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सियासत और साजिश complete

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विशाल के जाने के बाद राज सोच मे पड़ गया…विशाल की कही बातें राज को जिंजोड़ कर रख गयी थी………

राज का दिल बेचैन हो गया, वो उठ कर अपने रूम मे आ गया, और बेड पर लेट गया….पर उसके मन मे तूफान सा उठ रहा था, फिर वो हवेली के बाहर आकर अपनी कार मे बैठा , और खेतो की ओर चल दिया….राज के दिल मे सारा दिन विशाल की कही हुई बातें घूम रही थी….जब राज शाम को घर वापिस आया तो, वो नशे मे एक दम धुत था…बाहर बारिश शुरू हो गयी थी…हरिया ने राज को देखते ही, टेबल पर खाना लगाना चालू कर दिया…

राज अपने रूम मे कपड़े चेंज करने लगा…..उसके दिमाग़ की नसे विशाल की बातों के बारे मे सोच- 2 कर फटने को थी…यूँ तो वो पहले भी अकेला पन महसूस करता था…पर जब डॉली और साहिल यहाँ से चले गये थे…राज अपने आप को और भी तन्हा महसूस करने लगा था. और आज विशाल की बातों ने राज के जख़्मो को हरा कर दिया था…..

राज कपड़े चेंज करके जैसे ही बाहर आया तो उसने देखा रोमा बाहर डाइनिंग टेबल पर खाना लगा रही है…जब उसने हरिया को आस पास नही देखा, तो उसने रोमा से हरिया के बारे मे पूछा…

रोमा: बाबू जी आज हरया काका की तबीयत कुछ खराब थी, इसीलिए वो पीछे अपने कमरे मे चले गये हैं…

राज : तो ठीक है, तुम आज यहीं सो जाओ….वो उस कमरे मे हरिया सोता है..( कमरे की तरफ इशारा करते हुए)

रोमा: जी बाबू जी….

राज का मन खाना खाने का भी नही था….उसने हाल के मेन डोर की चाबी रोमा को दी, और कहा..

राज : ये लो….डोर बंद कर दो….मुझ अभी भूक नही है….

रोमा थोड़ा अहसहज महसूस कर रही थी….वो राज के साथ अकेली हवेली के अंदर बंद होने जा रही थी…वो चाबी लेकर बाहर डोर पर आई…..वो अपनी साड़ी बदलना चाहती थी…पर बाहर जोरों के बारिश हो रही थी…इसीलिए उसने अपना इरादा बदल दिया.. दरअसल जो ब्लाउस उसने पहना हुआ था, वो उसे बहुत टाइट लग रहा था….

रोमा ने डोर लॉक किया, और वापिस अंदर आ गयी…राज वहाँ पर नही था…वो अपने रूम मे जा चुका था…रोमा ने बर्तन टेबल पर से हटाए…और किचिन मे रख दिए…और फिर जो रूम राज ने बताया था….उस रूम मे चली गयी…वहाँ एक छोटे से टेबल पर एक बिस्तर पड़ा हुआ था….

रोमा ने बिस्तर को ज़मीन पर लगा दिया….और डोर को भिड़ा कर बिस्तर पर लेट गयी…पर तंग ब्लाउस के कारण उसे नींद नही आ रही थी…उसने सोने की बहुत कॉसिश की..पर जब उसे नींद नही आई तो, उसने अपना ब्लाउस खोल दिया, और अपनी साड़ी के पल्लू को अपनी चुचियों पर लापेट लिया…..

रोमा फिर से लेट गयी….अभी उसे लेटे हुए एक दो मिनट ही हुए थे…कि अचानक से रूम की लाइट ऑन हो गयी….रोमा एक दम से घबरा गयी….वो जल्दी से उठ कर खड़ी हो गयी. जब उसने डोर की तरफ देखा, तो सामने राज खड़ा था…

उसकी तनी हुई मोटी चुचियाँ डर के मारे तेज़ी से साँस लेने से साड़ी के पल्लू के अंदर ऊपेर नीचे हो रही थी….अपनी हालत देख कर वो एक दम से सकपका गयी…

राज : (नशे के कारण लड़खड़ाती हुई आवाज़ मे) वो मुझ डोर की चाबी दो…मेरी कार मे मेरी वाइन की बॉटल रह गयी है….मुझ वो लानी है…

रोमा ने घबराते हुए, चाबी को बिस्तर से उठा कर राज की तरफ बढ़ा दिया…राज ने रोमा के हाथ से चाबी ली, और बिना रोमा की ओर देखे हुए, बाहर चला गया…जैसे ही राज रूम के बाहर गया….रोमा डोर पर आकर राज को देखने लगी…राज लड़खड़ाता हुआ डोर क तरफ जा रहा था…

अचानक रोमा को ध्यान आया कि, बाहर तेज बारिश हो रही है….और बाबू जी नशे मे है. अगर गीले फर्श पर उनका पैर फिसल गया तो, उन्हे चोट भी लग सकती है….रोमा जल्दी से बाहर आ गयी…और राज को आवाज़ देकर रोक लिया…

रोमा: (राज को पीछे से आवाज़ लगाते हुए) बाबू जी रुकिये मे ला देती हूँ….बाहर बहुत तेज बारिश हो रही है….

राज : (पीछे मूड कर रोमा की ओर देखते हुए) हूँ…ये लो तुम ही ले आओ…

राज ने कार और डोर दोनो की चाबियाँ रोमा को पकड़ा दी….और खुद अपने रूम मे चला गया…हवेली का हाल बहुत बड़ा था…पूरे हाल मे इस टाइम एक ही लाइट जल रही थी…जिससे हल्का अंधैरा सा बना हुआ था…रोमा ने डोर खोला तो बारिश की फुहार उसके फेस पर गिरने लगी….

रोमा ने बाहर देखा…बाहर जोरों से बारिश लगी हुई थी…वो जल्दी से बाहर गयी. और कार खोल कर अंदर पड़ी वाइन की बॉटल निकाल ली…रोमा कुछ ही पलों मे एक दम भीग गयी थी…उसकी साड़ी भीग कर उसकी चुचियों पर चिपक गयी थी..हल्के क्रीम कलर की साड़ी के पल्लू मे से उसकी चुचियाँ सॉफ झलक रही थी….

यहाँ तक कि उसके ब्राउन कलर के निपल्स भी उसकी साड़ी के पल्लू से झाँक रहे थे… पर रोमा को जल्दबाज़ी मे अपनी हालत का पता नही चला…वो तेज़ी से अंदर आई…और डोर को लॉक करके राज के रूम की तरफ जाने लगी…जब उसने डोर नॉक किया तो, राज ने उसने अंदर आने को कहा….वो एक दम भीगी हुई थी….उसके जिस्म की खूबसूरती उसके बदन से चिपकी हुई साड़ी से झलक रही थी…..

जैसे ही रोमा रूम के अंदर आई…उसकी साँसें एक दम थम गयी…गर्मियों की ये पहली बारिश थी…राज अपने कपड़े उतार कर सिर्फ़ अंडरवेर मे खड़ा था..जब उसने मूड कर रोमा की तरफ देखा…तो उसकी आँखे रोमा की चुचियों पर जा अटकी… पर रोमा का ध्यान वहाँ नही गया….

राज : (ऐसे ही अंडरवेर मे सोफे बैठते हुए) लाओ यहाँ पर रख दो…

रोमा ने आगे बढ़ कर बॉटल को टेबल पर रख दिया..और मूड कर जाने लगी…राज पीछे से रोमा के चुतड़ों को देख रहा था…उसकी साड़ी और पेटिकॉट उसकी गान्ड से चिपका हुआ था….राज ने उसे आवाज़ देकर रोक लिया….रोमा मूड कर टेबल के सामने आकर खड़ी हो गयी…

 
राज टेबल के दूसरी तरफ सोफे पर बैठा हुआ था….उसने रोमा को नीचे बैठ कर वाइन को ग्लास मे डालने के लिए कहा….रोमा राज के सामने टेबल की दूसरी तरफ बैठ गयी..और ग्लास मे वाइन डालने लगी…..राज की नज़रे रोमा के झलक रहे ब्राउन कलर्स के निपल्स पर अटकी हुई थी…

अचानक से रोमा का ध्यान राज की ओर गया…जो अपनी नशीले आँखों से उसकी चुचियों को घूर रहा था…जब उसने अपनी चुचियों की तरफ देखा….तो वो एक दम से घबरा गयी….उसकी चुचियों के निपल्स भीगे होने के कारण एक दम तने हुए थे…और सॉफ दिखाई दे रहे थे….रोमा एक दम से घबरा गयी…उसने जल्दी से एक पेग बनाया, और खड़ी हो गयी….

रोमा: (घबराते हुए) बाबू जी अब मे जाउ…. (उसने अपनी बाहों से अपनी चुचियों को ढक लिया…

राज : रूको….क्या हुआ कुछ काम है..

राज ने पेग ख़तम किया, और खड़ा हो गया….उसका लंड उसके अंडरवेर को सामने से फुलाए हुए था…ये देख कर रोमा ने अपने सर को झुका लिया…उसका दिल जोरों से धड़कने लगा…राज के होंठो पर मुस्कान फैल गयी…और वो उठ कर बाथरूम की तरफ चला गया….

