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हंग्री वुल्फ गेम (इंसान या भूखे भेड़िए ) complete

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इधर सब लोग अपनी-अपनी बात करने मे लगे थे, और अखिल, काया का हाथ थामे उसे बस देखे ही जा रहा था. काया, अखिल की हरकतों पर हँसती हुई, बस खड़ी उसे देख रही थी. मनु की नज़र जब उन पर पड़ी तो ज़ोर से कहने लगा..... "अखिल तू बाहर से चिल्लाता हुआ क्या कह रह था"

अखिल का ध्यान टूटा, और वो हडबडा कर अपना हाथ हटाया. काया उसकी हालत देख कर ज़ोर-ज़ोर हँसने लगी. तीनो जैसे आए थे वैसे ही वापस चले गये. लेकिन काया का जाना अखिल को अखर रहा था, वो तो बस इस हसरत से था कि यहाँ से सब लोग चले जाए, और काया और वो बिल्कुल अकेले रहे.

मनु, अखिल के आँखों के पास चुटकियाँ बजाते.... "तू खोया कहाँ है अखिल"

अखिल.... यार बड़ा बेईमान है तू, शादी फिक्स कर ली और लड़की से मिलवाया भी नही....

मनु.... मेरी छोड़, तू मेरी बहाँ को घूर क्यों रहा था.... साले अभी निकल जा यहाँ से. तुम्हे शर्म नही आती, दोस्त की बहाँ को ऐसे घूरते हुए....

अखिल.... सॉरी यार, मुझे मंफ़ कर दे. पर सच कहता हूँ, उसे देख कर जैसे मैं कहीं खो सा गया.... देख तू मुझे जानता है, मैं क्या ग़लत लड़का हूँ.

मनु.... ग़लत क्या होता है अखिल. अभी तो देख लिया ना मैने. किसी के दिल मे क्या है, वो तो वक़्त आने पर ही दिख जाता है. जैसे मुझे अभी दिखा.

अखिल.... यार, मुझे वो वाकई बहुत प्यारी लगी. अगर तुम राज़ी हो तो मैं उस से शादी करना चाहता हूँ.

मनु..... दो कौड़ी के पोलीस वाले तुमने ऐसा सोचने की हिम्मत कैसे किया.

अखिल.... मनु, तू बहुत बड़ा पैसा वाला होगा, पर किसी की औकात इतनी आसानी से नही आँकते.

मनु.... अच्छा तो कैसे आँकते हैं. किसी के घर गये, और उसके घर के औरतों पर बुरी नज़र डाल कर.

अखिल.... आइ आम सॉरी दोस्त. ठीक है मुझ से ग़लती हुई. चलता हूँ अभी.

मनु.... ओये मूड कर उधर मेरे एनकाउंटर का तो नही सोच रहा.

अखिल, मुस्कुराता हुआ पीछे मुड़ा.... "यार बहुत गिल्टी फील करवाया तूने, जानता है अंदर से रोने-रोने जैसा मन कर रहा था. सॉरी यार, मैं पहली बार किसी लड़की को ले कर इतना सीरीयस हुआ. उस वक़्त पता नही क्या हुआ, मैं खुद पर काबू नही रख पाया. जब कि बात केवल दोस्त के घर की नही थी यार, मुझे तो ट्रनिंग मे एमोशनलेस्स होना सिखाया गया था".

मनु.... मियाँ, अब ग़लती तो हो गयी तेरे से. भाई मेरी तरफ से तो रिस्ता पक्का है. आख़िर घर का लड़का है, मेरा खुद का जाँचा-परखा. और माशा-अल्लाह आज के दौर मे ऐसा नायाब हीरा कहाँ मिलता है. पर बेटा मेरे हां कहने से कुछ नही होता, लग जा अपनी दुल्हनिया के पिछे, उसने हां कर दी तो तुम दोनो का रिश्ता मैं करवाउंगा....

स्नेहा.... लेकिन उसकी शादी तो पहले से तय है...

मनु... तो क्या हुआ, डीडीएलजी रीफ्रेन्स के तौर पर देख लेगा अखिल, हा हा हा.

अखिल.... वो सब छोड़, पर यार इतनी तो क्लास नही लेना था ना. सच मे बहुत बुरा फील हुआ.

मनु.... कल तुमने मेरी होने वाली दुल्हनिया को डराया, और उससे फ्लर्ट किया था ना, उसी की सज़ा तुम्हे दिया.

अखिल.... क्या ???? ओह्ह्ह हूओ, ओह्ह्ह हूओ ... मुझे कल ही लगा था तुम दोनो के बीच कुछ है, आख़िर मेरा अंदाज़ा सही निकला.... पार्टययययी टाइमेयीईयी... बॉस को बोल ऑफीस संभाले.... हम पार्टी करते हैं....

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शाम को तनु-रौनक की मीटिंग....

रौनक..... तनु जी अब कोई फ़ायदा नही, हम तीनो एक भी हो जाए तो मूलचंदानी फिर भी आगे ही रहेंगे. मुझे मेरी कंपनी पर ध्यान देने दीजिए...

तनु.... सुनिए रौनक जी. इस ग्रूप को खड़ा करने मे आप सब की जितनी मेहाँत है, उसका 10% मेहाँत भी मूलचंदानी ने नही किया. मैं तो आप सब के हक़ की बात कर रही हूँ. यदि आप साथ दे, तो हम ये बाज़ी बड़ी आसानी से जीत लेंगे.

रौनक.... वो कैसे....

