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हंग्री वुल्फ गेम (इंसान या भूखे भेड़िए ) complete

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मनु बहताशा उसकी गर्दन को चूमते हुए... उसके खुले स्तनों को मुट्ठी मे भर कर दबाता रहा.... "आहह...... उम्म्म्ममममम" की सिसकारी स्नेहा अपने होटो से निकालती, बस मनु के बालों पर वो अपने हाथ फेर रही थी.

मनु ने स्नेहा को अपने गोद मे उठाया और बेड पर ले आया .... प्यार मे डूब कर सेक्स का ऐसा पहला अनुभव था.. और दोनो जोश के साथ इससे बारे प्यार से कर रहे थे...

मनु, स्नेहा को बिस्तर पर लिटा कर ... उसके उपर आ गया... स्नेहा बस आँखें मुन्दे तेज-तेज साँसें ले रही थी... स्नेहा के होंठो को चूमते हुए धीरे से जीभ पहले उसके कानो, फिर कानो से नीचे गर्दन पर फिराने लगा.... दोनो अपने अंदर अजीब सी कंपन महसूस कर रहे थे....

जीभ फिराते मनु को इतना आनद मिल रहा था कि वो जल्दी से अपनी जीभ को वहाँ से हटा कर आनंद के और बड़े सागर मे डूबने को बेकरार था... उसने अपना जीब स्नेहा के स्तनों पर रखा और उसके चारो ओर फिराने लगा.... स्नेहा मारे उत्तेजना के ... ज़ोर से 'इष्ह" करती...... एक हाथ को अपने बदन पर फिराने लगी और दूसरे हाथ को मनु की गर्दन पर....

मनु, स्नेहा की कामुक आवाज़ सुनकर और जोश मे आ गया.... पूरा मुँह खोल कर, स्तन को मुँह मे भरा और दाँतों तले निपल दबा कर काट'ते हुए खिचने लगा... दूसरे स्तन को अपने हाथो मे भर कर कर आहिस्ते पर बड़े जोरों दबा रहा था.

स्तनों पर ऐसे प्यार, स्नेहा का बदन उत्तेजना मे सिहर रहा था..... होंठो को दाँतों से काट'ती..... "ओह मानूनन्ञनणणन्" करने लगी ... मनु धीरे-धीरे उसके पेट पर जीभ फिराता नीचे आया.... और जब स्नेहा को एहस्सास हुआ कि मनु की जीभ योनि के आस-पास चल रही है... तो योनि से हज़ार चिंगारियाँ भड़क उठी....

उसका बदन मचल गया.... और जैसे ही जीभ योनि पर गयी.... स्नेहा अपनी छाती को अपने हाथों से मसलती लंबी "इसस्स्शह" की सिसकारी ली.... मनु बारे प्यारे से, स्नेहा के योनि पर अपनी जीभ टिका कर बिल्कुल धीमे, नीचे से उपर, और उपर से नीचे फिरा रहा था.....

स्नेहा मुट्ठी मे बिस्तर को भींच रही थी. उसकी कमर खुद ही उपर नीचे हो रही थी.... सिसकारियाँ भरती वो उत्तेजना से पानी-पानी हुई जा रही थी. मनु ने अब अपनी जीभ को योनि के क्लिट से लगा कर उपर किया और अपने होटो मे भर कर उसे चूसने लगा....

जैसे ही मनु ने क्लिट को चूसा.... स्नेहा अपने दोनो पाँव से मनु के सिर को जकड कर अपनी योनि की ओर दबाव डालने लगी. वो बेकाबू होकर पूरे पाँव का ज़ोर मनु के सिर पर लगा दी, और अपनी कमर हिला कर उसके मुँह से योनि घिसने लगी. अंदर की उत्तेजना उस चरम पर थी, कि सारी इंद्रियाँ बेकाबू हो गयी थी... "अहह.. मनुउऊउ..... उफफफफफफफफ्फ़.... ये दीवानगी भडका रही है मुझे..... हााहह"

बेकाबू स्नेहा, मनु के बाल पकड़ कर उसे बिठाई, और धक्के देती उसे नीचे लिटा'ती हुई खुद उसके उपर आ गयी... अपने होंठो से मनु के होठ को चूसने लगी... काफ़ी लंबा वेट और लस्टी किस चला... मनु तो पागल हो गया...