थोड़ी देर बाद उसने रोमा को बाथरूम से आवाज़ दी…और उसे बाथरूम मे बुला लिया… राज की आवाज़ सुन कर उसके हाथ पैर काँपने लगे… पर वो राज की बात का टाल भी नही सकती थी….वो काँपते हुए कदमों से बाथरूम की तरफ जाने लगी… उसका दिल जोरो से धड़क रहा था…बाथरूम का डोर खुला था…जैसे ही वो बाथरूम के डोर के सामने आई तो, उसने देखा कि, राज शवर के नीचे खड़ा नहा रहा है…

उसकी पीठ रोमा की तरफ थी…राज ने फेस घुमा कर रोमा की तरफ देखा.. रोमा अपनी बाहों मे अपनी जवानी को छुपाए हुए खड़ी थी…राज ने फेस को फिर से आगे कर लिया….और कड़क आवाज़ मे बोला….

राज : मेरी पीठ को रगड़ दो….

ये सुनते ही रोमा के दिल की धड़कन बंद हो गयी….जैसे उसने कोई साँप देख लिया हो.. राज ने फिर से गुस्से से कहा…अब रोमा रुक नही सकती थी…वो आगे बढ़ कर बाथरूम मे घुस गयी…और अपने एक हाथ को अपनी चुचियों से हटा कर, राज की पीठ को रगड़ने लगी…

राज का चौड़ा और गठीला बदन देख कर रोमा भी एक पल के लिए मंत्र मुग्ध हो गये…पर अगले ही पल एक अंजाना सा डर उसके दिल मे घर कर गया…

राज : क्या हुआ….दूसरा हाथ टूटा हुआ है क्या….

रोमा: (एक दम से हड़बड़ाते हुए) जी क्या बाबू जी नही…..

राज : फिर दूसरे हाथ से भी रागडो

रोमा ने डरते हुए, अपना दूसरा हाथ भी अपनी चुचियों से हटा लिया…शवर का पानी राज की पीठ पर गिर कर रोमा की चुचियों को भिगोने लगा…उसकी साड़ी और गीली होने लगी…रोमा मन ही मन यही दुआ कर रही थी, कि राज उसकी तरफ ना घूमे. पर राज के मन की बात को समझते हुए भी…वो कुछ नही कर पा रही थी..और अपने दोनो हाथों से राज की पीठ को रगड़ रही थी….

फिर राज ने वो किया…जिसका रोमा को डर था…राज उसकी तरफ घूम गया… रोमा एक दम से चोंक पड़ी…उसने अपने हाथों को हटा लिया…और अपनी चुचियों पर रखने लगी…पर राज ने उसके हाथों को पकड़ लिया….और होंठो पर वासना से भरी मुस्कान लाते हुए बोला..

राज : अब ज़रा मेरी छाती को भी रगड़ कर सॉफ कर दो….

रोमा ने अपना सर नीचे झुका रखा था…उसका दिल ये सोच कर जोरों से धड़कने लगा कि, बाबू जी उसकी चुचियों को देख रहे है…वो अपनी इस हालत पर खुद को लाचार महसूस कर रही थी….राज ने उसके दोनो हाथों को पकड़ कर अपनी चैस्ट पर रख लिया…

राज : (रोमा के तने हुए निपल्स को देखते हुए) अब जल्दी कर क्या सोच रही हैं…

रोमा ने डरते हुए, अपने कांप रहे हाथों से राज की चैस्ट को मलना चालू कर दिया…रोमा राज से फाँसला बनाए खड़ी थी….पर राज रोमा के बदन को पास से महसूस करना चाहता था, उसने रोमा की कमर को दोनो हाथों से थाम कर एक झटके मे अपनी तरफ खैंच लिया….रोमा एक दम से सकपका गयी…उसकी चुचियाँ राज की चौड़ी छाती मे आकर धँस गयी….उसने अपने फेस को झुका लिया…उसके हाथ वहीं थम गये…राज के हाथ उसकी कमर से होते हुए, उसके चुतड़ों पर आ गये…

और राज ने अपने बड़ी-2 हथेलियों मे रोमा के चुतड़ों को दबोच लिया…रोमा अपने चुतड़ों पर राज के हाथों को महसूस करके एक दम मचल उठी…

राज : (अपनी हथेलियों से रोमा के चुतड़ों को मसलते हुए) क्या हुआ…चलो शुरू करो

रोमा: (कसमसाते हुए) बाबू जी छोड़िए….

राज : क्यों ऐसे नही रगड़ सकती….

राज का तना हुआ मोटा लंड रोमा के पेट पर रगड़ खा रहा था…रोमा राज के लंड की कठोरता को अपने पेट पर महसूस करते हुए घबरा रही थी…..पर रोमा ने ना चाहते हुए भी राज की चैस्ट को सहलाना चालू कर दिया…..

रोमा के बदन मे एक अज्जीब सी सिहरन दौड़ने लगी…राज रोमा के चुतड़ों को अपनी हथेलियों मे भर-2 कर मसल रहा था…अचानक से राज ने एक हाथ आगे ले जाकर रोमा के सारी के पल्लू को पकड़ कर खैंच दिया….अब उसकी चुचियाँ बेपर्दा हो गये थी…रोमा राज की बाहों से अलग होने की कॉसिश करने लगी…

राज : क्या हुआ, क्यों मचल रही हो….

रोमा: (घबराई हुई आवाज़ मे) बाबू जी मुझ साड़ी का पल्लू ठीक करने दो….

राज : उससे क्या होगा…तुम्हारी चुचियाँ वैसे भी दिख रही थी…

रोमा की आँखे शरम के कारण बंद हो गयी…वो अब चाह कर भी कुछ नही कर सकती थी….राज ने अपने एक हाथ मे रोमा की राइट चुचि को भर लिया, और ज़ोर ज़ोर से मसलना चालू कर दिया….रोमा राज की बाहों मे छटपटाने लगी…और अपनी आख़िरी कॉसिश करते हुए, राज की गिरफ़्त से निकलने की कॉसिश करते हुए, अपने हाथो को इधर उधर मारने लगी….

राज एक दम गुस्से बोखला उठा…उसने रोमा के बालों को पकड़ कर खैंच दिया…रोमा दर्द के मारे चीख उठी….

राज : साली मेरे सामने अपने हाथ चला रही है….तू जानती नही मैं कॉन हूँ…

रोमा राज की गुस्से से भरी हुई आवाज़ सुन कर एक दम से घबरा गयी….राज ने रोमा के साड़ी को पकड़ कर उतार कर एक तरफ फैंक दिया….और रोमा को दीवार से सटा दिया….रोमा की चुचियों के निपल्स राज को अपनी तरफ खैंच रहे थे…राज ने थोड़ा सा नीचे झुक कर रोमा की लेफ्ट चुचि को अपने मुँह मे भर लिया. और ज़ोर -2 से रोमा के निपल को चूसने लगा…..

 
रोमा के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी थी….अब वो मान चुकी थी कि, वो अपनी इज़्ज़त को राज के हाथों से बचा नही पाएगी…और वो राज का कुछ कर भी नही सकती….रोमा का पूरा बदन कांप रहा था…राज के हाथ रोमा के बदन के हर हिस्से को मसल रहे थे, सहला रहे थे….

और राज के हाथों को जादू रोमा के बदन पर होने लगा था…रोमा अपनी आँखे बंद किए, दीवार से पीठ टिका कर खड़ी थी…उसके रोम रोम मे उतेजना की लहरे उमड़ने लगी…और राज अब इन बातों का अंदाज़ा लगाने मे उस्ताद बन चुका था. उसने रोमा के पेटिकॉट का नाडा पकड़ कर एक झटके मे खोल दिया….

रोमा का पेटिकॉट ढीला पड़ते ही, बाथरूम के फर्श पर आ गिरा….रोमा ने अपनी जाँघो को शरम के मारे भींच लिया….रोमा की चूत घनी काली झान्टो से भरी हुई थी…ये देख कर राज का लंड उसके अंडरवेर को फाड़ कर बाहर आने को बेताब था…और उसने अपने अंडर वेअर को निकाल कर अपने मोटे और 8 इंच लंबे लंड को बाहर निकाल लिया…..

जब थोड़ी देर रोमा को कोई हरकत महसूस ना हुई, तो उसने अपनी आँखों कर खोल कर राज की तरफ देखा…जैसे ही उसकी नज़र राज के मोटे लंड पर पड़ी, उसकी दिल की धड़कन थम सी गये, उसकी साँसें तेज़ी से चलने लगी…उसने फिर से अपनी आँखों को बंद कर लिया….राज के होंठो पर कूटलता भरी मुस्कान फैल गयी….

राज ने रोमा को अपनी बाहों मे भरते हुए उठा लिया, और उसे रूम मे ले आया…रोमा का दिल जोरों से धक -2 कर रहा था….ना चाहते हुए भी, उसकी चूत ये सोच -2 कर पानी छोड़ रही थी, कि अब राज अपना मोटा और लंबा लंड उसकी चूत मे पेलने वाला है….रूम मे आते ही राज ने उसे बेड पर पटक दिया….

और उसकी जाँघो को फैला कर खुद उसकी जाँघो के बीच घुटनो के बल बैठ गया…और आगे की तरफ झुक कर रोमा की चुचि को मुँह मे भरते हुए, उसके निपल को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा…रोमा के मुँह से मस्ती से भरी आह निकल गयी…और वो ये सोच कर शरमा गयी कि, बाबू जी ये सोच रहे होंगे, कि मैं जानबूज कर नखरे कर रही हूँ..