तनु.... कुछ पाप ऐसे होते हैं जिस के धब्बे कभी नही मिट'ते. बस कुछ पुरानी बातें तो बाहर आनी है. कुछ ऐसी बातें जो मूलचंदानी मेंशन के अंदर दफ़न है, बस उसे बाहर ही तो करना है. लेकिन हम कामयाब तब तक नही होंगे, जब तक आप साथ ना दे.

रौनक.... आप करने क्या वाली हैं तनु जी.

तनु.... रौनक जी, आप के चेहरे के भाव देख कर मुझे ये तो समझ आ रहा है कि आप बात को अच्छी तरह समझ गये हैं, फिर ऐसे अंजान क्यों बन रहे हैं.

रौनक.... ह्म ! बात अंजान बन'ने की नही है. बात उस राज की है जिसे आप बाहर लाना चाहती हैं. मुझे सोचने का वक़्त दीजिए, मैं अभी किसी नतीजे पर नही पहुँच सकता.

तनु.... ठीक है आप आराम से सोचिए रौनक जी. पर सोचने मे इतना भी वक़्त नही लगाइएगा कि बाज़ी अपने हाथ से निकल जाए....

रौनक का उड़ा चेहरा सॉफ बता रहा था कि इस बात के परिणाम कितने गंभीर हो सकते हैं, वहीं तनु अपनी चेहरे पर ऐसे मुस्कान लिए रौनक को देख रही थी, मानो कह रही है.... "हमारे साथ मिल जाइए और बस तमाशा देखिए"

इस मीटिंग से दोनो किसी नतीजे पर तो नही पहुचे, लेकिन रौनक को आने वाले कल की भनक ज़रूर लग गयी. दोनो बाप-बेटी, रात को खाने पर बैठे थे....

रौनक.... जिया बेटा मुझे तुम से कुछ बात करनी थी.

जिया.... पापा कहिए भी, इसमे इतना फॉर्मल होने की क्या ज़रूरत है.

रौनक.... बेटा मैं ये कह रहा था कि हम अपना शेयर और अपनी कंपनी ले कर सब लोगों से साइड हो जाते हैं. मुझे नही लगता है कि हमे पूरे ग्रूप के बारे मे सोचना चाहिए.

जिया.... पापा, आप के चेहरे के भाव कुछ और ही बता रहे हैं. तनु आंटी से मीटिंग थी ना, क्या हुआ उस मीटिंग मे.

रौनक उस मीटिंग की सारी बात और तनु के मंसूबे को बता कर जिया से कहने लगा.... "हमे नही इनके झमेले मे पड़ना चाहिए, हम साइड ही रहते हैं इस से. जिसे जो करना है करे".

जिया.... हा हा हा... पापा, आप भी ना बच्चों जैसी बातें करते हैं. आप तनु आंटी को हां कह दो और साइलेंट्ली कूद जाओ इस खेल मे. वैसे भी डाइरेक्ट वॉर तो वही करने वाले हैं. हम बस पिछे खड़े रह कर तमाशा देखेंगे... वैसे एक बात आप को पता है क्या ?

रौनक... क्या????

जिया.... नताली, मनु का ग्रूप शायद कल से जाय्न कर ले.

रौनक.... मतलब...

जिया.... पापा यदि मैं ग़लत नही हूँ तो ये लोग केवल अतीत को निशाना नही बना रहे. बल्कि कहानी कुछ यूँ होगी कि प्रेज़ेंट की किसी एक घटना को ले कर अतीत की धज्जियाँ उड़ाएंगे ये लोग. और यदि ऐसा होता है तो उस वक़्त कंपनी मूलचंदानी के हाथ मे नही, उनके पार्ट्नर्स के हाथ मे चली जाएगी.

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मूलचंदानी हाउस.....

हर्षवर्धन..... अमृता, रौनक भड़क गया है हमारे फ़ैसले से. उसकी बातों से कड़वाहट नज़र आ रही थी.

अमृता..... ये तो होना ही था डार्लिंग. वैसे उन दोनो पार्ट्नर्स के क्या हाल हैं.

हर्षवर्धन.... उनकी हालत तो रौनक से भी खराब लगती है. आज कल उनकी अगुवाई तनु कर रही है.

अमृता.... डार्लिंग आप बस अब गेम एंजाय करो. आग लग चुकी है... धुआँ भी उतना शुरू हो गया है. अपना काम तो अब बस उन आग की लपटों को बढ़ाना है.

हर्षवर्धन.... लेकिन अमृता, कहीं ये आग हमारे घर को ना जला दे. रजत पहले तो खफा था, अब तो वो पूरे गुस्से मे है. मुझ से कह रहा था, हम मजबूर नही हो सकते, उस नाजायज़ को ये सुख ज़्यादा दिन नसीब नही होगा.

अमृता.... बच्चा है अभी, कल मैं उस से बात करूँगी, और बात कर के सब समझा दूँगी.

हर्षवर्धन.... कल क्यों, उसका इतना गुस्सा होना मुझे कुछ ठीक नही लग रहा. अभी चलते है ना बात करने.

अमृता.... ओह्ह्ह्ह कम ऑन हर्ष, जवान है, पार्टी मनाने गया है दोस्तों के साथ, उसे एंजाय करने दो. ये सब बातें शुरू कर के उससे अभी इन्वॉल्व मत करो. हम उस से कल बात कर लेंगे....

रात के 10:30 बजे... एक क्लब मे..

रजत कोकीन के एक शॉट सुघने के बाद जाम के घूँट पर घूँट पिए जा रहा था. पीछे से उसकी गर्लफ्रेंड उसके गले मे हाथ डालती...... "कम ऑन रजत, सब पार्टी एंजाय कर रहे हैं, और तुम यहाँ अकेले क्या कर रहे हो".

