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जैसे ही निर्मला ने पानी का ग्लास राज की तरफ बढ़ाया. वो थोड़ा झुक गयी. जिससे उसकी साड़ी का पल्लू खिसक गया. और निर्मला की बड़ी-2 चुचियाँ ब्लाउस मे कसी हुई राज की आँखों के सामने आ गयी. राज ने एक पल के लिए उसकी चुचियों की तरफ देखा. और फिर अपनी नज़रें फेर ली. निर्मला इस घटना के कारण एक दम से शरमा गयी. और थोड़ा सा घबरा भी गयी. राज ग्लास मे पानी लिए धीरे-2 पानी पीने लगा. निर्मला वहीं पैरों के बल नीचे बैठ गयी. उसने अपना पल्लू ठीक कर लिया था. पर फिर भी ना जाने क्यों राज का ध्यान फिर से एक बार उसकी चुचियों की तरफ चला गया.
निर्मला की आँखें बहुत पारखी थी. जब उसने देखा, कि राज बाबू जी उसकी चुचियों को बीच -2 मे देख रहे हैं. तो निर्मला के होंठो पर मुस्कान से फैल गयी. जिसे उसने अपने होंठो पर अपनी साड़ी का पल्लू रख कर छुपा लिया. जैसे ही राज ने दूसरी तरफ नज़र घुमाई. निर्मला ने अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा सा जान बूझ कर अपनी चुचियों से हटा लिया. जिससे उसकी ब्लाउस मे कसी हुई चुचियों का कुछ हिस्सा नज़र आने लगा.
राज ने पानी पाया. और ग्लास निर्मला की तरफ बढ़ा दिया. निर्मला ने ट्रे को आगे कर दिया. और राज ने खाली ग्लास ट्रे पर रख दिया. और निर्मला वैसे ही बैठी रही. जब भी राज निर्मला की ओर देखता. उसे निर्मला की चुचियों का ऊपरी हिस्सा दिख जाता. पर राज इन सब से बचना चाहता था.
राज : तुम ऐसे बैठी -2 थक जाओगी. जाओं अंदर जाकर आराम से अपना काम करो.
निर्मला: बाबू जी काम ही तो कर रही हूँ.
राज : क्या मतलब.
निर्मला: बाबू जी आपकी सेवा का मोका पहली बार मिला है. इससे बड़ा और क्या काम हो सकता है.
राज ने भी दुनियाँ देखी थी. वो निर्मला को कुछ ही पलों मे ताड़ चुका था. पर राज ने ललिता के अलावा किसी और औरत को आँख उठा कर भी नही देखा था. फिर कमरे से रवि और मुरली राज की तरफ आने लगे.
निर्मला: (मुस्कुरा कर खड़ी होती हुई) बाबू जी फिर हमें सेवा का मोका देना. हम कोई कसर नही छोड़ेंगी.(और निर्मला अपनी गान्ड मटकाते हुए कमरे मे चली गयी)
उसके बाद राज मुरली और रवि के साथ खेतों को चक्कर लगाने चला गया. तीनो काफ़ी देर तक घूमते रहे. जब तीन घंटों बाद वापिस आए तो रवि ने देखा राज की कार पर धूल जमी हुई है. रवि दौड़ कर कार के पास गया. और देखने लगा.
राज :क्या हुआ क्या देख रहा है.
रवि: बाबू जी आपकी कार पर धूल जम गये है. मे सॉफ कर देता हूँ.
राज ने कार से उसे एक कपड़ा निकाल दिया. और रवि कार सॉफ करने लगा. राज वहीं खड़ा हो गया.
राज : मुरली अच्छा तो मे अब हम चलते हैं.
मुरली: बाबू जी सिर्फ़ पाँच मिनिट मेरे साथ चलें. पिछली फसल को बेच कर मुझ 5 लाख रुपये मिले हैं . आपकी अमानत है. साथ मे ले जाए. आइए बाबू जी.
और राज उसके पीछे-2 उसके कमरे के पास आ गया. मुरली की बीवी बाहर एक साइड मे कपड़े धो रही थी. उसने अपनी साड़ी के पल्लू को कमर मे लापेट रखा था. जैसे ही उसने राज को मुरली के साथ आते देखा. निर्मला ने अपने ब्लाउस के ऊपेर के दो हुक्स खोल दिए. जिससे उसकी चुचियाँ और बाहर की तरफ झलकने लगी. जैसे ही राज बाहर खाट पर बैठा . मुरली पैसे लाने अंदर चला गया.
थोड़ी देर बाद अचानक उसे चूड़ियों के खनकने की आवाज़ सुनाई दी. जैसे ही राज ने सर उठा कर देखा. तो सामने निर्मला बैठी कपड़े धो रही थी. उसकी फूली हुई बड़ी-2 चुचियाँ बाहर की तरफ झलक रही थी. राज का ध्यान ना चाहते हुए भी बार-2 उसकी चुचियों पर जा रहा था. जो आधी से ज़्यादा बाहर झलक रही थी. और निर्मला राज की तरफ देख कर बेशर्मी से मुस्कुरा रही थी. थोड़ी देर बाद मुरली बाहर आ गया. और राज को एक लिफाफे मे पैसे दे दिए. और राज उठ कर कार की तरफ चलने लगा.
