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हंग्री वुल्फ गेम (इंसान या भूखे भेड़िए ) complete

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स्नेहा हँसती हुई मनु के कानो मे कही..... "बॉस, सेक्स ट्रिप के लिए कही थी, आप ये कौन सी ट्रिप पर ले जा रहे हो"

मनु.... धीरज रखो, और चुप-चाप मुझे फॉलो करो.

कुछ देर बाद प्लतेफोर्म पर एक ट्रेन आ कर रुकी. मनु, स्नेहा को अपने पिछे आने के लिए कहा.... स्नेहा ट्रेन को देख कर सोच मे पड़ गयी..... "ये देल्ही-मुंबई की ट्रेन मे, पता नही क्या करना चाह रहा है मनु.. इसका तो फ्यूज़ ही उड़ा हुआ है"

मनु के पिछे-पिछे स्नेहा चलती रही. कुछ देर बाद तो उसका दिमाग़ ही सुन्न पड़ गया....

स्नेहा.... मनु तुम सठिया गये हो, एक तो कब से मैं, नये एक्सिटमेंट का सोच-सोच कर जल रही हूँ, और तुम हो कि एक तो पहले रेलवे स्टेशन बुला लिया, उपर से ट्रेन से मुंबई जा रहे हो... और हद होती है अब ये जनरल कॉमपार्टमेंट....

मनु.... सीईईईईई...... चुप-चाप मेरे पिछे आओ.

गुस्से मे चेहरा लाल करती स्नेहा, मनु के पिछे-पिछे जा चुप-चाप जा कर उस जनरल कॉमपार्टमेंट मे बैठ गयी. स्नेहा विंडो सीट पर, और उसके बगल मे मनु बैठा.

स्नेहा गुस्सा दिखाती हुई मनु से कोई बात ना करते हुए चुप-चाप खिड़की के बाहर देखने लगी. मनु भी मॅगज़ीन उठाया और पढ़ने लगा. ट्रेन चली, धीरे-धीरे जनरल कॉमपार्टमेंट भरने लगा.... भीड़ इतनी हो गयी कि लोगों पर लोग चढ़े हुए थे.

स्नेहा विंडो सीट पर सिकुड़ी सी बैठी थी... आख़िर उसके सब्र का बाँध टूट गया....

स्नेहा.... मनु मैं अभी रिजाइन कर रही हूँ, मुझे तुम्हारे साथ कोई काम नही करना....

मनु... ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी...

स्नेहा... क्या???? ... मनु देखो ये ओवर हो रहा है... मुझे लगता है तुम्हारे दिमाग़ की नसें ढीली हो गयी हैं ... कोई फिजीशियन से इलाज करवाओ...

मनु हँसने लगा और स्नेहा की बातों का कोई जवाब नही दिया. कुछ देर बाद वो अपने बगल वाले से कुछ कहा और वो बंदा वहाँ से उठ कर चला गया...

मनु.... लो अब थोड़ी सी जगह बन गयी... आराम से बैठो...

स्नेहा.... हुहह !

ट्रेन चलती रही, और स्नेहा गुस्से मे खिड़की के बाहर देखती रही. धीरे-धीरे शाम भी होने लगी. सर्द हवाओं ने स्नेहा को हल्की ठंड का एहसास करवाया, वो थोड़ी सिकुड कर बैठ गयी....

 


मनु समझ गया, और बॅग से एक कंबल निकाल कर उसे दे दिया.... स्नेहा गुस्से से उसके हाथ से कंबल ले ली, और ओढ़ कर चुप-चाप बैठ गयी.

कुछ देर बाद ट्रेन की सारी लाइट भी बंद हो गयी... अंधेरा सा हो गया पूरा कॉमपार्टमेंट मे. स्नेहा अब भी कंबल मे दुब्कि हुई थी..... अचानक ही उसकी आँखें बड़ी हो गयी.... मनु के कान मे फुसफुसाते वो कहने लगी.....

"मेरे बूब्स से हाथ हटाओ मनु, क्या कर रहे हो"

मनु ने जल्दी से स्नेहा के होंठ चूमे और कहा..... "इस नये एक्सपीरियेन्स का भी मज़ा लो"...