रजत.... दीप्ति, मेरा मूड ठीक नही है, तुम सब पार्टी एंजाय करो.

दीप्ति पिछे से उसके कान को अपने दाँतों तले दबाती.... "चलो भी, एक डॅन्स जाए"

रजत.... एक बार तुमसे कहा ना मेरा मूड नही है, फिर क्यों परेशान कर रही हो.

रजत की तेज आवाज़ सुन कर उसके बाकी के दोस्त भी उनके पास आ गये. बार काउंटर के आगे सभी उसे घेर कर बैठ गये.

सम... रजत ब्रो क्या हुआ, तुम इतने परेशान क्यों लग रहे हो.

रजत, लड़खड़ाई सी आवाज़ मे कहा... "पार्टी ओवर दोस्तों, तुम सब अब जाओ, मैं भी चलता हूँ".

सम.... फ्रेंड्स पार्टी ओवर. दीप्ति चल इसे ले कर...

सम अपनी बात कहते दीप्ति को आँख मारा, और दोनो उसे ले कर दीप्ति के फ्लॅट पर पहुँच गये. वहाँ पहुँच कर दोनो फिर से रजत को घेर कर बैठ गये....

सम... तुझे क्या हुआ, इतना परेशान क्यों है.

रजत..... दिमाग़ की माँ बहाँ मत कर, और चुप-चाप जा यहाँ से.

सम.... यार बात दोस्तों को नही बताएगा तो किसे बताएगा. आख़िर दोस्त होते किस लिए हैं. तू परेशानी तो बता, हम जान लगा कर भी उससे तेरे लिए हल कर देंगे.

रजत.... क्या बताऊ, साला एक हरामी मेरा हक़ मारने पर तुला है. उसकी नज़र मेरी सारी प्रॉपर्टी पर है. उस ने मोम-डॅड को इतना मजबूर कर दिया कि, उन्हे अपना शेयर तक उस हरामी को देना पड़ा. जी तो करता है उसे अभी जा कर गोली मार दूं.

सम.... और गोली मार कर खुद जैल चले जाना. फिर वो दौलत को क्या दीमक चाटेगी. तू ये बड़ों की बातें उन्ही पर क्यों नही छोड़ देता. वो लोग खुद समझ लेंगे.

दीप्ति.... हां रजत, इतना टेन्षन लेने से कोई फ़ायदा नही.

रजत.... भागो यहाँ से कमिनो. कोई मेरे हक़ छिन रहा है, और मुझे ही शांत होने को कह रहे हो.अपना प्रवचन अपने पिच्छवाड़े मे डाल लो. गन निकाल, किधर है उसे अभी गोली मारूँगा फिर मेरे कलेजे को ठंडक मिलेगी.

सम.... तेरा दिमाग़ फिर गया है. अच्छा सुन मेरी एक बात. ये हरामी भी बिल्कुल अपने टाय्लेट की तरह होते हैं. ठीक से सॉफ ना करो तो इसकी बदबू पूरे घर मे फैलती है... तो क्या करे जा कर खुद ही टाय्लेट सॉफ करे, उस गंदगी को खुद छुये... या किसी को बुला कर उसे सॉफ करवाते हैं...

रजत.... साले, अब किया ना तूमे पते की बात. अभी फोन लगा उस गंदगी सॉफ करने वाले को. उस हरामी की बदबू मैं और बर्दास्त नही कर सकता.

सम.... रहने दे अभी रात हो गयी है. तू 10 लाख का एक टोकन अमाउंट दे. कल उस गंदगी सॉफ करने वाले से भी मीटिंग फिक्स कर लेते हैं.... तब तक तू एक काम कर....

रजत उसे 10 लॅक का एक चेक देते पुच्छने लगा.... "क्या करूँ".

सम.... दीप्ति को भरे क्लब मे तुम्हे डांटा... यहाँ भी चिल्ला दिया... देख तो बेचारी कितनी उदास है... आज रात तुम दीप्ति की उदासी मिटाओ, कल हम उस गंदगी को भी भागते हैं. ग़लती दुश्मन करे... और सज़ा अपनो को दे रहे हो. ये नही चलेगा... आज तो पूरा मज़ा देना दीप्ति को.

 


सम की बात सुन कर रजत जाम हाथ मे उठाया, और दीप्ति को देख कर कहने लगा.... "आज तो मैं अपनी बेब को पूरा खुश कर दूँगा.... कल मिलता हूँ साले... सारा इंतज़ाम कर देना"...

दीप्ति, रजत के साथ उसे नीचे तक ड्रॉपे करने गयी.... "ज़रा आराम से इसे दुनिया दिखाना, ताकि तेरा दीवाना रहे. सही मौके पर बड़ा मुर्गा फसा है. अभी तो ये हमारी करोड़ो की चाबी है. बस कोई ग़लती मत करना".

दीप्ति, सम को ड्रॉप कर के जल्द ही वापस आई... तब तक रजत विश्की के दो पॅक बनाए बैठा था. दीप्ति जैसे ही अंदर आई.... उसे कमर से पकड़ कर खींचा और खुद से चिपका लिया. उसके हाथों मे जाम के ग्लास थमाते कहने लगा..... "ओ' माइ हॉट बेबी, यू आर सो सेक्सी.... आज तो प्यास बढ़ रही है"

दीप्ति..... तुम भी बिल्कुल माचो मॅन लग रहे.... बिजली गिरा रहे हो. आज तो प्यास इधर भी पूरी भड़की है. बुझा लो, और बुझा दो प्यास.

