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हंग्री वुल्फ गेम (इंसान या भूखे भेड़िए ) complete

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अखिल होंठो को स्तन से लगाते हुए अब उसे लगातार बड़े प्यार से चूस रहा था और एक हाथ को नीचे ले जाकर उसके कमर के पास फिराने लगा.....

उंगलियाँ सरकती हुई पैंटी के अंदर जाने लगी और काया को हल्की गुदगदी सी होने लगी.... धीरे-धीरे हाथ अंदर और अंदर की ओर गया.... योनि के पास हाथ पहुँचते ही हल्की गर्मी सी महसूस हुई... काम-उत्तेजना की तपन और काया की योनि पूरी तरह जैसे मस्ती की रस फुहार छोड़ रही थी.

जैसे ही हाथ का पहला स्पर्श योनि पर हुआ, काया छटपटा उठी, लंबी सी सांस लेती उपर उठी और छोड़ती हुई नीचे आई... अखिल भी स्तनों

का रस-पान करने के बाद अपने होंठो को उसके बदन पर फिराते हुए धीरे-धीरे नीचे ले आया....

काया लगातार सिसकती हुई बस अपने हाथों से चादर को भींच रही थी और बदन को उपर नीचे लहरा कर इस पल का आनंद उठा रही थी.... कमर के दोनो ओर हाथ रख कर अखिल ने उसकी पैंटी को धीरे-धीरे नीचे सरकाना शुरू कर दिया... हर एक स्टेप पर जब पैंटी नीचे

आ रहा था और खुली योनि दिखने लगी थी, अखिल की आँखों मे वासना की अजीब सी चमक तैर गयी...

स्लो मोशन मे पैंटी को उतारने के बाद, अखिल ने धीरे से काया की योनि पर अपना पूरा हाथ फिरा दिया.... अहह क्या अहसास था दोनो के लिए.... सब कुछ भूल कर दोनो बस अब मस्ती मे डूब चुके थे....

उत्तेजना मे जल रही योनि जब नगन हुई और हल्की तन्ड़ी हवा का जब उसपर एहस्सास हुआ तो काया का बदन सिहर उठा .... काम की

आग को और भड़काते हुए ... अखिल ने तलवो से चूमना शुरू किया... अपने होठ धीरे धीरे उपर करता जांघों तक लाया....

गोरी चिकनी जांघों पर जैसे विराम लग गया हो... अपने होठ और जीभ जांघों पर फिराते हुए अपने नाक भी रगड़ने लगा... काया की योनि के

अंदर तो जैसे आग लगी हो .... उसे अपने अंदर काफ़ी बेचैनी और अजीब ही प्यास महसूस होने लगा... उत्तेजना ऐसी बढ़ी थी कि अब और

बर्दास्त कर पाना मुस्किल था....

अपने बेड पर मचलती काया, अपने हाथो से बिस्तर को ज़ोर-ज़ोर से बस भिंचे ही जा रही थी..... "आहह.... इसस्स्शह...... अखिल..... बेबी,

अब बर्दास्त नही हो रहा.... इष्ह"

काया मचलती हुई अब तो और तेज-तेज सिसकारियाँ लेने लगी थी... अंदर की आग अब बिल्कुल संभाल नही पा रही थी...

अखिल, काया की जांघों को छोड़ अब ... अपनी नाक को योनि के पास लाया, तेज साँसे लेता जैसे उसने खुसबु लिया हो....

अखिल "आअहह" करता बड़ी तेज़ी से अपना नाक और होंठ योनि पर फिराने लगा....

 
अखिल ने योनि को पूरा मुँह मे भरे अपना मुँह खोला और हल्का दाँतों को गढ़ाता उसे धीरे-धीरे बंद करने लगा..... "उफफफफफफफफफफफ्फ़... उम्म्म्ममममम.... आहह... अखिल्ल्ल्ल". तेज और लंबी सिसकारी लेती हुई काया अखिल के सिर को अपनी

जाँघो से जकड ली.... और उसके चेहरे को अपनी योनि पर दबाने लगी.

बदहाल से साँसे हो चुकी थी. पसीने से दोनो का बदन पूरा भींग चुका था.... अखिल से भी अब रुका नही जा रहा था... नीचे पैंट मे उसके भी

काफ़ी हलचल सी हो रही थी.... अखिल बड़ी तेज़ी से अपने कपड़े उतारता दोनो पाँव के बीच मे आ गया...

