकर उसने अपने कपड़े उतारने चालू कर दिए. कपड़े उतारने के बाद उसने अपनी ब्रा और पैंटी को भी निकाल कर मशीन मे डाल दिया. और फिर वो अपने बदन को टवल से पौंछने लगी.

तभी उसे अपनी चूत की फांकों के बीच मे कुछ चिपचपा सा अहसास हुआ. डॉली ने अपने हाथों की उंगलियों से अपनी चूत की फांकों को फैला कर. सामने लगे आयने मे देखा. उसकी चूत का छेद उसके काम रस से एक दम सना हुआ था. डॉली के बदन मे अजीब सी सिहरन दौड़ गयी. और उसे बस मे रवि के लंड का अपने कपड़ों के ऊपेर से हुआ स्पर्श याद आ गया. पर फिर भी उसने अपने सर को झटक दिया. और पानी से अपनी नाज़ुक सी चूत को धो कर सॉफ करके नयी ब्रा और पैंटी पहनने लगी.

जब डॉली अपनी ड्रेस चेंज करके बाहर आई. तो रवि भी अपने कपड़े चेंज करके आ चुका था, और वो चाइ पी रहा था. डॉली रवि से नज़रें नही मिला रही थी. उसने बिना रवि की ओर देखे ही अपनी चाइ का कप उठाया, और रूम मे चली गयी. 2 घंटे लगतार बारिश होती रही.

जब बारिश बंद हुई. तो रवि जैसे ही बाहर आया. तो राज की कार हवेली के अंदर आकर रुकी. और राज उतर कर अंदर की ओर आने लगा.

राज : तुम्हारी दीदी कहाँ पर है. (हाल मे अंदर की ओर जाते हुए)

और रवि हवेली की ओर जाते हुए, घूम कर दूसरे रास्ते से खेतो की तरफ निकल पड़ा. वो तेज़ी से चलते हुए खेतो मे पहुँच गया. जब वो रज़िया के कमरे के सामने पहुँचा , तो उसने चारो तरफ देखा. नज़दीक कोई नही था. वो कमरे की तरफ बढ़ने लगा. चारो तरफ़ा सन्नाटा पसरा हुआ था. जब वो कमरे के पास पहुँचा . तो उसने देखा कमरे कि बाहर कुण्डी लगी हुई थी.

रवि खेतो मे उस तरफ जाने लगा. यहाँ अक्सर रज़िया काम करती थी. वो दबे पावं आगे बढ़ने लगा. जैसे -2 वो आगे बढ़ रहा था. उसका दिल जोरों से धड़क रहा था. फिर अचानक से उसे हल्की से हँसने की आवाज़ सुनी दी. रवि को आवाज़ पहचानते देर ना लगी कि ये आवाज़ रज़िया की थी. पर अगले ही पल उसके दिमाग़ मे ये सवाल उठा. कि आख़िर रज़िया किसके साथ हंस रही है.

जाहिर सी बात है कि उसके साथ कोई ना कोई है. वो वापस मूड कर जाने लगा. उसने सोचा कि रज़िया के साथ किसी मजदूर की बेटी या पत्नी होगी. पर उसे फिर से रज़िया की धीमे से आवाज़ सुनाई पड़ी. वो आवाज़ ऐसी थी. जैसे अक्सर रज़िया रवि के लंड को अपनी चूत मे लिए हुए सीसियाती थी. रवि के पावं वहीं रुक गये.

वो फिर से धीरे-2 आवाज़ की तरफ बढ़ने लगा. वो अपने कदमों को ऐसे रख रहा था. जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को दबोचने के लिए आगे बढ़ रहा हो. रज़िया की मस्ती से भरी हुई आवाज़ अब उसके कानो मे सॉफ-2 पड़ने लगी थी. फिर उसके कदम अचानक से रुक गये. सामने जो रवि देख रहा था. उसे अपनी आँखों पर यकीन नही हो रहा था.

रज़िया नीचाई तरपाल बिछा कर लेटी हुई थी. उसने अपने टाँगों को किसी के कंधे पर रखा हुआ था. रज़िया का लहंगा उसकी कमर पर चढ़ा हुआ था. और उसकी मोटी गान्ड सॉफ दिखाई दे रही थी. रज़िया ने ऊपेर से अपनी चोली निकाली हुई थी. वो ऊपेर से बिल्कुल नंगी थी.

और रज़िया अपनी गाड़ को तेज़ी से ऊपेर की ओर उछाल कर उस सख्स के लंड पर अपनी चूत को पटक-2 कर चुदवा रही थी. जैसे ही उस सख्स ने उसकी तरफ अपना मुँह घुमाया. तो रवि को पहचनाते देर ना लगी. वो रज़िया का देवर अली था.

रज़िया: (आहह आहह सीईईईई करते हुए) क्या कर रहा है जल्दी कर ना बीच खेतो मे मुझ नंगा कर दिया है. अगर किसी ने देख लिया तो.

अली: क्या करूँ भाभी कब से तुम्हारी चूत को चोदा नही था. आज तो जी भर कर चोदने दे ना अपने देवर को.