राज दूसरी चुचि को पकड़ कर मसलने लगा…उसका लंड रोमा की चूत की फांकों पर रगड़ खा रहा था….रोमा ने मस्ती मे आकर अपने दाँतों से होंठो को काटना शुरू कर दिया, और अपने दोनो हाथों से बेड शीट को कस के पकड़ लिया….

राज के तने हुए लंड का मोटा सुपाडा रोमा की चूत के छेड़ पर सटा हुआ था… और उसकी चूत के छेद मे संकुचन हो रहा था….राज समझ गया कि, अब रोमा उसका लंड अपनी चूत मे लेने के लिए मचल रही है….राज ने अपने लंड को हाथ से पकड़ सही से रोमा की चूत से भिड़ा दिया….और अपनी कमर को नीचे की तरफ पेला.

राज के लंड का मोटा सुपाडा रोमा की चूत के टाइट छेद को फैलाता हुआ अंदर घुस गया….एक ही बार मे राज का आधे से ज़्यादा लंड रोमा की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर घुस कर फँस सा गया था…रोमा का बदन दर्द के मारे अकड़ गया…वो दर्द के मारे तिलमिला उठी…..

रोमा: आह बाबू जीईई धीरीए ओह मार डाला बाबू जीईई आप ने..

रोमा की दर्द से भरी चीख सुन कर राज को जैसे अपने ऊपेर घमंड सा होने लगा….और उसने बिना रोके अपने लंड को तेज़ी से रोमा की चूत के छेद के अंदर बाहर करना चालू कर दिया…..राज का लंड कुछ ही पलों मे पूरा अंदर घुस्स कर रोमा की बच्चेदानी से जाकर टकराने लगा…कुछ देर बाद रोमा का दर्द ख़तम हो गया, और वो भी मस्त होकर अपनी जाँघो को फैला कर राज के लंड के तेज वारों को अपनी चूत मे झेलने लगी…..

रोमा की चूत गरम होकर पानी छोड़ने लगी, और राज का लंड उसकी चूत से निकल रहे पानी के कारण भीग कर फॅक-2 करता हुआ, अंदर बाहर होने लगा…रोमा भी मस्त होकर आह ओह्ह्ह जैसी मस्ती से भरी आवाज़ें निकाल रही थी…राज के जबर्दश्त धक्को से उसे स्वर्ग दिख रहा था . अब राज के धक्को मे तेज़ी आ चुकी थी . रोमा ने भी मस्ती मे आकर अपनी टाँगे राज की कमर पर चढ़ा ली . थोड़ी ही देर मे दोनो अपने परमआनंद को प्राप्त कर चुके थे उस रात राज ने रोमा की चूत की धज्जियाँ कई बार उड़ाई और उसके बाद थककर नींद के आगोश मे चले गये

रात भर चुदने के कारण रोमा का बदन चूर चूर हो गया था…जब उसकी आँख खुली तो, वो राज की बगल मे बिना कपड़ों के लेटी हुई थी…उसकी चूत मे थोड़ी से सूजन आ चुकी थी….रोमा को उठ कर बैठने मे भी तकलीफ़ हो रही थी…वो मुस्किल से उठ कर बैठ गयी…उसकी नज़र राज पर पड़ी….वो भी एक दम नंगा लेटा हुआ था. उसका मुरझाया हुआ लंड देख कर रोमा के होंठो पर मुस्कान आ गयी….

कल रात इस लंड से पता नही कितनी बार चुदि थी….और कितनी ही बार उसकी चूत ने पानी छोड़ा था…उसने अपनी चूत को अपने हाथ से सहला कर देखा….उसने हल्का-2 दर्द हो रहा था….पर राज का लंड देख कर, उसकी चूत की दीवारों मे फिर से सरसराहट होने लगी थी…

रोमा अपने आप को रोक ना सकी….और वो राज की तरफ करवट लेकर लेट गयी…और अपना हाथ नीचे ले जाकर राज के लंड को अपनी मुट्ठी मे भर लिया….और धीरे-2 राज के लंड की चमड़ी को आगे पीछे करने लगी….जिसे राज की नींद टूट गये…और वो जाग गया….पर उसने अपनी आँखों को नही खोला….

रोमा अपनी हसरत से भरी हुई, आँखों से राज के लंड को देखते हुए, तेज़ी से हिला रही थी….राज का लंड कुछ ही पलों मे तन कर खड़ा हो गया…रोमा की चूत फिर से पानी छोड़ने लगी…और रोमा उठ कर बैठ गयी…..उसने राज की तरफ देखा, और फिर झुक कर राज के लंड को मुँह मे ले लिया…राज एक दम से मस्त हो गया….आँखे बंद किए हुए, राज के होंठो पर मुस्कान फैल गयी…

रोमा अपनी जीभ निकाल कर राज के लंड को चाट रही थी…कभी उसके लंड को अपने होंठो मे दबा-2 कर चूसने लगती…और अपने हाथ से राज के अंडकोषों को सहलाने लगती….राज अब पूरी तरहा गरम हो चुका था…उसने रोमा को उसके खुले हुए बालों से पकड़ लिया….रोमा एक दम से घबरा गयी….

जब उसने राज की तरफ देखा, तो उसके होंठो पर वासना से भरी कुटिल मुस्कान फैली हुई थी…उसने रोमा को अपने ऊपेर खैंच लिया…और एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर, लंड के सुपाडे को उसकी चूत के छेद पर लगा दिया….जैसे ही रोमा की सूजी हुई चूत के छेद पर राज के लंड का गरम सुपाडा लगा, तो रोमा के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी….वासना और मस्ती के कारण उसकी आँखे बंद हो गयी….

रोमा के बाल बिखरे हुए थे….उसकी चुचियों पर राज के दाँतों के निशान बने हुए थे…और राज की उंगलियाँ के निशान रोमा के पूरे बदन पर छपे हुए थे.

राज : (रोमा को इस हालत मे भी लंड के लिए तड़पटा देख कर) कल तो बहुत नखरे कर रही थी…और आज सुबह-2 ही तेरी चूत लंड लेने के लिए पानी छोड़ रही है….

रोमा राज की बातों को सुन कर एक दम शरमा गये…उसने अपने हाथों से अपने फेस को ढक लिया…ये देख कर राज के होंठो की मुस्कान और बढ़ गयी…उसने दोनो हाथों से रोमा की कमर को कस्के पकड़ लिया….और पूरी ताक़त से अपनी कमर को ऊपेर की ओर उछालते हुए, अपने आधे से ज़्यादा लंड को उसकी चूत मे घुस गया…रोमा का बदन मस्ती और दर्द के कारण मचल उठा…….

रोमा: अह्ह्ह्ह बाबू जीईए धीरीई ओह बहुत दर्द हो रहा है….

राज : (लगतार चार पाँच धक्के मार कर राज ने अपना पूरा लंड रोमा की चूत मे घुसा दिया. ) रात को तो खूब उछल-2 कर मेरा लंड चूत मे ले रही थी. अब क्यों दर्द होने लगा….

रोमा: आहह बाबू जीए धीरीई करो ना…..कल रात आपके मोटे लंड ने मेरी चूत को रगड़-2 का सूजा दिया है…देखो ना कैसे फूल गयी है….

 


राज : फिर कल नखरे क्यों कर रही थी….

रोमा: (शरमा कर अपने फेस राज की चैस्ट मे छुपाते हुए) मैं कहाँ नखरे कर रही थी….पहली बार को छोड़ कारर्र अहह धीरीए मैने फिर मना कहाँ किया था..

राज रोमा की बातों को सुन कर जोश से भर गया….और तेज़ी से अपनी कमर को ऊपेर की ओर उछाल कर रोमा की चूत मे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा….रोमा मस्ती मे आकर आहह ओह्ह्ह बाबू जी करने लगी…..और मस्त होकर अपनी गान्ड को उछाल-2 कर राज के लंड पर पटाकने लगी…

रोमा: उंघह उम्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह बाबू जीईई चोदिये और ज़ोर से चोदिये ओह फाड़ दो मेरी चूत को अह्ह्ह्ह बाबू जी मैं नखरे नही करूँगी….

रोमा इतनी मस्त हो चुकी थी, कि वो पागलों की तरहा अपनी गान्ड को ऊपेर नीचे करते हुए, राज के मोटे लंड को अपनी चूत मे पिलवा रही थी….राज के लंड का मोटा सुपाडा हर बार अंदर जाकर रोमा की बच्चेदानी से टकरा रहा था….राज ने रोमा की चुचियों को अपनी हथेलियों मे भर कर मसलना चालू कर दिया….

रोमा और मस्त हो गयी…और राज के हाथों के ऊपेर अपने हाथों को रख कर, और ज़ोर से अपनी चुचियों को मसलवाने लगी….

रोमा: हां बाबू जी निकाल लो सारा रस्स अहह बहुत तंग करती है…इनकी सारी अकड़ निकाल दो और ज़ोर से मस्लो…..बाबू जी ओह्ह्ह्ह मेरीई चूत फिर से पानी छोड़ने वाली है.. आह बाबू जीए ओह और ज़ोर चोदो…….उईमाआअ बहुत अच्छा लग रहा है.