स्नेहा की साँसे अटक गयी... वो तय नही कर पा रही थी अब क्या करे... खुली आँखों से वहाँ की भीड़ को देख रही थी... और कंबल के अंदर मनु के हाथ उसके बूब्स को सहला रहे थे....

अजीब सी सिहरन दौर गयी स्नेहा के बदन मे.... बूब्स पर हाथ पड़ने से उसकी साँसे उखड़ सी गयी... और जैसे ही खोती हुई वो अपनी आखें बंद करती, वैसे ही भीड़ को देख कर आखें बड़ी हो जाती....

स्नेहा पर तो अजीब सा फियर-एक्सिटमेंट छाया था.... इधर स्नेहा की तड़प को बढ़ाते हुए मनु ने उसकी टी-शर्ट के अंदर हाथ डाल दिया और उसके ब्रा को हटा कर उसके नंगे बूब्स को अपने हाथों से ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा.....

स्नेहा के मूह से हल्की सिसकारियाँ निकलने लगी... जिसे वो अपने होंठो मे दबा कर, अपने होन्ट दांतो से काट रही थी.... नज़रें चारो ओर घुमा रही थी... और होश खोने को बेकाबू थे...

तभी मनु ने दोनो बूब्स के निपल को पकड़ कर पूरी ताक़त से मसल दिया... स्नेहा दर्द से छटपटा गयी और एक तेज चीख निकली..... "अऔचह"

उस जगह की भीड़ बॅड-बड़ाने लगी... "क्या-हुआ, क्या-हुआ"....

स्नेहा किसी तरह जबाव दी.... "किसी कीड़े ने शैतानी की"

सभी लोगों मोबाइल की लाइट जला कर देखने लगे.... लाइट जलते ही स्नेहा धीरे से मनु के काम मे बोली ... डार्लिंग प्लीज़ हाथ हटा लो वरना सब जान जाएँगे....

लेकिन मनु हाथ हटाने के बदले... निपल को और भी तेज-तेज रब करने लगा... और फिर से पूरे ज़ोर से निपल को मरोड़ दिया.... स्नेहा के हलक मे साँसे अटक गयी.... चीख बाहर आने को तैयार थी पर होंठो को दांतो तले दबा लिया.....

तभी

 
तभी भीड़ से एक आदमी उसके चेहरे के भाव को देख कर बोला.... "मेडम, क्या आप को असहनीय दर्द हो रहा है"

मनु, उस आदमी की बात सुन कर हँसने लगा और थोड़ी देर के लिए अपना काम रोक दिया.... स्नेहा थोड़ी नॉर्मल होती कहने लगी.... "नही मुझे दवा मिल रही है... दर्द नही मज़ा आएगा ... आप टेन्षन ना लो और लाइट बंद कर दो"

स्नेहा इतना कह कर सीट से टिक गयी और लंबी-लंबी साँसे लेने लगी.... मनु ने हाथ फिर कंबल के अंदर डाल दिया.... कंबल के अंदर हाथ जाते ही... स्नेहा अजब सी एक्सिटमेंट फील करने लगी... उसकी योनि मे ऐसा लगा जैसे चिंगारियाँ जल रही हो.... इतना मज़ा उसे पहले कभी नही आया था.. जितना मज़ा वो इस .. भीड़ के होने का डर... के साथ ले रही थी....

हाथों ने अंदर जाते ही इस बार सबसे पहले जीन्स के बटन खोले फिर धीरे-धीरे जीप नीचे हुई... मनु ने स्नेहा की आखों मे देखा... वो हँसती हुई अपने कमर को थोड़ा हवा मे की, और मनु ने जीन्स को घुटनो तक नीचे कर दिया....

एक हाथ उसके बूब्स पर रखते उसे ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा... और दूसरे हाथ को पैंटी पर ले जा कर योनि के उपर ज़ोर-ज़ोर से थाप लगाता उसके अंदर उंगली करने लगा... स्नेहा ... होंठो को दांतो तले दबाए ... "आहह.... इस्शह" की सिसकारियाँ ले रही थी.... और मनु अपने काम मे लगा था.....