स्नेहा उत्तेजना मे आकर ... मनु की छाती पर अपना चेहरा घिसती उसे चूमने लगी, और अपने एक हाथ से मनु के निपल को खिचने लगी.... उफफफफ्फ़... स्नेहा का आक्षन और आग भड़कने लगी थी अब तो.

सीने को चूमती हुई स्नेहा अपना दूसरा हाथ मनु की पैंट के अंदर डाल दी, और उसके लिंग को अपनी मुट्ठी मे दबाने लगी... बिकुल ठंडे हाथ जब लिंग पर गये... तो लिंग जैसे किसी साँप की तरह फुंफ़कार मारता खड़ा हो गया हो....

 
स्नेहा को तो जैसे कोई खिलौना मिल गया हो... और वो अपने हाथों से ज़ोर-ज़ोर से उसे उपर नीचे करने लगी... मनु अपना पूरा होश-हवास खो बैठा.... उसने स्नेहा के स्तन को दोनो हाथों से ज़ोर से दबाया. मनु बड़ी ही तेज़ी के साथ स्नेहा के उपर आ गया और नीचे हाथ ले जाकर स्नेहा के दोनो पाँव के बीच जगह बनाया.. और बेकाबू लिंग को.. जल रही योनि मे पूरे ज़ोर के साथ धक्का दिया....

स्नेहा ने मुत्ठियों मे चादर को भिंचे लंबी सिसकारी लेती अपनी छाती को उपर उठा ली, और अपने सिर दाएँ बाएँ घुमाती पूरे बालो को अपने चेहरे पर बिखेर ली ..... ऐसा मज़ा जो दोनो ने कभी पहले ना लिया हो...

हर धक्कों पर मज़ा बढ़ रहा था, सिसकारियाँ तेज और लंबी होती चली जा रही थी... मज़े से सिसकारी भरती स्नेहा ने अपने दोनो हाथों से मनु की पीठ को दबोच ली.....

मनु के धक्कों के उपर कोई कंट्रोल ना रहा ... वो तो बस ... "ओह्ह्ह्ह... ओह्ह्ह्ह" करता तेज-तेज धक्के लगा रहा था... स्नेहा का भी वही हाल था... उसकी कमर खुद व खुद तेज़ी से हिल रही थी... और वो भी बससस्स

"इस्शह..... आहह..... यसस्स्सस्स..... मानूनन्ञनननणणन्" करती मनु की पीठ को भींच रही थी....

दोनो अपने काम के चरम पर थे. स्नेहा का बदन तेज़ी से अकड़ गया... और उसकी मस्ती का उन्माद उसकी योनि से बहने लगा.... और जब ये हुआ... स्नेहा बिल्कुल निढाल पड़ गयी... उसके कुच्छ ही देर बाद ... मनु की भी एक तेज "आहह" निकली ... और उसकी भी चर्म सीमा पूरी हो गयी.... और अपने कम के निकलते ही पूरा हल्का होकर निढाल उसके उपर गिर गया.... दोनो एक दूसरे की बाहों मे एक प्यारी रात बिताए.... अगली सुबह प्यार भरी हसीन सुबह.....

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अगली सुबह.....

मनु बड़े प्यार से स्नेहा के बालों मे कंघी करते हुए उसकी चोटी बना रहा था. स्नेहा की हँसी रुक ही नही रही थी, और मनु लगा हुआ था....