और अली का लंड तेज़ी से रज़िया की चूत के अंदर बाहर हो रहा था. रज़िया भी पूरी मस्ती मे अपनी गान्ड को उछाल-2 कर अपनी चूत मे अपने देवर के लंड को ले रही थी. ये देख कर रवि का गुस्से का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया. दोनो काफ़ी देर तक चुदाई का मज़ा लेते रहे. जैसे ही दोनो झडे. तो रज़िया ने उठ कर जल्दी से अपनी चोली पहनी. और अपना लहंगा ठीक किया.

रज़िया: सुन कितने दिन यहाँ रहेगा.

अली: भाभी मैं तो कल ही चला जाउन्गा.

रज़िया: क्या क्या कह रहा है. तुझे मेरी ज़रा भी फिकर नही. पूरे एक साल के बाद आया है. और कल ही चला जाएगा. तुझे पता है तेरे लंड को याद करके मेरी चूत ने कितने आँसू बहाए हैं. मैं तो कब से तड़प रही हूँ.

अली: भाभी कुछ दिन और सबर कर लो. एक बार मैं वहाँ अपना काम सेट कर लूँ फिर तुम्हें और भैया को अपने साथ ले चलूँगा. और फिर तुम्हारा देवर दिन रात तुम्हारे पास रहेगा .

रज़िया अली की बाहों मे समा गयी. और अली रज़िया के होंठो को चूसने लगा. अली अपने दोनो हाथों से रज़िया की गान्ड को मसल रहा था. दोनो थोड़ी देर बाद अलग हुए.

अली: अच्छा भाभी तुम जाकर खाना तैयार करो. मे ज़रा उधर से होकर आता हूँ.

ये कह कर अली दूसरी तरफ से खेतो के और अंदर चला गया. रज़िया तिरपाल को इकट्ठा करके कमरे की तरफ आने लगी. रवि ने पहले तो वहाँ से हटने के बारे मे सोचा. फिर कुछ सोच कर वो वहीं खड़ा हो गया. जैसे रज़िया आगे बढ़ी. तो सामने रवि को देख कर उसके पैरों तले से ज़मीन खिसक गयी.

रज़िया: (हडबडाते हुए) अरे रवि तू कब आया.

रवि: तब जब तुम अली के ऊपेर उछल-2 कर उसका लंड अपनी चूत मे ले रही थी.

रवि की बात सुन कर रज़िया का रंग उड़ गया. उसे समझ मे नही आ रहा था, कि वो रवि को क्या कहे.

रज़िया: वो वो रवि क्या है ना. कि मेरे और अली के बीच बहुत पहले से संबंध थे. वो मेरे साथ ज़बरदस्ती करने लगा था.

रवि: हां वो मैं देख रहा था. आज के बाद मैं तुम्हारे पास कभी नही आउन्गा. उससे चुदवा लेना.

रज़िया अपने मन मे सोचने लगी, कि अली का तो पता नही, वो कब उसे अपने साथ शहर लेकर जाएगा. इधर ये भी हाथ से निकला जा रहा है. और पता भी नही अली सच कह रहा है या झूठ.

रवि मूड कर वापिस जाने लगा. रज़िया उसे पीछे से आवाज़ देती रही पर रवि ने नही सुना, और वो गुस्से मे आकर हवेली की तरफ वापिस जाने लगा.

रज़िया: सत्यानाश अब क्या होगा. इस अली के बच्चे को भी आज ही आना था.

रवि हवेली मे पहुँच कर अपने पीछे बने कमरे मे चला गया. उसके दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था. फिर रवि ने सोचा , कि उसने कुछ ज़्यादा ही रज़िया को बोल दिया है, पर रज़िया ने उसके साथ ग़लत क्या है. मैं उसके पास कभी नही जाउन्गा. वो काफ़ी देर अपने कमरे मे चारपाई पर लेटा रहा.

जब उसका दिमाग़ थोड़ी देर मे शांत हुआ, तो वो उठ कर बाहर आ गया. और पीछे बने हुए बाथरूम मे चला गया. जैसे ही वो बाथरूम मे पहुँचा . उसके पैर वहीं रुक गये. सामने पूनम बैठी पेशाब कर रही थी. उसकी पीठ रवि की तरफ थी. पूनम हरिया की बेटी थी, जो पिछले दो सालों से अपनी मौसी के गाँव मे रह कर पढ़ रही थी, और शायदा आज ही आई थी.

पूनम ने इसी साल 10थ क्लास पास की थी. उसकी उम्र **** साल थी, और वो रवि से दो साल छोटी थी. जैसे ही पूनम ने पीछे मूड कर देखा, वो एक दम से हडबडा गयी. और जल्दी से खड़ी होने लगी. जैसे ही पूनम खड़ी होने को हुई, उसका सर ऊपेर बनी स्लॅब से टकरा गया. ये सब एक दम अचानक से हुआ. पूनम का सर बहुत ज़ोर से टकराया था

पूनम ने एक दम से अपने हाथों से अपने सर को पकड़ लिया. उसको बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा था, वो एक दम से दर्द के मारे चिल्ला उठी, ये सब इतनी जल्दी मे हुआ, कि रवि को कुछ सोचने समझने का मोका नही मिला, वो तेज़ी से पूनम की तरफ बढ़ा. पूनम की हालत ऐसी थी, जैसे वो अभी चक्कर खा कर गिर जाएगी.