रोमा की चूत की दीवारों ने राज के लंड को अपने अंदर कसना चालू कर दिया…राज को महसूस हो रहा था, जैसे रोमा की चूत की दीवारें उसके लंड अपने अंदर मसल डालेंगी…फिर अचानक से रोमा की चूत दीवारें फैलने और सिकुडने लगी.. गरम पानी की नदी रोमा की चूत से बह कर राज के लंड को भिगोने लगी…राज रोमा को मस्त होकर झड़ता देख कर, और जोरों से धक्के लगाने लगा.. और रोमा के झड़ने के एक मिनिट बाद ही झाड़ गया….राज के लंड का वीर्य रोमा की चूत की दीवारों को भिगोता हुआ, उसकी बच्चेदानी मे जाकर इकट्ठा होने लगा…

रोमा के होंठोपर संतुष्टि से भरी मुस्कान फैल गयी….और वो राज की चैस्ट पर अपना सर रख कर लेट गयी….

उसी दिन शाम 5 बजे…..

शाम को राज तैयार होकर हवेली से निकल गया….वो बहुत ही तेज़ी से कार ड्राइव करते हुए, शहर की तरफ जाने लगा…आज वो इलाक़े के डीएसपी से मिलने जा रहा था…जब डीएसपी अमन की पोस्टिंग राज के एरिया मे हुई थी…उसने राज से हाथ मिला लिया था…और राज हर महीने उसे अपने काले धंधों के लिए 50000 रुपये देता था…आज सनडे का दिन था…इसीलिए राज सीधा डीएसपी अमन के घर पर चला गया….

राज ने डीएसपी अमन के घर बाहर कार खड़ी की, और कार से निकल कर डोर बेल बजाई…थोड़ी देर बाद डीएसपी अमन के नौकर ने गेट खोला…इनदिनो मे राज का नाम आस पास के सब लोग जान चुके थे…नौकर ने राज को अंदर आने को कहा…

जब राज अंदर आया तो, उसने देखा क़ि, अमन के घर पर पार्टी चल रही थी…तभी अमन राज के पास आया, और राज से हाथ मिलाकर उसे फर्स्ट फ्लोर पर बने अपने रूम मे ले गया….

अमन: कैसे हैं राज जी.

राज : मे ठीक हूँ…तुम्हारा काम कैसा चल रहा है….

अमन: सर आप के होते कोई तकलीफ़ नही हो सकती…और सुनाए अचानक कैसे आना हुआ.

राज : वो दरअसल मैं कल पेसे भिजवाना भूल गया था, सोचा आज चल कर खुद दे आता

हूँ. और तुम से मिल भी लूँगा….

अमन: अर्रे सर पैसे कहीं भागे थोड़े ही जा रहे थे…चलिए अब आप आ ही गये है तो, थोड़ी देर रुकें….आज मेरी वाइफ की बर्तडे पार्टी चल रही है…

राज : अच्छा तो आज तुम्हारी वाइफ का बर्थडे है…..

अमन: जी सर आएँ नीचे चलते हैं…..

राज : (अमन की ओर 500-2 के नोटो पॅकेट बढ़ाते हुए) ये लो अभी मुझ यारा जल्दी है, कुछ ज़रूरी काम हैं….

अमन: जैसे आप की मर्ज़ी सर….आएँ मैं आपको बाहर तक छोड़ दूं….

दोनो निकल कर रूम से बाहर आ गये….जब राज सीडयों से नीचे उतर रहा था, तब किसी के हँसने की आवाज़ ने उसका ध्यान अपनी तरफ खैंचा, राज अपने आप को उस ओर देखने से रोक नही पाया….जैसे ही राज की नज़र उस आवाज़ की तरफ गयी…राज का मुँह खुला का खुला रह गया….

सामने एक लड़की खड़ी थी….वो ग्रीन कलर का टाइट टीशर्ट और ब्लू कलर की जीन्स पहने हुई थी…राज की आँखे उसके चहरे पर गढ़ गयी….उस लड़की का खिलखिलाता हुआ फेस गुलाबी होन्ट, गोल गोरे गालों को देख कर राज उनमे खो सा गया…उस लड़की के बाल उसकी कमर तक आ रहे थे…

राज को यूँ उस लड़की मे खोया देख कर, अमन के होंठो पर मुस्कान आ गयी…उसने राज को कंधों से पकड़ कर हिलाया….राज एक दम से चोंक गया.

अमन: कहाँ खो गये जनाब…..

राज : (उस लड़की की ओर इशारा करते हुए) कॉन है ये लड़की…..

अमन: मेरी वाइफ की सहेली है….उसकी बेटी है…..ब्कॉम फाइनल एअर मे है…

राज : नाम क्या है इसका….

अमन: सुमन नाम है…बहुत ही प्यारी बच्ची है…

राज : (अमन की ओर देखते हुए) मुझ ये लड़की चाहिए….

अमन: (राज की बात सुन कर हैरानी से राज की ओर देखते हुए) ये क्या कह रहे हैं आप…ये मुमकिन नही है….

राज : (अमन के कंधे पर हाथ रखते हुए) राज के लिए कुछ भी नामुमकिन नही होता….और तुम तो जानते ही हो…..मैं अकेला हूँ…..इतनी बड़ी जायदाद को संभालने के लिए मुझ दोबारा शादी करनी है….ताकि आगे चल कर मेरा वारिस मेरी जायदाद को संभाल सकें……

अमन: (राहत के साँस लेते हुए) सॉरी मैं कुछ और ही समझ बैठा था…. पर फिर भी ये होना बहुत मुस्किल है….

राज : क्यों ?

अमन: भले ही सुमन एक साधारण परिवार से है….पर वो लोग बहुत खुदार है….

राज : इसीलिए ये काम मैं तुम्हे सोन्पता हूँ…..हर किसी की कोई ना कोई कमज़ोरी ज़रूर होती है….और इसके घर की कमजोर कड़ी कॉन सी है…वो तुम्हे पता लगाना है..

अमन: पर उससे क्या होगा…

राज : तुम बस पता लगाओ…..मुझ इसके घर के हर मेंबर के बारे मे पता लगा कर बताओ….बाकी मुझ पर छोड़ दो….मैं बाद मे तुम्हे बता दूँगा…कि आगे क्या करना है…

अमन: पर….

राज : (अमन को बीच मे टोकते हुए) तुम्हे इसके लिए जो भी कीमत चाहिए, मे देने के लिए तैयार हूँ….बोलो क्या चाहिए….

अमन: (कुछ देर सोचने के बाद) वैसे तो आप के रहते हुए, किसी चीज़ की कमी नही है, पर हां मेरा एक काम करवा दीजिए…..

राज : बोलो दिल खोल कर बोलो…..मुझ बस ये लड़की चाहिए…..

अमन: मैं वादा तो नही करता पर…..मुझसे जो होसकेगा मैं करूँगा….बस आप मेरी प्रमॉशन करवा दीजिए….

राज : ठीक है…तुम मेरा काम करो…तुम्हारी प्रमोशन पक्की…

अमन: (अमन के होंठो पर मुस्कान फैल गयी…) चलिए मैं आप को बाहर आपकी कार तक छोड़ दूं…..

और अमन राज को छोड़ने के लिए बाहर तक आया….और राज कार मे बैठ कर हवेली की तरफ निकल पड़ा…

 


राज हवेली वापिस आ गया…..पर उसका दिल अभी अमन के घर पर ही था.. राज के दिलो दिमाग़ पर सुमन ने कब्जा कर लिया था….जब से राज ने सुमन को देखा था, तब से लेकर अब तक वो बस सुमन के बारे मे ही सोच रहा था, और दिल मे ये दुआ कर रहा था, कि सुमन उसकी इस हवेली के मलिका बन कर आ जाए…..

राज अभी हाल मे बैठा यही सोच रहा था, कि रोमा उसके लिए कोल्ड ड्रिंक ले आई… पर राज अपने ही ख़यालों मे खोया हुआ था….ये देख कर रोमा ने ग्लास को टेबल पर रखते हुए, राज से पूछा….

रोमा: बाबू जी किन ख़यालों मे खोए हुए हो……

राज : (रोमा की आवाज़ सुन कर चोन्कते हुए) क्या हूँ….कुछ नही……

राज ने रोमा की तरफ देखा….रोमा ने आज पिंक कलर की साड़ी पहनी हुई थी… और पिंक कलर के ब्लाउस के नीचे उसकी ब्लॅक ब्रा के स्ट्रॅप्स सॉफ नज़र आ रहे थी… आज राज ने रोमा को पहली बार ऐसे रंग की साड़ी मे देखा था…. उसने होंठो पर लाइट पिंक कलर की लिपस्टिक लगाई हुई थी…..

राज जानता था कि, ये सब रोमा ने उसके लिए ही किया है….पर राज का ध्यान सुमन पर था….वो ग्लास उठा कर कोल्ड्ड्रिंक पीने लगा…जब रोमा ने देखा कि, राज ने उसकी तरफ ध्यान से देखा भी नही तो, वो खिसिया कर अंदर चली गयी…

ये देख कर राज के होंठो पर मुस्कान फैल गयी….उसने देखा कि हरिया किचिन मे कुछ काम कर रहा था……वो उठ कर अपने रूम मे जाने लगा….रोमा बाहर हाल मे झाड़ू लगा रही थी, जब राज रोमा के पास से गुज़रा तो, उसने रोमा का हाथ पकड़ लिया, और एक ही झटके मे उसे खैंच कर अपने रूम मे ले गया….