स्नेहा.... हीहीहीए .... मनु तुम्हे ऑफीस नही जाना क्या जो यहाँ मेरे बाल बना रहे हो...

मनु..... काम कर तो रहा हूँ, अब एक काम ख़तम हो, तो ना दूसरे काम पर जाउ.

स्नेहा.... अच्छा बाबा समझ गयी. ये बताओ यहाँ चल क्या रहा है मनु, बहुत कुछ छिपाया जा रहा है मुझ से हां.... और तुम मानस भाई साब के साथ ऐसा कर कैसे सकते हो. उपर से जब मैं तुम से कई बार कह चुकी हूँ कि वंश सर बुरे नही हैं, फिर भी तुम ने उनके अगेन्स्ट आक्षन ले लिया... अब यहाँ चल क्या रहा है बताओगे....

मनु उसे सारी प्लॅनिंग समझाते हुए कहने लगा..... "बस एक आखरी खेल समझो, फिर हमे कोई परेशान करने वाला नही होगा"

स्नेहा.... मनु क्या ये खेल ज़रूरी है... छोड़ दो जाने दो. हम किस से लड़ रहे हैं, अपनो से ही. वो कुछ करे या हम उसका कुछ जबाव दे, इज़्ज़त तो हमारी ही उछलती है ना. क्या ये मसला प्यार से बात करते हुए हल नही हो सकता.

 
मनु.... महाभारत मे भी सामने अपने ही थे ना. जब बात हद से ज़्यादा बिगड़ जाए तो अपनो के खिलाफ भी शस्त्र उठाने मे कोई बुराई नही है.

स्नेहा..... ह्म ! ओवरॉल मॅटर ये है कि अब तुम पीछे नही हटने वाले...

मनु.... एस्स, स्नेहा बिल्कुल सही समझी, मैं अब पिछे नही हट'ने वाला. और इश्स लड़ाई मे मुझे तुम्हारी मदद चाहिए....

स्नेहा.... मैं तो तुम्हारे हर काम की आधी भागीदार हूँ, मैं तुम्हारे साथ हूँ कि नही ये क्या पूछने वाली बात है... वैसे मैं कुछ बताऊ...

मनु.... हां ! तुम्हारे बुलाने का ही तो इंतज़ार था... बताओ ना आगे क्या करना है....

स्नेहा ने मनु के उसके पूरे प्लान मे कुछ तकनीकी बदलाव कर दिए, पहले जहाँ सुकन्या को फसाना मुस्किल लग रहा था, अब तो बिल्कुल आसान सा हो गया था.... वहीं इन लोगों के प्लान पर लगभग पानी फिरने वाला था क्योंकि हर्षवर्धन पवर ऑफ अटर्नी वितड्रॉ करने वाला था....

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ईव्निंग इन मूलचंदानी हाउस....

पहले जिस तरह से सुकन्या और मनु के साथ बैठ कर हर्षवर्धन और सुकन्या ने पवर ऑफ अटर्नी साइन किया था, ठीक वैसे ही आज विड्रोल से पहले उन दोनो को हर्षवर्धन ने अपने घर बुलाया....

हर्षवर्धन, सब के बीच अपनी बात रखते हुए कहने लगा..... "मुझे लगता है पवर ऑफ अटर्नी वितड्रॉ कर लेनी चाहिए, क्यों कि मनु के पास पहले से कंपनी का पूरा भार है उपर से अब वंश की कंपनी भी मनु के अंडर है, तो इन सब बातों को देखते हुए मेरा ये सुझाव है कि पवर ऑफ अटर्नी वितड्रॉ कर लेनी चाहिए"....

मनु.... ह्म ! ठीक है जैसा आप सही समझे. बताइए कहाँ सिग्नेचर करना है.

सुकन्या.... एक मिनट मनु, हर्ष यूँ अचानक से तुम्हारे मन मे ये ख्याल कहाँ से आ गया. मनु ने कुछ ग़लत किया जो तुम वितड्रॉ करने जा रहे हो.