 


रवि ने उसे अपने बाहों मे भर लिया. और उसे सहारा देकर दीवार के साथ खड़ा कर दिया. पूनम की सलवार और छोटी सी चड्धि उसकी जाँघो मे फँसी हुई थी. और रवि का हाथ पूनम के नरम-2 चुतड़ों पर था.

रवि: पूनम ज़्यादा चोट तो नही लगी.

पूनम: (ना मे सर हिलाते हुए) नही. (रवि का हाथ अभी भी पूनम के चुतड़ों पर था. जो पूनम को महसूस हो रहा था.)

रवि: बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा है.

पूनम: (रवि के हाथ को अपने नंगे चुतड़ों पर महसूस करके कसमसाते हुए) हाँ.

और पूनम ने रवि को अपने हाथों से धक्का दे दिया. और दीवार की तरफ घूम कर अपनी पैंटी और सलवार को एक साथ अपने चुतड़ों पर चढ़ा लिया. और दीवार की तरफ मुँह कर के मंद-2 मुस्कुराते हुए. तुम्हें ज़रा भी अकल नही है. ऐसे ही बाथरूम मे घुस आए. जाओ अब बाहर जाओ.

रवि एक दम से झैन्प गया, और बाथरूम से बाहर आकर वेट करने लगा. थोड़ी देर बाद पूनम सर झुकाए हुए बाथरूम से बाहर आई. और तिरछी नज़रों से रवि की ओर देख कर हल्की से मुस्कान अपने होंठो पर लाते हुए, शरमा कर अपने कमरे की तरफ भाग गयी. पूनम के जाते ही. रवि बाथरूम मे घुस गया. और पेशाब करने लगा.

फिर वो हवेली के हाल के अंदर आ गया. राज हरिया से कुछ बात कर रहा था.

राज : अच्छा ये बताओ पीछे कितने कमरे हैं.

हरिया : बाबू जी पीछे चार कमरे हैं. एक कमरे मे रवि रहता है. और एक मे मैं और मेरी बेटी.

राज : और ये रोमा कहाँ सोती है.

हरिया: बाबू जी ये यहीं किचिन मे ही सोती है.

राज : ठीक है. इसके लिए पीछे रूम खुलवा दो.

हरिया: जी बाबू जी आज ही खोल देता हूँ.

राज : कल से एक और नौकरानी आ रही है.

डॉली: (जो राज के पास ही बैठी हुई थी) पर भैया हमें इतने नौकरों की क्या ज़रूरत है.

राज : ज़रूरत है डॉली. हमारी हवेली बहुत बड़ी है. मैं चाहता हूँ, कि यहाँ की सॉफ सफाई अच्छे से हो. ठीक है हरिया. जो कल औरत आएगी. उसे काम समझा देना. बाकी कुछ दिनो के बाद उसका काम देख कर उसे भी पीछे रूम दे देंगें.

हरिया: जैसे आप कहें बाबू जी. बाबू जी खाना लगाऊ.

राज : हां खाना लगा दो. फिर आप लोग भी खा लेना.

और हरिया डाइनिंग टेबल पर खाना लगाने लगा. जब राज और डॉली ने खाना खा लिया. तो घर के सब नौकर भी खाना खाने लगे. राज खाना खा कर अपने रूम मे चला गया. राज अब ये समझने लगा था, कि वो दौलत के बूते पर सब कुछ हासिल कर सकता है.

राज जब शाम को डॉली के साथ सोफे पर बैठा चाइ पी रहा था. तो बाहर खड़े गार्ड ने आकर राज को बताया कि, बाहर कोई मक्खन शर्मा नाम का आदमी उस से मिलने आया है. राज उसको नही जानता था. राज ने गार्ड को उसे अंदर लाने को कहा. थोड़ी देर बाद माखन शर्मा गार्ड के साथ अंदर आ गया. और गार्ड वापिस बाहर चला गया. माखन ने राज के सामने हाथ जोड़े.

माखन शर्मा: बाबू जी मैं आपके गाँव के ही रहने वाला हूँ. मैं बहुत बड़ी मुसबीत मे फँस गया हूँ. बस आप ही मेरी मदद कर सकते हैं.

राज ने एक बार ऊपेर से नीचे तक माखन शर्मा को देखा. राज यूँ गोर से हर किसी आदमी को नही देखता था. माखन शर्मा लगभर 6, 2 इंच कद काठी का आदमी था. कसरती बदन. उसके शरीर को देख कर ऐसे लग रहा था. जैसे वो बहुत बड़ा पहलवान हो. उसके हाथ पैरो की मासपेशियाँ बहुत मजबूत और बड़ी-2 थी. राज ने एक बार उसको ऊपेर से नीचे तक देखा.

राज : क्या काम करते हो.

माखन शर्मा: बाबू जी थोड़ी बहुत खेती है. और साथ मे पहलवानी भी करता हूँ.

राज : बोलो क्या काम है.

माखन शर्मा: बाबू जी मे आप के पास बड़ी आस लेकर आया हूँ. मेरा 1 साल का बेटा है. वो एक दम से बीमार पड़ गया है. डॉक्टर उसके इलाज के लिए 1 लाख रुपये माँग रहे हैं. मैं तो ग़रीब सा आदमी हूँ. इतने पैसे कहाँ से लाउ. बाबू जी आप ही मेरी मदद कर सकते हो.