स्नेहा को इस खेल मे काफ़ी मज़ा आने लगा था.... बूब्स और योनि पर लगातार हाथ फिर रहे थे और लोगों की भीड़ को देख कर अंदर से अजीब तरह से फीलिंग आ रही थी... अब तो स्नेहा भी भीड़ को नज़रअंदाज़ करती इस खेल का मज़ा लेने लगी.... अचानक ही उसके होंठ खुल गये और एक ज़ोर की सिस्कारी उसके मूह से निकली.... "आअहह"

किसी ने लाइट स्नेहा के चेहरे पर दिखाई.... "कुत्ते के बच्चे सोने दे, कभी लड़की नही देखी जो टॉर्च जला कर देख रहा है"

स्नेहा के रंग मे भंग डालने वाले को उसने चिढ़ कर जबाव दिया... वो बेचारा चुप-चाप अपनी लाइट बंद कर दिया.... लाइट बंद होते ही स्नेहा मनु के पैंट पर लपकी और तेज़ी से उसकी पैंट खोलती उसके लिंग को बाहर निकाली.... मनु ने उस पर चादर ढकने की कोसिस की पर ... स्नेहा चादर हटाती झुक कर लिंग को अपने मूह मे ले कर चूसने लगी..

 


अब तो मनु की भी साँसे अटक गयी ... अब तक तो उसने जो भी किया वो कंबल की आड मे था, पर स्नेहा तो ओपन मे उसके लिंग को मूह मे ले ली.... मनु उसके बाल पकड़ कर उससे हटाने की कोसिस करने लगा ... पर स्नेहा थी कि लिंग को जड़ से अपने मुत्ठियों मे दबोचे अपना सिर हिला-हिला कर चूस रही थी.......

उत्तेजना से बेकाबू ऐसा हुआ मनु कि वो ज़ोर लगा कर हटा भी नही पा रहा था.... सीट से टिक कर अपना सिर टिका लिया .. और ज़ोर-ज़ोर से साँसे लेने लगा.... स्नेहा इतनी एग्ज़ाइटेड थी कि भरी भीड़ मे वो लिंग को मूह मे लिए बस चूस ही रही थी....

"ओह स्नहााआआआ" करते मनु ज़ोर की एक उत्तेजना भरी मादक आवाज़ निकाला और सिर को पकड़ कर अपने लिंग पर ज़ोर-ज़ोर उपर नीचे करने लगा.... लिंग पूरा मूह मे नही भी जा रहा था तो भी ज़बरदस्ती उसे अंदर धकेल रहा था...

इस बीच लोगों की बुदबुदाहट फिर से होने लगी ... लाइट जल गयीं मोबाइल की... और कई लोगों ने देखा.... स्नेहा का झुका होना... और उसकी टी-शर्ट सीने पर, जिस मे से उसके बूब्स बाहर निकले थे... और मूह मे लिंग भरा हुआ था ...

लाइट जलते ही, दोनो ने एक दूसरे को झटके के साथ छोड़ा..... स्नेहा धीरे से बोली ... "अब क्या होगा".....

"डॉन'ट वरी" का रिप्लाइ किया मनु ने .... और लोगों के रिक्षन भापने लगा....

मनु ने झट से स्नेहा की नाक पर एक मास्क रखा .. खुद भी एक मास्क पहना ... और स्प्रे कर दिया.... सारे लोग बेहोश हो कर गिरने-पड़ने लगे...

तभी मनु ने एक मेसेज भेजा और चार लोग वहाँ दौड़े चले आए ........ फिर उन चार लोगों ने भी मास्क पहना .. और पूरे कम्पार्टमेंट को बेहोश कर के दो-दो लोगों ने दोनो गेट को कवर कर लिया....

मनु.... अब हमे देखने वाला कोई नही.... भीड़ मे सेक्स का मज़ा लो पूरी तरह खुल कर जानेमन........ और इतना कह कर एक लाइट जला दिया.....

सारे लोग बेहोश पड़े थे... जलती लाइट मे ही मनु ने अब स्नेहा को पूरा नंगा कर दिया... खिड़की से आती सर्द हवा उसे ठंडा कर रही थी, पर इतने सारे लोगों के बीच सेक्स करना ... सोच-सोच कर ही स्नेहा गीली हो रही थी....