हर्ष.... नही, मनु तो अच्छा कर रहा है. उसने जब से एमडी की पोस्ट संभाली है, टोटल ग्रूप का टर्नोवर और प्रॉफिट मार्केट के कंपॅरटिव्ली काफ़ी ग्रोत मे है.

मनु.... फिर क्या परेशानी है हर्ष, उसे अपना काम करने दो. मनु अच्छा कर रहा है. अभी तो उसे खुल कर काम करने की आज़ादी मिली है, उसे करने दो. और वित्ड्रॉयल के बारे मे सोचना भी मत.

काफ़ी देर बहस चलती रही, लेकिन हर्षवर्धन के हर लॉजिक को काट'ती हुई सुकन्या अपनी बात पर अड़ी रही. हर्षवर्धना की बात ना बनते देख कर अंत मे अमृता ने ही कह दिया.... "जैसा सुकन्या चाह रही है हम वैसा ही करेंगे, रहने दो, जो जैसा चल रहा है चलने दो".....

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रात के वक़्त... मूलचंदनी हाउस...

अमृता और हर्ष आज की हुई घटनाओ पर चर्चा कर रहे थे. हर्षवर्धन को बिल्कुल समझ मे नही आया की आख़िर सूकन्या का इतने स्ट्रॉंग अपोज़ करने का कारण क्या था....

अमृता.... छोड़ो उसे जाने दो, वो लड़की कितनी प्यारी थी ना....

हर्ष... अमृता मैं यहाँ सीरीयस इश्यू की बात कर रहा हूँ और तुम हो कि, किसी लड़की के बारे मे पूछ रही हो.

अमृता.... हां हर्ष, मानो उसने पहली मुलाकात मे ही दिल मे जगह बना ली हो. हम भी रजत के लिए ठीक वैसी ही बहू ढूंढ़ेंगे.

हर्ष.... किस लड़की की तुम बात कर रही हो...

अमृता.... वही जो मानस के ऑफीस मे मिली थी. मानस की गर्लफ्रेंड...

हर्ष.... अमृता, ये अचानक से तुम मानस के लिए इतना कब से सोचने लगी...

अमृता.... मैं तो सौतेली हूँ, तुम तो पिता हो उन दोनो के फिर तुम ही क्यों नही सोच लेते.... एक बात कहूँ हर्ष मुझे ना आज कल खुद मे बहुत गिल्टी फील हो रहा है... काव्या के किए का बदला हम ने उन मासूम बच्चो से लिया, जब कि बदले मे आज तक उन लोगों ने पलट कर जबाव तक नही दिया. जानते हो आज शर्मिंदगी कब महसूस हुई....

हर्ष... क्यों अमृता...

अमृता.... जब तुम ने विथ्ड्रोल की बात की, और मनु ने बिना कोई आश्चर्य और बिना किसी शिकन के सीधे कह दिया कहाँ साइन करना है. यू नो हर्ष, मैं अक्सर सोचती थी कि हम जो कर रहे हैं उसका असर मनु और मानस पर पड़ता होगा. शायद उन्हे ये फील भी होता हो पर आज तक कभी हमारे किसी बात पर रिक्ट नही किया. आइ आम शुवर, जितना हमने उनके साथ किया उसका 5% भी यदि हम रजत के साथ करे तो हमे उल्टा सुन'ने को मिलेगा...

हर्ष.... ह्म ! शायद हम अंधे हो चुके हैं, जो हमे अच्छे और बुरे का फ़र्क पता नही चल रहा. या फिर हम किसी का किया इतना भुगत चुके हैं कि उनके बच्चो से भी हमे आज तक नफ़रत है...

अमृता.... हां दोनो की ही बात है मनु. हम अंधे भी हैं, और काव्या का किया हम भुला नही पा रहे इसलिए उसका बदला हम आज तक उसके बच्चो से ले रहे है....