राज : तुम्हारा बेटा कोन से हॉस्पिटल मे है.

माखन: वो **** मे अड्मिट है.

राज उस हॉस्पिटल के मालिक को अच्छी तरहा जानता था. उसने सोफे के साथ पड़े टेबल पर रखे हुए फोन को उठाया. और हॉस्पिटल का नंबर. डाइयल किया.

राज शर्मा: हैल्लो क्या मे ड्र. राकेश से बात कर सकता हूँ. जी मैं राज बोल रहा हूँ.

थोड़ी देर बाद ड्र राकेश फोन पर आया. राज ने उसे सारी बात बताई. और फिर राज ने फोन रख दिया.

राज : डॉली जाओ अंदर से 60000 रुपये ले आओ.

डॉली अंदर चली गयी. और थोड़ी देर बाद 60000 रुपये लेकर राज को दे दिए.

राज शर्मा: (पैसे माखन शर्मा को देते हुए) ये लो मैने हॉस्पिटल के मालिक राकेश से बात कर ली है. वो तुम्हारे बेटे का इलाज 60000 मे कर देगा. जाओ उसे मेरा नाम लेकर मिल लेना.

माखन: (पैसे लेते हुए) बहुत-2 शुक्रिया बाबू जी. मैं आपका ये अहसान कभी नही भुलुन्गा. मैं आपके पैसे जल्द से जल्द लौटा दूँगा.

राज : तुम मेरे लिए काम करोगे.

माखन शर्मा: जी बाबू जी. आज तो आप ने मुझ खरीद ही लिया है. आज से मे आपके लिए कुछ भी कर सकता हूँ.

राज : ठीक है. जैसे ही तुम्हारा बेटा ठीक होकर घर आजाए. तुम हवेली आ जाना. और अगर हो सके तो दो तीन और अपने जैसे हटे कट्टे आदमी ले आना.

माखन शर्मा: बाबू जी आप कहें तो मे ऐसे आदमियों की लाइन लगा दूँगा. जो आप के इशारे मे मर मिटने की हद तक तैयार रहेंगे.

और माखन शर्मा वापिस चला गया. माखन के शर्मा के वापिस जाते ही. डॉली जो अब तक चुप बैठी थी बोल उठी.

डॉली: भैया हमें इतने आदमियों की क्या ज़रूरत है. भैया इनसे हमारी इनकम तो बढ़ नही जाएगी. उसकी मदद तो करना ठीक है. पर ये फज़ूल के खर्चे क्यों बढ़ा रहे हो.

राज : तुम नही समझोगी. अगर मैं कुछ खर्च कर रहा हूँ, तो सोच समझ कर रहा हूँ.

डॉली राज से बहस नही करना चाहती थी. इसीलिए वो उठ कर अपने रूम मे चली गयी. और साहिल के साथ बेड पर लेट गयी. रात को खाना खाने से पहले राज ने आधी बॉटल शराब पी ली, शाम के 7 बजे त. डॉली अभी भी अपने रूम मे थी. हरिया रोमा के साथ किचिन मे खाना बना रहा था.

 
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राज ने सोफे पर बैठे हुए, हरिया को पानी लाने के लिए कहा. थोड़ी देर बाद रोमा ने एक ट्रे मे पानी का ग्लास लाकर राज के सामने आकर खड़ी हो गयी. राज पर पहले से ही शराब का नशा चढ़ा हुआ था. पानी लेते हुए. राज रोमा की गदराई जवानी को देखने लगा. रोमा ने वाइट कलर की साड़ी पहनी हुई थी. उसकी साड़ी नाभि से 2 इंच नीचे थी. राज रोमा की गदराई नाभि और पेट को देख कर एक पल के लिए उसमे खो गया.

रोमा: बाबू जी पानी.

राज : हूँ हां (और राज ने रोमा की तरफ देखते हुए पानी का ग्लास ट्रे से उठा लिया. और रोमा वापिस किचिन मे चली गयी)

राज ने अपने सर को झटक दिया. और सोचने लगा. बस आज की रात है. फिर तो निर्मला यहाँ रहने आ ही जायगी.

रात को सब खाना खा चुके थे. रोमा के लिए पीछे रवि के साथ वाला रूम को खोल दिया गया था. रोमा पीछे सोने चली गयी थी, रवि और हरिया ही हवेली के हाल के अंदर थे.

राज : (हरिया से) वो रोमा किधर गयी है.

हरिया: बाबू जी वो तो पीछे चली गयी है. आप ने ही तो सुबह उसके लिए रूम खोलने के लिए कहा था.

राज : हां कहा तो था. पर अगर डॉली को रात मे किसी चीज़ की ज़रूरत पड़ी तो.

हरिया: बाबू जी मे उसे बुला लाता हूँ.

राज : रहने दो. आज आप ही यहाँ सो जाओ.

हरिया: ठीक है बाबू जी.

राज : ठीक है. ये लो हाल के मेन डोर की चाबी. उसे लॉक करके मुझ वापिस दे दो.