स्नेहा लोगों की पीठ पर पाँव देती वहीं खड़ी हो गयी.... और अपने पाँव फैला कर बोली..... मनु डार्लिंग अभी इसे थोड़ा होंठो से लगा कर चूस लो... ये तुम्हारे होंठो की प्यासी है....

मनु नीचे बैठ कर स्नेहा के योनि मे मूह डाला .... उससे ज़ोर-ज़ोर से चाटने लगा.... स्नेहा ... अपने बाल पकड़ कर अपना सिर हवा मे हिलाती ... जोर्र्र-जोर्र से ... "उफफफफफफफफफ्फ़.... आहह इस्शह" करने लगी...

स्नेहा मस्ती मे, कभी मनु के बालों पर हाथ फेरती, तो कभी अपने बूब्स मसल रही थी ... और मनु बस लगातार उसकी योनि को चूस ही रहा था..... बीच-बीच मे योनि के क्लिट को दाँतों तले दबा लेता तो कभी योनि के लीप के अंदर दाँत घुसा कर कुरेद देता....

 


स्नेहा का बदन पूरा झटका खा रहा था. वो खड़ी-खड़ी अपने कमर हिलाती इस मस्त चुसाइ का मज़ा ले रही थी.... अचानक ही उसका बदन अकड़ सा गया ... और तेज-तेज चिल्लाती हुई स्नेहा कही..... "उम्म्म्ममममम.... अहह.... मनुउऊउ मेरा तो रस छूटने वाला है".....

मनु अपना सिर हटा कर..... "उम्म्म्मम ... मलाई ... आज मलाई ... आ रही है.... जल्दी पिलाऊओ"... इतना कहते ही मनु ने फिर से योनि मे मूह लगा लिया और उसके कमर को हाथ से पकड़ कर... मूह के अंदर पूरी योनि को ले लिया.....

स्नेहा, लगभग मनु के मूह पर ही पूरा भर दी थी... स्नेहा अपनी कमर मे तेज-तेज झटका देती.... पूरे बदन को हिलाने लगी ... और अपना सारा रस छोड़ दिया.....

मनु फिर भी योनि को पूरे मूह मे भरे चूस्ता रहा.... लगातार उसकी योनि को जीभ से सेवा देता रहा.... स्नेहा खुद को काफ़ी हल्का महसूस करने लगी......

अद्भुत एक्सिटमेंट .... स्नेहा झट से नीचे बैठी ........ "ओह्ह्ह्ह मनु डार्लिंगगगग.... उम्म्म्मम आज तो सातवे आसमान पर हुन्न्ञणन्.... लाओ अब मैं भी इस से ज़रा खेल लूँ"

कहती हुई स्नेहा ने मनु के बॉल को अपने हाथों से उठाया और जड़ मे अपनी जीभ फिराने लगी... जीभ फिराती वो जड़ से उपर की तरफ आई ... और पूरे लिंग को चाट'ते हुए, नीचे से टॉप पर पहुँची.... फिर स्नेहा ने पहले तो लिंग को अपने दोनो हाथों की मुट्ठी का बीच पकड़ा और ज़ोर से चमड़ी आगे-पीछे करने लगी .....

मनु गर्दन उँची किया स्नेहा के सिर पर हाथ रखा.... और ... "सस्स्स्स्स्स्सिईईईई, उफफफफफफफफफ्फ़... ओह" करने लगा.

"डार्लिंग... अब मुझे भी मलाई रस पिलाओ".... कहती हुई स्नेहा ने मनु के लिंग को अपने मूह मे डाल लिया ... और बड़ी तेज़ी से चूसने लगी... मनु भी स्नेहा के बाल पकड़ कर उसे ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा.... थोड़ी देर बाद मनु भी "सुउुउऊहह.... लूऊओ .... आअ र रहा है"......

तेज सिसकारी के साथ, मनु ने स्नेहा के सिर को अपने लिंग पर दबा दिया.... और कमर से तेज-तेज झटके देने लगा...... पूरा कम स्नेहा के मूह मे उडेल दिया... जो मूह के साइड से लार के साथ निकलने लगा....