हर्ष.... ह्म ! तुमने मुझे भी अभी फील करवा दिया... चलो चल कर अपने घर के बच्चो को वापस लाया जाए. पूरा परिवार एक छत के नीचे रहेगा...

अमृता.... ठहर जाओ अभी. पहले मनु और मानस की मिसांडरस्टॅंडिंग दूर करते हैं, वरना दोनो भाई कभी एक साथ नही रहेंगे.....

हर्ष.... ह्म ! ये भी सही सोची हो अमृता..... क्यों ना काया को बोले, काया ज़रूर दोनो भाई की दूरियाँ ख़तम कर देगी....

अमृता.... हां कहीं ना कहीं तो हम भी ज़िम्मेदार है इनके इस हालात का... करते हैं एक कोसिस और भूल जाते हैं हम काव्या को.... भूल जाओ अब उन पुरानी बातों को, जिन के लिए हम ने उन बच्चो को सज़ा देते आए हैं....

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अगले दिन शाम को.....

ड्रस्टी और मानस एक साथ बैठे शाम के सर्द हवाओं का आनंद उठा रहे थे. दोनो के हाथ बेंच पर टिके थे जो एक दूसरे के बिल्कुल आस-पास थे. दोनो सामने देखते बस खामोश से बैठे एक दूसरे की खामोशी को सुन रहे थे.

मानस ने धड़कते दिल के साथ थोड़ी हिम्मत दिखाई, और अपनी उंगलियाँ खिसका कर ड्रस्टी के हाथ के उपर रख दिया, पर देख अब भी सामने ही रहे थे. ड्रस्टी ने चोर नज़र से एक बार नीचे हाथ को देखा और मुस्कुराने लगी....

ड्रस्टी..... मानस, तुम्हारे हाथ...

मानस को लगा जैसे ड्रस्टी ने उसकी चोरी पकड़ ली हो, झट से अपना हाथ खींचते..... "वो मैने ध्यान नही दिया".

पता नही ये इकरार से पहले इतना क्यों धड़कता है दिल. हाथ हटा कर मानस, ड्रस्टी को देखता रहा... ड्रस्टी अपनी भवें उपर सरकती इशारों मे पूछने लगी.... "क्या"..... और मानस लचरते आवाज़ मे कहा.... "तो ड्रस्टी"

ड्रस्टी.... तो क्या मनु...

मानस.... कुछ नही, तुम अचानक यहाँ आ जाओगी मुझे उम्मीद नही थी,..

"उफफफ्फ़ ये लड़के भी" .. ड्रस्टी.... तो किस के आने की उम्मीद थी मानस....

मानस.... किसी की नही बाबा. वो थोड़ा नर्वस हूँ तो समझ मे नही आ रहा क्या बोलना था और क्या बोल रहा हूँ....

"प्ल्ज़, प्ल्ज़, प्ल्ज़... अब कह भी दो, ऊऊओ... कितनी क्यूट लग रही हो"...

ड्रस्टी..... ह्म ! सेम हियर मानस... वैसे क्या बोलने वाले थे तुम...

मानस.... छोड़ो जाने दो... ये बताओ तुम घर पर क्या कह कर आई हो.....

ड्रस्टी.... हुहह !!!! कुछ भी कह कर आई हूँ.... तुम्हे अभी ये सब बात करनी है...

मानस....... नही, वो तो कुछ सूझा नही तो बस यूँ ही पूछ लिया....

ड्रस्टी.... हद है मानस, तुम ऐसे ही बैठे रहो मैं जा रही हूँ....

 


मानस.... सुनो तो, ड्रस्टी... यूँ गुस्से मे तो ना जाओ.... सुनी भी नही चली गयी....

ड्रस्टी के जाते ही मानस ने नताली को कॉल लगाया.....

नताली.... जी एमडी सर कहिए, कैसे याद किया...