जब से राज डॉली के साथ हवेली मे रहने आया था. वो रोज रात को हाल के मेन डोर को लॉक करके ही सोता था. एक डोर और था. जो पीछे की तरफ खुलता था. पर वो पहले से ही लॉक था. रवि हाल से बाहर चला गया, और हरिया ने डोर लॉक करके के राज को चाबी पकड़ा दी.

रवि हवेली के पीछे बने अपने कमरे की तरफ जाने लगा. पीछे आकर वो सीधा बाथरूम की तरफ गया. उसे बहुत तेज पेशाब लगा था. पर वो बाथरूम तक पहुँचने का इंतजार नही कर सका. कमरों के बाहर 100 वॉट का बल्ब जल रहा था. पर सभी कमरे बंद थे. रवि ने इधर उधर देखा. और हरिया के रूम के साइड वाली दीवार के पास आकर अपना पाजामा खोल कर नीचे कर लिया. और अपने लंड को निकाल कर पेशाब करने लगा.

कमरे की दीवार के साथ कुछ झाड़ियाँ उंगी थी. जब रवि उनके ऊपेर से गुजरा. तो अंदर लेटी हुई पूनम को बाहर से आवाज़ सुनाई दी. और वो उठ कर रूम के बाहर आ गयी. और कमरे के साइड की तरफ देखने लगी. बल्ब की रोशनी चारो ओर फैली हुई थी. रवि पेशाब कर चुका था. पर वो अपनी आँखों को बंद करके, रज़िया और उसके बीच बिताए हुए, मस्ती भरे लम्हों को याद करते हुए, अपने लंड की चमड़ी को अपने लंड के सुपाडे के आगे पीछे करते हुए, मुठिया रहा था.

जैसे ही पूनम की नज़र रवि पर पड़ी. उसका दिल धक्क से रह गया. और उसके साँसे तेज़ी से चलने लगी. रवि दीवार के पास खड़ा. तेज़ी से अपने लंड को अपने हाथ से हिला रहा था. जिसे देख कर पूनम की कुँवारी चूत मे सिहरन से दौड़ गयी. पर अगले ही पल अचानक रवि ने पूनम को देख लिया. उसने जल्दी से अपना पाजामा ऊपेर किया. पूनम भी एक दम से झैन्प गयी. और अपने कमरे के डोर के सामने आकर खड़ी हो गयी.

इस बार शर्मसार होने की रवि की बारी थी. वो सर झुका कर पूनम के कमरे के डोर के सामने से गुज़रा. उसने तिरछी नज़रों से पूनम की तरफ देखा. जो उसे देख कर मंद-2 मुस्कुरा रही थी. वो अपने रूम का डोर खोलने लगा. जो बिल्कुल उसके रूम के साथ था.

रवि: (सर झुकाए हुए) वो आज काका हाल मे ही सोयेन्गे. तुम जाकर सो जाओ.

पूनम: (रवि की ओर हल्की मुस्कान के साथ देखते हुए) तुम्हे ज़रा भी शरम नही है ना. कहीं भी.

रवि: (एक दम से चोन्क्ते हुए पूनम की ओर देखते हुए) क्या.

पूनम: तुम जगह और टाइम तो देख लिया करो.

ये कह कर पूनम मुस्कुराते हुए अपने रूम के अंदर भाग गयी, और अंदर से डोर बंद कर लिया. रवि वहीं दरवाजे की दहलीज मे बैठ गया. 1 मिनिट बाद बाहर जल रहा बल्ब भी बंद हो गया. क्योंकि उसका स्विच हरिया के कमरे मे था.

रवि दरवाजे की दहलीज पर बैठा हुआ कुछ दिनो पहले जो कुछ उसके साथ हुआ था, उसके बारे मे सोचने लगा. रवि तकरीबन 30 मिंतत तक वहाँ बैठा रहा. वो अपनी ख़यालों की दुनियाँ मे खोया हुआ था. अचानक उसका ध्यान साथ वाले डोर के खुलने से टूटा. पूनम डोर खोल कर बाहर आई. बाहर चाँद की रोशनी चारो तरफ फैली हुई थी. पूनम ने एक ढीला सा टीशर्ट और एक ढीला सा लोवर पहना हुआ था

वो रवि की ओर देखने लगी. पहले उसने रवि से बात करने के बारे मे सोचा. पर फिर वो रवि के ओर देखते हुए, सीधा बाथरूम मे घुस्स गयी. बाथरूम मे जाकर उसने अपने लोवर को नीचे किया. और नीचे बैठ गयी. उसकी कुँवारी चूत की फाँकें धीरे-2 थोड़ा सा फैली, और फिर मूत सू सू की आवाज़ करते हुए, उसके चूत से निकलने लगा. बाहर एक दम सन्नाटा छाया हुआ था,

बाथरूम कमरों के बिल्कुल सामने 7-8 फुट की दूरी पर था. पूनम की चूत से निकल रहे मूत के कारण उठ रही आवाज़ रवि के कानो मे पड़ गयी. ये सोच कर कि पूनम कैसे बैठ कर मूत रही होगी . और उसकी चूत कैसी हो गी. ये सोचते ही रवि के लंड मे हलचल होने लगी. और कुछ ही पलों मे उसका लंड एक दम तन कर खड़ा हो गया. अंदर पूनम ने बैठे हुए, दीवार की ओट से रवि की ओर देखा, उसकी चूत मे रवि को देख कर फिर से सिहरन दौड़ गयी.