काया की कमर के नीचे तकिये लगा कर अखिल दोनो पाँव के बीच आ गया. अखिल ने योनि पर एक अपना हाथ फिराया फिर लिंग को योनि के लिप से लगा कर हल्का दबाव डाला और उसे धीरे-धीरे उपर-नीचे रब करने लगा....

काया अपने सिर झटकती..... "ऊऊफफफफफफ्फ़ बायययी.... आहह..... मैं जल रही हूँ..... इस्शह"

काया दोनो हाथों मे चादर को भिंचे अखिल की आँखों मे देखने लगी. अपने होंठो को दाँतों तले दबा कर मानो नज़रों से कह रही हो.... "प्लीज़

अब और मत तडपाओ"... अखिल भी तो जल रहा था, उस से भी कहाँ रुका जा रहा था.... रब करते हुए उसने पहला धक्का दिया....

अपने होंठो को दाँतों तले दबा कर काया ने इस पहले धक्के को झेला ... दर्द की एक धीमी "आअहह" निकली थी पर मस्ती के आगे वो अंदर

ही सिमट कर रह गयी.... दो टीन धक्कों तक उसे हल्के-हल्के दर्द का अनुभव होता रहा.

लेकिन उत्तेजना इतनी चरम पर थी कि योनि से कुछ हे देर मे जैसे रस वर्षा शुरू हो गयी हो. काया का बदन जैसे कांप कर अकड गया हो. एक लंबी सी "आहह" उसके मुँह से निकली हो, और रोम-रोम मे मस्ती दौड़ गया.

मस्ती ऐसी कि काया की कमर खुद-व-खुद हिलने लगी. काया अपनी कमर गोल गोल घुमाती.... हर धक्कों पर.... "अहह... इस्शह" करती

तेज-तेज सिसकारियाँ ले रही थी. अखिल भी मस्ती मे आता, उसे उठा कर अपनी गोद मे बिठा लिया.

काया, अखिल के कंधों पर हाथ रखती अपनी कमर उपर नीचे करने लगी. अखिल भी काया के सीने मे अपना मुँह घुसाए तेज-तेज धक्के मारने लगा. दोनो के बदन पसीने मे डूबे चमक रहे थे. सिसकारियों की आवाज़ जैसे उस कमरे मे गूँज रही हो..... "उफफफफफफ्फ़... आअहह..... ऊओह.... उम्म्म्मम.... आअहह"

दोनो के कमर ने जैसे एक साथ रफ़्तार पकड़ी हो. धक्कों की रफ़्तार बढ़ती ही चली गयी थी. हर धक्कों मे ऐसा आनंद, उफफफफफ्फ़ दोनो के बदन बिल्कुल मचल रहे थे. कभी ख़तम ना हो ये पल ऐसा लग रहा था. और फिर दोनो एक चरम पर पहुँचे....

जैसे बदन ने बदन को जकड लिया हो. अखिल ने इतने तेज-तेज धक्के मारने शुरू किए कि काया अपने अकड्ते बदन के साथ अपने होंठो

से अखिल के कंधे को काटने लगी, अपने नाख़ून से उसके पीठ को ज़ोर से भींचा ली और हाँफती हुई निढाल बिस्तर पर लेट गयी.

 
हाँफ ता हुआ अखिल भी काया की बगल मे लेट गया. दोनो एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे. बदन अजीब सा सुस्त पड गया था, जैसे अब कोई काम करने की इक्च्छा नही. एक मधुर अहसास जिसमे बदन टूट कर चूर हुआ हो.

अखिल प्यार से काया के स्तनों पर हाथ फेरता हुआ उसे देखने लगा..... "क्या हुआ अखिल, दिल नही भरा क्या"

अखिल.... आइ लव यू काया....

काया धीरे से अखिल के बालों पर हाथ फेरी और मुस्कुराती हुई पूछने लगी.... "बेबी, अब तो मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बन जाउन्गी. तुम मुझे

कुवारि माँ बना कर भाग तो नही जाओगी"

अखिल.... हट पगली, 80'स की मूवी चल रही है क्या.... उम्म्म... लव यू...

काया भी अखिल से लिपट'ती.... "लव यू टू बेबी"

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अगले दिन शाम को .... मनु आंड काया....

मनु को अपने काम को अंजाम देने से पहले बस अपनी बहन को अपनी ओर करना था. काया को अब तक मनु ने इन सारी बातों से दूर

रखा था, लेकिन वक़्त आ गया था की वो जो करने वाला है वो क्या और क्यों करने वाला है.