एक दूसरे से लिपटे हुए दोनो ने एक-एक जाम पिया, और रजत उसके हाथों से ग्लास ले कर टेबले पर रख दिया. ग्लास नीचे रख कर, रजत उसके होंठो को अपने उंगली से मसल दिया और अपने होंठ लगा कर ज़ोर-ज़ोर से चूमने लगा.

पूरी तेज़ी के साथ दोनो एक दूसरे के होंठ चूमना शुरू कर दिए. पूरा मुँह कॉल कर दोनो एक दूसरे का मुँह अपने मुँह मे भरते, खींचती सांसो के साथ जीभ से जीभ लगा कर चूस्ते चले जाते, और फिर छोड़ती सांसो के साथ दोनो के होंठ अलग हो जाते.

दीप्ति उसे चूमते हुए नीचे बैठ गयी, और रजत अपनी पीठ दीवाल से टिका दिया. दीप्ति तेज़ी दिखाते हुए उसके बेल्ट को खोली, फिर पैंट के बटन, और फिर जिप को नीचे खिसकाती, उसके पैंट को घुटनों मे कर दी.

दीप्ति, अंडरवर के उपर आए उभार पर अपने होंठ ले गयी, और उसे चूम कर तेज सांस अपने अंदर खींची. इधर दीप्ति ने तेज सांस लिया उधर रजत की साँसें चढ़ गयी.... "ऊओ कम ऑन बेबी सक इट"

दीप्ति, उपर नज़र उठा कर रजत को देखी और अपने होंठों को काट'ती कहने लगी.... "ओह्ह रियली रजत" और इतना कह कर अपन मुँह पूरा खोली और अंडरवर के उपर आए उभार को अपने मुँह मे भर कर दाँतों से धीरे-धीरे काटने लगी.... "ऊऊऊऊऊ.. आआआआआअ, कॉमह ओन्णन्न्.... आआआ... जान ले रही हूऊओ... उफफफफफ्फ़"

रजत की कमर फडक उठी और गर्दन उपर कर के वो तेज-तेज साँसे लेने लगा. दीप्ति देर ना लगाती हुई, उसके अंडरवर मे हाथ डाल दी, और उसके लिंग को अपने हाथों मे ले कर उसे बाहर निकाल दी. जैसे ही दीप्ति ने अपने सर्द हाथ से लिंग पकड़ी, रजत भी ठंडी सांस ले लिया.

दीप्ति लिंग को अपने दोनो हाथ मे पकड़ी और ज़ोर-ज़ोर से उसे जड तक आगे पिछे करने लगी. एक्सिटमेंट आउट ऑफ कंट्रोल हो गया, और रजत ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा.... "ओह्ह्ह्ह एसस्स... ओह्ह्ह्ह... दीप्ति... कम ऑन बेबी... सक इट... सक इट नाउ"

दीप्ति, रजत की बेकरारी पर मुस्कुराती, अपनी बड़ी सा जीभ निकाली, और लिंग के टॉप पर अपनी जीभ फिरा दी. पूरा बदन जैसे रजत का कांप गया हो. दो-तीन बार पूरी जीभ फिराने के बाद लिंग को अपने मुँह मे भर ली और अपने सिर हिला-हिला कर चूसने लगी.....

"ऊओफफफफफ्फ़... ऊओफफफफफफफ्फ़" करते हुए अपने दोनो मुट्ठी मे रजत ने दीप्ति के बाल पकड़े और उसका सिर ज़ोर-ज़ोर से आगे पिछे हिलाने लगा. उस पर से रजत अपने कमर को भी तेज़ी से झटकने लगा. एक्सिटमेंट... पूरा दोनो के उपर हावी हो गया था.

थोड़ी ही देर मे रजत पूरा पागल होते ही दीप्ति को उपर उठाया और खुद नीचे बैठ गया.... दीप्ति उल्टी घूम कर दोनो हाथ दीवाल से टिका ली. रजत उसकी स्कर्ट को उपर किया, और सर-सराते हुए उसकी पैंटी को नीचे उसके पाँव मे ले आया.

दीप्ति भी अपने पाओं से पैंटी निकालती, पीछे रजत के चेहरे पर फेक दी. रजत उसे नाक से लगा कर उसकी खुबहू लिया और उसे फर्श पर फेक कर अपना सिर पीछे से उसके चुतड़ों की दरारों के अंदर ठूंस दिया. बड़ी ही तेज़ी दिखाते हुए... उसने अपने हाथ आगे ले जा कर उसकी योनि के अंदर डाल कर ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगा... और पिछे से पूरा जीभ फिरा रहा था.....

"आहह..... ऱजत्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त" की सिसकी दीप्ति के मुँह से निकल गयी और उसने अपने पाँव को और फैला दिया. रजत लगातार पूरे एक्सिटमेंट के साथ उंगली अंदर बाहर करता रहा, और अपने दाँतों के बीच योनि के क्लिट को फसा कर उस पर जीभ फिराते हुए अपने दाँतों से हल्के-हल्के काटने लगा.

दीप्ति का रोम-रोम सिहर गया, उसके पाँव काँपने लगे..... "उम्म्म्ममममम .... आआआ.... ऊओफफफफफ्फ़... रजत... प्लीज़ ... अब तडपाओ मत..... फक मे बेबी..... फक मी हार्ड्ड्ड"

रजत अपना चेहरा बाहर निकालते हुए, "ओह्ह्ह्ह एसस्स बेबीयी" कहा... और खड़ा हो गया. दीप्ति को अपनी ओर घुमाया.... उसके होंठों को ज़ोर से चूस्ते... उपर से उसे टॉपलेस कर दिया.... और फिर से उसे पिछे घुमा दिया.