रवि दहलीज पर बैठा हुआ, अपने लंड को पाजामे के ऊपेर से धीरे-2 मसल रहा था. पेशाब करने के बाद, पूनम खड़ी हुई, और नीचे झुक कर अपनी लोवर और पैंटी को धीरे-2 से ऊपेर उठाते हुए, अपने चुतड़ों पर चढ़ा लिया. फिर अपने हाथ धो कर वो बाहर आ गयी. और सर को झुकाए हुए, अपने रूम की तरफ जाने लगी. रूम के डोर के पास जाकर उसने रवि की ओर देखा. अब वो अपने हाथों को अपने सर के पीछे रख कर दीवार से सर टिकाए बैठा था.

पूनम अपने आप को रवि से बात करने से रोक ना सकीं. और रवि की ओर चली गयी.

पूनम: क्या हुआ नींद नही आ रही ?

रवि: हाँ वो सुबह मे दोपहर को सो गया था. इसीलिए. और तुम सूनाओ. तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है.

पूनम: बिल्कुल ठीक है. बुद्धू कॉन सी दुनिया मे रहते हो. मे तो पास भी हो गयी. अभी फ्री हूँ.

रवि: ओह्ह्ह अच्छा तो पार्टी कब दे रही हो.

पूनम: जब तुम कहो. बोलो क्या खाओगे. मे बाबा से कह कर कल मंगवा लूँगी.

रवि: अर्रे रहने दो मैं तो मज़ाक कर रहा था. बाहर बहुत गरमी है. चलो अंदर चल कर बैठते हैं.

पूनम का दिल रवि की बात सुन कर जोरों से धड़कने लगा. वो उसे अकेले मे रात के टाइम पर अपने रूम मे आने के लिए बोल रहा था. पूनम खुद भी उसके साथ टाइम गुज़ारना चाहती थी. उससे बात करना चाहती थी. पर कुछ सोच कर वो बोली.

पूनम: नही अभी नही. कही बाबा आ गये तो. वो क्या सोचैंगे. मैं इतने रात को तुम्हारे कमरे मे क्या कर रही हूँ.

रवि: करना क्या है. सिर्फ़ बातें ही करेंगे. पहले भी तो तुम मेरे साथ देर रात तक खेलती और बातें करती रहती थी.

पूनम: तुम ना सच मे बहुत वो. तब हम छोटे थे ना. अब अगर बाबा ने देख लिया. तो पता नही सोचैंगे कि हम अंदर क्या कर रहे हैं.

रवि: क्या सोचैंगे तुम्हारे बाबा.

पूनम एक दम से शरमा गयी. और उसने अपने सर को झुका लिया.

रवि: आओ मैं कुछ नही करूँगा (मज़ाक करते हुए) वैसे भी तुम्हारे बाबा नही आ सकते.

पूनम: तुम्हें कैसे पता.

रवि: वो क्या है ना. राज बाबू जी अंदर से हाल को लॉक करके सोते हैं. और उसकी चाभी उन्ही के पास रहती है. और तुम्हारे बाबा इतनी रात को राज बाबू जी से चाभी लेने के लिए तो नही उठाएँगे.

और ये कह कर रवि खड़ा हो गया. पर वो भूल गया था, उसका लंड अभी भी पाजामे मे तना हुआ है. पूनम अभी भी उसके पास बैठी थी. जैसे ही रवि खड़ा हुआ, उसका तना हुआ लंड पाजामे मे उभार बनाए हुए, पूनम की आँखों के सामने आ गया. जो उसके फेस से सिर्फ़ 6-7 इंच दूर था. पूनम का दिल ज़ोर से धड़कने लगा. उसने मुस्कुराते हुए अपने फेस को दूसरी तरफ घुमा लिया.

 


रवि ने देखा कि, पूनम उसकी बातों और हरकतों पर मुस्कुरा रही है. अगर वो थोड़ी सी कॉसिश करे तो, ये नाज़ुक कली उसकी बाहों मे आ सकती हैं. इसलिए उसने अपना पहला और बहुत दम रखने वाला पता फैंका.

रवि: आ जाओ अंदर बैठ कर बातें करते हैं. (और रवि अंदर की तरफ आने लगा. पूनम भी खड़ी हो कर रवि के पीछे अंदर जाने लगी. अंदर जाते हुए रवि ने उस पत्ते को खोला. जिससे पूनम एक दम धराशाई हो गयी)

रवि: और वैसे अगर मैं तुम्हारे साथ कुछ करूँ भी तो, तुम अपने बाबा से शिकायत तो नही करोगी. (पीछे मूड कर पूनम की ओर देखते हुए)

पूनम रवि की बात सुन कर एक दम से शरमा गयी. उसने अपने सर को झुका लिया. और अपने पैरों के नाख़ून से फर्श को कुरदेन लगी.

रवि: (पूनम के पास जाते हुए) बोलो ना.

पूनम: (रवि को अपने इतना पास देख कर एक दम से कांप गयी) क्या ?

रवि: तुम अपने बाबा से मेरी शिकायत करोगी.