लेकिन मनु का कॉल आते ही काया थोड़ा डर गयी. उसे अंदर से लगा कहीं रात की कोई बात मनु को तो पता नही चली. होता तो कुछ नही पर भाई था, अजीब सी शर्म आ रही थी की कैसे पता चला भाई को.

काया जब पहुँची तो बड़ी ही शांत लग रही थी. मनु उसके सिर पर हाथ फेरते.... "ये आज तेरे चेहरे से हँसी कहाँ गायब है, क्या हुआ मेरी जान को, ऐसे मायूस क्यों हो"

काया, "ना" मे सिर हिलाती... "कुछ नही" कहने लगी.....

मनु..... हद है, अब तू बताएगी मेरी बच्ची को किसने परेशान किया है उसे तो मैं सूली पर लटका दूँगा...

काया, तेज से चीखती कहने लगी..... "हुहह ! बोलो भी ना भाई, क्यों सस्पेंस-सस्पेंस खेल रहे हो, बात क्या है वो बताओ ना"

मनु, काया को ले कर सीआइ उदय के थाने ले कर चल दिया...... "बात बताने वाली नही है, आज तुम्हे कुछ मैं दिखाउन्गा चल मेरे साथ"

काया के तो होश उड़ गये..... "ये भाई मुझे पोलीस स्टेशन क्यों ले कर आया है. वहाँ एस.पी की गाड़ी भी लगी थी. काया का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा, उसके माथे से पसीना आने लगा.... तभी उसे सामने से अखिल दिखा. काया उसे घूर्ने लगी.... अखिल ने कोई रेस्पॉंड नही किया और तीनो अंदर चले गये...

इंटेरोगेशन रूम मे सॅम था और सीआइ उदय उस से पूछ-ताछ कर रहा था.... बाहर उनके इंट्रोगेशन की आवाज़ आ रही थी..... पहले अंट्रे

मशीन पर सॅम और रजत की फोन कॉल फिर सॅम का कन्फेशन.... काया के पैरों तले ज़मीन खिसक गयी.......

 
काया को अपने कानो पर विस्वास नही हुआ कि वो क्या सुन रही है. वो मनु को देख कर रोती हुई पूछने लगी..... "भाई कह दो कि ये सच नही है. कह दो कि तुमने और अखिल ने मिल कर ये सब प्लान किया था. ये सच भी था तो मुझे क्यों बताया. मुझे इन सब से अलग ही रहने दिया होता"......

मनु, काया को शांत करते हुए कहने लगा..... "चलो यहाँ से काया अभी. मैं तुम्हे सब समझाता हूँ"

काया को ले कर घर की ओर मनु निकल गया... रास्ते मे..... "काया तुम ने जो कुछ भी सुना शायद ये काफ़ी चौकाने वाला था, जितना तुम्हारे लिए उतना मेरे लिए भी. हमारे अपने हमे मारना चाहते हैं. खैर इनकी नफ़रत तो ना जाने मैं कब से झेलता आ रहा हूँ, ये बात तो तुम से भी

नही छिपि".

"मैं तुम से बस इतना बताना चाहता हूँ कि आगे जो मैं करने वाला हूँ वो शायद ना तो मोम के हक़ मे हो ना डॅड के हक़ मे और ना ही रजत के हक़ मे हो. दुनिया मेरे बारे मे क्या सोचती है मुझे उस से कोई लेना देना नही लेकिन मेरे लिए मेरा सब कुछ तुम हो. तुम से बढ़ कर मेरा बदला नही, इसलिए अब सारा फ़ैसला तुम्हारे हाथ मे है"....

काया..... भाई, मुझे तो अब भी यकीन नही कि रजत मेरे लिए ऐसा सोच सकता है. बस एक बात बता दो क्या तुम उन्हे जान से मारने वाले हो क्या...

मनु, काया के सिर पर हाथ रखते हुए..... "तेरे सिर की कसम, मैं तो बस उन से वो सारी चीज़ें छीनुन्गा जिन चीज़ों ने उन्हे इतना गिरने पर

मजबूर कर दिया. इस से ज़्यादा कुछ नही".

काया..... "थॅंक्स भाई, प्लीज़ उन्हे उनके किए की सज़ा देना, पर कुछ ऐसा मत करना कि वो रिवर्स ना किया जा सके"

मनु.... तुम्हे विस्वास है ना अपने भाई पर... तेरे सिर की कसम खाया हूँ, तू डर मत ऐसा कुछ भी नही होगा.....