रोमा एक दम से डर गयी…..उसे ये डर था, कि हरिया कुछ देख ना ले….रोमा ने अपना हाथ राज से छुड़ा लिया, और बाहर की तरफ जाने लगी….पर राज ने उसे पीछे से अपनी बाहों मे भर लिया, और उसकी दोनो रसीले आमो को अपने हाथ मे लेकर मसलने लगा….रोमा एक दम से मचल उठी…….

रोमा: उफफफफफफ्फ़ आ बाबू जी छोड़ो मुझ क्या कर रहे हो…..हरिया काका अंदर आ गये तो….छोड़ो मुझ…..

राज : अच्छा तुम्हे हरिया की फिकर है….मे अभी उसका कुछ इंतज़ाम करता हूँ….

ये कह कर राज अपने रूम के डोर पर आ गया, और उसने हरिया को आवाज़ लगाई… जैसे ही हरिया उसके रूम के डोर के पास आया….रोमा डोर के पीछे की ओर हो गये.

राज : हरिया आप क्या कर रहे है….

हरिया: बाबू जी बर्तन सॉफ कर रहा था….

राज : अभी कल तक तो आप की तबीयत ठीक नही थी, और फिर से काम पर लग गये. जाओ जाकर आराम कर लो….

हरिया: बाबू जी अब ठीक हूँ….मे कर लूँगा….

राज : मैने कहा ना…आप जाकर आराम कर लीजिए….

हरिया: जैसे आप कहें बाबू जी…..

ये कह कर हरिया वापिस हवेली के पीछे बने अपने रूम मे चला गया…. राज ने हरिया के जाते ही डोर बंद कर दिया…और रोमा को अपनी बाहों मे भर लिया…

रोमा: (नखरे करते हुए) छोड़िए बाबू जी….मैं कब से आपके लिए तैयार होकर बैठी हूँ…और आप है कि आप ने मेरी तरफ एक बार देखा भी नही….

राज : अर्रे मेरी रानी….वो मैं थोड़ा परेशान था, वरना तेरे जैसे फूल का रस पीने का किसका दिल नही करेगा….

राज के हाथ रोमा की पीठ से होते हुए, उसके चुतड़ों पर आ चुके थे, और वो धीरे-2 रोमा के चुतड़ों को मसलने लगा….

रोमा: आह बाबू जी क्या कर रहे है….आप तो अभी से शुरू हो गये….दिन मे ही…रात तो होने दो…..

राज : अब रात तक का इंतजार नही होता…..जल्दी से अपने साड़ी निकाल….मेरा लंड तेरी चूत मे जाने के लिए तड़प रहा है…..

रोमा: (मस्त होते हुए) ओह्ह्ह बाबू जी मेरी चूत भी आपके लंड को याद करके पानी छोड़ रही है….पर अभी नही मेरे कपड़े खराब हो गये, तो हरिया काका को शक हो जाएगा…आपकी रोमा आपकी दासी है….रात को जितना चाहे अपना लंड डाल कर मुझ चोद लेना.

राज : पर अभी का क्या….मैं रात तक नही रुक सकता….

राज ने रोमा को अपनी बाहों से अलग कर दिया….और अपनी पेंट और अंडरवेर को एक साथ उतार कर घुटनो से नीचे कर दिया….राज का मोटा और 8 इंच लंबा लंड हवा मे झटके खाने लगा….जिसे देख कर रोमा की चूत के छेद मे कुलबुलाहट होने लगी…रोमा ने आगे बढ़ कर राज के लंड को अपनी मुट्ठी मे भींच लिया…..

 


राज ने रोमा को कंधों से पकड़ कर बेड पर बैठा दिया….अब राज का लंड रोमा के होंठो के बिल्कुल सामने था…..राज ने रोमा की आँखों मे देखा, और रोमा ने राज के इशारे को समझते हुए, अपना मुँह खोल कर राज के लंड को मुँह मे ले लिया….और रांड़ की तरहा चूसने लगी……

राज : अहह और ज़ोर से चूस साली रांड़…..हां और मुँह मे ले मेरा लंड…..

रोमा तेज़ी से अपने सर को आगे पीछे करते हुए, राज के लंड को अपनी मुँह मे लेकर चूस रही थी…राज के लंड की नसें एक दम फूल चुकी थी….रोमा ने राज के लंड को मुँह से बाहर निकाला, और खुद पीठ के बल बेड पर लेट गयी….

रोमा के पैर बेड से नीचे लटक रहे थे…..उसने अपनी साड़ी और पेटिकोट को अपने कमर तक ऊपेर उठा लिया….रोमा ने नीचे पैंटी नही पहनी हुई थी…उसकी चूत के छेद को देख कर राज की आँखों मे चमक आ गयी….

राज ने रोमा की टाँगों को उठा कर घुटनो से मोड़ दिया….और दोनो तरफ फैला दिया…जिससे रोमा की चूत का छेद खुल कर और ऊपेर हो गया….राज ने रोमा के थूक से सने हुए अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर, लंड के सुपाडे को रोमा की चूत के छेद पर लगा दिया….रोमा के बदन मे मानो करेंट दौड़ गया हो….

रोमा ने सीईईईईईईईईईई की आवाज़ निकालते हुए, अपनी आँखों को बंद कर लिया….उसका पूरा बदन मस्ती के कारण काँपने लगा…..उससे बर्दास्त करना मुस्किल हो रहा था….

रोमा: सीईईईईईईईईई बाबू जीईए क्या सोच रहे है……अब जल्दी से मेरी चूत मे अपना लंड डाल कर चोद दो मुझे अहह बाबू जीईईई….

रोमा की कमर ऐसे झटके खा रही थी….जैसे वो खुद ही राज के लंड को अपनी चूत मे ले लेना चाहती हो….राज ने अपनी गान्ड को पीछे की तरफ करके पूरी ताक़त से आगे की तरफ धकेला….रोमा के मुँह से चीख निकल गयी….राज के लंड का मोटा सुपाडा रोमा की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ आगे बढ़ने लगा…….पहले ही धक्के मे राज ने अपना आधा लंड रोमा की चूत मे पेल दिया था….

रोमा: ओह मररर्र्र्ररी रीईई धीरीईई बाबू जीईए ओह मेरी चूत फॅट गइई ओह बाबू जीए……

पर राज ने रोमा की बातों पर ध्यान नही दिया,….और तेज़ी से अपने लंड को उसकी चूत मे ठोकने लगा…..कुछ ही पलों मे राज का पूरा लंड पूरी रफ़्तार से अंदर बाहर होने लगा…और रोमा भी अपनी गान्ड को ऊपेर की और उछाल कर राज का साथ देने लगी….रोमा मस्ती मे आकर अहह ओह्ह्ह्ह सीईईईईईईई ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कर रही थी… और राज अपनी गान्ड को तेज़ी से हिलाते हुए, अपने लंड से रोमा की चूत को ठोक रहा था…राज के हर धक्के के साथ रोमा का पूरा बदन हिल रहा था….

राज के ताबडतोड़ धक्कों ने रोमा की चूत की दीवारों को हिला कर रख दिया था… और 10 मिनट की चुदाइ मे दोनो झड कर शांत हो गये……..

आफ्टर वन वीक………

डीएसपी अमन अपने ऑफीस मे बैठा हुआ, कुछ फाइल्स चैकक कर रहा था….तभी उसके डोर पर नॉक हुआ, अमन ने कम इन कहा…थोड़ी देर बाद कॉन्स्टेबल विक्रम उसके सामने आकर खड़ा हो गया…..

अमन: आओ विक्रम कोई खास खबर…….

विक्रम: जी सर….जैसे आप ने कहा था, मैं उस परिवार के लोगों पर पिछले सात दिनो से नज़र रख रहा हूँ…..मैने उनके बारे मे सब पता लगा लिया है….

अमन: गुड बताओ क्या खबर है…..

विक्रम: सर उस घर मे कुल 5 सदस्य है…..पहली सुमन…..दूसरी उसकी माँ वीना आपकी वाइफ की फ्रेंड सुमन की छोटी बेहन जो, बीए फर्स्ट एअर मे है उसका नाम टीना है….उसके पापा जय शर्मा….जो सरकारी टीचर है और सुमन से छोटा एक भाई है….उसका नाम अमित है…वो 2न्ड एअर मे पड़ता है…..

अमन: अर्रे यार ये सब तो मे भी जानता हूँ…कोई काम के खबर है तो बात करो…

विकाराम: जी सर काम की खबर है….

अमन: तो फिर बोलो क्या खबर है…..

विकाराम: सर उस परिवार की सबसे कमजोर कड़ी है, उनका बेटा, सुमन का भाई…..

अमन: वो कैसे……

विक्रम: सर मैने पता लगाया है कि, सुमन का भाई अमित ड्रग्स लेने का आदि है…. और एक दो बार तो उसने ड्रग्स लेने के लिए पड़ोस के घर मे चोरी भी की है…पर मोहल्ले वालों ने उसे बीच बचाव करके छुड़वा दिया था….