कम निकालने के बाद मनु भी खुद मे काफ़ी हल्का महसूस करने लगा. ठंडे पड़े लिंग को स्नेहा अब बॉल्स के साथ मूह मे डाल कर चूस रही थी..... थोड़ी ही देर मे लिंग फिर से आकार लेने लगा.... कुछ देर लिंग चूसने के बाद स्नेहा पिछे हटी ... और कहने लगी....

"इसस्शह मनु... अब अंदर की आग बुझा दो... डाल भी दो"....

 
कम निकालने के बाद मनु भी खुद मे काफ़ी हल्का महसूस करने लगा. ठंडे पड़े लिंग को स्नेहा अब बॉल्स के साथ मूह मे डाल कर चूस रही थी..... थोड़ी ही देर मे लिंग फिर से आकार लेने लगा.... कुछ देर लिंग चूसने के बाद स्नेहा पिछे हटी ... और कहने लगी....

"इसस्शह मनु... अब अंदर की आग बुझा दो... डाल भी दो"....

मनु हँसते हुए कहने लगा.... "दोनो पाँव दोनो सीट पर डाल कर खिड़की की रोड पकड़ लो"

स्नेहा भी अपने दोनो पाँव फैला कर दोनो सीट पर डाली और खिड़की के रोड को पकड़ ली.... ठंडी हवा के झोंके स्नेहा के चेहरे बूब्स और खुले बदन पर पड़ने गये... कुछ ही पल मे उसके दाँत किट-किट बजने लगे... जोश भी, इस ठंड के साथ ठंडा पड़ रहा था ...

तभी मनु अपने लिंग को योनि से रगड़ते एक ही झटके मे पूरा अंदर कर दिया ....

"आहह .... माआअंनूऊऊुुुुउउ"

फिर मनु नही रुका ... वो स्नेहा के कमर पकड़ कर उसे ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा.... स्नेहा रोड पकड़े, हर धक्के पर पूरा हिल रही थी .. और ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियाँ ले रही थी....

स्नेहा के पाँव जैसे अकड़ से गये हो उतना फैलाए-फैलाए... वो फिर मनु को हटने के लिए कही ... और जा कर लोगों के उपर ही उल्टी लेट गयी .... स्नेहा के नंगे जिस्म के नीचे कई लोग थे ... जिस्म की गर्मी से वो और भी ज़्यादा पागल होती, स्नेहा ज़ोर-ज़ोर से कहने लगी.... "ओह फक मी हार्डएर्र बाबयययययययी.... कॉंईए ओन्णन्न् फक्क्क-फक्क्क फक्क्क्क"

अजीब है सेक्स का सुरूर... इतने लोगों के बीच लाइट ऑन कर के ... और कोई डर नही.... धक्कों की रफ़्तार उत्तेजना के हिसाब से ही पूरे चरम पर थी... स्नेहा का पूरा बदन अंजाने लोगों के बदन से घिस रहा था.... और वो अपनी कमर हवा मे उछाल-उछाल कर सेक्स का भरपूर मज़ा लेने लगी.

सुबह ... लोगों को बेहोश छोड़ कर ही दोनो मुंबई उतर गये.... एक तूफ़ानी रात स्नेहा बिता कर आ रही थी.... सेक्स का ऐसा अनुभव उसे आज तक नही हुआ..... दोनो रात वाली हरकतों पर खूब हंस-हंस कर चर्चा करने के बाद ... स्नेहा मनु से पुछ्ने लगी..... "बॉस अब क्या वापस देल्ही चले"

मनु..... नही बाबा... अभी तो मुंबई मे हमे काया से मिलना है...

स्नेहा बड़ी सी आँखें करते हुए ... बारे आश्चर्य से ज़ोर से कही ...... " क्या .... काया.... पर क्योँन्न"

मनु.... क्योंकि अभी तो तीर छोड़ना शुरू करूँगा ... और पहले तीर की शुरुआत काया से ही होगी......

स्नेहा.... ह्म्म्म्म ! मतलब आप सेक्स फॅंटेसी मे नही .... बल्कि मुंबई शिकार खेलने आए हैं...