दीप्ति दोनो हाथ से दीवार थामे... अपने पूरा पाँव फैला ली, रजत अपने लिंग को उसकी योनि के उपर घिसा, और एक्सिटमेंट से भरा झटका दिया. लिंग, योनि के अंदर पूरा चला गया..... "ओह यअहह बेबीयीईयी.... फक... फक्क्क... फक्क्क... इट हार्ड्ड्ड"

रजत अपने दोनो हाथ उसके बूब्स पर टिकाते, उसे ज़ोर-ज़ोर से मसल्ते हुए, तेज-तेज धक्के लगाने लगा. हर धक्के पर दोनो तेज-तेज चिल्लाते जाते...

"उफफफफफफ्फ़.... आआअहह.... ओह... यअहह... ऱजत्त्त्त्त.... यअहह बेबीयी.... एससस्स... एसस्स एससस्स... फक इट.... फक्क्क्क इत्त्तत्त ओह... फक मी हार्ड्ड्ड... ऱजत्त्त्त्त्त"

रजत भी बूब्स को और ज़ोर-ज़ोर से मसलते हुए धक्के लगाते ही गया.... तेज.. तेज.... और तेज... धक्को की स्पीड पूरी तेज होते चली गयी..... "ओह्ह्ह्ह... दीप्ति.... उफफफ्फ़..... मेरा... हूओ गया.... उफ़फ्फ़... ओह्ह्ह दीप्ति.... आहह"

दीप्ति तुरंत सीधी हुई और घुटनो पर बैठ कर.... "कम .. ऑन बेबी... कम ऑन माइ फेस... ओह्ह्ह कम ओनन्न"..

दीप्ति अपनी आखे मुन्दे सिर उपर की, और बड़बड़ाने लगी.... दो-तीन बार हिलने के बाद... रजत ने अपना कम दीप्ति के चेहरे पर पूरा छोड़ दिया... और बिस्तर पर जा कर धम्म से पड़ गया...

दीप्ति भी अपने चेहरे को सॉफ करती उसी हालत मे जा कर रजत के बगल मे लेट गयी....

रजत.... ओह्ह्ह दीप्ति यू आर रियली आ फक्किंग बिच...

दीप्ति.... रजत यू टू रॉकिंग... मज़ा आ गया.... तुम्हे मज़ा आया कि नही...

रजत.... उफफफ्फ़ जान ही निकाल दी थी.... उम्म्म व्हाट आ सकिंग दीप्ति.... मैं तो पागल हो गया....

दीप्ति.... ये सब तो तुम्हे देख कर एक्सिटमेंट मे हो गया.... यू आर रियली अवेसम रजत....

रजत.... उम्म्म्मम ... तुमने तो खुश कर दिया मुझे.... दीप्ति...

दीप्ति.... डार्लिंग, एक बात कहूँ...

रजत.... बोलो ना, क्या कहना है....

दीप्ति.... डार्लिंग इस फ्लॅट मे बहुत परेशानी होती है. अभी तो कोई रूममेट नही तो कोई बात नही, पर मैं इस शेरिंग फ्लॅट से परेशान हो गयी हूँ.

रजत.... हा हा हा.... बस इत्ति सी बात... मेरी गर्लफ्रेंड और शेरिंग फ्लॅट मे. कल मेरे आड्वोकेट को कॉल कर देना, वो पेपर की सारी फॉरमॅलिटी पूरी कर देगा.... और कल ही सेक्टर 10 के आदर्श अपार्टमेंट के फ्लॅट नंबर 223 मे शिफ्ट हो जाना.

दीप्ति, खुश होती हुई.... "रजत.... एक बार हो जाए... मेरा दिल अभी भरा नही"....

दोनो ही रात भर लगे रहे एक दूसरे मे.... एक पूरी रात दोनो ने पूरी मस्ती से बिताए.

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अगली सुबह... कानपुर मे.....

आज फिर से मानस उसी ग्राउंड पर आया था. आज फिर से वही सब रिपीट हुआ, लेकिन आज जब मानस उस बेंच पर बैठा तो दृष्टि उठ कर गयी नही, बल्कि वो मानस के बॉडी लॅंग्वेज को अब्ज़र्व करने लगी. मानस, ड्रस्टी पर बिना कोई ध्यान दिए बेंच से टिका बैठा रहा, और गाने सुनता रहा...

"कमाल है, कल से जहाँ जा रही हूँ, वहीं ये मिल रहा है. हरकतें तो सरीफ़ जैसा ही हैं. दूसरे लड़कों की तरह, यहाँ किसी को घूर भी नही रहा. इत्तिफ़ाक़ है इसका मिलना, या ये कोई नाटक कर रहा है".

ड्रस्टी जब तक ये सब सोच मे लगी थी, तब तक मानस अपनी जगह से उठ कर बिना उसकी ओर देखे चुप-चाप अपना गाना सुनते चला गया.... "कितना अजीब है ये लड़का" ... ड्रस्टी भी उठ कर चली गयी. आज फिर से वही सब हो रहा था...

ड्रस्टी जिस शेरिंग ऑटो मे कॉलेज जाने के लिए बैठी, उसी ऑटो मे मानस भी बैठ गया.... "ये लड़का फिर से आज मेरे ही ऑटो मे. बुरखे मे ये मुझे कैसे जान गया. उस दिन भी बुरखे मे ही मिली थी, तो इसने जब देखा ही नही, तो मेरा पिच्छा कैसे कर रहा.... कुछ तो गड़बड़ है"

आज मानस उसे और परेशान करते हुए, उसके पिछे-पिछे कॉलेज के रास्ते पर चल दिया. ड्रस्टी के समझ से परे था कि मानस उसका पिच्छा कर रहा है या ये महज इत्तफ़ाक़ है. ड्रस्टी जैसे ही गाते से करीब 50 कदम की दूरी पर थी, कि उसे गेट पर पूर्वी दिख गयी.