अमन: अच्छा….ये बात है….ये अमित हमारे कुछ काम आ सकता है…..अच्छा एक काम और करो…ये पता लगाओ कि, ये अमित ड्रग्स कहाँ से लेता है…..

विक्रम: सर वो भी पता लगा लिया…..कोई रघु नाम का बंदा है, पहले मुंबई रहता था, अब यहाँ आकर उसने ये धंधा शुरू कर दिया है…..दो चार बार तो पकड़ा भी गया है….वो कॉलेज के लड़कों को ड्रग्स सप्लाइ करता है…..

अमन: हँ ठीक है…..तुम जाओ….मैं तुम्हारे काम से बहुत खुस हूँ….और तुम्हारी प्रमोशन के लिए सिफारिश करूँगा…. अब तुम जा सकते हो…..

विक्रम: थॅंक यू सर……

और विक्रम खड़ा होकर बाहर चला गया….अमन के होंठो पर मुस्कान फैल गयी… पर आगे कदम उठाने से पहले वो राज से बात करना चाहता था….

 


अमन ये बात जल्द से जल्द राज को बता देना चाहता था, इसीलिए उसने अगले दिन राज की हवेली जाने का फैंसला किया, इधर राज रोमा के जिस्म को भोग रहा था, और रोमा भी राज के रंग मे रंग चुकी थी….राज उसे अपनी रखैल की तरहा इस्तेमाल कर रहा था…..

अगले दिन सुबह ही अमन राज की हवेली पहुँच गया….राज अपने रूम मे था, हरिया ने उसके रूम मे जाकर अमन के आने के बारे मे बताया….

राज : उन्हे बाहर बैठाओ……मे अभी आता हूँ……

राज थोड़ी देर बाद अपने रूम से निकल कर हाल मे आ गया….अमन राज को देखते ही सोफे से खड़ा हो गया.

अमन: गुड मॉर्निंग सर…….

राज : गुड मॉर्निंग…..और बताओ इतनी सुबह-2 कैसे आना हुआ……

अमन: सर आप को एक गुड न्यूज़ देनी थी….इसीलिए मे इंतजार ना कर सका….सुबह होते ही आपके पास चला आया….

राज : पहले आराम से बैठो, फिर बताओ कि क्या बात है….

राज अमन के साथ सोफे पर बैठ गया,

अमन: सर मैने उस लड़की के घर वालो के बारे मे सब कुछ पता लगा लिया है…. उस घर मे सिर्फ़ एक ही बंदा हमारे काम का है….और वो सुमन का भाई…अमित…

राज : अमित सुमन का भाई…..वो हमारे कैसे काम आ सकता है……

अमन ने सारी बात राज को बता दी…..और राज के होंठो पर अमन की बात को सुन कर अजीब सी मुस्कान फैल गयी…..

अमन: सर अब मेरे लिए क्या हुकम है……..

राज : पहले ये बताओ को अमित को ड्रग्स कहाँ से मिलती है…..

अमन: रघु नाम का आदमी है सर वही कॉलेज के लड़को को ड्रग्स सप्लाइ करता है.

राज : (कुछ देर सोचने के बाद) यही रघु हमारे काम आ सकता है….इससे मिलना है मुझे…

अमन: जी सर….. मे आज ही उसे उठवा लेता हूँ…..

राज : ठीक है, तो मैं शाम को तुम्हारे ऑफीस आता हूँ, इस रघु से मिलने के लिए, बाकी आगे क्या करना है वहीं पर बताउन्गा…..

अमन: जी सर….जैसे आप कहें, अच्छा तो अब मे चलता हूँ….

ये कहते ही अमन खड़ा हो गया, और राज से हाथ मिलाकर हवेली से बाहर चला गया….राज को अपनी मंज़िल अब नज़दीक नज़र आ रही थी….

शाम को अमन के ऑफीस मे:-

अमन अपने ऑफीस मे कुछ काम कर रहा था, और साथ ही साथ राज का इंतजार भी कर रहा था, तभी राज अंदर आ गया, राज को देखते ही, अमन चेर से खड़ा हो गया, और राज से हाथ मिलाने के बाद उसे चेर पर बैठने को कहा…

राज : (अमन के सामने चेर पर बैठते हुए) तो पकड़ा उस रघु को.

अमन: जी सर, अभी बुलाता हूँ…..

अमन अपने कॅबिन से निकल कर बाहर खड़े हवलदार से रघु को अंदर लाने के लिए कहा.. थोड़ी देर बाद दो सिपाही रघु को साथ लेकर अंदर आ गये….

रघु: (अंदर आते ही) साहिब मुझ क्यों पकड़ा है…..मेने अपने सभी पुराने धंधे बंद कर दिए है….

अमन: हमने कुछ पूछा क्या तुम से….जितना पूछा जाए…उसी का जवाब दो……

अमन ने अमित की फोटो निकाल कर रघु को पकड़ा दी….रघु उसकी फोटो लेकर बड़े गोर से देखने लगा…अमित के फोटो को देखते ही, उसके फेस के भाव बदलने लगे…..

अमन: इसे जानते हो…..

रघु: नही साहिब मे नही जानता…..

अमन: सोच लो…..अगर झूट बोला, तो तुम्हारे लिए बहुत बुरा होगा….

रघु: मे सच कह रहा हूँ….मे इसे नही जानता….

अमन: हवाल दार…

हवाल दार: जी सर….

अमन: रघु जी की खातिर दारी की है या नही……जाओ पहले इसकी अच्छे से मेहमान नवाज़ी करो…फिर इनसे बात करेंगे…..

रघु: एक मिनिट साहिब मे जानता हूँ इसे,

अमन: तो फिर सब सच-2 बताओ….कैसे जानते हो……….

रघु: सर ये लौंडा **** कॉलेज मे पढ़ता है……एक नंबर. का मुफ़्त खोर है…. मुझसे से ड्रग्स लेता था, पर अब मैने इसे ड्रग्स देना बंद कर दिया है…पर फिर भी रोज तंग करने आ जाता है….पैसे तो इसके पास होते नही…..

अमन: तुम हमारे लिए एक काम करोगे ?

रघु अमन की बात सुन कर कुछ परेशान सा हो गया, वो कभी अमन की तरफ देखता, तो कभी राज की तरफ……अमन रघु की हालत समझ गया…

अमन: ये राज जी हैं….नाम तो सुना है होगा….

रघु: राज जी…हां साहिब बहुत नाम सुना है…पर देखा कभी नही था, आज इनको देख भी लिया….

अमन: तो फिर रघु….तुम्हे इनका एक काम करना होगा….बदले मे तुम्हे इतनी कीमत मिलेगी…कि तुमने कभी सपने मे भी नही सोची होगी…

रघु: पर ऐसा कॉन से काम है माईबाप…..

अमन ने कॅबिन के अंदर खड़े सिपाहियो को बाहर भेज दिया…..

और तीनो कुछ आपस मे बात करने लगे…. थोड़ी देर बाद तीनो अमन के कॅबिन से बाहर आ गये….

रघु: बाबू जी आपका काम समझो हो गया….ये रघु की ज़ुबान है….

राज : काम हो जाना चाहिए….इसके लिए तुम्हे जिस की चीज़ की ज़रूरत पड़े, तुम बेझिजक होकर मुझ या अमन से कह सकते हो…….

अमन: वैसे सर आप को माना पड़ेगा….क्या प्लॅनिंग की है आप ने….काश मे भी आपकी तरहा सोच पाता….

राज के होंठो पर घमंड से भरी हुई मुस्कान आ गयी…..

 


नेक्स्ट मॉर्निंग……………

रघु अपने कुछ आदमियों के साथ **** कॉलेज के पार्क मे खड़ा था…. वो जानता था, कि अमित (सुमन का भाई) उसके पास ज़रूर आएगा…..

और थोड़ी देर बाद अमित रघु को ढूँढते हुए पार्क मे आ गया….जैसे ही अमित ने रघु को देखा, वो तेज़ी से चलता हुआ उसके पास आया…..

अमित: नमस्ते भाई कैसे हो…..

रघु: (अमित की ओर अजीब सी नज़रों से देखते हुए) हूँ ठीक हूँ……..बोलो क्या काम है….

अमित: भाई मुझ थोड़ी से अफ़ीम दे दो……कसम से पूरा बदन टूट रहा है…

रघु: पैसा लिया है कि, फिर से उधारी माँग रहा है….

अमित: भाई पैसे मे दे दूँगा….पिछली बार भी आपको सारे पैसे लोटा तो दिए थे.

रघु: अर्रे सुन…..फालतू की मगजमारी मत कर. कॅश हैं तो बोल………

अमित: भाई प्लीज़ मे मर रहा हूँ, थोड़ी सी ही दे दो……..मैं जल्द ही पैसे दे दूँगा…कभी मैने आपके पासे रखे हैं…

रघु ने अमित के कंधे पर हाथ रखा, और पार्क के दूसरी तरफ जाने लगा….अमित भी उसके साथ चल रहा था….उसे समझ मे नही आ रहा था, कि रघु उसे कहाँ लेकर जा रहा था….जब दोनो पार्क के कोने मे पहुँच गये तो, रघु ने उसकी तरफ देखा…..

रघु: देख अमित अगर तुझे ड्रग्स चाहिए तो, तुझे मेरा एक काम करना पड़ेगा….