पूनम ने शरमाते हुए. ना मे सर हिला दिया. ये देख कर रवि के होंठो पर मुस्कान आ गयी. और मन ही मन मे खुस होने लगा. और मन मे रज़िया को गाली देते हुए बोला. देख रांड़ मेरे पास तेरे से भी सुन्दर माल है. वो भी एक दम कच्ची कली.

रवि ने आगे बढ़ कर पूनम का हाथ पकड़ लिया. पूनम का बदन एक दम से कांप गया. वो थोड़ा सा पीछे की ओर हुई. और अपने हाथों को छुड़ाने की कॉसिश करने लगी.

रवि: (पूनम की तरफ आगे बढ़ते हुए) क्या हुआ.

पूनम: (काँपती हुई आवाज़ मे) वो बाबा आ गये तो.

रवि: मेने कहा ना नही आएँगे.

पूनम: मुझ डर लग रहा है.

रवि: मैं तुम्हारे साथ हूँ. तो डरने की क्या ज़रूरत.

रवि आगे बढ़ता हुआ पूनम के बेहद करीब आ गया. अब दोनो की साँसें भी एक दूसरे के फेस पर टकराने लगी थी. पूनम ने अपने सर को नीचे झुका लिया.

पूनम: (घबराई और काँपती हुई आवाज़ से) नही मैं ये नही करना चाहती.

रवि: क्या नही करना चाहती.

पूनम: (एक बार रवि की आँखों मे देख कर फिर से शरमा कर उसने नज़रें झुका ली.) वहीं जो तुम चाहते हो.

रवि: मैं क्या करना चाहता हूँ.

पूनम: (शरमाते हुए) मुझ नही पता.

रवि: तो फिर क्या नही करना चाहती. जो तुम जानती हो.

पूनम: मुझ शरम आती है.

रवि: मे तो बस एक बार तुम्हारे होंठो पर किस करना चाहता हूँ. एक बार करने दो ना.

पूनम ना मे सर हिलाने लगी. और पीछे की ओर हटने लगी. पर पीछे अब दीवार आ चुकी थी. और पूनम वहीं रुक गयी. रवि ने उसे हाथ से पकड़ कर अपनी तरफ खैंच लिया, और उसे अपनी बाहों मे भर लिया.

पूनम का फूल सा बदन रवि की बाहों मे आते ही, पूनम एक दम से कसमसा उठी. और उसने अपनी आँखों को बंद कर लिया.

पूनम: रवि मुझ छोड़ दो प्लीज़.

रवि: बस एक बार मुझ अपने होंठो का रस पिला दो. मैं आगे कुछ नही करूँगा

और रवि अपने होंठो को पूनम के होंठो की तरफ बढ़ाने लगा. पूनम ने अपनी वासना और मस्ती से भरी आँखों को थोड़ा सा खोल कर रवि की ओर देखा, और फिर से अपनी आँखे बंद कर ली. पूनम के बदन मे कंपन सा होने लगा. उसके हाथ पैर ऐसे हो गये. जैसे उनमे जान ही ना हो. पूनम रवि की बाहों मे पिघलने लगी. और रवि ने अपने होंठो को पूनम के थरथरा रहे होंठो पर रख दिया.

पूनम अपने होंठो पर रवि के होंठो को महसूस करके एक दम सिहर गयी, उसके बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी. और वो रवि से एक दम चिपक गयी. पूनम की चुचियाँ जो किसी आम के आकर की हो चुकी थी. रवि की छाती मे धँस गयी. पूनम का पूरा बदन मस्ती मे कांप रहा था.

रवि धीरे-2 पूनम के होंठो को अपने होंठो मे लेते हुए. उसके होंठो को चूस रहा था. और पूनम अपनी आँखे बंद किए हुए, मस्त होकर रवि से अपने होंठो को चुस्वा रही थी. धीरे-2 रवि अपने होंठो को पूनम के होंठो को ज़ोर-2 से चूसने लगा. पूनम ने भी अपने होंठो को ढीला छोड़ दिया. और थोड़ा सा खोल दिया.

रवि ने अपने होंठो को पूनम के होंठो से हटा दिया, और पूनम की ओर देखने लगा. पूरा का फेस एक दम लाल हो चुका था. उसकी आँखें अभी भी बंद थी. उसके होन्ट थरथरा रहे त. जो अब एक दूसरे से अलग हो चुके थे. पूनम ने अपनी आँखे खोल कर रवि की तरफ देखा. जैसे पूछ रही हो. अब और क्या चाहते हो, रुक क्यों गये.

रवि ने फिर से अपने होंठो को पूनम के होंठो की तरफ बढ़ाना चालू कर दिया. पूनम ने अपनी वासना से भरी आँखों को फिर से बंद कर लिया. और रवि ने उसके नीचे वाले होंठ को अपने होंठो मे भर लिया. पूनम एक बार फिर से कांप उठी, और उसके हाथ रवि के कंधों पर आ गये. जैसे-2 रवि ने अपने होंठो से पूनम के होंठो को ज़ोर लगा कर चूसना चालू किया, वैसे-2 पूनम के हाथ रवि के कंधों पर और कसने लगे.