रवि कार सॉफ कर चुका था. जब राज ने अपनी कार को चमकते हुए देखा. तो उसने एक बार रवि के पीठ थप थपा दी. जिससे रवि खुस हो गया. जैसे ही राज कार खोल कर बैठने लगा. कार के पास आकर एक जीप रुकी. जीप में एक बहुत ही हटा कटा 30 साल की उम्र का एक आदमी बैठा था. उसकी जीप मे पीछे की तरफ चार और पहलवान टाइप आदमी बैठे थे. सब के हाथों मे गन्स थी. राज उस शख्स की तरफ देखने लगा.
आदमी: अबे ऐसे क्या देख रहा है राज पहचाना नही क्या.
राज : नही कोन हो तुम.
आदमी: यार मे हूँ विशाल विशाल ठाकुर.
विशाल और राज दोनो 12थ तक एक ही क्लास मे पढ़े थे. पर बाद मे वो राज से कभी मिल नही पाया था. राज के होंठो पर मुस्कान फैल गयी. विशाल जीप से नीचे उतरा और राज के गले से लग गया. और फिर राज के कंधों को पकड़ते हुए बोला.
विशाल: वाह याआअर जैसा नाम वैसे ही बदन बिल्कुल राजा हो गया हैं. वाह क्या गठीला बदन पाया है मेरे दोस्त ने. एक बार कोई दुस्मन देख ले तो वहीं डर कर मर जाए. तुझे देख कर बहुत ख़ुसी हुई राज.
राज : मुझ भी विशाल.
विशाल: (थोड़ा गंभीर होते हुए) सॉरी यार मुझ भाभी और डॉली बेहन के पति के बारे मे पता चला. सुन कर बहुत दुख हुआ. तेरा पता ढूँढने की बहुत कोशिश की. मे तुम्हारे दुख मे सरीक ना हो सका. हो सके तो मुझ माफ़ कर देना.
राज : (होंठो पर झूठी से मुस्कान लाते हुए) नही-2 कोई बात नही. इसमे माफी माँगने की क्या बात है. जो होना था वो तो हो ही गया.
विशाल: अच्छा यार चल मेरे साथ बहुत दिनो बाद मिला है. चल घर चल.
राज : नही यार आज नही जा पाउन्गा. फिर कभी. डॉली घर पर अकेली होगी.
विशाल: अच्छा सुन कल मेरे बेटे की बर्तडे पार्टी है. हो सके तो आ जाना. कहते हुए अच्छा तो नही लग रहा. पर तू इतने दिनो बाद मिला है. इसलिए बुला रहा हूँ. मुझ पता है अभी तुम किसी पार्टी मे नही जाना चाहोगे. पर फिर भी अपने दोस्त की खातिर आ जाना यार
राज : ठीक है मैं कल ज़रूर आउन्गा.
और राज और रवि दोनो कार मे बैठ कर अपने गाँव की तरफ चल पड़े. अब निर्मला के बारे मे कुछ बता दूं. निर्मला एक 26 साल की बहुत मस्त और चुदेल औरत थी. उसकी शादी 6 साल पहले मुरली से हुई थी. तब मुरली किसी और ज़मींदार की हवेली मे काम करता था.
जब कमजोर मुरली निर्मला के भरे हुए बदन को ठीक से संतुष्ट नही कर पाया. तो निर्मला ने अपने ज़मींदार के साथ संबंध बना लिए थे. और करीब वो उस ज़मीनदार से 2 साल तक अपनी चूत की आग को ठंडा करती रही थी. ज़मींदार महीने मे चार पाँच बार उसकी चूत को जम कर चोदता था. पर महीने मे चार-5 चुदने पर भी उसकी चूत की आग ठंडी नही हो पाती थी. और एक दिन मुरली को किसी वजह से ज़मींदार ने निकल दिया. और मुरली को राज के खेतों मे काम मिल गया था. पर खेतों मे बाकी मजदूर भी अपने परिवारों के साथ रहते थे. पर निर्मला को उनमे से कोई भी मजदूर ऐसा नही लगा जो उसके भरे हुए बदन को अपने हाथों से अच्छे से मसल सकें और उसकी चूत की आग को ठंडा कर सके.
राज और रवि कुछ ही देर बाद अपने घर पर पहुँच गये. शाम ढल चुकी थी. राज और रवि दोनो ने सुबह से कुछ नही खाया था. हरिया ने उनके आते ही खन्ना लगना चालू कर दिया. और राज अपने रूम मे फ्रेश होने चला गया. जब राज और रवि दोनो ने खाना खा लिया, तो रवि हाल मे बैठा डॉली की ओर देखने लगा. डॉली अपने हाथों मे साहिल को लिए बैठी थी. रवि का दिल छोटे से साहिल को देख कर उसको उठाने का मन करने लगा.