अमित: (थोड़ी देर सोचने के बाद) क्या काम करना है भाई…

रघु: तुझे मेरे लिए एप्रा गाँव से ड्रग्स लानी होंगी सिटी मे,….

अमित: (रघु की बात सुन कर थोड़ा घबरा गया) पर भाई मे ये काम नही कर सकता… इसमे तो बहुत रिस्क है….मुझसे नही होगा भाई…..

रघु: चल तुझे एक और चीज़ दूँगा…अगर तू मेरे लिए काम करेगा…..बोल करेगा. ?

अमित रघु की बातों को सुन कर सकतें मे आ गया….और रघु को फटी हुई आँखों से देखते हुए पूछा….

अमित: क्या भाई ?

रघु: देख अगर तू मुझे एक बार माल सप्लाइ करेगा…..तो मे तुझे एक चक्कर के 5000 रुपये दूँगा……और जो तुझे चाहिए…. वो भी फ्री मे मिलेगा.बोल करेगा मेरे लिए काम ?

अमित: क्या भाई 5000 रुपये… सिर्फ़ एक बार के….

रघु: (होंठो पर मुस्कान लाते हुए) हां 5000 हज़ार मिलेंगे……और जितनी बार तू मुझ माल ला कर देगा……हर बार 5000 रुपये मिलेंगे….

अमित: ठीक है भाई……कब जाना होगा मुझे……….

रघु: आज ही चला जा……. मे तुझे समझा देता हूँ कि, जाना कहाँ हैं….

थोड़ी देर बाद अमित रघु से सब जान कर चला गया…उसके जाते ही रघु ने राज को फोन किया…..

रघु: हैल्लो राज बाबू जी… चिड़िया अपने जाल मे फँस चुकी है….वो बस थोड़ी देर मे एप्रा गाँव पहुँच जाएगा…..अब आगे क्या करना है…..

राज : (दूसरी तरफ फोन से) आज कुछ नही करना………जब वो तुम्हे ड्रग्स लाकर दे, तो उसे 5000 रुपये दे देना, और ड्रग्स भी….बस तुम उसके साथ ऐसे ही खेल खेलते रहो…बाकी मे देख लूँगा……

दूसरी तरफ सुमन अपनी पहली क्लास ख़तम करके बाहर आ चुकी थी….तभी उसे इंग्लीश की टीचर साधना उसे मिली…और उसने सुमन को आवाज़ लगाई….

साधना: सुमन एक मिनिट के लिए ज़रा इधर आओ…..

सुमन: जी मॅम……..

साधना: वो तुम्हारा भाई कहाँ है…..आज कल क्लास आटेड भी करने नही आता…..कॉलेज भी आया है कि नही…

सुमन: जी कॉलेज तो आया था, पर ?

साधना: चलो छोड़ो….उसे कुछ समझाती क्यों नही….एक मंत बाद एग्ज़ॅम शुरू होने वाले हैं….अभी उसको पढ़ाई मे ध्यान देना चाहिए…

सुमन: जी मॅम…….आज घर जाकर उससे बात करूँगी……

साधना: ओके…..अच्छा मे चलती हूँ…..

दोपहर हो चुकी थी, पर अमित का कुछ अता पता नही था, सुमन ने उसे कॉलेज मे बहुत ढूँढा….पर वो उसे नही मिला….और वो कॉलेज से बाहर आगयी, और ऑटो पकड़ कर घर के लिए चल दी…..

थोड़ी देर बाद ही अमित अपनी बाइक पर कॉलेज मे आ गया, उसने अपनी बाइक खड़ी की, और कॉलेज की बिल्डिंग के पीछे की तरफ चला गया….उसका पूरा बदन पसीने से भीगा हुआ था, हाथ पैर डर के मारे कांप रहे थे….कंधे पर एक बॅग लटकाए, वो इधर उधर देखता हुआ, उस तरफ बढ़ रहा था, जहाँ पर रघु ने उसे मिलने के लिए कहा था.

तभी अमित की नज़र रघु पर पड़ी….उसकी जान मे जान आई….उसने एक लंबी साँस ली, और तेज़ी से उसकी तरफ भागा…..रघु के पास पहुँचते ही, उसके अपने कंधे पर टँगे हुए बॅग को रघु को पकड़ा दिया,…..

अमित: (तेज़ी से साँस लेते हुए) ये लो भाई मैं ले आया……..

रघु: शाबास बस ऐसे ही काम करता रहा……तो दीनो दिनो मे अमीर हो जायगा……

रघु ने बॅग मे से एक पॅकेट ड्रग्स का निकाल कर अमित की ओर बढ़ा दिया…अमित के होंठो पर मुस्कान फैल गयी….उसने पॅकेट को अपनी पेंट की पॉकेट मे रख लिया… और फिर रघु ने उसे 5000 रुपये दे दिए…

रघु: ये ले जा ऐश कर……कल मिलते हैं…….

ये कह कर रघु बॅग को लेकर वहाँ से चला गया….अमित इस ग़लत काम से मिले हुए पैसो को लेकर बहुत खुश था….अब अमित हर दूसरे दिन रघु के लिए ये काम करने लगा था….अमित का डर अब ख़तम हो चुका था….एक दिन जब अमित ड्रग्स से भरा हुआ बॅग लेकर रघु की बताई हुई जगह पर पहुँचा , तो उसे रघु वहाँ नही मिला…..

उसने रघु को फोन किया….पर रघु ने उसे बहाना बना दिया कि, उसे ज़रूरी काम से सिटी से बाहर जाना पड़ा है….वो ड्रग्स का बॅग अपने घर पर रख ले, और मैं कल आकर तुमसे बॅग ले लूँगा…..

 


अमित अब रघु के गॅंग का हिस्सा बन गया था, अमित ने किसी तरहा घरवालो की नज़र से बचा कर बॅग को अपने रूम मे छुपा लिया….

अगली सुबह 6 बजे के करीब ही, सुमन के घर की डोरबेल बजी….सब लोग एक दम से जाग गये….कोई बेल बजाए जा रहा था….अमित के पापा जय शर्मा ने अपने रूम से बाहर निकल कर गेट खोला….सामने पुलिस वाले खड़े थे…..जय शर्मा उनको देख कर एक दम से चोंक गया….उसे समझ मे नही आ रहा था, कि इतनी सुबह-2 उनके घर पोलीस क्यों आई है….

ज़य शर्मा: क्या बात है इनस्पेक्टर साहिब इतनी सुबह-2……

इनस्पेक्टर: जय शर्मा जी हमे आपका घर चैक करना है….

ज़य शर्मा: हमारा घर ? पर क्यों इनस्पेक्टर साहिब……?

इनस्पेक्टर: हमे इन्फर्मेशन मिली है कि, आप का लड़का अमित ड्रग्स सप्लाइ करता है….

ज़य शर्मा: ये क्या बोल रहे हैं सर आप….मेरा बेटा ऐसे काम नही करता…….

इनस्पेक्टर: वो तो घर चैक करने के बाद पता चल जाएगा……

तब तक सुमन उसकी बेहन और सुमन की माँ भी बाहर आ चुकी थी…..पर अमित अभी भी सो रहा था…….रात को उसने ड्रग्स ज़्यादा ही ले ली थी….इनस्पेक्टर ने अपने सिपाहियों को घर चैक करने के लिए कहा……

ज़य शर्मा: पर आप बिना वॉरेंट के मेरे घर की तलाशी नही ले सकते……

इनस्पेक्टर: वॉरेंट भी है हमारे पास….

और इनस्पेक्टर ने जय शर्मा को वॉरेंट दिखा दिया, और अपने आदमियों को तलाशी लेने के लिए इशारा किया….सभी सिपाही घर के अंदर घुस गये….इनस्पेक्टर खुद भी अमित के रूम की तरफ चला गया….जब वो अमित के रूम के अंदर दाखिल हुआ, तो अमित आवाज़ सुन कर जाग गया….जब उसने पोलीस वालों को अपने रूम मे देखा, तो उसके हाथ पैर डर के मारे काँपने लगी…..

अमित: ये ये क्या हो रहा है….

इनस्पेक्टर ने अमित को उसकी टीशर्ट से पकड़ कर खैंचते हुए नीचे उतार दिया, एक सिपाही उसके रूम की छानबीन करने लगा….तभी उसके हाथ ड्रग्स से भरा हुआ बॅग लग गया.

सिफाई: ये देखे सर…….इसमे ड्रग्स है….

तब तक अमित के पापा भी उसके रूम मे आ चुके थे…उन्हे अपनी आँखों पर विश्वास नही हो रहा था….

अमित: (घबराते हुए) सर ये बॅग मेरा नही है….मेरा यकीन करिए….

इनस्पेक्टर: अच्छा अगर ये बॅग तेरा नही है तो, ये यहाँ कैसे आ गया….चल पोलीस स्टेशन वहाँ चल कर तू सब बकेगा….

और इनस्पेक्टर ने अमित को हथकड़ी लगा दी, और उसे बाहर की ओर ले जाने लगा…

अमित: पापा मैं सच कह रहा हूँ…….ये बॅग मेरा नही हैं..मुझ बचा लो पापा….

ज़य शर्मा बिल्कुल मजबूर वहीं खड़ा देखता रहा…..सुमन उसकी माँ और छोटी बहन रोने लगी….