मनु.... नोट एग्ज़ॅक्ट्ली जानेमन.... मैने कहा मैं सिर्फ़ काया से मिलूँगा... उस से ज़्यादा कुछ नही ... अब सोचना बंद करो ... आगे और भी बहुत से काम हैं हमे .....

मनु और स्नेहा दोनो काया के बंग्लॉ मे घुसे .... और जैसे ही हॉल के अंदर आए वहाँ का पूरा महॉल ही शॉकिंग हो गया.... उम्मीद से परे थे ये ... जिसकी कल्पना ना तो मनु ने और ना ही काया ने की थी.... और बाकी का भी कुछ ऐसा ही हाल था.....

महॉल बिल्कुल शांत सा हो गया... स्नेहा ने जब वहाँ मौजूद लोगों को देखा तो चुप-चाप जा कर मनु के पिछे खड़ी हो गयी..... हॉल मे काया अपनी माँ और मनु की सौतेली माँ अमृता और पापा हर्षवर्धन के साथ थी....

काया...... मुझे कोई उम्मीद नही थी कि आप यहाँ आओगे, चले जाओ आप... मेरी ज़रूरत पर आए नही, और जब कोई उम्मीद नही तो चौका दिया.

 


मनु, काया की बात सुन कर वहाँ से चुप-चाप जाने लगा, तभी काया दौड़ कर उसके गले लगती हुई..... "भाई, यूँ अचनाक, अच्छा सर्प्राइज़ दिया, वैसे मैं अब भी नाराज़ हूँ"

मनु..... सर्प्राइज़्ड तो मैं हो गया, मोम-डॅड आप दोनो कब आए...... मुझे किसी ने कुछ बताया भी नही...

अमृता.... बताया तो तुम ने भी नही मनु, तुम यहाँ आ रहे हो. वैसे यूँ, इस तरह काया से मिलने आए, बड़े आश्चर्य की बात है...

काया.... भाई है मेरे, कभी भी आ सकते हैं, आप भी ना मोम.... वैसे भी अब मैं जाउन्गी भाई के साथ घूमने.....

हर्षवर्धन..... पर काया बेटा, वो अभी सफ़र से आया है, और उसकी हालत भी ठीक नही लग रही...

मनु.... नही डॅड मैं तो फिट हूँ, पर काया मैं नही चल सकता तेरे साथ.... मैं तो बस तुझे देखने चला आया था.....

काया.... हुहह ! मुझे कुछ नही सुन'ना, आप मुझे यहाँ आधे घंटे मे फ्रेश हो कर मिलो, बससस्स .. नो आर्ग्युमेंट .....

मनु, काया की बात मान कर चला गया, उसके साथ-साथ काया भी स्नेहा को ले कर उसे उसका फ्रेश होने के लिए कमरा दिखाने ले जाती है... इधर, हर्षवर्धन मूलचंदानी और अमृता दोनो आपस मे....

अमृता.... हर्ष, ये यहाँ क्या कर रहा है.... ज़रूर तुम ने ही बताया होगा...

हर्षवर्धन.... मुझे क्या पता मनु यहाँ क्या कर रहा है.... ट्रॅवेल एजेंट ने तो बताया भी नही इसकी कोई मुंबई की टूर प्लान है....

अमृता..... दोनो को साथ जाने से रोको, वरना कहीं बातों-बातों मे काया ने हमारी बात बता दी तो लेने के देने पड़ जाएँगे....

हर्षवर्धन..... नही काया उस से कुछ नही बताएगी, वैसे भी काया जब मनु के साथ होती है तो उन-दोनो को अपनी बातों के सिवा कुछ और सूझता ही कहाँ है...

अमृता.... पता नही ये मेरी ही बेटी है या हॉस्पिटल मे बच्चा बदल गया था.... ये हमारी तरह उस से कटी-कटी क्यों नही रह सकती. खा-म-खा उसे बाहर ले जा कर हमारी परेशानी बढ़ा रही है.

हर्षवर्धन.... चुप करो वो आ रही है.....

काया के आते ही वहाँ का महॉल शांत हो जाता है...... फीकी मुस्कान हँसती, अमृता बोलने लगी..... "काया मैं क्या सोच रही थी, चलो हम सब शॉपिंग करने चलते हैं".

काया..... नही मैं भाई के साथ जाउन्गी...