पूनम के मुँह से घुटि हुई आह निकल गयी. रवि ने पूनम के नीचले होंठ को अपने होंठो से निकाल कर ऊपेर वाले होंठ को चूसना चालू कर दिया. नीचे पूनम की चूत नम होने लगी थी. और रवि के हाथ पूनम की पीठ को सहलाते हुए, नीचे उसके चुतड़ों की तरफ बढ़ रहे थे.

पूनम रवि के हाथों को अपनी पीठ पर महसूस करके मचले जा रही थी. धीरे -2 रवि के हाथ पूनम की पीठ को सहलाते हुए, उसके चुतड़ों तक पहुँच गये. रवि ने अपने दोनो हाथो की हथेलियों को पूनम के चुतड़ों पर फैला कर रख दिया. पूनम के बदन मे करेंट सा दौड़ गया. और उसने अपने हाथों से रवि के कंधों को और कस के पकड़ लिया.

रवि ने अपने जी भर के पूनम के होंठो का रस्पान किया, और फिर अपने होंठो को पूनम के होंठो से अलग करते हुए, पूनम की ओर देखने लगा. पूनम का फेस कामुकता के कारण एक दम लाल होकर दहक रहा था. पूनम ने अपनी वासना से भरी आँखे खोल कर रवि की ओर देखा.

पूनम: (मदहोशी से भरी हुई काँपती आवाज़ मे) अब बस करो रवि. मुझ कुछ हो रहा हैं.

रवि: (पूनम के चुतड़ों को मसलते हुए) मैं तुम्हें कुछ नही होने दूँगा.

पूनम चूतड़ मसले जाने से आहह कर उठी. और वो एक दम से शरमा गयी. फिर पूनम पीछे की ओर हट गये. और बाहर की तरफ जाने लगी.

रवि: (पूनम का हाथ पकड़ कर रोकते हुए) क्या हुआ.

पूनम: (शरमाते हुए) तुम बड़े वो हो. मुझ जाने दो. वरना कुछ ग़लत हो जाएगा.

रवि: (पूनम को अपनी और खैंच कर अपनी बाहों मे भरते हुए) जब तक तुम नही चाहोगी. मैं कुछ ग़लत नही करूँगा. थोड़ी देर और रूको ना.

और रवि ने पूनम को छोड़ दिया. और नीचे फर्श पर जल्दी से बिस्तर लगाने लगा. बिस्तर लगा कर उसने पूनम का हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ बिस्तर मे बैठा लिया. और रवि पूनम की जाँघो पर सर रख कर लेट गया.

रवि: तुम जानती हो पूनम जब तुम पिछली बार यहाँ आई थी. मैं तब से तुम्हें चाहने लगा हूँ. मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ.

पूनम: (शरमाते हुए) मैं भी तुम्हे चाहती हूँ रवि.

रवि: अब कितने दिन और रहोगी.

पूनम: बस एक हफ्ते के लिए आई हूँ. फिर मे मौसी के यहाँ जाकर 11थ मे अड्मिशन ले लूँगी.

रवि: ( पूनम को अच्छे से अपने पिंजरें मे उतारने के लिए) मैं अब तुम्हारे बिना कैसे रहूँगा.

पूनम: रवि मैं क्या कर सकती हूँ. तुम्हें तो पता है है. माँ के देहांत के बाद बाबा ने मुझ मोसी के घर भेज दिया था. और बाबा सोचते हैं, कि जवान लड़की माँ की निगरानी के बिना बिगड़ सकती है. और इसे लिए वो मुझ वहाँ पढ़ा रहे हैं. तुम उदास मत हो मैं बीच-2 मे तुमसे मिलने आती रहूंगी.

रवि: मैं तुम्हारी याद मे तड़प-2 कर मर जाउन्गा.

पूनम: (रवि की बात सुन कर उसकी ओर खींची जा रही थी. उसने अपने हाथ को रवि के होंठो पर रख दिया) ऐसे ना कहो रवि, अभी हमारी उम्र है क्या है.

रवि ने पूनम की जाँघो पर सर रखे हुए, उसके सर को अपने हाथ से अपने ऊपेर झुकाना शुरू कर दिया. पूनम रवि की बातों को सुन कर भावनाओं मे बह गयी. और इस बार हल्का सा इशारा पाते ही, पूनम ने अपनी आँखे बंद कर के, अपने होंठो को रवि के होंठो की ओर बढ़ा दिया.

और दोनो के होन्ट एक दूसरे से मिल गये. इस बार पूनम भी रवि के होंठो को बड़े प्यार से चूस रही थी. दोनो एक दूसरे को 5 मिनट तक ऐसे ही किस करते रहे. 5 मिनट मे अब पूनम ने अपने होंठो को रवि के होंठो से अलग कर लिया. उसकी आँखों मे वासना की खुमारी छाई हुई थी. रवि उसकी तरफ देखते हुए मुस्कुराने लगा. पूनम एक दम से शरमा गयी. और उसके होंठो पर मुस्कान फैल गयी.

रवि उसकी जाँघो से सर उठा कर सीधा बैठ गया. रवि की पीठ पीछे से दीवार के साथ सटी हुई थी. उसने पूनम को पकड़ कर अपनी गोद मे खींच लिया. पूनम एक दम से कसमसा गयी.

पूनम: ओह उईमा ये क्या कर रहे हो.

 
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