ज़य शर्मा: (अपना माथा पकड़ते हुए) इस लड़के ने हमे कहीं का नही छोड़ा…….

वीना: (रोते हुए) आप कुछ करते क्यों नही……

ज़य शर्मा: (एक दम से चीखते हुए) अब मैं क्या करूँ…..कहीं जाकर खुद कुशी कर लूँ… तुम्हारे लाड़ले ने मुझ कहीं मुँह दिखाने लायक नही छोड़ा…..

वीना: मैं कुछ नही जानती जी….मुझे मेरा बेटा चाहिए…..आप चाहे कुछ भी करिए….नही तो मैं मर जाउन्गी….

ज़य शर्मा: अच्छा अब तुम शांत भी होगी….मुझे कुछ सोचने तो दो…..

वीना: आप अमन भाई साहिब को फोन करो…..वो हमारी मदद ज़रूर करेंगे….

ज़य शर्मा: हां अब वही हमारी मदद कर सकते हैं…..

ये कह कर जय शर्मा ने अमन को फोन लगाया…..

थोड़ी देर बाद अमन ने फोन उठाया…….

अमन: हैल्लो हंजी कॉन बोल रहा है….

ज़य शर्मा: सर मैं हूँ वीना का हज़्बेंड….सर एक प्राब्लम हो गयी है…..

ज़य शर्मा की बात सुनते ही अमन के होंठो पर मुस्कान आ गयी….वो समझ गया कि, अमित को घर से उठा लिया गया है….

अमन: (अपनी आवाज़ मे गंभीरता लाते हुए) जी कहिए क्या हुआ….

ज़य शर्मा: सर वो पोलीस वाले मेरे बेटे अमित को ले गये हैं…..

अमन: (अंजान बनने का नाटक करते हुए) पर क्यों किस जुर्म मे….क्या किया था उसने…

 


ज़य शर्मा: सर मुझे तो कुछ समझ मे नही आ रहा कि आख़िर क्या हो रहा है…उसके रूम से पता नही कहाँ से ड्रग्स का भरा हुआ बॅग आ गया….

अमन: (जानबूझ कर चोन्कते हुए) क्या ड्रग्स से भरा हुआ बॅग ?

ज़य शर्मा: जी सर प्लीज़ आप कुछ करिए नही तो मेरे बेटे की जिंदगी खराब हो जाएगी….

अमन: मुझे पहले इस मामले के बारे मे पता करना होगा…फिर देखता हूँ, कि क्या हो सकता है…..

ज़य शर्मा: सर आप ही हमारी आख़िरी उम्मीद हैं….किसी भी तरहा मेरे बेटे को इस केस से बचा लो….मे आपका ये अहसान जिंदगी भर नही भूलूंगा…..

अमन: ओके ओके आप हॉंसला रखिए….मैं थोड़ी देर मे ऑफीस के लिए निकल कर देखता हूँ, कि आख़िर माजरा क्या है….

ज़य शर्मा ने रोते हुए फोन रख दिया…..घर मे मातम सा महॉल छा गया था…. ज़य शर्मा ने कभी सोचा नही था, कि उसकी औलाद उसके माथे पर इतना बड़ा कलंक लगा सकती है….वो फिर से अपना सर पकड़ कर सोफे पर बैठ गया…..

जैसे ही जय शर्मा ने फोन रखा, तो अमन के मन मे राज को फोन करने का ख़याल आया…….पर जब उस ने टाइम देखा तो अभी सिर्फ़ 6:30 हो रहे थे….अमन ने इतनी सुबह-2 फोन करना ठीक नही समझा……

सुबह के 8 बजे हवेली मे राज अपने रूम मे बेड पर लेटा हुआ सो रहा था, उसकी बगल मे रोमा भी उसे चिपकी हुई लेटी हुई थी….तभी फोन की रिंग बजी….राज उठ कर बैठ गया, और फोन उठाया….

राज : (अपनी आँखों को मलते हुए) हैल्लो कॉन….

अमन: (दूसरी तरफ से) सर मे बोल रहा हूँ, अमन….आप का काम हो गया है….उस लोंडे को आज सुबह ही उठा लिया गया….ड्रग्स का बॅग भी उसके घर मे मिल गया..

राज : अच्छा तो ये बात है…..ठीक आगे क्या करना है वो तुम्हे अच्छी तरह पता हैं….मे बाद मे तुम्हे फोन करता हूँ….

ये कह कर राज ने फोन रख दिया….और उठ कर बाथरूम मे चला गया…. जब राज फ्रेश होकर बाथरूम से बाहर आया, तो रोमा बेड पर बैठी हुई, अपनी पैंटी पहन रही थी…उसकी चुचियों पर राज के दाँतों के निशान सॉफ दिखाई दे रहे थे…राज रोमा की चुचियों पर अपने दाँतों के निशान देख कर मुस्कुराने लगा…

रोमा: क्या बाबू जी आप भी ना देखो…..मेरे क्या हालत कर दी है आप ने……और ऊपेर से मुझ पर हंस रहे हो….

राज ने रोमा के बात का कोई जवाब नही दिया, और रूम से बाहर आकर हाल के डोर को अनलॉक किया….थोड़ी देर बाद रोमा भी बाहर आ गयी, और हवेली के पीछे बने अपने रूम मे चली गयी…रोमा के जाने के थोड़ी देर बाद है, हरिया अंदर आ गया, और राज के लिए चाइ बाने लगा…..

दूसरी तरफ दोपहर के 11 बजे अमन पोलीस स्टेशन मे अपने कॅबिन मे बैठा हुआ कुछ फाइल्स चैक कर रहा था….तभी एक हवलदार ने आकर अमन को बोला कि, कोई जय शर्मा नाम का आदमी उनसे मिलना चाहता हैं….अमन ने हवाल दार से जय शर्मा को तुरंत अंदर लाने को कहा…..थोड़ी देर बाद हवलदार जय शर्मा को अमन के कॅबिन मे छोड़ गया…..

अमन: (जय शर्मा को देखते हुए) आइए आइए जय शर्मा जी बैठिए….

ज़य शर्मा: (अमन के सामने बैठते हुए) सर कुछ पता लगा कि, आख़िर माजरा क्या है….मेरे बेटे को बचा लीजिए…..

अमन: (थोड़ी देर सोचने के बाद) देखिए जय शर्मा जी…जो मुझे पता चला है, वो ठीक नही है….आपका बेटा पिछले एक महीने से ड्रग्स का कारोबार कर रहा है….उसके गॅंग के सारे लोग फरार हैं….आप के लड़के के खिलाफ सभी सबूत हैं….क़ानूनी तोर पर मे आपकी कोई मदद नही कर सकता…. आपके बेटे के केस की फाइल ऊपेर पोलीस कमिशनर तक पहुँच गयी है…..

ज़य शर्मा: अमन सर कुछ तो करिए….मेरे बेटे की जिंदगी का सवाल है….ऐसे मे तो हमारी बड़ी बदनामी होगी….आप तो जानते ही हैं….घर मे दो जवान लड़कियाँ हैं.. उनका क्या होगा….प्लीज़ आप कुछ तो करिए…..

अमित: देखिए जय शर्मा जी….मे अब आपकी मदद नही कर सकता….आपके बेटे के केस की फाइल ऊपेर बैठे बड़े ओफीसेर्स के पास पहुँच गयी हैं…अमित को अरेस्ट करने का ऑर्डर भी ऊपेर से ही मिला था….मैने कोई ऑर्डर नही पास किया….अब अगर आप अपने बेटे को इस केस से निकलवाना चाहते हैं तो, आप के पास एक ही रास्ता है….

ज़य शर्मा: आप मुझ बताएँ….मे अपने बेटे को इस केस से निकालने के लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ…

अमित: देखिए सर..जैसा कि मे आप को बता ही चुका हूँ, कि आपके बेटे के केस की फाइल पोलीस कमिशनर के पास है, अब सिर्फ़ एक ही रास्ता है, कि आपके बेटे का केस कोर्ट मे ना फाइल हो….इसके लिए आप को ऊपेर के सभी ऑफीसर को रिशवत देनी पड़ेगी...नही तो अगर आपके बेटे का केस कोर्ट मे गया तो, कम से कम 7 साल के लिए अंदर जाएगा….

ज़य शर्मा: नही सर मे अपने बेटे के लिए सब कुछ बेच दूँगा….चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े….कितने पैसों के ज़रूरत होगी….

अमित: यही को 20 से 25 लाख रुपये…….

ज़य शर्मा अमित की बात सुन कर एक दम से सकते मे आ गया…..

ज़य शर्मा: क्या 25 लाख रुपये….पर ये तो बहुत ज़्यादा हैं……मे इतने रुपये कहाँ से लाउन्गा….ये मेरे बस की बात नही है…

अमित: ऊपेर बैठे लोगों के लिए 25 लाख भी कुछ नही है…..ये तो आपको करना ही पड़ेगा….वैसे मे भी देखता हूँ कि, मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ…. आप जल्द से जल्द पैसों को इंतज़ाम करिए……

ज़य शर्मा के हाथ सिर्फ़ निराशा ही लगी….वो उदास सा चैहारा लेकर वापिस आ गया, और उसने सारी बात अपने घरवालों को बता दी…

 
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