पीछे मानस था, आगे पूर्वी... ड्रस्टी अपनी जगह पर रुकी और थोड़ी साइड हो कर पूर्वी को कॉल लगाने लगी. तब तक मानस आगे बढ़ गया था....

पूर्वी जैसे ही ड्रस्टी का कॉल देखी वो पिक अप करती एक कदम आगे बढ़ कर बिल्कुल गेट के सामने आ गयी.... और ठीक उसी वक़्त मानस भी उसके सामने कॉलेज के गेट पर पहुँचा...

पूर्वी कॉलेज गेट पर फोन को पिक-अप कर रही थी. उसके ठीक सामने मानस.... और दोनो को आमने सामने देख कर ड्रस्टी के मुँह से ... "या अल्लाह" निकल गया.....

ड्रस्टी के प्राण हलक मे थे. जिस पूर्वी को वो मानस से दूर रखने की कोसिस मे थी, आज उसी की वजह से वो मानस के सामने खड़ी थी. दोनो की नज़रें भी एक दूसरे से मिली, और दोनो ने एक दूसरे को देखा. ये देखने के बाद तो जैसे ड्रस्टी और भी ज़्यादा हैरान रह गयी.

मानस, पूर्वी को ऐसे देखा जैसे कोई अंजान लड़की उसके सामने खड़ी हो, और बिल्कुल वही रिक्षन पूर्वी का भी था. शॉक्ड, ड्रस्टी प्युरे शॉक्ड हो गयी. मानस ने पूर्वी को एक झलक देखा और इग्नोर करता आगे बढ़ गया. मानस जब उस जगह से चला गया, तब ड्रस्टी, पूर्वी के पास पहुँची...

पूर्वी.... हद है ड्रस्टी, मैं कब से यहाँ इंतज़ार कर रही हूँ, 15 मिनट पहले कही थी कि कॉलेज पहुँची और अभी आ रही है. और ये, एक तो तू ना ये काले कव्वे के भेष मे ना आया कर, पास से गुजर भी गयी होगी अभी तो पता ना चला होगा.

ड्रस्टी.... बस भी कर, कितना पटर-पटर करती है. अर्रे बाबा एमर्जेन्सी थी वॉशरूम मे जाना पड़ा, सॉरी बाबा. वैसे वो लड़का कौन था, जो अभी-अभी तुझे देखा और मुस्कुरा कर गया, और बदले मे तू भी सेम रेस्पॉंड की.

पूर्वी.... ये लो मैं किसी को देख कर मुस्कुराइ, ये बात मुझे ही नही पता. तेरा दिमाग़ खराब हो गया है. ज़रा बताएगी किसे देख कर मैं मुस्कुराइ.

ड्रस्टी.... अर्रे जब तू मेरा कॉल पिक करने गेट के सामने आई थी, तभी तो वो लड़का तुम्हारे सामने आया था, और उसे देख कर तुम भी मुस्कुरा रही थी.

पूर्वी.... तू ना थप्पड़ खाएगी. कौन लड़का, किस लड़के की बात कर रही है... यहाँ तो कई आए और गये, मैं क्या यहाँ खड़े हो कर सब को देखने आई थी.... हुहह ! तू बता मुझे यहाँ क्यों बुलाई थी.

ड्रस्टी.... हां छोड़ उसे, चल शॉपिंग करने चलते हैं.....

"ये तो कमाल हो गया, पूर्वी उसे एक बार देखी, और वो ठीक वैसा ही रिक्षन दे रही है जैसे राह चलते किसी को देख कर नोटीस नही करते. मानस ने भी उसे सामने से देखा... और उसने भी उसे अंजानो की तरह ट्रीट किया. आअन्ह्ह्ह्ह ! ये लड़का अब तो मुझे पागल कर देगा".

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देल्ही की सुबह....

काया अभी आँख खोल कर बिस्तर पर अंगड़ाइयाँ ले ही रही थी, तभी उसके मोबाइल की रिंग बजने लगी. अननोन कॉल, काया फोन पिक अप करती...... "हेलो कौन"

अखिल..... गुड मॉर्निंग मिस काया जी, मैं अखिल बोल रहा हूँ...

काया.... अखिल, अम्म्म्म... कौन अखिल...

अखिल.... मैं, मनु का फ्रेंड अखिल...

काया..... एसपी सर, आप के सुबह सुबह कॉल करने का पर्पस.

"ये तो सीधे पॉइंट पर आ गयी".... अखिल.... बस आज की मॉर्निंग को गुड बना'ने

काया.... व्हाट ????

अखिल.... ऊप्स !! नही जी मेरा मतलब कहने का था, सुबह सुबह पोलीस वाले किसी को याद करे तो उनका दिन बना रहता है. आप से कुछ ज़रूरी डिसकस करना था, इसलिए कॉल किया.

काया.... अच्छा कहीं अपनी पोज़िशन का फ़ायदा तो नही उठा रहे. जो भी बातें करनी है मेरे आड्वोकेट से कर लीजिए, मैं उसे भेज दूँगी.

"बहुत ही होशियार है ये लड़की तो"...

अखिल.... "क्यों काया जी आप के पास 10 मिनट का टाइम भी नही क्या"

काया.... एसस्स, आइ आम बिज़ी गर्ल. यदि मेरा समय चाहिए तो प्रॉपर अपायंटमेंट लेनी होगी...