काया..... "ठीक है भैया, यूँ समझ लेना कि मैं ना तो उनके ओर हूँ ना तुम्हारी ओर. बस इस खेल मे ना तो आप को और ना उनको, दोनो मे से किसी को कुछ नही होना चाहिए"

मनु..... डॉन'ट वरी, चिंता मत करो.... दिल टूटा है पर एमोशन्स नही गये हैं. और हां मुस्कुराती जाओ घर और विस्वास रखो मुझ पर....

मनु, काया को घर ड्रॉप करने के बाद वहीं से सीधा अपनी एक लास्ट मीटिंग के लिए निकल गया था.... जहाँ पर पार्थ, नताली, मानस और अखिल मिलते.

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साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 
मीटिंग पॉइंट.... रात के 8.30 बजे...

मनु.... आप सब के आने का सुक्रिया, मैने आप सब को सिर्फ़ इसलिए बुलाया है कि मैं अब अपना फाइनल गेम खेलने वाला हूँ, क्या आप सब मेरे साथ हैं....

नताली.... हां मैं और पार्थ तुम्हारे साथ हैं...

पार्थ... अच्छा, मैने तो कुछ नही कहा, फिर मेरे बिहाफ मे तुम कैसे कह सकती हो...

नताली.... मुझे पता है इसलिए. तुम भी तो यही कहने वाले हो ना....

पार्थ.... नही, मैं तो ये कहने वाला था कि जहाँ कहीं भी मेरी ज़रूरत हो मुझे याद कर ले. मैं तो बस कानपुर जाउन्गा, उनकी जड़े खोदने जिसने मानस को फसाने की कोसिस किया. उस रात मानस और उसकी माँ के साथ क्या हुआ इस बात का पता तो अब मैं लगा कर रहूँगा.

मानस.... सुक्रिया दोस्त, तुम्हारा ये एहसान रहेगा. उस एक रात ने हमारी पूरी कायनात बदल कर रख दी. जैसे सस्पेंस सा छाया हुआ हो आज तक.

मनु..... ह्म ! सुक्रिया आप सब का. अब मैं एक मेजर स्टेप ले रहा हूँ, एक धोके के तहत मैं मानस भाई को कंपनी से अलग करूँगा.

नताली..... अलग तो कर दोगे लेकिन इसका क्या फ़ायदा होगा...

मनु.... मैं श्रेया का विस्वास जीतूँगा, और श्रेया की माँ के ज़रिए मैं मूलचंदानी हाउस मे सेंध लगा दूँगा.

पार्थ..... इस मे एक बात और एड कर सकते हो, तुम मानस के साथ-साथ वंश अंकल का भी पत्ता सॉफ कर दो, इस से ये लगेगा मनु ने टेप लीक करने वाले से अपना बदला ले लिया.

नताली.... इसे कहते हैं आइडिया का उपज होना. तुम्हारे पास दिमाग़ भी है पार्थ, आज समझ मे आया. मनु ये अच्छा रहेगा, और इस एक मूव के बाद तो बहुत कुछ प्लॉट किया जा सकता है....

मनु.... ह्म ! ये सही है, मैं कुछ फ्यूचर फोर्कास्ट देख रहा हूँ, लेकिन उसके लिए पहले मैं कुछ लीगल फॉरमॅलिटी देख लूँ. तो ये तय रहा कि मैं

भाई को और वंश अंकल को एक साथ हटाउँगा और दोनो बड़े ड्रामे के साथ मुझे छोड़ कर जाएँगे.

नताली.... एसस्स... उन्हे हमेशा ये लगना चाहिए कि गेम वो चला रहे हैं.

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रात 10:30 बजे.... श्रेया एंड मनु...

आज मनु के साथ पब जाने का प्लान था श्रेया का. बड़ी बन सवर कर निकलती थी आज जैसे अपने हुश्न का जादू मनु पर चलाने आई हो. मनु

ठीक समय पर उसके घर पहुँच गया उसे पिक-अप करने. हाइ हिल्स पर जब वो बड़ी अदा से सामने से चल कर आ रही थी.....

"ओह्ह्ह हूओ तो मेडम आज पूरा जाल बिच्छा कर आ रही है. साला मैं कितना भी सरीफ़ क्यों ना हो जाउ, अब इस के ऐसे सेक्सी अपरेन्स

तो शैतान मन कैसे शांत हो".....

मनु.... उफफफ्फ़ ऊऊओ... यू आर लुकिंग सो हॉट श्रेया... आज बात क्या है...

