S
StoryPublisher
Guest
मौसी ने भी वही सोचा था, जो रेखा का ख्याल था- "मेरा भी ख्याल है कि वह हमारी मॉडल टाऊन वाली कोठी पर
होंगे। पर वहां का फोन नम्बर कैसे मालूम हो?" नम्बर...।"
"बलदेव अंकल के घर फोन करो शायद वर्षा या उसकी मम्मी घर पर हों। उनसे मालूम हो जाएगा फोन
"गुड आइडिया...।" रेखा बोली और उसने फोन उठाकर सोफे पर रख लिया और नम्बर लगाने लगी। नम्बर तुरन्त ही लग गया। दो घंटिया बजने के बाद उधर किसी ने रिसीवर उठाकर कहा- "हैलो!"
"रेखा ने वर्षा की आवाज फौरन पहचान ली, वह चहकी- "वर्षा... मैं रेखा बोल रही?"
"कैसी हो रेखा...?"
"मैं ठीक मै यह बताओ अंकल कहां हैं?"
"मॉडल टाऊन! वह तो सुबह के गये हुए हैं। ड्राईवर गाड़ी लेकर वापस आने वाला हैं। मैं और मम्मी जाने वाले हैं। "
" फिर तुम एक काम करो, मॉडल टाऊन पहुंचकर अंकल से कहना कि मुझे फौरन फोन करें। और हां, क्या तुम्हारे पास वहां का फोन नम्बर है?"
"हां है, तुम्हें चाहिये?"
"हां, लिखा दो ।"
" अच्छा ठहरो, डायरी में देखकर बताती हूँ।" कुछ क्षणों बाद ही वह फिर बोली- "लिखो।" रेखा ने साईड टेबिल पर रखा हुआ अखबार और बॉलपेन उठा लिया था, बोली- "हां, बोली।" वर्षा का बताया हुआ नम्बर उसने अखबार के हाशिये पर लिख लिया और फिर इधर-उधर दो चार बातें करने के बाद
उसने रिसीवर रख दिया। अब उसे अंकल बलदेव की फोन कॉल का बेचैनी से इंतजार था।
फिर.... कोई डेढ़ घन्टे बाद फोन की घंटी बजी। रेखा ने झपटकर रिसीवर उठा लिया, बोली- "हेलो।"
"हां, रेखा! मैं बलदेव राज बोल रहा हूँ।"
" आप कहां से फोन कर रहे हैं अंकल?"
"मैं एक सेफ जगह से फोन कर रहा हूँ...।" अंकल बलदेव उसका आशय समझकर बोले- कोठी से तो बात नहीं कर सकता था ना।"
"अंकल मुझे आपको एक इम्पोर्टेन्ट जानकारी देनी है।" "हां मै कहो।"
"क्या पुलिस ने घर के नौकर घनश्याम और उसकी बीवी को अपनी इन्वेस्टीगेशन में रखा हुआ है?"
"हां, इन्सपेक्टर ने उसका ब्यान लिखा था। मेरे सामने की बात है। पुलिस इस किस्म की वारदात में सबसे पहले घर के नौकर-चाकरों पर ही शक करती है।"
"और ऐसा पुलिस बिल्कुल ठीक ही करती है, अंकल ।" रेखा उत्तेजित सी बोली।
" धनश्याम को मैं वरसों से जानता हूँ। वह कृष्णकांत की पूजा करता था, बेटी! वह तुम्हारे पापा का वफादार था। "
"अंकल ! मेरा दिल कहता है कि यह घनश्याम कातिल से अच्छी तरह वाकिफ है।"
"यह.... यह इम कैसे कह सकती हो?"
" आप सिर्फ इतना कर कि अपने तोर पर यह मालूम करा लें कि उसकी बेटी का एक्सीडेन्ट हुआ था या नहीं।"
होंगे। पर वहां का फोन नम्बर कैसे मालूम हो?" नम्बर...।"
"बलदेव अंकल के घर फोन करो शायद वर्षा या उसकी मम्मी घर पर हों। उनसे मालूम हो जाएगा फोन
"गुड आइडिया...।" रेखा बोली और उसने फोन उठाकर सोफे पर रख लिया और नम्बर लगाने लगी। नम्बर तुरन्त ही लग गया। दो घंटिया बजने के बाद उधर किसी ने रिसीवर उठाकर कहा- "हैलो!"
"रेखा ने वर्षा की आवाज फौरन पहचान ली, वह चहकी- "वर्षा... मैं रेखा बोल रही?"
"कैसी हो रेखा...?"
"मैं ठीक मै यह बताओ अंकल कहां हैं?"
"मॉडल टाऊन! वह तो सुबह के गये हुए हैं। ड्राईवर गाड़ी लेकर वापस आने वाला हैं। मैं और मम्मी जाने वाले हैं। "
" फिर तुम एक काम करो, मॉडल टाऊन पहुंचकर अंकल से कहना कि मुझे फौरन फोन करें। और हां, क्या तुम्हारे पास वहां का फोन नम्बर है?"
"हां है, तुम्हें चाहिये?"
"हां, लिखा दो ।"
" अच्छा ठहरो, डायरी में देखकर बताती हूँ।" कुछ क्षणों बाद ही वह फिर बोली- "लिखो।" रेखा ने साईड टेबिल पर रखा हुआ अखबार और बॉलपेन उठा लिया था, बोली- "हां, बोली।" वर्षा का बताया हुआ नम्बर उसने अखबार के हाशिये पर लिख लिया और फिर इधर-उधर दो चार बातें करने के बाद
उसने रिसीवर रख दिया। अब उसे अंकल बलदेव की फोन कॉल का बेचैनी से इंतजार था।
फिर.... कोई डेढ़ घन्टे बाद फोन की घंटी बजी। रेखा ने झपटकर रिसीवर उठा लिया, बोली- "हेलो।"
"हां, रेखा! मैं बलदेव राज बोल रहा हूँ।"
" आप कहां से फोन कर रहे हैं अंकल?"
"मैं एक सेफ जगह से फोन कर रहा हूँ...।" अंकल बलदेव उसका आशय समझकर बोले- कोठी से तो बात नहीं कर सकता था ना।"
"अंकल मुझे आपको एक इम्पोर्टेन्ट जानकारी देनी है।" "हां मै कहो।"
"क्या पुलिस ने घर के नौकर घनश्याम और उसकी बीवी को अपनी इन्वेस्टीगेशन में रखा हुआ है?"
"हां, इन्सपेक्टर ने उसका ब्यान लिखा था। मेरे सामने की बात है। पुलिस इस किस्म की वारदात में सबसे पहले घर के नौकर-चाकरों पर ही शक करती है।"
"और ऐसा पुलिस बिल्कुल ठीक ही करती है, अंकल ।" रेखा उत्तेजित सी बोली।
" धनश्याम को मैं वरसों से जानता हूँ। वह कृष्णकांत की पूजा करता था, बेटी! वह तुम्हारे पापा का वफादार था। "
"अंकल ! मेरा दिल कहता है कि यह घनश्याम कातिल से अच्छी तरह वाकिफ है।"
"यह.... यह इम कैसे कह सकती हो?"
" आप सिर्फ इतना कर कि अपने तोर पर यह मालूम करा लें कि उसकी बेटी का एक्सीडेन्ट हुआ था या नहीं।"