मानस.... नताली, ड्रस्टी गुस्से मे भाग गयी...

नताली.... ज़रूर तुम कुछ उल्टे-सीधे हरकत किए होगे, इसलिए भाग गयी होगी...

मानस.... हद है, बिना जाने ही मुझ पर इल्ज़ाम लगा दो. ये सभी लोग लड़कियों को ही क्यों सपोर्ट करते हैं. आररीए नही बाबा मैने कुछ नही किया, सुनो बात क्या हुई....

फिर मानस ने पूरी बात बताई... नताली उन दोनो की हालत सुन कर ही हंस-हंस कर पागल हो गयी... फिर मानस को दिलासा देती हुई कहने लगी.... "कोई ना मानस अभी कच्चे हो पक्के हो जाओगे. अब आज रहने दो, कल आराम से मिलना और हां, बी अ मॅन, अपनी दिल की बात दम से कह देना. वैसे भी कौन सा वो मना करेगी, हिम्मत दिखाओ और दिल की बात कह दो. वरना कहीं ऐसा ना हो कि तुम्हारे कुछ ना कहने के कारण वो तुम्हे छोड़ कर भाग जाए."

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मीटिंग इन मानस ऑफीस....

सुबह के 11 बजे हे रौनक और तनु दोनो पहुँच चुके थे मानस के ओफीस मे. सब के मन मे लड्डू फुट रहे थे, कई हज़ार करोड़, वो भी बैठे बिठाए.....

मानस और नताली दोनो ऑफीस मे बैठे हुए थे, और उनके ठीक सामने तनु और रौनक...

मानस.... इतने बड़े करोरेपति हम जैसे भिखारियों के दरवाजे, आख़िर बात क्या है...

नताली.... जाने दो मानस, ये वो आस्तीन के साँप हैं जो अपना किया दूसरों पर थोप कर उसकी बर्बादी का तमाशा देखते हैं.

रौनक.... कुछ भी कहने से पहले ज़रा बातों की गहराई को सोच लिया करो....

तनु.... हां नताली, कुछ भी बोलने से पहले ज़रा सोच लिया करो. यदि उस वक़्त हम ने भी कबूल किया होता तो हम भी वंश की तरह रोड पर होते और मनु अपने मंसूबों मे कामयाब हो जाता. जबकि तुम्हे पता था ये मामला आराम से रफ़ा-दफ़ा हो सकता था....

नताली.... कैसे ज़रा बताना...

रौनक.... क्योंकि इस पूरे मामले मे मनु का परिवार ही मुख्य आरोपी था. सारा चक्र्वियुह सुकन्या और हर्षवर्धन का रचा हुआ था. अब चुकी उनकी पवर ऑफ अटर्नी तो मनु के पास ही थी, इसलिए उसने साइड पार्ट्नर्स पर अटॅक किया...

मानस.... ह्म ! तो हम से क्या चाहते हो....

तनु.... मनु को बर्बाद करना....

नताली.... और वो कैसे होगा....

रौनक.... हम तुम्हारे प्रॉजेक्ट मे इनवेस्ट करेंगे और उसके प्रॉफिट से मनु के बिज़्नेस यूनिट के शेयर ख़रीदेंगे.

नताली.... तुम दोनो ही डफर हो, सिंपल सी बात है तुम यहाँ खुद से नही आए हो ज़रूर तुम्हे मनु ने भेजा है.... सोचते रहो तुम दोनो मनु के शेर्स को हासिल करना. जब तक तुम सोचोगे मनु के शेयर हासिल करना है, उतने मे तो वो तुम दोनो के बिज़्नेस यूनिट का ओनर बन चुका होगा....

तनु और रौनक दोनो एक साथ शॉकिंग एक्सप्रेशन देते हुए कहने लगे.... "तुम्हे कैसे पता कि मनु ने हमे यहाँ भेजा है, और वो हमे बर्बाद कैसे करेगा".