श्रेया... आज पहली डेट पर जो जा रही हूँ.... इतना तो चलता है....

मनु.... श्रेया, आज कहीं मुझ से आक्सिडेंट ना हो जाए...

श्रेया.... आक्सिडेंट, वो क्यों भला...

मनु.... तुम से जो नज़र नही हटेगी... इसलिए बाबा

श्रेया.... हहे, नज़र हट जाए इसलिए ऐसे निकली हूँ क्या ? डॉन'ट वरी कार मैं ड्राइव करूँगी, तुम बस अपने नज़रें जमाए रखना.....

दोनो हँसते हुए चल दिए. कार वाकई श्रेया ने ड्राइव किया और मनु साइड सीट पर बैठा था..... "श्रेया मैं पब जा कर क्या करूँगा, मुझे वो

बोरिंग जगह लगती है".

श्रेया.... ओह्ह्ह कम ऑन मनु, ये मेरी शाम है और मैं जो कहूँगी वही होगा.

मनु.... हाययययी... पूरी जवान शाम तो मेरे पास बैठी है, उसे छोड़ कर आज कहीं जाने का दिल नही कर रहा.

श्रेया.... कूल तो तुम भी कम नही लग रहे मनु.

मनु.... ग़लत कही श्रेया, कूल नही हॉट हो रहा हूँ तुम्हे देख कर....

श्रेया.... अच्छा जी, मुझे देख कर तो हॉट हो रहे हो लेकिन जो तुम्हारी मेहनत का खा रहे हैं, उन्हे देख कर तुम कूल रहते हो....

मनु.... छोड़ो भी अब क्या किया जा सकता है. दादू ने सब को कंपनी के ऐसे लीगल चक्कर मे फसा रखा है कि मैं चाह कर भी कुछ नही कर सकता.

श्रेया..... ओह्ह्ह कम ऑन डार्लिंग बहुत कुछ कर सकते हो. देखो सिंपल सा फंडा है, जिस पर तुम्हारा हक़ हो उसे छीन लो. मानस से बस

एक पेपर ही तो साइन करवाना हैं, इतना नही हो पाएगा क्या तुम से...

मनु.... हां यार ये आइडिया मेरे दिमाग़ मे क्यों नही आया. फिर तो कंपनी के 40% शेर मेरे हो जाएँगे.

श्रेया, बड़े आश्चर्य से.... "कंपनी के 40% शेयर, वो कैसे मनु"

मनु..... क्योंकि वंश को मैं हटा दूँगा कल तक. उसने मेरा वीडियो लीक करवा कर मुझे बदनाम किया था. मैं उस से उस का सब कुछ छीन

कर उसे सड़क पर ले आउन्गा.

श्रेया.... झूठे, वो क्यों भला अपने शेयर तुम्हारे नाम करेगा....

मनु.... करेगा नही, करना पड़ेगा. सुनो मेरी मिल के प्रोडक्षन पर स्टे किसने लगाया वो मुझे पता चल गया है. मैं सिंपल सा फंडा अपनाउंगा, ये आलिगेशन प्रूफ कर के अपने नुकसान का 100 गुना वसूल करूँगा, ऐज पर दा कंपनी लॉ. अब वो 100 गुना नुकसान भरेगा कहाँ से, इसलिए उसके सारे शेर्स मेरे नाम पर ट्रान्स्फर होंगे.

श्रेया.... वॉववव ! मनु, तुम मतलब कंपनी के लीगली एमडी होगे वो भी अपने दम पर.... यार पार्टी तो बनती है.... इट'स फन टाइम....

मनु.... मेरा फन तो मेरे बगल मे बैठी है, मुझे पार्टी मे कहाँ कोई फन मिलने वाला...

श्रेया.... ओह्ह्ह हूओ ! तो फन तुम्हारे पास बैठी है. ज़रा बताओगे मेरे साथ कैसे फन किया जाना है.

मनु..... कुछ नही, तुम नही समझोगी, चलाओ गाड़ी...

श्रेया..... अल्ले, मेरा बेबी तो नाराज़ हो गया... अच्छा तुम्हारे फन के लिए मैं कुछ लाई हूँ....

मनु.... अब मेरी उम्र है क्या गिफ्ट लेने की. कुछ दिन रुक जाओ पूरा एस.एस ग्रूप मैं तुम्हे गिफ्ट कर दूँगा...

श्रेया.... ओह्ह्ह रियली, सच मे ऐसा होगा क्या ?

 
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