अमृता..... मनु के साथ फिर कभी चली जाना, कितने अरमान से तुम्हारे लिए टाइम निकाल कर आए हैं, और तुम हो कि हमारे साथ जाने से मना कर रही हो....

काया..... आइ लव यू मोम, आइ लव यू डॅड.... पर आप को नही लगता कितना अजीब है, आप को अपनी बेटी के लिए टाइम निकाल कर यहाँ आना पड रहा है. यही अंतर है आप मे और भैया मे. वेल थॅंक्स फॉर युवर टाइम, बट सॉरी मैं आप लोगों के साथ नही आ सकती....

काया की बात सुन कर, अमृता पूरी तरह से गुस्सा हो जाती है, लेकिन अपने गुस्से को काबू कर के शांत बैठ जाती है.... थोड़ी देर बाद मनु भी हॉल मे आ जाता है और काया उस के साथ चली जाती है.....

घर पर ... हर्षवर्धन-अमृता और स्नेहा...

हर्षवर्धन.... सो स्नेहा तुम लोगो कोई नये कांट्रॅक्ट के लिए यहाँ आए हो...

स्नेहा.... नो सर, मनु सर को केवल काया मैम से मिलना था, और मिल कर हम वापस चले जाते...

अमृता..... तुम झूठ तो नही बोल रही. देखो मनु, काया के साथ गया है, और वो अपने सारे काम छोड़ सकता है पर काया जब तक कहेगी तब तक वो उसके साथ रहेगा. वैसे भी उसके सारे कांट्रॅक्ट तो हाथ से निकल गये, अब यदि काम नही होगा उसके पास तो उसकी कंपनी डूब जाएगी ना, इसलिए पूछ रही हूँ... यदि किसी कांट्रॅक्ट के लिए आए हो तो बता दो, हर्ष फ्री हैं वो चले जाएँगे...

स्नेहा... नो मैं, मैं सच कह रही हूँ. सर यहाँ किसी काम से नही केवल काया मैम से मिलने आए थे......

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इधर काया और मनु....

काया.... भाई आप ने चौका दिया, फोन कर के नही आ सकते थे....

मनु.... मन किया चला आया, अब क्या मैं फोन करूँ तुझे, बता...

काया.... और मैं कहीं बाहर होती तो....

मनु..... तो तू मुझे बता कर जाती. वैसे मुझ पर इतना गुस्सा किस बात पर थी, और यूँ अचानक ले कहाँ जा रही है...

काया.... सब पता चल जाएगा चलो तो सही....

कुछ ही देर मे दोनो एक रेस्टौरेंट मे थे... और उन दोनो के टेबल पर एक लड़का आ कर बैठ गया.....

काया... भैया इन से मिलो....

मनु बीच मे ही बात काट'ते हुए..... ये हैं मिस्टर नॉमिन घोसाल, सन ऑफ मिस्टर. सचिन घोसाल...

नॉमिन... हा हा हा, काया हम पहले मिल चुके हैं...

काया.... हुहह ! मेरा सर्प्राइज़ तो सर्प्राइज़ रहा ही नही, जानते हो तो अब बैठ के दोनो बातें करो मैं चलती हूँ....

मनु.... बस भी कर पगली, नोमिट क्या सोचेगा हमारे बारे मे...

काया.... आप के बारे मे कुछ सोचा तो उड़ा दूँगी, आख़िर मेरा फ्यूचर हज़्बेंड है....

मनु पूरा शॉक्ड हो गया..... "क्या ये कब हुआ, मुझे किसी ने बताया क्यों नही"

काया.... कल ही तो सब तय हुआ है... और मैं नाराज़ भी थी, मोम-डॅड आए और आप नही...

मनु फीकी सी मुस्कान के साथ... "कोई बात नही कोंग्रथस बोत ऑफ यू... कल मैं आक्च्युयली थोड़ा परेशान था इस वजह से नही आ पाया... वैसे गुस्सा तो मुझे होना चाहिए...

काया.... अच्छा वो क्यों भला.....

मनु..... "क्योंकि मैं नही आ सका तो क्या हुआ, तुम तो मुझे बता सकती थी".