अखिल.... अच्छा, तो काया मैं, क्या आप के पास आज के दिन का समय है.

काया.... नोप, आज दिन मे मेरा ब्यूटी पार्लर जाने का प्रोग्राम है. वहाँ से फिर मूवी, मूवी के बाद कुछ देर फॅमिली टाइम. फिर मैं अपने एनजीओ के साथ बिज़ी रहूंगी, फिर कुछ वक़्त मनु भैया के साथ आंड फाइनली दिन से ले कर रात तक का टाइट शिडुल.

अखिल.... ओह्ह्ह ! काफ़ी मशगूल हैं आप. कल का कोई भी वक़्त.

काया.... बस ब्यूटी पार्लर की जगह मैं स्पा के लिए जाउन्गी, बाकी का शिडुल सेम है.

अखिल.... और मैं, परसो भी शायद सेम प्रोग्राम होगा, बस स्पा के जगह कुछ और आड हो जाएगा.

काया.... वाहह ! अब लगता है कोई समझदार एस.पी आया है देल्ही मे.

अखिल... तो क्या काया जी, इस समझदार एस.पी के लिए आप के पास समय नही.

काया.... अम्म्म्मम ! फिलहाल तो नही दिख रहा, सोच कर बताउन्गी. शायद नेक्स्ट टाइम जब देल्ही आउ तब. वैसे मुझे एक बात समझ मे नही आ रही, आप इतने बेचैन क्यों हो रहे हैं मिलने के लिए. पहले तो अफीशियली कुछ डिसकस करना था, और अब लगता है कि बस आप को मिलना था मुझ से... क्यों एस.पी सर बात क्या है.

अखिल.... सी.यू काया जी, आप के पास जब भी टाइम हो एक बार कॉल कीजिएगा...

"ऊऊऊऊओ कितना क्यूट है ये, लगता है मायूस हो गया".....

काया.... "अच्छा सुनिए एस.पी सर मैं रात को 11 से 1, 2 घंटे अपने बिस्तर पर किताबें पढ़ती हूँ, उस मे से आप को मैं 15 मिनट दे सकती हूँ"

"हहे, लगता है मेरा टेस्ट ले रही है".....

अखिल.... "ओके काया जी डन, मैं ठीक 11:30 बजे आउन्गा, और 11:45 पर चला जाउन्गा. बस छोटा सा फेवर कर दीजिए, आप का कमरा कौन सा है, वो बता दीजिए"

काया.... जैसे मेरा नंबर पता कर लिया, वैसे आप मेरा कमरा भी पता कर लेंगे, आप के लिए कोई बड़ी डील थोड़े ना है... हां लेकिन किसी ने देख लिया तो मैं सॉफ मुकर जाउन्गी, सोच लीजिए कल को ये खबर ना आए कि देल्ही एस.पी चोरी-छिपे किसी के घर मे घुसते हैं.

अखिल.... डॉन'ट वरी काया जी, हम पोलीस वाले वैसे भी बदनाम हैं कोई और क्या बदनाम करेगा... सी यू देन 11:30पीयेम.

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दिन के समय ऑफीस मीटिंग....

सभी बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स की मीटिंग शुरू होने वाली थी. कंपनी के सेयो और सारे पार्ट्नर अवेलबल थे. कंपनी को फाइनॅन्षियली कैसे स्ट्रॉंग किया जाए, और कंपनी कैसे और भी ज़्यादा प्रॉफिट मे आए इस पर डिसकस करना था. सारे मुद्दे पर डिसक्यूसषन के बाद अंत मे मनु ने सभी बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स और सीओ के पास अपना एक प्रस्ताव रखा....

"क्यों ना इस कंपनी को पब्लिक एंटरप्राइज़स कर दिया जाए, और इसके 40% शेर मार्केट मे डाल दिए जाए"

मनु के इस प्रस्ताव पर कंपनी के सारे पार्ट्नर्स शॉक्ड हो गये. क्योंकि जो प्लान वंश और राजीव मिलकर कर रहे थे, मनु ने उसी बात की घोषणा कर दी. काफ़ी बड़ा फ़ैसला था, वंश और राजीव ने इस पर नकारात्मक प्रतिक्रिया जताते हुए कहा....

"इतने सालों से कंपनी वैसे ही प्रॉफिट मे चल रही है, तो अब ये इतना बड़ा स्टेप क्यों. हमे इस पर सोचने का वक़्त चाहिए".

मनु... ठीक है, नेक्स्ट मीटिंग हम 4 ऑक्टोबर को रखेंगे. 10 दिन का पर्याप्त समय है, अच्छे से विचार कर लीजिएगा....

मीटिंग ख़तम होते ही मनु अपने चेंबेर मे आ गया.... उसके साथ स्नेहा भी थी....

स्नेहा.... मनु, इतने बेस्ट प्लान पर ये लोग इतना नेगेटिव रेस्पॉन्स कैसे दे सकते हैं.

मनु.... छोड़ो उसे, पहले मुझे तुम ये बताओ, क्या तुम इस शादी के लिए सीरीयस हो.

स्नेहा.... अचानक से ऐसे सवाल, क्या हुआ मनु, कोई बात है क्या...

मनु... बस यूँ हे, कब से दिमाग़ मे था अभी वक़्त मिला तो पुच्छ लिया.

स्नेहा.... ह्म ! सब तुम पर डिपेंड करता है मनु, मैं क्या कहूँ....

मनु... मैने तुम्हारी राई पुछि है, और प्लीज़ सीधा आन्सर दो ना.

स्नेहा... सच कहूँ तो हाँ मैं सीरीयस हूँ.