नताली...... तुम जैसे विस्वाशघातियों को मैं कुछ भी बता कर क्या करूँगी. कल को फिर मुझे फसा कर मेरा ये बिज़्नेस भी हथिया लोगे.

रौनक..... कितनी बार हम बताए, वहाँ ऑफीस मे यदि हम कुछ बोलते तो हमारा भी सब कुछ चला जाता.

नताली...... ह्म ! समझ सकती हूँ तुम लोगों का दर्द, पर हो तो तुम सब सेल्फिश ही ना. अभी भी मनु के ही कहने पर यहाँ आए. अर्रे बेवकुफों इतना भी नही समझते कि यदि तुम ने अपना सारा पैसा उसकी कंपनी से लोन ले कर यहाँ मेरे प्रॉजेक्ट पर इनवेस्ट कर दिया तो वो उधर तब तक तुम दोनो की कंपनी के शेयर खरीद चुका होगा. तुम मेरे प्रॉजेक्ट से पैसा बना कर जब तक उसके शेयर खरीदोगे तब तक तो तुम दोनो का शेयर जा चुका होगा....

रौनक.... नही ऐसा नही हो सकता. मनु को शेयर खरीदने के लिए पैसे शो करने होंगे. अब वो कंपनी का पैसे से थोड़े ना हमारा शेयर खरीद सकता है.

नताली.... जैसु तुम्हारी मर्ज़ी, मत मानो मेरी बात. माइ डोर ईज़ ऑल्वेज़ ओपन फॉर यू. जब मान करे तब इनवेस्टमेंट कर देना. लेकिन सीधी बात हम तुम्हे अपना पार्ट्नर नही बनाएँगे, बस तुम हमारे इन्वेस्टर्स रहोगे. हमारे प्रॉफिट या लॉस मे तुम्हारे इनवेस्टमेंट के बराबर शेयर रहेगा...

तनु..... नताली, मानस तुम दोनो का मोटिव क्या है पहले मुझे ये क्लियर करो....

मानस..... एस.एस ग्रूप को बर्बाद करना. उसके सारे शेयर्स खरीद कर मालिकाना हक़ लेना...

रौनक.... और वो तुम कैसे करने वाले हो.

मानस..... उपर वाला हमारे साथ है, हमे इतना बड़ा कांट्रॅक्ट मिलने वाला है कि हम 25% के बराबर होंगे पूरे एस.एस ग्रूप के.

तनु..... तो हमे भी अपने मोटिव के साथ जोड़ लो. मनु की इतनी प्लॅनिंग होगी ये हम सोच नही सकते थे. हां ये सच है हम उसी के कहने पर तुम सब से पार्ट्नरशिप करने आए थे. हां लेकिन सोच यही थी कि उसके प्रॉफिट के पैसों से मनु के शेर्स ही ख़रीदेंगे पर यहाँ तो प्लॅनिंग ही कुछ और चल रही थी.

नताली..... तो मिलाओ हाथ और लग जाओ उस मनु को धूल चटाने मे. यहाँ के प्रॉफिट से मैं मनु के और उनके फॅमिली ग्रूप के शेर्स खरिदुन्गि. तुम दोनो वहाँ से पैसे निकाल कर सीधा ही मनु के शेर्स खरीदना शुरू कर दो. इसके बदले मैं तुम दोनो को 25% पार्ट्नरशिप दूँगी वो भी बिना किसी इनवेस्टमेंट के.

ऐसा ऑफर भी कोई ठुकराता है क्या. पल मे ही प्लान बना तनु और रौनक का कि... "सीधा मनु की कंपनी के शेर्स ख़रीदो, और 25% का प्रॉफिट इन के टेंडर से लो. पासे बिच्छ चुके थे और दोनो उन पासों पर अपना पूरा दौ खेल चुके थे. अब बस बचे थे तो हर्षवर्धन और सुकन्या.

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