काया अपने कान पकड़ती.... "सो सॉरी भाई, वो सब कुछ इतना अचानक हो गया कि मैं भूल गयी"

नॉमिन... लगता है मैं दोनो भाई-बहन के बीच आ गया.... मुझे चलना चाहिए....

काया.... हां ये सही कहे... हहहे, ... तुम्हारा कोई काम नही, मैं अब भाई के साथ ये पूरा दिन बिताउन्गी....

मनु.... सॉरी नॉमिन, हट पागल कोई ऐसे बात करता है क्या....

नॉमिन.... इट'स ओके मनु, कोई बात नही..... मैं वैसे भी ऑफीस जा रहा था...

काया.... ओये, यदि मुझ से शादी करनी है तो भाई को भैया बुलाओ. इतना भी किसी ने नही सिखाया क्या, घर मे बड़ों से कैसे बात करते हैं. और हां कोई बिज़्नेस वाला रीलेशन नही है, इनके पाँव भी छुने होंगे....

मनु.... नॉमिन इसकी बातों का बुरा मत मान'ना ... मुझे ले कर कुछ ज़्यादा ही सीरीयस रहती है...

काया... हुहह ! सही ही कही हूँ मैं... कोई ग़लत बात नही बोली.....

मनु, काया को खींच कर बाहर ले आया.... "क्या तरीका है ऐसे किसी से बात करने का, वैसे भी रेस्पेक्ट अर्न की जाती है, उससे ज़बरदस्ती हाँसिल नही किया जाता"

काया.... आप इसमे कुछ नही बोलो, वरना समझ लो आप की मेरी कट्टी. खा-म-खा डाँट दिया उस लंगूर के लिए... उस से अब शादी कॅन्सल ...

मनु ने उसे कुछ भी ऐसा करने से मना कर दिया. दोनो भाई-बहन साथ मे ही घूमे सारा दिन,

और शाम को स्नेहा के साथ मनु मुंबई से देल्ही रवाना हो गया....

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स्नेहा.... "मनु, तुम्हारी सौतेली माँ को तो तुम्हारी बहुत फ़िक्र है".... फिर स्नेहा ने घर पर हुई सारी बातें बता दी.....

मनु.... जानती हो काया की शादी फिक्स हो गयी, और शादी कहाँ तय हुई है पता है...

स्नेहा.... कहाँ...

मनु... घोसाल ग्रूप ऑफ कपम्पनीएस के ओनर सचिन घोसल के बेटे नॉमिन से....

स्नेहा.... हा हा हा, मतलब तीर आप छोड़ने गये थे या उल्टा तीर खाने...

मनु.... शॉकिंग तो है बेबी, पर इन सब चक्कर मे उन लोगों ने काया को घसीट कर अच्छा नही किया.....

स्नेहा... वैसे एक बात पर ध्यान दिया आपने... कल ही आप की भी शादी फिक्स हुई...

मनु... ह्म ! इस बात पर मेरा ध्यान गया नही .... स्नेहा ज़रा पता करो कल वंश और राजीव किधर थे....

दोनो के बारे मे पता करने के बाद..... "मनु कल के दिन की कोई खबर नही ये दोनो कहाँ थे कल, इनफॅक्ट परसो की भी इन्फर्मेशन नही. ऑफीस स्टाफ मे से किसी ने ना तो वंश सर को देखा और ना ही राजीव सर को".

"ह्म ! इसका मतलब मैं इन सब से एक कदम पीछे रह गया. अच्छा कोई बात नही, एक काम करो... सारे बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स को मेसेज कर दो.... ऐज पर हिज़/हर चाय्स, आइदर ही/शी कॅन टेकोवर और मर्ज माइ कॉप्नीस... दा बिड ईज़ ओपन टूमारो फ्रॉम 12:00 पीयेम"

इधर काया के बिहेव को ले कर अमृता, हर्षवर्धन पर बरसती हुई कह रही था..... "ये दिन मुझे तुम्हारे कारण देखना पड़ रहा है हर्ष, सिर्फ़ तुम्हारी वजह से मेरी बेटी उस सन ऑफ बिच के इतने करीब है. काया की ज़िंदगी से उसे हटाओ, वरना मुझ से बुरा कोई नही होगा".....

 
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