मनु.... देन फाइन, आज रात मैं बात कर लूँगा मानस भाई से. तुम भी अपने घर पर बता दो.

स्नेहा... मैं अपने घर बात करूँ...

मनु.... तुम्हे इतने पसीने क्यों आने लगे एसी मे स्नेहा...

स्नेहा.... कुछ नही मनु, आज रात बात कर लूँगी.

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ईव्निंग 6 पीयेम... रजत मीटिंग....

सम.... रजत तुम्हारा काम हो गया है, बस तुम्हे कुछ इन्फर्मेशन देनी है.

रजत.... काम कब तक होगा.

सम... वो तुम्हारे इन्फर्मेशन पर डिपेंड करता है. क्योंकि मनु के बारे मे सब पता लग गया है. बुलेटप्रूफ कार मे घर से ऑफीस और ऑफीस से घर. चारो ओर टाइट सेक़ुरिटी... नज़र भी नही रखा जा सकता. कोई रूटीन भी नही फॉलो करता. सो हमे कोई सेफ प्लेस चाहिए, जहाँ आसानी से उसका काम तमाम किया जा सके.

रजत.... समझ गया. थोड़ा इंतज़ार करो, हमारी फॅमिली किसी जगह हॉलिडे पर जाने वाली है, मैं तुम्हे इनफॉर्म कर दूँगा... तुम वहीं काम तमाम कर देना.

सम... ये तो गुड न्यूज़ है ब्रो... कब और कहाँ निकल रहे हैं सब...

रजत... वो मैं जल्द ही बताता हूँ. एक काम और करना, मनु के साथ काया का भी काम तमाम कर देना... बस मैं ही अकेला रहूँगा.

सम... क्या, काया... तुम्हारी सिस्टर...

रजत.... ज़्यादा शॉक्ड होने की ज़रूरत नही. और मैं उसे बहाँ नही मानता. ना तो उस को मुझ से, और ना ही मुझ को उस से कोई लेना देना है... तुम बस ये बताओ काम होगा कि नही.

सम.... काम तो हो ही जाएगा, पर रजत पैसे और लगेंगे....

रजत.... पैसे की कोई चिंता नही है, बस काम हो जाना चाहिए.

सम... ठीक है कल मिल कर बताता हूँ....

सम से बात कर के रजत वापस लौट आया... ऐसा लग रहा था जैसे विजयी मुस्कान मुस्कुरा रहा हो.... "थॅंक्स मनु, तुम्हारी नफ़रत ने मुझे पूरा मालिक बनने का क्या आइडिया दिया है... थॅंक्स आ लॉट. अब सिर्फ़ मैं ही रहूँगा एकलौता, और कोई दूसरा नही".

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रात के 11 बजे....

अखिल अपने ड्राइवर के साथ बंग्लॉ के पिछे गाड़ी लगाए खड़ा-खड़ा सोच रहा था...

ड्राइवर.... सर, जी सोच क्या रहे हो, भगवान का नाम लो और चढ़ जाओ.... नौकरी और छोकरी दोनो के लिए मेहाँत करनी पड़ती है.

अखिल.... यार थोड़ा अजीब लग रहा है मिश्रा जी, मैं पोलीस वाला हो कर किसी के घर चोरी से कैसे घुस जाऊ.

ड्राइवर.... ठीक है आप सोचते रहिए, तब तक मेडम की शादी किसी और से हो जाएगी.... मेरा क्या है, तब मैं दारू की बॉटल सर्व किया करूँगा...

अखिल.... शुभ-शुभ बोलो मिश्रा जी, बात बन'ने से पहले ही बिगाड़ने की बात कर रहे हो...

ड्राइवर.... सर जी एक तो छोकरी, वो भी करोड़पती, मैं आप की जगह होता तो अब तक चढ़ भी गया होता. सोचते-सोचते ही 11:10 हो गये...

अखिल... अच्छा ठीक है मैं जाता हूँ, आप अलर्ट रहना, पी कर टल्ली मत हो जाना...

ड्राइवर.... बेस्ट ऑफ लक सर, जाओ फ़तह हासिल कर आओ...

अखिल एक बार नीचे से ले कर उपर तक की उचाई देखा, और फिर चढ़ गया पाइप.... पाइप चढ़ कर वो गॅलरी मे आया और छिप्ते छिपते वो काया का कमरा ढूँढने लगा.... "हद है, साला रहते यहाँ चार लोग हैं और कमरे 100 बनवा रखे हैं"....

उपर की लॉबी से वो हर कमरे मे झाँकता हुआ जा रहा था.... जब उसने दूसरे कमरे मे झाँका तो उसे रंजीत दिखा... आज शाम की हुई मीटिंग के बाद तो जैसे उसने दुनिया जीत ली हो... सराब पी रहा था और खूब झूम रहा था..... अखिल की होल से उसे देखने लगा ....

"ये बेवडा खुद ही पी कर खुद ही झूम रहा है.... ये अमीर लोग कुछ मेंटल होते हैं क्या... हां होते ही होंगे, इतना पैसा जो होता है उड़ाने के लिए"

अखिल आगे बढ़ गया.... एक कमरे के की होल से देखा तो पता चला, अंदर किसी की रास लीला चल रही है.... "हा हा हा.... अब ये कौन शौकीन है... कहीं मनु के पापा तो नही... तौबा-तौबा, पता नही जिन्हे नही देखना था वही सब दिख रहे हैं, पता नही मेरी जानेमन किधर है"

दो कमरे खाली थे, उसके बाद की रो का आखरी कमरा.... "आहह ! हियर शी ईज़.... उफ़फ्फ़ क्या सेक्सी लुक मे है, जान ना ले ले".....
 
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